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इस दस्तावेज़ में अध्याय-9 (नियम 136 से नियम 173) के सभी कानूनी प्रावधान, उप-नियम, टिप्पणियाँ, विभागीय निर्देश, केस लॉ तथा फुटनोट्स पूरी तरह समाहित हैं ।
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996
अध्याय-9: स्थावर संपत्तियां
136. पंचायत की संपत्तियां.-
[(1) पंचायत सर्किल के भीतर कॉमन भूमियाँ और सार्वजनिक मार्ग उनके खंडजों, पत्थरों और अन्य सामग्री सहित के साथ ही आबादी क्षेत्र के भीतर आने वाली सभी सरकारी भूमियां पंचायत में निहित होंगी और उसकी होंगी । पंचायत सर्किल के भीतर की अन्य सभी सरकारी भूमियों का प्रबन्ध पंचायत द्वारा ऐसी शर्तों और निर्बन्धनों के अध्यधीन रहते हुए किया जायेगा, जो राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर अधिरोपित किये जाये [^1]।]
(2) राज्य सरकार, ऐसी शर्तों और निर्बन्धनों के अध्यधीन रहते हुए जिन्हें अधिरोपित करना वह ठीक समझे, राज्य सरकार की किन्हीं भी भूमि, संपत्तियों, संकर्मों, सामग्रियों और वस्तुओं को पंचायत में निहित कर सकेगी ।
(3) उप-धारा (1) और (2) में उल्लिखित सभी संपत्तियां पंचायत के निदेशन, प्रबंध और नियंत्रण के अधीन होंगी और उसके द्वारा इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए न्यासी के रूप में धारित की जायेंगी ।
(4) राज्य सरकार या पंचायत समिति द्वारा प्रबंधित के सिवाय सभी ऐसी मण्डियों और मेलों का प्रबंध और विनियमन जो पंचायत में निहित की गयी या पंचायत में निहित की जा रही भूमियों पर आयोजित किये जायें, उसके द्वारा किया जावेगा ।
(5) विक्रय आगमों या ऐसी संपत्तियों अथवा उनकी प्राकृतिक उपज से होने वाली आय और ऐसी भूमियों पर आयोजित की जाने वाली मंडियों या मेलों के संबंध में उद्गृहीत या अधिरोपित कोई भी शोध्य पंचायत निधि के भाग होंगे और पंचायत द्वारा पंचायती राज अधिनियम के उद्देश्यों की प्राप्ति में उपयोजित किये जायेंगे ।
(6) राज्य सरकार पंचायत में निहित कोई भी ऐसी संपत्ति पुनर्गुहीत कर सकेगी :-
- (i) यदि जांच पर यह पाया जाये कि पंचायत ने संपत्ति का कुप्रबंध किया है या निहित किये जाने के समय अधिरोपित निबंधनों और शर्तों का उल्लंघन करते हुए उपयोग किया है, या
- (ii) यदि वह राज्य सरकार द्वारा लोकहित में ऐसे निबंधनों पर अन्यथा अपेक्षित हो, जिन्हें राज्य सरकार अवधारित करे
।
टिप्पणी
इस नियम में पंचायत सर्किल में स्थित सार्वजनिक एवं राज्य सरकार की संपत्तियां पंचायत में निहित होने इत्यादि के बारे में विविध प्रावधान किये गये हैं ।
- उप-नियम (1) के अनुसार पंचायत सर्किल के आबादी क्षेत्र में स्थित सभी सामान्य भूमियाँ, लोक या सार्वजनिक मार्ग, जिसमें खंडजे, पत्थर एवं अन्य सामग्री सम्मिलित है, तथा सभी राजकीय भूमियाँ पंचायत में निहित होंगी तथा पंचायत की होगी
। - उप-नियम (2) के अनुसार राज्य सरकार ऐसी शर्तों और निर्बन्धनों के अधीन रहते हुये, जो वह लगाना उचित समझे, अपनी कोई भी सम्पत्तियों, संकर्म, सामग्री एवं वस्तुयें पंचायत में निहित कर सकती है
। - उप-नियम (3) प्रावहित करता है कि उप-नियम (1) एवं (2) में वर्णित सभी सम्पत्तियाँ पंचायत के निदेशन, प्रबंध व नियंत्रण के अधीन रहेंगी तथा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 के प्रयोजन से पंचायत द्वारा न्यासी के रूप में रखी जायेंगी
। - उप-नियम (4) के अनुसार पंचायत में निहित भूमियों पर लगने वाले बाजार एवं मेलों का प्रबन्ध व नियमन पंचायत के अधीन रहेगा, परन्तु राज्य सरकार अथवा पंचायत समिति के प्रबंध में लगने वाले बाजार एवं मेले इसमें शामिल नहीं होंगे
। - उप-नियम (5) में यह प्रावधान है कि ऐसी सम्पत्तियों की बिक्री, ऐसी सम्पत्तियों या उनकी प्राकृतिक उपज से अर्जित आय, ऐसी भूमियों पर लगने वाले बाजार एवं मेलों से वसूल या अधिरोपित शोध्यों से प्राप्त आय पंचायत निधि या कोष के भाग होंगे
। - उप-नियम (6) राज्य सरकार को ऐसी सम्पत्तियाँ निम्न दशाओं में पुनः अपने नियंत्रण में लेने का अधिकार प्रदान करता है
:- - यदि जांच के आधार पर यह पाया जाये कि पंचायत ने सम्पत्तियों का कुप्रबंधन किया है अथवा लगाई गई शर्तों व निर्बन्धनों का उल्लंघन कर उसका उपयोग किया है, अथवा
- यदि राज्य सरकार को ऐसी शर्तों पर, जिसे लगाना वह निश्चित करे, लोकहित में ऐसी सम्पत्तियों की अन्यथा आवश्यकता हो
।
- राज्य सरकार उप-नियमों के प्रावधानों को भूतलक्षी प्रभाव (Retrospective Effect) से लागू नहीं कर सकती
। अतएव, पूर्व में प्रभावी उप-नियमों के आधार पर जिला पंचायत में मछली पकड़ने के अधिकार एक बार निहित हो जाने के पश्चात् इसके कार्य की अवधि के पूर्ण होने तक समाप्त नहीं किये जा सकते [^2] ।
137. स्थावर संपत्तियों का रजिस्टर.-
पंचायती राज संस्थाएं उनमें निहित या उनके निर्वर्तनाधीन रखे गये सभी भवनों और अन्य स्थावर संपत्तियों का रजिस्टर प्ररूप 20 में रखेंगी ।
138. संपत्तियों का अनुरक्षण.-
नियम 136 में निर्दिष्ट सभी संपत्तियों को सही स्थिति में रखना पंचायती राज संस्था का कर्त्तव्य होगा और वह उनकी आवश्यक मरम्मत या पुताई की, आवश्यक समझे जाने पर, व्यवस्था करेगी । सभी विद्यालय भवनों को सुरक्षित व खतरे से मुक्त रखने के लिए विशेष प्रयास किये जायेंगे ।
139. संपत्तियों का निरीक्षण.-
(1) सभी अध्यक्ष ऐसी संपत्तियों की सुरक्षा व उचित अनुरक्षण सुनिश्चित करने के लिए वर्ष में एक बार संपत्तियों का निरीक्षण करेंगे ।
(2) विकास अधिकारी / मुख्य कार्यपालक अधिकारी क्रमशः पंचायत / पंचायत समिति के निरीक्षण के दौरान वर्ष में एक बार रजिस्टर और सम्पत्तियों का निरीक्षण करेगा ।
आबादी भूमि
140. आबादी भूमि.-
"आबादी भूमि" से किसी पंचायत सर्किल के बसे हुए क्षेत्रों के भीतर पड़ने वाली ऐसी नजूल भूमि अभिप्रेत है जो राज्य सरकार के किसी आदेश के द्वारा या अधीन किसी पंचायत में निहित हो या निहित की गयी हो या उसके निर्वर्तनाधीन रखी गयी हो ।
141. भूमि का विक्रय.-
किसी पंचायत द्वारा भूमि के सभी विक्रय साधारणतया नीलाम के माध्यम से किये जायेंगे, जब तक ऐसा न करने के विशेष कारण न हों । पंचायत ऐसी भूमियों का अग्रिम रूप से नियत किये गये नीलामी कार्यक्रम के माध्यम से विक्रय करने का विनिश्चय कर सकेगी ।
142. योजना का तैयार किया जाना.-
(1) जब कभी आबादी के विकास के लिए भूमि किसी पंचायत को अंतरित की जाये तो वह ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग में पदस्थापित नगर आयोजन के अधिकारी द्वारा जो सहायक नगर आयोजनाकार से नीचे की रैंक का न हो, ग्रामीण क्षेत्र के लिए विकास योजना तैयार करायेगी । उसे विभाग के वरिष्ठ नगर आयोजनाकार द्वारा अनुमोदित किया जायेगा । ऐसे ग्रामीण क्षेत्र का भावी विकास अनुमोदित विकास योजना के अनुसार किया जायेगा ।
(2) आवासन, वाणिज्यिक क्षेत्रों और अन्य परियोजनाओं के लिए स्कीमें अनुमोदित विकास योजना के अनुसार तैयार की जायेगी । ऐसी स्कीमों का क्रियान्वयन अनुमोदित प्लान के अनुसार ही किया जायेगा ।
परन्तु उन ग्रामीण क्षेत्रों के लिए जहां विकास योजना अनुमोदित नहीं की गयी है, निवासीय और वाणिज्यिक क्षेत्रों के योजनाबद्ध विकास के लिए परियोजनाएं / स्कीमें ग्राम आयोजनाकार द्वारा तैयार और अनुमोदित की जायेंगी, जो ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग में पदस्थापित सहायक नगर आयोजनाकार से नीचे की रैंक का न हो।
(3) राज्य सरकार ऐसी परियोजनाओं/स्कीमों के क्रियान्वयन के लिए, यदि आवश्यकता हो तो, नियमानुसार निजी भूमियों को अर्जित कर सकेगी ।
(4) अनुमोदित विकास परियोजनाओं/स्कीमों में भूखण्डों का निर्वर्तन, राज्य सरकार के निदेशों के अनुसार, नीलाम और आवंटन द्वारा किया जायेगा ।
(5) राज्य सरकार द्वारा ऐसी परियोजनाओं / स्कीमों के क्रियान्वयन के लिए राज्य सरकार द्वारा प्राधिकृत पंचायत समिति / जिला परिषद् वित्तीय संस्थाओं से नियमानुसार उधार लेने के लिए पात्र होंगी ।
143. आबादी क्षेत्र में भूखण्डों का नीलाम किया जाना.-
(1) पंचायत आबादी क्षेत्र के भीतर इधर-उधर स्थित भूखण्डों सहित भूखण्डों की एक सूची, सार्वजनिक मार्गों/सड़कों, नालियों और अन्य सार्वजनिक प्रयोजनों के लिए अपेक्षित स्थान पर ध्यान रखते हुए तैयार करेगी ।
(2) पंचायत इधर-उधर स्थित किसी भी भूखण्ड के नीलाम का विनिश्चय करते समय, जहां तक संभव हो, निर्माण-रेखा को बनाये रखने का प्रयत्न करेगी ।
(3) निवासीय प्रयोजनों के लिए 100 वर्ग गज या अधिक के और वाणिज्यिक प्रयोजनों के लिए 200 वर्ग फुट तक के किसी भी क्षेत्र को इधर-उधर स्थित भूखण्ड के रूप में नीलाम किया जायेगा ।
144. भूमि-पट्टी का आवंटन.-
(1) पंचायत 100 वर्ग गज तक की कोई भूमि पट्टी निवासीय प्रयोजनों के लिए और 200 वर्ग फुट तक की भूमि पट्टी वाणिज्यिक प्रयोजनों के लिए विद्यमान बाजार मूल्य पर आवंटित कर सकेगी ।
(2) भूमि पट्टी केवल उन्हीं व्यक्तियों को आवंटित की जायेगी, जिनका विद्यमान मकान/दुकान ऐसी पट्टी से लगी हुई है और उसके लिए अन्य कोई भी आवेदक नहीं है ।
(3) एक से अधिक व्यक्तियों के मकानों / दुकानों पट्टी से लगी हुई होने के मामले में उन्हें नीलाम किया जायेगा ।
टिप्पणी
इस नियम में पंचायत द्वारा 100 वर्ग गज तक की भूमि की पट्टी निवास के लिये तथा वाणिज्यिक कार्यों के लिए 200 वर्गफुट की भूमि की पट्टी का आवंटन केवल पड़ौस के भवन या दुकान के स्वामी को ही किये जाने का प्रावधान है । एक से अधिक व्यक्तियों के मकानों / दुकानों के पट्टी से लगे होने की स्थिति में ऐसी भूमि की पट्टी को नीलाम किया जायेगा ।
145. क्रय के लिए आवेदन.-
(1) पंचायत से कोई भी आबादी भूमि / छूटा हुआ भूखण्ड या भूमि की कोई पट्टी खरीदने का इच्छुक कोई व्यक्ति पंचायत को लिखित आवेदन उसमें उसका ऐसा विवरण देते हुए करेगा, जो क्रय के लिए प्रस्तावित भूमि की पहचान के लिए पर्याप्त हो ।
(2) आवेदक अपने आवेदन के साथ स्थल निरीक्षण के व्ययों के पेटे पच्चीस रुपये की राशि जमा करायेगा ।
(3) यदि आवेदन के साथ स्थल नक्शा संलग्न नहीं किया गया हो तो आवेदक नक्शा तैयार करने के लिए भी पच्चीस रुपये जमा करायेगा । ऐसे मामले में सचिव आवेदक की उपस्थिति में स्थल निरीक्षण करने के पश्चात् स्थल नक्शा तैयार करेगा ।
146. स्थल निरीक्षण.-
(1) सचिव ऐसे आवेदन को प्ररूप 21 में एक रजिस्टर में रजिस्टर करेगा और फाइल खोलेगा ।
(2) सचिव ऐसी सभी लंबित फाइलों को स्थल निरीक्षण के लिए तीन पंचों की कोई समिति प्रतिनियुक्त करने के लिए पंचायत की आगामी बैठक में रखेगा ।
(3) पंच 15 दिन के भीतर-भीतर स्थल का निरीक्षण करेंगे और निम्नलिखित विषयों पर विचार करके आवेदित विक्रय की वांछनीयता के संबंध में पंचायत को अपनी राय देंगे, अर्थात् :-
- (क) क्या आवेदित विक्रय ग्रामीणों द्वारा आने-जाने के लिए उपभुक्त सुविधाओं को प्रभावित करेगा;
- (ख) क्या ऐसा विक्रय अन्य व्यक्तियों के सुखाचार संबंधी अधिकारों को प्रभावित करेगा;
- (ग) क्या ऐसा विक्रय परिक्षेत्र की सुंदरता व सफाई को प्रभावित करेगा;
- (घ) ऐसी भूमि को खरीदने के इच्छुक पार्श्व के निवासियों के नाम;
- (ङ) ऐसे अन्य विषय जो सुसंगत प्रतीत हों
।
147. अनंतिम विनिश्चय.-
(1) तब पंचायत किसी बैठक में अनंतिम रूप से यह विनिश्चय करेगी कि प्रस्तावित विक्रय किया जाये या नहीं ।
(2) यदि वह विक्रय न करने का विनिश्चय करे तो आवेदन अस्वीकार कर दिया जायेगा और यह तथ्य आवेदक को संसूचित कर दिया जायेगा । ऐसे मामले में आवेदक फीस के किसी भी प्रतिदाय का हकदार नहीं होगा ।
148. नोटिस का जारी व प्रकाशित किया जाना.-
(1) यदि पंचायत अनंतिम रूप से यह विनिश्चय करे कि विक्रय किया जाये तो वह उप-नियम (2) में अधिकथित रीति से प्ररूप 22 में एक नोटिस, प्रस्तावित विक्रय के संबंध में, इसके प्रकाशन की तारीख से एक मास के भीतर-भीतर, आक्षेप आमंत्रित करते हुए प्रकाशित करेगी :
[परन्तु राजस्व अभियान या प्रशासन गांव के संग अभियान के समय आक्षेपों की आक्षेप आमंत्रण की अवधि एक मास के स्थान पर सात दिवस की होगी [^3]।]
(2) उप-नियम (1) में निर्दिष्ट नोटिस दो प्रतियों में तैयार किया जायेगा और उसकी एक प्रति विक्रय हेतु प्रस्तावित भूमि पर किसी सहजदृश्य स्थान पर लगायी जायेगी, दूसरी प्रति परिक्षेत्र के कम से कम दो प्रतिष्ठित व्यक्तियों के उसे ऐसे लगाये जाने के प्रमाणस्वरूप हस्ताक्षर अभिप्राप्त करने के पश्चात् पंचायत कार्यालय को लौटा दी जायेगी ।
149. आक्षेपों का निपटारा.-
नियम 148 के अधीन जारी सूचना के प्रत्युत्तर में प्राप्त आक्षेप, यदि कोई हों, पंचायत द्वारा संबंधित पक्षों की सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर देने के पश्चात् निपटायें जायेंगे ।
150. भूमि का नीलाम किया जाना.-
(1) यदि नियम 148 के अधीन कोई भी आक्षेप एक मास के भीतर-भीतर प्राप्त न हो या यदि प्राप्त हुए सभी आक्षेप नियम 149 के अधीन निपटा दिये गये हों तो पंचायत संकल्प द्वारा, विक्रय के लिए प्रस्तावित भूमि के, किसी ऐसी तारीख को, जो संकल्प के आदेश की तारीख से एक मास के पूर्व की न हो, और विनिर्दिष्ट किये जाने वाले समय और स्थान पर, नीलाम का आदेश देगी ।
(2) तदुपरांत ऐसे नीलाम का, और उप-नियम (1) में विनिर्दिष्ट तारीख, समय और स्थान का एक नोटिस डोंडी पिटवाकर / किसी भी अन्य ध्वनि प्रवर्धक युक्ति द्वारा उद्घोषित किया जायेगा और नीलाम के नोटिस की एक प्रति स्थल के समीप तथा गांव के बाजार में सहजदृश्य स्थानों पर और पंचायत के नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित की जायेगी ।
टिप्पणी
इस नियम में पंचायत द्वारा भूमि की नीलामी सम्बन्धी प्रावधान है । उप-नियम (1) के अनुसार पंचायत बिक्री के लिये प्रस्तावित भूमि की नीलामी, पारित संकल्प द्वारा निश्चित तारीख, समय एवं स्थान पर किये जाने हेतु आदेश करेगी, परन्तु नीलामी की ऐसी तारीख संकल्प की तारीख से एक महीने पूर्व की नहीं होगी । पंचायत द्वारा तब तक ऐसा आदेश नहीं दिया जा सकता, जब तक कि-
- नियम 148 के अधीन एक माह के भीतर कोई आपत्ति प्राप्त नहीं हुई हो, तथा
- सभी प्राप्त आपत्तियाँ नियम 149 के प्रावधानों के अनुसार निपटा न दी गई हों
। उप-नियम (2) में नीलामी के नोटिस की उद्घोषणा ढोल पीटकर या अन्य ध्वनि विस्तारक विधि से करने तथा नोटिस की एक प्रति नीलामी के स्थान के साथ-साथ गांव के बाजार के सुगोचर स्थानों एवं पंचायत के नोटिस बोर्ड पर भी चस्पा करने सम्बन्धी व्यवस्था है।
151. नीलामी समिति.-
(1) स्थावर संपत्ति के सभी नीलाम एक नीलामी समिति द्वारा किये जायेंगे, जिसमें-
- (i) सरपंच;
- (ii) उप-सरपंच;
- (iii) सतर्कता समिति का अध्यक्ष;
- (iv) महिला/अनुसूचित जाति/जनजाति/अन्य पिछड़े वर्ग का एक पंच पंचायत द्वारा मनोनीत होगा, यदि पहले से उसका प्रतिनिधित्व न हो;
- (v) भू-राजस्व निरीक्षक या उसकी अनुपस्थिति में पटवारी, जिन्हें पर्याप्त समय पूर्व सूचना दी जायेगी
। - (vi) तीन सदस्यों से नीलामी समिति की गणपूर्ति होगी
।
(2) नीलामी, नीलामी के स्थल पर की जावेगी और दिन अस्त होने से पूर्व नीलामी समाप्त नहीं की जायेगी ।
152. बाजार कीमत.-
(1) यह सुनिश्चित करना नीलामी समिति का कर्त्तव्य होगा कि बोली लगाने वालों के बीच स्वतंत्र और उचित प्रतियोगिता हो ।
(2) नीलामी समिति ऐसी भूमि की विद्यमान बाजार कीमत ध्यान में रखेगी ।
(3) अन्तिम बोली किसी भी स्थिति में उस सूचक दर से कम नहीं होगी जो क्षेत्र के उप-रजिस्ट्रार द्वारा स्टाम्प शुल्क के प्रयोजनार्थ भूमियों के पिछले विक्रयों के आधार पर नियत की गयी हो ।
(4) विकास अधिकारी प्रत्येक गांव के लिए ऐसी सूचक दरें उप-रजिस्ट्रार के कार्यालय से अप्रेल मास में अभिप्राप्त करेगा और संबंधित पंचायतों को सूचित करेगा ।
(5) बोलियां ऐसी सूचक दरों से प्रारंभ होंगी जो उप-नियम (4) के अधीन विकास अधिकारी द्वारा सूचित की जाये और सूचक दरें बाजार कीमत के अनुसार होंगी, जिनसे नीचे किसी भी विक्रय को पंचायत द्वारा अंतिम रूप नहीं दिया जायेगा ।
153. विफल होने पर संदाय और पुनर्विक्रय.-
(1) जिस व्यक्ति ने अन्तिम सबसे ऊंची बोली लगायी हो, वह बोली की रकम का 10% स्थल पर ही तुरन्त और 15% चौबीस घंटे के भीतर-भीतर तथा अतिशेष 60 दिवस के भीतर-भीतर जमा करायेगा ।
(2) उप-नियम (1) में उपबंधित संदाय करने में विफल रहने पर भूमि का तत्काल पुनर्विक्रय किया जायेगा :
परन्तु बोली की रकम का अतिशेष संदत करने में विफल रहने पर कोई पुनर्विक्रय नियम 150 के उप-नियम (2) में उपबंधित रूप में कोई नया नोटिस जारी किये जाने के पश्चात् किया जायेगा और मूल विक्रय के समय निक्षिप्त की गयी नीलाम कीमत का 10% पंचायत में समपहृत हो जायेगा: परन्तु यह और कि ऐसे पुनर्विक्रय से प्राप्त कीमत में की कोई भी कमी उस व्यक्ति द्वारा संदेय होगी जो पूर्वोक्त रूप से संदाय करने में विफल रहा है और यह उससे पंचायत शोध्यों के रूप में वसूलीय होगी।
154. विक्रय की पुष्टि.-
(1) सबसे ऊंची बोली की स्वीकृति पंचायत और उप-नियम (3) में विहित प्राधिकारियों द्वारा पुष्टि किये जाने के अध्यधीन होगी ।
(2) यदि कोई भी आक्षेप प्राप्त नहीं हुआ हो तो पंचायत सबसे ऊंची बोली को अपनी आगामी बैठक में मंजूरी देगी जो नीलाम की तारीख के 15 दिन पूर्व आयोजित नहीं की जायेगी ।
(3) जहां सबसे ऊंची बोली की रकम [पचास हजार रुपये [^4]] से अधिक है वहां पंचायत निम्नलिखित रूप से पूर्व अनुमोदन प्राप्त करेगी :-
- (क) अधिकारिता रखने वाली पंचायत समिति से, यदि रकम [दो लाख रुपये [^4]] से अधिक न हो,
- (ख) संबंधित जिला परिषद् से, यदि राशि [पांच लाख रुपये [^4]] से अधिक न हो,
- (ग) राज्य सरकार से, यदि राशि [पांच लाख रुपये [^4]] से अधिक हो
।
टिप्पण:- पट्टी भूमि के विक्रय या बातचीत द्वारा विक्रय जो 10,000/- रु. से अधिक का हो, की पुष्टि भी पट्टा जारी करने के पूर्व अपेक्षित होगी।
(4) उप-नियम (3) में विनिर्दिष्ट प्राधिकारी किसी बोली को पुष्ट करने से इन्कार कर सकेगा यदि उसकी राय में बेची जाने वाली भूमि का पूरा मूल्य नहीं आया हो या अधिकथित प्रक्रिया का अनुसरण नहीं किया गया हो, और ऐसे मामलों में सबसे ऊंची बोली लगाने वाले के द्वारा जमा करायी गयी रकम बिना ब्याज के प्रतिदत्त कर दी जायेगी ।
(5) अतिशेष की 75% रकम नीलाम की तारीख से दो मास के भीतर-भीतर या बोली की पुष्टि की संसूचना की तारीख से एक मास के भीतर-भीतर जमा करायी जायेगी ।
टिप्पणी
इस नियम में नीलामी द्वारा किये गये भूमि के विक्रय की पुष्टि, सक्षम प्राधिकारी द्वारा पुष्टि न करने पर विक्रय-पेटे प्राप्त रकम को लौटाने तथा पुष्टि होने पर क्रेता से शेष रकम की प्राप्ति सम्बन्धी प्रावधान है ।
155. कब्जा.-
पंचायत नीलाम की गयी संपत्ति का भौतिक कब्जा तब तक सुपुर्द नहीं करेगी, जब तक नियम 154 (2) या 154 (3) में उल्लिखित सक्षम प्राधिकारी द्वारा सबसे ऊंची बोली की पुष्टि न कर दी जाये ।
156. प्राइवेट बातचीत द्वारा आबादी भूमि का अंतरण.-
(1) पंचायत किसी भी आबादी भूमि को प्राइवेट बातचीत के द्वारा विक्रय के जरिये निम्नलिखित मामलों में अंतरित कर सकेगी :-
- (क) जहां किसी व्यक्ति का भूमि पर राजस्व का दावा न्यायसंगत हो और नीलाम से उचित कीमत प्राप्त नहीं हो सकती है;
- (ख) जहां कोई अतिचार हो या अन्य किसी कारण, लेखबद्ध किये जाने वाले किसी भी अन्य कारण से पंचायत यह समझती हो कि नीलाम उस भूमि के निर्वर्तन का कोई सुविधाजनक ढंग नहीं होगा, और
- (ग) जहां वह नियम 144 के उप-नियम (1) और (2) के अनुसार भूमि की कोई पट्टी हो और एक ही आवेदक हो
।
(2) किसी भी मामले में ऐसी आबादी भूमि उप-रजिस्ट्रार द्वारा नियत और विकास अधिकारी द्वारा गांव की विद्यमान बाजार कीमत के रूप में संसूचित कीमत से नीचे के किसी दर पर अंतरित नहीं की जायेगी ।
(3) किसी बाजार या वाणिज्यिक क्षेत्र में ऐसी बाजार कीमत निवासीय क्षेत्रों के लिए नियत कीमत की दुगुनी से कम नहीं होगी ।
टिप्पणी
इस नियम में वे परिस्थितियां दी गई हैं, केवल जिनके कारण ही आबादी भूमि का हस्तान्तरण निजी वार्ता द्वारा मान्य किया गया है ।
- सब रजिस्ट्रार की मूल्य सूची से कम पर हस्तान्तरण: उपपंजीयक द्वारा निर्धारित मूल्य सूची तथा विकास अधिकारी द्वारा उस गांव के लिये प्रचलित बाजार-दर के रूप में भिजवाई गई दर से कम पर आपसी बातचीत द्वारा आबादी भूमि हस्तान्तरित नहीं की जा सकेगी
। - बाजार या यह वाणिज्यिक क्षेत्र में ऐसी दर आबादी भूमि क्षेत्र के दुगने से कम नहीं होगी
। - आपसी बातचीत में बिक्री के मामले में कारण लेखबद्ध करना आवश्यक है [^5]
। यदि स्वत्व सम्बन्धी मामला विवादस्पद हो, वहाँ ग्राम पंचायत अथवा तहसील पंचायत का क्षेत्राधिकार नहीं माना गया [^6] । परन्तु जहाँ किसी विवाद का कोई आधार नहीं है तथा काल्पनिक है, तो पंचायत की ऐसी कार्यवाहियों पर रोक (Stay) नहीं लगाई जा सकती [^7] ।
157. पुराने गृहों का विनियमितिकरण.-
[(1) जहां व्यक्ति आबादी भूमि में पुराने गृह का कब्जा रखते हैं और पट्टा जारी किये जाने के इच्छुक हैं वहां उन्हें निम्नलिखित प्रभार निक्षिप्त कराने के पश्चात्, प्ररूप 23-क में पंचायत द्वारा पट्टा जारी किया जा सकेगा [^8]-
- (i) 300 वर्गगज तक के क्षेत्रफल के लिए या 300 वर्गगज अधिकतम क्षेत्रफल के अध्यधीन रहते हुए 25% संनिर्मित क्षेत्रफल को सम्मिलित करते हुए संनिर्मित क्षेत्रफल
:- - (क) इन नियमों के प्रारम्भ की तारीख से पूर्व, पचास वर्षों से अधिक पूर्व में संनिर्मित पुराने गृहों के लिए - 100/- रु.
- (ख) इन नियमों के प्रारम्भ की तारीख से ठीक पूर्ववर्ती पचास वर्षों के दौरान संनिर्मित पुराने गृहों के लिए - 200/- रु.
- (ii) उपर्युक्त खण्ड (i) में विनिर्दिष्ट क्षेत्रफल से अधिक क्षेत्रफल के लिए ऐसे अधिक क्षेत्रफल पर राजस्थान स्टाम्प नियम, 2004 के नियम 58 के खण्ड (क) के अधीन गठित जिला स्तरीय समिति द्वारा सिफारिश की गयी बाजार दरों का 25 प्रतिशत
: परन्तु गरीबी रेखा से नीचे की सूची में सम्मिलित परिवारों से उप-खण्ड (क) के अधीन कोई फीस प्रभारित नहीं की जायेगी और उपर्युक्त खण्ड (i) के उप-खण्ड (ख) के अधीन केवल 10 प्रतिशत फीस प्रभारित की जायेगी।]
[(2) ऐसे परिवार जिनके पास कोई गृह या गृह-स्थल नहीं है और जिनका वर्ष 2003 तक झुग्गी-झोंपड़ी/कच्चे-गृह के निर्माण के तौर पर आबादी भूमि पर कब्जा है, अधिकतम 300 गज तक कब्जे के मुफ्त विनियमितिकरण के हकदार होंगे [^9]। ऐसी भूमि का पट्टा [प्ररूप 23-ख [^10]] ऐसी महिला के नाम से जारी किया जाएगा, जो ऐसे परिवार की मुखिया हो [^9] :]
निर्देश
[1] ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान द्वारा अधिसूचना सं. एफ. 4 () पीसी/परावि/आबादी पट्टा/2009/96, दिनांक 6 जनवरी, 2010 द्वारा 300 वर्ग गज तक के भूखण्डों के नियमन बाबत् दिशा-निर्देश जारी किये गये हैं :
"राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 के नियम 157 के अन्तर्गत पुराने मकानों के नियमिति एवं पट्टा जारी करने का प्रावधान है, लेकिन यह पाया गया है कि इस नियम के मौजूद होते हुए भी बहुत कम लोगों को पट्टे जारी किए गए हैं। गाँवों से ऐसी शिकायतें भी प्राप्त होती हैं कि पंचायतों द्वारा यह कार्यवाही न करने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था पर कुप्रभाव पड़ता है, क्योंकि जिन व्यक्तियों को बैंकों से ऋण लेकर मकान निर्माण करना है, पट्टे की गैर मौजूदगी में वे ऐसा नहीं कर पाते हैं । इससे ग्रामीण क्षेत्रों में निवेश की भी कमी होती है और लोगों के लिए रोजगार के अतिरिक्त अवसरों का सृजन नहीं होता । पंचायती राज नियम 157 में अधिसूचना संख्या एफ. 4 (7) पीआरडी/लॉ रूल/एमेंड/07/1166 दिनांक 9-4-2007 द्वारा संशोधन करते हुए नियम 157 (2) जोड़ा गया है, जिसके अन्तर्गत ऐसे व्यक्ति, जिनके पास कोई भूखण्ड या मकान नहीं है और उन्होंने वर्ष 2003 तक कोई झोपड़ी या कच्चा मकान आबादी भूमि पर निर्माण कर लिया है, उन्हें 300 वर्गगज तक का भूखण्ड निःशुल्क नियमित कर दिया जाए। अतः उक्त नियम के तहत नियमित नहीं किये गये परिवारों को चिन्हित कर सूची तैयार कराई जावे । पंचायती राज नियम 158 के अन्तर्गत कमजोर वर्गों को रियायती दरों पर भूखण्ड आवंटन का प्रावधान है एवं बी.पी.एल. सेन्सस 2002 के सर्वे में ऐसे परिवार जिनके पास राज्य में कोई भूखण्ड या मकान नहीं है और वे इस नियम के तहत भूखण्ड पाने के पात्र हैं, उन समस्त व्यक्तियों को चिन्हित कर सूची तैयार कराई जाये। पंचायती राज नियम 158 (2) में संशोधन करते हुए राज्य सरकार ने गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों की भूमि का आवंटन निःशुल्क करने का अधिकार पंचायतों को ही दे दिया है। पहले यह अधिकार राज्य सरकार में निहित था । अतः आप यह व्यवस्था सुनिश्चित करें, जिससे कि उक्तानुसार परिवारों/अभ्यर्थियों को जो उक्त नियम के तहत पात्र हैं, उन्हें चिन्हित कर सूची तैयार कराई जावे । उक्तानुसार सर्वे कराकर पात्र परिवारों/अभ्यर्थियों का चिन्हीकरण कर लिया जावे तथा पात्र परिवारों को उपलब्ध भूमि एवं यदि पर्याप्त आवासीय भूमि ग्राम पंचायत के पास उपलब्ध नहीं है तो आबादी विस्तार हेतु सक्षम स्तर से नियमानुसार अतिरिक्त आवश्यक भूमि आवंटित कराने के प्रस्ताव तैयार कराकर आवश्यक कार्यवाही की जावे । इसे सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान करें।"
158. भूमियों का कमजोर वर्गों को आवंटन.-
(1) पंचायत, गांव आबादियों में, [300 वर्ग गज [^11]] तक की आबादी भूमि, अनुसूचित जातियों, स्वच्छकारों, अनुसूचित जनजातियों, पिछड़ा वर्गों के सदस्यों को गांव कारीगरों, श्रम मजदूरी पर आधारित भूमिहीन व्यक्तियों, गाड़िया लुहारों के पास स्वयं के गृह स्थल/गृह नहीं है, और ऐसे बाढ़ग्रस्तों को भी जिनके गृह ढह गये हैं या गृहस्थल बाढ़ के कारण भावी निवास हेतु अयोग्य हो गये हैं, रियायती दरों पर आवंटित कर सकेगी [और ऐसी भूमि पर पट्टा प्ररूप 23-ग में जारी किया जा सकेगा [^12]]।
[(1क) पंचायत, सरहदी पंचायत समिति क्षेत्रों में भूतपूर्व सैनिकों को ग्रामीण आबादी में [300 वर्ग गज [^11]] तक आबादी भूमि रियायती दर पर आवंटित कर सकेगी [^13]।
(2) ऐसे आवंटियों से निम्न प्रकार दर वसूल की जावेगी :-
| क्र.सं. | गांव की आबादी (1991 जनगणना) | रियायती दर |
| (क) | 1000 से कम की आबादी वाले गांवों में | 2/- रु. प्रति वर्गमीटर |
| (ख) | 1001 से 2000 की आबादी वाले गांवों में | 5/- रु. प्रति वर्गमीटर |
| (ग) | 2000 से अधिक की आबादी वाले गांवों में | 10/- रु. प्रति वर्गमीटर |
परन्तु राज्य सरकार ऐसी भूमियों को व्यक्तियों की कुछ श्रेणियों के लिये निःशुल्क आवंटित कर सकेगी। [परन्तु यह और कि गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों को आबादी भूमि के आवंटन की दशा में पंचायत भूमि निःशुल्क आवंटित कर सकेगी [^9]। [और ऐसी भूमि का पट्टा प्ररूप 23-ग में जारी किया जा सकेगा [^12]]।
[(2क) पंचायत, घुमक्कड़ भेड़ पालकों को 300 वर्ग गज तक आबादी भूमि निःशुल्क आवंटित कर सकेगी [^14]।
(3) इस प्रकार आवंटित की गई आबादी भूमि अनन्तरणीय होगी । ऐसे सभी पट्टों पर बड़े अक्षरों में "विक्रय के लिए नहीं" की मुहर लगायी जायेगी । यदि कोई भी आवंटिती ऐसे गृह स्थान/गृह को किसी अन्य व्यक्ति को अंतरित या विक्रीत करे तो आवंटन स्वतः निरस्त हो जायेगा, स्वामित्व, ऊपर के संनिर्माण या पड़ी सामग्री के साथ पंचायत में निहित हो जायेगा और अंतरिती को ऐसी आबादी भूमि पर अतिचारी मानते हुए बेदखल कर दिया जायेगा ।
[(3क) इस नियम के अधीन आवंटित तीस प्रतिशत भूमि विधवाओं और तलाकशुदा महिलाओं को आवंटित की जायेगी [^13]।
(4) तथापि पंचायत, बैठक में किसी संकल्प द्वारा ऐसी भूमि को बातचीत द्वारा अनुकम्पा आधारों पर ऐसे अतिचारी को बाजार कीमत पर आवंटित करने का निश्चय कर सकेगी ।
(5) ऐसे आवंटिती को भविष्य में किसी भी पश्चातवर्ती आवंटन से विवर्जित किया जायेगा ।
(6) उप-नियम (3) और (4) तथा (5) में अन्तर्विष्ट उपबंध अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों को पंचायत क्षेत्र में निःशुल्क आवंटित किये जाने वाले दुकान स्थलों के लिए भी लागू होंगे ।
(7) बाढ़ग्रस्त व्यक्तियों को अन्य स्थान/स्थानों पर गृह-स्थलों के आवंटन के लिए संबंधित पंचायत ऐसे व्यक्तियों से आवेदन इस परिवचन के साथ आमंत्रित करेगी कि अन्य स्थान/स्थानों पर गृह-स्थलों के आवंटन की स्थिति में, बाढ़ में ढह गये गृह-स्थल सामग्री सहित सभी विल्लंगमों से मुक्त रूप में, संबंधित पंचायत में निहित हो जायेंगे ।
159. भूमियों का रियायती कीमत पर आवंटन.-
(1) पंचायत, उसे उपलब्ध आबादी भूमि में से 500 वर्ग गज तक के भूखण्ड पूर्विकता के आधार पर भूतपूर्व सेना के ऐसे कर्मियों को (जो कमीशंड रैंकों के नहीं हैं) जिनके पास किसी भी आबादी भूमि में स्वयं का मकान नहीं है, नियम 152 के उप-नियम (5) में उल्लिखित बाजार कीमत की 50% पर आवंटित कर सकेगी ।
[(2) पंचायत-
- (i) नियम 152 के उप-नियम (5) में यथा वर्णित बाजार कीमत के 50% पर प्राथमिक कृषक सहकारी सोसाइटी / बड़ी बहुद्देश्यीय विपणन सोसाइटी को;
- (ii) राज्य सरकार द्वारा पुष्टिकरण के अध्यधीन रहते हुए ग्राम सेवा सहकारी समिति या क्रय विक्रय सहकारी समिति को निःशुल्क;गोदामों/कार्यालयों के संनिर्माण के लिए, पूर्विकता के आधार पर, आबादी क्षेत्र में 1500 वर्गगज तक के भूखण्डों का आवंटन भी कर सकेगी [^15]।
160. अनुमोदन के अध्यधीन अंतरण और आवंटन.-
(1) ऐसे सभी अंतरण जिनका मूल्य 10,000/- रु. से अधिक हो, नियम 154 के उप-नियम (3) में उल्लिखित प्राधिकारी द्वारा पुष्टि किये जाने के अध्यधीन होंगे ।
161. विक्रय की शक्ति से आबादी भूमि के कतिपय प्रवर्गों का अपवर्जन.-
(1) यदि किसी आबादी भूमि का स्वामित्व विवादग्रस्त हो तो ऐसी भूमि पंचायत द्वारा विक्रीत नहीं की जायेगी और ज्यों ही पंचायत की जानकारी में यह आये कि ऐसा कोई विवाद है त्यों ही उसके विक्रय की कार्यवाहियां सक्षम न्यायालय का ऐसे विवाद पर विनिश्चय होने तक के लिए रोक दी जायेगी ।
(2) पंचायत निम्नलिखित विनिर्दिष्ट सीमाओं में न तो किसी आबादी भूमि का विक्रय करेगी न ही पक्का संनिर्माण अनुज्ञात करेगी :-
- (क) रेल्वे लाईन से एक सौ फुट,
- (ख) राष्ट्रीय राजमार्ग की मध्य रेखा से एक सौ पचास फुट,
- (ग) राज्य राजमार्ग की मध्य रेखा से एक सौ पचास फुट,
- (घ) अन्य जिला सड़कों और गांव सड़कों की मध्य रेखा से पचास फुट
।
(3) पंचायत सर्किल के भीतर चारागाह भूमियों का और आबादी के विस्तार के लिए अकृष्य बंजर भूमियों का आवंटन राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम के अधीन बनाये गये नियमों से शासित होगा ।
(4) राज्य सरकार द्वारा अपेक्षित कोई भी आबादी भूमि पंचायत द्वारा बिना किसी दाम के दी जायेगी ।
(5) राज्य सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा सभी या किन्हीं भी पंचायतों से आबादी भूमि के निर्वर्तन की शक्तियां प्रत्याहृत कर सकेगी यदि वह लोकहित में ऐसा करना समीचीन समझे, और उन्हें किसी भी अन्य अधिकारी को प्रदत्त कर सकेगी ।
162. सरकारी संस्थाओं को आबादी भूमि का आवंटन.-
(1) पंचायत, आबादी क्षेत्र के भीतर 500 वर्ग गज तक की भूमियां, संबंधित जिला परिषद् द्वारा पुष्टि किये जाने के अध्यधीन, विद्यालय, औषधालय, आंगनवाड़ी को निःशुल्क आवंटित कर सकेगी ।
(2) कोई भी अन्य निःशुल्क या रियायती कीमत पर आवंटन केवल राज्य सरकार के पूर्वानुमोदन से ही किये जायेंगे ।
निर्देश
[1] ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान की अधिसूचना सं. एफ. 4 () अधि./विधि/पंरा/10/9114, दिनांक 26 नवम्बर, 2010 द्वारा नियम 162 के संबंध में जिला कलक्टर को शक्तियां प्रत्यायोजित की गई ।
163. भूमि का अस्थायी उपयोग.-
(1) पंचायत आबादी भूमि के किसी भी निःशुल्क उपयोग की अनुज्ञा नहीं देगी और धार्मिक उत्सवों, पशु मेलों, त्यौहारों, मंडी क्षेत्रों, खुले स्थानों में भूमि के अस्थायी उपयोग के लिए पट्टा किराया प्रभारित करेगी ।
(2) आबादी भूमि के अस्थायी उपयोग के लिए 2/- रु. प्रति वर्ग फुट से अन्यून का पट्टा किराया वार्षिक रूप से प्रभारित किया जायेगा ।
(3) बाजार क्षेत्र में पट्टा किराया दुगुनी दर पर प्रभारित किया जायेगा ।
(4) पंचायत तीन पंचों की एक समिति, जिसे सचिव सहायता करेगा, के जरिये तैयार किया गया एक सर्वेक्षण अभिलेख, भूमि धारक के पट्टे के आधिक्य में अस्थायी उपयोग के अधीन की आबादी का क्षेत्र उपदर्शित करते हुये तैयार करवायेगी ।
(5) पंचायत बड़े धार्मिक और अन्य मेलों में दूकानें चलाने के लिए भूमि के अस्थायी उपयोग हेतु ऐसे स्थलों का नीलाम, अच्छा-खासा प्रचार करने के पश्चात् पर्याप्त समय पूर्व करेगी ।
टिप्पणी
इस नियम में पंचायतों को भूमि के अस्थायी उपयोग की अनुमति द्वारा आय में वृद्धि का महत्वपूर्ण प्रावधान किया गया है, जिसके अनुसार पंचायत अपने क्षेत्र की आबादी भूमि के निःशुल्क उपयोग की अनुमति नहीं देगी तथा धार्मिक मेलों, पशु मेलों, त्यौहारों के अवसर पर बाजार क्षेत्रों, खुले स्थानों के लिये पट्टा किराया लेगी, जिसके लिये उप-नियम (2) व (3) में दरें निर्धारित की गई हैं । ऐसे पट्टे की भूमि से अधिक भूमि का, पट्टाधारक द्वारा उपयोग तो नहीं किया जा रहा है, इस बात के सर्वेक्षण के लिए तीन पंचों की एक समिति करने की भी उप-नियम (4) में व्यवस्था की गई है । उप-नियम (5) में बड़े धार्मिक एवं अन्य मेलों में दूकानों के लिए भूमि के अस्थायी उपयोग हेतु उचित अग्रिम प्रचार द्वारा नीलामी किये जाने बाबत् आदेशात्मक प्रावधान किये गये हैं, क्योंकि यहां 'नीलाम करेगी' शब्दावली में 'shall' का उपयोग किया गया है । आदेशात्मक प्रावधानों की कठोरतापूर्वक पालना अपेक्षित है [^16] ।
164. पंचायती राज भवनों और दुकानों का किराये पर दिया जाना.-
(1) कोई भी पंचायती राज संस्था अपने भवन सरकारी कार्यालयों, बैंक, डाकघर आदि को किराये पर दे सकेगी जो सार्वजनिक निर्माण विभाग के सक्षम प्राधिकारी द्वारा निर्धारित दरों से कम नहीं होगा ।
(2) दुकानें और अन्य वाणिज्यिक स्थल तीन वर्ष से अनधिक के लिए और निम्नलिखित 3 सदस्यों की समिति द्वारा खुले नीलाम के जरिये ही पट्टे पर दिये जायेंगे :-
- (क) जिला परिषद् भवनों के लिए: मुख्य कार्यपालक अधिकारी, लेखाधिकारी और प्रमुख द्वारा नामनिर्दिष्ट जिला परिषद् का एक सदस्य
। - (ख) पंचायत समिति की स्थावर संपत्तियों के लिए: विकास अधिकारी, लेखाकार और प्रधान द्वारा नामनिर्दिष्ट पंचायत समिति का एक सदस्य
। - (ग) पंचायत स्तर पर: समिति नियम 151 के अनुसार होगी
।
(3) ऐसे परिसरों को किराये पर देने के पट्टा करारों में किराया रकम को प्रतिवर्ष 10% बढ़ाने की शर्त सम्मिलित होगी ।
(4) यदि परिसर तीन वर्ष की समय सीमा के पश्चात् खाली नहीं किये जायें, या वे करार के निबंधनों के अतिक्रमण में किसी अन्य व्यक्ति को उप-पट्टे पर दे दिये जायें अथवा किराया नियमित रूप से जमा नहीं कराया जाये तो मुख्य कार्यपालक अधिकारी परिसर की बेदखली के लिए हेतुक दर्शित करने का नोटिस देने के पश्चात् परिसर खाली करवायेगा, यदि संबंधित पंचायत या पंचायत समिति द्वारा ऐसा निवेदन किया गया हो ।
(5) पंचायत या पंचायत समिति तीन वर्ष की अवधि बढ़ाने के विषय पर बातचीत भी कर सकेगी, किन्तु ऐसे मामले में पारस्परिक करार द्वारा किराये में ली जाने वाली वार्षिक वृद्धि की रकम 20% होगी ।
टिप्पणी
इस नियम में पंचायती राज संस्थाओं द्वारा अपने भवन, राजकीय कार्यालयों, बैंक व डाकघर इत्यादि को सार्वजनिक निर्माण विभाग के सक्षम प्राधिकारी द्वारा निर्धारित दर पर किराए पर देने तथा दुकानों व अन्य वाणिज्यिक भूखंडों (Sites) को अधिकतम तीन वर्ष के लिए पट्टे पर देने सम्बन्धी प्रावधान हैं । पट्टा देने के लिये जिला परिषद, पंचायत समिति एवं पंचायत स्तर पर पृथक् पृथक् समितियाँ बनाने के बारे में क्रमशः उप-नियम (2) के खंड (क), (ख) व (ग) में निर्देश हैं । उप-नियम (3) में प्रतिवर्ष 10% किराया बढ़ाने की शर्त रखी जाने, उप-नियम (4) में परिसर खाली न करने, अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन करने व किराया राशि न देने की स्थिति में परिसर को खाली कराने तथा उप-नियम (5) में परस्पर बातचीत द्वारा किराया अवधि तीन वर्ष से अधिक बढ़ाये जाने पर 20% वार्षिक किराया वृद्धि करने सम्बन्धी प्रावधान किये गये हैं ।
165. पंचायत भूमि पर के अतिचारियों का सर्वेक्षण और अतिक्रमणों का हटाया जाना.-
(1) पंचायत कॉमन भूमियों पर अतिचार के मामलों का पता लगाने के लिए प्रतिवर्ष जनवरी और जुलाई मास में आबादी भूमियों, तालाब तल और चरागाहों में के अतिचारियों का सर्वेक्षण करने के लिए तीन पंचों की एक समिति बनायेगी और जिसे सचिव द्वारा सहायता दी जायेगी ।
(2) ऐसे सभी अतिचार की, क्षेत्र के ब्यौरे और अतिचार की प्रकृति के साथ, सचिव द्वारा एक रजिस्टर में प्रविष्टि की जायेगी ।
(3) पंचायत आबादी क्षेत्र में के ऐसे अतिचारियों को, अतिचारित भूमि की बेदखली के लिए, नोटिस जारी करेगी । जब कभी पंचायत या उसके सदस्य या सचिव के ध्यान में लाया जावे कि अतिक्रमण किया जा रहा है तो सरपंच को अधिकार होगा कि अतिक्रमों के विरुद्ध निषेधात्मक आज्ञा जारी करके तुरन्त अतिक्रमण या निर्माण रोक दे अन्यथा उसके खर्चे व हर्जाने पर ऐसा अतिक्रमण हटा दिया जावेगा । सुनवाई की तिथि तय की जायेगी और पंचायत सुनवाई का समुचित अवसर देने के पश्चात् उचित आदेश पारित कर सकेगी ।
(4) यदि पंचायत की यह राय हो कि यदि ऐसे अतिचार का विनियमन कर दिये जाने से नियम 146 में उल्लिखित शर्तों का अतिक्रमण नहीं होगा तो वह अतिचारी भूमि को बाजार कीमत पर आवंटित करने का विनिश्चय कर सकेगी ।
(5) चरागाह भूमि या तालाब तल पर पाये गये अतिचार के सभी ऐसे मामलों की लिखित रिपोर्ट तहसीलदार को, मामले रजिस्टर करने और अतिचारियों की बेदखली के पंचायत के संकल्प के साथ, की जायेगी ।
(6) पंचायत, पंचायत भूमि पर अतिक्रमण हटाने के लिए सीधे ही या अपने क्षेत्र के उप-खण्ड मजिस्ट्रेट को प्रार्थना करते हुए अधिनियम की धारा 110 के अनुसार पुलिस की सहायता ले सकेगी ।
(7) पंचायत यह सुनिश्चित करेगी कि तहसीलदार द्वारा चारागाह भूमि के अतिचारियों पर अधिरोपित शास्तियों की सभी रकमें पंचायत निधि में पूरी तरह जमा करा दी जायें ।
166. अपीलें.-
(1) नियम 154 के अधीन आबादी भूमि के विक्रय या नियम 160 के साथ पठित नियम 156 के अधीन आबादी भूमि के अंतरण या नियम 157, 158 या 159 के अधीन, भूमियों के आवंटन की पुष्टि करने वाले पंचायत के किसी मूल आदेश की पंचायत समिति को कोई अपील अधिनियम की धारा 61 के अनुसार हो सकेगी ।
(2) जिस आदेश की अपील की जाये उसकी प्रति अभिप्राप्त करने के लिये अपेक्षित समय को अपवर्जित करते हुये, उसकी तारीख से 30 दिन के भीतर-भीतर अपील फाइल की जा सकेगी ।
टिप्पणी
इस नियम में पंचायत द्वारा धारा 154 के अधीन आबादी भूमि की बिक्री अथवा नियम 156 के अधीन आबादी भूमि के हस्तान्तरण अथवा नियम 160 के साथ पठित नियम 157, 158 या 159 के अधीन भूमि के आवंटन की पुष्टि विषयक पंचायत की मूल आज्ञा के विरुद्ध राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 61 के प्रावधानों के अनुसार अपील सम्बन्धी प्रावधान है । अपील के लिये आज्ञा पारित करने की तिथि से 30 दिन की मियाद निर्धारित की गई है, जिसमें उसकी प्रतिलिपि प्राप्त करने के लिए अपेक्षित समय को शामिल नहीं किया गया है ।
167. विक्रय विलेख.-
(1) नियम 153 में उपबंधितानुसार संदाय कर दिये जाने, नियम 154 में उपबंधितानुसार विक्रय की पुष्टि कर दिये जाने और नियम 166 के अधीन अपील, यदि कोई हो, निपटा दिये जाने, या यदि कोई भी अपील नहीं की गयी हो तो उसके लिये विहित समय सीमा के समाप्त हो जाने के पश्चात् आबादी भूमि के विक्रय का साक्ष्य देने वाला प्ररूप 23 में लिखा गया एक विलेख पंचायत की ओर से निष्पादित किया जायेगा ।
(2) पट्टे पर सरपंच और सचिव द्वारा संयुक्त रूप से हस्ताक्षर किये जायेंगे ।
168. पट्टा बही.-
(1) नीलामी, परक्रामण या आवंटन द्वारा किये गये समस्त विक्रयों का जिनके लिए पट्टे जारी किये जायें, अभिलेख पंचायत द्वारा प्ररूप 24 में रखी गयी पट्टा बही में रखा जायेगा ।
(2) पंचायत संबंधित पंचायत समिति के विकास अधिकारी को प्रत्येक मास के प्रथम सप्ताह में पट्टा बही की एक प्रति अग्रेषित करेगी । विकास अधिकारी एक नियंत्रण रजिस्टर रखेगा, जिसमें ऐसे प्राप्त की गयी पट्टा बही की प्रति के आधार पर, मास के दौरान ऐसी पंचायत द्वारा जारी किये गये पट्टों की संख्या के साथ-साथ मास और वर्ष उपदर्शित करते हुए, पंचायतवार लेजर रखा जायेगा । विकास अधिकारी सत्यापन के प्रमाण के रूप में ऐसी प्रविष्टि पर आद्याक्षर करेगा ताकि पिछली तारीखों में पट्टे जारी करना रोका जा सके ।
(3) पंचायत समिति पट्टों को अपने स्तर पर तीन प्रतियों में मुद्रित करायेगी । ऐसे सभी पट्टों पर पुस्तक संख्या तथा क्रम संख्या अंकित की जायेगी तथा पंचायत समिति स्तर पर पंचायतवार पट्टों को जारी करने का रिकॉर्ड संधारित किया जावेगा । पट्टे की पहली परत आवंटिती को जारी की जायेगी, दूसरी परत पंचायत कार्यालय में रखी जायेगी और तीसरी परत रिकॉर्ड के लिए पंचायत समिति में भेजी जावेगी । पंचायत समिति उन्हें अपनी अभिरक्षा में सुरक्षित रखेगी ।
चरागाह
169. चरागाह.-
(1) यदि किसी भी गांव में कॉमन चरागाह किसी पंचायत के निर्वर्तनाधीन नहीं रखा गया हो तो वह तहसीलदार को कोई नया चरागाह लेने / स्थापित करने के लिये अपना प्रस्ताव भेजेगी ।
(2) ऐसे प्रस्ताव की प्राप्ति पर, तहसीलदार तुरन्त कार्रवाई करेगा और पंचायत से प्रस्ताव की प्राप्ति की तारीख से तीन मास की कालावधि के भीतर किये गये विनिश्चय के बारे में पंचायत को सूचना देगा । यदि प्रस्ताव भेजने से तीन मास की कालावधि के भीतर पंचायत द्वारा मंजूरी प्राप्त नहीं की जाती है तो वह विकास अधिकारी को लिख सकेगी जो चरागाह के आवंटन के लिए कार्रवाई करेगा ।
(3) कॉमन चरागाहों पर उगे हुए वृक्षों और अन्य प्राकृतिक उपज से प्राप्त आय पंचायत निधि में जमा की जायेगी ।
(4) पंचायत ऐसे पेड़ों या प्राकृतिक उपज को प्राइवेट संविदा या सार्वजनिक नीलाम द्वारा पट्टे पर दे सकेगी और सूखे, क्षयशील और गिरे हुए पेड़ों का विक्रय भी तत्समय प्रवृत्त विधि के अध्यधीन रहते हुए पूर्वोक्त रीति से किया जा सकेगा ।
(5) चरागाहों पर के गोबर को भी पंचायत द्वारा प्राइवेट संविदा या सार्वजनिक नीलाम द्वारा बेचा जा सकेगा ।
(6) कोई पंचायत किसी चरागाह के क्षेत्र को पशुओं की संख्या में वृद्धि होने के मामले में बढ़ा सकेगी, उस मामले में मंजूरी के लिए आवेदन उसी प्रकार किया जायेगा जैसा कि किसी नये चरागाह की स्थापना के मामले में किया जाता है ।
(7) चराई भूमियों का उपयोग पशुओं को चराने से भिन्न किसी भी प्रयोजन के लिए नहीं किया जायेगा ।
(8) जहां कोई चराई भूमि किसी भी व्यक्ति द्वारा अविधिपूर्ण तरीके से अभिमुक्त की गयी हो या उसका उपयोग किसी भी अन्य प्रयोजन के लिए किया गया हो, वहां पंचायत, नियम 165 के अनुसार तैयार किये गये सर्वेक्षण अभिलेख के आधार पर तत्समय लागू कानून के अधीन कोई आवेदन संबंधित तहसीलदार को करेगी ।
170. चरागाहों का विकास.-
(1) पंचायतों का यह कर्त्तव्य होगा कि वे चरागाहों में उपयुक्त किस्म की घास, झाड़ियों और पौधों के विकास के लिए और अतिक्रमणों को रोकने के लिए सभी कदम उठाये । इस प्रयोजन के लिए पंचायत प्रत्येक गांव की चरागाह भूमि का नियंत्रण [पांच सदस्यों की एक समिति [^4]] को देगी, जिसकी अध्यक्षता संबंधित गांव का वार्ड पंच करेगा और जिसके चार सदस्य ग्राम सभा द्वारा निर्वाचित होंगे ।
(2) बंद क्षेत्र की घास खुली नीलाम या प्राइवेट संविदा के जरिये बेची जा सकेगी ।
(3) विकास योजनाओं की निधियों का उपयोग चरागाहों के विकास के गहन श्रम संकर्मों के लिए कर सकेगी ।
171. चराई-प्रभार.-
पंचायत पशुओं की चराई के लिए ऐसी फीसें प्रभारित कर सकेगी जो वह किसी संकल्प द्वारा अवधारित करे किन्तु ऐसी फीस नीचे विनिर्दिष्ट दरों से अधिक नहीं होंगी :-
| क्र.सं. | पशु का प्रकार | अधिकतम वार्षिक दर |
| (1) | भैंस, गाय, ऊँट, घोड़े प्रति पशु | 10/- रु. प्रति वर्ष |
| (2) | बकरियां और अन्य पशु प्रति पशु | 5/- रु. प्रति वर्ष |
जलाशय
172. जलाशय.-
(1) पंचायतों का यह कर्त्तव्य होगा कि वे उन तालाब / जलाशयों से होने वाली निजी आय को अधिक से अधिक बढ़ायें जो उन्हें संभलाये गये हैं या संभलवाये जायें ।
(2) पंचायतें तालाब जल को मत्स्य विकास, सिंघाड़े की खेती, कमल जड़ के उत्पादन के लिए पट्टे पर दे सकेंगी और तालाब के किनारे के वृक्षों की प्राकृतिक उपज को प्राइवेट संविदा या सार्वजनिक नीलाम द्वारा बेच सकेंगी ।
(3) तालाब तल की खेती भी प्रतियोगी बोलियां हो जाने के पश्चात्, सार्वजनिक नीलाम या प्राइवेट संविदा के माध्यम से दी जा सकेगी । स्वयं की आय बढ़ाने के लिए किसानों को एनीकट संबंधी बाधाएं हटाने के ठेके भी दिये जा सकेंगे ।
(4) पंचायत, जिला परिषद् या सिंचाई विभाग द्वारा नियत जल-दरों के अनुसार सिंचाई प्रभार भी वसूल करेगी यदि पंचायत क्षेत्र में सिंचाई जलाशयों के माध्यम से की जाय ।
(5) ऐसी सारी आय पंचायत निधि में जमा की जावेगी ।
कृषि फार्म और फलोद्यान
173. कृषि भूमियां.-
(1) ऐसी पंचायती राज संस्थाएं, जिनके पास स्वयं की कृषि भूमि हो, ऐसी भूमियों को सार्वजनिक नीलामी द्वारा पट्टे पर दे सकेंगी ।
(2) जिन पंचायतों के पास आम के पेड़ या ऐसे अन्य फलोद्यान हैं, वे भी उन्हें वार्षिक संविदा आधार पर सार्वजनिक नीलामी के माध्यम से ठेके पर देंगी ।
(3) ठेके केवल एक वर्ष की कालावधि के लिए, खरीफ और रबी के मौसमों के लिये दिये जायेंगे ।
(4) ठेकेदार अक्षय तृतीया से पहले-पहले फार्म खाली कर देगा और कृषि उपज को हटा लेगा । इस तथ्य का उल्लेख संविदा निबंधनों में किया जा सकेगा ।
(5) कृषि फार्म का एक भाग कृषि निदर्शन और सामाजिक वानिकी के लिए आरक्षित रखा जाना चाहिए ।
(6) नीलामी प्रतिवर्ष 15 मई को या इसके आसपास किसी नीलामी समिति की उपस्थिति में की जायेगी, जिसमें मुख्य कार्यपालक अधिकारी, तहसीलदार तथा विकास अधिकारी होंगे ।
(7) ठेके आवंटित करते समय, राजकीय विभागों या राजस्थान राज्य बीज निगम, राष्ट्रीय बीज निगम, नाफेड इत्यादि जैसे संगठनों को अधिमान दिया जायेगा ।
पाद-टिप्पणियां (Footnotes & Citations)
[^1]: अधिसूचना सं. एफ. 4 (7) अमे./लीगल/पीआर/2010, दिनांक 12 अगस्त, 2011 द्वारा प्रतिस्थापित। (राजस्थान राजपत्र, विशेषांक, भाग 4 (ग), दिनांक 18 अगस्त 2011 में प्रकाशित तथा प्रभावी) ।
[^2]: भगवान दीन बनाम कमिश्नर, कानपुर डिवीजन, ए.आई.आर. 1996 इलाहा. 124 ।
[^3]: अधिसूचना सं. एफ. 4 (7) अमे./लीगल/पीआर/2010/2113, दिनांक 26 नवम्बर, 2010 द्वारा 'परन्तुक' अन्तःस्थापित। (राजस्थान राजपत्र, विशेषांक भाग 4 (ग) दिनांक 30 नवम्बर, 2010 में प्रकाशित तथा प्रभावी) ।
[^4]: अधिसूचना सं. एफ. 4 (7) संशो/नियम/विधि/पंरा/2010/1348, दिनांक 12 अगस्त, 2011 द्वारा प्रतिस्थापित। (राजस्थान राजपत्र, विशेषांक, भाग 4 (ग), दिनांक 18 अगस्त, 2011 में प्रकाशित तथा प्रभावी) ।
[^5]: देवीलाल बनाम तहसील पंचायत, पदमपुर, 1958 आर.एल.डब्ल्यू 372 = आई.एल.आर. (1958) 8 ।
[^6]: पूनमा बनाम तहसील पंचायत, देसूरी, आई.एल.आर. (1960) 10 राज. 333 = 1960 आर.एल.डब्ल्यू. 475 ।
[^7]: मिश्रीमल बनाम ग्राम पंचायत, सिवाना, आई.एल.आर. (1975) 7 राज. 13 = 1957 आर.एल.डब्ल्यू 136 (खंडपीठ) ।
[^8]: अधिसूचना सं. एफ. 4 (7) अमे./लीगल/पीआर/2013/135, दिनांक 11 फरवरी, 2013 द्वारा प्रतिस्थापित। (राजस्थान राजपत्र, विशेषांक, भाग 4 (ग), दिनांक 19 फरवरी, 2013 में प्रकाशित तथा प्रभावी) ।
[^9]: अधिसूचना सं. एफ. 4 (7) पंरावि/विधि/नियम/संशो/07/1166, दिनांक 9 अप्रैल, 2007 द्वारा अन्तःस्थापित। (राजस्थान राजपत्र, विशेषांक, भाग 4 (ग), दिनांक 2 मई, 2007 में प्रकाशित तथा प्रभावी) ।
[^10]: अधिसूचना सं. एफ. 4 (11) पंरावि/विधि/नियम/संशो/07/445, दिनांक 1 फरवरी, 2008 द्वारा अन्तःस्थापित। (राजस्थान राजपत्र, विशेषांक, भाग 4 (ग), दिनांक 18 फरवरी, 2008 में प्रकाशित तथा प्रभावी) ।
[^11]: अधिसूचना सं. एफ. 4 (13) पंरावि/विधि/नियम/संशो./07/1301, दिनांक 4 अप्रैल, 2008 द्वारा '150 वर्ग गज' के स्थान पर प्रतिस्थापित। (राजस्थान राजपत्र, विशेषांक, भाग 4 (ग), दिनांक 10 अप्रैल, 2008 में प्रकाशित तथा प्रभावी) ।
[^12]: अधिसूचना सं. एफ. 4 (11) पंरावि/विधि/नियम/संशो./07/445, दिनांक 1 फरवरी, 2008 द्वारा अन्तःस्थापित ।
[^13]: अधिसूचना सं. एफ. 4 (11) पंरावि/विधि/नियम/संशो/07/2078, दिनांक 18 जून, 2007 द्वारा अन्तःस्थापित। (राजस्थान राजपत्र, विशेषांक, भाग 4 (ग), दिनांक 27 जून, 2007 में प्रकाशित तथा प्रभावी) ।
[^14]: अधिसूचना सं. एफ. 4 (7) पंरावि/विधि/नियम/संशो./07/1166, दिनांक 9 अप्रैल, 2007 द्वारा अन्तःस्थापित ।
[^15]: अधिसूचना सं. एफ. 4 (7) अमे./लीगल/पीआर/2012/136, दिनांक 11 फरवरी, 2013 द्वारा प्रतिस्थापित। (राजस्थान राजपत्र, विशेषांक, भाग 4 (ग), दिनांक 19 फरवरी, 2013 में प्रकाशित तथा प्रभावी) ।
[^16]: शरीफुद्दीन बनाम अब्दुलगनी लोन, ए.आई.आर. 1980 सु.को. 303 = (1980) 4 एस.सी.सी. 229 ।
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