प्रशासकीय समिति के पद को लाभ का पद मानने के संबंध में मार्गदर्शन
राज्य निर्वाचन आयोग, राजस्थान - आदेश एवं मार्गदर्शन
राज्य निर्वाचन आयोग, राजस्थान द्वारा ग्राम पंचायत के कार्यकाल समाप्त होने से पूर्व गठित प्रशासकीय समिति के संबंध में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
पत्रांक एवं दिनांक: क्रमांक: एफ. 5(2)(1)पंचा/रानिआ/2022/10520, दिनांक: 14.10.2026
प्रेषक: मुख्य निर्वाचन अधिकारी एवं सचिव, राज्य निर्वाचन आयोग, राजस्थान, जयपुर।
प्राप्तकर्ता: शासन सचिव एवं आयुक्त, पंचायतीराज विभाग, राजस्थान, जयपुर।
विषय: प्रशासकीय समिति को लाभ का पद (Office of profit) की श्रेणी में माना जायेगा अथवा नहीं, के संबंध में मार्गदर्शन।
आयोग का निर्णय: प्रकरण का परीक्षण करवाया गया जिसके बाद प्रशासकीय समिति के पदों को लाभ की श्रेणी में न मानते हुए अग्रिम कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए हैं।
यह दस्तावेज़ राजस्थान पंचायती राज से संबंधित उप सरपंच चुनाव के लिए नामांकन-पत्र का आधिकारिक प्रारूप (मॉडेल फार्म - ख) है। इस प्रपत्र का उपयोग ग्राम पंचायत स्तर पर उप सरपंच पद के लिए उम्मीदवार के नाम का प्रस्ताव करने हेतु किया जाता है।
प्रस्ताव प्रक्रिया: निर्वाचित पंच द्वारा उम्मीदवार के नाम का प्रस्ताव
आवश्यक विवरण: प्रस्तावक के हस्ताक्षर या अंगूठे का निशान, अभ्यर्थी की सहमति, हस्ताक्षर और दिनांक
नोट: जो शब्द उपयुक्त न हो उन्हें काट दीजिए।
पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्य निर्वाचन हेतु नाम-निर्देशन पत्र (प्रारूप-IV क)
राज ई पंचायत निर्देशिका: नाम-निर्देशन पत्र एवं शपथ पत्र प्रारूप
यह दस्तावेज राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 एवं इसके अधीन बनाए गए नियमों के अंतर्गत पंचायत समिति और जिला परिषद के सदस्यों के निर्वाचन के लिए नाम-निर्देशन पत्र (प्रारूप-IV क) तथा संबंधित घोषणाओं से संबंधित है।
मुख्य बिंदु एवं विवरण
प्रारूप-IV क (नियम-58): पंचायत समिति या जिला परिषद सदस्य के निर्वाचन के लिए नाम-निर्देशन पत्र। इसमें मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल द्वारा खड़े किए गए अभ्यर्थी (भाग-I) तथा अन्य अभ्यर्थियों (भाग-II) के लिए अलग-अलग प्रावधान हैं।
प्रारूप-4 घ (नियम 25 और 58): पंच, सरपंच या सदस्य के निर्वाचन हेतु रिटर्निंग अधिकारी के समक्ष अभ्यर्थी द्वारा दी जाने वाली घोषणा, जिसमें लंबित मामलों, आपराधिक पृष्ठभूमि, बच्चों का विवरण तथा चल-अचल संपत्तियों का ब्योरा देना होता है।
स्वच्छ शौचालय संबंधी घोषणा: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 19(थ) (राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) अधिनियम, 2015 द्वारा प्रतिस्थापित) के अनुसार कार्यरत स्वच्छ शौचालय और खुले में शौच न जाने संबंधी अंडरटेकिंग।
उपाबंध I-A (शपथ पत्र): जिला परिषद या पंचायत समिति सदस्य के चुनाव के लिए नामनिर्देशन पत्र के साथ प्रस्तुत किए जाने वाला शपथ-पत्र, जिसमें आयकर विवरणी, आपराधिक मामले, चल व अचल संपत्तियाँ (कृषि भूमि, गैर कृषि भूमि, भवन, मकान आदि), और देनदारियों का विवरण शामिल है।
सांख्यकीय सूचना फॉर्म: जिला परिषद/पंचायत समिति सदस्य/सरपंच के निर्वाचन में खड़े होने वाले प्रत्येक उम्मीदवार द्वारा भरा जाने वाला फॉर्म जो नोमीनेशन फॉर्म के साथ भरा जाता है।
पंच, सरपंच और अन्य पंचायती राज पदों के लिए नाम निर्देशन-पत्र (प्रारूप-4) और घोषणा प्रपत्र
पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचन हेतु नाम निर्देशन-पत्र एवं घोषणा प्रपत्र
यह दस्तावेज़ राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 और राजस्थान पंचायती राज नियम, 1994 के अंतर्गत पंच, सरपंच और अन्य पंचायती राज संस्थाओं के सदस्यों के चुनाव के लिए उपयोग किए जाने वाले विभिन्न प्रारूपों और घोषणा पत्रों का संग्रह है। इसमें नामांकन पत्र, आपराधिक मामलों और परिसंपत्तियों की घोषणा, शौचालय से संबंधित अंडरटेकिंग और शपथ-पत्र के प्रारूप शामिल हैं।
मुख्य बिंदु और प्रारूप
प्रारूप-4 (नियम 25(1)): पंच/सरपंच के निर्वाचन के लिए नाम निर्देशन-पत्र। इसमें उम्मीदवार का विवरण, जाति, लिंग, प्रस्तावक और रिटर्निंग अधिकारी द्वारा रसीद व निर्णय की जानकारी दी जाती है।
प्रारूप-4 घ (नियम 25 और 58): उम्मीदवार द्वारा दी जाने वाली घोषणा, जिसमें लंबित आपराधिक मामले, सजा, बच्चों का विवरण, चल एवं अचल संपत्तियों का ब्योरा शामिल है।
स्वच्छ शौचालय घोषणा (देखें धारा 19(थ), राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994): पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव में स्वच्छ शौचालय के संबंध में अंडरटेकिंग।
उपाबंध I-B (शपथ पत्र): सरपंच के चुनाव के लिए नामनिर्देशन पत्र के साथ प्रस्तुत किए जाने वाला शपथ-पत्र, जिसमें आय-कर विवरण, आपराधिक मामले, चल-अचल संपत्तियाँ, देनदारियाँ, व्यवसाय, आय के स्रोत और शैक्षणिक योग्यता का विवरण 50/- रुपये के गैर न्यायिक स्टाम्प पेपर पर देना होता है।
सांख्यकीय सूचना का फॉर्म: जिला परिषद/पंचायत समिति सदस्य/सरपंच और ग्राम पंचायत के पंच पद के उम्मीदवारों के लिए सांख्यकीय जानकारी का फॉर्म।
Reform उत्सव-2026 दौरान जन योजना अभियान (PPC) वर्ष 2027-28 हेतु दिनांक 02 अक्टूबर, 2026 को विशेष ग्राम सभा आयोजन के संबंध में दिशा-निर्देश
Reform उत्सव-2026 विशेष ग्राम सभा दिशा-निर्देश
राजस्थान सरकार, पंचायती राज विभाग द्वारा Reform उत्सव-2026 के दौरान 02 अक्टूबर, 2026 को विशेष ग्राम सभा के आयोजन हेतु दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु एवं उद्देश्य
अभियान का उद्देश्य: पंचायतों में सहभागी, समावेशी, साक्ष्य-आधारित एवं अभिसरण (Convergence) पर आधारित पंचायत विकास योजनाओं (PDPs) का प्रभावी निर्माण एवं क्रियान्वयन करना।
दिनांक: 02 अक्टूबर, 2026 को विशेष ग्राम सभा का आयोजन।
सहभागिता: जनप्रतिनिधियों, पंचायत कर्मियों, संबंधित विभागों, SHGs एवं अन्य हितधारकों की भागीदारी सुनिश्चित करना।
प्रमुख गतिविधियां: केंद्र एवं राज्य योजनाओं का अभिसरण, GPDP, BPDP एवं DPDP का समयबद्ध निर्माण, नोडल अधिकारी एवं सुविधा प्रदाताओं की नियुक्ति, TMP पोर्टल पर PPC प्रशिक्षण पब्लिश करना, ग्राम सभा GPDP पोर्टल पर अपलोड करना, तथा नागरिक-केंद्रित योजनाओं एवं सुधारों का प्रचार-प्रसार।
सभी संबंधित ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों को निर्देशित किया गया है कि वे 02 अक्टूबर, 2026 की विशेष ग्राम सभा में 7 विभागों की 13 गतिविधियों के आमजन को मिलने वाले लाभ एवं लाभ प्राप्ति की प्रक्रिया की जानकारी प्रदान करें।
राजस्थान ग्रामीण विकास राज्य सेवा के कनिष्ठ वेतन श्रृंखला के अधिकारियों का पदस्थापन आदेश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग राजस्थान सरकार पदस्थापन आदेश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), जयपुर द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ 2( )परावि/प्रशा-1/आरआरडीएस/पदस्थापन/2026-87859 दिनांकित 16-08-2026 के अनुसार, राजस्थान ग्रामीण विकास राज्य सेवा की कनिष्ठ वेतन श्रृंखला में नवोन्नत निम्नलिखित अधिकारियों का पदस्थापन राज्यहित में तत्काल प्रभाव से रिक्त पदों पर किया गया है।
मुख्य बिंदु:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
आदेश क्रमांक: एफ 2( )परावि/प्रशा-1/आरआरडीएस/पदस्थापन/2026-87859
कुल अधिकारी: इस आदेश के तहत कुल 118 विकास अधिकारी एवं संबंधित अधिकारियों का नवीन पदस्थापन किया गया है।
विशेष निर्देश: प्रस्तावित नगरीय निकाय एवं पंचायतीराज संस्थाओं के आम चुनावों के मद्देनजर सभी अधिकारियों को उनके वर्तमान पद से कार्यमुक्त करते हुए निर्देशित किया जाता है कि वे बिना कार्यग्रहण काल/अवकाश का उपयोग किये तुरन्त प्रभाव से अपने नवीन पद का कार्यग्रहण कर पालना रिपोर्ट तत्काल भेजेंगे।
अनुशासनात्मक कार्रवाई: आदेश की पालना के अभाव में अनुशासनत्मक कार्रवाई अमल में लायी जायेगी, जिसके लिए अधिकारीगण स्वयं उत्तरदायी होंगे।
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2026 जारी
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2026
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम सं. 13) की धारा 102 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2026 की अधिसूचना जारी कर दी गई है। यह अधिसूचना दिनांक 04 अगस्त, 2026 को जारी की गई है और यह तुरंत प्रभाव से प्रवृत्त हो गई है।
मुख्य संशोधन बिंदु:
नियम 154 का संशोधन: इसके तहत यदि सबसे ऊंची बोली की रकम दो लाख रुपये से अधिक हो, तो पंचायत को पूर्व अनुमोदन प्राप्त करना होगा:
(क) यदि रकम 5 लाख रुपये से अनधिक हो, तो पंचायत समिति का।
(ख) यदि रकम 5 लाख रुपये से अधिक किंतु 10 लाख रुपये से अनधिक हो, तो जिला परिषद का।
(ग) यदि रकम 10 लाख रुपये से अधिक हो, तो राज्य सरकार का पूर्व अनुमोदन आवश्यक होगा।
साथ ही, नियम 154 और नियम 160 के अंत में दी गई टिप्पणियों में मौजूदा अभिव्यक्ति "10,000/-" के स्थान पर "2,00,000/-" प्रतिस्थापित कर दिया गया है।
नियम 157 का संशोधन: नियम 157 के उप-नियम (1) के द्वितीय परंतुक में "प्रशासन गांव के संग अभियान 2021 और प्रशासन गांव के संग अभियान 2023" के स्थान पर "ग्रामीण सेवा शिविर 2026 या पंचायती राज विभाग या राजस्व विभाग द्वारा किसी भी नाम से आयोजित कोई भी शिविर या अभियान" प्रतिस्थापित किया गया है।
आदेश क्रमांक: [NO.F.4(05)Rule/Amend/Legal/PR/2026/45] हस्ताक्षर: भारत भूषण गोयल, शासन उप सचिव, राज्यपाल के आदेश से।
दिनांक 29 जून 2026 को विशेष ग्राम सभा के आयोजन बाबत आदेश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग राजस्थान सरकार का महत्वपूर्ण निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा आदेश जारी कर राज्य की समस्त ग्राम पंचायतों में दिनांक 29 जून, 2026 को विशेष ग्राम सभा आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं।
विशेष ग्राम सभा के मुख्य बिंदु एवं उद्देश्य
ग्रामीण सेवा शिविर-2026: दिनांक 12 जून, 2026 से 15 जुलाई, 2026 तक आयोजित हो रहे जन कल्याण शिविरों के तहत ग्रामीण विकास विभाग की योजनाओं का प्रचार-प्रसार, कार्य प्रस्ताव प्राप्त करना, प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत किस्तें व लंबित स्वीकृतियां जारी करना तथा भूमिहीन लाभकारियों को भूमि आवंटन आदि गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।
वीबी-जी राम जी योजना: दिनांक 01 जुलाई, 2026 से वीबी-जी राम जी योजना का शुभारंभ किया जा रहा है। इस संबंध में विशेष ग्राम सभा में योजना का प्रचार-प्रसार, प्राप्त कार्यों के प्रस्ताव एवं कार्ययोजना का अनुमोदन किया जाना है।
प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (आवास प्लस सर्वे-2024): 'सभी के लिए आवास' योजना के तहत आवास प्लस सर्वे-2024 के माध्यम से किए गए सर्वेक्षण के आधार पर तैयार की गई वरीयता सूची का ग्राम सभा में अनुमोदन कराया जाना आवश्यक है।
अतः सभी जिला परिषद के मुख्य/अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारियों और पंचायत समितियों के विकास अधिकारियों से अनुरोध किया गया है कि वे अपने जिले की सभी ग्राम पंचायतों में दिनांक 29 जून, 2026 को विशेष ग्राम सभा का आयोजन सुनिश्चित कराएं।
दिनांक 26 मई, 2026 को विशेष ग्राम सभा के आयोजन बाबत आवश्यक दिशा-निर्देश
विशेष ग्राम सभा आयोजन (26 मई, 2026)
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा जारी पत्र (क्रमांक: एफ.15(20)पंवैधि/वि0ग्रा0सभा/2026/ई-81146, दिनांक: 23.05.2026) के अनुसार दिनांक 26 मई, 2026 को राज्य की सभी ग्राम पंचायतों में विशेष ग्राम सभा का आयोजन किया जाना है।
ग्राम सभा के मुख्य एजेंडा एवं बिंदु:
ग्राम (ग्लोबल राजस्थान एग्रोटेक मीट) 2026 के बारे में जानकारी:
राज्य सरकार द्वारा 23 से 25 मई, 2026 तक प्रस्तावित 'GRAM-2026' आयोजन को वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में ईंधन संयम की अपील और मुख्यमंत्री महोदय के ईंधन बचत हेतु निर्देशों के कारण कुछ समय के लिए स्थगित किया गया है, जो शीघ्र ही आयोजित होगा।
ग्राम सभा में नागरिकों को इस आयोजन की रूपरेखा, ड्रोन तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, प्रेसिजन फार्मिंग, जैविक एवं प्राकृतिक खेती जैसी आधुनिक तकनीकों के बारे में बताया जाएगा।
किसानों, स्टार्टअप्स और कृषि वैज्ञानिकों के बीच सीधा संवाद स्थापित कर कृषि को अधिक लाभदायक बनाने पर चर्चा होगी।
ग्रामोत्थान शिविरों / ग्राम रथ यात्रा की प्रगति की जानकारी:
ग्राम उत्थान शिविर अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्र के समस्त 2770 गिरदावर सर्किल पर शिविर आयोजित किए गए, जिनमें 31.5 लाख से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया।
इन शिविरों में कृषि, उद्यान, कृषि विपणन, पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन, सहकारिता, जल संसाधन, ऊर्जा, उद्योग, ग्रामीण विकास, पंचायत राज तथा राजस्व विभाग ने भाग लिया तथा मौके पर ही ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान किया गया।
अधिकारियों की उपस्थिति एवं निर्देश:
मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद और विकास अधिकारी, पंचायत समिति यह सुनिश्चित करेंगे कि दिनांक 26 मई, 2026 को आयोजित होने वाली प्रत्येक ग्राम सभा में जिला स्तर या पंचायत समिति स्तर का कोई अधिकारी अनिवार्य रूप से उपस्थित रहे तथा ग्राम सभाओं का प्रभावी पर्यवेक्षण किया जाए।
राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2026 – ग्राम विकास अधिकारी की वरिष्ठता सूची से संबंधित अधिसूचना
राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2026
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 04 जून, 2026 को अधिसूचना जारी कर राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन किया गया है। इसे राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2026 कहा गया है, जो तुरंत प्रभाव से लागू हो गए हैं।
मुख्य बिंदु एवं संशोधन
नियम 285 का संशोधन: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 285 के परंतुक में खंड (iv) और (v) जोड़े गए हैं।
8 जून, 2016 या उसके पश्चात नियुक्त ग्राम विकास अधिकारी: इनकी वरिष्ठता सूची भर्ती एजेंसी से प्राप्त योग्यता/मेरिट सूची के आधार पर तैयार की जाएगी।
अनुकंपात्मक आधार पर नियुक्ति: 8 जून, 2016 या उसके पश्चात अनुकंपा के आधार पर नियुक्त ग्राम विकास अधिकारियों के मामले में वरिष्ठता उनके पदग्रहण (joining) की तारीख के आधार पर निर्धारित होगी।
राज्य स्तर पर वरिष्ठता: ग्राम विकास अधिकारी की वरिष्ठता सूची अब राज्य स्तर पर रखी जाएगी।
आदेश क्रमांक: [सं.एफ.4(09)अमेंड/रूल्स/लीगल/पीआर/2026/37]
जारीकर्ता: भारत भूषण गोयल, उप शासन सचिव, राज्यपाल के आदेश से।
ग्रामीण क्षेत्रों में चरणबद्ध रूप से स्ट्रीट लाइट/रोड लाइट व्यवस्था स्थापित किए जाने के संबंध में
ग्रामीण क्षेत्रों में स्ट्रीट लाइट और रोड लाइट व्यवस्था
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में चरणबद्ध रूप से स्ट्रीट लाइट और रोड लाइट व्यवस्था स्थापित करने के संबंध में दिशानिर्देश जारी किए गए हैं। यह पहल माननीय मंत्री महोदय, पंचायती राज विभाग द्वारा विधानसभा में की गई घोषणा के अनुपालन में है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रात्रिकालीन अंधकार की समस्या का समाधान करना और प्रत्येक गांव को प्रकाशमान बनाना है।
मुख्य उद्देश्य
ग्रामीण क्षेत्रों में रात्रि के समय सुरक्षित एवं सुगम आवागमन सुनिश्चित करना।
ग्रामों की मुख्य बस्तियों, बाजारों, सार्वजनिक स्थलों, विद्यालयों, पंचायत भवनों और स्वास्थ्य केंद्रों पर पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था उपलब्ध कराना।
ऊर्जा दक्ष एवं पर्यावरण अनुकूल प्रकाश व्यवस्था को बढ़ावा देना।
विद्युत आपूर्ति की कमी वाले क्षेत्रों में सौर ऊर्जा आधारित स्ट्रीट लाइट/रोड लाइट की स्थापना को प्रोत्साहित करना।
ग्रामीण क्षेत्रों में दुर्घटनाओं एवं आपराधिक गतिविधियों की संभावना को कम करना तथा ग्रामीण विकास को गति प्रदान करना।
क्रियान्वयन क्षेत्र एवं प्राथमिकता
प्रत्येक ग्राम पंचायत में सभी ग्रामीण क्षेत्रों, आबादी क्षेत्रों, बाजारों, मुख्य मार्गों, आंतरिक मार्गों और अन्य महत्वपूर्ण स्थलों पर चरणबद्ध रूप से स्ट्रीट लाइट/रोड लाइट लगाई जाएगी। कार्य प्रारंभ होने की प्राथमिकता में कच्ची बस्तियां, कमजोर वर्ग की बस्तियां, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति वर्ग की बस्तियां तथा मुख्य मार्ग, बाजार, बस स्टैंड, पंचायत भवन, विद्यालय, आंगनबाड़ी केंद्र एवं स्वास्थ्य केंद्र जैसे सार्वजनिक स्थान शामिल होंगे।
स्ट्रीट लाइट की स्थापना एवं विद्युत कनेक्शन
एल.ई.डी. स्ट्रीट लाइट: विद्युत वितरण निगम के खंभों पर नियमानुसार सड़क की चौड़ाई के अनुसार एल.ई.डी. लाइट लगाई जाएगी।
सौर ऊर्जा आधारित स्ट्रीट लाइट: जहां विद्युत पोल उपलब्ध नहीं हैं, विद्युत आपूर्ति नियमित नहीं है अथवा विद्युत वितरण का नेटवर्क उपलब्ध नहीं है, वहां सौर ऊर्जा आधारित स्ट्रीट लाइट स्थापित की जा सकती है।
विद्युत कनेक्शन: स्ट्रीट लाइट/रोड लाइट हेतु विद्युत कनेक्शन ग्राम पंचायत द्वारा लिया जाएगा, जो ग्रामवार, ग्राम पंचायतवार या क्षेत्रवार हो सकता है।
व्यय का प्रबंधन
राज्य वित्त आयोग षष्ठ/सप्तम के अंतर्गत जारी विभागीय दिशा-निर्देशों में मूलभूत एवं विकास कार्यों के लिए हस्तांतरित 55 प्रतिशत राशि से सड़कों एवं सार्वजनिक स्थानों पर उचित प्रकाश व्यवस्था और 40 प्रतिशत राशि का उपयोग रोड लाइट/स्ट्रीट लाइट के अंतर्गत किया जाना अनुमत है।
ई-पंचायत पोर्टल के माध्यम से क्रियान्वयन
योजना के पारदर्शी एवं प्रभावी क्रियान्वयन हेतु प्रशासनिक, तकनीकी एवं वित्तीय स्वीकृतियां जारी करना, राशि भुगतान, कार्य की जियो-टैगिंग एवं फोटो अपलोड करना तथा ऑनलाइन मॉनिटरिंग एवं प्रगति समीक्षा सभी कार्य ई-पंचायत पोर्टल के माध्यम से किए जाएंगे। जिला स्तर पर अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी, पंचायती राज इसके नोडल अधिकारी होंगे।
दिनांक 05 जून 2026 को विशेष ग्राम सभा का आयोजन बाबत
विशेष ग्राम सभा के आयोजन के संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 05 जून, 2026 को विशेष ग्राम सभा के आयोजन के संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
विषय: दिनांक 05 जून 2026 को विशेष ग्राम सभा का आयोजन।
संदर्भ: पंचायतीराज मंत्रालय, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार से प्राप्त संयुक्त अ.शा. पत्र क्रमांक M-11015/169/2026-CB दिनांक 21.05.2026।
अभियान: भारत सरकार द्वारा "स्वच्छ गाँव, सुरक्षित जलवायु" अभियान के अंतर्गत विश्व पर्यावरण दिवस 05 जून के अवसर पर विशेष ग्राम सभा का आयोजन किए जाने के निर्देश प्राप्त हुए हैं।
निर्देश: सभी जिलों की सभी ग्राम पंचायतों में विश्व पर्यावरण दिवस (05 जून) के अवसर पर विशेष ग्राम सभा का आयोजन किया जाना सुनिश्चित करें तथा संदर्भित पत्र में वर्णित निर्देशों की पालना की जाए।
यह आदेश भरत भूषण गोयल, उपायुक्त एवं उप शासन सचिव (प्रथम) द्वारा जारी किया गया है।
ग्रामीण क्षेत्रों में निर्माण कार्यों हेतु भूमि स्वामित्व एवं मार्गदर्शन बाबत निर्देश
विभागीय ग्रामीण कार्य निर्देशिका-2025 के प्रावधानों की जानकारी
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास विभाग (अनुभाग-5) द्वारा क्रमांक एफ 27(201)ग्राविफो/अनु-5/जीकेन/सरपंच संघ/2024-25 के अंतर्गत दिनांक 14-08-2025 से लागू विभागीय ग्रामीण कार्य निर्देशिका-2025 के बिंदु संख्या 10 एवं परिशिष्ट-2 के प्रावधानों के संबंध में मार्गदर्शन जारी किया गया है। यह निर्देश ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न केंद्रीय एवं राज्य प्रवर्तित योजनाओं के अंतर्गत कराए जाने वाले निर्माण कार्यों को तकनीकी, सुगमता और गुणवत्ता की दृष्टि से क्रियान्वित करने के लिए है।
मुख्य बिंदु एवं दिशा-निर्देश
भूमि स्वामित्व और विवाद से बचाव: निर्देशिका के बिंदु संख्या 10 में 'भूमि स्वामित्व तय करने एवं कार्य को विवाद से बचाने का दायित्व' और परिशिष्ट-2 में 'सामान्य तौर पर संपादित की जाने वाली गतिविधियों के लिए आवश्यक जमीन का विवरण' से संबंधित प्रावधान दिए गए हैं।
आबादी भूमि और निर्माण कार्य: नवीन आंगनबाड़ी भवन, विद्यालय, सामुदायिक भवन, पंचायत भवन, उप स्वास्थ्य केंद्र, वाचनालय, प्याऊ और नए जल स्रोत लगाने के लिए आबादी क्षेत्र में सक्षम प्राधिकारी/संस्था से अनापत्ति प्रमाण-पत्र प्राप्त कर गतिविधि के नाम आवंटन/पट्टा जारी कराना आवश्यक है।
रास्ता/गोचर/वन भूमि संबंधी प्रावधान: नदी, नाला, तालाब के भरौव क्षेत्र में, रेलवे लाइन या सड़क की सीमा में निर्माण कार्य सामान्यतः स्वीकृत नहीं होते हैं। हालांकि, सार्वजनिक शौचालय, नालियां, बोरिंग, टंकी, हैंडपंप आदि के लिए ग्राम पंचायत स्थानीय स्तर पर आपत्तियां मांगकर और कोरम में निर्णय लेकर इसे शिथिल कर सकती है, जो पंचायत के रिकॉर्ड में होना अनिवार्य है। वन/अरण्य भूमि के मामलों में संबंधित विभाग से अनापत्ति प्रमाण-पत्र प्राप्त किया जाना चाहिए।
खातेदारी भूमि और गिफ्ट/दान: किसी भी परिसंपत्ति निर्माण हेतु खातेदारी भूमि दान/समर्पण करवाकर नामांतरण, खसरा मैप में लोकेशन दर्ज करना और सीमा ज्ञान करवाना आवश्यक है। एक से अधिक खातेदार होने पर सभी की सहमति और नोटरी पब्लिक से प्रमाणीकरण अनिवार्य है।
यह आदेश शासन सचिव, ग्रामीण विकास विभाग (कृष्ण कुणाल) द्वारा जारी किया गया है और सभी संबंधित जिला कलेक्टरों, मुख्य कार्यकारी अधिकारियों तथा जिला परिषदों को आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रेषित किया गया है।
24 अप्रैल 2026 को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस मनाने के संबंध में निर्देश
राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस 2026 का आयोजन
पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश (क्रमांक: एफ 4(0) PR / DP / राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस 2026 / 81591) के अनुसार 24 अप्रैल 2026 को जिला, ब्लॉक एवं ग्राम पंचायत स्तर पर राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस समारोहपूर्वक आयोजित किया जाएगा।
मुख्य उद्देश्य एवं महत्व
73वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम के लागू होने की याद में प्रतिवर्ष 24 अप्रैल को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर सहभागी लोकतंत्र की भावना को मजबूत करना और आत्मनिर्भर पंचायत की परिकल्पना को साकार करना है।
आयोजित की जाने वाली मुख्य गतिविधियाँ
आम नागरिकों व लाइन विभागों के अधिकारियों/कार्मिकों की सार्थक भागीदारी सुनिश्चित करते हुए ग्राम सभा का आयोजन।
आयोजित ग्राम सभा की बैठक कार्यवाही विवरण सभा सार के माध्यम से तैयार करना।
कार्यक्रम में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली पंचायतों का अभिनंदन।
सामुदायिक सहभागिता एवं जागरूकता सृजन संबंधी गतिविधियाँ।
महिला नेतृत्व वाले विकास, पंचायत उन्नति सूचकांक के अंतर्गत प्रदर्शन, सतत विकास लक्ष्यों के स्थानीयकरण (LSDGs) में प्रगति और ओएसआर (OSR) को बढ़ाने की रणनीतियों पर चर्चा।
पंचायती राज मंत्रालय के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल को फॉलो व टैग करना।
व्यय और वित्त पोषण
इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों/समारोहों में किया जाने वाला व्यय ओएसआर (OSR)/आरजीएसए (RGSA) के ई.ई.सी. (IEC) मद या अन्य केंद्रीय व राज्य ग्रामीण विकास योजनाओं से किया जा सकता है। इसे सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान करने के निर्देश दिए गए हैं।
दिनांक 20 अप्रैल, 2026 को विशेष ग्राम सभा के आयोजन के संबंध में दिशा-निर्देश
दिनांक 20 अप्रैल, 2026 को विशेष ग्राम सभा का आयोजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश (क्रमांक: एफ.15(20)पंव्रावि/विधि/वि0ग्रा0सभा/2026/ई-81146, दिनांक: 2026.04.11) के अनुसार, राज्य की सभी ग्राम पंचायत में दिनांक 20 अप्रैल, 2026 को विशेष ग्राम सभा का आयोजन किया जाना है।
ग्राम सभा के मुख्य एजेंडा एवं चर्चा योग्य बिंदु
मुख्यमंत्री विकसित ग्राम अभियान: ग्राम पंचायत के संदर्भ में सूचकांकों पर चर्चा व अनुमोदन तथा आकांक्षाओं (Aspirations)/प्राथमिकताओं (Priorities) के संबंध में चर्चा।
वृक्षारोपण अभियान (मिशन हरियालो राजस्थान): वर्ष 2024 और 2025 में लगाए गए पौधों के जीवित रहने, उनके रख-रखाव, VBGRAMG (विकसित भारत-गारंटी फॉर रोज़गार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)) योजना के तहत श्रमिक उपलब्ध करवाने तथा वर्ष 2026 में पौधारोपण के लक्ष्यों (प्रत्येक ग्राम पंचायत में 2000 या 4000 पौधे) के संबंध में चर्चा।
'वंदे गंगा' जल संरक्षण जन अभियान (25 मई से 05 जून 2026): इस 12 दिवसीय अभियान के तहत जल संरक्षण, जन-जागरूकता, जल संग्रहण संरचनाओं का निर्माण/जीर्णोद्धार, प्रभात फेरी, श्रमदान, पौधारोपण और विभिन्न विभागों द्वारा प्रस्तावित गतिविधियों के संबंध में चर्चा।
अटल ज्ञान केंद्र: बजट घोषणा के अंतर्गत ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर स्थापित किए जा रहे अटल ज्ञान केंद्रों के उद्देश्यों, प्रस्तावित गतिविधियों, संरचनाओं और कार्य निष्पादन पर चर्चा।
समस्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी (जिला परिषद) और विकास अधिकारी (पंचायत समिति) को निर्देशित किया गया है कि वे अपने क्षेत्र की सभी ग्राम पंचायतों में उपर्युक्त एजेंडे के तहत कार्यवाही सुनिश्चित करें।
विकास अधिकारी के रिक्त पद पर अतिरिक्त कार्यभार सौंपे जाने के संबंध में परिपत्र
विकास अधिकारी के रिक्त पद पर अतिरिक्त कार्यभार हेतु निर्देश
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज) द्वारा विकास अधिकारी के रिक्त पद का अतिरिक्त कार्यभार प्रदान किए जाने के संबंध में नया परिपत्र जारी किया गया है। इस परिपत्र के माध्यम से पूर्व में जारी समस्त दिशा-निर्देशों को अतिक्रमित करते हुए विकास अधिकारी के रिक्त पद का अतिरिक्त कार्यभार वरियताक्रम में दिए जाने के निर्देश प्रदान किए गए हैं।
अतिरिक्त कार्यभार व्यवस्था का वरियताक्रम
पंचायत समिति कार्यालय में पदस्थापित नियमित सहायक अभियंता।
पंचायत समिति कार्यालय में पदस्थापित अतिरिक्त विकास अधिकारी।
इसके अतिरिक्त, प्रशासनिक रूप से उपखंड अधिकारी अथवा निकटतम पंचायत समिति में कार्यरत नियमित विकास अधिकारी को अतिरिक्त कार्यभार दिए जाने का निर्णय जिला कलेक्टर के स्तर से लिया जा सकता है।
पंचायत समिति की निधि से संदाय के लिए सभी आदेश एवं चैक पर हस्ताक्षर करने हेतु विभागीय परिपत्र क्रमांक एफ 2(1)पराजिव/आ.वि.अ./वि.अ./2010/993 दिनांक 03.05.2010 के अनुसार अग्रिम कार्यवाही संपादित की जाए। उक्त परिपत्र की अक्षरशः पालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
जारीकर्ता: डॉ. जोगाराम, शासन सचिव एवं आयुक्त (RajKaj Ref No.: 21456496)
ग्राम स्तर पर प्रत्येक माह के प्रथम मंगलवार को जनसुनवाई के संबंध में दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा जनसुनवाई व्यवस्था
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा माननीय पंचायती राज मंत्री महोदय की दिनांक 17.03.2026 को आयोजित बैठक में प्रदत्त निर्देशों की पालना के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
ग्राम स्तर पर जनसुनवाई: प्रत्येक माह के प्रथम मंगलवार को ग्राम स्तर पर नियमित रूप से जनसुनवाई का आयोजन किया जाएगा।
गायों का चयन: प्रत्येक ग्राम पंचायत में जनसुनवाई हेतु सबसे कम जनसंख्या वाले ग्राम का सर्वप्रथम चयन किया जाए।
अधिकारियों की मॉनीटरिंग: मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) द्वारा 2 माह में कम से कम एक बार तथा खण्ड विकास अधिकारी (BDO) द्वारा माह में कम से कम एक बार आवश्यक रूप से जन-समस्याओं के समाधान की मॉनीटरिंग सुनिश्चित की जाएगी।
जारीकर्ता: डॉ. जोगा राम, शासन सचिव एवं आयुक्त, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
राजस्थान पंचायती राज संस्थाओं के जनप्रतिनिधियों (सरपंच, वार्ड पंच, प्रधान व जिला प्रमुख) के मानदेय एवं बैठक भत्तों की वर्षवार दरें
राजस्थान पंचायती राज संस्थाओं के मानदेय एवं बैठक भत्ते
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा जारी विभिन्न अधिसूचनाओं के अनुसार पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों (जिला प्रमुख, प्रधान, सरपंच एवं वार्ड सदस्यों) के मानदेय और बैठक भत्तों में वर्षवार संशोधन किए गए हैं। इस पोस्ट में वर्ष 2013 से 2025 तक के मानदेय और भत्तों का विवरण दिया गया है।
जिला परिषद
वर्ष
जिला प्रमुख मानदेय प्रतिमाह
जिला परिषद सदस्य बैठक भत्ता
2013
₹9,000
₹500
2017
₹10,000
₹500
2022
₹12,000
₹600
2023
₹13,800
₹690
2024
₹15,180
₹690
2025
₹16,698
₹690
पंचायत समिति
वर्ष
प्रधान मानदेय प्रतिमाह
पंचायत समिति सदस्य बैठक भत्ता
2013
₹6,000
₹350
2017
₹7,000
₹350
2022
₹8,400
₹420
2023
₹9,660
₹483
2024
₹10,626
₹483
2025
₹11,689
₹483
ग्राम पंचायत
वर्ष
सरपंच मानदेय प्रतिमाह
वार्ड पंच बैठक भत्ता
2013
₹3,500
₹200
2017
₹4,000
₹200
2022
₹4,800
₹240
2023
₹5,520
₹276
2024
₹6,072
₹276
2025
₹6,679
₹276
माननीय प्रधानमंत्री महोदय की उपस्थिति में 28.02.2026 को आयोजित होने वाले राज्य स्तरीय समारोह के सीधे प्रसारण हेतु व्यवस्था के संबंध में
राज्य स्तरीय समारोह के सीधे प्रसारण हेतु दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी पत्र क्रमांक एफ 165(7)ले.ब./परावि/एसएफसी-7/2025-26/ के माध्यम से दिनांक 28.02.2026 को अजमेर में माननीय प्रधानमंत्री महोदय की उपस्थिति में आयोजित होने वाले राज्य स्तरीय कार्यक्रम के लाइव प्रसारण को ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर दिखाने हेतु व्यवस्था के संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु एवं वित्तीय स्वीकृति
दिनांक 28.02.2026 को अजमेर में होने वाले कार्यक्रम का लाइव प्रसारण जिला, ब्लॉक व ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर आयोजित किया जाना है।
इस कार्यक्रम के सीधे प्रसारण को ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर देखने हेतु समुचित व्यवस्था (जैसे टीवी, स्क्रीन, एलईडी व्यवस्था, फर्नीचर, टेंट, पेयजल व बैठक व्यवस्था) सुनिश्चित की जानी है।
षष्ठ राज्य वित्त आयोग के अंतर्गत पंचायती राज संस्थाओं को देय अनुदान राशि के उपयोग हेतु विभाग के पत्रांक 347 राजकाज क्रमांक 13247621 दिनांक 28.01.2025 द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के बिंदु संख्या-(अ)(3)(xiii) के प्रावधानों के अंतर्गत यह सहमति दी गई है।
प्रत्येक ग्राम पंचायत द्वारा इस प्रयोजन हेतु अधिकतम राशि 10,000/- रुपये तक का व्यय/उपयोग षष्ठ राज्य वित्त आयोग के अंतर्गत उपलब्ध अनुदान राशि से करने की सहमति प्रदान की जाती है।
यह सहमति वित्त विभाग की आई.डी. संख्या 332600355 दिनांक 26.02.2026 द्वारा अनुमोदित है।
जारीकर्ता: (डॉ. जोगा राम), शासन सचिव एवं आयुक्त, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
प्रधानमंत्री आवास योजना - ग्रामीण: ग्राम सभा सत्यापन एवं अपात्रता प्रमाण पत्र प्रारूप
प्रधानमंत्री आवास योजना - ग्रामीण (PMAY-G) सत्यापन प्रमाण पत्र
कार्यालय ग्राम पंचायत, पंचायत समिति बाड़मेर ग्रामीण, जिला - बाड़मेर के अंतर्गत प्रधानमंत्री आवास योजना - ग्रामीण के लाभार्थियों के भौतिक सत्यापन और ग्राम सभा प्रस्ताव के लिए निर्धारित प्रारूप जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
ग्राम सभा सत्यापन: प्रधानमंत्री आवास योजना - ग्रामीण की स्थायी वरीयता सूची में शामिल लाभार्थियों का ग्राम सभा द्वारा भौतिक सत्यापन एवं निर्धारित 14/16 मापदंडों के परीक्षण उपरांत पात्र या अपात्र घोषित किया जाता है।
अपात्रता के मुख्य कारण: विशेष ग्राम सभा में अपात्र पाए जाने वाले लाभार्थियों के लिए निर्धारित बिंदु (जैसे पूर्व में आवास योजना से लाभान्वित होना, सरकारी सेवा में होना, तिपहिया/चारपहिया वाहन होना, 50,000 से अधिक किसान क्रेडिट कार्ड लिमिट, 10,000 मासिक आय, आयकरदाता होना आदि) शामिल हैं।
प्रमाण पत्र विवरण: इसमें लाभार्थी का नाम, पिता का नाम, गांव का नाम, PMAY-G ID, PWL में वरीयता क्रमांक तथा सरपंच, ग्राम विकास अधिकारी (VDO) और विकास अधिकारी के हस्ताक्षर हेतु प्रावधान है।
दिनांक 22 जनवरी, 2026 को विशेष ग्राम सभा का आयोजन एवं गिरदावर सर्किल स्तर पर विशेष शिविरों के संबंध में निर्देश
विशेष ग्राम सभा और विशेष शिविर आयोजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज) और कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के दिशा-निर्देशों के क्रम में राज्य की प्रत्येक ग्राम पंचायत में दिनांक 22 जनवरी, 2026 को विशेष ग्राम सभा का आयोजन किया जाना है। इस विशेष ग्राम सभा का मुख्य उद्देश्य आगामी GRAM-2026 (Global Rajasthan Agri-Tech Meet-2026) और विभिन्न विभागीय अभियानों के प्रति जागरूकता पैदा करना है।
मुख्य बिंदु एवं दिशा-निर्देश:
ग्राम सभा आयोजन: दिनांक 22 जनवरी, 2026 को सभी ग्राम पंचायतों में विशेष ग्राम सभा आयोजित होगी जिसमें स्वामित्व कार्ड वितरण और अनुपयोगी विद्यालय भवन में नई स्वीकृत ग्राम पंचायत का कार्यालय प्रारंभ करने जैसे विषयों पर चर्चा व कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
गिरदावर सर्किल स्तर पर विशेष शिविर: बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर दिनांक 23 जनवरी, 2026 से इन शिविरों का शुभारंभ होगा। इसके पश्चात दिनांक 24, 25 एवं 31 जनवरी, 2026 तथा 01 एवं 05 से 09 फरवरी, 2026 (कुल 10 दिवस) तक प्रत्येक गिरदावर वृत्त (ILR) पर प्रातः 10:00 बजे से सायं 05:00 बजे तक विशेष शिविर लगाए जाएंगे।
भाग लेने वाले विभाग: इन शिविरों में कृषि, उद्यानिकी, कृषि विपणन, पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन, सहकारिता, जल संसाधन, ऊर्जा, उद्योग, आपदा प्रबंधन, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के क्षेत्रीय अधिकारी एवं कर्मचारी भाग लेंगे।
विभागीय गतिविधियां: शिविरों में सॉइल हेल्थ कार्ड वितरण, पीएम किसान निधि डीबीटी, फसल बीमा, किसान क्रेडिट कार्ड आवेदन, मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना, पीएम आवास योजना (PMAY-G) के तहत गृह प्रवेश, पीएम सूर्य घर योजना पंजीकरण और विभिन्न स्वरोजगार व अनुदान योजनाओं के आवेदन तैयार किए जाएंगे।
पंचायत समिति बाड़मेर, बाड़मेर ग्रामीण के पुनर्गठन/पुनर्शीलन/नवसृजन प्रारूप 2025
पंचायत समिति पुनर्गठन और नवसृजन 2025
यह दस्तावेज़ बाड़मेर जिले की पंचायत समिति बाड़मेर एवं बाड़मेर ग्रामीण के पुनर्गठन, पुनर्शीलन और नवसृजन से संबंधित प्रारूप 2025 (परिशिष्ट - ख) को प्रस्तुत करता है। इस दस्तावेज़ में ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन, उनकी वर्तमान स्थिति, प्रस्तावित ग्राम पंचायतों के नाम तथा वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार उनकी जनसंख्या का विवरण दिया गया है।
विवरण: विभिन्न ग्राम पंचायतों और उनके अंतर्गत आने वाले गांवों, ढाणियों की जनसंख्या (वर्ष 2011) एवं प्रस्तावित पुनर्गठन सूची का विस्तृत विवरण।
पंचायती राज संस्थाओं से जुड़े उपयोगकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों के लिए यह प्रारूप बाड़मेर क्षेत्र में प्रशासनिक सीमाओं और ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन की जानकारी हेतु महत्वपूर्ण है।
पंचायत समिति बाड़मेर ग्रामीण: ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन और पुनर्रचलन का प्रारूप 2025
ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन/पुनर्रचलन प्रारूप 2025
यह दस्तावेज़ पंचायत समिति बाड़मेर ग्रामीण के अंतर्गत ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन, पुनर्रचलन और नवसृजन से संबंधित प्रारूप 2025 को दर्शाता है। इसे ज़िला कलेक्टर, बाड़मेर (टीना डाबी) के अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत तैयार किया गया है।
मुख्य विवरण
क्षेत्र: पंचायत समिति बाड़मेर ग्रामीण
उद्देश्य: ग्राम पंचायतों और उनमें सम्मिलित गांवों की जनसंख्या और सीमाओं का पुनर्गठन व पुनर्रचलन
विविध ग्राम पंचायतें: जालीपा, लाखेताली, मूढ़ो की ढाणी, बांदरा, कपूरड़ी, रोहिली, भाड़खा, खारिया तला, आदर्श ढूंढा, आदर्श चवा, सरू पणजी, सरू चमनजी, सरली, बेरीवाला तला, गंगासरा, सांजटा, शिवकर, धने का तला, गालाबेरी, हाजाणियों की ढाणी (करली), मातासर, रावतसर, भुटिया, रामसर का कुआं, खुड़ासा, नोख और मंगने की ढाणी।
इस प्रारूप में प्रत्येक वर्तमान ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले गांवों, उनकी जनसंख्या तथा प्रस्तावित ग्राम पंचायतों में सम्मिलित गांवों के नए आँकड़ों को सारणीबद्ध किया गया है।
उदयपुर जिला ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन संबंधी शुद्धि पत्र
उदयपुर जिला ग्राम पंचायत एवं पंचायत समिति पुनर्गठन शुद्धि पत्र
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा आदेश क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/894, दिनांक 28-12-2025 के माध्यम से उदयपुर जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन से संबंधित पूर्व में जारी अधिसूचना में लिपकीय त्रुटियों के सुधार हेतु शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु एवं विवरण
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
दिनांक: 28-12-2025
संबंधित जिला: उदयपुर
ग्राम पंचायतों हेतु संशोधन: सायरा पंचायत समिति के अंतर्गत पूर्व प्रकाशित विवरण 'भानपुर' के स्थान पर कॉलम 7 के अनुसार 'भानपुरा' पढ़ा जाए।
पंचायत समितियों हेतु संशोधन: कुराबड और गिरवा पंचायत समितियों के अंतर्गत पूर्व प्रकाशित विवरण (जैसे 'मामादेव' और 'साठपुर मीणा') से संबंधित प्रविष्टियों में संशोधन करते हुए कुछ प्रविष्टियों को विलोपित किया गया है तथा अन्य सुधार किए गए हैं।
यह शुद्धि पत्र प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात पूर्व में प्रकाशित अधिसूचनाओं में हुई लिपकीय त्रुटियों को सुधारने के लिए जारी किया गया है।
जिला टोंक की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन बाबत शुद्धि पत्र
जिला टोंक ग्राम पंचायत एवं पंचायत समिति पुनर्गठन शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जिला टोंक की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन से संबंधित पूर्व में जारी अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटियों के संशोधन हेतु शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य विवरण:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
क्रमांक: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव/2024/893
दिनांक: 28-12-2025
संबंधित पूर्व अधिसूचनाएं: क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव/2024/807 दिनांक 20.11.2025 एवं संख्या एफ.15(39)पंव/पंचायत समिति गठन/2025/847 दिनांक 21.11.2025
इस शुद्धि पत्र के माध्यम से टोंक, निवाई, टोडारायसिंह और उनियारा पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों तथा पंचायत समितियों के विवरण में आवश्यक संशोधन किए गए हैं। विस्तृत विवरण के लिए संबंधित आदेश का अवलोकन करें।
राजस्थान सरकार: सीकर जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्संसीमाकन के संबंध में शुद्धि पत्र अधिसूचना (28-12-2025)
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा सीकर जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्संसीमाकन/नवसृजन के संबंध में एक महत्वपूर्ण शुद्धि पत्र जारी किया गया है। यह आदेश दिनांक 28-12-2025 को जारी किया गया है, जिसका पत्र क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/891 है।
अधिसूचना का मुख्य उद्देश्य
विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंव्रा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/845 दिनांक 20.11.2025 एवं संख्या एफ.15(39)पंव्रा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/846 दिनांक 21.11.2025 तथा दिनांक 21.11.2025 एवं 24.11.2025 को राजस्थान राजपत्र विशेषनांक भाग 6(ग) में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने की वजह से और प्राप्त आपत्तियों के निस्तारण पश्चात यह संशोधन/शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार।
जिला: सीकर।
जारी दिनांक: 28-12-2025।
संदर्भित आदेश क्रमांक: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/891।
विवरण: नीचे दिए गए कॉलम संख्या 6 में अंकित विवरण के स्थान पर कॉलम 7 में अंकित विवरण को सही समझ कर पढ़ा जाए, जिसके अंतर्गत ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों (जैसे नीमकाथाना, पाटन, खण्डेला, लक्ष्मणगढ़, दांताारामगढ़, फतेहपुर, नेछवा, श्रीमाधोपुर, अजीतगढ़, रामगढ़ शेखावाटी, पलसाना, खाचरियावास आदि) से संबंधित विवरणों में संशोधन किया गया है।
नोट: इस शुद्धि पत्र के माध्यम से संबंधित ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों के पूर्व प्रकाशित विवरण में आवश्यक संशोधन किए गए हैं जिन्हें राजपत्र के अनुसार पढ़ा जाना चाहिए।
श्री गंगानगर जिले के पुनर्गठन और परिसीमन से संबंधित शुद्धि पत्र - आदेश दिनांक 28-12-2025
श्री गंगानगर जिला पुनर्गठन शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा श्री गंगानगर जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन से संबंधित अधिसूचना के संबंध में एक महत्वपूर्ण शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/786 दिनांक 20.11.2025 एवं संख्या एफ.15(39)पंव्रा/समिति गठन/2025/827 दिनांक 21.11.2025 के तहत श्री गंगानगर जिले की ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्रसीमांकन के संबंध में राजपत्र में प्रकाशित विवरण में लिपिकीय त्रुटि व प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात यह शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों हेतु जारी तालिकाओं में पूर्व प्रकाशित विवरण के स्थान पर संशोधित विवरण को सही समझ कर पढ़ने के निर्देश दिए गए हैं।
सूरतगढ़, सादुलशहर, रायसिंहनगर, घड़साना, अनूपगढ़ और राजियासर आदि क्षेत्रों से संबंधित प्रविष्टियों में सुधार किया गया है।
विस्तृत विवरण और संशोधित प्रविष्टियों की जानकारी के लिए मूल पीडीएफ दस्तावेज़ का अवलोकन करें।
राजस्व ग्राम और पंचायत समिति पुनर्गठन शुद्धि पत्र - सिरोही जिला
राजस्थान सरकार ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), जयपुर द्वारा दिनांक 28-12-2025 को एक शुद्धि पत्र (कमांक: एफ.15(39)पंव/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/901) जारी किया गया है। यह शुद्धि पत्र विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंव/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/846 दिनांक 21.11.2025 तथा दिनांक 24.11.2025 को राजस्थान राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटियों को दुरुस्त करने और प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण के पश्चात जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
जिला: सिरोही
अधिसूचना दिनांक: 28-12-2025
शासन सचिव: डॉ. जोगा राम (राज्यपाल की आज्ञा से)
इस शुद्धि पत्र के माध्यम से सिरोही जिले की पुनर्गठित, पुनर्जीवित और नवसृजित पंचायत समितियों तथा उनमें सम्मिलित ग्राम पंचायतों के विवरण में संशोधन किया गया है। अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात उस जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो अनुसूची के स्तंभ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी।
जिला फलोदी की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सーीमौन हेतु शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा आदेश क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/886, दिनांक 28-12-2025 के तहत जिला फलोदी की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्ससीमांकन/नवसृजन के संबंध में शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
यह शुद्धि पत्र पूर्व में जारी विभागीय अधिसूचनाओं (संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/800 दिनांक 20.11.2025 एवं 840 दिनांक 21.11.2025) में लिपिकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने के कारण एवं प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार।
संबंधित जिला: फलोदी।
आदेश क्रमांक व दिनांक: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/886, दिनांक 28-12-2025।
विवरण: ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों हेतु राजपत्र में प्रकाशित विवरण में कॉलम संख्या 6 के स्थान पर कॉलम संख्या 7 में अंकित विवरण को सही पढ़ा जाए।
विभिन्न पंचायत समितियों जैसे घटियाली, बाप, फलोदी, आऊ, देचू, लोहावट, बापिणी आदि के अंतर्गत आने वाले ग्रामों और क्षेत्रों के नामों में आवश्यक संशोधन किए गए हैं तथा कुछ प्रविष्टियाँ विलोपित की गई हैं।
अधिक जानकारी एवं विस्तृत विवरण के लिए आधिकारिक राजपत्र या संबंधित विभाग के आदेश का अवलोकन करें।
कोटपूतली-बहरोड़ जिला: ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनःसीमांठन बाबत शुद्धि पत्र अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार, जयपुर द्वारा क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवै/2024/883 दिनांक 29-12-2025 के तहत एक महत्वपूर्ण शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
अधिसूचना का मुख्य उद्देश्य एवं विवरण
विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवै/2024/797 दिनांक 20.11.2025 एवं संख्या एफ.15(39)विधि/पंचायत समिति गठन/2025/837 दिनांक 21.11.2025 तथा जिला कोटपूतली-बहरोड़ की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनःसीमांठन/नवसृजन बाबत दिनांक 21.11.2025 एवं 24.11.2025 को राजस्थान राजपत्र विशेषनांक भाग 6(ग) में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने की वजह से व प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात यह संशोधन/शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु
संबंधित जिला: कोटपूतली-बहरोड़
प्रभावित क्षेत्र: ग्राम पंचायतें एवं पंचायत समितियां
जारीकर्ता: डॉ. जोगा राम, शासन सचिव, राज्यपाल की आज्ञा से
नोट: नीचे दिए गए कॉलम संख्या 6 में अंकित विवरण के स्थान पर कॉलम 7 में अंकित विवरण को सही समझ कर पढ़ा जाए, जैसा कि मूल अधिसूचना एवं संलग्न तालिकाओं में दर्शाया गया है।
राजस्थान सरकार - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग: जिला कोटा के पुनर्गठन संबंधशुद्धि पत्र
अधिसूचना एवं संशोधन विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/882 दिनांक 28-12-2025 के माध्यम से जिला कोटा की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन के संबंध में पूर्व में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटि के सुधार हेतु शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
आदेश क्रमांक व दिनांक: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/882, दिनांक 28-12-2025।
विषय: जिला कोटा की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन बाबत पूर्व में प्रकाशित राजपत्र अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटियों का संशोधन।
प्रभावित क्षेत्र: ग्राम पंचायतें (इटावा, खैराबाद, सुल्तानपुर) एवं पंचायत समितियां (खैराबाद)।
उक्त शुद्धि पत्र के अनुसार कॉलम संख्या 6 में अंकित पूर्व प्रकाशित विवरण के स्थान पर कॉलम संख्या 7 में अंकित विवरण को सही समझा व पढ़ा जाए।
जिला जोधपुर की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन संबंधी शुद्धि पत्र आदेश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा अधिसूचना
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा जिला जोधपुर की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्सीमांकन और नवसंयोजन के संबंध में एक महत्वपूर्ण शुद्धि पत्र जारी किया गया है। यह आदेश दिनांक 28-12-2025 को जारी किया गया है, जिसका पत्र क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव/2024/879 है।
आदेश का मुख्य उद्देश्य
विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव/पंचायत समिति गठन/2025/833 दिनांक 21.11.2025 एवं अन्य पूर्व प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटियों के कारण हुए गलत प्रकाशन और प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण के पश्चात इस शुद्धि पत्र के माध्यम से विवरणों को संशोधित किया गया है।
मुख्य विवरण एवं निर्देश
ग्राम पंचायतों हेतु संशोधन: तिंवरी, बालेसर, ओसियां, बावड़ी, लूणी, मण्डोर, शेरगढ़, सेखाला, चामू, भोपालगढ़, बिलाड़ा और पीपाड़ शहर आदि पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों के विवरण, नाम, और कॉलम की प्रविष्टियों में सुधार किया गया है।
पंचायत समितियों हेतु संशोधन: बावड़ी, हतुण्डी, लूणी, बिलाड़ा, कापरड़ा, भोपालगढ़, पीपाड़ शहर, उम्मेदनगर और झंवर मुख्यालय पाल रोड से संबंधित पंचायत समिति क्षेत्रों के विवरणों को संशोधित किया गया है।
निर्देश: संबंधित तालिकाओं में कॉलम 6 के स्थान पर कॉलम 7 में अंकित विवरण को सही समझ कर पढ़ा जाए।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है तथा इसकी प्रतियां संबंधित सभी उच्च अधिकारियों, जिला कलेक्टरों, जिला परिषदों और निर्वाचन आयोग को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रेषित की गई हैं।
झालावाड़ जिला ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन संबंधी शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंचा/2024/877 दिनांक 28-12-2025 के माध्यम से जिला झालावाड़ की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन के संबंध में शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु
मूल अधिसूचना: विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंचा/2024/791 दिनांक 20.11.2025 एवं दिनांक 21.11.2025 को राजस्थान राजपत्र विशेषांक भाग 6(ग) में प्रकाशित हुई थी।
शुद्धि का कारण: पूर्व प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने की वजह से व प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात यह संशोधन किया गया है।
संशोधित विवरण: पिड़ावा मुख्यालय सुनेल पंचायत समिति के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों के विवरण में कॉलम संख्या 6 के स्थान पर कॉलम संख्या 7 में अंकित विवरण को सही समझा जाए।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग - जालोर जिला पुनर्गठन संशोधन शुद्धि पत्र
अधिसूचना विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा आदेश क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवारा/2024/876, दिनांक 28-12-2025 के तहत जालोर जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन के संबंध में शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु
संदर्भित विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
आदेश दिनांक: 28-12-2025।
मूल अधिसूचनाएं: विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पुनर्गठन/विधि/पंवारा/2025/790 दिनांक 20.11.2025 एवं संख्या एफ.15(39)पुनर्गठन/विधि/पंवारा/2025/831 दिनांक 21.11.2025।
कारण: राजस्थान राजपत्र विशेषांक भाग 6(ग) दिनांक 21.11.2025 एवं 24.11.2025 में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने की वजह से और प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात यह संशोधन शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
प्रभावित क्षेत्र: जालोर जिले के अंतर्गत आने वाली विभिन्न ग्राम पंचायतें और पंचायत समितियां (जैसे आहोर, भीनमाल, रानीवाड़ा, चितलवाना, सांचौर, जालोर, भाद्रजून, जसवंतपुरा, सरनाऊ, झाब)।
विस्तृत विवरण के लिए संलग्न आधिकारिक दस्तावेज देखें।
जयपुर जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन संबंधी शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जयपुर जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन के संबंध में दिनांक 28-12-2025 को शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य विवरण:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
क्रमांक: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/ंपरा/2024/874
दिनांक: 28-12-2025
पार्श्वभूमि: पूर्व में जारी विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/ंपरा/2024/788 दिनांक 20.11.2025 एवं संख्या एफ.15(39)ंपरा/पेंचायत समिति गठन/2025/829 दिनांक 21.11.2025 में लिपकीय त्रुटि/गलत प्रकाशन होने की वजह से तथा प्राप्त आवेदनों के निस्तारण पश्चात् यह शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
विशेष निर्देश: नीचे दिए गए कॉलम संख्या 6 में अंकित विवरण के स्थान पर कॉलम 7 में अंकित विवरण को सही समझ कर पढ़ा जाए। इसमें फागी, चाकसू, कोटखावदा, जोबनेर, गोविन्दगढ़, शाहपुरा, माधोराजपुरा, किशनगढ़ रेनवाल, आंधी, जमवारामगढ़, दूदू, सांभरलेक, चौमूं, तूंगा, बस्सी आदि पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के विवरण में संशोधन किया गया है।
धौलपुर जिले के ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन बाबत शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), जयपुर द्वारा जारी अधिसूचना
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा धौलपुर जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन के संबंध में दिनांक 28-12-2025 को शुद्धि पत्र जारी किया गया है। इसका आदेश क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंचा/2024/869 है।
यह शुद्धि पत्र पूर्व में राजस्थान राजपत्र विशेष अंक भाग 6(ग) में प्रकाशित अधिसूचनाओं (क्रमांक एफ.15(39)पुनर्गठन/विधि/पंचा/2024/783 दिनांक 20.11.2025 एवं संख्या एफ.15(39)पुनर्गठन/विधि/पंचा/2025/824 दिनांक 21.11.2025) में लिपिकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने की वजह से और प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण के पश्चात जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
संशोधन का उद्देश्य: राजपत्र में हुए मुद्रण या लिपिकीय त्रुटियों को सुधारना और प्राप्त अभ्यावेदनों का निस्तारण करना।
प्रभावित क्षेत्र: धौलपुर जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतें और पंचायत समितियां (जैसे राजाखेड़ा, सैपऊ, सरमथुरा, बसेड़ी, बाड़ी आदि)।
निर्देश: कॉलम 6 में अंकित विवरण के स्थान पर कॉलम 7 में अंकित विवरण को सही समझा पढ़ा जाए।
जिला डीग में ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन संबंधी शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), जयपुर द्वारा दिनांक 28-12-2025 को एक शुद्धि पत्र (क्रमांक: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/868) जारी किया गया है। यह आदेश जिला डीग की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन के संबंध में पूर्व में जारी अधिसूचनाओं में लिपकीय त्रुटिवश हुए गलत प्रकाशन को सुधारने के लिए जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
आदेश दिनांक: 28-12-2025।
विषय: जिला डीग की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन से संबंधित पूर्व अधिसूचनाओं में संशोधन।
विवरण: पूर्व प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपकीय त्रुटियों के कारण, प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात अब कॉलम संख्या 6 में अंकित विवरण के स्थान पर कॉलम संख्या 7 में अंकित विवरण को सही पढ़ा जाएगा।
यह संशोधन ग्राम पंचायतों तथा पंचायत समितियों दोनों के लिए जारी सूचियों पर लागू होता है।
संबंधित उपयोगकर्ता और अधिकारी विस्तृत जानकारी के लिए मूल अधिसूचना देख सकते हैं।
राजस्थान सरकार: जिला चूरू की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन संबंधी शुद्धि पत्र
जिला चूरू ग्राम पंचायत एवं पंचायत समिति पुनर्गठन शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा आदेश क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/866 दिनांक 28-12-2025 के तहत चूरू जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन के संबंध में शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
यह शुद्धि पत्र विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंव्रा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/821 दिनांक 21.11.2025 एवं अन्य पूर्व प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटियों के कारण गलत प्रकाशन होने तथा प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण के पश्चात जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
संबंधित विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
आदेश दिनांक: 28-12-2025
विषय: जिला चूरू की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन से संबंधित शुद्धि पत्र
कवर किए गए क्षेत्र: चूरू, सुजानगढ़, सरदारशहर, राजगढ़, सिद्धमुख, भादरा और चांदगोठी (मुख्यालय राजगढ़) आदि पंचायत समितियां।
दस्तावेज में दी गई तालिकाओं के अनुसार ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों के विवरण में कॉलम 6 के स्थान पर कॉलम 7 में अंकित विवरण को सही समझा जाए।
राजस्थान सरकार - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा चित्तौड़गढ़ जिले के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन के संबंध में शुद्धि पत्र
ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन संबंधी शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा आदेश क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/865, दिनांक 28-12-2025 के तहत चित्तौड़गढ़ जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन के संबंध में पूर्व में जारी अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटियों एवं प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण के पश्चात संशोधन शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
पत्र क्रमांक: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/865
दिनांक: 28-12-2025
संबंधित जिला: चित्तौड़गढ़
विवरण: पूर्व प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने की वजह से और प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण के बाद ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों (जैसे गंगरार, चित्तौड़गढ़, बूँसू, भदेसर, कपासन आदि) से संबंधित विवरणों में संशोधन, नाम सुधार तथा विलोपन किया गया है।
संसोधित विवरण के अनुसार ही संबंधित प्रविष्टियों को सही समझा और पढ़ा जाए।
बूंदी जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन संबंधी संशोधन शुद्धि पत्र
अधिसूचना विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव/2024/864 दिनांक 28-12-2025 के माध्यम से जिला बूंदी की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन के संबंध में पूर्व में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटियों के सुधार हेतु शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु
यह शुद्धि पत्र निम्नलिखित विभागीय अधिसूचनाओं में संशोधन के लिए है:
अधिसूचना क्रमांक एफ.15(39)पंव/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/818 दिनांक 20.11.2025
अधिसूचना क्रमांक एफ.15(39)पंव/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/819 दिनांक 21.11.2025
राजस्थान राजपत्र विशेष अंक भाग 6(ग) दिनांक 21.11.2025 एवं 24.11.2025 में प्रकाशित विवरण
प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण और लिपिकीय त्रुटियों के कारण ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों (जैसे बूंदी, हिण्डोली, केशोरायपाटन, नैनवां, तालेड़ा, खटकड़ और लाखेरी) से संबंधित विवरणों में संशोधन किया गया है, जिसके तहत कॉलम संख्या 6 के स्थान पर कॉलम संख्या 7 के विवरण को सही पढ़ा जाए।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग - Baran Gram Panchayat & Panchayat Samiti Correction Notification
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार
यह अधिसूचना ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा जिला बारां की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसर्जन के संबंध में पूर्व में जारी अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटि सुधार हेतु जारी की गई शुद्धि पत्र है।
प्रमुख बिंदु:
पूर्व में जारी विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंव्रा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/813 दिनांक 20.11.2025 एवं अन्य संबंधित राजपत्र प्रकाशनों में हुई लिपिकीय त्रुटियों का निस्तारण किया गया है।
अन्ता, अट्रू, छबड़ा, छीपाबड़ोद पंचायत समितियों के अंतर्गत ग्राम पंचायतों के विवरण में संशोधन किया गया है।
नाहरगढ़ पंचायत समिति के अंतर्गत भी विवरण में संशोधन किया गया है।
संशोधित विवरण के अनुसार संबंधित कॉलम में पूर्व प्रकाशित विवरण के स्थान पर अद्यतन विवरण पढ़ा जाए।
बांसवाड़ा जिला ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन संबंधी शुद्धि पत्र आदेश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग राजस्थान सरकार अधिसूचना
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंचा/2024/859, दिनांक 28-12-2025 के तहत बांसवाड़ा जिले के ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन बाबत जारी पूर्व अधिसूचनाओं में लिपकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने के कारण यह शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार।
दिनांक: 28-12-2025।
संदर्भ आदेश: विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पुनर्गठन/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/812 दिनांक 21.11.2025 एवं जिला बांसवाड़ा की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन बाबत दिनांक 21.11.2025 व 24.11.2025 के राजस्थान राजपत्र विशेषांक भाग 6(ग)।
विवरण: राजपत्र में हुई लिपकीय त्रुटियों और प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों हेतु कॉलम संख्या 6 में अंकित विवरण के स्थान पर कॉलम संख्या 7 में अंकित विवरण को सही समझा कर पढ़ने हेतु निर्देशित किया गया है।
संबंधित पंचायत समितियों में बांसवाड़ा, तलवाड़ा, छोटी सरवन, गढ़ी, कुशलगढ़, घाटोल और सरेड़ी बड़ी के विभिन्न विवरणों में संशोधन किया गया है।
राजस्थान सरकार - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग: जिला बालोतरा की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन बाबत शुद्धि पत्र (अधिसूचना क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/856)
अधिसूचना एवं शुद्धि पत्र का विवरण
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), जयपुर द्वारा दिनांक 28.12.2025 को एक महत्वपूर्ण शुद्धि पत्र (अधिसूचना क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/856) जारी किया गया है। यह आदेश जिला बालोतरा की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्सीमांकन और नवसृजन से संबंधित है।
मुख्य बिंदु
संदर्भित पूर्व अधिसूचनाएं: विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/770 दिनांक 20.11.2025 एवं संख्या एफ.15(39)पुनर्गठन/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/811 दिनांक 21.11.2025 एवं 24.11.2025।
संशोधन का कारण: राजस्थान राजपत्र विशेषांक भाग 6(ग) में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने के कारण एवं प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात यह संशोधन किया गया है।
संशोधित विवरण: ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों हेतु जारी सूचियों में कॉलम 6 के स्थान पर कॉलम 7 में अंकित विवरण को सही समझा पढ़ने के निर्देश दिए गए हैं, जिसमें सिवाना, गिड़ा, कल्याणपुर, पायला कलां, बालोतरा, समदड़ी, बायतु एवं पाटोदी से संबंधित संशोधन शामिल हैं।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगाराम, शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है तथा संबंधित अधिकारियों को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित किया गया है।
राजस्थान सरकार: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग - जिला अलवर के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन हेतु शुद्धि पत्र
अधिसूचना एवं शुद्धि पत्र विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/855 दिनांक 28.12.2025 के माध्यम से जिला अलवर की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्सीमांकन और नवसृजन से संबंधित पूर्व में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटि के कारण गलत प्रकाशन को संशोधित किया गया है।
मुख्य बिंदु
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
आदेश क्रमांक: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/855
दिनांक: 28/12/2025
जिला: अलवर
उद्देश्य: पूर्व में दिनांक 21.11.2025 एवं 26.11.2025 को राजस्थान राजपत्र में प्रकाशित विवरणों में लिपिकीय त्रुटियों का सुधार।
इस शुद्धि पत्र के तहत ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों (जैसे रामगढ़, कठूमर, रैणी, भोनखर, खेड़ली-सोंखर आदि) से संबंधित कॉलम के विवरणों को संशोधित किया गया है, जिसके तहत पूर्व प्रकाशित विवरण के स्थान पर सही विवरण को पढ़ा जाए।
राजस्थान सरकार - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग: जिला अजमेर शुद्धि पत्र
ग्राम पंचायत पुनर्गठन संशोधन शुद्धि पत्र - जिला अजमेर
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/854 दिनांक 28.12.2025 के संदर्भ में जिला अजमेर की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन से संबंधित पूर्व में प्रकाशित अधिसूचना में लिपकीय त्रुटि सुधार हेतु शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
अधिसूचना क्रमांक एवं दिनांक: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/854, दिनांक 28.12.2025
संबंधित जिला: अजमेर
संशोधन विवरण: पंचायत समिति सिलोरा के अंतर्गत पूर्व में प्रकाशित विवरण (कॉलम 6) में अंकित 'चुन्दड़ी' के स्थान पर संशोधित विवरण (कॉलम 7) में 'बड़गांव' पढ़ा जाए।
राजस्व ग्राम और पंचायत समिति पुनर्गठन शुद्धि पत्र - सिरोही जिला
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 28-12-2025 को एक शुद्धि पत्र जारी किया गया है। इसका पत्र क्रमांक एफ.15(39)पंव/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/901 है।
मुख्य विवरण
यह शुद्धि पत्र विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंव/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/846 दिनांक 21.11.2025 और दिनांक 24.11.2025 को राजस्थान राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटियों को दुरुस्त करने तथा प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण के पश्चात जारी किया गया है।
प्रमुख बातें
जिला: सिरोही
पुनर्गठित पंचायत समितियां: सिरोही और कालन्द्री
विद्यमान पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात, पुरानी पंचायत समितियां अस्तित्व में नहीं रहेंगी और नई पुनर्गठित पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
जोधपुर जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन आदेश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/899, दिनांक 28-12-2025 के माध्यम से जोधपुर जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन की जानकारी दी गई है।
राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत शक्तियों का प्रयोग करते हुए, जोधपुर जिले की निम्नलिखित पंचायत समितियों का पुनर्गठन/पुनर्रसीमांकन/नवसृजन किया गया है:
शेरगढ़
चाबा
सेखाला
चामू
बालेसर
आगोलाई (नवसृजित/पुनर्गठित)
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना की अनुसूची के स्तम्भ 4 में वर्णित पंचायत समितियां उसी नाम से जानी जाएंगी।
उक्त पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात, जिले की विद्यमान पंचायत समितियां जो अनुसूची के स्तम्भ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे अनुसूची के स्तम्भ 4 में वर्णित पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगाराम, शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है।
जैसलमेर जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन और संशोधन बाबत अधिसूचना
जैसलमेर जिला पंचायत समिति पुनर्गठन संशोधन आदेश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 28-12-2025 को एक अधिसूचना (क्रमांक: एफ.15(39)पंव/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/898) जारी की गई है। यह अधिसूचना विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंस/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/830 दिनांक 21.11.2025 और राजस्थान राजपत्र में 24.11.2025 को प्रकाशित सूचनाओं में लिपिकीय त्रुटियों को दुरुस्त करने तथा प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण के पश्चात संशोधन हेतु जारी की गई है।
मुख्य बिंदु:
प्रभावित जिला: जैसलमेर
संशोधन का उद्देश्य: पूर्व में जारी अधिसूचनाओं की लिपिकीय त्रुटियों का सुधार और प्राप्त अभ्यावेदनों का निस्तारण।
कार्यकाल: सूची के स्तम्भ 4 में वर्णित पंचायत समितियों के चुनावों के पश्चात, उस जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो स्तम्भ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी, जिससे नई पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
बीकानेर जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन बाबत शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार
आदेश क्रमांक: एफ.15(39)पंवरे/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/896 दिनांक: 24-12-2025
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा जारी इस शुद्धि पत्र के माध्यम से जिला बीकानेर की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्सीमांकन और नवसृजन से संबंधित पूर्व में जारी विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंवरे/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/818 दिनांक 21.11.2025 (जो राजस्थान राजपत्र विशेषांक भाग 6(ग) में 24.11.2025 को प्रकाशित हुई थी) की लिपिकीय त्रुटियों को दुरुस्त किया गया है।
मुख्य बिंदु:
प्रभावित क्षेत्र: बीकानेर जिले की पुनर्गठित, पुनर्सीमांकित और नवसृजित पंचायत समितियां जैसे कोलायत, बज्जू खालसा, हदां, और बीछनोक तथा उनमें सम्मिलित ग्राम पंचायतों का विवरण संशोधित किया गया है।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पंचायत समितियों के चुनावों के पश्चात् उस जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो अनुसूची के स्तंभ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से ही विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
भीलवाड़ा जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन के संबंध में शुद्धि पत्र अधिसूचना
अधिसूचना विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार, जयपुर द्वारा भीलवाड़ा जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन के संबंध में दिनांक 28-12-2025 को शुद्धि पत्र अधिसूचना (क्रमांक: एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/895) जारी की गई है।
मुख्य बिंदु
संदर्भित अधिसूचना: यह अधिसूचना विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/817 दिनांक 21.11.2025 तथा राजस्थान राजपत्र दिनांक 24.11.2025 में प्रकाशित त्रुटियों को दुरुस्त करने के लिए जारी की गई है।
आसींद पंचायत समिति: आसींद पंचायत समिति के अंतर्गत पुनर्गठित/नवसृजित पंचायत समिति का मुख्यालय आसींद रहेगा और इसमें बराणा, चोरेला, ब्राह्मणों की सेरी, दांतड़ा, डड़ावत, दौलतगढ़, जालरिया, जिन्द्रास, कांवलास, करजालिया, कटार, लाछुड़ा, मोड़ का निम्बाहेड़ा, नेगड़िया, पालड़ी, रघुनाथपुरा, रतनपुरा (ला), तिलोली, सुलवाड़ा, बामणी, पाण्डरू, जीवलिया, झालरा, राजपुरा, मालासेरी, रूपपुरा (ब) और बागमाली ग्राम पंचायतें सम्मिलित हैं।
बदनौर पंचायत समिति: बदनौर पंचायत समिति में मोटरास, आकड़सादा, जगपुरा, संग्रामगढ़ और जयनगर ग्राम पंचायतें सम्मिलित हैं।
हुरडा पंचायत समिति: हुरडा पंचायत समिति का मुख्यालय हुरडा रहेगा और इसमें हुरडा, कोटड़ी, आगूचा, बराठिया, भोजरास, रूपारेली, बड़ला, लाम्बा, कानिया, गागेड़ा, खेजड़ी, अंतली, जालमपुरा, तस्वारिया, सरेरी, गढवालों का खेड़ा, कंवलियास, जालखेड़ा, टोंकरवाड, भगवानपुरा, आपलियास, बागा का खेड़ा, परडोदास और सनोदिया ग्राम पंचायतें सम्मिलित हैं।
शम्भूगढ़ पंचायत समिति: शम्भूगढ़ पंचायत समिति का मुख्यालय शम्भूगढ़ रहेगा और इसके अंतर्गत शम्भूगढ़, आमेसर, बरसणी, गांगलास, ईरास, कालियास, रूपपुरा, मोतीलपुर, परासोली, जोधडास, दूलहेपुरा, रामुपरिया, धौली जेतुपुरा, मोटरास, आकड़सादा, जगपुरा, संग्रामगढ़, रायरा, जयनगर, बारणी, दांतड़ा, फलामादा, सोडार और उंखलिया ग्राम पंचायतें शामिल हैं।
राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. ओ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा यह अधिसूचना जारी की गई है।
दिनांक 24 दिसंबर, 2025 को विशेष ग्राम सभा का आयोजन - विकसित भारत - रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण): वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025 बाबत
विशेष ग्राम सभा आयोजन: दिनांक 24 दिसंबर, 2025
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश (क्रमांक: एफ.15(10)पंरावि/विधि/वि0ग्रा0सं0/2024/ईफाइल 22379) के अनुसार, राज्य की सभी ग्राम पंचायतों में 24 दिसंबर, 2025 को विशेष ग्राम सभा का आयोजन किया जाना है।
इस विशेष ग्राम सभा में 'विकसित भारत - रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण): वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025' (VB-G RAM G Act, 2025), विकसित भारत पर जागरूकता, रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन जैसे विषयों पर चर्चा कर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025 की मुख्य विशेषताएँ:
125 दिनों की रोजगार गारंटी: प्रत्येक ग्रामीण परिवार के वयस्क सदस्यों को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों की मजदूरी-रोजगार की वैधानिक गारंटी दी गई है।
बेरोजगारी भत्ता: मांग प्रस्तुत करने के पश्चात निर्धारित समय-सीमा के भीतर कार्य प्रदान न किए जाने पर बेरोजगारी भत्ता भुगतान का प्रावधान है।
समय पर मजदूरी भुगतान: मजदूरी में देरी होने पर प्रत्येक विलंबित दिन का मुआवजा मजदूरी के साथ दिया जाएगा।
ग्राम स्तर पर योजना निर्माण: कार्यों की योजना ग्राम सभा में ही तय की जाएगी और ग्राम पंचायत 'विकसित ग्राम पंचायत योजना' तैयार करेगी।
कार्य श्रेणियाँ: जल सुरक्षा और संरक्षण, ग्रामीण बुनियादी ढाँचा, आजीविका संवर्धन तथा जलवायु परिवर्तन से निपटने वाले कार्य शामिल किए गए हैं।
कृषि-मजदूरी समन्वय: बुवाई एवं कटाई के व्यस्ततम समय हेतु कुल मिलाकर 60 दिनों की अवधि अधिसूचित करने का प्रावधान, जिससे कृषि कार्य निर्बाध रूप से चल सकें।
प्रशासनिक मद में वृद्धि: प्रशासनिक मद की सीमा 6% से बढ़ाकर 9% कर दी गई है।
समस्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी (जिला परिषद) और विकास अधिकारी (पंचायत समिति) को निर्देशित किया गया है कि वे अपने जिले की सभी ग्राम पंचायतों में इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें।
महात्मा गांधी नरेगार्न्तगत व्यक्तिगत लाभ के कार्य “अपना खेत अपना काम” दिशा-निर्देश 2011
महात्मा गांधी नरेगार्न्तगत व्यक्तिगत लाभ के कार्य “अपना खेत अपना काम” दिशा-निर्देश 2011
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (अनुभाग-3, नरेगार्), राजस्थान सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत व्यक्तिगत लाभ के कार्य “अपना खेत अपना काम” के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। यह दस्तावेज दिनांक 27.05.2011 (क्रमांक एफ. 40 (35) ग्रावि/नरेगार्/व्यक्तिगत लाभ के काम/2011) को जारी किया गया था।
योजना का मुख्य उद्देश्य
ग्रामीण क्षेत्र में बस रहे परिवारों की आजीविका के साधनों में स्थायी सुधार किए जाने के उद्देश्य से इस योजना को प्रारंभ किया गया है ताकि किसी भी पात्र परिवार की भूमि अविकसित न रहे और सिंचाई एवं भूमि संसाधनों का समग्र विकास कर उनकी आजीविका में सुधार किया जा सके।
प्रथम चरण में प्राथमिकता एवं पात्रता
गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वाले बी.पी.एल. परिवार (जिनका नाम बीपीएल सूची 2002 में दर्ज हो)।
अनुसूचित जाति के परिवार।
अनुसूचित जनजाति के परिवार।
इन वर्गों के कार्यों के पूर्ण होने के पश्चात् सीमांत कृषक एवं तद्पश्चात् लघु कृषक।
स्वीकृत कार्य और वित्तीय सीमा
इस योजना के अंतर्गत भूमि सुधार, डिग्गी, टांका, खेत तलाई, जल भराव क्षेत्रों में पानी निकास नाली, वृक्षारोपण, बागवानी, कृषि वानिकी, जल संरक्षण कार्य एवं लघु सिंचाई जैसे कार्य करवाए जा सकते हैं।
प्रत्येक जॉब कार्ड धारी परिवार को 1.50 लाख रुपए तक की सीमा में व्यक्तिगत लाभ का अनुमत कार्य स्वीकृत किया जा सकता है।
सामग्री मद में अधिकतम व्यय सीमा 60,000/- रुपए निर्धारित है।
महात्मा गांधी नरेगा योजना - मेट निर्देशिका (दिसम्बर 2010)
महात्मा गांधी नरेगा योजना - मेट निर्देशिका
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, शासन सचिवालय, जयपुर, राजस्थान द्वारा दिसम्बर 2010 में प्रकाशित मेट निर्देशिका महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत मेटों, ग्राम पंचायत और क्षेत्र के अधिकारियों के लिए एक अत्यंत उपयोगी मार्गदर्शिका है।
दस्तावेज़ का मुख्य उद्देश्य
इस निर्देशिका का मुख्य उद्देश्य मेटों को ई-मस्टर रोल, मस्टररोल ट्रैकिंग, मेट द्वारा प्रतिदिन किए जाने वाले कार्य की माप, समूहवार मस्टररोल प्रपत्र भरने, और समयबद्ध तरीके से श्रमिकों के भुगतान की प्रक्रिया को सरल भाषा में समझाना है।
मुख्य बिंदु और विशेषताएँ
श्रमजीवियों के 10 अधिकार: राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून, 2005 के तहत श्रमिकों को 100 दिन के रोजगार की गारंटी, जॉब कार्ड, 15 दिनों के भीतर काम या बेरोजगारी भत्ता, न्यूनतम दैनिक मजदूरी, और कार्यस्थल पर सुविधाएँ पाने का अधिकार।
मेट के कर्तव्य एवं दायित्व: कार्यस्थल पर श्रमिकों को काम का आवंटन, प्रतिदिन माप करना, मस्टर रोल भरना, श्रमिकों को दैनिक मजदूरी की जानकारी देना और कार्यस्थल पर छाया, पानी, प्राथमिक उपचार जैसी सुविधाएँ सुनिश्चित करना।
ई-मस्टर रोल और ट्रैकिंग: पारदर्शी कार्यप्रणाली के लिए ई-मस्टर रोल का उपयोग, मस्टर रोल के विभिन्न भागों (क, ख, ग, घ) को भरने की विधि और समयानुसार ट्रैकिंग।
दैनिक मजदूरी गणना और श्रमिक कार्ड: श्रमिकों को उनके द्वारा प्रतिदिन अर्जित मजदूरी की जानकारी देने के लिए श्रमिक कार्ड (दैनिक मजदूरी गणना प्रपत्र) का उपयोग।
विभिन्न विभागीय आदेश: मजदूरी में अंतर, विलंब से भुगतान पर मुआवजे के प्रावधान और अधिनियम के उल्लंघन पर शास्ति से संबंधित आदेशों का संकलन।
सरपंच हेतु महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी योजना निर्देशिका वर्ष 2010
सरपंच हेतु महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी योजना निर्देशिका - वर्ष 2010
यह निर्देशिका ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, शासन सचिवालय, जयपुर द्वारा प्रकाशित की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य ग्राम पंचायतों के सरपंचों को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी अधिनियम (मनरेगा), 2005 के सफल क्रियान्वयन, प्रशासनिक पारदर्शिता, सामाजिक अंकेक्षण और वित्तीय अनुशासन के संबंध में मार्गदर्शन प्रदान करना है।
मुख्य बिंदु और प्रावधान
रोजगार का अधिकार: प्रत्येक पंजीकृत ग्रामीण परिवार को वित्तीय वर्ष में 100 दिन का अकुशल शारीरिक श्रम का गारण्टीशुदा रोजगार प्रदान किया जाता है। आवेदन के 15 दिवस के भीतर कार्य देना अनिवार्य है, अन्यथा बेरोजगारी भत्ता देय होता है।
पारदर्शिता और उत्तरदायित्व: सभी सूचनाओं को स्वैच्छिक रूप से जारी करना (Proactive Disclosure), कार्यस्थल बोर्ड लगवाना, दीवारों पर लेखन करना, और समयबद्ध मजदूरी भुगतान बैंक या पोस्ट ऑफिस के खातों के माध्यम से सुनिश्चित करना।
हरित राजस्थान योजना: राज्य में हरियाली बढ़ाने और सूखे के बचाव हेतु सघन वृक्षारोपण एवं हरित सड़क कार्यक्रम का संचालन।
भारत निर्माण राजीव गांधी सेवा केन्द्र: प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर 10 लाख रुपये की लागत से सेवा केन्द्र का निर्माण, जिसमें सूचना, शिक्षा और संचार की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।
रिकॉर्ड संधारण: रोकड़ बही, माप पुस्तिका (MB), स्टॉक रजिस्टर, और परिसंपत्ति एवं संचयी व्यय रजिस्टर का सही तरीके से संधारण।
महात्मा गांधी रोजगार गारण्टी स्थायी समिति: योजना के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु ग्राम पंचायत स्तर पर 5 सदस्यीय स्थायी समिति का गठन (अध्यक्ष: सरपंच, सदस्य: वार्ड पंच, कनिष्ठ अभियंता/तकनीकी सहायक, ग्राम सेवक एवं पदेन सचिव, ग्राम रोजगार सहायक)।
उदयपुर जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्सีमांकन और नवसृजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/848 (दिनांक नवंबर 21, 2025) के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए उदयपुर जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्सีमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिनीम और प्रावधान: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98, धारा-9, 10 एवं 101 के अंतर्गत जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार प्रस्तावों और आपत्तियों पर सुनवाई के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से यह पुनर्गठन किया गया है।
अधिकारिता: अनुसूची के स्तंभ 4 में यथानामित पंचायत समितियां स्तंभ 5 में वर्णित स्थानीय क्षेत्र व ग्राम पंचायतों पर अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात्, उस जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो अनुसूची के स्तंभ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी, जिससे नई पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
यह अधिसूचना राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी की गई है।
पाली जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन से संबंधित अधिसूचना
पाली जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए पाली जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन किया गया है। यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र (असाधारण) दिनांक 24 नवंबर 2025 में प्रकाशित की गई है।
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना संख्या एवं दिनांक: संख्या एफ.15(39)पंव/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/839, दिनांक नवंबर 21, 2025।
संबंधित अधिनियम: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-9, 10 एवं 101 तथा धारा-98।
प्रभावित क्षेत्र: पाली जिले की पंचायत समितियां (जैसे बगड़ी और मारवाड़ जंक्शन)।
कार्यान्वयन: जिला कलेक्टरों द्वारा प्रस्ताव तैयार करने, आपत्तियां आमंत्रित करने तथा राज्य सरकार के अनुमोदन के पश्चात यह पुनर्गठन किया गया है।
अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में यथावर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात उस जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो अनुसूची के स्तंभ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में वर्णित पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
कोटा जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन एवं नवसर्जन - राजस्थान राजपत्र अधिसूचना
कोटा जिले में पंचायत समिति पुनर्गठन और नवसर्जन की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए कोटा जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसर्जन के संबंध में अधिसूचना जारी की गई है।
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना संख्या एवं दिनांक: संख्या एफ.15(39)पंश/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/836, दिनांक नवम्बर 21, 2025 (राजस्थान राजपत्र असाधारण, 24 नवम्बर 2025)।
कार्रवाई का विवरण: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-9, 10 एवं 101 में वर्णित शक्तियों के तहत जिला कलेक्टर द्वारा प्रस्ताव तैयार कर, सार्वजनिक अवलोकन एवं आपत्तियां आमंत्रित करने के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से कोटा जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन किया गया है।
शामिल पंचायत समितियां: सूची के अनुसार खैराबाद एवं चेचट पंचायत समितियों और उनसे संबंधित ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन और पुनर्सीमांकन किया गया है।
कार्यकाल की स्थिति: सूची के स्तंभ संख्या 4 में वर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात उस जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो स्तंभ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से ही विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पंचायत समितियों का कार्यकाल आरंभ हो सके।
यह अधिसूचना राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी की गई है।
फलोदी जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन एवं नवसृजन - अधिसूचना 2025
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज (पंचायती राज विभाग) द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए फलोदी जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन एवं नवसृजन किया गया है। यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र में दिनांक 24 नवंबर 2025 को प्रकाशित की गई है (अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंव/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/840, दिनांक 21 नवंबर 2025)।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम का संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा 9, 10, 101 एवं 98 के प्रावधानों के अंतर्गत यह कार्रवाई की गई है।
पंचायत समितियों का पुनर्गठन: फलोदी जिले की विभिन्न पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन एवं नवसृजन किया गया है, जिसके तहत उनकी अनुसूचियों और शामिल ग्राम पंचायतों का विवरण निर्धारित किया गया है।
कार्यकाल और प्रभाव: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात, जिले की विद्यमान वे पंचायत जो स्तंभ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और उनका कार्य करना बंद हो जाएगा, जिससे नई पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
अधिक जानकारी और विस्तृत अनुसूची के लिए कृपया आधिकारिक राजस्थान राजपत्र, दिनांक 24 नवंबर 2025 का अवलोकन करें।
धौलपुर जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन और नवसृजन अधिसूचना
धौलपुर जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा धौलपुर जिले में पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रमांकित और नवसृजन के संबंध में अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र (असाधारण) दिनांक 24 नवम्बर 2025 में प्रकाशित की गई है।
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना संख्या: एफ.15(39)पंवरे/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/824 (दिनांक 21 नवम्बर 2025)
राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-9, 10 एवं 101 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग किया गया है।
धौलपुर जिले की पंचायत समितियों (जैसे बाड़ी, बसेड़ी, सरमथुरा) का पुनर्गठन/नवसृजन किया गया है तथा इसमें शामिल ग्राम पंचायतों की सूची निर्धारित की गई है।
अधिसूचना के अनुसार, संबंधित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात जिले की विद्यमान पंचायत समितियां कार्य करना बंद कर देंगी और नई पंचायत समितियों का कार्यकाल आरंभ होगा।
ब्यावर जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन और पुनर्रचना की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए ब्यावर जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रचना और नवसर्जन से संबंधित अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना दिनांक 21 नवंबर, 2025 (संख्या एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/815-) के तहत राजस्थान राजपत्र में प्रकाशित हुई है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम और संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-9 और 10 के प्रावधानों तथा विभागीय अधिसूचनाओं के अंतर्गत यह कार्रवाई की गई है।
पुनर्गठन का क्षेत्र: ब्यावर जिले की निम्नलिखित पंचायत समितियों (जैतारण, रायपुर, रास, जवाजा और नरबदखेड़ा) का पुनर्गठन/पुनर्रचना/नवसर्जन किया गया है।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात्, उस जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो स्तंभ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी, जिससे स्तंभ 4 में वर्णित पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
भरतपुर जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन और पुनर्रसीमांकरण अधिसूचना
अधिसूचना विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए भरतपुर जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकरण और नवसृजन से संबंधित अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र (अतिरिक्त) में 24 नवंबर 2025 को प्रकाशित हुई है, जिसके आदेश संख्या एफ.15(39)पंव/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/816 दिनांक 21 नवंबर 2025 हैं।
मुख्य बिंदु
अधिनियम का संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98, 9, 10 एवं 101 के अंतर्गत जिला कलेक्टर के माध्यम से प्रस्ताव तैयार कर आपत्तियां आमंत्रित करने के पश्चात यह कार्रवाई की गई है।
पंचायत समितियों का पुनर्गठन: भरतपुर जिले की पंचायत समितियों (जैसे रूपवास, उच्चैन और सेवर) का पुनर्गठन/पुनर्रसीमांकरण किया गया है।
कार्यकाल और अधिकारिता: अनुसूची में वर्णित नई पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात उस जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो अनुसूची में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी तथा नई पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
बांसवाड़ा जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन और पुनसीमांकन
बांसवाड़ा जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन एवं नवसृजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पांरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/812 (दिनांक नवंबर 21, 2025) के अंतर्गत बांसवाड़ा जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है। यह कार्रवाई राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 द्वारा प्रदत्त शक्तियों तथा धारा-9, 10 एवं 101 के प्रावधानों के तहत जिला कलेक्टर द्वारा तैयार प्रस्तावों और राज्य सरकार के अनुमोदन के पश्चात की गई है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम के तहत कार्रवाई: संबंधित जिला कलेक्टर को ग्राम पंचायत एवं पंचायत समिति के पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन हेतु प्रस्ताव तैयार करने, सार्वजनिक अवलोकन के लिए प्रसारित करने, आपत्तियां आमंत्रित करने तथा सुनवाई करने हेतु अधिकृत किया गया था।
अधिकारिता: अनुसूची के स्तम्भ 4 में वर्णित पुनर्गठित/नवसृजित पंचायत समितियां स्तम्भ 5 में वर्णित स्थानीय क्षेत्रों और ग्राम पंचायतों पर अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
विद्यमान समितियों की समाप्ति: अनुसूची के स्तम्भ 4 में वर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात, उस जिले की विद्यमान पंचायत समितियां (जो स्तम्भ 2 में वर्णित हैं) उस तारीख से अस्तित्व में नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी, जिससे नई पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
डीडवाना-कुचामन जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन और नवसृजन - राजस्थान राजपत्र अधिसूचना
डीडवाना-कुचामन जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/825, दिनांक नवम्बर 21, 2025 के अंतर्गत डीडवाना-कुचामन जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्सिर्माकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह आदेश जारी किया गया है।
क्षेत्र और समितियाँ: डीडवाना-कुचामन जिले के अंतर्गत आने वाली पंचायत समितियों और उनमें सम्मिलित ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन किया गया है जैसा कि राजपत्र की अनुसूची में वर्णित है।
प्रभावी तिथि: अनुसूची में वर्णित पंचायत समितियों के चुनावों के पश्चात उस जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो अनुसूची के स्तंभ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगे तथा नई पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
खैरथल-तिजारा जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्सिर्मांकन एवं नवसृजन से संबंधित अधिसूचना
खैरथल-तिजारा जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन और नवसृजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए खैरथल-तिजारा जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्सिर्मांकन एवं नवसृजन से संबंधित अधिसूचना संख्या एफ.15 (36) पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/835 दिनांक नवंबर 21, 2025 जारी की गई है। यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र (असाधारण) में नवंबर 24, 2025 को प्रकाशित हुई है।
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना क्रमांक और दिनांक: संख्या एफ.15 (36) पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/835, दिनांक नवंबर 21, 2025।
संबंधित जिला: खैरथल-तिजारा जिला।
कानूनी प्रावधान: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 द्वारा प्रदत्त शक्तियां तथा धारा-9, 10 एवं 101 के अंतर्गत जिला कलेक्टर द्वारा तैयार प्रस्तावों और आपत्तियों पर विचार करने के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से यह पुनर्गठन किया गया है।
कार्यान्वयन: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात, उक्त जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो अनुसूची के स्तंभ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी। इसी के साथ स्तंभ 4 में वर्णित पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है।
बारां जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंव/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/813- (दिनांक नवम्बर 21, 2025) के अंतर्गत, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए और धारा-9, 10 एवं 101 के अंतर्गत राज्य सरकार द्वारा बारां जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु एवं विवरण
संबंधित जिला: बारां
अधिसूचना दिनांक: नवम्बर 21, 2025
शासन सचिव: डॉ. जोगा राम (राज्यपाल की आज्ञा से)
जिला कलेक्टर्स द्वारा पूर्व में निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्रस्ताव तैयार किए गए, आपत्तियां आमंत्रित की गईं और उन पर सुनवाई के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से यह अंतिम अधिसूचना जारी की गई है।
पुनर्गठन से संबंधित मुख्य निर्देश
बारां जिले की पुनर्गठित, पुनर्रसीमांकित और नवसृजित पंचायत समितियां अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित नाम से जानी जाएंगी।
स्थानीय क्षेत्र जो इस प्रकार पुनर्गठित किए गए हैं, वे अनुसूची के स्तंभ 5 में वर्णित ग्राम पंचायतों को समाहित करेंगे।
इन पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात, पूर्ववर्ती पंचायत समितियां इस तिथि से कार्य करना बंद कर देंगी और नई पंचायत समितियों का कार्यकाल आरंभ होगा।
दौसा जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन और नवसर्जन - अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा दौसा जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रोमन और नवसर्जन के संबंध में महत्वपूर्ण अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना आदेश क्रमांक एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/822 दिनांक 21-11-2025 के तहत जारी की गई है।
मुख्य बिंदु:
राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए, राज्य सरकार द्वारा दौसा जिले की विभिन्न पंचायत समितियों का पुनर्गठन/पुनर्रोन/नवसर्जन किया गया है।
जिला कलेक्टर द्वारा तैयार किए गए प्रस्तावों एवं आपत्तियों पर विचार करने तथा राज्य सरकार से अनुमोदन प्राप्त करने के पश्चात यह अंतिम आदेश लागू किया गया है।
अनुसूची में वर्णित पंचायत समितियां उस नाम से जानी जाएंगी और निर्धारित स्थानीय क्षेत्र व अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में वर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात, उक्त जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो अनुसूची के स्तंभ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में वर्णित पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
अलवर जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन/पुनर्सिमांकन/नवसृजन - अधिसूचना दिनांक 21-11-2025
अलवर जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन और नवसृजन अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक एफ.15(39)पंविलि/पंचायत समिति गठन/2025/810 दिनांक 21-11-2025 के अनुसार, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए अलवर जिले के अंतर्गत पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्सिमांकन एवं नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम व संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 के साथ धारा-9, 10 एवं 101 के प्रावधानों के अंतर्गत यह प्रशासनिक कार्रवाई की गई है।
जिला कलेक्टर के प्रस्ताव: जिला कलेक्टर्स द्वारा तैयार किए गए प्रस्तावों, सार्वजनिक अवलोकन और आपत्तियों पर सुनवाई के उपरांत प्राप्त संचिकाओं के परीक्षण के बाद राज्य सरकार द्वारा यह अनुमोदन प्रदान किया गया है।
नयी व्यवस्था: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पुनर्गठित/नवसृजित पंचायत समितियां उस नाम से जानी जाएंगी तथा स्तंभ 5 में उल्लेखित ग्राम पंचायतें उनके अधिकार क्षेत्र में आएंगी।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात, उक्त जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो अनुसूची के स्तंभ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
राजस्थान सरकार: सीकर जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन एवं नवसृजन की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा सीकर जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन एवं नवसृजन से संबंधित आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई है।
अधिसूचना विवरण
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
क्रमांक: एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/845
दिनांक: 21-11-2025
जारीकर्ता: डॉ. जोगा राम, शासन सचिव (राज्यपल की आज्ञा से)
मुख्य बिंदु एवं प्रक्रिया
राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 की प्रदत्त शक्तियों तथा विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/02 दिनांक 10.01.2025 के अंतर्गत जिला कलेक्टर सीकर द्वारा प्रस्ताव तैयार कर सार्वजनिक अवलोकनार्थ एक माह की अवधि में आपत्तियां आमंत्रित की गईं और सुनवाई की गई।
राज्य सरकार के अनुमोदन के पश्चात सीकर जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन/पुनर्रसीमांकन/नवसृजन किया गया है।
अधिसूचना के अनुसार, सीकर जिले की पुनर्गठित/पुनर्रसीमांकित/नवसृजित पंचायत समितियां अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित नाम से जानी जाएंगी और संबंधित स्थानीय क्षेत्र में अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
अनुसूची के स्तंभ 4 में यथावर्णित पंचायत समितियों के चुनावों के पश्चात उक्त जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो अनुसूची के स्तंभ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारम्भ होगा।
डीडवाना-कुचामन जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन एवं नवसृजन अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंश/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/825 दिनांक 21-11-2025 के माध्यम से डीडवाना-कुचामन जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन एवं नवसृजन के संबंध में आधिकारिक आदेश जारी किए गए हैं।
मुख्य विवरण
राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए, राज्य सरकार द्वारा डीडवाना-कुचामन जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन एवं नवसृजन किया गया है।
महत्वपूर्ण बिंदु
अधिनियम संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98, 9, 10 एवं 101 के अंतर्गत प्राप्त शक्तियां।
संबंधित जिला: डीडवाना-कुचामन।
कार्यकाल और चुनाव: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात उक्त जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो अनुसूची के स्तंभ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
जैसलमेर जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन और नवसृजन अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा जैसलमेर जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन के संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना दिनांक 21-11-2025 को जारी की गई है, जिसका क्रमांक एफ.15(39)पंवरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/830 है।
प्रमुख बिंदु
कानूनी प्रावधान: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-9, 10 एवं 101 में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह पुनर्गठन किया गया है।
कार्रवाई प्रक्रिया: जिला कलेक्टर द्वारा प्रस्ताव तैयार कर सार्वजनिक अवलोकन के लिए प्रसारित किए गए थे, एक माह की अवधि में आपत्तियां आमंत्रित की गईं और सुनवाई के पश्चात प्राप्त प्रस्तावों एवं अभिशंसाओं का परीक्षण कर राज्य सरकार से अनुमोदन कराया गया।
पंचायत समितियों का विवरण: अधिसूचना के तहत जैसलमेर जिले की विभिन्न पंचायत समितियों (जैसे जैसलमेर, सम, फतेहगढ़, मोहनगढ़, नाचना, सांकड़ा, रामदेवरा, भणियाना) का पुनर्गठन और नवसृजन किया गया है।
कार्यकाल और प्रभाव: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात उस जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो अनुसूची के स्तंभ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा यह आदेश जारी किया गया है।
बाड़मेर जिला परिषद की वर्तमान पंचायत समितियों व ग्राम पंचायतों की स्थिति
बाड़मेर जिला परिषद की पंचायत समितियां एवं ग्राम पंचायतें
यह दस्तावेज बाड़मेर जिला परिषद के अंतर्गत वर्तमान पंचायत समितियों और ग्राम पंचायतों की स्थिति की जानकारी प्रदान करता है। इसमें विभिन्न पंचायत समितियों के अंतर्गत पुनर्गठन सहित ग्राम पंचायतों की कुल संख्या और वर्तमान ग्राम पंचायतों की संख्या दर्शायी गई है।
मुख्य बिंदु:
डूगेरों का तला, विशाला, बाटाडू, लीलसर, मांगता और भियाड़ पंचायत समितियां नवसृजित हैं।
फागलिया, गडरारोड, रामसर और सेड़वा पंचायत समितियों की सीमा में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है।
बाड़मेर जिला परिषद के अंतर्गत कुल ग्राम पंचायतों का विवरण दिया गया है।
बालोतरा जिले की पंचायत समिति पायला कला से 2 ग्राम पंचायत खुडाला व नई उन्दरी पुनर्गठन के बाद गुड़ामालानी पंचायत समिति में हैं।
बालोतरा जिले की पंचायत समिति बायतु से 25 ग्राम पंचायतें (पुनर्गठन सहित) बाटाडू पंचायत समिति में हैं।
डूंगरपुर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नए सृजन की अंतिम अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान राजपत्र (असाधारण) दिनांक 21 नवंबर, 2025 में डूंगरपुर जिले के संबंध में एक महत्वपूर्ण अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/785 (दिनांक 20 नवंबर, 2025) जारी की गई है।
यह अधिसूचना राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए तथा धारा-9, 10 एवं 101 के प्रावधानों के अंतर्गत जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार प्रस्तावों और आपत्तियों पर सुनवाई के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से जारी की गई है।
मुख्य बिंदु:
पुनर्गठित क्षेत्र: डूंगरपुर जिले की विभिन्न पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नए सृजन का कार्य पूरा कर लिया गया है।
अधिकारिता: अनुसूची के स्तम्भ 4 में यथानामित ग्राम पंचायतें संबंधित स्तम्भ 5 में वर्णित स्थानीय क्षेत्रों पर अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
कार्यकाल और प्रभाव: अनुसूची के स्तम्भ 4 में वर्णित नई/पुनर्गठित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, स्तम्भ 2 में दर्शित पुरानी विद्यमान ग्राम पंचायतें उस तारीख से अस्तित्व में नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
शामिल पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के तहत सागवाड़ा, गलियाकोट, पालेदवल, दोवड़ा, डूंगरपुर, झोंथरी, आसपुर, साबला, चिखली, सीमलवाड़ा, गामड़ी अहाडा और बिछीवाड़ा पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाले राजस्व ग्रामों और ग्राम पंचायतों का विवरण राजपत्र में प्रकाशित किया गया है।
विस्तृत विवरण एवं राजस्व ग्रामों की सूची के लिए कृपया संलग्न मूल राजपत्र अधिसूचना देखें।
बारां जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन - अधिसूचना 2025
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग - अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा 98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, बारां जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन से संबंधित आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र (असाधारण) दिनांक 21 नवम्बर 2025 में प्रकाशित हुई है।
प्रमुख बिंदु
संबंधित विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
आदेश संख्या: संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/772, दिनांक 20 नवम्बर 2025।
कार्यान्वयन: जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार किए गए प्रस्तावों, आपत्तियों पर सुनवाई और राज्य सरकार के अनुमोदन के पश्चात बारां जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों और उनमें सम्मिलित राजस्व ग्रामों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, उक्त जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो स्तंभ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई वर्णित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
अधिक जानकारी के लिए कृपया मूल राजस्थान राजपत्र अधिसूचना देखें।
सवाई माधोपुर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/804 (दिनांक नवंबर 20, 2025) के माध्यम से सवाई माधोपुर जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन की आधिकारिक घोषणा की गई है।
यह कार्रवाई राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए तथा पूर्व अधिसूचना दिनांक 10.01.2025 के क्रम में जिला कलेक्टर द्वारा तैयार प्रस्तावों और आपत्तियों पर सुनवाई के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से की गई है।
मुख्य बिंदु:
सواسई माधोपुर जिला के अंतर्गत आने वाली पंचायत समितियों (जैसे बामनवास, बौंली, चौथ का बरवाड़ा, गंगापुरसिटी, खण्डार, मलारना डूंगर, सवाई माधोपुर आदि) में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन और नवसृजन किया गया है।
निसृत एवं पुनर्गठित ग्राम पंचायतें अनुसूची के स्तंभ-4 में वर्णित नामों से जानी जाएंगी तथा स्तंभ-5 में दर्शाए गए राजस्व ग्रामों पर अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
संबंधित पंचायत समितियों में नई पंचायतों के कार्यप्रारंभ के साथ ही पुरानी निर्धारित ग्राम पंचायतें अस्तित्व में नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी।
यह अधिसूचना राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी की गई है।
टोंक जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन एवं नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
टोंक जिले की ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन और पुनसीमांकन की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए टोंक जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन से संबंधित आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र (असाधारण) दिनांक 21 नवंबर, 2025 में प्रकाशित की गई है।
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
अधिकार क्षेत्र: टोंक जिले के अंतर्गत आने वाली विभिन्न पंचायत समितियां जैसे टोंक, निवाई, पीपलू, मालपुरा, टोडारायसिंह और उनियारा।
कार्यान्वयन प्रक्रिया: जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार किए गए प्रस्तावों एवं अभिशंषाओं के परीक्षण के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से टोंक जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
कार्यकाल और प्रभाव: अनुसूची के स्तम्भ संख्या 4 में वर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, उक्त जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो स्तम्भ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से ही विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
विस्तृत विवरण और ग्राम-वार सूची के लिए संलग्न आधिकारिक राजपत्र अधिसूचना देखें।
कोटपूतली-बहरोड़ जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/797- दिनांक नवंबर 20, 2025 के माध्यम से कोटपूतली-बहरोड़ जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
प्रमुख बिंदु
अधिनियम व संदर्भ: यह कार्रवाई राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-9, 10, 98 एवं 101 के अंतर्गत जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार प्रस्तावों और आपत्तियों पर सुनवाई के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से की गई है।
अधिकारिता: अनुसूची के स्तम्भ 4 में यथानामित पुनर्गठित एवं नवसृजित ग्राम पंचायतें स्तम्भ 5 में वर्णित स्थानीय क्षेत्र एवं राजस्व ग्रामों के अनुसार अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
कार्यकाल और प्रभाव: अनुसूची के स्तम्भ 4 में वर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, स्तम्भ 2 में दर्शाई गई विद्यमान ग्राम पंचायतें उस तारीख से अस्तित्व में नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
संबंधित पंचायत समितियां
बानसूर
बहरोड़
कोटपूतली
नारायणपुर
नीमराना
पावटा
विराटनगर
विस्तृत राजस्व ग्रामों की सूची और विवरण के लिए राजस्थान राजपत्र (असाधारण) दिनांक 21 नवंबर 2025 (भाग 6-ग) का अवलोकन करें।
भरतपुर जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन अधिसूचना
भरतपुर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन एवं नवसृजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए भरतपुर जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है। यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र (अतिरिक्त) में दिनांक 21 नवंबर, 2025 को प्रकाशित की गई है।
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना संख्या: संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/775 (दिनांक नवंबर 20, 2025)।
संबद्ध जिला: भरतपुर, राजस्थान।
शामिल पंचायत समितियां: बयाना, भुसावर, नदबई, रूपबास, सेवर, उच्चैन और वैर।
कार्यकाल और प्रभाव: अनुसूची के स्तम्भ संख्या 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात उक्त जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो अनुसूची के स्तम्भ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से ही विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
प्रतापगढ़ जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुन सीमांकन और नवसृजन - राजस्थान राजपत्र अधिसूचना
प्रतापगढ़ जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन एवं पुनसीमांकन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/801 (दिनांक नवंबर 20, 2025) के अंतर्गत राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए प्रतापगढ़ जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिनीम संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-9, 10 एवं 101 के प्रावधानों के तहत यह प्रक्रिया पूर्ण की गई है।
संबंधित पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के दायरे में प्रतापगढ़ जिले की धरियावद, पीपलखूट, सुहागपुरा, धमोतर, प्रतापगढ़, अरनोद, दलोट और छोटीसादड़ी पंचायत समितियां शामिल हैं।
कार्यकाल प्रभाव: अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, विद्यमान ग्राम पंचायतें (जो स्तंभ संख्या 2 में वर्णित हैं) उस तारीख से अस्तित्व में नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
जारीकर्ता: राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
जैसलमेर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
जैसलमेर जिला ग्राम पंचायत पुनर्गठन अधिसूचना 2025
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/789 (दिनांक नवम्बर 20, 2025) के तहत जैसलमेर जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन एवं नवसृजन किया गया है। यह कार्रवाई राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा 98 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए की गई है।
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना दिनांक: नवम्बर 20, 2025
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
कार्यान्वयन: अनुसूची के स्तम्भ 4 में वर्णित नई/पुनर्गठित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, स्तम्भ 2 में उल्लेखित मौजूदा ग्राम पंचायतें उस तारीख से अस्तित्व में नहीं रहेंगी और उनका कार्य बंद हो जाएगा, जिससे नई पुनर्गठित पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
विस्तृत जानकारी और ग्रामवार राजस्व गांवों की सूची के लिए मूल राजस्थान राजपत्र (असाधारण) दिनांक 21 नवम्बर 2025 का अवलोकन करें।
करौली जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन अधिसूचना
करौली जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/794 दिनांक 20 नवम्बर, 2025 के माध्यम से करौली जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम और शक्तियाँ: यह कार्रवाई राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों और धारा-9, 10 एवं 101 के अंतर्गत राज्य सरकार द्वारा जिला कलेक्टर को प्रदत्त अधिकारों के आधार पर की गई है।
कार्यान्वयन: जिला कलेक्टर द्वारा तैयार प्रस्तावों, सार्वजनिक अवलोकन, आपत्तियों के आमंत्रण और सुनवाई के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से करौली जिले की विभिन्न पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन व नवसृजन किया गया है।
शामिल पंचायत समितियां: इस अधिसूचना में मण्डरायल, हिण्डौन, टोडाभीम, श्रीमहावीरजी, करौली, मासलपुर और नादौती पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाले राजस्व ग्रामों और ग्राम पंचायतों का विवरण अनुसूची के अनुसार निर्धारित किया गया है।
प्रभावी तिथि: अनुसूची में वर्णित नई ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, पूर्ववर्ती विद्यमान ग्राम पंचायतें उस तिथि से कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
यह अधिसूचना राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा जारी की गई है।
जालोर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन एवं नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
जालोर जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/790 (दिनांक नवंबर 20, 2025) के अंतर्गत राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए जालोर जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
संबंधित विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
अधिसूचना दिनांक: 20 नवंबर 2025 (राजस्थान राजपत्र असाधारण में 21 नवंबर 2025 को प्रकाशित)।
अधिनियम संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-9, 10, 98 एवं 101।
क्षेत्र: जालोर जिला (जिसमें जालोर, आहोर, सायला, जसवंतपुरा, भीनमाल, बागोड़ा, रानीवाड़ा, सांचौर और चितलवाना पंचायत समितियां शामिल हैं)।
कार्यकाल निर्देश: अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात उक्त जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो अनुसूची के स्तंभ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से ही विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
यह अधिसूचना राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी की गई है।
धौलपुर जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा 98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए धौलपुर जिले की ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र (असाधारण) दिनांक 21 नवंबर 2025 में प्रकाशित की गई है, जिसके अंतर्गत धौलपुर जिले के विभिन्न क्षेत्रों एवं पंचायत समितियों (जैसे बाड़ी, बसेड़ी, धौलपुर, राजाखेड़ा, सैंपऊ, सरमथुरा) में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम और संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धाराओं के तहत जिला कलेक्टर द्वारा तैयार प्रस्तावों और आपत्तियों पर सुनवाई के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से यह पुनर्गठन किया गया है।
कार्यान्वयन: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, स्तंभ 2 में उल्लेखित पूर्ववर्ती ग्राम पंचायतें उस तारीख से अस्तित्व में नहीं रहेंगी और उनका कार्यकाल समाप्त माना जाएगा।
संबंधित पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के दायरे में बाड़ी, बसेड़ी, धौलपुर, राजाखेड़ा, सैंपऊ और सरमथुरा पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाले राजस्व ग्रामों और ग्राम पंचायतों का नया सीमांकन किया गया है।
अधिक जानकारी के लिए कृपया ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार की आधिकारिक अधिसूचना देखें।
ब्यावर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन एवं निसृजन से संबंधित अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), जयपुर द्वारा जारी अधिसूचना (संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/774, दिनांक 20 नवंबर 2025) के अनुसार, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए ब्यावर जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन एवं निसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु एवं प्रक्रिया:
संबद्ध अधिनियम एवं निर्देश: यह कार्रवाई राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-9, 10, 98 एवं 101 के प्रावधानों और पूर्व विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/02 दिनांक 10.01.2025 के अंतर्गत जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार प्रस्तावों, आपत्तियों के आमंत्रण, सुनवाई तथा राज्य सरकार के अनुमोदन के पश्चात की गई है।
ग्राम पंचायतों का क्षेत्राधिकार: इस अधिसूचना के तहत पुनर्गठित, पुनसीमांकित एवं नवसृजित ग्राम पंचायतें अपने निर्धारित नामों और राजस्व ग्रामों के स्थानीय क्षेत्र के अनुसार अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
कार्यकाल: अनुसूची में वर्णित ग्राम पंचायतों के चुनावों के पश्चात उस जिले की विद्यमान ग्राम पंचायतें, जो पुनर्गठन से प्रभावित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
शामिल पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के अंतर्गत मुख्य रूप से पंचायत समिति बदनोर, जवाजा, जैतारण, रायपुर और मसूदा के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों एवं उनके राजस्व ग्रामों का पुनर्गठन किया गया है।
विस्तृत विवरण एवं सूची के लिए संलग्न राजपत्र का अवलोकन करें।
बूंदी जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
बूंदी जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन एवं पुनसीमांकन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनगर्ठन/विधि/पंरा/2024/778:- (दिनांक 20 नवम्बर 2025) के अंतर्गत राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए बूंदी जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम व संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-9, 10 एवं 101 में वर्णित शक्तियों तथा पूर्व अधिसूचना दिनांक 10.01.2025 के अनुपालन में जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार प्रस्तावों और अभिशंसाओं के परीक्षण के पश्चात यह राज्य सरकार द्वारा अनुमोदित किया गया है।
प्रभावित पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के तहत बूंदी जिले की पंचायत समिति हिंडोली, नैनवां, तालेडा और बूंदी के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन व नवसृजन किया गया है।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, उस जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो स्तंभ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
अधिक जानकारी एवं विस्तृत राजस्व ग्रामों की सूची के लिए आधिकारिक राजस्थान राजपत्र (असाधारण) दिनांक 21 नवंबर 2025 का अवलोकन करें।
खैरथल-तिजारा जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन एवं नवसृजन - अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान राजपत्र में जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/795, दिनांक 20 नवम्बर 2025 के माध्यम से खैरथल-तिजारा जिले की ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन से संबंधित विस्तृत विवरण प्रकाशित किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम एवं शक्तियां: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों और धारा-9, 10 एवं 101 में वर्णित प्रावधानों के अंतर्गत यह कार्रवाई की गई है।
जिला कलेक्टर की भूमिका: संबंधित जिले के जिला कलेक्टर द्वारा प्रस्ताव तैयार कर सार्वजनिक अवलोकन हेतु प्रसारित करने, एक माह की अवधि में आपत्तियां आमंत्रित करने तथा उन पर सुनवाई करने के पश्चात राज्य सरकार से अनुमोदन प्राप्त किया गया है।
पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के तहत मुख्य रूप से किशनगढ़बास, कोटकासिम, और तिजारा पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों और उनमें सम्मिलित राजस्व ग्रामों का पुनर्गठन व नवसृजन किया गया है।
कार्यकाल और प्रभाव: अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में यथावर्णित नई/पुनर्गठित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, उस जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो स्तंभ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
यह अधिसूचना राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी की गई है।
कोटा जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नए सृजन की अधिसूचना
राजकीय अधिसूचना और उद्देश्य
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी इस आधिकारिक अधिसूचना (संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/796, दिनांक 20 नवंबर, 2025) के माध्यम से कोटा जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नए सृजन की जानकारी दी गई है। यह कार्रवाई राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए, धारा-9, 10 एवं 101 के प्रावधानों के अंतर्गत की गई है।
मुख्य बिंदु एवं प्रक्रिया
जिला कलेक्टर द्वारा प्रस्ताव: संबंधित जिले के जिला कलेक्टर ने नियमानुसार प्रस्ताव तैयार कर सार्वजनिक अवलोकन के लिए प्रसारित किए थे और एक माह की अवधि में आपत्तियां आमंत्रित कर उनकी सुनवाई की थी।
राज्य सरकार का अनुमोदन: जिला कलेक्टरों द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों एवं अभिशंषाओं का परीक्षण करने के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से कोटा जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन/पुनरसीमांकन/निसृजन किया गया है।
नामकरण और अधिकारिता: अनुसूची के स्तम्भ 4 में वर्णित पुनर्गठित/पुनरसीमांकित/नवसृजित ग्राम पंचायतें उसी नाम से जानी जाएंगी और स्तम्भ 5 में दर्शाए गए स्थानीय क्षेत्र व राजस्व ग्रामों पर अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
कार्यकाल की शुरुआत: अनुसूची के स्तम्भ 4 में वर्णित नई ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, स्तम्भ 2 में दर्शाई गई विद्यमान ग्राम पंचायतें उस तारीख से अस्तित्व में नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी, जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
संबद्ध पंचायत समितियां
इस अधिसूचना के अंतर्गत कोटा जिले की विभिन्न पंचायत समितियों (जैसे सांगोद, खैराबाद, सुल्तानपुर, लाडपुरा आदि) के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों एवं उनके राजस्व ग्रामों में पुनर्गठन और फेरबदल किया गया है। विस्तृत विवरण के लिए राजस्थान राजपत्र, दिनांक 21 नवंबर 2025 का अवलोकन किया जा सकता है।
नोट: यह पोस्ट संलग्न राजपत्र अधिसूचना पर आधारित है।
फलौदी जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन एवं नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए तथा धारा-9, 10 एवं 101 में वर्णित शक्तियों के अंतर्गत, संबंधित जिले के जिला कलेक्टर द्वारा तैयार किए गए प्रस्तावों एवं अभिशंषाओं का परीक्षण कर राज्य सरकार से अनुमोदन प्राप्त करने के पश्चात फलौदी जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन एवं नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
प्रभावित पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के तहत फलौदी जिले की विभिन्न पंचायत समितियों (जैसे बापणी, आऊ, फलौदी, देचू, बाप, घंटियाली, लोहावट आदि) के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों और उनके राजस्व गांवों का पुनर्गठन व पुनसीमांकन किया गया है।
नया नाम एवं मुख्यालय: पुनर्गठित/नवसृजित ग्राम पंचायतें उसी नाम से जानी जाएंगी जो अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित हैं और उनकी अधिकारिता का स्थानीय क्षेत्र स्तंभ 5 के अनुसार होगा।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, संबंधित जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो अनुसूची के स्तंभ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
यह अधिसूचना राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी की गई है।
सिरोही जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन एवं नवसृजन - अधिसूचना 2025
सिरोही जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन एवं नवसृजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान राजपत्र में दिनांक 20 नवंबर 2025 की अधिसूचना (संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/806) के माध्यम से सिरोही जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
प्रमुख बिंदु
अधिनियम व संदर्भ: यह कार्रवाई राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए की गई है।
संबंधित पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के तहत पिंडवाड़ा, आबूरोड, शिवगंज, रेवदर और सिरोही पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन किया गया है।
कार्यकाल और प्रभाव: अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में वर्णित पुनर्गठित/नवसृजित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, स्तंभ संख्या 2 में उल्लिखित वर्तमान ग्राम पंचायतें उस तारीख से अस्तित्व में नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी, जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
डीग जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
डीग जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन एवं पुनरसीमांकन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/782 (दिनांक नवंबर 20, 2025) के अंतर्गत राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा 9, 10, 101 एवं धारा 98 के प्रावधानों के तहत डीग जिले की विभिन्न पंचायत समितियों के अंतर्गत ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु एवं प्रक्रिया
सक्षम प्राधिकारी की कार्रवाई: जिला कलेक्टरों द्वारा नियमानुसार प्रस्ताव तैयार कर, सार्वजनिक अवलोकन हेतु प्रसारित कर एक माह की अवधि में आपत्तियां आमंत्रित करने तथा सुनवाई करने की प्रक्रिया पूरी की गई।
राज्य सरकार का अनुमोदन: जिला कलेक्टरों द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों एवं अभिशंषाओं के परीक्षण के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से डीग जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन/पुनरसीमांकन/नवसृजन किया गया है।
अधिकारिता और कार्यक्षेत्र: अनुसूची के स्तम्भ 4 में वर्णित पुनर्गठित एवं नवसृजित ग्राम पंचायतें स्तम्भ 5 में उल्लेखित राजस्व गांवों पर अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तम्भ 4 में वर्णित नई ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, स्तम्भ 2 में उल्लेखित विद्यमान ग्राम पंचायतें उस तारीख से अस्तित्व में नहीं रहेंगी और उनका कार्य समाप्त हो जाएगा, जिसके बाद नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
शामिल पंचायत समितियां
इस अधिसूचना के अंतर्गत डीग जिले की प्रमुख पंचायत समितियों (जैसे सीकरी, पहाड़ी, कुम्हेर, कामाँ, नगर और डीग) के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों और उनसे संबंधित राजस्व गांवों का विस्तृत विवरण राजस्थान राजपत्र (अतिरिक्त) दिनांक 21 नवंबर 2025 में प्रकाशित अनुसूची के अनुसार निर्धारित किया गया है।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है।
अजमेर जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
अजमेर जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन एवं पुनरसीमांकन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान राजपत्र में जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/768 (दिनांक 20 नवंबर, 2025) के अंतर्गत अजमेर जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
यह कार्रवाई राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा 98 के तहत प्रदत्त शक्तियों और जिला कलेक्टर्स द्वारा तैयार प्रस्तावों एवं आपत्तियों की सुनवाई के उपरांत राज्य सरकार के अनुमोदन से की गई है।
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना दिनांक: 20 नवंबर, 2025
संबंधित विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार
क्षेत्र: अजमेर जिला (विभिन्न पंचायत समितियाँ जैसे सिलोरा, सावर, अजमेर ग्रामीण, श्रीनगर, केकड़ी, सरवाड़, अड़ाई, बिनाय, पीसांगन आदि)
कार्यान्वयन: अनुसूची में यथावर्णित नई पुनर्गठित/नवसृजित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, पूर्ववर्ती विद्यमान ग्राम पंचायतें उस तिथि से अस्तित्व में नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा यह अधिसूचना जारी की गई है।
बाँसवाडा जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) अधिसूचना
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/771 (दिनांक नवंबर 20, 2025) के अंतर्गत राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए बाँसवाडा जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
प्रमुख मुख्य बिंदु:
अधिनियम एवं संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-9, 10, 98 एवं 101 के अंतर्गत संबंधित जिला कलेक्टर द्वारा तैयार प्रस्तावों और अनुशंसाओं के परीक्षण के पश्चात यह अधिसूचना जारी की गई है।
शामिल पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के तहत बाँसवाडा जिले की विभिन्न पंचायत समितियों (जैसे आनन्दपुरी, अरथुना, बागीदौरा, बाँसवाडा, छोटी सरवा, छोटी सरवन, गांगडतलाई, गढ़ी, घाटोल, कुशलगढ़, सज्जनगढ़, तलवाडा आदि) के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन एवं पुनसीमांकन किया गया है।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तम्भ संख्या 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात उक्त जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो अनुसूची के स्तम्भ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
यह अधिसूचना राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी की गई है।
दौसा जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन से संबंधित अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/781/- दिनांक नवम्बर 20, 2025 के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए दौसा जिले की विभिन्न पंचायत समितियों के अंतर्गत ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु एवं विवरण
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
अधिसूचना दिनांक: नवम्बर 20, 2025 (राजस्थान राजपत्र असाधारण में प्रकाशित)
जिला: दौसा
शामिल पंचायत समितियां: बांदीकुई, दौसा, लालसोट, महवा, मंडावर, नांगल राजावतान, रामगढ़ पचवारा, सिकंदरा, सिकराय और बैजूपाड़ा, बसवा।
इस अधिसूचना के अनुसार, संबंधित जिला कलेक्टर द्वारा तैयार प्रस्तावों तथा आपत्तियों पर सुनवाई और परीक्षण के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से दौसा जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन एवं नवसृजन किया गया है। अनुसूची में यथावर्णित नई ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात पुरानी विद्यमान ग्राम पंचायतें उस तिथि से अस्तित्व में नहीं रहेंगी और उनका कार्य समाप्त हो जाएगा जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
उदयपुर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन एवं नवसृजन - राजस्थान राजपत्र अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/808, दिनांक 20 नवम्बर 2025 के अनुसार, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए उदयपुर जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बातें:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
स्थान: उदयपुर जिला
प्रभाव: इस अधिसूचना के तहत संबंधित पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन और नवसृजन किया गया है, जिसके विस्तृत विवरण और राजस्व ग्रामों की सूची राजपत्र में प्रकाशित की गई है।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तम्भ संख्या 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, उक्त जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो स्तम्भ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से ही विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
यह अधिसूचना राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी की गई है।
राजसमंद जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन एवं नवसृजन अधिसूचना
राजसमंद जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन और पुनसीमांकन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान राजपत्र में राजसमंद जिले की ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन, पुनसीमांकन एवं नवसृजन के संबंध में अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना दिनांक 20 नवंबर, 2025 को जारी की गई है, जिसके अंतर्गत राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का उपयोग किया गया है।
मुख्य बिंदु:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
जिला: राजसमंद
शामिल पंचायत समितियां: आमेट, भीम, रेलमगरा, राजसमंद और अन्य संबंधित क्षेत्र।
कार्यान्वयन: जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार प्रस्तावों और आपत्तियों पर सुनवाई के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से राजसमंद जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
नया कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, उस जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो अनुसूची के स्तंभ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
अधिक जानकारी के लिए कृपया राजस्थान राजपत्र (असाधारण) दिनांक 21 नवंबर, 2025 का अवलोकन करें।
हनुमानगढ़ जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनर्र्सीमांकन और नवसृजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवारा/2024/787 (दिनांक नवंबर 20, 2025) के अंतर्गत राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए हनुमानगढ़ जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनर्र्सीमांकन और नवसृजन किया गया है।
प्रमुख बातें एवं निर्देश
सम्बन्धित विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
प्रभावित क्षेत्र: हनुमानगढ़ जिले की पंचायत समितियां (भादरा, पीलीबंगा, संगरिया, टिब्बी, हनुमानगढ़, नोहर आदि) एवं उनके अंतर्गत आने वाले राजस्व ग्राम।
नया कार्यकाल: पुनर्गठित/नवसृजित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, पुरानी विद्यमान ग्राम पंचायतें उस तारीख से कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
अधिकारिता: प्रत्येक पुनर्गठित/नवसृजित ग्राम पंचायत अनुसूची के स्तम्भ 5 में वर्णित स्थानीय क्षेत्र व राजस्व ग्रामों पर अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेगी।
जयपुर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
जयपुर जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन एवं पुनरसीमांकन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी असाधारण राजपत्र अधिसूचना (संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/788, दिनांक 20 नवंबर, 2025) के अनुसार, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए जयपुर जिले की विभिन्न पंचायत समितियों के अंतर्गत ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
संबद्ध अधिनियम: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-9, 10, 98 एवं 101।
क्रियान्वयन: संबंधित जिला कलेक्टर द्वारा तैयार प्रस्तावों एवं आपत्तियों की सुनवाई के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से जयपुर जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन और नवसृजन किया गया है।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, विद्यमान ग्राम पंचायतें उस तारीख से कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
अलवर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
अलवर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन और पुनरसीमांकन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/769, दिनांक नवम्बर 20, 2025 (राजस्थान राजपत्र असाधिकार प्रकाशित, 21 नवम्बर 2025) के अंतर्गत अलवर जिले की विभिन्न पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन एवं नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु और प्रक्रिया
यह कार्रवाई राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए, धारा-9, 10 एवं 101 में वर्णित प्रावधानों के तहत जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार प्रस्तावों और आपत्तियों पर सुनवाई के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से की गई है।
अधिसूचना के अनुसार, अनुसूची के स्तम्भ 4 में वर्णित नई पुनर्गठित/नवसृजित ग्राम पंचायतें उसी नाम से जानी जाएंगी और स्तम्भ 5 में वर्णित स्थानीय क्षेत्र व राजस्व ग्रामों पर अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
अनुसूची के स्तम्भ 4 में यथावर्नित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात्, उस जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो स्तम्भ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
संबंधित पंचायत समितियां
इस अधिसूचना के तहत अलवर जिले की कई पंचायत समितियों (जैसे भनोर और अन्य संबंधित क्षेत्र) के अंतर्गत आने वाले राजस्व ग्रामों और ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन और पुनरसीमांकन किया गया है। विस्तृत जानकारी और ग्रामवार सूची के लिए आधिकारिक राजस्थान राजपत्र (21 नवंबर 2025) देखा जा सकता है।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है।
झालावाड़ जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन - अधिसूचना 20 नवंबर 2025
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंचा/2024/791- (दिनांक नवंबर 20, 2025) के अंतर्गत, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए झालावाड़ जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम एवं प्रावधान: यह कार्रवाई राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-9, 10, 98 एवं 101 के प्रावधानों तथा पूर्व में जारी विभागीय आदेशों के तहत जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार प्रस्तावों एवं राज्य सरकार के अनुमोदन के पश्चात की गई है।
प्रभावित पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के तहत झालावाड़ जिले की कई पंचायत समितियों (जैसे अकलेरा, भवानीमंडी, डग, झालरापाटन, खानपुर, मनोहरथाना और पिड़ावा मुख्यालय सुनेल) के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों एवं उनके राजस्व ग्रामों का पुनर्गठन किया गया है।
कार्यकाल एवं अस्तित्व: अनुसूची के स्तम्भ संख्या 4 में यथावर्णित पुनर्गठित/नवसृजित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, उस जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो अनुसूची के स्तम्भ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
विस्तृत ग्राम-वार अनुसूची और राजस्व ग्रामों की जानकारी के लिए कृपया राजस्थान राजपत्र (असाधारण) दिनांक 21 नवंबर 2025 देखें।
जोधपुर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन एवं नवसृजन - राजस्थान राजपत्र अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/793 (दिनांक नवंबर 20, 2025) के तहत जोधपुर जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है। यह कार्रवाई राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा 98 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए की गई है।
मुख्य बिंदु एवं प्रक्रिया:
अधिकार एवं प्रस्ताव: जिला कलेक्टरों को संबंधित ग्राम पंचायतों व पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन हेतु प्रस्ताव तैयार करने, सार्वजनिक अवलोकन के लिए प्रसारित करने, एक माह की अवधि में आपत्तियां आमंत्रित करने और उन पर सुनवाई करने के लिए अधिकृत किया गया था।
नया नामकरण और अधिकारिता: जिला कलेक्टरों द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों और अभिशंषाओं का परीक्षण करने तथा राज्य सरकार से अनुमोदन प्राप्त करने के पश्चात, जोधपुर जिले की पुनर्गठित/पुनसीमांकित/नवसृजित ग्राम पंचायतें अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित नाम से जानी जाएंगी और स्तंभ 5 में उल्लिखित स्थानीय क्षेत्र/राजस्व गांवों पर अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
कार्यकाल और निरंतरता: अनुसूची के स्तंभ 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, संबंधित जिले की वे विद्यमान ग्राम पंचायतें जो स्तंभ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
आज्ञा से: डॉ. जोगा राम, शासन सचिव, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
चूरू जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन - अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/780 दिनांक नवंबर 20, 2025 के अंतर्गत, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए चूरू जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना क्रमांक एवं दिनांक: संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/780, दिनांक नवंबर 20, 2025।
संबंधित विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
अधिनियम संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-9, 10, 98 और 101।
क्षेत्र: चूरू जिले की विभिन्न पंचायत समितियाँ (चूरू, बीदासर, सुजानगढ़, रतनगढ़, सरदारशहर, तारानगर, राजगढ़, सिद्धमुख)।
कार्यान्वयन: जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार प्रस्तावों एवं आपत्तियों पर सुनवाई के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से चूरू जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तम्भ 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात उस जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो स्तम्भ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से ही विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा यह अधिसूचना जारी की गई है।
सीकर जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन - राजस्थान राजपत्र अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/805 (दिनांक नवंबर 20, 2025) के माध्यम से राजस्थान राजपत्र में सीकर जिले की ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन से संबंधित आधिकारिक विवरण प्रकाशित किया गया है।
मुख्य बिंदु एवं प्रक्रिया
यह अधिसूचना राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए तथा धारा-9, 10 एवं 101 के अंतर्गत जारी निर्देशों के तहत लाई गई है।
जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार किए गए प्रस्तावों, सार्वजनिक अवलोकन, आपत्तियों के आमंत्रण और सुनवाई की प्रक्रिया के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से सीकर जिले की विभिन्न पंचायत समितियों (जैसे अजीतगढ़, दांतारामगढ़, पलसाना, धोद, खंडेला, लक्ष्मणगढ़, नेछवा, नीमकाथाना, पाटन, पिपराली, श्रीमाधोपुर) के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
अनुसूची में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, उस जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो अनुसूची के स्तंभ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
विस्तृत ग्राम-वार और पंचायत समिति-वार सूची के लिए संलग्न आधिकारिक राजपत्र दस्तावेज़ का अवलोकन करें।
भीलवाड़ा जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
भीलवाड़ा जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/776 (दिनांक 20 नवम्बर 2025) के अंतर्गत राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए भीलवाड़ा जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
प्रमुख बिंदु:
अधिकार एवं प्रक्रिया: विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/02 दिनांक 10.01.2025 के द्वारा जिला कलेक्टर को ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनसीमांकन हेतु प्रस्ताव तैयार करने, सार्वजनिक अवलोकन के लिए प्रसारित करने, एक माह की अवधि में आपत्तियां आमंत्रित करने तथा सुनवाई करने हेतु अधिकृत किया गया था।
प्रस्तावों का अनुमोदन: जिला कलेक्टरों द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों और अभिशंसाओं का परीक्षण करने के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से भीलवाड़ा जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन/पुनसीमांकन/नवसृजन किया गया है।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तम्भ संख्या 4 में यथावर्णित नई ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात उस जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो स्तम्भ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
विस्तृत विवरण और पंचायत समिति वार पुनर्गठित/नवसृजित ग्राम पंचायतों तथा उनमें सम्मिलित राजस्व ग्रामों की सूचियों के लिए संलग्न राजस्थान राजपत्र (एक्स्ट्राऑर्डिनरी) का अवलोकन करें।
डीडवाना-कुचामन जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुन सीमांकन और नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
अधिसूचना विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/784 (दिनांक नवम्बर 20, 2025) के माध्यम से राजस्थान राजपत्र में डीडवाना-कुचामन जिले की ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन से संबंधित विस्तृत विवरण प्रकाशित किया गया है।
मुख्य उद्देश्य एवं प्रक्रिया
राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए, धारा-9, 10 एवं 101 में वर्णित प्रावधानों के अंतर्गत संबंधित जिला कलेक्टर को ग्राम पंचायत एवं पंचायत समिति के पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन हेतु प्रस्ताव तैयार करने, सार्वजनिक अवलोकन के लिए प्रसारित करने, एक माह की अवधि में आपत्तियां आमंत्रित करने तथा उन पर सुनवाई करने के लिए अधिकृत किया गया था। जिला कलेक्टरों द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों एवं अभिशंषाओं का परीक्षण कर तथा राज्य सरकार से अनुमोदन प्राप्त करने के पश्चात डीडवाना-कुचामन जिले की विभिन्न पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन/पुनसीमांकन/नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु
अधिनियम संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-9, 10, 98 एवं 101।
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
जारीकर्ता: डॉ. जोगा राम, शासन सचिव (राज्यपाल की आज्ञा से)।
प्रभावित क्षेत्र: डीडवाना-कुचामन जिले की विभिन्न पंचायत समितियाँ (जैसे कुचामन सिटी, लाडनूं, मौलासर, परबतसर, डीडवाना, मकराना, नावा आदि)।
अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात उक्त जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो अनुसूची के स्तंभ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
श्रीगंगानगर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन एवं नवसृजन - राजस्थान राजपत्र अधिसूचना
श्रीगंगानगर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन और नवसृजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/786, दिनांक 20 नवंबर 2025 के अनुसार, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए श्रीगंगानगर जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन एवं नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम व निर्देश: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-9, 10 एवं 101 के अंतर्गत जिला कलेक्टर द्वारा तैयार प्रस्तावों और अभिशंषाओं का परीक्षण कर राज्य सरकार के अनुमोदन के पश्चात यह अधिसूचना जारी की गई है।
कार्यान्वयन: अनुसूची के स्तम्भ संख्या 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात् उस जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो स्तम्भ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी, जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
संबद्ध पंचायत समितियां: इस अधिसूचना में श्रीगंगानगर जिले के अंतर्गत आने वाली विभिन्न पंचायत समितियों (जैसे श्रीगंगानगर, श्रीकरणपुर, पदमपुर, घड़साना, सूरतगढ़, अनूपगढ़, सादुलशहर आदि) के अंतर्गत आने वाले राजस्व ग्रामों और उनके मुख्यालयों की विस्तृत अनुसूची जारी की गई है।
यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र (असाधारण) दिनांक 21 नवंबर 2025 में प्रकाशित की गई है, जिसके अंतर्गत राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा हस्ताक्षर किए गए हैं।
बालोतरा जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग
बालोतरा जिले की ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी असाधारण राजपत्र अधिसूचना (संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/770, दिनांक नवम्बर 20, 2025) के अनुसार राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए बालोतरा जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिकार क्षेत्र और प्रभाव: इस अधिसूचना के तहत पुनर्गठित, पुनसीमांकित और नवसृजित ग्राम पंचायतें स्तम्भ 4 एवं 5 में दर्शाए गए स्थानीय क्षेत्रों और राजस्व ग्रामों के अनुसार अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तम्भ संख्या 4 में यथाور्णगत ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, उक्त जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो स्तम्भ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
संबंधित पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के अंतर्गत समदड़ी, कल्याणपुर, सिणधरी, पायला कलां, सिवाना, पादतू और गिडा पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में पुनर्गठन की कार्रवाई की गई है।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है।
ग्राम पंचायतों द्वारा स्वामित्व प्रमाण-पत्र, अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) तथा कुर्सीनामा / वारिस / उत्तराधिकारी प्रमाण-पत्र जारी न करने बाबत परिपत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के महत्वपूर्ण परिपत्र
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा ग्राम पंचायतों की शक्तियों औरकार्यों के संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए हैं। इन परिपत्रों के माध्यम से स्पष्ट किया गया है कि ग्रामपंचायतों द्वारा किन दस्तावेजों को जारी करने का कोई प्रावधान नहीं है।
मुख्य बिंदु:
स्वामित्व एवं अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC): क्रमांक एफ.4(16)दिशा-निर्देश/विधि/पंश/2016/325 दिनांक 17-4-2017 के अनुसार, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 एवं राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में ग्राम पंचायतों द्वारा स्वामित्व प्रमाण-पत्र अथवा किसी निजी भवन के विक्रय आदि के संबंध में अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) जारी करने का कोई प्रावधान नहीं है। अत: ऐसे प्रमाण-पत्र जारी न किए जाएं।
कुर्सीनामा / वारिस / उत्तराधिकारी प्रमाण-पत्र: क्रमांक एफ.139(16)निर्देश/विधि/पंश/2021/263 दिनांक 23-02-2021 एवं क्रमांक एफ.15(69)पंश्रावि/विधि/ग्रा.पं.मार्ग./जयपुर/2019/1801 दिनांक 30-08-2019 के अनुसार, सरपंचों या ग्राम पंचायतों द्वारा कुर्सीनामा, वारिस या उत्तराधिकारी प्रमाण-पत्र जारी किए जाने का भी पंचायती राज अधिनियम, 1994 व नियमों में कोई प्रावधान नहीं है। विधिक दृष्टि से अमान्य होने के कारण ऐसे प्रमाण-पत्र जारी करने से सरपंचों/ग्राम पंचायतों को अनावश्यक जांच का सामना करना पड़ सकता है।
समस्त संबंधित अधिकारियों, जिला कलक्टरों, मुख्य कार्यकारी अधिकारियों और विकास अधिकारियों को निर्देशित किया जाता है कि वे इन नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें।
नवीन जिला परिषद डीग का गठन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
नवीन जिला परिषद डीग का गठन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा अधिसूचना संख्या एफ15(1)परा/विधि/जिपगठन/2025/762 दिनांक 19 नवम्बर 2025 के माध्यम से नवीन जिला परिषद डीग के गठन की सूचना जारी की गई है।
मुख्य बिंदु:
नवीन जिला गठन: राजस्व विभाग की अधिसूचना क्रमांक प-9(18)राज-1/2022-(4) दिनांक 05.08.2023 के द्वारा भरतपुर जिले का पुनर्गठन कर नवीन जिला डीग का गठन किया गया है, जिसका मुख्यालय डीग रखा गया है।
जिला परिषद का गठन: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-11 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए जिला परिषद, डीग का गठन किया गया है।
क्षेत्राधिकार: नवगठित जिला परिषद, डीग का क्षेत्राधिकार राजस्व विभाग की उक्त अधिसूचना में वर्णित क्षेत्र में से नगर निगम/नगर परिषद/नगर पालिका (नगरीय क्षेत्र) को छोड़कर समस्त क्षेत्र रहेगा। यह क्षेत्र जिला परिषद भरतपुर के वर्तमान क्षेत्राधिकार से पृथक रहेगा।
भरतपुर जिला परिषद का कार्य: जिला परिषद भरतपुर वर्तमान स्वरूप में उस तारीख से ही विद्यमान नहीं रहेगी और कार्य करना बंद कर देगी जब नवीन जिला परिषद डीग एवं पुनर्गठित जिला परिषद भरतपुर का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयन्ती पर 15 नवम्बर 2025 को विशेष ग्राम सभा का आयोजन
विशेष ग्राम सभा आयोजन एवं निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा जारी पत्र (एफ.15(10)पंरावि/विधि/वि0ग्रा0सं0/2024/ईफाइल 22379, दिनांक: 14-11-2025) के अनुसार जनजाति गौरव वर्ष भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयन्ती के अवसर पर दिनांक 15 नवम्बर, 2025 को राज्य की सभी ग्राम पंचायतों में विशेष ग्राम सभा का आयोजन किया जाना है।
मुख्य बिंदु एवं निर्देश:
चारागाह विकास: ग्राम पंचायतों में चारागाह विकास हेतु ग्राम सभा में 'एक पंचायत-एक चारागाह' एवं 'एक गांव-एक चारागाह' गतिविधि के संबंध में प्रस्ताव लेकर संलग्न मॉडल प्रारूप के अनुसार चारागाह विकास को ग्राम सभा के स्थायी एजेंडे में जोड़कर प्रस्ताव पारित किए जाने हैं।
चारागाह समिति और अतिक्रमण: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 170 के अंतर्गत चारागाह विकास समिति को क्रियाशील बनाने, चारागाह भूमि का संरक्षण करने तथा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना: वर्ष 2025 के लिए सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के सभी लाभार्थियों के वार्षिक भौतिक सत्यापन तथा अपात्र पेंशनर्स के प्रकरणों को निस्तारित करने हेतु ग्राम सभाओं में व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए।
किसान गिरदावरी: पंचायत स्तर पर आयोजित ग्राम सभाओं में आने वाले किसानों को 'किसान गिरदावरी' मोबाइल ऐप डाउनलोड करने तथा लॉगिन प्रक्रिया की जानकारी देने के निर्देश दिए गए हैं।
जन योजना अभियान (पीपीसी): 'सबकी योजना सबका विकास' के तहत ग्राम पंचायत विकास योजनाएँ (GPDP) तैयार करने के लिए ग्राम सभा की बैठकों में आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
अतः सभी मुख्य/अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद और विकास अधिकारी, पंचायत समिति को उक्त निर्देशों की अक्षरशः पालना करने के निर्देश दिए गए हैं।
दिनांक 02 अक्टूबर, 2025 को आयोजित होने वाली ग्राम सभा के संबंध में दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के निर्देश
राजकीय दिशा-निर्देशों के अनुसार राज्य की सभी ग्राम पंचायतों में दिनांक 02 अक्टूबर, 2025 को ग्राम सभा का आयोजन किया जाना सुनिश्चित किया गया है। इस ग्राम सभा में प्रमुख रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर कार्रवाई संपादित की जानी है:
1. सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना से संबंधित बिंदु
वर्ष 2025 के लिए सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के सभी लाभार्थियों के वार्षिक भौतिक सत्यापन का कार्य सुनिश्चित किया जाए।
असतत्यापित पेंशनर्स के रुके हुए पेंशन भुगतान और विभिन्न कारणों से अपात्र हुए पेंशनर्स के मामलों के निस्तारण हेतु ग्राम सभा में व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए।
शत-प्रतिशत पेंशनर्स का वार्षिक सत्यापन कराया जाए तथा अपात्र पाए गए पेंशनर्स की सूची व गलत सूचना के आधार पर निरस्त प्रकरणों की जांच उपरांत पुनः प्रारंभ (री-ओपन) करने की कार्रवाई रिपोर्ट सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग को भेजी जाए।
2. किसान गिरदावरी से संबंधित बिंदु
ग्राम सभाओं में आने वाले किसानों को 'किसान गिरदावरी' मोबाइल ऐप डाउनलोड करने तथा लॉगिन प्रक्रिया की जानकारी दी जाए।
DOIT&C द्वारा तैयार स्क्रीन रिकॉर्डेड वीडियो एवं व्हाट्सएप टेम्पलेट्स का प्रचार-प्रसार किया जाए और व्हाट्सएप चैनल को फॉलो कराया जाए।
3. चारागाह विकास से संबंधित बिंदु
ग्राम पंचायतों में चारागाह और संपत्ति विवरण रजिस्टर का संधारण सुनिश्चित किया जाए।
ग्राम सभा में "एक पंचायत-एक चारागाह" एवं "एक गांव-एक चारागाह" गतिविधि के संबंध में प्रस्ताव लेकर चारागाह विकास हेतु आवश्यक कार्रवाई की जाए।
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 170 के अंतर्गत चारागाह विकास समिति का गठन/नवीनीकरण किया जाए और अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया पूरी की जाए।
4. जन योजना अभियान (पीपीसी) - सबकी योजना सबका विकास
पंचायती राज मंत्रालय, भारत सरकार के पत्र दिनांक 17.09.2025 एवं विभागीय पत्र दिनांक 25.09.2025 के अनुसार ग्राम पंचायत विकास योजनाएँ (GPDP) तैयार करने के लिए ग्राम सभा की बैठक में आवश्यक कार्रवाई की जाए।
दिनांक 15 अगस्त 2025 को ग्राम सभा के आयोजन बाबत दिशा-निर्देश
दिनांक 15 अगस्त 2025 को ग्राम सभा का आयोजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा आदेश क्रमांक एफ.15(10)पेरांवि/विधि/विशेष ग्राम सभा/2024/EFile-22379 के अंतर्गत दिनांक 15 अगस्त 2025 को राज्य की सभी ग्राम पंचायतों में आयोजित होने वाली ग्राम सभा के संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं।
ग्राम सभा के मुख्य एजेंडा बिंदु
पेंशनभोगियों का सत्यापन: ग्राम सभा में पेंशनभोगियों की संपूर्ण सूची का सत्यापन किया जाना सुनिश्चित किया जाए।
मृत्यु प्रमाण-पत्र और पहचान पोर्टल: पहचान पोर्टल पर मृत्यु प्रमाण-पत्र नियमित रूप से जारी किया जाना चाहिए, जिससे प्रमाण-पत्र जारी होने के उपरांत पेंशन की स्थिति स्वतः ही अद्यतन हो जाती है।
अक्षय ऊर्जा योजनाओं का प्रचार (MNRE): पंचायती राज मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रेषित एजेंडा के अनुसार, PM Surya Ghar और PM-KUSUM जैसी नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं का प्रचार, संबलन और नामांकन।
आवारा पशुओं का प्रबंधन: आवारा पशुओं से संबंधित चुनौतियों के समाधान के लिए सामुदायिक उपाय, चरागाह/आश्रय स्थलों की पहचान, टीकाकरण और टैगिंग के लिए पशुपालन विभाग के साथ समन्वय, तथा GPDPs में प्रासंगिक गतिविधियों को शामिल करना।
पंचायत एडवांसमेंट इंडेक्स (PAI) 1.0 परिणाम: पारदर्शिता, जवाबदेही और सहभागी योजना को बढ़ावा देने के लिए ग्राम पंचायत स्तर के प्रदर्शन परिणामों को समुदाय के साथ साझा करना।
समस्त मुख्य/अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी (जिला परिषद) और विकास अधिकारी (पंचायत समिति) को निर्देशित किया गया है कि वे अपने जिले की सभी ग्राम पंचायतों में इन निर्देशों की अक्षरशः पालना सुनिश्चित करें।
श्रीमती बिला देवी, प्रशासक एवं निवर्तमान सरपंच, ग्राम पंचायत डूंगा की नांगल (सीकर) को पदमुक्त करने बाबत आदेश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग का आदेश
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज) द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ 3(50) जांच/पांक्रावि/सीकर/2025/ई-फाइल 58613 के अनुसार, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद, सीकर की जांच रिपोर्ट के आधार पर ग्राम पंचायत डूंगा की नांगल, पंचायत समिति पाटन, जिला सीकर की निवर्तमान सरपंच एवं हाल प्रशासक श्रीमती बिला देवी के विरुद्ध कार्रवाई की गई है।
मुख्य बिंदु:
जांच रिपोर्ट के तथ्य: ग्राम पंचायत के निर्माण कार्यों पर कार्यों के बोर्ड नहीं लगाए जाने के बावजूद कार्यों के बोर्ड की राशि का भुगतान किया गया। इसके अतिरिक्त, सरकारी कार्यालयों के पट्टे नियम 162 के बजाय नियम 158 के तहत जारी करने संबंधी प्रकरण में दोषी पाया गया।
पदमुक्त आदेश: विभागीय आदेश क्रमांक 13524345 दिनांक 11.02.2025 की पालना में राज्य सरकार द्वारा लिए गए विनिश्चय के क्रम में श्रीमती बिला देवी को ग्राम पंचायत डूंगा की नांगल के प्रशासक पद से पदमुक्त कर दिया गया है।
जारीकर्ता: यह आदेश (इन्द्रजीत सिंह) अतिरिक्त आयुक्त एवं शासन उप सचिव II (जांच) द्वारा सक्षम स्तर से अनुमोदित कर जारी किया गया है।
दिनांक 20 जून 2025 को विशेष ग्राम सभा आयोजित करने के संबंध में निर्देश
विशेष ग्राम सभा आयोजन निर्देश
कार्यालय जिला परिषद बाड़मेर द्वारा दिनांक 20 जून 2025 को समस्त ग्राम पंचायतों में विशेष ग्राम सभा आयोजित करने के संबंध में आदेश जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
विकास कार्य योजना: वित्तीय वर्ष 2025-26 के समस्त विकास कार्यों एवं कार्यों से संबंधित कार्ययोजना का अवलोकन एवं अनुमोदन।
पंडित दीनदयाल उपाध्याय अंत्योदय संबल पखवाड़ा: दिनांक 24 जून से 09 जुलाई 2025 तक आयोजित होने वाले पखवाड़े का प्रचार-प्रसार।
योग दिवस: दिनांक 21 जून 2025 को योग दिवस का आयोजन एवं आमजन की भागीदारी सुनिश्चित करना।
कंटीजेंसी कार्य: ग्राम सभा में जन स्वास्थ्य एवं अभि. विभाग के समर कंटीजेंसी कार्यों का सत्यापन करवाना।
समस्त विकास अधिकारी, पंचायत समिति समस्त बाड़मेर / बालोतरा को आवश्यक कार्रवाई हेतु निर्देशित किया गया है।
आबादी भूमि में भूमिहीन परिवार को भूखंड आ आवंटन एवं पट्टा जारी करने की प्रक्रिया (रांपारा नियम 1996 के नियम 158-1)
आबादी भूमि में भूमिहीन परिवारों को भूखंड आवंटन की प्रक्रिया
राज ई पंचायत पोर्टल के इस पोस्ट में राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 के नियम 158(1) के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में भूमिहीन परिवारों को आबादी भूमि में भूखंड (पट्टा) आवंटन करने की पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया और प्रपत्रों की जानकारी दी गई है।
मुख्य बिंदु एवं प्रक्रिया:
आवेदन: ग्राम पंचायत के वार्ड में निवास करने वाले भूमिहीन परिवार, जिनका भारत में कहीं भी आवासीय या कृषि भूमि का पट्टा नहीं है, वे सरपंच महोदय को निर्धारित दस्तावेजों (मतदाता पहचान पत्र/आधार कार्ड, राशन कार्ड, शपथ पत्र, बीपीएल कार्ड यदि हो) के साथ आवेदन प्रस्तुत करते हैं।
पटवारी का भूमिहीन प्रमाण पत्र: पटवार मंडल एवं तहसील स्तर पर यह प्रमाणित किया जाता है कि आवेदक का परिवार राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार भूमिहीन श्रेणी में आता है।
शपथ-पत्र: आवेदक द्वारा 50/- रुपये के स्टाम्प पेपर पर भूमिहीन होने और अन्य स्थान पर पट्टा न होने संबंधी शपथ-पत्र प्रस्तुत किया जाता है।
मौका निरीक्षण कमेटी: राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 के नियम 146 के तहत ग्राम पंचायत द्वारा वार्ड पंचों की एक कमेटी का गठन किया जाता है जो स्थल निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करती है।
आपत्ति नोटिस: नियम 148 (प्रारूप 22) के तहत आबादी भूमि के आवंटन पर आपत्तियां आमंत्रित करने के लिए नोटिस जारी किया जाता है।
रियायती दरें: नियम 158(1) के तहत अनुसूचित जाति, स्वच्छता कर्मियों, अनुसूचित जनजाति, श्रम मजदूरी पर आधारित भूमिहीन व्यक्तियों और गाड़िया लुहारों को रियायती दरों पर भूखंड आवंटित किए जाते हैं:
1000 से कम आबादी वाले गांवों में: 2 रुपये प्रति वर्ग गज
1001 से 2000 की आबादी वाले गांवों में: 5 रुपये प्रति वर्ग गज
2000 से अधिक आबादी वाले गांवों में: 10 रुपये प्रति वर्ग मीटर
पट्टा जारी करना: निर्धारित राशि ग्राम पंचायत कोष में जमा होने के पश्चात प्रपत्र-23 (ग) में विक्रय विलेख (पट्टा) जारी किया जाता है, जो कि अहस्तांतरणीय होता है।
ग्राम पंचायत में नए निर्माण कार्यों के प्रस्ताव और प्रमाण पत्र प्रारूप
ग्राम पंचायत नए निर्माण कार्यों के प्रस्ताव और प्रमाण पत्र
यह दस्तावेज़ कार्यालय ग्राम पंचायत द्वारा जारी किए जाने वाले नए निर्माण कार्यों के प्रस्ताव (परिशिष्ट-5), प्रमाण पत्र और कार्य स्थल के फोटो प्रारूप से संबंधित है। इसमें ग्राम पंचायत स्तर पर विकास कार्यों के चयन और प्रमाणीकरण के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
नए निर्माण कार्यों के प्रस्ताव (परिशिष्ट-5): कार्य का नाम, योजना का नाम, वार्षिक योजना में सम्मिलित होने की स्थिति, प्रस्तावित व्यय राशि (श्रम, सामग्री और कुल), उपलब्ध राशि, कार्य पूर्ण होने की संभावित अवधि और कार्य की आवश्यकता का विवरण।
महत्वपूर्ण शर्तें और प्रमाण पत्र:
कार्य का साइट प्लान/नक्शा या सड़क कार्य का एलाइंसमेंट संलग्न होना आवश्यक है।
निर्माण किसी व्यक्तिगत भूमि पर नहीं कराया जाएगा, बल्कि विवाद रहित पर्याप्त सार्वजनिक भूमि या आबादी भूमि पर कराया जाएगा।
प्रस्तावित कार्य सार्वजनिक लाभ हेतु उपयोगी होगा और भविष्य में भी उपयोग हो सकेगा।
संस्था/ग्राम पंचायत द्वारा स्वयं रखरखाव किया जाएगा, जिसके लिए अलग से राशि नहीं मांगी जाएगी।
यह प्रमाणित किया जाना आवश्यक है कि उक्त कार्य पूर्व में किसी अन्य योजना में स्वीकृत/निर्मित या भुगतान नहीं किया गया है।
भूमि विवरण प्रमाण पत्र: खसरा नंबर, राजस्व ग्राम, ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और राज्य सरकार के खाता संख्या का उल्लेख।
कार्य स्थल का फोटो प्रारूप: कार्य का नाम, योजना का नाम, प्रशासनिक स्वीकृत राशि और वित्तीय वर्ष के विवरण के साथ फोटो संलग्न करने का प्रावधान।
स्वामित्व योजनान्तर्गत भारतीय सर्वेक्षण से प्राप्त मैप-2 में संशोधन किये जाने के सम्बन्ध में दिशा-निर्देश
स्वामित्व योजना: मैप-2 संशोधन सम्बन्धित दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा स्वामित्व योजनान्तर्गत भारतीय सर्वेक्षण (Survey of India) से प्राप्त मैप-2 में संशोधन किये जाने के सम्बन्ध में समस्त जिला कोर्डिनेटिंग अधिकारियों और जिला परिषदों को महत्वपूर्ण निर्देश जारी किये गये हैं।
मुख्य बिंदु:
मैप 1.0 की ग्राउंड ट्रूथिंग: मैप 1.0 पर की जाने वाली ग्राउंड ट्रूथिंग की कार्यवाही हेतु दक्ष एवं विज्ञ कार्मिकों को भारतीय सर्वेक्षण विभाग में भिजवाया जाए, ताकि होने वाले संशोधनों के सम्बन्ध में आवश्यक जानकारी दी जा सके।
नक्शों में संशोधन: भारतीय सर्वेक्षण विभाग से प्राप्त ग्राउंड ट्रूथिंग नक्शों में लाल डोरा प्रदर्शित करने, आबादी का विभाजन, नई आबादी को जोड़ने, नाम में संशोधन, नया नाम जुड़वा, और ID में संशोधन आदि को सुनिश्चित किया जाए।
मैप 2.0 की जाँच प्रक्रिया: मैप 2.0 में संशोधन करवाने के लिए अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी / मुख्य कार्यकारी अधिकारी द्वारा नक्शों की पूर्ण जाँच करायी जाए और निर्धारित प्रारूप में टिप्पणी के साथ भारतीय सर्वेक्षण विभाग को भिजवाया जाए।
राजस्थान में अटल ज्ञान केंद्र की स्थापना एवं संशोधित दिशा-निर्देश
अटल ज्ञान केंद्र योजना - संशोधित दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा राज्य की प्रत्येक ग्राम पंचायत में चरणबद्ध रूप से अटल ज्ञान केंद्र स्थापित किए जाने के संबंध में आदेश एवं संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता, युवाओं के लिए करियर मार्गदर्शन, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और लोक कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी सुलभ कराने के उद्देश्य से शुरू की गई है।
योजना के मुख्य बिंदु एवं गतिविधियां:
अटल पुस्तकालय एवं वाचनालय: महापुरुषों के विचार, प्रतियोगिता परीक्षा पुस्तकें, ई-लब्रेरी और कार्यशाला सेंटर की सुविधा।
संविधान केंद्र: भारत के संविधान की प्रस्तावना, मूल अधिकार, कर्तव्य और लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रदर्शन।
सूचना सुविधा केंद्र: सरकारी योजनाओं की जानकारी, साहित्य वितरण और कानूनी प्रावधानों की जागरूकता।
डिजिटल ई-लर्निंग केंद्र: ई-कॉर्नर, ई-मित्र प्लस मशीन और पोर्टल के माध्यम से योजनाओं के ऑनलाइन आवेदन की सुविधा।
युवा मार्गदर्शन केंद्र: करियर काउंसलिंग, उच्च शिक्षा ऋण संस्थानों की जानकारी और विषय विशेषज्ञों के व्याख्यान।
भवन निर्माण एवं लागत विवरण:
प्रथम चरण में राज्य की 3 हजार से अधिक आबादी वाले 2082 ग्राम पंचायत मुख्यालयों का चयन किया गया है। भारत निर्माण सेवा केंद्र के भवनों में आवश्यकतानुसार हॉल का निर्माण किया जाएगा। प्रत्येक अटल ज्ञान केंद्र के निर्माण की कुल अनुमानित लागत 12.50 लाख रुपये होगी, जिसमें हॉल निर्माण, फर्नीचर, वायरिंग और कंप्यूटर शामिल हैं।
अटल प्रेरकों का चयन एवं मानदेय:
स्थानीय युवाओं को आउटसोर्सिंग के माध्यम से अटल प्रेरक के रूप में नियुक्त किया जाएगा। इनकी न्यूनतम योग्यता 12वीं + RS-CIT प्रमाण-पत्र और न्यूनतम आयु 18 वर्ष (दिनांक 01.04.2025 तक) निर्धारित की गई है। श्रम विभाग की अधिसूचना दिनांक 13.12.2024 के अनुसार इन्हें 9334/- रुपये मासिक मानदेय (359/- प्रतिदिन) देय होगा।
ग्राम पंचायत स्तर पर 'बर्तन बैंक' की स्थापना हेतु दिशा-निर्देश
ग्राम पंचायत स्तर पर 'बर्तन बैंक' की स्थापना एवं संचालन
स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण), पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा बजट घोषणा वर्ष 2025-26 के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में प्लास्टिक के उपयोग को कम करने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए 'बर्तन बैंक' की स्थापना हेतु संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। प्रथम चरण में एक हजार ग्राम पंचायतों में स्टील के बर्तन उपलब्ध कराए जाएंगे।
मुख्य बिंदु एवं कार्यप्रणाली:
उद्देश्य: ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी बैठकों, व्यक्तिगत, सामाजिक, धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रमों में प्लास्टिक/डिस्पोजल के स्थान पर स्टील के बर्तनों के उपयोग को बढ़ावा देना।
बर्तन सेट विवरण: प्रत्येक ग्राम पंचायत हेतु न्यूनतम 400 सेट उपलब्ध होंगे। एक सेट में 1 प्लेट, 3 कटोरी, 1 चम्मच एवं 1 गिलास (कुल 6 बर्तन) होंगे।
संचालन: बर्तन बैंक का संचालन आजीविका की महिला स्वयं सहायता समूह (SHG) द्वारा किया जाएगा।
शुल्क निर्धारण: प्रत्येक बर्तन के सेट हेतु उपयोगकर्त्ता के लिए किराया 3.00 रुपये प्रति सेट रहेगा। बीपीएल, दिव्यांग, अनुसूचित जाति/जनजाति, विधवा आदि श्रेणियों या विशेष परिस्थितियों में 50 प्रतिशत की छूट दी जा सकेगी।
वित्तीय प्रावधान: ग्राम पंचायत द्वारा GF&AR तथा RTPP Act & Rules के अनुसार अधिकतम 1.00 लाख रुपये तक की राशि से उच्च गुणवत्ता के स्टील बर्तन क्रय किए जाएंगे। यह व्यय राज्य वित्त आयोग मद से किया जाएगा।
एम.ओ.यू. (MOU): बर्तन बैंक के संचालन हेतु ग्राम पंचायत और आजीविका महिला स्वयं सहायता समूह के मध्य समझौता ज्ञापन (MOU) निष्पादित किया जाएगा।
यह दिशा-निर्देश वित्त विभाग की आई.डी. संख्या 332500493 दिनांक 24.03.2025 से अनुमोदित हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित स्वच्छता गतिविधियों के भुगतान के सम्बन्ध में दिशा-निर्देश
स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत स्वच्छता गतिविधियों के भुगतान संबंधी निर्देश
राजस्थान सरकार, निदेशालय, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण), पंचायती राज विभाग द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित स्वच्छता सुनिश्चित करने एवं संपादित स्वच्छता गतिविधियों के भुगतान के संबंध में आदेश क्रमांक एफ 12(परावि/एसबीएम/BSR Sanitation/2024-25/3037-44 दिनांक 05.02.2025 जारी किया गया है।
भुगतान की प्रक्रिया एवं मुख्य बिंदु:
ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित साफ-सफाई की व्यवस्था हेतु ग्रामीण विकास विभाग द्वारा स्थायी आदेश संख्या 1/2024 दिनांक 03.09.2024 के तहत 05 आइटम की दरों का निर्धारण कर संवेदक के माध्यम से निविदा आमंत्रित कर कार्य करवाए जाने के निर्देश दिए गए हैं।
मॉडल टेंडर डॉक्यूमेंट के बिंदु संख्या 27, 28, 31 के अनुसार संवेदक द्वारा किए जा रहे स्वच्छता कार्य का भुगतान मासिक आधार पर निम्नलिखित प्रक्रिया से होगा:
सफाई कार्य की ग्राम पंचायत के दैनिक रजिस्टर में प्रविष्टि / रिपोर्ट।
ग्राम पंचायत में ग्रामीण जल एवं स्वच्छता समिति की रिपोर्ट।
स्वच्छता कार्यों की ऑनलाइन पोर्टल लागू किए जाने पर ऐप की रिपोर्ट।
तकनीकी अधिकारी (कनिष्ठ तकनीकी सहायक, कनिष्ठ अभियंता, सहायक अभियंता) द्वारा सड़क एवं नाली सफाई का सत्यापन एवं समस्त 4 संधारित रजिस्टरों में इन्द्राज कर हस्ताक्षर करना।
उक्तानुसार संधारित रजिस्टर/लॉगबुक की प्रतिलिपि प्रतिमाह विकास अधिकारी को प्रस्तुत की जाएगी।
हस्ताक्षर रजिस्टर की छायाप्रतियां बिल के साथ संलग्न कर भुगतान किया सकेगा।
कार्यों के सम्पादन हेतु सामान्य वित्तीय एवं लेखा नियम, RTPP Act and Rules, ग्रामीण कार्य निर्देशिका, 15वां वित्त आयोग / राज्य वित्त आयोग के प्रावधान लागू होंगे।
SOP के अनुसार संबंधित तकनीकी अधिकारियों के निरीक्षण/सत्यापन/प्रमाणीकरण उपरांत उपयोगिता प्रमाण-पत्र जारी किए जाने के पश्चात राशि का समायोजन 15वें वित्त आयोग एवं अन्य के दिशा-निर्देशों के अनुसार किया जाएगा।
दिनांक 24 अप्रैल 2025 को विशेष ग्राम सभा के आयोजन और सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के वार्षिक भौतिक सत्यापन के संबंध में
विशेष ग्राम सभा आयोजन एवं सामाजिक सुरक्षा पेंशन सत्यापन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा जारी पत्र (पत्रांक एफ.15(10)पंरावि/विधि/विशेष ग्राम सभा/2024/EFile-22379, दिनांक 23-04-2025) एवं सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के पत्र दिनांक 03-04-2025 के क्रम में प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों में दिनांक 24 अप्रैल, 2025 को विशेष ग्राम सभा का आयोजन किया जाना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य बिंदु एवं निर्देश
वार्षिक भौतिक सत्यापन: सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के लाभार्थीयों की वार्षिक सत्यापन प्रक्रिया प्रति वर्ष 1 नवंबर से शुरू होती है। वर्ष 2025 के लिए शत-प्रतिशत पेंशनर्स का वार्षिक भौतिक सत्यापन दिनांक 30-04-2025 तक करवाया जाना अनिवार्य है।
पेेंशन भुगतान पर प्रभाव: निर्धारित तिथि (30 अप्रैल 2025) तक वार्षिक सत्यापन न करवाने की स्थिति में पेंशनर्स का मई, 2025 (देय माह जून, 2025) के बाद पेंशन भुगतान रोका जा सकता है।
पेंशन निरस्तीकरण पर रोक थाम: पेंशन स्वीकृतकर्ता अधिकारियों के स्तर से बिना पूर्ण जांच के पेंशन लाभार्थियों को मृत अथवा राज्य से अन्यत्र पलायन दिखाकर पेंशन निरस्त करने के मामलों की रोकथाम के लिए, ऐसे प्रकरणों में निरस्तीकरण की कार्यवाही का विशेष ग्राम सभा में अनुमोदन करवाने के पश्चात ही आगे की कार्यवाही किए जाने के निर्देश हैं।
अतः समस्त मुख्य / अति0 मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद और विकास अधिकारी, पंचायत समिति को निर्देशित किया गया है कि वे अपने जिले की सभी ग्राम पंचायतों में 24 अप्रैल, 2025 को विशेष ग्राम सभा का आयोजन कर इन निर्देशों की पालना सुनिश्चित करें।
दिनांक 21 मार्च, 2025 को विशेष ग्राम सभा के आयोजन बाबत (विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस)
विशेष ग्राम सभा आयोजन के संबंध में निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश (क्रमांक: एफ.15(10)पंरावि/विधि/वि०ग्रा०सभा/24/इफाईल 22379, दिनांकित आदेश और भारतीय मानक ब्यूरो, जयपुर शाखा के पत्रों के संदर्भ में) राज्य की सभी ग्राम पंचायतों में 21 मार्च, 2025 को विशेष ग्राम सभा आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य उद्देश्य एवं बिंदु
विशेष ग्राम सभा: विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस के उपलक्ष्य में उपभोक्ता सशक्तिकरण और जागरूकता पर चर्चा हेतु सभी ग्राम पंचायतों में विशेष ग्राम सभा का आयोजन।
बीआईएस केयर ऐप (BIS Care App): आम नागरिकों को रोजमर्रा के उपयोग में आने वाले विभिन्न उत्पादों की गुणवत्ता, भारतीय मानकों और BIS गुणवत्ता चिह्न की प्रामाणिकता की जाँच के लिए 'BIS Care App' के उपयोग की जानकारी देना।
रिपोर्टिंग: कार्यक्रम के पूर्ण होने पर कुछ फोटो, वीडियो और प्रतिभागियों की संख्या सहित व्हाट्सएप के माध्यम से श्री राजेन्द्र कुमार मीना (मोबाइल नंबर - 9636845891) को भेजना सुनिश्चित किया जाए।
प्रतिलिपि एवं सूचसूचना
यह निर्देश समस्त मुख्य/अति० मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद और विकास अधिकारी, पंचायत समिति (राजस्थान) को आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रेषित किए गए हैं।
राजस्थान पंचायती राज विभाग अधिसूचना: प्रशासक नियुक्ति एवं प्रशासनिक समितियों का गठन
अधिसूचना विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 16-01-2025 को आदेश क्रमांक एफ.15(2)प्रशासक/विधि/पंपरा/2025/05 के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण अधिसूचना जारी की गई है।
मुख्य बिंदु
पृष्ठभूमि: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा-95 के तहत, जिन ग्राम पंचायतों का कार्यकाल दिनांक 31.01.2025 तक समाप्त हो रहा है और जिनके चुनाव अपरिहार्य कारणों से संपन्न नहीं हो पा रहे हैं, उनके लिए यह व्यवस्था की गई है।
प्रशासक की नियुक्ति: ऐसी समस्त ग्राम पंचायतों में संबंधित ग्राम पंचायत के निवर्तमान सरपंच को प्रशासक नियुक्त किया गया है ताकि कार्यों का सुचारू संचालन हो सके।
प्रशासनिक समिति का गठन: प्रत्येक ऐसी ग्राम पंचायत के लिए प्रशासकीय समिति का गठन किया जाएगा, जिसमें कार्यकाल समाप्त होने से पूर्व के उप सरपंच एवं वार्ड पंच सदस्य बनाए जाएंगे।
वित्तीय शक्तियाँ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 एवं राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के तहत ग्राम पंचायत के खातों (Bank Accounts) का संचालन व वित्तीय शक्तियों का प्रयोग प्रशासक (निवर्तमान सरपंच) एवं संबंधित ग्राम विकास अधिकारी द्वारा किया जाएगा।
कार्यकाल: प्रशासक एवं प्रशासकीय समिति की कार्यविधि नवनिर्वाचन के पश्चात गठित ग्राम पंचायत की प्रथम बैठक की तारीख के ठीक पूर्ववर्ती दिन तक रहेगी।
जिला कलेक्टर्स को अधिकार: अधिनियम की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्य सरकार द्वारा समस्त जिला कलेक्टर्स को अपने जिले की संबंधित ग्राम पंचायतों में प्रशासक नियुक्त करने एवं प्रशासकीय समितियों का गठन किए जाने हेतु अधिकृत किया गया है।
राजस्थान पंचायती राज विभाग अधिसूचना: प्रशासक नियुक्ति एवं प्रशासनिक समिति का गठन
अधिसूचना विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 11-3-2025 को आदेश क्रमांक एफ.15(2)प्रशासक/विधि/पंव्रा/2025/200 जारी किया गया है। यह अधिसूचना उन ग्राम पंचायतों के संबंध में है जिनका कार्यकाल दिनांक 31.03.2025 तक समाप्त हो रहा है और जिनके चुनाव अपरिहार्य कारणों से संपन्न नहीं हो पा रहे हैं।
मुख्य बिंदु
प्रशासक की नियुक्ति: ऐसी समस्त ग्राम पंचायतों में संबंधित ग्राम पंचायत के निवर्तमान सरपंच को प्रशासक नियुक्त किया गया है।
प्रशासनिक समिति का गठन: ग्राम पंचायतों के कार्यकलापों के सुचारू संचालन हेतु प्रशासक की सहायताार्थ प्रत्येक ऐसी ग्राम पंचायत के लिए प्रशासनिक समिति का गठन किया जाएगा।
समिति के सदस्य: इस प्रशासनिक समिति में ग्राम पंचायत का कार्यकाल समाप्त होने से पूर्व वे व्यक्ति जो संबंधित ग्राम पंचायत के उप सरपंच एवं वार्ड पंच रहे हैं, सदस्य बनाए जाएंगे।
वित्तीय एवं बैंक खाते का संचालन: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 एवं राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के तहत ग्राम पंचायत के खातों (Bank Accounts) का संचालन व वित्तीय शक्तियों का प्रयोग प्रशासक (निवर्तमान सरपंच) एवं सम्बन्धित ग्राम विकास अधिकारी द्वारा किया जाएगा।
कार्यवधि: प्रशासक एवं प्रशासनिक समिति की कार्यवधि नवनिर्वाचन के पश्चात गठित ग्राम पंचायत की प्रथम बैठक की तारीख के ठीक पूर्ववर्ती दिन तक रहेगी।
जिला कलेक्टर्स को अधिकार: अधिनियम की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्य सरकार द्वारा समस्त जिला कलक्टरों को अपने जिले की संबंधित ग्राम पंचायतों में उनका कार्यकाल समाप्त होने की तिथि से प्रशासक नियुक्त करने एवं प्रशासनिक समितियों का गठन किये जाने हेतु अधिकृत किया गया है।
15वें वित्त आयोग वित्तीय वर्ष 2023-24 (टייד अनुदान द्वितीय किस्त) की राशि ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर मैनुअल रिसिप्ट वाउचर की प्रविष्टि के संबंध में
15वें वित्त आयोग के अंतर्गत टाइड अनुदान की प्रविष्टि के संबंध में निर्देश
कार्यालय जिला परिषद, बाड़मेर एवं ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा जारी पत्र के अनुसार 15वें वित्त आयोग के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए देय टाइड अनुदान की द्वितीय किस्त की राशि रुपये 872.86 करोड़ (वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए) के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
विषय: 15वें वित्त आयोग अन्तर्गत वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए देय टाइड अनुदान की द्वितीय किस्त की राशि रुपये 872.86 करोड़ राशि के ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर मैनुअल रिसिप्ट वाउचर की एंट्री खुलवाने के संबंध में।
तकनीकी कारणों से छूट: 15वें वित्त आयोग के वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए देय टाइड अनुदान की प्रथम किस्त की राशि रुपये 791.34 करोड़ पंचायती राज संस्थाओं (जिला परिषदों, पंचायत समितियों एवं ग्राम पंचायतों) को हस्तांतरित की जा चुकी है, किंतु तकनीकी कारणों से संपूर्ण राशि ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर प्रदर्शित नहीं हो रही थी।
अनुमति: पंचायती राज मंत्रालय भारत सरकार द्वारा उक्त राशि के मैनुअल रिसिप्ट दिनांक 20.02.2025 तक खोले जाने की अनुमति प्रदान की गई है।
निर्देश: 15वें वित्त आयोग अन्तर्गत वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए देय टाइड अनुदान की द्वितीय किस्त की राशि रुपये 872.86 करोड़ (वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए देय टाइड अनुदान की प्रथम किस्त की राशि रुपये 791.34 करोड़) पंचायती राज संस्थाओं यथा जिला परिषदों, पंचायत समितियों एवं ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित की गई राशि की सीमा में ही मैनुअल रिसिप्ट वाउचर की एन्ट्री किया जाना सुनिश्चित करें।
व्यक्तिगत जिम्मेदारी: उक्त राशि की सीमा से अधिक राशि का इन्ड्राज किये जाने पर संबंधित व्यक्ति व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे।
ग्राम पंचायतों में प्रशासक एवं प्रशासनिक समितियों की नियुक्ति और ई-पंचायत पोर्टल संचालन संबंधी आदेश
ग्राम पंचायतों में प्रशासक एवं प्रशासनिक समितियों की नियुक्ति
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी विभिन्न आदेशों के अनुसार, जिन ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त हो चुका है और चुनाव अपरिहार्य कारणों से संपन्न नहीं हो पा रहे हैं, उनमें व्यवस्था सुचारू रखने हेतु दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
प्रशासक की नियुक्ति: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा-95 एवं 98 के तहत, संबंधित ग्राम पंचायत के निवर्तमान सरपंच को प्रशासक नियुक्त किया जाता है।
प्रशासनिक समिति का गठन: प्रशासक की सहायताार्थ प्रत्येक ऐसी ग्राम पंचायत के लिए प्रशासनिक समिति का गठन किया जाएगा, जिसमें निवर्तमान उप सरपंच एवं वार्ड पंच सदस्य बनाए जाएंगे।
ई-पंचायत पोर्टल पर लेन-देन: ई-पंचायत पोर्टल पर राशि भुगतान की कार्यवाही प्रशासक (निवर्तमान सरपंच) एवं संबंधित ग्राम विकास अधिकारी (VDO) द्वारा संयुक्त रूप से की जाएगी। इसके लिए पोर्टल पर प्रशासकों की एस.एस.ओ. (SSO) आईडी को संबंधित विकास अधिकारी-पंचायत समिति द्वारा निष्क्रिय कर समिति द्वारा अनुमोदन सुनिश्चित करने की व्यवस्था की गई है।
कार्य अवधि: प्रशासक एवं प्रशासनिक समिति की कार्यअवधि नवर्निर्वाचन के पश्चात गठित ग्राम पंचायत की प्रथम बैठक की तारीख के ठीक पूर्ववर्ती दिन तक रहेगी।
दिनांक 26 नवम्बर 2024 को विशेष ग्राम सभा के आयोजन बाबत
संविधान दिवस (Constitution Day) के अवसर पर विशेष ग्राम सभा का आयोजन
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज) के पत्र क्रमांक एफ.15(10)पंरावि/विधि/विग्र0सभा/24/ईफाइल 22379 जयपुर, दिनांक 21.11.2024 के माध्यम से सभी मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद और विकास अधिकारी, पंचायत समिति को निर्देश दिए गए हैं कि दिनांक 26 नवम्बर 2024 को संविधान लागू होने के 75वें वर्ष के उत्सव के रूप में सभी ग्राम पंचायतों में विशेष ग्राम सभा का आयोजन किया जाए।
विशेष ग्राम सभा में आयोजित की जाने वाली मुख्य गतिविधियाँ:
संविधानिक मूल्य पर प्रश्नोत्तरी: युवा पीढ़ी को शिक्षित करने और नागरिक जिम्मेदारी की भावना को बढ़ावा देने के लिए।
स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के साथ जुड़ाव: महिलाओं को सशक्त बनाने और राष्ट्र निर्माण में उनके आवश्यक योगदान पर चर्चा।
आदिवासी समुदायों में क्षमता निर्माण (पेसा गांव): संवैधानिक अधिकारों और कानूनी हकदारी के बारे में जागरूकता बढ़ाना।
अधिकारों और कर्तव्यों पर बहस: स्थानीय निकायों में नागरिकों के अधिकारों और कर्तव्यों पर चर्चा।
इसके अतिरिक्त, क्षेत्रीय भाषा में संविधान के अमृत महोत्सव के बारे में बताना तथा संविधान की प्रस्तावना पढ़ना भी सुनिश्चित किया जाए।
विभागीय ग्रामीण कार्य निर्देशिका 2025 के बिंदु संख्या 10 एवं परिशिष्ट 2 के प्रावधानों के संबंध में मार्गदर्शन
विभागीय ग्रामीण कार्य निर्देशिका 2025 - भूमि स्वामित्व एवं मार्गदर्शन
ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न निर्माण कार्यों की तकनीकी, सुगमता और गुणवत्ता के लिए विभागीय ग्रामीण कार्य निर्देशिका-2025 लागू की गई है। इस निर्देशिका के बिंदु संख्या 10 एवं परिशिष्ट 2 के प्रावधानों के संबंध में जिला कलेक्टरों को आवश्यक मार्गदर्शन जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु एवं दिशा-निर्देश
आबादी भूमि: नए आंगनबाड़ी भवन, विद्यालय, सामुदायिक भवन, पंचायत भवन, स्वास्थ्य केंद्र, शौचालय आदि के निर्माण के लिए आबादी क्षेत्र में सक्षम प्राधिकारी से अनापत्ति प्रमाण-पत्र प्राप्त करना या नाम आवंटन/पट्टा जारी कराना आवश्यक है।
रास्ता/गोचर भूमि: नदी, नाला, तालाब के भराव क्षेत्र, रेलवे लाइन और सड़क सीमा के पास निर्माण स्वीकृत नहीं है। हालांकि सार्वजनिक शौचालयी, नालियों, ट्यूवेल, टंकी आदि के निर्माण के लिए स्थानीय स्तर पर उचित निर्णय लिया जा सकता है।
खातेदारी भूमि (दान/समर्पण): परिसम्पत्तियों के निर्माण हेतु खातेदारी भूमि दान या उपहार स्वरूप ली जा सकती है, जिसके लिए नामांतरण, खसरा में लोकेशन दर्ज करना और सीमाज्ञान करवाना अनिवार्य है।
परिसम्पत्तियों का नामकरण: नवनिर्मित परिसम्पत्तियों (जैसे आंगनबाड़ी, विद्यालय, सामुदायिक भवन, पंचायत भवन आदि) की भूमि स्वामित्व शासकीय कार्यालय/ग्राम पंचायत के नाम होना अनिवार्य है।
विमुक्त, घुमन्तु एवं अर्द्धघुमन्तु आवासहीन व्यक्तियों को भूखंड/पट्टा आवंटन के संबंध में परिपत्र एवं दिशा-निर्देश
विमुक्त, घुमन्तु एवं अर्द्धघुमन्तु आवासहीन व्यक्तियों को भूखंड आवंटन
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा विमुक्त, घुमन्तु एवं अर्द्धघुमन्तु श्रेणी के आवासहीन व्यक्तियों को नियमानुसार भूखंड और पट्टा आवंटन करने के संबंध में आवश्यक परिपत्र एवं दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
प्रमुख बिंदु
नियम का संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम-158 के अंतर्गत पंचायतें 300 वर्गगज तक की आबादी भूमि रियायती दरों या पात्र श्रेणियों के लिए निःशुल्क आवंटित कर सकती हैं।
रियायती दरें (नियम 158(2)):
1000 से कम आबादी वाले गांवों में (1991 की जनगणना): 2/- रुपये प्रति वर्ग मीटर
1001 से 2000 की आबादी वाले गांवों में (1991 की जनगणना): 5/- रुपये प्रति वर्ग मीटर
2000 से अधिक आबादी वाले गांवों में (1991 की जनगणना): 10/- रुपये प्रति वर्ग मीटर
पट्टा वितरण और कार्यक्रम: राज्य सरकार के निर्देशानुसार पात्र परिवारों को भूखंड/पट्टा वितरण के संबंध में समय-समय पर अभियान चलाए गए हैं और जिला एवं स्थानीय स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाने के निर्देश हैं।
आवश्यक कार्रवाई: सभी संबंधित जिला कलेक्टरों, मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (जिला परिषद) और विकास अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे पात्र आवासहीन परिवारों का चिन्हीकरण कर पट्टे तैयार कराने और वितरण की कार्रवाई सुनिश्चित करें।
ग्राम पंचायत द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के पात्र परिवारों को पट्टा जारी करने बाबत निर्देश
ग्राम पंचायत द्वारा पट्टा जारी करने के संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत पट्टा आवंटन के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
राज्य सरकार के ध्यान में लाया गया था कि कतिपय ग्राम पंचायतों में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की पात्रता/वरीयता सूची में सम्मिलित परिवारों को आबादी भूमि का पट्टा आवंटित नहीं हो पा रहा है।
चूंकि प्रधानमंत्री आवास योजना राज्य सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं में शामिल है, इसलिए सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है।
समस्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद को निर्देशित किया जाता है कि प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की पात्रता/वरीयता सूची में शामिल समस्त परिवारों को निर्धारित प्रक्रिया अपनाते हुए नियमानुसार भूमि/पट्टे आवश्यक रूप से आवंटित किया जाना सुनिश्चित करावें।
यह आदेश शासन सचिव एवं आयुक्त, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के हस्ताक्षर से जारी किया गया है।
ग्राम पंचायतों/पंचायत समितियों द्वारा पट्टा बही का संधारण किए जाने बाबत् परिपत्र
परिचय
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों द्वारा पट्टा बही का संधारण किए जाने के संबंध में परिपत्र जारी किया गया है। विभाग के ध्यान में आया था कि कतिपय पंचायत समिति स्तर पर ग्राम पंचायतों द्वारा जारी पट्टों का रिकॉर्ड संधारित नहीं किया जा रहा है, जिससे अनियमित पट्टे जारी होने की संभावना रहती है।
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 168 के मुख्य प्रावधान
नियम 168(1): नीलामी, परक्रामण या आवंटन द्वारा किए गए समस्त विक्रय जिनके लिए पट्टे जारी किए गए, उनका अभिलेख पंचायत द्वारा प्ररूप 24 में रखी गई पट्टा बही में रखा जाएगा।
नियम 168(2): पंचायत संबंधित पंचायत समिति के विकास अधिकारी को प्रत्येक मास के प्रथम सप्ताह में पट्टा बही की एक प्रति अग्रषित करेगी। विकास अधिकारी एक नियंत्रण रजिस्टर रखेगा जिसमें पंचायतवार लेजर रखा जाएगा और सत्यापन के प्रमाणस्वरूप प्रविष्टि पर हस्ताक्षर करेगा ताकि पिछली तारीखों में पट्टे जारी करना रोका जा सके।
नियम 168(3): पंचायत समिति अपने स्तर पर पट्टा बहियां तीन परत में छपवाएगी। सभी पट्टों पर पुस्तक संख्या व क्रम संख्या होगी। पट्टे की पहली परत आवंटी को, दूसरी परत पंचायत कार्यालय में तथा तीसरी परत पंचायत समिति को रिकॉर्ड हेतु भेजी जाएगी।
अनुपालन एवं निर्देश
समस्त संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया जाता है कि राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 168 में वर्णित प्रावधानों की पालना कड़ाई से अमल में लाई जाए। उक्त परिपत्र की अवहेलना किए जाने वाले संबंधित विकास अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
विकसित भारत संकल्प यात्रा के सफल क्रियान्वयन एवं वित्तीय प्रावधान के संबंध में दिशा-निर्देश
विकसित भारत संकल्प यात्रा का सफल क्रियान्वयन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा विकसित भारत संकल्प यात्रा के सफल क्रियान्वयन के संबंध में दिनांक 22-12-2023 को आदेश जारी किया गया है।
मुख्य उद्देश्य एवं विशेषताएँ
भारत सरकार द्वारा संचालित विभिन्न फ्लेगशिप योजनाओं की जानकारी आमजन तक पहुँचाने, पात्र व्यक्तियों को लाभान्वित करने और योजनाओं के निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने के उद्देश्य से यह यात्रा राजस्थान के सभी जिलों की प्रत्येक ग्राम पंचायत तथा 10 हजार से अधिक आबादी के शहरी स्थानीय निकायों में 26 जनवरी 2024 तक जारी रहेगी। यात्रा की प्रमुख विशेषताओं में:
पहुँच से छूटे लोगों तक पहुँचना
प्रसार और जागरूकता बढ़ाना
संभावित लाभार्थियों का नामाकन एवं विशेष कैंपों का आयोजन
प्रत्येक ग्राम पंचायत में मोबिलाइजेशन, सांस्कृतिक प्रदर्शन एवं सूचना तकनीक का उपयोग
वित्तीय प्रावधान एवं व्यय सीमा
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के आदेश क्रमांक एफ 165(07)पाइफो/एसएफसी/षष्टम/दिशा निर्देश/2021-22/100 दिनांक 25-01-2022 के अनुसार पंचायती राज संस्थाओं में शिविरों/अभियानों के लिए व्यय सीमा निर्धारित है। विकसित भारत संकल्प यात्रा के सफल क्रियान्वयन हेतु:
प्रति जिला परिषद: रु. 0.50 लाख तक का व्यय
प्रति ग्राम पंचायत: रु. 0.20 लाख तक का व्यय
संबंधित जिला परिषद एवं ग्राम पंचायतें यह व्यय षष्ठम राज्य वित्त आयोग की उपलब्ध अवशेष राशि से करना सुनिश्चित करें तथा इस कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान करें।
मदरसा व मस्जिद के पट्टे चाहने के संबंध में मार्गदर्शन बाबत आदेश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग का मार्गदर्शन
यह दस्तावेज़ ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा जारी किया गया पत्र है, जिसका क्रमांक एफ.139(78)विविध/पार्ट-1/विधि/पंज/23 है। यह पत्र अति० मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद, सीकर को संबोधित है।
मुख्य बिंदु:
विषय: मदरसा व मस्जिद के पट्टे चाहने के संबंध में मार्गदर्शन बाबत।
संदर्भ: जिला परिषद सीकर का पत्र क्रमांक 733 दिनांक 26.06.2023।
विभाग का स्पष्टीकरण: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में किसी धार्मिक संस्था को निःशुल्क पट्टा आवंटन का कोई प्रावधान नहीं है।
प्रशासन गांव के संग अभियान 2023 के दौरान पट्टा जारी करने के संबंध में निर्देश
राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2023 एवं प्रशासन गांव के संग अभियान
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा प्रशासनिक आदेश क्रमांक एफ 139 (45) परावि/विधि/संशो/2021/190 दिनांक 02/06/2023 जारी किया गया है। इसके माध्यम से राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन करते हुए महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना विवरण: विभागीय अधिसूचना दिनांक 23.5.2023 (जी.एस.आर. 28) के तहत राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2023 लागू किए गए हैं जो तुरंत प्रभाव से प्रवृत्त हो गए हैं।
नियम 157 में संशोधन: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 के उप-नियम (1) के परंतुक में "प्रशासन गांव के संग अभियान 2021" के स्थान पर "प्रशासन गांव के संग अभियान 2021 और प्रशासन गांव के संग अभियान 2023" प्रतिस्थापित किया गया है।
पट्टा जारी करने की दर: प्रशासन गांव के संग अभियान 2023 के दौरान ग्राम पंचायत द्वारा जारी किए जाने वाले पट्टों की दर/प्रभार में छूट के संबंध में उपर्युक्त अधिसूचना के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
जारीकर्ता:निशु कुमार अग्निहोत्री, उपुयक्त एवं उप शासन सचिव (प्रथम), ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
राजस्थान पंचायती राज संस्थाओं के जनप्रतिनिधियों के मानदेय और बैठक भत्तों में संशोधन (अधिसूचना 21-02-2023)
पंचायती राज जनप्रतिनिधियों के मानदेय और बैठक भत्तों में वृद्धि
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 21-02-2023 की अधिसूचना (क्रमांक: एफ.951(19)(41)प्राविवि/लेखा/नि.आ./बजट घोषणा/2022-23/210) के माध्यम से पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित सदस्यों व जनप्रतिनिधियों के मानदेय एवं बैठक भत्तों की दरों में संशोधन किया गया है। यह आदेश माननीय मुख्यमंत्री महोदय द्वारा 10.02.2023 को की गई बजट घोषणा के बिंदु संख्या 162 के क्रम में जारी किया गया है।
मानदेय की संशोधित दरें (प्रति माह):
जिला प्रमुख, जिला परिषद: वर्तमान 12,000/- रुपये से बढ़कर 13,800/- रुपये प्रति माह।
प्रधान, पंचायत समिति: वर्तमान 8,400/- रुपये से बढ़कर 9,660/- रुपये प्रति माह।
सरपंच, ग्राम पंचायत: वर्तमान 4,800/- रुपये से बढ़कर 5,520/- रुपये प्रति माह।
बैठक भत्तों की संशोधित दरें (प्रति बैठक):
सदस्य, जिला परिषद: वर्तमान 600/- रुपये से बढ़कर 690/- रुपये प्रति बैठक।
सदस्य, पंचायत समिति: वर्तमान 420/- रुपये से बढ़कर 483/- रुपये प्रति बैठक।
सदस्य, ग्राम पंचायत: वर्तमान 240/- रुपये से बढ़कर 276/- रुपये प्रति बैठक।
मुख्य बिंदु:
जनप्रतिनिधियों को देय मानदेय एवं बैठक भत्तों का भुगतान राज्य वित्त आयोग के तहत मिलने वाली अनुदान राशि से किया जाएगा। यह आदेश दिनांक 01.04.2023 से लागू होगा। यह अधिसूचना वित्त (व्यय-5) विभाग की आईडी संख्या 332300155 दिनांक 17.02.2023 से प्राप्त सहमति के अनुसरण में जारी की गई है।
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 के अंतर्गत पुराने गृहों के वि नियमितीकरण एवं पट्टा जारी करने के संबंध में दिशा-निर्देश
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश (क्रमांक: एफ.4(1) दिशा-निर्देश/विधि/पंव/2023/04, दिनांक: 11.1.23) के अनुसार राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157-पुराने गृहों के विनिियमितीकरण के अंतर्गत 300 वर्गगज एवं उससे अधिक क्षेत्रफल के भूखंड का पट्टा जारी करने के संबंध में निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
नियम संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 का नियम 157 (पुराने गृहों का विनिियमितीकरण)।
क्षेत्रफल: 300 वर्गगज संनिर्मित क्षेत्रफल से अधिक भूमि जो आवासीय परिसर के साथ उपयोग में आ रही खाली आबादी भूमि का पट्टा नियम 157(1)(ii), उपयुक्त खण्ड (i) में विनिर्दिष्ट क्षेत्रफल से अधिक क्षेत्रफल के लिए है।
शर्ते एवं प्रक्रिया: ऐसे अधिक क्षेत्रफल पर राजस्थान स्टाम्प नियम, 2004 के नियम 58 के खण्ड (ख) के अधीन गठित जिला स्तरीय समिति द्वारा सिफारिश की गई नई बाजार दरों का 25 प्रतिशत राशि जमा करके भूखंडधारी के उपयोग में आ रही कब्जा शुदा (संपूर्ण) आबादी भूमि का पट्टा जारी किया जा सकता है।
पंचायत समिति एवं ग्राम पंचायत के स्वामित्व वाली भूमियों की सूचना भेजने बाबत निर्देश
पंचायत समिति एवं ग्राम पंचायत के स्वामित्व वाली भूमियों की सूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी पत्र क्रमांक एफ.4(14)लैण्ड बैंक/विधि/पंव्रा/2022/720 दिनांक 09/06/2022 के माध्यम से सभी मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद (राजस्थान) को पंचायत समिति एवं ग्राम पंचायत के स्वामित्व वाली भूमियों की सूचना भेजने के संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य उद्देश्य एवं पृष्ठभूमि
माननीय मंत्री महोदय, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज द्वारा दिनांक 15.3.2022 को राज्य विधानसभा में चर्चा के दौरान यह घोषणा की गई थी कि ग्राम पंचायतों की भूमि का रिकॉर्ड संधारित कर लैण्ड बैंक बनाया जाएगा, जिससे पंचायतों की निजी आय में वृद्धि हो सके।
समयबद्ध कार्यवाही हेतु निर्देश
15 दिवस की अवधि: समस्त विकास अधिकारीगण अपने कार्यालय के जिम्मेदार अधिकारी/कार्मिक को पाबंद करें तथा स्वयं क्षेत्र के राजस्व अधिकारियों (तहसीलदार, पटवारी आदि) के कार्यालय से संपर्क कर पंचायत समिति/ग्राम पंचायत के स्वामित्व की भूमि (चाहे वह आ आबादी किस्म की हो अथवा कृषि या अन्य किस्म की) का संपूर्ण विवरण प्राप्त कर जमाबंदी की प्रति प्राप्त करें। यह कार्य अधिकतम 15 दिवस में पूर्ण कराया जाए।
7 दिवस की अवधि: राजस्व रिकॉर्ड से सूचना प्राप्त होने के पश्चात संलग्न प्रपत्र में पंचायतवार/पंचायत समितिवार सूचना अधिकतम 07 दिवस में आवश्यक रूप से भरवाई जाए।
कुल समयसीमा: इस प्रकार वांछित प्रपत्र हर हाल में अधिकतम 21 दिवस की अवधि में पंचायती राज विभाग को भिजवाया जाना सुनिश्चित किया जाए।
निजी भूमि खातेदारी पर सड़क निर्माण कार्य की स्वीकृति जारी करने के संबंध में आदेश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग का महत्वपूर्ण आदेश
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रामीण विकास, अनुभाग-5) द्वारा दिनांक 22 मार्च, 2022 को निजी भूमि खातेदारी पर सड़क निर्माण कार्य की स्वीकृति जारी करने के संबंध में आदेश जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
पत्र क्रमांक: एफ 27(252) ग्राविव/ग्रुप-5/SOP/पार्ट-3/2021-22, दिनांक 22 मार्च, 2022।
जारीकर्ता: अपर्णा अरोड़ा, प्रमुख शासन सचिव।
शर्त/टिप्पणी संख्या 13: सड़क निर्माण कार्य हेतु निजी भूमि पर प्रचलित आम रास्तों के लिए भूमि से संबंधित काश्तकारों से सहमति एवं नियमानुसार शपथ पत्र लेने के उपरान्त कार्य सम्पादन किया जा सकेगा।
यह शर्त विभाग की समस्त विभागीय योजनान्तर्गत प्रशासनिक स्वीकृति जारी करने पर भी प्रभावी होगी।
काश्तकारों से सहमति में सरलता हेतु विभाग द्वारा पृथक् से प्रपत्र भी जारी किया जा सकता है।
यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग राजस्थान सरकार - शासकीय भवन परिसरों में विकास कार्यों के संबंध में आदेश
राजकीय भवन परिसरों में निर्माण कार्यों के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा क्रमांक एफ 27(252)/ग्राविवि/ग्रुप-5/SOP/पार्ट-3/2021-22 दिनांक 22 मार्च, 2022 के माध्यम से एक कार्यालय आदेश जारी किया गया है।
इस आदेश का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण विकास विभाग एवं पंचायती राज विभाग की योजनाओं के अंतर्गत शासकीय भवन परिसरों (जैसे- विद्यालय, चिकित्सालय, आंगनबाड़ी केन्द्र, किसान सेवा केन्द्र, पशु चिकित्सालय आदि) में किए जाने वाले कार्यों में आने वाली बाधाओं का समाधान करना है।
मुख्य बिंदु:
समस्या: शासकीय भवन परिसरों के नाम भूमि का पट्टा जारी न होने के कारण प्रशासनिक, तकनीकी या वित्तीय स्वीकृतियां लंबे समय तक लंबित रहती हैं, जिससे निर्माण कार्य विलंबित और प्रभावित होते हैं।
समाधान: जहाँ कार्यस्थल में राजकीय भवन परिसर होना सुनिश्चित हो, वहाँ यदि राजकीय भवन परिसर के नाम भूमि का पट्टा न हो, तो उस संस्था के प्रधान या कार्यालयाध्यक्ष की सहमति/अनापत्ति के अनुरूप निर्माण कार्य कराया जा सकता है।
ग्राम पंचायतों की भूमिका: इस संबंध में ग्राम पंचायतें भी संबंधित संस्था प्रधान की सहमति से विकास कार्य की स्वीकृति जारी कर सकेंगी।
यह आदेश प्रमुख शासन सचिव अपर्णा अरोरा द्वारा जारी किया गया है तथा इसकी प्रतिलिपि सूचनाथ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु विभिन्न संबंधित अधिकारियों को प्रेषित की गई है।
परिवाद या शिकायत की जांच के संबंध में शपथ पत्र के संशोधन से जुड़ा संशोधित आदेश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग का संशोधित आदेश
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज) द्वारा परिवाद या शिकायतों की जांच के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
विभाग के आदेश क्रमांक 24 दिनांक 03.01.2018 के तहत परिवाद या शिकायत की जांच से पूर्व शपथ पत्र प्रस्तुत करने का प्रावधान किया गया था।
संशोधित आदेश क्रमांक एफ.17(ई)परावि/प्र.2/संस्था/परिपत्र/2014/1012 दिनांक 22.02.2018 के अनुसार शपथ पत्र 10 रुपये के स्थान पर 50 रुपये के नॉन ज्यूडिशियल स्टाम्प पर, शपथग्रहिता से सत्यापित संलग्न करना अनिवार्य किया गया था।
आदेश क्रमांक एफ.17(ई)परावि/प्र.2/संस्था/परिपत्र/2014/461 दिनांक 02.03.2022 के तहत यह पुन: निर्देशित किया गया है कि परिवाद के साथ सत्य होने व आवेदक के परिचय बाबत शपथ पत्र 50 रुपये के नॉन ज्यूडिशियल स्टाम्प पर शपथग्रहिता से सत्यापित होना अनिवार्य है, क्योंकि 50 रुपये के स्टाम्प संलग्न न होने से अनावश्यक शिकायतें प्राप्त हो रही थीं।
शिकायत या परिवाद के साथ 50 रुपये के नॉन ज्यूडिशियल स्टाम्प पर शपथ पत्र प्रस्तुत करने बाबत आदेश
परिवाद एवं शिकायतों के संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज) द्वारा आदेश क्रमांक एफ 17(ई)पसवि/प्र.2/संस्था/परिपत्र/2014/461, दिनांक 02/03/2022 जारी किया गया है।
इस आदेश के अनुसार, किसी भी परिवाद अथवा शिकायत की जांच करने से पूर्व यह अनिवार्य किया गया है कि परिवाद के साथ परिवाद के सत्य होने व आवेदक के परिचय बाबत 50 रुपये के नॉन ज्यूडिशियल स्टाम्प पर शपथग्रहिता से सत्यापित शपथ पत्र संलग्न किया जाए।
मुख्य बिंदु:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
दिनांक: 02/03/2022
आदेश क्रमांक: एफ 17(ई)पसवि/प्र.2/संस्था/परिपत्र/2014/461
नियम: परिवाद या शिकायत की जांच से पहले 50 रुपये के नॉन ज्यूडिशियल स्टाम्प पर शपथ पत्र संलग्न करना अनिवार्य है।
उद्देश्य: कार्यालयों में अनावश्यक शिकायतों को प्राप्त होने से रोकना और निर्धारित प्रक्रिया का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करना।
33 केवी जी.एस.एस. बागावास अहिरान हेतु भूमि आवंटन के संबंध में परिपत्र
भूमि आवंटन के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज) द्वारा 33 केवी जी.एस.एस. बागावास अहिरान हेतु भूमि आवंटन के संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं।
राजस्थान पंचायती राज विभाग 1996 के नियम 162(2) के प्रावधानों के अनुसार सरकारी संस्थाओं को ही निःशुल्क भूमि आवंटन किये जाने का प्रावधान है।
विद्युत वितरण निगम लिमिटेड इस श्रेणी में नहीं आता है।
यदि इस निगम को जी.एस.एस. हेतु पंचायत की उक्त आबादी भूमि की आवश्यकता है, तो वांछित भूमि संबंधित ग्राम पंचायत से नियमानुसार क्रय कर सकता है।
यह सक्षम स्तर से अनुमोदित है।
प्रशासन गांवों के संग अभियान-2021 के दौरान जारी पट्टों के संबंध में मार्गदर्शन
प्रशासन गांवों के संग अभियान-2021 दिशा-निर्देश
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा पट्टों के संबंध में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन जारी किया गया है। यह पत्र क्रमांक एफ.4(13)मार्गदर्शन/विधि/पंवरा/2021/960 दिनांक 30.11.2021 को जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
विषय: प्रशासन गांवों के संग अभियान-2021 के दौरान जारी किये जाने वाले पट्टों के संबंध में मार्गदर्शन।
निर्देश: पट्टों के हस्तांतरण एवं नामांतरण के संबंध में स्पष्ट किया गया है कि हस्तांतरण एवं नामांतरण के प्रकरणों में नया पट्टा जारी नहीं किया जाकर, अन्तरण की प्रविष्टि मूल पट्टे पर अंकित कर कार्यवाही की जा सकती है।
अधिकारी: यह आदेश (पी.सी. किशन) शासन सचिव, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा जारी किया गया है।
प्रशासन गांवों के संग अभियान-2021 के दौरान जारी किये जाने वाले पट्टों के संबंध में मार्गदर्शन
प्रशासन गांवों के संग अभियान-2021: पट्टों के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 26.11.2021 को आदेश क्रमांक एफ.4(13)मार्गदर्शन/विधि/पंव्रा/2021/957 जारी किया गया है। यह आदेश सभी मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद (राजस्थान) को 'प्रशासन गांवों के संग अभियान-2021' के दौरान जारी किए जाने वाले पट्टों के संबंध में मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए है।
मुख्य बिंदु:
चोरी/नष्ट/गुम हुए मूल पट्टों के संबंध में: यदि 1994 से पूर्व या राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 एवं नियम, 1996 के तहत जारी मूल पट्टा चोरी, गुम या नष्ट हो गया हो:
यदि ग्राम पंचायत के रिकॉर्ड में कार्यालय प्रति उपलब्ध है: आवेदक से FIR की प्रति, शपथ पत्र (पट्टा चोरी होने पर) या शपथ पत्र (पट्टा नष्ट/गुम होने पर) प्राप्त कर, राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के अनुसार डुप्लीकेट पट्टा जारी किया जा सकता है।
यदि ग्राम पंचायत के रिकॉर्ड में कार्यालय प्रति उपलब्ध नहीं है: FIR की प्रति, शपथ पत्र, तथा पट्टा नष्ट/गुम होने पर आवेदक का शपथ पत्र लेकर स्थानीय समाचार पत्रों में आपत्ति आमंत्रण नोटिस प्रकाशित कराया जाएगा। आपत्तियों के निस्तारण के बाद नियमानुसार नया पट्टा जारी किया जा सकता है।
मूल पट्टा प्रस्तुत किए जाने पर पुनर्विसमयकरण/विभाजन/नामान्तरण/भू-उपयोग परिवर्तन: यदि आवेदक मूल पट्टा प्रस्तुत करे और पंचायत रिकॉर्ड में कार्यालय प्रति संधारित न हो, तो आवेदक से शपथ पत्र लेकर, स्थानीय समाचार पत्रों में आपत्ति नोटिस प्रकाशित करवाकर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
आवासीय भूमि का उप-विभाजन/पुनर्गठन: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के तहत प्रारूप-52 में जारी अनुज्ञा के पश्चात संबंधित ग्राम पंचायत द्वारा आवेदक का मूल पट्टा जमा कराकर अनुज्ञा के अनुसार नया पट्टा जारी किया जाएगा।
पट्टों का पंजीयन: आवासीय पट्टों का पंजीयन प्रचलित कानूनों के तहत एक अनिवार्य विधिक प्रक्रिया है, इसमें छूट प्रदान नहीं की जा सकती।
आबादी भूमि (राजस्व रिकॉर्ड): जिन ग्राम पंचायतों में जिला कलेक्टर/उपखण्ड अधिकारी एवं तहसीलदार द्वारा आबादी हेतु कुछ खसरे दर्ज किए जा रहे हैं और उनमें पक्के मकान हैं, तो राजस्व रिकॉर्ड में ग्राम पंचायत के नाम स्वामित्व दर्ज होने पर नियममानुसार पट्टे जारी किए जा सकते हैं।
नियम-157 के तहत कार्रवाई: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के लागू होने के पश्चात की अवधि में निहित भूमि पर पात्रता रखने वाले व्यक्ति को नियम-157 के तहत प्रक्रिया पूर्ण कर पट्टा दिया जा सकता है।
ग्राम विकास अधिकारियों (VDO) के बहुआयामी भत्ते और अतिरिक्त प्रभार भत्ते के संबंध में मार्गदर्शन
ग्राम विकास अधिकारियों के भत्ते के संबंध में निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा ग्राम विकास अधिकारियों (ग्राम सेवक) को अतिरिक्त ग्राम पंचायत पर देय बहुआयामी भत्ता (विशेष भत्ता) और अतिरिक्त कार्य भत्ते के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार।
आदेश दिनांक: 22/09/2021 (क्रमांक: एफ.28(13)पंचावि/प्रशा-2/ग्राविस(ग्रासे)/अति.भत्तो/2021/2181)
भत्ते में वृद्धि: बहुआयामी कार्य की प्रकृति को देखते हुए बहुआयामी भत्ता (विशेष भत्ता) 1500/- रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 2250/- रुपये प्रतिमाह तथा अतिरिक्त कार्यभत्ता 2500/- रुपये से बढ़ाकर 3750/- रुपये प्रतिमाह दिनांक 01.10.2021 से स्वीकृत किया गया है।
अन्य निर्देश: मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद- अजमेर के पत्र दिनांक 18/10/2021 (क्रमांक एफ.28(25)पंचावि/प्रशा-2/ग्राविस संघ/मार्ग(अजमेर)/2021/2396) के अनुसार ग्राम विकास अधिकारी को अन्य ग्राम पंचायत का अतिरिक्त कार्यभार दिए जाने पर उस ग्राम पंचायत के अतिरिक्त कार्य के लिए अतिरिक्त प्रभार भत्ता एवं विशेष भत्ता देय होगा, जो बिना अधिकतम समभावधि के लिए देय होगा।
राजस्थान पंचायती राज (चतुर्थ संशोधन) नियम, 2021 - प्रशासन गांवों के संग अभियान के दौरान शुल्क में छूट
राजस्थान पंचायती राज (चतुर्थ संशोधन) नियम, 2021
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा अधिसूचना दिनांक 06 अक्टूबर, 2021 जारी कर राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन किया गया है। इसके तहत 'राजस्थान पंचायती राज (चतुर्थ संशोधन) नियम, 2021' बनाए गए हैं जो तुरंत प्रभाव से लागू हो गए हैं।
प्रमुख बिंदु:
नियम 157 का संशोधन: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 के उप-नियम (1) के अंतर्गत एक नया परंतुक जोड़ा गया है।
प्रशासन गांवों के संग अभियान 2021: इस अभियान की समयावधि के दौरान खंड (i) और (ii) के अधीन विनिर्दिष्ट दरों के पचास प्रतिशत (50%) के समतुल्य दर से ही शुल्क प्रभारित किया जाएगा।
यह आदेश राज्यपाल के आदेश से डॉ. प्रेम सिंह चारण, संयुक्त शासन सचिव द्वारा [सं. एफ.139(45)पंरावि/विधि/संशो/2021/860] के अंतर्गत जारी किया गया है।
अकुशल व अर्द्धकुशल (मेट) श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी दर पुनरीक्षित करने के संबंध में आदेश
अकुशल व अर्द्धकुशल (मेट) श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी दर पुनरीक्षित
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रामीण विकास, अनुभाग-5) द्वारा अकुशल एवं अर्द्धकुशल (मेट) श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी दर पुनरीक्षित करने के संबंध में आदेश जारी किया गया है।
प्रमुख बिंदु एवं निर्देश
पत्रांक एवं दिनांक: क्रमांक एफ 27(74) प्राविवि/अनु-5/जीकेएम/न्यूनतम मजदूरी दर/ईओ 65508/2014-16, दिनांक 10 अगस्त, 2021।
संदर्भ: श्रम विभाग की अधिसूचना क्रमांक एफ 8(5)(6) न्यूअभि/आई आर/श्रम/2000/पार्ट/15340 दिनांक 30.07.2021।
पुनरीत मजदूरी दरें: श्रम विभाग की अधिसूचना दिनांक 30.07.2021 के आधार पर, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा संपादित की जा रही विभिन्न केंद्र व राज्य प्रवर्तित योजनाओं (महात्मा गांधी नरेगा योजना को छोड़कर) में नियोजित अकुशल श्रमिक की न्यूनतम मजदूरी दर रूपए 252/- प्रति दिवस तथा अर्द्धकुशल श्रमिक (मेट) की न्यूनतम मजदूरी दर रूपए 264/- प्रति दिवस पुनरीक्षित की गई है।
प्रभावी तिथि: यह आदेश जारी होने की तिथि से प्रभावी किया गया है।
बीएसआर सॉफ्टवेयर (BSR Software) संबंधी निर्देश: वर्ष 2021-22 के वर्तमान बीएसआर सॉफ्टवेयर में इन पुनरीक्षित दरों का इन्द्राज/अपडेशन नहीं किया जाएगा।
तकमीने में अंतर राशि का प्रावधान: पुनरीक्षित न्यूनतम मजदूरी दर एवं वर्ष 2021-22 बीएसआर सॉफ्टवेयर में दर्ज न्यूनतम मजदूरी दर के अंतर राशि का भुगतान कार्य के तकमीने में पृथक से सम्मिलित करते हुए संबंधित कार्यकारी संस्था द्वारा नियमानुसार किया जावे।
अकुशल व अर्द्धकुशल (मेट) श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी दरें पुनरीक्षित करने के संबंध में
राजस्थान सरकार ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग आदेश
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रामीण विकास, अनुभाग-5) द्वारा अकुशल व अर्द्धकुशल (मेट) श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी दरें पुनरीक्षित करने के संबंध में आदेश जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
क्रमांक व दिनांक: क्रमांक एफ 27 (74) प्राविवि/अनु-5/जीकेण/न्यूनतम मजदूरी दर/ई ओ. 85598/2014-15, जयपुर दिनांक 8 फरवरी 2021।
संदर्भ: श्रम विभाग द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक एफ 8(5)(6) न्यू.म.अभि./श्रम/आई.आर./2000/पार्ट/15744 दिनांक 19.08.2020।
पुनरीक्षित मजदूरी दरें: श्रम विभाग की अधिसूचना दिनांक 19.08.2020 के आधार पर ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की विभिन्न केंद्र व राज्य प्रवर्तित योजनाओं (महात्मा गांधी नरेगा योजना को छोड़कर) में नियोजित अकुशल श्रमिक एवं अर्द्धकुशल श्रमिक (मेट) की न्यूनतम मजदूरी दरें क्रमशः रुपये 225/- व रुपये 237/- प्रति दिवस पुनरीक्षित की गई हैं। यह आदेश जारी होने की तिथि से प्रभावी है।
सॉफ्टवेयर से संबंधित निर्देश: इन दरों का इन्ड्राज/अपडेशन वर्ष 2020-21 की वर्तमान बीएसआर सॉफ्टवेयर में नहीं किया जावेगा। पुनरीक्षित न्यूनतम मजदूरी दर एवं वर्ष 2020-21 की बीएसआर सॉफ्टवेयर में दर्ज/इन्ड्राज न्यूनतम मजदूरी दर के अंतर राशि का भुगतान कार्य के तकमीने में पृथक से सम्मिलित करते हुए संबंधित कार्यकारी द्वारा अकुशल व अर्द्धकुशल (मेट) श्रमिक को कर दिया जावे।
राजस्थान में स्वामित्त्व योजना के क्रियान्वयन बाबत दिशा-निर्देश
स्वामित्त्व योजना का क्रियान्वयन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.4(1)स्वामित्त्व/विधि/पंश/2020/4046 दिनांक 07.09.2020 के अंतर्गत 'स्वामित्त्व योजना' के क्रियान्वयन के संबंध में विस्तृत निर्देश जारी किए गए हैं। इस पत्र के साथ भारत सरकार द्वारा जारी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) भी संलग्न किया गया है।
योजना का मुख्य उद्देश्य
ग्रामीण भारत में आबाद क्षेत्रों (Abadi Land) की ड्रोन सर्वेक्षण तकनीक से पैमाइश कर डिजिटल मानचित्र तैयार करना।
ग्रामीण परिवारों को 'प्रॉपर्टी कार्ड' (अधिकारों के अभिलेख) वितरित करना ताकि वे अपनी संपत्ति का उपयोग बैंक ऋण और अन्य वित्तीय लाभ प्राप्त करने के लिए कर सकें।
ग्राम पंचायतों में संपत्ति कर और संपत्ति रजिस्टर को अद्यतन कर कर संग्रहण प्रणाली को सुदृढ़ बनाना।
ग्रामीण संपत्ति से जुड़े आपसी विवादों और अदालतों में लम्बित मुकदमों के त्वरित निराकरण का मार्ग प्रशस्त करना।
प्रमुख प्रक्रिया एवं चरण (Standard Operating Procedure)
CORS नेटवर्क की स्थापना: पायलट चरण के तहत राजस्थान और पंजाब राज्यों में सतत प्रचलित संदर्भ स्टेशन (CORS) नेटवर्क की स्थापना।
तैयारी की गतिविधियां: कलेक्टर/सक्षम प्राधिकारी द्वारा सार्वजनिक नोटिस के माध्यम से सर्वेक्षण क्षेत्र की अधिसूचना, ग्राम सभा का आयोजन, और राजस्व विभाग एवं ग्राम पंचायत अधिकारियों द्वारा सीमाओं का चूना लाइनों से चिह्नीकरण।
ड्रोन सर्वेक्षण एवं डेटा प्रोसेसिंग: भारतीय सर्वेक्षण विभाग (Survey of India) द्वारा ड्रोन के माध्यम से हवाई तस्वीरें लेना और जीआईएस (GIS) लैब में डेटा प्रोसेसिंग कर ऑर्थो-रेक्टिफाइड इमेज (ORI) तथा लैंड पार्सल मैप्स (LPM) तैयार करना।
दावा और आपत्ति निस्तारण: ग्राम सभा, भूस्वामियों और राजस्व अधिकारियों की मदद से स्वामित्व का सत्यापन तथा प्राप्त आपत्तियों का निस्तारण।
प्रॉपर्टी कार्ड का वितरण: राजस्व विभाग द्वारा अंतिम मानचित्रों और टेक्स्ट डेटा के आधार पर ग्रामीणों को प्रॉपर्टी कार्ड जारी करना।
संबंधित विभाग एवं अधिकारी
इस योजना के क्रियान्वयन में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राज्य राजस्व विभाग, भारतीय सर्वेक्षण विभाग (Survey of India), और पंचायती राज संस्थाएं (सरपंच, पंचायत सचिव, ग्राम सेवक) संयुक्त रूप से कार्य कर रहे हैं।
आबादी भूमि पर से अतिक्रमण हटाने बाबत महत्वपूर्ण निर्देश
आबादी भूमि पर से अतिक्रमण हटाने बाबत निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा आबाती भूमि पर से अतिक्रमण हटाने के संबंध में आदेश जारी किया गया है।
निर्देश: मुख्यमंत्री सूचना तंत्र पर पंचायती राज विभाग के जन घोषणा पत्र में बिंदु संख्या 27.8.04 के अनुसार अतिक्रमणियों पर शिकंजा कसा जाएगा एवं जमीनों के मामलों में धोखाधड़ी रोकने के लिए संबंधित अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी एवं हाउसिंग सोसाइटियों की जिम्मेदारी सुनिश्चित की जाएगी की पालना सुनिश्चित की जानी है।
नियम संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम-165 के अन्तर्गत उपरोक्तानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
यह पत्र मगनलाल योगी, आयुक्त एवं संयुक्त शासन सचिव (प्रथम) द्वारा जारी किया गया है तथा समस्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद को प्रेषित किया गया है।
विशेष आवासीय पट्टा एवं भू-खण्ड आवंटन अभियान बाबत निर्देश
विशेष आवासीय पट्टा / भू-खण्ड आवंटन अभियान
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा क्रमांक एफ.4(4)पट्टा अभि/विधि/पंव्रा/2019/200 दिनांक 19.02.2019 (22.2.19) के तहत विशेष आवासीय पट्टा/भू-खण्ड आवंटन अभियान के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
अभियान के मुख्य बिंदु:
राज्य में विशेष अभियान चलाकर पंचायतों के पट्टाहीन पात्र व्यक्तियों को आबादी भूमि के पट्टे एवं भू-खण्डहीन पात्र व्यक्तियों को भू-खण्ड आवंटित किए जाएंगे।
अभियान के लिए जिला स्तर पर संबंधित जिला कलेक्टर प्रभारी होंगे।
ग्राम पंचायतों को उनकी आबादी भूमि का सीमाज्ञान करवाना सुनिश्चित किया जाए ताकि पट्टे आवंटन में समस्या न आए।
जहाँ ग्राम पंचायतों के पास आबादी भूमि उपलब्ध नहीं है, वहाँ सिवायचक भूमि या राज्य सरकार के स्वामित्व की अन्य उपयोग की भूमि का उपयोग परिवर्तन कर आवंटन हेतु उपलब्ध कराई जाए, किंतु चारागाह भूमि को आवश्यकतानुसार नियमानुसार रूपांतरित किया जाए।
पट्टा/भू-खण्ड आवंटन से संबंधित लंबित प्रकरणों की सूची कारणों सहित तीन दिवस की अवधि में जिला परिषद को प्राप्त कर मुख्य कार्यकारी अधिकारी स्तर से मार्गदर्शन दिया जाए।
प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के पात्र परिवारों को प्राथमिकता प्रदान करते हुए आवासीय पट्टा उपलब्ध कराया जाना सुनिश्चित करें।
बेरों (खेतों में कुओं) पर सड़क, सीसी सड़क एवं अन्य विकास कार्यों के संबंध में दिशा-निर्देश
राजस्थान सरकार ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग का महत्वपूर्ण पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रामीण विकास, अनुभाग-5), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश (क्रमांक एफ 27(212)ग्रावि/ग्रुप-5/पीएमजीवाई/अभि./बेरों पर निर्माण/2018-19 जयपुर, दिनांक जुलाई 2018) के माध्यम से बेरों (खेतों में कुओं) पर सड़क, सीसी सड़क एवं अन्य विकास/निर्माण कार्यों के संबंध में स्थिति स्पष्ट की गई है।
मुख्य बिंदु एवं दिशा-निर्देश
अपना खेत अपना काम: व्यक्तिगत लाभ के कार्य महात्मा गांधी नरेगा योजनान्तर्गत अनुमत किए गए हैं। विस्तृत दिशा-निर्देश विभागीय पत्र क्रमांक एफ 40(35)ग्रावि/नरेगा/व्यक्तिगत लाभ के कार्य/2011 दिनांक 04.05.11 व 27.05.2011 के द्वारा जारी किए गए हैं।
भूमि सुधार एवं अन्य कार्य: भूमि सुधार, कृषि वानिकी, उद्यानिकी, जल संरक्षण, लघु सिंचाई (कच्चे धोरों बनाने का कार्य, कच्चे धोरों को पक्का करने का कार्य, फार्मपॉण्ड, डिग्गी टांके, जल हॉज निर्माण, नवीन कूप निर्माण, कूप गहरा करना आदि) तथा जल भराव क्षेत्रों से पानी निकास हेतु नाली निर्माण, चेकडेम आदि कार्य महात्मा गांधी नरेगा योजनान्तर्गत अनुमत हैं।
गाँवों और ढाणियों के रास्ते: गाँवों और ढाणियों में कदमी रास्ते जो राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हैं, किन्तु लगातार उपयोग में आ रहे हैं, उन पर खंरजा, सड़क निर्माण कार्य संबंधित काश्तकारों से सहमति एवं नियमानुसार शपथ लेने के उपरान्त विभिन्न योजनान्तर्गत अनुमत हैं।
पेयजल कार्य: राजकीय भूमि के अभाव में, भूमिधारक द्वारा राज्य सरकार के पक्ष में 100/- रुपये के स्टाम्प पेपर पर सहमति पत्र जारी करने पर निजी भूमि पर पेयजल हेतु ट्यूूबवेल, हैंडपंप, पानी की टंकी तथा टांका निर्माण कार्य कराया जाना अनुमत है।
राजस्थान पंचायती राज (दूसरा संशोधन) नियम, 2018 - आ आबादी क्षेत्र में भूमि उपयोग परिवर्तन एवं भू-खंडों के उप-विभाजन संबंधित अधिसूचना
राजस्थान पंचायती राज (दूसरा संशोधन) नियम, 2018
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 10 जुलाई, 2018 की अधिसूचना (जी.एस.आर.61) के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन करते हुए नया 'अध्याय-9क' अंतःस्थापित किया गया है। यह दस्तावेज मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी भूमि के उपयोग परिवर्तन और भू-खंडों के उप-विभाजन या पुनर्गठन से संबंधित है।
मुख्य बिंदु और विशेषताएँ:
नया अध्याय-9क: आबादी क्षेत्र में भूमि के उपयोग का परिवर्तन और भू-खंडों के उप-विभाजन/पुनर्गठन की प्रक्रिया का विस्तृत प्रावधान।
प्रारूप 48: किसी व्यक्ति द्वारा आबादी क्षेत्र में भूमि उपयोग परिवर्तन के लिए प्राधिकृत अधिकारी को आवेदन करने हेतु निर्धारित प्रारूप।
संपरिवर्तन प्रभार (Conversion Charges): गैर-आवासीय प्रयोजनों (जैसे वाणिज्यिक, औद्योगिक, संस्थागत, चिकित्सा सुविधा आदि) के लिए संपरिवर्तन प्रभार की दरें निर्धारित की गई हैं।
प्रारूप 51: गाँव के आबादी क्षेत्र में स्थित भूमि के भू-खंडों के उप-विभाजन या पुनर्गठन की अनुज्ञा प्राप्त करने के लिए आवेदन।
अभिलेख संधारण: प्रत्येक पंचायत द्वारा 'प्रारूप 53' में गाँव के पंचायत क्षेत्र के भीतर स्थित आबादी भूमि का अभिलेख (आबादी भूमि का रजिस्टर) रखा जाएगा।
यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र में दिनांक 10 जुलाई, 2018 को प्रकाशित की गई थी और इसके तहत नए प्रारूप (प्रारूप 48 से प्रारूप 53) जोड़े गए हैं ताकि ग्राम पंचायतों में भूमि उपयोग परिवर्तन और उप-विभाजन से जुड़े कार्यों का सुचारू संचालन किया जा सके।
अकुशल एवं अर्द्धकुशल श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी दरों में पुनरीक्षण के संबंध में आदेश
अकुशल एवं अर्द्धकुशल (मेट) श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी दर पुनरीक्षित
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा अकुशल एवं अर्द्धकुशल (मेट) श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी दरों में पुनरीक्षण के संबंध में आदेश जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
न्यूनतम मजदूरी दर: श्रम विभाग की अधिसूचना दिनांक 07.06.2018 के आधार पर, महात्मा गांधी नरेगा योजना को छोड़कर अन्य ग्रामीण विकास एवं राज्य प्रवर्तित योजनाओं में नियोजित अकुशल श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी रुपये 213/- प्रति दिवस तथा अर्द्धकुशल (मेट) श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी रुपये 223/- प्रति दिवस पुनरीक्षित की गई है।
प्रभावी तिथि: यह आदेश जारी होने की तिथि से प्रभावी है।
बीएसआर सॉफ्टवेयर (BSR Software) संबंधी निर्देश: वर्ष 2018-19 के बीएसआर (BSR) ऑनलाइन सॉफ्टवेयर में इन पुनरीक्षित दरों का इंदराज/अपडेशन नहीं किया गया है। अतः पुनरीक्षित न्यूनतम मजदूरी दर एवं वर्ष 2018-19 की बीएसआर सॉफ्टवेयर में दर्ज न्यूनतम मजदूरी दर के अंतर की राशि का भुगतान कार्य के तकमीने में पृथक से सम्मिलित करते हुए संबंधित कार्यकारी संस्था द्वारा किया जाएगा।
राजस्थान पंचायती राज (पंचम संशोधन) नियम, 2017 - अधिसूचना
राजस्थान पंचायती राज (पंचम संशोधन) नियम, 2017
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना (क्रमांक: जी.एस.आर.98, संख्या एफ.4(7)अमे/रूल्स/लीगल/पी.आर./2017/1457, दिनांक 22 नवम्बर 2017) के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
नियम का नाम: ये नियम राजस्थान पंचायती राज (पंचम संशोधन) नियम, 2017 कहलाएंगे और राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से प्रवृत्त होंगे।
नियम 21 का संशोधन: नियम 21 के उप-नियम (1) और उप-नियम (2) में अधिकारियों जैसे मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद, विकास आयुक्त के स्थान पर 'सक्षम प्राधिकारी' अभिव्यक्ति प्रतिस्थापित की गई है।
नया नियम 167-क का अंतःस्थापन: नियम 167 के पश्चात नया नियम '167-क. विक्रय विलेख, पट्टा या पट्टा विलेख का पुनर्विधिमान्यकरण' जोड़ा गया है।
पुनर्विधिमान्यकरण की प्रक्रिया: पंचायत द्वारा जारी किए गए विक्रय विलेख, पट्टा या पट्टा विलेख के पुनर्विधिमान्यकरण के लिए कोई भी व्यक्ति मूल दस्तावेजों और राज्य सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट फीस के साथ आवेदन कर सकेगा। पंचायत अपने अभिलेखों से समाधान करने के पश्चात इसे पुन: विधिमान्य कर सकेगी और इस प्रभाव का पृष्ठांकन करेगी।
राजस्थान पंचायती राज (पंचम संशोधन) नियम, 2017 - अधिसूचना
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या जी.एस.आर.98 (क्रमांक एफ.4(7) अमे/रूल्स/लीगल/पी.आर./2017/1457, दिनांक 22 नवम्बर 2017) के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन किए गए हैं। इन्हें राजस्थान पंचायती राज (पंचम संशोधन) नियम, 2017 कहा गया है। यह राजपत्र में प्रकाशन की तिथि (23 नवम्बर 2017) से प्रवृत्त हो गए हैं।
मुख्य बिंदु एवं संशोधन
नियम 21 का संशोधन: नियम 21 के उप-नियम (1) और उप-नियम (2) में अधिकारियों के पदों के स्थान पर अब "सक्षम प्राधिकारी" अभिव्यक्ति को प्रतिस्थापित किया गया है।
नया नियम 167-क अंतःस्थापित: नियमों में नया नियम 167-क जोड़ा गया है जो विक्रय विलेख, पट्टा या पट्टा विलेख का पुनर्वितिमान्यकरण से संबंधित है।
पुनर्वितिमान्यकरण की प्रक्रिया: पंचायत द्वारा जारी किए गए विक्रय विलेख, पट्टा या पट्टा विलेख का पुनर्वितिमान्यकरण कराने के इच्छुक व्यक्ति को मूल दस्तावेज और राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर विनिर्दिष्ट फीस के साथ पंचायत में आवेदन करना होगा।
पंचायत अपने अभिलेख से समाधान करने के पश्चात विक्रय विलेख, पट्टा या पट्टा विलेख को पुन: विधिमान्य कर सकेगी और इस प्रभाव का पृष्ठांकन करेगी।
यह आदेश राज्यपाल के आदेश से राजेन्द्र शेखर मक्कड़, शासन उप सचिव द्वारा जारी किया गया है।
अकुशल व अर्द्धकुशल (मेट) श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी दर पुनरीक्षित करने के संबंध में आदेश
अकुशल व अर्द्धकुशल श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी दर पुनरीक्षण
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रामीण विकास, अनुभाग-5) द्वारा दिनांक 13 अक्टूबर 2017 का आदेश जारी किया गया है, जिसका क्रमांक एफ 27 (74) ग्राविवि/अनु-5/जीकेएन/न्यूनतम मजदूरी दर/ई.ओ. 65598/2014-15 है।
मुख्य बिंदु:
संदर्भ: श्रम विभाग द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक एफ 5(6) न्यू.म./श्रम/2000/पार्ट/11232 एवं 11276 दिनांक 03.07.2017।
पुनरीक्षित दरें: महात्मा नरेगा योजना को छोड़कर, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा संपादित की जा रही विभिन्न केन्द्र व राज्य प्रवर्तित योजनाओं में नियोजित अकुशल श्रमिक की न्यूनतम मजदूरी दर रुपये 207/- प्रति दिवस तथा अर्द्धकुशल श्रमिक (मेट) की न्यूनतम मजदूरी दर रुपये 217/- प्रति दिवस पुनरीक्षित की गई है।
प्रभावी तिथि: यह आदेश जारी होने की तिथि से प्रभावी है।
बीसआर सॉफ्टवेयर संबंधी निर्देश: पुनरीक्षित न्यूनतम मजदूरी दरों का इन्ड्राज/अपडेशन वर्ष 2017-18 की बीएसआर सॉफ़्टवेयर में नहीं किया जावेगा। कार्य के तकमीने में पृथक से सम्मिलित करते हुए भुगतान किया जाएगा।
ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी भूमि पर बने आवास गृहों के पट्टे जारी किए जाने के संबंध में निर्देश
ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी भूमि पर बने आवास गृहों के पट्टे जारी करने की प्रक्रिया
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी भूमि पर बने आवास गृहों के पट्टे दिए जाने के संबंध में आदेश जारी किया गया है। यह पत्र क्रमांक फ.4(78)सिवायचक/नियमन/विधि/पंचरा/2017/1104, दिनांक 03-10-2017 को जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु एवं निर्देश:
सर्वेक्षण कार्य: ग्राम पंचायत स्तर पर ग्राम सेवक एवं पटवारी द्वारा राजस्व विभाग के परिपत्र दिनांक 07.09.2017 में वर्णित प्रावधानों के तहत दिनांक 01.01.2017 से पूर्व बने आवास गृहों का संयुक्त सर्वे किया जाएगा।
प्रमाणन दस्तावेज: 01.01.2017 से पूर्व रहने के प्रमाण हेतु राशन कार्ड, वोटर आईडी, भामाशाह कार्ड, आधार कार्ड, बिजली, पानी या टेलीफोन बिल में से किसी एक दस्तावेज का उपयोग किया जाएगा।
पात्रता शर्तें: पट्टा जारी करते समय यह ध्यान रखा जाएगा कि एक परिवार को अधिकतम 300 वर्गगज या वास्तविक क्षेत्रफल (इसमें से जो भी कम हो) का ही पट्टा दिया जाएगा। यदि उस ग्राम पंचायत में उस परिवार के पास पूर्व में ही आवासीय मकान या भूखंड है, तो पट्टा नहीं दिया जाएगा।
प्रतिबंधित श्रेणियां: राजस्थान काश्तकारी अधिनियम, 1955 की धारा 16 के अंतर्गत प्रतिबंधित भूमि, नाला, नाड़ी, जोहड़, जलप्रवाह क्षेत्र, ओरण, चारागाह भूमि, वन विभाग के अधीन भूमि तथा अन्य प्रतिबंधित क्षेत्रों को छोड़कर ही भूमि सेटअपार्ट की जाएगी।
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2017 - नियम 157 में संशोधन
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग अधिसूचना
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम सं. 13) की धारा 102 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन हेतु अधिसूचना जारी की गई है।
मुख्य बिंदु:
नियम का नाम: राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2017।
प्रवर्तन: यह राजपत्र में इसके प्रकाशन की तारीख (17 मई 2017) से प्रवृत्त होंगे।
नियम 157 का संशोधन: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 के उप-नियम (1) के खण्ड (i) के उप-खण्ड (ब) में विद्यमान अभिव्यक्ति “इन नियमों के प्रारम्भ की तारीख से ठीक पूर्ववर्ती पचास वर्षों के दौरान” के स्थान पर “31 दिसम्बर, 2016 के ठीक पूर्ववर्ती सत्तर वर्षों के दौरान” प्रतिस्थापित की गई है।
राज्यपाल के आदेश से, विष्णु कुमार गोयल, उप शासन सचिव।
पट्टा आवंटन अभियान (14 अप्रैल, 2017 से 12 जुलाई, 2017) के संबंध में निर्देश
पट्टा आवंटन अभियान निर्देश
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा पट्टा आवंटन अभियान के संबंध में पत्र जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
अभियान की अवधि: 14 अप्रैल, 2017 से 12 जुलाई, 2017 तक (90 दिवस)।
ग्राम पंचायतों द्वारा शिविर के दिन के अलावा भी इस पूरी अवधि में पट्टा/भू-खण्ड आवंटन से संबंधित आवेदन प्रार्थना-पत्र प्राप्त कर उनका निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।
प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की पात्रता/वरीयता सूची में शामिल समस्त परिवारों को निर्धारित प्रक्रिया अपनाकर भूमि/पट्टे आवश्यक रूप से आवंटित किए जाएं।
शिविरों में पटवारी, तहसीलदार एवं नायब तहसीलदार आदि की उपस्थिति सुनिश्चित कर पंचायती राज अधिकारियों को वांछित सहयोग प्रदान करने के निर्देश दिए गए हैं।
द्वितीय अपील संख्या 220/2016 - राज्य सूचना आयोग, जयपुर आदेश
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत द्वितीय अपील का निर्णय
राज्य सूचना आयोग, जयपुर द्वारा अपील संख्या 220/2016 (दिनांक 13-10-2016) के संबंध में आदेश जारी किया गया है। यह मामला श्री किशोरी लाल बनाम राज्य सूचना अधिकारी / सचिव, ग्राम पंचायत गणेश्वर, पंचायत समिति नीम का थाना, जिला सीकर से संबंधित है।
मुख्य बिंदु और निर्देश:
अपीलार्थी का आवेदन: अपीलार्थी ने दिनांक 02-05-2015 को विकास अधिकारी, पंचायत समिति नीम का थाना को प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर पंचायत समिति के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों में जनवरी 2009 से मार्च 2015 तक विभिन्न योजनाओं के तहत हुए विकास कार्यों की जानकारी मांगी थी।
सूचना का अंतरण: विकास अधिकारी द्वारा पत्र क्रमांक 2316 दिनांक 11-05-2015 को 41 पंचायतों के ग्राम सचिवों को प्रार्थना पत्र का अंतरण किया गया था।
प्रत्यार्थी का पक्ष: आयोग के नोटिस के संदर्भ में प्रत्यार्थी ने दिनांक 21-03-2016 को अपीलोत्तर प्रस्तुत कर बताया कि चाही गई सूचना पत्र दिनांक 20-10-2015 द्वारा पंजीकृत डाक से उपलब्ध करा दी गई है तथा उसकी प्रति आयोग को प्रेषित की गई है।
आयोग की टिप्पणी एवं निर्देश: सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 6 (1) के तहत आवेदक का यह दायित्व है कि वह वांछित सूचना से संबंधित लोक प्राधिकरण के लोक सूचना अधिकारी के समक्ष ही प्रार्थना प्रस्तुत करें। विकास अधिकारी द्वारा एक साथ 41 ग्राम पंचायतों के लोक सूचना अधिकारियों को धारा 6 (3) के तहत प्रार्थना पत्र का अंतरण करना अधिनियम के प्रावधानों के प्रतिकूल माना गया है।
अपील का निस्तारण: चूंकि वांछित सूचना प्रदान की जा चुकी है और अपीलार्थी सुनवाई के समय उपस्थित नहीं हुआ, अतः वर्तमान अपील को खारिज किया जाता है।
स्थायी आदेश संख्या 27/2016: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा कार्यकारी संस्था के संबंध में आदेश
स्थायी आदेश संख्या 27/2016
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रामीण विकास, अनुभाग-5) राजस्थान सरकार द्वारा जारी स्थायी आदेश संख्या 27/2016 (क्रमांक: एफ 4(10) पंरावि/पीपी/जीकेन/2014-15, दिनांक 11 अप्रैल 2016) के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी।
मुख्य बिंदु:
विभागीय स्थायी आदेश संख्या 24/2015 दिनांक 15 दिसंबर 2015 के द्वारा ग्रामीण कार्य निर्देशिका-2015 के बिन्दु संख्या 24.8 के अंतर्गत जलग्रहण विकास एवं भू-संरक्षण विभाग के कार्य कराने के लिए अधिकृत जलग्रहण समिति को जोड़ा गया था।
विभागीय परिपत्र संख्या 17/2015 द्वारा जारी ग्रामीण कार्य निर्देशिका-2015 भाग-1 को विभागीय आदेश दिनांक 22.12.2015 द्वारा स्थगित कर ग्रामीण कार्य निर्देशिका-2010 प्रभावी की गई है।
ग्रामीण कार्य निर्देशिका-2010 के बिंदु संख्या 2.3 में वर्णित कार्यकारी संस्था संबंधित योजना की मार्गदर्शिका के प्रावधान अनुसार होने का उल्लेख है।
भारत सरकार / जलग्रहण विकास एवं भू-संरक्षण विभाग द्वारा जारी मार्गदर्शिका के अनुसार कार्य कराने के लिए अधिकृत जलग्रहण समिति को भी कार्यकारी संस्था की श्रेणी में जोड़ा जाता है।
उपरोक्त आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होंगे।
स्थायी आदेश संख्या 26/2016 - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग
स्थायी आदेश संख्या 26/2016
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रामीण विकास, अनुभाग-5), राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 06 अप्रैल, 2016 का स्थायी आदेश जारी किया गया है। यह आदेश एफ- 27(252)ग्राविवि/ग्रुप-5/जीकेएन/एसओपी/2015-16 के अंतर्गत है।
इस आदेश के माध्यम से ग्राम पंचायतों और विकास अधिकारियों (पंचायत समिति) को प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति के लिए प्रदत्त शक्तियों में संशोधन किया गया है:
परिशिष्ट - 1 प्रशासनिक स्वीकृति: निर्माण कार्य की प्रशासनिक स्वीकृति (मूल) (विधायक कोष व महात्मा गांधी नरेगा के अतिरिक्त) के संबंध में ग्राम पंचायत एवं विकास अधिकारी की वित्तीय सीमाएं निर्धारित की गई हैं। नवीन स्वीकृति के लिए ग्राम पंचायत हेतु 5.00 लाख रुपये तक तथा विकास अधिकारी हेतु 5.00 लाख रुपये तक की सीमा है। रखरखाव/मरम्मत हेतु ग्राम पंचायत हेतु 0.50 लाख रुपये तथा विकास अधिकारी हेतु 2.00 लाख रुपये तक की सीमा तय की गई है।
परिशिष्ट - 2 वित्तीय स्वीकृति (संशोधित सहित): निर्माण कार्य की वित्तीय स्वीकृति (मूल) हेतु ग्राम पंचायत एवं विकास अधिकारी की वित्तीय सीमाएं दी गई हैं। नवीन स्वीकृति के लिए ग्राम पंचायत (ग्राम पंचायत के पास उपलब्ध राशि) तथा विकास अधिकारी (पंचायत समिति के पास उपलब्ध राशि) हेतु 5.00 लाख रुपये तक की सीमा है। रखरखाव/मरम्मत हेतु ग्राम पंचायत हेतु 0.50 लाख रुपये तथा विकास अधिकारी हेतु 2.00 लाख रुपये तक की सीमा है।
यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा। अधिक जानकारी के लिए प्रमुख शासन सचिव श्रीमंत पाण्डेय के हस्ताक्षर से जारी मूल आदेश का अवलोकन करें।
राजस्थान सरकार - स्थायी आदेश संख्या 25/2015: शेड्यूल्ड ऑफ़ पॉवर में संशोधन
राजस्थान सरकार ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग - स्थायी आदेश
ग्रामीण विकास (विकास, अनुभाग-5) द्वारा जारी स्थायी आदेश संख्या- 25/2015 (क्रमांक एफ-27(252)ग्राविव/ग्रुप-5/जीकेन/एसओपी/2015-16 जयपुर, दिनांक 10 मार्च, 2016) के माध्यम से ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों को प्रदत्त प्रशासनिक एवं वित्तीय शक्तियों के शेड्यूल्ड ऑफ़ पॉवर में संशोधन किया गया है।
प्रमुख बिंदु
प्रशासनिक स्वीकृति (परिशिष्ट-1): ग्राम पंचायत के पास उपलब्ध राशि के अनुसार निर्माण कार्य की प्रशासनिक स्वीकृति (मूल) नवीन स्वीकृति 10.00 लाख रुपये तक तथा रखरखाव/मरम्मत 0.50 लाख रुपये तक निर्धारित की गई है। विकास अधिकारी (पंचायत समिति के पास उपलब्ध राशि) हेतु नवीन स्वीकृति 5.00 लाख रुपये तक तथा रखरखाव/मरम्मत 2.00 लाख रुपये तक है।
वित्तीय स्वीकृति (परिशिष्ट-2): ग्राम पंचायत हेतु नवीन वित्तीय स्वीकृति 10.00 लाख रुपये तक तथा रखरखाव/मरम्मत 0.50 लाख रुपये तक है। विकास अधिकारी हेतु नवीन वित्तीय स्वीकृति 5.00 लाख रुपये तक तथा रखरखाव/मरम्मत 2.00 लाख रुपये तक है।
शर्तें एवं निर्देश: यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होंगे। सड़क निर्माण कार्य हेतु निजी भूमि पर प्रचलित आम रास्तों के संबंध में भूमि से संबंधित काश्तकारों से सहमति एवं नियमानुसार शपथ पत्र लेने के उपरांत कार्य सम्पादन किया जा सकेगा।
प्रधानमंत्री आवास योजना - ग्रामीण की पात्रता/वरीयता सूची में शामिल परिवारों को पट्टा आवंटन बाबत निर्देश
प्रधानमंत्री आवास योजना - ग्रामीण पट्टा आवंटन निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना - ग्रामीण के संबंध में आदेश जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
विषय: "प्रधानमंत्री आवास योजना - ग्रामीण" की पात्रता/वरीयता सूची में शामिल परिवारों को पट्टा आवंटन करने बाबत।
आदेश संख्या एवं दिनांक: क्र.एफ.4( )पट्टा निर्देश/विधि/पंशावि/2016/692, दिनांक 01.09.2016।
जारीकर्ता: आनन्द कुमार, शासन सचिव एवं आयुक्त, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
मुख्य निर्देश: इस योजना की पात्रता/वरीयता सूची में शामिल परिवारों को राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के प्रावधानों के अन्तर्गत निर्धारित प्रक्रिया अपनाई जाकर संबंधित को भूमि/पट्टे आवंटन की कार्यवाही तत्काल सुनिश्चित करावे, ताकि योजना सुचारू रूप से क्रियान्वित की जा सके।
ग्रामीण कार्य निर्देशिका - 2015 (भाग-1) के क्रियान्वयन को स्थगित करने बाबत आदेश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग का आदेश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रामीण विकास, अनुभाग-5), राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 22 दिसंबर 2015 को एक आदेश जारी किया गया है, जिसका क्रमांक एफ 4(10)पंरावि/पीपी/जीकेन/2014-15 है।
मुख्य बिंदु:
आदेश का उद्देश्य: विभागीय परिपत्र दिनांक 18.08.2015 के द्वारा राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 के नियम 182 (क) के क्रम में ग्रामीण कार्य निर्देशिका -2015 (भाग-1) लागू की गई थी।
क्रियान्वयन स्थगन: उक्त ग्रामीण कार्य निर्देशिका -2015 (भाग-1) के संबंध में प्राप्त सुझावों के निस्तारण कर संशोधित निर्देशिका तैयार होने तक इसके क्रियान्वयन को स्थगित किया गया है।
वैकल्पिक व्यवस्था: इस दौरान विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन हेतु पूर्व की भांति ग्रामीण कार्य निर्देशिका -2010 लागू रहेगी।
स्थायी आदेश संख्या 23/2015: ग्रामीण कार्य निर्देशिका-2015 में संशोधन संबधी आदेश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रामीण विकास, अनुभाग-5) द्वारा जारी स्थायी आदेश संख्या - 23/2015 (क्रमांक: एफ-27(71)ग्रावि/अनु-5/सरपंच ज्ञापन/2015-16, दिनांक 27 नवम्बर, 2015) के संबंध में मुख्य जानकारी निम्नलिखित है:
मुख्य बिंदु एवं उद्देश्य:
विभागीय परिपत्र संख्या 17/2015 के द्वारा जारी ग्रामीण कार्य निर्देशिका-2015 भाग-1 में संशोधन किया गया है।
निर्देशिका के निर्देश संख्या 9.6.1 - जिला स्तरीय दर निर्णायक समिति अथवा जिला स्तरीय समिति में जिले के दो सरपंच एवं दो ग्राम सेवक पदेन सचिव (कुल 4 सदस्य) शामिल किए जाते हैं।
इन सदस्यों का चयन अलग-अलग पंचायत समितियों से प्रतिवर्ष रोटेशन के आधार पर जिला कलक्टर द्वारा मनोनीत किया जाएगा।
शेष प्रावधान यथावत रहेंगे और यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होंगे।
स्थायी आदेश संख्या 22/2015: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा प्रशासनिक स्वीकृतियों के संबंध में संशोधन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार - स्थायी आदेश संख्या 22/2015
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रामीण विकास, अनुभाग-5) द्वारा दिनांक 17 नवंबर, 2015 को स्थायी आदेश संख्या 22/2015 जारी किया गया है। यह आदेश विभागीय परिपत्र संख्या- 17/2015 द्वारा जारी ग्रामीण कार्य निर्देशिका-2015, भाग-1 में संशोधन से संबंधित है।
मुख्य बिंदु एवं संशोधन
निर्देश संख्या 11.1 में संशोधन: स्वामित्व आवश्यकता एवं प्रक्रिया में परिसम्पत्तियों की श्रेणियों में से सड़क निर्माण कार्यों हेतु निजी भूमि पर प्रचलित आम रास्ते के लिए भूमि पर सम्बन्धित काश्तकारों से सहमति, शपथ-पत्र पर लेने के उपरान्त कार्य सम्पादन किया जा सकेगा।
तालिका-1 शिड्यूल ऑफ़ पावर (प्रशासनिक स्वीकृति):
कार्य/आइटम का विवरण: निर्माण कार्य की प्रशासनिक स्वीकृति (मूल) (विधायक व सांसद कोष के अतिरिक्त)।
स्वीकृतकर्ता अधिकारी/समिति: ग्राम पंचायत (ग्राम पंचायत के पास उपलब्ध राशि)।
शक्तियों की वित्तीय सीमा: नवीन स्वीकृति के लिए 5.00 लाख रुपये तक तथा रख-रखाव/मरम्मत के लिए 0.50 लाख रुपये।
शर्ते/टिप्पणियां: शर्तें/टिप्पणियां क्र.सं. 1 से 16 से यथावत लागू होंगी।
यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा।
स्थायी आदेश संख्या 24/2015: ग्रामीण कार्य निर्देशिका-2015 में संशोधन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग का स्थायी आदेश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रामीण विकास, अनुभाग-5), राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 15 दिसम्बर 2015 का स्थायी आदेश संख्या 24/2015 जारी किया गया है। यह आदेश ग्रामीण कार्य निर्देशिका-2015, भाग-1 में संशोधन के संबंध में है।
मुख्य बिंदु
परिपत्र संदर्भ: विभागीय परिपत्र संख्या 17/2015 द्वारा ग्रामीण कार्य निर्देशिका-2015, भाग-1 जारी की गई थी।
बिंदु संख्या 24 में संशोधन: निर्देशिका के बिंदु संख्या 24 (कार्यकारी संस्था / कार्य निष्पादन संख्या) में संशोधन करते हुए, अनुच्छेद 24.8 में अन्य संस्थाओं की श्रेणी में 'जलग्रहण विकास एवं भू-संरक्षण विभाग के कार्य कराने के लिए अधिकृत जलग्रहण समिति' को जोड़ा गया है।
प्रभावी तिथि: यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।
यह आदेश संबंधित अधिकारियों, जिला कलेक्टरों, मुख्य कार्यकारी अधिकारियों और विकास अधिकारियों को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित किया गया है।
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) अधिनियम, 2015 - आबादी क्षेत्र भूमि विनियमन और पट्टा प्रावधान
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) अधिनियम, 2015
विधि (विधायी प्रारूपण) विभाग (ग्रुप-2) द्वारा जारी अधिसूचना संख्या प. 2 (40) विधि/2/2015 दिनांक 8 अक्टूबर, 2015 के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) अधिनियम, 2015 (2015 का अधिनियम संख्यांक 28) प्रकाशित किया गया है। यह अधिनियम 5 जून, 2015 से प्रवृत्त हुआ समझा जाएगा।
मुख्य बिंदु और प्रावधान
अध्याय-4-क का अंतःस्थापन: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 में नया अध्याय 'किसी गांव के आबादी क्षेत्र का विनियमन' जोड़ा गया है।
धारा 107-क (भूमि के उपयोग के परिवर्तन पर निर्बन्धन): आबादी क्षेत्र की भूमि के उपयोग परिवर्तन (जैसे आवासीय से वाणिज्यिक, औद्योगिक से वाणिज्यिक आदि) के लिए राज्य सरकार या प्राधिकृत अधिकारी से अनुमति और निर्धारित संपरिवर्तन प्रभार (Conversion Charges) का प्रावधान किया गया है।
धारा 107-ख (भू-खण्डों का उप-विभाजन या पुनर्गठन): आबादी क्षेत्र में भू-खण्ड के उप-विभाजन या पुनर्गठन के लिए पूर्व अनुमति और निर्धारित शर्तों का पालन अनिवार्य किया गया है।
धारा 107-ग (कतिपय भूमियों के पट्टे की मंजूरी): विधिपूर्ण कब्जा रखने वाले व्यक्तियों को पंचायत द्वारा विहित रीति से पट्टा प्राप्त करने का प्रावधान है, जिसके लिए आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी।
धारा 107-घ (कतिपय भूमियों का व्ययन): नज़ूल भूमि या आबादी विकास हेतु आरक्षित भूमि का व्ययन पंचायत द्वारा नियमानुसार किया जाएगा।
धारा 107-च (आबादी भूमि के अभिलेख): प्रत्येक पंचायत द्वारा अपने क्षेत्र के भीतर स्थित आबादी भूमि का अभिलेख तैयार और संधारित किया जाएगा।
वसूले गए समस्त संपरिवर्तन प्रभार और अन्य प्रभार पंचायत की निधि में जमा किए जाएंगे।
स्थायी आदेश संख्या 20/2015 - ग्रामीण कार्य निर्देशिका-2015 भाग-1 में संशोधन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग - स्थायी आदेश संख्या 20/2015
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रामीण विकास, अनुभाग-5) द्वारा दिनांक 17 सितम्बर, 2015 को स्थायी आदेश संख्या- 20/2015 जारी किया गया है। यह आदेश विभागीय परिपत्र संख्या- 17/2015 द्वारा जारी ग्रामीण कार्य निर्देशिका-2015 भाग-1 के निर्देशों में संशोधन के संबंध में है।
प्रमुख संशोधन एवं बिंदु:
निर्देश संख्या- 7.1: शिड्यूूल ऑफ पॉवर्स हेतु परिशिष्ट-2 (ग्रामीण कार्य निर्देशिका-2015 भाग-1) की तालिका संख्या- 3 शिड्यूूल ऑफ पॉवर्स के तकनीकी स्वीकृति कॉलम संख्या- 6 में शर्त/टिप्पणी जोड़ी गई है कि प्राकृतिक आपदा की स्थिति में क्षतिग्रस्त कार्यों के तत्काल सम्पादन हेतु ग्राम पंचायत द्वारा एक लाख तक की तकनीकी स्वीकृति ग्रामीण कार्य निर्देशिका- 2015 के भाग-1 के निर्देश संख्या- 4.3 व 4.4 के अनुसार जारी की जा सकेगी।
निर्देश संख्या- 9.5.1: पंचायत समिति स्तरीय बाजार दर सर्वेक्षण एवं प्रस्तावक समिति में उप-निर्देश संख्या- 1 के अनुसार एक सरपंच एवं एक ग्राम सेवक (कुल 2 सदस्य) शामिल किये जाते हैं। प्रतिवर्ष रोटेशन के आधार पर इन सदस्यों का चयन विकास अधिकारी द्वारा पंचायत समिति की प्रशासन व स्थापना समिति की बैठक में लॉटरी के आधार पर किया जाएगा।
ग्रामीण कार्य निर्देशिका- 15 भाग-1 के निर्देश संख्या- 18.1: "राज्य स्तरीय तकनीकी अनुमोदन समिति में क्रम संख्या- 5 पर अंकित जिलों के आमंत्रित अधिशाषी अभियंता 3 के स्थान पर प्रत्येक संभाग से एक अधिशाषी अभियंता को प्रतिवर्ष रोटेशन के आधार पर सदस्य नियुक्त किया जाता है।"
प्रभावी तिथि: उपर्युक्त आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होंगे। आदेश पर श्रीमत पाण्डेय, प्रमुख शासन सचिव, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज के हस्ताक्षर हैं।
राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) अध्यादेश, 2014 - शौचालय संबंधी योग्यता नियम
राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) अध्यादेश, 2014
विधि (विधाई प्रारूपण) विभाग (ग्रुप-2) द्वारा दिनांक 8 दिसंबर, 2014 को राजस्थान राजपत्र में राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) अध्यादेश, 2014 (अध्यादेश संख्यांक 1) प्रकाशित किया गया है। यह अध्यादेश तत्काल प्रवृत्त होगा।
मुख्य बिंदु एवं संशोधन
राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम सं. 13) की धारा 19 में संशोधन करते हुए नया खंड अन्तःस्थापित किया गया है:
शौचालय की अनिवार्यता: घर में कार्यशील स्वच्छ शौचालय होना चाहिए और उसके परिवार का कोई भी सदस्य खुले में शौच के लिए नहीं जाता हो।
स्पष्टीकरण-II के अनुसार 'स्वच्छ शौचालय' का अर्थ: तीन दीवारों, एक दरवाजे और छत से घिरी हुई कोई जल-बंध (वाटर सील्ड) शौचालय प्रणाली या व्यवस्था।
परिवार के सदस्य का अर्थ: ऐसे व्यक्ति का/की पति/पत्नी, बच्चे और ऐसे व्यक्ति के साथ निवास कर रहे उसके माता-पिता।
यह अध्यादेश राज्यपाल कल्याण सिंह के आदेशानुसार तथा प्रमुख शासन सचिव दीपक माहेश्वरी के हस्ताक्षर से जारी किया गया है।
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2013 - नियम 159 में संशोधन
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2013
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा अधिसूचना संख्या F.4 (7)Ame./Rules/Legal/PR/2012/136 दिनांक 11-2-2013 जारी की गई है। इसके तहत राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 159 की उप-नियम (2) में संशोधन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
पंचायत आबादी क्षेत्र में गोदामों या कार्यालयों के निर्माण के लिए प्राथमिकता के आधार पर 1500 वर्ग गज तक के प्लॉट आवंटित कर सकती है।
प्राथमिक कृषि सहकारी समिति / बड़ी आकार की बहुउद्देशीय विपणन समिति (Primary Agricultural Cooperative Society/ Large Sized Multipurpose Marketing Society): उप-नियम (5) के नियम 152 के तहत बाजार मूल्य के 50% मूल्य पर।
ग्राम सेवा सहकारी समिति या क्रय विक्रय सहकारी समिति (Gram Sewa Sahakari Samiti or Kray Vikray Sahakari Samiti): राज्य सरकार के अनुमोदन के अधीन निःशुल्क (free of charge)।
राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 73 के अन्तर्गत पंचायतों की आमदनी में बढ़ोतरी करने की अपेक्षा बाबत
परिचय एवं उद्देश्य
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी पत्र क्रमांक एफ.1(11)(परावि)लेखा/निजी आय/2011-12/11186 दिनांक 7-11-2012 के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 73 के अंतर्गत ग्राम पंचायतों की निजी आय में बढ़ोतरी करने और वित्तीय स्वतंत्रता प्राप्त करने के संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु एवं निर्देश
वित्तीय स्वतंत्रता एवं निजी आय: राज्य वित्त आयोग की सिफारिश के अनुसार पंचायतों को अपनी निजी आय प्रति वर्ष 1.50 से 2.00 लाख रुपये बढ़ानी चाहिए ताकि वे कार्यों का प्रभावशाली तरीके से क्रियान्वयन कर सकें।
बजट घोषणा 2011-12: माननीय मुख्यमंत्री महोदय की बजट घोषणा के अनुसार, यदि कोई पंचायत पूर्व वर्ष के मुकाबले 2.00 लाख रुपये की निजी आय बढ़ाएगी, तो पंचायत समिति/जिला परिषद की सिफारिश के आधार पर राज्य सरकार द्वारा अतिरिक्त 2.00 लाख रुपये की मैंचिंग राशि (अनुदान) प्रदान की जाएगी।
राजस्व वृद्धि के स्रोत: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 33 और 34 के अनुसार पंचायतें सफाई, रोशनी, जल-निकास, सड़कों के रखरखाव के साथ-साथ कर, फीस, प्रमारों और शास्तियों में वृद्धि कर सकती हैं। हवेलियों, बड़े पक्के ग्रहों, ढाबों, होटलों, ऑटोमोबाइल सर्विस स्टेशनों, मरम्मत की दुकानों, पेट्रोल/डीजल पंपों आदि पर फीस उद्ग्रहित करके गैर राजस्व में वृद्धि की जा सकती है।
वाणिज्यिक डीएलसी दर: सड़क के किनारे स्थित दुकानों के संबंध में राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 (3) के अनुसार वाणिज्यिक डी.एल.सी. दर से कम से कम दोगुनी वसूली की जा सकती है या नियमानुसार बेदखली नोटिस/वाणिज्यिक पट्टा बनाकर पंचायत की आय बढ़ाई जा सकती है।
फीसों की दरें (नियम 68)
नियम 68 के अंतर्गत जनता को दी जाने वाली सेवाओं के लिए अधिकतम फीस दरें निर्धारित की गई हैं, जैसे:
आवेदन फीस: 10/- रुपये
निवास, जाति, आय प्रमाण पत्र: 20/- रुपये (अ.जा./अ.ज.जा. हेतु 5/- रुपये)
बिजली/पानी कनेक्शन हेतु अनापत्ति: 40/- रुपये (अ.जा./अ.ज.जा. हेतु 5/- रुपये)
भवन निर्माण स्वीकृति (पक्का निर्माण): 2/- रुपये प्रति वर्ग मीटर
पेट्रोल/डीजल पंप: 2500/- रुपये प्रति वर्ष
ढाबा/रेस्टोरेंट: 1000/- रुपये प्रति वर्ष
मोबाइल टॉवर: 10000/- रुपये प्रति वर्ष
अतिथि गृह/होटल/मोटल/विश्राम गृह: 5 कक्ष तक 1000/- रुपये प्रति वर्ष से लेकर 16 और अधिक कमरे तक 5000/- रुपये प्रति वर्ष
फीस/कर लागू करने एवं वसूली की प्रक्रिया
पंचायतों को साधारण बैठक में नियम 57 के अनुसार फीस निर्धारित दरों पर वसूल करने का प्रस्ताव पारित करना होगा।
नियम 58 के अनुसार आपत्तियों के लिए एक माह का नोटिस जारी किया जाएगा।
नियम 105 के तहत मांग पर्ची (प्रारूप 5) दी जाएगी और नियम 106 के तहत 15 दिन का नोटिस देकर चल संपत्ति की कुर्की की जा सकती है।
राजस्व विभाग के माध्यम से पटवारी द्वारा करों की वसूली (नियम 62, 63, 64) की जाएगी, जिसमें पटवारी 5 प्रतिशत काटकर 95 प्रतिशत राशि पंचायत के पी.डी. लेखे या पंचायत लेखे में जमा करेगा।
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2011 - शुल्क और नियमों से संबंधित अधिसूचना
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2011
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा अधिसूचना संख्या No. F.4 (7) Am/Rule/Legal/PR/2010/ 1348 दिनांक 12-8-2011 जारी की गई है। इसके माध्यम से राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
नियम 68 के तहत पंचायत द्वारा लिए जाने वाले शुल्क (Fees):
आवेदन शुल्क (Application fees): Rs. 10/-
निवास, जाति, आय प्रमाण पत्र आदि: Rs. 20/- (SC/ST के लिए 50% छूट)
उत्तराधिकार प्रमाण पत्र आदि: Rs. 40/- (SC/ST के लिए 50% छूट)
बिजली या पाईप द्वारा पानी के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC): Rs. 40/- (SC/ST के लिए 50% छूट)
आबादी भूमि क्रय हेतु आवेदन: Rs. 20/-
साइट प्लान तैयार करने और साइट निरीक्षण का खर्च: Rs. 50/-
राशन कार्ड (आवेदन पत्र और छपाई सहित): Rs. 10/-
30 दिन के बाद जन्म और मृत्यु का पंजीकरण: Rs. 20/-
भवन निर्माण की अनुमति: पक्का निर्माण के लिए Rs. 2/- प्रति वर्ग मीटर
पंचायत द्वारा पहले से स्वीकृत साइट प्लान में जोड़/बदलाव (Addition/Alteration): Rs. 100/-
बिना अनुमति अनाधिकृत निर्माण का नियममीकरण (Regularization): Rs. 10/- प्रति वर्ग मीटर (अधिकतम Rs. 1000/- तक)
पेट्रोल/डीजल पंप: Rs. 2500/- प्रति वर्ष
ढाबा/रेस्टोरेंट: Rs. 1000/- प्रति वर्ष
अन्य कोई व्यावसायिक इकाई: Rs. 200/- प्रति वर्ष
माइनिंग एनओसी के लिए प्रस्ताव: Rs. 5000/-
मोबाइल टॉवर: Rs. 10000/- प्रति वर्ष
गेस्ट हाउस/होटल/मोटेल/रेस्ट हाउस हेतु शुल्क: 5 कमरे तक Rs. 1000/- प्रति वर्ष, 6 से 10 कमरे Rs. 2500/- प्रति वर्ष, 11 से 15 कमरे Rs. 4000/- प्रति वर्ष, 16 या अधिक कमरे Rs. 5000/- प्रति वर्ष
इस अधिसूचना में बैठकों के आयोजन, समितियों, और विभिन्न नियमों के अंतर्गत वित्तीय सीमाओं और शक्तियों में भी संशोधन किए गए हैं।
राजस्थान पंचायती राज विभाग अधिसूचना: आ आबादी भूमि के विक्रय/नीलामी की पुष्टि संबंधी अधिकार
अधिसूचना विवरण
राजस्थान सरकार, पंचायती राज विभाग द्वारा जारी क्रमांक एफ.5(31)पंसंवि/विधि/संशोधितकरण/सं.आयुक्त/2011/1302, दिनांक 2-8-2011 के अंतर्गत आबादी भूमि के विक्रय और नीलामी की पुष्टि के संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु
नियम संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा 98 तथा राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 154(4)(ग) के अंतर्गत यह प्रावधान किया गया है।
संभागीय आयुक्त के अधिकार: 5.00 लाख रुपये से 10.00 लाख रुपये तक की आबादी भूमि के विक्रय/नीलामी की पुष्टि करने हेतु संभागीय आयुक्त को अधिकृत किया गया है।
राज्य सरकार स्तर पर पुष्टि: जिन भूखंडों की राशि 10.00 लाख से अधिक होगी, उनके विक्रय/नीलामी की पुष्टि हेतु प्रकरण पूर्ववत् राज्य सरकार को प्रेषित किए जाएंगे तथा पुष्टि राज्य सरकार द्वारा की जाएगी।
मुख्यमंत्री ग्रामीण बीपीएल आवास योजना एवं इंदिरा आवास योजना के अंतर्गत निःशुल्क पट्टा आवंटन के संबंध में निर्देश
मुख्यमंत्री ग्रामीण बीपीएल आवास योजना एवं इंदिरा आवास योजना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी पत्र क्रमांक एफ.4()विधि/पंचावि/2011/1134 दिनांक 1 जुलाई 2011 के माध्यम से बीपीएल परिवारों को निःशुल्क पट्टा आवंटन के संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
पट्टा आवंटन का अधिकार: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 153 के अंतर्गत कमजोर वर्गों को आवंटन का प्रावधान है जिसके तहत पंचायत सर्किल की आबादी भूमि में बीपीएल परिवारों को निःशुल्क पट्टे आवंटित करने का अधिकार ग्राम पंचायत में निहित है।
नियम 157 एवं 158: इन नियमों के अंतर्गत पट्टा आवंटन के लिए ग्राम पंचायत द्वारा संकल्प पारित कर बीपीएल परिवारों को पट्टे देने की कार्यवाही तत्काल सुनिश्चित करने के निर्देश हैं। इसके लिए नियम 145 से 156 द्वारा निर्धारित नीलामी प्रक्रिया की पालना करना आवश्यक नहीं है।
आबादी भूमि की उपलब्धता: जिला कलेक्टर से अपेक्षा की गई है कि जिन ग्राम पंचायतों के अधीन पंचायत सर्किल में आवंटन हेतु आबादी भूमि उपलब्ध नहीं है, वहां राज्य सरकार के स्वामित्व की अन्य उपयोग की भूमि को आबादी उपयोगार्थ परिवर्तित करते हुए ग्राम पंचायत को उपलब्ध कराई जाए।
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2010 - आ आबादी एवं आपत्ति अवधि संबंधित अधिसूचना
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2010
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक [No.F.4(7)Am/Rule/Legal/PR/2010/2113] दिनांक 26 नवम्बर, 2010 के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी।
मुख्य बिंदु:
नियम संशोधन: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 148 के उप-नियम (1) के परन्तुक में संशोधन किया गया है।
आपत्ति अवधि में छूट: राजस्व अभियान या प्रशासन गांवों के संघ अभियान के दौरान आपत्तियां आमंत्रित करने की अवधि एक महीने के स्थान पर सात (7) दिन होगी।
प्रारूप संशोधन: फॉर्म XXII के अंतर्गत भी नोट जोड़ा गया है कि राजस्व अभियान या प्रशासन गांवों के संघ अभियान के दौरान फाइलिंग आपत्तियां दर्ज करने की अवधि एक महीने के स्थान पर सात दिन होगी।
लागू होना: यह नियम आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशन की तिथि (30 नवम्बर, 2010) से प्रभावी हो गए हैं।
राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2007 - पट्टा नियम 158 संशोधन
राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2007
पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 18.06.2007 की अधिसूचना (क्रमांक: एफ.4(11)पीआरओडी/लॉ/रूल-एमेंड/07/2078) के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 158 में संशोधन किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
भूतपूर्व सैनिकों के लिए: पंचायत, सरहदी पंचायत समिति क्षेत्रों में भूतपूर्व सैनिकों को ग्रामीण आबादी में 150 वर्गगज तक आबादी भूमि रियायती दर पर आवंटित कर सकेगी।
घुमक्कड़ भेड़ पालकों के लिए: पंचायत, घुमक्कड़ भेड़ पालकों को 300 वर्गगज तक आबादी भूमि निःशुल्क आवंटित कर सकेगी।
विधवाओं और तलाकशुदा महिलाओं के लिए प्रावधान: इस नियम के अधीन आबंटित तीस प्रतिशत भूमि विधवाओं और तलाकशुदा महिलाओं को आबंटित की जायेगी।
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 और 158 में संशोधन - अधिसूचना दिनांक 9-4-2007
राजस्थान पंचायती राज विभाग अधिसूचना
राजस्थान सरकार के पंचायती राज विभाग द्वारा अधिसूचना क्रमांक F.4(7)/PRD/LAW/Rule-Amnd/07/1166 दिनांक 9-4-2007 जारी की गई है। इसके माध्यम से राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन किए गए हैं जिन्हें राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) नियम, 2007 कहा गया है।
मुख्य बिंदु:
नियम 157 में संशोधन: ऐसे परिवार जिनके पास कहीं भी कोई मकान या घर का प्लॉट नहीं है और जो वर्ष 2003 तक की अवधि के आवास/झोपड़ी/कच्चे घर के रूप में आबादी भूमि पर काबिज हैं, वे अधिकतम 300 वर्ग गज तक भूमि के निःशुल्क नियमन के हकदार होंगे। इस प्रकार की भूमि का पट्टा परिवार की महिला मुखिया के नाम जारी किया जाएगा।
नियम 158 में संशोधन: नियम 158 के उप-नियम (2) के अंतर्गत यह प्रावधान जोड़ा गया है कि बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे) परिवारों को आबादी भूमि के आवंटन के मामले में पंचायत भूमि निःशुल्क आवंटित कर सकेगी।
पंचायती राज नियमों के अंतर्गत अचल संपत्ति की नीलामी, पट्टा और आबाड़ी भूमि आवंटन संबंधी निर्देश
पंचायती राज अधिनियम और नियम: संपत्ति नीलामी और पट्टा दिशा-निर्देश
यह दस्तावेज़ पंचायती राज संस्थाओं के अंतर्गत अचल संपत्ति की नीलामी, बाजार कीमत निर्धारण, पुनर्विक्रय, बिक्री की पुष्टि, प्राइवेट बातचीत द्वारा आबाड़ी भूमि का अंतरण, पुराने गृहों का विनियामीकरण और कमजोर वर्गों को भूमि आबंटन से संबंधित महत्वपूर्ण नियमों की जानकारी प्रदान करता है।
मुख्य बिंदु:
नीलामी समिति (नियम 151): सरपंच, उप-सरपंच, सतर्कता समिति का अध्यक्ष, महिला/अनुसूचित जाति/जनजाति/पिछड़ा वर्ग का पंचायत द्वारा मनोनीत एक पंच, भू-राजस्व निरीक्षक या पटवारी शामिल होते हैं।
बाजार कीमत (नियम 152): विकास अधिकारी प्रत्येक वर्ष अप्रैल मास में उप-registrar कार्यालय से क्षेत्र की आबाड़ी जमीनों के सूचक दर प्राप्त करते हैं।
विक्रय की पुष्टि और अनुमोदन (नियम 154): 10,000 रुपये से अधिक की बोली के लिए पंचायत समिति (50,000 रु से अधिक), जिला परिषद (1,00,000 रु से अधिक) या राज्य सरकार (1,00,000 रु से अधिक) से पूर्व अनुमोदन प्राप्त करना आवश्यक है।
पुराने गृहों का विनियामीकरण (नियम 157): 50 वर्ष से अधिक पूर्व निर्मित मकानों हेतु 100 रुपये और 50 वर्ष के दौरान बने मकानों हेतु 200 रुपये (चयनित परिवारों के लिए राशि वसूल नहीं होगी; गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वालों के लिए भी छूट)।
कमजोर वर्गों को आबंटन (नियम 158): गांव आबादियों में 150 वर्ग गज तक की आबाड़ी भूमि अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, पिछड़े वर्गों, श्रम मजदूरों और भूमिहीन व्यक्तियों को रियायती दरों पर आबंटित की जा सकती है।
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के अंतर्गत आबाद भूमि, पट्टा और विक्रय से संबंधित प्रारूप (प्रारूप 20 से 24)
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996: आबाद भूमि और पट्टा प्रारूप विवरण
यह दस्तावेज़ राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 और राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के अंतर्गत आने वाले महत्वपूर्ण आबाद भूमि, पट्टा, और संपत्ति रजिस्टरों के प्रारूपों (प्रारूप 20 से प्रारूप 24) को स्पष्ट करता है। ग्राम पंचायतों में भूमि आवंटन, विक्रय, और संपत्ति प्रबंधन के लिए इन प्रारूपों का आधिकारिक उपयोग किया जाता है।
मुख्य बिंदु और निर्धारित प्रारूप:
प्रारूप 20 (नियम 137): भवनों और स्थावर सम्पत्तियों का रजिस्टर।
प्रारूप 21 (नियम 146): आबाद भूमि के विक्रय का रजिस्टर।
प्रारूप 22 (नियम 148): आबाद भूमि के प्रस्तावित विक्रय के सम्बन्ध में आक्षेप आमंत्रण करने का नोटिस।
प्रारूप 23 (नियम 167(1)): आबाद भूमि का विक्रय विलेख।
प्रारूप 23क (नियम 157(1)): आवासीय भूमि का पट्टा।
प्रारूप 23ख (नियम 152(2)): आबाद भूमि का आवंटन / परिवारों में के कब्जे के अस्थायी मकानों / कच्चे मकानों का नियमितीकरण (विक्रय के लिए नहीं)।
प्रारूप 23ग (नियम 158): आबाद भूमि का रियायती दर पर / निःशुल्क आवंटन।
प्रारूप 24 (नियम 168(1)): आबाद भूमि की पट्टा बही (विक्रय विलेखों का रजिस्टर)।
ग्राम पंचायत स्तर पर भूमि रिकॉर्ड, पट्टा वितरण, और नियमबद्ध आवंटन के लिए ये सभी प्रपत्र कानूनी रूप से अनिवार्य और आधिकारिक दस्तावेज हैं।
राज पंचायती राज संस्थाओं में स्थावर संपत्तियाँ, आबाद भूमि और भूखण्ड आ आवंटन नियम
अध्याय 9: स्थावर संपत्तियाँ और आबाद भूमि
यह दस्तावेज़ राज पंचायती राज संस्थाओं के अंतर्गत स्थावर संपत्तियों, आबाद भूमि, भूखंडों की नीलामी, पट्टा आवंटन, और राजस्व संवर्धन से जुड़े नियमों की विस्तृत जानकारी प्रदान करता है। इसमें ग्राम पंचायत और पंचायती राज संस्थाओं द्वारा संपत्तियों के प्रबंधन, निरीक्षण और आबाद भूमि के उपयोग से संबंधित प्रावधान शामिल हैं।
मुख्य बिंदु:
पंचायत की संपत्तियां (नियम 136): पंचायत सर्किल के आबाद क्षेत्र के भीतर आने वाली सभी सरकारी भूमियां, कॉमन भूमियां और सार्वजनिक मार्ग पंचायत में निहित होते हैं।
आबाद भूमि और भूखंडों की नीलामी (नियम 141-143): आबाद भूमि का विक्रय सामान्यतः खुली नीलामी के माध्यम से किया जाता है। आवासीय और वाणिज्यिक प्रयोजनों के लिए निर्धारित मानकों के अनुसार भूखंडों की सूची तैयार की जाती है।
कमजोर वर्गों को आबाद भूमि का आवंटन (नियम 158): अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, स्वच्छता कर्मियों, पिछड़े वर्गों, विकलांगों और बाढ़ग्रस्त परिवारों को रियायती दरों पर 150 वर्ग गज तक की आबाद भूमि का पट्टा दिया जा सकता है।
भूमि का अस्थायी उपयोग और किराए पर देना (नियम 163-164): धार्मिक उत्सवों, पशु मेलों और बाजारों के लिए आबाद भूमि के अस्थायी उपयोग हेतु पट्टा-किराया निर्धारित किया गया है। पंचायती राज भवन और दुकानें खुली नीलामी के माध्यम से पट्टे पर दी जाती हैं।
अतिक्रमण हटाना (नियम 165): सार्वजनिक भूमियों, तालाब-तलों और चरागाहों पर अतिक्रमण की जांच के लिए हर वर्ष जनवरी और जुलाई में सर्वेक्षण किया जाता है और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाती है।
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 - अवलोकन एवं मुख्य प्रावधान
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996
यह दस्तावेज़ राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 का आधिकारिक संकलन है, जिसे ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 के अंतर्गत बनाया गया है। यह नियम राज्य की त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं (ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और ज़िला परिषद) के प्रशासन, कार्यप्रणाली, ग्राम सभा, कर एवं शुल्क निर्धारण, अ आबादी भूमि के प्रबंधन, और सेवा नियमों से संबंधित विस्तृत दिशा-निर्देश प्रदान करता है।
मुख्य बिंदु:
ग्राम सभा और सतर्कता समिति (विजिलेंस कमेटी): ग्राम सभा की बैठकों का आयोजन, कोरम, एजेंडा, कार्यवाही का रिकॉर्ड और 7 सदस्यीय सतर्कता समिति के गठन व उसके कार्यों का प्रावधान।
कर, शुल्क और राजस्व: पंचायतों द्वारा भवन कर, वाटर टैक्स, वाहन कर, व्यावसायिक फसलों पर कर, और विभिन्न सेवाओं पर शुल्क (फीस) लगाने और उनकी वसूली की प्रक्रिया।
आबादी भूमि और संपत्ति प्रबंधन: आबादी भूमि के पट्टे जारी करने, पुरानी बसावटों के नियमतिकरण, भूमि आवंटन, नीलामी समिति और उप-विभाजन (सब-डिवीजन) के नियम।
कार्य, अनुबंध और खरीदारी: वार्षिक कार्य योजना (एनुअल एक्शन प्लान), निर्माण कार्यों के निष्पादन, ठेकेदारों पर प्रतिबंध और सामग्री की खरीद के लिए पारदर्शी प्रक्रिया (बी.एस.आर. और निविदाएं)।
बजट, लेखा और लेखापरीक्षा (ऑडिट): बजट का निर्माण, कैलेंडर, रोकड़ बही (कैश बुक), वित्तीय औचित्य के मानक और स्थानीय निधि संपरीक्षा अधिनियम के तहत ऑडिट का प्रावधान।
स्थापना और सेवा नियम: पंचायती राज संस्थाओं में विभिन्न श्रेणियों के पदों, भर्ती, आरक्षण, वरिष्ठता, परिवीक्षा काल और अनुशासनात्मक कार्रवाई के नियम।
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 - महत्वपूर्ण नियम और दिशा-निर्देश
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 का सारांश
राज्य सरकार ने राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धाराओं और शक्तियों के तहत राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 बनाए हैं। यह दस्तावेज पंचायती राज संस्थाओं, ग्राम सभा, सतर्कता समितियों, कर निर्धारण, कार्यभार हस्तांतरण, बजट, लेखा और लेखापरीक्षा से संबंधित नियमों का विस्तृत विवरण प्रदान करता है।
मुख्य बिंदु:
ग्राम सभा और बैठकें: प्रत्येक वर्ष कम से कम दो ग्राम सभाओं का आयोजन किया जाना अनिवार्य है। बैठक का स्थान पंचायत कार्यालय या सुविधाजनक सार्वजनिक स्थल होगा। बैठक के नोटिस का प्रकाशन कम से कम 15 दिन पूर्व किया जाना आवश्यक है।
सतर्कता समितियाँ: वित्तीय वर्ष के प्रथम त्रimas में आयोजित होने वाली ग्राम सभा में सतर्कता समिति के गठन का प्रावधान है। इसका उद्देश्य विकास क्रिया-कलापों का त्वरित कार्यान्वयन और निधियों के दुरुपयोग को रोकना है।
कर और फीस का अधिरोपण: पंचायतें अधिनियम के तहत विभिन्न कर, फीस और उपकर (जैसे भवन कर, यात्री कर, वाहन कर, जल कर आदि) अधिरोपित और संग्रहित कर सकती हैं।
स्थावर संपत्तियाँ और आबाद भूमि: पंचायत क्षेत्र की सभी सार्वजनिक भूमि, मार्ग और आबाद भूमि पंचायत में निहित होती हैं। आबाद भूमि का आवंटन और विक्रय निर्धारित नियमों के अनुसार किया जाता है।
बजट, लेखा और संपरीक्षा: पंचायती राज संस्थाओं द्वारा प्रतिवर्ष 15 फरवरी तक आगामी वर्ष का बजट तैयार कर संबंधित प्राधिकारी को प्रस्तुत किया जाता है। लेखाओं की संपरीक्षा राजस्थान स्थानीय निधि संपरीक्षा अधिनियम, 1954 के तहत की जाती है।