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जन्म-मृत्यु पंजीकरण के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
राजस्थान सरकार, आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय द्वारा दिनांक 25.02.2026 को एक परिपत्र (क्रमांक-एफ13/1/3/आरजीआई/बीएस/डीईएस/2017/158) जारी किया गया है। यह परिपत्र जन्म और मृत्यु के पंजीयन के संबंध में जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1969 और राजस्थान जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण नियम 2000 के प्रावधानों के तहत जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
- विलंबित पंजीयन: जन्म की 30 दिवस से एक वर्ष की अवधि की घटनाओं का पंजीयन धारा 13(2) एवं राज्य नियम 9(2) तथा एक वर्ष से अधिक की अवधि का पंजीयन धारा 13(3) एवं राज्य नियम 9(3) के तहत जारी अनुज्ञा के आधार पर किया जाता है।
- दो अनुज्ञा के प्रकरण: कई प्रकरणों में माता-पिता/संरक्षक द्वारा जन्म की विलंबित घटनाओं का पंजीयन दो अलग-अलग अनुज्ञा जारी करवाकर अलग-अलग तिथियों में करवा लिया जाता है, विशेषकर शैक्षणिक लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से।
- निर्णय एवं निर्देश: जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1969 की धारा 4(3) एवं 4(4) के प्रावधान के अंतर्गत यह निर्णय लिया गया है कि जिला रजिस्ट्रार/ब्लॉक सांख्यिकी अधिकारी/रजिस्ट्रार द्वारा दोनों जन्म प्रमाण पत्रों की सत्यता की जाँच, दस्तावेजों एवं साक्ष्यों की संतुष्टि के उपरांत प्रथम बार अनुज्ञा से जारी जन्म प्रमाण पत्र को यथावत रखा जावे और दूसरा अनुज्ञा से जारी जन्म प्रमाण पत्र को निरस्त किया जावे।
- संस्थागत जन्म के मामले में, यदि जन्म राजकीय या निजी चिकित्सा संस्थान में हुआ है, तो ऐसी स्थिति में चिकित्सा संस्थानों में नियुक्त उप-रजिस्ट्रार द्वारा जारी जन्म प्रमाण ही मान्य होगा।
