Reform उत्सव-2026 दौरान जन योजना अभियान (PPC) वर्ष 2027-28 हेतु दिनांक 02 अक्टूबर, 2026 को विशेष ग्राम सभा आयोजन के संबंध में दिशा-निर्देश
Reform उत्सव-2026 विशेष ग्राम सभा दिशा-निर्देश
राजस्थान सरकार, पंचायती राज विभाग द्वारा Reform उत्सव-2026 के दौरान 02 अक्टूबर, 2026 को विशेष ग्राम सभा के आयोजन हेतु दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु एवं उद्देश्य
अभियान का उद्देश्य: पंचायतों में सहभागी, समावेशी, साक्ष्य-आधारित एवं अभिसरण (Convergence) पर आधारित पंचायत विकास योजनाओं (PDPs) का प्रभावी निर्माण एवं क्रियान्वयन करना।
दिनांक: 02 अक्टूबर, 2026 को विशेष ग्राम सभा का आयोजन।
सहभागिता: जनप्रतिनिधियों, पंचायत कर्मियों, संबंधित विभागों, SHGs एवं अन्य हितधारकों की भागीदारी सुनिश्चित करना।
प्रमुख गतिविधियां: केंद्र एवं राज्य योजनाओं का अभिसरण, GPDP, BPDP एवं DPDP का समयबद्ध निर्माण, नोडल अधिकारी एवं सुविधा प्रदाताओं की नियुक्ति, TMP पोर्टल पर PPC प्रशिक्षण पब्लिश करना, ग्राम सभा GPDP पोर्टल पर अपलोड करना, तथा नागरिक-केंद्रित योजनाओं एवं सुधारों का प्रचार-प्रसार।
सभी संबंधित ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों को निर्देशित किया गया है कि वे 02 अक्टूबर, 2026 की विशेष ग्राम सभा में 7 विभागों की 13 गतिविधियों के आमजन को मिलने वाले लाभ एवं लाभ प्राप्ति की प्रक्रिया की जानकारी प्रदान करें।
विकसित भारत-जन सेवा अभियान के अंतर्गत आयोजित गतिविधियों एवं वित्तीय स्वीकृति के संबंध में
विकसित भारत-जन सेवा अभियान के संबंध में दिशा-निर्देश एवं वित्तीय स्वीकृति
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ 165(7)ले.ब./परावि/एसएफसी-7/2025-26/ दिनांक के अंतर्गत राज्य में विकसित भारत-जन सेवा अभियान के आयोजन के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश और वित्तीय स्वीकृति जारी की गई है।
मुख्य उद्देश्य एवं गतिविधियाँ
राज्य में जनसेवा, सामाजिक सरोकार और सुशासन की भावना को सुदृढ़ करने, विभिन्न जनकल्याणकारी गतिविधियों की जानकारी को व्यापक स्तर पर पहुँचाने तथा विकसित राजस्थान के लक्ष्य को प्राप्त करने में आमजन, किसानों, महिलाओं और युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से 17 सितम्बर, 2026 से इस अभियान का आयोजन किया जा रहा है।
जिला स्तर: जनप्रतिनिधियों और आमजन के साथ संवाद।
पंचायत समिति मुख्यालय: शिविरों का आयोजन कर केंद्रीय एवं राज्य योजनाओं की जानकारी से संबंधित कार्य (दिनांक 19.09.2026 से 25.09.2026 तक)।
ग्राम पंचायत स्तर: जन-भागीदारी के माध्यम से स्वच्छता और सामुदायिक सेवा से संबंधित गतिविधियाँ।
षष्ठ राज्य वित्त आयोग के अनुदान से व्यय हेतु वित्तीय प्रावधान
षष्ठ राज्य वित्त आयोग के अंतर्गत पंचायती राज संस्थाओं को देय अनुदान राशि के उपयोग हेतु पंचायती राज विभाग के पत्रांक 347 राजकाज क्रमांक 13247621 दिनांक 28.01.2025 के बिंदु संख्या (अ)(3)(xiii) के प्रावधानों के तहत निम्नलिखित व्यय की भूतलक्षीय स्वीकृति प्रदान की गई है:
पंचायत समिति स्तर पर: शिविर के आयोजन हेतु टेंट, फर्नीचर, दरी, पेयजल व्यवस्था, बैठक व्यवस्था, इंटरनेट कनेक्टिविटी एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं से संबंधित व्यय हेतु प्रति पंचायत समिति अधिकतम राशि ₹25,000/-।
ग्राम पंचायत स्तर पर: जन-भागीदारी के माध्यम से स्वच्छता और सामुदायिक सेवा से संबंधित गतिविधियों के आयोजन हेतु प्रति ग्राम पंचायत अधिकतम राशि ₹10,000/-।
उपरोक्त व्यय षष्ठ राज्य वित्त आयोग के अंतर्गत उपलब्ध अनुदान राशि से किया जाएगा, जिसे वित्त विभाग की आई.डी. संख्या 332601518 दिनांक 18.09.2026 द्वारा अनुमोदित किया गया है।
नल जल मित्रों के प्रशिक्षण (Training) के संबंध में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग का निर्देश
जल जीवन मिशन के अंतर्गत नल जल मित्रों के प्रशिक्षण बाबत निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा जारी पत्र क्रमांक एफ 4 (1489) परावि/पीसी/NJM/Trg/2026/87001 के माध्यम से सभी जिला कलेक्टरों और मुख्य कार्यकारी अधिकारियों, जिला परिषद को नल जल मित्रों के प्रशिक्षण के संबंध में आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
पृष्ठभूमि: जल जीवन मिशन के तहत नल जल मित्र के प्रशिक्षण हेतु पीएचईडी के माध्यम से DWSM द्वारा सभी जिलों से नामांकित अभ्यर्थियों की सूचियाँ RSLDC को प्रेषित करने के लिए प्राप्त हुई थीं।
विसंगतियाँ: प्राप्त सूचियों के अवलोकन पर यह पाया गया कि वे जल जीवन मिशन के अंतर्गत निर्धारित मापदंडों (न्यूनतम योग्यता, अनुभव और आयु सीमा) के अनुरूप नहीं हैं, जिससे राज्य स्तर पर मिलान करना संभव नहीं है।
ग्राम पंचायतों को योजनाओं का हस्तांतरण: दिनांक 13.08.2026 को जल आपूर्ति कार्यक्रम के तहत ग्राम पंचायतों को जेजेएम की योजनाएँ हस्तांतरित हो चुकी हैं और भविष्य में भी और योजनाएँ हस्तांतरित की जाएंगी।
आवश्यक कार्रवाई: योजनाओं के रखरखाव हेतु राज्य स्तर पर प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक प्रशिक्षित (आरपीएल) एवं एक अप्रशिक्षित (नल जल मित्र) का तत्काल चयन किया जाकर प्रशिक्षण दिया जाना है।
अंतिम सूची भेजना: सभी मापदंडों का मिलान करवाते हुए नल जल मित्र एवं आरपीएल प्रशिक्षण हेतु अंतिम सूची अविलंब भिजवाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि राजस्थान कौशल आजीविका विकास निगम को सूची भेजी जा सके।
प्रशासक द्वारा स्वेच्छा से पद से इस्तीफा दिए जाने के संबंध में आदेश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग का महत्वपूर्ण आदेश
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा प्रशासक के स्वेच्छा से इस्तीफा देने के संबंध में नया आदेश जारी किया गया है। यह आदेश क्रमांक ए.15(09)पंथ्रावि/विधि/विविध/2025/ई-54050 दिनांक 31.08.2026 को जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
यदि किसी प्रशासक द्वारा स्वेच्छा से अपने पद से इस्तीफा दिया जाता है, तो ऐसे समस्त प्रकरणों में संबंधित जिला कलेक्टर द्वारा इस्तीफा स्वीकार किया जाकर उसे पदमुक्त किए जाने के आदेश स्वयं स्तर पर जारी किए जाने की कार्रवाई की जाएगी।
इसकी सूचना पंचायती राज विभाग को प्रेषित की जावेगी।
यह आदेश सक्षम स्तर से अनुमोदित है।
यह आदेश जसवंत सिंह, उप आयुक्त एवं उप शासन सचिव (प्रथम) द्वारा जारी किया गया है और इसकी प्रतियां सभी संबंधित जिला कलेक्टरों, संभागीय आयुक्तों और जिला परिषदों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्रवाई हेतु भेजी गई हैं।
अटल ज्ञान केंद्रों में क्यूबिकल आधारित फर्नीचर और वर्क स्टेशन व्यवस्था स्थापित किए जाने के संबंध में
अटल ज्ञान केंद्रों में आधुनिक क्यूबिकल आधारित फर्नीचर और वर्क स्टेशन व्यवस्था
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज) राजस्थान सरकार द्वारा बजट घोषणा वर्ष 2025-26 के अंतर्गत निर्मित किए जा रहे अटल ज्ञान केंद्रों की कार्यप्रणाली और उपयोगिता को अधिक प्रभावी बनाने के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
माननीय मुख्यमंत्री महोदय की अध्यक्षता में दिनांक 04.04.2026 को आयोजित समीक्षा बैठक में दिए गए निर्देशों के क्रम में, पूर्व में निर्धारित सामान्य फर्नीचर व्यवस्था के स्थान पर आधुनिक क्यूबिकल आधारित फर्नीचर/वर्क स्टेशन व्यवस्था विकसित की जाएगी, जिससे अध्ययनरत विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को बेहतर और व्यवस्थित अध्ययन वातावरण मिल सके।
मुख्य बिंदु एवं वित्तीय संशोधन
उद्देश्य: प्रदेश की तीन हजार से अधिक आबादी वाली ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर आधुनिक पुस्तकालय एवं अध्ययन सुविधाओं का विकास।
संशोधित लागत: वित्त विभाग की आईडी संख्या 332601032 दिनांक 01.07.2026 के द्वारा सामान्य फर्नीचर हेतु पूर्व में स्वीकृत राशि रु. 2.35 लाख के स्थान पर क्यूबिकल आधारित फर्नीचर/वर्क स्टेशन हेतु रु. 4.10 लाख प्रति अटल ज्ञान केंद्र स्वीकृत करने की संशोधित सहमति प्रदान की गई है।
व्यय का स्रोत: उक्त स्वीकृत राशि का व्यय राज्य वित्त आयोग के अंतर्गत संबंधित पंचायतों की स्वीकृत अनुदान/उपलब्ध राशि से किया जाएगा।
फर्नीचर एवं वर्क स्टेशन का अनुमानित विवरण
वर्क स्टेशन (750mm x 600mm x 1200mm) - 20 नग (कुल लागत: रु. 3,07,000)
विज़िटर चेयर कुशन सीट और बैक के साथ - 20 नग (कुल लागत: रु. 40,000)
रिवॉल्विंग चेयर - 1 नग (कुल लागत: रु. 4,000)
टेबल (900mm x 600mm x 750mm) - 1 नग (कुल लागत: रु. 5,000)
कुल अनुमानित लागत: रु. 4,10,000 प्रति अटल ज्ञान केंद्र
सभी संबंधित जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, अति. मुख्य कार्यकारी अधिकारी, अधिशाषी/सहायक अभियंता और विकास अधिकारी, पंचायत समिति को निर्देशित किया जाता है कि समस्त कार्य विभाग द्वारा अनुमोदित ड्राइंग, गुणवत्ता मानकों एवं तकनीकी विनिर्देशों के अनुरूप ही संपन्न हों तथा कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग एवं समयबद्ध पूर्णता सुनिश्चित की जाए।
ग्रामीण सेवा शिविर 2026 के आयोजन एवं व्यय स्वीकृति बाबत
ग्रामीण सेवा शिविर 2026 का आयोजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ 165(7)ले.ब./परावि/एसएफसी-6/2025-26/ के अनुसार ग्रामीण सेवा शिविर-2026 का आयोजन दिनांक 12 जून, 2026 से 15 जुलाई, 2026 तक किया जाना निर्धारित किया गया है।
शिविर से संबंधित मुख्य बिंदु
अवधि: प्रत्येक ग्राम पंचायत मुख्यालय पर एक दिवसीय शिविर का आयोजन 12 जून, 2026 से 15 जुलाई, 2026 के दौरान किया जाएगा।
समय: शिविर का समय प्रातः 09:30 बजे से सायं 06:00 बजे तक अथवा कार्य समाप्ति तक रहेगा।
स्थान: शिविरों का आयोजन पंचायत भवन, स्कूल भवन या उपलब्ध अन्य सार्वजनिक स्थानों पर किया जाएगा।
व्यवस्थाएं: आगंतुकों के लिए पेयजल की समुचित व्यवस्था, मेज, कुर्सियां, दरियां और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं ग्राम पंचायत द्वारा की जाएंगी।
वित्तीय प्रावधान एवं व्यय की स्वीकृति
षष्ठ राज्य वित्त आयोग के तहत पंचायती राज संस्थाओं को देय अनुदान राशि के उपयोग के संबंध में विभागीय पत्रांक 347 राजकाज क्रमांक 13247621 दिनांक 28.01.2025 द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के बिंदु संख्या (अ) (3) (XIII) के अंतर्गत प्रति ग्राम पंचायत, अधिकतम राशि रु. 15,000/- का व्यय/उपयोग, षष्ठ राज्य वित्त आयोग के अंतर्गत उपलब्ध अनुदान राशि से व्यय करने की सहमति प्रदान की जाती है। यह सहमति वित्त विभाग की आई.डी. संख्या 332601019 दिनांक 11.06.2026 द्वारा अनुमोदित है।
ग्रामीण सेवा शिविर-2026: जन-कल्याण अभियान के आयोजन हेतु दिशा-निर्देश
ग्रामीण सेवा शिविर-2026 जन-कल्याण अभियान
राजस्थान सरकार के राजस्व विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, राज्य में जन-कल्याण योजनाओं को आमजन तक पहुँचाने के लिए 12 जून, 2026 से 15 जुलाई, 2026 तक "ग्रामीण सेवा शिविर-2026" का आयोजन किया जाएगा। इस अभियान में राजस्व विभाग के अतिरिक्त 21 विभागों की सहभागिता सुनिश्चित की गई है, और इसका नोडल विभाग राजस्व एवं सहायक नोडल विभाग पंचायती राज रहेगा।
शिविर का स्वरूप और समय
प्रत्येक ग्राम पंचायत मुख्यालय पर एक दिवसीय शिविर का आयोजन किया जाएगा।
शिविर का समय प्रातः 09:30 बजे से सांय 06:00 बजे तक (अथवा कार्यसमाप्ति तक) रहेगा।
आगामी शिकायतों का मौके पर ही निस्तारण सुनिश्चित किया जाएगा ताकि राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँच सके।
शिविर में शामिल प्रमुख विभागों के कार्य
राजस्व विभाग: राजस्व अभिलेख/खातों का शुद्धिकरण, आपसी सहमति से खातों का विभाजन, रास्ते के प्रकरणों का निस्तारण, भूमिहीन किसानों को भूमि आवंटन, जाति/मूल निवास/हैसियत प्रमाण-पत्र जारी करना आदि।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग: प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत पट्टा वितरण व किस्त जारी करना, मनरेगा, आजीविका (SHG), IHHL स्वीकृतियां, जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करना।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग: मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य जांच, टीकाकरण, टीबी मुक्त भारत अभियान, पीएमजेएवाई कार्ड बनाना।
अन्य विभाग: पशुपालन, ऊर्जा, कृषि, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता, महिला एवं बाल विकास, श्रम, आपदा प्रबंधन, जल संसाधन, परिवहन, सहकारिता, शिक्षा, आयुर्वेद, सैनिक कल्याण, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी (PHED) और सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) से जुड़े विभिन्न जन-कल्याणकारी कार्य।
अभियान की संपूर्ण तैयारी, अनुश्रवण एवं समीक्षा की जिम्मेदारी जिला कलेक्टर की होगी। प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर पूर्व तैयारी हेतु अग्रिम दल का गठन किया जाएगा।
जल जीवन मिशन (JJM) के अंतर्गत नल जल मित्र के चयन और प्रशिक्षण हेतु दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग - नल जल मित्र चयन मार्गदर्शन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा जल जीवन मिशन (JJM) के अंतर्गत नल जल मित्र के चयन और प्रशिक्षण के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इस संबंध में मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य बिंदु और दिशा-निर्देश:
चयन प्रक्रिया: प्रत्येक ग्राम पंचायत में 2 नल जल मित्र का चयन किया जाना है। इसमें से एक नल जल मित्र पेयजल योजनाओं के संचालन में पूर्व अनुभव वाला तथा दूसरा बिना अनुभव वाला होगा।
वरीयता: वर्तमान में जनता जल योजना एवं अन्य पेयजल योजनाओं में कार्य कर रहे पंप चालकों को 'Recognition of Prior Learning' (RPL) के तहत प्राथमिकता दी जाएगी।
शैक्षणिक योग्यता: नए चयन किए जाने वाले नल जल मित्र के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता (जैसे 12वीं कक्षा उत्तीर्ण, 10वीं के बाद सिविल इंजीनियरिंग में 3 वर्ष का डिप्लोमा, 10वीं पास आईटीआई के साथ 2 वर्ष का अनुभव आदि) निर्धारित की गई है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम: चयनित नल जल मित्रों का प्रशिक्षण आरएसएलडीसी (RSLDC) या कौशल विकास एवं उद्यमिता विभाग के माध्यम से कराया जाएगा, जिसमें कक्षा-कक्ष प्रशिक्षण (Classroom training), प्रायोगिक प्रशिक्षण (Practical training) और ओजेटी प्रशिक्षण (OJT Training) शामिल है।
ई-पंचायत पोर्टल पर प्रविष्टि: चयनित नल जल मित्रों के नामों का विवरण ई-पंचायत पोर्टल पर अनिवार्य रूप से दर्ज किया जाना सुनिश्चित किया जाए।
अनुमोदन: जिला कलक्टर की अध्यक्षता में गठित जिला जल एवं स्वच्छता समिति (DWSM) की बैठक में इनका अनुमोदन किया जाना आवश्यक है।
दिनांक 26 मई, 2026 को विशेष ग्राम सभा के आयोजन बाबत आवश्यक दिशा-निर्देश
विशेष ग्राम सभा आयोजन (26 मई, 2026)
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा जारी पत्र (क्रमांक: एफ.15(20)पंवैधि/वि0ग्रा0सभा/2026/ई-81146, दिनांक: 23.05.2026) के अनुसार दिनांक 26 मई, 2026 को राज्य की सभी ग्राम पंचायतों में विशेष ग्राम सभा का आयोजन किया जाना है।
ग्राम सभा के मुख्य एजेंडा एवं बिंदु:
ग्राम (ग्लोबल राजस्थान एग्रोटेक मीट) 2026 के बारे में जानकारी:
राज्य सरकार द्वारा 23 से 25 मई, 2026 तक प्रस्तावित 'GRAM-2026' आयोजन को वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में ईंधन संयम की अपील और मुख्यमंत्री महोदय के ईंधन बचत हेतु निर्देशों के कारण कुछ समय के लिए स्थगित किया गया है, जो शीघ्र ही आयोजित होगा।
ग्राम सभा में नागरिकों को इस आयोजन की रूपरेखा, ड्रोन तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, प्रेसिजन फार्मिंग, जैविक एवं प्राकृतिक खेती जैसी आधुनिक तकनीकों के बारे में बताया जाएगा।
किसानों, स्टार्टअप्स और कृषि वैज्ञानिकों के बीच सीधा संवाद स्थापित कर कृषि को अधिक लाभदायक बनाने पर चर्चा होगी।
ग्रामोत्थान शिविरों / ग्राम रथ यात्रा की प्रगति की जानकारी:
ग्राम उत्थान शिविर अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्र के समस्त 2770 गिरदावर सर्किल पर शिविर आयोजित किए गए, जिनमें 31.5 लाख से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया।
इन शिविरों में कृषि, उद्यान, कृषि विपणन, पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन, सहकारिता, जल संसाधन, ऊर्जा, उद्योग, ग्रामीण विकास, पंचायत राज तथा राजस्व विभाग ने भाग लिया तथा मौके पर ही ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान किया गया।
अधिकारियों की उपस्थिति एवं निर्देश:
मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद और विकास अधिकारी, पंचायत समिति यह सुनिश्चित करेंगे कि दिनांक 26 मई, 2026 को आयोजित होने वाली प्रत्येक ग्राम सभा में जिला स्तर या पंचायत समिति स्तर का कोई अधिकारी अनिवार्य रूप से उपस्थित रहे तथा ग्राम सभाओं का प्रभावी पर्यवेक्षण किया जाए।
राजस्थान जन आधार प्राधिकरण - परिपत्र-11: नवजात शिशु का स्वतः जन आधार नामांकन एवं मृतक सदस्य को स्वतः हटाने की प्रक्रिया
राजस्थान जन आधार प्राधिकरण परिपत्र-11
राजस्थान सरकार के आयोजना विभाग (राजस्थान जन आधार प्राधिकरण) द्वारा परिपत्र-11 (क्रमांक: एफ17(8)4/डीईएस/रा.ज.आ.यो./परिपत्र/2019/1043, दिनांक: 04.06.2026) जारी किया गया है। यह परिपत्र नवजात शिशु के जन्म उपरांत स्वतः (Auto) जन आधार नामांकन और परिवार में मृतक सदस्य का नाम स्वतः हटाने की प्रक्रिया से संबंधित है।
1. नवजात शिशु के जन्म उपरांत स्वतः (Auto) जन आधार नामांकन
राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ आमजन तक त्वरित गति से पहुँचाने के उद्देश्य से, पहचान पोर्टल द्वारा जन्म प्रमाण पत्र जारी होने और डेटा प्राप्त होने के बाद शिशु का माता के जन आधार कार्ड में स्वतः जुड़ने का प्रावधान किया गया है। इसके लिए निम्नलिखित शर्तें पूरी होनी आवश्यक हैं:
पहचान पोर्टल से शिशु का जन्म प्रमाण पत्र बनाते समय आवेदन फॉर्म में शिशु की माता की आधार संख्या, जन आधार परिवार पहचान संख्या एवं जन आधार सदस्य पहचान संख्या (Member ID) दर्ज करना आवश्यक है।
जन आधार में माता की आधार ई-केवाईसी आवश्यक रूप से होनी चाहिए।
ऐसे शिशु, जिनका नाम जन्म प्रमाण पत्र में दर्ज नहीं होता, उनका जन आधार नामांकन उनकी माता के जन आधार परिवार में वास्तविक नाम उपलब्ध होने तक बेबी ऑफ़ माता (Baby of Mother Name) के नाम से स्वतः ही जोड़ा जायेगा।
शिशु का फोटो जन आधार में एडिटिंग प्रोफाइल (Profile Editing) मॉड्यूल द्वारा अपडेट किया जा सकता है। शिशु का नाम जन्म प्रमाण पत्र में अद्यतन कराने पर पहचान पोर्टल से डेटा प्राप्त होने के उपरांत जन आधार में नाम स्वतः ही अद्यतन हो जायेगा।
2. मृतक सदस्य को जन आधार से स्वतः हटाना
किसी जन आधार परिवार में किसी सदस्य की मृत्यु उपरांत पहचान पोर्टल द्वारा मृत्यु प्रमाण पत्र जारी होने एवं पहचान पोर्टल से डेटा प्राप्त होने के उपरांत मृतक सदस्य का नाम उनके जन आधार परिवार से स्वतः हटाने के प्रावधान किए गए हैं। इस हेतु मृतक सदस्य का पहचान पोर्टल से मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाते समय आवेदन फॉर्म में मृतक की आधार संख्या, जन आधार परिवार पहचान संख्या एवं जन आधार सदस्य पहचान संख्या (Member ID) दर्ज करना आवश्यक है।
नोट: उक्त प्रक्रियाओं के अतिरिक्त जन आधार नामांकन एवं इसमें किसी नए सदस्य को जोड़ने एवं हटाने की प्रक्रिया पूर्ववत रहेंगी।
ग्रामीण क्षेत्रों में चरणबद्ध रूप से स्ट्रीट लाइट/रोड लाइट व्यवस्था स्थापित किए जाने के संबंध में
ग्रामीण क्षेत्रों में स्ट्रीट लाइट और रोड लाइट व्यवस्था
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में चरणबद्ध रूप से स्ट्रीट लाइट और रोड लाइट व्यवस्था स्थापित करने के संबंध में दिशानिर्देश जारी किए गए हैं। यह पहल माननीय मंत्री महोदय, पंचायती राज विभाग द्वारा विधानसभा में की गई घोषणा के अनुपालन में है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रात्रिकालीन अंधकार की समस्या का समाधान करना और प्रत्येक गांव को प्रकाशमान बनाना है।
मुख्य उद्देश्य
ग्रामीण क्षेत्रों में रात्रि के समय सुरक्षित एवं सुगम आवागमन सुनिश्चित करना।
ग्रामों की मुख्य बस्तियों, बाजारों, सार्वजनिक स्थलों, विद्यालयों, पंचायत भवनों और स्वास्थ्य केंद्रों पर पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था उपलब्ध कराना।
ऊर्जा दक्ष एवं पर्यावरण अनुकूल प्रकाश व्यवस्था को बढ़ावा देना।
विद्युत आपूर्ति की कमी वाले क्षेत्रों में सौर ऊर्जा आधारित स्ट्रीट लाइट/रोड लाइट की स्थापना को प्रोत्साहित करना।
ग्रामीण क्षेत्रों में दुर्घटनाओं एवं आपराधिक गतिविधियों की संभावना को कम करना तथा ग्रामीण विकास को गति प्रदान करना।
क्रियान्वयन क्षेत्र एवं प्राथमिकता
प्रत्येक ग्राम पंचायत में सभी ग्रामीण क्षेत्रों, आबादी क्षेत्रों, बाजारों, मुख्य मार्गों, आंतरिक मार्गों और अन्य महत्वपूर्ण स्थलों पर चरणबद्ध रूप से स्ट्रीट लाइट/रोड लाइट लगाई जाएगी। कार्य प्रारंभ होने की प्राथमिकता में कच्ची बस्तियां, कमजोर वर्ग की बस्तियां, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति वर्ग की बस्तियां तथा मुख्य मार्ग, बाजार, बस स्टैंड, पंचायत भवन, विद्यालय, आंगनबाड़ी केंद्र एवं स्वास्थ्य केंद्र जैसे सार्वजनिक स्थान शामिल होंगे।
स्ट्रीट लाइट की स्थापना एवं विद्युत कनेक्शन
एल.ई.डी. स्ट्रीट लाइट: विद्युत वितरण निगम के खंभों पर नियमानुसार सड़क की चौड़ाई के अनुसार एल.ई.डी. लाइट लगाई जाएगी।
सौर ऊर्जा आधारित स्ट्रीट लाइट: जहां विद्युत पोल उपलब्ध नहीं हैं, विद्युत आपूर्ति नियमित नहीं है अथवा विद्युत वितरण का नेटवर्क उपलब्ध नहीं है, वहां सौर ऊर्जा आधारित स्ट्रीट लाइट स्थापित की जा सकती है।
विद्युत कनेक्शन: स्ट्रीट लाइट/रोड लाइट हेतु विद्युत कनेक्शन ग्राम पंचायत द्वारा लिया जाएगा, जो ग्रामवार, ग्राम पंचायतवार या क्षेत्रवार हो सकता है।
व्यय का प्रबंधन
राज्य वित्त आयोग षष्ठ/सप्तम के अंतर्गत जारी विभागीय दिशा-निर्देशों में मूलभूत एवं विकास कार्यों के लिए हस्तांतरित 55 प्रतिशत राशि से सड़कों एवं सार्वजनिक स्थानों पर उचित प्रकाश व्यवस्था और 40 प्रतिशत राशि का उपयोग रोड लाइट/स्ट्रीट लाइट के अंतर्गत किया जाना अनुमत है।
ई-पंचायत पोर्टल के माध्यम से क्रियान्वयन
योजना के पारदर्शी एवं प्रभावी क्रियान्वयन हेतु प्रशासनिक, तकनीकी एवं वित्तीय स्वीकृतियां जारी करना, राशि भुगतान, कार्य की जियो-टैगिंग एवं फोटो अपलोड करना तथा ऑनलाइन मॉनिटरिंग एवं प्रगति समीक्षा सभी कार्य ई-पंचायत पोर्टल के माध्यम से किए जाएंगे। जिला स्तर पर अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी, पंचायती राज इसके नोडल अधिकारी होंगे।
दिनांक 05 जून 2026 को विशेष ग्राम सभा का आयोजन बाबत
विशेष ग्राम सभा के आयोजन के संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 05 जून, 2026 को विशेष ग्राम सभा के आयोजन के संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
विषय: दिनांक 05 जून 2026 को विशेष ग्राम सभा का आयोजन।
संदर्भ: पंचायतीराज मंत्रालय, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार से प्राप्त संयुक्त अ.शा. पत्र क्रमांक M-11015/169/2026-CB दिनांक 21.05.2026।
अभियान: भारत सरकार द्वारा "स्वच्छ गाँव, सुरक्षित जलवायु" अभियान के अंतर्गत विश्व पर्यावरण दिवस 05 जून के अवसर पर विशेष ग्राम सभा का आयोजन किए जाने के निर्देश प्राप्त हुए हैं।
निर्देश: सभी जिलों की सभी ग्राम पंचायतों में विश्व पर्यावरण दिवस (05 जून) के अवसर पर विशेष ग्राम सभा का आयोजन किया जाना सुनिश्चित करें तथा संदर्भित पत्र में वर्णित निर्देशों की पालना की जाए।
यह आदेश भरत भूषण गोयल, उपायुक्त एवं उप शासन सचिव (प्रथम) द्वारा जारी किया गया है।
ग्रामीण क्षेत्रों में निर्माण कार्यों हेतु भूमि स्वामित्व एवं मार्गदर्शन बाबत निर्देश
विभागीय ग्रामीण कार्य निर्देशिका-2025 के प्रावधानों की जानकारी
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास विभाग (अनुभाग-5) द्वारा क्रमांक एफ 27(201)ग्राविफो/अनु-5/जीकेन/सरपंच संघ/2024-25 के अंतर्गत दिनांक 14-08-2025 से लागू विभागीय ग्रामीण कार्य निर्देशिका-2025 के बिंदु संख्या 10 एवं परिशिष्ट-2 के प्रावधानों के संबंध में मार्गदर्शन जारी किया गया है। यह निर्देश ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न केंद्रीय एवं राज्य प्रवर्तित योजनाओं के अंतर्गत कराए जाने वाले निर्माण कार्यों को तकनीकी, सुगमता और गुणवत्ता की दृष्टि से क्रियान्वित करने के लिए है।
मुख्य बिंदु एवं दिशा-निर्देश
भूमि स्वामित्व और विवाद से बचाव: निर्देशिका के बिंदु संख्या 10 में 'भूमि स्वामित्व तय करने एवं कार्य को विवाद से बचाने का दायित्व' और परिशिष्ट-2 में 'सामान्य तौर पर संपादित की जाने वाली गतिविधियों के लिए आवश्यक जमीन का विवरण' से संबंधित प्रावधान दिए गए हैं।
आबादी भूमि और निर्माण कार्य: नवीन आंगनबाड़ी भवन, विद्यालय, सामुदायिक भवन, पंचायत भवन, उप स्वास्थ्य केंद्र, वाचनालय, प्याऊ और नए जल स्रोत लगाने के लिए आबादी क्षेत्र में सक्षम प्राधिकारी/संस्था से अनापत्ति प्रमाण-पत्र प्राप्त कर गतिविधि के नाम आवंटन/पट्टा जारी कराना आवश्यक है।
रास्ता/गोचर/वन भूमि संबंधी प्रावधान: नदी, नाला, तालाब के भरौव क्षेत्र में, रेलवे लाइन या सड़क की सीमा में निर्माण कार्य सामान्यतः स्वीकृत नहीं होते हैं। हालांकि, सार्वजनिक शौचालय, नालियां, बोरिंग, टंकी, हैंडपंप आदि के लिए ग्राम पंचायत स्थानीय स्तर पर आपत्तियां मांगकर और कोरम में निर्णय लेकर इसे शिथिल कर सकती है, जो पंचायत के रिकॉर्ड में होना अनिवार्य है। वन/अरण्य भूमि के मामलों में संबंधित विभाग से अनापत्ति प्रमाण-पत्र प्राप्त किया जाना चाहिए।
खातेदारी भूमि और गिफ्ट/दान: किसी भी परिसंपत्ति निर्माण हेतु खातेदारी भूमि दान/समर्पण करवाकर नामांतरण, खसरा मैप में लोकेशन दर्ज करना और सीमा ज्ञान करवाना आवश्यक है। एक से अधिक खातेदार होने पर सभी की सहमति और नोटरी पब्लिक से प्रमाणीकरण अनिवार्य है।
यह आदेश शासन सचिव, ग्रामीण विकास विभाग (कृष्ण कुणाल) द्वारा जारी किया गया है और सभी संबंधित जिला कलेक्टरों, मुख्य कार्यकारी अधिकारियों तथा जिला परिषदों को आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रेषित किया गया है।
24 अप्रैल 2026 को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस मनाने के संबंध में निर्देश
राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस 2026 का आयोजन
पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश (क्रमांक: एफ 4(0) PR / DP / राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस 2026 / 81591) के अनुसार 24 अप्रैल 2026 को जिला, ब्लॉक एवं ग्राम पंचायत स्तर पर राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस समारोहपूर्वक आयोजित किया जाएगा।
मुख्य उद्देश्य एवं महत्व
73वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम के लागू होने की याद में प्रतिवर्ष 24 अप्रैल को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर सहभागी लोकतंत्र की भावना को मजबूत करना और आत्मनिर्भर पंचायत की परिकल्पना को साकार करना है।
आयोजित की जाने वाली मुख्य गतिविधियाँ
आम नागरिकों व लाइन विभागों के अधिकारियों/कार्मिकों की सार्थक भागीदारी सुनिश्चित करते हुए ग्राम सभा का आयोजन।
आयोजित ग्राम सभा की बैठक कार्यवाही विवरण सभा सार के माध्यम से तैयार करना।
कार्यक्रम में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली पंचायतों का अभिनंदन।
सामुदायिक सहभागिता एवं जागरूकता सृजन संबंधी गतिविधियाँ।
महिला नेतृत्व वाले विकास, पंचायत उन्नति सूचकांक के अंतर्गत प्रदर्शन, सतत विकास लक्ष्यों के स्थानीयकरण (LSDGs) में प्रगति और ओएसआर (OSR) को बढ़ाने की रणनीतियों पर चर्चा।
पंचायती राज मंत्रालय के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल को फॉलो व टैग करना।
व्यय और वित्त पोषण
इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों/समारोहों में किया जाने वाला व्यय ओएसआर (OSR)/आरजीएसए (RGSA) के ई.ई.सी. (IEC) मद या अन्य केंद्रीय व राज्य ग्रामीण विकास योजनाओं से किया जा सकता है। इसे सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान करने के निर्देश दिए गए हैं।
पचपदरा, बालोतरा में एचआरआरएल रिफाइनरी के उद्घाटन कार्यक्रम के लाइव प्रसारण हेतु व्यवस्था
एचआरआरएल रिफाइनरी उद्घाटन कार्यक्रम का लाइव प्रसारण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा पचपदरा, बालोतरा में माननीय प्रधानमंत्री महोदय की उपस्थिति में दिनांक 21.04.2026 को होने वाले HRRL रिफाइनरी के उद्घाटन कार्यक्रम का लाइव प्रसारण ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर दिखाने के संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं।
प्रसारण व्यवस्था: सभी ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर लाइव प्रसारण की समुचित व्यवस्था (टीवी/स्क्रीन/एलईडी व्यवस्था, फर्नीचर, टेंट, पेयजल, व्यवस्थित बैठक व्यवस्था, इंटरनेट कनेक्टिविटी तथा ग्राम पंचायत भवन पर स्थापित ई-मित्र प्लस मशीन के माध्यम से प्रसारण)।
वित्तीय प्रावधान: छठे राज्य वित्त आयोग के अंतर्गत उपलब्ध अनुदान राशि से प्रति ग्राम पंचायत अधिकतम राशि 5,000/- रुपये तक के व्यय/उपयोग की सहमति प्रदान की गई है।
अनुमोदन: यह सहमति वित्त विभाग की आई.डी. संख्या 332600669 दिनांक 19.04.2026 द्वारा अनुमोदित है।
अतिरिक्त विकास अधिकारियों (Addl. Development Officers) की वर्ष 2022-2023 से 2025-2026 की स्थायी वरिष्ठता सूचियां प्रकाशित
अतिरिक्त विकास अधिकारियों की स्थायी वरिष्ठता सूचियां जारी
पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा अतिरिक्त विकास अधिकारियों (Addl. Development Officers) की 01 अप्रैल की स्थिति के अनुसार वर्ष 2022-2023, 2023-2024, 2024-2025 एवं 2025-2026 की स्थायी वरिष्ठता सूचियां विधिवत प्रकाशित कर दी गई हैं।
यह आदेश शासन सचिव एवं आयुक्त डॉ. जोगाराम के हस्ताक्षर से जारी किया गया है।
महत्वपूर्ण बिंदु:
संबंधित पद: अतिरिक्त विकास अधिकारी (Addl. Development Officers)
प्रकाशन वर्ष: 2022-23, 2023-24, 2024-25, 2025-26 (01 अप्रैल की स्थिति के अनुसार)
संबद्ध कार्मिक एवं अधिकारी विभाग की वेबसाइट पर जाकर अपनी वरिष्ठता सूची देख सकते हैं।
माननीय प्रधानमंत्री महोदय की उपस्थिति में 28.02.2026 को आयोजित होने वाले राज्य स्तरीय समारोह के सीधे प्रसारण हेतु व्यवस्था के संबंध में
राज्य स्तरीय समारोह के सीधे प्रसारण हेतु दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी पत्र क्रमांक एफ 165(7)ले.ब./परावि/एसएफसी-7/2025-26/ के माध्यम से दिनांक 28.02.2026 को अजमेर में माननीय प्रधानमंत्री महोदय की उपस्थिति में आयोजित होने वाले राज्य स्तरीय कार्यक्रम के लाइव प्रसारण को ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर दिखाने हेतु व्यवस्था के संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु एवं वित्तीय स्वीकृति
दिनांक 28.02.2026 को अजमेर में होने वाले कार्यक्रम का लाइव प्रसारण जिला, ब्लॉक व ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर आयोजित किया जाना है।
इस कार्यक्रम के सीधे प्रसारण को ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर देखने हेतु समुचित व्यवस्था (जैसे टीवी, स्क्रीन, एलईडी व्यवस्था, फर्नीचर, टेंट, पेयजल व बैठक व्यवस्था) सुनिश्चित की जानी है।
षष्ठ राज्य वित्त आयोग के अंतर्गत पंचायती राज संस्थाओं को देय अनुदान राशि के उपयोग हेतु विभाग के पत्रांक 347 राजकाज क्रमांक 13247621 दिनांक 28.01.2025 द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के बिंदु संख्या-(अ)(3)(xiii) के प्रावधानों के अंतर्गत यह सहमति दी गई है।
प्रत्येक ग्राम पंचायत द्वारा इस प्रयोजन हेतु अधिकतम राशि 10,000/- रुपये तक का व्यय/उपयोग षष्ठ राज्य वित्त आयोग के अंतर्गत उपलब्ध अनुदान राशि से करने की सहमति प्रदान की जाती है।
यह सहमति वित्त विभाग की आई.डी. संख्या 332600355 दिनांक 26.02.2026 द्वारा अनुमोदित है।
जारीकर्ता: (डॉ. जोगा राम), शासन सचिव एवं आयुक्त, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
पट्टा नवीनीकरण प्रक्रिया
मुख्य नियम एवं शुल्क
इस प्रक्रिया को पंचायती राज विभाग के विशिष्ट नियमों और आदेशों द्वारा निर्देशित किया जाता है:
सरपंच को दिए जाने वाले आवेदन पत्र के साथ निम्नलिखित पांच दस्तावेज संलग्न करना अनिवार्य है:
मूल विक्रय विलेख (पट्टा)।
मूल विक्रय विलेख (पट्टा) की फोटो प्रति।
पट्टा जारी करने की रसीद।
आधार कार्ड।
मतदाता पहचान पत्र।
प्रक्रिया का चरणबद्ध सारांश
आवेदन प्रस्तुति: प्रार्थी सरपंच/ग्राम पंचायत को आवेदन प्रस्तुत करता है ताकि वह अपने विक्रय विलेख का पंजीयन करवा सके।
रिकॉर्ड मिलान: ग्राम विकास अधिकारी (VDO) पंचायत में उपलब्ध रिकॉर्ड से पट्टा संख्या, दिनांक और पुस्तक संख्या का मिलान करते हैं।
पंचायत बैठक में प्रस्ताव: पत्रावली को पंचायत की आगामी बैठक में रखा जाता है, जहाँ उपस्थित सदस्य सर्वसम्मति से 100 रुपये के शुल्क के साथ पुनर्विधिमान्यकरण का प्रस्ताव पारित करते हैं।
आदेश जारी करना: प्रस्ताव के अनुमोदन के पश्चात्, ग्राम विकास अधिकारी और सरपंच के हस्ताक्षर व कार्यालय की मोहर के साथ अंतिम आदेश जारी किया जाता है।
सोलहवें वित्त आयोग की सिफारिशों पर की गई कार्रवाई के संबंध में व्याख्यात्मक ज्ञापन (फरवरी 2026)
सोलहवें वित्त आयोग व्याख्यात्मक ज्ञापन - मुख्य विवरण
यह दस्तावेज़ वित्त मंत्रालय (बजट प्रभाग) द्वारा फरवरी 2026 में जारी किया गया व्याख्यात्मक ज्ञापन है, जो 17 नवंबर, 2025 को माननीय राष्ट्रपति को सौंपी गई सोलहवें वित्त आयोग (XXI-FC) की रिपोर्ट पर की गई कार्रवाई से संबंधित है। यह रिपोर्ट संविधान के अनुच्छेद 281 के अनुसरण में सदन के पटल पर प्रस्तुत की गई है। इसमें वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 की अवधि के लिए की गई मुख्य सिफारिशों और सरकार के निर्णयों का सारांश दिया गया है।
प्रमुख बिंदु
कर राजस्वों का साझा करना (ऊर्ध्वाधर अंतरण): आयोग ने राज्यों के हिस्से को केंद्रीय करों की निवल प्राप्तियों के 41 प्रतिशत पर बनाए रखा है, जिसे सरकार ने स्वीकार कर लिया है।
स्थानीय निकाय अनुदान: वर्ष 2026-27 से 2030-31 की अवधि के लिए ग्रामीण स्थानीय निकायों (आरएलबी) और शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) के लिए कुल 7,91,493 करोड़ रुपये के अनुदान की सिफारिश की गई है।
अनुदान वर्गीकरण और शर्तें: ग्रामीण स्थानीय निकायों के अनुदान को मूल और निष्पादन घटकों में वर्गीकृत किया गया है। मूल घटक का 50 प्रतिशत स्वच्छता, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और/या जल प्रबंधन के लिए आरक्षित किया जाएगा।
आपदा प्रबंधन वित्तपोषण: वर्ष 2026-27 से 2030-31 की अवधि के लिए राज्य आपदा मोचन निधि (एसडीआरएफ) और राज्य आपदा शमन निधि (एसडीएमएफ) के लिए कुल 2,04,401 करोड़ रुपये की कुल धनराशि की सिफारिश की गई है।
जन्म, मृत्यु एवं विवाह रजिस्ट्रीकरण के परिपत्रों का संकलन - आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय, राजस्थान
जन्म, मृत्यु एवं विवाह रजिस्ट्रीकरण परिपत्र संकलन
यह दस्तावेज आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय, सांख्यिकी विभाग, राजस्थान, जयपुर द्वारा जारी किया गया जन्म, मृत्यु एवं विवाह रजिस्ट्रीकरण के महत्वपूर्ण परिपत्रों का एक विस्तृत संकलन है। इस संकलन में ग्राम पंचायतों, स्थानीय निकायों और संबंधित अधिकारियों के मार्गदर्शन के लिए कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य बिंदु एवं विषय
नष्ट या खराब हुए रिकॉर्ड: नष्ट अथवा खराब हुए रजिस्ट्रीकरण रिकॉर्ड को पुनः तैयार करने के लिए दिशा-निर्देश।
दत्तक-ग्रहण (Adoption): दत्तक-ग्रहण किए गए बच्चों के जन्म रिकॉर्ड में प्रविष्टि और परिवर्तन तथा संबंधित स्पष्टीकरण।
ई-मित्र सेवाएं: ई-मित्र केंद्र के माध्यम से जन्म और मृत्यु पंजीकरण हेतु आवेदन प्रक्रिया।
आधार प्रमाणीकरण: जन्म, मृत्यु एवं विवाह पंजीयन तथा राजकीय योजनाओं की सेवाओं के लिए आधार प्रमाणीकरण की अनिवार्यता।
ई-साइन और डिजिटल हस्ताक्षर: जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र में ई-साइन/डिजिटल हस्ताक्षर के प्रयोग संबंधी निर्देश।
विवाह पंजीयन: राजस्थान विवाहों का अनिवार्य रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 2009 के अंतर्गत आने वाले विभिन्न प्रावधान, मार्गदर्शन और प्रक्रियाएं।
जनआधार अनिवार्यता: जन्म-मृत्यु एवं विवाह पंजीयन में जनआधार की अनिवार्यता और उससे उत्पन्न समस्याओं के समाधान।
यह संकलन ग्राम पंचायत स्तर पर जन्म, मृत्यु और विवाह पंजीकरण के कार्यों को सुचारू रूप से संचालित करने और आमजन को बेहतर सेवाएं प्रदान करने में अत्यंत उपयोगी है।
दिनांक 22 जनवरी, 2026 को विशेष ग्राम सभा का आयोजन एवं गिरदावर सर्किल स्तर पर विशेष शिविरों के संबंध में निर्देश
विशेष ग्राम सभा और विशेष शिविर आयोजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज) और कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के दिशा-निर्देशों के क्रम में राज्य की प्रत्येक ग्राम पंचायत में दिनांक 22 जनवरी, 2026 को विशेष ग्राम सभा का आयोजन किया जाना है। इस विशेष ग्राम सभा का मुख्य उद्देश्य आगामी GRAM-2026 (Global Rajasthan Agri-Tech Meet-2026) और विभिन्न विभागीय अभियानों के प्रति जागरूकता पैदा करना है।
मुख्य बिंदु एवं दिशा-निर्देश:
ग्राम सभा आयोजन: दिनांक 22 जनवरी, 2026 को सभी ग्राम पंचायतों में विशेष ग्राम सभा आयोजित होगी जिसमें स्वामित्व कार्ड वितरण और अनुपयोगी विद्यालय भवन में नई स्वीकृत ग्राम पंचायत का कार्यालय प्रारंभ करने जैसे विषयों पर चर्चा व कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
गिरदावर सर्किल स्तर पर विशेष शिविर: बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर दिनांक 23 जनवरी, 2026 से इन शिविरों का शुभारंभ होगा। इसके पश्चात दिनांक 24, 25 एवं 31 जनवरी, 2026 तथा 01 एवं 05 से 09 फरवरी, 2026 (कुल 10 दिवस) तक प्रत्येक गिरदावर वृत्त (ILR) पर प्रातः 10:00 बजे से सायं 05:00 बजे तक विशेष शिविर लगाए जाएंगे।
भाग लेने वाले विभाग: इन शिविरों में कृषि, उद्यानिकी, कृषि विपणन, पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन, सहकारिता, जल संसाधन, ऊर्जा, उद्योग, आपदा प्रबंधन, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के क्षेत्रीय अधिकारी एवं कर्मचारी भाग लेंगे।
विभागीय गतिविधियां: शिविरों में सॉइल हेल्थ कार्ड वितरण, पीएम किसान निधि डीबीटी, फसल बीमा, किसान क्रेडिट कार्ड आवेदन, मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना, पीएम आवास योजना (PMAY-G) के तहत गृह प्रवेश, पीएम सूर्य घर योजना पंजीकरण और विभिन्न स्वरोजगार व अनुदान योजनाओं के आवेदन तैयार किए जाएंगे।
श्री गंगानगर जिले के पुनर्गठन और परिसीमन से संबंधित शुद्धि पत्र - आदेश दिनांक 28-12-2025
श्री गंगानगर जिला पुनर्गठन शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा श्री गंगानगर जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन से संबंधित अधिसूचना के संबंध में एक महत्वपूर्ण शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/786 दिनांक 20.11.2025 एवं संख्या एफ.15(39)पंव्रा/समिति गठन/2025/827 दिनांक 21.11.2025 के तहत श्री गंगानगर जिले की ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्रसीमांकन के संबंध में राजपत्र में प्रकाशित विवरण में लिपिकीय त्रुटि व प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात यह शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों हेतु जारी तालिकाओं में पूर्व प्रकाशित विवरण के स्थान पर संशोधित विवरण को सही समझ कर पढ़ने के निर्देश दिए गए हैं।
सूरतगढ़, सादुलशहर, रायसिंहनगर, घड़साना, अनूपगढ़ और राजियासर आदि क्षेत्रों से संबंधित प्रविष्टियों में सुधार किया गया है।
विस्तृत विवरण और संशोधित प्रविष्टियों की जानकारी के लिए मूल पीडीएफ दस्तावेज़ का अवलोकन करें।
पाली जिले की ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन/पुनर्सिमांकन के संबंध में शुद्धि पत्र जारी
पाली जिला ग्राम पंचायत पुनर्गठन शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवारा/2024/885 दिनांक 28-12-2025 के माध्यम से पाली जिले की ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सिमांकन/नवसृजन बाबत पूर्व में जारी अधिसूचना में लिपिकीय त्रुटि के सुधार हेतु शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य विवरण एवं संशोधन
विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवारा/2024/799 दिनांक 20.11.2025 (जो दिनांक 21.11.2025 को राजस्थान राजपत्र विशेषांक भाग 6(ग) में प्रकाशित हुई थी) में प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात निम्नलिखित संशोधन किए गए हैं:
पंचायत समिति बाली: राजपत्र पृष्ठ 1184, क्रम संख्या 23, कॉलम 5 - पूर्व प्रकाशित विवरण '3. रेलिया' को विलोपन किया गया है।
पंचायत समिति बाली: राजपत्र पृष्ठ 1184, क्रम संख्या 27, कॉलम 5 - संशोधित विवरण में '3. रेलिया' जोड़ा गया है।
पंचायत समिति बाली: राजपत्र पृष्ठ 1181, क्रम संख्या 4, कॉलम 5 - पूर्व प्रकाशित विवरण '3. सादलवा' को विलोपन किया गया है।
पंचायत समिति बाली: राजपत्र पृष्ठ 1182, क्रम संख्या 6, कॉलम 5 - संशोधित विवरण में '3. सादलवा' जोड़ा गया है।
उक्त विवरण को कॉलम 6 के स्थान पर कॉलम 7 में अंकित विवरण के अनुसार सही समझ कर पढ़ा जाए। यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है।
राजस्थान सरकार - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग: जिला कोटा के पुनर्गठन संबंधशुद्धि पत्र
अधिसूचना एवं संशोधन विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/882 दिनांक 28-12-2025 के माध्यम से जिला कोटा की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन के संबंध में पूर्व में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटि के सुधार हेतु शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
आदेश क्रमांक व दिनांक: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/882, दिनांक 28-12-2025।
विषय: जिला कोटा की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन बाबत पूर्व में प्रकाशित राजपत्र अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटियों का संशोधन।
प्रभावित क्षेत्र: ग्राम पंचायतें (इटावा, खैराबाद, सुल्तानपुर) एवं पंचायत समितियां (खैराबाद)।
उक्त शुद्धि पत्र के अनुसार कॉलम संख्या 6 में अंकित पूर्व प्रकाशित विवरण के स्थान पर कॉलम संख्या 7 में अंकित विवरण को सही समझा व पढ़ा जाए।
राजस्थान सरकार - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा चित्तौड़गढ़ जिले के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन के संबंध में शुद्धि पत्र
ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन संबंधी शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा आदेश क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/865, दिनांक 28-12-2025 के तहत चित्तौड़गढ़ जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन के संबंध में पूर्व में जारी अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटियों एवं प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण के पश्चात संशोधन शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
पत्र क्रमांक: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/865
दिनांक: 28-12-2025
संबंधित जिला: चित्तौड़गढ़
विवरण: पूर्व प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने की वजह से और प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण के बाद ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों (जैसे गंगरार, चित्तौड़गढ़, बूँसू, भदेसर, कपासन आदि) से संबंधित विवरणों में संशोधन, नाम सुधार तथा विलोपन किया गया है।
संसोधित विवरण के अनुसार ही संबंधित प्रविष्टियों को सही समझा और पढ़ा जाए।
बांसवाड़ा जिला ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन संबंधी शुद्धि पत्र आदेश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग राजस्थान सरकार अधिसूचना
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंचा/2024/859, दिनांक 28-12-2025 के तहत बांसवाड़ा जिले के ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन बाबत जारी पूर्व अधिसूचनाओं में लिपकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने के कारण यह शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार।
दिनांक: 28-12-2025।
संदर्भ आदेश: विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पुनर्गठन/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/812 दिनांक 21.11.2025 एवं जिला बांसवाड़ा की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन बाबत दिनांक 21.11.2025 व 24.11.2025 के राजस्थान राजपत्र विशेषांक भाग 6(ग)।
विवरण: राजपत्र में हुई लिपकीय त्रुटियों और प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों हेतु कॉलम संख्या 6 में अंकित विवरण के स्थान पर कॉलम संख्या 7 में अंकित विवरण को सही समझा कर पढ़ने हेतु निर्देशित किया गया है।
संबंधित पंचायत समितियों में बांसवाड़ा, तलवाड़ा, छोटी सरवन, गढ़ी, कुशलगढ़, घाटोल और सरेड़ी बड़ी के विभिन्न विवरणों में संशोधन किया गया है।
राजस्थान सरकार - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग: जिला बालोतरा की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन बाबत शुद्धि पत्र (अधिसूचना क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/856)
अधिसूचना एवं शुद्धि पत्र का विवरण
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), जयपुर द्वारा दिनांक 28.12.2025 को एक महत्वपूर्ण शुद्धि पत्र (अधिसूचना क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/856) जारी किया गया है। यह आदेश जिला बालोतरा की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्सीमांकन और नवसृजन से संबंधित है।
मुख्य बिंदु
संदर्भित पूर्व अधिसूचनाएं: विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/770 दिनांक 20.11.2025 एवं संख्या एफ.15(39)पुनर्गठन/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/811 दिनांक 21.11.2025 एवं 24.11.2025।
संशोधन का कारण: राजस्थान राजपत्र विशेषांक भाग 6(ग) में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने के कारण एवं प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात यह संशोधन किया गया है।
संशोधित विवरण: ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों हेतु जारी सूचियों में कॉलम 6 के स्थान पर कॉलम 7 में अंकित विवरण को सही समझा पढ़ने के निर्देश दिए गए हैं, जिसमें सिवाना, गिड़ा, कल्याणपुर, पायला कलां, बालोतरा, समदड़ी, बायतु एवं पाटोदी से संबंधित संशोधन शामिल हैं।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगाराम, शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है तथा संबंधित अधिकारियों को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित किया गया है।
बीकानेर जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन बाबत शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार
आदेश क्रमांक: एफ.15(39)पंवरे/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/896 दिनांक: 24-12-2025
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा जारी इस शुद्धि पत्र के माध्यम से जिला बीकानेर की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्सीमांकन और नवसृजन से संबंधित पूर्व में जारी विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंवरे/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/818 दिनांक 21.11.2025 (जो राजस्थान राजपत्र विशेषांक भाग 6(ग) में 24.11.2025 को प्रकाशित हुई थी) की लिपिकीय त्रुटियों को दुरुस्त किया गया है।
मुख्य बिंदु:
प्रभावित क्षेत्र: बीकानेर जिले की पुनर्गठित, पुनर्सीमांकित और नवसृजित पंचायत समितियां जैसे कोलायत, बज्जू खालसा, हदां, और बीछनोक तथा उनमें सम्मिलित ग्राम पंचायतों का विवरण संशोधित किया गया है।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पंचायत समितियों के चुनावों के पश्चात् उस जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो अनुसूची के स्तंभ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से ही विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
भीलवाड़ा जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन के संबंध में शुद्धि पत्र अधिसूचना
अधिसूचना विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार, जयपुर द्वारा भीलवाड़ा जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन के संबंध में दिनांक 28-12-2025 को शुद्धि पत्र अधिसूचना (क्रमांक: एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/895) जारी की गई है।
मुख्य बिंदु
संदर्भित अधिसूचना: यह अधिसूचना विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/817 दिनांक 21.11.2025 तथा राजस्थान राजपत्र दिनांक 24.11.2025 में प्रकाशित त्रुटियों को दुरुस्त करने के लिए जारी की गई है।
आसींद पंचायत समिति: आसींद पंचायत समिति के अंतर्गत पुनर्गठित/नवसृजित पंचायत समिति का मुख्यालय आसींद रहेगा और इसमें बराणा, चोरेला, ब्राह्मणों की सेरी, दांतड़ा, डड़ावत, दौलतगढ़, जालरिया, जिन्द्रास, कांवलास, करजालिया, कटार, लाछुड़ा, मोड़ का निम्बाहेड़ा, नेगड़िया, पालड़ी, रघुनाथपुरा, रतनपुरा (ला), तिलोली, सुलवाड़ा, बामणी, पाण्डरू, जीवलिया, झालरा, राजपुरा, मालासेरी, रूपपुरा (ब) और बागमाली ग्राम पंचायतें सम्मिलित हैं।
बदनौर पंचायत समिति: बदनौर पंचायत समिति में मोटरास, आकड़सादा, जगपुरा, संग्रामगढ़ और जयनगर ग्राम पंचायतें सम्मिलित हैं।
हुरडा पंचायत समिति: हुरडा पंचायत समिति का मुख्यालय हुरडा रहेगा और इसमें हुरडा, कोटड़ी, आगूचा, बराठिया, भोजरास, रूपारेली, बड़ला, लाम्बा, कानिया, गागेड़ा, खेजड़ी, अंतली, जालमपुरा, तस्वारिया, सरेरी, गढवालों का खेड़ा, कंवलियास, जालखेड़ा, टोंकरवाड, भगवानपुरा, आपलियास, बागा का खेड़ा, परडोदास और सनोदिया ग्राम पंचायतें सम्मिलित हैं।
शम्भूगढ़ पंचायत समिति: शम्भूगढ़ पंचायत समिति का मुख्यालय शम्भूगढ़ रहेगा और इसके अंतर्गत शम्भूगढ़, आमेसर, बरसणी, गांगलास, ईरास, कालियास, रूपपुरा, मोतीलपुर, परासोली, जोधडास, दूलहेपुरा, रामुपरिया, धौली जेतुपुरा, मोटरास, आकड़सादा, जगपुरा, संग्रामगढ़, रायरा, जयनगर, बारणी, दांतड़ा, फलामादा, सोडार और उंखलिया ग्राम पंचायतें शामिल हैं।
राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. ओ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा यह अधिसूचना जारी की गई है।
ग्रामीण सेवा शिविर के फॉलोअप शिविर 17 दिसंबर 2025 से 24 दिसंबर 2025 तक आयोजित करने बाबत
ग्रामीण सेवा शिविर के फॉलोअप शिविर आयोजन के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा वर्तमान सरकार के 02 वर्ष का कार्यकाल पूर्ण होने के उपलक्ष्य में ग्रामीण सेवा शिविर के फॉलोअप शिविर आयोजित किए जाने के संबंध में आदेश जारी किया गया है।
शिविर की मुख्य तिथियां एवं अवधि
शिविर अवधि: 17 दिसंबर, 2025 से 24 दिसंबर, 2025 तक (दिनांक 21.12.2025 को छोड़कर)।
शिविर आयोजन स्थल एवं व्यवस्थाएं
शिविरों का आयोजन पंचायत भवन, स्कूल भवन या उपलब्ध अन्य सार्वजनिक स्थानों पर किया जाएगा।
भू-अभिलेख निरीक्षक वृत्त मुख्यालय पर राज्य की प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर शिविर आयोजित किए जाएंगे।
आगंतुकों के लिए पेयजल की समुचित व्यवस्था, मेज, कुर्सियां, दरियां और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं ग्राम पंचायत द्वारा की जाएंगी।
वित्तीय प्रावधान एवं व्यय की अनुमति
षष्ठ राज्य वित्त आयोग के अंतर्गत पंचायती राज संस्थाओं को देय अनुदान राशि के उपयोग के संबंध में जारी दिशा-निर्देशों के बिंदु संख्या (अ) 3 XIII के अंतर्गत संबंधित ग्राम पंचायत द्वारा शिविर आयोजन हेतु राशि रु. 25,000/- (अधिकतम) का व्यय षष्ठ राज्य वित्त आयोग अंतर्गत उपलब्ध अनुदान राशि से करने की सहमति प्रदान की जाती है। यह सहमति वित्त विभाग की आई.डी. संख्या 332501835 दिनांक 05.12.2025 द्वारा अनुमोदित है।
इस कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान करने के निर्देश दिए गए हैं।
दौसा जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन और नवसर्जन - अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा दौसा जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रोमन और नवसर्जन के संबंध में महत्वपूर्ण अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना आदेश क्रमांक एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/822 दिनांक 21-11-2025 के तहत जारी की गई है।
मुख्य बिंदु:
राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए, राज्य सरकार द्वारा दौसा जिले की विभिन्न पंचायत समितियों का पुनर्गठन/पुनर्रोन/नवसर्जन किया गया है।
जिला कलेक्टर द्वारा तैयार किए गए प्रस्तावों एवं आपत्तियों पर विचार करने तथा राज्य सरकार से अनुमोदन प्राप्त करने के पश्चात यह अंतिम आदेश लागू किया गया है।
अनुसूची में वर्णित पंचायत समितियां उस नाम से जानी जाएंगी और निर्धारित स्थानीय क्षेत्र व अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में वर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात, उक्त जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो अनुसूची के स्तंभ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में वर्णित पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
अलवर जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन/पुनर्सिमांकन/नवसृजन - अधिसूचना दिनांक 21-11-2025
अलवर जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन और नवसृजन अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक एफ.15(39)पंविलि/पंचायत समिति गठन/2025/810 दिनांक 21-11-2025 के अनुसार, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए अलवर जिले के अंतर्गत पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्सिमांकन एवं नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम व संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 के साथ धारा-9, 10 एवं 101 के प्रावधानों के अंतर्गत यह प्रशासनिक कार्रवाई की गई है।
जिला कलेक्टर के प्रस्ताव: जिला कलेक्टर्स द्वारा तैयार किए गए प्रस्तावों, सार्वजनिक अवलोकन और आपत्तियों पर सुनवाई के उपरांत प्राप्त संचिकाओं के परीक्षण के बाद राज्य सरकार द्वारा यह अनुमोदन प्रदान किया गया है।
नयी व्यवस्था: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पुनर्गठित/नवसृजित पंचायत समितियां उस नाम से जानी जाएंगी तथा स्तंभ 5 में उल्लेखित ग्राम पंचायतें उनके अधिकार क्षेत्र में आएंगी।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात, उक्त जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो अनुसूची के स्तंभ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
राजस्थान सरकार: सीकर जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन एवं नवसृजन की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा सीकर जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन एवं नवसृजन से संबंधित आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई है।
अधिसूचना विवरण
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
क्रमांक: एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/845
दिनांक: 21-11-2025
जारीकर्ता: डॉ. जोगा राम, शासन सचिव (राज्यपल की आज्ञा से)
मुख्य बिंदु एवं प्रक्रिया
राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 की प्रदत्त शक्तियों तथा विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/02 दिनांक 10.01.2025 के अंतर्गत जिला कलेक्टर सीकर द्वारा प्रस्ताव तैयार कर सार्वजनिक अवलोकनार्थ एक माह की अवधि में आपत्तियां आमंत्रित की गईं और सुनवाई की गई।
राज्य सरकार के अनुमोदन के पश्चात सीकर जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन/पुनर्रसीमांकन/नवसृजन किया गया है।
अधिसूचना के अनुसार, सीकर जिले की पुनर्गठित/पुनर्रसीमांकित/नवसृजित पंचायत समितियां अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित नाम से जानी जाएंगी और संबंधित स्थानीय क्षेत्र में अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
अनुसूची के स्तंभ 4 में यथावर्णित पंचायत समितियों के चुनावों के पश्चात उक्त जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो अनुसूची के स्तंभ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारम्भ होगा।
बाड़मेर जिला परिषद की वर्तमान पंचायत समितियों व ग्राम पंचायतों की स्थिति
बाड़मेर जिला परिषद की पंचायत समितियां एवं ग्राम पंचायतें
यह दस्तावेज बाड़मेर जिला परिषद के अंतर्गत वर्तमान पंचायत समितियों और ग्राम पंचायतों की स्थिति की जानकारी प्रदान करता है। इसमें विभिन्न पंचायत समितियों के अंतर्गत पुनर्गठन सहित ग्राम पंचायतों की कुल संख्या और वर्तमान ग्राम पंचायतों की संख्या दर्शायी गई है।
मुख्य बिंदु:
डूगेरों का तला, विशाला, बाटाडू, लीलसर, मांगता और भियाड़ पंचायत समितियां नवसृजित हैं।
फागलिया, गडरारोड, रामसर और सेड़वा पंचायत समितियों की सीमा में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है।
बाड़मेर जिला परिषद के अंतर्गत कुल ग्राम पंचायतों का विवरण दिया गया है।
बालोतरा जिले की पंचायत समिति पायला कला से 2 ग्राम पंचायत खुडाला व नई उन्दरी पुनर्गठन के बाद गुड़ामालानी पंचायत समिति में हैं।
बालोतरा जिले की पंचायत समिति बायतु से 25 ग्राम पंचायतें (पुनर्गठन सहित) बाटाडू पंचायत समिति में हैं।
डूंगरपुर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नए सृजन की अंतिम अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान राजपत्र (असाधारण) दिनांक 21 नवंबर, 2025 में डूंगरपुर जिले के संबंध में एक महत्वपूर्ण अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/785 (दिनांक 20 नवंबर, 2025) जारी की गई है।
यह अधिसूचना राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए तथा धारा-9, 10 एवं 101 के प्रावधानों के अंतर्गत जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार प्रस्तावों और आपत्तियों पर सुनवाई के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से जारी की गई है।
मुख्य बिंदु:
पुनर्गठित क्षेत्र: डूंगरपुर जिले की विभिन्न पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नए सृजन का कार्य पूरा कर लिया गया है।
अधिकारिता: अनुसूची के स्तम्भ 4 में यथानामित ग्राम पंचायतें संबंधित स्तम्भ 5 में वर्णित स्थानीय क्षेत्रों पर अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
कार्यकाल और प्रभाव: अनुसूची के स्तम्भ 4 में वर्णित नई/पुनर्गठित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, स्तम्भ 2 में दर्शित पुरानी विद्यमान ग्राम पंचायतें उस तारीख से अस्तित्व में नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
शामिल पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के तहत सागवाड़ा, गलियाकोट, पालेदवल, दोवड़ा, डूंगरपुर, झोंथरी, आसपुर, साबला, चिखली, सीमलवाड़ा, गामड़ी अहाडा और बिछीवाड़ा पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाले राजस्व ग्रामों और ग्राम पंचायतों का विवरण राजपत्र में प्रकाशित किया गया है।
विस्तृत विवरण एवं राजस्व ग्रामों की सूची के लिए कृपया संलग्न मूल राजपत्र अधिसूचना देखें।
कोटपूतली-बहरोड़ जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/797 (दिनांक 20 नवम्बर 2025) के अंतर्गत राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए कोटपूतली-बहरोड़ जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन एवं नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम व संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-9, 10, 101 एवं 98 के तहत यह कार्रवाई की गई है।
जिला कलेक्टर के प्रस्ताव: संबंधित जिला कलेक्टर द्वारा तैयार प्रस्तावों, सार्वजनिक अवलोकन, आपत्तियों के आमंत्रण तथा सुनवाई की प्रक्रिया के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से यह अधिसूचना जारी की गई है।
पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के दायरे में बानसूर, बहरोड़, कोटपूतली, नारायणपुर, नीमराना, पाटन और विराट नगर पंचायत समितियां शामिल हैं।
कार्यकाल की स्थिति: अनुसूची के स्तम्भ संख्या 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, उक्तानुसार जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो स्तम्भ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
राज्यपाल की आज्ञा से, डॉ. जोगा राम, शासन सचिव।
बारां जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन - अधिसूचना 2025
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग - अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा 98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, बारां जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन से संबंधित आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र (असाधारण) दिनांक 21 नवम्बर 2025 में प्रकाशित हुई है।
प्रमुख बिंदु
संबंधित विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
आदेश संख्या: संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/772, दिनांक 20 नवम्बर 2025।
कार्यान्वयन: जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार किए गए प्रस्तावों, आपत्तियों पर सुनवाई और राज्य सरकार के अनुमोदन के पश्चात बारां जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों और उनमें सम्मिलित राजस्व ग्रामों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, उक्त जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो स्तंभ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई वर्णित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
अधिक जानकारी के लिए कृपया मूल राजस्थान राजपत्र अधिसूचना देखें।
सवाई माधोपुर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/804 (दिनांक नवंबर 20, 2025) के माध्यम से सवाई माधोपुर जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन की आधिकारिक घोषणा की गई है।
यह कार्रवाई राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए तथा पूर्व अधिसूचना दिनांक 10.01.2025 के क्रम में जिला कलेक्टर द्वारा तैयार प्रस्तावों और आपत्तियों पर सुनवाई के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से की गई है।
मुख्य बिंदु:
सواسई माधोपुर जिला के अंतर्गत आने वाली पंचायत समितियों (जैसे बामनवास, बौंली, चौथ का बरवाड़ा, गंगापुरसिटी, खण्डार, मलारना डूंगर, सवाई माधोपुर आदि) में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन और नवसृजन किया गया है।
निसृत एवं पुनर्गठित ग्राम पंचायतें अनुसूची के स्तंभ-4 में वर्णित नामों से जानी जाएंगी तथा स्तंभ-5 में दर्शाए गए राजस्व ग्रामों पर अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
संबंधित पंचायत समितियों में नई पंचायतों के कार्यप्रारंभ के साथ ही पुरानी निर्धारित ग्राम पंचायतें अस्तित्व में नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी।
यह अधिसूचना राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी की गई है।
टोंक जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन एवं नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
टोंक जिले की ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन और पुनसीमांकन की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए टोंक जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन से संबंधित आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र (असाधारण) दिनांक 21 नवंबर, 2025 में प्रकाशित की गई है।
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
अधिकार क्षेत्र: टोंक जिले के अंतर्गत आने वाली विभिन्न पंचायत समितियां जैसे टोंक, निवाई, पीपलू, मालपुरा, टोडारायसिंह और उनियारा।
कार्यान्वयन प्रक्रिया: जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार किए गए प्रस्तावों एवं अभिशंषाओं के परीक्षण के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से टोंक जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
कार्यकाल और प्रभाव: अनुसूची के स्तम्भ संख्या 4 में वर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, उक्त जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो स्तम्भ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से ही विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
विस्तृत विवरण और ग्राम-वार सूची के लिए संलग्न आधिकारिक राजपत्र अधिसूचना देखें।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग - सलूंबर जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन एवं नवसृजन अधिसूचना
अधिसूचना विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/803 दिनांक 20 नवंबर 2025 के अंतर्गत, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए सलूंबर जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन एवं नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु
अधिनियम व निर्देश: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-9, 10 एवं 101 में वर्णित शक्तियों तथा विभागीय अधिसूचना दिनांक 10.01.2025 के तहत जिला कलेक्टर को प्रस्ताव तैयार करने, सार्वजनिक अवलोकन के लिए प्रसारित करने, आपत्तियां आमंत्रित करने और सुनवाई हेतु अधिकृत किया गया था।
राज्य सरकार का अनुमोदन: जिला कलेक्टरों द्वारा कार्यवाही किए जाने, प्रस्तावों एवं अभिशंषाओं का परीक्षण करने के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से सलूंबर जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन/पुनरसीमांकन/नवसृजन किया गया है।
शामिल पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के तहत पंचायत समिति झल्लारा, जयसमंद, लसाड़िया, सलूंबर, सराडा और सेमारी के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों एवं उनमें सम्मिलित राजस्व ग्रामों की सूची में परिवर्तन किया गया है।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, उस जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो स्तंभ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
कोटपूतली-बहरोड़ जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/797- दिनांक नवंबर 20, 2025 के माध्यम से कोटपूतली-बहरोड़ जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
प्रमुख बिंदु
अधिनियम व संदर्भ: यह कार्रवाई राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-9, 10, 98 एवं 101 के अंतर्गत जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार प्रस्तावों और आपत्तियों पर सुनवाई के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से की गई है।
अधिकारिता: अनुसूची के स्तम्भ 4 में यथानामित पुनर्गठित एवं नवसृजित ग्राम पंचायतें स्तम्भ 5 में वर्णित स्थानीय क्षेत्र एवं राजस्व ग्रामों के अनुसार अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
कार्यकाल और प्रभाव: अनुसूची के स्तम्भ 4 में वर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, स्तम्भ 2 में दर्शाई गई विद्यमान ग्राम पंचायतें उस तारीख से अस्तित्व में नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
संबंधित पंचायत समितियां
बानसूर
बहरोड़
कोटपूतली
नारायणपुर
नीमराना
पावटा
विराटनगर
विस्तृत राजस्व ग्रामों की सूची और विवरण के लिए राजस्थान राजपत्र (असाधारण) दिनांक 21 नवंबर 2025 (भाग 6-ग) का अवलोकन करें।
भरतपुर जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन अधिसूचना
भरतपुर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन एवं नवसृजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए भरतपुर जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है। यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र (अतिरिक्त) में दिनांक 21 नवंबर, 2025 को प्रकाशित की गई है।
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना संख्या: संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/775 (दिनांक नवंबर 20, 2025)।
संबद्ध जिला: भरतपुर, राजस्थान।
शामिल पंचायत समितियां: बयाना, भुसावर, नदबई, रूपबास, सेवर, उच्चैन और वैर।
कार्यकाल और प्रभाव: अनुसूची के स्तम्भ संख्या 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात उक्त जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो अनुसूची के स्तम्भ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से ही विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
प्रतापगढ़ जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुन सीमांकन और नवसृजन - राजस्थान राजपत्र अधिसूचना
प्रतापगढ़ जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन एवं पुनसीमांकन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/801 (दिनांक नवंबर 20, 2025) के अंतर्गत राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए प्रतापगढ़ जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिनीम संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-9, 10 एवं 101 के प्रावधानों के तहत यह प्रक्रिया पूर्ण की गई है।
संबंधित पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के दायरे में प्रतापगढ़ जिले की धरियावद, पीपलखूट, सुहागपुरा, धमोतर, प्रतापगढ़, अरनोद, दलोट और छोटीसादड़ी पंचायत समितियां शामिल हैं।
कार्यकाल प्रभाव: अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, विद्यमान ग्राम पंचायतें (जो स्तंभ संख्या 2 में वर्णित हैं) उस तारीख से अस्तित्व में नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
जारीकर्ता: राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
जैसलमेर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
जैसलमेर जिला ग्राम पंचायत पुनर्गठन अधिसूचना 2025
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/789 (दिनांक नवम्बर 20, 2025) के तहत जैसलमेर जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन एवं नवसृजन किया गया है। यह कार्रवाई राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा 98 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए की गई है।
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना दिनांक: नवम्बर 20, 2025
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
कार्यान्वयन: अनुसूची के स्तम्भ 4 में वर्णित नई/पुनर्गठित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, स्तम्भ 2 में उल्लेखित मौजूदा ग्राम पंचायतें उस तारीख से अस्तित्व में नहीं रहेंगी और उनका कार्य बंद हो जाएगा, जिससे नई पुनर्गठित पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
विस्तृत जानकारी और ग्रामवार राजस्व गांवों की सूची के लिए मूल राजस्थान राजपत्र (असाधारण) दिनांक 21 नवम्बर 2025 का अवलोकन करें।
करौली जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन अधिसूचना
करौली जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/794 दिनांक 20 नवम्बर, 2025 के माध्यम से करौली जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम और शक्तियाँ: यह कार्रवाई राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों और धारा-9, 10 एवं 101 के अंतर्गत राज्य सरकार द्वारा जिला कलेक्टर को प्रदत्त अधिकारों के आधार पर की गई है।
कार्यान्वयन: जिला कलेक्टर द्वारा तैयार प्रस्तावों, सार्वजनिक अवलोकन, आपत्तियों के आमंत्रण और सुनवाई के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से करौली जिले की विभिन्न पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन व नवसृजन किया गया है।
शामिल पंचायत समितियां: इस अधिसूचना में मण्डरायल, हिण्डौन, टोडाभीम, श्रीमहावीरजी, करौली, मासलपुर और नादौती पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाले राजस्व ग्रामों और ग्राम पंचायतों का विवरण अनुसूची के अनुसार निर्धारित किया गया है।
प्रभावी तिथि: अनुसूची में वर्णित नई ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, पूर्ववर्ती विद्यमान ग्राम पंचायतें उस तिथि से कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
यह अधिसूचना राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा जारी की गई है।
जालोर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन एवं नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
जालोर जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/790 (दिनांक नवंबर 20, 2025) के अंतर्गत राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए जालोर जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
संबंधित विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
अधिसूचना दिनांक: 20 नवंबर 2025 (राजस्थान राजपत्र असाधारण में 21 नवंबर 2025 को प्रकाशित)।
अधिनियम संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-9, 10, 98 एवं 101।
क्षेत्र: जालोर जिला (जिसमें जालोर, आहोर, सायला, जसवंतपुरा, भीनमाल, बागोड़ा, रानीवाड़ा, सांचौर और चितलवाना पंचायत समितियां शामिल हैं)।
कार्यकाल निर्देश: अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात उक्त जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो अनुसूची के स्तंभ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से ही विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
यह अधिसूचना राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी की गई है।
धौलपुर जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा 98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए धौलपुर जिले की ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र (असाधारण) दिनांक 21 नवंबर 2025 में प्रकाशित की गई है, जिसके अंतर्गत धौलपुर जिले के विभिन्न क्षेत्रों एवं पंचायत समितियों (जैसे बाड़ी, बसेड़ी, धौलपुर, राजाखेड़ा, सैंपऊ, सरमथुरा) में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम और संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धाराओं के तहत जिला कलेक्टर द्वारा तैयार प्रस्तावों और आपत्तियों पर सुनवाई के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से यह पुनर्गठन किया गया है।
कार्यान्वयन: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, स्तंभ 2 में उल्लेखित पूर्ववर्ती ग्राम पंचायतें उस तारीख से अस्तित्व में नहीं रहेंगी और उनका कार्यकाल समाप्त माना जाएगा।
संबंधित पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के दायरे में बाड़ी, बसेड़ी, धौलपुर, राजाखेड़ा, सैंपऊ और सरमथुरा पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाले राजस्व ग्रामों और ग्राम पंचायतों का नया सीमांकन किया गया है।
अधिक जानकारी के लिए कृपया ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार की आधिकारिक अधिसूचना देखें।
ब्यावर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन एवं निसृजन से संबंधित अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), जयपुर द्वारा जारी अधिसूचना (संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/774, दिनांक 20 नवंबर 2025) के अनुसार, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए ब्यावर जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन एवं निसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु एवं प्रक्रिया:
संबद्ध अधिनियम एवं निर्देश: यह कार्रवाई राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-9, 10, 98 एवं 101 के प्रावधानों और पूर्व विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/02 दिनांक 10.01.2025 के अंतर्गत जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार प्रस्तावों, आपत्तियों के आमंत्रण, सुनवाई तथा राज्य सरकार के अनुमोदन के पश्चात की गई है।
ग्राम पंचायतों का क्षेत्राधिकार: इस अधिसूचना के तहत पुनर्गठित, पुनसीमांकित एवं नवसृजित ग्राम पंचायतें अपने निर्धारित नामों और राजस्व ग्रामों के स्थानीय क्षेत्र के अनुसार अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
कार्यकाल: अनुसूची में वर्णित ग्राम पंचायतों के चुनावों के पश्चात उस जिले की विद्यमान ग्राम पंचायतें, जो पुनर्गठन से प्रभावित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
शामिल पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के अंतर्गत मुख्य रूप से पंचायत समिति बदनोर, जवाजा, जैतारण, रायपुर और मसूदा के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों एवं उनके राजस्व ग्रामों का पुनर्गठन किया गया है।
विस्तृत विवरण एवं सूची के लिए संलग्न राजपत्र का अवलोकन करें।
बूंदी जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
बूंदी जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन एवं पुनसीमांकन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनगर्ठन/विधि/पंरा/2024/778:- (दिनांक 20 नवम्बर 2025) के अंतर्गत राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए बूंदी जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम व संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-9, 10 एवं 101 में वर्णित शक्तियों तथा पूर्व अधिसूचना दिनांक 10.01.2025 के अनुपालन में जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार प्रस्तावों और अभिशंसाओं के परीक्षण के पश्चात यह राज्य सरकार द्वारा अनुमोदित किया गया है।
प्रभावित पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के तहत बूंदी जिले की पंचायत समिति हिंडोली, नैनवां, तालेडा और बूंदी के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन व नवसृजन किया गया है।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, उस जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो स्तंभ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
अधिक जानकारी एवं विस्तृत राजस्व ग्रामों की सूची के लिए आधिकारिक राजस्थान राजपत्र (असाधारण) दिनांक 21 नवंबर 2025 का अवलोकन करें।
खैरथल-तिजारा जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन एवं नवसृजन - अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान राजपत्र में जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/795, दिनांक 20 नवम्बर 2025 के माध्यम से खैरथल-तिजारा जिले की ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन से संबंधित विस्तृत विवरण प्रकाशित किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम एवं शक्तियां: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों और धारा-9, 10 एवं 101 में वर्णित प्रावधानों के अंतर्गत यह कार्रवाई की गई है।
जिला कलेक्टर की भूमिका: संबंधित जिले के जिला कलेक्टर द्वारा प्रस्ताव तैयार कर सार्वजनिक अवलोकन हेतु प्रसारित करने, एक माह की अवधि में आपत्तियां आमंत्रित करने तथा उन पर सुनवाई करने के पश्चात राज्य सरकार से अनुमोदन प्राप्त किया गया है।
पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के तहत मुख्य रूप से किशनगढ़बास, कोटकासिम, और तिजारा पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों और उनमें सम्मिलित राजस्व ग्रामों का पुनर्गठन व नवसृजन किया गया है।
कार्यकाल और प्रभाव: अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में यथावर्णित नई/पुनर्गठित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, उस जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो स्तंभ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
यह अधिसूचना राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी की गई है।
कोटा जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नए सृजन की अधिसूचना
राजकीय अधिसूचना और उद्देश्य
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी इस आधिकारिक अधिसूचना (संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/796, दिनांक 20 नवंबर, 2025) के माध्यम से कोटा जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नए सृजन की जानकारी दी गई है। यह कार्रवाई राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए, धारा-9, 10 एवं 101 के प्रावधानों के अंतर्गत की गई है।
मुख्य बिंदु एवं प्रक्रिया
जिला कलेक्टर द्वारा प्रस्ताव: संबंधित जिले के जिला कलेक्टर ने नियमानुसार प्रस्ताव तैयार कर सार्वजनिक अवलोकन के लिए प्रसारित किए थे और एक माह की अवधि में आपत्तियां आमंत्रित कर उनकी सुनवाई की थी।
राज्य सरकार का अनुमोदन: जिला कलेक्टरों द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों एवं अभिशंषाओं का परीक्षण करने के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से कोटा जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन/पुनरसीमांकन/निसृजन किया गया है।
नामकरण और अधिकारिता: अनुसूची के स्तम्भ 4 में वर्णित पुनर्गठित/पुनरसीमांकित/नवसृजित ग्राम पंचायतें उसी नाम से जानी जाएंगी और स्तम्भ 5 में दर्शाए गए स्थानीय क्षेत्र व राजस्व ग्रामों पर अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
कार्यकाल की शुरुआत: अनुसूची के स्तम्भ 4 में वर्णित नई ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, स्तम्भ 2 में दर्शाई गई विद्यमान ग्राम पंचायतें उस तारीख से अस्तित्व में नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी, जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
संबद्ध पंचायत समितियां
इस अधिसूचना के अंतर्गत कोटा जिले की विभिन्न पंचायत समितियों (जैसे सांगोद, खैराबाद, सुल्तानपुर, लाडपुरा आदि) के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों एवं उनके राजस्व ग्रामों में पुनर्गठन और फेरबदल किया गया है। विस्तृत विवरण के लिए राजस्थान राजपत्र, दिनांक 21 नवंबर 2025 का अवलोकन किया जा सकता है।
नोट: यह पोस्ट संलग्न राजपत्र अधिसूचना पर आधारित है।
फलौदी जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन एवं नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए तथा धारा-9, 10 एवं 101 में वर्णित शक्तियों के अंतर्गत, संबंधित जिले के जिला कलेक्टर द्वारा तैयार किए गए प्रस्तावों एवं अभिशंषाओं का परीक्षण कर राज्य सरकार से अनुमोदन प्राप्त करने के पश्चात फलौदी जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन एवं नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
प्रभावित पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के तहत फलौदी जिले की विभिन्न पंचायत समितियों (जैसे बापणी, आऊ, फलौदी, देचू, बाप, घंटियाली, लोहावट आदि) के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों और उनके राजस्व गांवों का पुनर्गठन व पुनसीमांकन किया गया है।
नया नाम एवं मुख्यालय: पुनर्गठित/नवसृजित ग्राम पंचायतें उसी नाम से जानी जाएंगी जो अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित हैं और उनकी अधिकारिता का स्थानीय क्षेत्र स्तंभ 5 के अनुसार होगा।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, संबंधित जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो अनुसूची के स्तंभ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
यह अधिसूचना राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी की गई है।
सिरोही जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन एवं नवसृजन - अधिसूचना 2025
सिरोही जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन एवं नवसृजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान राजपत्र में दिनांक 20 नवंबर 2025 की अधिसूचना (संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/806) के माध्यम से सिरोही जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
प्रमुख बिंदु
अधिनियम व संदर्भ: यह कार्रवाई राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए की गई है।
संबंधित पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के तहत पिंडवाड़ा, आबूरोड, शिवगंज, रेवदर और सिरोही पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन किया गया है।
कार्यकाल और प्रभाव: अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में वर्णित पुनर्गठित/नवसृजित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, स्तंभ संख्या 2 में उल्लिखित वर्तमान ग्राम पंचायतें उस तारीख से अस्तित्व में नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी, जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
डीग जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
डीग जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन एवं पुनरसीमांकन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/782 (दिनांक नवंबर 20, 2025) के अंतर्गत राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा 9, 10, 101 एवं धारा 98 के प्रावधानों के तहत डीग जिले की विभिन्न पंचायत समितियों के अंतर्गत ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु एवं प्रक्रिया
सक्षम प्राधिकारी की कार्रवाई: जिला कलेक्टरों द्वारा नियमानुसार प्रस्ताव तैयार कर, सार्वजनिक अवलोकन हेतु प्रसारित कर एक माह की अवधि में आपत्तियां आमंत्रित करने तथा सुनवाई करने की प्रक्रिया पूरी की गई।
राज्य सरकार का अनुमोदन: जिला कलेक्टरों द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों एवं अभिशंषाओं के परीक्षण के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से डीग जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन/पुनरसीमांकन/नवसृजन किया गया है।
अधिकारिता और कार्यक्षेत्र: अनुसूची के स्तम्भ 4 में वर्णित पुनर्गठित एवं नवसृजित ग्राम पंचायतें स्तम्भ 5 में उल्लेखित राजस्व गांवों पर अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तम्भ 4 में वर्णित नई ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, स्तम्भ 2 में उल्लेखित विद्यमान ग्राम पंचायतें उस तारीख से अस्तित्व में नहीं रहेंगी और उनका कार्य समाप्त हो जाएगा, जिसके बाद नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
शामिल पंचायत समितियां
इस अधिसूचना के अंतर्गत डीग जिले की प्रमुख पंचायत समितियों (जैसे सीकरी, पहाड़ी, कुम्हेर, कामाँ, नगर और डीग) के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों और उनसे संबंधित राजस्व गांवों का विस्तृत विवरण राजस्थान राजपत्र (अतिरिक्त) दिनांक 21 नवंबर 2025 में प्रकाशित अनुसूची के अनुसार निर्धारित किया गया है।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है।
अजमेर जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
अजमेर जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन एवं पुनरसीमांकन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान राजपत्र में जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/768 (दिनांक 20 नवंबर, 2025) के अंतर्गत अजमेर जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
यह कार्रवाई राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा 98 के तहत प्रदत्त शक्तियों और जिला कलेक्टर्स द्वारा तैयार प्रस्तावों एवं आपत्तियों की सुनवाई के उपरांत राज्य सरकार के अनुमोदन से की गई है।
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना दिनांक: 20 नवंबर, 2025
संबंधित विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार
क्षेत्र: अजमेर जिला (विभिन्न पंचायत समितियाँ जैसे सिलोरा, सावर, अजमेर ग्रामीण, श्रीनगर, केकड़ी, सरवाड़, अड़ाई, बिनाय, पीसांगन आदि)
कार्यान्वयन: अनुसूची में यथावर्णित नई पुनर्गठित/नवसृजित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, पूर्ववर्ती विद्यमान ग्राम पंचायतें उस तिथि से अस्तित्व में नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा यह अधिसूचना जारी की गई है।
बाँसवाडा जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) अधिसूचना
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/771 (दिनांक नवंबर 20, 2025) के अंतर्गत राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए बाँसवाडा जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
प्रमुख मुख्य बिंदु:
अधिनियम एवं संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-9, 10, 98 एवं 101 के अंतर्गत संबंधित जिला कलेक्टर द्वारा तैयार प्रस्तावों और अनुशंसाओं के परीक्षण के पश्चात यह अधिसूचना जारी की गई है।
शामिल पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के तहत बाँसवाडा जिले की विभिन्न पंचायत समितियों (जैसे आनन्दपुरी, अरथुना, बागीदौरा, बाँसवाडा, छोटी सरवा, छोटी सरवन, गांगडतलाई, गढ़ी, घाटोल, कुशलगढ़, सज्जनगढ़, तलवाडा आदि) के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन एवं पुनसीमांकन किया गया है।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तम्भ संख्या 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात उक्त जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो अनुसूची के स्तम्भ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
यह अधिसूचना राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी की गई है।
दौसा जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन से संबंधित अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/781/- दिनांक नवम्बर 20, 2025 के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए दौसा जिले की विभिन्न पंचायत समितियों के अंतर्गत ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु एवं विवरण
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
अधिसूचना दिनांक: नवम्बर 20, 2025 (राजस्थान राजपत्र असाधारण में प्रकाशित)
जिला: दौसा
शामिल पंचायत समितियां: बांदीकुई, दौसा, लालसोट, महवा, मंडावर, नांगल राजावतान, रामगढ़ पचवारा, सिकंदरा, सिकराय और बैजूपाड़ा, बसवा।
इस अधिसूचना के अनुसार, संबंधित जिला कलेक्टर द्वारा तैयार प्रस्तावों तथा आपत्तियों पर सुनवाई और परीक्षण के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से दौसा जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन एवं नवसृजन किया गया है। अनुसूची में यथावर्णित नई ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात पुरानी विद्यमान ग्राम पंचायतें उस तिथि से अस्तित्व में नहीं रहेंगी और उनका कार्य समाप्त हो जाएगा जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
उदयपुर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन एवं नवसृजन - राजस्थान राजपत्र अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/808, दिनांक 20 नवम्बर 2025 के अनुसार, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए उदयपुर जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बातें:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
स्थान: उदयपुर जिला
प्रभाव: इस अधिसूचना के तहत संबंधित पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन और नवसृजन किया गया है, जिसके विस्तृत विवरण और राजस्व ग्रामों की सूची राजपत्र में प्रकाशित की गई है।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तम्भ संख्या 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, उक्त जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो स्तम्भ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से ही विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
यह अधिसूचना राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी की गई है।
बीकानेर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा बीकानेर जिले में ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन के संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र (असाधारण) में दिनांक 20 नवंबर, 2025 को प्रकाशित हुई है।
अधिनियम संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98, 9, 10 एवं 101 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग।
कार्रवाई: जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार प्रस्तावों एवं अभिशषाओं का परीक्षण कर राज्य सरकार के अनुमोदन के पश्चात बीकानेर जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
शामिल पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के तहत लूनकरनसर, श्रीडूंगरगढ़, बीकानेर, नोखा, पाँचू, बज्जू खालसा, खाजूवाला, पूगल और हदां पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाले ग्राम क्षेत्रों का पुनर्गठन किया गया है।
कार्यकाल संबंधी निर्देश: अनुसूची के स्तम्भ संख्या 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात संबंधित जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो स्तम्भ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
अधिक जानकारी और विस्तृत राजस्व ग्राम सूची के लिए कृपया संलग्न मूल राजपत्र अधिसूचना देखें।
राजसमंद जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन एवं नवसृजन अधिसूचना
राजसमंद जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन और पुनसीमांकन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान राजपत्र में राजसमंद जिले की ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन, पुनसीमांकन एवं नवसृजन के संबंध में अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना दिनांक 20 नवंबर, 2025 को जारी की गई है, जिसके अंतर्गत राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का उपयोग किया गया है।
मुख्य बिंदु:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
जिला: राजसमंद
शामिल पंचायत समितियां: आमेट, भीम, रेलमगरा, राजसमंद और अन्य संबंधित क्षेत्र।
कार्यान्वयन: जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार प्रस्तावों और आपत्तियों पर सुनवाई के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से राजसमंद जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
नया कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, उस जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो अनुसूची के स्तंभ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
अधिक जानकारी के लिए कृपया राजस्थान राजपत्र (असाधारण) दिनांक 21 नवंबर, 2025 का अवलोकन करें।
हनुमानगढ़ जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनर्र्सीमांकन और नवसृजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवारा/2024/787 (दिनांक नवंबर 20, 2025) के अंतर्गत राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए हनुमानगढ़ जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनर्र्सीमांकन और नवसृजन किया गया है।
प्रमुख बातें एवं निर्देश
सम्बन्धित विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
प्रभावित क्षेत्र: हनुमानगढ़ जिले की पंचायत समितियां (भादरा, पीलीबंगा, संगरिया, टिब्बी, हनुमानगढ़, नोहर आदि) एवं उनके अंतर्गत आने वाले राजस्व ग्राम।
नया कार्यकाल: पुनर्गठित/नवसृजित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, पुरानी विद्यमान ग्राम पंचायतें उस तारीख से कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
अधिकारिता: प्रत्येक पुनर्गठित/नवसृजित ग्राम पंचायत अनुसूची के स्तम्भ 5 में वर्णित स्थानीय क्षेत्र व राजस्व ग्रामों पर अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेगी।
जयपुर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
जयपुर जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन एवं पुनरसीमांकन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी असाधारण राजपत्र अधिसूचना (संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/788, दिनांक 20 नवंबर, 2025) के अनुसार, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए जयपुर जिले की विभिन्न पंचायत समितियों के अंतर्गत ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
संबद्ध अधिनियम: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-9, 10, 98 एवं 101।
क्रियान्वयन: संबंधित जिला कलेक्टर द्वारा तैयार प्रस्तावों एवं आपत्तियों की सुनवाई के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से जयपुर जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन और नवसृजन किया गया है।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, विद्यमान ग्राम पंचायतें उस तारीख से कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
अलवर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
अलवर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन और पुनरसीमांकन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/769, दिनांक नवम्बर 20, 2025 (राजस्थान राजपत्र असाधिकार प्रकाशित, 21 नवम्बर 2025) के अंतर्गत अलवर जिले की विभिन्न पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन एवं नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु और प्रक्रिया
यह कार्रवाई राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए, धारा-9, 10 एवं 101 में वर्णित प्रावधानों के तहत जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार प्रस्तावों और आपत्तियों पर सुनवाई के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से की गई है।
अधिसूचना के अनुसार, अनुसूची के स्तम्भ 4 में वर्णित नई पुनर्गठित/नवसृजित ग्राम पंचायतें उसी नाम से जानी जाएंगी और स्तम्भ 5 में वर्णित स्थानीय क्षेत्र व राजस्व ग्रामों पर अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
अनुसूची के स्तम्भ 4 में यथावर्नित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात्, उस जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो स्तम्भ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
संबंधित पंचायत समितियां
इस अधिसूचना के तहत अलवर जिले की कई पंचायत समितियों (जैसे भनोर और अन्य संबंधित क्षेत्र) के अंतर्गत आने वाले राजस्व ग्रामों और ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन और पुनरसीमांकन किया गया है। विस्तृत जानकारी और ग्रामवार सूची के लिए आधिकारिक राजस्थान राजपत्र (21 नवंबर 2025) देखा जा सकता है।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है।
झालावाड़ जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन - अधिसूचना 20 नवंबर 2025
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंचा/2024/791- (दिनांक नवंबर 20, 2025) के अंतर्गत, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए झालावाड़ जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम एवं प्रावधान: यह कार्रवाई राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-9, 10, 98 एवं 101 के प्रावधानों तथा पूर्व में जारी विभागीय आदेशों के तहत जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार प्रस्तावों एवं राज्य सरकार के अनुमोदन के पश्चात की गई है।
प्रभावित पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के तहत झालावाड़ जिले की कई पंचायत समितियों (जैसे अकलेरा, भवानीमंडी, डग, झालरापाटन, खानपुर, मनोहरथाना और पिड़ावा मुख्यालय सुनेल) के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों एवं उनके राजस्व ग्रामों का पुनर्गठन किया गया है।
कार्यकाल एवं अस्तित्व: अनुसूची के स्तम्भ संख्या 4 में यथावर्णित पुनर्गठित/नवसृजित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, उस जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो अनुसूची के स्तम्भ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
विस्तृत ग्राम-वार अनुसूची और राजस्व ग्रामों की जानकारी के लिए कृपया राजस्थान राजपत्र (असाधारण) दिनांक 21 नवंबर 2025 देखें।
जोधपुर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन एवं नवसृजन - राजस्थान राजपत्र अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/793 (दिनांक नवंबर 20, 2025) के तहत जोधपुर जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है। यह कार्रवाई राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा 98 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए की गई है।
मुख्य बिंदु एवं प्रक्रिया:
अधिकार एवं प्रस्ताव: जिला कलेक्टरों को संबंधित ग्राम पंचायतों व पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन हेतु प्रस्ताव तैयार करने, सार्वजनिक अवलोकन के लिए प्रसारित करने, एक माह की अवधि में आपत्तियां आमंत्रित करने और उन पर सुनवाई करने के लिए अधिकृत किया गया था।
नया नामकरण और अधिकारिता: जिला कलेक्टरों द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों और अभिशंषाओं का परीक्षण करने तथा राज्य सरकार से अनुमोदन प्राप्त करने के पश्चात, जोधपुर जिले की पुनर्गठित/पुनसीमांकित/नवसृजित ग्राम पंचायतें अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित नाम से जानी जाएंगी और स्तंभ 5 में उल्लिखित स्थानीय क्षेत्र/राजस्व गांवों पर अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
कार्यकाल और निरंतरता: अनुसूची के स्तंभ 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, संबंधित जिले की वे विद्यमान ग्राम पंचायतें जो स्तंभ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
आज्ञा से: डॉ. जोगा राम, शासन सचिव, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
चूरू जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन - अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/780 दिनांक नवंबर 20, 2025 के अंतर्गत, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए चूरू जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना क्रमांक एवं दिनांक: संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/780, दिनांक नवंबर 20, 2025।
संबंधित विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
अधिनियम संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-9, 10, 98 और 101।
क्षेत्र: चूरू जिले की विभिन्न पंचायत समितियाँ (चूरू, बीदासर, सुजानगढ़, रतनगढ़, सरदारशहर, तारानगर, राजगढ़, सिद्धमुख)।
कार्यान्वयन: जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार प्रस्तावों एवं आपत्तियों पर सुनवाई के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से चूरू जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तम्भ 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात उस जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो स्तम्भ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से ही विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा यह अधिसूचना जारी की गई है।
सीकर जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन - राजस्थान राजपत्र अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/805 (दिनांक नवंबर 20, 2025) के माध्यम से राजस्थान राजपत्र में सीकर जिले की ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन से संबंधित आधिकारिक विवरण प्रकाशित किया गया है।
मुख्य बिंदु एवं प्रक्रिया
यह अधिसूचना राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए तथा धारा-9, 10 एवं 101 के अंतर्गत जारी निर्देशों के तहत लाई गई है।
जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार किए गए प्रस्तावों, सार्वजनिक अवलोकन, आपत्तियों के आमंत्रण और सुनवाई की प्रक्रिया के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से सीकर जिले की विभिन्न पंचायत समितियों (जैसे अजीतगढ़, दांतारामगढ़, पलसाना, धोद, खंडेला, लक्ष्मणगढ़, नेछवा, नीमकाथाना, पाटन, पिपराली, श्रीमाधोपुर) के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
अनुसूची में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, उस जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो अनुसूची के स्तंभ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
विस्तृत ग्राम-वार और पंचायत समिति-वार सूची के लिए संलग्न आधिकारिक राजपत्र दस्तावेज़ का अवलोकन करें।
भीलवाड़ा जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
भीलवाड़ा जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/776 (दिनांक 20 नवम्बर 2025) के अंतर्गत राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए भीलवाड़ा जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
प्रमुख बिंदु:
अधिकार एवं प्रक्रिया: विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/02 दिनांक 10.01.2025 के द्वारा जिला कलेक्टर को ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनसीमांकन हेतु प्रस्ताव तैयार करने, सार्वजनिक अवलोकन के लिए प्रसारित करने, एक माह की अवधि में आपत्तियां आमंत्रित करने तथा सुनवाई करने हेतु अधिकृत किया गया था।
प्रस्तावों का अनुमोदन: जिला कलेक्टरों द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों और अभिशंसाओं का परीक्षण करने के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से भीलवाड़ा जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन/पुनसीमांकन/नवसृजन किया गया है।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तम्भ संख्या 4 में यथावर्णित नई ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात उस जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो स्तम्भ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
विस्तृत विवरण और पंचायत समिति वार पुनर्गठित/नवसृजित ग्राम पंचायतों तथा उनमें सम्मिलित राजस्व ग्रामों की सूचियों के लिए संलग्न राजस्थान राजपत्र (एक्स्ट्राऑर्डिनरी) का अवलोकन करें।
पाली जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन - अधिसूचना 20 नवंबर 2025
पाली जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन एवं पुनसीमांकन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए पाली जिले के विभिन्न क्षेत्रों में ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन से संबंधित आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना दिनांक 20 नवंबर 2025 को राजस्थान राजपत्र (असाधारण) में प्रकाशित हुई है।
प्रमुख बिंदु
अधिनियम संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम सं. 13) की धारा-9, 10, 98 और 101 के प्रावधानों के अंतर्गत यह कार्रवाई की गई है।
संबंधित जिला: पाली जिला।
शामिल पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के तहत बगड़ी, देसूरी, मारवाड़ जंक्शन, रानी, रोहट, सोजत और सुमेरपुर पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन और नवसृजन किया गया है।
कार्यकाल और प्रभाव: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, संबंधित जिले की वे विद्यमान ग्राम पंचायतें जो स्तंभ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से अस्तित्व में नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है।
झुंझुनूं जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन एवं नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
झुंझुनूं जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन एवं नवसृजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/792 (दिनांक नवंबर 20, 2025) जारी की गई है। इसके माध्यम से झुंझुनूं जिले में विभिन्न ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन एवं नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु एवं प्रक्रिया
संवैधानिक प्रावधान: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा-9, 10 एवं 101 में वर्णित शक्तियों तथा विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/02 (दिनांक 10.01.2025) के तहत जिला कलेक्टर को प्रस्ताव तैयार करने, सार्वजनिक अवलोकन के लिए प्रसारित करने और एक माह की अवधि में आपत्तियां आमंत्रित कर सुनवाई करने हेतु अधिकृत किया गया था।
राज्य सरकार का अनुमोदन: जिला कलेक्टर्स द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों एवं अभिशंषाओं का परीक्षण करने के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से झुंझुनूं जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन/पुनसीमांकन/नवसृजन किया गया है।
अधिकारिता: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पुनर्गठित/नवसृजित ग्राम पंचायतें स्तंभ 5 में दर्शाए गए स्थानीय क्षेत्रों एवं राजस्व ग्रामों पर अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
विद्यमान पंचायतों का कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित नई ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात स्तंभ 2 में उल्लेखित वर्तमान ग्राम पंचायतें उस तारीख से अस्तित्व में नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी, जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
शामिल पंचायत समितियां
इस अधिसूचना के अंतर्गत झुंझुनूं जिले की निम्नलिखित पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों का पुनर्गठन किया गया है:
बुहाना
चिड़ावा
खेतडी
मण्डावा
नवलगढ़
पिलानी
सिंघाना
सूरजगढ़
उदयपुरवाटी
अलसीसर
झुंझुनूं
यह अधिसूचना राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी की गई है।
नागौर में नई ग्राम पंचायत गठन गजट में जारी
नागौर में नई ग्राम पंचायत गठन गजट में जारी
डीडवाना-कुचामन जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुन सीमांकन और नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
अधिसूचना विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/784 (दिनांक नवम्बर 20, 2025) के माध्यम से राजस्थान राजपत्र में डीडवाना-कुचामन जिले की ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन से संबंधित विस्तृत विवरण प्रकाशित किया गया है।
मुख्य उद्देश्य एवं प्रक्रिया
राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए, धारा-9, 10 एवं 101 में वर्णित प्रावधानों के अंतर्गत संबंधित जिला कलेक्टर को ग्राम पंचायत एवं पंचायत समिति के पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन हेतु प्रस्ताव तैयार करने, सार्वजनिक अवलोकन के लिए प्रसारित करने, एक माह की अवधि में आपत्तियां आमंत्रित करने तथा उन पर सुनवाई करने के लिए अधिकृत किया गया था। जिला कलेक्टरों द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों एवं अभिशंषाओं का परीक्षण कर तथा राज्य सरकार से अनुमोदन प्राप्त करने के पश्चात डीडवाना-कुचामन जिले की विभिन्न पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन/पुनसीमांकन/नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु
अधिनियम संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-9, 10, 98 एवं 101।
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
जारीकर्ता: डॉ. जोगा राम, शासन सचिव (राज्यपाल की आज्ञा से)।
प्रभावित क्षेत्र: डीडवाना-कुचामन जिले की विभिन्न पंचायत समितियाँ (जैसे कुचामन सिटी, लाडनूं, मौलासर, परबतसर, डीडवाना, मकराना, नावा आदि)।
अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात उक्त जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो अनुसूची के स्तंभ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
श्रीगंगानगर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन एवं नवसृजन - राजस्थान राजपत्र अधिसूचना
श्रीगंगानगर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन और नवसृजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/786, दिनांक 20 नवंबर 2025 के अनुसार, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए श्रीगंगानगर जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन एवं नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम व निर्देश: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-9, 10 एवं 101 के अंतर्गत जिला कलेक्टर द्वारा तैयार प्रस्तावों और अभिशंषाओं का परीक्षण कर राज्य सरकार के अनुमोदन के पश्चात यह अधिसूचना जारी की गई है।
कार्यान्वयन: अनुसूची के स्तम्भ संख्या 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात् उस जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो स्तम्भ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी, जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
संबद्ध पंचायत समितियां: इस अधिसूचना में श्रीगंगानगर जिले के अंतर्गत आने वाली विभिन्न पंचायत समितियों (जैसे श्रीगंगानगर, श्रीकरणपुर, पदमपुर, घड़साना, सूरतगढ़, अनूपगढ़, सादुलशहर आदि) के अंतर्गत आने वाले राजस्व ग्रामों और उनके मुख्यालयों की विस्तृत अनुसूची जारी की गई है।
यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र (असाधारण) दिनांक 21 नवंबर 2025 में प्रकाशित की गई है, जिसके अंतर्गत राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा हस्ताक्षर किए गए हैं।
बालोतरा जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग
बालोतरा जिले की ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी असाधारण राजपत्र अधिसूचना (संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/770, दिनांक नवम्बर 20, 2025) के अनुसार राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए बालोतरा जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिकार क्षेत्र और प्रभाव: इस अधिसूचना के तहत पुनर्गठित, पुनसीमांकित और नवसृजित ग्राम पंचायतें स्तम्भ 4 एवं 5 में दर्शाए गए स्थानीय क्षेत्रों और राजस्व ग्रामों के अनुसार अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तम्भ संख्या 4 में यथाور्णगत ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, उक्त जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो स्तम्भ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
संबंधित पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के अंतर्गत समदड़ी, कल्याणपुर, सिणधरी, पायला कलां, सिवाना, पादतू और गिडा पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में पुनर्गठन की कार्रवाई की गई है।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है।
बाड़मेर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीममार्कन और नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) अधिसूचना
यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र (असाधारण) में प्रकाशित की गई है। इसके अनुसार, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्य सरकार द्वारा बाड़मेर जिले के विभिन्न पंचायत समितियों के अंतर्गत ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीममार्कन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
संबद्ध विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार।
कार्रवाई का आधार: जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार किए गए प्रस्तावों, आपत्तियों पर सुनवाई और राज्य सरकार के अनुमोदन के पश्चात यह अंतिम अधिसूचना जारी की गई है।
प्रभाव: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित नई एवं पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल संबंधित पंचायतों के चुनावों के पश्चात प्रारंभ होगा, और स्तंभ 2 में उल्लेखित पुरानी पंचायतें उस तिथि से अस्तित्व में नहीं रहेंगी।
विस्तृत विवरण और पंचायत समिति वार (जैसे सेड़वा, रामसर, गडाररद, धोरीमन्ना, बायतू, शिव, गुड़ामालानी, फागलिया आदि) नवगठित ग्राम पंचायतों एवं उनमें सम्मिलित राजस्व ग्रामों की सूची आधिकारिक राजपत्र में उपलब्ध है।
राजस्थान पंचायती राज (अंतरित क्रियाकलाप) (संशोधन) नियम, 2025 जारी
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धाराओं के तहत राजस्थान पंचायती राज (अंतरित क्रियाकलाप) नियम, 2011 में संशोधन हेतु अधिसूचना जारी की गई है।
दिनांक: अक्टूबर 29, 2025 (राजस्थान राजपत्र असाधारण में 31 अक्टूबर 2025 को प्रकाशित)
नियम का नाम: राजस्थान पंचायती राज (अंतरित क्रियाकलाप) (संशोधन) नियम, 2025
प्रभावी तिथि: ये नियम तुरंत प्रवृत्त होंगे।
नियम 8 में संशोधन: राजस्थान पंचायती राज (अंतरित क्रियाकलाप) नियम, 2011 के नियम 8 के विद्यमान खंड (iii) के स्थान पर "एक जिले से दूसरे जिले में संबंधित विभाग" प्रतिस्थापित किया गया है।
यह आदेश राज्यपाल के आदेश से भारत भूषण गोयल, शासन उप सचिव द्वारा जारी किया गया है।
ग्राम पंचायतों द्वारा स्वामित्व प्रमाण-पत्र, अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) तथा कुर्सीनामा / वारिस / उत्तराधिकारी प्रमाण-पत्र जारी न करने बाबत परिपत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के महत्वपूर्ण परिपत्र
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा ग्राम पंचायतों की शक्तियों औरकार्यों के संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए हैं। इन परिपत्रों के माध्यम से स्पष्ट किया गया है कि ग्रामपंचायतों द्वारा किन दस्तावेजों को जारी करने का कोई प्रावधान नहीं है।
मुख्य बिंदु:
स्वामित्व एवं अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC): क्रमांक एफ.4(16)दिशा-निर्देश/विधि/पंश/2016/325 दिनांक 17-4-2017 के अनुसार, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 एवं राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में ग्राम पंचायतों द्वारा स्वामित्व प्रमाण-पत्र अथवा किसी निजी भवन के विक्रय आदि के संबंध में अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) जारी करने का कोई प्रावधान नहीं है। अत: ऐसे प्रमाण-पत्र जारी न किए जाएं।
कुर्सीनामा / वारिस / उत्तराधिकारी प्रमाण-पत्र: क्रमांक एफ.139(16)निर्देश/विधि/पंश/2021/263 दिनांक 23-02-2021 एवं क्रमांक एफ.15(69)पंश्रावि/विधि/ग्रा.पं.मार्ग./जयपुर/2019/1801 दिनांक 30-08-2019 के अनुसार, सरपंचों या ग्राम पंचायतों द्वारा कुर्सीनामा, वारिस या उत्तराधिकारी प्रमाण-पत्र जारी किए जाने का भी पंचायती राज अधिनियम, 1994 व नियमों में कोई प्रावधान नहीं है। विधिक दृष्टि से अमान्य होने के कारण ऐसे प्रमाण-पत्र जारी करने से सरपंचों/ग्राम पंचायतों को अनावश्यक जांच का सामना करना पड़ सकता है।
समस्त संबंधित अधिकारियों, जिला कलक्टरों, मुख्य कार्यकारी अधिकारियों और विकास अधिकारियों को निर्देशित किया जाता है कि वे इन नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें।
सहायक विकास अधिकारी वरिष्ठता सूची
सहायक विकास अधिकारी वरिष्ठता सूची
पंचायती राज संस्थाओं के अधीन विद्यालय भवनों में रंग-ररोगन कार्य के संबंध में दिशा-निर्देश
पंचायती राज संस्थाओं के अधीन विद्यालय भवनों में रंग-ररोगन कार्य
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा राजकाज संदर्भ संख्या 18172438 (क्रमांक एफ 4(1111) परावि/पीसी/विविध/22-00409, दिनांक 28-01-2025) के तहत पंचायती राज संस्थाओं के अधीन आने वाले राजकीय विद्यालयों में रंग-रोगन कार्य करवाए जाने के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य निर्देश एवं बिंदु:
समयसीमा: राजकीय विद्यालय भवन में रंग-रोगन का कार्य मध्यावधि अवकाश (दीपावली अवकाश - दिनांक 13.10.2025 से दिनांक 24.10.2025) के मध्य अनिवार्य रूप से पूर्ण कराया जाना सुनिश्चित किया जाए।
विद्यालयों की सूची: इस हेतु जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक) से पंचायती राज संस्थाओं के अधीन राजकीय विद्यालयों की सूची प्राप्त की जावे।
वित्तीय प्रावधान: रंग-रोगन कार्य हेतु आवश्यकतानुसार राशि राज्य वित्त आयोग - षष्ठम योजना अंतर्गत व्यय की जा सकेगी, जिसमें अधिकतम ₹ 1.00 लाख (एक लाख रुपये तक की) सीमा तय की गई है।
गुणवत्ता एवं रंग: उच्च गुणवत्ता के पेंट/कलर का उपयोग किया जाए तथा प्राथमिकता से पर्यावरण-अनुकूल एवं दीर्घकालीन टिकाऊ पेंट का चयन हो। प्राथमिक/उच्च प्राथमिक विद्यालय भवनों पर संलग्न कलर-कोड के अनुसार ही रंग-ररोगन/पेंट किया जाना सुनिश्चित करें।
प्रगति रिपोर्ट: कार्य अधिकृत पद्धति से कराया जाए तथा प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर पूर्ण किए गए कार्य की प्रगति (पूर्व एवं पश्चात् स्थिति के फोटो सहित) जिला परिषद कार्यालय को प्रस्तुत कर विभाग को प्रेषित की जाए।
दिनांक 02 अक्टूबर, 2025 को आयोजित होने वाली ग्राम सभा के संबंध में दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के निर्देश
राजकीय दिशा-निर्देशों के अनुसार राज्य की सभी ग्राम पंचायतों में दिनांक 02 अक्टूबर, 2025 को ग्राम सभा का आयोजन किया जाना सुनिश्चित किया गया है। इस ग्राम सभा में प्रमुख रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर कार्रवाई संपादित की जानी है:
1. सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना से संबंधित बिंदु
वर्ष 2025 के लिए सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के सभी लाभार्थियों के वार्षिक भौतिक सत्यापन का कार्य सुनिश्चित किया जाए।
असतत्यापित पेंशनर्स के रुके हुए पेंशन भुगतान और विभिन्न कारणों से अपात्र हुए पेंशनर्स के मामलों के निस्तारण हेतु ग्राम सभा में व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए।
शत-प्रतिशत पेंशनर्स का वार्षिक सत्यापन कराया जाए तथा अपात्र पाए गए पेंशनर्स की सूची व गलत सूचना के आधार पर निरस्त प्रकरणों की जांच उपरांत पुनः प्रारंभ (री-ओपन) करने की कार्रवाई रिपोर्ट सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग को भेजी जाए।
2. किसान गिरदावरी से संबंधित बिंदु
ग्राम सभाओं में आने वाले किसानों को 'किसान गिरदावरी' मोबाइल ऐप डाउनलोड करने तथा लॉगिन प्रक्रिया की जानकारी दी जाए।
DOIT&C द्वारा तैयार स्क्रीन रिकॉर्डेड वीडियो एवं व्हाट्सएप टेम्पलेट्स का प्रचार-प्रसार किया जाए और व्हाट्सएप चैनल को फॉलो कराया जाए।
3. चारागाह विकास से संबंधित बिंदु
ग्राम पंचायतों में चारागाह और संपत्ति विवरण रजिस्टर का संधारण सुनिश्चित किया जाए।
ग्राम सभा में "एक पंचायत-एक चारागाह" एवं "एक गांव-एक चारागाह" गतिविधि के संबंध में प्रस्ताव लेकर चारागाह विकास हेतु आवश्यक कार्रवाई की जाए।
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 170 के अंतर्गत चारागाह विकास समिति का गठन/नवीनीकरण किया जाए और अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया पूरी की जाए।
4. जन योजना अभियान (पीपीसी) - सबकी योजना सबका विकास
पंचायती राज मंत्रालय, भारत सरकार के पत्र दिनांक 17.09.2025 एवं विभागीय पत्र दिनांक 25.09.2025 के अनुसार ग्राम पंचायत विकास योजनाएँ (GPDP) तैयार करने के लिए ग्राम सभा की बैठक में आवश्यक कार्रवाई की जाए।
स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन बाबत महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
राजस्थान सरकार पंचायती राज विभाग द्वारा निर्देश
राजस्थान सरकार के पंचायती राज विभाग द्वारा क्रमांक: एफ 4(1)स्वामित्व/विधि/पंव्रा/2020/पार्ट-3/E-File - 00439 के अंतर्गत स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन के संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए हैं। यह आदेश शासन सचिव एवं आयुक्त डॉ. जोगा राम द्वारा जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
प्रशासक की नियुक्ति: राज्य की ऐसी ग्राम पंचायतें जिनका कार्यकाल दिनांक 16.01.2025, 11.03.2025 व 23.09.2025 तक समाप्त हो गया है और जिनके चुनाव अपरिहार्य कारणों से संपन्न नहीं हो पा रहे हैं, उनमें संबंधित ग्राम पंचायत के निवर्तमान सरपंच को प्रशासक नियुक्त किया गया है।
प्रशासनिक समिति का गठन: ग्राम पंचायतों के कार्यों के सुचारू संचालन के लिए प्रशासक की सहायता हेतु प्रशासनिक समिति गठित की गई है। इसमें कार्यकाल समाप्त होने से पूर्व संबंधित ग्राम पंचायत के उप सरपंच एवं वार्ड पंचों को सदस्य बनाया गया है।
सर्वे समिति में कार्य: विभागीय पत्र क्रमांक 48 दिनांक 18.01.2021 के अनुसार स्वामित्व योजनांतर्गत गठित सर्वे समिति में 2 वार्ड पंचों کے स्थान पर प्रशासनिक समिति के 2 सदस्यों द्वारा सर्वे समिति का कार्य संपादित किया जाएगा।
समस्त जिला कलेक्टरों और मुख्य कार्यकारी अधिकारियों, जिला परिषदों को इस योजना के सफल एवं समयबद्ध क्रियान्वयन हेतु आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
माननीय प्रधानमंत्री महोदय के दिनांक 25.09.2025 के कार्यक्रम के सीधे प्रसारण हेतु ग्राम पंचायत स्तर पर व्यवस्था के संबंध में
माननीय प्रधानमंत्री महोदय के कार्यक्रम के सीधे प्रसारण की व्यवस्था
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ 165(7)ले.ब./परावि/एसएफसी-6/2025-26 के अंतर्गत दिनांक 25.09.2025 को बांसवाड़ा में माननीय प्रधानमंत्री महोदय की उपस्थिति में होने वाले राज्य स्तरीय समारोह के लाइव प्रसारण को ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर दिखाने की समुचित व्यवस्था के संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु एवं वित्तीय स्वीकृति
कार्यक्रम: दिनांक 25.09.2025 को बांसवाड़ा में आयोजित होने वाले राज्य स्तरीय समारोह का जिला, ब्लॉक व ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर लाइव प्रसारण।
उद्देश्य: आमजन को सरकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त हो सके।
व्यवस्थाएं: टी.वी./स्क्रीन व्यवस्था, फर्नीचर, दरी, पेयजल आदि से संबंधित व्यय।
वित्तीय प्रावधान: छठे राज्य वित्त आयोग के अंतर्गत उपलब्ध अनुदान राशि से प्रति ग्राम पंचायत अधिकतम रु. 10,000/- (दस हजार रुपये) तक के व्यय/उपयोग करने की सहमति प्रदान की जाती है।
अनुमोदन: यह सहमति वित्त विभाग की आई.डी. संख्या 332501526 दिनांक 23.09.2025 द्वारा अनुमोदित है।
यह आदेश डॉ. जोंगा राम, शासन सचिव एवं आयुक्त, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा जारी किया गया है।
ग्राम पंचायतों में स्थित भारत निर्माण सेवा केंद्रों एवं ग्राम पंचायत भवनों की मरम्मत और रंग-रोगन के संबंध में दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग का महत्वपूर्ण निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा ग्राम पंचायतों में स्थित भारत निर्माण सेवा केंद्रों एवं ग्राम पंचायत भवनों की मरम्मत और एकरूप रंग-रोगन के संबंध में आदेश जारी किया गया है। यह आदेश क्रमांक एफ 4(1111) परावि/पीसी/विविध/22-00409, दिनांक 19.09.2025 के अंतर्गत जारी किया गया है, जिसके हस्ताक्षर डॉ. जोगा राम, शासन सचिव एवं आयुक्त द्वारा किए गए हैं।
प्रमुख निर्देश एवं समय-सीमा
जिन भवनों में मरम्मत की आवश्यकता है: ऐसे भवनों के लिए राज्य वित्त आयोग एवं पंद्रहवां वित्त आयोग के अंतर्गत मरम्मत और रंग-रोगन की स्वीकृति तत्काल जारी करते हुए दिनांक 15.11.2025 तक कार्य पूर्ण किया जाए।
जिन भवनों में केवल रंग-रोगन की आवश्यकता है: ऐसे भवनों के लिए तत्काल स्वीकृति जारी करते हुए दिनांक 31.10.2025 तक कार्य पूर्ण किया जाए।
रंग-रोगन के लिए निर्धारित मानक
बाहरी दीवारें: अच्छी गुणवत्ता का Pink शेड का Paint (PU + Silicon Modified 100% Acrylic Exterior Emulsion) किया जाए।
आंतरिक दीवारें: Cream / Off White शेड का Paint किया जाए।
सीलिंग (छत): White शेड का Paint (PU Reinforced Luxury Acrylic Emulsion) किया जाए।
प्रगति निगरानी
उक्त कार्यों की प्रगति दर्ज करने के लिए पृथक से गूगल स्प्रेडशीट/फॉर्मेट का लिंक भेजा जा रहा है, जिस पर नियमित रूप से प्रगति दर्ज कराई जानी है। संबंधित सभी मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (जिला परिषद) को इन निर्देशों की समयबद्ध क्रियान्विति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
जन्पम मृत्हयु विवाह पंजीकरण मार्गदर्शिका 2025
जन्पम मृत्हयु विवाह पंजीकरण मार्गदर्शिका 2025
राजस्थान विवाहों का अनिवार्य रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 2009 के अंतर्गत विधवा/विधुर के विवाह पंजीयन के संबंध में दिशानिर्देश
विधवा/विधुर के विवाह पंजीयन के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय, राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान विवाहों का अनिवार्य रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 2009 के अंतर्गत विधवा/विधुर के विवाह पंजीयन के संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं। इस संबंध में जिला नोडल विवाह पंजीयन अधिकारी एवं उप/सहायक निदेशकों को पत्र प्रेषित किए गए हैं।
मुख्य बिंदु एवं प्रक्रिया
शपथ पत्रों का सत्यापन: विवाह पंजीयन हेतु प्रस्तुत किए जाने वाले शपथ पत्रों को पब्लिक नोटरी से प्रमाणित कराना एवं नियमानुसार नोटरी टिकट लगाना अनिवार्य है।
आवश्यक शपथ पत्र:
विवाह के मृत पक्ष (वर/वधु) की ओर से माता/पिता अथवा संरक्षक की ओर से दिया जाने वाला शपथ पत्र।
विधवा/विधुर द्वारा पाई पेपर पर नोटरी द्वारा सत्यापित शपथ पत्र।
विवाह की पुष्टि हेतु दो स्वतंत्र गवाहों के शपथ पत्र अलग-अलग पाई पेपर पर नोटरी द्वारा सत्यापित।
मृत्यु प्रमाण पत्र: विवाह पंजीयन हेतु प्रस्तुत किए जाने वाले आवेदन पत्र के साथ विवाह के मृत पक्ष का मृत्यु प्रमाण पत्र आवश्यक रूप से लिया जाए।
माता-पिता/संरक्षक द्वारा शपथ पत्र न देने पर प्रक्रिया: यदि मृत पक्ष के माता-पिता या संरक्षक द्वारा 15 दिवस में शपथ पत्र नहीं दिए जाते हैं या उपस्थित नहीं होते हैं, तो रजिस्ट्रार विवाह में उपस्थित अन्य चार प्रतिष्ठित गवाहों के शपथ पत्र एवं बयान पश्चात संपूर्ण तथ्यों की जांच करेगा और स्वयं की संतुष्टि उपरांत विवाह का पंजीयन करेगा तथा पंजीयन रजिस्टर में संबंधित गवाहों के हस्ताक्षर भी लेगा।
ग्रामीण सेवा शिविर 18 सितम्बर, 2025 से आयोजित किये जाने बाबत
ग्रामीण सेवा शिविरों का आयोजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुसार राज्य की प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर "ग्रामीण सेवा शिविर" का आयोजन 18 सितम्बर, 2025 से किया जाना है।
मुख्य निर्देश एवं व्यवस्थाएं
अभियान की अवधि तब तक होगी जब तक कि प्रत्येक पंचायत समिति की प्रत्येक ग्राम पंचायत में शिविर का आयोजन न हो जावे।
शिविर स्थल पंचायत मुख्यालय पर पंचायत भवन, स्कूल भवन या उपलब्ध अन्य सार्वजनिक स्थानों पर निर्धारित किए जाएंगे।
आगंतुकों के लिए पेयजल की समुचित व्यवस्था, मेज, कुर्सियां, दरियां और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं ग्राम पंचायत द्वारा की जाएंगी।
वित्तीय प्रावधान एवं व्यय
शिविर आयोजन एवं संचालन हेतु षष्ठ राज्य वित्त आयोग अंतर्गत पंचायती राज संस्थाओं को देय अनुदान राशि के उपयोग हेतु विभागीय पत्रांक 347 राजकाज क्रमांक 13247621 दिनांक 28.01.2025 के दिशा-निर्देशों के बिंदु सं. (अ)(3)(XIII) के अंतर्गत ग्राम पंचायत को स्वीकृत अनुदान राशि में से अधिकतम राशि रु. 25,000/- प्रति ग्राम पंचायत व्यय/उपयोग करने की सहमति प्रदान की जाती है।
यह सहमति वित्त विभाग की आई.डी. संख्या 332501444 दिनांक 16.09.2025 द्वारा अनुमोदित है। इस कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान करने के निर्देश दिए गए हैं।
दिनांक 15 अगस्त 2025 को ग्राम सभा के आयोजन बाबत दिशा-निर्देश
दिनांक 15 अगस्त 2025 को ग्राम सभा का आयोजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा आदेश क्रमांक एफ.15(10)पेरांवि/विधि/विशेष ग्राम सभा/2024/EFile-22379 के अंतर्गत दिनांक 15 अगस्त 2025 को राज्य की सभी ग्राम पंचायतों में आयोजित होने वाली ग्राम सभा के संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं।
ग्राम सभा के मुख्य एजेंडा बिंदु
पेंशनभोगियों का सत्यापन: ग्राम सभा में पेंशनभोगियों की संपूर्ण सूची का सत्यापन किया जाना सुनिश्चित किया जाए।
मृत्यु प्रमाण-पत्र और पहचान पोर्टल: पहचान पोर्टल पर मृत्यु प्रमाण-पत्र नियमित रूप से जारी किया जाना चाहिए, जिससे प्रमाण-पत्र जारी होने के उपरांत पेंशन की स्थिति स्वतः ही अद्यतन हो जाती है।
अक्षय ऊर्जा योजनाओं का प्रचार (MNRE): पंचायती राज मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रेषित एजेंडा के अनुसार, PM Surya Ghar और PM-KUSUM जैसी नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं का प्रचार, संबलन और नामांकन।
आवारा पशुओं का प्रबंधन: आवारा पशुओं से संबंधित चुनौतियों के समाधान के लिए सामुदायिक उपाय, चरागाह/आश्रय स्थलों की पहचान, टीकाकरण और टैगिंग के लिए पशुपालन विभाग के साथ समन्वय, तथा GPDPs में प्रासंगिक गतिविधियों को शामिल करना।
पंचायत एडवांसमेंट इंडेक्स (PAI) 1.0 परिणाम: पारदर्शिता, जवाबदेही और सहभागी योजना को बढ़ावा देने के लिए ग्राम पंचायत स्तर के प्रदर्शन परिणामों को समुदाय के साथ साझा करना।
समस्त मुख्य/अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी (जिला परिषद) और विकास अधिकारी (पंचायत समिति) को निर्देशित किया गया है कि वे अपने जिले की सभी ग्राम पंचायतों में इन निर्देशों की अक्षरशः पालना सुनिश्चित करें।
श्रीमती बिला देवी, प्रशासक एवं निवर्तमान सरपंच, ग्राम पंचायत डूंगा की नांगल (सीकर) को पदमुक्त करने बाबत आदेश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग का आदेश
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज) द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ 3(50) जांच/पांक्रावि/सीकर/2025/ई-फाइल 58613 के अनुसार, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद, सीकर की जांच रिपोर्ट के आधार पर ग्राम पंचायत डूंगा की नांगल, पंचायत समिति पाटन, जिला सीकर की निवर्तमान सरपंच एवं हाल प्रशासक श्रीमती बिला देवी के विरुद्ध कार्रवाई की गई है।
मुख्य बिंदु:
जांच रिपोर्ट के तथ्य: ग्राम पंचायत के निर्माण कार्यों पर कार्यों के बोर्ड नहीं लगाए जाने के बावजूद कार्यों के बोर्ड की राशि का भुगतान किया गया। इसके अतिरिक्त, सरकारी कार्यालयों के पट्टे नियम 162 के बजाय नियम 158 के तहत जारी करने संबंधी प्रकरण में दोषी पाया गया।
पदमुक्त आदेश: विभागीय आदेश क्रमांक 13524345 दिनांक 11.02.2025 की पालना में राज्य सरकार द्वारा लिए गए विनिश्चय के क्रम में श्रीमती बिला देवी को ग्राम पंचायत डूंगा की नांगल के प्रशासक पद से पदमुक्त कर दिया गया है।
जारीकर्ता: यह आदेश (इन्द्रजीत सिंह) अतिरिक्त आयुक्त एवं शासन उप सचिव II (जांच) द्वारा सक्षम स्तर से अनुमोदित कर जारी किया गया है।
जन आधार योजना: ग्रामीण क्षेत्र में द्वितीय स्तरीय सत्यापन हेतु ब्लॉक सांख्यिकी अधिकारी को अधिकृत करने बाबत (परिपत्र-9)
राजस्थान जन आधार प्राधिकरण परिपत्र-9
राजस्थान सरकार के योजना विभाग (राजस्थान जन आधार प्राधिकरण) द्वारा दिनांक 09.07.2025 का परिपत्र (क्रमांक: एफ17(8)4/ डीएस/रा.ज.आ.यो./परिपत्र/2019/1730) जारी किया गया है। यह परिपत्र जन आधार योजनान्तर्गत नामांकन एवं अद्यतन के सत्यापन की प्रक्रिया से संबंधित है।
मुख्य बिंदु:
ग्रामीण क्षेत्र (ब्लॉक स्तर): प्रथम सत्यापन ग्राम विकास अधिकारी द्वारा किया जाएगा। इसके उपरांत, आंशिक संशोधन करते हुए द्वितीय स्तरीय सत्यापन हेतु ब्लॉक सांख्यिकी अधिकारी को अधिकृत किया गया है।
शहरी क्षेत्र (नगर निकाय): प्रथम सत्यापन नगरीय निकाय के आयुक्त/उपायुक्त/अधिशाषी अधिकारी द्वारा तथा द्वितीय सत्यापन उपखण्ड अधिकारी द्वारा किया जाएगा।
कार्यव्यवस्था: प्रथम सत्यापन के उपरांत प्रकरण निर्धारित समयावधि में द्वितीय स्तरीय सत्यापन हेतु संबंधित अधिकारी को ऑनलाइन अग्रषित किया जायेगा।
यह आदेश मुख्य सचिव एवं अध्यक्ष, राजस्थान जन आधार प्राधिकरण, सुधांशु पंत द्वारा जारी किए गए हैं।
पंड़ित दीनदयाल उपाध्याय अंत्योदय सम्बल पखवाड़ा (24 जून से 09 जुलाई, 2025) के आयोजन हेतु राशि व्यय करने की सहमति
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा 'पंड़ित दीनदयाल उपाध्याय अंत्योदय सम्बल पखवाड़ा' (दिनांक 24 जून, 2025 से 09 जुलाई, 2025) के आयोजन के संबंध में आदेश जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
पखवाड़े की अवधि: 24 जून, 2025 से 09 जुलाई, षष्ठ राज्य वित्त आयोग अंतर्गत पंचायती राज संस्थाओं को देय अनुदान राशि का उपयोग।
व्यय सीमा: ग्राम पंचायत को स्वीकृत अनुदान राशि में से अधिकतम राशि रु. 25,000/- प्रति ग्राम पंचायत व्यय/उपयोग करने की सहमति प्रदान की जाती है।
संदर्भित निर्देश: विभागीय पत्रांक 347 राजकाज क्रमांक 13247621 दिनांक 28.01.2025 के दिशा-निर्देशों के बिंदु सं (अ)(3)(XIII) के अंतर्गत।
वित्त विभाग की सहमति: वित्त विभाग की आई.डी. संख्या 332501054 दिनांक 03.07.2025 द्वारा अनुमोदित।
इस कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान करने के निर्देश दिए गए हैं।
दिनांक 20 जून 2025 को विशेष ग्राम सभा आयोजित करने के संबंध में निर्देश
विशेष ग्राम सभा आयोजन निर्देश
कार्यालय जिला परिषद बाड़मेर द्वारा दिनांक 20 जून 2025 को समस्त ग्राम पंचायतों में विशेष ग्राम सभा आयोजित करने के संबंध में आदेश जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
विकास कार्य योजना: वित्तीय वर्ष 2025-26 के समस्त विकास कार्यों एवं कार्यों से संबंधित कार्ययोजना का अवलोकन एवं अनुमोदन।
पंडित दीनदयाल उपाध्याय अंत्योदय संबल पखवाड़ा: दिनांक 24 जून से 09 जुलाई 2025 तक आयोजित होने वाले पखवाड़े का प्रचार-प्रसार।
योग दिवस: दिनांक 21 जून 2025 को योग दिवस का आयोजन एवं आमजन की भागीदारी सुनिश्चित करना।
कंटीजेंसी कार्य: ग्राम सभा में जन स्वास्थ्य एवं अभि. विभाग के समर कंटीजेंसी कार्यों का सत्यापन करवाना।
समस्त विकास अधिकारी, पंचायत समिति समस्त बाड़मेर / बालोतरा को आवश्यक कार्रवाई हेतु निर्देशित किया गया है।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता संबंधी कार्यों के संचालन एवं मॉडल टेंडर दिशा-निर्देश
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता संबंधी कार्य और मॉडल टेंडर दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रामीण विकास, अनुभाग-5), राजस्थान सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता संबंधी कार्यों को संपादित करने हेतु स्थायी आदेश संख्या 01/2024 (दिनांक 03/09/2024) जारी किया गया है। इसके माध्यम से बी.एस.आर. (BSR) सॉफ़्ट पर प्रदर्शित स्वच्छता संबंधी आइटम्स की नई दरें निर्धारित की गई हैं तथा मॉडल टेंडर डॉक्यूमेंट (Model Tender Document) के संबंध में निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य बिंदु एवं निर्धारित दरें
घर-घर कचरा संग्रहण: वाहन उपलब्ध कराने पर अथवा संवेदक द्वारा वाहन, ड्राइवर, POL, श्रमिक व सुरक्षा उपकरणों सहित घर-घर कचरा संग्रहण व प्लास्टिक कचरे का सुरक्षित निस्तारण।
कचरे का पृथक्करण: Degradable और Non-Degradable कचरे का पृथक्करण कार्य एवं प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट नियम, 2016 के अनुसार निस्तारण।
सड़क, बाजार एवं मुख्य चौक सफाई: झाड़ू एवं सफाई कार्य, आवश्यक सुरक्षा उपकरण और मेडिकल किट के साथ कचरे को डंपिंग यार्ड पर पहुंचाना।
नाली सफाई: आवश्यक उपकरणों और सुरक्षा किट के साथ नाली सफाई कार्य।
सामुदायिक स्वच्छता परिसर (CSC) सफाई: सीट, फर्श और टाइल्स की सफाई कार्य।
निविदा प्रक्रिया एवं समय-सीमा
परिवारों एवं साफ-सफाई का आकलन (वार्ड वार): सितंबर माह का प्रथम सप्ताह
निविदा जारी करना: सितंबर माह का द्वितीय सप्ताह
निविदा प्रक्रिया पूर्ण कर कार्य आदेश जारी करना: सितंबर माह का चतुर्थ सप्ताह
कार्य प्रारम्भ करने का समय: 02 अक्टूबर
सभी ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों को आरटीपीपी (RTPP) नियमों के तहत मॉडल टेंडर के अनुसार पारदर्शी तरीके से निविदा की कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED), राजस्थान सरकार, जयपुर के मुख्य अभियंता (तकनीकी) एवं टीएम, आरडब्ल्यूएसएमबी कार्यालय द्वारा Amendment No.01/BSR-2022 (आदेश संख्या D&S/BSR/2022-23/1868-1978, दिनांक 02-08-2022) और Amendment No.02/BSR-2022 (आदेश संख्या D&S/BSR/2022-23/8928-8990, दिनांक 03-02-2023) जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु और संशोधन विवरण
जीएसटी (GST) दरों में बदलाव: जीएसटी अधिसूचना 03/2022, केंद्रीय कर दिनांक 13.07.2022 के प्रभाव के कारण विभाग में सरकारी कार्य अनुबंध (work contract) के लिए जीएसटी दर 12% से बढ़ाकर 18% कर दी गई है, जिससे सभी अध्यायों की दरों में परिवर्तन हुआ है।
कच्चे माल की कीमतों में गिरावट: कच्चे माल की कीमतों में कमी के कारण डीआई पाइप्स, एचडीपीई पाइप्स, एमएस पाइप्स, पीडब्ल्यूएससी पाइप्स, एमएस स्पेशल्स, एमएस केसिंग पाइप्स, जीआई पाइप्स, एचडीपीई राइजर्स और सभी प्रकार के आरसीसी जलाशयों (RCC Reservoirs) की मूल दरों (Basic Rates) को कम किया गया है।
नई वस्तुएं (New Additions): टीसी की बैठक दिनांक 06.07.2022 की सिफारिश के अनुसार चैप्टर 1 में PTMT टैप आइटम (item no 1.30) जोड़ा गया है।
नामकरण और विनिर्देश सुधार: FHTC और सॉफ्ट सीटेड स्लुइस वाल्व के नामकरण व MOC विवरणों में तकनीकी विनिर्देशों के अनुसार सुधार किए गए हैं।
पंचायती राज और ग्रामीण जल आपूर्ति योजनाओं (JJM) से जुड़े उपयोगकर्ता और अभियंता इन संशोधित दरों का उपयोग विभागीय कार्यों के लिए कर सकते हैं। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है।
PWD Electrical Works BSR rate
PWD Electrical Works BSR rate
PWD Building Material BSR rate
PWD Building Material BSR rate
स्वामित्व योजनान्तर्गत भारतीय सर्वेक्षण से प्राप्त मैप-2 में संशोधन किये जाने के सम्बन्ध में दिशा-निर्देश
स्वामित्व योजना: मैप-2 संशोधन सम्बन्धित दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा स्वामित्व योजनान्तर्गत भारतीय सर्वेक्षण (Survey of India) से प्राप्त मैप-2 में संशोधन किये जाने के सम्बन्ध में समस्त जिला कोर्डिनेटिंग अधिकारियों और जिला परिषदों को महत्वपूर्ण निर्देश जारी किये गये हैं।
मुख्य बिंदु:
मैप 1.0 की ग्राउंड ट्रूथिंग: मैप 1.0 पर की जाने वाली ग्राउंड ट्रूथिंग की कार्यवाही हेतु दक्ष एवं विज्ञ कार्मिकों को भारतीय सर्वेक्षण विभाग में भिजवाया जाए, ताकि होने वाले संशोधनों के सम्बन्ध में आवश्यक जानकारी दी जा सके।
नक्शों में संशोधन: भारतीय सर्वेक्षण विभाग से प्राप्त ग्राउंड ट्रूथिंग नक्शों में लाल डोरा प्रदर्शित करने, आबादी का विभाजन, नई आबादी को जोड़ने, नाम में संशोधन, नया नाम जुड़वा, और ID में संशोधन आदि को सुनिश्चित किया जाए।
मैप 2.0 की जाँच प्रक्रिया: मैप 2.0 में संशोधन करवाने के लिए अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी / मुख्य कार्यकारी अधिकारी द्वारा नक्शों की पूर्ण जाँच करायी जाए और निर्धारित प्रारूप में टिप्पणी के साथ भारतीय सर्वेक्षण विभाग को भिजवाया जाए।
जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम के तहत 30 दिवस से एक वर्ष तक विलंबित पंजीकरण के संबंध में दिशा-निर्देश
जन्म और मृत्यु पंजीकरण दिशा-निर्देश
राजस्थान सरकार, आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय द्वारा क्रमांक एफ-13/4/8/वी.एस./डीईएस/2020/457 दिनांक 10.06.2025 के अंतर्गत जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 (2023 में संशोधित) एवं जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण नियम 2000 (2025 में संशोधित) के नियम 9(2) के प्रावधानों के तहत अनुज्ञा जारी करने के संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु
अधिनियम व नियम संदर्भ: जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 की धारा 13(2) एवं जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण नियम 2000 के नियम 9(2) के अंतर्गत शहरी क्षेत्र में जिला रजिस्ट्रार एवं ग्रामीण क्षेत्र में ब्लॉक सांख्यिकी अधिकारी द्वारा अनुज्ञा जारी की जाती है।
आवश्यक दस्तावेज: अनुज्ञा जारी करने से पूर्व आवेदक से निम्नलिखित दस्तावेज लिए जाने का प्रावधान है:
आवेदक का जन्म/मृत्यु की घटना से सम्बन्धित प्रार्थना पत्र
अनुज्ञा हेतु शपथ पत्र (सादे पेपर पर नोटरी सत्यापित नहीं)
विलंबित इत्तिला देने के लिए स्वप्रमाणित घोषणा पत्र (प्ररूप संख्या-14)
रजिस्ट्रार द्वारा जारी अनुपलब्धता प्रमाण पत्र (प्ररूप संख्या-10)
2 उत्तरदायी व्यक्तियों द्वारा प्रमाणीकरण मय उनकी पहचान सम्बन्धित दस्तावेज, अथवा जन्म-मृत्यु की घटना का सत्यापन ANM और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता द्वारा (जाँच रिपोर्ट), अथवा ग्रामीण क्षेत्र में सरपंच एवं वार्ड पंच तथा शहरी क्षेत्र में वार्ड पार्षद द्वारा (जाँच रिपोर्ट)।
निर्देश: अनुज्ञा जारी करने से पूर्व उक्तनानुसार आवेदक से दस्तावेज प्राप्त करेंगे और दस्तावेजों एवं तथ्यों से पूर्ण संतुष्टि उपरान्त जन्म/मृत्यु की अनुज्ञा जारी कर रिकार्ड संधारण करना सुनिश्चित करेंगे।
बजट घोषणा वर्ष 2025-26 के अंतर्गत अटल ज्ञान केंद्रों की स्थापना एवं क्रियान्विति के संबंध में दिशा-निर्देश
बजट घोषणा वर्ष 2025-26: अटल ज्ञान केंद्रों की स्थापना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज) राजस्थान सरकार द्वारा बजट घोषणा वर्ष 2025-26 के अंतर्गत प्रथम चरण में 3 हजार से अधिक आबादी वाले 2082 ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर अटल ज्ञान केंद्रों की स्थापना और क्रियान्विति के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
प्रमुख बिंदु एवं वित्तीय प्रावधान
केंद्र राशि: प्रत्येक अटल ज्ञान केंद्र हेतु केंद्र राशि रु. 12.50 लाख का व्यय षष्ठम राज्य वित्त आयोग के दिशा-निर्देश क्रमांक 347 दिनांक 28.01.2025 के बिंदु संख्या 3(iv) 'सामुदायिक केंद्रों का निर्माण एवं रख-रखाव कार्य' (जिसमें पुस्तकालय एवं वाचनालयों का निर्माण, फर्नीचर यथा कुर्सी, टेबल आदि) के तहत किया जा सकेगा।
इंटरनेट सुविधा: 15वें वित्त आयोग के दिशा-निर्देश क्रमांक 301 दिनांक 15.02.2022 के बिंदु संख्या 8 'सार्वजनिक पुस्तकालय' के तहत इंटरनेट सुविधा प्राप्त करने हेतु एकबारीय लागत एवं आवर्ती व्यय का उपयोग किया जा सकेगा।
कंप्यूटर क्रय: षष्ठम राज्य वित्त आयोग के दिशा-निर्देश के बिंदु संख्या (ब)(1) 'सूचना प्रौद्योगिकी/ई-गवर्नेंस/डेटा बेस का उपयोग' के तहत प्रति ग्राम पंचायत 4 कंप्यूटर क्रय किए जा सकेंगे।
अटल ज्ञान केंद्रों की स्थापना हेतु निर्धारित समय सीमा
प्रशासनिक स्वीकृति जारी करना - दिनांक 15.06.2025 तक
तकनीकी स्वीकृति जारी करना - दिनांक 30.06.2025 तक
वित्तीय स्वीकृति जारी करना - दिनांक 05.07.2025 तक
निविदा जारी संबंधित कार्यवाही - दिनांक 15.07.2025 तक
अटल प्रेरकों का चयन
प्रथम चरण में चयनित 2082 ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर अटल ज्ञान केंद्रों की स्थापना के उपरांत निर्धारित प्रक्रिया द्वारा आउटसोर्सिंग के माध्यम से अटल प्रेरकों का चयन किया जाएगा। अटल प्रेरक मानदेय का भुगतान 15वें वित्त आयोग के दिशा-निर्देश के बिंदु संख्या 13 के तहत अन्य बुनियादी सेवाओं/संवर्धित सेवाओं के आवर्ती व्यय और आवश्यक रूप से अन्य प्रशासनिक खर्च (10 प्रतिशत की सीमा भीतर) के तहत किया सकेगा। यह वित्त विभाग की आईडी संख्या 332500866 दिनांक 02.06.2025 द्वारा अनुमोदित है।
वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान (5 जून से 20 जून 2025) के तहत विशेष ग्राम सभाओं और गतिविधियों का आयोजन
वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान एवं विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन
कार्यालय जिला परिषद बाड़मेर एवं ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग, राजस्थान सरकार के निर्देशानुसार राज्य में 5 जून, 2025 से 20 जून, 2025 तक 'वंदे गंगा' जल संरक्षण जन अभियान का आयोजन किया जा रहा है। इस अभियान के तहत बाड़मेर एवं बालोतरा जिले की प्रत्येक ग्राम पंचायत में विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन किया जाएगा।
प्रमुख बिंदु एवं निर्देश
विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन: दिनांक 05.06.2025 एवं 20.06.2025 को प्रत्येक ग्राम पंचायत में विशेष ग्राम सभाएं आयोजित की जाएंगी, जिसमें जल संचय जन भागीदारी अभियान से संबंधित कम से कम 20 कार्यों का चिह्नीकरण किया जाएगा जिन्हें 30 नवंबर 2025 तक पूर्ण किया जा सके।
पीपल पूजन एवं वृक्षारोपण: 05 जून को हर ग्राम पंचायत में 21 महिलाओं द्वारा पीपल पूजन का कार्यक्रम कराया जाएगा तथा प्रत्येक राजस्व ग्राम में न्यूनतम एक कार्य जल संरक्षण के तहत आवश्यक रूप से करवाया जाएगा।
अभियान संकल्प: प्रत्येक दिन के कार्यक्रमों के साथ 'वंदे गंगा' जल संरक्षण जन अभियान संकल्प दिलाया जाएगा।
चारागाह एवं ओरिएंट चिह्नीकरण: पखवाड़े (05 जून से 20 जून 2025) के दौरान चारागाहों/औरॉण गोचर का चिह्नीकरण और पौधारोपण कार्यों की अग्रिम तैयारी की जाएगी।
श्रमदान: श्रमदान कार्यक्रम यथासंभव प्रातः 6:30 से 9:30 तक सुनिश्चित किया जाएगा जिसमें मनरेगा श्रमिकों, आम-जन और विभिन्न संस्थाओं की भागीदारी होगी।
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य जल संरक्षण, वर्षा जल संग्रहण, पर्यावरण संरक्षण, हरियालो राजस्थान, और स्वच्छता को बढ़ावा देना है। सभी ग्राम पंचायतों और शहरी निकायों को इस अभियान को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सफल बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
ग्राम पंचायत स्तर पर 'बर्तन बैंक' की स्थापना हेतु दिशा-निर्देश
ग्राम पंचायत स्तर पर 'बर्तन बैंक' की स्थापना एवं संचालन
स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण), पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा बजट घोषणा वर्ष 2025-26 के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में प्लास्टिक के उपयोग को कम करने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए 'बर्तन बैंक' की स्थापना हेतु संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। प्रथम चरण में एक हजार ग्राम पंचायतों में स्टील के बर्तन उपलब्ध कराए जाएंगे।
मुख्य बिंदु एवं कार्यप्रणाली:
उद्देश्य: ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी बैठकों, व्यक्तिगत, सामाजिक, धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रमों में प्लास्टिक/डिस्पोजल के स्थान पर स्टील के बर्तनों के उपयोग को बढ़ावा देना।
बर्तन सेट विवरण: प्रत्येक ग्राम पंचायत हेतु न्यूनतम 400 सेट उपलब्ध होंगे। एक सेट में 1 प्लेट, 3 कटोरी, 1 चम्मच एवं 1 गिलास (कुल 6 बर्तन) होंगे।
संचालन: बर्तन बैंक का संचालन आजीविका की महिला स्वयं सहायता समूह (SHG) द्वारा किया जाएगा।
शुल्क निर्धारण: प्रत्येक बर्तन के सेट हेतु उपयोगकर्त्ता के लिए किराया 3.00 रुपये प्रति सेट रहेगा। बीपीएल, दिव्यांग, अनुसूचित जाति/जनजाति, विधवा आदि श्रेणियों या विशेष परिस्थितियों में 50 प्रतिशत की छूट दी जा सकेगी।
वित्तीय प्रावधान: ग्राम पंचायत द्वारा GF&AR तथा RTPP Act & Rules के अनुसार अधिकतम 1.00 लाख रुपये तक की राशि से उच्च गुणवत्ता के स्टील बर्तन क्रय किए जाएंगे। यह व्यय राज्य वित्त आयोग मद से किया जाएगा।
एम.ओ.यू. (MOU): बर्तन बैंक के संचालन हेतु ग्राम पंचायत और आजीविका महिला स्वयं सहायता समूह के मध्य समझौता ज्ञापन (MOU) निष्पादित किया जाएगा।
यह दिशा-निर्देश वित्त विभाग की आई.डी. संख्या 332500493 दिनांक 24.03.2025 से अनुमोदित हैं।
माननीय मुख्यमंत्री महोदय की बजट घोषणा के अनुपालन में जनता जल योजनाओं का पीएचईडी विभाग को हस्तांतरण
जनता जल योजनाओं का पीएचईडी (PHED) विभाग को हस्तांतरण
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज) द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ 4 (1050) पंरावि/पीसी/जेजेवाई पीएचईडी को हस्तांतरण/2022/910 दिनांक 29.04.2022 के अनुसार, माननीय मुख्यमंत्री महोदय की दिनांक 21.03.2022 की बजट घोषणा की पालना में जनता जल योजनाओं को जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी (पीएचईडी) विभाग को हस्तांतरित किए जाने के संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
घोषणा की पृष्ठभूमि: माननीय मुख्यमंत्री महोदय द्वारा वित्त विनिमय विधेयक चर्चा पर घोषणा की गई थी कि पंचायतों को जनता जल योजना चलाने में वित्तीय संसाधनों और तकनीकी मैनपावर की कमी के कारण समस्या आती है। अतः पेयजल योजनाओं के सुचारू संचालन के लिए इन्हें पीएचईडी विभाग को सौंपा जाएगा।
हस्तांतरण की तिथि: ग्राम पंचायतों के अधीन जनता जल योजनाएं दिनांक 30.04.2022 तक रहेंगी तथा दिनांक 01.05.2022 से उक्त जनता जल योजनाएं पीएचईडी विभाग के अधीन रहेंगी।
आवश्यक कार्रवाई: सभी मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद को निर्देशित किया गया है कि वे अपने जिले की ग्राम पंचायतों की जनता जल योजनाओं को जिला स्तर पर पीएचईडी अधिकारियों को हस्तांतरित करें और इसकी पालना रिपोर्ट विभागीय ई-मेल पर भिजवाएं।
ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित स्वच्छता गतिविधियों के भुगतान के सम्बन्ध में दिशा-निर्देश
स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत स्वच्छता गतिविधियों के भुगतान संबंधी निर्देश
राजस्थान सरकार, निदेशालय, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण), पंचायती राज विभाग द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित स्वच्छता सुनिश्चित करने एवं संपादित स्वच्छता गतिविधियों के भुगतान के संबंध में आदेश क्रमांक एफ 12(परावि/एसबीएम/BSR Sanitation/2024-25/3037-44 दिनांक 05.02.2025 जारी किया गया है।
भुगतान की प्रक्रिया एवं मुख्य बिंदु:
ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित साफ-सफाई की व्यवस्था हेतु ग्रामीण विकास विभाग द्वारा स्थायी आदेश संख्या 1/2024 दिनांक 03.09.2024 के तहत 05 आइटम की दरों का निर्धारण कर संवेदक के माध्यम से निविदा आमंत्रित कर कार्य करवाए जाने के निर्देश दिए गए हैं।
मॉडल टेंडर डॉक्यूमेंट के बिंदु संख्या 27, 28, 31 के अनुसार संवेदक द्वारा किए जा रहे स्वच्छता कार्य का भुगतान मासिक आधार पर निम्नलिखित प्रक्रिया से होगा:
सफाई कार्य की ग्राम पंचायत के दैनिक रजिस्टर में प्रविष्टि / रिपोर्ट।
ग्राम पंचायत में ग्रामीण जल एवं स्वच्छता समिति की रिपोर्ट।
स्वच्छता कार्यों की ऑनलाइन पोर्टल लागू किए जाने पर ऐप की रिपोर्ट।
तकनीकी अधिकारी (कनिष्ठ तकनीकी सहायक, कनिष्ठ अभियंता, सहायक अभियंता) द्वारा सड़क एवं नाली सफाई का सत्यापन एवं समस्त 4 संधारित रजिस्टरों में इन्द्राज कर हस्ताक्षर करना।
उक्तानुसार संधारित रजिस्टर/लॉगबुक की प्रतिलिपि प्रतिमाह विकास अधिकारी को प्रस्तुत की जाएगी।
हस्ताक्षर रजिस्टर की छायाप्रतियां बिल के साथ संलग्न कर भुगतान किया सकेगा।
कार्यों के सम्पादन हेतु सामान्य वित्तीय एवं लेखा नियम, RTPP Act and Rules, ग्रामीण कार्य निर्देशिका, 15वां वित्त आयोग / राज्य वित्त आयोग के प्रावधान लागू होंगे।
SOP के अनुसार संबंधित तकनीकी अधिकारियों के निरीक्षण/सत्यापन/प्रमाणीकरण उपरांत उपयोगिता प्रमाण-पत्र जारी किए जाने के पश्चात राशि का समायोजन 15वें वित्त आयोग एवं अन्य के दिशा-निर्देशों के अनुसार किया जाएगा।
दिनांक 24 अप्रैल 2025 को विशेष ग्राम सभा के आयोजन और सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के वार्षिक भौतिक सत्यापन के संबंध में
विशेष ग्राम सभा आयोजन एवं सामाजिक सुरक्षा पेंशन सत्यापन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा जारी पत्र (पत्रांक एफ.15(10)पंरावि/विधि/विशेष ग्राम सभा/2024/EFile-22379, दिनांक 23-04-2025) एवं सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के पत्र दिनांक 03-04-2025 के क्रम में प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों में दिनांक 24 अप्रैल, 2025 को विशेष ग्राम सभा का आयोजन किया जाना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य बिंदु एवं निर्देश
वार्षिक भौतिक सत्यापन: सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के लाभार्थीयों की वार्षिक सत्यापन प्रक्रिया प्रति वर्ष 1 नवंबर से शुरू होती है। वर्ष 2025 के लिए शत-प्रतिशत पेंशनर्स का वार्षिक भौतिक सत्यापन दिनांक 30-04-2025 तक करवाया जाना अनिवार्य है।
पेेंशन भुगतान पर प्रभाव: निर्धारित तिथि (30 अप्रैल 2025) तक वार्षिक सत्यापन न करवाने की स्थिति में पेंशनर्स का मई, 2025 (देय माह जून, 2025) के बाद पेंशन भुगतान रोका जा सकता है।
पेंशन निरस्तीकरण पर रोक थाम: पेंशन स्वीकृतकर्ता अधिकारियों के स्तर से बिना पूर्ण जांच के पेंशन लाभार्थियों को मृत अथवा राज्य से अन्यत्र पलायन दिखाकर पेंशन निरस्त करने के मामलों की रोकथाम के लिए, ऐसे प्रकरणों में निरस्तीकरण की कार्यवाही का विशेष ग्राम सभा में अनुमोदन करवाने के पश्चात ही आगे की कार्यवाही किए जाने के निर्देश हैं।
अतः समस्त मुख्य / अति0 मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद और विकास अधिकारी, पंचायत समिति को निर्देशित किया गया है कि वे अपने जिले की सभी ग्राम पंचायतों में 24 अप्रैल, 2025 को विशेष ग्राम सभा का आयोजन कर इन निर्देशों की पालना सुनिश्चित करें।
दिनांक 21 मार्च, 2025 को विशेष ग्राम सभा के आयोजन बाबत (विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस)
विशेष ग्राम सभा आयोजन के संबंध में निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश (क्रमांक: एफ.15(10)पंरावि/विधि/वि०ग्रा०सभा/24/इफाईल 22379, दिनांकित आदेश और भारतीय मानक ब्यूरो, जयपुर शाखा के पत्रों के संदर्भ में) राज्य की सभी ग्राम पंचायतों में 21 मार्च, 2025 को विशेष ग्राम सभा आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य उद्देश्य एवं बिंदु
विशेष ग्राम सभा: विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस के उपलक्ष्य में उपभोक्ता सशक्तिकरण और जागरूकता पर चर्चा हेतु सभी ग्राम पंचायतों में विशेष ग्राम सभा का आयोजन।
बीआईएस केयर ऐप (BIS Care App): आम नागरिकों को रोजमर्रा के उपयोग में आने वाले विभिन्न उत्पादों की गुणवत्ता, भारतीय मानकों और BIS गुणवत्ता चिह्न की प्रामाणिकता की जाँच के लिए 'BIS Care App' के उपयोग की जानकारी देना।
रिपोर्टिंग: कार्यक्रम के पूर्ण होने पर कुछ फोटो, वीडियो और प्रतिभागियों की संख्या सहित व्हाट्सएप के माध्यम से श्री राजेन्द्र कुमार मीना (मोबाइल नंबर - 9636845891) को भेजना सुनिश्चित किया जाए।
प्रतिलिपि एवं सूचसूचना
यह निर्देश समस्त मुख्य/अति० मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद और विकास अधिकारी, पंचायत समिति (राजस्थान) को आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रेषित किए गए हैं।
राजस्थान पंचायती राज विभाग अधिसूचना: प्रशासक नियुक्ति एवं प्रशासनिक समितियों का गठन
अधिसूचना विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 16-01-2025 को आदेश क्रमांक एफ.15(2)प्रशासक/विधि/पंपरा/2025/05 के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण अधिसूचना जारी की गई है।
मुख्य बिंदु
पृष्ठभूमि: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा-95 के तहत, जिन ग्राम पंचायतों का कार्यकाल दिनांक 31.01.2025 तक समाप्त हो रहा है और जिनके चुनाव अपरिहार्य कारणों से संपन्न नहीं हो पा रहे हैं, उनके लिए यह व्यवस्था की गई है।
प्रशासक की नियुक्ति: ऐसी समस्त ग्राम पंचायतों में संबंधित ग्राम पंचायत के निवर्तमान सरपंच को प्रशासक नियुक्त किया गया है ताकि कार्यों का सुचारू संचालन हो सके।
प्रशासनिक समिति का गठन: प्रत्येक ऐसी ग्राम पंचायत के लिए प्रशासकीय समिति का गठन किया जाएगा, जिसमें कार्यकाल समाप्त होने से पूर्व के उप सरपंच एवं वार्ड पंच सदस्य बनाए जाएंगे।
वित्तीय शक्तियाँ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 एवं राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के तहत ग्राम पंचायत के खातों (Bank Accounts) का संचालन व वित्तीय शक्तियों का प्रयोग प्रशासक (निवर्तमान सरपंच) एवं संबंधित ग्राम विकास अधिकारी द्वारा किया जाएगा।
कार्यकाल: प्रशासक एवं प्रशासकीय समिति की कार्यविधि नवनिर्वाचन के पश्चात गठित ग्राम पंचायत की प्रथम बैठक की तारीख के ठीक पूर्ववर्ती दिन तक रहेगी।
जिला कलेक्टर्स को अधिकार: अधिनियम की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्य सरकार द्वारा समस्त जिला कलेक्टर्स को अपने जिले की संबंधित ग्राम पंचायतों में प्रशासक नियुक्त करने एवं प्रशासकीय समितियों का गठन किए जाने हेतु अधिकृत किया गया है।
राजस्थान पंचायती राज विभाग अधिसूचना: प्रशासक नियुक्ति एवं प्रशासनिक समिति का गठन
अधिसूचना विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 11-3-2025 को आदेश क्रमांक एफ.15(2)प्रशासक/विधि/पंव्रा/2025/200 जारी किया गया है। यह अधिसूचना उन ग्राम पंचायतों के संबंध में है जिनका कार्यकाल दिनांक 31.03.2025 तक समाप्त हो रहा है और जिनके चुनाव अपरिहार्य कारणों से संपन्न नहीं हो पा रहे हैं।
मुख्य बिंदु
प्रशासक की नियुक्ति: ऐसी समस्त ग्राम पंचायतों में संबंधित ग्राम पंचायत के निवर्तमान सरपंच को प्रशासक नियुक्त किया गया है।
प्रशासनिक समिति का गठन: ग्राम पंचायतों के कार्यकलापों के सुचारू संचालन हेतु प्रशासक की सहायताार्थ प्रत्येक ऐसी ग्राम पंचायत के लिए प्रशासनिक समिति का गठन किया जाएगा।
समिति के सदस्य: इस प्रशासनिक समिति में ग्राम पंचायत का कार्यकाल समाप्त होने से पूर्व वे व्यक्ति जो संबंधित ग्राम पंचायत के उप सरपंच एवं वार्ड पंच रहे हैं, सदस्य बनाए जाएंगे।
वित्तीय एवं बैंक खाते का संचालन: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 एवं राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के तहत ग्राम पंचायत के खातों (Bank Accounts) का संचालन व वित्तीय शक्तियों का प्रयोग प्रशासक (निवर्तमान सरपंच) एवं सम्बन्धित ग्राम विकास अधिकारी द्वारा किया जाएगा।
कार्यवधि: प्रशासक एवं प्रशासनिक समिति की कार्यवधि नवनिर्वाचन के पश्चात गठित ग्राम पंचायत की प्रथम बैठक की तारीख के ठीक पूर्ववर्ती दिन तक रहेगी।
जिला कलेक्टर्स को अधिकार: अधिनियम की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्य सरकार द्वारा समस्त जिला कलक्टरों को अपने जिले की संबंधित ग्राम पंचायतों में उनका कार्यकाल समाप्त होने की तिथि से प्रशासक नियुक्त करने एवं प्रशासनिक समितियों का गठन किये जाने हेतु अधिकृत किया गया है।
पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित जन प्रतिनिधियों के मानदेय में संशोधन के संबंध में अधिसूचना
अधिसूचना विवरण
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज) द्वारा राजस्थान पंचायतीराज नियम 1996 के नियम 27 से 30 के अनुसार प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित सदस्यों/जनप्रतिनिधियों के मानदेय की दरों में संशोधन किया गया है। यह संशोधन बजट घोषणा वर्ष 2024-25 के बिंदु सं.-99 के क्रम में किया गया है।
संशोधित मानदेय की दरें
जिला प्रमुख, जिला परिषद: वर्तमान मानदेय रु. 15180/- प्रतिमाह से बढ़ाकर संशोधित मानदेय रु. 16698/- प्रतिमाह किया गया है।
प्रधान, पंचायत समिति: वर्तमान मानदेय रु. 10626/- प्रतिमाह से बढ़ाकर संशोधित मानदेय रु. 11689/- प्रतिमाह किया गया है।
सरपंच, ग्राम पंचायत: वर्तमान मानदेय रु. 6072/- प्रतिमाह से बढ़ाकर संशोधित मानदेय रु. 6679/- प्रतिमाह किया गया है।
मुख्य बिंदु
जनप्रतिनिधियों को देय मानदेय का भुगतान राज्य वित्त आयोग के तहत मिलने वाली अनुदान राशि से किया जाएगा।
यह आदेश दिनांक 01.04.2025 से लागू होगा।
यह अधिसूचना वित्त (व्यय-5) विभाग की आईडी संख्या 332500330 दिनांक 05.03.2025 से प्राप्त सहमति के अनुसार जारी की गई है।
फार्मर रजिस्ट्री शिविरों के आयोजन हेतु षष्ठ राज्य वित्त आयोग की अनुदान राशि के उपयोग की स्वीकृति
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग राजस्थान सरकार आदेश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), जयपुर द्वारा दिनांक 05 फरवरी, 2025 से 31 मार्च, 2025 तक प्रदेश की समस्त ग्राम पंचायतों में "फार्मर रजिस्ट्री" शिविरों के आयोजन के संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
शिविर की अवधि: दिनांक 05 फरवरी, 2025 से 31 मार्च, 2025 तक प्रदेश की समस्त ग्राम पंचायतों में फार्मर रजिस्ट्री शिविर आयोजित किए जा रहे हैं।
वित्तीय स्वीकृति: षष्ठ राज्य वित्त आयोग के अंतर्गत पंचायती राज संस्थाओं को देय अनुदान राशि के उपयोग हेतु, ग्राम पंचायत स्तर पर तीन दिवसीय शिविर आयोजित करने पर प्रति ग्राम पंचायत अधिकतम रु. 15,000/- प्रति शिविर के व्यय/उपयोग करने की सहमति प्रदान की जाती है।
संदर्भित पत्र एवं आदेश: यह सहमति वित्त (व्यय-5) विभाग की आई.डी. संख्या 332500159 दिनांक 21.02.2025, राजस्व एवं उपवेशन विभाग के पत्र संख्या 349 दिनांक 21.01.2025 तथा विभागीय राजकाज पत्रक संख्या 13145977 दिनांक 22.01.2025 के क्रम में दी गई है।
यह आदेश शासन सचिव एवं आयुक्त डॉ. जोगाराम द्वारा जारी किया गया है।
जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण (संशोधन) नियम 2025 के संबंध में आदेश
जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण (संशोधन) नियम 2025
आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय, राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 19.02.2025 का पत्र क्रमांक एफ/13/1/3/आर.जी.आई./बीएस/डीईएस/2017/148 जारी किया गया है। यह पत्र जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण (संशोधन) अधिनियम 2023 और राजस्थान जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण (संशोधन) नियम 2025 के संबंध में है।
मुख्य बिंदु:
ग्रामीण क्षेत्र में अनुज्ञा: नियम 9 (2) के अंतर्गत जन्म और मृत्यु की 30 दिवस के पश्चात 1 वर्ष के भीतर की घटना हेतु जारी की जाने वाली अनुज्ञा ग्रामीण क्षेत्र में ब्लॉक सांख्यिकी अधिकारी द्वारा जारी की जाएगी।
विलम्ब शुल्क में संशोधन: नियम 9 (2) एवं (3) के अंतर्गत विलम्ब शुल्क इस प्रकार रहेगा:
घटना की सूचना 21 दिवस पश्चात परंतु 30 दिवस के भीतर देने पर 1 रुपये के स्थान पर 20 रुपये विलम्ब शुल्क।
30 दिवस पश्चात परंतु 1 वर्ष के भीतर देने पर 50 रुपये विलम्ब शुल्क।
घटना की सूचना 1 वर्ष पश्चात दिए जाने पर 100 रुपये विलम्ब शुल्क।
नोटरी सत्यापन समाप्त: नियम 9 (2) में जन्म-मृत्यु के विलंबित रजिस्ट्रीकरण में नोटरी सत्यापन को समाप्त किया गया है।
चिकित्सा संस्थानों द्वारा विलम्ब पर पेनल्टी: नियम 16 (2) के अंतर्गत चिकित्सा संस्थानों द्वारा 21 दिवस से अधिक विलम्ब किए जाने पर पूर्व में 50 रुपये की पेनल्टी थी, जिसे बढ़ाकर अब 250 रुपये एवं अधिकतम 1000 रुपये कर दिया गया है।
अपील का प्रावधान: नियम 16 (क) में अपील का प्रावधान किया गया है, जिसके अनुसार यदि प्रार्थी रजिस्ट्रार/जिला रजिस्ट्रार के कार्य या किसी आदेश से संतुष्ट नहीं है तो मुख्य रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) को अपील कर सकता है।
15वें वित्त आयोग वित्तीय वर्ष 2023-24 (टייד अनुदान द्वितीय किस्त) की राशि ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर मैनुअल रिसिप्ट वाउचर की प्रविष्टि के संबंध में
15वें वित्त आयोग के अंतर्गत टाइड अनुदान की प्रविष्टि के संबंध में निर्देश
कार्यालय जिला परिषद, बाड़मेर एवं ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा जारी पत्र के अनुसार 15वें वित्त आयोग के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए देय टाइड अनुदान की द्वितीय किस्त की राशि रुपये 872.86 करोड़ (वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए) के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
विषय: 15वें वित्त आयोग अन्तर्गत वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए देय टाइड अनुदान की द्वितीय किस्त की राशि रुपये 872.86 करोड़ राशि के ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर मैनुअल रिसिप्ट वाउचर की एंट्री खुलवाने के संबंध में।
तकनीकी कारणों से छूट: 15वें वित्त आयोग के वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए देय टाइड अनुदान की प्रथम किस्त की राशि रुपये 791.34 करोड़ पंचायती राज संस्थाओं (जिला परिषदों, पंचायत समितियों एवं ग्राम पंचायतों) को हस्तांतरित की जा चुकी है, किंतु तकनीकी कारणों से संपूर्ण राशि ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर प्रदर्शित नहीं हो रही थी।
अनुमति: पंचायती राज मंत्रालय भारत सरकार द्वारा उक्त राशि के मैनुअल रिसिप्ट दिनांक 20.02.2025 तक खोले जाने की अनुमति प्रदान की गई है।
निर्देश: 15वें वित्त आयोग अन्तर्गत वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए देय टाइड अनुदान की द्वितीय किस्त की राशि रुपये 872.86 करोड़ (वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए देय टाइड अनुदान की प्रथम किस्त की राशि रुपये 791.34 करोड़) पंचायती राज संस्थाओं यथा जिला परिषदों, पंचायत समितियों एवं ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित की गई राशि की सीमा में ही मैनुअल रिसिप्ट वाउचर की एन्ट्री किया जाना सुनिश्चित करें।
व्यक्तिगत जिम्मेदारी: उक्त राशि की सीमा से अधिक राशि का इन्ड्राज किये जाने पर संबंधित व्यक्ति व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे।
दिनांक 26 जनवरी 2025 को आयोजित होने वाली ग्राम सभा के संबंध में दिशा-निर्देश
26 जनवरी 2025 को ग्राम सभा का आयोजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा जारी पत्र क्रमांक एफ.15(10)पंरावि/विधि/वि0ग्रा0सभा/24/ईफाईल 22379 (दिनांक 23.01.2025) के अनुसार राज्य की सभी ग्राम पंचायत में दिनांक 26 जनवरी 2025 को ग्राम सभा का आयोजन किया जाना है। इस संबंध में सभी मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद और विकास अधिकारी, पंचायत समिति को आवश्यक कार्रवाई हेतु निर्देश दिए गए हैं।
ग्राम सभा के मुख्य एजेंडा बिंदु
सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना से संबंधित बिंदु: सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के पत्रांक 12901185 दिनांक 09.01.2025 के अनुसरण में, दिनांक 26 जनवरी 2025 की ग्राम सभा में पेंशनर्स के वार्षिक भौतिक सत्यापन, विभिन्न कारणों से निरस्त की गई पेंशन स्वीकृतियों की सूची का पठन, अपात्र पेंशनर्स के पी.पी.ओ. निरस्त करने तथा पात्र पेंशनर की गलत सूचनाओं के आधार पर निरست की गई पेंशन को पुनः प्रारंभ किए जाने हेतु अनुमोदन की कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं से संबंधित रिपोर्ट निर्धारित प्रपत्र में भेजी जाएगी।
राज-किसान गिरदावरी मोबाइल ऐप: बजट घोषणा 2024-25 के अनुसार एग्रीस्टेक के माध्यम से किसान स्तर से स्वयं के खसरे पर जाकर फसल की फोटो लेकर (geo-location with photo based) ऑनलाइन गिरदावरी किए जाने का प्रावधान है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय भारत सरकार के एग्रीस्टेक प्रोजेक्ट के अंतर्गत रबी संवत 2081 से राज्य की ऑनलाइन तहसीलों में डिजिटल क्रॉप सर्वे (ई-गिरदावरी) दिनांक 01.01.2025 सेारंभ किया गया है।
पर्यावरण संरक्षण कार्य योजना एवं उपभोक्ता सशक्तिकरण शपथ: गांव में प्लास्टिक मुक्त वातावरण बनाना, जैविक खेती को प्रोत्साहित करना, वृक्षारोपण, जल संरक्षण और पर्यावरणीय जागरूकता पर चर्चा की जाएगी। इसके अलावा, गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में उपभोक्ता सशक्तिकरण के लिए गुणवत्ता शपथ ग्रहण कराई जाएगी।
विशेष निर्देश: ग्राम सभा के दौरान भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के सहयोग से उपभोक्ता सशक्तिकरण के लिए गुणवत्ता शपथ ग्रहण करवाने तथा संबंधित फोटो व वीडियो श्री राजेन्द्र कुमार मीणा (मोबाइल नंबर - 9636845891) को व्हाट्सएप पर भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
ग्राम पंचायतों में प्रशासक एवं प्रशासनिक समितियों की नियुक्ति और ई-पंचायत पोर्टल संचालन संबंधी आदेश
ग्राम पंचायतों में प्रशासक एवं प्रशासनिक समितियों की नियुक्ति
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी विभिन्न आदेशों के अनुसार, जिन ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त हो चुका है और चुनाव अपरिहार्य कारणों से संपन्न नहीं हो पा रहे हैं, उनमें व्यवस्था सुचारू रखने हेतु दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
प्रशासक की नियुक्ति: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा-95 एवं 98 के तहत, संबंधित ग्राम पंचायत के निवर्तमान सरपंच को प्रशासक नियुक्त किया जाता है।
प्रशासनिक समिति का गठन: प्रशासक की सहायताार्थ प्रत्येक ऐसी ग्राम पंचायत के लिए प्रशासनिक समिति का गठन किया जाएगा, जिसमें निवर्तमान उप सरपंच एवं वार्ड पंच सदस्य बनाए जाएंगे।
ई-पंचायत पोर्टल पर लेन-देन: ई-पंचायत पोर्टल पर राशि भुगतान की कार्यवाही प्रशासक (निवर्तमान सरपंच) एवं संबंधित ग्राम विकास अधिकारी (VDO) द्वारा संयुक्त रूप से की जाएगी। इसके लिए पोर्टल पर प्रशासकों की एस.एस.ओ. (SSO) आईडी को संबंधित विकास अधिकारी-पंचायत समिति द्वारा निष्क्रिय कर समिति द्वारा अनुमोदन सुनिश्चित करने की व्यवस्था की गई है।
कार्य अवधि: प्रशासक एवं प्रशासनिक समिति की कार्यअवधि नवर्निर्वाचन के पश्चात गठित ग्राम पंचायत की प्रथम बैठक की तारीख के ठीक पूर्ववर्ती दिन तक रहेगी।
दिनांक 20 दिसम्बर 2024 को विशेष ग्राम सभा के आयोजन बाबत
विशेष ग्राम सभा आयोजन आदेश
कार्यालय जिला परिषद (पंचायत प्रकोष्ठ) बाड़मेर द्वारा जारी पत्र के अनुसार, माननीय मुख्य सचिव महोदय द्वारा दिनांक 28.11.2024 को सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षात्मक बैठक में लिए गए निर्णयों एवं निर्देशों के क्रम में राज्य की सभी ग्राम पंचायतों में दिनांक 20 दिसम्बर 2024 को विशेष ग्राम सभा का आयोजन किया जाना है।
मुख्य बिंदु एवं आवश्यक निर्देश
वार्षिक भौतिक सत्यापन: वर्ष 2024 के लिए असत्यापित पेंशनर्स से व्यक्तिगत संपर्क कर उनके वार्षिक भौतिक सत्यापन को सुनिश्चित किया जाना है।
मृत्यु, पलायन या अपात्रता: यदि कोई पेंशनर वर्तमान में मृत्यु, पलायन अथवा अन्य कारणों से अपात्र हो गया है, तो उनकी पेंशन निरस्त करने के लिए संबंधित स्वीकृतिर्त्ताओं अधिकारी को रिपोर्ट प्रेषित कर आवश्यक कार्यवाही की जानी है।
निरस्त पेंशन स्वीकृतियों की सूची चस्पा करना: दिनांक 1 अप्रैल, 2022 से 30 नवंबर, 2024 की अवधि में विभिन्न कारणों से निरस्त की गई पेंशन स्वीकृतियों के संबंध में ऐसे प्रकरणों की सूची को चस्पा कर अपात्र पेंशनर्स के पी.पी.ओ. निरस्त करने तथा पात्र पेंशनर की गलत सूचनाओं के आधार पर पेंशन निरस्त की गई हो तो अनुमोदन कर संबंधित स्वीकृतिर्त्ता अधिकारी के स्तर से पेंशन पुनः प्रारम्भ करवाया जावे।
अतः सभी संबंधित विकास अधिकारियों को निर्देशित किया जाता है कि वे अपने क्षेत्र की सभी ग्राम पंचायतों में नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करावें।
दिनांक 26 नवम्बर 2024 को विशेष ग्राम सभा के आयोजन बाबत
संविधान दिवस (Constitution Day) के अवसर पर विशेष ग्राम सभा का आयोजन
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज) के पत्र क्रमांक एफ.15(10)पंरावि/विधि/विग्र0सभा/24/ईफाइल 22379 जयपुर, दिनांक 21.11.2024 के माध्यम से सभी मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद और विकास अधिकारी, पंचायत समिति को निर्देश दिए गए हैं कि दिनांक 26 नवम्बर 2024 को संविधान लागू होने के 75वें वर्ष के उत्सव के रूप में सभी ग्राम पंचायतों में विशेष ग्राम सभा का आयोजन किया जाए।
विशेष ग्राम सभा में आयोजित की जाने वाली मुख्य गतिविधियाँ:
संविधानिक मूल्य पर प्रश्नोत्तरी: युवा पीढ़ी को शिक्षित करने और नागरिक जिम्मेदारी की भावना को बढ़ावा देने के लिए।
स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के साथ जुड़ाव: महिलाओं को सशक्त बनाने और राष्ट्र निर्माण में उनके आवश्यक योगदान पर चर्चा।
आदिवासी समुदायों में क्षमता निर्माण (पेसा गांव): संवैधानिक अधिकारों और कानूनी हकदारी के बारे में जागरूकता बढ़ाना।
अधिकारों और कर्तव्यों पर बहस: स्थानीय निकायों में नागरिकों के अधिकारों और कर्तव्यों पर चर्चा।
इसके अतिरिक्त, क्षेत्रीय भाषा में संविधान के अमृत महोत्सव के बारे में बताना तथा संविधान की प्रस्तावना पढ़ना भी सुनिश्चित किया जाए।
दिनांक 15 नवम्बर 2024 को आयोजित होने वाली विशेष ग्राम सभा के संबंध में दिशा-निर्देश
विशेष ग्राम सभा और जनजातीय गौरव दिवस आयोजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा जारी पत्र क्र. एफ.15(10)पंरावि/विधि/विग्रामसभा/24/ईफाइल 22379 दिनांक 14.11.2024 के माध्यम से दिनांक 15 नवम्बर 2024 को आयोजित होने वाली विशेष ग्राम सभा के संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश प्रदान किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
विशेष ग्राम सभा का आयोजन: आदिवासी नेता और महान व्यक्तित्व भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में पेसा और वन अधिकार अधिनियम (FRA) गांवों में 15 नवम्बर 2024 को विशेष ग्राम सभा सह-अभिविन्यास/प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाना है।
आदर्श आचार संहिता: जिन विधानसभा क्षेत्रों में राजस्थान विधानसभा उप चुनाव, 2024 की आदर्श आचार संहिता प्रभावी है, उन जिलों में विशेष ग्राम सभा सह-अभिविन्यास/प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जाने हैं।
माननीय प्रधानमंत्री महोदय का संबोधन: पंचायती राज मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देशानुसार 15 नवम्बर 2024 को जमुई, बिहार में जनजातीय गौरव दिवस कार्यक्रम का संबोधन माननीय प्रधानमंत्री महोदय द्वारा किया जा रहा है। इसका सीधा प्रसारण 15 नवम्बर 2024 को आयोजित विशेष ग्राम सभा में किया जाना है।
रिकॉर्डेड संस्करण: 15 नवम्बर 2024 के बाद आयोजित होने वाली ग्राम सभाओं में माननीय प्रधानमंत्री महोदय के संबोधन का रिकॉर्डेड संस्करण प्रसारित किया जाएगा।
स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी क्रमांक एफ44(51)पंच्रावि/प्रशि./स्वामित्व/2023/पार्ट-1/E-File - 01834 (दिनांक 27.08.2024) के अंतर्गत 'स्वामित्व योजना' के क्रियान्वयन में जिलों में आ रही विभिन्न समस्याओं के निराकरण हेतु राजस्व विभाग एवं पंचायती राज विभाग के समन्वय से महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश प्रसारित किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
सीमाज्ञान एवं चूना मार्किंग: आबादी क्षेत्र की बाहरी सीमा का सीमाज्ञान संबंधित पटवारी द्वारा किए जाने के उपरांत ग्राम पंचायत के कर्मियों द्वारा चूना मार्किंग की जाएगी। चूना मार्किंग के समय पटवारी की उपस्थिति अनिवार्य है।
सड़क सीमा एवं रेलवे लाइन दूरी: राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 के नियम 161 के अनुसार, जिन व्यक्तियों के मकान आबादी भूमि में स्थित हैं किंतु सड़क सीमा या रेलवे लाइन सीमा में आ रहे हैं, उन्हें प्रॉपर्टी पार्सल का वितरण नहीं किया जाए।
एक से अधिक भूखंड: किसी व्यक्ति के स्वामित्व में एक से अधिक भूखंड होने और उनका पट्टा न होने पर सिर्फ पट्टा शुद्धा भूखंड का प्रॉपर्टी पार्सल देय है, शेष का नहीं।
महिला पट्टा धारक: राजस्थान पंचायती राज नियम 157(2) के तहत 300 वर्गगज तक के महिला पट्टा धारक की प्रॉपर्टी आईडी का क्षेत्रफल 300 वर्गगज से अधिक होने पर नियम 165(4) के अनुसार डीएलसी दर से प्रभार लेकर विक्रय विलेख दिया जा सकता है, अन्यथा प्रॉपर्टी आईडी विवादग्रस्त अंकित की जाए।
आपत्तियां एवं अपील: स्वामित्व योजना अंतर्गत आपत्तियों के आमंत्रण हेतु विज्ञापन नियमानुसार प्रकाशित किए जाएं। पट्टे या प्रॉपर्टी कार्ड वितरण में त्रुटि/विवाद होने पर राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 के नियम 166 एवं अधिनियम 1994 की धारा 97 के संबंधित अपीलीय प्रावधान ही लागू होंगे।
राजस्थान संपर्क पोर्टल पर प्राप्त लाल मुंह के बंदर एवं हनुमान लंगूर से संबंधित परिवादों के निस्तारण बाबत आदेश
राजस्थान संपर्क पोर्टल परिवाद निस्तारण एवं बंदर/लंगूर पकड़ने के संबंध में निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान संपर्क पोर्टल (181 सी.एम. हेल्पलाइन) पर प्राप्त होने वाले परिवादों के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
परिवादों का अंतरण: राजस्थान संपर्क पोर्टल पर लाल मुंह के बंदर (Rhesus Macaque) एवं हनुमान लंगूर (Presbytis Entellus) से संबंधित प्राप्त परिवाद संबंधित ग्राम पंचायत को भिजवाए जाने का प्रावधान है।
ग्राम पंचायत स्तर पर कार्यवाही: जिले के अधीन ग्राम पंचायतें इन बंदरों को भगाए जाने / पकड़े जाने के संबंध में आवश्यकतानुसार, नियमानुसार अपने स्तर से व्यय कर, संबंधित पेशेवर (Professionals) की मदद लेकर उचित कार्यवाही कर सकती हैं।
वन विभाग की अधिसूचना: वन विभाग की अधिसूचना दिनांक 18.02.2000 के अनुसार वन्य जीव (सुरक्षा) अधिनियम-1972 के तहत जिला कलेक्टर्स को लाल मुंह के बंदर एवं हनुमान लंगूर के संबंध में प्राधिकृत अधिकारी नियुक्त किया गया है।
पंचायती राज संस्थाओं के जनप्रतिनिधियों के मानदेय में संशोधन की अधिसूचना
पंचायती राज जनप्रतिनिधियों के मानदेय में संशोधन
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज) द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक एफ.951(19)(41)परावि/लेखा/नि.आ./बजट घोषणा/2022-23 के अनुसार, माननीय उप मुख्यमंत्री (वित्त) महोदया की दिनांक 08.02.2024 की बजट घोषणा के बिंदु सं.-48 के क्रम में पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के मानदेय की दरों में संशोधन किया गया है।
मानदेय की संशोधित दरें
जिला प्रमुख, जिला परिषद: वर्तमान दर 13800/- रुपये प्रति माह से बढ़ाकर संशोधित दर 15180/- रुपये प्रति माह की गई है।
प्रधान, पंचायत समिति: वर्तमान दर 9660/- रुपये प्रति माह से बढ़ाकर संशोधित दर 10626/- रुपये प्रति माह की गई है।
सरपंच, ग्राम पंचायत: वर्तमान दर 5520/- रुपये प्रति माह से बढ़ाकर संशोधित दर 6072/- रुपये प्रति माह की गई है।
जनप्रतिनिधियों को देय मानदेय का भुगतान राज्य वित्त आयोग के तहत मिलने वाली अनुदान राशि से किया जाएगा। यह आदेश दिनांक 01.04.2024 से लागू होगा। यह अधिसूचना वित्त (व्यय-5) विभाग की आईडी संख्या 332400440 दिनांक 14.03.2024 से प्राप्त सहमति के अनुसरण में जारी की गई है।
ग्राम पंचायत द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के पात्र परिवारों को पट्टा जारी करने के संबंध में निर्देश
प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत पट्टा आवंटन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा ग्राम पंचायतों द्वारा पट्टा जारी करने के संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
विषय: ग्राम पंचायत द्वारा पट्टा जारी करने बाबत।
कारण: राज्य सरकार के ध्यान में लाया गया था कि कतिपय ग्राम पंचायतों में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की पात्रता/वरीयता सूची में सम्मिलित परिवारों को आबादी भूमि का पट्टा आवंटित नहीं हो पा रहा है।
योजना का महत्व: प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण राज्य सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं में शामिल है।
निर्देश: सभी मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद को निर्देशित किया गया है कि वे प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की पात्रता/वरीयता सूची में शामिल समस्त परिवारों को निर्धारित प्रक्रिया अपनाते हुए नियमनुसार भूमि/पट्टे आवश्यक रूप से आवंटित किया जाना सुनिश्चित करावें।
यह आदेश शासन सचिव एवं आयुक्त, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा जारी किया गया है।
ग्राम पंचायत द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के पात्र परिवारों को पट्टा जारी करने बाबत निर्देश
ग्राम पंचायत द्वारा पट्टा जारी करने के संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत पट्टा आवंटन के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
राज्य सरकार के ध्यान में लाया गया था कि कतिपय ग्राम पंचायतों में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की पात्रता/वरीयता सूची में सम्मिलित परिवारों को आबादी भूमि का पट्टा आवंटित नहीं हो पा रहा है।
चूंकि प्रधानमंत्री आवास योजना राज्य सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं में शामिल है, इसलिए सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है।
समस्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद को निर्देशित किया जाता है कि प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की पात्रता/वरीयता सूची में शामिल समस्त परिवारों को निर्धारित प्रक्रिया अपनाते हुए नियमानुसार भूमि/पट्टे आवश्यक रूप से आवंटित किया जाना सुनिश्चित करावें।
यह आदेश शासन सचिव एवं आयुक्त, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के हस्ताक्षर से जारी किया गया है।
ग्राम पंचायतों/पंचायत समितियों द्वारा पट्टा बही का संधारण किए जाने बाबत् परिपत्र
परिचय
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों द्वारा पट्टा बही का संधारण किए जाने के संबंध में परिपत्र जारी किया गया है। विभाग के ध्यान में आया था कि कतिपय पंचायत समिति स्तर पर ग्राम पंचायतों द्वारा जारी पट्टों का रिकॉर्ड संधारित नहीं किया जा रहा है, जिससे अनियमित पट्टे जारी होने की संभावना रहती है।
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 168 के मुख्य प्रावधान
नियम 168(1): नीलामी, परक्रामण या आवंटन द्वारा किए गए समस्त विक्रय जिनके लिए पट्टे जारी किए गए, उनका अभिलेख पंचायत द्वारा प्ररूप 24 में रखी गई पट्टा बही में रखा जाएगा।
नियम 168(2): पंचायत संबंधित पंचायत समिति के विकास अधिकारी को प्रत्येक मास के प्रथम सप्ताह में पट्टा बही की एक प्रति अग्रषित करेगी। विकास अधिकारी एक नियंत्रण रजिस्टर रखेगा जिसमें पंचायतवार लेजर रखा जाएगा और सत्यापन के प्रमाणस्वरूप प्रविष्टि पर हस्ताक्षर करेगा ताकि पिछली तारीखों में पट्टे जारी करना रोका जा सके।
नियम 168(3): पंचायत समिति अपने स्तर पर पट्टा बहियां तीन परत में छपवाएगी। सभी पट्टों पर पुस्तक संख्या व क्रम संख्या होगी। पट्टे की पहली परत आवंटी को, दूसरी परत पंचायत कार्यालय में तथा तीसरी परत पंचायत समिति को रिकॉर्ड हेतु भेजी जाएगी।
अनुपालन एवं निर्देश
समस्त संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया जाता है कि राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 168 में वर्णित प्रावधानों की पालना कड़ाई से अमल में लाई जाए। उक्त परिपत्र की अवहेलना किए जाने वाले संबंधित विकास अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
विकसित भारत संकल्प यात्रा के सफल क्रियान्वयन एवं वित्तीय प्रावधान के संबंध में दिशा-निर्देश
विकसित भारत संकल्प यात्रा का सफल क्रियान्वयन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा विकसित भारत संकल्प यात्रा के सफल क्रियान्वयन के संबंध में दिनांक 22-12-2023 को आदेश जारी किया गया है।
मुख्य उद्देश्य एवं विशेषताएँ
भारत सरकार द्वारा संचालित विभिन्न फ्लेगशिप योजनाओं की जानकारी आमजन तक पहुँचाने, पात्र व्यक्तियों को लाभान्वित करने और योजनाओं के निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने के उद्देश्य से यह यात्रा राजस्थान के सभी जिलों की प्रत्येक ग्राम पंचायत तथा 10 हजार से अधिक आबादी के शहरी स्थानीय निकायों में 26 जनवरी 2024 तक जारी रहेगी। यात्रा की प्रमुख विशेषताओं में:
पहुँच से छूटे लोगों तक पहुँचना
प्रसार और जागरूकता बढ़ाना
संभावित लाभार्थियों का नामाकन एवं विशेष कैंपों का आयोजन
प्रत्येक ग्राम पंचायत में मोबिलाइजेशन, सांस्कृतिक प्रदर्शन एवं सूचना तकनीक का उपयोग
वित्तीय प्रावधान एवं व्यय सीमा
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के आदेश क्रमांक एफ 165(07)पाइफो/एसएफसी/षष्टम/दिशा निर्देश/2021-22/100 दिनांक 25-01-2022 के अनुसार पंचायती राज संस्थाओं में शिविरों/अभियानों के लिए व्यय सीमा निर्धारित है। विकसित भारत संकल्प यात्रा के सफल क्रियान्वयन हेतु:
प्रति जिला परिषद: रु. 0.50 लाख तक का व्यय
प्रति ग्राम पंचायत: रु. 0.20 लाख तक का व्यय
संबंधित जिला परिषद एवं ग्राम पंचायतें यह व्यय षष्ठम राज्य वित्त आयोग की उपलब्ध अवशेष राशि से करना सुनिश्चित करें तथा इस कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान करें।
स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
स्वामित्व योजना क्रियान्वयन निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन के संबंध में समस्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद, राजस्थान को महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
सम्पत्ति दस्तावेज तैयार करना: स्वामित्व योजनांतर्गत भू-खण्ड धारकों का सम्पत्ति दस्तावेज (टाईटल डॉक्यूमेंट) तैयार करते समय पंचायती राज नियम 1996 के अध्याय 9 में वर्णित स्थावर सम्पत्तियों से संबंधित प्रावधान अनुरूप पुराने गृहों का विनियमितीकरण, भूमियों का कमजोर वर्गों को आवंटन, भूमियों का रियायती कीमत पर आवंटन, सरकारी संस्थाओं को आबाद भूमि का आवंटन एवं नीलामी से संबंधित नियमों में वर्णित प्रावधान अनुरूप ही नियमानुसार कार्यवाही की जानी है।
भौतिक सर्वेक्षण एवं पट्टा निर्माण: भौतिक सर्वेक्षण उपरांत भारतीय सर्वेक्षण विभाग से मैप-2 प्राप्त होने पर राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 के प्रावधानों के तहत पट्टा निर्माण की कार्यवाही की जावे। साथ ही यह भी सुनिश्चित कर लिया जावे कि पूर्व में जारी पट्टे एवं वर्तमान कब्जे के आधार पर क्षेत्रफल कम या अधिक होने की स्थिति में, पट्टे में नियमानुसार संशोधन कर लेवें तथा यह भी सुनिश्चित किया जावे कि पंचायती राज संस्थाओं को किसी भी प्रकार की राजस्व हानि न हो।
सभी जिलों में इन निर्देशों का अध्ययन कर योजना के सफल क्रियान्वयन हेतु आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
राजस्थान पंचायती राज संस्थाओं के जनप्रतिनिधियों के मानदेय और बैठक भत्तों में संशोधन (अधिसूचना 21-02-2023)
पंचायती राज जनप्रतिनिधियों के मानदेय और बैठक भत्तों में वृद्धि
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 21-02-2023 की अधिसूचना (क्रमांक: एफ.951(19)(41)प्राविवि/लेखा/नि.आ./बजट घोषणा/2022-23/210) के माध्यम से पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित सदस्यों व जनप्रतिनिधियों के मानदेय एवं बैठक भत्तों की दरों में संशोधन किया गया है। यह आदेश माननीय मुख्यमंत्री महोदय द्वारा 10.02.2023 को की गई बजट घोषणा के बिंदु संख्या 162 के क्रम में जारी किया गया है।
मानदेय की संशोधित दरें (प्रति माह):
जिला प्रमुख, जिला परिषद: वर्तमान 12,000/- रुपये से बढ़कर 13,800/- रुपये प्रति माह।
प्रधान, पंचायत समिति: वर्तमान 8,400/- रुपये से बढ़कर 9,660/- रुपये प्रति माह।
सरपंच, ग्राम पंचायत: वर्तमान 4,800/- रुपये से बढ़कर 5,520/- रुपये प्रति माह।
बैठक भत्तों की संशोधित दरें (प्रति बैठक):
सदस्य, जिला परिषद: वर्तमान 600/- रुपये से बढ़कर 690/- रुपये प्रति बैठक।
सदस्य, पंचायत समिति: वर्तमान 420/- रुपये से बढ़कर 483/- रुपये प्रति बैठक।
सदस्य, ग्राम पंचायत: वर्तमान 240/- रुपये से बढ़कर 276/- रुपये प्रति बैठक।
मुख्य बिंदु:
जनप्रतिनिधियों को देय मानदेय एवं बैठक भत्तों का भुगतान राज्य वित्त आयोग के तहत मिलने वाली अनुदान राशि से किया जाएगा। यह आदेश दिनांक 01.04.2023 से लागू होगा। यह अधिसूचना वित्त (व्यय-5) विभाग की आईडी संख्या 332300155 दिनांक 17.02.2023 से प्राप्त सहमति के अनुसरण में जारी की गई है।
पंचायती राज संस्थाओं के स्वामित्व वाले सरकारी जर्जर भवनों को ध्वस्त करने के संबंध में दिशानिर्देश
पंचायती राज संस्थाओं के जर्जर भवनों को ध्वस्त करने के संबंध में दिशानिर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा क्रमांक एफ 4 (1054) परावि/पीसी/पालडी एम/जर्जर सम्पत्ति भवन/2022/294 दिनांक 14/02/2023 के तहत पंचायती राज संस्थाओं के स्वामित्व वाले जीर्णशीर्ण, अनुपयोगी एवं असुरक्षित भवनों को ध्वस्त करने के संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
पूर्व निर्देश का संदर्भ: विभागीय पत्र क्रमांक 618 दिनांक 13.04.2012 के द्वारा पूर्व में निर्देश जारी किए गए थे, जिन्हें इस आदेश द्वारा अतिक्रमित किया गया है।
निरीक्षण दल का पुनर्गठन: पंचायती राज संस्थाओं के स्वामित्व वाले जीर्णशीर्ण/अनुपयोगी एवं असुरक्षित भवनों को ध्वस्त करने के लिए गठित निरीक्षण दल का पुनर्गठन इस प्रकार किया गया है: 1. अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद 2. संबंधित अधीक्षण अभियंता / अधिशाषी अभियंता पी.डब्ल्यू.डी., जिला परिषद 3. अधिशाषी अभियंता (सिविल), जिला परिषद 4. लेखाधिकारी, जिला परिषद
अनुमति प्रक्रिया: उक्त समिति की रिपोर्ट के आधार पर जिला कलेक्टर पंचायतीराज राज संस्थाओं के स्वामित्व वाले भवन गिराने की अनुमति/आदेश प्रदान करेंगे। अनुमति/आदेश जारी होने के उपरांत ही जीर्णशीर्ण/अनुपयोगी एवं असुरक्षित भवन को ध्वस्त करने की कार्यवाही की जाएगी।
ग्राम विकास अधिकारियों की राज्यस्तरीय अंतिम वरिष्ठता सूची (01 अप्रैल, 2020 की स्थिति)
ग्राम विकास अधिकारियों की राज्यस्तरीय अंतिम वरिष्ठता सूची जारी
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 23/01/2023 को आदेश क्रमांक एफ.28(67)पंरावि/प्रशा.2/ग्राविवो/वरि० सूची/2022/313 जारी किया गया है। यह आदेश विभागीय आदेश क्रमांक 4573 दिनांक 16.12.2022 के क्रम में ग्राम विकास अधिकारियों की 01 अप्रैल, 2020 की स्थिति के अनुसार राज्यस्तरीय अस्थायी वरिष्ठता सूची पर जिला परिषदों से प्राप्त आपत्तियों के निस्तारण के पश्चात प्रकाशित की गई है।
मुख्य बिंदु:
पद का नाम: ग्राम विकास अधिकारी
स्थिति की तिथि: 01 अप्रैल, 2020
क्षेत्र: टीएसपी (TSP) एवं नॉन टीएसपी (Non-TSP) क्षेत्र
संबंधित ग्राम विकास अधिकारी एवं पंचायत समितियां इस सूची को आधिकारिक पोर्टल से देख सकते हैं।
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 के अंतर्गत पुराने गृहों के वि नियमितीकरण एवं पट्टा जारी करने के संबंध में दिशा-निर्देश
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश (क्रमांक: एफ.4(1) दिशा-निर्देश/विधि/पंव/2023/04, दिनांक: 11.1.23) के अनुसार राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157-पुराने गृहों के विनिियमितीकरण के अंतर्गत 300 वर्गगज एवं उससे अधिक क्षेत्रफल के भूखंड का पट्टा जारी करने के संबंध में निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
नियम संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 का नियम 157 (पुराने गृहों का विनिियमितीकरण)।
क्षेत्रफल: 300 वर्गगज संनिर्मित क्षेत्रफल से अधिक भूमि जो आवासीय परिसर के साथ उपयोग में आ रही खाली आबादी भूमि का पट्टा नियम 157(1)(ii), उपयुक्त खण्ड (i) में विनिर्दिष्ट क्षेत्रफल से अधिक क्षेत्रफल के लिए है।
शर्ते एवं प्रक्रिया: ऐसे अधिक क्षेत्रफल पर राजस्थान स्टाम्प नियम, 2004 के नियम 58 के खण्ड (ख) के अधीन गठित जिला स्तरीय समिति द्वारा सिफारिश की गई नई बाजार दरों का 25 प्रतिशत राशि जमा करके भूखंडधारी के उपयोग में आ रही कब्जा शुदा (संपूर्ण) आबादी भूमि का पट्टा जारी किया जा सकता है।
नियम 157 के तहत 300 वर्ग गज से अधिक भूमि की बाजार दर की 25 प्रतिशत राशी लेने के सम्बन्ध में
नियम 157 के तहत 300 वर्ग गज से अधिक भूमि की बाजार दर की 25 प्रतिशत राशी लेने के सम्बन्ध में
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 के अंतर्गत पुराने गृहों के वि नियमितीकरण और पट्टा जारी करने बाबत
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 के संबंध में निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी पत्र क्रमांक एफ.4(1)दिशा-निर्देश/विधि/पंव/2023/04 दिनांक 11.1.2023 के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 (पुराने गृहों के विियमितीकरण) के अंतर्गत 300 वर्गगज एवं उससे अधिक क्षेत्रफल के भूखंड का पट्टा जारी करने के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
विषय: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157-पुराने गृहों के विियमितीकरण के संबंध में।
क्षेत्रफल: 300 वर्गगज संनिर्मित क्षेत्रफल से अधिक भूमि जो आवासीय परिसर के साथ उपयोग में आ रही खाली आबादी भूमि का पट्टा नियम 157(1)(ii), उपयुक्त खण्ड (i) में विनिर्दिष्ट क्षेत्र से अधिक क्षेत्रफल के लिए है।
शर्तें एवं प्रक्रिया: ऐसे अधिक क्षेत्रफल पर राजस्थान स्टाम्प नियम, 2004 के नियम 58 के खण्ड (ख) के अधीन गठित जिला स्तरीय समिति द्वारा सिफारिश की गई नई बाजार दरों का 25 प्रतिशत राशि जमा करके भूखंडधारी के उपयोग में आ रही कब्जा शुदा (संपूर्ण) आबादी भूमि का पट्टा जारी किया जा सकता है।
यह आदेश समस्त जिलों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद को आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रेषित किया गया है।
पंचायत समिति एवं ग्राम पंचायत के स्वामित्व वाली भूमियों की सूचना भेजने बाबत निर्देश
पंचायत समिति एवं ग्राम पंचायत के स्वामित्व वाली भूमियों की सूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी पत्र क्रमांक एफ.4(14)लैण्ड बैंक/विधि/पंव्रा/2022/720 दिनांक 09/06/2022 के माध्यम से सभी मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद (राजस्थान) को पंचायत समिति एवं ग्राम पंचायत के स्वामित्व वाली भूमियों की सूचना भेजने के संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य उद्देश्य एवं पृष्ठभूमि
माननीय मंत्री महोदय, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज द्वारा दिनांक 15.3.2022 को राज्य विधानसभा में चर्चा के दौरान यह घोषणा की गई थी कि ग्राम पंचायतों की भूमि का रिकॉर्ड संधारित कर लैण्ड बैंक बनाया जाएगा, जिससे पंचायतों की निजी आय में वृद्धि हो सके।
समयबद्ध कार्यवाही हेतु निर्देश
15 दिवस की अवधि: समस्त विकास अधिकारीगण अपने कार्यालय के जिम्मेदार अधिकारी/कार्मिक को पाबंद करें तथा स्वयं क्षेत्र के राजस्व अधिकारियों (तहसीलदार, पटवारी आदि) के कार्यालय से संपर्क कर पंचायत समिति/ग्राम पंचायत के स्वामित्व की भूमि (चाहे वह आ आबादी किस्म की हो अथवा कृषि या अन्य किस्म की) का संपूर्ण विवरण प्राप्त कर जमाबंदी की प्रति प्राप्त करें। यह कार्य अधिकतम 15 दिवस में पूर्ण कराया जाए।
7 दिवस की अवधि: राजस्व रिकॉर्ड से सूचना प्राप्त होने के पश्चात संलग्न प्रपत्र में पंचायतवार/पंचायत समितिवार सूचना अधिकतम 07 दिवस में आवश्यक रूप से भरवाई जाए।
कुल समयसीमा: इस प्रकार वांछित प्रपत्र हर हाल में अधिकतम 21 दिवस की अवधि में पंचायती राज विभाग को भिजवाया जाना सुनिश्चित किया जाए।
कृषि भूमि के आवासीय संपरिवर्तन और पट्टा जारी करने के संबंध में मार्गदर्शन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग का महत्वपूर्ण मार्गदर्शन
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज) द्वारा कृषि भूमि के आवासीय संपरिवर्तन और पट्टा जारी करने के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
क्रमांक एवं दिनांक: क्रमांक एफ.139 (22) मार्गदर्शन/पाली/विधि/परां/2022/4-13, दिनांक 13/4/2022 (जिला कलेक्टर, पाली को संबोधित)।
विषय: ग्राम पंचायत रायपुर, पं.स. रायपुर जिला पाली में तहसीलदार द्वारा खातेदारी भूमि का आवासीय संपरिवर्तन (कृषि भूमि से अकृषि) के पश्चात उस भूमि के पंचायत क्षेत्र के क्षेत्राधिकार में आने या नहीं आने के संबंध में मार्गदर्शन।
प्रमुख स्पष्टीकरण: कृषि भूमि का आवासीय संपरिवर्तन करने के पश्चात वह भूमि संबंधित खातेदार / अन्तरिती के नाम पर ही दर्ज रहती है, इसलिए यह ग्राम पंचायत की आबादी में नहीं मानी जा सकती है।
ग्राम पंचायत का क्षेत्राधिकार: ग्राम पंचायत को ऐसी भूमि के संबंध में पट्टा जारी करने या अन्य कोई कार्यवाही करने की अधिकारिता नहीं है। ऐसी भूमि पर विकास कार्य संपरिवर्तन आदेश के अनुसार ही करवाए जा सकते हैं।
अन्य संबंधित आदेश: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के क्रमांक एफ.139 ()पराविवि/कृषि भू.पट्टा/अलवर/2016/368 दिनांक 02-06-2016 के अनुसार राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में ग्राम पंचायतों को पंचायत क्षेत्र में स्थित आबादी भूमि का ही पट्टा दिये जाने के प्रावधान हैं। निजी खातेदारों में परिवर्तित आबादी भूमि का पट्टा दिये जाने के प्रावधान नहीं हैं। ऐसे प्रकरणों में राजस्व विभाग द्वारा ही कार्यवाही की जाती है।
राजस्थान पंचायती राज संस्थाओं के जनप्रतिनिधियों के मानदेय एवं बैठक भत्तों में संशोधन (बजट घोषणा 2022-23)
राजस्थान पंचायती राज संस्थाओं के जनप्रतिनिधियों का मानदेय और बैठक भत्ता संशोधित
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक एफ.951(19)(41)परावि/लेखा/नि.आ./बजट घोषणा/2022-23/623, दिनांक 07.04.2022 के अनुसार, माननीय मुख्यमंत्री की बजट घोषणा वर्ष 2022-23 के तहत पंचायती राज संस्थाओं के जनप्रतिनिधियों के मानदेय एवं बैठक भत्तों की दरों में संशोधन किया गया है। यह आदेश 01.04.2022 से लागू होगा।
मानदेय की संशोधित दरें (प्रतिमाह)
जिला प्रमुख, जिला परिषद: वर्तमान 10,000/- रुपये से बढ़ाकर 12,000/- रुपये
प्रधान, पंचायत समिति: वर्तमान 7,000/- रुपये से बढ़ाकर 8,400/- रुपये
सरपंच, ग्राम पंचायत: वर्तमान 4,000/- रुपये से बढ़ाकर 4,800/- रुपये
बैठक भत्तों की संशोधित दरें
सदस्य, जिला परिषद: वर्तमान 500/- रुपये से बढ़ाकर 600/- रुपये
सदस्य, पंचायत समिति: वर्तमान 350/- रुपये से बढ़ाकर 420/- रुपये
सदस्य, ग्राम पंचायत: वर्तमान 200/- रुपये से बढ़ाकर 240/- रुपये
विशेष निर्देश: जनप्रतिनिधियों को देय मानदेय एवं बैठक भत्तों का भुगतान राज्य वित्त आयोग के तहत मिलने वाली अनुदान राशि से किया जाएगा। यह अधिसूचना वित्त (व्यय-5) विभाग की आई.डी. संख्या 332200190 दिनांक 23.03.2022 से प्राप्त सहमति के अनुसरण में जारी की गई है।
ग्राम पंचायतों/पंचायत समितियों द्वारा पट्टा बही का संधारण किए जाने बाबत् परिपत्र
पट्टा बही के संधारण के संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा दिनांक 30/03/2022 को एक परिपत्र जारी किया गया है जिसका क्रमांक क्र.एफ.139(06)निर्देश/विधि/पंवरे/2022/327 है।
इस परिपत्र का मुख्य उद्देश्य ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों द्वारा पट्टा बही का उचित संधारण सुनिश्चित करना है।
मुख्य बिंदु:
विभाग के ध्यान में लाया गया था कि कतिपय पंचायत समिति स्तर पर ग्राम पंचायतों द्वारा जारी पट्टों का रिकॉर्ड संधारित नहीं किया जा रहा है, जिससे भ्रष्टाचार संबंधी प्रकरण प्राप्त हो रहे हैं।
राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1996 के नियम 168 के तहत नीलामी, परक्रामण या आवंटन द्वारा किए गए समस्त विक्रयों, जिनके लिए पट्टे जारी किए जाएं, अभिलेख पंचायत द्वारा प्ररूप 24 में पट्टा बही में रखे जाने का प्रावधान है।
समस्त विकास अधिकारियों, पंचायत समिति (राजस्थान) को निर्देशित किया गया है कि राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1996 के नियम 168 में वर्णित प्रावधानों की पालना कढ़ाई से अमल में लाई जाए।
उक्त परिपत्र की अवहेलना किए जाने वाले संबंधित विकास अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग राजस्थान सरकार - शासकीय भवन परिसरों में विकास कार्यों के संबंध में आदेश
राजकीय भवन परिसरों में निर्माण कार्यों के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा क्रमांक एफ 27(252)/ग्राविवि/ग्रुप-5/SOP/पार्ट-3/2021-22 दिनांक 22 मार्च, 2022 के माध्यम से एक कार्यालय आदेश जारी किया गया है।
इस आदेश का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण विकास विभाग एवं पंचायती राज विभाग की योजनाओं के अंतर्गत शासकीय भवन परिसरों (जैसे- विद्यालय, चिकित्सालय, आंगनबाड़ी केन्द्र, किसान सेवा केन्द्र, पशु चिकित्सालय आदि) में किए जाने वाले कार्यों में आने वाली बाधाओं का समाधान करना है।
मुख्य बिंदु:
समस्या: शासकीय भवन परिसरों के नाम भूमि का पट्टा जारी न होने के कारण प्रशासनिक, तकनीकी या वित्तीय स्वीकृतियां लंबे समय तक लंबित रहती हैं, जिससे निर्माण कार्य विलंबित और प्रभावित होते हैं।
समाधान: जहाँ कार्यस्थल में राजकीय भवन परिसर होना सुनिश्चित हो, वहाँ यदि राजकीय भवन परिसर के नाम भूमि का पट्टा न हो, तो उस संस्था के प्रधान या कार्यालयाध्यक्ष की सहमति/अनापत्ति के अनुरूप निर्माण कार्य कराया जा सकता है।
ग्राम पंचायतों की भूमिका: इस संबंध में ग्राम पंचायतें भी संबंधित संस्था प्रधान की सहमति से विकास कार्य की स्वीकृति जारी कर सकेंगी।
यह आदेश प्रमुख शासन सचिव अपर्णा अरोरा द्वारा जारी किया गया है तथा इसकी प्रतिलिपि सूचनाथ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु विभिन्न संबंधित अधिकारियों को प्रेषित की गई है।
शिकायत या परिवाद के साथ 50 रुपये के नॉन ज्यूडिशियल स्टाम्प पर शपथ पत्र प्रस्तुत करने बाबत आदेश
परिवाद एवं शिकायतों के संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज) द्वारा आदेश क्रमांक एफ 17(ई)पसवि/प्र.2/संस्था/परिपत्र/2014/461, दिनांक 02/03/2022 जारी किया गया है।
इस आदेश के अनुसार, किसी भी परिवाद अथवा शिकायत की जांच करने से पूर्व यह अनिवार्य किया गया है कि परिवाद के साथ परिवाद के सत्य होने व आवेदक के परिचय बाबत 50 रुपये के नॉन ज्यूडिशियल स्टाम्प पर शपथग्रहिता से सत्यापित शपथ पत्र संलग्न किया जाए।
मुख्य बिंदु:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
दिनांक: 02/03/2022
आदेश क्रमांक: एफ 17(ई)पसवि/प्र.2/संस्था/परिपत्र/2014/461
नियम: परिवाद या शिकायत की जांच से पहले 50 रुपये के नॉन ज्यूडिशियल स्टाम्प पर शपथ पत्र संलग्न करना अनिवार्य है।
उद्देश्य: कार्यालयों में अनावश्यक शिकायतों को प्राप्त होने से रोकना और निर्धारित प्रक्रिया का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करना।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग - कार्य सम्पादन हेतु स्थायी आदेश
कार्य सम्पादन हेतु स्थायी आदेश
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज) द्वारा क्रमांक एफ.17(ई)ग्राविप/प्र.2/संस्था/2009/04, दिनांक 03.01.2022 के तहत नया स्थायी आदेश जारी किया गया है। यह आदेश राजस्थान कार्यपद्धति नियमों के नियम 21 के अंतर्गत पूर्व में जारी स्थायी आदेश (दिनांक 04.01.2017) को अतिक्रमित करते हुए जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
कार्यों का निष्पादन: इस आदेश की अनुसूची में पंचायती राज विभाग से संबंधित कार्यों का विवरण दिया गया है और यह निर्धारित किया गया है कि कौन सा कार्य किस अधिकारी, निदेशक/आयुक्त, शासन सचिव (पं.राज), प्रमुख शासन सचिव (ग्रा.वि. एवं पं.राज), राज्यमंत्री या मंत्री के स्तर पर निपटाया जाएगा।
अनुसूची के कार्य: इसमें नीति निर्धारण, नीतिगत परिवर्तन, वार्षिक व पंचवर्षीय योजना, मंत्रीमंडल ज्ञापन, नियम एवं अधिनियमों का संशोधन, ग्राम सभा एवं मीटिंग, पंचायत संस्थाओं की स्थापना, आरक्षण, कार्यकाल, निलंबन, वित्तीय बजट, लेखा और संपरीक्षा, कर्मचारियों के स्थानांतरण, विधानसभा प्रश्न, पंचायती राज संस्थाओं का विघटन और अन्य कई प्रशासनिक एवं विधिक कार्य शामिल हैं।
विशेष निर्देश:
मंत्री की अनुपस्थिति में मामलों को मुख्यालय पर निपटाने और बाद में मंत्री के ध्यान में लाने के संबंध में निर्देश दिए गए हैं।
शासन सचिव / प्रमुख शासन सचिव (ग्रा.वि. एवं पं.राज) की अनुपस्थिति में निदेशक/आयुक्त मामलों को निपटा सकते हैं।
वित्तीय निहितार्थ (Financial Implications) वाले प्रकरणों तथा 50 लाख रुपये या उससे अधिक की निविदा से संबंधित पत्रावलियां वित्तीय सलाहकार के माध्यम से प्रस्तुत की जाएंगी।
राजमार्ग एवं अन्य सड़कों के मध्य बिंदु से छोड़ी जाने वाली भूमि के संबंध में।
विषयः- राजस्थान भू-राजस्व (ग्रामीण क्षेत्र में कृषि भूमि का अकृषि प्रयोजन हेतु संपरिवर्तन) नियम, 2007 के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अन्य सड़कों के मध्य बिंदु से छोड़ी जाने वाली भूमि के संबंध में।
राजस्थान भू-राजस्व (ग्रामीण क्षेत्र में कृषि भूमि का अकृषि प्रयोजन हेतु संपरिवर्तन) नियम, 2007 के नियम 4 उन श्रेणियों की भूमियों का अंकन है, जिसका संपरिवर्तन अनुज्ञात नहीं किया जा सकता है। उक्त नियमों के नियम (ख) में यह प्रावधान है किः-
"किसी भी रेल लाईन, राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य मार्ग या केन्द्रीय या राज्य सरकार द्वारा इस निमित्त बनाये गये किसी भी अधिनियम या नियमों में विनिर्दिष्ट हो, की सीमाओं के भीतर या उद्योग स्थापित करने के लिए, भारतीय सड़क कांग्रेस के मार्गदर्शनों में राष्ट्रीय राज मार्ग / राज्य राज मार्ग / मुख्य जिला सड़क / अन्य जिला सड़क / ग्रामीण सड़को के मध्य बिन्दु से, विनिर्दिष्ट सीमा, जो दीर्घती हो, के भीतर आने वाली भूमि"
उक्त प्रावधानानुसार इण्डियन रोड़ कांग्रेस के नोर्म्स अनुसार सड़क के मध्य बिंदु से भूमि छोड़कर संपरिवर्तन किये जाने के प्रावधान है। इस संबंध में इण्डियन रोड़ कांग्रेस के प्रावधानानुसार किस श्रेणी की सड़क के मध्य से कितनी भूमि छोड़कर संपरिवर्तन किया जा सकता है, के संबंध में समय-समय पर विभाग से मार्गदर्शन अपेक्षित किया जाता है। इस संबंध में यह स्पष्ट किया जाता है कि राजस्थान भू-राजस्व (ग्रामीण क्षेत्र में कृषि भूमि का अकृषि प्रयोजन हेतु संपरिवर्तन) नियम, 2007 के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग / राज्य राजमार्ग / मेजर डिस्ट्रिक्ट रोड़ / अन्य डिस्ट्रिक्ट रोड़ / ग्रामीण सड़को पर स्थित कृषि भूमियों का संपरिवर्तन केन्द्र बिन्दु से निम्नानुसार दूरी छोड़कर किया जावेंः-
क्र.स.
सड़क श्रेणी
केन्द्र बिन्दु से बिल्डिंग लाईन की दूरी जिसके भीतर आने वाली भूमि संपरिवर्तन योग्य नही है।
केन्द्र बिंदु से कन्ट्रोल लाईन की दूरी जहां तक भवन निर्माण संक्रियाओं को नियंत्रित किया जाता है।
1
राष्ट्रीय / राज्य राजमार्ग
40 मीटर
75 मीटर
2
एम.डी.आर.
25 मीटर
50 मीटर
3
ओ.डी.आर.
15 मीटर
17.5 मीटर
4
ग्रामीण सड़क
12.5 मीटर
15 मीटर
राष्ट्रीय राजमार्ग / राज्य राजमार्ग / मेजर डिस्ट्रिक्ट रोड़ / अन्य डिस्ट्रिक्ट रोड़ / ग्रामीण सड़कों पर कन्ट्रोल लाईन (ऊपर वर्णित अनुसार) तक भवन निर्माण संक्रियाओं को नियंत्रित किया जाना आवश्यक है।
अतः केन्द्र बिन्दु से बिल्डिंग लाईन एवं कन्ट्रोल लाईन के भीतर निर्माण संक्रियाए उक्त सड़कों के लिये सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति के बिना नहीं करने हेतु संपरिवर्तन आदेश में शर्त अंकित की जावें।
उक्त परिपत्र, समय-समय पर इण्डियन रोड़ कांग्रेस द्वारा जारी नोर्म्स के अध्यधीन रहेगा।
प्रशासन गांवों के संग अभियान-2021 की अवधि बढ़ाने बाबत अधिसूचना
प्रशासन गांवों के संग अभियान-2021 की अवधि विस्तार
राजस्थान सरकार राजस्व (ग्रुप-6) विभाग द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक प.3(17)राज-6/2021/143, दिनांक 15/12/2021 के अनुसार 'प्रशासन गांवों के संग अभियान-2021' की अवधि में संशोधन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
संशोधित अवधि: उक्त अभियान अब दिनांक 02.10.2021 से 28.02.2022 तक के लिये प्रभावशाली रहेगा।
पूर्व अवधि: अधिसूचना में उल्लेखित पहले की अवधि (दिनांक 02.10.2021 से 17.12.2021) के स्थान पर अब इसे आगे बढ़ाया गया है।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से महावीर प्रसाद मीना, संयुक्त शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है तथा इसकी प्रतिलिपि विभिन्न संबंधित विभागों एवं अधिकारियों को सूचनाथ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित की गई है।
33 केवी जी.एस.एस. बागावास अहिरान हेतु भूमि आवंटन के संबंध में परिपत्र
भूमि आवंटन के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज) द्वारा 33 केवी जी.एस.एस. बागावास अहिरान हेतु भूमि आवंटन के संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं।
राजस्थान पंचायती राज विभाग 1996 के नियम 162(2) के प्रावधानों के अनुसार सरकारी संस्थाओं को ही निःशुल्क भूमि आवंटन किये जाने का प्रावधान है।
विद्युत वितरण निगम लिमिटेड इस श्रेणी में नहीं आता है।
यदि इस निगम को जी.एस.एस. हेतु पंचायत की उक्त आबादी भूमि की आवश्यकता है, तो वांछित भूमि संबंधित ग्राम पंचायत से नियमानुसार क्रय कर सकता है।
यह सक्षम स्तर से अनुमोदित है।
प्रशासन गांवों के संग अभियान-2021 के दौरान जारी पट्टों के संबंध में मार्गदर्शन
प्रशासन गांवों के संग अभियान-2021 दिशा-निर्देश
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा पट्टों के संबंध में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन जारी किया गया है। यह पत्र क्रमांक एफ.4(13)मार्गदर्शन/विधि/पंवरा/2021/960 दिनांक 30.11.2021 को जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
विषय: प्रशासन गांवों के संग अभियान-2021 के दौरान जारी किये जाने वाले पट्टों के संबंध में मार्गदर्शन।
निर्देश: पट्टों के हस्तांतरण एवं नामांतरण के संबंध में स्पष्ट किया गया है कि हस्तांतरण एवं नामांतरण के प्रकरणों में नया पट्टा जारी नहीं किया जाकर, अन्तरण की प्रविष्टि मूल पट्टे पर अंकित कर कार्यवाही की जा सकती है।
अधिकारी: यह आदेश (पी.सी. किशन) शासन सचिव, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा जारी किया गया है।
राजस्थान लोक उपापन में पारदर्शिता नियम, 2013 के नियम 16 के अंतर्गत 6.00 लाख रुपये से अधिक लागत के कार्यों हेतु सामग्री उपापन के संबंध में मार्गदर्शन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग का महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा क्रमांक एफ 27(263)ग्रावि/ग्रुप-5/जीकेण/उपापन 2015-18, जयपुर, दिनांक 29 नवम्बर 2021 के तहत राजस्थान लोक उपापन में पारदर्शिता अधिनियम, 2012 एवं राजस्थान लोक उपापन में पारदर्शिता नियम, 2013 के नियम 16 के प्रावधानों के अंतर्गत महात्मा गांधी नरेगा योजना सहित निर्माण कार्य हेतु आनुषंगिक सामग्री के उपापन के संबंध में विस्तृत मार्गदर्शन जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु एवं निर्देश
नियम संशोधन: राजस्थान राजपत्र विशेषांक में जारी अधिसूचना दिनांक 1 अक्टूबर, 2021 (G.S.R. 349) के अनुसार राजस्थान लोक उपापन में पारदर्शिता नियम, 2013 के नियम 16 के उप-नियम (1) के परन्तुक में 'पांच लाख' के स्थान पर 'छः लाख' तथा 'पचास लाख' के स्थान पर 'साठ लाख' प्रतिस्थापित किया गया है।
6.00 लाख रुपये से अधिक के कार्य: महात्मा गांधी नरेगा को छोड़कर ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा क्रियान्वित योजनाओं के अंतर्गत स्वीकृत 6.00 लाख रुपये से अधिक लागत के समस्त कार्य राजस्थान लोक उपापन में पारदर्शिता नियम, 2013 की पालना कर संपूर्ण कार्य (श्रम एवं सामग्री सहित) संकर्म निविदा (वर्क्स टेंडर) द्वारा संपादित कराए जाएंगे।
सामग्री उपापन सीमा: पंचायती राज संस्थाएं सीमित निविदा के माध्यम से अधिकतम सीमा राशि रु. 60.00 लाख तक की सामग्री का उपापन कर सकती हैं।
कार्य समिति की जिम्मेदारी: पंचायती राज संस्था द्वारा एक वित्तीय वर्ष में रु. 60.00 लाख तक की पालना कराने का उत्तरदायित्व संबंधित पंचायत समिति का होगा।
ई-उपापन प्रक्रिया: रु. 6.00 लाख से अधिक लागत (श्रम सामग्री सहित) के कार्यों हेतु सामग्री का क्रय/उपापन ई-उपापन (E-Procurement) प्रक्रिया को अपना कर ही संपादित किया जाएगा।
अधिक जानकारी एवं विस्तृत दिशा-निर्देशों के लिए कृपया मूल विभागीय आदेश पत्र का अवलोकन करें।
राजस्थान लोक उपापन में पारदर्शिता (RTTP) नियम 2013 के नियम 16 के अंतर्गत महात्मा नरेगा योजनांतर्गत निर्माण कार्यों हेतु आनुषंगिक सामग्री उपापन बाबत दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग का महत्वपूर्ण आदेश
यह आदेश ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रामीण विकास, अनुभाग-5), राजस्थान सरकार द्वारा क्रमांक एफ 27(263)प्रावि/युप-5/जीकेएन/उपापन 2015-18, दिनांक 29 नवम्बर 2021 को जारी किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य राजस्थान लोक उपापन में पारदर्शिता अधिनियम, 2012 एवं राजस्थान लोक उपापन में पारदर्शिता नियम, 2013 के नियम 16 के तहत महात्मा नरेगा योजनांतर्गत स्वीकृत निर्माण कार्यों हेतु आनुषंगिक सामग्री के उपापन के संबंध में मार्गदर्शन प्रदान करना है।
मुख्य दिशा-बिंदु एवं नियम:
सीमा में संशोधन: राजस्थान लोक उपापन में पारदर्शिता नियम, 2013 के नियम 16 के प्रावधानों के तहत 'सीमित बोली' प्रक्रिया के अंतर्गत वित्तीय वर्ष में सामग्री उपापन की अधिकतम सीमा को 'पाँच लाख रुपये' से बढ़ाकर 'छः लाख रुपये' (6.00 लाख रुपये) कर दिया गया है।
6.00 लाख रुपये तक के कार्य: महात्मा नरेगा योजना सहित अन्य योजनाओं के अंतर्गत रुपये 6.00 लाख तक (श्रम सामग्री सहित) की लागत के कार्यों हेतु सामग्री उपापन 'सीमित निविदा' के माध्यम से किया जा सकेगा।
6.00 लाख रुपये से अधिक के कार्य: रुपये 6.00 लाख से अधिक लागत के समस्त कार्य राजस्थान लोक उपापन में पारदर्शिता अधिनियम, 2012 एवं नियम, 2013 की पालना में अनिवार्य रूप से पूर्ण कार्य (श्रम एवं सामग्री सहित) संकर्म निविदा (वर्क्स एंड मटेरियल सप्लाई टेंडर) के माध्यम से कराए जाएंगे।
वित्तीय सीमा: पंचायती राज संस्थाओं द्वारा एक वित्तीय वर्ष में सामग्री उपापन की निर्धारित अधिकतम सीमा रु. 60.00 लाख तक की पालना करने का उत्तरदायित्व संबंधित पंचायत समिति का होगा।
ई-प्रोक्योरमेंट (E-Procurement): रुपये 6.00 लाख से अधिक लागत के कार्यों हेतु सामग्री का क्रय/उपापन 'राजस्थान लोक उपापन में पारदर्शिता अधिनियम, 2012' एवं नियमों के तहत ई-उपापन प्रक्रिया को अपनाकर ही संपादित किया जाएगा।
अधिक जानकारी के लिए कृपया विभागीय आदेश पत्र संख्या एफ 27(263)प्रावि/युप-5/जीकेएन/उपापन 2015-18 दिनांक 29 नवंबर 2021 का अवलोकन करें।
प्रशासन गांवों के संग अभियान-2021 के दौरान जारी किये जाने वाले पट्टों के संबंध में मार्गदर्शन
प्रशासन गांवों के संग अभियान-2021: पट्टों के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 26.11.2021 को आदेश क्रमांक एफ.4(13)मार्गदर्शन/विधि/पंव्रा/2021/957 जारी किया गया है। यह आदेश सभी मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद (राजस्थान) को 'प्रशासन गांवों के संग अभियान-2021' के दौरान जारी किए जाने वाले पट्टों के संबंध में मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए है।
मुख्य बिंदु:
चोरी/नष्ट/गुम हुए मूल पट्टों के संबंध में: यदि 1994 से पूर्व या राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 एवं नियम, 1996 के तहत जारी मूल पट्टा चोरी, गुम या नष्ट हो गया हो:
यदि ग्राम पंचायत के रिकॉर्ड में कार्यालय प्रति उपलब्ध है: आवेदक से FIR की प्रति, शपथ पत्र (पट्टा चोरी होने पर) या शपथ पत्र (पट्टा नष्ट/गुम होने पर) प्राप्त कर, राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के अनुसार डुप्लीकेट पट्टा जारी किया जा सकता है।
यदि ग्राम पंचायत के रिकॉर्ड में कार्यालय प्रति उपलब्ध नहीं है: FIR की प्रति, शपथ पत्र, तथा पट्टा नष्ट/गुम होने पर आवेदक का शपथ पत्र लेकर स्थानीय समाचार पत्रों में आपत्ति आमंत्रण नोटिस प्रकाशित कराया जाएगा। आपत्तियों के निस्तारण के बाद नियमानुसार नया पट्टा जारी किया जा सकता है।
मूल पट्टा प्रस्तुत किए जाने पर पुनर्विसमयकरण/विभाजन/नामान्तरण/भू-उपयोग परिवर्तन: यदि आवेदक मूल पट्टा प्रस्तुत करे और पंचायत रिकॉर्ड में कार्यालय प्रति संधारित न हो, तो आवेदक से शपथ पत्र लेकर, स्थानीय समाचार पत्रों में आपत्ति नोटिस प्रकाशित करवाकर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
आवासीय भूमि का उप-विभाजन/पुनर्गठन: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के तहत प्रारूप-52 में जारी अनुज्ञा के पश्चात संबंधित ग्राम पंचायत द्वारा आवेदक का मूल पट्टा जमा कराकर अनुज्ञा के अनुसार नया पट्टा जारी किया जाएगा।
पट्टों का पंजीयन: आवासीय पट्टों का पंजीयन प्रचलित कानूनों के तहत एक अनिवार्य विधिक प्रक्रिया है, इसमें छूट प्रदान नहीं की जा सकती।
आबादी भूमि (राजस्व रिकॉर्ड): जिन ग्राम पंचायतों में जिला कलेक्टर/उपखण्ड अधिकारी एवं तहसीलदार द्वारा आबादी हेतु कुछ खसरे दर्ज किए जा रहे हैं और उनमें पक्के मकान हैं, तो राजस्व रिकॉर्ड में ग्राम पंचायत के नाम स्वामित्व दर्ज होने पर नियममानुसार पट्टे जारी किए जा सकते हैं।
नियम-157 के तहत कार्रवाई: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के लागू होने के पश्चात की अवधि में निहित भूमि पर पात्रता रखने वाले व्यक्ति को नियम-157 के तहत प्रक्रिया पूर्ण कर पट्टा दिया जा सकता है।
राजस्थान पंचायती राज (चतुर्थ संशोधन) नियम, 2021 - प्रशासन गांवों के संग अभियान के दौरान शुल्क में छूट
राजस्थान पंचायती राज (चतुर्थ संशोधन) नियम, 2021
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा अधिसूचना दिनांक 06 अक्टूबर, 2021 जारी कर राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन किया गया है। इसके तहत 'राजस्थान पंचायती राज (चतुर्थ संशोधन) नियम, 2021' बनाए गए हैं जो तुरंत प्रभाव से लागू हो गए हैं।
प्रमुख बिंदु:
नियम 157 का संशोधन: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 के उप-नियम (1) के अंतर्गत एक नया परंतुक जोड़ा गया है।
प्रशासन गांवों के संग अभियान 2021: इस अभियान की समयावधि के दौरान खंड (i) और (ii) के अधीन विनिर्दिष्ट दरों के पचास प्रतिशत (50%) के समतुल्य दर से ही शुल्क प्रभारित किया जाएगा।
यह आदेश राज्यपाल के आदेश से डॉ. प्रेम सिंह चारण, संयुक्त शासन सचिव द्वारा [सं. एफ.139(45)पंरावि/विधि/संशो/2021/860] के अंतर्गत जारी किया गया है।
आबादी भूमि के भू-परिवर्तन, उप-विभाजन, पुनर्गठन, पुनर्रधिमान्यकरण एवं हस्तांतरण संबंधी दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की आज्ञा दिनांक 30.09.2021
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा क्रमांक एफ.4(3)निर्देश/पट्टा/विधि/पंवै/2020/849 दिनांक 30.9.2021 के माध्यम से ग्राम पंचायतों की आबादी भूमि के आवासीय से अन्य उपयोग में भू-परिवर्तन, भू-खंडों के उप-विभाजन, पुनर्गठन, पट्टों के पुनर्रधिमान्यकरण (Revalidation) तथा हस्तांतरण/नामांतरण (Mutation) के संबंध में विस्तृत प्रक्रिया और दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
आवासीय भूमि का वाणिज्यिक एवं अन्य प्रयोजनार्थ भू-उपयोग संपरिवर्तन: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 173-क से 173-ज के अंतर्गत विभिन्न प्रयोजनों (वाणिज्यिक, औद्योगिक, लोक उपयोग, संस्थागत, चिकित्सा सुविधा, सौर या पवन ऊर्जा संयंत्र) के लिए संपरिवर्तन शुल्क और प्रक्रिया निर्धारित की गई है।
आपत्तियां आमंत्रित करना व नोटिस: भूमि उपयोग परिवर्तन के आवेदन पर आसपास के क्षेत्र में नोटिस चस्पा करके, डुगडुगी बजवाकर या समाचार पत्र में प्रकाशित कर 30 दिवस के भीतर आपत्तियां आमंत्रित की जाती हैं।
भू-खंडों का उप-विभाजन एवं पुनर्गठन: नियम 173-ख के अंतर्गत भू-खंडों के उप-विभाजन या पुनर्गठन के लिए प्रारूप 51 में आवेदन करना होता है, जिसे मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद द्वारा 45 दिनों में निपटाया जाता है।
पट्टों का पुनर्रधिमान्यकरण (Revalidation): निर्धारित समय सीमा समाप्त हो चुके पट्टों के पुनर्रधिमान्यकरण हेतु नियम 157, 158, 159 एवं 162 के अधीन फीस निर्धारित की गई है।
हस्तांतरण/नामांतरण (Mutation): आबादी भूमि के पट्टों के हस्तांतरण हेतु उत्तराधिकार, वसीयतनामा, गिफ्ट डीड आदि मामलों के लिए आवश्यक दस्तावेज और शुल्क/दरें (प्रारूप 48 से 52) तय की गई हैं।
स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन बाबत महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन बाबत निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 18.01.2021 को 'स्वामित्व योजना' के क्रियान्वयन के संबंध में महत्वपूर्ण आदेश जारी किया गया है। राष्ट्रीय पंचायत दिवस (24 अप्रैल 2020) पर केंद्र सरकार द्वारा आरंभ की गई इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पंचायती राज पर इसके दूरगामी प्रभावों को देखते हुए राजस्व विभाग एवं पंचायती राज विभाग के संयुक्त प्रयासों से क्रियान्वयन करना है।
योजना की मुख्य बातें और प्रक्रिया
ड्रोन फोटोग्राफी और मैपिंग: भारतीय सर्वेक्षण विभाग (Survey of India) द्वारा प्रत्येक राजस्व ग्राम की आबादी भूमि का मानचित्र ड्रोन के जरिए फोटोग्राफी कर तैयार किया जाएगा।
चूना मार्किंग: ड्रोन उड़ान से पहले राजस्व ग्राम की आबादी भूमि की बाहरी सीमा (outer line) पर चार इंच चौड़ाई की चूना लाइन डालकर सीमा मार्क की जाएगी। खाली पड़े भूखंडों को भी चूना लाइन डालकर चिह्नित किया जाएगा।
सर्वे समिति का गठन: प्रत्येक राजस्व ग्राम हेतु सर्वे समिति का गठन किया जाएगा जिसमें ग्राम सेवक, दो वार्ड पंच (संबंधित राजस्व ग्राम व अन्य वार्ड पंच) और पंचायत का एक कार्मिक (कनिष्ठ लिपिक अथवा ग्राम रोजगार सहायक) शामिल होंगे। यह समिति प्राप्त इमेज मैप के अनुसार प्रत्येक भूखंड और निर्मित भवन का सर्वे कर निर्धारित प्रपत्र में जानकारी संकलित करेगी।
आपत्तियां एवं निस्तारण: ग्राम पंचायत द्वारा सर्वे प्रपत्र और इमेज मैप की प्रति पंचायत भवन एवं सार्वजनिक स्थल पर चस्पा की जाएगी। राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम-148 के प्रावधानुसार 07 दिवस के भीतर आपत्तियां दर्ज कराई जा सकेंगी, जिनका निस्तारण ग्राम सभा के माध्यम से किया जाएगा।
पट्टा वितरण: आपत्तियों के निराकरण के बाद फाइनल इमेज मैप (आईडी नंबरिंग सहित) के आधार पर संबंधित लाभार्थियों को राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के प्रावधानों के तहत पट्टा, रजिस्ट्री एवं पीडीएफ कॉपी मोबाइल नंबर पर उपलब्ध कराई जाएगी।
प्रथम चरण: राज्य में इस योजना का सबसे पहले क्रियान्वयन जैसलमेर जिले में किया जाना है।
राजस्थान में स्वामित्त्व योजना के क्रियान्वयन बाबत दिशा-निर्देश
स्वामित्त्व योजना का क्रियान्वयन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.4(1)स्वामित्त्व/विधि/पंश/2020/4046 दिनांक 07.09.2020 के अंतर्गत 'स्वामित्त्व योजना' के क्रियान्वयन के संबंध में विस्तृत निर्देश जारी किए गए हैं। इस पत्र के साथ भारत सरकार द्वारा जारी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) भी संलग्न किया गया है।
योजना का मुख्य उद्देश्य
ग्रामीण भारत में आबाद क्षेत्रों (Abadi Land) की ड्रोन सर्वेक्षण तकनीक से पैमाइश कर डिजिटल मानचित्र तैयार करना।
ग्रामीण परिवारों को 'प्रॉपर्टी कार्ड' (अधिकारों के अभिलेख) वितरित करना ताकि वे अपनी संपत्ति का उपयोग बैंक ऋण और अन्य वित्तीय लाभ प्राप्त करने के लिए कर सकें।
ग्राम पंचायतों में संपत्ति कर और संपत्ति रजिस्टर को अद्यतन कर कर संग्रहण प्रणाली को सुदृढ़ बनाना।
ग्रामीण संपत्ति से जुड़े आपसी विवादों और अदालतों में लम्बित मुकदमों के त्वरित निराकरण का मार्ग प्रशस्त करना।
प्रमुख प्रक्रिया एवं चरण (Standard Operating Procedure)
CORS नेटवर्क की स्थापना: पायलट चरण के तहत राजस्थान और पंजाब राज्यों में सतत प्रचलित संदर्भ स्टेशन (CORS) नेटवर्क की स्थापना।
तैयारी की गतिविधियां: कलेक्टर/सक्षम प्राधिकारी द्वारा सार्वजनिक नोटिस के माध्यम से सर्वेक्षण क्षेत्र की अधिसूचना, ग्राम सभा का आयोजन, और राजस्व विभाग एवं ग्राम पंचायत अधिकारियों द्वारा सीमाओं का चूना लाइनों से चिह्नीकरण।
ड्रोन सर्वेक्षण एवं डेटा प्रोसेसिंग: भारतीय सर्वेक्षण विभाग (Survey of India) द्वारा ड्रोन के माध्यम से हवाई तस्वीरें लेना और जीआईएस (GIS) लैब में डेटा प्रोसेसिंग कर ऑर्थो-रेक्टिफाइड इमेज (ORI) तथा लैंड पार्सल मैप्स (LPM) तैयार करना।
दावा और आपत्ति निस्तारण: ग्राम सभा, भूस्वामियों और राजस्व अधिकारियों की मदद से स्वामित्व का सत्यापन तथा प्राप्त आपत्तियों का निस्तारण।
प्रॉपर्टी कार्ड का वितरण: राजस्व विभाग द्वारा अंतिम मानचित्रों और टेक्स्ट डेटा के आधार पर ग्रामीणों को प्रॉपर्टी कार्ड जारी करना।
संबंधित विभाग एवं अधिकारी
इस योजना के क्रियान्वयन में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राज्य राजस्व विभाग, भारतीय सर्वेक्षण विभाग (Survey of India), और पंचायती राज संस्थाएं (सरपंच, पंचायत सचिव, ग्राम सेवक) संयुक्त रूप से कार्य कर रहे हैं।
नियम 167.क - पट्टा पुन्र्विधिमान्य करण हेतु मूल पट्टे पर लिखा जाने वाला आदेश
नियम 167.क - पट्टा पुन्र्विधिमान्य करण हेतु मूल पट्टे पर लिखा जाने वाला आदेश
राजस्थान पंचायती राज (दूसरा संशोधन) नियम, 2018 - आ आबादी क्षेत्र में भूमि उपयोग परिवर्तन एवं भू-खंडों के उप-विभाजन संबंधित अधिसूचना
राजस्थान पंचायती राज (दूसरा संशोधन) नियम, 2018
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 10 जुलाई, 2018 की अधिसूचना (जी.एस.आर.61) के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन करते हुए नया 'अध्याय-9क' अंतःस्थापित किया गया है। यह दस्तावेज मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी भूमि के उपयोग परिवर्तन और भू-खंडों के उप-विभाजन या पुनर्गठन से संबंधित है।
मुख्य बिंदु और विशेषताएँ:
नया अध्याय-9क: आबादी क्षेत्र में भूमि के उपयोग का परिवर्तन और भू-खंडों के उप-विभाजन/पुनर्गठन की प्रक्रिया का विस्तृत प्रावधान।
प्रारूप 48: किसी व्यक्ति द्वारा आबादी क्षेत्र में भूमि उपयोग परिवर्तन के लिए प्राधिकृत अधिकारी को आवेदन करने हेतु निर्धारित प्रारूप।
संपरिवर्तन प्रभार (Conversion Charges): गैर-आवासीय प्रयोजनों (जैसे वाणिज्यिक, औद्योगिक, संस्थागत, चिकित्सा सुविधा आदि) के लिए संपरिवर्तन प्रभार की दरें निर्धारित की गई हैं।
प्रारूप 51: गाँव के आबादी क्षेत्र में स्थित भूमि के भू-खंडों के उप-विभाजन या पुनर्गठन की अनुज्ञा प्राप्त करने के लिए आवेदन।
अभिलेख संधारण: प्रत्येक पंचायत द्वारा 'प्रारूप 53' में गाँव के पंचायत क्षेत्र के भीतर स्थित आबादी भूमि का अभिलेख (आबादी भूमि का रजिस्टर) रखा जाएगा।
यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र में दिनांक 10 जुलाई, 2018 को प्रकाशित की गई थी और इसके तहत नए प्रारूप (प्रारूप 48 से प्रारूप 53) जोड़े गए हैं ताकि ग्राम पंचायतों में भूमि उपयोग परिवर्तन और उप-विभाजन से जुड़े कार्यों का सुचारू संचालन किया जा सके।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना - भूमि रूपांतरण और प्राधिकृत अधिकारी (25 जून 2018)
अधिसूचना विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना दिनांक 25 जून 2018 (एस.ओ. 77 और एस.ओ. 78) के अंतर्गत राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम सं. 13) की धाराओं के तहत प्राधिकृत अधिकारियों और उनके क्षेत्रों का निर्धारण किया गया है।
मुख्य बिंदु
एस.ओ. 77: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 107-क की उप-धारा (3) के तहत, राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 173-क के अधीन विभिन्न प्राधिकारियों को प्रयोजन और क्षेत्रफल के अनुसार प्राधिकृत किया गया है:
संबंधित ग्राम पंचायत: 100 वर्गमीटर तक वाणिज्यिक प्रयोजन (सिनेमा, मल्टीप्लेक्स, पेट्रोल पंप को अपवर्जित करते हुए) और 300 वर्गमीटर तक लोक उपयोग प्रयोजन।
संबंधित पंचायत समिति की प्रशासनिक और स्थापन समिति: 100 वर्गमीटर से अधिक किंतु 300 वर्गमीटर तक वाणिज्यिक प्रयोजन (सिनेमा, मल्टीप्लेक्स, पेट्रोल पंप को छोड़कर), 300 वर्गमीटर से अधिक किंतु 900 वर्गमीटर तक लोक उपयोग प्रयोजन, तथा 300 वर्गमीटर तक चिकित्सा सुविधा प्रयोजन।
संबंधित जिला परिषद की प्रशासनिक और स्थापन समिति: 300 वर्गमीटर से अधिक वाणिज्यिक प्रयोजन, 900 वर्गमीटर से अधिक लोक उपयोग प्रयोजन, तथा 300 वर्गमीटर से अधिक चिकित्सा सुविधा प्रयोजन।
राज्य सरकार: किसी भी क्षेत्र के लिए सिनेमा, मल्टीप्लेक्स, पेट्रोल पंप से संबंधित वाणिज्यिक प्रयोजन, औद्योगिक क्षेत्र/औद्योगिक संपदा प्रयोजन, और सौर या वायु शक्ति संयंत्र की स्थापना।
एस.ओ. 78: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 107-ख की उप-धारा (1) के तहत, संबंधित जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (Chief Executive Officer) को राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 173-ख के अधीन प्राधिकृत अधिकारी के कृत्यों का पालन करने के लिए प्राधिकृत किया गया है।
आदेश संख्या: संख्या एफ.4(93)सीएलूंग/नोटि./लीगल/पी आर/2018/833 और संख्या एफ.4(93)सीएलूंग/नोटि./लीगल/पी आर/2018/834 जारीकर्ता: कुंजी लाल मीणा, शासन सचिव (राज्यपाल के आदेश से)
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना - भूमि रूपांतरण और प्राधिकृत अधिकारी (25 जून 2018)
अधिसूचना विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना दिनांक 25 जून 2018 (एस.ओ. 77 और एस.ओ. 78) के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 107-क एवं 107-ख के अंतर्गत विभिन्न प्राधिकृत अधिकारियों को शक्तियों का प्रत्यायोजन किया गया है।
मुख्य बिंदु
संबंधित ग्राम पंचायत: 100 वर्गमीटर तक वाणिज्यिक प्रयोजन (सिनेमा, मल्टीप्लेक्स, पेट्रोल पंप को अपवर्जित करते हुए) तथा 300 वर्गमीटर तक लोक उपयोग प्रयोजन के लिए प्राधिकृत।
संबंधित पंचायत समिति की प्रशासनिक और स्थापन समिति: 100 वर्गमीटर से अधिक किंतु 300 वर्गमीटर तक वाणिज्यिक प्रयोजन (सिनेमा, मल्टीप्लेक्स, पेट्रोल पंप को छोड़कर), 300 वर्गमीटर से अधिक किंतु 900 वर्गमीटर तक लोक उपयोग प्रयोजन, और 300 वर्गमीटर तक चिकित्सा सुविधा प्रयोजन के लिए प्राधिकृत।
संबंधित जिला परिषद की प्रशासनिक और स्थापन समिति: 300 वर्गमीटर से अधिक वाणिज्यिक प्रयोजन (सिनेमा, मल्टीप्लेक्स, पेट्रोल पंप को छोड़कर), 900 वर्गमीटर से अधिक लोक उपयोग प्रयोजन, और 300 वर्गमीटर से अधिक चिकित्सा सुविधा प्रयोजन के लिए प्राधिकृत।
राज्य सरकार: किसी भी क्षेत्र के लिए सिनेमा, मल्टीप्लेक्स, पेट्रोल पंप, औद्योगिक क्षेत्र/औद्योगिक संपदा प्रयोजन, तथा सौर या वायु शक्ति संयंत्र की स्थापना के लिए प्राधिकृत।
एस.ओ. 78 के तहत: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 107-ख की उप-धारा (1) के अंतर्गत संबंधित जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) को प्राधिकृत किया गया है।
आदेश क्रमांक: संख्या एफ.4(93)सीएल यूं/नोटि./लीगल/पीआर/2018/833 और 834 हस्ताक्षरकर्ता: कुंजी लाल मीणा, शासन सचिव, राज्यपाल के आदेश से
ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी भूमि पर बने आवास गृहों के पट्टे जारी करने के संबंध में निर्देश
ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी भूमि पर पट्टे जारी करने के संबंध में
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 25.05.2018 को क्र0एफ.(78)सिवायचक/नियमिन/विधि/परा/2017/659 के अंतर्गत सभी संभागीय आयुक्तों एवं जिला कलेक्टर्स को ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी भूमि पर बने आवास गृहों के पट्टे दिए जाने के संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
सर्वे एवं पट्टे जारी करना: ग्राम पंचायत स्तर पर ग्राम सेवक एवं पटवारी द्वारा संयुक्त सर्वे कराया जाएगा। तहसीलदार द्वारा सेटअपार्ट का प्रस्ताव तैयार कर उपखण्ड अधिकारी द्वारा सेटअपार्ट की कार्यवाही के उपरांत संबंधित ग्राम पंचायतों द्वारा पट्टे जारी किए जाएंगे।
पात्रता: वे मकान जहां रहवासी दिनांक 01.01.2017 को कम से कम 3 वर्ष अथवा इससे अधिक की अवधि से पूर्व मकान बनाकर रह रहे हैं (विधि द्वारा वर्जित/प्रतिबंधित श्रेणी, सार्वजनिक प्रयोजनार्थ भूमि एवं मास्टर प्लान में प्रभावित भूमि को छोड़कर)।
न्याय आपके द्वार अभियान 2018: राजस्व लोक अदालत अभियान (01.05.2018 से 30.06.2018) के दौरान अभियान से पूर्व एवं अभियान के दौरान दिए गए पट्टों की प्रगति ई-पंचायत पोर्टल पर ऑनलाइन भिजवाना सुनिश्चित किया जाए।
स्थायी आदेश संख्या 36/2018: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा तकनीकी अधिकारियों को वित्तीय शक्तियां प्रत्याहारित
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग - स्थायी आदेश संख्या 36/2018
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रामीण विकास, अनुभाग-5) द्वारा दिनांक 27 मार्च, 2018 को स्थायी आदेश संख्या 36/2018 जारी किया गया है। यह आदेश विभिन्न योजनाओं में सम्पादित निर्माण कार्यों के मूल्यांकन जांच एवं पूर्णता प्रमाण पत्र के संबंध में तकनीकी अधिकारियों को वित्तीय शक्तियां प्रदान करने हेतु है।
मुख्य बिंदु एवं वित्तीय शक्तियां
मूल्यांकन जांच करना:
कनिष्ठ अभियंता (JEN): 5 लाख तक
सहायक अभियंता (AEN): 15.00 लाख तक
अधिशाषी अभियंता (EE): 50.00 लाख तक
अधीक्षक अभियंता (SE): 100.00 लाख तक
अतिरिक्त मुख्य अभियंता (ACE): पूर्ण शक्तियां
पूर्णता प्रमाण पत्र:
कनिष्ठ अभियंता (JEN): मनरेगा योजना में व्यक्तिगत लाभ श्रेणी (कैटेगरी 4) के राशि रुपये 3 लाख तक की लागत के कार्य एवं अन्य विभागीय योजनाओं में (हैंडपम्प, ट्यूबवेल के कार्यों को छोड़ कर) 1 लाख तक स्वीकृत राशि के निर्माण कार्यों के पूर्णता प्रमाण-पत्र कनिष्ठ अभियंता द्वारा जारी किए जा सकेंगे।
सहायक अभियंता (AEN): 15.00 लाख तक
अधिशाषी अभियंता (EE): 50.00 लाख तक
वित्त विभाग की आईडी संख्या 101801752 दिनांक 26.03.2018 के अनुशरण में जारी यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं।
राजस्थान पंचायती राज (दूसरा संशोधन) नियम, 2018 - आबादी भूमि उपयोग परिवर्तन और उप-विभाजन
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 27 मार्च 2018 की अधिसूचना (सं. एफ.4(7)अमे/रूल्स/लीगल/पी.आर./2014/926 दिनांक 10.7.2018) के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज (दूसरा संशोधन) नियम, 2018 जारी किए गए हैं। यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र में प्रकाशित की गई है।
मुख्य बिंदु और प्रावधान
नया अध्याय-9क का अंतःस्थापन: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में नया अध्याय-9क जोड़ा गया है जो आबादी क्षेत्र में भूमि के उपयोग के परिवर्तन (नियम 173-क) तथा भू-खंडों के उप-विभाजन व पुनर्गठन (नियम 173-ख) से संबंधित है।
संपरिवर्तन प्रभार (Conversion Charges): गैर-आवासीय प्रयोजनों के लिए आवासीय आबादी भूमि के संपरिवर्तन हेतु वाणिज्यिक, औद्योगिक, लोक उपयोग, संस्थागत, चिकित्सा सुविधा तथा सौर/पवन ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना के लिए अलग-अलग दरें निर्धारित की गई हैं।
छूट के प्रावधान: केंद्रीय या राज्य सरकार के विभागों या स्थानीय प्राधिकरणों के उपयोग, राजस्थान विनियोजन प्रोत्साहन स्कीम, 2003/2010 और तकनीकी शिक्षा संस्थान के मामलों में संपरिवर्तन प्रभारों में आंशिक या पूर्ण छूट दी गई है।
भू-खंडों का उप-विभाजन और पुनर्गठन: नियम 173-ख के तहत ग्रामीण आबादी क्षेत्र में भू-खंडों के उप-विभाजन या पुनर्गठन के लिए प्ररूप 51 में आवेदन करना होगा तथा इसके लिए निर्धारित प्रभार नियम 173-घ के अनुसार देय होंगे।
नए प्ररूप (Forms): नियमों के अंतर्गत प्ररूप 48 से लेकर प्ररूप 53 तक नए आवेदन पत्र, अनुज्ञा, पट्टा विलेख और आबादी भूमि का रजिस्टर जोड़े गए हैं।
अधिक जानकारी और विस्तृत प्रक्रियाओं के लिए संबंधित ग्राम पंचायत कार्यालय या राज ई-पंचायत पोर्टल से संपर्क करें।
अवधिपार पट्टा विलेखों के पुनर्विधिमान्यकरण के संबंध में दिशा-निर्देश
अवधिपार पट्टा विलेखों का पुनर्विधिमान्यकरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा अवधिपार पट्टा विलेखों के पुनर्विधिमान्यकरण के संबंध में आदेश जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
नया नियम: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 167 में उप-नियम 167(क) जोड़कर ग्राम पंचायतों द्वारा जारी विक्रय विलेख, पट्टा या पट्टा विलेख के पुनर्विधिमान्यकरण का प्रावधान किया गया है।
शुल्क निर्धारण: विभागीय अधिसूचना दिनांक 02.01.2018 के अनुसार शुल्क का निर्धारण किया गया है। नियम 157, 158, 159 एवं 162 के अधीन जारी पट्टों के पुनर्विधिमान्यकरण हेतु 100/- रुपये तथा अन्य नियमों के अधीन जारी विक्रय विलेख या पट्टा विलेख हेतु मूल विक्रय विलेख या पट्टा विलेख द्वारा दी गई भूमि की वर्तमान डीएलसी (DLC) दर की राशि का एक प्रतिशत देय होगा।
आवेदन प्रक्रिया: कोई भी व्यक्ति जो अपने पट्टा विलेख का पुनर्विधिमान्यकरण कराना चाहता है, वह मूल विक्रय विलेख/पट्टा और निर्धारित फीस के साथ पंचायत में आवेदन कर सकेगा।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना - पट्टा विलेख का पुनर्वितिमान्यकरण
राजस्थान राज-पत्र अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), जयपुर द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.4(7)संशो/नियम/विधि/पंरा/2017/02 (दिनांक 02 जनवरी, 2018) के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी।
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 167-क द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, राज्य सरकार द्वारा ग्राम पंचायत द्वारा जारी किये गये विक्रय विलेख, पट्टा या पट्टा विलेख का पुनर्वितिमान्यकरण किये जाने के आवेदन के साथ देय फीस निम्नानुसार निर्धारित की गई है:
पanchayat नियम 157, 158, 159 एवं 162 के अधीन जारी किये गये पट्टों का पुनर्वितिमान्यकरण हेतु: 100/- रुपये
पanchayat नियम 157, 158, 159 एवं 162 के अतिरिक्त अन्य नियमों के अधीन जारी किये गये विक्रय विलेख, पट्टा या पट्टा विलेख का पुनर्वितिमान्यकरण हेतु: मूल विक्रय विलेख, पट्टा या पट्टा विलेख द्वारा दी गई भूमि की वर्तमान डी०एल०सी० दर की राशि का एक प्रतिशत
यह अधिसूचना विष्णु कुमार गोयल, उप शासन सचिव द्वारा जारी की गई है।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग परिपत्र - न्यायालयीन प्रकरणों एवं अंतरिम आदेशों की पालना के संबंध में
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 06/12/2017 को एक महत्वपूर्ण परिपत्र (क्रमांक: एफ 13(632)पविवि/विधि/एस.बी.रिट./जय.उच्च/2017/4586) जारी किया गया है। यह परिपत्र न्यायालयीन प्रकरणों, अंतरिम आदेशों की पालना और अभ्यावेदनों के निस्तारण के संबंध में है।
मुख्य बिंदु:
अंतरिम आदेशों की पालना: माननीय न्यायालय द्वारा पारित अंतरिम आदेशों की पालना मुख्यालय भिजवाने के बजाय शासन स्तर पर यथासमय की जाए। यदि अंतरिम आदेश विभागीय नियमों या निर्देशों के विपरीत प्रतीत होता है, तो अतिरिक्त महाधिवक्ता या राजकीय अभियोक्ता से संपर्क कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए। एकपक्षीय अंतरिम आदेश होने पर माननीय न्यायालय के समक्ष भारतीय संविधान के अनुच्छेद 226(3) के अंतर्गत प्रार्थना-पत्र प्रस्तुत करवाया जाए।
अभ्यावेदनों का निस्तारण: जिन प्रकरणों में न्यायालय द्वारा अभ्यावेदन निस्तारण किए जाने के आदेश दिए जाते हैं, उनका निस्तारण विभागीय अधिनियम, नियम, परिपत्र, आदेश या निर्देश के अनुसार नियत समय सीमा में किया जाए।
मुख्यालय मार्गदर्शन: किसी प्रकरण में मार्गदर्शन की आवश्यकता होने पर संबंधित बिंदु को स्पष्ट रूप से अंकित करते हुए सुसंगत दस्तावेजों की छायाप्रति के साथ ही मुख्यालय भिजवाया जाए, ताकि अनावश्यक देरी न हो।
जारीकर्ता: नवीन महाजन, शासन सचिव एवं आयुक्त, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
राजस्थान पंचायती राज (पंचम संशोधन) नियम, 2017 - अधिसूचना
राजस्थान पंचायती राज (पंचम संशोधन) नियम, 2017
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना (क्रमांक: जी.एस.आर.98, संख्या एफ.4(7)अमे/रूल्स/लीगल/पी.आर./2017/1457, दिनांक 22 नवम्बर 2017) के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
नियम का नाम: ये नियम राजस्थान पंचायती राज (पंचम संशोधन) नियम, 2017 कहलाएंगे और राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से प्रवृत्त होंगे।
नियम 21 का संशोधन: नियम 21 के उप-नियम (1) और उप-नियम (2) में अधिकारियों जैसे मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद, विकास आयुक्त के स्थान पर 'सक्षम प्राधिकारी' अभिव्यक्ति प्रतिस्थापित की गई है।
नया नियम 167-क का अंतःस्थापन: नियम 167 के पश्चात नया नियम '167-क. विक्रय विलेख, पट्टा या पट्टा विलेख का पुनर्विधिमान्यकरण' जोड़ा गया है।
पुनर्विधिमान्यकरण की प्रक्रिया: पंचायत द्वारा जारी किए गए विक्रय विलेख, पट्टा या पट्टा विलेख के पुनर्विधिमान्यकरण के लिए कोई भी व्यक्ति मूल दस्तावेजों और राज्य सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट फीस के साथ आवेदन कर सकेगा। पंचायत अपने अभिलेखों से समाधान करने के पश्चात इसे पुन: विधिमान्य कर सकेगी और इस प्रभाव का पृष्ठांकन करेगी।
राजस्थान पंचायती राज (पंचम संशोधन) नियम, 2017 - अधिसूचना
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या जी.एस.आर.98 (क्रमांक एफ.4(7) अमे/रूल्स/लीगल/पी.आर./2017/1457, दिनांक 22 नवम्बर 2017) के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन किए गए हैं। इन्हें राजस्थान पंचायती राज (पंचम संशोधन) नियम, 2017 कहा गया है। यह राजपत्र में प्रकाशन की तिथि (23 नवम्बर 2017) से प्रवृत्त हो गए हैं।
मुख्य बिंदु एवं संशोधन
नियम 21 का संशोधन: नियम 21 के उप-नियम (1) और उप-नियम (2) में अधिकारियों के पदों के स्थान पर अब "सक्षम प्राधिकारी" अभिव्यक्ति को प्रतिस्थापित किया गया है।
नया नियम 167-क अंतःस्थापित: नियमों में नया नियम 167-क जोड़ा गया है जो विक्रय विलेख, पट्टा या पट्टा विलेख का पुनर्वितिमान्यकरण से संबंधित है।
पुनर्वितिमान्यकरण की प्रक्रिया: पंचायत द्वारा जारी किए गए विक्रय विलेख, पट्टा या पट्टा विलेख का पुनर्वितिमान्यकरण कराने के इच्छुक व्यक्ति को मूल दस्तावेज और राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर विनिर्दिष्ट फीस के साथ पंचायत में आवेदन करना होगा।
पंचायत अपने अभिलेख से समाधान करने के पश्चात विक्रय विलेख, पट्टा या पट्टा विलेख को पुन: विधिमान्य कर सकेगी और इस प्रभाव का पृष्ठांकन करेगी।
यह आदेश राज्यपाल के आदेश से राजेन्द्र शेखर मक्कड़, शासन उप सचिव द्वारा जारी किया गया है।
पंचायत प्रसार अधिकारियों हेतु पंचायत क्लस्टर/सर्किल का गठन एवं संशोधित जॉब चार्ट के संबंध में परिपत्र
परिचय एवं उद्देश्य
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा क्रमांक एफ.28()परावि/प्रशा.2/पंचा.प्र.अ./जॉब चार्ट/2017/4313 दिनांक 16.11.2017 को पंचायत प्रसार अधिकारियों को पंचायत क्लस्टर/सर्किल बनाकर स्थापित करने और तदनुसार संशोधित जॉब चार्ट जारी करने के संबंध में परिपत्र जारी किया गया है।
पंचायत प्रसार अधिकारियों के स्वीकृत पदों का विवरण
संभागीय आयुक्त कार्यालय: 7 पद (प्रत्येक कार्यालय में 1)
जिला कलेक्टर्रेट: 66 पद (प्रत्येक कार्यालय में 2)
जिला परिषद: 198 पद (प्रत्येक कार्यालय में 6)
पंचायत समिति: 2105 पद (प्रत्येक 4.7 ग्राम पंचायत पर 1)
कुल स्वीकृत पद: 2376
पंचायत प्रसार सर्किल / क्लस्टर का स्वरूप व संचालन
प्रत्येक पंचायत समिति में पंचायत प्रसार अधिकारी के स्वीकृत पदों की सीमा तक ग्राम पंचायत क्लस्टर का गठन किया जाएगा। ये क्लस्टर भौगोलिक निकटता (Contiguity) को ध्यान में रखकर बनाए जाएंगे और स्थायी होंगे। क्लस्टर गठन हेतु सभी प्रस्ताव मुख्य कार्यकारी अधिकारी के नेतृत्व में दिनांक 30.11.2017 तक तैयार किए जाकर 25.12.2017 तक पंचायती राज मुख्यालय को भिजवाना सुनिश्चित किया जाना है।
पंचायत प्रसार अधिकारियों के मुख्य कार्य एवं दायित्व (पंचायत समिति स्तर पर)
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की समस्त विकास योजनाओं के प्रभावी पर्यवेक्षण एवं क्रियान्वयन में सहयोग करना।
क्लस्टर की सभी ग्राम पंचायतियों का त्रैमासिक निरीक्षण करना।
माह में न्यूनतम 7 व अधिकतम 10 कार्यदिवसों पर फील्ड में भ्रमण करना।
ग्राम पंचायतों के कार्मिकों/जनप्रतिनिधियों से सतत संपर्क रख मार्गदर्शन प्रदान करना तथा लंबित कार्यों का निस्तारण करवाना।
नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों को नियमों/प्रावधानों से अवगत कराना व प्रशिक्षण प्रदान करना।
विभिन्न संक्रमणों का पर्यवेक्षण एवं गुणवत्ता नियंत्रण करना।
जिला परिषद पर कार्यरत पंचायत प्रसार अधिकारियों के कार्य
मुख्य कार्यकारी अधिकारी / अति. मुख्य कार्यकारी अधिकारी द्वारा प्रदत्त सभी कार्यों/दिशा निर्देशों की पालना करना।
आवंटित प्राथमिक जाँचों का सम्पादन करना।
पंचायत शाखा में आवंटित समस्त कार्य करना।
विकास योजनाओं के प्रभारी/सहायक प्रभारी के रूप में दायित्वों का निर्वहन करना।
राजस्थान पंचायती राज संस्थाओं के जन प्रतिनिधियों के मानदेय में संशोधन संबंधी अधिसूचना
राजस्थान पंचायती राज संस्थाओं के मानदेय में संशोधन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक एफ 951(19) ( )प्रविवि/लेखा/नि.आ./जिला परिषद/सांख्य/7364 दिनांक 11/10/2017 के माध्यम से पंचायती राज संस्थाओं के जनप्रतिनिधियों के मानदेय की दरों में तत्काल प्रभाव से संशोधन किया गया है।
संशोधित मानदेय की दरें
जिला प्रमुख, जिला परिषद: वर्तमान दर 9000/- रुपये प्रति माह से बढ़ाकर संशोधित दर 10000/- रुपये प्रति माह की गई है।
प्रधान, पंचायत समिति: वर्तमान दर 6000/- रुपये प्रति माह से बढ़ाकर संशोधित दर 7000/- रुपये प्रति माह की गई है।
सरपंच, ग्राम पंचायत: वर्तमान दर 3500/- रुपये प्रति माह से बढ़ाकर संशोधित दर 4000/- रुपये प्रति माह की गई है।
जिला प्रमुख, प्रधान एवं सरपंच को मानदेय राशि का भुगतान राज्य वित्त आयोग के तहत मिलने वाली राशि से किया जाएगा। यह अधिसूचना वित्त (व्यय-5) विभाग की आईडी संख्या 101702662 दिनांक 01.06.2017 से प्राप्त सहमति के अनुसरण में जारी की गई है।
ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी भूमि पर बने आवास गृहों के पट्टे जारी किए जाने के संबंध में निर्देश
ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी भूमि पर बने आवास गृहों के पट्टे जारी करने की प्रक्रिया
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी भूमि पर बने आवास गृहों के पट्टे दिए जाने के संबंध में आदेश जारी किया गया है। यह पत्र क्रमांक फ.4(78)सिवायचक/नियमन/विधि/पंचरा/2017/1104, दिनांक 03-10-2017 को जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु एवं निर्देश:
सर्वेक्षण कार्य: ग्राम पंचायत स्तर पर ग्राम सेवक एवं पटवारी द्वारा राजस्व विभाग के परिपत्र दिनांक 07.09.2017 में वर्णित प्रावधानों के तहत दिनांक 01.01.2017 से पूर्व बने आवास गृहों का संयुक्त सर्वे किया जाएगा।
प्रमाणन दस्तावेज: 01.01.2017 से पूर्व रहने के प्रमाण हेतु राशन कार्ड, वोटर आईडी, भामाशाह कार्ड, आधार कार्ड, बिजली, पानी या टेलीफोन बिल में से किसी एक दस्तावेज का उपयोग किया जाएगा।
पात्रता शर्तें: पट्टा जारी करते समय यह ध्यान रखा जाएगा कि एक परिवार को अधिकतम 300 वर्गगज या वास्तविक क्षेत्रफल (इसमें से जो भी कम हो) का ही पट्टा दिया जाएगा। यदि उस ग्राम पंचायत में उस परिवार के पास पूर्व में ही आवासीय मकान या भूखंड है, तो पट्टा नहीं दिया जाएगा।
प्रतिबंधित श्रेणियां: राजस्थान काश्तकारी अधिनियम, 1955 की धारा 16 के अंतर्गत प्रतिबंधित भूमि, नाला, नाड़ी, जोहड़, जलप्रवाह क्षेत्र, ओरण, चारागाह भूमि, वन विभाग के अधीन भूमि तथा अन्य प्रतिबंधित क्षेत्रों को छोड़कर ही भूमि सेटअपार्ट की जाएगी।
वित्त विभाग, राजस्थान सरकार अधिसूचना - दिनांक 27.09.2017
वित्त विभाग अधिसूचना दिनांक 27.09.2017
यह दस्तावेज़ राजस्थान सरकार के वित्त विभाग (कर खंड), जयपुर द्वारा जारी की गई अधिसूचना है, जिसका क्रमांक [No.F.2(11)FD/Tax/2011-100] दिनांक 27.09.2017 है।
मुख्य बिंदु:
यह अधिसूचना पंजीकरण अधिनियम, 1908 (1908 का केंद्रीय अधिनियम संख्या XVI) की धारा 88 की उप-धारा (1) के खंड (d) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए जारी की गई है।
राज्य सरकार द्वारा यह निर्देश दिया गया है कि ग्राम पंचायत के सचिव के लिए, जो अपनी पदीय क्षमता में किसी लिखत (instrument) को निष्पादित करने के लिए सक्षम प्राधिकारी है, यह आवश्यक नहीं होगा कि वह किसी भी पंजीकृत अधिकारी (Registering Officer) के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हो या उससे संबंधित किसी भी कार्यवाही में उपस्थित रहे।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से हर्धेश कुमार जुनेजा, शासन उप सचिव द्वारा जारी किया गया है तथा आवश्यक कार्रवाई हेतु संबंधित विभागों को प्रेषित किया गया है।
स्थायी आदेश संख्या 34/2017: प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृतियों की वित्तीय सीमा के संबंध में संशोधन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग का स्थायी आदेश संख्या 34/2017
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रामीण विकास, अनुभाग-5) द्वारा क्रमांक एफ 27(263) ग्रावि/ग्रुप-5/जीकेन/उपापन/2015-16/ई.ओ.नं. दिनांक 22.8.2017 के तहत स्थायी आदेश संख्या 34/2017 जारी किया गया है।
यह आदेश विभागीय परिपत्र क्रमांक एफ-27(79) ग्रावि/अनु.5/जीकेन/प्रशा.अनु.स./2014 दिनांक 17.9.2014 के परिशिष्ट 1 के बिन्दु संख्या 1 (ब) में वर्णित प्रशासनिक स्वीकृति जारी करने की सीमा एवं परिशिष्ट 2 के बिन्दु संख्या 1 (ब) में वर्णित वित्तीय स्वीकृति जारी करने के संबंध में संशोधित निर्देश जारी करता है।
मुख्य बिंदु:
परिशिष्ट 1 (प्रशासनिक स्वीकृति): निर्माण कार्य की प्रशासनिक स्वीकृति (मूल) (विधायक, सांसद कोष व महात्मा गांधी नरेगा के लिए) हेतु जिला कलक्टर/जिला कार्यक्रम समन्वयक, ईजीएस को संपूर्ण शक्तियां प्रदान की गई हैं।
परिशिष्ट 2 (वित्तीय स्वीकृति): निर्माण कार्य की प्रशासनिक स्वीकृति (मूल) (विधायक, सांसद कोष व महात्मा गांधी नरेगा के लिए) की वित्तीय स्वीकृति हेतु जिला कलक्टर/जिला कार्यक्रम समन्वयक, ईजीएस को संपूर्ण शक्तियां दी गई हैं।
यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू रहेगा।
इस आदेश की प्रति सभी संबंधित जिला कलेक्टरों, मुख्य कार्यकारी अधिकारियों, विकास अधिकारियों और ग्राम पंचायतों को आवश्यक कार्रवाई एवं अनुपालन हेतु प्रेषित की गई है।
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2017 - नियम 157 में संशोधन
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग अधिसूचना
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम सं. 13) की धारा 102 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन हेतु अधिसूचना जारी की गई है।
मुख्य बिंदु:
नियम का नाम: राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2017।
प्रवर्तन: यह राजपत्र में इसके प्रकाशन की तारीख (17 मई 2017) से प्रवृत्त होंगे।
नियम 157 का संशोधन: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 के उप-नियम (1) के खण्ड (i) के उप-खण्ड (ब) में विद्यमान अभिव्यक्ति “इन नियमों के प्रारम्भ की तारीख से ठीक पूर्ववर्ती पचास वर्षों के दौरान” के स्थान पर “31 दिसम्बर, 2016 के ठीक पूर्ववर्ती सत्तर वर्षों के दौरान” प्रतिस्थापित की गई है।
राज्यपाल के आदेश से, विष्णु कुमार गोयल, उप शासन सचिव।
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2017 से संबंधित अधिसूचना
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2017
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना जी.एस.आर. 20 (दिनांक 17 मई, 2017) के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
नियम का नाम: इन नियमों का नाम राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2017 है।
प्रवृत्ती: ये राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से प्रवृत्त होंगे।
नियम 157 का संशोधन: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 के उप-नियम (1) के खण्ड (i) के उप-खण्ड (ब) में विद्यमान अभिव्यक्ति "इन नियमों के प्रारम्भ की तारीख से ठीक पूर्ववर्ती पचास वर्षों के दौरान" के स्थान पर "31 दिसम्बर, 2016 के ठीक पूर्ववर्ती सत्तर वर्षों के दौरान" प्रतिस्थापित की गई है।
आदेश संख्या: [संख्या एफ.4(7) अमे/रूल्स/लीगल/पी.आर./2017/447]
हस्ताक्षरकर्ता: राज्यपाल के आदेश से, विष्णु कुमार गोयल, उप शासन सचिव।
पट्टा आवंटन अभियान (14 अप्रैल, 2017 से 12 जुलाई, 2017) के संबंध में निर्देश
पट्टा आवंटन अभियान निर्देश
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा पट्टा आवंटन अभियान के संबंध में पत्र जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
अभियान की अवधि: 14 अप्रैल, 2017 से 12 जुलाई, 2017 तक (90 दिवस)।
ग्राम पंचायतों द्वारा शिविर के दिन के अलावा भी इस पूरी अवधि में पट्टा/भू-खण्ड आवंटन से संबंधित आवेदन प्रार्थना-पत्र प्राप्त कर उनका निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।
प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की पात्रता/वरीयता सूची में शामिल समस्त परिवारों को निर्धारित प्रक्रिया अपनाकर भूमि/पट्टे आवश्यक रूप से आवंटित किए जाएं।
शिविरों में पटवारी, तहसीलदार एवं नायब तहसीलदार आदि की उपस्थिति सुनिश्चित कर पंचायती राज अधिकारियों को वांछित सहयोग प्रदान करने के निर्देश दिए गए हैं।
स्थायी आदेश संख्या 31/2017: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के अंतर्गत विकास कार्यों के संबंध में दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग - स्थायी आदेश संख्या 31/2017
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रामीण विकास, अनुभाग-5), राजस्थान सरकार द्वारा क्रमांक एफ 27(263) ग्रावि/ग्रुप-5/जीकेन/उपापन/2015-16/92279, दिनांक 13-04-2017 को स्थायी आदेश संख्या 31/2017 जारी किया गया है। यह आदेश ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा क्रियान्वित योजनाओं (विशेषकर महात्मा गांधी मनरेगा योजना) के अंतर्गत कराए जा रहे विकास कार्यों की संपादन व्यवस्था के संबंध में है।
मुख्य बिंदु एवं निर्देश:
ग्रेवल सड़कों की नियमित मरम्मत और अधिकतम आयु: विभिन्न विकास योजनाओं में निर्मित ग्रेवल सड़कों के वार्षिक क्षरण की रोकथाम हेतु नियत कालीन मरम्मत (Periodical Maintenance) के निर्देश दिए गए हैं। ग्रेवल सड़कों की पुनरावृत्ति (repetitive) मरम्मत कार्य सामान्यतः कार्य पूर्णता प्रमाण-पत्र जारी होने की दिनांक से न्यूनतम 5 वर्ष से पहले नहीं कराया जा सकेगा।
गांवों के अंदर नालियों के साथ आंतरिक सड़क निर्माण एवं तकनीकी मापदंड: गांवों की आंतरिक सड़कों की चौड़ाई स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। मुख्य आवागमन मार्ग की चौड़ाई भारत सरकार के निर्देश दिनांक 24.04.2012 के अनुसार 3 मीटर निर्धारित की गई है। आंतरिक सीमेंट सड़क की अधिकतम चौड़ाई 5.5 मीटर तक ही अनुमत होगी।
सार्वजनिक निर्माण विभाग की सड़कों के बर्म की मरम्मत: पीडब्ल्यूडी या अन्य विभागों द्वारा निर्मित सड़कों और उनके बर्म (पटरी) की मरम्मत एवं झाड़ियां काटने का कार्य मनरेगा योजनान्तर्गत दिशा-निर्देशानुसार स्वीकृति उपरांत पंचायती राज संस्थाओं द्वारा कराया जा सकता है।
गाँवों में श्रमिकों का नियोजन और साफ-सफाई की गतिविधियाँ: श्रमिकों के नियोजन हेतु बीएसआर (BSR) / दर विश्लेषण का निर्धारण स्थानीय निकाय (नगर निगम/परिषद/पालिका) की प्रचलित दरों से 10 प्रतिशत कम दर की सीमा में जिला दर निर्धारण समिति द्वारा पंचायत समितिवार किया जाएगा।
कदीमी रास्ते और निजी भूमि पर सड़क निर्माण: राजस्व रिकार्ड में दर्ज न होने वाले कदीमी रास्तों पर सड़क निर्माण हेतु विभागीय आदेश संख्या 26/2016 दिनांक 06.04.2016 की शर्त संख्या 13 के अनुसार संबंधित काश्तकारों की सहमति और नियमानुसार शपथ-पत्र के उपरांत कार्य संपादित किया जा सकेगा।
राजकीय कार्यालय भवन हेतु निःशुल्क भूमि आवंटन संबंधी अधिसूचना
अधिसूचना विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना (क्रमांक: संख्या एफ.4(54)पट्टा अभि/विधि/पंव्रा/2017/271, दिनांक अप्रैल 06, 2017) के अंतर्गत किसी भी सरकारी कार्यालय के भवन हेतु निःशुल्क भूमि आवंटन के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु एवं सीमाएं
राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा 98 और राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 162(2) के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग किया गया है।
500 वर्ग गज तक: संबंधित ग्राम पंचायत द्वारा भूमि का निःशुल्क आवंटन किया जा सकता है।
500 से अधिक एवं 1000 वर्ग गज तक: संबंधित पंचायत समिति की पूर्वानुमति से भूमि का निःशुल्क आवंटन किया जा सकता है।
1000 वर्ग गज से अधिक: संबंधित जिला परिषद की पूर्वानुमति से भूमि का निःशुल्क आवंटन किया जा सकता है।
यह आदेश आनंद कुमार, शासन सचिव एवं आयुक्त द्वारा जारी किया गया है।
राजस्व ग्राम विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना - सरकारी कार्यालय भवनों हेतु निःशुल्क भूमि आवंटन नियम
अधिसूचना विवरण एवं मुख्य बिंदु
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.4(54)पट्टा अभि/विधि/पंश/2017/271 दिनांक अप्रैल 06, 2017 के माध्यम से सरकारी कार्यालयों के भवन हेतु भूमि के निःशुल्क आवंटन के संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं।
यह अधिसूचना राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा 98 तथा राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 162(2) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए जारी की गई है।
निःशुल्क भूमि आवंटन की सीमाएं एवं प्राधिकार:
500 वर्ग गज तक: संबंधित ग्राम पंचायत द्वारा निःशुल्क भूमि का आवंटन किया जा सकता है।
500 से अधिक एवं 1000 वर्ग गज तक: संबंधित पंचायत समिति की पूर्वानुमति से ग्राम पंचायत/पंचायत समिति द्वारा आवंटन।
1000 वर्ग गज से अधिक: संबंधित जिला परिषद की पूर्वानुमति से संबंधित ग्राम पंचायत, पंचायत समिति एवं जिला परिषद को अधिकृत किया गया है।
यह आदेश शासन सचिव एवं आयुक्त आनन्द कुमार के आदेशानुसार जारी किया गया है।
द्वितीय अपील संख्या 220/2016 - राज्य सूचना आयोग, जयपुर आदेश
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत द्वितीय अपील का निर्णय
राज्य सूचना आयोग, जयपुर द्वारा अपील संख्या 220/2016 (दिनांक 13-10-2016) के संबंध में आदेश जारी किया गया है। यह मामला श्री किशोरी लाल बनाम राज्य सूचना अधिकारी / सचिव, ग्राम पंचायत गणेश्वर, पंचायत समिति नीम का थाना, जिला सीकर से संबंधित है।
मुख्य बिंदु और निर्देश:
अपीलार्थी का आवेदन: अपीलार्थी ने दिनांक 02-05-2015 को विकास अधिकारी, पंचायत समिति नीम का थाना को प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर पंचायत समिति के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों में जनवरी 2009 से मार्च 2015 तक विभिन्न योजनाओं के तहत हुए विकास कार्यों की जानकारी मांगी थी।
सूचना का अंतरण: विकास अधिकारी द्वारा पत्र क्रमांक 2316 दिनांक 11-05-2015 को 41 पंचायतों के ग्राम सचिवों को प्रार्थना पत्र का अंतरण किया गया था।
प्रत्यार्थी का पक्ष: आयोग के नोटिस के संदर्भ में प्रत्यार्थी ने दिनांक 21-03-2016 को अपीलोत्तर प्रस्तुत कर बताया कि चाही गई सूचना पत्र दिनांक 20-10-2015 द्वारा पंजीकृत डाक से उपलब्ध करा दी गई है तथा उसकी प्रति आयोग को प्रेषित की गई है।
आयोग की टिप्पणी एवं निर्देश: सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 6 (1) के तहत आवेदक का यह दायित्व है कि वह वांछित सूचना से संबंधित लोक प्राधिकरण के लोक सूचना अधिकारी के समक्ष ही प्रार्थना प्रस्तुत करें। विकास अधिकारी द्वारा एक साथ 41 ग्राम पंचायतों के लोक सूचना अधिकारियों को धारा 6 (3) के तहत प्रार्थना पत्र का अंतरण करना अधिनियम के प्रावधानों के प्रतिकूल माना गया है।
अपील का निस्तारण: चूंकि वांछित सूचना प्रदान की जा चुकी है और अपीलार्थी सुनवाई के समय उपस्थित नहीं हुआ, अतः वर्तमान अपील को खारिज किया जाता है।
स्थायी आदेश संख्या 27/2016: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा कार्यकारी संस्था के संबंध में आदेश
स्थायी आदेश संख्या 27/2016
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रामीण विकास, अनुभाग-5) राजस्थान सरकार द्वारा जारी स्थायी आदेश संख्या 27/2016 (क्रमांक: एफ 4(10) पंरावि/पीपी/जीकेन/2014-15, दिनांक 11 अप्रैल 2016) के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी।
मुख्य बिंदु:
विभागीय स्थायी आदेश संख्या 24/2015 दिनांक 15 दिसंबर 2015 के द्वारा ग्रामीण कार्य निर्देशिका-2015 के बिन्दु संख्या 24.8 के अंतर्गत जलग्रहण विकास एवं भू-संरक्षण विभाग के कार्य कराने के लिए अधिकृत जलग्रहण समिति को जोड़ा गया था।
विभागीय परिपत्र संख्या 17/2015 द्वारा जारी ग्रामीण कार्य निर्देशिका-2015 भाग-1 को विभागीय आदेश दिनांक 22.12.2015 द्वारा स्थगित कर ग्रामीण कार्य निर्देशिका-2010 प्रभावी की गई है।
ग्रामीण कार्य निर्देशिका-2010 के बिंदु संख्या 2.3 में वर्णित कार्यकारी संस्था संबंधित योजना की मार्गदर्शिका के प्रावधान अनुसार होने का उल्लेख है।
भारत सरकार / जलग्रहण विकास एवं भू-संरक्षण विभाग द्वारा जारी मार्गदर्शिका के अनुसार कार्य कराने के लिए अधिकृत जलग्रहण समिति को भी कार्यकारी संस्था की श्रेणी में जोड़ा जाता है।
उपरोक्त आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होंगे।
स्थायी आदेश संख्या 26/2016 - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग
स्थायी आदेश संख्या 26/2016
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रामीण विकास, अनुभाग-5), राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 06 अप्रैल, 2016 का स्थायी आदेश जारी किया गया है। यह आदेश एफ- 27(252)ग्राविवि/ग्रुप-5/जीकेएन/एसओपी/2015-16 के अंतर्गत है।
इस आदेश के माध्यम से ग्राम पंचायतों और विकास अधिकारियों (पंचायत समिति) को प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति के लिए प्रदत्त शक्तियों में संशोधन किया गया है:
परिशिष्ट - 1 प्रशासनिक स्वीकृति: निर्माण कार्य की प्रशासनिक स्वीकृति (मूल) (विधायक कोष व महात्मा गांधी नरेगा के अतिरिक्त) के संबंध में ग्राम पंचायत एवं विकास अधिकारी की वित्तीय सीमाएं निर्धारित की गई हैं। नवीन स्वीकृति के लिए ग्राम पंचायत हेतु 5.00 लाख रुपये तक तथा विकास अधिकारी हेतु 5.00 लाख रुपये तक की सीमा है। रखरखाव/मरम्मत हेतु ग्राम पंचायत हेतु 0.50 लाख रुपये तथा विकास अधिकारी हेतु 2.00 लाख रुपये तक की सीमा तय की गई है।
परिशिष्ट - 2 वित्तीय स्वीकृति (संशोधित सहित): निर्माण कार्य की वित्तीय स्वीकृति (मूल) हेतु ग्राम पंचायत एवं विकास अधिकारी की वित्तीय सीमाएं दी गई हैं। नवीन स्वीकृति के लिए ग्राम पंचायत (ग्राम पंचायत के पास उपलब्ध राशि) तथा विकास अधिकारी (पंचायत समिति के पास उपलब्ध राशि) हेतु 5.00 लाख रुपये तक की सीमा है। रखरखाव/मरम्मत हेतु ग्राम पंचायत हेतु 0.50 लाख रुपये तथा विकास अधिकारी हेतु 2.00 लाख रुपये तक की सीमा है।
यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा। अधिक जानकारी के लिए प्रमुख शासन सचिव श्रीमंत पाण्डेय के हस्ताक्षर से जारी मूल आदेश का अवलोकन करें।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग - संशोधित अधिसूचना (राजपत्र दिनांक 6 अप्रैल 2016)
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
यह दस्तावेज ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा जारी संशोधित अधिसूचना से संबंधित है, जो राजस्थान राज-पत्र (असाधारण) दिनांक 6 अप्रैल 2016 में प्रकाशित हुई है।
संदर्भ: विभागीय समसंख्यक अधिसूचना क्रमांक 1302 दिनांक 02-08-2011 द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (अधिनियम संख्या 13) की धारा 98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 154(4)(ग) के अन्तर्गत 5.00 लाख से 10.00 लाख तक की आबादी भूमि के विक्रय/नीलामी की पुष्टि किए जाने हेतु संभागीय आयुक्त को अधिकृत किया गया था।
संशोधन विवरण: सहवं से नियम 154(3)(ग) के स्थान पर "नियम 154(4)(ग)" अंकित हो गया था। अत: उक्त अधिसूचना में आंशिक संशोधन कर प्रयुक्त अभिव्यक्ति राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के "नियम 154(3)(ग)" के स्थान पर "नियम 154(4)(ग)" पढ़ा जावे।
यह आदेश संयुक्त शासन सचिव (विधि) द्वारा जारी किया गया है।
ग्रामीण कार्य निर्देशिका - 2015 (भाग-1) के क्रियान्वयन को स्थगित करने बाबत आदेश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग का आदेश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रामीण विकास, अनुभाग-5), राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 22 दिसंबर 2015 को एक आदेश जारी किया गया है, जिसका क्रमांक एफ 4(10)पंरावि/पीपी/जीकेन/2014-15 है।
मुख्य बिंदु:
आदेश का उद्देश्य: विभागीय परिपत्र दिनांक 18.08.2015 के द्वारा राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 के नियम 182 (क) के क्रम में ग्रामीण कार्य निर्देशिका -2015 (भाग-1) लागू की गई थी।
क्रियान्वयन स्थगन: उक्त ग्रामीण कार्य निर्देशिका -2015 (भाग-1) के संबंध में प्राप्त सुझावों के निस्तारण कर संशोधित निर्देशिका तैयार होने तक इसके क्रियान्वयन को स्थगित किया गया है।
वैकल्पिक व्यवस्था: इस दौरान विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन हेतु पूर्व की भांति ग्रामीण कार्य निर्देशिका -2010 लागू रहेगी।
स्थायी आदेश संख्या 22/2015: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा प्रशासनिक स्वीकृतियों के संबंध में संशोधन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार - स्थायी आदेश संख्या 22/2015
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रामीण विकास, अनुभाग-5) द्वारा दिनांक 17 नवंबर, 2015 को स्थायी आदेश संख्या 22/2015 जारी किया गया है। यह आदेश विभागीय परिपत्र संख्या- 17/2015 द्वारा जारी ग्रामीण कार्य निर्देशिका-2015, भाग-1 में संशोधन से संबंधित है।
मुख्य बिंदु एवं संशोधन
निर्देश संख्या 11.1 में संशोधन: स्वामित्व आवश्यकता एवं प्रक्रिया में परिसम्पत्तियों की श्रेणियों में से सड़क निर्माण कार्यों हेतु निजी भूमि पर प्रचलित आम रास्ते के लिए भूमि पर सम्बन्धित काश्तकारों से सहमति, शपथ-पत्र पर लेने के उपरान्त कार्य सम्पादन किया जा सकेगा।
तालिका-1 शिड्यूल ऑफ़ पावर (प्रशासनिक स्वीकृति):
कार्य/आइटम का विवरण: निर्माण कार्य की प्रशासनिक स्वीकृति (मूल) (विधायक व सांसद कोष के अतिरिक्त)।
स्वीकृतकर्ता अधिकारी/समिति: ग्राम पंचायत (ग्राम पंचायत के पास उपलब्ध राशि)।
शक्तियों की वित्तीय सीमा: नवीन स्वीकृति के लिए 5.00 लाख रुपये तक तथा रख-रखाव/मरम्मत के लिए 0.50 लाख रुपये।
शर्ते/टिप्पणियां: शर्तें/टिप्पणियां क्र.सं. 1 से 16 से यथावत लागू होंगी।
यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा।
स्थायी आदेश संख्या 24/2015: ग्रामीण कार्य निर्देशिका-2015 में संशोधन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग का स्थायी आदेश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रामीण विकास, अनुभाग-5), राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 15 दिसम्बर 2015 का स्थायी आदेश संख्या 24/2015 जारी किया गया है। यह आदेश ग्रामीण कार्य निर्देशिका-2015, भाग-1 में संशोधन के संबंध में है।
मुख्य बिंदु
परिपत्र संदर्भ: विभागीय परिपत्र संख्या 17/2015 द्वारा ग्रामीण कार्य निर्देशिका-2015, भाग-1 जारी की गई थी।
बिंदु संख्या 24 में संशोधन: निर्देशिका के बिंदु संख्या 24 (कार्यकारी संस्था / कार्य निष्पादन संख्या) में संशोधन करते हुए, अनुच्छेद 24.8 में अन्य संस्थाओं की श्रेणी में 'जलग्रहण विकास एवं भू-संरक्षण विभाग के कार्य कराने के लिए अधिकृत जलग्रहण समिति' को जोड़ा गया है।
प्रभावी तिथि: यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।
यह आदेश संबंधित अधिकारियों, जिला कलेक्टरों, मुख्य कार्यकारी अधिकारियों और विकास अधिकारियों को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित किया गया है।
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) अधिनियम, 2015 - आबादी क्षेत्र भूमि विनियमन और पट्टा प्रावधान
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) अधिनियम, 2015
विधि (विधायी प्रारूपण) विभाग (ग्रुप-2) द्वारा जारी अधिसूचना संख्या प. 2 (40) विधि/2/2015 दिनांक 8 अक्टूबर, 2015 के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) अधिनियम, 2015 (2015 का अधिनियम संख्यांक 28) प्रकाशित किया गया है। यह अधिनियम 5 जून, 2015 से प्रवृत्त हुआ समझा जाएगा।
मुख्य बिंदु और प्रावधान
अध्याय-4-क का अंतःस्थापन: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 में नया अध्याय 'किसी गांव के आबादी क्षेत्र का विनियमन' जोड़ा गया है।
धारा 107-क (भूमि के उपयोग के परिवर्तन पर निर्बन्धन): आबादी क्षेत्र की भूमि के उपयोग परिवर्तन (जैसे आवासीय से वाणिज्यिक, औद्योगिक से वाणिज्यिक आदि) के लिए राज्य सरकार या प्राधिकृत अधिकारी से अनुमति और निर्धारित संपरिवर्तन प्रभार (Conversion Charges) का प्रावधान किया गया है।
धारा 107-ख (भू-खण्डों का उप-विभाजन या पुनर्गठन): आबादी क्षेत्र में भू-खण्ड के उप-विभाजन या पुनर्गठन के लिए पूर्व अनुमति और निर्धारित शर्तों का पालन अनिवार्य किया गया है।
धारा 107-ग (कतिपय भूमियों के पट्टे की मंजूरी): विधिपूर्ण कब्जा रखने वाले व्यक्तियों को पंचायत द्वारा विहित रीति से पट्टा प्राप्त करने का प्रावधान है, जिसके लिए आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी।
धारा 107-घ (कतिपय भूमियों का व्ययन): नज़ूल भूमि या आबादी विकास हेतु आरक्षित भूमि का व्ययन पंचायत द्वारा नियमानुसार किया जाएगा।
धारा 107-च (आबादी भूमि के अभिलेख): प्रत्येक पंचायत द्वारा अपने क्षेत्र के भीतर स्थित आबादी भूमि का अभिलेख तैयार और संधारित किया जाएगा।
वसूले गए समस्त संपरिवर्तन प्रभार और अन्य प्रभार पंचायत की निधि में जमा किए जाएंगे।
स्थायी आदेश संख्या 20/2015 - ग्रामीण कार्य निर्देशिका-2015 भाग-1 में संशोधन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग - स्थायी आदेश संख्या 20/2015
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रामीण विकास, अनुभाग-5) द्वारा दिनांक 17 सितम्बर, 2015 को स्थायी आदेश संख्या- 20/2015 जारी किया गया है। यह आदेश विभागीय परिपत्र संख्या- 17/2015 द्वारा जारी ग्रामीण कार्य निर्देशिका-2015 भाग-1 के निर्देशों में संशोधन के संबंध में है।
प्रमुख संशोधन एवं बिंदु:
निर्देश संख्या- 7.1: शिड्यूूल ऑफ पॉवर्स हेतु परिशिष्ट-2 (ग्रामीण कार्य निर्देशिका-2015 भाग-1) की तालिका संख्या- 3 शिड्यूूल ऑफ पॉवर्स के तकनीकी स्वीकृति कॉलम संख्या- 6 में शर्त/टिप्पणी जोड़ी गई है कि प्राकृतिक आपदा की स्थिति में क्षतिग्रस्त कार्यों के तत्काल सम्पादन हेतु ग्राम पंचायत द्वारा एक लाख तक की तकनीकी स्वीकृति ग्रामीण कार्य निर्देशिका- 2015 के भाग-1 के निर्देश संख्या- 4.3 व 4.4 के अनुसार जारी की जा सकेगी।
निर्देश संख्या- 9.5.1: पंचायत समिति स्तरीय बाजार दर सर्वेक्षण एवं प्रस्तावक समिति में उप-निर्देश संख्या- 1 के अनुसार एक सरपंच एवं एक ग्राम सेवक (कुल 2 सदस्य) शामिल किये जाते हैं। प्रतिवर्ष रोटेशन के आधार पर इन सदस्यों का चयन विकास अधिकारी द्वारा पंचायत समिति की प्रशासन व स्थापना समिति की बैठक में लॉटरी के आधार पर किया जाएगा।
ग्रामीण कार्य निर्देशिका- 15 भाग-1 के निर्देश संख्या- 18.1: "राज्य स्तरीय तकनीकी अनुमोदन समिति में क्रम संख्या- 5 पर अंकित जिलों के आमंत्रित अधिशाषी अभियंता 3 के स्थान पर प्रत्येक संभाग से एक अधिशाषी अभियंता को प्रतिवर्ष रोटेशन के आधार पर सदस्य नियुक्त किया जाता है।"
प्रभावी तिथि: उपर्युक्त आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होंगे। आदेश पर श्रीमत पाण्डेय, प्रमुख शासन सचिव, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज के हस्ताक्षर हैं।
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2015 - सिंचाई परियोजना के विस्थापितों को भूमि आवंटन
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2015
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना दिनांक 5 अगस्त 2015 के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
नियम का नाम: राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2015।
प्रवर्तन: ये नियम राजपत्र में प्रकाशन की तारीख (05.08.2015) से प्रवृत्त होंगे।
नियम 158 का संशोधन: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 158 में उप-नियम (2क) के पश्चात् और उप-नियम (3) के पूर्व नया उप-नियम (2ख) अंतःस्थापित किया गया है।
विस्थापितों के लिए प्रावधान: राज्य सरकार, सिंचाई परियोजना के विस्थापितों को, निःशुल्क अधिकतम 300 वर्ग गज के अध्यधीन रहते हुए उनके स्वामित्व वाले गृह स्थलों या गृह के समतुल्य आबादी भूमि आवंटित कर सकेगी।
आदेश क्रमांक: [संख्या एफ.4 (7) अमें/रूल/लीगल/पी.आर./2014/537]
यह आदेश राज्यपाल के आदेश से एस.के. सोलंकी, संयुक्त शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है।
राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) अध्यादेश, 2014 - शौचालय संबंधी योग्यता नियम
राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) अध्यादेश, 2014
विधि (विधाई प्रारूपण) विभाग (ग्रुप-2) द्वारा दिनांक 8 दिसंबर, 2014 को राजस्थान राजपत्र में राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) अध्यादेश, 2014 (अध्यादेश संख्यांक 1) प्रकाशित किया गया है। यह अध्यादेश तत्काल प्रवृत्त होगा।
मुख्य बिंदु एवं संशोधन
राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम सं. 13) की धारा 19 में संशोधन करते हुए नया खंड अन्तःस्थापित किया गया है:
शौचालय की अनिवार्यता: घर में कार्यशील स्वच्छ शौचालय होना चाहिए और उसके परिवार का कोई भी सदस्य खुले में शौच के लिए नहीं जाता हो।
स्पष्टीकरण-II के अनुसार 'स्वच्छ शौचालय' का अर्थ: तीन दीवारों, एक दरवाजे और छत से घिरी हुई कोई जल-बंध (वाटर सील्ड) शौचालय प्रणाली या व्यवस्था।
परिवार के सदस्य का अर्थ: ऐसे व्यक्ति का/की पति/पत्नी, बच्चे और ऐसे व्यक्ति के साथ निवास कर रहे उसके माता-पिता।
यह अध्यादेश राज्यपाल कल्याण सिंह के आदेशानुसार तथा प्रमुख शासन सचिव दीपक माहेश्वरी के हस्ताक्षर से जारी किया गया है।
डिजिटली हस्ताक्षरित आवासीय भूमि का पट्टा जारी करने बाबत अधिसूचना
राजकीय अधिसूचना: डिजिटली हस्ताक्षरित आवासीय भूमि का पट्टा
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 27 नवंबर 2014 की अधिसूचना संख्या एफ.4( )डिजी.पट्टा/विधि/पंस/2014/1569 के अंतर्गत डिजिटली हस्ताक्षरित 'आवासीय भूमि का पट्टा' जारी करने के संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
पूर्वापेक्षित स्टेशनरी: आवासीय भूमि का पट्टा जारी करने के लिए पूर्व मुद्रित (Pre-Printed) स्टेशनरी का उपयोग किया जाएगा जिसमें सुरक्षा मानकों जैसे होलोग्राम (Hologram), वॉटरमार्क (Water Mark) और बारकोड (Bar Code) का समावेश होगा।
डिजिटल हस्ताक्षर: इन पट्टों पर डिजिटल हस्ताक्षर (Digital Signature) किए जाएंगे जिसे इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट 2000 और संशोधित आईटी एक्ट 2009 के प्रावधानों के तहत मान्यता प्रदान की गई है।
वितरण व्यवस्था: इस सेवा को पूरे राज्य में कार्यरत ई-मित्र केन्द्रों (एकीकृत नागरिक सेवा केंद्र) और जिले में प्रस्तावित नेशनल ई-गवर्नेंस प्लान के तहत स्थापित किए जाने वाले सीएससी केन्द्रों (नागरिक सेवा केंद्र) के माध्यम से उपलब्ध कराने के लिए अधिकृत किया गया है।
मूल आवेदन व दस्तावेज: इस सेवा को प्राप्त करने के लिए प्रार्थी द्वारा प्रस्तुत किए गए मूल आवेदन पत्र एवं संबंधित दस्तावेज जिले से संबंधित अधिकारी, जिनके हस्ताक्षर से यह जारी किया जाएगा, के कार्यालय में निरीक्षण/परीक्षण के लिए उपलब्ध होंगे।
यह आदेश राजेश यादव, शासन सचिव एवं आयुक्त की आज्ञा से जारी किया गया है।
डिजिटल हस्ताक्षर और प्री-प्रिंटेड स्टेशनरी के माध्यम से 'आवासीय भूमि का पट्टा' जारी करने बाबत अधिसूचना
राजस्थान राज-पत्र अधिसूचना दिनांक 27 नवम्बर 2014
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज) द्वारा जारी इस अधिसूचना के माध्यम से महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए हैं:
ग्राम पंचायत रूपवास का नगर पालिका में क्षेत्र परिवर्तन: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा-101 के अंतर्गत ग्राम पंचायत रूपवास की वर्तमान सीमाओं (उत्तर में ग्राम बरबार, दक्षिण में ग्राम समाहड, पूर्व में भिड़यानी व रूढ़ रूपवास तथा पश्चिम में दौरदा) को पंचायती राज संस्थाओं के क्षेत्राधिकार से पृथक किया गया है।
आवासीय भूमि का पट्टा: राज्य सरकार द्वारा डिजिटल हस्ताक्षरित (Digital Signature) और पूर्व-मुद्रित (Pre-Printed) स्टेशनरी का उपयोग करते हुए 'आवासीय भूमि का पट्टा' अनुमन्य किए जाने का निर्णय लिया गया है।
सुरक्षा मानक: पट्टे के लिए उपयोग की जाने वाली स्टेशनरी में सुरक्षा की दृष्टि से मानक तरीकों (Hologram, Water Mark, Bar Code, आदि) का उपयोग किया जाएगा।
वितरण और उपलब्धता: यह सेवा संपूर्ण राज्य में ई-मित्र केन्द्रों (एकीकृत नागरिक सेवा केन्द्र) एवं नेशनल ई-गवर्नेंस प्लान के तहत स्थापित सी.एस.सी. केन्द्रों (नागरिक सेवा केन्द्र) के माध्यम से चरणबद्ध रूप से उपलब्ध कराई जाएगी।
ग्राम सेवक एवं पदेन सचिवों के कैश हैंडलिंग भत्ते में वृद्धि के संबंध में आदेश
ग्राम सेवक एवं पदेन सचिवों का कैश हैंडलिंग भत्ता बढाया गया
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज) द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ 28( )परावरि/प्रशा-2/ग्रासे संघ/ज्ञापन/2011/2264, दिनांक 25.07.2013 के अनुसार, राज्य की ग्राम पंचायतों में पदस्थापित ग्राम सेवक एवं पदेन सचिवों के भत्ते में संशोधन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
पूर्व में देय भत्ता: पूर्व में प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति के तहत 500/- रुपये प्रतिमाह प्रशासनिक एवं वित्तीय कार्य हेतु दिए जाते थे।
संशोधित भत्ता: इस विशेष भत्ते की राशि को 500/- रुपये से बढ़ाकर 1000/- रुपये प्रतिमाह कैश हैंडलिंग भत्ता कर दिया गया है।
प्रभावी तिथि: यह बढ़ी हुई दर दिनांक 01.07.2013 से लागू होगी, जिसका भुगतान दिनांक 01.08.2013 को देय होगा।
यह विशेष भत्ता किसी अन्य प्रयोजन हेतु मान्य नहीं होगा।
यह स्वीकृति वित्त (नियम) विभाग की आईडी क्रमांक 101302845 दिनांक 17.07.2013 से प्राप्त सहमति के अनुसरण में प्रदान की गई है।
राजस्थान पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों के मानदेय एवं बैठक भत्तों में संशोधन - अधिसूचना 2013
राजस्थान पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों के मानदेय एवं बैठक भत्तों में संशोधन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक एफ.951(19).(41)प्ररावि/लेखा/निओअउ/बजट घोषणा/2012-13/2494 दिनांक 01-04-2013 के अनुसार राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 के नियम 27 से 30 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए मानदेय एवं बैठक भत्तों की दरों में आंशिक संशोधन किया गया है।
मानदेय की संशोधित दरें (प्रति माह):
जिला प्रमुख, जिला परिषद: वर्तमान 7,500/- रुपये से बढ़ाकर 9,000/- रुपये
प्रधान, पंचायत समिति: वर्तमान 5,000/- रुपये से बढ़ाकर 6,000/- रुपये
सरपंच, ग्राम पंचायत: वर्तमान 3,000/- रुपये से बढ़ाकर 3,500/- रुपये
बैठक भत्ता की संशोधित दरें:
सदस्य, जिला परिषद: वर्तमान 125/- रुपये से बदलकर 500/- रुपये
सदस्य, पंचायत समिति: वर्तमान 100/- रुपये से बदलकर 350/- रुपये
सदस्य, ग्राम पंचायत: वर्तमान 75/- रुपये से बदलकर 200/- रुपये
यह भत्ता संबंधित प्रतिनिधि द्वारा माह में बैठक आयोजित होने पर ही तथा माह हेतु निर्धारित बैठकों में उपस्थित होने पर ही देय होगा। यह अधिसूचना वित्त (व्यय-5) विभाग की आईडी संख्या 331300289 दि. 25.03.2013 से प्राप्त सहमति के अनुसरण में जारी की गई है।
राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2013 से संबंधित अधिसूचना
राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2013
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक एफ.4(7)अमे/रूल्स/लीगल/पीआर/2012/135 दिनांक 11-2-2013 के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
नियम का नाम: राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2013।
प्रवर्तन: यह राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से प्रवृत्त होंगे।
नियम 157 का संशोधन: इसके तहत व्यैक्तिक आबादी भूमि में पुराने गृह का कब्ज़ा रखने वाले और पट्टा प्राप्त करने के इच्छुक व्यक्तियों के लिए प्ररूप 23-क में पंचायत द्वारा पट्टा जारी करने का प्रावधान किया गया है।
प्रभार एवं शुल्क विवरण: 300 वर्गगज तक या 300 वर्गगज अधिकतम क्षेत्रफल (25 प्रतिशत संनिर्मित क्षेत्रफल को सम्मिलित करते हुए) के लिए संनिर्मित पुराने ग्रहों पर नियम के प्रारंभ की तारीख से पूर्व, पचास वर्षों से अधिक पूर्व के लिए 100/- रु. तथा ठीक पूर्ववर्ती पचास वर्षों के दौरान के लिए 200/- रु. प्रभार निर्धारित किया गया है।
विशेष छूट: गरीबी रेखा से नीचे की सूची में सम्मिलित परिवारों से उप-खण्ड (क) के अधीन कोई फीस प्रभारित नहीं की जाएगी तथा उप-खण्ड (ख) के अधीन केवल 10 प्रतिशत फीस प्रभारित की जाएगी।
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2013 - नियम 159 में संशोधन
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2013
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा अधिसूचना संख्या F.4 (7)Ame./Rules/Legal/PR/2012/136 दिनांक 11-2-2013 जारी की गई है। इसके तहत राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 159 की उप-नियम (2) में संशोधन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
पंचायत आबादी क्षेत्र में गोदामों या कार्यालयों के निर्माण के लिए प्राथमिकता के आधार पर 1500 वर्ग गज तक के प्लॉट आवंटित कर सकती है।
प्राथमिक कृषि सहकारी समिति / बड़ी आकार की बहुउद्देशीय विपणन समिति (Primary Agricultural Cooperative Society/ Large Sized Multipurpose Marketing Society): उप-नियम (5) के नियम 152 के तहत बाजार मूल्य के 50% मूल्य पर।
ग्राम सेवा सहकारी समिति या क्रय विक्रय सहकारी समिति (Gram Sewa Sahakari Samiti or Kray Vikray Sahakari Samiti): राज्य सरकार के अनुमोदन के अधीन निःशुल्क (free of charge)।
राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2013 - आबादी क्षेत्र के पुराने मकानों के पट्टा जारी करने के संबंध में अधिसूचना
राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2013
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा अधिसूचना संख्या No.F.4(7)Ame./Rules/Legal/PR/2012/35 दिनांक 11-2-2013 जारी की गई है। यह अधिसूचना राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा 102 द्वारा प्रद शक्तियों के तहत राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन करने के लिए है।
मुख्य बिंदु और नियम संशोधन:
इन नियमों को राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2013 कहा गया है।
नियम 157 की उप-नियम (1) में संशोधन किया गया है जिसके अनुसार आबादी भूमि में स्थित पुराने मकानों के लिए प्रपत्र XXIII-A में पट्टा जारी किया जा सकता है।
300 वर्ग गज तक का क्षेत्र या निर्मित क्षेत्र (25 प्रतिशत निर्मित क्षेत्र सहित):
50 वर्ष से अधिक पुराने मकानों के लिए शुल्क: रु. 100/-
नियमों के प्रारंभ होने की तिथि से ठीक पहले पचास वर्षों के दौरान निर्मित मकानों के लिए शुल्क: रु. 200/-
300 वर्ग गज से अधिक के क्षेत्र पर, ऐसे अतिरिक्त क्षेत्र के लिए राजस्थान स्टाम्प नियम, 2004 के नियम 58 के खंड (b) के तहत जिला स्तरीय समिति द्वारा अनुशंसित बाजार दरों का 25 प्रतिशत देय होगा।
बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे) सूची में शामिल परिवारों से उप-खंड (a) के तहत कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा और उप-खंड (i) के उप-खंड (b) के तहत केवल 10 प्रतिशत शुल्क लिया जाएगा।
राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 के अंतर्गत नियम 162 की शक्तियों का प्रत्यायोजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज) द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक एफ.4( )पंसंवि/पीसी/प्र.गा.के संग अभि./आ.भू./2012-13/16 दिनांक 09-01-2013 के संबंध में आवश्यक जानकारी:
मुख्य बिंदु:
अधिनियम और नियम: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 तथा राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 162 के उप-नियम (2) के अंतर्गत शक्तियां।
प्रत्यायोजन अवधि: 'प्रशासन गांवों के संग अभियान-2013' की अवधि दिनांक 10.01.2013 से 28.02.2013 तक।
शक्तियों का उपयोग: यह शक्तियां संबंधित जिला कलेक्टर को प्रत्यायोजित की गई हैं, जिनका प्रयोग केवल राजकीय विभागों एवं राजकीय संस्थाओं को आवंटन किए जाने के संबंध में किया जाएगा।
यह आदेश किशनलाल बांडेलिया, उप शासन सचिव (विधि) द्वारा जारी किया गया है।
आबादी भूमि पट्टा प्रक्रिया हेतु राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के अंतर्गत तीन बैठकों की प्रक्रिया संबंधी परिपत्र
परिचय
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 08/01/2013 को जारी परिपत्र (क्रमांक: एफ.15(79)पंवारा/विधि/प्रशा.गाヴォं के संग अभि.2013/12/12) के माध्यम से आबादी भूमि के पट्टा वितरण की प्रक्रिया को सरल बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य उद्देश्य एवं विवरण
विभाग के ध्यान में लाया गया था कि पंचायतों द्वारा आबादी भूमि का पट्टा देने के लिए कम से कम छह बैठकें करनी पड़ती हैं, जिससे प्रक्रिया में काफी विलम्ब होता है। इस संबंध में नियमों के प्रावधानों एवं मूल भावना को ध्यान में रखते हुए स्पष्ट किया जाता है कि राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 145 से 147 में पट्टा दिए जाने की प्रक्रिया निर्धारित है। इसके तहत आवेदन पत्र प्रस्तुत करने के पश्चात् ग्राम पंचायत द्वारा पट्टा दिए जाने की कार्यवाही अब केवल 3 बैठकों में पूर्ण की जा सकती है:
प्रथम बैठक: तीन पंचों की समिति की प्रतिनियुक्ति।
द्वितीय बैठक: रिपोर्ट का समिश्रण व आपत्ति आमंत्रण।
तृतीय बैठक: यदि आपत्ति प्राप्त नहीं होती है तो पट्टा जारी करने की कार्यवाही की जा सकती है।
प्रशासन गांवों के संग अभियान-2013: नगरीय सीमाओं में सम्मिलित ग्राम पंचायतों में भूमि आवंटन और पट्टा वितरण के निर्देश
नगरीय विकास आवासन एवं स्वायत्त शासन विभाग आदेश
राजस्थान सरकार के नगरीय विकास आवासन एवं स्वायत्त शासन विभाग द्वारा क्रमांक प.3 (1192)/नविचि/3/2010, दिनांक 4 जनवरी 2013 को आदेश जारी किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य 'प्रशासन गांवों के संग अभियान-2013' के शिविरों में नगरीय सीमाओं (Urbanisable limits) में सम्मिलित ग्राम पंचायतों के गांवों में सार्वजनिक उपयोग, सरकारी विभागों एवं आबादी विस्तार हेतु ग्राम पंचायतों को भूमि आवंटन करना है।
मुख्य बिंदु:
अभियान अवधि: राज्य सरकार द्वारा 10 जनवरी, 2013 से 28 फरवरी, 2013 तक 'प्रशासन गांवों के संग अभियान-2013' चलाया जा रहा है।
पट्टा देने की अधिकारिता: मास्टर प्लान में दर्शाये गए परिधीय क्षेत्र में स्थित ग्राम पंचायतों को ग्राम पंचायत मुख्यालय वाले ग्राम में 500 मीटर तक और पंचायत के अन्य गांवों में 200 मीटर तक की सीमा में आबादी विस्तार एवं अन्य सार्वजनिक सुविधाओं (विद्यालय, चिकित्सालय आदि) के लिए राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 के अंतर्गत पट्टे दिए जाने की अधिकारिता दी गई है।
भूमि की उपलब्धता: जयपुर रीजन में जयपुर विकास प्राधिकरण द्वारा, जोधपुर रीजन में जोधपुर विकास प्राधिकरण तथा अन्य क्षेत्रों में जिला कलेक्टर द्वारा ग्राम पंचायतों को भूमि उपलब्ध कराई जाएगी।
समस्या निवारण एवं कमेटी गठन: प्राधिकरण/न्यास/स्थानीय निकाय के नाम दर्ज एवं सिवायचक भूमि को ग्राम पंचायतों को आवंटित करने के लिए कमेटी का गठन किया गया है, जिसमें प्राधिकरण का उपायुक्त/सचिव/मुख्य नगर पालिका अधिकारी (अध्यक्ष), संबंधित उपखण्ड अधिकारी (सदस्य), और संबंधित उप नगर नियोजक या सहायक/कनिष्ठ अभियंता (सदस्य) शामिल हैं।
राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 73 के अन्तर्गत पंचायतों की आमदनी में बढ़ोतरी करने की अपेक्षा बाबत
परिचय एवं उद्देश्य
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी पत्र क्रमांक एफ.1(11)(परावि)लेखा/निजी आय/2011-12/11186 दिनांक 7-11-2012 के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 73 के अंतर्गत ग्राम पंचायतों की निजी आय में बढ़ोतरी करने और वित्तीय स्वतंत्रता प्राप्त करने के संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु एवं निर्देश
वित्तीय स्वतंत्रता एवं निजी आय: राज्य वित्त आयोग की सिफारिश के अनुसार पंचायतों को अपनी निजी आय प्रति वर्ष 1.50 से 2.00 लाख रुपये बढ़ानी चाहिए ताकि वे कार्यों का प्रभावशाली तरीके से क्रियान्वयन कर सकें।
बजट घोषणा 2011-12: माननीय मुख्यमंत्री महोदय की बजट घोषणा के अनुसार, यदि कोई पंचायत पूर्व वर्ष के मुकाबले 2.00 लाख रुपये की निजी आय बढ़ाएगी, तो पंचायत समिति/जिला परिषद की सिफारिश के आधार पर राज्य सरकार द्वारा अतिरिक्त 2.00 लाख रुपये की मैंचिंग राशि (अनुदान) प्रदान की जाएगी।
राजस्व वृद्धि के स्रोत: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 33 और 34 के अनुसार पंचायतें सफाई, रोशनी, जल-निकास, सड़कों के रखरखाव के साथ-साथ कर, फीस, प्रमारों और शास्तियों में वृद्धि कर सकती हैं। हवेलियों, बड़े पक्के ग्रहों, ढाबों, होटलों, ऑटोमोबाइल सर्विस स्टेशनों, मरम्मत की दुकानों, पेट्रोल/डीजल पंपों आदि पर फीस उद्ग्रहित करके गैर राजस्व में वृद्धि की जा सकती है।
वाणिज्यिक डीएलसी दर: सड़क के किनारे स्थित दुकानों के संबंध में राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 (3) के अनुसार वाणिज्यिक डी.एल.सी. दर से कम से कम दोगुनी वसूली की जा सकती है या नियमानुसार बेदखली नोटिस/वाणिज्यिक पट्टा बनाकर पंचायत की आय बढ़ाई जा सकती है।
फीसों की दरें (नियम 68)
नियम 68 के अंतर्गत जनता को दी जाने वाली सेवाओं के लिए अधिकतम फीस दरें निर्धारित की गई हैं, जैसे:
आवेदन फीस: 10/- रुपये
निवास, जाति, आय प्रमाण पत्र: 20/- रुपये (अ.जा./अ.ज.जा. हेतु 5/- रुपये)
बिजली/पानी कनेक्शन हेतु अनापत्ति: 40/- रुपये (अ.जा./अ.ज.जा. हेतु 5/- रुपये)
भवन निर्माण स्वीकृति (पक्का निर्माण): 2/- रुपये प्रति वर्ग मीटर
पेट्रोल/डीजल पंप: 2500/- रुपये प्रति वर्ष
ढाबा/रेस्टोरेंट: 1000/- रुपये प्रति वर्ष
मोबाइल टॉवर: 10000/- रुपये प्रति वर्ष
अतिथि गृह/होटल/मोटल/विश्राम गृह: 5 कक्ष तक 1000/- रुपये प्रति वर्ष से लेकर 16 और अधिक कमरे तक 5000/- रुपये प्रति वर्ष
फीस/कर लागू करने एवं वसूली की प्रक्रिया
पंचायतों को साधारण बैठक में नियम 57 के अनुसार फीस निर्धारित दरों पर वसूल करने का प्रस्ताव पारित करना होगा।
नियम 58 के अनुसार आपत्तियों के लिए एक माह का नोटिस जारी किया जाएगा।
नियम 105 के तहत मांग पर्ची (प्रारूप 5) दी जाएगी और नियम 106 के तहत 15 दिन का नोटिस देकर चल संपत्ति की कुर्की की जा सकती है।
राजस्व विभाग के माध्यम से पटवारी द्वारा करों की वसूली (नियम 62, 63, 64) की जाएगी, जिसमें पटवारी 5 प्रतिशत काटकर 95 प्रतिशत राशि पंचायत के पी.डी. लेखे या पंचायत लेखे में जमा करेगा।
गुमशुदा व्यक्ति के मृत्यु के स्थान के निर्धारण संबंधी स्पष्टीकरण - भारत सरकार
गुमशुदा व्यक्ति के मृत्यु के स्थान के निर्धारण संबंधी स्पष्टीकरण
भारत सरकार, गृह मंत्रालय, भारत के महारजिस्ट्रार का कार्यालय द्वारा गुमशुदा व्यक्ति के मामले में न्यायालय के आदेश में मृत्यु के स्थान के निर्धारण के संबंध में स्पष्टीकरण जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
पत्राचार संदर्भ: कार्यालय का पत्र दिनांक 22.10.2012 (सं. 8/4/2011-जीवननांक सी.आर.पी.)।
जन्म एवं मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1969: अधिनियम की धारा 13(3) के प्रावधानों के अंतर्गत ऐसे मामलों में मृत्यु का रजिस्ट्रेशन केवल सक्षम न्यायालय के आदेश द्वारा ही किया जाएगा।
मृत्यु की तिथि और स्थान: न्यायालय के आदेश में मृत्यु की तारीख वह होगी जिस तारीख को वादी न्यायालय में गया, और यह उपयुक्त होगा कि 'मृत्यु का स्थान' वह स्थान हो जहां वादी न्यायालय में गया।
निर्देश: सभी जिला और स्थानीय स्तर के रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों को इस संबंध में अवगत कराने के निर्देश दिए गए हैं ताकि वे गुम हुए व्यक्ति की मृत्यु दर्ज कर सकें।
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2011 - शुल्क और नियमों से संबंधित अधिसूचना
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2011
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा अधिसूचना संख्या No. F.4 (7) Am/Rule/Legal/PR/2010/ 1348 दिनांक 12-8-2011 जारी की गई है। इसके माध्यम से राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
नियम 68 के तहत पंचायत द्वारा लिए जाने वाले शुल्क (Fees):
आवेदन शुल्क (Application fees): Rs. 10/-
निवास, जाति, आय प्रमाण पत्र आदि: Rs. 20/- (SC/ST के लिए 50% छूट)
उत्तराधिकार प्रमाण पत्र आदि: Rs. 40/- (SC/ST के लिए 50% छूट)
बिजली या पाईप द्वारा पानी के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC): Rs. 40/- (SC/ST के लिए 50% छूट)
आबादी भूमि क्रय हेतु आवेदन: Rs. 20/-
साइट प्लान तैयार करने और साइट निरीक्षण का खर्च: Rs. 50/-
राशन कार्ड (आवेदन पत्र और छपाई सहित): Rs. 10/-
30 दिन के बाद जन्म और मृत्यु का पंजीकरण: Rs. 20/-
भवन निर्माण की अनुमति: पक्का निर्माण के लिए Rs. 2/- प्रति वर्ग मीटर
पंचायत द्वारा पहले से स्वीकृत साइट प्लान में जोड़/बदलाव (Addition/Alteration): Rs. 100/-
बिना अनुमति अनाधिकृत निर्माण का नियममीकरण (Regularization): Rs. 10/- प्रति वर्ग मीटर (अधिकतम Rs. 1000/- तक)
पेट्रोल/डीजल पंप: Rs. 2500/- प्रति वर्ष
ढाबा/रेस्टोरेंट: Rs. 1000/- प्रति वर्ष
अन्य कोई व्यावसायिक इकाई: Rs. 200/- प्रति वर्ष
माइनिंग एनओसी के लिए प्रस्ताव: Rs. 5000/-
मोबाइल टॉवर: Rs. 10000/- प्रति वर्ष
गेस्ट हाउस/होटल/मोटेल/रेस्ट हाउस हेतु शुल्क: 5 कमरे तक Rs. 1000/- प्रति वर्ष, 6 से 10 कमरे Rs. 2500/- प्रति वर्ष, 11 से 15 कमरे Rs. 4000/- प्रति वर्ष, 16 या अधिक कमरे Rs. 5000/- प्रति वर्ष
इस अधिसूचना में बैठकों के आयोजन, समितियों, और विभिन्न नियमों के अंतर्गत वित्तीय सीमाओं और शक्तियों में भी संशोधन किए गए हैं।
राजस्थान पंचायती राज विभाग अधिसूचना: आ आबादी भूमि के विक्रय/नीलामी की पुष्टि संबंधी अधिकार
अधिसूचना विवरण
राजस्थान सरकार, पंचायती राज विभाग द्वारा जारी क्रमांक एफ.5(31)पंसंवि/विधि/संशोधितकरण/सं.आयुक्त/2011/1302, दिनांक 2-8-2011 के अंतर्गत आबादी भूमि के विक्रय और नीलामी की पुष्टि के संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु
नियम संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा 98 तथा राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 154(4)(ग) के अंतर्गत यह प्रावधान किया गया है।
संभागीय आयुक्त के अधिकार: 5.00 लाख रुपये से 10.00 लाख रुपये तक की आबादी भूमि के विक्रय/नीलामी की पुष्टि करने हेतु संभागीय आयुक्त को अधिकृत किया गया है।
राज्य सरकार स्तर पर पुष्टि: जिन भूखंडों की राशि 10.00 लाख से अधिक होगी, उनके विक्रय/नीलामी की पुष्टि हेतु प्रकरण पूर्ववत् राज्य सरकार को प्रेषित किए जाएंगे तथा पुष्टि राज्य सरकार द्वारा की जाएगी।
मुख्यमंत्री ग्रामीण बीपीएल आवास योजना एवं इंदिरा आवास योजना के अंतर्गत निःशुल्क पट्टा आवंटन के संबंध में निर्देश
मुख्यमंत्री ग्रामीण बीपीएल आवास योजना एवं इंदिरा आवास योजना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी पत्र क्रमांक एफ.4()विधि/पंचावि/2011/1134 दिनांक 1 जुलाई 2011 के माध्यम से बीपीएल परिवारों को निःशुल्क पट्टा आवंटन के संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
पट्टा आवंटन का अधिकार: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 153 के अंतर्गत कमजोर वर्गों को आवंटन का प्रावधान है जिसके तहत पंचायत सर्किल की आबादी भूमि में बीपीएल परिवारों को निःशुल्क पट्टे आवंटित करने का अधिकार ग्राम पंचायत में निहित है।
नियम 157 एवं 158: इन नियमों के अंतर्गत पट्टा आवंटन के लिए ग्राम पंचायत द्वारा संकल्प पारित कर बीपीएल परिवारों को पट्टे देने की कार्यवाही तत्काल सुनिश्चित करने के निर्देश हैं। इसके लिए नियम 145 से 156 द्वारा निर्धारित नीलामी प्रक्रिया की पालना करना आवश्यक नहीं है।
आबादी भूमि की उपलब्धता: जिला कलेक्टर से अपेक्षा की गई है कि जिन ग्राम पंचायतों के अधीन पंचायत सर्किल में आवंटन हेतु आबादी भूमि उपलब्ध नहीं है, वहां राज्य सरकार के स्वामित्व की अन्य उपयोग की भूमि को आबादी उपयोगार्थ परिवर्तित करते हुए ग्राम पंचायत को उपलब्ध कराई जाए।
मुख्यमंत्री ग्रामीण बीपीएल आवास योजना एवं इंदिरा आवास योजना के अंतर्गत निःशुल्क पट्टा आवंटन बाबत
मुख्यमंत्री ग्रामीण बीपीएल आवास योजना एवं इंदिरा आवास योजना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा मुख्यमंत्री ग्रामीण बीपीएल आवास योजना एवं इंदिरा आवास योजना के अंतर्गत बीपीएल परिवारों को निःशुल्क पट्टा आवंटन के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
पट्टा आवंटन का अधिकार: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 153 के अंतर्गत कमजोर वर्गों को आवंटन का प्रावधान है, जिसके तहत पंचायत सर्किल की आबादी भूमि में बीपीएल परिवारों को निःशुल्क पट्टे आवंटन करने का अधिकार ग्राम पंचायत में निहित है।
विनियमितीकरण: नियम 153 के अंतर्गत पुराने ग्रहों का विनियामितीकरण कर पट्टे जारी करने की शक्ति भी पंचायत में निहित है।
प्रक्रिया: उपरोक्त प्रावधानों के अंतर्गत आवंटन/पट्टा जारी किए जाने बाबत ग्राम पंचायत द्वारा संकल्प पारित किया जाकर आवंटन/पट्टा जारी करने की कार्यवाही की जा सकती है।
नियमों का पालन: नियम 157 एवं 158 के अंतर्गत आवंटन व पट्टा जारी करने के लिए नीलामी किए जाने संबंधी प्रक्रियात्मक प्रावधान नियम 145 से 156 द्वारा निर्धारित प्रक्रिया की पालना अपेक्षित/आवश्यक नहीं है।
भूमि की उपलब्धता: जिला कलेक्टरों से अपेक्षा की जाती है कि जिन ग्राम पंचायतों के अधीन पंचायत सर्किल में आवंटन हेतु आबादी भूमि उपलब्ध नहीं है, उन ग्राम पंचायतों के लिए ग्राम पंचायत क्षेत्र में उपलब्ध राज्य सरकार के स्वामित्व की अन्य उपयोग की भूमि को आबादी उपयोगार्थ परिवर्तित करते हुए आवंटन हेतु ग्राम पंचायत को उपलब्ध कराई जाए।
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2010 - आ आबादी एवं आपत्ति अवधि संबंधित अधिसूचना
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2010
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक [No.F.4(7)Am/Rule/Legal/PR/2010/2113] दिनांक 26 नवम्बर, 2010 के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी।
मुख्य बिंदु:
नियम संशोधन: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 148 के उप-नियम (1) के परन्तुक में संशोधन किया गया है।
आपत्ति अवधि में छूट: राजस्व अभियान या प्रशासन गांवों के संघ अभियान के दौरान आपत्तियां आमंत्रित करने की अवधि एक महीने के स्थान पर सात (7) दिन होगी।
प्रारूप संशोधन: फॉर्म XXII के अंतर्गत भी नोट जोड़ा गया है कि राजस्व अभियान या प्रशासन गांवों के संघ अभियान के दौरान फाइलिंग आपत्तियां दर्ज करने की अवधि एक महीने के स्थान पर सात दिन होगी।
लागू होना: यह नियम आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशन की तिथि (30 नवम्बर, 2010) से प्रभावी हो गए हैं।
राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2007 - पट्टा नियम 158 संशोधन
राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2007
पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 18.06.2007 की अधिसूचना (क्रमांक: एफ.4(11)पीआरओडी/लॉ/रूल-एमेंड/07/2078) के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 158 में संशोधन किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
भूतपूर्व सैनिकों के लिए: पंचायत, सरहदी पंचायत समिति क्षेत्रों में भूतपूर्व सैनिकों को ग्रामीण आबादी में 150 वर्गगज तक आबादी भूमि रियायती दर पर आवंटित कर सकेगी।
घुमक्कड़ भेड़ पालकों के लिए: पंचायत, घुमक्कड़ भेड़ पालकों को 300 वर्गगज तक आबादी भूमि निःशुल्क आवंटित कर सकेगी।
विधवाओं और तलाकशुदा महिलाओं के लिए प्रावधान: इस नियम के अधीन आबंटित तीस प्रतिशत भूमि विधवाओं और तलाकशुदा महिलाओं को आबंटित की जायेगी।
ग्राम पंचायतों द्वारा किसी भी समुदाय, धार्मिक संस्थाओं और गैर सरकारी संस्था को पट्टा जारी नहीं करने के संबंध में आदेश
राजस्व एवं पंचायती राज विभाग निर्देश
राजस्थान सरकार, पंचायती राज विभाग द्वारा ग्राम पंचायतों द्वारा जारी पट्टों के संबंध में आदेश जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
नियम संदर्भ: ग्राम पंचायत द्वारा आबादी क्षेत्रों की भूमि के पट्टे राजस्थान पंचायत राज (सामान्य) नियम 1996 के नियम 162 एवं 167 के प्रावधानों के तहत ही दिए जा सकते हैं।
निःशुल्क भूमि आवंटन: नियम 162 के तहत केवल राजकीय संस्थाओं को ही 500 वर्ग गज तक भूमि निःशुल्क दी जा सकती है। किसी भी समाज या गैर सरकारी संस्थाओं को निःशुल्क भूमि दिए जाने का नियमों में कोई प्रावधान नहीं है।
निरस्तीकरण कार्रवाई: यदि किसी गैर सरकारी संस्था या समुदाय को नियम विरुद्ध आबादी भूमि आवंटित की गई है, तो उसे तुरंत प्रभाव से निरस्त करने हेतु राज्य सरकार को मामला प्रेषित किया जाए।
शासकीय आदेश संख्या: क्रमांक:- एफ-139(26)परावरि/विधि/पट्टा/सामान्य/02/3297, दिनांक 19-7-06।
राजस्थान लोक सम्पत्ति अधिनियम के अंतर्गत अतिक्रमण हटाने के संबंध में परिपत्र
राजस्थान पंचायती राज विभाग परिपत्र
यह परिपत्र राजस्थान सरकार के पंचायती राज विभाग द्वारा क्रमांक एफ 139(51)परावि/विधि/अतिक्रमण/2005/3833, दिनांक 24-12-2005 को जारी किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य राजस्थान लोक सम्पत्ति (अनाधिकृत अधिभोगियों, बेदखली अधिनियम) 1964 के अंतर्गत पंचायतों की संपत्ति से अवैध अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया और नियमों की जानकारी देना है।
मुख्य बिंदु:
सम्पदा अधिकारी की नियुक्ति: राज्य सरकार की अधिसूचना दिनांक 12.11.92 के तहत समस्त जिला परिषदों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को सम्पदा अधिकारी नियुक्त किया गया है, जो पंचायत की संपत्तियों से अवैध कब्जों को हटाने हेतु अधिकृत हैं।
नोटिस की प्रक्रिया: अतिक्रमण करने वाले व्यक्ति को कम से कम 10 दिन का समय देते हुए नोटिस दिया जाना चाहिए, जिसे लोक शपथ के ऊपर या व्यक्तिगत रूप से/डाक द्वारा तामील कराया जाएगा।
बेदखली और नीलामी के नियम: सम्पदा अधिकारी सुनवाई के पश्चात बेदखली का आदेश पारित कर सकते हैं। अतिक्रमणकर्ता द्वारा छोड़ी गई संपत्ति को 14 दिन का समय देते हुए समाचार पत्र में प्रकाशन के पश्चात नीलाम किया जा सकता है।
अपील का प्रावधान: बेदखली के आदेश के विरुद्ध जिला जज या उनके द्वारा अधिकृत न्यायिक अधिकारी के समक्ष 15 दिन के भीतर अपील की जा सकती है।
शासकीय शक्तियां और दंड: सम्पदा अधिकारी को गवाहों को बुलाने और दस्तावेज मंगवाने हेतु सिविल न्यायालय की शक्तियां प्राप्त हैं। अवैध अतिक्रमण जारी रखने पर एक वर्ष तक की सजा और 1000/- रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।
पंचायती राज नियमों के अंतर्गत अचल संपत्ति की नीलामी, पट्टा और आबाड़ी भूमि आवंटन संबंधी निर्देश
पंचायती राज अधिनियम और नियम: संपत्ति नीलामी और पट्टा दिशा-निर्देश
यह दस्तावेज़ पंचायती राज संस्थाओं के अंतर्गत अचल संपत्ति की नीलामी, बाजार कीमत निर्धारण, पुनर्विक्रय, बिक्री की पुष्टि, प्राइवेट बातचीत द्वारा आबाड़ी भूमि का अंतरण, पुराने गृहों का विनियामीकरण और कमजोर वर्गों को भूमि आबंटन से संबंधित महत्वपूर्ण नियमों की जानकारी प्रदान करता है।
मुख्य बिंदु:
नीलामी समिति (नियम 151): सरपंच, उप-सरपंच, सतर्कता समिति का अध्यक्ष, महिला/अनुसूचित जाति/जनजाति/पिछड़ा वर्ग का पंचायत द्वारा मनोनीत एक पंच, भू-राजस्व निरीक्षक या पटवारी शामिल होते हैं।
बाजार कीमत (नियम 152): विकास अधिकारी प्रत्येक वर्ष अप्रैल मास में उप-registrar कार्यालय से क्षेत्र की आबाड़ी जमीनों के सूचक दर प्राप्त करते हैं।
विक्रय की पुष्टि और अनुमोदन (नियम 154): 10,000 रुपये से अधिक की बोली के लिए पंचायत समिति (50,000 रु से अधिक), जिला परिषद (1,00,000 रु से अधिक) या राज्य सरकार (1,00,000 रु से अधिक) से पूर्व अनुमोदन प्राप्त करना आवश्यक है।
पुराने गृहों का विनियामीकरण (नियम 157): 50 वर्ष से अधिक पूर्व निर्मित मकानों हेतु 100 रुपये और 50 वर्ष के दौरान बने मकानों हेतु 200 रुपये (चयनित परिवारों के लिए राशि वसूल नहीं होगी; गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वालों के लिए भी छूट)।
कमजोर वर्गों को आबंटन (नियम 158): गांव आबादियों में 150 वर्ग गज तक की आबाड़ी भूमि अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, पिछड़े वर्गों, श्रम मजदूरों और भूमिहीन व्यक्तियों को रियायती दरों पर आबंटित की जा सकती है।
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 - अवलोकन एवं मुख्य प्रावधान
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996
यह दस्तावेज़ राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 का आधिकारिक संकलन है, जिसे ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 के अंतर्गत बनाया गया है। यह नियम राज्य की त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं (ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और ज़िला परिषद) के प्रशासन, कार्यप्रणाली, ग्राम सभा, कर एवं शुल्क निर्धारण, अ आबादी भूमि के प्रबंधन, और सेवा नियमों से संबंधित विस्तृत दिशा-निर्देश प्रदान करता है।
मुख्य बिंदु:
ग्राम सभा और सतर्कता समिति (विजिलेंस कमेटी): ग्राम सभा की बैठकों का आयोजन, कोरम, एजेंडा, कार्यवाही का रिकॉर्ड और 7 सदस्यीय सतर्कता समिति के गठन व उसके कार्यों का प्रावधान।
कर, शुल्क और राजस्व: पंचायतों द्वारा भवन कर, वाटर टैक्स, वाहन कर, व्यावसायिक फसलों पर कर, और विभिन्न सेवाओं पर शुल्क (फीस) लगाने और उनकी वसूली की प्रक्रिया।
आबादी भूमि और संपत्ति प्रबंधन: आबादी भूमि के पट्टे जारी करने, पुरानी बसावटों के नियमतिकरण, भूमि आवंटन, नीलामी समिति और उप-विभाजन (सब-डिवीजन) के नियम।
कार्य, अनुबंध और खरीदारी: वार्षिक कार्य योजना (एनुअल एक्शन प्लान), निर्माण कार्यों के निष्पादन, ठेकेदारों पर प्रतिबंध और सामग्री की खरीद के लिए पारदर्शी प्रक्रिया (बी.एस.आर. और निविदाएं)।
बजट, लेखा और लेखापरीक्षा (ऑडिट): बजट का निर्माण, कैलेंडर, रोकड़ बही (कैश बुक), वित्तीय औचित्य के मानक और स्थानीय निधि संपरीक्षा अधिनियम के तहत ऑडिट का प्रावधान।
स्थापना और सेवा नियम: पंचायती राज संस्थाओं में विभिन्न श्रेणियों के पदों, भर्ती, आरक्षण, वरिष्ठता, परिवीक्षा काल और अनुशासनात्मक कार्रवाई के नियम।
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 - महत्वपूर्ण नियम और दिशा-निर्देश
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 का सारांश
राज्य सरकार ने राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धाराओं और शक्तियों के तहत राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 बनाए हैं। यह दस्तावेज पंचायती राज संस्थाओं, ग्राम सभा, सतर्कता समितियों, कर निर्धारण, कार्यभार हस्तांतरण, बजट, लेखा और लेखापरीक्षा से संबंधित नियमों का विस्तृत विवरण प्रदान करता है।
मुख्य बिंदु:
ग्राम सभा और बैठकें: प्रत्येक वर्ष कम से कम दो ग्राम सभाओं का आयोजन किया जाना अनिवार्य है। बैठक का स्थान पंचायत कार्यालय या सुविधाजनक सार्वजनिक स्थल होगा। बैठक के नोटिस का प्रकाशन कम से कम 15 दिन पूर्व किया जाना आवश्यक है।
सतर्कता समितियाँ: वित्तीय वर्ष के प्रथम त्रimas में आयोजित होने वाली ग्राम सभा में सतर्कता समिति के गठन का प्रावधान है। इसका उद्देश्य विकास क्रिया-कलापों का त्वरित कार्यान्वयन और निधियों के दुरुपयोग को रोकना है।
कर और फीस का अधिरोपण: पंचायतें अधिनियम के तहत विभिन्न कर, फीस और उपकर (जैसे भवन कर, यात्री कर, वाहन कर, जल कर आदि) अधिरोपित और संग्रहित कर सकती हैं।
स्थावर संपत्तियाँ और आबाद भूमि: पंचायत क्षेत्र की सभी सार्वजनिक भूमि, मार्ग और आबाद भूमि पंचायत में निहित होती हैं। आबाद भूमि का आवंटन और विक्रय निर्धारित नियमों के अनुसार किया जाता है।
बजट, लेखा और संपरीक्षा: पंचायती राज संस्थाओं द्वारा प्रतिवर्ष 15 फरवरी तक आगामी वर्ष का बजट तैयार कर संबंधित प्राधिकारी को प्रस्तुत किया जाता है। लेखाओं की संपरीक्षा राजस्थान स्थानीय निधि संपरीक्षा अधिनियम, 1954 के तहत की जाती है।