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राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 का सारांश
राज्य सरकार ने राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धाराओं और शक्तियों के तहत राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 बनाए हैं। यह दस्तावेज पंचायती राज संस्थाओं, ग्राम सभा, सतर्कता समितियों, कर निर्धारण, कार्यभार हस्तांतरण, बजट, लेखा और लेखापरीक्षा से संबंधित नियमों का विस्तृत विवरण प्रदान करता है।
मुख्य बिंदु:
- ग्राम सभा और बैठकें: प्रत्येक वर्ष कम से कम दो ग्राम सभाओं का आयोजन किया जाना अनिवार्य है। बैठक का स्थान पंचायत कार्यालय या सुविधाजनक सार्वजनिक स्थल होगा। बैठक के नोटिस का प्रकाशन कम से कम 15 दिन पूर्व किया जाना आवश्यक है।
- सतर्कता समितियाँ: वित्तीय वर्ष के प्रथम त्रimas में आयोजित होने वाली ग्राम सभा में सतर्कता समिति के गठन का प्रावधान है। इसका उद्देश्य विकास क्रिया-कलापों का त्वरित कार्यान्वयन और निधियों के दुरुपयोग को रोकना है।
- कर और फीस का अधिरोपण: पंचायतें अधिनियम के तहत विभिन्न कर, फीस और उपकर (जैसे भवन कर, यात्री कर, वाहन कर, जल कर आदि) अधिरोपित और संग्रहित कर सकती हैं।
- स्थावर संपत्तियाँ और आबाद भूमि: पंचायत क्षेत्र की सभी सार्वजनिक भूमि, मार्ग और आबाद भूमि पंचायत में निहित होती हैं। आबाद भूमि का आवंटन और विक्रय निर्धारित नियमों के अनुसार किया जाता है।
- बजट, लेखा और संपरीक्षा: पंचायती राज संस्थाओं द्वारा प्रतिवर्ष 15 फरवरी तक आगामी वर्ष का बजट तैयार कर संबंधित प्राधिकारी को प्रस्तुत किया जाता है। लेखाओं की संपरीक्षा राजस्थान स्थानीय निधि संपरीक्षा अधिनियम, 1954 के तहत की जाती है।
