📘 ग्राम सभा कार्यवाही लेखन
एवं ड्राफ्टिंग मैनुअल
Volume – 1
अध्याय – 1
ग्राम सभा प्रस्ताव लेखन की सरकारी भाषा एवं
अभिलेखीय शैली
प्रस्तावना
ग्राम सभा में पारित प्रत्येक प्रस्ताव केवल एक
औपचारिक निर्णय नहीं होता, बल्कि वह ग्राम पंचायत की सामूहिक इच्छा, प्रशासनिक
उत्तरदायित्व तथा भविष्य में की जाने वाली कार्यवाही का विधिवत अभिलेख होता है।
यही कारण है कि प्रस्ताव लेखन में प्रयुक्त प्रत्येक शब्द, प्रत्येक वाक्य एवं
प्रत्येक अनुच्छेद का विशेष महत्व होता है। एक अच्छी प्रस्ताव भाषा न केवल निर्णय
को स्पष्ट करती है, बल्कि यह भी प्रमाणित करती है कि निर्णय विस्तृत
विचार-विमर्श, पारदर्शिता एवं ग्राम सभा की सामूहिक सहमति के आधार पर लिया
गया है।
प्रस्ताव लेखन का उद्देश्य केवल यह लिखना नहीं
है कि "प्रस्ताव पारित किया गया", बल्कि यह अभिलेखित करना भी
है कि प्रस्ताव किस आधार पर प्रस्तुत हुआ, उसके समर्थन में क्या तर्क दिए गए, किन पहलुओं पर
विचार किया गया तथा ग्राम सभा किस निष्कर्ष पर पहुँची।
1. प्रस्ताव लेखन का मूल
सिद्धांत
एक उत्कृष्ट प्रस्ताव
सामान्यतः निम्नलिखित क्रम में लिखा जाना चाहिए—
विषय का
प्रस्तुतीकरण → पृष्ठभूमि → आवश्यकता → विचार-विमर्श → प्राप्त सुझाव → ग्राम सभा का अभिमत → निर्णय → अनुपालन → उत्तरदायित्व
यदि यह क्रम बना रहता है तो
कार्यवाही पढ़ने वाला कोई भी अधिकारी बिना अतिरिक्त स्पष्टीकरण के प्रस्ताव की
संपूर्ण पृष्ठभूमि समझ सकता है।
2. प्रस्ताव प्रारम्भ करने की
अभिलेखीय भाषा
अधिकांश कार्यवाहियों में सबसे बड़ी त्रुटि
प्रस्ताव के प्रारम्भ में होती है। सामान्यतः लिखा जाता है—
"प्रस्ताव रखा गया।"
यह भाषा अधूरी, सामान्य एवं अभिलेखीय
दृष्टि से कमजोर मानी जाती है।
इसके स्थान पर प्रस्ताव का प्रारम्भ इस प्रकार किया जाना
चाहिए—
प्रारूप – 1
अध्यक्ष महोदय की अनुमति प्राप्त होने के उपरांत कार्यसूची
के क्रमांक ........ पर अंकित विषय को ग्राम पंचायत सचिव द्वारा ग्राम सभा के
समक्ष विचारार्थ प्रस्तुत किया गया। विषय प्रस्तुत करते हुए उसके उद्देश्य,
आवश्यकता,
वर्तमान स्थिति
तथा प्रस्तावित कार्य के संभावित प्रभावों से उपस्थित सदस्यों को क्रमवार अवगत
कराया गया।
प्रारूप – 2
निर्धारित कार्यसूची के अनुसार विचारणीय विषय को अध्यक्ष
महोदय के निर्देशानुसार ग्राम सभा के समक्ष प्रस्तुत किया गया। सचिव द्वारा विषय
की पृष्ठभूमि, उससे संबंधित उपलब्ध अभिलेख, विभागीय दिशा-निर्देश तथा
ग्राम पंचायत स्तर पर प्राप्त सुझावों का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत करते हुए विषय
पर विचार-विमर्श प्रारम्भ करने का अनुरोध किया गया।
प्रारूप – 3
ग्राम पंचायत सचिव द्वारा कार्यसूची में सम्मिलित विषय का
विस्तृत प्रतिवेदन ग्राम सभा के समक्ष प्रस्तुत किया गया। प्रतिवेदन में विषय की
प्रशासनिक आवश्यकता, ग्राम पंचायत क्षेत्र की वर्तमान परिस्थितियाँ, उपलब्ध संसाधन,
पूर्व में किए
गए प्रयास तथा अपेक्षित परिणामों का उल्लेख किया गया। अध्यक्ष महोदय की अनुमति
प्राप्त होने पर विषय पर विचार-विमर्श प्रारम्भ किया गया।
प्रारूप – 4
कार्यसूची के अनुसार विषय को ग्राम सभा के समक्ष इस
उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया कि उपस्थित सदस्य विषय के प्रत्येक पक्ष पर विचार
करते हुए ग्रामहित में उपयुक्त निर्णय प्रदान कर सकें। सचिव द्वारा विषय के संबंध
में उपलब्ध समस्त तथ्य, अभिलेख एवं आवश्यक जानकारियाँ क्रमवार प्रस्तुत की गईं।
प्रारूप – 5
ग्राम पंचायत क्षेत्र के विकास, जनसुविधा तथा ग्रामीणों की
आवश्यकताओं को दृष्टिगत रखते हुए प्रस्तुत विषय को विचारार्थ रखा गया। सचिव द्वारा
यह अवगत कराया गया कि विषय का संबंध ग्राम पंचायत की प्राथमिक विकास आवश्यकताओं से
है, अतः इस पर
गंभीरतापूर्वक विचार किया जाना अपेक्षित है।
3. प्रस्ताव की पृष्ठभूमि
लिखने की भाषा
प्रस्ताव की पृष्ठभूमि वह आधार है जिससे यह
स्पष्ट होता है कि विषय ग्राम सभा तक पहुँचा कैसे। एक अच्छी पृष्ठभूमि प्रस्ताव को
मजबूत बनाती है।
प्रारूप – 1
सचिव द्वारा अवगत कराया गया कि प्रस्तुत विषय
ग्राम पंचायत क्षेत्र के विभिन्न वार्डों से प्राप्त सुझावों, स्थानीय
आवश्यकताओं तथा ग्रामीणों द्वारा समय-समय पर व्यक्त मांगों के आधार पर कार्यसूची
में सम्मिलित किया गया है।
प्रारूप – 2
यह बताया गया कि विषय के संबंध में पूर्व में भी
विभिन्न स्तरों पर चर्चा की जा चुकी है। प्राप्त सुझावों, उपलब्ध अभिलेखों एवं
वर्तमान परिस्थितियों के पुनः परीक्षण के उपरांत विषय को ग्राम सभा
के विचारार्थ प्रस्तुत किया गया है।
प्रारूप – 3
ग्राम पंचायत क्षेत्र की वर्तमान आवश्यकताओं,
उपलब्ध
संसाधनों, सार्वजनिक हित
तथा भविष्य की विकास योजनाओं को दृष्टिगत रखते हुए विषय को प्राथमिकता के आधार पर
विचारार्थ रखा गया।
प्रारूप – 4
सचिव द्वारा जानकारी दी गई कि विषय से संबंधित
आवश्यक तथ्य, उपलब्ध अभिलेख,
प्राप्त आवेदन,
संबंधित
विभागों से प्राप्त पत्राचार तथा पूर्व में लिए गए निर्णयों का परीक्षण करने के
उपरांत ही इसे ग्राम सभा के समक्ष प्रस्तुत किया गया है।
प्रारूप – 5
अध्यक्ष महोदय ने स्पष्ट किया कि प्रस्तुत विषय
केवल वर्तमान आवश्यकता तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्राम पंचायत क्षेत्र के दीर्घकालिक विकास,
जनसुविधा एवं
प्रशासनिक व्यवस्था को भी प्रभावित करता है। अतः सभी सदस्यों से अपेक्षा की गई कि
वे विषय पर गंभीरतापूर्वक विचार करें।
4. प्रस्ताव प्रस्तुत करते समय
प्रयोग होने वाले प्रीमियम सरकारी वाक्य
- विषय की पृष्ठभूमि से ग्राम सभा को अवगत कराया गया।
- उपलब्ध अभिलेखों का अवलोकन कराया गया।
- संबंधित तथ्यों का क्रमवार विवरण प्रस्तुत किया गया।
- वर्तमान परिस्थितियों का संक्षिप्त प्रतिवेदन प्रस्तुत
किया गया।
- विषय के औचित्य पर प्रकाश डाला गया।
- विषय की प्रशासनिक आवश्यकता स्पष्ट की गई।
- उपलब्ध संसाधनों की स्थिति से अवगत कराया गया।
- प्रस्तावित कार्य के संभावित प्रभावों का उल्लेख किया
गया।
- ग्रामीणों से प्राप्त सुझावों का सार प्रस्तुत किया
गया।
- पूर्व निर्णयों का संक्षिप्त संदर्भ प्रस्तुत किया
गया।
- विभागीय दिशा-निर्देशों का उल्लेख किया गया।
- विषय की तात्कालिक आवश्यकता पर बल दिया गया।
- सार्वजनिक हित के दृष्टिकोण से विषय का महत्व स्पष्ट
किया गया।
- विषय के प्रत्येक पहलू की जानकारी प्रस्तुत की गई।
·
ग्राम सभा का ध्यान विषय की ओर आकर्षित किया गया।
5. प्रस्ताव प्रारम्भ करते समय
किन शब्दों से बचें
❌ प्रस्ताव रखा गया।
❌ सभी ने चर्चा की।
❌ सबने हाँ कर दी।
❌ काम करने का निर्णय लिया।
❌ मंजूर कर दिया।
❌ सब लोग सहमत थे।
इनके स्थान पर लिखें
✅ विषय विचारार्थ प्रस्तुत किया गया।
✅ विषय पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।
✅ उपस्थित सदस्यों द्वारा अपने अभिमत व्यक्त किए
गए।
✅ प्रस्ताव का सर्वसम्मति से अनुमोदन किया गया।
✅ नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित किए जाने
का निर्णय लिया गया।
✅ किसी भी सदस्य द्वारा कोई आपत्ति व्यक्त नहीं की
गई।
6. विषय पर विचार-विमर्श
प्रारम्भ करने की सरकारी भाषा
प्रस्ताव प्रस्तुत किए जाने के उपरांत कार्यवाही
का सबसे महत्वपूर्ण भाग विचार-विमर्श होता है। अधिकांश कार्यवाहियों में केवल एक
पंक्ति लिख दी जाती है—
"इस पर चर्चा की गई।"
यह भाषा सरकारी अभिलेख की दृष्टि से अत्यंत
साधारण मानी जाती है।
वास्तविक कार्यवाही में यह स्पष्ट होना चाहिए कि
चर्चा किस प्रकार प्रारम्भ हुई, किन-किन पक्षों पर विचार किया गया तथा ग्राम सभा किस
निष्कर्ष तक पहुँची।
प्रारूप – 1
प्रस्तुत विषय पर अध्यक्ष महोदय की अनुमति
प्राप्त होने के उपरांत विस्तृत विचार-विमर्श प्रारम्भ किया गया। सर्वप्रथम ग्राम
पंचायत सचिव द्वारा विषय की आवश्यकता एवं उसके प्रशासनिक पक्षों का संक्षिप्त
विवरण प्रस्तुत किया गया, जिसके उपरांत उपस्थित सदस्यों द्वारा क्रमवार अपने विचार,
सुझाव एवं
अभिमत व्यक्त किए गए।
प्रारूप – 2
अध्यक्ष महोदय द्वारा विषय पर स्वतंत्र एवं
निष्पक्ष चर्चा के लिए सभी उपस्थित सदस्यों को आमंत्रित किया गया। चर्चा के दौरान
विषय के सामाजिक, आर्थिक, प्रशासनिक एवं विकासात्मक पहलुओं पर विस्तारपूर्वक विचार
किया गया तथा प्राप्त सुझावों का विधिवत अभिलेखीकरण किया गया।
प्रारूप – 3
ग्राम सभा द्वारा यह सुनिश्चित किया गया कि विषय
पर निर्णय लेने से पूर्व उसके प्रत्येक पक्ष का समुचित परीक्षण किया जाए। इसी
उद्देश्य से विषय पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया तथा उपस्थित प्रत्येक सदस्य को
अपने विचार व्यक्त करने का अवसर प्रदान किया गया।
प्रारूप – 4
चर्चा के प्रारम्भ में सचिव द्वारा विषय से
संबंधित उपलब्ध अभिलेखों का संक्षिप्त अवलोकन कराया गया। तत्पश्चात अध्यक्ष महोदय
द्वारा उपस्थित सदस्यों से विषय के संबंध में अपने सुझाव एवं अभिमत प्रस्तुत करने
का अनुरोध किया गया।
प्रारूप – 5
ग्राम सभा ने यह मत व्यक्त किया कि किसी भी
निर्णय पर पहुँचने से पूर्व विषय के प्रत्येक तथ्य, उपलब्ध संसाधनों, प्रशासनिक
आवश्यकताओं तथा ग्राम पंचायत की प्राथमिकताओं का समग्र मूल्यांकन किया जाना आवश्यक
है। इस उद्देश्य से विस्तृत विचार-विमर्श प्रारम्भ किया गया।
7. चर्चा को आगे बढ़ाने की
भाषा
अब कार्यवाही में लगातार एक ही प्रकार के वाक्य
नहीं आने चाहिए। नीचे दिए गए वाक्य अलग-अलग स्थानों पर उपयोग किए जा सकते हैं।
- विषय के संबंध में उपस्थित सदस्यों द्वारा अपने विचार
व्यक्त किए गए।
- विभिन्न वार्डों के प्रतिनिधियों द्वारा स्थानीय
परिस्थितियों से अवगत कराया गया।
- प्राप्त सुझावों का गंभीरतापूर्वक परीक्षण किया गया।
- विषय के प्रत्येक पहलू पर क्रमवार विचार किया गया।
- उपलब्ध संसाधनों के आलोक में प्रस्ताव का मूल्यांकन
किया गया।
- जनसामान्य की आवश्यकताओं को दृष्टिगत रखते हुए चर्चा
की गई।
- ग्रामीणों द्वारा प्रस्तुत सुझावों का स्वागत किया
गया।
- विषय के व्यावहारिक पक्षों पर विशेष रूप से विचार किया
गया।
- कार्य के संभावित प्रभावों का मूल्यांकन किया गया।
- प्रशासनिक व्यवहार्यता पर विस्तार से विचार किया गया।
- वित्तीय प्रावधानों के संदर्भ में विषय का परीक्षण
किया गया।
- उपलब्ध अभिलेखों का पुनः अवलोकन किया गया।
- विभिन्न मतों पर संतुलित दृष्टिकोण से विचार किया गया।
- चर्चा के दौरान प्राप्त सुझावों को कार्यवाही में
अभिलेखित किया गया।
- ग्राम सभा द्वारा सामूहिक सहमति विकसित करने का प्रयास
किया गया।
8. सदस्यों के विचार लिखने की
भाषा
अधिकांश कार्यवाहियों में यह नहीं लिखा जाता कि
सदस्यों ने क्या कहा, केवल "चर्चा हुई" लिख दिया जाता है। जबकि
अभिलेखीय दृष्टि से यह उचित नहीं माना जाता।
प्रारूप – 1
उपस्थित सदस्यों द्वारा यह मत व्यक्त किया गया
कि प्रस्तुत विषय ग्राम पंचायत क्षेत्र की वर्तमान आवश्यकताओं से प्रत्यक्ष रूप से
संबंधित है तथा इस पर सकारात्मक निर्णय लिया जाना जनहित में अपेक्षित है।
प्रारूप – 2
अनेक सदस्यों द्वारा यह सुझाव प्रस्तुत किया गया
कि कार्य के क्रियान्वयन के दौरान गुणवत्ता, पारदर्शिता एवं समयबद्धता
का विशेष ध्यान रखा जाए, जिससे ग्रामीणों को अपेक्षित लाभ प्राप्त हो सके।
प्रारूप – 3
कुछ सदस्यों द्वारा यह अभिमत व्यक्त किया गया कि
प्रस्तावित विषय का दीर्घकालिक प्रभाव ग्राम पंचायत क्षेत्र के विकास पर पड़ेगा,
अतः निर्णय
लेते समय भविष्य की आवश्यकताओं को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
प्रारूप – 4
उपस्थित ग्रामीणों द्वारा विषय के समर्थन में
अपने विचार प्रस्तुत किए गए तथा अपेक्षा व्यक्त की गई कि निर्णय का क्रियान्वयन
निर्धारित समयावधि में पूर्ण किया जाए।
प्रारूप – 5
महिला सदस्यों द्वारा सुझाव दिया गया कि कार्य
के क्रियान्वयन में सामाजिक समावेशिता एवं जनसहभागिता सुनिश्चित की जाए, जिससे समाज के
प्रत्येक वर्ग को समान रूप से लाभ प्राप्त हो सके।
9. चर्चा के दौरान जोड़ने
योग्य प्रीमियम वाक्य
ये वाक्य पूरी कार्यवाही को उच्च स्तरीय सरकारी
स्वरूप देते हैं—
- इस संबंध में विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।
- प्राप्त सुझावों का सम्यक् परीक्षण किया गया।
- विषय के विभिन्न आयामों पर गंभीरतापूर्वक विचार किया
गया।
- उपलब्ध तथ्यों के आलोक में विषय का मूल्यांकन किया
गया।
- विषय के गुण-दोषों पर संतुलित चर्चा की गई।
- सार्वजनिक हित को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान की गई।
- ग्राम पंचायत क्षेत्र की वास्तविक आवश्यकताओं का आकलन
किया गया।
- प्रशासनिक दृष्टिकोण से विषय की उपयुक्तता का परीक्षण
किया गया।
- उपलब्ध संसाधनों की पर्याप्तता पर विचार किया गया।
- ग्राम सभा द्वारा विषय के प्रत्येक पहलू का समग्र
परीक्षण किया गया।
- प्राप्त अभिमतों का तुलनात्मक मूल्यांकन किया गया।
- स्थानीय परिस्थितियों को निर्णय का आधार माना गया।
- पारदर्शिता एवं उत्तरदायित्व की भावना से विचार किया
गया।
- निर्णय प्रक्रिया को सर्वसम्मति की दिशा में आगे
बढ़ाया गया।
- विषय पर सभी सदस्यों की सहभागिता सुनिश्चित की गई।
10. चर्चा के दौरान उपयोग होने
वाले उच्च स्तरीय सरकारी शब्द
"कहा" की जगह
- अवगत कराया
- अभिमत व्यक्त किया
- मत व्यक्त किया
- सुझाव प्रस्तुत किया
- स्पष्ट किया
- उल्लेख किया
- प्रतिपादित किया
- इंगित किया
- अवलोकन प्रस्तुत किया
- समर्थन व्यक्त किया
"सोचा" की जगह
- विचार किया
- परीक्षण किया
- मूल्यांकन किया
- समीक्षा की
- सम्यक् परीक्षण किया
- विवेचना की
- विश्लेषण किया
"अच्छा" की जगह
- उपयुक्त
- औचित्यपूर्ण
- जनहितकारी
- व्यवहारिक
- प्रशंसनीय (जहाँ उचित हो)
- संतोषजनक
- प्रभावी
- आवश्यक
11. कार्यवाही में प्रवाह (Flow)
कैसे बनाएँ
एक अच्छा प्रस्ताव कभी सीधे निर्णय पर नहीं
पहुँचता। उसका क्रम इस प्रकार होना चाहिए—
विषय प्रस्तुत हुआ
⬇
पृष्ठभूमि बताई गई
⬇
आवश्यकता स्पष्ट की गई
⬇
सदस्यों ने विचार व्यक्त किए
⬇
सुझाव प्राप्त हुए
⬇
प्राप्त सुझावों का परीक्षण किया गया
⬇
ग्राम सभा का सामूहिक अभिमत बना
⬇
निर्णय लिया गया
⬇
अनुपालन हेतु निर्देश दिए गए
ड्राफ्टिंग सूत्र:
"प्रस्तुतीकरण
जितना मजबूत होगा, निर्णय उतना ही वैधानिक और प्रभावशाली दिखाई देगा।"
12. ग्राम सभा का अभिमत लिखने
की सरकारी भाषा
ग्राम सभा की कार्यवाही में केवल चर्चा लिखना
पर्याप्त नहीं होता। चर्चा के बाद यह स्पष्ट होना चाहिए कि ग्राम सभा का
सामूहिक अभिमत (Collective Opinion) क्या बना।
यही वह भाग है जहाँ अधिकांश कार्यवाहियाँ कमजोर
दिखाई देती हैं।
सामान्यतः लिखा जाता है—
"सभी सदस्य सहमत थे।"
यह भाषा अभिलेखीय दृष्टि से कमजोर है।
इसके स्थान पर निम्न प्रकार की भाषा का प्रयोग
किया जाना चाहिए।
प्रारूप – 1
विस्तृत विचार-विमर्श के दौरान उपस्थित सदस्यों
द्वारा व्यक्त अभिमतों का समग्र परीक्षण करने पर ग्राम सभा इस निष्कर्ष पर पहुँची
कि प्रस्तुत विषय ग्राम पंचायत क्षेत्र के व्यापक जनहित, विकासात्मक आवश्यकताओं एवं
सार्वजनिक सुविधा की दृष्टि से उपयुक्त एवं औचित्यपूर्ण है।
प्रारूप – 2
चर्चा के दौरान प्राप्त सुझावों, उपलब्ध
अभिलेखों एवं स्थानीय परिस्थितियों के समग्र मूल्यांकन के उपरांत ग्राम सभा ने यह
अभिमत व्यक्त किया कि विषय पर सकारात्मक निर्णय लिया जाना ग्राम पंचायत के समग्र
हित में अपेक्षित है।
प्रारूप – 3
उपस्थित सदस्यों द्वारा विषय के विभिन्न पहलुओं
पर विचार करने के पश्चात यह अनुभव किया गया कि प्रस्तावित विषय वर्तमान
परिस्थितियों में आवश्यक, व्यवहारिक एवं ग्रामहित के अनुरूप है।
प्रारूप – 4
ग्राम सभा द्वारा यह मत व्यक्त किया गया कि विषय
के संबंध में प्रस्तुत तथ्यों एवं प्राप्त सुझावों के आधार पर प्रस्ताव का अनुमोदन
किया जाना न्यायोचित एवं जनहितकारी होगा।
प्रारूप – 5
सामूहिक विचार-विमर्श के परिणामस्वरूप ग्राम सभा
इस अभिमत पर पहुँची कि विषय का क्रियान्वयन ग्राम पंचायत क्षेत्र के विकास एवं
सार्वजनिक हित की दृष्टि से लाभकारी सिद्ध होगा।
13. यदि सभी सदस्य सहमत हों तो
भाषा कैसी हो?
अधिकांश लोग लिखते हैं—❌ सभी सदस्य सहमत थे।
सरकारी भाषा में ऐसे लिखिए—
शैली – 1
प्रस्तुत विषय पर उपस्थित सभी सदस्यों द्वारा
एकमत सहमति व्यक्त की गई।
शैली – 2
ग्राम सभा के सभी उपस्थित सदस्यों ने प्रस्ताव
के समर्थन में अपना अभिमत व्यक्त किया।
शैली – 3
किसी भी सदस्य द्वारा प्रस्ताव के संबंध में कोई
आपत्ति अथवा विरोध व्यक्त नहीं किया गया।
शैली – 4
ग्राम सभा में उपस्थित समस्त सदस्यों द्वारा
प्रस्ताव का समर्थन किया गया।
शैली – 5
ग्राम सभा द्वारा सर्वसम्मत अभिमत व्यक्त करते
हुए प्रस्ताव के अनुमोदन पर सहमति प्रदान की गई।
शैली – 6
उपस्थित सदस्यों द्वारा सर्वानुमति से प्रस्ताव
को स्वीकार किया गया।
शैली – 7
ग्राम सभा ने सामूहिक सहमति से विषय का अनुमोदन
किया।
शैली – 8
सभी उपस्थित सदस्यों द्वारा प्रस्ताव के समर्थन
में सकारात्मक अभिमत व्यक्त किया गया।
शैली – 9
ग्राम सभा में प्रस्ताव के संबंध में पूर्ण
सहमति व्यक्त की गई।
शैली – 10
विषय पर किसी प्रकार का मतभेद अभिलेखित नहीं
हुआ।
14. यदि कुछ सदस्यों ने सुझाव
दिए हों
यह भी एक कला है।
कभी भी यह मत लिखो—
कुछ लोगों ने कहा।
ऐसे लिखो—
प्रारूप – 1
चर्चा के दौरान कुछ सदस्यों द्वारा कार्य के
प्रभावी क्रियान्वयन के संबंध में महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए गए, जिन पर ग्राम
सभा द्वारा सकारात्मक दृष्टिकोण से विचार किया गया।
प्रारूप – 2
कुछ सदस्यों ने विषय के व्यावहारिक पक्षों की ओर
ग्राम सभा का ध्यान आकर्षित किया तथा आवश्यक सावधानियाँ अपनाने का सुझाव दिया।
प्रारूप – 3
कुछ उपस्थित सदस्यों द्वारा कार्य की गुणवत्ता,
समयबद्धता एवं
पारदर्शिता सुनिश्चित किए जाने पर विशेष बल दिया गया।
प्रारूप – 4
महिला सदस्यों द्वारा सुझाव दिया गया कि कार्य
के निष्पादन में समाज के प्रत्येक वर्ग की आवश्यकताओं को समान रूप से ध्यान में
रखा जाए।
प्रारूप – 5
वरिष्ठ नागरिकों द्वारा अपने अनुभवों के आधार पर
कुछ व्यवहारिक सुझाव प्रस्तुत किए गए, जिन्हें ग्राम सभा द्वारा उपयोगी माना गया।
15. यदि किसी सदस्य ने आपत्ति
की हो
सरकारी भाषा कभी नहीं लिखती—
फलाँ आदमी ने विरोध किया।
ऐसे लिखो—
प्रारूप – 1
चर्चा के दौरान एक सदस्य द्वारा प्रस्ताव के
संबंध में कुछ आपत्तियाँ एवं स्पष्टीकरण अपेक्षित किए गए, जिनका अध्यक्ष महोदय एवं
सचिव द्वारा संतोषजनक निराकरण किया गया।
प्रारूप – 2
कुछ सदस्यों द्वारा प्रस्ताव के संबंध में
वैकल्पिक सुझाव प्रस्तुत किए गए, जिन पर विस्तार से विचार करने के उपरांत मूल प्रस्ताव को
यथावत रखने का निर्णय लिया गया।
प्रारूप – 3
विषय के संबंध में प्राप्त आपत्तियों एवं
सुझावों का क्रमवार परीक्षण किया गया तथा आवश्यक स्पष्टीकरण उपलब्ध कराए जाने के
पश्चात प्रस्ताव पर पुनः विचार किया गया।
प्रारूप – 4
ग्राम सभा द्वारा प्रस्तुत आपत्तियों का विधिवत
संज्ञान लेते हुए उनका परीक्षण किया गया तथा विषय के संबंध में आवश्यक तथ्य स्पष्ट
किए गए।
प्रारूप – 5
आपत्तियों पर समुचित विचार करने के उपरांत
उपस्थित अधिकांश सदस्यों द्वारा मूल प्रस्ताव का समर्थन किया गया।
16. निर्णय से पहले प्रयोग होने
वाले सर्वोत्तम वाक्य
ये वाक्य कार्यवाही को उच्च स्तरीय बनाते हैं—
- विस्तृत विचार-विमर्श उपरांत...
- समग्र परीक्षण के पश्चात...
- प्राप्त सुझावों के परीक्षण के उपरांत...
- ग्राम सभा के सामूहिक अभिमत के आधार पर...
- स्थानीय परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए...
- उपलब्ध अभिलेखों का अवलोकन करने के पश्चात...
- सार्वजनिक हित को सर्वोपरि मानते हुए...
- वर्तमान आवश्यकताओं का मूल्यांकन करते हुए...
- विषय के गुण-दोषों पर विचार करने के उपरांत...
- सभी तथ्यों का सम्यक् परीक्षण करने के पश्चात...
- प्रस्तुत अभिमतों के आलोक में...
- प्रशासनिक दृष्टि से उपयुक्त पाए जाने पर...
- उपलब्ध संसाधनों को ध्यान में रखते हुए...
- प्रचलित नियमों एवं दिशा-निर्देशों के अनुरूप...
- ग्राम सभा की सर्वसम्मत सहमति से...
✍️ ड्राफ्टिंग सूत्र
"निर्णय कभी अचानक नहीं लिखा
जाता।"
पहले—
चर्चा
↓
अभिमत
↓
सहमति
↓
निर्णय
यह क्रम जितना स्वाभाविक होगा, कार्यवाही उतनी
ही मजबूत, विश्वसनीय और
अभिलेखीय दृष्टि से प्रभावी मानी जाएगी।
17. निर्णय लेखन की सरकारी भाषा
(Decision Drafting)
कार्यवाही का सबसे महत्वपूर्ण भाग "निर्णय" होता है। यही
वह भाग है जो भविष्य में ग्राम पंचायत, विभाग, ऑडिट, निरीक्षण एवं न्यायालय के समक्ष आधिकारिक निर्णय
के रूप में प्रस्तुत होता है। अतः निर्णय की भाषा स्पष्ट, औपचारिक, अभिलेखीय तथा
निर्विवाद होनी चाहिए।
सबसे बड़ी गलती जो अधिकांश कार्यवाहियों में
देखने को मिलती है, वह है—
"प्रस्ताव पास कर दिया
गया।"
यह भाषा सरकारी अभिलेखों के अनुरूप नहीं मानी
जाती।
निर्णय लिखते समय यह स्पष्ट होना चाहिए—
- निर्णय किस आधार पर लिया गया।
- ग्राम सभा का अभिमत क्या था।
- निर्णय किस प्रकार लिया गया।
- आगे क्या कार्यवाही की जाएगी।
- उत्तरदायी कौन होगा।
निर्णय प्रारूप – 1
उपस्थित सदस्यों द्वारा व्यक्त अभिमतों, प्राप्त
सुझावों, उपलब्ध
अभिलेखों के परीक्षण तथा ग्राम पंचायत क्षेत्र की वर्तमान आवश्यकताओं का समग्र
मूल्यांकन करने के उपरांत ग्राम सभा द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव को सर्वसम्मति से
अनुमोदित किया गया तथा निर्णय लिया गया कि नियमानुसार आवश्यक प्रशासनिक कार्यवाही
तत्काल प्रारम्भ की जाए।
निर्णय प्रारूप – 2
विस्तृत विचार-विमर्श, विषय के विभिन्न पहलुओं के
परीक्षण तथा ग्रामहित को सर्वोपरि रखते हुए ग्राम सभा ने सर्वानुमति से प्रस्ताव
का अनुमोदन किया तथा संबंधित अधिकारी को नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करने हेतु
निर्देशित किया।
निर्णय प्रारूप – 3
प्राप्त सुझावों एवं उपलब्ध तथ्यों के समुचित
परीक्षण के पश्चात ग्राम सभा इस निष्कर्ष पर पहुँची कि प्रस्ताव जनहित में आवश्यक
एवं औचित्यपूर्ण है। फलस्वरूप प्रस्ताव को सर्वसम्मति से स्वीकृति प्रदान करते हुए
आवश्यक अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्णय लिया गया।
निर्णय प्रारूप – 4
ग्राम सभा ने विषय पर व्यापक सहमति व्यक्त करते
हुए निर्णय लिया कि प्रस्तावित कार्य को प्राथमिकता के आधार पर संपादित किया जाए
तथा कार्य की प्रत्येक प्रक्रिया प्रचलित नियमों एवं विभागीय दिशा-निर्देशों के
अनुरूप संपन्न की जाए।
निर्णय प्रारूप – 5
ग्राम सभा द्वारा यह निर्णय लिया गया कि
प्रस्तुत विषय ग्राम पंचायत क्षेत्र के दीर्घकालिक विकास एवं जनसुविधा की दृष्टि
से महत्वपूर्ण है। अतः प्रस्ताव का अनुमोदन करते हुए नियमानुसार आवश्यक
स्वीकृतियाँ प्राप्त कर कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।
निर्णय प्रारूप – 6
ग्राम सभा द्वारा सामूहिक सहमति से यह निर्णय
अभिलेखित किया गया कि प्रस्ताव का क्रियान्वयन पारदर्शिता, गुणवत्ता एवं समयबद्धता के
साथ किया जाएगा तथा प्रत्येक स्तर पर निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित किया
जाएगा।
निर्णय प्रारूप – 7
विषय के प्रशासनिक, वित्तीय एवं तकनीकी पक्षों
का परीक्षण करने के उपरांत ग्राम सभा द्वारा प्रस्ताव को उपयुक्त पाया गया तथा
सर्वसम्मति से इसके अनुमोदन का निर्णय लिया गया।
निर्णय प्रारूप – 8
ग्राम सभा ने उपलब्ध अभिलेखों, स्थानीय
परिस्थितियों एवं प्राप्त सुझावों का समग्र परीक्षण करने के पश्चात निर्णय लिया कि
प्रस्ताव का क्रियान्वयन ग्राम पंचायत के हित में होगा। अतः प्रस्ताव को
सर्वसम्मति से पारित किया गया।
निर्णय प्रारूप – 9
विस्तृत विचार-विमर्श के परिणामस्वरूप ग्राम सभा
इस निष्कर्ष पर पहुँची कि प्रस्ताव व्यवहारिक, जनहितकारी एवं प्रशासनिक
दृष्टि से उपयुक्त है। इस आधार पर प्रस्ताव का अनुमोदन करते हुए आवश्यक कार्यवाही
करने का निर्णय लिया गया।
निर्णय प्रारूप – 10
प्रस्तुत विषय के संबंध में किसी प्रकार की
आपत्ति प्राप्त न होने तथा सभी उपस्थित सदस्यों द्वारा समर्थन व्यक्त किए जाने के
कारण अध्यक्ष महोदय द्वारा प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित घोषित किया गया।
18. निर्णय को प्रभावशाली बनाने
वाले वाक्य
इन वाक्यों को निर्णय से पहले या बाद में जोड़ने
से भाषा और अधिक सरकारी एवं प्रभावी हो जाती है—
- ग्राम सभा इस निष्कर्ष पर पहुँची कि...
- विषय का सम्यक् परीक्षण करने के उपरांत...
- समस्त तथ्यों का मूल्यांकन किए जाने के पश्चात...
- उपलब्ध अभिलेखों के अवलोकन से यह स्पष्ट हुआ कि...
- व्यापक जनहित को दृष्टिगत रखते हुए...
- ग्राम पंचायत के समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए...
- वर्तमान एवं भावी आवश्यकताओं का आकलन करते हुए...
- प्रशासनिक औचित्य को स्वीकार करते हुए...
- वित्तीय उपलब्धता के अधीन...
- नियमानुसार आवश्यक स्वीकृतियाँ प्राप्त होने पर...
- सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति के अधीन...
- ग्राम सभा की सर्वसम्मत सहमति के आधार पर...
- पारदर्शी एवं उत्तरदायी प्रशासन की भावना से...
- सार्वजनिक हित को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान करते
हुए...
- कार्य की उपयोगिता एवं आवश्यकता को स्वीकार करते
हुए...
19. निर्णय के बाद क्या लिखें?
यहीं अधिकांश कार्यवाहियाँ समाप्त हो जाती हैं,
जबकि वास्तव
में निर्णय के बाद अनुपालन (Compliance)
लिखना आवश्यक
होता है।
उदाहरण—
प्रारूप – 1
निर्णय लिया गया कि प्रस्ताव के संबंध में
नियमानुसार आवश्यक प्रशासनिक कार्यवाही ग्राम पंचायत द्वारा तत्काल प्रारम्भ की
जाएगी।
प्रारूप – 2
संबंधित अधिकारी को निर्देशित किया गया कि
प्रस्ताव के क्रियान्वयन हेतु आवश्यक कार्यवाही निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करना
सुनिश्चित करें।
प्रारूप – 3
यदि प्रस्ताव के क्रियान्वयन हेतु सक्षम
प्राधिकारी की स्वीकृति अपेक्षित हो तो नियमानुसार प्रस्ताव प्रेषित किया जाए तथा
स्वीकृति प्राप्त होने पर आगे की कार्यवाही की जाए।
प्रारूप – 4
कार्य की प्रगति से समय-समय पर ग्राम सभा को
अवगत कराया जाएगा तथा आवश्यकता पड़ने पर आगामी बैठक में इसकी समीक्षा की जाएगी।
प्रारूप – 5
ग्राम पंचायत सचिव को निर्देशित किया गया कि
प्रस्ताव का विधिवत अभिलेखीकरण कर संबंधित विभाग को आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित
किया जाए।
20. निर्णय के अंत में जोड़ने
योग्य सरकारी पंक्तियाँ
- इस आशय का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया।
- उक्त निर्णय कार्यवाही पुस्तिका में विधिवत अभिलेखित
किया गया।
- प्रस्ताव का अनुमोदन ग्राम सभा द्वारा सर्वसम्मति से
किया गया।
- निर्णय का अनुपालन नियमानुसार सुनिश्चित किया जाएगा।
- संबंधित अधिकारी को आवश्यक निर्देश जारी किए गए।
- प्रस्ताव की प्रति आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित की
जाएगी।
- कार्य की समीक्षा आगामी ग्राम सभा में की जाएगी।
- निर्णय के संबंध में सभी सदस्यों को अवगत कराया गया।
- कार्यवाही का अभिलेखीकरण कर सुरक्षित संधारित किया
गया।
- अध्यक्ष महोदय द्वारा निर्णय की पुष्टि की गई।
✍️ ड्राफ्टिंग सिद्धांत
एक उत्कृष्ट निर्णय केवल "क्या हुआ"
नहीं बताता, बल्कि यह भी बताता है—
- निर्णय क्यों लिया गया,
- किस आधार पर लिया गया,
- किसके द्वारा लिया गया,
- किसे लागू करना है,
- और उसकी समीक्षा कब होगी।
21. अनुपालन (Compliance)
लेखन की सरकारी
भाषा
ग्राम सभा की अधिकांश कार्यवाहियों में एक बड़ी
कमी यह होती है कि निर्णय तो लिख दिया जाता है,
लेकिन उसके बाद
क्या होगा, यह नहीं लिखा जाता।
एक अच्छी सरकारी कार्यवाही में निर्णय के बाद अनुपालन (Compliance)
अवश्य लिखा
जाता है।
यही वह भाग है जो ग्राम सभा के निर्णय को
वास्तविक प्रशासनिक कार्यवाही में परिवर्तित करता है।
अनुपालन प्रारूप – 1
ग्राम सभा द्वारा यह निर्णय लिया गया कि
प्रस्ताव के संबंध में आवश्यक समस्त प्रशासनिक कार्यवाही प्रचलित नियमों एवं शासन
द्वारा समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप सुनिश्चित की जाएगी तथा कार्य की
प्रगति से ग्राम सभा को समय-समय पर अवगत कराया जाएगा।
अनुपालन प्रारूप – 2
निर्णय लिया गया कि प्रस्ताव के प्रभावी
क्रियान्वयन हेतु आवश्यक अभिलेखीय, प्रशासनिक एवं वित्तीय प्रक्रिया ग्राम पंचायत स्तर पर
पूर्ण की जाएगी तथा जहाँ सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति अपेक्षित होगी वहाँ
नियमानुसार प्रस्ताव प्रेषित किया जाएगा।
अनुपालन प्रारूप – 3
ग्राम पंचायत सचिव को निर्देशित किया गया कि
प्रस्ताव की सत्यापित प्रति आवश्यक कार्यवाही हेतु संबंधित विभाग, कार्यालय अथवा
सक्षम प्राधिकारी को प्रेषित करते हुए अनुपालन की कार्यवाही प्रारम्भ करें।
अनुपालन प्रारूप – 4
यह भी निर्णय लिया गया कि प्रस्ताव के
क्रियान्वयन में पूर्ण पारदर्शिता, गुणवत्ता एवं समयबद्धता सुनिश्चित की जाएगी तथा कार्य पूर्ण
होने तक समय-समय पर प्रगति का परीक्षण किया जाएगा।
अनुपालन प्रारूप – 5
यदि प्रस्ताव के क्रियान्वयन के लिए तकनीकी
स्वीकृति, प्रशासनिक
स्वीकृति अथवा वित्तीय स्वीकृति अपेक्षित हो तो नियमानुसार समस्त औपचारिकताएँ
पूर्ण करते हुए कार्यवाही आगे बढ़ाई जाएगी।
अनुपालन प्रारूप – 6
ग्राम सभा ने निर्देशित किया कि प्रस्ताव के
क्रियान्वयन के प्रत्येक चरण का अभिलेखीकरण किया जाए तथा आवश्यकतानुसार संबंधित
अभिलेख सुरक्षित संधारित किए जाएँ।
अनुपालन प्रारूप – 7
प्रस्ताव के संबंध में की गई प्रत्येक कार्यवाही
की जानकारी आगामी ग्राम सभा की बैठक में प्रस्तुत की जाएगी, जिससे ग्राम सभा द्वारा
समय-समय पर इसकी समीक्षा की जा सके।
अनुपालन प्रारूप – 8
ग्राम पंचायत को निर्देशित किया गया कि कार्य
प्रारम्भ होने से पूर्व समस्त वैधानिक एवं प्रशासनिक औपचारिकताएँ पूर्ण कर ली जाएँ
तथा तत्पश्चात ही कार्यवाही प्रारम्भ की जाए।
अनुपालन प्रारूप – 9
कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करने हेतु समय-समय
पर निरीक्षण किया जाएगा तथा यदि आवश्यक हुआ तो संबंधित विभाग के अधिकारियों से
तकनीकी मार्गदर्शन प्राप्त किया जाएगा।
अनुपालन प्रारूप – 10
निर्णय का अनुपालन ग्राम पंचायत स्तर पर
निर्धारित समय-सीमा के भीतर सुनिश्चित किया जाएगा तथा किसी प्रकार की प्रशासनिक
अथवा तकनीकी बाधा उत्पन्न होने पर सक्षम प्राधिकारी से आवश्यक मार्गदर्शन प्राप्त
किया जाएगा।
22. उत्तरदायित्व निर्धारण की
भाषा
सरकारी कार्यवाही में केवल निर्णय लिखना
पर्याप्त नहीं है।
यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि उत्तरदायी कौन
होगा।
प्रारूप – 1
प्रस्ताव के प्रभावी क्रियान्वयन का
उत्तरदायित्व ग्राम पंचायत का होगा।
प्रारूप – 2
ग्राम पंचायत सचिव को आवश्यक प्रशासनिक
कार्यवाही सुनिश्चित करने हेतु अधिकृत किया गया।
प्रारूप – 3
संबंधित विभागीय अधिकारी को आवश्यक कार्रवाई
करने हेतु निर्देशित किया गया।
प्रारूप – 4
कार्य की निगरानी ग्राम पंचायत द्वारा की जाएगी
तथा प्रगति की समीक्षा समय-समय पर की जाएगी।
प्रारूप – 5
कार्य के सफल एवं समयबद्ध क्रियान्वयन हेतु
संबंधित अधिकारियों एवं ग्राम पंचायत के मध्य समन्वय स्थापित किया जाएगा।
प्रारूप – 6
कार्य की गुणवत्ता एवं पारदर्शिता सुनिश्चित
करने का उत्तरदायित्व संबंधित कार्यान्वयन एजेंसी का होगा।
प्रारूप – 7
प्रस्ताव के प्रत्येक बिंदु का अनुपालन
सुनिश्चित करने हेतु संबंधित अधिकारी व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी होंगे।
प्रारूप – 8
आवश्यकतानुसार संबंधित विभाग से समन्वय स्थापित
कर कार्यवाही पूर्ण की जाएगी।
23. समीक्षा (Review) की भाषा
उच्च स्तरीय कार्यवाही में समीक्षा का उल्लेख
अवश्य होना चाहिए।
प्रारूप – 1
प्रस्ताव की प्रगति की समीक्षा आगामी ग्राम सभा
की बैठक में की जाएगी।
प्रारूप – 2
आवश्यकतानुसार समय-समय पर कार्य की प्रगति का
मूल्यांकन किया जाएगा।
प्रारूप – 3
यदि कार्य की प्रगति संतोषजनक नहीं पाई जाती है
तो आवश्यक सुधारात्मक कार्यवाही की जाएगी।
प्रारूप – 4
ग्राम पंचायत समय-समय पर कार्य की स्थिति का
परीक्षण कर ग्राम सभा को अवगत कराएगी।
प्रारूप – 5
कार्य पूर्ण होने के उपरांत उसका विवरण ग्राम
सभा के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
24. प्रस्ताव समाप्त करने की
सरकारी भाषा
यहीं अधिकांश लोग लिखते हैं—
प्रस्ताव समाप्त।
लेकिन सरकारी कार्यवाही में ऐसा नहीं लिखा जाता।
प्रारूप – 1
उपरोक्त निर्णय के साथ विषय पर विचार-विमर्श
समाप्त हुआ तथा कार्यसूची के अगले विषय पर कार्यवाही प्रारम्भ की गई।
प्रारूप – 2
अध्यक्ष महोदय द्वारा प्रस्ताव के संबंध में लिए
गए निर्णय की पुष्टि करते हुए विषय को पूर्ण घोषित किया गया।
प्रारूप – 3
उक्त प्रस्ताव पर आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित
किए जाने के निर्देश प्रदान करते हुए विषय का समापन किया गया।
प्रारूप – 4
इस प्रकार प्रस्तुत विषय पर विस्तृत
विचार-विमर्श एवं निर्णय की कार्यवाही पूर्ण हुई।
प्रारूप – 5
अध्यक्ष महोदय द्वारा उपस्थित सदस्यों का सहयोग
हेतु आभार व्यक्त करते हुए अगले विषय पर चर्चा प्रारम्भ करने की घोषणा की गई।
25. उच्च स्तरीय समापन
पंक्तियाँ
- इस आशय का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया।
- निर्णय का विधिवत अभिलेखीकरण किया गया।
- प्रस्ताव की प्रति आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित की
जाएगी।
- संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया।
- अनुपालन प्रतिवेदन आगामी बैठक में प्रस्तुत किया
जाएगा।
- प्रस्ताव के क्रियान्वयन की नियमित समीक्षा की जाएगी।
- ग्राम सभा द्वारा निर्णय की पुष्टि की गई।
- कार्यवाही अध्यक्ष महोदय की अनुमति से अभिलेखित की गई।
- सभी सदस्यों ने निर्णय पर संतोष व्यक्त किया।
- अध्यक्ष महोदय द्वारा विषय समाप्त घोषित किया गया।
📌 लेखक टिप्पणी (ड्राफ्टिंग
सिद्धांत)
एक उच्च स्तरीय
प्रस्ताव कभी भी केवल "प्रस्ताव –
निर्णय – समाप्त" नहीं होता।
उसकी वास्तविक संरचना होती है—
विषय
⬇
पृष्ठभूमि
⬇
औचित्य
⬇
विचार-विमर्श
⬇
सदस्यों के अभिमत
⬇
ग्राम सभा का सामूहिक मत
⬇
निर्णय
⬇
अनुपालन
⬇
उत्तरदायित्व
⬇
समीक्षा
⬇
समापन
💯 यही वह ड्राफ्टिंग शैली है
जो साधारण कार्यवाही को एक मजबूत, अभिलेखीय और पेशेवर सरकारी दस्तावेज़ में बदल
देती है।
26. प्रस्ताव के समर्थन में
अभिमत लिखने की सरकारी भाषा
ग्राम सभा की कार्यवाही में केवल यह लिख देना कि "सभी ने समर्थन किया" पर्याप्त नहीं
होता। यह उल्लेख होना चाहिए कि समर्थन किस आधार पर किया गया। इससे कार्यवाही अधिक
मजबूत एवं अभिलेखीय बनती है।
प्रारूप–1
उपस्थित सदस्यों द्वारा यह अभिमत व्यक्त किया
गया कि प्रस्तुत प्रस्ताव ग्राम पंचायत क्षेत्र की वर्तमान आवश्यकताओं, उपलब्ध
संसाधनों एवं जनहित की दृष्टि से पूर्णतः उपयुक्त एवं समयोचित है। अतः प्रस्ताव का
अनुमोदन किया जाना उचित होगा।
प्रारूप–2
ग्राम सभा में उपस्थित सदस्यों ने विषय के
विभिन्न पक्षों पर विचार करने के उपरांत यह मत व्यक्त किया कि प्रस्ताव का
क्रियान्वयन ग्राम पंचायत क्षेत्र के विकास, सार्वजनिक सुविधाओं के
विस्तार तथा ग्रामीणों की आवश्यकताओं की पूर्ति में सहायक सिद्ध होगा। इस आधार पर
प्रस्ताव का समर्थन किया गया।
प्रारूप–3
चर्चा के दौरान यह अनुभव किया गया कि प्रस्तुत
प्रस्ताव से ग्राम पंचायत क्षेत्र के अधिकांश ग्रामीण प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष
रूप से लाभान्वित होंगे। अतः प्रस्ताव को ग्रामहित में स्वीकार किया जाना आवश्यक
है।
प्रारूप–4
ग्राम सभा द्वारा यह मत व्यक्त किया गया कि
प्रस्तावित कार्य दीर्घकालीन सार्वजनिक उपयोगिता का है तथा इसके क्रियान्वयन से
ग्राम पंचायत क्षेत्र के विकास को नई दिशा प्राप्त होगी। इस आधार पर प्रस्ताव के
समर्थन में सर्वसम्मति व्यक्त की गई।
प्रारूप–5
उपस्थित सदस्यों ने यह अभिमत व्यक्त किया कि
विषय के संबंध में उपलब्ध तथ्यों, प्राप्त सुझावों एवं वर्तमान परिस्थितियों के समग्र परीक्षण
के उपरांत प्रस्ताव का अनुमोदन जनहित में उपयुक्त होगा।
27. प्रस्ताव के विरोध की भाषा
(यदि विरोध हो)
सरकारी कार्यवाही में कभी भी यह नहीं लिखा जाता—
फलाँ व्यक्ति ने विरोध किया।
इस प्रकार लिखना चाहिए।
प्रारूप–1
कुछ सदस्यों द्वारा प्रस्ताव के संबंध में
वैकल्पिक अभिमत प्रस्तुत किए गए तथा विषय के कुछ बिंदुओं पर पुनर्विचार करने का
सुझाव दिया गया।
प्रारूप–2
चर्चा के दौरान कुछ सदस्यों द्वारा प्रस्ताव के
संबंध में स्पष्टीकरण अपेक्षित किया गया। आवश्यक तथ्य स्पष्ट किए जाने के उपरांत
विषय पर पुनः विचार किया गया।
प्रारूप–3
विषय के संबंध में कुछ सदस्यों द्वारा सीमित
आपत्तियाँ प्रस्तुत की गईं, जिनका परीक्षण करने के उपरांत ग्राम सभा ने मूल प्रस्ताव को
यथावत रखने का निर्णय लिया।
प्रारूप–4
प्राप्त आपत्तियों एवं सुझावों का गंभीरतापूर्वक
परीक्षण किया गया। तथ्यों के परीक्षण के उपरांत ग्राम सभा द्वारा मूल प्रस्ताव का
समर्थन किया गया।
प्रारूप–5
कुछ सदस्यों द्वारा वैकल्पिक सुझाव प्रस्तुत किए
गए, जिनका परीक्षण
करने के पश्चात ग्राम सभा ने सर्वसम्मति से मूल प्रस्ताव के अनुरूप निर्णय लिया।
28. यदि संशोधन प्रस्ताव आए
प्रारूप–1
मूल प्रस्ताव पर विचार-विमर्श के दौरान कुछ
सदस्यों द्वारा संशोधन संबंधी सुझाव प्रस्तुत किए गए। प्राप्त सुझावों पर विस्तृत
विचार करने के उपरांत संशोधित प्रस्ताव ग्राम सभा के समक्ष पुनः प्रस्तुत किया
गया।
प्रारूप–2
संशोधन प्रस्ताव का परीक्षण किए जाने के पश्चात
ग्राम सभा ने आवश्यक संशोधन स्वीकार करते हुए संशोधित प्रस्ताव को सर्वसम्मति से
अनुमोदित किया।
प्रारूप–3
संशोधन संबंधी सुझावों पर विचार करने के उपरांत
यह पाया गया कि मूल प्रस्ताव में किसी परिवर्तन की आवश्यकता नहीं है। अतः मूल
प्रस्ताव को यथावत स्वीकृति प्रदान की गई।
प्रारूप–4
ग्राम सभा ने संशोधन के सुझावों का स्वागत किया
तथा उनमें से आवश्यक बिंदुओं को प्रस्ताव में सम्मिलित करने का निर्णय लिया।
प्रारूप–5
संशोधन प्रस्ताव पर विचार करने के उपरांत
अध्यक्ष महोदय द्वारा संशोधित पाठ ग्राम सभा के समक्ष पढ़कर सुनाया गया, जिसे
सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया।
29. यदि निर्णय बहुमत से लिया
जाए
कई बार सर्वसम्मति नहीं बनती। ऐसी स्थिति में
भाषा भी अलग होगी।
प्रारूप–1
विस्तृत विचार-विमर्श के उपरांत प्रस्ताव को
बहुमत के आधार पर स्वीकृति प्रदान की गई।
प्रारूप–2
प्रस्ताव पर मत विभाजन होने के कारण उपस्थित
सदस्यों के बहुमत द्वारा प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया।
प्रारूप–3
ग्राम सभा में प्राप्त बहुमत के आधार पर
प्रस्ताव पारित किया गया तथा असहमति व्यक्त करने वाले सदस्यों के अभिमत का भी
संज्ञान लिया गया।
प्रारूप–4
बहुमत से पारित प्रस्ताव का विधिवत अभिलेखीकरण
किया गया तथा नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही करने का निर्णय लिया गया।
प्रारूप–5
मतदान की प्रक्रिया पूर्ण होने के पश्चात
अध्यक्ष महोदय द्वारा परिणाम घोषित किया गया तथा बहुमत से प्रस्ताव स्वीकृत किया
गया।
30. प्रस्ताव को स्थगित करने की
भाषा
प्रारूप–1
विषय पर अंतिम निर्णय लेने से पूर्व अतिरिक्त
जानकारी प्राप्त किया जाना आवश्यक पाए जाने के कारण प्रस्ताव को अगली बैठक तक
स्थगित रखने का निर्णय लिया गया।
प्रारूप–2
उपलब्ध अभिलेख अपूर्ण होने के कारण प्रस्ताव पर
निर्णय स्थगित करते हुए आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत किए जाने के निर्देश दिए गए।
प्रारूप–3
विषय के संबंध में विस्तृत परीक्षण अपेक्षित
होने के कारण प्रस्ताव पर निर्णय आगामी ग्राम सभा में लिए जाने का निर्णय किया
गया।
प्रारूप–4
ग्राम सभा द्वारा यह निर्णय लिया गया कि आवश्यक
तकनीकी प्रतिवेदन प्राप्त होने के उपरांत प्रस्ताव पर पुनः विचार किया जाएगा।
प्रारूप–5
प्राप्त तथ्यों के आधार पर तत्काल निर्णय लिया
जाना उचित नहीं पाए जाने के कारण विषय को स्थगित रखा गया।
31. प्रस्ताव अस्वीकार करने की
भाषा
सरकारी कार्यवाही में कभी नहीं लिखते—
प्रस्ताव खारिज कर दिया।
ऐसे लिखते हैं—
प्रारूप–1
उपलब्ध तथ्यों एवं विस्तृत विचार-विमर्श के
उपरांत ग्राम सभा द्वारा यह पाया गया कि वर्तमान परिस्थितियों में प्रस्ताव का
अनुमोदन किया जाना उचित नहीं होगा। अतः प्रस्ताव को इस स्तर पर स्वीकृति प्रदान
नहीं की गई।
प्रारूप–2
प्रस्तुत प्रस्ताव पर विचार करने के उपरांत
ग्राम सभा ने यह निर्णय लिया कि आवश्यक औपचारिकताएँ पूर्ण होने के पश्चात ही विषय
पर पुनर्विचार किया जाएगा।
प्रारूप–3
प्रस्ताव का परीक्षण करने के उपरांत यह पाया गया
कि वर्तमान में प्रस्ताव अनुमोदन योग्य नहीं है। अतः विषय को अस्वीकृत करते हुए
आवश्यक सुधारों के साथ पुनः प्रस्तुत करने का निर्णय लिया गया।
प्रारूप–4
ग्राम सभा द्वारा विषय का समग्र परीक्षण करने के
उपरांत प्रस्ताव को स्वीकार किए जाने हेतु पर्याप्त आधार उपलब्ध नहीं पाए गए।
प्रारूप–5
ग्राम सभा ने यह अभिमत व्यक्त किया कि प्रस्ताव
वर्तमान परिस्थितियों में जनहित के अनुरूप नहीं पाया गया, अतः उसे स्वीकृति प्रदान
नहीं की गई।
📘 लेखक टिप्पणी
यही अंतर है साधारण कार्यवाही और उच्च स्तरीय
कार्यवाही में।
एक अनुभवी पंचायत सचिव "हाँ",
"ना",
"पास",
"रद्द" जैसे शब्द कम
लिखता है। वह ऐसे वाक्य लिखता है जिनसे निर्णय का आधार, प्रक्रिया और औचित्य स्पष्ट
दिखाई दे।
32. प्रस्ताव प्रारम्भ करने की
सरकारी भाषा (Opening Sentence Bank)
लेखक टिप्पणी:
अधिकांश ग्राम
पंचायतों में यही सबसे बड़ी गलती होती है कि प्रत्येक प्रस्ताव की शुरुआत एक जैसी
होती है। परिणामस्वरूप पूरी कार्यवाही कॉपी-पेस्ट जैसी प्रतीत होती है। एक दक्ष
पंचायत सचिव प्रत्येक प्रस्ताव का प्रारम्भ अलग शैली में करता है, जबकि निर्णय का
आशय वही रहता है।
प्रारूप–1
अध्यक्ष महोदय की अनुमति प्राप्त होने के उपरांत
कार्यसूची के क्रमांक ........ पर अंकित विषय को ग्राम सभा के समक्ष विचारार्थ
प्रस्तुत किया गया। विषय की पृष्ठभूमि, उद्देश्य एवं आवश्यकता का संक्षिप्त विवरण
प्रस्तुत करते हुए उपस्थित सदस्यों से इस पर अपने विचार व्यक्त करने का अनुरोध
किया गया।
प्रारूप–2
निर्धारित कार्यसूची के अनुसार विचारणीय विषय को
अध्यक्ष महोदय के निर्देशानुसार ग्राम सभा के समक्ष रखा गया। सचिव द्वारा विषय के
संबंध में उपलब्ध समस्त तथ्यों, अभिलेखों एवं आवश्यक जानकारियों से उपस्थित सदस्यों को अवगत
कराया गया।
प्रारूप–3
कार्यसूची के अनुसार प्रस्तुत विषय का विस्तृत
प्रतिवेदन ग्राम पंचायत सचिव द्वारा प्रस्तुत किया गया। प्रतिवेदन में विषय की
पृष्ठभूमि, वर्तमान स्थिति,
प्रशासनिक
आवश्यकता एवं अपेक्षित परिणामों का उल्लेख करते हुए विषय पर विचार-विमर्श प्रारम्भ
किया गया।
प्रारूप–4
ग्राम पंचायत क्षेत्र की वर्तमान परिस्थितियों,
ग्रामीणों की
आवश्यकताओं तथा विकासात्मक प्राथमिकताओं को दृष्टिगत रखते हुए विषय को विचारार्थ
प्रस्तुत किया गया। अध्यक्ष महोदय ने विषय की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए सभी
सदस्यों से निष्पक्ष एवं रचनात्मक सुझाव देने का आग्रह किया।
प्रारूप–5
प्रस्तुत विषय के संबंध में सचिव द्वारा अवगत
कराया गया कि यह विषय ग्राम पंचायत क्षेत्र के व्यापक जनहित से संबंधित है तथा इस
पर लिया जाने वाला निर्णय दीर्घकालिक प्रभाव रखने वाला होगा। अतः सभी सदस्यों से
गंभीरतापूर्वक विचार करने का अनुरोध किया गया।
प्रारूप–6
ग्राम सभा के समक्ष विषय प्रस्तुत करते हुए यह
स्पष्ट किया गया कि प्रस्ताव प्राप्त सुझावों, स्थानीय आवश्यकताओं तथा
उपलब्ध संसाधनों के समुचित परीक्षण के उपरांत विचारार्थ रखा गया है।
प्रारूप–7
सचिव द्वारा विषय की प्रशासनिक एवं व्यवहारिक
पृष्ठभूमि का विवरण प्रस्तुत करते हुए बताया गया कि प्रस्ताव ग्राम पंचायत क्षेत्र
के समग्र विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इसके उपरांत अध्यक्ष महोदय द्वारा
विचार-विमर्श प्रारम्भ करने की घोषणा की गई।
प्रारूप–8
ग्राम पंचायत क्षेत्र के विकास, सार्वजनिक
सुविधा एवं ग्रामीणों के हितों को ध्यान में रखते हुए प्रस्तुत विषय पर चर्चा
प्रारम्भ की गई। विषय से संबंधित उपलब्ध अभिलेखों का अवलोकन कराते हुए सचिव द्वारा
आवश्यक तथ्य प्रस्तुत किए गए।
प्रारूप–9
अध्यक्ष महोदय द्वारा उपस्थित सदस्यों को
संबोधित करते हुए कहा गया कि प्रस्तुत विषय ग्राम पंचायत की प्राथमिक आवश्यकताओं
से संबंधित है। अतः सभी सदस्यों से अपेक्षा की गई कि वे अपने अनुभव एवं सुझाव
ग्रामहित में प्रस्तुत करें।
प्रारूप–10
ग्राम सभा के समक्ष प्रस्तुत विषय के संबंध में
विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराते हुए सचिव द्वारा यह अवगत कराया गया कि विषय का
परीक्षण विभिन्न स्तरों पर प्राप्त तथ्यों एवं सुझावों के आधार पर किया जा चुका है
तथा अब अंतिम निर्णय हेतु इसे ग्राम सभा के समक्ष रखा गया है।
प्रारूप–11
ग्राम पंचायत क्षेत्र की वर्तमान परिस्थितियों,
उपलब्ध
संसाधनों, स्थानीय
आवश्यकताओं तथा सार्वजनिक हित के व्यापक परिप्रेक्ष्य में विचार करते हुए प्रस्तुत
विषय को ग्राम सभा के समक्ष निर्णयार्थ प्रस्तुत किया गया। सचिव द्वारा विषय की
संपूर्ण पृष्ठभूमि एवं प्रशासनिक औचित्य का क्रमवार विवरण प्रस्तुत किया गया,
जिसके उपरांत
अध्यक्ष महोदय की अनुमति से विचार-विमर्श प्रारम्भ किया गया।
प्रारूप–12
विषय का प्रस्तुतीकरण करते हुए सचिव द्वारा अवगत
कराया गया कि प्रस्ताव ग्राम पंचायत स्तर पर प्राप्त सुझावों, संबंधित
विभागों के दिशा-निर्देशों एवं ग्राम पंचायत की विकासात्मक प्राथमिकताओं को ध्यान
में रखते हुए तैयार किया गया है। अध्यक्ष महोदय ने सभी सदस्यों से विषय के
प्रत्येक पक्ष पर गंभीरतापूर्वक विचार करने का अनुरोध किया।
प्रारूप–13
ग्राम सभा के समक्ष विचारार्थ प्रस्तुत विषय का
विस्तृत प्रतिवेदन पढ़कर सुनाया गया। प्रतिवेदन में विषय की आवश्यकता, संभावित
उपयोगिता, प्रशासनिक पक्ष,
उपलब्ध
संसाधनों तथा अपेक्षित परिणामों का उल्लेख करते हुए विषय पर क्रमबद्ध विचार-विमर्श
प्रारम्भ किया गया।
प्रारूप–14
अध्यक्ष महोदय ने अपने उद्बोधन में कहा कि ग्राम
सभा द्वारा लिया जाने वाला प्रत्येक निर्णय ग्राम पंचायत क्षेत्र के विकास एवं
प्रशासनिक उत्तरदायित्व का आधार होता है। अतः प्रस्तुत विषय पर समग्र एवं संतुलित
विचार करना आवश्यक है। इसके उपरांत सचिव द्वारा विषय का विवरण प्रस्तुत किया गया।
प्रारूप–15
ग्राम सभा में उपस्थित सदस्यों को यह अवगत कराया
गया कि प्रस्तुत विषय केवल एक सामान्य प्रशासनिक विषय नहीं है, बल्कि ग्राम
पंचायत क्षेत्र की सार्वजनिक आवश्यकताओं एवं भावी विकास योजनाओं से प्रत्यक्ष रूप
से संबंधित है। इस कारण विषय पर गंभीर एवं विस्तृत विचार-विमर्श अपेक्षित है।
प्रारूप–16
विषय के संबंध में उपलब्ध समस्त अभिलेख, प्राप्त आवेदन,
विभागीय
पत्राचार, पूर्व निर्णय
एवं आवश्यक दस्तावेजों का परीक्षण किए जाने के उपरांत विषय को ग्राम सभा के समक्ष
निर्णयार्थ प्रस्तुत किया गया।
प्रारूप–17
सचिव द्वारा यह प्रमाणित किया गया कि विषय से
संबंधित आवश्यक अभिलेख ग्राम सभा के अवलोकनार्थ उपलब्ध कराए गए हैं तथा निर्णय
हेतु अपेक्षित समस्त जानकारी उपस्थित सदस्यों को प्रदान कर दी गई है।
प्रारूप–18
विषय के संबंध में प्राप्त तथ्यों, उपलब्ध
अभिलेखों एवं ग्राम पंचायत स्तर पर प्राप्त सुझावों का क्रमवार विवरण प्रस्तुत
करते हुए अध्यक्ष महोदय से विषय पर विचार-विमर्श प्रारम्भ करने की अनुमति प्राप्त
की गई।
प्रारूप–19
ग्राम पंचायत क्षेत्र की वर्तमान आवश्यकताओं एवं
विकासात्मक प्राथमिकताओं के आलोक में प्रस्तुत विषय को विचारार्थ रखा गया तथा
उपस्थित सदस्यों से तथ्यात्मक एवं निष्पक्ष अभिमत प्रस्तुत करने का अनुरोध किया
गया।
प्रारूप–20
विषय का प्रस्तुतीकरण करते हुए सचिव द्वारा
स्पष्ट किया गया कि प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत आग्रह पर नहीं, बल्कि ग्राम पंचायत क्षेत्र
की वास्तविक आवश्यकताओं, उपलब्ध अभिलेखों एवं प्रशासनिक औचित्य के आधार पर तैयार
किया गया है तथा इसी उद्देश्य से ग्राम सभा के समक्ष विचारार्थ प्रस्तुत किया गया
है।
✍️ ड्राफ्टिंग नोट
(महत्वपूर्ण)
एक अनुभवी पंचायत सचिव कभी भी लगातार
दो प्रस्ताव एक ही वाक्य से शुरू नहीं करता।
यदि एक कार्यवाही में 20
प्रस्ताव हैं, तो आदर्श रूप
से 20 अलग-अलग प्रारम्भिक शैली उपयोग की जानी
चाहिए। इससे पूरी कार्यवाही स्वाभाविक, पेशेवर और मौलिक दिखाई देती है।
35. प्रस्ताव की पृष्ठभूमि
लिखने की सरकारी भाषा (Background Drafting Bank)
लेखक टिप्पणी:
अधिकांश पंचायत
सचिव सीधे विषय लिखकर निर्णय पर पहुँच जाते हैं। जबकि उच्च स्तरीय सरकारी
कार्यवाही में पृष्ठभूमि (Background) अवश्य लिखी
जाती है। यही भाग प्रस्ताव को मजबूत, तार्किक एवं अभिलेखीय बनाता है।
पृष्ठभूमि प्रारूप – 1
ग्राम पंचायत क्षेत्र के विभिन्न वार्डों से
समय-समय पर प्राप्त सुझावों, ग्रामीणों द्वारा व्यक्त आवश्यकताओं तथा स्थानीय
परिस्थितियों के समग्र मूल्यांकन के आधार पर प्रस्तुत विषय को ग्राम सभा के समक्ष
विचारार्थ रखा गया।
पृष्ठभूमि प्रारूप – 2
सचिव द्वारा अवगत कराया गया कि प्रस्तुत विषय पर
पूर्व में भी अनौपचारिक स्तर पर चर्चा की जा चुकी है। प्राप्त सुझावों एवं उपलब्ध
तथ्यों का परीक्षण करने के उपरांत विषय को निर्णयार्थ ग्राम सभा के समक्ष प्रस्तुत
किया गया है।
पृष्ठभूमि प्रारूप – 3
ग्राम पंचायत क्षेत्र की वर्तमान परिस्थितियों,
सार्वजनिक
आवश्यकता एवं उपलब्ध संसाधनों का परीक्षण करने के उपरांत यह अनुभव किया गया कि
विषय पर ग्राम सभा का निर्णय प्राप्त किया जाना आवश्यक है।
पृष्ठभूमि प्रारूप – 4
उक्त विषय ग्राम पंचायत क्षेत्र के समग्र विकास,
जनसुविधा तथा
ग्रामीणों के हितों से प्रत्यक्ष रूप से संबंधित होने के कारण इसे प्राथमिकता के
आधार पर वर्तमान बैठक की कार्यसूची में सम्मिलित किया गया।
पृष्ठभूमि प्रारूप – 5
संबंधित विषय के संबंध में प्राप्त अभिलेखों,
उपलब्ध जानकारी
एवं विभिन्न स्तरों से प्राप्त सुझावों का परीक्षण करने के उपरांत यह आवश्यक समझा
गया कि विषय पर ग्राम सभा द्वारा विस्तृत विचार किया जाए।
पृष्ठभूमि प्रारूप – 6
ग्राम पंचायत सचिव द्वारा यह बताया गया कि विषय
का संबंध ग्राम पंचायत की विकासात्मक प्राथमिकताओं से है तथा इसके संबंध में
समय-समय पर ग्रामीणों द्वारा अपेक्षाएँ व्यक्त की जाती रही हैं। इस कारण विषय को
विचारार्थ प्रस्तुत किया गया।
पृष्ठभूमि प्रारूप – 7
उपलब्ध अभिलेखों के परीक्षण से यह स्पष्ट हुआ कि
विषय ग्राम पंचायत क्षेत्र की वर्तमान आवश्यकताओं से जुड़ा हुआ है। अतः जनहित को
दृष्टिगत रखते हुए इसे ग्राम सभा के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
पृष्ठभूमि प्रारूप – 8
ग्राम पंचायत क्षेत्र में उपलब्ध परिस्थितियों,
संसाधनों एवं
विकास कार्यों की वर्तमान स्थिति का परीक्षण करने के उपरांत यह आवश्यक समझा गया कि
विषय पर सामूहिक निर्णय प्राप्त किया जाए।
पृष्ठभूमि प्रारूप – 9
विभिन्न वार्डों से प्राप्त सूचनाओं, जनप्रतिनिधियों
के सुझावों एवं ग्रामीणों द्वारा व्यक्त आवश्यकताओं का समेकित परीक्षण करने के
उपरांत विषय को ग्राम सभा की कार्यसूची में सम्मिलित किया गया।
पृष्ठभूमि प्रारूप – 10
अध्यक्ष महोदय द्वारा यह अवगत कराया गया कि
प्रस्तुत विषय पर लिया जाने वाला निर्णय ग्राम पंचायत क्षेत्र के भावी विकास को
प्रभावित करेगा। अतः विषय की पृष्ठभूमि से सभी सदस्यों को विस्तारपूर्वक अवगत
कराया गया।
पृष्ठभूमि प्रारूप – 11
सचिव द्वारा यह स्पष्ट किया गया कि विषय से
संबंधित उपलब्ध तथ्यों, विभागीय दिशा-निर्देशों एवं पूर्व निर्णयों का सम्यक्
परीक्षण कर ही प्रस्ताव तैयार किया गया है, जिससे निर्णय लेते समय किसी
प्रकार की तथ्यात्मक कमी न रहे।
पृष्ठभूमि प्रारूप – 12
प्रस्तुत विषय की आवश्यकता का आधार ग्राम पंचायत
क्षेत्र में विद्यमान वास्तविक परिस्थितियाँ, सार्वजनिक उपयोगिता तथा
ग्रामीणों द्वारा प्राप्त सुझाव रहे हैं। इन्हीं तथ्यों के आधार पर विषय को
विचारार्थ रखा गया।
पृष्ठभूमि प्रारूप – 13
विषय का परिचय देते हुए सचिव द्वारा बताया गया
कि यह विषय किसी एक व्यक्ति अथवा समूह विशेष से संबंधित न होकर संपूर्ण ग्राम
पंचायत क्षेत्र के व्यापक हित से जुड़ा हुआ है। इसलिए ग्राम सभा का निर्णय प्राप्त
किया जाना आवश्यक है।
पृष्ठभूमि प्रारूप – 14
ग्राम पंचायत द्वारा उपलब्ध कराए गए अभिलेखों
एवं क्षेत्रीय आवश्यकताओं का परीक्षण करने के उपरांत यह पाया गया कि विषय पर
सामूहिक निर्णय लिए बिना आगे की प्रशासनिक कार्यवाही करना उचित नहीं होगा। अतः
विषय को ग्राम सभा के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
पृष्ठभूमि प्रारूप – 15
सचिव द्वारा यह भी अवगत कराया गया कि विषय के
संबंध में प्राप्त सुझावों का पृथक-पृथक परीक्षण करने के पश्चात उनका समेकित
प्रतिवेदन तैयार किया गया है, जिसे ग्राम सभा के समक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है।
पृष्ठभूमि प्रारूप – 16
ग्राम पंचायत क्षेत्र में किए गए निरीक्षण,
स्थानीय स्तर
पर प्राप्त सूचनाओं एवं संबंधित अभिलेखों के परीक्षण से यह अनुभव किया गया कि विषय
पर ग्राम सभा का मार्गदर्शन एवं निर्णय प्राप्त किया जाना आवश्यक है।
पृष्ठभूमि प्रारूप – 17
विषय का संबंध ग्राम पंचायत की दीर्घकालिक विकास
योजना से होने के कारण इसे सामान्य विषयों से पृथक रखते हुए प्राथमिकता के आधार पर
विचारार्थ प्रस्तुत किया गया।
पृष्ठभूमि प्रारूप – 18
प्राप्त अभिलेखों एवं उपलब्ध तथ्यों के अध्ययन
से यह स्पष्ट हुआ कि वर्तमान परिस्थितियों में विषय पर निर्णय लिया जाना प्रशासनिक
दृष्टि से आवश्यक एवं समयोचित है।
पृष्ठभूमि प्रारूप – 19
संबंधित विषय पर विभिन्न स्तरों से प्राप्त
सुझावों, उपलब्ध
संसाधनों एवं ग्राम पंचायत की प्रशासनिक क्षमता का परीक्षण करने के उपरांत यह विषय
ग्राम सभा के समक्ष रखा गया।
पृष्ठभूमि प्रारूप – 20
विषय की महत्ता, जनहित एवं भविष्य में
संभावित प्रभावों को ध्यान में रखते हुए अध्यक्ष महोदय द्वारा इसे ग्राम सभा के
समक्ष विस्तारपूर्वक विचारार्थ प्रस्तुत करने का निर्णय लिया गया।
✍️ ड्राफ्टिंग सिद्धांत
एक अच्छी पृष्ठभूमि में हमेशा इन पाँच बातों में
से कम से कम तीन अवश्य होनी चाहिए—
- विषय क्यों आया?
- इसकी आवश्यकता क्या है?
- आधार क्या है?
- किसके सुझाव से आया?
- ग्राम सभा में लाने का उद्देश्य क्या है?
📖 लेखक की सलाह
यहीं से भाषा बदलती है।
साधारण पंचायत सचिव लिखेगा—
"विषय रखा गया।"
अनुभवी पंचायत सचिव लिखेगा—
"विभिन्न वार्डों से प्राप्त
सुझावों, उपलब्ध
अभिलेखों के परीक्षण, स्थानीय परिस्थितियों के समग्र मूल्यांकन तथा ग्राम पंचायत
क्षेत्र की विकासात्मक आवश्यकताओं को दृष्टिगत रखते हुए विषय को विचारार्थ
प्रस्तुत किया गया।"
दोनों का अर्थ एक है, लेकिन सरकारी
स्तर बिल्कुल अलग है।
36. चर्चा प्रारम्भ करने की
सरकारी भाषा (Discussion Drafting Bank)
ड्राफ्टिंग सिद्धांत
कार्यवाही का
सबसे जीवंत भाग "चर्चा" होता है। यहीं
से यह स्पष्ट होता है कि निर्णय वास्तव में विचार-विमर्श के बाद लिया गया है। एक
कुशल पंचायत सचिव कभी भी प्रत्येक प्रस्ताव में केवल "इस पर चर्चा की
गई" नहीं लिखता, बल्कि विषय के अनुसार भाषा बदलता है।
चर्चा प्रारूप – 1
विषय प्रस्तुत किए जाने के उपरांत अध्यक्ष महोदय
द्वारा उपस्थित सदस्यों से अनुरोध किया गया कि वे विषय के संबंध में अपने विचार,
सुझाव एवं
अभिमत क्रमवार प्रस्तुत करें। तत्पश्चात विषय पर विस्तृत विचार-विमर्श प्रारम्भ
किया गया।
चर्चा प्रारूप – 2
ग्राम सभा द्वारा यह निर्णय लिया गया कि अंतिम
निर्णय पर पहुँचने से पूर्व विषय के प्रत्येक पहलू पर विस्तार से विचार किया जाना
आवश्यक है। इसी उद्देश्य से क्रमबद्ध चर्चा प्रारम्भ की गई।
चर्चा प्रारूप – 3
उपस्थित सदस्यों द्वारा विषय की आवश्यकता,
उपयोगिता,
व्यवहारिकता
तथा ग्राम पंचायत क्षेत्र पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों के संबंध में
विस्तारपूर्वक अपने विचार व्यक्त किए गए।
चर्चा प्रारूप – 4
अध्यक्ष महोदय द्वारा सभी सदस्यों को स्वतंत्र
रूप से अपने विचार रखने का अवसर प्रदान किया गया तथा प्राप्त प्रत्येक सुझाव का
विधिवत अभिलेखीकरण किया गया।
चर्चा प्रारूप – 5
विषय के विभिन्न प्रशासनिक, सामाजिक,
आर्थिक एवं
विकासात्मक पक्षों पर क्रमवार विचार-विमर्श किया गया तथा उपस्थित सदस्यों द्वारा
अनेक महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए गए।
चर्चा प्रारूप – 6
चर्चा के दौरान यह प्रयास किया गया कि विषय के
प्रत्येक पक्ष का निष्पक्ष परीक्षण हो तथा निर्णय तथ्यों एवं जनहित के आधार पर
लिया जाए।
चर्चा प्रारूप – 7
ग्राम सभा में उपस्थित सदस्यों द्वारा अपने-अपने
क्षेत्र की परिस्थितियों, स्थानीय आवश्यकताओं एवं जनसामान्य की अपेक्षाओं के संबंध
में विस्तारपूर्वक जानकारी प्रस्तुत की गई।
चर्चा प्रारूप – 8
प्राप्त अभिलेखों, उपलब्ध संसाधनों तथा
संभावित परिणामों को ध्यान में रखते हुए विषय पर गहन विचार-विमर्श किया गया।
चर्चा प्रारूप – 9
सचिव द्वारा विषय से संबंधित आवश्यक स्पष्टीकरण
प्रस्तुत किए जाने के उपरांत सदस्यों द्वारा अपने विचार क्रमवार व्यक्त किए गए।
चर्चा प्रारूप – 10
चर्चा के दौरान विषय के गुण-दोष, संभावित लाभ,
व्यवहारिक
कठिनाइयों एवं उपलब्ध विकल्पों का विस्तारपूर्वक परीक्षण किया गया।
चर्चा प्रारूप – 11
ग्राम सभा ने यह सुनिश्चित किया कि किसी भी
निर्णय से पूर्व प्रत्येक सदस्य को अपने विचार रखने का पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराया
जाए। इसके उपरांत क्रमशः विचार-विमर्श प्रारम्भ हुआ।
चर्चा प्रारूप – 12
विषय की गंभीरता को दृष्टिगत रखते हुए अध्यक्ष
महोदय द्वारा सभी सदस्यों से तथ्यात्मक एवं रचनात्मक सुझाव प्रस्तुत करने का
अनुरोध किया गया।
चर्चा प्रारूप – 13
उपस्थित ग्रामीणों द्वारा स्थानीय परिस्थितियों
का उल्लेख करते हुए अनेक व्यवहारिक सुझाव प्रस्तुत किए गए, जिनका ग्राम सभा द्वारा
सकारात्मक दृष्टिकोण से परीक्षण किया गया।
चर्चा प्रारूप – 14
ग्राम सभा में उपस्थित महिला सदस्यों, वरिष्ठ
नागरिकों एवं युवाओं द्वारा भी विषय के संबंध में अपने विचार व्यक्त किए गए तथा
उनके सुझावों का विधिवत संज्ञान लिया गया।
चर्चा प्रारूप – 15
चर्चा के दौरान यह अनुभव किया गया कि विषय का
प्रभाव केवल वर्तमान परिस्थितियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में भी ग्राम
पंचायत क्षेत्र के विकास को प्रभावित करेगा। इस कारण विषय के प्रत्येक पक्ष पर
विस्तार से विचार किया गया।
चर्चा प्रारूप – 16
सदस्यों द्वारा विषय के संबंध में प्राप्त
अनुभवों, स्थानीय
आवश्यकताओं एवं प्रशासनिक व्यवहार्यता के आधार पर अपने-अपने सुझाव प्रस्तुत किए
गए।
चर्चा प्रारूप – 17
प्रत्येक सुझाव का क्रमवार परीक्षण करते हुए
ग्राम सभा ने विषय के सामाजिक, आर्थिक एवं प्रशासनिक प्रभावों का समग्र मूल्यांकन किया।
चर्चा प्रारूप – 18
ग्राम सभा द्वारा यह प्रयास किया गया कि निर्णय
किसी एक मत के आधार पर न होकर सामूहिक विचार-विमर्श एवं सर्वमान्य सहमति के आधार
पर लिया जाए।
चर्चा प्रारूप – 19
उपस्थित सदस्यों द्वारा प्रस्तावित विषय की
उपयोगिता, आवश्यकता एवं
दीर्घकालिक प्रभावों पर गंभीरतापूर्वक विचार किया गया तथा अनेक महत्वपूर्ण सुझाव
प्रस्तुत किए गए।
चर्चा प्रारूप – 20
चर्चा के दौरान यह विशेष रूप से सुनिश्चित किया
गया कि प्रत्येक सदस्य को बिना किसी भेदभाव के अपना अभिमत व्यक्त करने का अवसर
प्राप्त हो तथा प्राप्त प्रत्येक सुझाव को निष्पक्ष रूप से अभिलेखित किया जाए।
चर्चा शैली–21
चर्चा के दौरान उपस्थित सदस्यों द्वारा विषय के
संबंध में स्थानीय परिस्थितियों, उपलब्ध संसाधनों, पूर्व अनुभवों एवं वर्तमान आवश्यकताओं के आधार
पर अपने-अपने विचार प्रस्तुत किए गए। प्राप्त सभी सुझावों का क्रमवार परीक्षण करते
हुए विषय के प्रत्येक पहलू पर विस्तारपूर्वक विचार किया गया।
चर्चा शैली–22
उपस्थित सदस्यों द्वारा यह मत व्यक्त किया गया
कि किसी भी निर्णय से पूर्व विषय की व्यवहारिक उपयोगिता, संभावित लाभ, वित्तीय
उपलब्धता तथा दीर्घकालिक प्रभावों का समुचित परीक्षण किया जाना आवश्यक है। इस
संबंध में प्राप्त सभी अभिमतों का विधिवत अभिलेखीकरण किया गया।
चर्चा शैली–23
ग्राम सभा में उपस्थित सदस्यों ने इस बात पर
विशेष बल दिया कि प्रस्तावित विषय का क्रियान्वयन पूर्ण पारदर्शिता, गुणवत्ता एवं
उत्तरदायित्व के साथ किया जाना चाहिए। इस संबंध में अनेक महत्वपूर्ण सुझाव
प्रस्तुत किए गए, जिनका समुचित परीक्षण किया गया।
चर्चा शैली–24
विस्तृत विचार-विमर्श के दौरान यह तथ्य उभरकर
सामने आया कि प्रस्तुत विषय ग्राम पंचायत क्षेत्र के अधिकांश ग्रामीणों के हितों
से प्रत्यक्ष रूप से संबंधित है। अतः विषय पर निर्णय लेते समय व्यापक जनहित को
सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान किए जाने पर सहमति व्यक्त की गई।
चर्चा शैली–25
उपस्थित सदस्यों द्वारा यह सुझाव प्रस्तुत किया
गया कि प्रस्ताव के क्रियान्वयन से पूर्व आवश्यक प्रशासनिक, तकनीकी एवं वित्तीय
औपचारिकताओं का पूर्ण परीक्षण कर लिया जाए, जिससे भविष्य में किसी
प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो।
चर्चा शैली–26
चर्चा के दौरान यह भी विचार किया गया कि
प्रस्तावित विषय का प्रभाव केवल वर्तमान समय तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य
में ग्राम पंचायत क्षेत्र के विकास, सार्वजनिक सुविधाओं एवं संसाधनों के समुचित
उपयोग पर भी पड़ेगा। इस दृष्टि से विषय का विस्तृत परीक्षण किया गया।
चर्चा शैली–27
अनेक सदस्यों द्वारा सुझाव दिया गया कि निर्णय
लेते समय ग्राम पंचायत की उपलब्ध वित्तीय क्षमता, मानव संसाधन, तकनीकी सहयोग
तथा रखरखाव की भावी व्यवस्था को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। ग्राम सभा द्वारा इस
सुझाव का समर्थन करते हुए इसे महत्वपूर्ण माना गया।
चर्चा शैली–28
ग्राम सभा में यह अभिमत व्यक्त किया गया कि किसी
भी निर्णय का उद्देश्य केवल वर्तमान समस्या का समाधान नहीं होना चाहिए, बल्कि
दीर्घकालीन जनहित एवं सतत विकास को भी सुनिश्चित करना चाहिए। इस आधार पर विषय पर
गंभीरतापूर्वक विचार किया गया।
चर्चा शैली–29
उपस्थित ग्रामीणों द्वारा स्थानीय अनुभवों के
आधार पर अनेक व्यवहारिक सुझाव प्रस्तुत किए गए। ग्राम सभा ने इन सुझावों का स्वागत
करते हुए उन्हें विषय के मूल्यांकन में महत्वपूर्ण आधार माना।
चर्चा शैली–30
अध्यक्ष महोदय द्वारा चर्चा के दौरान समय-समय पर
प्राप्त सुझावों का सार प्रस्तुत किया गया तथा यह सुनिश्चित किया गया कि
विचार-विमर्श केवल तथ्यात्मक, विषय-केंद्रित एवं जनहितपरक रहे।
चर्चा को प्रभावशाली बनाने वाले वाक्य
इन वाक्यों को चर्चा के बीच-बीच में जोड़ने से
कार्यवाही का स्तर काफी ऊँचा हो जाता है—
- विषय के प्रत्येक पहलू पर क्रमबद्ध विचार किया गया।
- प्राप्त सुझावों का समग्र परीक्षण किया गया।
- उपलब्ध तथ्यों के आलोक में चर्चा आगे बढ़ाई गई।
- स्थानीय परिस्थितियों को विशेष रूप से ध्यान में रखा
गया।
- ग्रामवासियों की अपेक्षाओं का सम्मान करते हुए विचार
किया गया।
- विषय के अल्पकालिक एवं दीर्घकालिक प्रभावों का
मूल्यांकन किया गया।
- संभावित लाभ एवं व्यवहारिक चुनौतियों का तुलनात्मक
परीक्षण किया गया।
- जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान करते हुए चर्चा
की गई।
- निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता एवं सहभागिता
सुनिश्चित की गई।
- प्राप्त प्रत्येक अभिमत का विधिवत संज्ञान लिया गया।
- चर्चा के दौरान प्रस्तुत तथ्यों का अभिलेखीकरण किया
गया।
- ग्राम पंचायत क्षेत्र के समग्र हित को दृष्टिगत रखते
हुए विचार किया गया।
- विषय के प्रशासनिक औचित्य का परीक्षण किया गया।
- उपलब्ध संसाधनों एवं वित्तीय स्थिति पर भी विचार किया
गया।
- व्यापक सहमति विकसित करने का प्रयास किया गया।
✍️ ड्राफ्टिंग नोट
एक ही कार्यवाही में यदि 20 प्रस्ताव हैं,
तो प्रत्येक
में "विस्तृत विचार-विमर्श किया गया" लिखने के बजाय
अलग-अलग अभिव्यक्तियों का प्रयोग करें। उदाहरण के लिए—
- समग्र परीक्षण किया गया।
- क्रमबद्ध विचार किया गया।
- विभिन्न पक्षों का मूल्यांकन किया गया।
- विषय का गहन परीक्षण किया गया।
- प्राप्त सुझावों का विश्लेषण किया गया।
- उपलब्ध तथ्यों की समीक्षा की गई।
- विषय पर व्यापक चर्चा हुई।
- प्रशासनिक एवं व्यवहारिक पक्षों पर विचार किया गया।
- जनहित के परिप्रेक्ष्य में परीक्षण किया गया।
- सामूहिक अभिमत विकसित किया गया।
यही विविधता कार्यवाही को पेशेवर और स्वाभाविक
बनाती है।
38. विषय को मजबूत बनाने वाले
सरकारी अनुच्छेद
अनुच्छेद–1
ग्राम सभा ने यह अनुभव किया कि विषय के संबंध
में प्राप्त सुझाव केवल व्यक्तिगत मत न होकर ग्राम पंचायत क्षेत्र की वास्तविक
आवश्यकताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। अतः प्राप्त अभिमतों को निर्णय प्रक्रिया
में समुचित महत्व प्रदान किया गया तथा उनके आधार पर विषय का समग्र परीक्षण किया
गया।
अनुच्छेद–2
चर्चा के दौरान यह विशेष रूप से स्पष्ट हुआ कि
प्रस्तुत विषय का संबंध ग्राम पंचायत क्षेत्र की आधारभूत आवश्यकताओं, सार्वजनिक
सुविधाओं एवं ग्रामीणों के दैनिक जीवन से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ा हुआ है। इस कारण
ग्राम सभा द्वारा विषय पर सामान्य चर्चा के स्थान पर विस्तृत एवं तथ्याधारित
विचार-विमर्श किया गया।
अनुच्छेद–3
ग्राम सभा द्वारा यह भी विचार किया गया कि
प्रस्तावित निर्णय भविष्य में ग्राम पंचायत के प्रशासनिक दायित्वों, वित्तीय
प्रबंधन एवं विकास योजनाओं को प्रभावित करेगा। अतः निर्णय लेने से पूर्व विषय के
प्रत्येक पक्ष का संतुलित एवं निष्पक्ष परीक्षण किया गया।
अनुच्छेद–4
प्राप्त सुझावों का परीक्षण करते समय यह विशेष
ध्यान रखा गया कि किसी भी निर्णय से ग्राम पंचायत क्षेत्र के किसी वर्ग, समुदाय अथवा
वार्ड के हित प्रभावित न हों। सभी पक्षों के हितों का समुचित संतुलन स्थापित करते
हुए विषय पर विचार किया गया।
अनुच्छेद–5
विस्तृत विचार-विमर्श के उपरांत ग्राम सभा इस
निष्कर्ष पर पहुँची कि विषय पर लिया जाने वाला निर्णय केवल प्रशासनिक औपचारिकता
नहीं है, बल्कि ग्राम
पंचायत क्षेत्र के समग्र विकास एवं जनकल्याण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध
होगा।
39. चर्चा समाप्त करने की
सरकारी भाषा
निर्णय से पहले चर्चा का समापन भी अच्छी भाषा
में होना चाहिए।
प्रारूप–1
विस्तृत विचार-विमर्श उपरांत यह अनुभव किया गया
कि विषय के संबंध में आवश्यक तथ्यों एवं सुझावों पर पर्याप्त विचार किया जा चुका
है। अतः अध्यक्ष महोदय द्वारा चर्चा समाप्त करते हुए निर्णय की प्रक्रिया प्रारम्भ
करने की अनुमति प्रदान की गई।
प्रारूप–2
जब यह सुनिश्चित हो गया कि उपस्थित सभी इच्छुक
सदस्यों को अपने विचार प्रस्तुत करने का पर्याप्त अवसर प्राप्त हो चुका है,
तब अध्यक्ष
महोदय द्वारा चर्चा समाप्त घोषित की गई।
प्रारूप–3
प्राप्त समस्त अभिमतों, सुझावों एवं उपलब्ध तथ्यों
का समग्र परीक्षण किए जाने के पश्चात ग्राम सभा द्वारा चर्चा का समापन करते हुए
निर्णय की कार्यवाही प्रारम्भ की गई।
प्रारूप–4
विषय के प्रत्येक पक्ष पर पर्याप्त विचार किए
जाने के उपरांत अध्यक्ष महोदय द्वारा यह घोषित किया गया कि अब निर्णय लिए जाने
हेतु ग्राम सभा तैयार है।
प्रारूप–5
ग्राम सभा द्वारा यह संतोष व्यक्त किया गया कि
विषय पर पर्याप्त विचार-विमर्श किया जा चुका है तथा अब निर्णय लिए जाने में कोई
तथ्यात्मक बाधा शेष नहीं है।
📘 लेखक टिप्पणी
याद रखिए—
एक अनुभवी पंचायत सचिव कभी नहीं लिखता—
"फिर निर्णय लिया गया।"
वह पहले यह लिखता है कि—
- चर्चा पूरी हुई,
- सभी को अवसर मिला,
- सुझावों का परीक्षण हुआ,
- तथ्यों का मूल्यांकन हुआ,
और उसके बाद ही निर्णय लिखता है।
यही क्रम कार्यवाही को सरकारी,
मजबूत और
ऑडिट-योग्य बनाता है।
40. निर्णय लेखन की 50 सरकारी शैलियाँ
(Decision Language Bank – Part 1)
ड्राफ्टिंग सिद्धांत
ग्राम सभा की कार्यवाही में सबसे अधिक दोहराया
जाने वाला वाक्य होता है—
"प्रस्ताव सर्वसम्मति से
पारित किया गया।"
यदि एक ही कार्यवाही में 25 प्रस्ताव हैं
और सभी में यही वाक्य लिखा जाए तो पूरी कार्यवाही एक जैसी दिखाई देती है।
निर्णय शैली–1
उपस्थित सदस्यों द्वारा व्यक्त अभिमतों, प्राप्त
सुझावों एवं उपलब्ध अभिलेखों के समग्र परीक्षण के उपरांत ग्राम सभा द्वारा
प्रस्तुत प्रस्ताव का सर्वसम्मति से अनुमोदन करते हुए नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही
सुनिश्चित करने का निर्णय लिया गया।
निर्णय शैली–2
ग्राम सभा द्वारा विषय के समस्त पहलुओं पर
विस्तारपूर्वक विचार करने के पश्चात यह निष्कर्ष निकाला गया कि प्रस्तुत प्रस्ताव
जनहित में उपयुक्त एवं आवश्यक है। फलस्वरूप प्रस्ताव को सर्वसम्मति से स्वीकृति
प्रदान की गई।
निर्णय शैली–3
विस्तृत विचार-विमर्श के दौरान प्राप्त सुझावों
का समुचित परीक्षण किए जाने के उपरांत ग्राम सभा द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव का
अनुमोदन करते हुए आवश्यक प्रशासनिक कार्यवाही प्रारम्भ करने का निर्णय लिया गया।
निर्णय शैली–4
उपस्थित सदस्यों द्वारा व्यक्त सामूहिक अभिमत के
आधार पर यह निर्णय लिया गया कि प्रस्तावित विषय ग्राम पंचायत क्षेत्र के विकास एवं
सार्वजनिक हित की दृष्टि से उपयुक्त है। अतः प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित किया
गया।
निर्णय शैली–5
ग्राम सभा द्वारा उपलब्ध अभिलेखों, स्थानीय
परिस्थितियों एवं वर्तमान आवश्यकताओं का परीक्षण करने के पश्चात प्रस्ताव को
स्वीकार करते हुए आवश्यक अनुपालन सुनिश्चित किए जाने का निर्णय लिया गया।
निर्णय शैली–6
विषय के संबंध में प्राप्त तथ्यों, प्रस्तुत
सुझावों एवं विस्तृत विचार-विमर्श के आधार पर ग्राम सभा द्वारा प्रस्ताव को
अनुमोदित करते हुए ग्राम पंचायत को आवश्यक कार्यवाही करने हेतु अधिकृत किया गया।
निर्णय शैली–7
ग्राम सभा द्वारा यह अनुभव किया गया कि प्रस्तुत
प्रस्ताव ग्राम पंचायत क्षेत्र के समग्र हित में है। इस आधार पर प्रस्ताव को
सर्वानुमति से स्वीकार करते हुए आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया पूर्ण करने का निर्णय
लिया गया।
निर्णय शैली–8
उपस्थित सदस्यों द्वारा विषय के संबंध में पूर्ण
सहमति व्यक्त किए जाने के फलस्वरूप अध्यक्ष महोदय द्वारा प्रस्ताव को सर्वसम्मति
से पारित घोषित किया गया।
निर्णय शैली–9
ग्राम सभा ने उपलब्ध तथ्यों एवं प्राप्त सुझावों
का समुचित मूल्यांकन करने के उपरांत यह निर्णय लिया कि प्रस्ताव का क्रियान्वयन
नियमानुसार किया जाना जनहित में होगा। अतः प्रस्ताव अनुमोदित किया गया।
निर्णय शैली–10
चर्चा के दौरान व्यक्त अभिमतों एवं प्राप्त
सुझावों के आधार पर यह पाया गया कि प्रस्ताव प्रशासनिक, व्यवहारिक एवं वित्तीय
दृष्टि से उपयुक्त है। फलस्वरूप प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गई।
निर्णय शैली–11
ग्राम सभा ने सर्वसम्मत अभिमत व्यक्त करते हुए
प्रस्ताव के समर्थन में निर्णय लिया तथा कार्यवाही को नियमानुसार आगे बढ़ाने हेतु
ग्राम पंचायत को निर्देशित किया।
निर्णय शैली–12
विस्तृत विचार-विमर्श एवं उपलब्ध तथ्यों के
परीक्षण के उपरांत अध्यक्ष महोदय द्वारा प्रस्ताव को निर्णयार्थ प्रस्तुत किया गया,
जिस पर ग्राम
सभा ने सर्वसम्मति से अपनी स्वीकृति प्रदान की।
निर्णय शैली–13
ग्राम सभा द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव का परीक्षण
करने के पश्चात यह पाया गया कि इसके क्रियान्वयन से ग्राम पंचायत क्षेत्र को
व्यापक लाभ प्राप्त होगा। अतः प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया।
निर्णय शैली–14
प्रस्तुत विषय के संबंध में प्राप्त अभिमतों के
आधार पर ग्राम सभा ने यह निर्णय लिया कि प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए आवश्यक
कार्यवाही निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पूर्ण की जाए।
निर्णय शैली–15
ग्राम सभा द्वारा सर्वसम्मति से यह निर्णय
अभिलेखित किया गया कि प्रस्तावित कार्य को प्राथमिकता के आधार पर संपादित किया जाए
तथा प्रगति की समीक्षा समय-समय पर की जाए।
निर्णय शैली–16
उपस्थित सदस्यों द्वारा किसी प्रकार की आपत्ति
व्यक्त न किए जाने के कारण अध्यक्ष महोदय द्वारा प्रस्ताव को सर्वसम्मति से
अनुमोदित घोषित किया गया।
निर्णय शैली–17
प्रस्तुत विषय पर प्राप्त सभी सुझावों एवं
तथ्यों का परीक्षण करने के उपरांत ग्राम सभा ने प्रस्ताव के समर्थन में अपना
सामूहिक अभिमत व्यक्त किया तथा आवश्यक कार्यवाही करने का निर्णय लिया।
निर्णय शैली–18
ग्राम सभा द्वारा यह माना गया कि प्रस्तावित
विषय ग्राम पंचायत क्षेत्र की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप है। अतः प्रस्ताव को
स्वीकृति प्रदान करते हुए नियमानुसार कार्यवाही सुनिश्चित करने का निर्णय लिया
गया।
निर्णय शैली–19
चर्चा के उपरांत ग्राम सभा ने यह निष्कर्ष
निकाला कि प्रस्ताव के संबंध में पर्याप्त विचार किया जा चुका है। फलस्वरूप
प्रस्ताव को सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया।
निर्णय शैली–20
विषय के विभिन्न पहलुओं पर गंभीरतापूर्वक विचार
करने के उपरांत ग्राम सभा ने प्रस्ताव को अनुमोदित करते हुए संबंधित अधिकारियों को
आवश्यक कार्यवाही हेतु निर्देशित किया।
📌 निर्णय लिखने में प्रयोग
होने वाले शक्तिशाली सरकारी शब्द
"निर्णय लिया गया" की
जगह लिखें—
- निर्णय अभिलेखित किया गया।
- स्वीकृति प्रदान की गई।
- अनुमोदन किया गया।
- सर्वसम्मत अभिमत व्यक्त किया गया।
- स्वीकार किया गया।
- अनुमोदन प्रदान किया गया।
- पारित घोषित किया गया।
- अंगीकृत किया गया।
- समर्थन प्रदान किया गया।
- औपचारिक स्वीकृति प्रदान की गई।
- स्वीकारोक्ति व्यक्त की गई।
- निर्णय की पुष्टि की गई।
- अनुमोदन अभिलेखित किया गया।
- संस्तुति की गई।
- अनुशंसा की गई।
- क्रियान्वयन का निर्णय लिया गया।
- कार्यवाही प्रारम्भ करने का निर्णय लिया गया।
- कार्यान्वयन हेतु अधिकृत किया गया।
- प्रशासनिक कार्यवाही सुनिश्चित करने का निर्णय लिया
गया।
- आवश्यक प्रक्रिया पूर्ण करने का निर्णय लिया गया।
निर्णय शैली–21
विस्तृत विचार-विमर्श, प्राप्त अभिमतों, उपलब्ध
अभिलेखों के परीक्षण तथा स्थानीय परिस्थितियों के समग्र मूल्यांकन के उपरांत ग्राम
सभा द्वारा यह सर्वसम्मत अभिमत व्यक्त किया गया कि प्रस्तुत प्रस्ताव ग्राम पंचायत
क्षेत्र के व्यापक जनहित में है। अतः प्रस्ताव का अनुमोदन करते हुए नियमानुसार
आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित किए जाने का निर्णय लिया गया।
निर्णय शैली–22
ग्राम सभा द्वारा विषय के प्रशासनिक, वित्तीय,
सामाजिक एवं
व्यवहारिक पक्षों का पृथक-पृथक परीक्षण करने के पश्चात यह निष्कर्ष निकाला गया कि
प्रस्ताव का क्रियान्वयन ग्राम पंचायत क्षेत्र के विकास की दृष्टि से उपयुक्त एवं
औचित्यपूर्ण होगा। फलस्वरूप प्रस्ताव को सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया।
निर्णय शैली–23
प्रस्तुत विषय के संबंध में व्यक्त किए गए समस्त
सुझावों, आपत्तियों एवं
स्पष्टीकरणों का परीक्षण करने के उपरांत ग्राम सभा इस निष्कर्ष पर पहुँची कि
प्रस्ताव में किसी प्रकार के संशोधन की आवश्यकता नहीं है। अतः मूल प्रस्ताव को
यथावत स्वीकृति प्रदान की गई।
निर्णय शैली–24
ग्राम सभा ने उपलब्ध तथ्यों एवं प्रस्तुत
अभिमतों का समग्र परीक्षण करने के पश्चात यह निर्णय लिया कि प्रस्ताव के
क्रियान्वयन से ग्राम पंचायत क्षेत्र में जनसुविधाओं का विस्तार होगा तथा
ग्रामीणों को प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त होगा। इस आधार पर प्रस्ताव को सर्वसम्मति से
अनुमोदित किया गया।
निर्णय शैली–25
विस्तृत विचार-विमर्श के दौरान किसी भी सदस्य
द्वारा प्रस्ताव के संबंध में कोई औपचारिक आपत्ति प्रस्तुत नहीं की गई। फलस्वरूप
अध्यक्ष महोदय द्वारा प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित घोषित करते हुए आवश्यक
कार्यवाही प्रारम्भ करने के निर्देश प्रदान किए गए।
निर्णय शैली–26
ग्राम सभा ने यह माना कि प्रस्तुत विषय पर
पर्याप्त विचार किया जा चुका है तथा निर्णय लेने के लिए आवश्यक समस्त तथ्य उपलब्ध
हैं। अतः प्रस्ताव का अनुमोदन करते हुए नियमानुसार आगे की कार्यवाही सुनिश्चित
करने का निर्णय लिया गया।
निर्णय शैली–27
ग्राम पंचायत क्षेत्र की वर्तमान आवश्यकताओं,
उपलब्ध
संसाधनों एवं भावी विकास योजनाओं को दृष्टिगत रखते हुए ग्राम सभा ने प्रस्ताव को
उपयुक्त पाया तथा उसके प्रभावी क्रियान्वयन हेतु सर्वसम्मति से स्वीकृति प्रदान
की।
निर्णय शैली–28
उपस्थित सदस्यों द्वारा व्यक्त सामूहिक अभिमत,
स्थानीय
परिस्थितियों के मूल्यांकन एवं सार्वजनिक हित के व्यापक दृष्टिकोण को आधार बनाते
हुए ग्राम सभा द्वारा प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया।
निर्णय शैली–29
ग्राम सभा ने यह अनुभव किया कि प्रस्तुत
प्रस्ताव केवल वर्तमान आवश्यकता की पूर्ति तक सीमित न होकर भविष्य में ग्राम
पंचायत क्षेत्र के विकास एवं संसाधनों के समुचित उपयोग में भी सहायक सिद्ध होगा।
इस आधार पर प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गई।
निर्णय शैली–30
चर्चा के दौरान प्रस्तुत सुझावों एवं उपलब्ध
तथ्यों का सम्यक् परीक्षण करने के पश्चात ग्राम सभा द्वारा प्रस्ताव का समर्थन
करते हुए इसे नियमानुसार क्रियान्वित किए जाने का निर्णय लिया गया।
निर्णय शैली–31
विषय के समस्त तथ्यों, उपलब्ध अभिलेखों एवं
प्राप्त अभिमतों के विश्लेषण के उपरांत ग्राम सभा द्वारा यह अभिमत व्यक्त किया गया
कि प्रस्ताव प्रशासनिक दृष्टि से पूर्णतः स्वीकार्य है। अतः प्रस्ताव को अनुमोदित
किया गया।
निर्णय शैली–32
ग्राम सभा द्वारा यह निर्णय लिया गया कि
प्रस्ताव का क्रियान्वयन पूर्ण पारदर्शिता, गुणवत्ता, उत्तरदायित्व
एवं समयबद्धता के साथ सुनिश्चित किया जाएगा तथा प्रत्येक चरण का अभिलेखीकरण किया
जाएगा।
निर्णय शैली–33
विस्तृत विचार-विमर्श के उपरांत अध्यक्ष महोदय
ने प्रस्ताव को निर्णयार्थ प्रस्तुत किया। उपस्थित सदस्यों द्वारा सर्वसम्मति से
समर्थन व्यक्त किए जाने के फलस्वरूप प्रस्ताव पारित किया गया।
निर्णय शैली–34
ग्राम सभा द्वारा यह संतोष व्यक्त किया गया कि
प्रस्ताव से संबंधित सभी आवश्यक बिंदुओं पर पर्याप्त विचार हो चुका है। फलस्वरूप
प्रस्ताव को सर्वसम्मति से स्वीकृति प्रदान करते हुए आगे की कार्यवाही करने का
निर्णय लिया गया।
निर्णय शैली–35
उपस्थित सदस्यों द्वारा व्यक्त अभिमतों के आधार
पर यह पाया गया कि प्रस्ताव का क्रियान्वयन ग्राम पंचायत क्षेत्र के हित में होगा।
अतः प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया पूर्ण करने के
निर्देश दिए गए।
निर्णय शैली–36
प्रस्ताव के समर्थन में प्राप्त व्यापक सहमति को
दृष्टिगत रखते हुए ग्राम सभा द्वारा निर्णय लिया गया कि कार्य के क्रियान्वयन हेतु
आवश्यक समस्त औपचारिकताएँ निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पूर्ण की जाएँ।
निर्णय शैली–37
ग्राम सभा ने उपलब्ध अभिलेखों, प्राप्त
सुझावों एवं प्रशासनिक आवश्यकता का परीक्षण करने के उपरांत प्रस्ताव को सर्वसम्मति
से अंगीकृत किया तथा उसके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत को सौंपी।
निर्णय शैली–38
सार्वजनिक हित, स्थानीय आवश्यकता एवं
उपलब्ध संसाधनों के संतुलित मूल्यांकन के आधार पर ग्राम सभा द्वारा प्रस्ताव को
अनुमोदित करते हुए आवश्यक कार्यवाही प्रारम्भ करने का निर्णय लिया गया।
निर्णय शैली–39
विषय के संबंध में प्राप्त समस्त अभिमतों का
परीक्षण करने के पश्चात ग्राम सभा ने यह पाया कि प्रस्ताव पूर्णतः व्यवहारिक एवं
जनोपयोगी है। अतः प्रस्ताव को सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया।
निर्णय शैली–40
ग्राम सभा द्वारा प्रस्ताव के प्रत्येक पक्ष का
परीक्षण किए जाने के पश्चात यह निर्णय अभिलेखित किया गया कि विषय के संबंध में
नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई ग्राम पंचायत द्वारा प्राथमिकता के आधार पर की जाएगी।
निर्णय अनुच्छेद (Premium Style)
इन अनुच्छेदों को किसी भी निर्णय से पहले या बाद
में जोड़ा जा सकता है—
अनुच्छेद–1
ग्राम सभा द्वारा यह स्पष्ट किया गया कि
प्रस्ताव का क्रियान्वयन केवल नियमानुसार स्वीकृत प्रक्रिया के अंतर्गत ही किया
जाएगा तथा प्रत्येक स्तर पर पारदर्शिता, गुणवत्ता एवं उत्तरदायित्व सुनिश्चित किया
जाएगा।
अनुच्छेद–2
यह भी निर्णय लिया गया कि प्रस्ताव के
क्रियान्वयन के दौरान यदि किसी स्तर पर अतिरिक्त प्रशासनिक, तकनीकी अथवा वित्तीय
स्वीकृति की आवश्यकता होगी तो नियमानुसार संबंधित सक्षम प्राधिकारी से अनुमोदन
प्राप्त किया जाएगा।
अनुच्छेद–3
ग्राम सभा ने अपेक्षा व्यक्त की कि प्रस्ताव के
क्रियान्वयन में निर्धारित समय-सीमा का पालन करते हुए कार्य की गुणवत्ता एवं
सार्वजनिक हित को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान की जाएगी।
अनुच्छेद–4
प्रस्ताव के संबंध में की जाने वाली प्रत्येक
कार्यवाही का अभिलेखीकरण किया जाएगा तथा आवश्यकता पड़ने पर उसकी प्रगति ग्राम सभा
के समक्ष समीक्षा हेतु प्रस्तुत की जाएगी।
अनुच्छेद–5
ग्राम सभा ने यह विश्वास व्यक्त किया कि
प्रस्ताव के प्रभावी क्रियान्वयन से ग्राम पंचायत क्षेत्र के विकास, जनसुविधाओं के
विस्तार तथा प्रशासनिक दक्षता में सकारात्मक वृद्धि होगी।
✍️ ड्राफ्टिंग सिद्धांत
एक उत्कृष्ट
निर्णय केवल "स्वीकृत किया
गया" पर समाप्त नहीं होता।
उसमें निम्न तत्व दिखाई देने चाहिए—
- निर्णय का आधार
- ग्राम सभा का सामूहिक अभिमत
- प्रशासनिक औचित्य
- जनहित
- उत्तरदायित्व
- अनुपालन
- भविष्य की समीक्षा
यही भाषा साधारण कार्यवाही को उच्च स्तरीय
सरकारी दस्तावेज़ का स्वरूप प्रदान करती है।
42. प्रस्ताव में तर्क (Reasoning)
लिखने की
सरकारी भाषा
विशेष टिप्पणी
राजस्थान की अधिकांश ग्राम सभा कार्यवाहियों में
केवल निर्णय लिखा जाता है, निर्णय का आधार
(Reasoning) नहीं लिखा जाता।
जबकि एक मजबूत अभिलेखीय कार्यवाही में निर्णय से
पहले यह स्पष्ट किया जाता है कि ग्राम सभा इस निर्णय तक
क्यों पहुँची।
यही भाग भविष्य में Audit, Inquiry, RTI एवं Court
के समय सबसे
अधिक उपयोगी सिद्ध होता है।
तर्क शैली–1
ग्राम सभा द्वारा यह अनुभव किया गया कि प्रस्तुत
विषय ग्राम पंचायत क्षेत्र की वर्तमान आवश्यकताओं से प्रत्यक्ष रूप से संबंधित है।
यदि विषय पर समय रहते निर्णय नहीं लिया जाता तो ग्रामवासियों को अनावश्यक
कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। अतः व्यापक जनहित को दृष्टिगत रखते हुए
प्रस्ताव का अनुमोदन आवश्यक समझा गया।
तर्क शैली–2
उपस्थित सदस्यों द्वारा व्यक्त अभिमतों से यह
स्पष्ट हुआ कि विषय की आवश्यकता केवल वर्तमान परिस्थितियों तक सीमित नहीं है,
बल्कि भविष्य
में भी ग्राम पंचायत क्षेत्र के विकास एवं जनसुविधाओं की दृष्टि से महत्वपूर्ण बनी
रहेगी। इस आधार पर प्रस्ताव स्वीकार किया गया।
तर्क शैली–3
ग्राम सभा द्वारा उपलब्ध अभिलेखों, स्थानीय
परिस्थितियों तथा प्राप्त सुझावों का परीक्षण करने के पश्चात यह पाया गया कि
प्रस्ताव प्रशासनिक, व्यवहारिक एवं जनहित की दृष्टि से पूर्णतः उपयुक्त है।
फलस्वरूप प्रस्ताव को अनुमोदित किया गया।
तर्क शैली–4
चर्चा के दौरान यह तथ्य उभरकर सामने आया कि
प्रस्तावित विषय का प्रभाव ग्राम पंचायत क्षेत्र के अधिकांश परिवारों पर पड़ने
वाला है। इस कारण विषय पर सकारात्मक निर्णय लिया जाना आवश्यक एवं औचित्यपूर्ण पाया
गया।
तर्क शैली–5
ग्राम सभा ने यह मत व्यक्त किया कि यदि प्रस्ताव
का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाता है तो ग्राम पंचायत क्षेत्र की
आधारभूत सुविधाओं में उल्लेखनीय सुधार होगा। अतः प्रस्ताव को स्वीकार किया गया।
तर्क शैली–6
प्राप्त सुझावों के परीक्षण से यह स्पष्ट हुआ कि
प्रस्ताव का क्रियान्वयन ग्रामीणों की लंबे समय से चली आ रही आवश्यकता की पूर्ति
करेगा। इस कारण प्रस्ताव के अनुमोदन पर सहमति व्यक्त की गई।
तर्क शैली–7
ग्राम सभा ने उपलब्ध संसाधनों, वित्तीय स्थिति
एवं प्रशासनिक क्षमता का मूल्यांकन करने के उपरांत यह निष्कर्ष निकाला कि प्रस्ताव
व्यवहारिक रूप से क्रियान्वित किया जा सकता है। फलस्वरूप प्रस्ताव का अनुमोदन किया
गया।
तर्क शैली–8
ग्राम सभा द्वारा यह भी विचार किया गया कि विषय
के संबंध में प्राप्त सुझावों का समुचित परीक्षण किए बिना निर्णय लिया जाना उचित
नहीं होगा। विस्तृत विचार-विमर्श के उपरांत प्रस्ताव का समर्थन किया गया।
तर्क शैली–9
ग्राम सभा ने यह अनुभव किया कि प्रस्ताव का
उद्देश्य किसी व्यक्तिगत हित की पूर्ति न होकर संपूर्ण ग्राम पंचायत क्षेत्र के
सार्वजनिक हित को बढ़ावा देना है। इस आधार पर प्रस्ताव को स्वीकार किया गया।
तर्क शैली–10
विषय के विभिन्न पहलुओं के परीक्षण से यह स्पष्ट
हुआ कि प्रस्तावित निर्णय वर्तमान परिस्थितियों में प्रशासनिक दृष्टि से आवश्यक,
वित्तीय दृष्टि
से संभव तथा ग्रामहित की दृष्टि से उपयुक्त है। अतः प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया।
43. निर्णय को कानूनी रूप से
मजबूत बनाने वाली भाषा
इन पंक्तियों को निर्णय से पहले या बाद में
जोड़ा जा सकता है।
प्रारूप–1
निर्णय लेते समय प्रचलित नियमों, शासन द्वारा
समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों तथा संबंधित अधिनियमों के प्रावधानों का ध्यान रखा
गया।
प्रारूप–2
ग्राम सभा द्वारा यह स्पष्ट किया गया कि
प्रस्ताव का क्रियान्वयन केवल नियमानुसार स्वीकृत प्रक्रिया का पालन करते हुए किया
जाएगा।
प्रारूप–3
यह निर्णय उपलब्ध अभिलेखों, प्रस्तुत
तथ्यों एवं ग्राम सभा में व्यक्त सामूहिक अभिमत के आधार पर लिया गया।
प्रारूप–4
यदि प्रस्ताव के क्रियान्वयन के दौरान सक्षम
प्राधिकारी की स्वीकृति अपेक्षित होगी तो नियमानुसार स्वीकृति प्राप्त किए जाने के
उपरांत ही आगे की कार्यवाही की जाएगी।
प्रारूप–5
ग्राम सभा ने यह निर्देशित किया कि प्रस्ताव के
क्रियान्वयन के प्रत्येक चरण का विधिवत अभिलेखीकरण एवं दस्तावेजीकरण सुनिश्चित
किया जाए।
44. प्रस्ताव को प्रशासनिक रूप
से मजबूत बनाने वाले अनुच्छेद
अनुच्छेद–1
ग्राम सभा ने अपेक्षा व्यक्त की कि प्रस्ताव के
क्रियान्वयन में पारदर्शिता, गुणवत्ता, समयबद्धता एवं वित्तीय अनुशासन का पूर्ण पालन किया जाएगा
तथा प्रत्येक स्तर पर उत्तरदायित्व सुनिश्चित किया जाएगा।
अनुच्छेद–2
ग्राम सभा द्वारा यह निर्देश दिया गया कि
प्रस्ताव से संबंधित समस्त अभिलेख सुरक्षित संधारित किए जाएँ तथा आवश्यकता पड़ने
पर निरीक्षण एवं परीक्षण हेतु उपलब्ध कराए जाएँ।
अनुच्छेद–3
निर्णय लिया गया कि कार्य के प्रत्येक चरण की
प्रगति का समय-समय पर परीक्षण किया जाएगा तथा यदि आवश्यक हुआ तो ग्राम सभा के
समक्ष समीक्षा प्रस्तुत की जाएगी।
अनुच्छेद–4
ग्राम सभा ने यह भी अपेक्षा व्यक्त की कि
प्रस्ताव के क्रियान्वयन में स्थानीय जनसहभागिता को प्रोत्साहित किया जाएगा तथा
कार्य के संबंध में आवश्यक जानकारी समय-समय पर सार्वजनिक की जाएगी।
अनुच्छेद–5
यह भी निर्णय लिया गया कि प्रस्ताव के संबंध में
भविष्य में उत्पन्न होने वाली आवश्यकताओं अथवा परिस्थितियों के अनुसार ग्राम सभा
द्वारा पुनः विचार किया जा सकेगा।
45. प्रस्ताव का अंतिम समापन (Premium
Closing Paragraph)
समापन–1
उपरोक्त विस्तृत विचार-विमर्श, उपलब्ध
अभिलेखों के परीक्षण, प्राप्त सुझावों के समुचित मूल्यांकन तथा ग्राम सभा द्वारा
व्यक्त सर्वसम्मत अभिमत के आधार पर प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया। अध्यक्ष महोदय
द्वारा निर्णय की पुष्टि करते हुए ग्राम पंचायत सचिव को निर्देशित किया गया कि
प्रस्ताव का विधिवत अभिलेखीकरण कर नियमानुसार आवश्यक अनुपालन कार्यवाही सुनिश्चित
करें।
समापन–2
इस प्रकार विषय के प्रत्येक प्रशासनिक, सामाजिक,
वित्तीय एवं
व्यवहारिक पक्ष पर पर्याप्त विचार करने के उपरांत ग्राम सभा द्वारा प्रस्ताव को
सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया तथा आवश्यक कार्यवाही निर्धारित प्रक्रिया के
अनुसार संपादित किए जाने का निर्णय अभिलेखित किया गया।
समापन–3
चूँकि विषय के संबंध में सभी आवश्यक तथ्यों पर
पर्याप्त विचार हो चुका था तथा किसी भी सदस्य द्वारा अतिरिक्त आपत्ति प्रस्तुत
नहीं की गई, इसलिए अध्यक्ष
महोदय ने प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित घोषित करते हुए विषय का समापन किया।
46. प्रस्ताव के बीच जोड़ने
वाले सरकारी वाक्य (Government Linking Sentence Bank – Part 1)
लेखक टिप्पणी
ग्राम सभा की कार्यवाही में सबसे बड़ी समस्या यह
होती है कि प्रत्येक अनुच्छेद अचानक समाप्त हो जाता है और अगला अनुच्छेद बिना किसी
प्रवाह के प्रारम्भ हो जाता है।
अनुभवी पंचायत सचिव कभी भी ऐसा नहीं लिखता।
वह प्रत्येक अनुच्छेद को अगले अनुच्छेद से
जोड़ने के लिए Linking Sentences का प्रयोग करता
है।
यही वाक्य पूरी कार्यवाही को साहित्यिक नहीं,
बल्कि सरकारी एवं
अभिलेखीय प्रवाह प्रदान करते हैं।
एक अनुच्छेद से दूसरे अनुच्छेद में जाने वाले
वाक्य
शैली–1
उक्त विवरण प्रस्तुत किए जाने के उपरांत विषय पर
उपस्थित सदस्यों द्वारा क्रमवार अपने विचार व्यक्त किए गए।
शैली–2
विषय की पृष्ठभूमि स्पष्ट किए जाने के पश्चात
अध्यक्ष महोदय द्वारा विस्तृत विचार-विमर्श प्रारम्भ करने की अनुमति प्रदान की गई।
शैली–3
सचिव द्वारा आवश्यक तथ्य प्रस्तुत किए जाने के
उपरांत ग्राम सभा का ध्यान विषय के व्यवहारिक पक्षों की ओर आकर्षित किया गया।
शैली–4
उक्त जानकारी से अवगत कराए जाने के पश्चात
उपस्थित सदस्यों द्वारा विषय पर अपने सुझाव प्रस्तुत किए गए।
शैली–5
विषय के संबंध में आवश्यक स्पष्टीकरण उपलब्ध
कराए जाने के बाद विस्तृत चर्चा प्रारम्भ हुई।
शैली–6
इसके उपरांत विषय के विभिन्न प्रशासनिक एवं
व्यवहारिक पक्षों पर क्रमवार विचार किया गया।
शैली–7
तत्पश्चात विषय पर उपस्थित सदस्यों द्वारा
क्रमशः अपने विचार एवं अभिमत प्रस्तुत किए गए।
शैली–8
इसके पश्चात अध्यक्ष महोदय द्वारा चर्चा को अगले
चरण में आगे बढ़ाया गया।
शैली–9
उक्त तथ्यों के आलोक में विषय का विस्तृत
परीक्षण किया गया।
शैली–10
उपलब्ध जानकारी के आधार पर विषय पर समग्र
विचार-विमर्श प्रारम्भ किया गया।
शैली–11
चर्चा के दौरान अनेक महत्वपूर्ण तथ्य ग्राम सभा
के संज्ञान में आए।
शैली–12
विचार-विमर्श के क्रम में विभिन्न सदस्यों
द्वारा व्यवहारिक सुझाव प्रस्तुत किए गए।
शैली–13
उपस्थित सदस्यों द्वारा विषय के विभिन्न आयामों
पर गंभीरतापूर्वक विचार किया गया।
शैली–14
ग्राम सभा ने विषय का परीक्षण केवल वर्तमान
परिस्थितियों तक सीमित न रखते हुए भविष्य की आवश्यकताओं के संदर्भ में भी किया।
शैली–15
इस संबंध में प्राप्त प्रत्येक सुझाव का क्रमवार
परीक्षण किया गया।
शैली–16
प्रस्तुत अभिमतों के आधार पर विषय का पुनः
मूल्यांकन किया गया।
शैली–17
चर्चा के दौरान उपलब्ध अभिलेखों का भी संदर्भ
लिया गया।
शैली–18
सचिव द्वारा आवश्यक तथ्यों का पुनः स्पष्टीकरण
प्रस्तुत किया गया।
शैली–19
विभिन्न सदस्यों द्वारा व्यक्त अभिमतों में
पर्याप्त समानता परिलक्षित हुई।
शैली–20
ग्राम सभा ने यह सुनिश्चित किया कि प्रत्येक
सुझाव पर निष्पक्ष रूप से विचार किया जाए।
शैली–21
उक्त तथ्यों को दृष्टिगत रखते हुए...
शैली–22
प्राप्त सुझावों के आलोक में...
शैली–23
स्थानीय परिस्थितियों के परिप्रेक्ष्य में...
शैली–24
उपलब्ध अभिलेखों के परीक्षण के आधार पर...
शैली–25
ग्राम पंचायत क्षेत्र की वर्तमान आवश्यकताओं को
ध्यान में रखते हुए...
शैली–26
सार्वजनिक हित को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान
करते हुए...
शैली–27
व्यापक जनहित के दृष्टिकोण से...
शैली–28
प्रस्तुत तथ्यों का समग्र मूल्यांकन करने के
पश्चात...
शैली–29
प्राप्त अभिमतों के सामूहिक विश्लेषण के
उपरांत...
शैली–30
विस्तृत विचार-विमर्श के परिणामस्वरूप...
शैली–31
जब यह सुनिश्चित हो गया कि विषय के प्रत्येक
पक्ष पर पर्याप्त विचार किया जा चुका है...
शैली–32
सभी इच्छुक सदस्यों को अपने विचार प्रस्तुत करने
का अवसर उपलब्ध हो जाने के उपरांत...
शैली–33
प्राप्त समस्त सुझावों एवं उपलब्ध तथ्यों का
परीक्षण करने के पश्चात...
शैली–34
विषय पर व्यापक सहमति स्थापित हो जाने के
फलस्वरूप...
शैली–35
किसी भी प्रकार की अतिरिक्त आपत्ति प्राप्त न
होने के कारण...
शैली–36
ग्राम सभा द्वारा व्यक्त सामूहिक अभिमत के आधार
पर...
शैली–37
समस्त पक्षों पर पर्याप्त विचार किए जाने के
पश्चात...
शैली–38
विषय के संबंध में संतोषजनक स्पष्टीकरण प्राप्त
हो जाने के उपरांत...
शैली–39
विस्तृत विचार-विमर्श पूर्ण होने पर...
शैली–40
अध्यक्ष महोदय द्वारा निर्णय की प्रक्रिया
प्रारम्भ करने की अनुमति प्रदान किए जाने पर...
शैली–41
निर्णय लिए जाने के उपरांत...
शैली–42
तत्संबंध में आगे यह निर्णय लिया गया कि...
शैली–43
साथ ही ग्राम सभा द्वारा यह भी निर्देशित किया
गया कि...
शैली–44
इसके अतिरिक्त यह भी सुनिश्चित किया गया कि...
शैली–45
आगे की कार्यवाही के संबंध में...
शैली–46
प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के उद्देश्य
से...
शैली–47
भविष्य में किसी प्रकार की कठिनाई उत्पन्न न हो,
इस उद्देश्य
से...
शैली–48
नियमानुसार आवश्यक प्रक्रिया पूर्ण करने हेतु...
शैली–49
प्रस्ताव के प्रभावी अनुपालन के दृष्टिगत...
शैली–50
कार्यवाही को आगे बढ़ाते हुए यह निर्णय लिया गया
कि...
47. ग्राम सभा में विचार व्यक्त
करने की सरकारी भाषा (Opinion Drafting Bank)
विशेष टिप्पणी
अधिकांश कार्यवाहियों में केवल लिखा जाता है—
"सदस्यों ने अपने विचार
रखे।"
लेकिन एक उच्च स्तरीय कार्यवाही में यह भी लिखा
जाता है कि विचार किस प्रकार व्यक्त किए गए, किन बिंदुओं पर
व्यक्त किए गए और उनका सार क्या था।
अभिमत शैली–1
उपस्थित सदस्यों द्वारा यह अभिमत व्यक्त किया
गया कि प्रस्तुत विषय ग्राम पंचायत क्षेत्र की वर्तमान आवश्यकताओं से प्रत्यक्ष
रूप से संबंधित है तथा इस पर समयबद्ध निर्णय लिया जाना आवश्यक है।
अभिमत शैली–2
ग्राम सभा में यह मत व्यक्त किया गया कि
प्रस्तावित विषय केवल वर्तमान समस्या के समाधान तक सीमित न रहकर भविष्य की
आवश्यकताओं को भी ध्यान में रखकर क्रियान्वित किया जाना चाहिए।
अभिमत शैली–3
अनेक सदस्यों द्वारा यह सुझाव प्रस्तुत किया गया
कि कार्य के क्रियान्वयन में पारदर्शिता, गुणवत्ता एवं वित्तीय अनुशासन को सर्वोच्च
प्राथमिकता प्रदान की जाए।
अभिमत शैली–4
उपस्थित सदस्यों ने यह विचार व्यक्त किया कि
ग्राम पंचायत द्वारा उपलब्ध संसाधनों का उपयोग जनहित को दृष्टिगत रखते हुए किया
जाना चाहिए।
अभिमत शैली–5
चर्चा के दौरान यह मत उभरकर सामने आया कि
प्रस्तावित विषय ग्राम पंचायत क्षेत्र के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम
सिद्ध होगा।
अभिमत शैली–6
सदस्यों द्वारा यह भी सुझाव दिया गया कि
प्रस्ताव के क्रियान्वयन से पूर्व आवश्यक प्रशासनिक एवं तकनीकी औपचारिकताएँ पूर्ण
कर ली जाएँ।
अभिमत शैली–7
उपस्थित ग्रामीणों ने अपने अनुभवों के आधार पर
विषय के समर्थन में विचार प्रस्तुत किए तथा अपेक्षा व्यक्त की कि कार्य का
निष्पादन गुणवत्तापूर्ण ढंग से किया जाए।
अभिमत शैली–8
ग्राम सभा द्वारा यह अनुभव किया गया कि विषय का
संबंध ग्राम पंचायत क्षेत्र के व्यापक जनहित से है, इसलिए निर्णय लेते समय सभी
वर्गों के हितों का समुचित ध्यान रखा जाना चाहिए।
अभिमत शैली–9
महिला सदस्यों द्वारा सुझाव दिया गया कि कार्य
के क्रियान्वयन में महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों एवं दिव्यांगजनों की आवश्यकताओं का भी
समुचित ध्यान रखा जाए।
अभिमत शैली–10
वरिष्ठ नागरिकों ने अपने अनुभवों के आधार पर यह
सुझाव प्रस्तुत किया कि कार्य के दीर्घकालिक रखरखाव की व्यवस्था भी पूर्व से
सुनिश्चित की जानी चाहिए।
48. अध्यक्ष महोदय की टिप्पणी
लिखने की भाषा
यह भाग अधिकांश कार्यवाहियों में नहीं लिखा जाता,
जबकि यह
कार्यवाही को अधिक स्वाभाविक और प्रभावशाली बनाता है।
प्रारूप–1
अध्यक्ष महोदय द्वारा सभी उपस्थित सदस्यों से
विषय पर निष्पक्ष एवं तथ्याधारित विचार प्रस्तुत करने का अनुरोध किया गया।
प्रारूप–2
अध्यक्ष महोदय ने स्पष्ट किया कि निर्णय केवल
व्यापक जनहित एवं ग्राम पंचायत क्षेत्र की वास्तविक आवश्यकताओं के आधार पर लिया
जाएगा।
प्रारूप–3
अध्यक्ष महोदय द्वारा सुझाव दिया गया कि विषय के
प्रत्येक पहलू का समुचित परीक्षण किए बिना कोई निर्णय न लिया जाए।
प्रारूप–4
अध्यक्ष महोदय ने सभी सदस्यों को आश्वस्त किया
कि प्रत्येक सुझाव एवं अभिमत का निष्पक्ष परीक्षण किया जाएगा।
प्रारूप–5
अध्यक्ष महोदय ने उपस्थित सदस्यों से आग्रह किया
कि चर्चा विषय-केंद्रित रहे तथा व्यक्तिगत टिप्पणियों से बचा जाए।
प्रारूप–6
अध्यक्ष महोदय ने कहा कि ग्राम सभा का प्रत्येक
निर्णय भविष्य का अभिलेख बनता है, इसलिए प्रत्येक सदस्य अपनी बात तथ्य एवं तर्क के आधार पर
प्रस्तुत करे।
प्रारूप–7
अध्यक्ष महोदय द्वारा यह अपेक्षा व्यक्त की गई
कि प्रस्ताव के संबंध में व्यक्त किए जाने वाले सभी सुझाव ग्राम पंचायत के समग्र
हित को ध्यान में रखकर दिए जाएँ।
प्रारूप–8
अध्यक्ष महोदय ने यह निर्देश दिया कि सभी
सदस्यों को अपनी बात रखने का समान अवसर प्रदान किया जाए।
प्रारूप–9
अध्यक्ष महोदय द्वारा प्राप्त सुझावों का
संक्षिप्त सार प्रस्तुत करते हुए चर्चा को अगले चरण में आगे बढ़ाया गया।
प्रारूप–10
अध्यक्ष महोदय ने यह संतोष व्यक्त किया कि विषय
पर गंभीर एवं सार्थक चर्चा हुई है, जिससे उचित निर्णय लेने में सुविधा होगी।
49. सचिव की टिप्पणी लिखने की
भाषा
प्रारूप–1
ग्राम पंचायत सचिव द्वारा विषय से संबंधित
आवश्यक तथ्य, उपलब्ध अभिलेख
एवं विभागीय दिशा-निर्देशों का क्रमवार विवरण प्रस्तुत किया गया।
प्रारूप–2
सचिव द्वारा सदस्यों द्वारा पूछे गए प्रश्नों का
तथ्यात्मक उत्तर प्रस्तुत किया गया।
प्रारूप–3
सचिव द्वारा स्पष्ट किया गया कि प्रस्ताव का
क्रियान्वयन प्रचलित नियमों एवं शासन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप किया जाएगा।
प्रारूप–4
सचिव द्वारा प्राप्त सभी सुझावों का विधिवत
अभिलेखीकरण किया गया।
प्रारूप–5
सचिव द्वारा यह भी अवगत कराया गया कि प्रस्ताव
से संबंधित समस्त अभिलेख निरीक्षण हेतु उपलब्ध हैं।
50. चर्चा के बीच प्रयोग होने
वाले छोटे लेकिन प्रभावशाली सरकारी वाक्य
- इस संबंध में विस्तृत चर्चा हुई।
- विषय पर पुनः विचार किया गया।
- सभी पहलुओं का परीक्षण किया गया।
- आवश्यक स्पष्टीकरण प्राप्त किया गया।
- प्राप्त सुझावों का परीक्षण किया गया।
- विषय पर सहमति व्यक्त की गई।
- प्राप्त अभिमतों का संज्ञान लिया गया।
- तथ्यों का मूल्यांकन किया गया।
- व्यवहारिक पक्षों पर विचार किया गया।
- प्रशासनिक दृष्टिकोण से परीक्षण किया गया।
- स्थानीय आवश्यकताओं का आकलन किया गया।
- सार्वजनिक हित को प्राथमिकता दी गई।
- उपलब्ध संसाधनों पर विचार किया गया।
- भविष्य की आवश्यकताओं का भी परीक्षण किया गया।
- गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन पर बल दिया गया।
- समयबद्ध कार्यवाही की आवश्यकता व्यक्त की गई।
- नियमानुसार कार्रवाई किए जाने पर सहमति व्यक्त की गई।
- पारदर्शिता बनाए रखने पर बल दिया गया।
- उत्तरदायित्व सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई गई।
- कार्य की नियमित समीक्षा करने का सुझाव दिया गया।
51. सर्वसम्मति व्यक्त करने की सरकारी शैलियाँ (Consensus
Language Bank – Part 1)
विशेष टिप्पणी
ग्राम सभा की कार्यवाही में सबसे अधिक दोहराया
जाने वाला वाक्य होता है—
"सर्वसम्मति से प्रस्ताव
पारित किया गया।"
यदि एक ही बैठक में 25 प्रस्ताव हों और प्रत्येक
प्रस्ताव में यही वाक्य लिखा जाए तो पूरी कार्यवाही कृत्रिम प्रतीत होती है।
एक अनुभवी पंचायत सचिव प्रत्येक प्रस्ताव में सहमति की भाषा
बदलता है।
सर्वसम्मति शैली–1
विषय पर विस्तृत विचार-विमर्श के उपरांत उपस्थित
समस्त सदस्यों द्वारा प्रस्ताव के समर्थन में अपना अभिमत व्यक्त किया गया।
सर्वसम्मति शैली–2
उपस्थित सदस्यों द्वारा किसी प्रकार की आपत्ति
व्यक्त नहीं किए जाने के कारण प्रस्ताव को सर्वसम्मत समर्थन प्राप्त हुआ।
सर्वसम्मति शैली–3
ग्राम सभा में उपस्थित सभी सदस्यों ने प्रस्ताव
के पक्ष में अपनी सहमति प्रदान की।
सर्वसम्मति शैली–4
प्रस्तुत विषय के संबंध में ग्राम सभा द्वारा
पूर्ण सहमति व्यक्त करते हुए प्रस्ताव को स्वीकार किया गया।
सर्वसम्मति शैली–5
सभी उपस्थित सदस्यों द्वारा प्रस्ताव का समर्थन
किए जाने के फलस्वरूप प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया।
सर्वसम्मति शैली–6
प्रस्तुत विषय पर ग्राम सभा में किसी भी प्रकार
का मतभेद अभिलेखित नहीं हुआ।
सर्वसम्मति शैली–7
ग्राम सभा ने सर्वमान्य सहमति के आधार पर
प्रस्ताव को स्वीकार किया।
सर्वसम्मति शैली–8
विषय के संबंध में व्यक्त समस्त अभिमत प्रस्ताव
के समर्थन में रहे।
सर्वसम्मति शैली–9
ग्राम सभा द्वारा सामूहिक सहमति व्यक्त करते हुए
प्रस्ताव को अंगीकृत किया गया।
सर्वसम्मति शैली–10
सभी उपस्थित सदस्यों द्वारा प्रस्ताव के समर्थन
में सकारात्मक मत व्यक्त किया गया।
सर्वसम्मति शैली–11
उपस्थित सदस्यों के बीच व्यापक सहमति स्थापित
होने के उपरांत प्रस्ताव को अनुमोदित किया गया।
सर्वसम्मति शैली–12
विस्तृत विचार-विमर्श के पश्चात ग्राम सभा
द्वारा सर्वानुमति से प्रस्ताव स्वीकार किया गया।
सर्वसम्मति शैली–13
ग्राम सभा में उपस्थित किसी भी सदस्य द्वारा
प्रस्ताव का विरोध नहीं किया गया।
सर्वसम्मति शैली–14
प्रस्ताव के समर्थन में व्यक्त सामूहिक अभिमत के
आधार पर निर्णय अभिलेखित किया गया।
सर्वसम्मति शैली–15
उपस्थित सदस्यों ने एक स्वर में प्रस्ताव का
समर्थन किया।
सर्वसम्मति शैली–16
ग्राम सभा द्वारा व्यक्त सर्वसम्मत अभिमत के
अनुरूप प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गई।
सर्वसम्मति शैली–17
विषय पर व्यापक सहमति बनने के पश्चात प्रस्ताव
का अनुमोदन किया गया।
सर्वसम्मति शैली–18
ग्राम सभा ने प्रस्ताव के संबंध में सर्वसम्मत
समर्थन व्यक्त करते हुए निर्णय लिया।
सर्वसम्मति शैली–19
सभी उपस्थित सदस्यों ने प्रस्ताव को स्वीकार
करने की सहमति प्रदान की।
सर्वसम्मति शैली–20
ग्राम सभा द्वारा प्रस्ताव को सर्वमान्य निर्णय
के रूप में स्वीकार किया गया।
सर्वसम्मति शैली–21
विस्तृत विचार-विमर्श के उपरांत यह स्पष्ट हुआ
कि प्रस्ताव के संबंध में सभी सदस्यों की सहमति प्राप्त है।
सर्वसम्मति शैली–22
उपस्थित सदस्यों द्वारा व्यक्त अभिमतों में
पर्याप्त समानता पाए जाने के कारण प्रस्ताव को सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया।
सर्वसम्मति शैली–23
ग्राम सभा द्वारा किसी प्रकार का विरोध दर्ज न
किए जाने के फलस्वरूप प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया।
सर्वसम्मति शैली–24
सभी उपस्थित सदस्यों ने प्रस्ताव के प्रति अपना
समर्थन व्यक्त किया तथा आवश्यक कार्यवाही किए जाने पर सहमति प्रदान की।
सर्वसम्मति शैली–25
सामूहिक विचार-विमर्श के परिणामस्वरूप प्रस्ताव
के पक्ष में सर्वसम्मत वातावरण निर्मित हुआ, जिसके आधार पर निर्णय लिया
गया।
52. सर्वसम्मति व्यक्त करने
वाले शक्तिशाली सरकारी शब्द
सिर्फ "सर्वसम्मति" शब्द पर निर्भर
मत रहिए।
इन शब्दों का भी उपयोग कीजिए—
- सर्वानुमति
- सर्वमान्य सहमति
- सामूहिक सहमति
- सामूहिक अभिमत
- सर्वस्वीकृति
- सर्वमान्य निर्णय
- एकमत समर्थन
- पूर्ण समर्थन
- सर्वस्वीकृत अभिमत
- सर्वमान्य अनुमोदन
- सर्वसहमति
- एकराय
- सर्वस्वीकृत निर्णय
- सामूहिक समर्थन
- व्यापक सहमति
- सर्वहितकारी निर्णय
- सर्वमान्य मत
- संयुक्त अभिमत
- सर्वसमर्थित प्रस्ताव
- सर्वानुकूल निर्णय
53. यदि सर्वसम्मति तुरंत न बनी
हो
यह भाषा अधिकांश सचिवों को नहीं आती।
प्रारूप–1
प्रारम्भिक चर्चा के दौरान कुछ बिंदुओं पर
भिन्न-भिन्न अभिमत व्यक्त किए गए। तथापि आवश्यक स्पष्टीकरण प्रस्तुत किए जाने एवं
विस्तृत विचार-विमर्श के उपरांत ग्राम सभा में सर्वसम्मति स्थापित हो गई।
प्रारूप–2
चर्चा के प्रारम्भिक चरण में कुछ सदस्यों द्वारा
वैकल्पिक सुझाव प्रस्तुत किए गए। प्राप्त सुझावों पर समुचित विचार करने के पश्चात
सभी सदस्य मूल प्रस्ताव के समर्थन में सहमत हुए।
प्रारूप–3
विषय पर पर्याप्त विचार-विमर्श एवं स्पष्टीकरण
के उपरांत सभी उपस्थित सदस्यों द्वारा प्रस्ताव का समर्थन किया गया।
प्रारूप–4
चर्चा के दौरान प्राप्त विभिन्न अभिमतों का
परीक्षण करने के पश्चात ग्राम सभा ने सर्वमान्य सहमति विकसित करते हुए प्रस्ताव
स्वीकार किया।
प्रारूप–5
अध्यक्ष महोदय द्वारा आवश्यक तथ्य स्पष्ट किए
जाने के पश्चात प्रस्ताव के संबंध में व्यक्त मतभेद समाप्त हो गए तथा ग्राम सभा ने
सर्वसम्मति से निर्णय लिया।
📘 ड्राफ्टिंग गुरु मंत्र
सर्वसम्मति केवल एक शब्द नहीं है।
एक अच्छी कार्यवाही में यह भी दिखाई देना चाहिए
कि—
- सहमति कैसे बनी,
- चर्चा के बाद बनी या पहले से थी,
- सुझावों के बाद बनी,
- स्पष्टीकरण के बाद बनी,
- या बिना किसी आपत्ति के बनी।
यही विवरण कार्यवाही को जीवंत, विश्वसनीय और
अभिलेखीय बनाता है।
52. सम्पूर्ण प्रस्ताव प्रारूप
(Premium Government Draft Bank)
प्रारूप–1 : अभिलेखीय शैली
अध्यक्ष महोदय की अनुमति प्राप्त होने के उपरांत
कार्यसूची के क्रमांक … पर अंकित विषय को ग्राम सभा के समक्ष विचारार्थ प्रस्तुत
किया गया। सचिव द्वारा विषय की पृष्ठभूमि, आवश्यकता, उपलब्ध अभिलेखों, स्थानीय
परिस्थितियों एवं प्राप्त सुझावों का क्रमवार विवरण प्रस्तुत किया गया। उपस्थित
सदस्यों द्वारा विषय के प्रशासनिक, सामाजिक एवं व्यवहारिक पक्षों पर विस्तारपूर्वक विचार किया
गया। प्राप्त सुझावों एवं उपलब्ध तथ्यों के परीक्षण के उपरांत ग्राम सभा ने यह
अभिमत व्यक्त किया कि प्रस्ताव ग्राम पंचायत क्षेत्र के व्यापक जनहित में है।
फलस्वरूप प्रस्ताव को सर्वसम्मति से अनुमोदित करते हुए नियमानुसार आवश्यक
कार्यवाही सुनिश्चित करने का निर्णय लिया गया तथा सचिव को निर्देशित किया गया कि
प्रस्ताव का विधिवत अभिलेखीकरण कर आवश्यक अनुपालन कार्यवाही प्रारम्भ करें।
प्रारूप–2 : निरीक्षण योग्य शैली
कार्यसूची के अनुसार विचारणीय विषय का विस्तृत
प्रतिवेदन ग्राम सभा के समक्ष प्रस्तुत किया गया। प्रतिवेदन में विषय की आवश्यकता,
उद्देश्य,
संभावित लाभ
एवं उपलब्ध संसाधनों का उल्लेख किया गया। अध्यक्ष महोदय द्वारा उपस्थित सदस्यों से
विषय पर अपने अभिमत प्रस्तुत करने का अनुरोध किया गया। विस्तृत विचार-विमर्श के
दौरान अनेक सुझाव प्राप्त हुए, जिनका क्रमवार परीक्षण किया गया। ग्राम सभा ने उपलब्ध
तथ्यों एवं सामूहिक अभिमत के आधार पर प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए निर्देशित किया
कि कार्यवाही प्रचलित नियमों एवं शासन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप संपादित की जाए
तथा प्रगति की समीक्षा आगामी ग्राम सभा में प्रस्तुत की जाए।
प्रारूप–3 : प्रशासनिक शैली
प्रस्तुत विषय ग्राम पंचायत क्षेत्र की वर्तमान
आवश्यकताओं एवं विकासात्मक प्राथमिकताओं से संबंधित होने के कारण विचारार्थ
प्रस्तुत किया गया। विषय पर पर्याप्त विचार-विमर्श के उपरांत ग्राम सभा इस
निष्कर्ष पर पहुँची कि प्रस्ताव का क्रियान्वयन जनहित में अपेक्षित है। अतः
प्रस्ताव को अनुमोदित करते हुए संबंधित अधिकारी को आवश्यक प्रशासनिक, तकनीकी एवं
वित्तीय औपचारिकताएँ पूर्ण करने हेतु निर्देशित किया गया।
53. सम्पूर्ण सरकारी प्रस्ताव
प्रारूप (Premium Draft Bank)
प्रारूप–01 : उच्च स्तरीय अभिलेखीय शैली
कार्यसूची के क्रमांक ........ पर अंकित विषय को
अध्यक्ष महोदय की अनुमति प्राप्त होने के उपरांत ग्राम सभा के समक्ष विचारार्थ
प्रस्तुत किया गया। ग्राम पंचायत सचिव द्वारा विषय की पृष्ठभूमि, उपलब्ध
अभिलेखों, प्राप्त
आवेदनों, स्थानीय
परिस्थितियों, पूर्व में किए गए पत्राचार तथा विषय की आवश्यकता का विस्तृत
विवरण प्रस्तुत किया गया। सचिव द्वारा यह भी अवगत कराया गया कि विषय का परीक्षण
उपलब्ध अभिलेखों एवं प्रचलित नियमों के अनुसार किया जा चुका है तथा ग्राम सभा का
निर्णय प्राप्त किया जाना अपेक्षित है।
उक्त विवरण के उपरांत अध्यक्ष महोदय द्वारा
उपस्थित सदस्यों से अनुरोध किया गया कि वे विषय के संबंध में अपने विचार, सुझाव एवं
अभिमत स्वतंत्र रूप से प्रस्तुत करें। चर्चा के दौरान अनेक सदस्यों द्वारा विषय की
प्रशासनिक आवश्यकता, ग्राम पंचायत क्षेत्र में उसकी उपयोगिता, भविष्य में
होने वाले संभावित लाभ तथा कार्य के प्रभावी क्रियान्वयन के संबंध में अपने विचार
व्यक्त किए गए। प्राप्त सभी सुझावों का क्रमवार परीक्षण किया गया तथा उपलब्ध
तथ्यों के साथ उनका तुलनात्मक मूल्यांकन किया गया।
विस्तृत विचार-विमर्श के उपरांत ग्राम सभा इस
निष्कर्ष पर पहुँची कि प्रस्तुत विषय ग्राम पंचायत क्षेत्र के व्यापक जनहित,
सार्वजनिक
सुविधा एवं दीर्घकालिक विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। ग्राम सभा द्वारा यह भी
अपेक्षा व्यक्त की गई कि कार्य के प्रत्येक चरण में गुणवत्ता, पारदर्शिता,
वित्तीय
अनुशासन तथा उत्तरदायित्व सुनिश्चित किया जाए।
उपस्थित किसी भी सदस्य द्वारा प्रस्ताव के संबंध
में कोई औपचारिक आपत्ति प्रस्तुत नहीं किए जाने के कारण अध्यक्ष महोदय द्वारा
प्रस्ताव को सर्वसम्मति से अनुमोदित घोषित किया गया। साथ ही ग्राम पंचायत सचिव को
निर्देशित किया गया कि प्रस्ताव का विधिवत अभिलेखीकरण कर नियमानुसार आवश्यक
प्रशासनिक, तकनीकी एवं
वित्तीय कार्यवाही सुनिश्चित करें तथा कार्य की प्रगति आगामी ग्राम सभा में
समीक्षा हेतु प्रस्तुत करें।
प्रारूप–02 : निरीक्षण एवं ऑडिट योग्य
शैली
निर्धारित कार्यसूची के अनुसार विचारणीय विषय को
ग्राम सभा के समक्ष प्रस्तुत किया गया। सचिव द्वारा विषय से संबंधित उपलब्ध समस्त
अभिलेख, प्राप्त आवेदन,
विभागीय
पत्राचार, पूर्व में लिए
गए निर्णय तथा वर्तमान प्रशासनिक स्थिति का संक्षिप्त प्रतिवेदन प्रस्तुत किया
गया। विषय की आवश्यकता एवं औचित्य स्पष्ट करते हुए बताया गया कि ग्राम पंचायत स्तर
पर प्राप्त सुझावों एवं उपलब्ध तथ्यों के परीक्षण के उपरांत इसे ग्राम सभा के
विचारार्थ रखा गया है।
अध्यक्ष महोदय द्वारा उपस्थित सदस्यों को विषय
के प्रत्येक पक्ष पर गंभीरतापूर्वक विचार करने का अनुरोध किया गया। चर्चा के दौरान
ग्राम पंचायत क्षेत्र की वर्तमान आवश्यकताओं, उपलब्ध संसाधनों, संभावित लाभों
एवं व्यवहारिक कठिनाइयों पर विस्तारपूर्वक विचार किया गया। अनेक सदस्यों द्वारा
उपयोगी सुझाव प्रस्तुत किए गए, जिन्हें ग्राम सभा द्वारा सकारात्मक दृष्टिकोण से स्वीकार
करते हुए उनका परीक्षण किया गया।
ग्राम सभा द्वारा यह पाया गया कि विषय का
क्रियान्वयन ग्राम पंचायत क्षेत्र के समग्र विकास एवं सार्वजनिक हित के अनुरूप
होगा। अतः प्रस्तुत प्रस्ताव को सर्वसम्मति से स्वीकृति प्रदान करते हुए निर्णय
लिया गया कि समस्त कार्यवाही प्रचलित नियमों, शासन के दिशा-निर्देशों एवं
सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी निर्देशों के अनुरूप संपादित की जाएगी।
साथ ही यह भी निर्देशित किया गया कि कार्य के
प्रत्येक चरण का अभिलेखीकरण किया जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर समस्त अभिलेख निरीक्षण
हेतु उपलब्ध कराए जाएँ। प्रस्ताव की प्रगति की समीक्षा आगामी ग्राम सभा में
प्रस्तुत की जाएगी।
प्रारूप–03 : विकास कार्यों के लिए
उपयुक्त शैली
ग्राम पंचायत क्षेत्र की वर्तमान विकासात्मक
आवश्यकताओं, ग्रामीणों
द्वारा समय-समय पर व्यक्त सुझावों तथा स्थानीय परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए
प्रस्तुत विषय को विचारार्थ रखा गया। सचिव द्वारा बताया गया कि विषय ग्राम पंचायत
क्षेत्र के समग्र विकास से संबंधित है तथा इसके क्रियान्वयन से ग्रामवासियों को
प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त होने की संभावना है।
अध्यक्ष महोदय द्वारा सभी सदस्यों से ग्रामहित
को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अपने विचार प्रस्तुत करने का अनुरोध किया गया।
चर्चा के दौरान विभिन्न वार्डों के प्रतिनिधियों द्वारा स्थानीय परिस्थितियों का
उल्लेख करते हुए अपने सुझाव दिए गए। महिला सदस्यों, वरिष्ठ नागरिकों एवं अन्य
उपस्थित ग्रामीणों द्वारा भी विषय के संबंध में अपने विचार व्यक्त किए गए। प्राप्त
समस्त सुझावों का समुचित परीक्षण किया गया।
विस्तृत विचार-विमर्श के पश्चात ग्राम सभा ने यह
अनुभव किया कि प्रस्तुत प्रस्ताव ग्राम पंचायत क्षेत्र के विकास, जनसुविधाओं के
विस्तार एवं ग्रामीणों के जीवन स्तर में सुधार हेतु आवश्यक है। फलस्वरूप प्रस्ताव
को सर्वसम्मति से स्वीकार करते हुए निर्णय लिया गया कि कार्य का क्रियान्वयन
निर्धारित प्रक्रिया, गुणवत्ता मानकों एवं वित्तीय अनुशासन के अनुरूप सुनिश्चित
किया जाए।
ग्राम पंचायत सचिव को निर्देशित किया गया कि
आवश्यक औपचारिकताएँ पूर्ण कर प्रस्ताव का अनुपालन सुनिश्चित करें तथा समय-समय पर
कार्य की प्रगति से ग्राम सभा को अवगत कराते रहें।
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