नव सर्जित ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों एवं जिला परिषदों में प्रशासनिक व्यवस्था सुनिश्चित करने बाबत आदेश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग का प्रशासनिक आदेश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा नव सर्जित ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों एवं जिला परिषदों के संबंध में प्रशासनिक व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए आदेश जारी किया गया है। यह आदेश राज्य निर्वाचन आयोग की अनुमति दिनांक 23.10.2026 से सक्षम अनुमोदन पश्चात जारी किया गया है।
मुख्य निर्देश एवं बिंदु:
ग्राम विकास अधिकारी: नव सर्जित ग्राम पंचायत हेतु वित्त विभाग की आईडी 332600780 दिनांक 23.06.2026 तथा विभाग के आदेश दिनांक 26.06.2026 के अंतर्गत स्वीकृत पद के क्रम में, नोलसृजित ग्राम पंचायत का कार्यभार उस ग्राम पंचायत के ग्राम विकास अधिकारी को दिया जाए जिससे नव सर्जित ग्राम पंचायत पुनर्गठित होकर बनी है।
विकास अधिकारी: नव सर्जित पंचायत समिति हेतु वित्त विभाग की आईडी 332600780 दिनांक 23.06.2026 तथा विभाग के आदेश दिनांक 26.06.2026 के अंतर्गत स्वीकृत पद के क्रम में, नोलसृजित पंचायत समिति का कार्यभार उस पंचायत समिति के विकास अधिकारी को दिया जाए जिससे नव सर्जित पंचायत समिति पुनर्गठित होकर बनी है।
अन्य अधिकारी/कर्मचारी: नव सर्जित पंचायत समितियों एवं नव सर्जित जिला परिषदों के लिए वित्त विभाग की आईडी 332600780 दिनांक 23.06.2026 से स्वीकृत पदों के क्रम में, नव सर्जित पंचायत समितियों व नव सर्जित जिला परिषदों हेतु स्वीकृत पदों के विरुद्ध कार्मिकों को अतिरिक्त कार्यभार दिया जाए जो पुनर्गठित पंचायत समिति/जिला परिषद में कार्यरत हैं।
उपर्युक्त आदेशों की शीघ्र पालना कर रिपोर्ट प्रेषित करना सुनिश्चित करने के निर्देश समस्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद और विकास अधिकारी, पंचायत समिति को दिए गए हैं।
ग्राम पंचायत प्रशासक द्वारा त्याग-पत्र देने के संबंध में महत्वपूर्ण अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा जारी आदेश (क्रमांक: एफ.15(09)पंरावि/विधि/विविध/2025/ई-54050) के अनुसार ग्राम पंचायतों के प्रशासकों के त्याग-पत्र और नए प्रशासक की नियुक्ति के संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
त्याग-पत्र स्वीकार करना: यदि नियुक्त प्रशासकों में से कोई प्रशासक त्याग-पत्र देता है, तो संबंधित जिला कलेक्टर द्वारा उक्त त्याग-पत्र स्वीकार किया जाएगा।
ग्राम विकास अधिकारी की नियुक्ति: प्रशासक द्वारा त्याग-पत्र दिए जाने पर उसके स्थान पर संबंधित ग्राम पंचायत के ग्राम विकास अधिकारी को प्रशासक नियुक्त किए जाने हेतु अधिकृत किया गया है।
कार्य अवधि: प्रशासक की कार्यविधि नवनिर्वाचन के पश्चात गठित ग्राम पंचायत की प्रथम बैठक की तारीख के ठीक पूर्ववर्ती दिन तक निर्धारित की गई है।
यह आदेश शासन सचिव एवं आयुक्त डॉ. जोगा राम द्वारा जारी किया गया है और संबंधित अधिकारियों को सूचमार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित किया गया है।
जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण (संशोधन) अधिनियम, 2026 के प्रावधानों के संबंध में निर्देश
जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण (संशोधन) अधिनियम, 2026 की जानकारी
राजस्थान सरकार के सांख्यिकी विभाग द्वारा सभी जिला कलेक्टरों एवं अतिरिक्त मुख्य रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) को जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण (संशोधन) अधिनियम, 2026 के प्रावधानों के संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं। यह पत्र दिनांक 24/09/2026 (क्रमांक-एफ/13/1/3/आर.जी.आई./वीएस/डीएस/2017/789) को जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु एवं नए प्रावधान
विधि एवं न्याय मंत्रालय (विधाई विभाग) भारत सरकार द्वारा जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण (संशोधन) अधिनियम, 2026 (No. 12 of 2026) को दिनांक 6 अगस्त 2026 को राजपत्र में प्रकाशित किया गया था।
भारत के महारजिस्ट्रार कार्यालय की अधिसूचना के अनुसार इस अधिनियम के प्रावधान 01 अक्टूबर, 2026 से प्रभावी होंगे।
धारा 13(3): यदि किसी जन्म या मृत्यु की घटना की विलंबित इत्तिला उसके घटित होने के एक वर्ष के पश्चात किंतु दो वर्ष के भीतर दी जाती है, तो वह केवल जिला मजिस्ट्रेट, उप-खंड मजिस्ट्रेट या जिला मजिस्ट्रेट द्वारा अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 14 की उप-धारा (1) के अधीन नियुक्त) के आदेश तथा विहित फीस दिए जाने पर ही रजिस्ट्रकृत की जाएगी।
धारा 13(3A): यदि किसी जन्म या मृत्यु की घटना की विलंबित इत्तिला उसके घटित होने के दो वर्ष के पश्चात दी जाती है, तो वह केवल प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश तथा विहित फीस दिए जाने पर ही रजिस्ट्रकृत की जाएगी।
पंचायती राज एवं ग्राम पंचायत उपयोगकर्ताओं के लिए निर्देश: जिले के समस्त उपखंड अधिकारी (SDM), कार्यपालक मजिस्ट्रेट, तहसीलदार, नगर निगम/परिषद/पालिका के रजिस्ट्रार और ग्राम पंचायत के रजिस्ट्रार यह सुनिश्चित करें कि दिनांक 01.10.2026 के पश्चात उक्त संशोधित प्रावधानों की पालना अनिवार्य रूप से की जाए।
ग्रामीण विकास मंत्रालय अधिसूचना: अकुशल हस्त कार्यकर्ताओं के लिए राज्य-वार मजदूरी दरें (1 जुलाई, 2026 से प्रभावी)
ग्रामीण विकास मंत्रालय अधिसूचना
भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा 30 जून, 2026 की अधिसूचना (का.आ. 3518 (अ)) के माध्यम से 'विकसित भारत - रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण): वीबी-जी राम जी (विकसित भारत – जी राम जी) अधिनियम, 2025' के अंतर्गत अकुशल हस्त कार्यकर्ताओं के लिए राज्य-वार संशोधित मजदूरी दरें जारी कर दी गई हैं। यह अधिसूचना 1 जुलाई, 2026 से प्रवृत्त होगी।
मुख्य बिंदु:
यह अधिसूचना वर्ष 2025 के अधिनियम संख्या 36 की धारा 10 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए जारी की गई है।
इसके तहत विभिन्न राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों में अकुशल हस्त कार्य के लिए प्रतिदिन की मजदूरी दर निर्धारित की गई है।
हिमाचल प्रदेश के लिए गैर-अनुसूचित क्षेत्र में 300.00 रुपये और अनुसूचित क्षेत्र में 375.00 रुपये निर्धारित किए गए हैं।
सिक्किम के अधिकांश क्षेत्रों में 300.00 रुपये तथा इसकी 3 ग्राम पंचायतों (ज्ञानथांग, लाचुंग और लाचेन) के लिए 450.00 रुपये प्रति दिन तय किए गए हैं।
अंडमान और निकोबार के लिए, अंडमान जिला (348.00 रुपये) और निकोबार जिला (367.00 रुपये) की दरें अलग-अलग हैं।
फाइल संख्या: फा. सं. जे-11060/16/2026-आरई-III, हस्ताक्षर: रोहिणी रा भाजीभाकरे, संयुक्त सचिव।
राजस्थान जन आधार प्राधिकरण - परिपत्र-11: नवजात शिशु का स्वतः जन आधार नामांकन एवं मृतक सदस्य को स्वतः हटाने की प्रक्रिया
राजस्थान जन आधार प्राधिकरण परिपत्र-11
राजस्थान सरकार के आयोजना विभाग (राजस्थान जन आधार प्राधिकरण) द्वारा परिपत्र-11 (क्रमांक: एफ17(8)4/डीईएस/रा.ज.आ.यो./परिपत्र/2019/1043, दिनांक: 04.06.2026) जारी किया गया है। यह परिपत्र नवजात शिशु के जन्म उपरांत स्वतः (Auto) जन आधार नामांकन और परिवार में मृतक सदस्य का नाम स्वतः हटाने की प्रक्रिया से संबंधित है।
1. नवजात शिशु के जन्म उपरांत स्वतः (Auto) जन आधार नामांकन
राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ आमजन तक त्वरित गति से पहुँचाने के उद्देश्य से, पहचान पोर्टल द्वारा जन्म प्रमाण पत्र जारी होने और डेटा प्राप्त होने के बाद शिशु का माता के जन आधार कार्ड में स्वतः जुड़ने का प्रावधान किया गया है। इसके लिए निम्नलिखित शर्तें पूरी होनी आवश्यक हैं:
पहचान पोर्टल से शिशु का जन्म प्रमाण पत्र बनाते समय आवेदन फॉर्म में शिशु की माता की आधार संख्या, जन आधार परिवार पहचान संख्या एवं जन आधार सदस्य पहचान संख्या (Member ID) दर्ज करना आवश्यक है।
जन आधार में माता की आधार ई-केवाईसी आवश्यक रूप से होनी चाहिए।
ऐसे शिशु, जिनका नाम जन्म प्रमाण पत्र में दर्ज नहीं होता, उनका जन आधार नामांकन उनकी माता के जन आधार परिवार में वास्तविक नाम उपलब्ध होने तक बेबी ऑफ़ माता (Baby of Mother Name) के नाम से स्वतः ही जोड़ा जायेगा।
शिशु का फोटो जन आधार में एडिटिंग प्रोफाइल (Profile Editing) मॉड्यूल द्वारा अपडेट किया जा सकता है। शिशु का नाम जन्म प्रमाण पत्र में अद्यतन कराने पर पहचान पोर्टल से डेटा प्राप्त होने के उपरांत जन आधार में नाम स्वतः ही अद्यतन हो जायेगा।
2. मृतक सदस्य को जन आधार से स्वतः हटाना
किसी जन आधार परिवार में किसी सदस्य की मृत्यु उपरांत पहचान पोर्टल द्वारा मृत्यु प्रमाण पत्र जारी होने एवं पहचान पोर्टल से डेटा प्राप्त होने के उपरांत मृतक सदस्य का नाम उनके जन आधार परिवार से स्वतः हटाने के प्रावधान किए गए हैं। इस हेतु मृतक सदस्य का पहचान पोर्टल से मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाते समय आवेदन फॉर्म में मृतक की आधार संख्या, जन आधार परिवार पहचान संख्या एवं जन आधार सदस्य पहचान संख्या (Member ID) दर्ज करना आवश्यक है।
नोट: उक्त प्रक्रियाओं के अतिरिक्त जन आधार नामांकन एवं इसमें किसी नए सदस्य को जोड़ने एवं हटाने की प्रक्रिया पूर्ववत रहेंगी।
ग्रामीण क्षेत्रों में निर्माण कार्यों हेतु भूमि स्वामित्व एवं मार्गदर्शन बाबत निर्देश
विभागीय ग्रामीण कार्य निर्देशिका-2025 के प्रावधानों की जानकारी
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास विभाग (अनुभाग-5) द्वारा क्रमांक एफ 27(201)ग्राविफो/अनु-5/जीकेन/सरपंच संघ/2024-25 के अंतर्गत दिनांक 14-08-2025 से लागू विभागीय ग्रामीण कार्य निर्देशिका-2025 के बिंदु संख्या 10 एवं परिशिष्ट-2 के प्रावधानों के संबंध में मार्गदर्शन जारी किया गया है। यह निर्देश ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न केंद्रीय एवं राज्य प्रवर्तित योजनाओं के अंतर्गत कराए जाने वाले निर्माण कार्यों को तकनीकी, सुगमता और गुणवत्ता की दृष्टि से क्रियान्वित करने के लिए है।
मुख्य बिंदु एवं दिशा-निर्देश
भूमि स्वामित्व और विवाद से बचाव: निर्देशिका के बिंदु संख्या 10 में 'भूमि स्वामित्व तय करने एवं कार्य को विवाद से बचाने का दायित्व' और परिशिष्ट-2 में 'सामान्य तौर पर संपादित की जाने वाली गतिविधियों के लिए आवश्यक जमीन का विवरण' से संबंधित प्रावधान दिए गए हैं।
आबादी भूमि और निर्माण कार्य: नवीन आंगनबाड़ी भवन, विद्यालय, सामुदायिक भवन, पंचायत भवन, उप स्वास्थ्य केंद्र, वाचनालय, प्याऊ और नए जल स्रोत लगाने के लिए आबादी क्षेत्र में सक्षम प्राधिकारी/संस्था से अनापत्ति प्रमाण-पत्र प्राप्त कर गतिविधि के नाम आवंटन/पट्टा जारी कराना आवश्यक है।
रास्ता/गोचर/वन भूमि संबंधी प्रावधान: नदी, नाला, तालाब के भरौव क्षेत्र में, रेलवे लाइन या सड़क की सीमा में निर्माण कार्य सामान्यतः स्वीकृत नहीं होते हैं। हालांकि, सार्वजनिक शौचालय, नालियां, बोरिंग, टंकी, हैंडपंप आदि के लिए ग्राम पंचायत स्थानीय स्तर पर आपत्तियां मांगकर और कोरम में निर्णय लेकर इसे शिथिल कर सकती है, जो पंचायत के रिकॉर्ड में होना अनिवार्य है। वन/अरण्य भूमि के मामलों में संबंधित विभाग से अनापत्ति प्रमाण-पत्र प्राप्त किया जाना चाहिए।
खातेदारी भूमि और गिफ्ट/दान: किसी भी परिसंपत्ति निर्माण हेतु खातेदारी भूमि दान/समर्पण करवाकर नामांतरण, खसरा मैप में लोकेशन दर्ज करना और सीमा ज्ञान करवाना आवश्यक है। एक से अधिक खातेदार होने पर सभी की सहमति और नोटरी पब्लिक से प्रमाणीकरण अनिवार्य है।
यह आदेश शासन सचिव, ग्रामीण विकास विभाग (कृष्ण कुणाल) द्वारा जारी किया गया है और सभी संबंधित जिला कलेक्टरों, मुख्य कार्यकारी अधिकारियों तथा जिला परिषदों को आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रेषित किया गया है।
पचपदरा, बालोतरा में एचआरआरएल रिफाइनरी के उद्घाटन कार्यक्रम के लाइव प्रसारण हेतु व्यवस्था
एचआरआरएल रिफाइनरी उद्घाटन कार्यक्रम का लाइव प्रसारण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा पचपदरा, बालोतरा में माननीय प्रधानमंत्री महोदय की उपस्थिति में दिनांक 21.04.2026 को होने वाले HRRL रिफाइनरी के उद्घाटन कार्यक्रम का लाइव प्रसारण ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर दिखाने के संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं।
प्रसारण व्यवस्था: सभी ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर लाइव प्रसारण की समुचित व्यवस्था (टीवी/स्क्रीन/एलईडी व्यवस्था, फर्नीचर, टेंट, पेयजल, व्यवस्थित बैठक व्यवस्था, इंटरनेट कनेक्टिविटी तथा ग्राम पंचायत भवन पर स्थापित ई-मित्र प्लस मशीन के माध्यम से प्रसारण)।
वित्तीय प्रावधान: छठे राज्य वित्त आयोग के अंतर्गत उपलब्ध अनुदान राशि से प्रति ग्राम पंचायत अधिकतम राशि 5,000/- रुपये तक के व्यय/उपयोग की सहमति प्रदान की गई है।
अनुमोदन: यह सहमति वित्त विभाग की आई.डी. संख्या 332600669 दिनांक 19.04.2026 द्वारा अनुमोदित है।
राजस्थान पंचायती राज संस्थाओं के जनप्रतिनिधियों (सरपंच, वार्ड पंच, प्रधान व जिला प्रमुख) के मानदेय एवं बैठक भत्तों की वर्षवार दरें
राजस्थान पंचायती राज संस्थाओं के मानदेय एवं बैठक भत्ते
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा जारी विभिन्न अधिसूचनाओं के अनुसार पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों (जिला प्रमुख, प्रधान, सरपंच एवं वार्ड सदस्यों) के मानदेय और बैठक भत्तों में वर्षवार संशोधन किए गए हैं। इस पोस्ट में वर्ष 2013 से 2025 तक के मानदेय और भत्तों का विवरण दिया गया है।
जिला परिषद
वर्ष
जिला प्रमुख मानदेय प्रतिमाह
जिला परिषद सदस्य बैठक भत्ता
2013
₹9,000
₹500
2017
₹10,000
₹500
2022
₹12,000
₹600
2023
₹13,800
₹690
2024
₹15,180
₹690
2025
₹16,698
₹690
पंचायत समिति
वर्ष
प्रधान मानदेय प्रतिमाह
पंचायत समिति सदस्य बैठक भत्ता
2013
₹6,000
₹350
2017
₹7,000
₹350
2022
₹8,400
₹420
2023
₹9,660
₹483
2024
₹10,626
₹483
2025
₹11,689
₹483
ग्राम पंचायत
वर्ष
सरपंच मानदेय प्रतिमाह
वार्ड पंच बैठक भत्ता
2013
₹3,500
₹200
2017
₹4,000
₹200
2022
₹4,800
₹240
2023
₹5,520
₹276
2024
₹6,072
₹276
2025
₹6,679
₹276
प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण (PMAY-G) के अंतर्गत लाभार्थियों के भौतिक सत्यापन एवं उन्हें अपात्र घोषित करने हेतु यह 'रिमांड ऑफ फॉर्म' (Remand Off Form) उपयोग
यह प्रपत्र PMAY-G की स्थाई वरीयता सूची (PWL) में शामिल लाभार्थियों के ग्राम सभा द्वारा भौतिक सत्यापन के लिए है।
ग्राम सभा की बैठक में योजनान्तर्गत निर्धारित मापदण्डों के परीक्षण उपरान्त लाभार्थियों को पात्र या अपात्र घोषित कर अनुमोदन किया जाता है।
प्रपत्र में लाभार्थी का नाम, पिता/पति का नाम, गाँव का नाम, PMAY-G ID एवं PWL में वरीयता क्रमांक दर्ज करने का स्पष्ट प्रावधान है।
अपात्रता के मुख्य कारण (मापदंड):
प्रपत्र में अपात्रता के 16 बिंदु दिए गए हैं, जिनमें से किसी एक का होना अपात्रता (Remand Off) के लिए पर्याप्त है:
पूर्व में मकान होना या किसी आवास योजना से लाभान्वित होना।
लाभार्थी की मृत्यु हो जाना (तथा परिवार में कोई न होना) या ग्राम पंचायत से पलायन कर जाना।
किसी भी प्रकार का वाहन (मोटरसाईकिल, टेम्पो, कार, जीप, नाव) या 3-व्हीलर/4-व्हीलर मशीनरी होना।
किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) की लिमिट 50,000 रुपये से अधिक होना।
परिवार के किसी सदस्य का राजकीय सेवा में होना, गैर कृषि उद्यम में पंजीकृत होना या मासिक आय 10,000 रुपये होना।
आयकर (Tax) या पेशेवर कर (Professional Tax) का भुगतान करने वाला होना।
घर में फ्रीज या बेसिक फोन होना।
स्वयं की 2.5 एकड़ जमीन के साथ कृषि यंत्र होना, 5.0 एकड़ सिंचित भूमि होना, या कम से कम 7.5 एकड़ भूमि/1 सिंचाई उपकरण होना।
पंचायती राज संस्थाओं की बैठकों के कार्यवाही विवरण संधारण के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
पंचायती राज संस्थाओं की बैठकों के संबंध में परिपत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा पंचायती राज संस्थाओं की बैठकों के कार्यवाही विवरण (Minutes of Meetings) के संधारण और पालना के संबंध में परिपत्र जारी किया गया है। यह दस्तावेज सभी ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों के लिए बैठकों की कार्यप्रणाली में एकरूपता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने हेतु जारी किया गया है।
मुख्य दिशा-निर्देश एवं बिंदु
हिन्दी भाषा में अभिलेखन: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम-44 के अंतर्गत ग्राम पंचायत स्तर पर सचिव, पंचायत समिति स्तर पर विकास अधिकारी और जिला परिषद स्तर पर मुख्य कार्यकारी अधिकारी द्वारा कार्यवाही विवरण अनिवार्य रूप से हिन्दी में लिखा जाना चाहिए।
हस्ताक्षर और उपस्थिति: बैठकों में उपस्थित सदस्यों की उपस्थिति, उनके हस्ताक्षर तथा लिए गए विनििश्चय स्पष्ट रूप से दर्ज किए जाने चाहिए। कार्यवाही विवरण के अंत में बिना कोई रिक्त स्थान छोड़े हस्ताक्षर कराए जाएं ताकि बाद में कोई प्रस्ताव न जोड़ा जा सके।
निजी प्रिंटेड रजिस्टरों का प्रयोग बंद करने बाबत: राजस्थान पंचायत अधिनियम, 1953 (जो कि राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 124 के तहत निरस्त हो चुका है) के प्रपत्र संख्या 24 (नियम 164) वाले निजी प्रिंटेड कार्यवाही विवरण रजिस्टरों का उपयोग विधि विरुद्ध है। अतः इनका उपयोग तुरंत प्रभाव से बंद किया जाए और केवल सामान्य लाइनदार रजिस्टर का उपयोग किया जाए।
संकल्पों की रिपोर्टिंग: अधिनियम या नियमों के विपरीत पारित किसी संकल्प के संबंध में 24 घंटे के भीतर मुख्य कार्यकारी अधिकारी को रिपोर्ट किया जाना आवश्यक है।
प्रतियों का प्रेषण: कार्यवाही विवरण की प्रतियां संबंधित पंचायत समिति, जिला परिषद तथा सभी वार्ड पंचों, पंचायत समिति सदस्यों और जिला परिषद सदस्यों को भेजी जाएं।
पंचायत निर्णय एवं सभा सार पोर्टल: ग्राम सभा बैठक का कार्यवाही विवरण फोटो आदि के साथ पंचायत निर्णय एवं सभा सार पोर्टल पर नियमित रूप से अपलोड किया जाना सुनिश्चित किया जाए।
पंचायती राज संस्थाओं की साधारण सभा की बैठकें नियमित समयावधि में करवाने बाबत
पंचायती राज संस्थाओं की साधारण सभा की बैठकें नियमित समयावधि में करवाने के संबंध में दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा पंचायती राज संस्थाओं की साधारण सभा की बैठकें नियमित समयावधि में आयोजित कराने के संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं। पत्र के माध्यम से सभी मुख्य/अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारियों, जिला परिषद (समस्त राजस्थान) को अवगत कराया गया है कि विभिन्न स्तरों पर बैठकों का आयोजन तय समय सीमा के भीतर किया जाए।
मुख्य बिंदु और प्रावधान
ग्राम पंचायत: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा-45 के तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत की साधारण सभा की बैठक प्रत्येक पन्द्रह दिवस में कम से कम एक बार (प्रत्येक माह की दिनांक 5 एवं 20 को) आयोजित की जाती है। अवकाश होने पर आगामी दिवस को बैठक आयोजित होती है।
पंचायत समिति: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा-46 के तहत पंचायत समिति की साधारण सभा की बैठक प्रत्येक माह में कम से कम एक बार आयोजित की जाती है।
जिला परिषद: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा-46 के तहत जिला परिषद की साधारण सभा की बैठक कम से कम 45 दिन के अंतराल पर आयोजित की जाए तथा इनमें जिला स्तरीय अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए।
बैठकों की अध्यक्षता संबंधी नियम
ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद की साधारण सभा की बैठकों की अध्यक्षता क्रमशः सरपंच, प्रधान और प्रमुख द्वारा की जाती है। यदि वे किन्हीं कारणों से अनुपस्थित रहते हैं, तो अध्यक्षता उप-सरपंच, उप-प्रधान या उप-प्रमुख द्वारा की जाएगी। उनके भी अनुपस्थित रहने पर बैठक में उपस्थित वार्ड पंचों, पंचायत समिति सदस्यों या जिला परिषद सदस्यों में से किसी एक को चुनकर अध्यक्षता सौंपी जाएगी।
प्रधानमंत्री आवास योजना - ग्रामीण: ग्राम सभा सत्यापन एवं अपात्रता प्रमाण पत्र प्रारूप
प्रधानमंत्री आवास योजना - ग्रामीण (PMAY-G) सत्यापन प्रमाण पत्र
कार्यालय ग्राम पंचायत, पंचायत समिति बाड़मेर ग्रामीण, जिला - बाड़मेर के अंतर्गत प्रधानमंत्री आवास योजना - ग्रामीण के लाभार्थियों के भौतिक सत्यापन और ग्राम सभा प्रस्ताव के लिए निर्धारित प्रारूप जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
ग्राम सभा सत्यापन: प्रधानमंत्री आवास योजना - ग्रामीण की स्थायी वरीयता सूची में शामिल लाभार्थियों का ग्राम सभा द्वारा भौतिक सत्यापन एवं निर्धारित 14/16 मापदंडों के परीक्षण उपरांत पात्र या अपात्र घोषित किया जाता है।
अपात्रता के मुख्य कारण: विशेष ग्राम सभा में अपात्र पाए जाने वाले लाभार्थियों के लिए निर्धारित बिंदु (जैसे पूर्व में आवास योजना से लाभान्वित होना, सरकारी सेवा में होना, तिपहिया/चारपहिया वाहन होना, 50,000 से अधिक किसान क्रेडिट कार्ड लिमिट, 10,000 मासिक आय, आयकरदाता होना आदि) शामिल हैं।
प्रमाण पत्र विवरण: इसमें लाभार्थी का नाम, पिता का नाम, गांव का नाम, PMAY-G ID, PWL में वरीयता क्रमांक तथा सरपंच, ग्राम विकास अधिकारी (VDO) और विकास अधिकारी के हस्ताक्षर हेतु प्रावधान है।
पंचायत समिति बाड़मेर, बाड़मेर ग्रामीण के पुनर्गठन/पुनर्शीलन/नवसृजन प्रारूप 2025
पंचायत समिति पुनर्गठन और नवसृजन 2025
यह दस्तावेज़ बाड़मेर जिले की पंचायत समिति बाड़मेर एवं बाड़मेर ग्रामीण के पुनर्गठन, पुनर्शीलन और नवसृजन से संबंधित प्रारूप 2025 (परिशिष्ट - ख) को प्रस्तुत करता है। इस दस्तावेज़ में ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन, उनकी वर्तमान स्थिति, प्रस्तावित ग्राम पंचायतों के नाम तथा वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार उनकी जनसंख्या का विवरण दिया गया है।
विवरण: विभिन्न ग्राम पंचायतों और उनके अंतर्गत आने वाले गांवों, ढाणियों की जनसंख्या (वर्ष 2011) एवं प्रस्तावित पुनर्गठन सूची का विस्तृत विवरण।
पंचायती राज संस्थाओं से जुड़े उपयोगकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों के लिए यह प्रारूप बाड़मेर क्षेत्र में प्रशासनिक सीमाओं और ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन की जानकारी हेतु महत्वपूर्ण है।
पंचायत समिति बाड़मेर ग्रामीण: ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन और पुनर्रचलन का प्रारूप 2025
ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन/पुनर्रचलन प्रारूप 2025
यह दस्तावेज़ पंचायत समिति बाड़मेर ग्रामीण के अंतर्गत ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन, पुनर्रचलन और नवसृजन से संबंधित प्रारूप 2025 को दर्शाता है। इसे ज़िला कलेक्टर, बाड़मेर (टीना डाबी) के अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत तैयार किया गया है।
मुख्य विवरण
क्षेत्र: पंचायत समिति बाड़मेर ग्रामीण
उद्देश्य: ग्राम पंचायतों और उनमें सम्मिलित गांवों की जनसंख्या और सीमाओं का पुनर्गठन व पुनर्रचलन
विविध ग्राम पंचायतें: जालीपा, लाखेताली, मूढ़ो की ढाणी, बांदरा, कपूरड़ी, रोहिली, भाड़खा, खारिया तला, आदर्श ढूंढा, आदर्श चवा, सरू पणजी, सरू चमनजी, सरली, बेरीवाला तला, गंगासरा, सांजटा, शिवकर, धने का तला, गालाबेरी, हाजाणियों की ढाणी (करली), मातासर, रावतसर, भुटिया, रामसर का कुआं, खुड़ासा, नोख और मंगने की ढाणी।
इस प्रारूप में प्रत्येक वर्तमान ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले गांवों, उनकी जनसंख्या तथा प्रस्तावित ग्राम पंचायतों में सम्मिलित गांवों के नए आँकड़ों को सारणीबद्ध किया गया है।
जिला टोंक की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन बाबत शुद्धि पत्र
जिला टोंक ग्राम पंचायत एवं पंचायत समिति पुनर्गठन शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जिला टोंक की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन से संबंधित पूर्व में जारी अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटियों के संशोधन हेतु शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य विवरण:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
क्रमांक: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव/2024/893
दिनांक: 28-12-2025
संबंधित पूर्व अधिसूचनाएं: क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव/2024/807 दिनांक 20.11.2025 एवं संख्या एफ.15(39)पंव/पंचायत समिति गठन/2025/847 दिनांक 21.11.2025
इस शुद्धि पत्र के माध्यम से टोंक, निवाई, टोडारायसिंह और उनियारा पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों तथा पंचायत समितियों के विवरण में आवश्यक संशोधन किए गए हैं। विस्तृत विवरण के लिए संबंधित आदेश का अवलोकन करें।
जिला सिरोही की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सիमांकन के संबंध में शुद्धि पत्र
अधिसूचना विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/892 दिनांक 28-12-2025 के माध्यम से जिला सिरोही की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन से संबंधित पूर्व में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने एवं प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात संशोधन कर शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
संदर्भित पत्र संख्या एवं दिनांक: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/892, दिनांक 28-12-2025
पूर्व अधिसूचनाएं: क्रमांक एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/846 दिनांक 21.11.2025 तथा राजपत्र में दिनांक 21.11.2025 एवं 24.11.2025 को प्रकाशित सूचनाएं।
विषय: जिला सिरोही के अंतर्गत ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों हेतु पूर्व प्रकाशित विवरण में संशोधन (जैसे रेवदर और सिरोही पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाले गांवों/क्षेत्रों के नाम)।
नोट: नीचे दिए गए कॉलम संख्या 6 में अंकित विवरण के स्थान पर कॉलम 7 में अंकित विवरण को सही समझा पढ़ा जाए। विस्तृत विवरण के लिए आधिकारिक अधिसूचना का अवलोकन करें।
राजस्थान सरकार: सीकर जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्संसीमाकन के संबंध में शुद्धि पत्र अधिसूचना (28-12-2025)
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा सीकर जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्संसीमाकन/नवसृजन के संबंध में एक महत्वपूर्ण शुद्धि पत्र जारी किया गया है। यह आदेश दिनांक 28-12-2025 को जारी किया गया है, जिसका पत्र क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/891 है।
अधिसूचना का मुख्य उद्देश्य
विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंव्रा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/845 दिनांक 20.11.2025 एवं संख्या एफ.15(39)पंव्रा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/846 दिनांक 21.11.2025 तथा दिनांक 21.11.2025 एवं 24.11.2025 को राजस्थान राजपत्र विशेषनांक भाग 6(ग) में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने की वजह से और प्राप्त आपत्तियों के निस्तारण पश्चात यह संशोधन/शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार।
जिला: सीकर।
जारी दिनांक: 28-12-2025।
संदर्भित आदेश क्रमांक: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/891।
विवरण: नीचे दिए गए कॉलम संख्या 6 में अंकित विवरण के स्थान पर कॉलम 7 में अंकित विवरण को सही समझ कर पढ़ा जाए, जिसके अंतर्गत ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों (जैसे नीमकाथाना, पाटन, खण्डेला, लक्ष्मणगढ़, दांताारामगढ़, फतेहपुर, नेछवा, श्रीमाधोपुर, अजीतगढ़, रामगढ़ शेखावाटी, पलसाना, खाचरियावास आदि) से संबंधित विवरणों में संशोधन किया गया है।
नोट: इस शुद्धि पत्र के माध्यम से संबंधित ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों के पूर्व प्रकाशित विवरण में आवश्यक संशोधन किए गए हैं जिन्हें राजपत्र के अनुसार पढ़ा जाना चाहिए।
जिला सवाई माधोपुर की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सীमांकन बाबत शुद्धि पत्र (दिनांक 28-12-2025)
जिला सवाई माधोपुर पुनर्गठन शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार, जयपुर द्वारा दिनांक 28-12-2025 का आदेश (क्रमांक: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/890) जारी किया गया है। यह शुद्धि पत्र जिला सवाई माधोपुर की ग्राम-पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन के संबंध में पूर्व में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटि सुधार हेतु जारी किया गया है।
प्रमुख बिंदु:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
दिनांक: 28-12-2025
संबंधित जिला: सवाई माधोपुर
उद्देश्य: पूर्व में प्रकाशित अधिसूचनाओं (दिनांक 21.11.2025 एवं 24.11.2025) में लिपिकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने के कारण प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात विवरण में संशोधन।
संशोधित विवरण के अंतर्गत गंगापुरसिटी, खण्डार, बामनवास और मलारना डूंगर पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाली विभिन्न ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों के विवरण में आवश्यक सुधार किए गए हैं। संबंधित उपयोगकर्ता एवं अधिकारी अधिक जानकारी के लिए मूल आदेश का अवलोकन कर सकते हैं।
जिला सलूंबर की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन से संबंधित शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा जारी शुद्धि पत्र
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवारा/2024/889 दिनांक 28-12-2025 के तहत जिला सलूंबर की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसर्जन से संबंधित पूर्व में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटिवश हुए गलत प्रकाशन को सुधारने हेतु शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
विवरण: पूर्व प्रकाशित अधिसूचनाओं (संख्या एफ.15(39)पंवारा/पंचायत समिति गठन/2025/803 दिनांक 20.11.2025 एवं संख्या एफ.15(39)पंवारा/पंचायत समिति गठन/2025/843 दिनांक 21.11.2025) में प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात कॉलम संख्या 6 के स्थान पर कॉलम 7 में अंकित विवरण को सही पढ़ा जाए।
राजसमंद जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन संबंधी शुद्धि पत्र - 24.12.2025
राजसमंद जिले के पुनर्गठन और परिसीमन से संबंधित शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजसमंद जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन के संबंध में जारी पूर्व अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटियों के सुधार हेतु नया शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य विवरण:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
क्रमांक: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवारा/2024/889
दिनांक: 24-12-2025
संदर्भ: विभागीय अधिसूचना क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवारा/2025/842 दिनांक 20.11.2025 एवं 21.11.2025
मुख्य बिंदु:
राजपत्र प्रकाशन में हुई लिपिकीय त्रुटियों व प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण के पश्चात आमेठ, कुंभलगढ़, देवगढ़, भीम, रेलमगरा और राजसमंद पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों के विवरण में संशोधन किया गया है। कॉलम संख्या 6 के स्थान पर कॉलम संख्या 7 में दिए गए विवरण को सही पढ़ा जाए।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है।
जिला प्रतापगढ़ की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन संबंधी शुद्धि पत्र
जिला प्रतापगढ़ पुनर्गठन शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा जिला प्रतापगढ़ की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन के संबंध में जारी अधिसूचना में लिपिकीय त्रुटियों के संशोधन हेतु शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य विवरण:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार
क्रमांक: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव/2024/887
दिनांक: 28-12-2025
विषय: जिला प्रतापगढ़ की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन के संबंध में पूर्व में प्रकाशित अधिसूचनाओं (दिनांक 21.11.2025 एवं 26.11.2025) में लिपिकीय त्रुटियों का संशोधन।
जारी किए गए विवरण के अनुसार, कॉलम संख्या 6 में अंकित पूर्व प्रकाशित विवरण के स्थान पर कॉलम संख्या 7 में दिए गए संशोधित विवरण को सही समझा जाए। इसमें दलॉट, प्रतापगढ़, पीपलखूट, सुहागपुरा और अरनोद पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाले ग्रामों एवं विवरणों में संशोधन किया गया है।
जिला फलोदी की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सーीमौन हेतु शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा आदेश क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/886, दिनांक 28-12-2025 के तहत जिला फलोदी की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्ससीमांकन/नवसृजन के संबंध में शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
यह शुद्धि पत्र पूर्व में जारी विभागीय अधिसूचनाओं (संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/800 दिनांक 20.11.2025 एवं 840 दिनांक 21.11.2025) में लिपिकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने के कारण एवं प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार।
संबंधित जिला: फलोदी।
आदेश क्रमांक व दिनांक: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/886, दिनांक 28-12-2025।
विवरण: ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों हेतु राजपत्र में प्रकाशित विवरण में कॉलम संख्या 6 के स्थान पर कॉलम संख्या 7 में अंकित विवरण को सही पढ़ा जाए।
विभिन्न पंचायत समितियों जैसे घटियाली, बाप, फलोदी, आऊ, देचू, लोहावट, बापिणी आदि के अंतर्गत आने वाले ग्रामों और क्षेत्रों के नामों में आवश्यक संशोधन किए गए हैं तथा कुछ प्रविष्टियाँ विलोपित की गई हैं।
अधिक जानकारी एवं विस्तृत विवरण के लिए आधिकारिक राजपत्र या संबंधित विभाग के आदेश का अवलोकन करें।
पाली जिले की ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन/पुनर्सिमांकन के संबंध में शुद्धि पत्र जारी
पाली जिला ग्राम पंचायत पुनर्गठन शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवारा/2024/885 दिनांक 28-12-2025 के माध्यम से पाली जिले की ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सिमांकन/नवसृजन बाबत पूर्व में जारी अधिसूचना में लिपिकीय त्रुटि के सुधार हेतु शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य विवरण एवं संशोधन
विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवारा/2024/799 दिनांक 20.11.2025 (जो दिनांक 21.11.2025 को राजस्थान राजपत्र विशेषांक भाग 6(ग) में प्रकाशित हुई थी) में प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात निम्नलिखित संशोधन किए गए हैं:
पंचायत समिति बाली: राजपत्र पृष्ठ 1184, क्रम संख्या 23, कॉलम 5 - पूर्व प्रकाशित विवरण '3. रेलिया' को विलोपन किया गया है।
पंचायत समिति बाली: राजपत्र पृष्ठ 1184, क्रम संख्या 27, कॉलम 5 - संशोधित विवरण में '3. रेलिया' जोड़ा गया है।
पंचायत समिति बाली: राजपत्र पृष्ठ 1181, क्रम संख्या 4, कॉलम 5 - पूर्व प्रकाशित विवरण '3. सादलवा' को विलोपन किया गया है।
पंचायत समिति बाली: राजपत्र पृष्ठ 1182, क्रम संख्या 6, कॉलम 5 - संशोधित विवरण में '3. सादलवा' जोड़ा गया है।
उक्त विवरण को कॉलम 6 के स्थान पर कॉलम 7 में अंकित विवरण के अनुसार सही समझ कर पढ़ा जाए। यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है।
जिला नागौर के ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन हेतु शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा संशोधन आदेश
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/884, दिनांक 28-12-2025 के तहत जिला नागौर की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन बाबत पूर्व में जारी अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने के कारण संशोधन/शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
प्रमुख विवरण:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार
दिनांक: 28-12-2025
संदर्भित पूर्व अधिसूचनाएं: संख्या एफ.15(39)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2025/798 दिनांक 20.11.2025 एवं संख्या एफ.15(39)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2025/838 दिनांक 21.11.2025
विषय: जिला नागौर की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन में लिपिकीय त्रुटियों का सुधार
इस शुद्धि पत्र के माध्यम से ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों हेतु पूर्व प्रकाशित विवरण में कॉलम संख्या 6 के स्थान पर कॉलम संख्या 7 में अंकित विवरण को सही समझा व पढ़ा जाए।
कोटपूतली-बहरोड़ जिला: ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनःसीमांठन बाबत शुद्धि पत्र अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार, जयपुर द्वारा क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवै/2024/883 दिनांक 29-12-2025 के तहत एक महत्वपूर्ण शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
अधिसूचना का मुख्य उद्देश्य एवं विवरण
विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवै/2024/797 दिनांक 20.11.2025 एवं संख्या एफ.15(39)विधि/पंचायत समिति गठन/2025/837 दिनांक 21.11.2025 तथा जिला कोटपूतली-बहरोड़ की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनःसीमांठन/नवसृजन बाबत दिनांक 21.11.2025 एवं 24.11.2025 को राजस्थान राजपत्र विशेषनांक भाग 6(ग) में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने की वजह से व प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात यह संशोधन/शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु
संबंधित जिला: कोटपूतली-बहरोड़
प्रभावित क्षेत्र: ग्राम पंचायतें एवं पंचायत समितियां
जारीकर्ता: डॉ. जोगा राम, शासन सचिव, राज्यपाल की आज्ञा से
नोट: नीचे दिए गए कॉलम संख्या 6 में अंकित विवरण के स्थान पर कॉलम 7 में अंकित विवरण को सही समझ कर पढ़ा जाए, जैसा कि मूल अधिसूचना एवं संलग्न तालिकाओं में दर्शाया गया है।
जिला खैरथल-तिजारा के पुनर्गठन/पुनर्सীमांकन संबंधी शुद्धि पत्र
ग्राम विकास एवं पंचायती राज विभाग शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवारा/2024/881 दिनांक 24-12-2025 के माध्यम से जिला खैरथल-तिजारा की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन से संबंधित पूर्व में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटियों के संशोधन हेतु शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
अधिसूचना संदर्भ: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवारा/2024/795 दिनांक 20.11.2025 एवं संख्या एफ.15(39)पुनर्गठन/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/835 दिनांक 21.11.2025
संशोधित क्षेत्र: जिला खैरथल-तिजारा की ग्राम पंचायतें एवं पंचायत समितियाँ (जैसे तिजारा, किशनगढ़बास, मुण्डावर, ततारपुर)
विवरण: राजपत्र में पूर्व प्रकाशित विवरण में लिपिकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने की वजह से तथा प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात कॉलम 6 के स्थान पर कॉलम 7 में अंकित विवरण को सही समझा जाए।
करौली जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सիमांकन संबंधी शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवै/2024/880 दिनांक 28-12-2025 के माध्यम से जिला करौली की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन के संबंध में पूर्व में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटियों के सुधार हेतु शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार।
आदेश क्रमांक व दिनांक: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवै/2024/880, दिनांक 28-12-2025।
विषय: जिला करौली की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन बाबत पूर्व में प्रकाशित राजपत्र अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने एवं प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात संशोधन।
विवरण: सपोटरा, मासलपुर, हिण्डौन, करौली, नादौती, टोडामीम, श्रीमहावीरजी, कुडगांव, शेरपुर-सुरोठ आदि पंचायत समितियों और संबंधित ग्राम पंचायतों के विवरण में संशोधन किया गया है।
अधिक जानकारी के लिए संबंधित आधिकारिक प्रपत्र एवं दस्तावेजों का अवलोकन करें।
जिला जोधपुर की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन संबंधी शुद्धि पत्र आदेश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा अधिसूचना
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा जिला जोधपुर की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्सीमांकन और नवसंयोजन के संबंध में एक महत्वपूर्ण शुद्धि पत्र जारी किया गया है। यह आदेश दिनांक 28-12-2025 को जारी किया गया है, जिसका पत्र क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव/2024/879 है।
आदेश का मुख्य उद्देश्य
विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव/पंचायत समिति गठन/2025/833 दिनांक 21.11.2025 एवं अन्य पूर्व प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटियों के कारण हुए गलत प्रकाशन और प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण के पश्चात इस शुद्धि पत्र के माध्यम से विवरणों को संशोधित किया गया है।
मुख्य विवरण एवं निर्देश
ग्राम पंचायतों हेतु संशोधन: तिंवरी, बालेसर, ओसियां, बावड़ी, लूणी, मण्डोर, शेरगढ़, सेखाला, चामू, भोपालगढ़, बिलाड़ा और पीपाड़ शहर आदि पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों के विवरण, नाम, और कॉलम की प्रविष्टियों में सुधार किया गया है।
पंचायत समितियों हेतु संशोधन: बावड़ी, हतुण्डी, लूणी, बिलाड़ा, कापरड़ा, भोपालगढ़, पीपाड़ शहर, उम्मेदनगर और झंवर मुख्यालय पाल रोड से संबंधित पंचायत समिति क्षेत्रों के विवरणों को संशोधित किया गया है।
निर्देश: संबंधित तालिकाओं में कॉलम 6 के स्थान पर कॉलम 7 में अंकित विवरण को सही समझ कर पढ़ा जाए।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है तथा इसकी प्रतियां संबंधित सभी उच्च अधिकारियों, जिला कलेक्टरों, जिला परिषदों और निर्वाचन आयोग को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रेषित की गई हैं।
जिला झुंझुनू की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन हेतु शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/874 दिनांक 28-12-2025 के माध्यम से जिला झुंझुनू की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन बाबत पूर्व में जारी अधिसूचनाओं में लिपकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने के कारण एवं प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात संशोधन एवं शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
क्रमांक एवं दिनांक: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/874, दिनांक 28-12-2025
संबंधित जिला: झुंझुनू
उद्देश्य: ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों के पुनर्गठन एवं पुनर्सीमांकन संबंधी पूर्व प्रकाशन में लिपकीय त्रुटियों का संशोधन।
विविध ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों (जैसे उदयपुरवाटी, अलसीसर, झुंझुनू, चिड़ावा, मंडावा, सिंहाना, पिलानी, बुहाना, खेतड़ी, बबाई, टोडीगुढ़ा आदि) के संबंध में कॉलम संख्या 6 के पूर्व प्रकाशित विवरण को कॉलम संख्या 7 के संशोधित विवरण के अनुसार पढ़ा जाए।
झालावाड़ जिला ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन संबंधी शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंचा/2024/877 दिनांक 28-12-2025 के माध्यम से जिला झालावाड़ की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन के संबंध में शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु
मूल अधिसूचना: विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंचा/2024/791 दिनांक 20.11.2025 एवं दिनांक 21.11.2025 को राजस्थान राजपत्र विशेषांक भाग 6(ग) में प्रकाशित हुई थी।
शुद्धि का कारण: पूर्व प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने की वजह से व प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात यह संशोधन किया गया है।
संशोधित विवरण: पिड़ावा मुख्यालय सुनेल पंचायत समिति के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों के विवरण में कॉलम संख्या 6 के स्थान पर कॉलम संख्या 7 में अंकित विवरण को सही समझा जाए।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग - जालोर जिला पुनर्गठन संशोधन शुद्धि पत्र
अधिसूचना विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा आदेश क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवारा/2024/876, दिनांक 28-12-2025 के तहत जालोर जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन के संबंध में शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु
संदर्भित विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
आदेश दिनांक: 28-12-2025।
मूल अधिसूचनाएं: विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पुनर्गठन/विधि/पंवारा/2025/790 दिनांक 20.11.2025 एवं संख्या एफ.15(39)पुनर्गठन/विधि/पंवारा/2025/831 दिनांक 21.11.2025।
कारण: राजस्थान राजपत्र विशेषांक भाग 6(ग) दिनांक 21.11.2025 एवं 24.11.2025 में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने की वजह से और प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात यह संशोधन शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
प्रभावित क्षेत्र: जालोर जिले के अंतर्गत आने वाली विभिन्न ग्राम पंचायतें और पंचायत समितियां (जैसे आहोर, भीनमाल, रानीवाड़ा, चितलवाना, सांचौर, जालोर, भाद्रजून, जसवंतपुरा, सरनाऊ, झाब)।
विस्तृत विवरण के लिए संलग्न आधिकारिक दस्तावेज देखें।
जैसलमेर जिला: ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सिमांकन के संबंध में शुद्धि पत्र
जैसलमेर जिले के पुनर्गठन और पुनर्सिमांकन से संबंधित शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवरे/2024/875 (दिनांक 28-12-2025) के माध्यम से जिला जैसलमेर की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्सिमांकन और नवसृजन के संबंध में पूर्व में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपकीय त्रुटियों को सुधारने हेतु शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
संदर्भित पूर्व अधिसूचनाएं: विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवरे/2024/789 दिनांक 20.11.2025 एवं संख्या एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/830 दिनांक 21.11.2025।
कारण: 21.11.2025 एवं 24.11.2025 को राजस्थान राजपत्र विशेष अंक भाग 6(ग) में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने के कारण प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात यह संशोधन किया गया है।
विवरण: जारी किए गए शुद्धि पत्र में ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों के कॉलम में पूर्व प्रकाशित विवरण के स्थान पर संशोधित विवरण को सही समझा पढ़ने के निर्देश दिए गए हैं।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है।
जयपुर जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन संबंधी शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जयपुर जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन के संबंध में दिनांक 28-12-2025 को शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य विवरण:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
क्रमांक: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/ंपरा/2024/874
दिनांक: 28-12-2025
पार्श्वभूमि: पूर्व में जारी विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/ंपरा/2024/788 दिनांक 20.11.2025 एवं संख्या एफ.15(39)ंपरा/पेंचायत समिति गठन/2025/829 दिनांक 21.11.2025 में लिपकीय त्रुटि/गलत प्रकाशन होने की वजह से तथा प्राप्त आवेदनों के निस्तारण पश्चात् यह शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
विशेष निर्देश: नीचे दिए गए कॉलम संख्या 6 में अंकित विवरण के स्थान पर कॉलम 7 में अंकित विवरण को सही समझ कर पढ़ा जाए। इसमें फागी, चाकसू, कोटखावदा, जोबनेर, गोविन्दगढ़, शाहपुरा, माधोराजपुरा, किशनगढ़ रेनवाल, आंधी, जमवारामगढ़, दूदू, सांभरलेक, चौमूं, तूंगा, बस्सी आदि पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के विवरण में संशोधन किया गया है।
जिला हनुमानगढ़ की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन संबंधी शुद्धि पत्र अधिसूचना दिनांक 28-12-2025
अधिसूचना विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंचा/2024/873 दिनांक 28-12-2025 के माध्यम से जिला हनुमानगढ़ की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन के संबंध में पूर्व में जारी अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने के कारण संशोधन हेतु शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
दिनांक: 28-12-2025
विषय: जिला हनुमानगढ़ की ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन संबंधी पूर्व प्रकाशन में लिपिकीय त्रुटियों का संशोधन।
विवरण: पीलीबंगा, भादरा, संगरिया, हनुमानगढ़, टिब्बी, रावतसर, पल्लू और नोहर सहित विभिन्न पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायतों एवं राजस्व क्षेत्रों से संबंधित विवरण को कॉलम संख्या 6 (पूर्व प्रकाशित विवरण) के स्थान पर कॉलम संख्या 7 (संशोधित विवरण) के अनुसार पढ़ने हेतु संशोधित किया गया है।
संबंधित ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के उपयोगकर्ता और अधिकारी इस शुद्धि पत्र के अनुसार अपने अभिलेखों में सुधार कर सकते हैं।
डूंगरपुर जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन के संबंध में शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवारा/2024/87/ दिनांक 28-12-2025 के माध्यम से जिला डूंगरपुर की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्सीमांकन और नवसृजन से संबंधित पूर्व में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने के कारण यह संशोधन शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
संदर्भित पूर्व अधिसूचनाएं: क्रमांक एफ.15(39)पंवारा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/826 दिनांक 20.11.2025 एवं संख्या 827 दिनांक 21.11.2025।
संशोधन का कारण: राजस्थान राजपत्र विशेषांक भाग 6(ग) में 21.11.2025 एवं 24.11.2025 को प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटियों और प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण के पश्चात यह संशोधन किया गया है।
विवरण: ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों हेतु जारी सूचियों में कॉलम संख्या 6 में अंकित विवरण के स्थान पर कॉलम संख्या 7 में अंकित विवरण को सही पढ़ा जाए।
विस्तृत जानकारी के लिए आधिकारिक प्रपत्र और संबंधित जिले की सूचियों का अवलोकन करें।
धौलपुर जिले के ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन बाबत शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), जयपुर द्वारा जारी अधिसूचना
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा धौलपुर जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन के संबंध में दिनांक 28-12-2025 को शुद्धि पत्र जारी किया गया है। इसका आदेश क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंचा/2024/869 है।
यह शुद्धि पत्र पूर्व में राजस्थान राजपत्र विशेष अंक भाग 6(ग) में प्रकाशित अधिसूचनाओं (क्रमांक एफ.15(39)पुनर्गठन/विधि/पंचा/2024/783 दिनांक 20.11.2025 एवं संख्या एफ.15(39)पुनर्गठन/विधि/पंचा/2025/824 दिनांक 21.11.2025) में लिपिकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने की वजह से और प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण के पश्चात जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
संशोधन का उद्देश्य: राजपत्र में हुए मुद्रण या लिपिकीय त्रुटियों को सुधारना और प्राप्त अभ्यावेदनों का निस्तारण करना।
प्रभावित क्षेत्र: धौलपुर जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतें और पंचायत समितियां (जैसे राजाखेड़ा, सैपऊ, सरमथुरा, बसेड़ी, बाड़ी आदि)।
निर्देश: कॉलम 6 में अंकित विवरण के स्थान पर कॉलम 7 में अंकित विवरण को सही समझा पढ़ा जाए।
जिला डीग में ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन संबंधी शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), जयपुर द्वारा दिनांक 28-12-2025 को एक शुद्धि पत्र (क्रमांक: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/868) जारी किया गया है। यह आदेश जिला डीग की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन के संबंध में पूर्व में जारी अधिसूचनाओं में लिपकीय त्रुटिवश हुए गलत प्रकाशन को सुधारने के लिए जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
आदेश दिनांक: 28-12-2025।
विषय: जिला डीग की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन से संबंधित पूर्व अधिसूचनाओं में संशोधन।
विवरण: पूर्व प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपकीय त्रुटियों के कारण, प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात अब कॉलम संख्या 6 में अंकित विवरण के स्थान पर कॉलम संख्या 7 में अंकित विवरण को सही पढ़ा जाएगा।
यह संशोधन ग्राम पंचायतों तथा पंचायत समितियों दोनों के लिए जारी सूचियों पर लागू होता है।
संबंधित उपयोगकर्ता और अधिकारी विस्तृत जानकारी के लिए मूल अधिसूचना देख सकते हैं।
डीडवाना कुचामन ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन संबंध में शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा जारी संशोधन सूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 28-12-2025 को एक शुद्धि पत्र (क्रमांक: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवारा/2024/870) जारी किया गया है। यह आदेश डीडवाना कुचामन जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन से संबंधित पूर्व में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटियों के सुधार के संबंध में है।
मुख्य विवरण
विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवारा/2024/784 (दिनांक 20.11.2025) एवं एफ.15(39)विधि/पंचायत गठन/2025/825 (दिनांक 21.11.2025) तथा राजस्थान राजपत्र विशेष अंक भाग 6(ग) में दिनांक 21.11.2025 एवं 24.11.2025 को प्रकाशित सूचनाओं में हुई लिपिकीय त्रुटियों को आपत्तियों/आवेदन पत्रों के निस्तारण के पश्चात संशोधित किया गया है।
संशोधित विवरण के अंतर्गत विभिन्न पंचायत समितियों (जैसे नावा, परबतसर, मौलासर, डीडवाना, कुचामन सिटी और मकराना) के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों के नामों और विवरणों में सुधार किया गया है, जिसे संलग्न सूचियों के अनुसार पढ़ा जाए।
जिला दौसा की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन संबंधी शुद्धि पत्र
अति आवश्यक सूचना - जिला दौसा
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जिला दौसा की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसर्जन के संबंध में अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/867, दिनांक 28-12-2025 जारी की गई है।
यह शुद्धि पत्र विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंव्रा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/822 दिनांक 21.11.2025 एवं अन्य पूर्व प्रकाशित अधिसूचनाओं में राजपत्र विशेष अंक भाग 6(ग) में लिपिकी त्रुटि व गलत प्रकाशन होने तथा प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण के पश्चात जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
दिनांक: 28-12-2025
क्रमांक: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/867
विषय: जिला दौसा की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन से संबंधित पूर्व प्रकाशित विवरण में संशोधन/शुद्धि।
जारीकर्ता: डॉ० जोगा राम, शासन सचिव (राजपाल की आज्ञा से)।
संबंधित ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों के उपयोगकर्ता एवं अधिकारी इस अधिसूचना के अनुसार अपने रिकॉर्ड और विवरण को सही रूप में पढ़ व समझ सकते हैं।
राजस्थान सरकार: जिला चूरू की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन संबंधी शुद्धि पत्र
जिला चूरू ग्राम पंचायत एवं पंचायत समिति पुनर्गठन शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा आदेश क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/866 दिनांक 28-12-2025 के तहत चूरू जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन के संबंध में शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
यह शुद्धि पत्र विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंव्रा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/821 दिनांक 21.11.2025 एवं अन्य पूर्व प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटियों के कारण गलत प्रकाशन होने तथा प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण के पश्चात जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
संबंधित विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
आदेश दिनांक: 28-12-2025
विषय: जिला चूरू की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन से संबंधित शुद्धि पत्र
कवर किए गए क्षेत्र: चूरू, सुजानगढ़, सरदारशहर, राजगढ़, सिद्धमुख, भादरा और चांदगोठी (मुख्यालय राजगढ़) आदि पंचायत समितियां।
दस्तावेज में दी गई तालिकाओं के अनुसार ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों के विवरण में कॉलम 6 के स्थान पर कॉलम 7 में अंकित विवरण को सही समझा जाए।
राजस्थान सरकार - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा चित्तौड़गढ़ जिले के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन के संबंध में शुद्धि पत्र
ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन संबंधी शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा आदेश क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/865, दिनांक 28-12-2025 के तहत चित्तौड़गढ़ जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन के संबंध में पूर्व में जारी अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटियों एवं प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण के पश्चात संशोधन शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
पत्र क्रमांक: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/865
दिनांक: 28-12-2025
संबंधित जिला: चित्तौड़गढ़
विवरण: पूर्व प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने की वजह से और प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण के बाद ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों (जैसे गंगरार, चित्तौड़गढ़, बूँसू, भदेसर, कपासन आदि) से संबंधित विवरणों में संशोधन, नाम सुधार तथा विलोपन किया गया है।
संसोधित विवरण के अनुसार ही संबंधित प्रविष्टियों को सही समझा और पढ़ा जाए।
बीकानेर जिला की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमन संबंधी शुद्धि पत्र आदेश
अधिसूचना विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/863 दिनांक 28-12-2025 के माध्यम से जिला बीकानेर की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमन/नवसृजन के संबंध में पूर्व में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटियों के सुधार हेतु शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
आदेश क्रमांक एवं दिनांक: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/863, दिनांक 28-12-2025।
संशोधन का कारण: दिनांक 21.11.2025 एवं 24.11.2025 को राजस्थान राजपत्र विशेष अंक भाग 6(ग) में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटि व प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात।
संबंधित क्षेत्र: बीकानेर जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतें (जैसे बज्जू खालसा, हदां, खाजूवाला, कोलायत) और पंचायत समितियां।
नोट: कॉलम संख्या 6 में अंकित विवरण के स्थान पर कॉलम 7 में अंकित विवरण को सही समझ कर पढ़ा जाए।
भीलवाड़ा जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन संबंधी शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/862 दिनांक 28-12-2025 के तहत भीलवाड़ा जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन के संबंध में शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
यह शुद्धि पत्र विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/776 दिनांक 20.11.2025 एवं संख्या एफ.15(39)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2025/817 दिनांक 21.11.2025 तथा 24.11.2025 को राजस्थान राजपत्र विशेष अंक भाग 6(ग) में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने की वजह से प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना में दी गई सूचियों के अनुसार संबंधित कॉलम में पूर्व प्रकाशित विवरण के स्थान पर संशोधित विवरण को सही समझा कर पढ़ा जाए।
यह संशोधन भीलवाड़ा जिले की विभिन्न पंचायत समितियों (जैसे रायपुर, जहाजपुर, शाहपुरा, करेड़ा, आसींद, हुरड़ा, मांडलगढ़, बनेड़ा, कोटड़ी, सुवाणा, फूलिया कलां आदि) के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों और उनके विवरण से संबंधित है।
यह आदेश डॉ. जोगा राम, शासन सचिव, राजस्थान सरकार द्वारा राज्यपाल की आज्ञा से जारी किया गया है।
जिला भरतपुर की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सիमांकन संबंधी शुद्धि पत्र
राजस्थान सरकार ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा शुद्धि पत्र
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/861, दिनांक 28-12-2025 के माध्यम से जिला भरतपुर की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्सिमांंकन तथा नवसृजन के संबंध में पूर्व में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपकीय त्रुटियों के सुधार हेतु शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य विवरण
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
दिनांक: 28-12-2025
संदर्भित जिले: भरतपुर
उद्देश्य: पूर्व प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने तथा प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात विवरणों में संशोधन करना।
इस शुद्धि पत्र में भुसावर, उच्चैन, सेवर, बयाना और वैर पंचायत समितियों के अंतर्गत विभिन्न ग्राम पंचायतों के विवरणों (जैसे बाछरैन, सलेमपुर खुर्द, झारौटी, हींगोटा, ऊहलू, नंगला तुला, आदि) में आवश्यक संशोधन एवं विलोपन किए गए हैं। संबंधित उपयोगकर्ता और अधिकारी विस्तृत जानकारी के लिए आधिकारिक प्रपत्र देख सकते हैं।
ब्यावर जिला ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन बाबत शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा जयपुर, दिनांक 28-12-2025 को एक शुद्धि पत्र जारी किया गया है। इसका क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/860 है।
यह शुद्धि पत्र विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पुनर्गठन/विधि/पंरा/पंचायत समिति गठन/2025/774 दिनांक 20.11.2025 एवं संख्या एफ.15(39)पुनर्गठन/विधि/पंरा/पंचायत समिति गठन/2025/815 दिनांक 21.11.2025 के संदर्भ में है, जो जिला ब्यावर की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन बाबत दिनांक 21.11.2025 एवं 24.11.2025 को राजस्थान राजपत्र विशेषनांक भाग 6(ग) में प्रकाशित हुई थीं।
मुख्य बिंदु
कारण: पूर्व में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने की वजह से व प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात यह संशोधन किया गया है।
संशोधन विवरण: ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों (जैसे रायपुर, जैतारण, जवाजा, रास) से संबंधित प्रविष्टियों, कॉलम संख्या और विवरण में सुधार किया गया है।
निर्देश: नीचे दिए गए कॉलम संख्या 6 में अंकित विवरण के स्थान पर कॉलम 7 में अंकित विवरण को सही समझ कर पढ़ा जाए।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है तथा इसकी प्रतिलिपि आवश्यक सूचनार्थ विभिन्न संबंधित अधिकारियों को प्रेषित की गई है।
बाड़मेर जिले में ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन संबंधी शुद्धि पत्र
राजस्थान सरकार ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग)
यह अधिसूचना ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा जारी की गई है। इसके माध्यम से बाड़मेर जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन के संबंध में दिनांक 21.11.2025 को राजस्थान राजपत्र विशेषांक भाग 6(ग) में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपकीय त्रुटियों के कारण हुए गलत प्रकाशन को सुधारने हेतु शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंचा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/814 दिनांक 20.11.2025 एवं अन्य संबंधित अधिसूचनाओं में संशोधन किया गया है।
प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण के पश्चात, राजपत्र में प्रकाशित विवरण में कॉलम 6 के स्थान पर कॉलम 7 में अंकित विवरण को सही माना जाएगा।
ग्राम पंचायतों हेतु बाड़मेर, धनाऊ, धोरीमन्ना, गडरारोड, गुड़ामालानी, सेड़वा, फागलिया, चौहटन, आड़ेल, शिव, रामसर, विशायला, डूंगरो का तला आदि पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाले गांवों और ढाणियों के नामों में संशोधन, विलोपन या शुद्धि की गई है।
पंचायत समितियों हेतु भी संबंधित विवरणों को संशोधित किया गया है।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है।
बांसवाड़ा जिला ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन संबंधी शुद्धि पत्र आदेश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग राजस्थान सरकार अधिसूचना
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंचा/2024/859, दिनांक 28-12-2025 के तहत बांसवाड़ा जिले के ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन बाबत जारी पूर्व अधिसूचनाओं में लिपकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने के कारण यह शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार।
दिनांक: 28-12-2025।
संदर्भ आदेश: विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पुनर्गठन/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/812 दिनांक 21.11.2025 एवं जिला बांसवाड़ा की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन बाबत दिनांक 21.11.2025 व 24.11.2025 के राजस्थान राजपत्र विशेषांक भाग 6(ग)।
विवरण: राजपत्र में हुई लिपकीय त्रुटियों और प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों हेतु कॉलम संख्या 6 में अंकित विवरण के स्थान पर कॉलम संख्या 7 में अंकित विवरण को सही समझा कर पढ़ने हेतु निर्देशित किया गया है।
संबंधित पंचायत समितियों में बांसवाड़ा, तलवाड़ा, छोटी सरवन, गढ़ी, कुशलगढ़, घाटोल और सरेड़ी बड़ी के विभिन्न विवरणों में संशोधन किया गया है।
राजस्थान सरकार - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग: जिला बालोतरा की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन बाबत शुद्धि पत्र (अधिसूचना क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/856)
अधिसूचना एवं शुद्धि पत्र का विवरण
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), जयपुर द्वारा दिनांक 28.12.2025 को एक महत्वपूर्ण शुद्धि पत्र (अधिसूचना क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/856) जारी किया गया है। यह आदेश जिला बालोतरा की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्सीमांकन और नवसृजन से संबंधित है।
मुख्य बिंदु
संदर्भित पूर्व अधिसूचनाएं: विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/770 दिनांक 20.11.2025 एवं संख्या एफ.15(39)पुनर्गठन/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/811 दिनांक 21.11.2025 एवं 24.11.2025।
संशोधन का कारण: राजस्थान राजपत्र विशेषांक भाग 6(ग) में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने के कारण एवं प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात यह संशोधन किया गया है।
संशोधित विवरण: ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों हेतु जारी सूचियों में कॉलम 6 के स्थान पर कॉलम 7 में अंकित विवरण को सही समझा पढ़ने के निर्देश दिए गए हैं, जिसमें सिवाना, गिड़ा, कल्याणपुर, पायला कलां, बालोतरा, समदड़ी, बायतु एवं पाटोदी से संबंधित संशोधन शामिल हैं।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगाराम, शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है तथा संबंधित अधिकारियों को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित किया गया है।
जैसलमेर जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन और संशोधन बाबत अधिसूचना
जैसलमेर जिला पंचायत समिति पुनर्गठन संशोधन आदेश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 28-12-2025 को एक अधिसूचना (क्रमांक: एफ.15(39)पंव/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/898) जारी की गई है। यह अधिसूचना विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंस/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/830 दिनांक 21.11.2025 और राजस्थान राजपत्र में 24.11.2025 को प्रकाशित सूचनाओं में लिपिकीय त्रुटियों को दुरुस्त करने तथा प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण के पश्चात संशोधन हेतु जारी की गई है।
मुख्य बिंदु:
प्रभावित जिला: जैसलमेर
संशोधन का उद्देश्य: पूर्व में जारी अधिसूचनाओं की लिपिकीय त्रुटियों का सुधार और प्राप्त अभ्यावेदनों का निस्तारण।
कार्यकाल: सूची के स्तम्भ 4 में वर्णित पंचायत समितियों के चुनावों के पश्चात, उस जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो स्तम्भ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी, जिससे नई पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
राजस्थान सरकार: पंचायत समिति गठन एवं पुनर्गठन संशोधन शुद्धि पत्र (जयपुर जिला)
अधिसूचना विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 28-12-2025 को एक शुद्धि पत्र अधिसूचना (क्रमांक: एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/897) जारी की गई है।
मुख्य उद्देश्य
यह अधिसूचना दिनांक 21.11.2025 की विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/829 और दिनांक 26.11.2025 को राजस्थान राजपत्र विशेष अंक में प्रकाशित अधिसूचनाओं में रही लिपिकीय त्रुटियों को दुरुस्त करने तथा प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण के पश्चात जारी की गई है।
मुख्य बिंदु
जिला: जयपुर
संशोधित क्षेत्र/नाम: शाहपुरा, विराट नगर और अमरसर पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन से संबंधित विवरण।
सूची विवरण: अधिसूचना की अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पुनर्गठित/नवसृजित पंचायत समितियों के नाम तथा स्तंभ 5 में उनमें सम्मिलित ग्राम पंचायतों के नाम स्पष्ट किए गए हैं।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ 4 में यथावर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात, उक्त जिले की विद्यमान वे पंचायत जो स्तंभ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी, जिससे नई पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
यह आदेश डॉ. जोगा राम, शासन सचिव, राजस्थान सरकार द्वारा राज्यपाल की आज्ञा से जारी किया गया है।
विकसित भारत—गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण): VB-G RAM G अधिनियम, 2025 का प्रकाशन
विस्तृत परिचय और उद्देश्य
भारत के राजपत्र (असाधारण) में प्रकाशित द विक्सित भारत—गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण): VB—G RAM G (विकसित भारत—जी राम जी) अधिनियम, 2025 (अधिनियम संख्या 36, 2025) ग्रामीण विकास के ढांचे को राष्ट्रीय विजन 'Viksit Bharat @2047' के अनुरूप स्थापित करने के लिए बनाया गया है। इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक ग्रामीण परिवार, जिसके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक श्रम करने के लिए स्वेच्छा से आगे आते हैं, को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में कम से कम एक सौ पच्चीस दिन (125 days) के मजदूरी रोजगार की कानूनी गारंटी प्रदान करना है।
प्रमुख विशेषताएं एवं बिंदु
रोजगार की गारंटी: हर ग्रामीण परिवार को वित्तीय वर्ष में कम से कम 125 दिनों का वैधानिक मजदूरी रोजगार।
कार्यान्वयन फ्रेमवर्क: इसे केंद्र प्रायोजित योजना (Centrally Sponsored Scheme) के रूप में लागू किया जाएगा।
फंड शेयरिंग पैटर्न: उत्तर पूर्वी राज्यों, हिमालयी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश (उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर) के लिए 90:10 तथा अन्य सभी राज्यों और विधायिका वाले केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 60:40 अनुपात होगा।
विकसित ग्राम पंचायत योजनाएं (VGPPs): कार्यों की शुरुआत और प्राथमिकता 'Viksit Gram Panchayat Plans' के माध्यम से होगी, जिसे पीएम गति शक्ति (PM Gati Shakti) और जीआईएस (GIS) उपकरणों के साथ एकीकृत किया जाएगा।
कार्यों के चार विषयगत डोमेन (Thematic Domains):(अ) जल सुरक्षा से जुड़े कार्य, (ब) कोर ग्रामीण बुनियादी ढांचा, (स) आजीविका से जुड़ा बुनियादी ढांचा, और (द) अत्यधिक मौसम की घटनाओं से निपटने के लिए विशेष कार्य।
ग्राम पंचायत की भूमिका: ग्राम पंचायतें परिवारों का पंजीकरण करेंगी, ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड (Gramin Rozgar Guarantee Card) जारी करेंगी और 'विकसित ग्राम पंचायत योजनाएं' तैयार करेंगी। कार्यक्रम अधिकारी (Programme Officer) यह सुनिश्चित करेंगे कि कम से कम 50 प्रतिशत लागत के कार्य ग्राम पंचायतों के माध्यम से क्रियान्वित हों।
ठेकेदारों पर रोक: अधिनियम के तहत किसी भी कार्य या घटक के निष्पादन के लिए किसी ठेकेदार को नियुक्त नहीं किया जाएगा। सभी कार्य सीधे क्रियान्वयन एजेंसियों द्वारा कराए जाएंगे।
बेरोजगारी भत्ता: आवेदन के 15 दिनों के भीतर रोजगार उपलब्ध न कराए जाने पर नियमानुसार दैनिक बेरोजगारी भत्ते का प्रावधान किया गया है।
पारदर्शिता और जवाबदेही: बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण, ई-मस्टर रोल, कार्यस्थल पर 'जनता बोर्ड' का प्रदर्शन, और ग्राम सभा द्वारा हर छह महीने में कम से कम एक बार अनिवार्य सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit)।
सरपंच हेतु महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी योजना निर्देशिका वर्ष 2010
सरपंच हेतु महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी योजना निर्देशिका - वर्ष 2010
यह निर्देशिका ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, शासन सचिवालय, जयपुर द्वारा प्रकाशित की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य ग्राम पंचायतों के सरपंचों को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी अधिनियम (मनरेगा), 2005 के सफल क्रियान्वयन, प्रशासनिक पारदर्शिता, सामाजिक अंकेक्षण और वित्तीय अनुशासन के संबंध में मार्गदर्शन प्रदान करना है।
मुख्य बिंदु और प्रावधान
रोजगार का अधिकार: प्रत्येक पंजीकृत ग्रामीण परिवार को वित्तीय वर्ष में 100 दिन का अकुशल शारीरिक श्रम का गारण्टीशुदा रोजगार प्रदान किया जाता है। आवेदन के 15 दिवस के भीतर कार्य देना अनिवार्य है, अन्यथा बेरोजगारी भत्ता देय होता है।
पारदर्शिता और उत्तरदायित्व: सभी सूचनाओं को स्वैच्छिक रूप से जारी करना (Proactive Disclosure), कार्यस्थल बोर्ड लगवाना, दीवारों पर लेखन करना, और समयबद्ध मजदूरी भुगतान बैंक या पोस्ट ऑफिस के खातों के माध्यम से सुनिश्चित करना।
हरित राजस्थान योजना: राज्य में हरियाली बढ़ाने और सूखे के बचाव हेतु सघन वृक्षारोपण एवं हरित सड़क कार्यक्रम का संचालन।
भारत निर्माण राजीव गांधी सेवा केन्द्र: प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर 10 लाख रुपये की लागत से सेवा केन्द्र का निर्माण, जिसमें सूचना, शिक्षा और संचार की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।
रिकॉर्ड संधारण: रोकड़ बही, माप पुस्तिका (MB), स्टॉक रजिस्टर, और परिसंपत्ति एवं संचयी व्यय रजिस्टर का सही तरीके से संधारण।
महात्मा गांधी रोजगार गारण्टी स्थायी समिति: योजना के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु ग्राम पंचायत स्तर पर 5 सदस्यीय स्थायी समिति का गठन (अध्यक्ष: सरपंच, सदस्य: वार्ड पंच, कनिष्ठ अभियंता/तकनीकी सहायक, ग्राम सेवक एवं पदेन सचिव, ग्राम रोजगार सहायक)।
MGNREGA Case Record/ Work File: Indicative Framework
MGNREGA Case Record / Work File
ग्रामीण विकास मंत्रालय (Ministry of Rural Development, Government of India) द्वारा मनरेगा (MGNREGS) के अंतर्गत प्रत्येक प्रोजेक्ट या कार्य के लिए केस रिकॉर्ड / वर्क फाइल (Case Record / Work File) तैयार करने हेतु एक इंडिकेटिव फ्रेमवर्क जारी किया गया है।
यह शारीरिक फाइल (physical file) प्रत्येक कार्य के क्रियान्वयन, निगरानी और ऑडिट के लिए महत्वपूर्ण है ताकि देश भर में एकरूपता लाई जा सके।
फाइल में शामिल किए जाने वाले मुख्य दस्तावेज और अनुभाग:
कवर पेज और चेकलिस्ट: कार्य का सारांश और दस्तावेजों की अनुक्रमित सूची (Annexure I & II)।
प्रशासनिक और तकनीकी दस्तावेज: वार्षिक कार्य योजना (Annual Action Plan), तकनीकी अनुमान (Technical Estimate & Design), तकनीकी स्वीकृति (Technical Sanction) और प्रशासनिक/वित्तीय स्वीकृति।
मांग और कार्य आवंटन: व्यक्तिगत या समूह आवेदन फॉर्म (Annexure III A & B) और कार्य आवंटन पत्र (Work Allocation Form - Annexure IV)।
क्रियान्वयन से जुड़े रिकॉर्ड: ई-मस्टर रोल (e-Muster Roll), माप पुस्तिका (Measurement Book / e-MB), सामग्री खरीद दस्तावेज, मजदूरी सूची (Wage List), और भुगतान एफटीओ (FTOs)।
अन्य जरूरी दस्तावेज: रॉयल्टी रसीदें, कार्य के तीनों चरणों (शुरुआत, दौरान, पूर्णता) की तस्वीरें और जियो-टैग की गई तस्वीरें, कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र (Work Completion Certificate - Annexure V), मस्टर रोल मूवमेंट स्लिप (Annexure VI) और सोशल ऑडिट रिपोर्ट।
यह फ्रेमवर्क ग्राम पंचायत स्तर पर दस्तावेजों के बेहतर रखरखाव और पारदर्शिता के लिए उपयोगी है।
मनरेगा के अंतर्गत नागरिक सूचना बोर्ड (CIB) और वॉल राइटिंग हेतु दिशा-निर्देश
महात्मा गांधी नरेगा (MGNREGA) - नागरिक सूचना बोर्ड और वॉल राइटिंग रूपरेखा
भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (Mahatma Gandhi National Rural Employment Act, 2005) के अंतर्गत कार्यस्थलों पर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए नागरिक सूचना बोर्ड (Citizen Information Boards - CIB) और वॉल राइटिंग का सुझाव फ्रेमवर्क जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
पार्श्वभूमि और उद्देश्य: अधिनियम की अनुसूची-1 के पैरा 25(a) और मास्टर सर्कुलर के अनुसार, जनता को बुनियादी जानकारी प्रदान करने के लिए 'जनता सूचना प्रणाली' का उपयोग किया जाता है।
नागरिक सूचना बोर्ड (CIB): प्रत्येक कार्यस्थल पर CIB लगाना अनिवार्य है। व्यक्तिगत कार्यों के लिए बोर्ड का आकार कम से कम 0.6 मीटर x 0.9 मीटर और सामुदायिक कार्यों के लिए कम से कम 0.9 मीटर x 1.2 मीटर होना चाहिए।
लागत सीमा: व्यक्तिगत कार्य के लिए CIB की लागत 3,000 रुपये और सामुदायिक कार्य के लिए 5,000 रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए।
सामग्री और लेआउट: बोर्ड पर कार्य का नाम, कार्य ID, प्राक्कलन राशि, प्रारंभ और समाप्ति तिथि, मजदूरी और सामग्री घटक, और लोकपाल/ओम्बुड्समैन का संपर्क विवरण क्षेत्रीय भाषा में प्रदर्शित होना चाहिए।
वॉल राइटिंग: पंचायत भवन, आंगनवाड़ी केंद्रों, और अन्य प्रमुख सार्वजनिक स्थानों की दीवारों पर 'मेरा गांव, मेरा मनरेगा' और अन्य जागरूकता संदेश पेंट किए जाने चाहिए, जिसकी न्यूनतम चौड़ाई 2 मीटर और ऊंचाई 1.2 मीटर सुझाई गई है।
क्रियान्वयन जिम्मेदारी: ग्राम रोजगार सहायक (GRS) और तकनीकी सहायक (Technical Assistant) कार्यस्थल पर बोर्ड की स्थापना और गुणवत्ता के लिए जिम्मेदार हैं।
महात्मा गांधी नरेगा (MGNREGS) अनुमेय कार्य सूची (Schedule 1 of MGNREG Act 2005)
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम 2005 - अनुमेय कार्य सूची
यह दस्तावेज़ ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी महात्मा गांधी नरेगा (MGNREGS) के अंतर्गत अनुमेय कार्यों की सूची (Schedule 1 of MGNREG Act 2005) को दर्शाता है। इस सूची में ग्राम पंचायत और पंचायती राज स्तर पर कराए जाने वाले विभिन्न प्रकार के कार्यों का विवरण दिया गया है।
प्रमुख कार्य श्रेणियां और विवरण:
व्यक्तिगत, सामुदायिक और समूह स्तर के कार्य: इसमें पीएमएवाई-जी (PMAY-G) आवास निर्माण, आंगनवाड़ी भवन, ग्राम पंचायत/पंचायत भवन, खाद्यान्न भंडारण, किचन शेड और भारत निर्माण सेवा केंद्र का निर्माण एवं मरम्मत शामिल है।
प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन (NRM) और जल संरक्षण: जल संभरण (SWC), सिंचाई (Irrigation), भू-जल पुनर्भरण (GWR), भूमि विकास (LR), और जल निकासी से संबंधित कार्य।
कृषि एवं संबद्ध कार्य (Agri & Allied): कृषि उत्पादन भंडारण, वर्मी कम्पोस्ट, नाडेप कम्पोस्ट, पशु शेड (गाय, बकरी, सुअर, मुर्गी), और अजोला खेती के लिए बुनियादी ढांचा।
वृक्षारोपण और वानिकी (PLNT): तटबंध वृक्षारोपण, सीमा रेखा वृक्षारोपण, और उद्यानिकी (Horticulture) से जुड़े कार्य।
ग्रामीण बुनियादी ढांचा: ग्रामीण हाट, खेल का मैदान, चक्रवात आश्रय (Cyclone shelter), और सड़क व जल निकासी संरचनाएं।
यह सूची पंचायती राज संस्थाओं और ग्राम पंचायतों को महात्मा गांधी नरेगा योजना के तहत सही कार्यों के चयन और क्रियान्वयन में सहायता प्रदान करती है।
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 (मनरेगा) संक्षिप्त विवरण
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 (मनरेगा)
यह दस्तावेज़ The Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act, 2005 (No. 42 of 2005) का संशोधित संस्करण है (20 अक्टूबर, 2010 तक संशोधित)। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब परिवारों को वित्तीय वर्ष में कम से कम सौ दिनों की गारंटीकृत मजदूरी रोजगार प्रदान करके आजीविका सुरक्षा को बढ़ाना है।
मुख्य बिंदु और प्रावधान
रोजगार की गारंटी: हर ग्रामीण परिवार के वयस्क सदस्य, जो अकुशल शारीरिक कार्य करने के इच्छुक हैं, उन्हें वित्तीय वर्ष में कम से कम एक सौ दिन का रोजगार दिया जाता है।
बेरोजगारी भत्ता: यदि आवेदन प्राप्ति के पंद्रह दिनों के भीतर रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो आवेदक दैनिक बेरोजगारी भत्ते के हकदार होंगे।
कार्यान्वयन और एजेंसियां: ग्राम पंचायत, पंचायत समिति (intermediate level), जिला पंचायत और जिला कार्यक्रम समन्वयक (District Programme Coordinator) इस योजना के क्रियान्वयन और निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit): योजना के तहत कराए जाने वाले कार्यों का सामाजिक अंकेक्षण ग्राम सभा द्वारा कम से कम हर छह महीने में एक बार किया जाना अनिवार्य है।
जॉब कार्ड: पंजीकृत परिवारों के वयस्क सदस्यों के लिए जॉब कार्ड जारी किया जाता है, जिसमें कार्य मांग, कार्य आवंटन और मजदूरी भुगतान का पूरा विवरण दर्ज होता है।
मजदूरी और सामग्री का अनुपात: ग्राम पंचायत स्तर पर कार्यों के निष्पादन में श्रम और सामग्री का अनुपात 60:40 बनाए रखा जाता है।
महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 (मनरेगा) - अवलोकन
महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 (मनरेगा)
यह दस्तावेज़ महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 (2005 का अधिनियम संख्यांक-42) का आधिकारिक विवरण है, जिसे विभिन्न संशोधनों के साथ प्रकाशित किया गया है। यह ग्रामीण क्षेत्रों में अकुशल शारीरिक कार्य करने के इच्छुक वयस्क सदस्यों वाले परिवारों को वित्तीय वर्ष में कम से कम सौ दिनों की गारंटीकृत मजदूरी रोजगार प्रदान करने का उपबंध करता है।
मुख्य बिंदु एवं विशेषताएं:
रोजगार की गारंटी: प्रत्येक ग्रामीण गृहस्थी जिसके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक कार्य करने के लिए स्वेच्छा से आगे आते हैं, उन्हें प्रति वित्तीय वर्ष कम से कम सौ दिनों का गारंटीकृत रोजगार प्रदान किया जाएगा।
आवेदन और जॉब कार्ड: ग्राम पंचायत स्तर पर पंजीकरण और जॉब कार्ड जारी करने की प्रक्रिया का प्रावधान है, जिसमें गृहस्थी के पंजीकृत वयस्क सदस्यों का विवरण और कार्य की मांग दर्ज की जाती है।
बेकारी भत्ता: यदि आवेदन प्राप्ति के 15 दिनों के भीतर या अग्रिम आवेदन की दशा में नियत तिथि से रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो आवेदक बेरोजगारी भत्ता पाने का हकदार होगा।
मजदूरी दर: न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, 1948 के अधीन निर्धारित दरों के अनुसार मजदूरी देय होगी, जो किसी भी स्थिति में साठ रुपए प्रतिदिन से कम नहीं होगी।
सामाजिक संपरीक्षा (Social Audit): पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए ग्राम सभा द्वारा अधिनियम के अधीन सभी परियोजनाओं की नियमित सामाजिक संपरीक्षा की जाएगी।
कार्यान्वयन प्राधिकारी: केंद्रीय परिषद, राज्य रोजगार गारंटी परिषद, जिला कार्यक्रम समन्वयक, कार्यक्रम अधिकारी, और ग्राम पंचायत स्तर पर विभिन्न प्रशासनिक उत्तरदायित्व तय किए गए हैं।
महात्मा गांधी नरेगा अंतर्गत ग्राम पंचायत स्तर पर संधारित किए जाने वाले 7 रजिस्टर
महात्मा गांधी नरेगा (MGNREGA) के अंतर्गत ग्राम पंचायत स्तर पर 7 अनिवार्य रजिस्टरों का संधारण
ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा सुशासन पहल के तहत महात्मा गांधी नरेगा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और रिकॉर्ड संधारण को सरल बनाने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर 7 अनिवार्य रजिस्टरों की रूपरेखा जारी की गई है। यह पुस्तिका ग्राम रोजगार सहायकों (GRS) और अन्य क्षेत्रीय पदाधिकारियों के लिए रिकॉर्ड संधारण को सुगम बनाती है।
ग्राम पंचायत स्तर पर संधारित किए जाने वाले 7 रजिस्टर:
रजिस्टर – I: जॉब कार्ड आवेदन, जॉब कार्ड पंजीकरण, जॉब कार्ड निर्गत और परिवार रोजगार संबंधी रिपोर्ट
रजिस्टर – II: ग्राम सभा की बैठक, कार्यवृत्त, संकल्प, कार्यों की प्राथमिकता प्राप्त सूची और विशेष सामाजिक लेखा-परीक्षा ग्राम सभा की बैठक एवं कार्यवृत्त की गई कार्रवाई
रजिस्टर – III: काम की मांग, कार्यों का आवंटन तथा मजदूरी का भुगतान रजिस्टर
रजिस्टर – IV: कार्य रजिस्टर (भाग क और भाग ख)
रजिस्टर – V: स्थायी परिसंपत्ति रजिस्टर (मनरेगा कार्य)
रजिस्टर – VI: शिकायत रजिस्टर
रजिस्टर – VII: सामग्री रजिस्टर
इन सभी रजिस्टरों को एनरेगासॉफ्ट (NREGASoft MIS) के माध्यम से प्राप्त करके और निर्धारित दिशा-निर्देशों व त माही/वार्षिक आधार पर भौतिक रजिस्टरों में संधारित किया जाना है।
सिरोही जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन और पुनर्सिमांकन - अधिसूचना
सिरोही जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए सिरोही जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्सिमांकन और नवसर्जन किया गया है। यह अधिसूचना 21 नवंबर 2025 को जारी की गई है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम का संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98, धारा-9, 10 एवं 101 के अंतर्गत।
कार्यान्वयन: जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार प्रस्तावों एवं आपत्तियों पर सुनवाई के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से सिरोही जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन किया गया है।
प्रभाव: अनुसूची में वर्णित नई पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात् पुरानी पंचायत समितियां कार्य करना बंद कर देंगी और नई पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
विस्तृत जानकारी के लिए राजस्थान राजपत्र, दिनांक 24 नवंबर 2025 का अवलोकन करें।
सीकर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनर्सिमांकन एवं नवसृजन - राजस्थान राजपत्र अधिसूचना
सीकर जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन और पुनर्सिमांकन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना (संख्या एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/845-, दिनांक 21 नवम्बर 2025) के अनुसार सीकर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनर्सिमांकन एवं नवसृजन किया गया है।
मुख्य विवरण
जारीकर्ता विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
अधिसूचना दिनांक: 21 नवम्बर 2025 (राजस्थान राजपत्र असाधारण में प्रकाशित - 24 नवम्बर 2025)
कानूनी संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा-98 की शक्तियों का प्रयोग करते हुए तथा धारा-9, 10 एवं 101 के अंतर्गत
जिला कलेक्टरों द्वारा निर्धारित प्रक्रिया, आपत्तियों के आमंत्रण एवं सुनवाई के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से सीकर जिले की विभिन्न पंचायत समितियों और उनमें सम्मिलित ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन व नवसृजन किया गया है।
महत्वपूर्ण बिंदु
शेड्यूल के अनुसार पुनर्भाषित पंचायत समितियां संबंधित क्षेत्र में अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
चुनावी प्रक्रिया और निर्धारित प्रावधानों के तहत पुरानी पंचायतों का कार्यकाल और नई पंचायतों का कार्यकाल तय किया जाएगा।
संबधित पंचायत समितियों और ग्राम पंचायतों की पूरी सूची राजपत्र अधिसूचना में संलग्न है।
राजसमंद जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन और नवसृजन - अधिसूचना 2025
राजसमंद जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजसमंद जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन के संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र (असाधारण) दिनांक 24 नवंबर 2025 को प्रकाशित की गई है।
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना क्रमांक: एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/842 (दिनांक 21 नवंबर 2025)
अधिनियम संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए, तथा धारा-9, 10 एवं 101 के अंतर्गत प्राप्त शक्तियों के तहत यह पुनर्गठन किया गया है।
प्रभावित क्षेत्र: राजसमंद जिले की पंचायत समितियां (जैसे आमेट, भीम, कुंभलगढ़, रेलमगरा और राजसमंद) और उनमें सम्मिलित ग्राम पंचायतें।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में वर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात, उक्त जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो अनुसूची के स्तंभ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
अधिक जानकारी के लिए कृपया ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की आधिकारिक अधिसूचना देखें।
जालोर जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्सীमांकन और नवसृजन - अधिसूचना दिनांक 21 नवंबर 2025
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा राजस्थान राजपत्र में जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/831 दिनांक 21 नवंबर 2025 के अंतर्गत जालोर जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्सীमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम का संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 की प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए धारा-9, 10 एवं 101 में वर्णित शक्तियों के तहत यह कार्रवाई की गई है।
जिला कलेक्टर की भूमिका: जिला कलेक्टरों द्वारा प्रस्ताव तैयार करने, सार्वजनिक अवलोकन के लिए प्रसारित करने, एक माह की अवधि में आपत्तियों पर सुनवाई करने तथा राज्य सरकार से अनुमोदन प्राप्त करने के पश्चात यह पुनर्गठन लागू किया गया है।
प्रभाव: अनुसूची में वर्णित पंचायत समितियों का पुनर्गठन/पुनर्सীमांकन/नवसृजन किया गया है तथा संबंधित पंचायत समितियों का कार्यकाल अनुसूची के अनुसार निर्धारित होगा।
यह अधिसूचना राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी की गई है।
डूंगरपुर जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन एवं नवसृजन - राजस्थान राजपत्र अधिसूचना
डूंगरपुर जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान राजपत्र (असाधारण) में दिनांक 24 नवम्बर, 2025 को एक महत्वपूर्ण अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंव/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/826 जारी की गई है।
यह अधिसूचना राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए, राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी की गई है। इसके तहत डूंगरपुर जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुर्नसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना क्रमांक: एफ.15(39)पंव/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/826 (दिनांक: नवम्बर 21, 2025)
संबंधित जिला: डूंगरपुर
प्रमुख प्रावधान: जिला कलेक्टर द्वारा तैयार प्रस्तावों एवं आपत्तियों पर विचार करने के पश्चात् राज्य सरकार के अनुमोदन से डूंगरपुर जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन किया गया है।
चुनाव पश्चात प्रभाव: अनुसूची के स्तम्भ संख्या 4 में वर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात्, उक्त जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो स्तम्भ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से ही विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बन्द कर देंगी, जिससे नई पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारम्भ हो सके।
विस्तृत जानकारी के लिए राजस्थान राजपत्र के भाग 6 (ग) का अवलोकन करें।
डीग जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन और नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
डीग जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा डीग जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन से संबंधित महत्वपूर्ण अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र (असाधारण) दिनांक 24 नवंबर, 2025 में प्रकाशित हुई है।
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना संख्या एवं दिनांक: संख्या एफ.15(39)पंव/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/823, दिनांक 21 नवंबर, 2025।
विधिक प्रावधान: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए डीग जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन किया गया है।
पुनर्गठित पंचायत समितियां: डीग जिले के अंतर्गत डीग, कुम्हेर, ब्रज नगर और सीकरि (सीकरी) पंचायत समितियों का पुनर्गठन एवं नवसृजन किया गया है।
कार्यकाल: अनुसूची में वर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात, उस जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो नई अनुसूची में शामिल नहीं हैं, वे कार्य करना बंद कर देंगी और नई पंचायत समितियों का कार्यकाल आरंभ होगा।
अधिक जानकारी के लिए कृपया मूल राजस्थान राजपत्र अधिसूचना देखें।
दौसा जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन और पुनर्सिमांकन - अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज (पंचायती राज विभाग) द्वारा राजस्थान राजपत्र (असाधारण) में दौसा जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्सिमांकन और नवसर्जन से संबंधित महत्वपूर्ण अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए जारी की गई है।
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना क्रमांक: संख्या एफ.15 (39) पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/822 दिनांक नवंबर 21, 2025 (राजस्थान राजपत्र दिनांक 24 नवंबर, 2025)।
अधिकार क्षेत्र: जिला कलेक्टर द्वारा तैयार किए गए प्रस्तावों, आपत्तियों पर सुनवाई और राज्य सरकार के अनुमोदन के पश्चात दौसा जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन किया गया है।
नयी व्यवस्था: अनुसूची के स्तूप 4 में वर्णित पुनर्गठित/नवसृजित पंचायत समितियां स्तूप 5 में दर्शित ग्राम पंचायतों पर अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तूप 4 में वर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात उस जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो स्तूप 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी, जिससे नई पंचायत समितियों का कार्यकाल आरंभ हो सके।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है।
चित्तौड़गढ़ जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन - अधिसूचना
चित्तौड़गढ़ जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा 98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए, चित्तौड़गढ़ जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन से संबंधित अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंचा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/820 दिनांक नवंबर 21, 2025 जारी की गई है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम व प्रावधान: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा 98 के अंतर्गत शक्तियों का प्रयोग करते हुए तथा जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार प्रस्तावों एवं आपत्तियों पर विचार करने के पश्चात यह पुनर्गठन किया गया है।
प्रभावित पंचायत समितियाँ: इस अधिसूचना के तहत चित्तौड़गढ़ जिले की प्रमुख पंचायत समितियों (जैसे बेगूूँ, गंगरार, चित्तौड़गढ़, कपासन, और भदेसर आदि) के अंतर्गत शामिल ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन और पुनर्रसीमांकन की सूची जारी की गई है।
कार्यकाल और चुनाव: अनुसूची में वर्णित नई पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात उस जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो अनुसूची में पूर्व में थीं, वे उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
विस्तृत विवरण और ग्राम पंचायतों की सूची के लिए मूल राजपत्र अधिसूचना देखें।
ब्यावर जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन और पुनर्रचना की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए ब्यावर जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रचना और नवसर्जन से संबंधित अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना दिनांक 21 नवंबर, 2025 (संख्या एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/815-) के तहत राजस्थान राजपत्र में प्रकाशित हुई है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम और संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-9 और 10 के प्रावधानों तथा विभागीय अधिसूचनाओं के अंतर्गत यह कार्रवाई की गई है।
पुनर्गठन का क्षेत्र: ब्यावर जिले की निम्नलिखित पंचायत समितियों (जैतारण, रायपुर, रास, जवाजा और नरबदखेड़ा) का पुनर्गठन/पुनर्रचना/नवसर्जन किया गया है।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात्, उस जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो स्तंभ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी, जिससे स्तंभ 4 में वर्णित पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
बालोतरा जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पांरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/811, दिनांक नवम्बर 21, 2025 के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए बालोतरा जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
संबद्ध अधिनियम: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-9, 10, 98 एवं 101।
जिला कलेक्टर की भूमिका: जिला कलेक्टरों द्वारा प्रस्ताव तैयार कर सार्वजनिक अवलोकन हेतु प्रसारित करने, एक माह की अवधि में आपत्तियां आमंत्रित करने तथा उन पर सुनवाई करने के पश्चात राज्य सरकार से अनुमोदन प्राप्त किया गया है।
कार्यकाल से संबंधित प्रावधान: अनुसूची के स्तम्भ संख्या 4 में यथावर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात, उस जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो स्तम्भ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से ही विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ हो सके।
डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा राज्यपाल की आज्ञा से यह अधिसूचना जारी की गई है।
बूंदी जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन और नवसृजन - राजस्थान राजपत्र अधिसूचना
बूंदी जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्सीमांकन और नवसृजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/819-, दिनांक नवंबर 21, 2025 के अनुसार, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए बूंदी जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्सीमांकन और नवসृजन किया गया है।
प्रमुख बिंदु
अधिनियम का संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98, 9, 10 एवं 101 के अंतर्गत।
कार्यान्वयन: जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार प्रस्तावों एवं आपत्तियों पर विचार करने और राज्य सरकार के अनुमोदन के पश्चात यह अधिसूचना जारी की गई है।
नया कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पुनर्गठित/नवसृजित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात्, स्तंभ 2 में वर्णित वर्तमान पंचायत समितियां उस तारीख से कार्य करना बंद कर देंगी और नई पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
पुनर्गठित पंचायत समितियां
हिंडोली
दबलान
नैनवा
केशोरायपाटन
लाखेरी
तालेड़ा
बूंदी
खटकड़
विस्तृत विवरण और ग्राम पंचायतों की सूची के लिए मूल राजपत्र अधिसूचना देखें।
बाड़मेर जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए बाड़मेर जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन से संबंधित अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना दिनांक 21 नवम्बर 2025 को जारी की गई है।
मुख्य बातें एवं विवरण
अधिनियम संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98, 9, 10 एवं 101 के अंतर्गत।
जिला: बाड़मेर
कार्यान्वयन प्रक्रिया: जिला कलेक्टरों द्वारा पूर्व में तैयार किए गए प्रस्तावों, आपत्तियों पर सुनवाई और आपत्तियों के आमंत्रण के उपरांत राज्य सरकार से अनुमोदन प्राप्त कर यह पुनर्गठन किया गया है।
निर्धारित व्यवस्था: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात्, स्तंभ 2 में उल्लेखित वर्तमान पंचायत समितियाँ इस तिथि से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी, जिससे नई पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित आधिकारिक राजपत्र एवं ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के निर्देशों का अवलोकन करें।
भीलवाड़ा जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन - राजस्थान राजपत्र अधिसूचना
भीलवाड़ा जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन एवं पुनर्रसीमांकन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/817, दिनांक नवंबर 21, 2025 के अनुसार, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए भीलवाड़ा जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा 98, 9, 10 एवं 101।
संबंधित विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
जारीकर्ता: राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव।
प्रक्रिया: जिला कलेक्टरों द्वारा प्रस्ताव तैयार कर, आपत्तियां आमंत्रित करने तथा राज्य सरकार से अनुमोदन प्राप्त करने के पश्चात यह पुनर्गठन किया गया है।
प्रभाव: अनुसूची में वर्णित नई पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात उस जिले की विद्यमान पंचायत समितियां कार्य करना बंद कर देंगी और नई पंचायत समितियों का कार्यकाल आरंभ होगा।
टोंक जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन - अधिसूचना दिनांक 21-11-2025
राजस्थान सरकार ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा टोंक जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन के संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना दिनांक 21-11-2025 (क्रमांक: एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/847) को जारी की गई है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-9, 10 एवं 101 की प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्य सरकार द्वारा यह पुनर्गठन किया गया है।
टोंक जिला पंचायत समितियां: जिला कलेक्टर द्वारा तैयार किए गए प्रस्तावों एवं आपत्तियों पर विचार करने के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से टोंक जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन/पुनर्रसीमांकन/नवसृजन किया गया है।
कार्यकाल और प्रभाव: संबंधित पंचायत समितियों के चुनावों के पश्चात उस जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो सूची में वर्णित हैं, इस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और अनुसूची में वर्णित नई पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
ब्यावर जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन और नवसृजन - अधिसूचना दिनांक 21-11-2025
ब्यावर जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा ब्यावर जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्सीमांकन और नवसृजन से संबंधित अधिसूचना जारी कर दी गई है। यह अधिसूचना क्रमांक एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/ 815 दिनांक 21-11-2025 को जारी की गई है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम के प्रावधान: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह कार्रवाई की गई है।
जिला कलेक्टर की भूमिका: जिला कलेक्टरों द्वारा प्रस्ताव तैयार करने, सार्वजनिक अवलोकन के लिए प्रसारित करने, एक माह की अवधि में आपत्तियां आमंत्रित करने और उन पर सुनवाई करने की प्रक्रिया के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से यह पुनर्गठन किया गया है।
पंचायत समितियों का कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में यथावर्णित पंचायत समितियों के चुनावों के पश्चात उस जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो अनुसूची के स्तंभ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से ही विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी।
विस्तृत विवरण और ग्राम पंचायतों की सूची के लिए मूल अधिसूचना देखें।
जयपुर जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन अधिसूचना
अधिसूचना विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जयपुर जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन के संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना आदेश क्रमांक एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/829, दिनांक 21-11-2025 के तहत जारी की गई है।
मुख्य बिंदु
अधिनियम के प्रावधान: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-9, 10 एवं 101 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्य सरकार द्वारा यह पुनर्गठन और पुनर्रसीमांकन किया गया है।
जिला कलेक्टर की कार्रवाई: संबंधित जिला कलेक्टर द्वारा प्रस्ताव तैयार कर सार्वजनिक अवलोकनार्थ एक माह की अवधि में आपत्तियां आमंत्रित करने तथा सुनवाई करने की निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के पश्चात राज्य सरकार से अनुमोदन प्राप्त किया गया है।
नया कार्यभार और नाम: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पुनर्गठित एवं नवसृजित पंचायत समितियां उसी नाम से जानी जाएंगी और निर्धारित स्थानीय क्षेत्र पर अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
चुनाव और कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात, उक्त जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो अनुसूची के स्तंभ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और उनका कार्यभार समाप्त माना जाएगा, जिससे नई पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
चूरू जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन और नवसृजन - अधिसूचना 21-11-2025
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), जयपुर द्वारा दिनांक 21-11-2025 को चूरू जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रोमांकित और नवसृजन के संबंध में एक महत्वपूर्ण अधिसूचना जारी की गई है (क्रमांक: एफ.15(39)पंव्रा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/ 821)।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम का संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए तथा धारा-9, 10 एवं 101 में वर्णित शक्तियों के अंतर्गत यह पुनर्गठन किया गया है।
कार्यान्वयन: जिला कलेक्टर द्वारा तैयार किए गए प्रस्तावों और आपत्तियों पर सुनवाई के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से चूरू जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन/पुनर्रोमांकित/नवसृजन किया गया है।
नया कार्यकाल: संबंधित अनुसूचियों में वर्णित नई पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात, उस जिले की विद्यमान पंचायत समितियां इस तारीख से कार्य करना बंद कर देंगी और नई पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
नागौर जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन एवं नवसृजन - अधिसूचना दिनांक 21.11.2025
राजस्थान सरकार ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा नागौर जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन एवं नवसृजन के संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना दिनांक 21-11-2025 (क्रमांक: एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/838) को जारी की गई है।
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना का आधार: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 की धारा-9, 10 एवं 101 में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए तथा जिला कलेक्टर नागौर द्वारा तैयार प्रस्तावों एवं आपत्तियों पर विचार के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से यह पुनर्गठन किया गया है।
पंचायत समितियों का पुनर्गठन: नागौर जिले की वर्तमान पंचायत समितियों और उनमें सम्मिलित ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन एवं नवसृजन किया गया है, जिसके तहत नागौर, श्रीबालाजी, रियांवड़ी, मेड़ता सिटी, मेड़ता रोड, भैरूंदा, जायल, डेह, मूंडवा, डेगाना, खींवसर और पांचौड़ी जैसी पंचायत समितियां शामिल हैं।
अधिकारिता: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पुनर्गठित/नवसृजित पंचायत समितियां स्तंभ 5 में वर्णित ग्राम पंचायतों के क्षेत्र पर अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात, उक्त जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो अनुसूची के स्तंभ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है।
फलोदी जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन और नवसृजन - अधिसूचना दिनांक 21-11-2025
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम सं. 13) की धारा-9, 10 एवं 101 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए फलोदी जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन के संबंध में अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना दिनांक 21-11-2025 (क्रमांक: एफ.15(39)पंवरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/840) को जारी की गई है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम और प्रावधान: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-9, 10 और 101 के अंतर्गत शक्तियों का प्रयोग।
जिला कलेक्टर की कार्यवाही: जिला कलेक्टर द्वारा तैयार किए गए प्रस्तावों, सार्वजनिक अवलोकन और एक माह की अवधि में प्राप्त आपत्तियों पर सुनवाई के पश्चात राज्य सरकार से अनुमोदन प्राप्त किया गया है।
कार्यकाल प्रारंभ: अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में यथावर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात, उक्त जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो अनुसूची के स्तंभ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से ही विद्यमान नहीं रहेंगी और अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में वर्णित पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
विस्तृत जानकारी के लिए संलग्न दस्तावेज या संबंधित विभाग के आदेश का अवलोकन करें।
बाड़मेर जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन - अधिसूचना 21 नवंबर 2025
बाड़मेर जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा बाड़मेर जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन से संबंधित अधिसूचना जारी कर दी गई है। यह अधिसूचना दिनांक 21-11-2025 को जारी की गई है, जिसका पत्र क्रमांक एफ.15(39)पंवरे/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/815 है।
मुख्य बिंदु:
विभागीय निर्देश: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-9, 10 एवं 101 में प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए जिला कलेक्टर द्वारा प्रस्ताव तैयार किए गए थे।
अनुमोदन पश्चात कार्रवाई: राज्य सरकार से अनुमोदन के पश्चात बाड़मेर जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन और पुनर्रसीमांकन किया गया है।
चुनाव और कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में वर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात, उक्त जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो स्तंभ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से बंद हो जाएंगी और स्तंभ संख्या 4 में वर्णित पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
विस्तृत जानकारी और पंचायत समिति वार सम्मिलित ग्राम पंचायतों की सूची के लिए मूल अधिसूचना देखें।
जोधपुर जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन आदेश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/833 दिनांक 21-11-2025 के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 की शक्तियों का उपयोग करते हुए जोधपुर जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-9, 10 एवं 101 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग।
कार्यान्वयन प्रक्रिया: जिला कलेक्टर द्वारा तैयार प्रस्तावों, सार्वजनिक अवलोकन और आपत्तियों के आमंत्रण के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से यह अधिसूचना जारी की गई है।
अधिकारिता: जोधपुर जिले की पुनर्गठित/पुनर्रसीमांकित एवं नवसृजित पंचायत समितियां अनुसूची के अनुसार संबंधित क्षेत्राधिकार का प्रयोग करेंगी।
कार्यकाल और चुनाव: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात, उक्त जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो अनुसूची के स्तंभ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारम्भ होगा।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से शासन सचिव (डॉ. जोगा राम) द्वारा दिनांक 21.11.2025 को जारी किया गया है।
बाड़मेर जिला परिषद की वर्तमान पंचायत समितियों व ग्राम पंचायतों की स्थिति
बाड़मेर जिला परिषद की पंचायत समितियां एवं ग्राम पंचायतें
यह दस्तावेज बाड़मेर जिला परिषद के अंतर्गत वर्तमान पंचायत समितियों और ग्राम पंचायतों की स्थिति की जानकारी प्रदान करता है। इसमें विभिन्न पंचायत समितियों के अंतर्गत पुनर्गठन सहित ग्राम पंचायतों की कुल संख्या और वर्तमान ग्राम पंचायतों की संख्या दर्शायी गई है।
मुख्य बिंदु:
डूगेरों का तला, विशाला, बाटाडू, लीलसर, मांगता और भियाड़ पंचायत समितियां नवसृजित हैं।
फागलिया, गडरारोड, रामसर और सेड़वा पंचायत समितियों की सीमा में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है।
बाड़मेर जिला परिषद के अंतर्गत कुल ग्राम पंचायतों का विवरण दिया गया है।
बालोतरा जिले की पंचायत समिति पायला कला से 2 ग्राम पंचायत खुडाला व नई उन्दरी पुनर्गठन के बाद गुड़ामालानी पंचायत समिति में हैं।
बालोतरा जिले की पंचायत समिति बायतु से 25 ग्राम पंचायतें (पुनर्गठन सहित) बाटाडू पंचायत समिति में हैं।
डूंगरपुर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नए सृजन की अंतिम अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान राजपत्र (असाधारण) दिनांक 21 नवंबर, 2025 में डूंगरपुर जिले के संबंध में एक महत्वपूर्ण अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/785 (दिनांक 20 नवंबर, 2025) जारी की गई है।
यह अधिसूचना राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए तथा धारा-9, 10 एवं 101 के प्रावधानों के अंतर्गत जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार प्रस्तावों और आपत्तियों पर सुनवाई के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से जारी की गई है।
मुख्य बिंदु:
पुनर्गठित क्षेत्र: डूंगरपुर जिले की विभिन्न पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नए सृजन का कार्य पूरा कर लिया गया है।
अधिकारिता: अनुसूची के स्तम्भ 4 में यथानामित ग्राम पंचायतें संबंधित स्तम्भ 5 में वर्णित स्थानीय क्षेत्रों पर अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
कार्यकाल और प्रभाव: अनुसूची के स्तम्भ 4 में वर्णित नई/पुनर्गठित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, स्तम्भ 2 में दर्शित पुरानी विद्यमान ग्राम पंचायतें उस तारीख से अस्तित्व में नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
शामिल पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के तहत सागवाड़ा, गलियाकोट, पालेदवल, दोवड़ा, डूंगरपुर, झोंथरी, आसपुर, साबला, चिखली, सीमलवाड़ा, गामड़ी अहाडा और बिछीवाड़ा पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाले राजस्व ग्रामों और ग्राम पंचायतों का विवरण राजपत्र में प्रकाशित किया गया है।
विस्तृत विवरण एवं राजस्व ग्रामों की सूची के लिए कृपया संलग्न मूल राजपत्र अधिसूचना देखें।
कोटपूतली-बहरोड़ जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/797 (दिनांक 20 नवम्बर 2025) के अंतर्गत राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए कोटपूतली-बहरोड़ जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन एवं नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम व संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-9, 10, 101 एवं 98 के तहत यह कार्रवाई की गई है।
जिला कलेक्टर के प्रस्ताव: संबंधित जिला कलेक्टर द्वारा तैयार प्रस्तावों, सार्वजनिक अवलोकन, आपत्तियों के आमंत्रण तथा सुनवाई की प्रक्रिया के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से यह अधिसूचना जारी की गई है।
पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के दायरे में बानसूर, बहरोड़, कोटपूतली, नारायणपुर, नीमराना, पाटन और विराट नगर पंचायत समितियां शामिल हैं।
कार्यकाल की स्थिति: अनुसूची के स्तम्भ संख्या 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, उक्तानुसार जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो स्तम्भ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
राज्यपाल की आज्ञा से, डॉ. जोगा राम, शासन सचिव।
बारां जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन - अधिसूचना 2025
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग - अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा 98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, बारां जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन से संबंधित आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र (असाधारण) दिनांक 21 नवम्बर 2025 में प्रकाशित हुई है।
प्रमुख बिंदु
संबंधित विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
आदेश संख्या: संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/772, दिनांक 20 नवम्बर 2025।
कार्यान्वयन: जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार किए गए प्रस्तावों, आपत्तियों पर सुनवाई और राज्य सरकार के अनुमोदन के पश्चात बारां जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों और उनमें सम्मिलित राजस्व ग्रामों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, उक्त जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो स्तंभ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई वर्णित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
अधिक जानकारी के लिए कृपया मूल राजस्थान राजपत्र अधिसूचना देखें।
सवाई माधोपुर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/804 (दिनांक नवंबर 20, 2025) के माध्यम से सवाई माधोपुर जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन की आधिकारिक घोषणा की गई है।
यह कार्रवाई राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए तथा पूर्व अधिसूचना दिनांक 10.01.2025 के क्रम में जिला कलेक्टर द्वारा तैयार प्रस्तावों और आपत्तियों पर सुनवाई के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से की गई है।
मुख्य बिंदु:
सواسई माधोपुर जिला के अंतर्गत आने वाली पंचायत समितियों (जैसे बामनवास, बौंली, चौथ का बरवाड़ा, गंगापुरसिटी, खण्डार, मलारना डूंगर, सवाई माधोपुर आदि) में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन और नवसृजन किया गया है।
निसृत एवं पुनर्गठित ग्राम पंचायतें अनुसूची के स्तंभ-4 में वर्णित नामों से जानी जाएंगी तथा स्तंभ-5 में दर्शाए गए राजस्व ग्रामों पर अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
संबंधित पंचायत समितियों में नई पंचायतों के कार्यप्रारंभ के साथ ही पुरानी निर्धारित ग्राम पंचायतें अस्तित्व में नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी।
यह अधिसूचना राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी की गई है।
टोंक जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन एवं नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
टोंक जिले की ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन और पुनसीमांकन की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए टोंक जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन से संबंधित आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र (असाधारण) दिनांक 21 नवंबर, 2025 में प्रकाशित की गई है।
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
अधिकार क्षेत्र: टोंक जिले के अंतर्गत आने वाली विभिन्न पंचायत समितियां जैसे टोंक, निवाई, पीपलू, मालपुरा, टोडारायसिंह और उनियारा।
कार्यान्वयन प्रक्रिया: जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार किए गए प्रस्तावों एवं अभिशंषाओं के परीक्षण के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से टोंक जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
कार्यकाल और प्रभाव: अनुसूची के स्तम्भ संख्या 4 में वर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, उक्त जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो स्तम्भ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से ही विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
विस्तृत विवरण और ग्राम-वार सूची के लिए संलग्न आधिकारिक राजपत्र अधिसूचना देखें।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग - सलूंबर जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन एवं नवसृजन अधिसूचना
अधिसूचना विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/803 दिनांक 20 नवंबर 2025 के अंतर्गत, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए सलूंबर जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन एवं नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु
अधिनियम व निर्देश: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-9, 10 एवं 101 में वर्णित शक्तियों तथा विभागीय अधिसूचना दिनांक 10.01.2025 के तहत जिला कलेक्टर को प्रस्ताव तैयार करने, सार्वजनिक अवलोकन के लिए प्रसारित करने, आपत्तियां आमंत्रित करने और सुनवाई हेतु अधिकृत किया गया था।
राज्य सरकार का अनुमोदन: जिला कलेक्टरों द्वारा कार्यवाही किए जाने, प्रस्तावों एवं अभिशंषाओं का परीक्षण करने के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से सलूंबर जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन/पुनरसीमांकन/नवसृजन किया गया है।
शामिल पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के तहत पंचायत समिति झल्लारा, जयसमंद, लसाड़िया, सलूंबर, सराडा और सेमारी के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों एवं उनमें सम्मिलित राजस्व ग्रामों की सूची में परिवर्तन किया गया है।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, उस जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो स्तंभ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
भरतपुर जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन अधिसूचना
भरतपुर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन एवं नवसृजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए भरतपुर जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है। यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र (अतिरिक्त) में दिनांक 21 नवंबर, 2025 को प्रकाशित की गई है।
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना संख्या: संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/775 (दिनांक नवंबर 20, 2025)।
संबद्ध जिला: भरतपुर, राजस्थान।
शामिल पंचायत समितियां: बयाना, भुसावर, नदबई, रूपबास, सेवर, उच्चैन और वैर।
कार्यकाल और प्रभाव: अनुसूची के स्तम्भ संख्या 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात उक्त जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो अनुसूची के स्तम्भ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से ही विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
प्रतापगढ़ जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुन सीमांकन और नवसृजन - राजस्थान राजपत्र अधिसूचना
प्रतापगढ़ जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन एवं पुनसीमांकन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/801 (दिनांक नवंबर 20, 2025) के अंतर्गत राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए प्रतापगढ़ जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिनीम संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-9, 10 एवं 101 के प्रावधानों के तहत यह प्रक्रिया पूर्ण की गई है।
संबंधित पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के दायरे में प्रतापगढ़ जिले की धरियावद, पीपलखूट, सुहागपुरा, धमोतर, प्रतापगढ़, अरनोद, दलोट और छोटीसादड़ी पंचायत समितियां शामिल हैं।
कार्यकाल प्रभाव: अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, विद्यमान ग्राम पंचायतें (जो स्तंभ संख्या 2 में वर्णित हैं) उस तारीख से अस्तित्व में नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
जारीकर्ता: राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
जैसलमेर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
जैसलमेर जिला ग्राम पंचायत पुनर्गठन अधिसूचना 2025
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/789 (दिनांक नवम्बर 20, 2025) के तहत जैसलमेर जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन एवं नवसृजन किया गया है। यह कार्रवाई राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा 98 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए की गई है।
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना दिनांक: नवम्बर 20, 2025
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
कार्यान्वयन: अनुसूची के स्तम्भ 4 में वर्णित नई/पुनर्गठित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, स्तम्भ 2 में उल्लेखित मौजूदा ग्राम पंचायतें उस तारीख से अस्तित्व में नहीं रहेंगी और उनका कार्य बंद हो जाएगा, जिससे नई पुनर्गठित पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
विस्तृत जानकारी और ग्रामवार राजस्व गांवों की सूची के लिए मूल राजस्थान राजपत्र (असाधारण) दिनांक 21 नवम्बर 2025 का अवलोकन करें।
करौली जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन अधिसूचना
करौली जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/794 दिनांक 20 नवम्बर, 2025 के माध्यम से करौली जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम और शक्तियाँ: यह कार्रवाई राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों और धारा-9, 10 एवं 101 के अंतर्गत राज्य सरकार द्वारा जिला कलेक्टर को प्रदत्त अधिकारों के आधार पर की गई है।
कार्यान्वयन: जिला कलेक्टर द्वारा तैयार प्रस्तावों, सार्वजनिक अवलोकन, आपत्तियों के आमंत्रण और सुनवाई के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से करौली जिले की विभिन्न पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन व नवसृजन किया गया है।
शामिल पंचायत समितियां: इस अधिसूचना में मण्डरायल, हिण्डौन, टोडाभीम, श्रीमहावीरजी, करौली, मासलपुर और नादौती पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाले राजस्व ग्रामों और ग्राम पंचायतों का विवरण अनुसूची के अनुसार निर्धारित किया गया है।
प्रभावी तिथि: अनुसूची में वर्णित नई ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, पूर्ववर्ती विद्यमान ग्राम पंचायतें उस तिथि से कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
यह अधिसूचना राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा जारी की गई है।
धौलपुर जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा 98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए धौलपुर जिले की ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र (असाधारण) दिनांक 21 नवंबर 2025 में प्रकाशित की गई है, जिसके अंतर्गत धौलपुर जिले के विभिन्न क्षेत्रों एवं पंचायत समितियों (जैसे बाड़ी, बसेड़ी, धौलपुर, राजाखेड़ा, सैंपऊ, सरमथुरा) में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम और संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धाराओं के तहत जिला कलेक्टर द्वारा तैयार प्रस्तावों और आपत्तियों पर सुनवाई के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से यह पुनर्गठन किया गया है।
कार्यान्वयन: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, स्तंभ 2 में उल्लेखित पूर्ववर्ती ग्राम पंचायतें उस तारीख से अस्तित्व में नहीं रहेंगी और उनका कार्यकाल समाप्त माना जाएगा।
संबंधित पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के दायरे में बाड़ी, बसेड़ी, धौलपुर, राजाखेड़ा, सैंपऊ और सरमथुरा पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाले राजस्व ग्रामों और ग्राम पंचायतों का नया सीमांकन किया गया है।
अधिक जानकारी के लिए कृपया ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार की आधिकारिक अधिसूचना देखें।
ब्यावर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन एवं निसृजन से संबंधित अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), जयपुर द्वारा जारी अधिसूचना (संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/774, दिनांक 20 नवंबर 2025) के अनुसार, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए ब्यावर जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन एवं निसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु एवं प्रक्रिया:
संबद्ध अधिनियम एवं निर्देश: यह कार्रवाई राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-9, 10, 98 एवं 101 के प्रावधानों और पूर्व विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/02 दिनांक 10.01.2025 के अंतर्गत जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार प्रस्तावों, आपत्तियों के आमंत्रण, सुनवाई तथा राज्य सरकार के अनुमोदन के पश्चात की गई है।
ग्राम पंचायतों का क्षेत्राधिकार: इस अधिसूचना के तहत पुनर्गठित, पुनसीमांकित एवं नवसृजित ग्राम पंचायतें अपने निर्धारित नामों और राजस्व ग्रामों के स्थानीय क्षेत्र के अनुसार अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
कार्यकाल: अनुसूची में वर्णित ग्राम पंचायतों के चुनावों के पश्चात उस जिले की विद्यमान ग्राम पंचायतें, जो पुनर्गठन से प्रभावित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
शामिल पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के अंतर्गत मुख्य रूप से पंचायत समिति बदनोर, जवाजा, जैतारण, रायपुर और मसूदा के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों एवं उनके राजस्व ग्रामों का पुनर्गठन किया गया है।
विस्तृत विवरण एवं सूची के लिए संलग्न राजपत्र का अवलोकन करें।
कोटा जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नए सृजन की अधिसूचना
राजकीय अधिसूचना और उद्देश्य
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी इस आधिकारिक अधिसूचना (संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/796, दिनांक 20 नवंबर, 2025) के माध्यम से कोटा जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नए सृजन की जानकारी दी गई है। यह कार्रवाई राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए, धारा-9, 10 एवं 101 के प्रावधानों के अंतर्गत की गई है।
मुख्य बिंदु एवं प्रक्रिया
जिला कलेक्टर द्वारा प्रस्ताव: संबंधित जिले के जिला कलेक्टर ने नियमानुसार प्रस्ताव तैयार कर सार्वजनिक अवलोकन के लिए प्रसारित किए थे और एक माह की अवधि में आपत्तियां आमंत्रित कर उनकी सुनवाई की थी।
राज्य सरकार का अनुमोदन: जिला कलेक्टरों द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों एवं अभिशंषाओं का परीक्षण करने के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से कोटा जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन/पुनरसीमांकन/निसृजन किया गया है।
नामकरण और अधिकारिता: अनुसूची के स्तम्भ 4 में वर्णित पुनर्गठित/पुनरसीमांकित/नवसृजित ग्राम पंचायतें उसी नाम से जानी जाएंगी और स्तम्भ 5 में दर्शाए गए स्थानीय क्षेत्र व राजस्व ग्रामों पर अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
कार्यकाल की शुरुआत: अनुसूची के स्तम्भ 4 में वर्णित नई ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, स्तम्भ 2 में दर्शाई गई विद्यमान ग्राम पंचायतें उस तारीख से अस्तित्व में नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी, जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
संबद्ध पंचायत समितियां
इस अधिसूचना के अंतर्गत कोटा जिले की विभिन्न पंचायत समितियों (जैसे सांगोद, खैराबाद, सुल्तानपुर, लाडपुरा आदि) के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों एवं उनके राजस्व ग्रामों में पुनर्गठन और फेरबदल किया गया है। विस्तृत विवरण के लिए राजस्थान राजपत्र, दिनांक 21 नवंबर 2025 का अवलोकन किया जा सकता है।
नोट: यह पोस्ट संलग्न राजपत्र अधिसूचना पर आधारित है।
फलौदी जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन एवं नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए तथा धारा-9, 10 एवं 101 में वर्णित शक्तियों के अंतर्गत, संबंधित जिले के जिला कलेक्टर द्वारा तैयार किए गए प्रस्तावों एवं अभिशंषाओं का परीक्षण कर राज्य सरकार से अनुमोदन प्राप्त करने के पश्चात फलौदी जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन एवं नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
प्रभावित पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के तहत फलौदी जिले की विभिन्न पंचायत समितियों (जैसे बापणी, आऊ, फलौदी, देचू, बाप, घंटियाली, लोहावट आदि) के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों और उनके राजस्व गांवों का पुनर्गठन व पुनसीमांकन किया गया है।
नया नाम एवं मुख्यालय: पुनर्गठित/नवसृजित ग्राम पंचायतें उसी नाम से जानी जाएंगी जो अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित हैं और उनकी अधिकारिता का स्थानीय क्षेत्र स्तंभ 5 के अनुसार होगा।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, संबंधित जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो अनुसूची के स्तंभ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
यह अधिसूचना राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी की गई है।
सिरोही जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन एवं नवसृजन - अधिसूचना 2025
सिरोही जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन एवं नवसृजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान राजपत्र में दिनांक 20 नवंबर 2025 की अधिसूचना (संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/806) के माध्यम से सिरोही जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
प्रमुख बिंदु
अधिनियम व संदर्भ: यह कार्रवाई राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए की गई है।
संबंधित पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के तहत पिंडवाड़ा, आबूरोड, शिवगंज, रेवदर और सिरोही पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन किया गया है।
कार्यकाल और प्रभाव: अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में वर्णित पुनर्गठित/नवसृजित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, स्तंभ संख्या 2 में उल्लिखित वर्तमान ग्राम पंचायतें उस तारीख से अस्तित्व में नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी, जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
डीग जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
डीग जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन एवं पुनरसीमांकन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/782 (दिनांक नवंबर 20, 2025) के अंतर्गत राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा 9, 10, 101 एवं धारा 98 के प्रावधानों के तहत डीग जिले की विभिन्न पंचायत समितियों के अंतर्गत ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु एवं प्रक्रिया
सक्षम प्राधिकारी की कार्रवाई: जिला कलेक्टरों द्वारा नियमानुसार प्रस्ताव तैयार कर, सार्वजनिक अवलोकन हेतु प्रसारित कर एक माह की अवधि में आपत्तियां आमंत्रित करने तथा सुनवाई करने की प्रक्रिया पूरी की गई।
राज्य सरकार का अनुमोदन: जिला कलेक्टरों द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों एवं अभिशंषाओं के परीक्षण के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से डीग जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन/पुनरसीमांकन/नवसृजन किया गया है।
अधिकारिता और कार्यक्षेत्र: अनुसूची के स्तम्भ 4 में वर्णित पुनर्गठित एवं नवसृजित ग्राम पंचायतें स्तम्भ 5 में उल्लेखित राजस्व गांवों पर अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तम्भ 4 में वर्णित नई ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, स्तम्भ 2 में उल्लेखित विद्यमान ग्राम पंचायतें उस तारीख से अस्तित्व में नहीं रहेंगी और उनका कार्य समाप्त हो जाएगा, जिसके बाद नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
शामिल पंचायत समितियां
इस अधिसूचना के अंतर्गत डीग जिले की प्रमुख पंचायत समितियों (जैसे सीकरी, पहाड़ी, कुम्हेर, कामाँ, नगर और डीग) के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों और उनसे संबंधित राजस्व गांवों का विस्तृत विवरण राजस्थान राजपत्र (अतिरिक्त) दिनांक 21 नवंबर 2025 में प्रकाशित अनुसूची के अनुसार निर्धारित किया गया है।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है।
बाँसवाडा जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) अधिसूचना
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/771 (दिनांक नवंबर 20, 2025) के अंतर्गत राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए बाँसवाडा जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
प्रमुख मुख्य बिंदु:
अधिनियम एवं संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-9, 10, 98 एवं 101 के अंतर्गत संबंधित जिला कलेक्टर द्वारा तैयार प्रस्तावों और अनुशंसाओं के परीक्षण के पश्चात यह अधिसूचना जारी की गई है।
शामिल पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के तहत बाँसवाडा जिले की विभिन्न पंचायत समितियों (जैसे आनन्दपुरी, अरथुना, बागीदौरा, बाँसवाडा, छोटी सरवा, छोटी सरवन, गांगडतलाई, गढ़ी, घाटोल, कुशलगढ़, सज्जनगढ़, तलवाडा आदि) के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन एवं पुनसीमांकन किया गया है।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तम्भ संख्या 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात उक्त जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो अनुसूची के स्तम्भ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
यह अधिसूचना राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी की गई है।
दौसा जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन से संबंधित अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/781/- दिनांक नवम्बर 20, 2025 के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए दौसा जिले की विभिन्न पंचायत समितियों के अंतर्गत ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु एवं विवरण
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
अधिसूचना दिनांक: नवम्बर 20, 2025 (राजस्थान राजपत्र असाधारण में प्रकाशित)
जिला: दौसा
शामिल पंचायत समितियां: बांदीकुई, दौसा, लालसोट, महवा, मंडावर, नांगल राजावतान, रामगढ़ पचवारा, सिकंदरा, सिकराय और बैजूपाड़ा, बसवा।
इस अधिसूचना के अनुसार, संबंधित जिला कलेक्टर द्वारा तैयार प्रस्तावों तथा आपत्तियों पर सुनवाई और परीक्षण के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से दौसा जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन एवं नवसृजन किया गया है। अनुसूची में यथावर्णित नई ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात पुरानी विद्यमान ग्राम पंचायतें उस तिथि से अस्तित्व में नहीं रहेंगी और उनका कार्य समाप्त हो जाएगा जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
बीकानेर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा बीकानेर जिले में ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन के संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र (असाधारण) में दिनांक 20 नवंबर, 2025 को प्रकाशित हुई है।
अधिनियम संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98, 9, 10 एवं 101 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग।
कार्रवाई: जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार प्रस्तावों एवं अभिशषाओं का परीक्षण कर राज्य सरकार के अनुमोदन के पश्चात बीकानेर जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
शामिल पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के तहत लूनकरनसर, श्रीडूंगरगढ़, बीकानेर, नोखा, पाँचू, बज्जू खालसा, खाजूवाला, पूगल और हदां पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाले ग्राम क्षेत्रों का पुनर्गठन किया गया है।
कार्यकाल संबंधी निर्देश: अनुसूची के स्तम्भ संख्या 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात संबंधित जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो स्तम्भ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
अधिक जानकारी और विस्तृत राजस्व ग्राम सूची के लिए कृपया संलग्न मूल राजपत्र अधिसूचना देखें।
राजसमंद जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन एवं नवसृजन अधिसूचना
राजसमंद जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन और पुनसीमांकन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान राजपत्र में राजसमंद जिले की ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन, पुनसीमांकन एवं नवसृजन के संबंध में अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना दिनांक 20 नवंबर, 2025 को जारी की गई है, जिसके अंतर्गत राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का उपयोग किया गया है।
मुख्य बिंदु:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
जिला: राजसमंद
शामिल पंचायत समितियां: आमेट, भीम, रेलमगरा, राजसमंद और अन्य संबंधित क्षेत्र।
कार्यान्वयन: जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार प्रस्तावों और आपत्तियों पर सुनवाई के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से राजसमंद जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
नया कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, उस जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो अनुसूची के स्तंभ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
अधिक जानकारी के लिए कृपया राजस्थान राजपत्र (असाधारण) दिनांक 21 नवंबर, 2025 का अवलोकन करें।
हनुमानगढ़ जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनर्र्सीमांकन और नवसृजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवारा/2024/787 (दिनांक नवंबर 20, 2025) के अंतर्गत राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए हनुमानगढ़ जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनर्र्सीमांकन और नवसृजन किया गया है।
प्रमुख बातें एवं निर्देश
सम्बन्धित विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
प्रभावित क्षेत्र: हनुमानगढ़ जिले की पंचायत समितियां (भादरा, पीलीबंगा, संगरिया, टिब्बी, हनुमानगढ़, नोहर आदि) एवं उनके अंतर्गत आने वाले राजस्व ग्राम।
नया कार्यकाल: पुनर्गठित/नवसृजित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, पुरानी विद्यमान ग्राम पंचायतें उस तारीख से कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
अधिकारिता: प्रत्येक पुनर्गठित/नवसृजित ग्राम पंचायत अनुसूची के स्तम्भ 5 में वर्णित स्थानीय क्षेत्र व राजस्व ग्रामों पर अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेगी।
जयपुर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
जयपुर जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन एवं पुनरसीमांकन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी असाधारण राजपत्र अधिसूचना (संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/788, दिनांक 20 नवंबर, 2025) के अनुसार, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए जयपुर जिले की विभिन्न पंचायत समितियों के अंतर्गत ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
संबद्ध अधिनियम: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-9, 10, 98 एवं 101।
क्रियान्वयन: संबंधित जिला कलेक्टर द्वारा तैयार प्रस्तावों एवं आपत्तियों की सुनवाई के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से जयपुर जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन और नवसृजन किया गया है।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, विद्यमान ग्राम पंचायतें उस तारीख से कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
अलवर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
अलवर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन और पुनरसीमांकन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/769, दिनांक नवम्बर 20, 2025 (राजस्थान राजपत्र असाधिकार प्रकाशित, 21 नवम्बर 2025) के अंतर्गत अलवर जिले की विभिन्न पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन एवं नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु और प्रक्रिया
यह कार्रवाई राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए, धारा-9, 10 एवं 101 में वर्णित प्रावधानों के तहत जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार प्रस्तावों और आपत्तियों पर सुनवाई के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से की गई है।
अधिसूचना के अनुसार, अनुसूची के स्तम्भ 4 में वर्णित नई पुनर्गठित/नवसृजित ग्राम पंचायतें उसी नाम से जानी जाएंगी और स्तम्भ 5 में वर्णित स्थानीय क्षेत्र व राजस्व ग्रामों पर अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
अनुसूची के स्तम्भ 4 में यथावर्नित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात्, उस जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो स्तम्भ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
संबंधित पंचायत समितियां
इस अधिसूचना के तहत अलवर जिले की कई पंचायत समितियों (जैसे भनोर और अन्य संबंधित क्षेत्र) के अंतर्गत आने वाले राजस्व ग्रामों और ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन और पुनरसीमांकन किया गया है। विस्तृत जानकारी और ग्रामवार सूची के लिए आधिकारिक राजस्थान राजपत्र (21 नवंबर 2025) देखा जा सकता है।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है।
झालावाड़ जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन - अधिसूचना 20 नवंबर 2025
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंचा/2024/791- (दिनांक नवंबर 20, 2025) के अंतर्गत, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए झालावाड़ जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम एवं प्रावधान: यह कार्रवाई राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-9, 10, 98 एवं 101 के प्रावधानों तथा पूर्व में जारी विभागीय आदेशों के तहत जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार प्रस्तावों एवं राज्य सरकार के अनुमोदन के पश्चात की गई है।
प्रभावित पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के तहत झालावाड़ जिले की कई पंचायत समितियों (जैसे अकलेरा, भवानीमंडी, डग, झालरापाटन, खानपुर, मनोहरथाना और पिड़ावा मुख्यालय सुनेल) के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों एवं उनके राजस्व ग्रामों का पुनर्गठन किया गया है।
कार्यकाल एवं अस्तित्व: अनुसूची के स्तम्भ संख्या 4 में यथावर्णित पुनर्गठित/नवसृजित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, उस जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो अनुसूची के स्तम्भ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
विस्तृत ग्राम-वार अनुसूची और राजस्व ग्रामों की जानकारी के लिए कृपया राजस्थान राजपत्र (असाधारण) दिनांक 21 नवंबर 2025 देखें।
जोधपुर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन एवं नवसृजन - राजस्थान राजपत्र अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/793 (दिनांक नवंबर 20, 2025) के तहत जोधपुर जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है। यह कार्रवाई राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा 98 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए की गई है।
मुख्य बिंदु एवं प्रक्रिया:
अधिकार एवं प्रस्ताव: जिला कलेक्टरों को संबंधित ग्राम पंचायतों व पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन हेतु प्रस्ताव तैयार करने, सार्वजनिक अवलोकन के लिए प्रसारित करने, एक माह की अवधि में आपत्तियां आमंत्रित करने और उन पर सुनवाई करने के लिए अधिकृत किया गया था।
नया नामकरण और अधिकारिता: जिला कलेक्टरों द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों और अभिशंषाओं का परीक्षण करने तथा राज्य सरकार से अनुमोदन प्राप्त करने के पश्चात, जोधपुर जिले की पुनर्गठित/पुनसीमांकित/नवसृजित ग्राम पंचायतें अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित नाम से जानी जाएंगी और स्तंभ 5 में उल्लिखित स्थानीय क्षेत्र/राजस्व गांवों पर अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
कार्यकाल और निरंतरता: अनुसूची के स्तंभ 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, संबंधित जिले की वे विद्यमान ग्राम पंचायतें जो स्तंभ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
आज्ञा से: डॉ. जोगा राम, शासन सचिव, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
चूरू जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन - अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/780 दिनांक नवंबर 20, 2025 के अंतर्गत, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए चूरू जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना क्रमांक एवं दिनांक: संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/780, दिनांक नवंबर 20, 2025।
संबंधित विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
अधिनियम संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-9, 10, 98 और 101।
क्षेत्र: चूरू जिले की विभिन्न पंचायत समितियाँ (चूरू, बीदासर, सुजानगढ़, रतनगढ़, सरदारशहर, तारानगर, राजगढ़, सिद्धमुख)।
कार्यान्वयन: जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार प्रस्तावों एवं आपत्तियों पर सुनवाई के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से चूरू जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तम्भ 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात उस जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो स्तम्भ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से ही विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा यह अधिसूचना जारी की गई है।
सीकर जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन - राजस्थान राजपत्र अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/805 (दिनांक नवंबर 20, 2025) के माध्यम से राजस्थान राजपत्र में सीकर जिले की ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन से संबंधित आधिकारिक विवरण प्रकाशित किया गया है।
मुख्य बिंदु एवं प्रक्रिया
यह अधिसूचना राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए तथा धारा-9, 10 एवं 101 के अंतर्गत जारी निर्देशों के तहत लाई गई है।
जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार किए गए प्रस्तावों, सार्वजनिक अवलोकन, आपत्तियों के आमंत्रण और सुनवाई की प्रक्रिया के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से सीकर जिले की विभिन्न पंचायत समितियों (जैसे अजीतगढ़, दांतारामगढ़, पलसाना, धोद, खंडेला, लक्ष्मणगढ़, नेछवा, नीमकाथाना, पाटन, पिपराली, श्रीमाधोपुर) के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
अनुसूची में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, उस जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो अनुसूची के स्तंभ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
विस्तृत ग्राम-वार और पंचायत समिति-वार सूची के लिए संलग्न आधिकारिक राजपत्र दस्तावेज़ का अवलोकन करें।
पाली जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन - अधिसूचना 20 नवंबर 2025
पाली जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन एवं पुनसीमांकन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए पाली जिले के विभिन्न क्षेत्रों में ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन से संबंधित आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना दिनांक 20 नवंबर 2025 को राजस्थान राजपत्र (असाधारण) में प्रकाशित हुई है।
प्रमुख बिंदु
अधिनियम संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम सं. 13) की धारा-9, 10, 98 और 101 के प्रावधानों के अंतर्गत यह कार्रवाई की गई है।
संबंधित जिला: पाली जिला।
शामिल पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के तहत बगड़ी, देसूरी, मारवाड़ जंक्शन, रानी, रोहट, सोजत और सुमेरपुर पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन और नवसृजन किया गया है।
कार्यकाल और प्रभाव: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, संबंधित जिले की वे विद्यमान ग्राम पंचायतें जो स्तंभ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से अस्तित्व में नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है।
झुंझुनूं जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन एवं नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
झुंझुनूं जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन एवं नवसृजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/792 (दिनांक नवंबर 20, 2025) जारी की गई है। इसके माध्यम से झुंझुनूं जिले में विभिन्न ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन एवं नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु एवं प्रक्रिया
संवैधानिक प्रावधान: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा-9, 10 एवं 101 में वर्णित शक्तियों तथा विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/02 (दिनांक 10.01.2025) के तहत जिला कलेक्टर को प्रस्ताव तैयार करने, सार्वजनिक अवलोकन के लिए प्रसारित करने और एक माह की अवधि में आपत्तियां आमंत्रित कर सुनवाई करने हेतु अधिकृत किया गया था।
राज्य सरकार का अनुमोदन: जिला कलेक्टर्स द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों एवं अभिशंषाओं का परीक्षण करने के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से झुंझुनूं जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन/पुनसीमांकन/नवसृजन किया गया है।
अधिकारिता: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पुनर्गठित/नवसृजित ग्राम पंचायतें स्तंभ 5 में दर्शाए गए स्थानीय क्षेत्रों एवं राजस्व ग्रामों पर अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
विद्यमान पंचायतों का कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित नई ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात स्तंभ 2 में उल्लेखित वर्तमान ग्राम पंचायतें उस तारीख से अस्तित्व में नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी, जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
शामिल पंचायत समितियां
इस अधिसूचना के अंतर्गत झुंझुनूं जिले की निम्नलिखित पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों का पुनर्गठन किया गया है:
बुहाना
चिड़ावा
खेतडी
मण्डावा
नवलगढ़
पिलानी
सिंघाना
सूरजगढ़
उदयपुरवाटी
अलसीसर
झुंझुनूं
यह अधिसूचना राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी की गई है।
श्रीगंगानगर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन एवं नवसृजन - राजस्थान राजपत्र अधिसूचना
श्रीगंगानगर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन और नवसृजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/786, दिनांक 20 नवंबर 2025 के अनुसार, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए श्रीगंगानगर जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन एवं नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम व निर्देश: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-9, 10 एवं 101 के अंतर्गत जिला कलेक्टर द्वारा तैयार प्रस्तावों और अभिशंषाओं का परीक्षण कर राज्य सरकार के अनुमोदन के पश्चात यह अधिसूचना जारी की गई है।
कार्यान्वयन: अनुसूची के स्तम्भ संख्या 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात् उस जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो स्तम्भ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी, जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
संबद्ध पंचायत समितियां: इस अधिसूचना में श्रीगंगानगर जिले के अंतर्गत आने वाली विभिन्न पंचायत समितियों (जैसे श्रीगंगानगर, श्रीकरणपुर, पदमपुर, घड़साना, सूरतगढ़, अनूपगढ़, सादुलशहर आदि) के अंतर्गत आने वाले राजस्व ग्रामों और उनके मुख्यालयों की विस्तृत अनुसूची जारी की गई है।
यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र (असाधारण) दिनांक 21 नवंबर 2025 में प्रकाशित की गई है, जिसके अंतर्गत राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा हस्ताक्षर किए गए हैं।
बालोतरा जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग
बालोतरा जिले की ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी असाधारण राजपत्र अधिसूचना (संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/770, दिनांक नवम्बर 20, 2025) के अनुसार राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए बालोतरा जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिकार क्षेत्र और प्रभाव: इस अधिसूचना के तहत पुनर्गठित, पुनसीमांकित और नवसृजित ग्राम पंचायतें स्तम्भ 4 एवं 5 में दर्शाए गए स्थानीय क्षेत्रों और राजस्व ग्रामों के अनुसार अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तम्भ संख्या 4 में यथाور्णगत ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, उक्त जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो स्तम्भ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
संबंधित पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के अंतर्गत समदड़ी, कल्याणपुर, सिणधरी, पायला कलां, सिवाना, पादतू और गिडा पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में पुनर्गठन की कार्रवाई की गई है।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है।
बाड़मेर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीममार्कन और नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) अधिसूचना
यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र (असाधारण) में प्रकाशित की गई है। इसके अनुसार, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्य सरकार द्वारा बाड़मेर जिले के विभिन्न पंचायत समितियों के अंतर्गत ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीममार्कन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
संबद्ध विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार।
कार्रवाई का आधार: जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार किए गए प्रस्तावों, आपत्तियों पर सुनवाई और राज्य सरकार के अनुमोदन के पश्चात यह अंतिम अधिसूचना जारी की गई है।
प्रभाव: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित नई एवं पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल संबंधित पंचायतों के चुनावों के पश्चात प्रारंभ होगा, और स्तंभ 2 में उल्लेखित पुरानी पंचायतें उस तिथि से अस्तित्व में नहीं रहेंगी।
विस्तृत विवरण और पंचायत समिति वार (जैसे सेड़वा, रामसर, गडाररद, धोरीमन्ना, बायतू, शिव, गुड़ामालानी, फागलिया आदि) नवगठित ग्राम पंचायतों एवं उनमें सम्मिलित राजस्व ग्रामों की सूची आधिकारिक राजपत्र में उपलब्ध है।
ग्राम पंचायतों द्वारा स्वामित्व प्रमाण-पत्र, अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) तथा कुर्सीनामा / वारिस / उत्तराधिकारी प्रमाण-पत्र जारी न करने बाबत परिपत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के महत्वपूर्ण परिपत्र
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा ग्राम पंचायतों की शक्तियों औरकार्यों के संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए हैं। इन परिपत्रों के माध्यम से स्पष्ट किया गया है कि ग्रामपंचायतों द्वारा किन दस्तावेजों को जारी करने का कोई प्रावधान नहीं है।
मुख्य बिंदु:
स्वामित्व एवं अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC): क्रमांक एफ.4(16)दिशा-निर्देश/विधि/पंश/2016/325 दिनांक 17-4-2017 के अनुसार, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 एवं राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में ग्राम पंचायतों द्वारा स्वामित्व प्रमाण-पत्र अथवा किसी निजी भवन के विक्रय आदि के संबंध में अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) जारी करने का कोई प्रावधान नहीं है। अत: ऐसे प्रमाण-पत्र जारी न किए जाएं।
कुर्सीनामा / वारिस / उत्तराधिकारी प्रमाण-पत्र: क्रमांक एफ.139(16)निर्देश/विधि/पंश/2021/263 दिनांक 23-02-2021 एवं क्रमांक एफ.15(69)पंश्रावि/विधि/ग्रा.पं.मार्ग./जयपुर/2019/1801 दिनांक 30-08-2019 के अनुसार, सरपंचों या ग्राम पंचायतों द्वारा कुर्सीनामा, वारिस या उत्तराधिकारी प्रमाण-पत्र जारी किए जाने का भी पंचायती राज अधिनियम, 1994 व नियमों में कोई प्रावधान नहीं है। विधिक दृष्टि से अमान्य होने के कारण ऐसे प्रमाण-पत्र जारी करने से सरपंचों/ग्राम पंचायतों को अनावश्यक जांच का सामना करना पड़ सकता है।
समस्त संबंधित अधिकारियों, जिला कलक्टरों, मुख्य कार्यकारी अधिकारियों और विकास अधिकारियों को निर्देशित किया जाता है कि वे इन नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग - नया जिला परिषद ब्यावरा गठन अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-11 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए जिला परिषद, ब्यावर के गठन की अधिसूचना जारी की गई है।
क्षेत्राधिकार: राजस्व विभाग की पूर्ववर्ती अधिसूचनाओं के अंतर्गत अजमेर, पाली, भीलवाड़ा और राजसमंद जिलों के पुनर्गठन के फलस्वरूप नवगठित जिला ब्यावर के क्षेत्र को इसमें शामिल किया गया है (नगरीय क्षेत्रों को छोड़कर)।
कार्यान्वयन: जिला परिषद अजमेर, भीलवाड़ा, पाली और राजसमंद अपने वर्तमान स्वरूप में निर्धारित तिथि से कार्य करना बंद कर देंगी, जब तक कि नवीन जिला परिषद ब्यावर और पुनर्गठित जिला परिषदों का कार्यकाल प्रारंभ नहीं होता।
ग्राम पंचायतों में नियुक्त प्रशासकों के मानदेय भुगतान के संबंध में मार्गदर्शन
ग्राम पंचायतों में प्रशासकों के मानदेय भुगतान के संबंध में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद, श्रीगंगानगर को ग्राम पंचायतों में नियुक्त प्रशासकों के मानदेय भुगतान के संबंध में मार्गदर्शन जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
पत्राचार संदर्भ: आपका राजकाज क्रमांक 17879858 दिनांक 19.09.2025 के संदर्भ में।
विभाग का मार्गदर्शन: वर्तमान में ग्राम पंचायतों में नियुक्त प्रशासकों को मानदेय के संबंध में राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 एवं राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 में कोई प्रावधान नहीं है।
यह पत्र वित्तीय सलाहकार, कृष्ण कन्हैया मीणा द्वारा जारी किया गया है और इसकी प्रतिलिपि निजी सचिव, शासन सचिव एवं आयुक्त, पंचायती राज विभाग, जयपुर को सूचनार्थ प्रेषित की गई है।
पंचायती राज संस्थाओं के अधीन विद्यालय भवनों में रंग-ररोगन कार्य के संबंध में दिशा-निर्देश
पंचायती राज संस्थाओं के अधीन विद्यालय भवनों में रंग-ररोगन कार्य
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा राजकाज संदर्भ संख्या 18172438 (क्रमांक एफ 4(1111) परावि/पीसी/विविध/22-00409, दिनांक 28-01-2025) के तहत पंचायती राज संस्थाओं के अधीन आने वाले राजकीय विद्यालयों में रंग-रोगन कार्य करवाए जाने के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य निर्देश एवं बिंदु:
समयसीमा: राजकीय विद्यालय भवन में रंग-रोगन का कार्य मध्यावधि अवकाश (दीपावली अवकाश - दिनांक 13.10.2025 से दिनांक 24.10.2025) के मध्य अनिवार्य रूप से पूर्ण कराया जाना सुनिश्चित किया जाए।
विद्यालयों की सूची: इस हेतु जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक) से पंचायती राज संस्थाओं के अधीन राजकीय विद्यालयों की सूची प्राप्त की जावे।
वित्तीय प्रावधान: रंग-रोगन कार्य हेतु आवश्यकतानुसार राशि राज्य वित्त आयोग - षष्ठम योजना अंतर्गत व्यय की जा सकेगी, जिसमें अधिकतम ₹ 1.00 लाख (एक लाख रुपये तक की) सीमा तय की गई है।
गुणवत्ता एवं रंग: उच्च गुणवत्ता के पेंट/कलर का उपयोग किया जाए तथा प्राथमिकता से पर्यावरण-अनुकूल एवं दीर्घकालीन टिकाऊ पेंट का चयन हो। प्राथमिक/उच्च प्राथमिक विद्यालय भवनों पर संलग्न कलर-कोड के अनुसार ही रंग-ररोगन/पेंट किया जाना सुनिश्चित करें।
प्रगति रिपोर्ट: कार्य अधिकृत पद्धति से कराया जाए तथा प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर पूर्ण किए गए कार्य की प्रगति (पूर्व एवं पश्चात् स्थिति के फोटो सहित) जिला परिषद कार्यालय को प्रस्तुत कर विभाग को प्रेषित की जाए।
ग्राम पंचायतों में नियुक्त प्रशासकों के मानदेय भुगतान के संबंध में मार्गदर्शन
ग्राम पंचायतों में प्रशासकों के मानदेय भुगतान पर मार्गदर्शन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा ग्राम पंचायतों में नियुक्त प्रशासकों के मानदेय भुगतान के संबंध में मार्गदर्शन जारी किया गया है। यह पत्र मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद श्रीगंगानगर को संबोधित है।
मुख्य बिंदु:
विषय: ग्राम पंचायतों में नियुक्त प्रशासकों के मानदेय भुगतान के सम्बन्ध में मार्गदर्शन बाबत।
संदर्भ: आपका राजकाज क्रमांक 17879858 दिनांक 19.09.2025।
विभाग का स्पष्टीकरण: वर्तमान में ग्राम पंचायतों में नियुक्त प्रशासकों को मानदेय के सम्बन्ध में राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 एवं राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 में कोई प्रावधान नहीं है।
यह पत्र वित्तीय सलाहकार कृष्ण कन्हैया मीणा द्वारा जारी किया गया है तथा इसकी प्रतिलिपि निजी सचिव, शासन सचिव एवं आयुक्त, पंचायती राज विभाग, जयपुर को सूचनार्थ प्रेषित की गई है।
ग्राम पंचायतियों की कालावधि के दौरान पट्टे जारी करने के संबंध में निर्देश
ग्राम पंचायतों की कालावधि के दौरान पट्टे जारी करने के संबंध में दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा ग्राम पंचायतों की कालावधि के दौरान पट्टे जारी करने के संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
संदर्भ: विभागीय अधिसूचना दिनांक 16.01.2025
प्रशासनिक समिति का गठन: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा-95 के तहत जिन ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त हो गया है, उनमें निवर्तमान सरपंच को प्रशासक नियुक्त किया गया है तथा संबंधित ग्राम पंचायत के उप सरपंच एवं वार्ड पंचों को प्रशासक समिति का सदस्य बनाया गया है।
शक्तियों का प्रयोग: प्रशासक द्वारा अधिनियम और राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में वर्णित समस्त शक्तियों और कर्तव्यों का प्रयोग प्रशासनिक समिति की बैठक में परामर्श उपरांत किया जाएगा।
पट्टा आवंटन प्रक्रिया: पट्टा आवंटन से संबंधित कार्यवाही में राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के प्रावधानों के तहत जहाँ वार्ड पंच की कमेटी गठित किया जाना आवश्यक है, वहाँ प्रशासक द्वारा प्रशासनिक समिति के सदस्यों की कमेटी गठित कर पट्टा आवंटन संबंधी कार्यवाही की जाए।
यह आदेश डॉ. जोगाराम, शासन सचिव एवं आयुक्त, पंचायती राज विभाग द्वारा जारी किया गया है।
स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन बाबत महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
राजस्थान सरकार पंचायती राज विभाग द्वारा निर्देश
राजस्थान सरकार के पंचायती राज विभाग द्वारा क्रमांक: एफ 4(1)स्वामित्व/विधि/पंव्रा/2020/पार्ट-3/E-File - 00439 के अंतर्गत स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन के संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए हैं। यह आदेश शासन सचिव एवं आयुक्त डॉ. जोगा राम द्वारा जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
प्रशासक की नियुक्ति: राज्य की ऐसी ग्राम पंचायतें जिनका कार्यकाल दिनांक 16.01.2025, 11.03.2025 व 23.09.2025 तक समाप्त हो गया है और जिनके चुनाव अपरिहार्य कारणों से संपन्न नहीं हो पा रहे हैं, उनमें संबंधित ग्राम पंचायत के निवर्तमान सरपंच को प्रशासक नियुक्त किया गया है।
प्रशासनिक समिति का गठन: ग्राम पंचायतों के कार्यों के सुचारू संचालन के लिए प्रशासक की सहायता हेतु प्रशासनिक समिति गठित की गई है। इसमें कार्यकाल समाप्त होने से पूर्व संबंधित ग्राम पंचायत के उप सरपंच एवं वार्ड पंचों को सदस्य बनाया गया है।
सर्वे समिति में कार्य: विभागीय पत्र क्रमांक 48 दिनांक 18.01.2021 के अनुसार स्वामित्व योजनांतर्गत गठित सर्वे समिति में 2 वार्ड पंचों کے स्थान पर प्रशासनिक समिति के 2 सदस्यों द्वारा सर्वे समिति का कार्य संपादित किया जाएगा।
समस्त जिला कलेक्टरों और मुख्य कार्यकारी अधिकारियों, जिला परिषदों को इस योजना के सफल एवं समयबद्ध क्रियान्वयन हेतु आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
माननीय प्रधानमंत्री महोदय के दिनांक 25.09.2025 के कार्यक्रम के सीधे प्रसारण हेतु ग्राम पंचायत स्तर पर व्यवस्था के संबंध में
माननीय प्रधानमंत्री महोदय के कार्यक्रम के सीधे प्रसारण की व्यवस्था
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ 165(7)ले.ब./परावि/एसएफसी-6/2025-26 के अंतर्गत दिनांक 25.09.2025 को बांसवाड़ा में माननीय प्रधानमंत्री महोदय की उपस्थिति में होने वाले राज्य स्तरीय समारोह के लाइव प्रसारण को ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर दिखाने की समुचित व्यवस्था के संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु एवं वित्तीय स्वीकृति
कार्यक्रम: दिनांक 25.09.2025 को बांसवाड़ा में आयोजित होने वाले राज्य स्तरीय समारोह का जिला, ब्लॉक व ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर लाइव प्रसारण।
उद्देश्य: आमजन को सरकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त हो सके।
व्यवस्थाएं: टी.वी./स्क्रीन व्यवस्था, फर्नीचर, दरी, पेयजल आदि से संबंधित व्यय।
वित्तीय प्रावधान: छठे राज्य वित्त आयोग के अंतर्गत उपलब्ध अनुदान राशि से प्रति ग्राम पंचायत अधिकतम रु. 10,000/- (दस हजार रुपये) तक के व्यय/उपयोग करने की सहमति प्रदान की जाती है।
अनुमोदन: यह सहमति वित्त विभाग की आई.डी. संख्या 332501526 दिनांक 23.09.2025 द्वारा अनुमोदित है।
यह आदेश डॉ. जोंगा राम, शासन सचिव एवं आयुक्त, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा जारी किया गया है।
ग्राम पंचायतों में स्थित भारत निर्माण सेवा केंद्रों एवं ग्राम पंचायत भवनों की मरम्मत और रंग-रोगन के संबंध में दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग का महत्वपूर्ण निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा ग्राम पंचायतों में स्थित भारत निर्माण सेवा केंद्रों एवं ग्राम पंचायत भवनों की मरम्मत और एकरूप रंग-रोगन के संबंध में आदेश जारी किया गया है। यह आदेश क्रमांक एफ 4(1111) परावि/पीसी/विविध/22-00409, दिनांक 19.09.2025 के अंतर्गत जारी किया गया है, जिसके हस्ताक्षर डॉ. जोगा राम, शासन सचिव एवं आयुक्त द्वारा किए गए हैं।
प्रमुख निर्देश एवं समय-सीमा
जिन भवनों में मरम्मत की आवश्यकता है: ऐसे भवनों के लिए राज्य वित्त आयोग एवं पंद्रहवां वित्त आयोग के अंतर्गत मरम्मत और रंग-रोगन की स्वीकृति तत्काल जारी करते हुए दिनांक 15.11.2025 तक कार्य पूर्ण किया जाए।
जिन भवनों में केवल रंग-रोगन की आवश्यकता है: ऐसे भवनों के लिए तत्काल स्वीकृति जारी करते हुए दिनांक 31.10.2025 तक कार्य पूर्ण किया जाए।
रंग-रोगन के लिए निर्धारित मानक
बाहरी दीवारें: अच्छी गुणवत्ता का Pink शेड का Paint (PU + Silicon Modified 100% Acrylic Exterior Emulsion) किया जाए।
आंतरिक दीवारें: Cream / Off White शेड का Paint किया जाए।
सीलिंग (छत): White शेड का Paint (PU Reinforced Luxury Acrylic Emulsion) किया जाए।
प्रगति निगरानी
उक्त कार्यों की प्रगति दर्ज करने के लिए पृथक से गूगल स्प्रेडशीट/फॉर्मेट का लिंक भेजा जा रहा है, जिस पर नियमित रूप से प्रगति दर्ज कराई जानी है। संबंधित सभी मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (जिला परिषद) को इन निर्देशों की समयबद्ध क्रियान्विति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
ग्राम पंचायतों में स्थित भारत निर्माण सेवा केंद्रों एवं ग्राम पंचायत भवनों की मरम्मत और रंग-रोगन के संबंध में दिशा-निर्देश
ग्राम पंचायत भवनों एवं भारत निर्माण सेवा केंद्रों की मरम्मत और एकरूप रंग-रोगन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ 4(1111) परावि/पीसी/विविध/22-00409 (दिनांक 19.09.2025) के अनुसार, माननीय मुख्यमंत्री महोदय की समीक्षा बैठक के निर्देशों के पालन में सभी ग्राम पंचायतों एवं भारत निर्माण सेवा केंद्रों में मरम्मत और एकरूप रंग-रोगन के कार्य करवाने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य निर्देश एवं समय-सीमा
मरम्मत और रंग-रोगन (वित्तीय स्वीकृति सहित): जिन भवनों में मरम्मत की आवश्यकता है, वहां राज्य वित्त आयोग एवं पंद्रहवां वित्त आयोग के अंतर्गत तुरंत स्वीकृति जारी करते हुए 15.11.2025 तक कार्य पूर्ण किया जाए।
केवल रंग-रोगन: जिन भवनों में केवल रंग-रोगन की आवश्यकता है, वहां तत्काल स्वीकृति जारी करते हुए 31.10.2025 तक कार्य पूर्ण किया जाए।
रंग एवं पेंट के मानक: भवन की बाहरी दीवारों पर अच्छी गुणवत्ता का Pink शेड का Paint (PU + Silicon Modified 100% Acrylic Exterior Emulsion), आंतरिक दीवारों पर Cream/Off White एवं छत (सीलिंग) पर White शेड का Paint (PU Reinforced Luxury Acrylic Emulsion) किया जाए।
प्रगति की मॉनिटरिंग: उक्त कार्यों की प्रगति हेतु अलग से Google Spreadsheet/Format का लिंक भेजा जा रहा है, जिस पर नियमित प्रगति दर्ज की जाए।
ग्रामीण सेवा शिविर 18 सितम्बर, 2025 से आयोजित किये जाने बाबत
ग्रामीण सेवा शिविरों का आयोजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुसार राज्य की प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर "ग्रामीण सेवा शिविर" का आयोजन 18 सितम्बर, 2025 से किया जाना है।
मुख्य निर्देश एवं व्यवस्थाएं
अभियान की अवधि तब तक होगी जब तक कि प्रत्येक पंचायत समिति की प्रत्येक ग्राम पंचायत में शिविर का आयोजन न हो जावे।
शिविर स्थल पंचायत मुख्यालय पर पंचायत भवन, स्कूल भवन या उपलब्ध अन्य सार्वजनिक स्थानों पर निर्धारित किए जाएंगे।
आगंतुकों के लिए पेयजल की समुचित व्यवस्था, मेज, कुर्सियां, दरियां और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं ग्राम पंचायत द्वारा की जाएंगी।
वित्तीय प्रावधान एवं व्यय
शिविर आयोजन एवं संचालन हेतु षष्ठ राज्य वित्त आयोग अंतर्गत पंचायती राज संस्थाओं को देय अनुदान राशि के उपयोग हेतु विभागीय पत्रांक 347 राजकाज क्रमांक 13247621 दिनांक 28.01.2025 के दिशा-निर्देशों के बिंदु सं. (अ)(3)(XIII) के अंतर्गत ग्राम पंचायत को स्वीकृत अनुदान राशि में से अधिकतम राशि रु. 25,000/- प्रति ग्राम पंचायत व्यय/उपयोग करने की सहमति प्रदान की जाती है।
यह सहमति वित्त विभाग की आई.डी. संख्या 332501444 दिनांक 16.09.2025 द्वारा अनुमोदित है। इस कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान करने के निर्देश दिए गए हैं।
ग्राम पंचायत द्वारा जारी पट्टे का नामांतरण एवं हस्तांतरण आवेदन प्रारूप व आदेश प्रक्रिया
ग्राम पंचायत पट्टा नामांतरण एवं हस्तांतरण प्रक्रिया
यह दस्तावेज़ राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 के नियम 157(1) के अंतर्गत ग्राम पंचायत द्वारा जारी पट्टों के नामांतरण (Mutation) और हस्तांतरण से संबंधित आवेदन प्रारूप, आदेश और कार्यवाही विवरण प्रदान करता है।
मुख्य बिंदु:
नियम एवं निर्देश: यह प्रक्रिया राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 के नियम 157(1) तथा ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के पत्र क्रमांक एफ 4 (86) नामांतरण / विधि / परा / 2018 / 603 जयपुर दिनांक 09.05.2018 की अनुपालना में है।
आवेदन का उद्देश्य: मूल पट्टाधारी की मृत्यु होने के पश्चात, उनके उत्तराधिकारियों द्वारा आबादी भूमि के पट्टे को अपने नाम नामांतरण या हस्तांतरित कराने हेतु सरपंच एवं ग्राम विकास अधिकारी महोदय को आवेदन प्रस्तुत किया जाता है।
संलग्नक: आवेदन के साथ मूल विक्रय विलेख (पट्टा), मूल विक्रय विलेख की फोटो प्रति, पट्टा जारी की रसीद, आधार कार्ड और मतदाता पहचान पत्र संलग्न किए जाते हैं।
कार्यालयीन प्रक्रिया: पंचायत रिकॉर्ड से मिलान करने के बाद, ग्राम विकास अधिकारी और सरपंच द्वारा पत्रावली तैयार की जाती है और पंचायत बैठक में अनुमोदन हेतु प्रस्तुत की जाती है। 100 रुपये का निर्धारित शुल्क प्राप्त कर नामांतरण/हस्तांतरण आदेश जारी किया जाता है।
जन्म, मृत्यु एवं विवाह प्रमाण पत्र में संशोधन हेतु अनुशंसा पत्र प्रारूप
जन्म, मृत्यु एवं विवाह प्रमाण पत्र में संशोधन हेतु अनुशंसा पत्र
यह दस्तावेज़ ग्राम पंचायत स्तर पर जारी जन्म, मृत्यु और विवाह प्रमाण पत्रों में संशोधन के लिए ब्लॉक सांख्यिकी अधिकारी और जिला रजिस्ट्रार को भेजी जाने वाली आधिकारिक अनुशंसा से संबंधित है।
मुख्य विवरण एवं प्रक्रिया
प्रेषक: रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) एवं ग्राम विकास अधिकारी, ग्राम पंचायत
प्रेषित: ब्लॉक सांख्यिकी अधिकारी, पंचायत समिति
विषय: जन्म / मृत्यु / विवाह प्रमाण पत्रों में संशोधन करने के सम्बन्ध में
प्रमाण पत्र में संशोधन के लिए पूर्व में जारी प्रमाण पत्र की सूचना तथा संशोधन किये जाने हेतु नई सूचना का मिलान किया जाता है, जिसमें नाम, पिता का नाम, माता का नाम, लिंग, जन्म दिनांक, माता-पिता का स्थायी पता, जन्म के समय माता-पिता का पता, फोटो प्रदर्शित न होना और पंजीकरण दिनांक शामिल हैं।
महत्वपूर्ण निर्देश
ग्राम विकास अधिकारी द्वारा दस्तावेजों की जाँच कर स्पष्ट अनुशंसा की जाती है।
जिस कॉलम में संशोधन किया जाना है, केवल वही कॉलम भरा जाए तथा अन्य कॉलम में डैश किया जाए।
ब्लॉक सांख्यिकी अधिकारी द्वारा जिला रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) एवं सहायक निदेशक, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग को ऑनलाइन रिक्वेस्ट अनुमोदन हेतु प्रेषित किया जाता है।
जन्म, मृत्यु एवं विवाह रजिस्ट्रीकरण की मार्गदर्शिका (पहचान पोर्टल)
जन्म-मृत्यु एवं विवाह रजिस्ट्रीकरण की मार्गदर्शिका
यह मार्गदर्शिका आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय, योजना विभाग, राजस्थान, जयपुर द्वारा जारी की गई है। इस पुस्तिका का मुख्य उद्देश्य जन्म, मृत्यु और विवाह रजिस्ट्रीकरण अधिनियमों तथा नियमों के तहत जिला रजिस्ट्रार, रजिस्ट्रार और पंचायत स्तर के अधिकारियों को सुगम दिशा-निर्देश प्रदान करना है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियमों का पालन: जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1969 एवं राजस्थान विवाहों का अनिवार्य रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 2009 के प्रावधानों के तहत कार्य किया जाना सुनिश्चित करना।
पहचान पोर्टल: राजस्थान के विवाह एवं जन्म-मृत्यु पंजीकरण कार्यों को ऑनलाइन वेबपोर्टल 'पहचान' के माध्यम से सुगम और पारदर्शी बनाया गया है।
पंचायत स्तर पर अधिकार: ग्राम पंचायत स्तर पर कार्यरत ग्राम सेवक (पदेन सचिव) को रजिस्ट्रार की शक्तियां प्रदान की गई हैं, जो जन्म और मृत्यु की घटनाओं का पंजीकरण करते हैं।
डिजिटल हस्ताक्षर: ई-मित्र केंद्रों और पोर्टल के माध्यम से डिजिटली हस्ताक्षरित जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने की सुविधा दी गई है।
यह मार्गदर्शिका ग्राम पंचायतों और स्थानीय निकायों के उपयोगकर्ताओं के लिए पंजीकरण प्रक्रिया को सरल और मानकीकृत करने में अत्यंत उपयोगी है।
पंड़ित दीनदयाल उपाध्याय अंत्योदय सम्बल पखवाड़ा (24 जून से 09 जुलाई, 2025) के आयोजन हेतु राशि व्यय करने की सहमति
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा 'पंड़ित दीनदयाल उपाध्याय अंत्योदय सम्बल पखवाड़ा' (दिनांक 24 जून, 2025 से 09 जुलाई, 2025) के आयोजन के संबंध में आदेश जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
पखवाड़े की अवधि: 24 जून, 2025 से 09 जुलाई, षष्ठ राज्य वित्त आयोग अंतर्गत पंचायती राज संस्थाओं को देय अनुदान राशि का उपयोग।
व्यय सीमा: ग्राम पंचायत को स्वीकृत अनुदान राशि में से अधिकतम राशि रु. 25,000/- प्रति ग्राम पंचायत व्यय/उपयोग करने की सहमति प्रदान की जाती है।
संदर्भित निर्देश: विभागीय पत्रांक 347 राजकाज क्रमांक 13247621 दिनांक 28.01.2025 के दिशा-निर्देशों के बिंदु सं (अ)(3)(XIII) के अंतर्गत।
वित्त विभाग की सहमति: वित्त विभाग की आई.डी. संख्या 332501054 दिनांक 03.07.2025 द्वारा अनुमोदित।
इस कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान करने के निर्देश दिए गए हैं।
PMAY-G के अंतर्गत 25 मीटर से अधिक दूरी वाले आवासों का भौतिक सत्यापन
PMAY-G भौतिक सत्यापन प्रारूप
यह दस्तावेज़ प्रधानमंत्री आवास योजना - ग्रामीण (PMAY-G) के तहत 25 मीटर से अधिक दूरी पर आवास निर्माण करने वाले मामलों के भौतिक सत्यापन के लिए निर्धारित प्रपत्र है।
मुख्य विवरण
निरीक्षणकर्ता का विवरण: नाम, पद, मोबाइल नंबर और निरीक्षण दिनांक दर्ज करने का प्रावधान।
विवरण तालिका: क्र.सं., ग्राम पंचायत, PMAY-G ID, लाभार्थी का नाम और 25 मीटर से अधिक दूरी पर आवास निर्माण करने का कारण।
हस्ताक्षर: निरीक्षणकर्ता के हस्ताक्षर का स्थान।
आबादी भूमि में भूमिहीन परिवार को भूखंड आ आवंटन एवं पट्टा जारी करने की प्रक्रिया (रांपारा नियम 1996 के नियम 158-1)
आबादी भूमि में भूमिहीन परिवारों को भूखंड आवंटन की प्रक्रिया
राज ई पंचायत पोर्टल के इस पोस्ट में राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 के नियम 158(1) के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में भूमिहीन परिवारों को आबादी भूमि में भूखंड (पट्टा) आवंटन करने की पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया और प्रपत्रों की जानकारी दी गई है।
मुख्य बिंदु एवं प्रक्रिया:
आवेदन: ग्राम पंचायत के वार्ड में निवास करने वाले भूमिहीन परिवार, जिनका भारत में कहीं भी आवासीय या कृषि भूमि का पट्टा नहीं है, वे सरपंच महोदय को निर्धारित दस्तावेजों (मतदाता पहचान पत्र/आधार कार्ड, राशन कार्ड, शपथ पत्र, बीपीएल कार्ड यदि हो) के साथ आवेदन प्रस्तुत करते हैं।
पटवारी का भूमिहीन प्रमाण पत्र: पटवार मंडल एवं तहसील स्तर पर यह प्रमाणित किया जाता है कि आवेदक का परिवार राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार भूमिहीन श्रेणी में आता है।
शपथ-पत्र: आवेदक द्वारा 50/- रुपये के स्टाम्प पेपर पर भूमिहीन होने और अन्य स्थान पर पट्टा न होने संबंधी शपथ-पत्र प्रस्तुत किया जाता है।
मौका निरीक्षण कमेटी: राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 के नियम 146 के तहत ग्राम पंचायत द्वारा वार्ड पंचों की एक कमेटी का गठन किया जाता है जो स्थल निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करती है।
आपत्ति नोटिस: नियम 148 (प्रारूप 22) के तहत आबादी भूमि के आवंटन पर आपत्तियां आमंत्रित करने के लिए नोटिस जारी किया जाता है।
रियायती दरें: नियम 158(1) के तहत अनुसूचित जाति, स्वच्छता कर्मियों, अनुसूचित जनजाति, श्रम मजदूरी पर आधारित भूमिहीन व्यक्तियों और गाड़िया लुहारों को रियायती दरों पर भूखंड आवंटित किए जाते हैं:
1000 से कम आबादी वाले गांवों में: 2 रुपये प्रति वर्ग गज
1001 से 2000 की आबादी वाले गांवों में: 5 रुपये प्रति वर्ग गज
2000 से अधिक आबादी वाले गांवों में: 10 रुपये प्रति वर्ग मीटर
पट्टा जारी करना: निर्धारित राशि ग्राम पंचायत कोष में जमा होने के पश्चात प्रपत्र-23 (ग) में विक्रय विलेख (पट्टा) जारी किया जाता है, जो कि अहस्तांतरणीय होता है।
ग्राम पंचायत स्तर पर निविदा आमंत्रित करने के निर्देशों के संबंध में आदेश
ग्राम पंचायत स्तर पर निविदा प्रक्रिया के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
राजगंगार सरकार (ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग) द्वारा ग्राम पंचायत स्तर पर निविदा/उपज्ञापन की कार्यवाही के संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं। यह दस्तावेज राजस्थान राज्य में पारदर्शिता अधिनियम 2012 व नियम 2013, सामान्य वित्त एवं लेखा नियम तथा पंचायती राज नियम 1996 के तहत जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
उपज्ञापन समिति का गठन: ग्राम पंचायत स्तर पर उपज्ञापन हेतु एक समिति होगी जिसमें सरपंच (अध्यक्ष), सचिव (सदस्य-सचिव), संबंधित पंचायत समिति के सहायक अभियंता, और पंचायत समिति में पदस्थापित लेखाधिकारी/सहायक लेखाधिकारी (सदस्य) शामिल होंगे। इसके अलावा अन्य वांछित तकनीकी अधिकारी को भी शामिल किया जा सकेगा।
निविदा दरों का अंतर: निविदा में सम्मिलित निविदादाताओं से प्राप्त दरों का अंतर जी-शेड्यूल (G-Schedule) से 10 प्रतिशत अधिक होने पर निविदाओं की स्वीकृति पंचायत समिति स्तर से की जाएगी।
तुलना और निर्धारण: प्राप्त निविदाओं की तुलना करते समय मनरेगा योजना, अन्य विभागीय योजनाओं में प्राप्त समकालीन दरों तथा बाजार में प्रचलित दरों का ध्यान रखा जाएगा और सर्वाधिक उपयुक्त कीमतों का निर्धारण होगा।
अनुबंध निष्पादन: जब भी कोई निविदा स्वीकृत की जाए, तो उस व्यक्ति से नियमानुसार करार/इकरार निष्पादित किया जाएगा, जिसकी निविदा स्वीकृत की गई है।
जारीकर्ता: रोहित कुमार सिंह, अतिरिक्त मुख्य सचिव, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (दिनांक: 27/08/2020)
ग्राम पंचायत में नए निर्माण कार्यों के प्रस्ताव और प्रमाण पत्र प्रारूप
ग्राम पंचायत नए निर्माण कार्यों के प्रस्ताव और प्रमाण पत्र
यह दस्तावेज़ कार्यालय ग्राम पंचायत द्वारा जारी किए जाने वाले नए निर्माण कार्यों के प्रस्ताव (परिशिष्ट-5), प्रमाण पत्र और कार्य स्थल के फोटो प्रारूप से संबंधित है। इसमें ग्राम पंचायत स्तर पर विकास कार्यों के चयन और प्रमाणीकरण के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
नए निर्माण कार्यों के प्रस्ताव (परिशिष्ट-5): कार्य का नाम, योजना का नाम, वार्षिक योजना में सम्मिलित होने की स्थिति, प्रस्तावित व्यय राशि (श्रम, सामग्री और कुल), उपलब्ध राशि, कार्य पूर्ण होने की संभावित अवधि और कार्य की आवश्यकता का विवरण।
महत्वपूर्ण शर्तें और प्रमाण पत्र:
कार्य का साइट प्लान/नक्शा या सड़क कार्य का एलाइंसमेंट संलग्न होना आवश्यक है।
निर्माण किसी व्यक्तिगत भूमि पर नहीं कराया जाएगा, बल्कि विवाद रहित पर्याप्त सार्वजनिक भूमि या आबादी भूमि पर कराया जाएगा।
प्रस्तावित कार्य सार्वजनिक लाभ हेतु उपयोगी होगा और भविष्य में भी उपयोग हो सकेगा।
संस्था/ग्राम पंचायत द्वारा स्वयं रखरखाव किया जाएगा, जिसके लिए अलग से राशि नहीं मांगी जाएगी।
यह प्रमाणित किया जाना आवश्यक है कि उक्त कार्य पूर्व में किसी अन्य योजना में स्वीकृत/निर्मित या भुगतान नहीं किया गया है।
भूमि विवरण प्रमाण पत्र: खसरा नंबर, राजस्व ग्राम, ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और राज्य सरकार के खाता संख्या का उल्लेख।
कार्य स्थल का फोटो प्रारूप: कार्य का नाम, योजना का नाम, प्रशासनिक स्वीकृत राशि और वित्तीय वर्ष के विवरण के साथ फोटो संलग्न करने का प्रावधान।
कार्यालय ग्राम पंचायत सुमेरपुर (पाली) - अतिक्रमण हटाने हेतु अंतिम नोटिस प्रारूप
कार्यालय ग्राम पंचायत - आदेश / अंतिम नोटिस
यह दस्तावेज़ कार्यालय ग्राम पंचायत, पं.स. सुमेरपुर (पाली) द्वारा जारी किया जाने वाला अतिक्रमण/अवैध निर्माण से संबंधित अंतिम नोटिस (प्रारूप-3) है। यह राजस्थान पंचायतीराज नियम 1996 के नियम 165 (3, 6) तथा The Prevention Of Damage to Public Property Act, 1984 के अंतर्गत आता है।
मुख्य बिंदु:
प्रसंग: पूर्व में जारी पत्र और सूचना के बावजूद अतिक्रमण/अवैध निर्माण हटाने के आदेश की पालना रिपोर्ट कार्यालय में प्रस्तुत न करने के संबंध में।
कार्रवाई की चेतावनी: नोटिस में दिए गए निर्देश के अनुसार आज ही अतिक्रमण/अवैध निर्माण हटाकर लिखित पालना रिपोर्ट निर्धारित तिथि को सुबह 11:00 बजे तक पंचायत कार्यालय में प्रस्तुत करनी होती है।
प्रशासनिक सहायता: समय सीमा में पालना न करने पर उपखंड प्रशासन / पुलिस इमदाद से अतिक्रमण/अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई की जाएगी और इसका समस्त हर्जा-खर्चा संबंधित व्यक्ति से वसूल किया जाएगा।
महत्वपूर्ण नियम: ग्राम पंचायत की सक्षम स्वीकृति के बिना किसी प्रकार का निर्माण कार्य करना नियम विरुद्ध है।
यह दस्तावेज़ कार्यालय ग्राम पंचायत, पं.स. सुमेरपुर (पाली) द्वारा जारी किया गया अतिक्रमण/अवैध निर्माण से संबंधित आदेश/नोटिस (प्रारूप-2) है।
मुख्य बिंदु:
नियम एवं अधिनियम: यह नोटिस राजस्थान पंचायतीराज नियम 1996 के नियम 165 (3, 6) तथा The Prevention Of Damage to Public Property Act, 1984 के अंतर्गत जारी किया जाता है।
अतिक्रमण हटाने के निर्देश: पूर्व में जारी स्थगन आदेश एवं नोटिस की पालना न करने तथा प्रस्तुत जवाब/स्पष्टीकरण असंतोषजनक होने पर अतिक्रमण/अवैध निर्माण को जनहित में हटाने के निर्देश दिए जाते हैं।
कार्रवाई की चेतावनी: निर्धारित तिथि एवं समय (सुबह 11:00 बजे) तक अतिक्रमण स्वयं न हटाने पर उपखण्ड प्रशासन/पुलिस इमदाद से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाएगी और समस्त हर्जा खर्च संबंधित व्यक्ति से वसूला जाएगा।
पुलिस कार्रवाई: आदेश/नोटिस की प्रति संबंधित पुलिस थाने में भेजकर कानूनी कार्यवाही हेतु निवेदन भी किया जाता है।
नोट: ग्राम पंचायत की सक्षम स्वीकृति के बिना किसी प्रकार का निर्माण कार्य करना नियम विरुद्ध है।
कार्यालय ग्राम पंचायत (पंस. सुमेरपुर, पाली) - स्थगन आदेश एवं नोटिस प्रारूप
कार्यालय ग्राम पंचायत - स्थगन आदेश एवं नोटिस प्रारूप
यह दस्तावेज़ कार्यालय ग्राम पंचायत, पंचायत समिति सुमेरपुर (पाली) द्वारा जारी किया गया स्थगन आदेश एवं नोटिस (प्रारूप-1) है। यह राजस्थान पंचायतीराज नियम 1996 के नियम 165(3) तथा The Prevention Of Damage to Public Property Act, 1984 के अंतर्गत आता है।
मुख्य बिंदु:
अतिक्रमण की शिकायत: ग्राम पंचायत की भूमि, आवागमन के रास्ते, जल निकासी की नाली आदि पर अतिक्रमण या अवैध निर्माण की शिकायत मिलने पर यह नोटिस जारी किया जाता है।
निषेधात्मक आज्ञा: अतिक्रमण/निर्माण को तत्काल प्रभाव से रोकने का आदेश दिया जाता है, अन्यथा नियमानुसार हटाने की कार्रवाई की जाती है।
सुनवाई की तारीख: निर्धारित तिथि एवं समय पर भूमि के स्वामित्व/निर्माण से संबंधित मूल दस्तावेज़ और जवाब के साथ पंचायत कार्यालय में उपस्थित होना अनिवार्य है, अन्यथा एक तरफा कानूनी कार्रवाई की जाती है।
महत्वपूर्ण नोट: ग्राम पंचायत की सक्षम स्वीकृति के बिना किसी प्रकार का निर्माण कार्य करना नियम विरुद्ध है।
ग्राम पंचायत में नए निर्माण कार्यों के प्रस्ताव और प्रमाण पत्र प्रारूप
ग्राम पंचायत नए निर्माण कार्यों के प्रस्ताव प्रपत्र
यह दस्तावेज़ कार्यालय ग्राम पंचायत द्वारा जारी किया गया है जिसमें नए निर्माण कार्यों के प्रस्ताव (परिशिष्ट-5) और उससे संबंधित प्रमाण पत्रों का प्रारूप दिया गया है। इसके माध्यम से ग्राम पंचायत स्तर पर विकास कार्यों की प्रशासनिक प्रक्रिया को पूरा किया जाता है।
मुख्य बिंदु:
नए निर्माण कार्यों के प्रस्ताव: कार्य का नाम, योजना का नाम, वार्षिक योजना में सम्मिलित होने की स्थिति, और अनुमानित लागत (श्रम, सामग्री और कुल) का विवरण।
आवश्यक शर्तें व प्रमाण पत्र: कार्य का साइट प्लान/नक्शा या सड़क का एलाइनमेंट संलग्न होना अनिवार्य है।
सार्वजनिक भूमि: निर्माण किसी भी व्यक्तिगत भूमि पर नहीं कराया जाएगा तथा यह विवाद रहित पर्याप्त सार्वजनिक भूमि या आबादी भूमि पर होगा जिससे सार्वजनिक लाभ सुनिश्चित हो सके।
रखरखाव और उपयोग: कार्य के रखरखाव एवं समुचित उपयोग की व्यवस्था संस्था या ग्राम पंचायत द्वारा स्वयं की जाएगी, जिसके लिए अलग से राशि नहीं मांगी जाएगी।
दोहरी प्रविष्टि की रोकथाम: यह प्रमाणित किया जाता है कि प्रस्तावित कार्य पूर्व में किसी अन्य योजना के अंतर्गत स्वीकृत या निर्मित नहीं है और न ही इसका भुगतान अन्य योजनाओं से किया गया है।
खसरा एवं भूमि विवरण: प्रमाण पत्र में खसरा नंबर, राजस्व ग्राम, और राज्य सरकार के खाता संख्या का उल्लेख किया जाता है।
स्थल फोटो: प्रस्तावित कार्य स्थल का फोटो, प्रशासनिक स्वीकृत राशि और वित्तीय वर्ष का विवरण दर्ज करने का प्रावधान है।
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 के तहत प्ररूप 23-क एवं 23-ख में संशोधन के संबंध में
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 - पट्टा प्ररूप संशोधन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.4(1)नियम/संशो/विधि/पंवारा/2024/304 दिनांक 27-3-2025 के माध्यम से सभी मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद (समस्त राजस्थान) को राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 के तहत जारी पट्टों के प्ररूप-23क एवं 23ख में किए गए संशोधनों के अनुसार पट्टा जारी करने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना विवरण: राजस्थान राजपत्र (असाधारण) दिनांक 20 जनवरी, 2025 में प्रकाशित अधिसूचना (जी.एस.आर. 97) के तहत राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) नियम, 2025 बनाए गए हैं।
प्ररूप-23-क: नियम 157(1) के अंतर्गत आवासीय भूमि का पट्टा (पट्टा विलेख) से संबंधित है, जो पंचायत आबाबी भूमि पर पुराने संनिर्मित घरों पर कब्जे या 31 दिसंबर, 2016 से ठीक पूर्ववर्ती सत्तर वर्ष के दौरान संनिर्मित घरों के लिए है।
प्ररूप-23-ख: नियम 157(2) के अंतर्गत आबाबी भूमि का आवंटन / परिवारों के कब्जे के अस्थायी मकानों / कच्चे मकानों का नियमितीकरण (पट्टा विलेख) से संबंधित है, जो वर्ष 2003 तक के कच्चे/अस्थायी मकानों के कब्जे के लिए है (अधिकतम 300 वर्ग गज)।
आवश्यक कार्रवाई: सभी संबंधित ग्राम पंचायतों को निर्देशित किया गया है कि वे संशोधित प्ररूपों के अनुसार ही पट्टा जारी करना सुनिश्चित करें।
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 के तहत प्ररूप 23-क एवं 23-ख में संशोधन के संबंध में
राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) नियम, 2025
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.4(1)नियम/संशो/विधि/पंवारा/2024/304 दिनांक 27-3-2025 और राजस्थान राजपत्र असाधारण (दिनांक 20 जनवरी, 2025) की अधिसूचना जी.एस.आर. 97 के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 के अंतर्गत पट्टों के प्ररूप-23-क एवं 23-ख में संशोधन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
नियम 157(1) के अंतर्गत प्ररूप-23-क: आवासीय भूमि का पट्टा (पट्टा विलेख) जिसमें पुराने संनिर्मित घरों पर कब्जे या पंचायत आबाद भूमि पर कब्जे से संबंधित प्रावधान और शर्तें शामिल हैं।
नियम 157(2) के अंतर्गत प्ररूप-23-ख: आबाद भूमि का आवंटन / परिवारों के कब्जे के अस्थायी मकानों / कच्चे मकानों का नियमितीकरण (पट्टा विलेख), जिसमें अधिकतम 300 गज तक की आबाद भूमि के निःशुल्क आवंटन और उससे जुड़ी शर्तों का उल्लेख है।
निर्देश: सभी मुख्य कार्यकारी अधिकारियों, जिला परिषद (राजस्थान) को निर्देशित किया गया है कि वे संबंधित ग्राम पंचायतों को संशोधित प्ररूप-23-क और 23-ख के अनुसार पट्टा जारी करना सुनिश्चित कराएं।
ग्राम पंचायत पादंगा में नाडेप, मैजिक पिट और वर्मी कंपोस्ट निर्माण कार्य
ग्राम पंचायत पादंगा में स्वच्छता और खाद निर्माण संरचनाएं
दस्तावेज़ में ग्राम पंचायत पादंगा (GP Padanga) के अंतर्गत पूरे किए गए विभिन्न निर्माण कार्यों की फोटोग्राफ और जियो-टैग विवरण दिए गए हैं। इनमें मुख्य रूप से स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़ी संरचनाएं शामिल हैं:
मैजिक पिट (Magic Pit): गंदे पानी के निकास और सोखने के लिए निर्मित गोल और वर्गाकार संरचनाएं (नोट: मैजिक पिट कम्प्लीट जीपी पादंगा)।
वर्मी कंपोस्ट पिट (Vermi Compost Pit): जैविक खाद निर्माण हेतु कंक्रीट/ईंटों से निर्मित बहु-कक्षीय टैंक (नोट: वर्मी कंपोस्ट पिट कम्प्लीट जीपी पादंगा)।
नाडेप कंपोस्ट पिट (Nadep Pit): कचरे से खाद बनाने के लिए ईंटों की जालीदार दीवारों वाली संरचना (नोट: नाडेप कम्प्लीट जीपी पादंगा)।
इन सभी कार्यों के फोटोग्राफ्स में निर्माण की तिथि 15 अप्रैल 2024 और सटीक भौगोलिक निर्देशांक (Latitude & Longitude) दर्ज हैं, जो ग्राम पंचायत स्तर पर स्वच्छता और कंपोस्ट निर्माण कार्यों की प्रगति को दर्शाते हैं।
स्वच्छता कार्यों के लिए रजिस्टर प्रारूप (Register Format for Sanitation Works)
ग्राम पंचायतों में स्वच्छता कार्यों के लिए निर्धारित रजिस्टर प्रारूप
यह दस्तावेज़ ग्राम पंचायतों में संचालित होने वाले विभिन्न स्वच्छता कार्यों के रिकॉर्ड और मॉनिटरिंग के लिए आधिकारिक रजिस्टर प्रारूप प्रदान करता है। इसमें मुख्य रूप से चार प्रकार के रजिस्टरों के प्रारूप शामिल हैं:
घर-घर कचरा संग्रहण एवं पृथक्करण कार्य रजिस्टर-1
सड़क सफाई कार्य रजिस्टर-2
नाली सफाई कार्य रजिस्टर-3
सामुदायिक स्वच्छता परिसर सफाई कार्य रजिस्टर-4
सामान्य विवरण और मुख्य बिंदु
प्रत्येक रजिस्टर के मुख्य पृष्ठ (सामान्य विवरण) और दैनिक कार्य इंद्राज पृष्ठ पर निम्नलिखित महत्वपूर्ण जानकारियां दर्ज करने का प्रावधान है:
ग्राम पंचायत का नाम एवं गाँव का नाम
गाँव में वार्डों की संख्या एवं परिवारों की संख्या
फर्म का नाम, मोबाइल नंबर और कार्य की अवधि
गाँव में झाड़ू लगाने का क्षेत्रफल (वर्ग मीटर), नालियों की कुल लंबाई (मीटर) और सी.एस.सी. की संख्या
कार्य आदेश के अनुसार कार्य अंतराल
कार्य करने का दिनांकवार इंद्राज एवं कुल कार्य दिवस
फर्म के प्रतिनिधि के हस्ताक्षर तथा चैक करने वाले अधिकारी (सरपंच / LDC / VDO) के हस्ताक्षर, नाम व पद
बजट घोषणा वर्ष 2025-26 के अंतर्गत अटल ज्ञान केंद्रों की स्थापना एवं क्रियान्विति के संबंध में दिशा-निर्देश
बजट घोषणा वर्ष 2025-26: अटल ज्ञान केंद्रों की स्थापना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज) राजस्थान सरकार द्वारा बजट घोषणा वर्ष 2025-26 के अंतर्गत प्रथम चरण में 3 हजार से अधिक आबादी वाले 2082 ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर अटल ज्ञान केंद्रों की स्थापना और क्रियान्विति के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
प्रमुख बिंदु एवं वित्तीय प्रावधान
केंद्र राशि: प्रत्येक अटल ज्ञान केंद्र हेतु केंद्र राशि रु. 12.50 लाख का व्यय षष्ठम राज्य वित्त आयोग के दिशा-निर्देश क्रमांक 347 दिनांक 28.01.2025 के बिंदु संख्या 3(iv) 'सामुदायिक केंद्रों का निर्माण एवं रख-रखाव कार्य' (जिसमें पुस्तकालय एवं वाचनालयों का निर्माण, फर्नीचर यथा कुर्सी, टेबल आदि) के तहत किया जा सकेगा।
इंटरनेट सुविधा: 15वें वित्त आयोग के दिशा-निर्देश क्रमांक 301 दिनांक 15.02.2022 के बिंदु संख्या 8 'सार्वजनिक पुस्तकालय' के तहत इंटरनेट सुविधा प्राप्त करने हेतु एकबारीय लागत एवं आवर्ती व्यय का उपयोग किया जा सकेगा।
कंप्यूटर क्रय: षष्ठम राज्य वित्त आयोग के दिशा-निर्देश के बिंदु संख्या (ब)(1) 'सूचना प्रौद्योगिकी/ई-गवर्नेंस/डेटा बेस का उपयोग' के तहत प्रति ग्राम पंचायत 4 कंप्यूटर क्रय किए जा सकेंगे।
अटल ज्ञान केंद्रों की स्थापना हेतु निर्धारित समय सीमा
प्रशासनिक स्वीकृति जारी करना - दिनांक 15.06.2025 तक
तकनीकी स्वीकृति जारी करना - दिनांक 30.06.2025 तक
वित्तीय स्वीकृति जारी करना - दिनांक 05.07.2025 तक
निविदा जारी संबंधित कार्यवाही - दिनांक 15.07.2025 तक
अटल प्रेरकों का चयन
प्रथम चरण में चयनित 2082 ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर अटल ज्ञान केंद्रों की स्थापना के उपरांत निर्धारित प्रक्रिया द्वारा आउटसोर्सिंग के माध्यम से अटल प्रेरकों का चयन किया जाएगा। अटल प्रेरक मानदेय का भुगतान 15वें वित्त आयोग के दिशा-निर्देश के बिंदु संख्या 13 के तहत अन्य बुनियादी सेवाओं/संवर्धित सेवाओं के आवर्ती व्यय और आवश्यक रूप से अन्य प्रशासनिक खर्च (10 प्रतिशत की सीमा भीतर) के तहत किया सकेगा। यह वित्त विभाग की आईडी संख्या 332500866 दिनांक 02.06.2025 द्वारा अनुमोदित है।
प्रधान मंत्री आवास योजना - ग्रामीण: मॉडल डिज़ाइन 2 और 3
प्रधानमंत्री आवास योजना - ग्रामीण
यह दस्तावेज़ प्रधानमंत्री आवास योजना - ग्रामीण के तहत मॉडल डिज़ाइन 2 और मॉडल डिज़ाइन 3 के संरचनात्मक प्लान और 3D मॉडल को प्रदर्शित करता है। ग्राम पंचायत और ग्रामीण उपयोगकर्ताओं के लिए यह जानकारी आवास निर्माण के लिए उपयोगी डिज़ाइन समझने में सहायक है।
मुख्य बिंदु:
मॉडल डिज़ाइन - 2: इसमें मल्टीपर्पस रूम (3.2M X 2.7M), स्टोर (2M X 2.7M), किचन (2.4M X 2.4M), बाथ, टॉयलेट और लॉबी/वरांडा शामिल हैं।
मॉडल डिज़ाइन - 3: इसमें दो मल्टीपर्पस रूम (3M X 2.7M और 3M X 2.6M), कुकिंग स्पेस, स्टोरेज, टॉयलेट, वॉशिंग एरिया और टैंक का प्रावधान दिया गया है।
नोट: यह विवरण केवल योजना के मॉडल डिज़ाइन और प्लान के दृश्यों पर आधारित है।
प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) क्रियान्वयन फ्रेमवर्क: महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश और मुख्य बिंदु
यह दस्तावेज ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) के क्रियान्वयन का फ्रेमवर्क है। इसका मुख्य उद्देश्य वर्ष 2022 तक देश के सभी बेघर परिवारों तथा कच्चे व जीर्ण-शीर्ण मकानों में रहने वाले परिवारों को बुनियादी सुविधाओं से युक्त पक्का मकान उपलब्ध कराना है।
मुख्य विशेषताएं एवं वित्तीय प्रावधान:
लक्ष्य: 2016-17 से 2018-19 तक तीन वर्षों में एक करोड़ ग्रामीण आवास निर्माण का लक्ष्य।
आवास का आकार: मकान का न्यूनतम आकार बढ़ाकर 25 वर्ग मीटर (साफ-सुथरे रसोई घर सहित) कर दिया गया है।
इकाई सहायता: मैदानी क्षेत्रों में 70,000 रुपये से बढ़ाकर 1.20 लाख रुपये तथा पर्वतीय राज्यों, दुर्गम क्षेत्रों एवं आईएपी जिलों में 75,000 रुपये से बढ़ाकर 1.30 लाख रुपये की गई है।
शौचालय निर्माण: स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण (एसबीएम-जी), मनरेगा या अन्य स्रोतों से शौचालय निर्माण के लिए 12,000 रुपये की अतिरिक्त सहायता।
मनरेगा मजदूरी: आवास निर्माण के लिए मनरेगा के अंतर्गत 90 / 95 दिनों की अकुशल मजदूरी का प्रावधान।
ऋण सुविधा: इच्छुक लाभार्थियों को वित्तीय संस्थाओं से 70,000 रुपये तक की ऋण सुविधा उपलब्ध कराने में मदद।
लाभार्थियों का चयन और सत्यापन:
लाभार्थियों का चयन सामाजिक आर्थिक जाति आधारित जनगणना (एसईसीसी) 2011 के आंकड़ों और मापदंडों के आधार पर ग्राम सभा द्वारा किया जाता है। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आवाससॉफ्ट (AwaasSoft) पोर्टल और आवास ऐप के माध्यम से ई-शासन, जिओ-टैगिंग और निगरानी की व्यवस्था की गई है।
प्रधान मंत्री आवास योजना (ग्रामीण) शपथ-पत्र प्रारूप
प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) शपथ-पत्र प्रारूप
यह दस्तावेज़ प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत स्वयं के आवास निर्माण हेतु अनुदान या सहायता राशि प्राप्त करने के लिए आवेदक द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले शपथ-पत्र का प्रारूप है।
मुख्य बिंदु:
आवेदक का देश में अन्यत्र कोई पक्का मकान नहीं है।
आवास निर्माण हेतु उपलब्ध भूखंड आवेदक के स्वयं के स्वामित्व का है।
पूर्व में किसी आवासीय योजना की सब्सिडी या लाभ नहीं लिया गया है।
परिवार के किसी भी सदस्य की वार्षिक आय 1.20 लाख रुपए से कम है।
भूखंड रिक्त या कच्चा आवास है।
सरकार द्वारा निर्धारित अनुदान राशि से न्यूनतम 25 वर्गमीटर प्लिंथ क्षेत्र का नवीन पक्का आवास अधिकतम 12 महीने में पूर्ण करने की वचनबद्धता।
प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण: आवश्यक दस्तावेजों की चेक लिस्ट और पात्रता शर्तें
प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण चेक लिस्ट
यह दस्तावेज़ कार्यालय ग्राम पंचायत द्वारा जारी प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत आवश्यक दस्तावेजों और पात्रता शर्तों की जानकारी प्रदान करता है। ग्राम पंचायत और पंचायत समिति स्तर पर आवेदन प्रक्रिया के लिए यह चेक लिस्ट अत्यंत उपयोगी है।
आवश्यक दस्तावेज
प्रार्थी की पासपोर्ट साईज़ प्रमाणित फोटो
फार्म में 14 बिन्दु की जांच रिपोर्ट
प्रार्थी का स्वयं का मोबाइल नम्बर अथवा रिश्तेदार का मोबाइल नम्बर
जॉब कार्ड के आन लाईन नम्बर / स्पष्ट छायाप्रति (स्वयं प्रमाणित)
प्रस्तावित भूखण्ड का प्रधानमंत्री आवास योजनान्तर्गत लाभार्थी का पट्टा / खातेदारी भूमि की नकल
बैंक पास बुक की स्पष्ट छाया प्रति (स्वयं प्रमाणित)
आधार कार्ड की स्पष्ट छाया प्रति (स्वयं प्रमाणित)
जन आधार / भामाशाह कार्ड की स्पष्ट छाया प्रति (स्वयं प्रमाणित)
विकलांग हो तो प्रमाण पत्र की स्पष्ट छाया प्रति (स्वयं प्रमाणित)
आवास स्वीकृति हेतु पात्रता की शर्तें (14 बिन्दु जांच रिपोर्ट मुख्य बिंदु)
मोटर साईकिल दुपहिया / तिपहिया / चौपहिया वाहन / मछली नाव नहीं है।
मेकेनाइज्ड तिपहिया / चौपहिया वाहन कृषि उपकरण नहीं है।
किसान कैडिट कार्ड, कैडिट सीमा के साथ 50 हजार या उससे अधिक का नहीं है।
परिवार का कोई सदस्य सरकारी कर्मचारी नहीं है।
परिवार के गैर कृषि उद्यमों का सरकार के साथ पंजीकृत नहीं है।
परिवार के किसी भी सदस्य की आय अधिकतम रुपये 10 हजार प्रति माह नहीं है।
इन्कमटैक्स नहीं देता हूँ।
व्यासायिक कर नहीं देता हूँ।
स्वयं का रेफ्रिजरेटर नहीं है।
स्वयं का लेण्डलाईन फोन नहीं है।
स्वयं 2.5 एकड़ या अधिक सिंचित भूमि के साथ एक सिंचित उपकरण नहीं है।
5 एकड़ या अधिक सिंचित भूमि के लिए दो या अधिक फसल मौसम नहीं है।
मालिक 7.5 एकड़ भूमि या अधिक, एक सिंचाई उपकरण के साथ नहीं है।
किसी भी सरकारी योजना में आवास निर्माण हेतु मेरे परिवार के पक्ष में आ दिनांक तक कोई स्वीकृति जारी नही हुई है अथवा कोई पक्का मकान आवंटन नहीं है।
नोट: सरकार द्वारा नवीन आवास हेतु निर्धारित अनुदान सहायता राशि से मैं न्यूनतम 25 वर्गमीटर प्लिंथ क्षेत्र का नवीन पक्का आवास निर्माण अधिकतम 12 माह की अवधि में पूर्ण कराने के लिए वचनबद्ध हूँ। आवासीय अनुदान सहायता से अधिक होने वाले व्यय की व्यवस्था मैं अपने स्तर पर स्वयं करूँगा।
ग्रामीण क्षेत्रों में संवेदक के माध्यम से स्वच्छता कार्यों की नियमित समीक्षा एवं प्रभावी निरीक्षण हेतु स्वच्छता क्लस्टर प्रभारी नियुक्त करने के संबंध में
स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत स्वच्छता कार्यों की प्रभावी मॉनिटरिंग
राजस्थान सरकार, निदेशालय स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण), पंचायती राज विभाग द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में संवेदक के माध्यम से संचालित स्वच्छता कार्यों की नियमित समीक्षा एवं प्रभावी निरीक्षण हेतु स्वच्छता क्लस्टर प्रभारी नियुक्त किए जाने के संबंध में आदेश जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु एवं निर्देश
पत्रांक एवं दिनांक: पत्रांक एफ 4 परावि/SBM(G)/BSR/2024-25/ 2928-34, दिनांक 24.01.2025
उद्देश्य: ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर कचरा संग्रहण, कचरे का पृथक्करण, सड़क एवं नाली की सफाई तथा सामुदायिक स्वच्छता परिसरों की सफाई कार्य को नियमित और प्रभावी रूप से सुनिश्चित करना।
क्लस्टर निर्धारण: प्रत्येक पंचायत समिति में सहायक अभियंता, अतिरिक्त विकास अधिकारी, सहायक विकास अधिकारी, कनिष्ठ अभियंता एवं कनिष्ठ तकनीकी सहायक के पदों की संख्या के आधार पर समान संख्या में ग्राम पंचायतों का क्लस्टर निर्धारित किया जाएगा।
अधिकारियों के दायित्व: विकास अधिकारी, अतिरिक्त विकास अधिकारी, स्वच्छता क्लस्टर प्रभारी, ब्लॉक समन्वयक, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला स्तरीय स्वच्छता प्रभारी और जिला परियोजना समन्वयक के लिए अलग-अलग साप्ताहिक/दैनिक निरीक्षण और समीक्षा बैठक के निर्देश दिए गए हैं।
समस्त संबंधित अधिकारियों को इन निर्देशों की पालना 3 दिवस में सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
ग्राम पंचायत क्षेत्र में नियमित सफाई व घर-घर कचरा संग्रहण की निविदा शर्तों की पालना के संबंध में नोटिस प्रारूप
ग्राम पंचायत सफाई एवं कचरा संग्रहण नोटिस प्रारूप
यह दस्तावेज़ ग्राम पंचायत स्तर पर वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान नियमित सफाई और घर-घर कचरा संग्रहण के लिए जारी किए जाने वाला आधिकारिक नोटिस प्रारूप है।
मुख्य बिंदु:
विषय: ग्राम पंचायत क्षेत्र में नियमित सफाई व घर-घर कचरा संग्रहण की निविदा शर्तों की पालना नहीं करने के संबंध में।
उद्देश्य: संबंधित फर्म को यह सूचित करना कि उनके द्वारा निविदा में उल्लिखित शर्तों के अनुसार सफाई कार्य और घर-घर कचरा संग्रहण नहीं किया जा रहा है।
निर्देश: स्वच्छता टेंडर के नियम व शर्तों के अनुसार कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
चेतावनी: निर्देशों की पालना न करने पर निविदा शर्तों के अनुसार विधिक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है जिसकी जिम्मेदारी स्वयं फर्म की होगी।
हस्ताक्षरकर्ता: सरपंच / प्रशासक और ग्राम विकास अधिकारी।
पन्द्रहवें वित्त आयोग (2021-26) की सिफारिशों के तहत पंचायती राज संस्थाओं के अनुदान उपयोग हेतु संशोधित दिशा-निर्देश
पन्द्रहवें वित्त आयोग दिशा-निर्देश 2021-26
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा पन्द्रहवें वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत पंचायत अवधि (2021-26) के दौरान पंचायती राज संस्थाओं को देय अनुदान राशि के उपयोग एवं कार्यान्वयन हेतु संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं (क्रमांक: एफ.165(13)पंचारावि/ले.ब./15वां वि.आ./दिशा-निर्देश/2021-22/301, दिनांक 15-2-2022)।
प्रमुख बिंदु एवं अनुदान का विभाजन
टाइड-ग्रैंड (Tied-Grant): कुल अनुदान का 60 प्रतिशत भाग राष्ट्रीय प्राथमिकताओं जैसे पेयजल आपूर्ति, वर्षा जल संचयन और स्वच्छता के लिए निर्धारित किया गया है।
अनअटायड-ग्रैंड (Untied-Grant): कुल अनुदान का 40 प्रतिशत भाग पंचायती राज संस्थाओं द्वारा मूलभूत सेवाओं में सुधार लाने के लिए उपयोग किया जा सकेगा।
अनुदान हस्तांतरण का आधार: पंचायती राज संस्थाओं (जिला परिषदों को 5 प्रतिशत, पंचायत समितियों को 20 प्रतिशत एवं ग्राम पंचायतों को 75 प्रतिशत) में राशि का वितरण किया गया है।
मूल (Untied) अनुदान के उपयोग के मुख्य क्षेत्र
स्वास्थ्य, शिक्षा और पोषण से संबंधित गतिविधियां (जैसे टीकाकरण व कुपोषण की रोकथाम)।
ग्राम पंचायत भवनों का निर्माण और मरम्मत।
ग्राम पंचायत क्षेत्रों के अंदर और अन्तर ग्राम पंचायत सड़कों व पैदल रास्तों का निर्माण व मरम्मत।
एलईडी स्ट्रीट लाइट्स और सोलर लाइटिंग की स्थापना व रख-रखाव।
श्मशान और कब्रिस्तान का निर्माण, मरम्मत एवं रख-रखाव।
सार्वजनिक पुस्तकालय, बच्चों के पार्क, खेल का मैदान और ग्रामीण हाट।
तकनीकी एवं प्रशासनिक व्यय
15वें वित्त आयोग के तहत देय मूल (अनटायड) अनुदान का अधिकतम 10 प्रतिशत तकनीकी एवं प्रशासनिक व्ययों (जैसे संविदा पर डेटा एंट्री ऑपरेटर/इंजीनियर की सेवाएं, कंप्यूटर क्रय, इंटरनेट सुविधा, सिविल कार्यों की गुणवत्ता की जांच आदि) के लिए उपयोग किया जा सकता है।
बेंध-अनुदान (Tied Grants) के अंतर्गत प्राथमिकताएं
बेंध-अनुदान (Tied-Grant) की 50% राशि का उपयोग स्वच्छता और खुले में शौच मुक्त (ODF) स्थिति तथा शेष 50% राशि का उपयोग पेयजल आपूर्ति, जल संचयन और जल पुनर्चक्रण की बुनियादी सेवाओं के लिए किया जा सकता है।
ग्राम पंचायत क्षेत्र में नियमित सफाई एवं घर-घर कचरा संग्रहण की निविदा शर्तों की पालना के संबंध में नोटिस प्रारूप
ग्राम पंचायत नोटिस प्रारूप: सफाई एवं कचरा संग्रहण निविदा शर्तें
यह दस्तावेज़ कार्यालय ग्राम पंचायत द्वारा स्वच्छता और कचरा संग्रहण कार्य में संलग्न फर्मों को जारी किए जाने वाले नोटिस का आधिकारिक प्रारूप है। इसके माध्यम से संबंधित फर्मों को उनके द्वारा निविदा शर्तों की पालना नहीं किए जाने पर सूचित किया जाता है।
मुख्य बिंदु:
विषय: ग्राम पंचायत क्षेत्र में नियमित सफाई व घर-घर कचरा संग्रहण की निविदा शर्तों की पालना नहीं करने के संबंध में।
वित्तीय वर्ष: वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंतर्गत सफाई और घर-घर कचरा संग्रहण के लिए ली गई निविदाओं पर लागू।
निर्देश: संबंधित फर्म को स्वच्छता टेंडर के नियम व शर्तों के अनुसार कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए जाते हैं।
चेतावनी: शर्तों की पालना न करने पर निविदा शर्तों के अनुसार विधिक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है जिसकी जिम्मेदारी स्वयं फर्म की होगी।
नोटिस का क्रम: यह नोटिस आवश्यकतानुसार प्रथम, द्वितीय या तृतीय नोटिस के रूप में जारी किया जा सकता है।
इस प्रारूप का उपयोग सरपंच, प्रशासक और ग्राम विकास अधिकारी द्वारा किया जा सकता है।
राजस्थान पंचायती राज विभाग अधिसूचना: प्रशासक नियुक्ति एवं प्रशासनिक समितियों का गठन
अधिसूचना विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 16-01-2025 को आदेश क्रमांक एफ.15(2)प्रशासक/विधि/पंपरा/2025/05 के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण अधिसूचना जारी की गई है।
मुख्य बिंदु
पृष्ठभूमि: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा-95 के तहत, जिन ग्राम पंचायतों का कार्यकाल दिनांक 31.01.2025 तक समाप्त हो रहा है और जिनके चुनाव अपरिहार्य कारणों से संपन्न नहीं हो पा रहे हैं, उनके लिए यह व्यवस्था की गई है।
प्रशासक की नियुक्ति: ऐसी समस्त ग्राम पंचायतों में संबंधित ग्राम पंचायत के निवर्तमान सरपंच को प्रशासक नियुक्त किया गया है ताकि कार्यों का सुचारू संचालन हो सके।
प्रशासनिक समिति का गठन: प्रत्येक ऐसी ग्राम पंचायत के लिए प्रशासकीय समिति का गठन किया जाएगा, जिसमें कार्यकाल समाप्त होने से पूर्व के उप सरपंच एवं वार्ड पंच सदस्य बनाए जाएंगे।
वित्तीय शक्तियाँ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 एवं राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के तहत ग्राम पंचायत के खातों (Bank Accounts) का संचालन व वित्तीय शक्तियों का प्रयोग प्रशासक (निवर्तमान सरपंच) एवं संबंधित ग्राम विकास अधिकारी द्वारा किया जाएगा।
कार्यकाल: प्रशासक एवं प्रशासकीय समिति की कार्यविधि नवनिर्वाचन के पश्चात गठित ग्राम पंचायत की प्रथम बैठक की तारीख के ठीक पूर्ववर्ती दिन तक रहेगी।
जिला कलेक्टर्स को अधिकार: अधिनियम की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्य सरकार द्वारा समस्त जिला कलेक्टर्स को अपने जिले की संबंधित ग्राम पंचायतों में प्रशासक नियुक्त करने एवं प्रशासकीय समितियों का गठन किए जाने हेतु अधिकृत किया गया है।
राजस्थान पंचायती राज विभाग अधिसूचना: प्रशासक नियुक्ति एवं प्रशासनिक समिति का गठन
अधिसूचना विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 11-3-2025 को आदेश क्रमांक एफ.15(2)प्रशासक/विधि/पंव्रा/2025/200 जारी किया गया है। यह अधिसूचना उन ग्राम पंचायतों के संबंध में है जिनका कार्यकाल दिनांक 31.03.2025 तक समाप्त हो रहा है और जिनके चुनाव अपरिहार्य कारणों से संपन्न नहीं हो पा रहे हैं।
मुख्य बिंदु
प्रशासक की नियुक्ति: ऐसी समस्त ग्राम पंचायतों में संबंधित ग्राम पंचायत के निवर्तमान सरपंच को प्रशासक नियुक्त किया गया है।
प्रशासनिक समिति का गठन: ग्राम पंचायतों के कार्यकलापों के सुचारू संचालन हेतु प्रशासक की सहायताार्थ प्रत्येक ऐसी ग्राम पंचायत के लिए प्रशासनिक समिति का गठन किया जाएगा।
समिति के सदस्य: इस प्रशासनिक समिति में ग्राम पंचायत का कार्यकाल समाप्त होने से पूर्व वे व्यक्ति जो संबंधित ग्राम पंचायत के उप सरपंच एवं वार्ड पंच रहे हैं, सदस्य बनाए जाएंगे।
वित्तीय एवं बैंक खाते का संचालन: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 एवं राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के तहत ग्राम पंचायत के खातों (Bank Accounts) का संचालन व वित्तीय शक्तियों का प्रयोग प्रशासक (निवर्तमान सरपंच) एवं सम्बन्धित ग्राम विकास अधिकारी द्वारा किया जाएगा।
कार्यवधि: प्रशासक एवं प्रशासनिक समिति की कार्यवधि नवनिर्वाचन के पश्चात गठित ग्राम पंचायत की प्रथम बैठक की तारीख के ठीक पूर्ववर्ती दिन तक रहेगी।
जिला कलेक्टर्स को अधिकार: अधिनियम की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्य सरकार द्वारा समस्त जिला कलक्टरों को अपने जिले की संबंधित ग्राम पंचायतों में उनका कार्यकाल समाप्त होने की तिथि से प्रशासक नियुक्त करने एवं प्रशासनिक समितियों का गठन किये जाने हेतु अधिकृत किया गया है।
फार्मर रजिस्ट्री शिविरों के आयोजन हेतु षष्ठ राज्य वित्त आयोग की अनुदान राशि के उपयोग की स्वीकृति
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग राजस्थान सरकार आदेश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), जयपुर द्वारा दिनांक 05 फरवरी, 2025 से 31 मार्च, 2025 तक प्रदेश की समस्त ग्राम पंचायतों में "फार्मर रजिस्ट्री" शिविरों के आयोजन के संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
शिविर की अवधि: दिनांक 05 फरवरी, 2025 से 31 मार्च, 2025 तक प्रदेश की समस्त ग्राम पंचायतों में फार्मर रजिस्ट्री शिविर आयोजित किए जा रहे हैं।
वित्तीय स्वीकृति: षष्ठ राज्य वित्त आयोग के अंतर्गत पंचायती राज संस्थाओं को देय अनुदान राशि के उपयोग हेतु, ग्राम पंचायत स्तर पर तीन दिवसीय शिविर आयोजित करने पर प्रति ग्राम पंचायत अधिकतम रु. 15,000/- प्रति शिविर के व्यय/उपयोग करने की सहमति प्रदान की जाती है।
संदर्भित पत्र एवं आदेश: यह सहमति वित्त (व्यय-5) विभाग की आई.डी. संख्या 332500159 दिनांक 21.02.2025, राजस्व एवं उपवेशन विभाग के पत्र संख्या 349 दिनांक 21.01.2025 तथा विभागीय राजकाज पत्रक संख्या 13145977 दिनांक 22.01.2025 के क्रम में दी गई है।
यह आदेश शासन सचिव एवं आयुक्त डॉ. जोगाराम द्वारा जारी किया गया है।
ग्राम पंचायतों में प्रशासक एवं प्रशासनिक समितियों की नियुक्ति और ई-पंचायत पोर्टल संचालन संबंधी आदेश
ग्राम पंचायतों में प्रशासक एवं प्रशासनिक समितियों की नियुक्ति
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी विभिन्न आदेशों के अनुसार, जिन ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त हो चुका है और चुनाव अपरिहार्य कारणों से संपन्न नहीं हो पा रहे हैं, उनमें व्यवस्था सुचारू रखने हेतु दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
प्रशासक की नियुक्ति: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा-95 एवं 98 के तहत, संबंधित ग्राम पंचायत के निवर्तमान सरपंच को प्रशासक नियुक्त किया जाता है।
प्रशासनिक समिति का गठन: प्रशासक की सहायताार्थ प्रत्येक ऐसी ग्राम पंचायत के लिए प्रशासनिक समिति का गठन किया जाएगा, जिसमें निवर्तमान उप सरपंच एवं वार्ड पंच सदस्य बनाए जाएंगे।
ई-पंचायत पोर्टल पर लेन-देन: ई-पंचायत पोर्टल पर राशि भुगतान की कार्यवाही प्रशासक (निवर्तमान सरपंच) एवं संबंधित ग्राम विकास अधिकारी (VDO) द्वारा संयुक्त रूप से की जाएगी। इसके लिए पोर्टल पर प्रशासकों की एस.एस.ओ. (SSO) आईडी को संबंधित विकास अधिकारी-पंचायत समिति द्वारा निष्क्रिय कर समिति द्वारा अनुमोदन सुनिश्चित करने की व्यवस्था की गई है।
कार्य अवधि: प्रशासक एवं प्रशासनिक समिति की कार्यअवधि नवर्निर्वाचन के पश्चात गठित ग्राम पंचायत की प्रथम बैठक की तारीख के ठीक पूर्ववर्ती दिन तक रहेगी।
प्रधानमन्त्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) नयाँ आवास आवेदन फॉर्म और आवश्यक दस्तावेज चेकलिस्ट
प्रधानमन्त्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) आवेदन फॉर्म और दिशानिर्देश
यह दस्तावेज़ ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार और पंचायती राज विभाग के अंतर्गत प्रधानमन्त्री आवास योजना-ग्रामीण के नए आवास निर्माण हेतु आवेदन पत्र, स्वीकृति प्रक्रिया, शपथ-पत्र, भूमि प्रमाण-पत्र, सहमति-पत्र और चेकलिस्ट का आधिकारिक प्रारूप प्रस्तुत करता है।
मुख्य उद्देश्य एवं प्रक्रिया
प्रपत्र-24(1/1): यह नया आवास प्राप्त करने के लिए ग्रामीण विकास अधिकारी, टैग अधिकारी या ई-मित्र के माध्यम से भरा जाने वाला आवेदन पत्र है।
योग्यता और पात्रता: आवेदक का नाम PWL-2021 की वरीयता सूची में होना चाहिए। आवेदक के पास पूर्व में पक्का मकान नहीं होना चाहिए और वह निर्धारित अपवर्जन मानदंडों (जैसे वाहन, सरकारी नौकरी, आयकरदाता, भूमि सीमा आदि) के दायरे में नहीं आना चाहिए।
अनुदान और निर्माण शर्तें: आवास निर्माण हेतु मिलने वाली सहायता राशि से न्यूनतम 25 वर्गमीटर प्लिथ क्षेत्र का नया आवास अधिकतम 12 माह की अवधि में पूरा करना अनिवार्य है।
स्वीकृति प्रक्रिया: ग्राम विकास अधिकारी या टैग अधिकारी द्वारा पात्रता की जाँच, जियो टैग फोटो, Aawas Soft पर रजिस्ट्रेशन और पंचायत समिति स्तर पर प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति दी जाती है।
आवश्यक दस्तावेजों की चेकलिस्ट
वरीयता अनुसार भरा हुआ पूर्ण रजिस्ट्रेशन फॉर्म (प्रपत्र-1) और प्रमाणित फोटो
जमीन से संबंधित दस्तावेज की प्रमाणित प्रति या भूमि संबंधित प्रमाण-पत्र / सहमति-पत्र
ग्राम पंचायत की आबादी भूमि में रहवासी होने का प्रमाण-पत्र (सरपंच/ग्राम विकास अधिकारी द्वारा)
जॉब कार्ड, जन आधार कार्ड, राशन कार्ड और आधार कार्ड की प्रमाणित प्रतियाँ
आवेदक स्वयं की बैंक खाता संख्या की छाया प्रति
शपथ-पत्र, योग्यता निर्धारण शपथ-पत्र, कंसेंट फॉर्म (Consent Form) और आधार कार्ड सहमति प्रमाण-पत्र
कार्यस्थल एवं प्रस्तावित कार्य की जियो टैग फोटो
नोट: तथ्य छिपाकर या गलत जानकारी देकर लाभ प्राप्त करने पर राज्य सरकार से प्राप्त अनुदान राशि दण्डनीय ब्याज सहित वसूली योग्य होगी और प्रशासनिक स्वीकृति निरस्त कर दी जाएगी।
कार्यालय पटवार मण्डल - मकान व आबादी भूमि संबंधी रिपोर्ट प्रारूप
कार्यालय पटवार मण्डल रिपोर्ट प्रारूप
यह दस्तावेज कार्यालय पटवार मण्डल, तहसील और जिला स्तर पर उपयोग होने वाला एक आधिकारिक रिपोर्ट प्रारूप है। इस प्रारूप का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में आवेदक के मकान और आबादी भूमि से संबंधित विवरण को पटवार मण्डल के रिकॉर्ड के आधार पर सत्यापित करना है।
मुख्य बिंदु और विवरण:
कार्यालय विवरण: पटवार मण्डल, तहसील और जिला का उल्लेख करने के लिए निर्धारित स्थान।
आवेदक की जानकारी: आवेदक का नाम, पिता का नाम, जाति और निवास स्थान की प्रविष्टि।
भूमि और मकान का विवरण: ग्राम की आबादी भूमि में बने मकान, आराजी नंबर और मकान का कुल क्षेत्रफल (वर्ग फीट में) दर्ज करने का प्रावधान।
सत्यापन: पटवारी हल्के के हस्ताक्षर के साथ रिपोर्ट जारी करने का स्थान।
यह प्रपत्र पंचायती राज और ग्रामीण प्रशासनिक कार्यों के अंतर्गत आबादी भूमि व मकान से जुड़े सत्यापन कार्यों में उपयोगी है।
राजस्थान संपर्क पोर्टल पर प्राप्त लाल मुंह के बंदर एवं हनुमान लंगूर से संबंधित परिवादों के निस्तारण बाबत आदेश
राजस्थान संपर्क पोर्टल परिवाद निस्तारण एवं बंदर/लंगूर पकड़ने के संबंध में निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान संपर्क पोर्टल (181 सी.एम. हेल्पलाइन) पर प्राप्त होने वाले परिवादों के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
परिवादों का अंतरण: राजस्थान संपर्क पोर्टल पर लाल मुंह के बंदर (Rhesus Macaque) एवं हनुमान लंगूर (Presbytis Entellus) से संबंधित प्राप्त परिवाद संबंधित ग्राम पंचायत को भिजवाए जाने का प्रावधान है।
ग्राम पंचायत स्तर पर कार्यवाही: जिले के अधीन ग्राम पंचायतें इन बंदरों को भगाए जाने / पकड़े जाने के संबंध में आवश्यकतानुसार, नियमानुसार अपने स्तर से व्यय कर, संबंधित पेशेवर (Professionals) की मदद लेकर उचित कार्यवाही कर सकती हैं।
वन विभाग की अधिसूचना: वन विभाग की अधिसूचना दिनांक 18.02.2000 के अनुसार वन्य जीव (सुरक्षा) अधिनियम-1972 के तहत जिला कलेक्टर्स को लाल मुंह के बंदर एवं हनुमान लंगूर के संबंध में प्राधिकृत अधिकारी नियुक्त किया गया है।
विभागीय ग्रामीण कार्य निर्देशिका 2025 के बिंदु संख्या 10 एवं परिशिष्ट 2 के प्रावधानों के संबंध में मार्गदर्शन
विभागीय ग्रामीण कार्य निर्देशिका 2025 - भूमि स्वामित्व एवं मार्गदर्शन
ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न निर्माण कार्यों की तकनीकी, सुगमता और गुणवत्ता के लिए विभागीय ग्रामीण कार्य निर्देशिका-2025 लागू की गई है। इस निर्देशिका के बिंदु संख्या 10 एवं परिशिष्ट 2 के प्रावधानों के संबंध में जिला कलेक्टरों को आवश्यक मार्गदर्शन जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु एवं दिशा-निर्देश
आबादी भूमि: नए आंगनबाड़ी भवन, विद्यालय, सामुदायिक भवन, पंचायत भवन, स्वास्थ्य केंद्र, शौचालय आदि के निर्माण के लिए आबादी क्षेत्र में सक्षम प्राधिकारी से अनापत्ति प्रमाण-पत्र प्राप्त करना या नाम आवंटन/पट्टा जारी कराना आवश्यक है।
रास्ता/गोचर भूमि: नदी, नाला, तालाब के भराव क्षेत्र, रेलवे लाइन और सड़क सीमा के पास निर्माण स्वीकृत नहीं है। हालांकि सार्वजनिक शौचालयी, नालियों, ट्यूवेल, टंकी आदि के निर्माण के लिए स्थानीय स्तर पर उचित निर्णय लिया जा सकता है।
खातेदारी भूमि (दान/समर्पण): परिसम्पत्तियों के निर्माण हेतु खातेदारी भूमि दान या उपहार स्वरूप ली जा सकती है, जिसके लिए नामांतरण, खसरा में लोकेशन दर्ज करना और सीमाज्ञान करवाना अनिवार्य है।
परिसम्पत्तियों का नामकरण: नवनिर्मित परिसम्पत्तियों (जैसे आंगनबाड़ी, विद्यालय, सामुदायिक भवन, पंचायत भवन आदि) की भूमि स्वामित्व शासकीय कार्यालय/ग्राम पंचायत के नाम होना अनिवार्य है।
पंचायती राज संस्थाओं के जनप्रतिनिधियों के मानदेय में संशोधन की अधिसूचना
पंचायती राज जनप्रतिनिधियों के मानदेय में संशोधन
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज) द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक एफ.951(19)(41)परावि/लेखा/नि.आ./बजट घोषणा/2022-23 के अनुसार, माननीय उप मुख्यमंत्री (वित्त) महोदया की दिनांक 08.02.2024 की बजट घोषणा के बिंदु सं.-48 के क्रम में पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के मानदेय की दरों में संशोधन किया गया है।
मानदेय की संशोधित दरें
जिला प्रमुख, जिला परिषद: वर्तमान दर 13800/- रुपये प्रति माह से बढ़ाकर संशोधित दर 15180/- रुपये प्रति माह की गई है।
प्रधान, पंचायत समिति: वर्तमान दर 9660/- रुपये प्रति माह से बढ़ाकर संशोधित दर 10626/- रुपये प्रति माह की गई है।
सरपंच, ग्राम पंचायत: वर्तमान दर 5520/- रुपये प्रति माह से बढ़ाकर संशोधित दर 6072/- रुपये प्रति माह की गई है।
जनप्रतिनिधियों को देय मानदेय का भुगतान राज्य वित्त आयोग के तहत मिलने वाली अनुदान राशि से किया जाएगा। यह आदेश दिनांक 01.04.2024 से लागू होगा। यह अधिसूचना वित्त (व्यय-5) विभाग की आईडी संख्या 332400440 दिनांक 14.03.2024 से प्राप्त सहमति के अनुसरण में जारी की गई है।
ग्राम पंचायत द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के पात्र परिवारों को पट्टा जारी करने के संबंध में निर्देश
प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत पट्टा आवंटन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा ग्राम पंचायतों द्वारा पट्टा जारी करने के संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
विषय: ग्राम पंचायत द्वारा पट्टा जारी करने बाबत।
कारण: राज्य सरकार के ध्यान में लाया गया था कि कतिपय ग्राम पंचायतों में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की पात्रता/वरीयता सूची में सम्मिलित परिवारों को आबादी भूमि का पट्टा आवंटित नहीं हो पा रहा है।
योजना का महत्व: प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण राज्य सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं में शामिल है।
निर्देश: सभी मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद को निर्देशित किया गया है कि वे प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की पात्रता/वरीयता सूची में शामिल समस्त परिवारों को निर्धारित प्रक्रिया अपनाते हुए नियमनुसार भूमि/पट्टे आवश्यक रूप से आवंटित किया जाना सुनिश्चित करावें।
यह आदेश शासन सचिव एवं आयुक्त, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा जारी किया गया है।
ग्राम पंचायत द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के पात्र परिवारों को पट्टा जारी करने बाबत निर्देश
ग्राम पंचायत द्वारा पट्टा जारी करने के संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत पट्टा आवंटन के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
राज्य सरकार के ध्यान में लाया गया था कि कतिपय ग्राम पंचायतों में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की पात्रता/वरीयता सूची में सम्मिलित परिवारों को आबादी भूमि का पट्टा आवंटित नहीं हो पा रहा है।
चूंकि प्रधानमंत्री आवास योजना राज्य सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं में शामिल है, इसलिए सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है।
समस्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद को निर्देशित किया जाता है कि प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की पात्रता/वरीयता सूची में शामिल समस्त परिवारों को निर्धारित प्रक्रिया अपनाते हुए नियमानुसार भूमि/पट्टे आवश्यक रूप से आवंटित किया जाना सुनिश्चित करावें।
यह आदेश शासन सचिव एवं आयुक्त, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के हस्ताक्षर से जारी किया गया है।
ग्राम पंचायतों/पंचायत समितियों द्वारा पट्टा बही का संधारण किए जाने बाबत् परिपत्र
परिचय
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों द्वारा पट्टा बही का संधारण किए जाने के संबंध में परिपत्र जारी किया गया है। विभाग के ध्यान में आया था कि कतिपय पंचायत समिति स्तर पर ग्राम पंचायतों द्वारा जारी पट्टों का रिकॉर्ड संधारित नहीं किया जा रहा है, जिससे अनियमित पट्टे जारी होने की संभावना रहती है।
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 168 के मुख्य प्रावधान
नियम 168(1): नीलामी, परक्रामण या आवंटन द्वारा किए गए समस्त विक्रय जिनके लिए पट्टे जारी किए गए, उनका अभिलेख पंचायत द्वारा प्ररूप 24 में रखी गई पट्टा बही में रखा जाएगा।
नियम 168(2): पंचायत संबंधित पंचायत समिति के विकास अधिकारी को प्रत्येक मास के प्रथम सप्ताह में पट्टा बही की एक प्रति अग्रषित करेगी। विकास अधिकारी एक नियंत्रण रजिस्टर रखेगा जिसमें पंचायतवार लेजर रखा जाएगा और सत्यापन के प्रमाणस्वरूप प्रविष्टि पर हस्ताक्षर करेगा ताकि पिछली तारीखों में पट्टे जारी करना रोका जा सके।
नियम 168(3): पंचायत समिति अपने स्तर पर पट्टा बहियां तीन परत में छपवाएगी। सभी पट्टों पर पुस्तक संख्या व क्रम संख्या होगी। पट्टे की पहली परत आवंटी को, दूसरी परत पंचायत कार्यालय में तथा तीसरी परत पंचायत समिति को रिकॉर्ड हेतु भेजी जाएगी।
अनुपालन एवं निर्देश
समस्त संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया जाता है कि राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 168 में वर्णित प्रावधानों की पालना कड़ाई से अमल में लाई जाए। उक्त परिपत्र की अवहेलना किए जाने वाले संबंधित विकास अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
राजस्थान पंचायती राज संस्थाओं में बैठक कार्यवाही विवरण संधारण बाबत परिपत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग परिपत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 23-01-2024 को क्रमांक एफ.4(3)दिशा-निर्देश/विधि/पंश/2024/27 के अंतर्गत पंचायती राज संस्थाओं की बैठकों की कार्यवाही के संधारण के संबंध में महत्वपूर्ण परिपत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
नियम-44 के प्रावधान: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम-44 के अनुसार पंचायत में सरपंच, पंचायत समिति में विकास अधिकारी तथा जिला परिषद में मुख्य कार्यकारी अधिकारी द्वारा कार्यवाही का अभिलेखन हिंदी में किया जाना अनिवार्य है।
हस्ताक्षर की प्रक्रिया: बैठक समाप्त होने के पश्चात कार्यवाही विवरण के अंत में उपस्थित सदस्यों के हस्ताक्षर करवाए जाएं। विवरण के अंत में बिना कोई रिक्त स्थान छोड़े हस्ताक्षर कराए जाएं ताकि बाद में कोई विवरण दर्ज न किया जा सके।
प्राइवेट प्रिंटेड रजिस्टरों पर रोक: बाजार से खरीदे गए प्राइवेट प्रिंटेड कार्यवाही विवरण रजिस्टरों (जिन पर प्रपत्र संख्या 24 छपा होता है) का उपयोग तुरंत प्रभाव से बंद किया जाए, क्योंकि राजस्थान पंचायत एवं न्याय पंचायत (सामान्य) नियम, 1961 का वह नियम निरस्त हो चुका है और वर्तमान में राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1953 अस्तित्व में नहीं है।
लाइनदार रजिस्टर का उपयोग: कार्यवाही विवरण दर्ज करने हेतु किसी प्रिंटेड रजिस्टर की आवश्यकता नहीं है, केवल सामान्य लाइनदार रजिस्टर का उपयोग किया जा सकता है।
स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
स्वामित्व योजना क्रियान्वयन निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन के संबंध में समस्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद, राजस्थान को महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
सम्पत्ति दस्तावेज तैयार करना: स्वामित्व योजनांतर्गत भू-खण्ड धारकों का सम्पत्ति दस्तावेज (टाईटल डॉक्यूमेंट) तैयार करते समय पंचायती राज नियम 1996 के अध्याय 9 में वर्णित स्थावर सम्पत्तियों से संबंधित प्रावधान अनुरूप पुराने गृहों का विनियमितीकरण, भूमियों का कमजोर वर्गों को आवंटन, भूमियों का रियायती कीमत पर आवंटन, सरकारी संस्थाओं को आबाद भूमि का आवंटन एवं नीलामी से संबंधित नियमों में वर्णित प्रावधान अनुरूप ही नियमानुसार कार्यवाही की जानी है।
भौतिक सर्वेक्षण एवं पट्टा निर्माण: भौतिक सर्वेक्षण उपरांत भारतीय सर्वेक्षण विभाग से मैप-2 प्राप्त होने पर राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 के प्रावधानों के तहत पट्टा निर्माण की कार्यवाही की जावे। साथ ही यह भी सुनिश्चित कर लिया जावे कि पूर्व में जारी पट्टे एवं वर्तमान कब्जे के आधार पर क्षेत्रफल कम या अधिक होने की स्थिति में, पट्टे में नियमानुसार संशोधन कर लेवें तथा यह भी सुनिश्चित किया जावे कि पंचायती राज संस्थाओं को किसी भी प्रकार की राजस्व हानि न हो।
सभी जिलों में इन निर्देशों का अध्ययन कर योजना के सफल क्रियान्वयन हेतु आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 के अंतर्गत पुराने गृहों के वि नियमितीकरण एवं पट्टा जारी करने के संबंध में दिशा-निर्देश
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश (क्रमांक: एफ.4(1) दिशा-निर्देश/विधि/पंव/2023/04, दिनांक: 11.1.23) के अनुसार राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157-पुराने गृहों के विनिियमितीकरण के अंतर्गत 300 वर्गगज एवं उससे अधिक क्षेत्रफल के भूखंड का पट्टा जारी करने के संबंध में निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
नियम संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 का नियम 157 (पुराने गृहों का विनिियमितीकरण)।
क्षेत्रफल: 300 वर्गगज संनिर्मित क्षेत्रफल से अधिक भूमि जो आवासीय परिसर के साथ उपयोग में आ रही खाली आबादी भूमि का पट्टा नियम 157(1)(ii), उपयुक्त खण्ड (i) में विनिर्दिष्ट क्षेत्रफल से अधिक क्षेत्रफल के लिए है।
शर्ते एवं प्रक्रिया: ऐसे अधिक क्षेत्रफल पर राजस्थान स्टाम्प नियम, 2004 के नियम 58 के खण्ड (ख) के अधीन गठित जिला स्तरीय समिति द्वारा सिफारिश की गई नई बाजार दरों का 25 प्रतिशत राशि जमा करके भूखंडधारी के उपयोग में आ रही कब्जा शुदा (संपूर्ण) आबादी भूमि का पट्टा जारी किया जा सकता है।
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 के अंतर्गत पुराने गृहों के वि नियमितीकरण और पट्टा जारी करने बाबत
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 के संबंध में निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी पत्र क्रमांक एफ.4(1)दिशा-निर्देश/विधि/पंव/2023/04 दिनांक 11.1.2023 के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 (पुराने गृहों के विियमितीकरण) के अंतर्गत 300 वर्गगज एवं उससे अधिक क्षेत्रफल के भूखंड का पट्टा जारी करने के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
विषय: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157-पुराने गृहों के विियमितीकरण के संबंध में।
क्षेत्रफल: 300 वर्गगज संनिर्मित क्षेत्रफल से अधिक भूमि जो आवासीय परिसर के साथ उपयोग में आ रही खाली आबादी भूमि का पट्टा नियम 157(1)(ii), उपयुक्त खण्ड (i) में विनिर्दिष्ट क्षेत्र से अधिक क्षेत्रफल के लिए है।
शर्तें एवं प्रक्रिया: ऐसे अधिक क्षेत्रफल पर राजस्थान स्टाम्प नियम, 2004 के नियम 58 के खण्ड (ख) के अधीन गठित जिला स्तरीय समिति द्वारा सिफारिश की गई नई बाजार दरों का 25 प्रतिशत राशि जमा करके भूखंडधारी के उपयोग में आ रही कब्जा शुदा (संपूर्ण) आबादी भूमि का पट्टा जारी किया जा सकता है।
यह आदेश समस्त जिलों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद को आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रेषित किया गया है।
मरम्मत हेतु 1.00 लाख रुपये तक की सीमा ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग - स्थायी आदेश संख्या 39/2022
राजकीय आदेश विवरण
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रामीण विकास, अनुभाग-5) द्वारा जारी स्थायी आदेश संख्या 39/2022 (दिनांक 19 अक्टूबर 2022) के माध्यम से निर्माण कार्यों की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृतियों के संबंध में संशोधन किया गया है।
मुख्य बिंदु
पत्रांक संख्या: एफ 27(252) ग्राविव/ग्रुप-5/SOP/पार्ट-3/2021-22
जारी दिनांक: 19 अक्टूबर 2022
जारीकर्ता: अपर्णा अरोरा, प्रमुख शासन सचिव
संशोधन विवरण: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के पूर्व जारी आदेशों के क्रम में ग्राम पंचायतों को प्रदत्त शक्तियों के तहत प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति (विशेषकर रखरखाव मरम्मत हेतु 1.00 लाख रुपये तक की सीमा) से संबंधित प्रावधानों को संशोधित किया गया है।
यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है और इसकी प्रतियां संबंधित विभागों, जिला कलेक्टरों, मुख्य कार्यकारी अधिकारियों और विकास अधिकारियों को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रेषित की गई हैं।
राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 के नियम 157(1) के संबंध में मार्गदर्शन बाबत
राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 के नियम 157(1) पर मार्गदर्शन
कार्यालय जिला परिषद जोधपुर (ग्रामीण विकास प्रकोष्ठ) द्वारा जारी पत्र क्रमांक जिपजो/पंचायत/2022-23/1134 दिनांक 21/4/2022 के माध्यम से विकास अधिकारी, पंचायत समिति लूणी, जिला जोधपुर को राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 के संशोधित नियम 157(1) के संबंध में मार्गदर्शन प्रेषित किया गया है।
मुख्य बिंदु एवं मार्गदर्शन
विषय: राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 के संशोधित नियम 157(1) के सम्बन्ध में मार्गदर्शन बाबत।
संदर्भ: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), जयपुर का पत्र क्रमांक एफ.139(3) मार्गदर्शन/विधि/धरा/2022/291 दिनांक 23/3/2022 (तथा संयुक्त शासन सचिव (प्रथम) जयपुर के पत्रांक 291 दिनांक 23.03.2022)।
नियम 157(1) के अंतर्गत उठाए गए मुख्य प्रश्न:
नियम 157 पुराने गृहों का विनियामितीकरण (1) जहां व्यक्ति आबादी भूमि में पुराने गृह का कब्जा रखते हैं, और पट्टा जारी किये जाने के इच्छुक हैं, में 'व्यक्ति' शब्द को इस नियम के सन्दर्भ में परिभाषित/विवेचित करने के संबंध में।
किसी 'व्यक्ति' के आबादी भूमि में पुश्तैनी कब्जाशुदा मकान एक से अधिक होने पर उस व्यक्ति/उस परिवार के अन्य सदस्यों के नाम एक से अधिक पट्टे/विक्रय विलेख जारी किये जा सकते हैं अथवा नहीं।
विभाग द्वारा प्रेषित मार्गदर्शन:
'व्यक्ति' शब्द पंचायती राज अधिनियम, 1994 में नहीं है। उक्त शब्द की परिभाषा Gen. Clause Act के अनुसार व्यक्ति शब्द की परिभाषा Section 42 के अनुसार:- "Person shall include any company or association or body of individuals, whether incorporated or not;" है।
संबंधित प्रावधानों में ऐसे पट्टे/विक्रय विलेख जारी किए जाने के संबंध में स्पष्ट प्रावधान नहीं है।
कृषि भूमि के आवासीय संपरिवर्तन और पट्टा जारी करने के संबंध में मार्गदर्शन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग का महत्वपूर्ण मार्गदर्शन
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज) द्वारा कृषि भूमि के आवासीय संपरिवर्तन और पट्टा जारी करने के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
क्रमांक एवं दिनांक: क्रमांक एफ.139 (22) मार्गदर्शन/पाली/विधि/परां/2022/4-13, दिनांक 13/4/2022 (जिला कलेक्टर, पाली को संबोधित)।
विषय: ग्राम पंचायत रायपुर, पं.स. रायपुर जिला पाली में तहसीलदार द्वारा खातेदारी भूमि का आवासीय संपरिवर्तन (कृषि भूमि से अकृषि) के पश्चात उस भूमि के पंचायत क्षेत्र के क्षेत्राधिकार में आने या नहीं आने के संबंध में मार्गदर्शन।
प्रमुख स्पष्टीकरण: कृषि भूमि का आवासीय संपरिवर्तन करने के पश्चात वह भूमि संबंधित खातेदार / अन्तरिती के नाम पर ही दर्ज रहती है, इसलिए यह ग्राम पंचायत की आबादी में नहीं मानी जा सकती है।
ग्राम पंचायत का क्षेत्राधिकार: ग्राम पंचायत को ऐसी भूमि के संबंध में पट्टा जारी करने या अन्य कोई कार्यवाही करने की अधिकारिता नहीं है। ऐसी भूमि पर विकास कार्य संपरिवर्तन आदेश के अनुसार ही करवाए जा सकते हैं।
अन्य संबंधित आदेश: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के क्रमांक एफ.139 ()पराविवि/कृषि भू.पट्टा/अलवर/2016/368 दिनांक 02-06-2016 के अनुसार राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में ग्राम पंचायतों को पंचायत क्षेत्र में स्थित आबादी भूमि का ही पट्टा दिये जाने के प्रावधान हैं। निजी खातेदारों में परिवर्तित आबादी भूमि का पट्टा दिये जाने के प्रावधान नहीं हैं। ऐसे प्रकरणों में राजस्व विभाग द्वारा ही कार्यवाही की जाती है।
ग्राम पंचायतों/पंचायत समितियों द्वारा पट्टा बही का संधारण किए जाने बाबत् परिपत्र
पट्टा बही के संधारण के संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा दिनांक 30/03/2022 को एक परिपत्र जारी किया गया है जिसका क्रमांक क्र.एफ.139(06)निर्देश/विधि/पंवरे/2022/327 है।
इस परिपत्र का मुख्य उद्देश्य ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों द्वारा पट्टा बही का उचित संधारण सुनिश्चित करना है।
मुख्य बिंदु:
विभाग के ध्यान में लाया गया था कि कतिपय पंचायत समिति स्तर पर ग्राम पंचायतों द्वारा जारी पट्टों का रिकॉर्ड संधारित नहीं किया जा रहा है, जिससे भ्रष्टाचार संबंधी प्रकरण प्राप्त हो रहे हैं।
राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1996 के नियम 168 के तहत नीलामी, परक्रामण या आवंटन द्वारा किए गए समस्त विक्रयों, जिनके लिए पट्टे जारी किए जाएं, अभिलेख पंचायत द्वारा प्ररूप 24 में पट्टा बही में रखे जाने का प्रावधान है।
समस्त विकास अधिकारियों, पंचायत समिति (राजस्थान) को निर्देशित किया गया है कि राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1996 के नियम 168 में वर्णित प्रावधानों की पालना कढ़ाई से अमल में लाई जाए।
उक्त परिपत्र की अवहेलना किए जाने वाले संबंधित विकास अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
अतिरिक्त / सहायक विकास अधिकारी के जॉब चार्ट के संबंध में परिपत्र
परिचय एवं मुख्य उद्देश्य
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा क्रमांक एफ.28(2)परावि/प्रशा.2/पंचा.प.अ./जॉब चार्ट/2017/550, दिनांक 23-02-2022 के तहत अतिरिक्त विकास अधिकारी और सहायक विकास अधिकारी के जॉब चार्ट के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
अतिरिक्त विकास अधिकारी के कार्य एवं उत्तरदायित्व
समन्वयक के रूप में: अतिरिक्त विकास अधिकारी, सहायक विकास अधिकारी तथा विकास अधिकारी के मध्य एक समन्वयक के रूप में विकास अधिकारी के सीधे नियंत्रण में कार्य करेंगे।
शाखाओं के प्रभारी: पंचायत समिति की समस्त शाखाओं के प्रभारी के रूप में विकास अधिकारी के निर्देशन में कार्य करेंगे।
पर्यवेक्षण: पंचायत समिति के सहायक विकास अधिकारी अतिरिक्त विकास अधिकारी के पर्यवेक्षण में अपनी आवंटित शाखाओं का कार्य संपादित करेंगे।
नोडल अधिकारी: प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), राजीविका, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं के नोडल अधिकारी भी आवश्यकतानुसार नियुक्त किए जा सकेंगे।
सहायक विकास अधिकारी (SEO) का जॉब चार्ट एवं सर्कल पुनर्गठन
पदों का विवरण: जिला परिषद में कुल 165 सृजित पद (प्रति कार्यालय 5-5 पद) तथा पंचायत समिति में 2264 सृजित पद (औसततन 5 ग्राम पंचायतों पर 1 पद) हैं।
सर्कल/क्लस्टर पुनर्गठन: पंचायत समिति के परिदृश्य में आने वाली समस्त ग्राम पंचायतों को स्वीकृत सहायक विकास अधिकारियों के पदों के अनुरूप समान रूप से भौगोलिक संबद्धता और निकटता को ध्यान में रखते हुए सर्कल/क्लस्टर में पुनर्वितजित किया जाएगा।
निरीक्षण एवं भ्रमण: सहायक विकास अधिकारी अपने कलस्टर की प्रत्येक ग्राम पंचायत का माह में कम से कम एक बार विस्तृत निरीक्षण करेंगे तथा निरीक्षण प्रतिवेदन विकास अधिकारी के माध्यम से मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद तथा विभाग को प्रेषित करेंगे।
ग्राम पंचायत रिकॉर्ड: सहायक विकास अधिकारी ग्राम पंचायत अभिलेखों, लेजर, रोकड़ बही, स्टॉक रजिस्टर, जन्म-मृत्यु पंजीका, और विभिन्न अधिनियमों (सूचना का अधिकार अधिनियम 2005, सुनवाई का अधिकार अधिनियम 2012, लोक सेवा गारंटी अधिनियम 2011) के अंतर्गत प्राप्त आवेदन रजिस्टरों का नियमित संधारण सुनिश्चित कराएंगे।
अतिरिक्त / सहायक विकास अधिकारी के जॉब चार्ट के संबंध में परिपत्र
अतिरिक्त एवं सहायक विकास अधिकारी जॉब चार्ट परिपत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा क्रमांक एफ.28(2)परावि/प्रशा.2/पंचा.प.अ./जॉब चार्ट/2017/550 दिनांक 23-2-2022 के तहत अतिरिक्त विकास अधिकारी और सहायक विकास अधिकारी के जॉब चार्ट के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
अतिरिक्त विकास अधिकारी के कार्य एवं दायित्व
अतिरिक्त विकास अधिकारी, सहायक विकास अधिकारी तथा विकास अधिकारी के मध्य एक समन्वयक के रूप में विकास अधिकारी के सीधे नियंत्रण में कार्य करेंगे।
पंचायत समिति की समस्त शाखाओं के प्रभारी के रूप में विकास अधिकारी के निर्देशन में कार्य करेंगे।
पंचायत समिति के सहायक विकास अधिकारी अतिरिक्त विकास अधिकारी के पर्यवेक्षण में अपनी आवंटित शाखाओं का कार्य संपादित करेंगे।
अतिरिक्त विकास अधिकारी अपने अधीन पदस्थापित अतिरिक्त विकास अधिकारियों को प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), राजिविका, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं का नोडल अधिकारी भी आवश्यकतानुसार नियुक्त कर सकेंगे।
सहायक विकास अधिकारी (SEO) का जॉब चार्ट एवं कलस्टर पुनर्गठन
विभागीय परिपत्र क्रमांक 4313 दिनांक 16.11.17 की निरंतरता में सहायक विकास अधिकारी के ग्राम पंचायत कलस्टर पुनर्गठन करने एवं उसके अनुरूप निरीक्षण व्यवस्था स्थापित करने के संबंध में निर्देश दिए गए हैं।
जिला परिषद: कुल सृजित पद 165 (प्रति कार्यालय में 5-5 पद)।
पंचायत समिति: कुल सृजित पद 2264 (औसततन 5 ग्राम पंचायतों पर 1 पद)।
सहायक विकास अधिकारी के प्रमुख निरीक्षण एवं कार्य
सहायक विकास अधिकारी अपने कलस्टर की प्रत्येक ग्राम पंचायत का माह में कम से कम एक बार विस्तृत निरीक्षण करेंगे।
ग्राम पंचायतों के कलस्टर के मध्य वाली ग्राम पंचायत को कलस्टर मुख्यालय बनाया जाकर कलस्टर की ग्राम पंचायतों के ग्राम विकास अधिकारियों की माह में कम से कम एक बैठक का आयोजन किया जाएगा।
मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण, सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास कार्यक्रम, विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास कार्यक्रम, राज्य वित्त आयोग अनुदान, केन्द्र वित्त आयोग अनुदान, स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन जैसी योजनाओं के कार्यों का प्रतिमाह निरीक्षण करेंगे।
ग्राम पंचायत में संधारित किए जाने वाले रिकॉर्ड/पंजिकाओं का संधारण और अद्यतन सुनिश्चित कराना।
प्रशासन गांवों के संग अभियान-2021 की अवधि बढ़ाने बाबत अधिसूचना
प्रशासन गांवों के संग अभियान-2021 की अवधि विस्तार
राजस्थान सरकार राजस्व (ग्रुप-6) विभाग द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक प.3(17)राज-6/2021/143, दिनांक 15/12/2021 के अनुसार 'प्रशासन गांवों के संग अभियान-2021' की अवधि में संशोधन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
संशोधित अवधि: उक्त अभियान अब दिनांक 02.10.2021 से 28.02.2022 तक के लिये प्रभावशाली रहेगा।
पूर्व अवधि: अधिसूचना में उल्लेखित पहले की अवधि (दिनांक 02.10.2021 से 17.12.2021) के स्थान पर अब इसे आगे बढ़ाया गया है।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से महावीर प्रसाद मीना, संयुक्त शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है तथा इसकी प्रतिलिपि विभिन्न संबंधित विभागों एवं अधिकारियों को सूचनाथ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित की गई है।
राजस्थान लोक उपापन में पारदर्शिता नियम, 2013 के नियम 16 के अंतर्गत 6.00 लाख रुपये से अधिक लागत के कार्यों हेतु सामग्री उपापन के संबंध में मार्गदर्शन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग का महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा क्रमांक एफ 27(263)ग्रावि/ग्रुप-5/जीकेण/उपापन 2015-18, जयपुर, दिनांक 29 नवम्बर 2021 के तहत राजस्थान लोक उपापन में पारदर्शिता अधिनियम, 2012 एवं राजस्थान लोक उपापन में पारदर्शिता नियम, 2013 के नियम 16 के प्रावधानों के अंतर्गत महात्मा गांधी नरेगा योजना सहित निर्माण कार्य हेतु आनुषंगिक सामग्री के उपापन के संबंध में विस्तृत मार्गदर्शन जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु एवं निर्देश
नियम संशोधन: राजस्थान राजपत्र विशेषांक में जारी अधिसूचना दिनांक 1 अक्टूबर, 2021 (G.S.R. 349) के अनुसार राजस्थान लोक उपापन में पारदर्शिता नियम, 2013 के नियम 16 के उप-नियम (1) के परन्तुक में 'पांच लाख' के स्थान पर 'छः लाख' तथा 'पचास लाख' के स्थान पर 'साठ लाख' प्रतिस्थापित किया गया है।
6.00 लाख रुपये से अधिक के कार्य: महात्मा गांधी नरेगा को छोड़कर ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा क्रियान्वित योजनाओं के अंतर्गत स्वीकृत 6.00 लाख रुपये से अधिक लागत के समस्त कार्य राजस्थान लोक उपापन में पारदर्शिता नियम, 2013 की पालना कर संपूर्ण कार्य (श्रम एवं सामग्री सहित) संकर्म निविदा (वर्क्स टेंडर) द्वारा संपादित कराए जाएंगे।
सामग्री उपापन सीमा: पंचायती राज संस्थाएं सीमित निविदा के माध्यम से अधिकतम सीमा राशि रु. 60.00 लाख तक की सामग्री का उपापन कर सकती हैं।
कार्य समिति की जिम्मेदारी: पंचायती राज संस्था द्वारा एक वित्तीय वर्ष में रु. 60.00 लाख तक की पालना कराने का उत्तरदायित्व संबंधित पंचायत समिति का होगा।
ई-उपापन प्रक्रिया: रु. 6.00 लाख से अधिक लागत (श्रम सामग्री सहित) के कार्यों हेतु सामग्री का क्रय/उपापन ई-उपापन (E-Procurement) प्रक्रिया को अपना कर ही संपादित किया जाएगा।
अधिक जानकारी एवं विस्तृत दिशा-निर्देशों के लिए कृपया मूल विभागीय आदेश पत्र का अवलोकन करें।
प्रशासन गांवों के संग अभियान-2021 के दौरान जारी किये जाने वाले पट्टों के संबंध में मार्गदर्शन
प्रशासन गांवों के संग अभियान-2021: पट्टों के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 26.11.2021 को आदेश क्रमांक एफ.4(13)मार्गदर्शन/विधि/पंव्रा/2021/957 जारी किया गया है। यह आदेश सभी मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद (राजस्थान) को 'प्रशासन गांवों के संग अभियान-2021' के दौरान जारी किए जाने वाले पट्टों के संबंध में मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए है।
मुख्य बिंदु:
चोरी/नष्ट/गुम हुए मूल पट्टों के संबंध में: यदि 1994 से पूर्व या राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 एवं नियम, 1996 के तहत जारी मूल पट्टा चोरी, गुम या नष्ट हो गया हो:
यदि ग्राम पंचायत के रिकॉर्ड में कार्यालय प्रति उपलब्ध है: आवेदक से FIR की प्रति, शपथ पत्र (पट्टा चोरी होने पर) या शपथ पत्र (पट्टा नष्ट/गुम होने पर) प्राप्त कर, राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के अनुसार डुप्लीकेट पट्टा जारी किया जा सकता है।
यदि ग्राम पंचायत के रिकॉर्ड में कार्यालय प्रति उपलब्ध नहीं है: FIR की प्रति, शपथ पत्र, तथा पट्टा नष्ट/गुम होने पर आवेदक का शपथ पत्र लेकर स्थानीय समाचार पत्रों में आपत्ति आमंत्रण नोटिस प्रकाशित कराया जाएगा। आपत्तियों के निस्तारण के बाद नियमानुसार नया पट्टा जारी किया जा सकता है।
मूल पट्टा प्रस्तुत किए जाने पर पुनर्विसमयकरण/विभाजन/नामान्तरण/भू-उपयोग परिवर्तन: यदि आवेदक मूल पट्टा प्रस्तुत करे और पंचायत रिकॉर्ड में कार्यालय प्रति संधारित न हो, तो आवेदक से शपथ पत्र लेकर, स्थानीय समाचार पत्रों में आपत्ति नोटिस प्रकाशित करवाकर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
आवासीय भूमि का उप-विभाजन/पुनर्गठन: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के तहत प्रारूप-52 में जारी अनुज्ञा के पश्चात संबंधित ग्राम पंचायत द्वारा आवेदक का मूल पट्टा जमा कराकर अनुज्ञा के अनुसार नया पट्टा जारी किया जाएगा।
पट्टों का पंजीयन: आवासीय पट्टों का पंजीयन प्रचलित कानूनों के तहत एक अनिवार्य विधिक प्रक्रिया है, इसमें छूट प्रदान नहीं की जा सकती।
आबादी भूमि (राजस्व रिकॉर्ड): जिन ग्राम पंचायतों में जिला कलेक्टर/उपखण्ड अधिकारी एवं तहसीलदार द्वारा आबादी हेतु कुछ खसरे दर्ज किए जा रहे हैं और उनमें पक्के मकान हैं, तो राजस्व रिकॉर्ड में ग्राम पंचायत के नाम स्वामित्व दर्ज होने पर नियममानुसार पट्टे जारी किए जा सकते हैं।
नियम-157 के तहत कार्रवाई: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के लागू होने के पश्चात की अवधि में निहित भूमि पर पात्रता रखने वाले व्यक्ति को नियम-157 के तहत प्रक्रिया पूर्ण कर पट्टा दिया जा सकता है।
राजस्थान पंचायती राज (चतुर्थ संशोधन) नियम, 2021 - प्रशासन गांवों के संग अभियान के दौरान शुल्क में छूट
राजस्थान पंचायती राज (चतुर्थ संशोधन) नियम, 2021
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा अधिसूचना दिनांक 06 अक्टूबर, 2021 जारी कर राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन किया गया है। इसके तहत 'राजस्थान पंचायती राज (चतुर्थ संशोधन) नियम, 2021' बनाए गए हैं जो तुरंत प्रभाव से लागू हो गए हैं।
प्रमुख बिंदु:
नियम 157 का संशोधन: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 के उप-नियम (1) के अंतर्गत एक नया परंतुक जोड़ा गया है।
प्रशासन गांवों के संग अभियान 2021: इस अभियान की समयावधि के दौरान खंड (i) और (ii) के अधीन विनिर्दिष्ट दरों के पचास प्रतिशत (50%) के समतुल्य दर से ही शुल्क प्रभारित किया जाएगा।
यह आदेश राज्यपाल के आदेश से डॉ. प्रेम सिंह चारण, संयुक्त शासन सचिव द्वारा [सं. एफ.139(45)पंरावि/विधि/संशो/2021/860] के अंतर्गत जारी किया गया है।
स्थायी आदेश संख्या 37/2021: ग्राम पंचायतों के निर्माण कार्यों की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति के संबंध में
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग - स्थायी आदेश संख्या 37/2021
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रामीण विकास, अनुभाग-5) द्वारा दिनांक 01 अक्टूबर 2021 को स्थायी आदेश संख्या 37/2021 जारी किया गया है। यह आदेश ग्राम पंचायतों को निर्माण कार्यों की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति जारी करने हेतु प्रदत्त शक्तियों में संशोधन से संबंधित है।
मुख्य बिंदु एवं वित्तीय सीमाएं
परिशिष्ट - 1 (प्रशासनिक स्वीकृति): निर्माण कार्य की प्रशासनिक स्वीकृति (मूल) (विधायक, सांसद कोष व महात्मा गांधी नरेगा के अतिरिक्त) के अंतर्गत नवीन स्वीकृति हेतु वित्तीय सीमा 10.00 लाख रुपये तक तथा रखरखाव एवं मरम्मत हेतु 0.50 लाख रुपये तक निर्धारित की गई है। इसमें शर्तें/टिप्पणियां क्र.सं. 1 से 13 यथावत लागू होंगी।
परिशिष्ट - 2 (वित्तीय स्वीकृति): निर्माण कार्य की वित्तीय स्वीकृति (मूल) (विधायक, सांसद कोष व महात्मा गांधी नरेगा के अतिरिक्त) के अंतर्गत नवीन स्वीकृति हेतु वित्तीय सीमा 10.00 लाख रुपये तक तथा रखरखाव एवं मरम्मत हेतु 0.50 लाख रुपये तक निर्धारित की गई है। इसमें शर्तें/टिप्पणियां क्र.सं. 1 से 10 यथावत लागू होंगी।
यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं।
आबादी भूमि के भू-परिवर्तन, उप-विभाजन, पुनर्गठन, पुनर्रधिमान्यकरण एवं हस्तांतरण संबंधी दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की आज्ञा दिनांक 30.09.2021
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा क्रमांक एफ.4(3)निर्देश/पट्टा/विधि/पंवै/2020/849 दिनांक 30.9.2021 के माध्यम से ग्राम पंचायतों की आबादी भूमि के आवासीय से अन्य उपयोग में भू-परिवर्तन, भू-खंडों के उप-विभाजन, पुनर्गठन, पट्टों के पुनर्रधिमान्यकरण (Revalidation) तथा हस्तांतरण/नामांतरण (Mutation) के संबंध में विस्तृत प्रक्रिया और दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
आवासीय भूमि का वाणिज्यिक एवं अन्य प्रयोजनार्थ भू-उपयोग संपरिवर्तन: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 173-क से 173-ज के अंतर्गत विभिन्न प्रयोजनों (वाणिज्यिक, औद्योगिक, लोक उपयोग, संस्थागत, चिकित्सा सुविधा, सौर या पवन ऊर्जा संयंत्र) के लिए संपरिवर्तन शुल्क और प्रक्रिया निर्धारित की गई है।
आपत्तियां आमंत्रित करना व नोटिस: भूमि उपयोग परिवर्तन के आवेदन पर आसपास के क्षेत्र में नोटिस चस्पा करके, डुगडुगी बजवाकर या समाचार पत्र में प्रकाशित कर 30 दिवस के भीतर आपत्तियां आमंत्रित की जाती हैं।
भू-खंडों का उप-विभाजन एवं पुनर्गठन: नियम 173-ख के अंतर्गत भू-खंडों के उप-विभाजन या पुनर्गठन के लिए प्रारूप 51 में आवेदन करना होता है, जिसे मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद द्वारा 45 दिनों में निपटाया जाता है।
पट्टों का पुनर्रधिमान्यकरण (Revalidation): निर्धारित समय सीमा समाप्त हो चुके पट्टों के पुनर्रधिमान्यकरण हेतु नियम 157, 158, 159 एवं 162 के अधीन फीस निर्धारित की गई है।
हस्तांतरण/नामांतरण (Mutation): आबादी भूमि के पट्टों के हस्तांतरण हेतु उत्तराधिकार, वसीयतनामा, गिफ्ट डीड आदि मामलों के लिए आवश्यक दस्तावेज और शुल्क/दरें (प्रारूप 48 से 52) तय की गई हैं।
स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन बाबत महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन बाबत निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 18.01.2021 को 'स्वामित्व योजना' के क्रियान्वयन के संबंध में महत्वपूर्ण आदेश जारी किया गया है। राष्ट्रीय पंचायत दिवस (24 अप्रैल 2020) पर केंद्र सरकार द्वारा आरंभ की गई इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पंचायती राज पर इसके दूरगामी प्रभावों को देखते हुए राजस्व विभाग एवं पंचायती राज विभाग के संयुक्त प्रयासों से क्रियान्वयन करना है।
योजना की मुख्य बातें और प्रक्रिया
ड्रोन फोटोग्राफी और मैपिंग: भारतीय सर्वेक्षण विभाग (Survey of India) द्वारा प्रत्येक राजस्व ग्राम की आबादी भूमि का मानचित्र ड्रोन के जरिए फोटोग्राफी कर तैयार किया जाएगा।
चूना मार्किंग: ड्रोन उड़ान से पहले राजस्व ग्राम की आबादी भूमि की बाहरी सीमा (outer line) पर चार इंच चौड़ाई की चूना लाइन डालकर सीमा मार्क की जाएगी। खाली पड़े भूखंडों को भी चूना लाइन डालकर चिह्नित किया जाएगा।
सर्वे समिति का गठन: प्रत्येक राजस्व ग्राम हेतु सर्वे समिति का गठन किया जाएगा जिसमें ग्राम सेवक, दो वार्ड पंच (संबंधित राजस्व ग्राम व अन्य वार्ड पंच) और पंचायत का एक कार्मिक (कनिष्ठ लिपिक अथवा ग्राम रोजगार सहायक) शामिल होंगे। यह समिति प्राप्त इमेज मैप के अनुसार प्रत्येक भूखंड और निर्मित भवन का सर्वे कर निर्धारित प्रपत्र में जानकारी संकलित करेगी।
आपत्तियां एवं निस्तारण: ग्राम पंचायत द्वारा सर्वे प्रपत्र और इमेज मैप की प्रति पंचायत भवन एवं सार्वजनिक स्थल पर चस्पा की जाएगी। राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम-148 के प्रावधानुसार 07 दिवस के भीतर आपत्तियां दर्ज कराई जा सकेंगी, जिनका निस्तारण ग्राम सभा के माध्यम से किया जाएगा।
पट्टा वितरण: आपत्तियों के निराकरण के बाद फाइनल इमेज मैप (आईडी नंबरिंग सहित) के आधार पर संबंधित लाभार्थियों को राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के प्रावधानों के तहत पट्टा, रजिस्ट्री एवं पीडीएफ कॉपी मोबाइल नंबर पर उपलब्ध कराई जाएगी।
प्रथम चरण: राज्य में इस योजना का सबसे पहले क्रियान्वयन जैसलमेर जिले में किया जाना है।
स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन हेतु प्रभारी अधिकारी की नियुक्ति का आदेश
स्वामित्व योजना आदेश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.4(5)स्वामित्व/विधि/पंव/2020/45 दिनांक 13.01.2021 के अनुसार 'स्वामित्व योजना' के क्रियान्वयन हेतु राज्य स्तर पर SVAMITVA Dashboard integration के लिए प्रभारी अधिकारी नियुक्त किया गया है।
प्रभारी अधिकारी का विवरण:
नाम: श्री पी.एन. मीणा
पदनाम: ए.सी.पी. (उप निदेशक), पंचायती राज विभाग
मोबाइल नंबर: 9784590643
यह आदेश शासन सचिव एवं आयुक्त महोदय द्वारा जारी किया गया है तथा इसकी प्रतिलिपि संबंधित विभागों एवं अधिकारियों को सूचनार्थ प्रेषित की गई है।
राजस्थान में स्वामित्त्व योजना के क्रियान्वयन बाबत दिशा-निर्देश
स्वामित्त्व योजना का क्रियान्वयन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.4(1)स्वामित्त्व/विधि/पंश/2020/4046 दिनांक 07.09.2020 के अंतर्गत 'स्वामित्त्व योजना' के क्रियान्वयन के संबंध में विस्तृत निर्देश जारी किए गए हैं। इस पत्र के साथ भारत सरकार द्वारा जारी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) भी संलग्न किया गया है।
योजना का मुख्य उद्देश्य
ग्रामीण भारत में आबाद क्षेत्रों (Abadi Land) की ड्रोन सर्वेक्षण तकनीक से पैमाइश कर डिजिटल मानचित्र तैयार करना।
ग्रामीण परिवारों को 'प्रॉपर्टी कार्ड' (अधिकारों के अभिलेख) वितरित करना ताकि वे अपनी संपत्ति का उपयोग बैंक ऋण और अन्य वित्तीय लाभ प्राप्त करने के लिए कर सकें।
ग्राम पंचायतों में संपत्ति कर और संपत्ति रजिस्टर को अद्यतन कर कर संग्रहण प्रणाली को सुदृढ़ बनाना।
ग्रामीण संपत्ति से जुड़े आपसी विवादों और अदालतों में लम्बित मुकदमों के त्वरित निराकरण का मार्ग प्रशस्त करना।
प्रमुख प्रक्रिया एवं चरण (Standard Operating Procedure)
CORS नेटवर्क की स्थापना: पायलट चरण के तहत राजस्थान और पंजाब राज्यों में सतत प्रचलित संदर्भ स्टेशन (CORS) नेटवर्क की स्थापना।
तैयारी की गतिविधियां: कलेक्टर/सक्षम प्राधिकारी द्वारा सार्वजनिक नोटिस के माध्यम से सर्वेक्षण क्षेत्र की अधिसूचना, ग्राम सभा का आयोजन, और राजस्व विभाग एवं ग्राम पंचायत अधिकारियों द्वारा सीमाओं का चूना लाइनों से चिह्नीकरण।
ड्रोन सर्वेक्षण एवं डेटा प्रोसेसिंग: भारतीय सर्वेक्षण विभाग (Survey of India) द्वारा ड्रोन के माध्यम से हवाई तस्वीरें लेना और जीआईएस (GIS) लैब में डेटा प्रोसेसिंग कर ऑर्थो-रेक्टिफाइड इमेज (ORI) तथा लैंड पार्सल मैप्स (LPM) तैयार करना।
दावा और आपत्ति निस्तारण: ग्राम सभा, भूस्वामियों और राजस्व अधिकारियों की मदद से स्वामित्व का सत्यापन तथा प्राप्त आपत्तियों का निस्तारण।
प्रॉपर्टी कार्ड का वितरण: राजस्व विभाग द्वारा अंतिम मानचित्रों और टेक्स्ट डेटा के आधार पर ग्रामीणों को प्रॉपर्टी कार्ड जारी करना।
संबंधित विभाग एवं अधिकारी
इस योजना के क्रियान्वयन में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राज्य राजस्व विभाग, भारतीय सर्वेक्षण विभाग (Survey of India), और पंचायती राज संस्थाएं (सरपंच, पंचायत सचिव, ग्राम सेवक) संयुक्त रूप से कार्य कर रहे हैं।
आबादी भूमि पर से अतिक्रमण हटाने बाबत महत्वपूर्ण निर्देश
आबादी भूमि पर से अतिक्रमण हटाने बाबत निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा आबाती भूमि पर से अतिक्रमण हटाने के संबंध में आदेश जारी किया गया है।
निर्देश: मुख्यमंत्री सूचना तंत्र पर पंचायती राज विभाग के जन घोषणा पत्र में बिंदु संख्या 27.8.04 के अनुसार अतिक्रमणियों पर शिकंजा कसा जाएगा एवं जमीनों के मामलों में धोखाधड़ी रोकने के लिए संबंधित अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी एवं हाउसिंग सोसाइटियों की जिम्मेदारी सुनिश्चित की जाएगी की पालना सुनिश्चित की जानी है।
नियम संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम-165 के अन्तर्गत उपरोक्तानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
यह पत्र मगनलाल योगी, आयुक्त एवं संयुक्त शासन सचिव (प्रथम) द्वारा जारी किया गया है तथा समस्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद को प्रेषित किया गया है।
पुराने पट्टों के पुनर्विधमान्यकरण (Revalidation) किये जाने बाबत आदेश
पुराने पट्टों का पुनर्विधमान्यकरण (Revalidation)
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा पुराने पट्टों के पुनर्विधमान्यकरण के संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
नया नियम: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में नया नियम-167क जोड़ा गया है जिसके तहत पंचायत द्वारा जारी किये गए विक्रय विलेख, पट्टा या पट्टा विलेख का पुनर्विधमान्यकरण (Revalidation) किया जा सकता है।
शर्तें: पट्टे का पुनर्विधमान्यकरण ग्राम पंचायत में उपलब्ध रिकॉर्ड से मिलान कर पट्टा नियमानुसार जारी होने की स्थिति में तथा पट्टाधारक स्वयं या उसके वारिसान द्वारा प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करने पर ही किया जाएगा।
प्रारूप: पट्टे का पुनर्विधमान्यकरण मूल पट्टे पर ही निर्धारित प्रारूप में किया जायेगा जिसमें ग्राम पंचायत की बैठक दिनांक, प्रस्ताव संख्या और पुनर्विधमान्यकरण की दिनांक का उल्लेख किया जाएगा।
हस्ताक्षर: इस प्रक्रिया में ग्राम विकास अधिकारी और सरपंच के हस्ताक्षर होंगे।
राजस्थान राज्य सूचना आयोग का निर्णय: तृतीय पक्षकार से संबंधित सूचना नहीं दी जा सकती
राजस्थान राज्य सूचना आयोग निर्णय
यह पोस्ट राजस्थान राज्य सूचना आयोग, जयपुर द्वारा जारी द्वितीय अपील संख्या 105739/2018 (निर्णय दिनांक: 24/05/2019) के आदेश पर आधारित है।
मुख्य बिंदु एवं विवरण
अपीलार्थी: श्री मुकेश गैना, तेजाजी मन्दिर के पास, तबीजी, जिला अजमेर (राज.)।
प्रत्यर्थी: राज्य लोक सूचना अधिकारी एवं सचिव, ग्राम पंचायत तबीजी, पंचायत समिति पीसांगन, जिला अजमेर (राज.)।
मामला: अपीलार्थी द्वारा दिनांक 20-04-2018 को आवेदन कर अन्य व्यक्तियों (श्री शिवशंकर सोनी व कालूराम सोनी) को पंचायत द्वारा जारी पट्टों की प्रति उपलब्ध कराने की मांग की गई थी।
आयोग का निर्णय: सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 8(1)(ज) के तहत चाही गई सूचना तृतीय पक्षकार की व्यक्तिगत सूचना होने के कारण प्रदाय नहीं की जा सकती। अपीलार्थी द्वारा किया गया आक्षेप बलहीन पाया गया और आयोग द्वारा अपील खारिज कर दी गई।
यह सारांश राजस्थान राज्य सूचना आयोग के आधिकारिक निर्णय दस्तावेज पर आधारित है।
राजस्थान पंचायती राज (दूसरा संशोधन) नियम, 2018 - आबादी क्षेत्र में भूमि उपयोग परिवर्तन और भू-खण्डों के उप-विभाजन संबंधी दिशा-निर्देश
राजस्थान पंचायती राज (दूसरा संशोधन) नियम, 2018
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 10 जुलाई 2018 की अधिसूचना (जी.एस.आर. 61) के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन करते हुए नया 'अध्याय-9क' अंतःस्थापित किया गया है। यह संशोधन ग्राम पंचायतों के आबादी क्षेत्र में भूमि उपयोग परिवर्तन और भू-खण्डों के उप-विभाजन व पुनर्गठन से संबंधित है।
मुख्य बिंदु और प्रावधान
आबादी क्षेत्र में भूमि उपयोग का परिवर्तन (नियम 173-क): ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग के अंतर्गत कोई भी व्यक्ति अपने द्वारा धारित आबादी क्षेत्र की भूमि के उपयोग परिवर्तन के लिए प्रारूप 48 में आवेदन कर सकेगा। इसके लिए आपत्तियां आमंत्रित की जाती हैं और निर्धारित प्रक्रिया के बाद संपरिवर्तन प्रभार जमा कराके नया पट्टा विलेख (प्रारूप 50) जारी किया जाता है।
संपरिर्वतन प्रभार की दरें:
वाणिज्यिक प्रयोजन: 10 रुपये प्रति वर्ग मीटर या आवासीय आबादी भूमि की जिला स्तरीय समिति (जि.स्त.स.) दर की रकम का दस प्रतिशत, जो भी उच्चतर हो।
औद्योगिक क्षेत्र/संपदा-प्रयोजन: 5 रुपये प्रति वर्ग मीटर या जि.स्त.स. दर की 5 प्रतिशत, जो भी उच्चतर हो।
लोक उपयोग प्रयोजन: 1000 वर्ग मीटर तक निःशुल्क और 1000 वर्ग मीटर से अधिक के लिए 5 रुपये प्रति वर्ग मीटर या जि.स्त.स. दर का 5 प्रतिशत।
संस्थागत प्रयोजन: 5 रुपये प्रति वर्ग मीटर या जि.स्त.स. दर का 5 प्रतिशत।
चिकित्सा सुविधा-प्रयोजन: 10 रुपये प्रति वर्ग मीटर या जि.स्त.स. दर का 10 प्रतिशत।
सौर या पवन ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना: औद्योगिक प्रयोजन के लिए विहित दरों का 10 प्रतिशत।
भू-खण्डों का उप-विभाजन और पुनर्गठन (नियम 173-ख): ग्राम पंचायत क्षेत्र में स्थित भू-खण्डों के उप-विभाजन या पुनर्गठन के लिए प्रारूप 51 में आवेदन करना होगा। इसके लिए स्थल योजना, मूल नक्शा और अन्य विवरण संलग्न करना अनिवार्य है।
आबादी भूमि के अभिलेख का रखरखाव (नियम 173-छ): प्रत्येक पंचायत प्रारूप 53 में गांव के पंचायत क्षेत्र के भीतर स्थित आबादी भूमि का अभिलेख रखेगी।
नए प्रारूप (प्रारूप 48 से 53): नियमों के अंतर्गत भूमि उपयोग परिवर्तन, अनुज्ञा, भू-खंड उप-विभाजन आवेदन और आबादी भूमि रजिस्टर के लिए नए प्रारूप जोड़े गए हैं।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना - भूमि रूपांतरण और प्राधिकृत अधिकारी (25 जून 2018)
अधिसूचना विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना दिनांक 25 जून 2018 (एस.ओ. 77 और एस.ओ. 78) के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 107-क एवं 107-ख के अंतर्गत विभिन्न प्राधिकृत अधिकारियों को शक्तियों का प्रत्यायोजन किया गया है।
मुख्य बिंदु
संबंधित ग्राम पंचायत: 100 वर्गमीटर तक वाणिज्यिक प्रयोजन (सिनेमा, मल्टीप्लेक्स, पेट्रोल पंप को अपवर्जित करते हुए) तथा 300 वर्गमीटर तक लोक उपयोग प्रयोजन के लिए प्राधिकृत।
संबंधित पंचायत समिति की प्रशासनिक और स्थापन समिति: 100 वर्गमीटर से अधिक किंतु 300 वर्गमीटर तक वाणिज्यिक प्रयोजन (सिनेमा, मल्टीप्लेक्स, पेट्रोल पंप को छोड़कर), 300 वर्गमीटर से अधिक किंतु 900 वर्गमीटर तक लोक उपयोग प्रयोजन, और 300 वर्गमीटर तक चिकित्सा सुविधा प्रयोजन के लिए प्राधिकृत।
संबंधित जिला परिषद की प्रशासनिक और स्थापन समिति: 300 वर्गमीटर से अधिक वाणिज्यिक प्रयोजन (सिनेमा, मल्टीप्लेक्स, पेट्रोल पंप को छोड़कर), 900 वर्गमीटर से अधिक लोक उपयोग प्रयोजन, और 300 वर्गमीटर से अधिक चिकित्सा सुविधा प्रयोजन के लिए प्राधिकृत।
राज्य सरकार: किसी भी क्षेत्र के लिए सिनेमा, मल्टीप्लेक्स, पेट्रोल पंप, औद्योगिक क्षेत्र/औद्योगिक संपदा प्रयोजन, तथा सौर या वायु शक्ति संयंत्र की स्थापना के लिए प्राधिकृत।
एस.ओ. 78 के तहत: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 107-ख की उप-धारा (1) के अंतर्गत संबंधित जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) को प्राधिकृत किया गया है।
आदेश क्रमांक: संख्या एफ.4(93)सीएल यूं/नोटि./लीगल/पीआर/2018/833 और 834 हस्ताक्षरकर्ता: कुंजी लाल मीणा, शासन सचिव, राज्यपाल के आदेश से
ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी भूमि पर बने आवास गृहों के पट्टे जारी करने के संबंध में निर्देश
ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी भूमि पर पट्टे जारी करने के संबंध में
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 25.05.2018 को क्र0एफ.(78)सिवायचक/नियमिन/विधि/परा/2017/659 के अंतर्गत सभी संभागीय आयुक्तों एवं जिला कलेक्टर्स को ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी भूमि पर बने आवास गृहों के पट्टे दिए जाने के संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
सर्वे एवं पट्टे जारी करना: ग्राम पंचायत स्तर पर ग्राम सेवक एवं पटवारी द्वारा संयुक्त सर्वे कराया जाएगा। तहसीलदार द्वारा सेटअपार्ट का प्रस्ताव तैयार कर उपखण्ड अधिकारी द्वारा सेटअपार्ट की कार्यवाही के उपरांत संबंधित ग्राम पंचायतों द्वारा पट्टे जारी किए जाएंगे।
पात्रता: वे मकान जहां रहवासी दिनांक 01.01.2017 को कम से कम 3 वर्ष अथवा इससे अधिक की अवधि से पूर्व मकान बनाकर रह रहे हैं (विधि द्वारा वर्जित/प्रतिबंधित श्रेणी, सार्वजनिक प्रयोजनार्थ भूमि एवं मास्टर प्लान में प्रभावित भूमि को छोड़कर)।
न्याय आपके द्वार अभियान 2018: राजस्व लोक अदालत अभियान (01.05.2018 से 30.06.2018) के दौरान अभियान से पूर्व एवं अभियान के दौरान दिए गए पट्टों की प्रगति ई-पंचायत पोर्टल पर ऑनलाइन भिजवाना सुनिश्चित किया जाए।
ग्राम पंचायत द्वारा जारी पट्टों के हस्तांतरण / नामांतरण (Mutation) हेतु निर्देश, आवश्यक दस्तावेज एवं शुल्क दर
ग्राम पंचायत पट्टा हस्तांतरण एवं नामांतरण दिशानिर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.4(86) नामांतरण/विधि/पंश/2018/603 दिनांक 9.5.2018 के अंतर्गत ग्राम पंचायतों द्वारा जारी पट्टों के हस्तांतरण या नामांतरण (Mutation) के संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु एवं निर्देश
पट्टों का रिकॉर्ड: समस्त पंचायतों को राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 173.जी में वर्णित Form LIII (Form 53) प्रारूप में अब तक जारी किए गए समस्त पट्टों का पूर्ण रिकॉर्ड संधारित करना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
हस्तांतरण हेतु आवश्यक दस्तावेज: पट्टों के प्रकार और हस्तांतरण के आधार (उत्तराधिकार, वसीयतनामा, पंजीकृत हक त्याग, पंजीकृत विक्रय पत्र, पंजीकृत गिफ्ट डीड) के अनुसार आवश्यक दस्तावेज जैसे उत्तराधिकार प्रमाण पत्र, शपथ-पत्र, हक त्यागपत्र, आपत्तियों हेतु समाचार पत्रों में प्रकाशन आदि निर्धारित किए गए हैं।
शुल्क एवं दरें: मूल आवंटन के प्रकार (पुराने ग्रहों का विनियमितीकरण, निःशुल्क आवंटित भूखंड, रियायती दर पर आवंटन, नीलामी द्वारा आवंटन, पूर्ण शुल्क के साथ आवंटन) के आधार पर परिवार के सदस्यों या अन्य व्यक्तियों को नामांतरण करने हेतु प्रक्रिया शुल्क (रु. 100 से रु. 200) एवं नामांतरण शुल्क (डीएलसी दर का 2% से 5%) निर्धारित किया गया है।
नामांतरण की प्रक्रिया निर्धारित दस्तावेजों की जांच के उपरांत ग्राम पंचायत की बैठक में प्रस्ताव पारित करके की जाएगी।
राजस्थान पंचायती राज (दूसरा संशोधन) नियम, 2018 - आबादी भूमि उपयोग परिवर्तन और उप-विभाजन
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 27 मार्च 2018 की अधिसूचना (सं. एफ.4(7)अमे/रूल्स/लीगल/पी.आर./2014/926 दिनांक 10.7.2018) के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज (दूसरा संशोधन) नियम, 2018 जारी किए गए हैं। यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र में प्रकाशित की गई है।
मुख्य बिंदु और प्रावधान
नया अध्याय-9क का अंतःस्थापन: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में नया अध्याय-9क जोड़ा गया है जो आबादी क्षेत्र में भूमि के उपयोग के परिवर्तन (नियम 173-क) तथा भू-खंडों के उप-विभाजन व पुनर्गठन (नियम 173-ख) से संबंधित है।
संपरिवर्तन प्रभार (Conversion Charges): गैर-आवासीय प्रयोजनों के लिए आवासीय आबादी भूमि के संपरिवर्तन हेतु वाणिज्यिक, औद्योगिक, लोक उपयोग, संस्थागत, चिकित्सा सुविधा तथा सौर/पवन ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना के लिए अलग-अलग दरें निर्धारित की गई हैं।
छूट के प्रावधान: केंद्रीय या राज्य सरकार के विभागों या स्थानीय प्राधिकरणों के उपयोग, राजस्थान विनियोजन प्रोत्साहन स्कीम, 2003/2010 और तकनीकी शिक्षा संस्थान के मामलों में संपरिवर्तन प्रभारों में आंशिक या पूर्ण छूट दी गई है।
भू-खंडों का उप-विभाजन और पुनर्गठन: नियम 173-ख के तहत ग्रामीण आबादी क्षेत्र में भू-खंडों के उप-विभाजन या पुनर्गठन के लिए प्ररूप 51 में आवेदन करना होगा तथा इसके लिए निर्धारित प्रभार नियम 173-घ के अनुसार देय होंगे।
नए प्ररूप (Forms): नियमों के अंतर्गत प्ररूप 48 से लेकर प्ररूप 53 तक नए आवेदन पत्र, अनुज्ञा, पट्टा विलेख और आबादी भूमि का रजिस्टर जोड़े गए हैं।
अधिक जानकारी और विस्तृत प्रक्रियाओं के लिए संबंधित ग्राम पंचायत कार्यालय या राज ई-पंचायत पोर्टल से संपर्क करें।
अवधिपार पट्टा विलेखों के पुनर्विधिमान्यकरण के संबंध में दिशा-निर्देश
अवधिपार पट्टा विलेखों का पुनर्विधिमान्यकरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा अवधिपार पट्टा विलेखों के पुनर्विधिमान्यकरण के संबंध में आदेश जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
नया नियम: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 167 में उप-नियम 167(क) जोड़कर ग्राम पंचायतों द्वारा जारी विक्रय विलेख, पट्टा या पट्टा विलेख के पुनर्विधिमान्यकरण का प्रावधान किया गया है।
शुल्क निर्धारण: विभागीय अधिसूचना दिनांक 02.01.2018 के अनुसार शुल्क का निर्धारण किया गया है। नियम 157, 158, 159 एवं 162 के अधीन जारी पट्टों के पुनर्विधिमान्यकरण हेतु 100/- रुपये तथा अन्य नियमों के अधीन जारी विक्रय विलेख या पट्टा विलेख हेतु मूल विक्रय विलेख या पट्टा विलेख द्वारा दी गई भूमि की वर्तमान डीएलसी (DLC) दर की राशि का एक प्रतिशत देय होगा।
आवेदन प्रक्रिया: कोई भी व्यक्ति जो अपने पट्टा विलेख का पुनर्विधिमान्यकरण कराना चाहता है, वह मूल विक्रय विलेख/पट्टा और निर्धारित फीस के साथ पंचायत में आवेदन कर सकेगा।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना - पट्टा पुनर्वितिप्रमाणिकरण फीस
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 167-क के अंतर्गत अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना राजस्थान राज-पत्र (असाधारण) दिनांक 02 जनवरी, 2018 को प्रकाशित की गई है।
मुख्य बिंदु
संख्या: एफ.4(7)संशो/नियम/विधि/पंरा/2017/02 (जयपुर, जनवरी 02, 2018)
नियम संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 167-क द्वारा प्रदत्त शक्तियां।
नियम 157, 158, 159 एवं 162 के अधीन पट्टे: पंचायत द्वारा नियम 157, 158, 159 एवं 162 के अधीन जारी किये गये पट्टों के पुनर्वितिप्रमाणिकरण (re-verification/re-authentication) किये जाने के आवेदन के साथ देय फीस 100/- रुपये निर्धारित की गई है।
अन्य नियमों के अधीन जारी पट्टे: पंचायत द्वारा नियम 157, 158, 159 एवं 162 के अतिरिक्त अन्य नियमों के अधीन जारी किये गये विक्रय विलेख, पट्टा या पट्टा विलेख के पुनर्वितिप्रमाणिकरण हेतु मूल विक्रय विलेख, पट्टा या पट्टा विलेख द्वारा दी गई भूमि की वर्तमान डी०एल०सी० (DLC) दर की राशि का एक प्रतिशत फीस होगी।
यह आदेश विष्णु कुमार गोयल, उप शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है।
पंचायत प्रसार अधिकारियों हेतु पंचायत क्लस्टर/सर्किल का गठन एवं संशोधित जॉब चार्ट के संबंध में परिपत्र
परिचय एवं उद्देश्य
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा क्रमांक एफ.28()परावि/प्रशा.2/पंचा.प्र.अ./जॉब चार्ट/2017/4313 दिनांक 16.11.2017 को पंचायत प्रसार अधिकारियों को पंचायत क्लस्टर/सर्किल बनाकर स्थापित करने और तदनुसार संशोधित जॉब चार्ट जारी करने के संबंध में परिपत्र जारी किया गया है।
पंचायत प्रसार अधिकारियों के स्वीकृत पदों का विवरण
संभागीय आयुक्त कार्यालय: 7 पद (प्रत्येक कार्यालय में 1)
जिला कलेक्टर्रेट: 66 पद (प्रत्येक कार्यालय में 2)
जिला परिषद: 198 पद (प्रत्येक कार्यालय में 6)
पंचायत समिति: 2105 पद (प्रत्येक 4.7 ग्राम पंचायत पर 1)
कुल स्वीकृत पद: 2376
पंचायत प्रसार सर्किल / क्लस्टर का स्वरूप व संचालन
प्रत्येक पंचायत समिति में पंचायत प्रसार अधिकारी के स्वीकृत पदों की सीमा तक ग्राम पंचायत क्लस्टर का गठन किया जाएगा। ये क्लस्टर भौगोलिक निकटता (Contiguity) को ध्यान में रखकर बनाए जाएंगे और स्थायी होंगे। क्लस्टर गठन हेतु सभी प्रस्ताव मुख्य कार्यकारी अधिकारी के नेतृत्व में दिनांक 30.11.2017 तक तैयार किए जाकर 25.12.2017 तक पंचायती राज मुख्यालय को भिजवाना सुनिश्चित किया जाना है।
पंचायत प्रसार अधिकारियों के मुख्य कार्य एवं दायित्व (पंचायत समिति स्तर पर)
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की समस्त विकास योजनाओं के प्रभावी पर्यवेक्षण एवं क्रियान्वयन में सहयोग करना।
क्लस्टर की सभी ग्राम पंचायतियों का त्रैमासिक निरीक्षण करना।
माह में न्यूनतम 7 व अधिकतम 10 कार्यदिवसों पर फील्ड में भ्रमण करना।
ग्राम पंचायतों के कार्मिकों/जनप्रतिनिधियों से सतत संपर्क रख मार्गदर्शन प्रदान करना तथा लंबित कार्यों का निस्तारण करवाना।
नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों को नियमों/प्रावधानों से अवगत कराना व प्रशिक्षण प्रदान करना।
विभिन्न संक्रमणों का पर्यवेक्षण एवं गुणवत्ता नियंत्रण करना।
जिला परिषद पर कार्यरत पंचायत प्रसार अधिकारियों के कार्य
मुख्य कार्यकारी अधिकारी / अति. मुख्य कार्यकारी अधिकारी द्वारा प्रदत्त सभी कार्यों/दिशा निर्देशों की पालना करना।
आवंटित प्राथमिक जाँचों का सम्पादन करना।
पंचायत शाखा में आवंटित समस्त कार्य करना।
विकास योजनाओं के प्रभारी/सहायक प्रभारी के रूप में दायित्वों का निर्वहन करना।
ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी भूमि पर बने आवास गृहों के पट्टे जारी करने के संबंध में निर्देश
ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी और सिवायचक भूमि पर बने आवासों के पट्टे जारी करने के दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी पत्रांक क्र.0एफ.4(78)सिवायचक/नियमन/विधि/पंव्रा/2017/659 दिनांक 25.05.2018 के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी भूमि पर बने आवास गृहों के नियमन और पट्टे जारी करने के संबंध में आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य निर्देश एवं प्रक्रिया:
संयुक्त सर्वे: राजस्व लोक अदालत अभियान: न्याय आपके द्वार-2018 (दिनांक 01.05.2018 से 30.06.2018) के तहत ग्राम सेवक एवं पटवारी द्वारा संयुक्त सर्वे कराया जाना सुनिश्चित किया जाए।
ई-पचायत पोर्टल पर प्रगति दर्ज करना: अभियान के दौरान दिए गए पट्टों की प्रगति ई-पंचायत पोर्टल पर प्रतिदिन ऑनलाइन भेजी जानी चाहिए।
समयबद्ध कार्यवाही: जिन ग्राम पंचायतों में सर्वे एवं पट्टे जारी करने का कार्य नहीं हुआ है, वहां नियमानुसार प्रक्रिया अपनाकर अभियान द्वारा पट्टे जारी किए जाएं।
समन्वय बैठक: उपखंड अधिकारी, विकास अधिकारी एवं तहसीलदार की संयुक्त बैठक आयोजित कर अधिक से अधिक पात्र रहवासियों को पट्टे जारी किए जाएं।
वित्त विभाग, राजस्थान सरकार अधिसूचना - दिनांक 27.09.2017
वित्त विभाग अधिसूचना दिनांक 27.09.2017
यह दस्तावेज़ राजस्थान सरकार के वित्त विभाग (कर खंड), जयपुर द्वारा जारी की गई अधिसूचना है, जिसका क्रमांक [No.F.2(11)FD/Tax/2011-100] दिनांक 27.09.2017 है।
मुख्य बिंदु:
यह अधिसूचना पंजीकरण अधिनियम, 1908 (1908 का केंद्रीय अधिनियम संख्या XVI) की धारा 88 की उप-धारा (1) के खंड (d) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए जारी की गई है।
राज्य सरकार द्वारा यह निर्देश दिया गया है कि ग्राम पंचायत के सचिव के लिए, जो अपनी पदीय क्षमता में किसी लिखत (instrument) को निष्पादित करने के लिए सक्षम प्राधिकारी है, यह आवश्यक नहीं होगा कि वह किसी भी पंजीकृत अधिकारी (Registering Officer) के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हो या उससे संबंधित किसी भी कार्यवाही में उपस्थित रहे।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से हर्धेश कुमार जुनेजा, शासन उप सचिव द्वारा जारी किया गया है तथा आवश्यक कार्रवाई हेतु संबंधित विभागों को प्रेषित किया गया है।
राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2017 से संबंधित अधिसूचना
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग अधिसूचना
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), जयपुर द्वारा दिनांक 12 अप्रैल, 2017 को राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2017 जारी किए गए हैं। यह अधिसूचना राजस्थान राज-पत्र में प्रकाशित की गई है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम व नियम: यह संशोधन राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम सं. 13) की धारा 102 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में किया गया है।
नियम 148 का संशोधन: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 148 के उप-नियम (1) के अंतिम परन्तुक में आवश्यक संशोधन किया गया है।
शब्दावली में बदलाव: "राजस्व अभियान या प्रशासन गांव के संग अभियान" के स्थान पर "राजस्व अभियान या प्रशासन गांव के संग अभियान या भूमि के विक्रय और पट्टा वितरण के लिए राज्य सरकार के आदेश द्वारा आयोजित किसी अन्य अभियान के समय" शब्दावली प्रतिस्थापित की गई है।
प्रारूप 22 का संशोधन: संलग्न प्रारूप 22 की टिप्पणी में भी उपर्युक्त शब्दावली को प्रतिस्थापित किया गया है।
लागू होना: ये नियम राजपत्र में इनके प्रकाशन की तारीख (12 अप्रैल, 2017) से प्रवृत्त होंगे।
आदेश संख्या: [सं. एफ.4(7) अमे/रूल्स/लीगल/पी.आर./2017/289]
राजकीय कार्यालय भवन हेतु निःशुल्क भूमि आवंटन संबंधी अधिसूचना
अधिसूचना विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना (क्रमांक: संख्या एफ.4(54)पट्टा अभि/विधि/पंव्रा/2017/271, दिनांक अप्रैल 06, 2017) के अंतर्गत किसी भी सरकारी कार्यालय के भवन हेतु निःशुल्क भूमि आवंटन के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु एवं सीमाएं
राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा 98 और राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 162(2) के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग किया गया है।
500 वर्ग गज तक: संबंधित ग्राम पंचायत द्वारा भूमि का निःशुल्क आवंटन किया जा सकता है।
500 से अधिक एवं 1000 वर्ग गज तक: संबंधित पंचायत समिति की पूर्वानुमति से भूमि का निःशुल्क आवंटन किया जा सकता है।
1000 वर्ग गज से अधिक: संबंधित जिला परिषद की पूर्वानुमति से भूमि का निःशुल्क आवंटन किया जा सकता है।
यह आदेश आनंद कुमार, शासन सचिव एवं आयुक्त द्वारा जारी किया गया है।
राजस्व ग्राम विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना - सरकारी कार्यालय भवनों हेतु निःशुल्क भूमि आवंटन नियम
अधिसूचना विवरण एवं मुख्य बिंदु
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.4(54)पट्टा अभि/विधि/पंश/2017/271 दिनांक अप्रैल 06, 2017 के माध्यम से सरकारी कार्यालयों के भवन हेतु भूमि के निःशुल्क आवंटन के संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं।
यह अधिसूचना राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा 98 तथा राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 162(2) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए जारी की गई है।
निःशुल्क भूमि आवंटन की सीमाएं एवं प्राधिकार:
500 वर्ग गज तक: संबंधित ग्राम पंचायत द्वारा निःशुल्क भूमि का आवंटन किया जा सकता है।
500 से अधिक एवं 1000 वर्ग गज तक: संबंधित पंचायत समिति की पूर्वानुमति से ग्राम पंचायत/पंचायत समिति द्वारा आवंटन।
1000 वर्ग गज से अधिक: संबंधित जिला परिषद की पूर्वानुमति से संबंधित ग्राम पंचायत, पंचायत समिति एवं जिला परिषद को अधिकृत किया गया है।
यह आदेश शासन सचिव एवं आयुक्त आनन्द कुमार के आदेशानुसार जारी किया गया है।
विमुक्त, घुमन्तु एवं अर्द्धघुमन्तु के आवासहीन व्यक्तियों को भूखण्ड आवंटन बाबत परिपत्र
विमुक्त, घुमन्तु एवं अर्द्धघुमन्तु के आवासहीन व्यक्तियों को भूखण्ड आवंटन
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा परिपत्र क्रमांक एफ.4()दिशा निर्देश/विधि/पंरा/2016/494 दिनांक 27-6-16 जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
राज्य सरकार के ध्यान में लाया गया है कि अधिकांश ग्राम पंचायतों द्वारा विमुक्त, घुमन्तु एवं अर्द्धघुमन्तु के आवासहीन व्यक्तियों को नियमानुसार भूखण्ड आवंटन करने में शिथिलता बरती जा रही है।
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 का नियम 158 कमजोर वर्गों को आबंटन के तहत ग्राम पंचायत को 300 वर्गगज तक की आबादी भूमि रियायती दर पर आवंटित करने की अनुमति देता है।
समाज कल्याण विभाग द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक F.1(F)(2)SW/63 दिनांक 24.2.1964 के तहत अधिसूचित जातियों के आवासहीन व्यक्तियों को नियमानुसार भूखण्ड आवंटन किया जाना सुनिश्चित किया जाए।
राजस्थान सरकार - स्थायी आदेश संख्या 25/2015: शेड्यूल्ड ऑफ़ पॉवर में संशोधन
राजस्थान सरकार ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग - स्थायी आदेश
ग्रामीण विकास (विकास, अनुभाग-5) द्वारा जारी स्थायी आदेश संख्या- 25/2015 (क्रमांक एफ-27(252)ग्राविव/ग्रुप-5/जीकेन/एसओपी/2015-16 जयपुर, दिनांक 10 मार्च, 2016) के माध्यम से ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों को प्रदत्त प्रशासनिक एवं वित्तीय शक्तियों के शेड्यूल्ड ऑफ़ पॉवर में संशोधन किया गया है।
प्रमुख बिंदु
प्रशासनिक स्वीकृति (परिशिष्ट-1): ग्राम पंचायत के पास उपलब्ध राशि के अनुसार निर्माण कार्य की प्रशासनिक स्वीकृति (मूल) नवीन स्वीकृति 10.00 लाख रुपये तक तथा रखरखाव/मरम्मत 0.50 लाख रुपये तक निर्धारित की गई है। विकास अधिकारी (पंचायत समिति के पास उपलब्ध राशि) हेतु नवीन स्वीकृति 5.00 लाख रुपये तक तथा रखरखाव/मरम्मत 2.00 लाख रुपये तक है।
वित्तीय स्वीकृति (परिशिष्ट-2): ग्राम पंचायत हेतु नवीन वित्तीय स्वीकृति 10.00 लाख रुपये तक तथा रखरखाव/मरम्मत 0.50 लाख रुपये तक है। विकास अधिकारी हेतु नवीन वित्तीय स्वीकृति 5.00 लाख रुपये तक तथा रखरखाव/मरम्मत 2.00 लाख रुपये तक है।
शर्तें एवं निर्देश: यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होंगे। सड़क निर्माण कार्य हेतु निजी भूमि पर प्रचलित आम रास्तों के संबंध में भूमि से संबंधित काश्तकारों से सहमति एवं नियमानुसार शपथ पत्र लेने के उपरांत कार्य सम्पादन किया जा सकेगा।
प्रधानमंत्री आवास योजना - ग्रामीण की पात्रता/वरीयता सूची में शामिल परिवारों को पट्टा आवंटन बाबत निर्देश
प्रधानमंत्री आवास योजना - ग्रामीण पट्टा आवंटन निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना - ग्रामीण के संबंध में आदेश जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
विषय: "प्रधानमंत्री आवास योजना - ग्रामीण" की पात्रता/वरीयता सूची में शामिल परिवारों को पट्टा आवंटन करने बाबत।
आदेश संख्या एवं दिनांक: क्र.एफ.4( )पट्टा निर्देश/विधि/पंशावि/2016/692, दिनांक 01.09.2016।
जारीकर्ता: आनन्द कुमार, शासन सचिव एवं आयुक्त, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
मुख्य निर्देश: इस योजना की पात्रता/वरीयता सूची में शामिल परिवारों को राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के प्रावधानों के अन्तर्गत निर्धारित प्रक्रिया अपनाई जाकर संबंधित को भूमि/पट्टे आवंटन की कार्यवाही तत्काल सुनिश्चित करावे, ताकि योजना सुचारू रूप से क्रियान्वित की जा सके।
स्थायी आदेश संख्या 20/2015 - ग्रामीण कार्य निर्देशिका-2015 भाग-1 में संशोधन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग - स्थायी आदेश संख्या 20/2015
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रामीण विकास, अनुभाग-5) द्वारा दिनांक 17 सितम्बर, 2015 को स्थायी आदेश संख्या- 20/2015 जारी किया गया है। यह आदेश विभागीय परिपत्र संख्या- 17/2015 द्वारा जारी ग्रामीण कार्य निर्देशिका-2015 भाग-1 के निर्देशों में संशोधन के संबंध में है।
प्रमुख संशोधन एवं बिंदु:
निर्देश संख्या- 7.1: शिड्यूूल ऑफ पॉवर्स हेतु परिशिष्ट-2 (ग्रामीण कार्य निर्देशिका-2015 भाग-1) की तालिका संख्या- 3 शिड्यूूल ऑफ पॉवर्स के तकनीकी स्वीकृति कॉलम संख्या- 6 में शर्त/टिप्पणी जोड़ी गई है कि प्राकृतिक आपदा की स्थिति में क्षतिग्रस्त कार्यों के तत्काल सम्पादन हेतु ग्राम पंचायत द्वारा एक लाख तक की तकनीकी स्वीकृति ग्रामीण कार्य निर्देशिका- 2015 के भाग-1 के निर्देश संख्या- 4.3 व 4.4 के अनुसार जारी की जा सकेगी।
निर्देश संख्या- 9.5.1: पंचायत समिति स्तरीय बाजार दर सर्वेक्षण एवं प्रस्तावक समिति में उप-निर्देश संख्या- 1 के अनुसार एक सरपंच एवं एक ग्राम सेवक (कुल 2 सदस्य) शामिल किये जाते हैं। प्रतिवर्ष रोटेशन के आधार पर इन सदस्यों का चयन विकास अधिकारी द्वारा पंचायत समिति की प्रशासन व स्थापना समिति की बैठक में लॉटरी के आधार पर किया जाएगा।
ग्रामीण कार्य निर्देशिका- 15 भाग-1 के निर्देश संख्या- 18.1: "राज्य स्तरीय तकनीकी अनुमोदन समिति में क्रम संख्या- 5 पर अंकित जिलों के आमंत्रित अधिशाषी अभियंता 3 के स्थान पर प्रत्येक संभाग से एक अधिशाषी अभियंता को प्रतिवर्ष रोटेशन के आधार पर सदस्य नियुक्त किया जाता है।"
प्रभावी तिथि: उपर्युक्त आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होंगे। आदेश पर श्रीमत पाण्डेय, प्रमुख शासन सचिव, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज के हस्ताक्षर हैं।
राजस्थान पंचायती राज (पर्यटन इकाईयों के लिए पंचायत क्षेत्र में आबादी भूमि का आवंटन, भूमि के उपयोग का परिवर्तन और नियमितीकरण) नियम, 2015
राजस्थान पंचायती राज नियम, 2015 - पर्यटन इकाइयों हेतु दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.4( )पर्यटन नियम/विधि/पैरा/2015/486 दिनांक जुलाई 10, 2015 के अंतर्गत राजस्थान पंचायती राज (पर्यटन इकाईयों के लिए पंचायत क्षेत्र में आबादी भूमि का आवंटन, भूमि के उपयोग का परिवर्तन और नियमितीकरण) नियम, 2015 बनाए गए हैं।
मुख्य बिंदु एवं नियम:
लागू क्षेत्र: यह नियम पंचायत क्षेत्र में आबादी भूमि के आवंटन, भूमि उपयोग परिवर्तन और नियमितीकरण पर लागू होते हैं।
आबादी भूमि का आवंटन: जिला कलेक्टर, संबंधित पंचायती राज संस्था से परामर्श कर पर्यटन इकाइयों की स्थापना के लिए ग्राम की आबादी क्षेत्र में उपयुक्त भूमि की पहचान करेंगे।
न्यूनतम एवं अधिकतम भूमि क्षेत्र:
बजट होटल और 1 से 3 सितारा होटल: न्यूनतम 1,200 वर्ग मीटर, अधिकतम 4,000 वर्ग मीटर तक।
4 सितारा होटल: न्यूनतम 6,000 वर्ग मीटर, अधिकतम 12,000 वर्ग मीटर तक।
5 सितारा और उससे ऊपर के होटल: न्यूनतम 18,000 वर्ग मीटर, अधिकतम 40,000 वर्ग मीटर तक।
अन्य पर्यटन इकाई: आवश्यकता/उपलब्धता के अनुसार।
आरक्षित मूल्य: पर्यटन इकाइयों के लिए आरक्षित भूमि के आवंटन का आरक्षित मूल्य जिला स्तरीय समिति द्वारा आबादी भूमि के बाजार मूल्य के निर्धारण के लिए सिफारिश की गई दरों के समतुल्य होगा।
विरासत संपत्तियों (हेरिटेज होटल्स) का परिवर्तन: हेरिटेज संपत्तियों को हेरिटेज होटल में बदलने के लिए सादे कागज पर आवेदन किया जा सकता है। इसके लिए भूमि उपयोग परिवर्तन का कोई प्रभार देय नहीं होगा।
राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) अध्यादेश, 2014 - शौचालय संबंधी योग्यता नियम
राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) अध्यादेश, 2014
विधि (विधाई प्रारूपण) विभाग (ग्रुप-2) द्वारा दिनांक 8 दिसंबर, 2014 को राजस्थान राजपत्र में राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) अध्यादेश, 2014 (अध्यादेश संख्यांक 1) प्रकाशित किया गया है। यह अध्यादेश तत्काल प्रवृत्त होगा।
मुख्य बिंदु एवं संशोधन
राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम सं. 13) की धारा 19 में संशोधन करते हुए नया खंड अन्तःस्थापित किया गया है:
शौचालय की अनिवार्यता: घर में कार्यशील स्वच्छ शौचालय होना चाहिए और उसके परिवार का कोई भी सदस्य खुले में शौच के लिए नहीं जाता हो।
स्पष्टीकरण-II के अनुसार 'स्वच्छ शौचालय' का अर्थ: तीन दीवारों, एक दरवाजे और छत से घिरी हुई कोई जल-बंध (वाटर सील्ड) शौचालय प्रणाली या व्यवस्था।
परिवार के सदस्य का अर्थ: ऐसे व्यक्ति का/की पति/पत्नी, बच्चे और ऐसे व्यक्ति के साथ निवास कर रहे उसके माता-पिता।
यह अध्यादेश राज्यपाल कल्याण सिंह के आदेशानुसार तथा प्रमुख शासन सचिव दीपक माहेश्वरी के हस्ताक्षर से जारी किया गया है।
डिजिटल हस्ताक्षर और प्री-प्रिंटेड स्टेशनरी के माध्यम से 'आवासीय भूमि का पट्टा' जारी करने बाबत अधिसूचना
राजस्थान राज-पत्र अधिसूचना दिनांक 27 नवम्बर 2014
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज) द्वारा जारी इस अधिसूचना के माध्यम से महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए हैं:
ग्राम पंचायत रूपवास का नगर पालिका में क्षेत्र परिवर्तन: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा-101 के अंतर्गत ग्राम पंचायत रूपवास की वर्तमान सीमाओं (उत्तर में ग्राम बरबार, दक्षिण में ग्राम समाहड, पूर्व में भिड़यानी व रूढ़ रूपवास तथा पश्चिम में दौरदा) को पंचायती राज संस्थाओं के क्षेत्राधिकार से पृथक किया गया है।
आवासीय भूमि का पट्टा: राज्य सरकार द्वारा डिजिटल हस्ताक्षरित (Digital Signature) और पूर्व-मुद्रित (Pre-Printed) स्टेशनरी का उपयोग करते हुए 'आवासीय भूमि का पट्टा' अनुमन्य किए जाने का निर्णय लिया गया है।
सुरक्षा मानक: पट्टे के लिए उपयोग की जाने वाली स्टेशनरी में सुरक्षा की दृष्टि से मानक तरीकों (Hologram, Water Mark, Bar Code, आदि) का उपयोग किया जाएगा।
वितरण और उपलब्धता: यह सेवा संपूर्ण राज्य में ई-मित्र केन्द्रों (एकीकृत नागरिक सेवा केन्द्र) एवं नेशनल ई-गवर्नेंस प्लान के तहत स्थापित सी.एस.सी. केन्द्रों (नागरिक सेवा केन्द्र) के माध्यम से चरणबद्ध रूप से उपलब्ध कराई जाएगी।
ग्राम सेवक एवं पदेन सचिवों के कैश हैंडलिंग भत्ते में वृद्धि के संबंध में आदेश
ग्राम सेवक एवं पदेन सचिवों का कैश हैंडलिंग भत्ता बढाया गया
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज) द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ 28( )परावरि/प्रशा-2/ग्रासे संघ/ज्ञापन/2011/2264, दिनांक 25.07.2013 के अनुसार, राज्य की ग्राम पंचायतों में पदस्थापित ग्राम सेवक एवं पदेन सचिवों के भत्ते में संशोधन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
पूर्व में देय भत्ता: पूर्व में प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति के तहत 500/- रुपये प्रतिमाह प्रशासनिक एवं वित्तीय कार्य हेतु दिए जाते थे।
संशोधित भत्ता: इस विशेष भत्ते की राशि को 500/- रुपये से बढ़ाकर 1000/- रुपये प्रतिमाह कैश हैंडलिंग भत्ता कर दिया गया है।
प्रभावी तिथि: यह बढ़ी हुई दर दिनांक 01.07.2013 से लागू होगी, जिसका भुगतान दिनांक 01.08.2013 को देय होगा।
यह विशेष भत्ता किसी अन्य प्रयोजन हेतु मान्य नहीं होगा।
यह स्वीकृति वित्त (नियम) विभाग की आईडी क्रमांक 101302845 दिनांक 17.07.2013 से प्राप्त सहमति के अनुसरण में प्रदान की गई है।
राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2013 से संबंधित अधिसूचना
राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2013
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक एफ.4(7)अमे/रूल्स/लीगल/पीआर/2012/135 दिनांक 11-2-2013 के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
नियम का नाम: राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2013।
प्रवर्तन: यह राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से प्रवृत्त होंगे।
नियम 157 का संशोधन: इसके तहत व्यैक्तिक आबादी भूमि में पुराने गृह का कब्ज़ा रखने वाले और पट्टा प्राप्त करने के इच्छुक व्यक्तियों के लिए प्ररूप 23-क में पंचायत द्वारा पट्टा जारी करने का प्रावधान किया गया है।
प्रभार एवं शुल्क विवरण: 300 वर्गगज तक या 300 वर्गगज अधिकतम क्षेत्रफल (25 प्रतिशत संनिर्मित क्षेत्रफल को सम्मिलित करते हुए) के लिए संनिर्मित पुराने ग्रहों पर नियम के प्रारंभ की तारीख से पूर्व, पचास वर्षों से अधिक पूर्व के लिए 100/- रु. तथा ठीक पूर्ववर्ती पचास वर्षों के दौरान के लिए 200/- रु. प्रभार निर्धारित किया गया है।
विशेष छूट: गरीबी रेखा से नीचे की सूची में सम्मिलित परिवारों से उप-खण्ड (क) के अधीन कोई फीस प्रभारित नहीं की जाएगी तथा उप-खण्ड (ख) के अधीन केवल 10 प्रतिशत फीस प्रभारित की जाएगी।
राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2013 - आबादी क्षेत्र के पुराने मकानों के पट्टा जारी करने के संबंध में अधिसूचना
राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2013
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा अधिसूचना संख्या No.F.4(7)Ame./Rules/Legal/PR/2012/35 दिनांक 11-2-2013 जारी की गई है। यह अधिसूचना राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा 102 द्वारा प्रद शक्तियों के तहत राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन करने के लिए है।
मुख्य बिंदु और नियम संशोधन:
इन नियमों को राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2013 कहा गया है।
नियम 157 की उप-नियम (1) में संशोधन किया गया है जिसके अनुसार आबादी भूमि में स्थित पुराने मकानों के लिए प्रपत्र XXIII-A में पट्टा जारी किया जा सकता है।
300 वर्ग गज तक का क्षेत्र या निर्मित क्षेत्र (25 प्रतिशत निर्मित क्षेत्र सहित):
50 वर्ष से अधिक पुराने मकानों के लिए शुल्क: रु. 100/-
नियमों के प्रारंभ होने की तिथि से ठीक पहले पचास वर्षों के दौरान निर्मित मकानों के लिए शुल्क: रु. 200/-
300 वर्ग गज से अधिक के क्षेत्र पर, ऐसे अतिरिक्त क्षेत्र के लिए राजस्थान स्टाम्प नियम, 2004 के नियम 58 के खंड (b) के तहत जिला स्तरीय समिति द्वारा अनुशंसित बाजार दरों का 25 प्रतिशत देय होगा।
बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे) सूची में शामिल परिवारों से उप-खंड (a) के तहत कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा और उप-खंड (i) के उप-खंड (b) के तहत केवल 10 प्रतिशत शुल्क लिया जाएगा।
प्रशासन गाँवों के संग अभियान में भूमि विक्रय व पट्टा जारी करने के संबंध में विभागीय मार्गदर्शन
प्रशासन गाँवों के संग अभियान - भूमि विक्रय और पट्टा जारी करने के संबंध में मार्गदर्शन
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज) द्वारा जिला कलेक्टर, पाली को प्रशासन गाँवों के संग अभियान के अंतर्गत भूमि विक्रय (पट्टे जारी करने) के संबंध में मार्गदर्शन प्रदान किया गया है।
मुख्य बिंदु एवं विभागीय टिप्पणी
पुश्तैनी कब्जा सुधा प्लॉटों पर पट्टा: ग्राम पंचायतों की आबादी भूमि में सरपंच द्वारा जारी स्वामित्व प्रमाण पत्र या अनापत्ति प्रमाण पत्र के आधार पर पुश्तैनी कब्जा सुधा प्लॉटों की रजिस्ट्री करवाने और पट्टा बनवाने की मांग के संबंध में, राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के प्रावधानों के अनुसार नियमानुसार राशि वसूल कर पट्टा जारी किया जा सकता है।
व्यावसायिक उपयोग हेतु भूमि के पट्टे: आबादी भूमि क्षेत्र में स्थित पुश्तैनी भूमि में दुकानें या छोटे-छोटे कुटीर उद्योग संचालित होने और उनके पट्टे भूमि स्वामियों के पास न होने की स्थिति में, पंचायती राज नियमों में वर्तमान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। अतः व्यावसायिक प्रयोजनार्थ उपयोग में लाई जा रही भूमि के पट्टे दिया जाना संभव नहीं है।
यह आदेश उप शासन सचिव (विधि) द्वारा जारी किया गया है।
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 के अंतर्गत पट्टा जारी करने संबंधी दिशा-निर्देश
प्रस्तावना
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज) द्वारा दिनांक 10.01.2013 को क्रमांक एफ.139( )परावि/विधि/नियम/मार्गदर्शन/2012/23 के तहत एक महत्वपूर्ण आज्ञा जारी की गई है। यह दस्तावेज ग्रामीण क्षेत्रों में पुराने गृहों के वि니मितीकरण और पट्टा वितरण से संबंधित है।
मुख्य बिंदु एवं निर्देश
नियम 157(1) के तहत प्रावधान: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 के उप-नियम (1) के अनुसार, आबादी भूमि में स्थित पुराने गृहों के लिए पट्टा जारी किया जाता है, जिसमें पुराने गृह की परिधि में परिसर में स्थित उपयोग में आने वाली भूमि भी सम्मिलित होती है।
प्रशासन-गाँवों के संग अभियान 2013: अभियान की अवधि के दौरान ऐसे सभी मामलों में पट्टा जारी करने के लिए पंचायत द्वारा संबंधित व्यक्ति को उसके कब्जे वाली आबादी भूमि (अधिकतम 300 वर्गगज तक निर्मित भवन/मकान का क्षेत्रफल) तथा इस निर्मित एरिया के 25 प्रतिशत तक की उसकी उपयोग में आने वाली कब्जाशुदा भूमि को सम्मिलित किया जाएगा।
पट्टा जारी करने की प्रक्रिया: निर्मित भवन और 25 प्रतिशत अतिरिक्त भूमि (इनमें से जो भी कम हो) का पट्टा, नियम 146 के प्रावधानुसार स्थल निरीक्षण करवाने के पश्चात तथा नियम 148 व 149 के अनुसार नोटिस जारी कर प्राप्त आपक्षपों का निपटारा करने के पश्चात जारी किया जाएगा।
आबादी भूमि पट्टा प्रक्रिया हेतु राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के अंतर्गत तीन बैठकों की प्रक्रिया संबंधी परिपत्र
परिचय
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 08/01/2013 को जारी परिपत्र (क्रमांक: एफ.15(79)पंवारा/विधि/प्रशा.गाヴォं के संग अभि.2013/12/12) के माध्यम से आबादी भूमि के पट्टा वितरण की प्रक्रिया को सरल बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य उद्देश्य एवं विवरण
विभाग के ध्यान में लाया गया था कि पंचायतों द्वारा आबादी भूमि का पट्टा देने के लिए कम से कम छह बैठकें करनी पड़ती हैं, जिससे प्रक्रिया में काफी विलम्ब होता है। इस संबंध में नियमों के प्रावधानों एवं मूल भावना को ध्यान में रखते हुए स्पष्ट किया जाता है कि राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 145 से 147 में पट्टा दिए जाने की प्रक्रिया निर्धारित है। इसके तहत आवेदन पत्र प्रस्तुत करने के पश्चात् ग्राम पंचायत द्वारा पट्टा दिए जाने की कार्यवाही अब केवल 3 बैठकों में पूर्ण की जा सकती है:
प्रथम बैठक: तीन पंचों की समिति की प्रतिनियुक्ति।
द्वितीय बैठक: रिपोर्ट का समिश्रण व आपत्ति आमंत्रण।
तृतीय बैठक: यदि आपत्ति प्राप्त नहीं होती है तो पट्टा जारी करने की कार्यवाही की जा सकती है।
प्रशासन गांवों के संग अभियान-2013: नगरीय सीमाओं में सम्मिलित ग्राम पंचायतों में भूमि आवंटन और पट्टा वितरण के निर्देश
नगरीय विकास आवासन एवं स्वायत्त शासन विभाग आदेश
राजस्थान सरकार के नगरीय विकास आवासन एवं स्वायत्त शासन विभाग द्वारा क्रमांक प.3 (1192)/नविचि/3/2010, दिनांक 4 जनवरी 2013 को आदेश जारी किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य 'प्रशासन गांवों के संग अभियान-2013' के शिविरों में नगरीय सीमाओं (Urbanisable limits) में सम्मिलित ग्राम पंचायतों के गांवों में सार्वजनिक उपयोग, सरकारी विभागों एवं आबादी विस्तार हेतु ग्राम पंचायतों को भूमि आवंटन करना है।
मुख्य बिंदु:
अभियान अवधि: राज्य सरकार द्वारा 10 जनवरी, 2013 से 28 फरवरी, 2013 तक 'प्रशासन गांवों के संग अभियान-2013' चलाया जा रहा है।
पट्टा देने की अधिकारिता: मास्टर प्लान में दर्शाये गए परिधीय क्षेत्र में स्थित ग्राम पंचायतों को ग्राम पंचायत मुख्यालय वाले ग्राम में 500 मीटर तक और पंचायत के अन्य गांवों में 200 मीटर तक की सीमा में आबादी विस्तार एवं अन्य सार्वजनिक सुविधाओं (विद्यालय, चिकित्सालय आदि) के लिए राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 के अंतर्गत पट्टे दिए जाने की अधिकारिता दी गई है।
भूमि की उपलब्धता: जयपुर रीजन में जयपुर विकास प्राधिकरण द्वारा, जोधपुर रीजन में जोधपुर विकास प्राधिकरण तथा अन्य क्षेत्रों में जिला कलेक्टर द्वारा ग्राम पंचायतों को भूमि उपलब्ध कराई जाएगी।
समस्या निवारण एवं कमेटी गठन: प्राधिकरण/न्यास/स्थानीय निकाय के नाम दर्ज एवं सिवायचक भूमि को ग्राम पंचायतों को आवंटित करने के लिए कमेटी का गठन किया गया है, जिसमें प्राधिकरण का उपायुक्त/सचिव/मुख्य नगर पालिका अधिकारी (अध्यक्ष), संबंधित उपखण्ड अधिकारी (सदस्य), और संबंधित उप नगर नियोजक या सहायक/कनिष्ठ अभियंता (सदस्य) शामिल हैं।
राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 73 के अन्तर्गत पंचायतों की आमदनी में बढ़ोतरी करने की अपेक्षा बाबत
परिचय एवं उद्देश्य
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी पत्र क्रमांक एफ.1(11)(परावि)लेखा/निजी आय/2011-12/11186 दिनांक 7-11-2012 के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 73 के अंतर्गत ग्राम पंचायतों की निजी आय में बढ़ोतरी करने और वित्तीय स्वतंत्रता प्राप्त करने के संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु एवं निर्देश
वित्तीय स्वतंत्रता एवं निजी आय: राज्य वित्त आयोग की सिफारिश के अनुसार पंचायतों को अपनी निजी आय प्रति वर्ष 1.50 से 2.00 लाख रुपये बढ़ानी चाहिए ताकि वे कार्यों का प्रभावशाली तरीके से क्रियान्वयन कर सकें।
बजट घोषणा 2011-12: माननीय मुख्यमंत्री महोदय की बजट घोषणा के अनुसार, यदि कोई पंचायत पूर्व वर्ष के मुकाबले 2.00 लाख रुपये की निजी आय बढ़ाएगी, तो पंचायत समिति/जिला परिषद की सिफारिश के आधार पर राज्य सरकार द्वारा अतिरिक्त 2.00 लाख रुपये की मैंचिंग राशि (अनुदान) प्रदान की जाएगी।
राजस्व वृद्धि के स्रोत: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 33 और 34 के अनुसार पंचायतें सफाई, रोशनी, जल-निकास, सड़कों के रखरखाव के साथ-साथ कर, फीस, प्रमारों और शास्तियों में वृद्धि कर सकती हैं। हवेलियों, बड़े पक्के ग्रहों, ढाबों, होटलों, ऑटोमोबाइल सर्विस स्टेशनों, मरम्मत की दुकानों, पेट्रोल/डीजल पंपों आदि पर फीस उद्ग्रहित करके गैर राजस्व में वृद्धि की जा सकती है।
वाणिज्यिक डीएलसी दर: सड़क के किनारे स्थित दुकानों के संबंध में राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 (3) के अनुसार वाणिज्यिक डी.एल.सी. दर से कम से कम दोगुनी वसूली की जा सकती है या नियमानुसार बेदखली नोटिस/वाणिज्यिक पट्टा बनाकर पंचायत की आय बढ़ाई जा सकती है।
फीसों की दरें (नियम 68)
नियम 68 के अंतर्गत जनता को दी जाने वाली सेवाओं के लिए अधिकतम फीस दरें निर्धारित की गई हैं, जैसे:
आवेदन फीस: 10/- रुपये
निवास, जाति, आय प्रमाण पत्र: 20/- रुपये (अ.जा./अ.ज.जा. हेतु 5/- रुपये)
बिजली/पानी कनेक्शन हेतु अनापत्ति: 40/- रुपये (अ.जा./अ.ज.जा. हेतु 5/- रुपये)
भवन निर्माण स्वीकृति (पक्का निर्माण): 2/- रुपये प्रति वर्ग मीटर
पेट्रोल/डीजल पंप: 2500/- रुपये प्रति वर्ष
ढाबा/रेस्टोरेंट: 1000/- रुपये प्रति वर्ष
मोबाइल टॉवर: 10000/- रुपये प्रति वर्ष
अतिथि गृह/होटल/मोटल/विश्राम गृह: 5 कक्ष तक 1000/- रुपये प्रति वर्ष से लेकर 16 और अधिक कमरे तक 5000/- रुपये प्रति वर्ष
फीस/कर लागू करने एवं वसूली की प्रक्रिया
पंचायतों को साधारण बैठक में नियम 57 के अनुसार फीस निर्धारित दरों पर वसूल करने का प्रस्ताव पारित करना होगा।
नियम 58 के अनुसार आपत्तियों के लिए एक माह का नोटिस जारी किया जाएगा।
नियम 105 के तहत मांग पर्ची (प्रारूप 5) दी जाएगी और नियम 106 के तहत 15 दिन का नोटिस देकर चल संपत्ति की कुर्की की जा सकती है।
राजस्व विभाग के माध्यम से पटवारी द्वारा करों की वसूली (नियम 62, 63, 64) की जाएगी, जिसमें पटवारी 5 प्रतिशत काटकर 95 प्रतिशत राशि पंचायत के पी.डी. लेखे या पंचायत लेखे में जमा करेगा।
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2011 - शुल्क और नियमों से संबंधित अधिसूचना
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2011
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा अधिसूचना संख्या No. F.4 (7) Am/Rule/Legal/PR/2010/ 1348 दिनांक 12-8-2011 जारी की गई है। इसके माध्यम से राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
नियम 68 के तहत पंचायत द्वारा लिए जाने वाले शुल्क (Fees):
आवेदन शुल्क (Application fees): Rs. 10/-
निवास, जाति, आय प्रमाण पत्र आदि: Rs. 20/- (SC/ST के लिए 50% छूट)
उत्तराधिकार प्रमाण पत्र आदि: Rs. 40/- (SC/ST के लिए 50% छूट)
बिजली या पाईप द्वारा पानी के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC): Rs. 40/- (SC/ST के लिए 50% छूट)
आबादी भूमि क्रय हेतु आवेदन: Rs. 20/-
साइट प्लान तैयार करने और साइट निरीक्षण का खर्च: Rs. 50/-
राशन कार्ड (आवेदन पत्र और छपाई सहित): Rs. 10/-
30 दिन के बाद जन्म और मृत्यु का पंजीकरण: Rs. 20/-
भवन निर्माण की अनुमति: पक्का निर्माण के लिए Rs. 2/- प्रति वर्ग मीटर
पंचायत द्वारा पहले से स्वीकृत साइट प्लान में जोड़/बदलाव (Addition/Alteration): Rs. 100/-
बिना अनुमति अनाधिकृत निर्माण का नियममीकरण (Regularization): Rs. 10/- प्रति वर्ग मीटर (अधिकतम Rs. 1000/- तक)
पेट्रोल/डीजल पंप: Rs. 2500/- प्रति वर्ष
ढाबा/रेस्टोरेंट: Rs. 1000/- प्रति वर्ष
अन्य कोई व्यावसायिक इकाई: Rs. 200/- प्रति वर्ष
माइनिंग एनओसी के लिए प्रस्ताव: Rs. 5000/-
मोबाइल टॉवर: Rs. 10000/- प्रति वर्ष
गेस्ट हाउस/होटल/मोटेल/रेस्ट हाउस हेतु शुल्क: 5 कमरे तक Rs. 1000/- प्रति वर्ष, 6 से 10 कमरे Rs. 2500/- प्रति वर्ष, 11 से 15 कमरे Rs. 4000/- प्रति वर्ष, 16 या अधिक कमरे Rs. 5000/- प्रति वर्ष
इस अधिसूचना में बैठकों के आयोजन, समितियों, और विभिन्न नियमों के अंतर्गत वित्तीय सीमाओं और शक्तियों में भी संशोधन किए गए हैं।
राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) नियम, 2008 - नए पट्टा प्ररूप (प्ररूप 23-क, 23-ख और 23-ग)
राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) नियम, 2008
राजस्थान सरकार, पंचायती राज विभाग द्वारा दिनांक 1.2.2008 को अधिसूचना सं. एफ.4(11)पी.आर.डी./लॉ/रूल/एमेण्ड/07/445 जारी की गई है। इस अधिसूचना के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन किया गया है और नए पट्टा प्ररूप जोड़े गए हैं।
मुख्य बिंदु:
नियम 157 का संशोधन: नियम 157 के उप-नियम (1) में 'प्ररूप 23-क' और उप-नियम (2) में 'प्ररूप 23-ख' जोड़ा गया है।
नियम 158 का संशोधन: नियम 158 के उप-नियम (1) में 'प्ररूप 23-ग' जोड़ा गया है।
प्ररूप 23-क: आवासीय भूमि का पट्टा (नियम 157 (1) के अंतर्गत)।
प्ररूप 23-ख: आबादी भूमि का आवंटन / परिवारों के कब्जे के अस्थायी मकानों/कच्चे मकानों की नियमितीकरण (नियम 157 (2) के अंतर्गत)।
प्ररूप 23-ग: आबादी भूमि का रियायती दर पर / निःशुल्क आवंटन (नियम 158 के अंतर्गत)।
यह संशोधन ग्राम पंचायतों में आवासीय भूमि के आवंटन, पट्टा जारी करने और कच्चे मकानों के नियमितीकरण प्रक्रिया से संबंधित प्ररूपों को स्पष्ट करता है।
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 और 158 में संशोधन - अधिसूचना दिनांक 9-4-2007
राजस्थान पंचायती राज विभाग अधिसूचना
राजस्थान सरकार के पंचायती राज विभाग द्वारा अधिसूचना क्रमांक F.4(7)/PRD/LAW/Rule-Amnd/07/1166 दिनांक 9-4-2007 जारी की गई है। इसके माध्यम से राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन किए गए हैं जिन्हें राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) नियम, 2007 कहा गया है।
मुख्य बिंदु:
नियम 157 में संशोधन: ऐसे परिवार जिनके पास कहीं भी कोई मकान या घर का प्लॉट नहीं है और जो वर्ष 2003 तक की अवधि के आवास/झोपड़ी/कच्चे घर के रूप में आबादी भूमि पर काबिज हैं, वे अधिकतम 300 वर्ग गज तक भूमि के निःशुल्क नियमन के हकदार होंगे। इस प्रकार की भूमि का पट्टा परिवार की महिला मुखिया के नाम जारी किया जाएगा।
नियम 158 में संशोधन: नियम 158 के उप-नियम (2) के अंतर्गत यह प्रावधान जोड़ा गया है कि बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे) परिवारों को आबादी भूमि के आवंटन के मामले में पंचायत भूमि निःशुल्क आवंटित कर सकेगी।
ग्राम पंचायतों द्वारा किसी भी समुदाय, धार्मिक संस्थाओं और गैर सरकारी संस्था को पट्टा जारी नहीं करने के संबंध में आदेश
राजस्व एवं पंचायती राज विभाग निर्देश
राजस्थान सरकार, पंचायती राज विभाग द्वारा ग्राम पंचायतों द्वारा जारी पट्टों के संबंध में आदेश जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
नियम संदर्भ: ग्राम पंचायत द्वारा आबादी क्षेत्रों की भूमि के पट्टे राजस्थान पंचायत राज (सामान्य) नियम 1996 के नियम 162 एवं 167 के प्रावधानों के तहत ही दिए जा सकते हैं।
निःशुल्क भूमि आवंटन: नियम 162 के तहत केवल राजकीय संस्थाओं को ही 500 वर्ग गज तक भूमि निःशुल्क दी जा सकती है। किसी भी समाज या गैर सरकारी संस्थाओं को निःशुल्क भूमि दिए जाने का नियमों में कोई प्रावधान नहीं है।
निरस्तीकरण कार्रवाई: यदि किसी गैर सरकारी संस्था या समुदाय को नियम विरुद्ध आबादी भूमि आवंटित की गई है, तो उसे तुरंत प्रभाव से निरस्त करने हेतु राज्य सरकार को मामला प्रेषित किया जाए।
शासकीय आदेश संख्या: क्रमांक:- एफ-139(26)परावरि/विधि/पट्टा/सामान्य/02/3297, दिनांक 19-7-06।
राजस्थान लोक सम्पत्ति अधिनियम के अंतर्गत अतिक्रमण हटाने के संबंध में परिपत्र
राजस्थान पंचायती राज विभाग परिपत्र
यह परिपत्र राजस्थान सरकार के पंचायती राज विभाग द्वारा क्रमांक एफ 139(51)परावि/विधि/अतिक्रमण/2005/3833, दिनांक 24-12-2005 को जारी किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य राजस्थान लोक सम्पत्ति (अनाधिकृत अधिभोगियों, बेदखली अधिनियम) 1964 के अंतर्गत पंचायतों की संपत्ति से अवैध अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया और नियमों की जानकारी देना है।
मुख्य बिंदु:
सम्पदा अधिकारी की नियुक्ति: राज्य सरकार की अधिसूचना दिनांक 12.11.92 के तहत समस्त जिला परिषदों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को सम्पदा अधिकारी नियुक्त किया गया है, जो पंचायत की संपत्तियों से अवैध कब्जों को हटाने हेतु अधिकृत हैं।
नोटिस की प्रक्रिया: अतिक्रमण करने वाले व्यक्ति को कम से कम 10 दिन का समय देते हुए नोटिस दिया जाना चाहिए, जिसे लोक शपथ के ऊपर या व्यक्तिगत रूप से/डाक द्वारा तामील कराया जाएगा।
बेदखली और नीलामी के नियम: सम्पदा अधिकारी सुनवाई के पश्चात बेदखली का आदेश पारित कर सकते हैं। अतिक्रमणकर्ता द्वारा छोड़ी गई संपत्ति को 14 दिन का समय देते हुए समाचार पत्र में प्रकाशन के पश्चात नीलाम किया जा सकता है।
अपील का प्रावधान: बेदखली के आदेश के विरुद्ध जिला जज या उनके द्वारा अधिकृत न्यायिक अधिकारी के समक्ष 15 दिन के भीतर अपील की जा सकती है।
शासकीय शक्तियां और दंड: सम्पदा अधिकारी को गवाहों को बुलाने और दस्तावेज मंगवाने हेतु सिविल न्यायालय की शक्तियां प्राप्त हैं। अवैध अतिक्रमण जारी रखने पर एक वर्ष तक की सजा और 1000/- रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।
पंचायती राज नियमों के अंतर्गत अचल संपत्ति की नीलामी, पट्टा और आबाड़ी भूमि आवंटन संबंधी निर्देश
पंचायती राज अधिनियम और नियम: संपत्ति नीलामी और पट्टा दिशा-निर्देश
यह दस्तावेज़ पंचायती राज संस्थाओं के अंतर्गत अचल संपत्ति की नीलामी, बाजार कीमत निर्धारण, पुनर्विक्रय, बिक्री की पुष्टि, प्राइवेट बातचीत द्वारा आबाड़ी भूमि का अंतरण, पुराने गृहों का विनियामीकरण और कमजोर वर्गों को भूमि आबंटन से संबंधित महत्वपूर्ण नियमों की जानकारी प्रदान करता है।
मुख्य बिंदु:
नीलामी समिति (नियम 151): सरपंच, उप-सरपंच, सतर्कता समिति का अध्यक्ष, महिला/अनुसूचित जाति/जनजाति/पिछड़ा वर्ग का पंचायत द्वारा मनोनीत एक पंच, भू-राजस्व निरीक्षक या पटवारी शामिल होते हैं।
बाजार कीमत (नियम 152): विकास अधिकारी प्रत्येक वर्ष अप्रैल मास में उप-registrar कार्यालय से क्षेत्र की आबाड़ी जमीनों के सूचक दर प्राप्त करते हैं।
विक्रय की पुष्टि और अनुमोदन (नियम 154): 10,000 रुपये से अधिक की बोली के लिए पंचायत समिति (50,000 रु से अधिक), जिला परिषद (1,00,000 रु से अधिक) या राज्य सरकार (1,00,000 रु से अधिक) से पूर्व अनुमोदन प्राप्त करना आवश्यक है।
पुराने गृहों का विनियामीकरण (नियम 157): 50 वर्ष से अधिक पूर्व निर्मित मकानों हेतु 100 रुपये और 50 वर्ष के दौरान बने मकानों हेतु 200 रुपये (चयनित परिवारों के लिए राशि वसूल नहीं होगी; गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वालों के लिए भी छूट)।
कमजोर वर्गों को आबंटन (नियम 158): गांव आबादियों में 150 वर्ग गज तक की आबाड़ी भूमि अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, पिछड़े वर्गों, श्रम मजदूरों और भूमिहीन व्यक्तियों को रियायती दरों पर आबंटित की जा सकती है।
राज पंचायती राज संस्थाओं में स्थावर संपत्तियाँ, आबाद भूमि और भूखण्ड आ आवंटन नियम
अध्याय 9: स्थावर संपत्तियाँ और आबाद भूमि
यह दस्तावेज़ राज पंचायती राज संस्थाओं के अंतर्गत स्थावर संपत्तियों, आबाद भूमि, भूखंडों की नीलामी, पट्टा आवंटन, और राजस्व संवर्धन से जुड़े नियमों की विस्तृत जानकारी प्रदान करता है। इसमें ग्राम पंचायत और पंचायती राज संस्थाओं द्वारा संपत्तियों के प्रबंधन, निरीक्षण और आबाद भूमि के उपयोग से संबंधित प्रावधान शामिल हैं।
मुख्य बिंदु:
पंचायत की संपत्तियां (नियम 136): पंचायत सर्किल के आबाद क्षेत्र के भीतर आने वाली सभी सरकारी भूमियां, कॉमन भूमियां और सार्वजनिक मार्ग पंचायत में निहित होते हैं।
आबाद भूमि और भूखंडों की नीलामी (नियम 141-143): आबाद भूमि का विक्रय सामान्यतः खुली नीलामी के माध्यम से किया जाता है। आवासीय और वाणिज्यिक प्रयोजनों के लिए निर्धारित मानकों के अनुसार भूखंडों की सूची तैयार की जाती है।
कमजोर वर्गों को आबाद भूमि का आवंटन (नियम 158): अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, स्वच्छता कर्मियों, पिछड़े वर्गों, विकलांगों और बाढ़ग्रस्त परिवारों को रियायती दरों पर 150 वर्ग गज तक की आबाद भूमि का पट्टा दिया जा सकता है।
भूमि का अस्थायी उपयोग और किराए पर देना (नियम 163-164): धार्मिक उत्सवों, पशु मेलों और बाजारों के लिए आबाद भूमि के अस्थायी उपयोग हेतु पट्टा-किराया निर्धारित किया गया है। पंचायती राज भवन और दुकानें खुली नीलामी के माध्यम से पट्टे पर दी जाती हैं।
अतिक्रमण हटाना (नियम 165): सार्वजनिक भूमियों, तालाब-तलों और चरागाहों पर अतिक्रमण की जांच के लिए हर वर्ष जनवरी और जुलाई में सर्वेक्षण किया जाता है और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाती है।