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महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 (मनरेगा)
यह दस्तावेज़ The Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act, 2005 (No. 42 of 2005) का संशोधित संस्करण है (20 अक्टूबर, 2010 तक संशोधित)। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब परिवारों को वित्तीय वर्ष में कम से कम सौ दिनों की गारंटीकृत मजदूरी रोजगार प्रदान करके आजीविका सुरक्षा को बढ़ाना है।
मुख्य बिंदु और प्रावधान
- रोजगार की गारंटी: हर ग्रामीण परिवार के वयस्क सदस्य, जो अकुशल शारीरिक कार्य करने के इच्छुक हैं, उन्हें वित्तीय वर्ष में कम से कम एक सौ दिन का रोजगार दिया जाता है।
- बेरोजगारी भत्ता: यदि आवेदन प्राप्ति के पंद्रह दिनों के भीतर रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो आवेदक दैनिक बेरोजगारी भत्ते के हकदार होंगे।
- कार्यान्वयन और एजेंसियां: ग्राम पंचायत, पंचायत समिति (intermediate level), जिला पंचायत और जिला कार्यक्रम समन्वयक (District Programme Coordinator) इस योजना के क्रियान्वयन और निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit): योजना के तहत कराए जाने वाले कार्यों का सामाजिक अंकेक्षण ग्राम सभा द्वारा कम से कम हर छह महीने में एक बार किया जाना अनिवार्य है।
- जॉब कार्ड: पंजीकृत परिवारों के वयस्क सदस्यों के लिए जॉब कार्ड जारी किया जाता है, जिसमें कार्य मांग, कार्य आवंटन और मजदूरी भुगतान का पूरा विवरण दर्ज होता है।
- मजदूरी और सामग्री का अनुपात: ग्राम पंचायत स्तर पर कार्यों के निष्पादन में श्रम और सामग्री का अनुपात 60:40 बनाए रखा जाता है।
