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ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग - स्थायी आदेश संख्या 31/2017
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रामीण विकास, अनुभाग-5), राजस्थान सरकार द्वारा क्रमांक एफ 27(263) ग्रावि/ग्रुप-5/जीकेन/उपापन/2015-16/92279, दिनांक 13-04-2017 को स्थायी आदेश संख्या 31/2017 जारी किया गया है। यह आदेश ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा क्रियान्वित योजनाओं (विशेषकर महात्मा गांधी मनरेगा योजना) के अंतर्गत कराए जा रहे विकास कार्यों की संपादन व्यवस्था के संबंध में है।
मुख्य बिंदु एवं निर्देश:
- ग्रेवल सड़कों की नियमित मरम्मत और अधिकतम आयु: विभिन्न विकास योजनाओं में निर्मित ग्रेवल सड़कों के वार्षिक क्षरण की रोकथाम हेतु नियत कालीन मरम्मत (Periodical Maintenance) के निर्देश दिए गए हैं। ग्रेवल सड़कों की पुनरावृत्ति (repetitive) मरम्मत कार्य सामान्यतः कार्य पूर्णता प्रमाण-पत्र जारी होने की दिनांक से न्यूनतम 5 वर्ष से पहले नहीं कराया जा सकेगा।
- गांवों के अंदर नालियों के साथ आंतरिक सड़क निर्माण एवं तकनीकी मापदंड: गांवों की आंतरिक सड़कों की चौड़ाई स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। मुख्य आवागमन मार्ग की चौड़ाई भारत सरकार के निर्देश दिनांक 24.04.2012 के अनुसार 3 मीटर निर्धारित की गई है। आंतरिक सीमेंट सड़क की अधिकतम चौड़ाई 5.5 मीटर तक ही अनुमत होगी।
- सार्वजनिक निर्माण विभाग की सड़कों के बर्म की मरम्मत: पीडब्ल्यूडी या अन्य विभागों द्वारा निर्मित सड़कों और उनके बर्म (पटरी) की मरम्मत एवं झाड़ियां काटने का कार्य मनरेगा योजनान्तर्गत दिशा-निर्देशानुसार स्वीकृति उपरांत पंचायती राज संस्थाओं द्वारा कराया जा सकता है।
- गाँवों में श्रमिकों का नियोजन और साफ-सफाई की गतिविधियाँ: श्रमिकों के नियोजन हेतु बीएसआर (BSR) / दर विश्लेषण का निर्धारण स्थानीय निकाय (नगर निगम/परिषद/पालिका) की प्रचलित दरों से 10 प्रतिशत कम दर की सीमा में जिला दर निर्धारण समिति द्वारा पंचायत समितिवार किया जाएगा।
- कदीमी रास्ते और निजी भूमि पर सड़क निर्माण: राजस्व रिकार्ड में दर्ज न होने वाले कदीमी रास्तों पर सड़क निर्माण हेतु विभागीय आदेश संख्या 26/2016 दिनांक 06.04.2016 की शर्त संख्या 13 के अनुसार संबंधित काश्तकारों की सहमति और नियमानुसार शपथ-पत्र के उपरांत कार्य संपादित किया जा सकेगा।
