ग्राम सेवक से ग्राम विकास अधिकारी नाम परिवर्तन
-:: आदेश ::-
राज्य सरकार द्वारा यह निर्णय लिया गया है कि राज्य की ग्राम पंचायतों में पदस्थापित "ग्राम सेवक" के पदनाम को "ग्राम विकास अधिकारी" के पदनाम में परिवर्तित किया जाता है। ग्राम सेवक के पदनाम को ग्राम विकास अधिकारी के पदनाम से परिवर्तित किया जाना निम्नलिखित शर्तों के अध्यधीन रहेगा -
ग्राम सेवक का पदनाम ग्राम विकास अधिकारी होने पर भी सरपंच पूर्ववत कार्यालयाध्यक्ष रहेगा तथा ग्राम पंचायत में कार्यरत कनिष्ठ लिपिक एवं ग्राम विकास अधिकारी दोनों वर्तमान व्यवस्था अनुसार सरपंच के प्रति उत्तरदायी होंगे। कनिष्ठ लिपिक एवं ग्राम विकास अधिकारी का रिपोर्टिंग चैनल समान रहेगा। उक्त स्थिति में कनिष्ठ लिपिक एवं ग्राम विकास अधिकारी में कार्य विभाजन एवं जॉब चार्ट वर्तमान व्यवस्था के अनुसार ही रहेगा।
ग्राम विकास अधिकारी का पदनाम होने पर अभी अथवा भविष्य में न तो कोई अतिरिक्त वित्तीय लाभ मांगा जायेगा तथा ना ही इस पद को राजपत्रित घोषित करने की मांग की जायेगी।
ग्राम विकास अधिकारी का पदनाम घोषित होने की स्थिति में वेतनमान में किसी परिवर्तन की मांग नहीं की जावेगी तथा ना ही इस स्थिति में किसी प्रकार की पदोन्नति से संबंद्ध मांग की जावेगी।
ग्राम सेवक के पदनाम को ग्राम विकास अधिकारी का पदनाम दिये जाने पर इस तथ्य का कोई अतिरिक्त दावा सामन्त कमेटी के समक्ष अतिरिक्त लाभ हेतु नहीं किया जावेगा।
ग्राम सेवकों का पदनाम ग्राम विकास अधिकारी होने पर भी वे राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 व राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 व अन्य अधिनियमों/नियमों/आदेशों/दिशा निर्देशों में विहित ग्राम सेवक एवं सचिव पद के कर्तव्यों व दायित्वों का निर्वहन यथावत करते रहेंगे।
ग्राम विकास अधिकारी (Village Development Officer) एवं कनिष्ठ लिपिक (LDC) ग्राम पंचायत में एक दूसरे के लिंक ऑफिसर के रूप में कार्य करेंगे, जिससे कि एक की अनुपस्थिति में दूसरा उसका भी कार्य संपादित कर सके।
यह आदेश वित्त विभाग की आई.डी. सं. 101701936 दिनांक 05.04.2018 के अनुसरण में जारी किया जा रहा है तथा सक्षम स्तर से अनुमोदित है। यह आदेश जारी करने की दिनांक से प्रभावी होंगे।
इन आदेशों की क्रियान्विति हेतु अन्य आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने/नियम परिवर्तन की कार्यवाही पृथक से की जायेगी।