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ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग का महत्वपूर्ण आदेश
यह आदेश ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रामीण विकास, अनुभाग-5), राजस्थान सरकार द्वारा क्रमांक एफ 27(263)प्रावि/युप-5/जीकेएन/उपापन 2015-18, दिनांक 29 नवम्बर 2021 को जारी किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य राजस्थान लोक उपापन में पारदर्शिता अधिनियम, 2012 एवं राजस्थान लोक उपापन में पारदर्शिता नियम, 2013 के नियम 16 के तहत महात्मा नरेगा योजनांतर्गत स्वीकृत निर्माण कार्यों हेतु आनुषंगिक सामग्री के उपापन के संबंध में मार्गदर्शन प्रदान करना है।
मुख्य दिशा-बिंदु एवं नियम:
- सीमा में संशोधन: राजस्थान लोक उपापन में पारदर्शिता नियम, 2013 के नियम 16 के प्रावधानों के तहत 'सीमित बोली' प्रक्रिया के अंतर्गत वित्तीय वर्ष में सामग्री उपापन की अधिकतम सीमा को 'पाँच लाख रुपये' से बढ़ाकर 'छः लाख रुपये' (6.00 लाख रुपये) कर दिया गया है।
- 60 लाख रुपये तक के कार्य: महात्मा नरेगा योजना सहित अन्य योजनाओं के अंतर्गत रुपये 6.00 लाख तक (श्रम सामग्री सहित) की लागत के कार्यों हेतु सामग्री उपापन 'सीमित निविदा' के माध्यम से किया जा सकेगा।
- 60 लाख रुपये से अधिक के कार्य: रुपये 6.00 लाख से अधिक लागत के समस्त कार्य राजस्थान लोक उपापन में पारदर्शिता अधिनियम, 2012 एवं नियम, 2013 की पालना में अनिवार्य रूप से पूर्ण कार्य (श्रम एवं सामग्री सहित) संकर्म निविदा (वर्क्स एंड मटेरियल सप्लाई टेंडर) के माध्यम से कराए जाएंगे।
- वित्तीय सीमा: पंचायती राज संस्थाओं द्वारा एक वित्तीय वर्ष में सामग्री उपापन की निर्धारित अधिकतम सीमा रु. 60.00 लाख तक की पालना करने का उत्तरदायित्व संबंधित पंचायत समिति का होगा।
- ई-प्रोक्योरमेंट (E-Procurement): रुपये 6.00 लाख से अधिक लागत के कार्यों हेतु सामग्री का क्रय/उपापन 'राजस्थान लोक उपापन में पारदर्शिता अधिनियम, 2012' एवं नियमों के तहत ई-उपापन प्रक्रिया को अपनाकर ही संपादित किया जाएगा।
अधिक जानकारी के लिए कृपया विभागीय आदेश पत्र संख्या एफ 27(263)प्रावि/युप-5/जीकेएन/उपापन 2015-18 दिनांक 29 नवंबर 2021 का अवलोकन करें।
