वरिष्ठ ग्राम विकास अधिकारी (GP 3600, L-10) के कुल 2000 पदों का पंचायत समितिवार वर्गीकरण और आवंटन
वरिष्ठ ग्राम विकास अधिकारी पदों का पंचायत समितिवार वर्गीकरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा वित्त विभाग की आईडी एवं पूर्व आदेशों के क्रम में 'वरिष्ठ ग्राम विकास अधिकारी (GP 3600, L-10)' के सृजित कुल 2000 पदों का पंचायत समितिवार वर्गीकरण और आवंटन जारी कर दिया गया है। यह आदेश शासन सचिव एवं आयुक्त डॉ. जोगा राम द्वारा जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
पदों का विवरण: पूर्व में आवंटित 750 पदों को शामिल करते हुए वरिष्ठ ग्राम विकास अधिकारी के कुल 2000 नए सृजित पदों का जिलेवार और पंचायत समितिवार वर्गीकरण किया गया है।
नियुक्ति की शर्त: यह पद पंचायत समिति की बड़ी ग्राम पंचायतों (जनसंख्या के अनुसार) में सृजित रहेंगे।
सेवा नियम: कार्मिक विभाग, क-ग्रुप-2 की अधिसूचना दिनांक 30 मार्च 2026 के अनुसार उक्त पद (वरिष्ठ ग्राम विकास अधिकारी) राजस्थान ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज राज्य एवं अधीनस्थ सेवा नियम, 1998 के अधीन रहेंगे।
आदेश की प्रति सभी संबंधित जिला कलेक्टरों, मुख्य कार्यकारी अधिकारियों, और विकास अधिकारियों को सूचना एवं आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रेषित कर दी गई है।
बजट घोषणा 2026-27 के अंतर्गत अटल ज्ञान केंद्रों (फेस-2) की स्थापना एवं क्रियान्वयन के संबंध में दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा अटल ज्ञान केंद्र स्थापना के निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा बजट घोषणा 2026-27 के अंतर्गत द्वितीय चरण में 2400 से 3000 तक की आबादी वाले चयनित 1000 ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर अटल ज्ञान केंद्रों की स्थापना एवं क्रियान्वयन के संबंध में आदेश जारी किए गए हैं।
भवन निर्माण एवं लागत विवरण
प्रथम तल पर नया भवन (36'x20' हॉल): अनुमानित लागत 9.60 लाख रुपये प्रति केंद्र (श्रम मद में 2.78 लाख रुपये VBGRAMG से तथा शेष 4.95 लाख रुपये राज्य वित्त आयोग योजना अंतर्गत)।
भू-तल पर नया भवन (30'x20' हॉल): अनुमानित लागत 9.40 लाख रुपये प्रति केंद्र (श्रम मद में 2.87 लाख रुपये VBGRAMG से तथा शेष 4.64 लाख रुपये राज्य वित्त आयोग योजना अंतर्गत)।
पुराने/अनुपयोगी भवनों के लिए: अधिकतम 4.00 लाख रुपये राज्य वित्त आयोग योजना अंतर्गत वहन किए जाएंगे।
अन्य गतिविधियां एवं सुविधाएं (राज्य वित्त आयोग द्वारा वहन)
ई-कियोस्क/फर्नीचर/वर्क स्टेशन एवं वायरिंग: 4.35 लाख रुपये प्रति केंद्र।
कंप्यूटर एवं प्रिंटर: 2.25 लाख रुपये प्रति केंद्र (कंप्यूटर 2.00 लाख रुपये जिसमें अधिकतम 0.50 लाख रुपये प्रति कंप्यूटर तथा प्रिंटर 0.25 लाख रुपये)।
प्रतियोगिता परीक्षाओं की पुस्तकें एवं पत्रिकाएं: 0.30 लाख रुपये प्रति केंद्र।
महत्वपूर्ण निर्देश
सर्वप्रथम भवन निर्माण का कार्य किया जाएगा, जिसके उपरांत अन्य गतिविधियों का निष्पादन होगा।
नवीन भवनों के निर्माण पर होने वाले व्यय को सर्वप्रथम VBGRAMG मद से और तत्पश्चात राज्य वित्त आयोग मद से वहन किया जावेगा।
निर्माण कार्य आर.टी.पी.पी. (RTPP) एक्ट 2012 एवं राजस्थान सार्वजनिक खरीद पारदर्शिता नियम, 2013 के अनुसार किया जाना सुनिश्चित करें।
प्रशासक द्वारा स्वेच्छा से पद से इस्तीफा दिए जाने के संबंध में आदेश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग का महत्वपूर्ण आदेश
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा प्रशासक के स्वेच्छा से इस्तीफा देने के संबंध में नया आदेश जारी किया गया है। यह आदेश क्रमांक ए.15(09)पंथ्रावि/विधि/विविध/2025/ई-54050 दिनांक 31.08.2026 को जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
यदि किसी प्रशासक द्वारा स्वेच्छा से अपने पद से इस्तीफा दिया जाता है, तो ऐसे समस्त प्रकरणों में संबंधित जिला कलेक्टर द्वारा इस्तीफा स्वीकार किया जाकर उसे पदमुक्त किए जाने के आदेश स्वयं स्तर पर जारी किए जाने की कार्रवाई की जाएगी।
इसकी सूचना पंचायती राज विभाग को प्रेषित की जावेगी।
यह आदेश सक्षम स्तर से अनुमोदित है।
यह आदेश जसवंत सिंह, उप आयुक्त एवं उप शासन सचिव (प्रथम) द्वारा जारी किया गया है और इसकी प्रतियां सभी संबंधित जिला कलेक्टरों, संभागीय आयुक्तों और जिला परिषदों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्रवाई हेतु भेजी गई हैं।
राजस्थान ग्रामीण विकास राज्य सेवा के कनिष्ठ वेतन श्रृंखला के अधिकारियों का पदस्थापन आदेश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग राजस्थान सरकार पदस्थापन आदेश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), जयपुर द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ 2( )परावि/प्रशा-1/आरआरडीएस/पदस्थापन/2026-87859 दिनांकित 16-08-2026 के अनुसार, राजस्थान ग्रामीण विकास राज्य सेवा की कनिष्ठ वेतन श्रृंखला में नवोन्नत निम्नलिखित अधिकारियों का पदस्थापन राज्यहित में तत्काल प्रभाव से रिक्त पदों पर किया गया है।
मुख्य बिंदु:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
आदेश क्रमांक: एफ 2( )परावि/प्रशा-1/आरआरडीएस/पदस्थापन/2026-87859
कुल अधिकारी: इस आदेश के तहत कुल 118 विकास अधिकारी एवं संबंधित अधिकारियों का नवीन पदस्थापन किया गया है।
विशेष निर्देश: प्रस्तावित नगरीय निकाय एवं पंचायतीराज संस्थाओं के आम चुनावों के मद्देनजर सभी अधिकारियों को उनके वर्तमान पद से कार्यमुक्त करते हुए निर्देशित किया जाता है कि वे बिना कार्यग्रहण काल/अवकाश का उपयोग किये तुरन्त प्रभाव से अपने नवीन पद का कार्यग्रहण कर पालना रिपोर्ट तत्काल भेजेंगे।
अनुशासनात्मक कार्रवाई: आदेश की पालना के अभाव में अनुशासनत्मक कार्रवाई अमल में लायी जायेगी, जिसके लिए अधिकारीगण स्वयं उत्तरदायी होंगे।
अटल ज्ञान केंद्रों में क्यूबिकल आधारित फर्नीचर और वर्क स्टेशन व्यवस्था स्थापित किए जाने के संबंध में
अटल ज्ञान केंद्रों में आधुनिक क्यूबिकल आधारित फर्नीचर और वर्क स्टेशन व्यवस्था
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज) राजस्थान सरकार द्वारा बजट घोषणा वर्ष 2025-26 के अंतर्गत निर्मित किए जा रहे अटल ज्ञान केंद्रों की कार्यप्रणाली और उपयोगिता को अधिक प्रभावी बनाने के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
माननीय मुख्यमंत्री महोदय की अध्यक्षता में दिनांक 04.04.2026 को आयोजित समीक्षा बैठक में दिए गए निर्देशों के क्रम में, पूर्व में निर्धारित सामान्य फर्नीचर व्यवस्था के स्थान पर आधुनिक क्यूबिकल आधारित फर्नीचर/वर्क स्टेशन व्यवस्था विकसित की जाएगी, जिससे अध्ययनरत विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को बेहतर और व्यवस्थित अध्ययन वातावरण मिल सके।
मुख्य बिंदु एवं वित्तीय संशोधन
उद्देश्य: प्रदेश की तीन हजार से अधिक आबादी वाली ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर आधुनिक पुस्तकालय एवं अध्ययन सुविधाओं का विकास।
संशोधित लागत: वित्त विभाग की आईडी संख्या 332601032 दिनांक 01.07.2026 के द्वारा सामान्य फर्नीचर हेतु पूर्व में स्वीकृत राशि रु. 2.35 लाख के स्थान पर क्यूबिकल आधारित फर्नीचर/वर्क स्टेशन हेतु रु. 4.10 लाख प्रति अटल ज्ञान केंद्र स्वीकृत करने की संशोधित सहमति प्रदान की गई है।
व्यय का स्रोत: उक्त स्वीकृत राशि का व्यय राज्य वित्त आयोग के अंतर्गत संबंधित पंचायतों की स्वीकृत अनुदान/उपलब्ध राशि से किया जाएगा।
फर्नीचर एवं वर्क स्टेशन का अनुमानित विवरण
वर्क स्टेशन (750mm x 600mm x 1200mm) - 20 नग (कुल लागत: रु. 3,07,000)
विज़िटर चेयर कुशन सीट और बैक के साथ - 20 नग (कुल लागत: रु. 40,000)
रिवॉल्विंग चेयर - 1 नग (कुल लागत: रु. 4,000)
टेबल (900mm x 600mm x 750mm) - 1 नग (कुल लागत: रु. 5,000)
कुल अनुमानित लागत: रु. 4,10,000 प्रति अटल ज्ञान केंद्र
सभी संबंधित जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, अति. मुख्य कार्यकारी अधिकारी, अधिशाषी/सहायक अभियंता और विकास अधिकारी, पंचायत समिति को निर्देशित किया जाता है कि समस्त कार्य विभाग द्वारा अनुमोदित ड्राइंग, गुणवत्ता मानकों एवं तकनीकी विनिर्देशों के अनुरूप ही संपन्न हों तथा कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग एवं समयबद्ध पूर्णता सुनिश्चित की जाए।
ग्रामीण विकास मंत्रालय अधिसूचना: अकुशल हस्त कार्यकर्ताओं के लिए राज्य-वार मजदूरी दरें (1 जुलाई, 2026 से प्रभावी)
ग्रामीण विकास मंत्रालय अधिसूचना
भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा 30 जून, 2026 की अधिसूचना (का.आ. 3518 (अ)) के माध्यम से 'विकसित भारत - रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण): वीबी-जी राम जी (विकसित भारत – जी राम जी) अधिनियम, 2025' के अंतर्गत अकुशल हस्त कार्यकर्ताओं के लिए राज्य-वार संशोधित मजदूरी दरें जारी कर दी गई हैं। यह अधिसूचना 1 जुलाई, 2026 से प्रवृत्त होगी।
मुख्य बिंदु:
यह अधिसूचना वर्ष 2025 के अधिनियम संख्या 36 की धारा 10 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए जारी की गई है।
इसके तहत विभिन्न राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों में अकुशल हस्त कार्य के लिए प्रतिदिन की मजदूरी दर निर्धारित की गई है।
हिमाचल प्रदेश के लिए गैर-अनुसूचित क्षेत्र में 300.00 रुपये और अनुसूचित क्षेत्र में 375.00 रुपये निर्धारित किए गए हैं।
सिक्किम के अधिकांश क्षेत्रों में 300.00 रुपये तथा इसकी 3 ग्राम पंचायतों (ज्ञानथांग, लाचुंग और लाचेन) के लिए 450.00 रुपये प्रति दिन तय किए गए हैं।
अंडमान और निकोबार के लिए, अंडमान जिला (348.00 रुपये) और निकोबार जिला (367.00 रुपये) की दरें अलग-अलग हैं।
फाइल संख्या: फा. सं. जे-11060/16/2026-आरई-III, हस्ताक्षर: रोहिणी रा भाजीभाकरे, संयुक्त सचिव।
दिनांक 29 जून 2026 को विशेष ग्राम सभा के आयोजन बाबत आदेश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग राजस्थान सरकार का महत्वपूर्ण निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा आदेश जारी कर राज्य की समस्त ग्राम पंचायतों में दिनांक 29 जून, 2026 को विशेष ग्राम सभा आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं।
विशेष ग्राम सभा के मुख्य बिंदु एवं उद्देश्य
ग्रामीण सेवा शिविर-2026: दिनांक 12 जून, 2026 से 15 जुलाई, 2026 तक आयोजित हो रहे जन कल्याण शिविरों के तहत ग्रामीण विकास विभाग की योजनाओं का प्रचार-प्रसार, कार्य प्रस्ताव प्राप्त करना, प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत किस्तें व लंबित स्वीकृतियां जारी करना तथा भूमिहीन लाभकारियों को भूमि आवंटन आदि गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।
वीबी-जी राम जी योजना: दिनांक 01 जुलाई, 2026 से वीबी-जी राम जी योजना का शुभारंभ किया जा रहा है। इस संबंध में विशेष ग्राम सभा में योजना का प्रचार-प्रसार, प्राप्त कार्यों के प्रस्ताव एवं कार्ययोजना का अनुमोदन किया जाना है।
प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (आवास प्लस सर्वे-2024): 'सभी के लिए आवास' योजना के तहत आवास प्लस सर्वे-2024 के माध्यम से किए गए सर्वेक्षण के आधार पर तैयार की गई वरीयता सूची का ग्राम सभा में अनुमोदन कराया जाना आवश्यक है।
अतः सभी जिला परिषद के मुख्य/अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारियों और पंचायत समितियों के विकास अधिकारियों से अनुरोध किया गया है कि वे अपने जिले की सभी ग्राम पंचायतों में दिनांक 29 जून, 2026 को विशेष ग्राम सभा का आयोजन सुनिश्चित कराएं।
दिनांक 29 जून, 2026 को विशेष ग्राम सभा के आयोजन बाबत
विशेष ग्राम सभा आयोजन निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा जारी पत्र (क्रमांक: एफ.15(20)पंच्रावि/विधि/वि0ग्रा0सभा/2026/ई-81146, दिनांक 22-06-2026) के माध्यम से प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों में दिनांक 29 जून, 2026 को आयोजित होने वाली विशेष ग्राम सभा के संबंध में निर्देश प्रेषित किए गए हैं।
विशेष ग्राम सभा के मुख्य एजेंडे एवं बिंदु
ग्राम पंचायत क्षेत्राधिकार से मांस की अवैध दुकानें हटाया जाना।
चरागाह एवं जलाशय क्षेत्रों में अतिक्रमणकारियों के नाम ग्राम सभा में सार्वजनिक कर अतिक्रमण हटाना।
एक गांव-एक चरागाह विकास गतिविधि- तय फॉर्मेट मय क्षेत्रफल का विवरण अंकित कराते हुए।
चरागाह विकास समिति के पुनर्गठन का अनुमोदन करना।
ग्राम पंचायत की समस्त परिसंपत्तियों (चरागाह, आबादी भूमि, पंचायत के अधीन निर्मित भवन इत्यादि) की सूची को ग्राम सभा में उपलब्ध कराकर परिसंपत्ति रजिस्टर में इंदराज के प्रमाणीकरण का अनुमोदन करना।
जलग्रहण विकास समितियों का पुनर्गठन एवं नए सचिव का चयन।
पं. दीनदयाल उपाध्याय चरागाह विकास एवं गौमाता आश्रय स्थल हेतु चयनित ग्राम पंचायतों में चरागाह भूमि (25 हेक्टेयर से अधिक) का चिन्ह्नीकरण।
घुमन्तु परिवारों को आवासीय भूखंडों के पट्टे आवंटन करना।
समस्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी (जिला परिषद) और विकास अधिकारी (पंचायत समिति) को निर्देशित किया गया है कि वे अपने क्षेत्र की सभी ग्राम पंचायतों में इन बिंदुओं को सम्मिलित करते हुए नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग: ग्राम विकास अधिकारी एवं वरिष्ठ ग्राम विकास अधिकारी के पदों का सृजन
ग्राम विकास अधिकारी एवं वरिष्ठ ग्राम विकास अधिकारी पदों का सृजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ28(40)परावि/प्रशा.2/ग्राविअ/ज्ञापन/2022-20135 के अंतर्गत वित्त (व्यय-5) विभाग की आईडी संख्या 332600780 दिनांक 23.06.2026 की सहमति के अनुसरणा में नवगठित पंचायती राज संस्थाओं के ग्राम पंचायत स्तर पर पदों का सृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
ग्राम विकास अधिकारी: पूर्व में स्वीकृत 10554 पदों के अतिरिक्त 3099 नवीन पद सृजित किए गए हैं। वर्तमान में कुल 14403 ग्राम पंचायतों हेतु 10554 ग्राम विकास अधिकारी एवं 750 वरिष्ठ ग्राम विकास अधिकारी कुल 11304 पद स्वीकृत थे, जिसके क्रम में 3099 नवीन पद स्वीकृत किए गए हैं। (ग्रेड पे-2400, एल-6)
वरिष्ठ ग्राम विकास अधिकारी: पदोन्नति के अवसर उपलब्ध कराने हेतु 1250 पदों को वरिष्ठ ग्राम विकास अधिकारी के पद में क्रमोन्नत किए जाने की सहमति प्रदान की गई है। विभाग द्वारा बड़ी ग्राम पंचायतों में वरिष्ठ ग्राम विकास अधिकारी के कुल 2000 पद (750+1250) हो जाएंगे। (ग्रेड पे-3600, एल-10)
उक्त पदों के कार्यालयवार आवंटन की कार्यवाही पृथक से की जाएगी। आदेश डॉ. जोगा राम, शासन सचिव एवं आयुक्त द्वारा जारी किया गया है।
प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण: दिनांक 29.06.2026 को विशेष ग्राम सभा के आयोजन और ड्राफ्ट वरीयता सूची (PWL) के अनुमोदन के संबंध में
प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत विशेष ग्राम सभा आयोजन निर्देश
ग्रामीण विकास विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुसार, प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत आवास+ 2024 सर्वेक्षण के क्रम में तैयार ड्राफ्ट Permanent Wait List (PWL) का विशेष ग्राम सभा द्वारा दिनांक 29.06.2026 को अनुमोदन कराया जाना है।
मुख्य बिंदु एवं दिशा-निर्देश
ग्राम सभा का आयोजन: दिनांक 29.06.2026 को सभी ग्राम पंचायतों में विशेष ग्राम सभा का आयोजन किया जाएगा।
अंतिम तिथि: अंतिम वरीयता सूची आवास सॉफ्ट पर अपलोड करने की अंतिम तिथि 10.07.2026 निर्धारित की गई है।
आवास सॉफ्ट सूची: आवास सॉफ्ट पर ग्राम पंचायतवार प्रदर्शित ड्राफ्ट वरीयता सूची को 25.06.2026 तक डाउनलोड कर संबंधित ग्राम पंचायत, सरकारी कार्यालय और सार्वजनिक स्थलों के नोटिस बोर्ड पर आमजन के अवलोकन हेतु प्रदर्शित किया जाना है।
अपील का प्रावधान: यदि किसी पात्र परिवार का नाम सूची में शामिल नहीं है या गलत तरीके से काटा गया है, तो वे निर्धारित प्रारूप में आवश्यक दस्तावेजों के साथ ग्राम सभा या जिला अपीलेट कमेटी के समक्ष अपील प्रस्तुत कर सकते हैं।
सभी संबंधित ग्राम पंचायतों और अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे निर्धारित समयावधि में इन निर्देशों की अनुपालना सुनिश्चित करें।
दिनांक 26 मई, 2026 को विशेष ग्राम सभा के आयोजन बाबत आवश्यक दिशा-निर्देश
विशेष ग्राम सभा आयोजन (26 मई, 2026)
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा जारी पत्र (क्रमांक: एफ.15(20)पंवैधि/वि0ग्रा0सभा/2026/ई-81146, दिनांक: 23.05.2026) के अनुसार दिनांक 26 मई, 2026 को राज्य की सभी ग्राम पंचायतों में विशेष ग्राम सभा का आयोजन किया जाना है।
ग्राम सभा के मुख्य एजेंडा एवं बिंदु:
ग्राम (ग्लोबल राजस्थान एग्रोटेक मीट) 2026 के बारे में जानकारी:
राज्य सरकार द्वारा 23 से 25 मई, 2026 तक प्रस्तावित 'GRAM-2026' आयोजन को वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में ईंधन संयम की अपील और मुख्यमंत्री महोदय के ईंधन बचत हेतु निर्देशों के कारण कुछ समय के लिए स्थगित किया गया है, जो शीघ्र ही आयोजित होगा।
ग्राम सभा में नागरिकों को इस आयोजन की रूपरेखा, ड्रोन तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, प्रेसिजन फार्मिंग, जैविक एवं प्राकृतिक खेती जैसी आधुनिक तकनीकों के बारे में बताया जाएगा।
किसानों, स्टार्टअप्स और कृषि वैज्ञानिकों के बीच सीधा संवाद स्थापित कर कृषि को अधिक लाभदायक बनाने पर चर्चा होगी।
ग्रामोत्थान शिविरों / ग्राम रथ यात्रा की प्रगति की जानकारी:
ग्राम उत्थान शिविर अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्र के समस्त 2770 गिरदावर सर्किल पर शिविर आयोजित किए गए, जिनमें 31.5 लाख से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया।
इन शिविरों में कृषि, उद्यान, कृषि विपणन, पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन, सहकारिता, जल संसाधन, ऊर्जा, उद्योग, ग्रामीण विकास, पंचायत राज तथा राजस्व विभाग ने भाग लिया तथा मौके पर ही ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान किया गया।
अधिकारियों की उपस्थिति एवं निर्देश:
मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद और विकास अधिकारी, पंचायत समिति यह सुनिश्चित करेंगे कि दिनांक 26 मई, 2026 को आयोजित होने वाली प्रत्येक ग्राम सभा में जिला स्तर या पंचायत समिति स्तर का कोई अधिकारी अनिवार्य रूप से उपस्थित रहे तथा ग्राम सभाओं का प्रभावी पर्यवेक्षण किया जाए।
ग्रामीण क्षेत्रों में चरणबद्ध रूप से स्ट्रीट लाइट/रोड लाइट व्यवस्था स्थापित किए जाने के संबंध में
ग्रामीण क्षेत्रों में स्ट्रीट लाइट और रोड लाइट व्यवस्था
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में चरणबद्ध रूप से स्ट्रीट लाइट और रोड लाइट व्यवस्था स्थापित करने के संबंध में दिशानिर्देश जारी किए गए हैं। यह पहल माननीय मंत्री महोदय, पंचायती राज विभाग द्वारा विधानसभा में की गई घोषणा के अनुपालन में है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रात्रिकालीन अंधकार की समस्या का समाधान करना और प्रत्येक गांव को प्रकाशमान बनाना है।
मुख्य उद्देश्य
ग्रामीण क्षेत्रों में रात्रि के समय सुरक्षित एवं सुगम आवागमन सुनिश्चित करना।
ग्रामों की मुख्य बस्तियों, बाजारों, सार्वजनिक स्थलों, विद्यालयों, पंचायत भवनों और स्वास्थ्य केंद्रों पर पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था उपलब्ध कराना।
ऊर्जा दक्ष एवं पर्यावरण अनुकूल प्रकाश व्यवस्था को बढ़ावा देना।
विद्युत आपूर्ति की कमी वाले क्षेत्रों में सौर ऊर्जा आधारित स्ट्रीट लाइट/रोड लाइट की स्थापना को प्रोत्साहित करना।
ग्रामीण क्षेत्रों में दुर्घटनाओं एवं आपराधिक गतिविधियों की संभावना को कम करना तथा ग्रामीण विकास को गति प्रदान करना।
क्रियान्वयन क्षेत्र एवं प्राथमिकता
प्रत्येक ग्राम पंचायत में सभी ग्रामीण क्षेत्रों, आबादी क्षेत्रों, बाजारों, मुख्य मार्गों, आंतरिक मार्गों और अन्य महत्वपूर्ण स्थलों पर चरणबद्ध रूप से स्ट्रीट लाइट/रोड लाइट लगाई जाएगी। कार्य प्रारंभ होने की प्राथमिकता में कच्ची बस्तियां, कमजोर वर्ग की बस्तियां, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति वर्ग की बस्तियां तथा मुख्य मार्ग, बाजार, बस स्टैंड, पंचायत भवन, विद्यालय, आंगनबाड़ी केंद्र एवं स्वास्थ्य केंद्र जैसे सार्वजनिक स्थान शामिल होंगे।
स्ट्रीट लाइट की स्थापना एवं विद्युत कनेक्शन
एल.ई.डी. स्ट्रीट लाइट: विद्युत वितरण निगम के खंभों पर नियमानुसार सड़क की चौड़ाई के अनुसार एल.ई.डी. लाइट लगाई जाएगी।
सौर ऊर्जा आधारित स्ट्रीट लाइट: जहां विद्युत पोल उपलब्ध नहीं हैं, विद्युत आपूर्ति नियमित नहीं है अथवा विद्युत वितरण का नेटवर्क उपलब्ध नहीं है, वहां सौर ऊर्जा आधारित स्ट्रीट लाइट स्थापित की जा सकती है।
विद्युत कनेक्शन: स्ट्रीट लाइट/रोड लाइट हेतु विद्युत कनेक्शन ग्राम पंचायत द्वारा लिया जाएगा, जो ग्रामवार, ग्राम पंचायतवार या क्षेत्रवार हो सकता है।
व्यय का प्रबंधन
राज्य वित्त आयोग षष्ठ/सप्तम के अंतर्गत जारी विभागीय दिशा-निर्देशों में मूलभूत एवं विकास कार्यों के लिए हस्तांतरित 55 प्रतिशत राशि से सड़कों एवं सार्वजनिक स्थानों पर उचित प्रकाश व्यवस्था और 40 प्रतिशत राशि का उपयोग रोड लाइट/स्ट्रीट लाइट के अंतर्गत किया जाना अनुमत है।
ई-पंचायत पोर्टल के माध्यम से क्रियान्वयन
योजना के पारदर्शी एवं प्रभावी क्रियान्वयन हेतु प्रशासनिक, तकनीकी एवं वित्तीय स्वीकृतियां जारी करना, राशि भुगतान, कार्य की जियो-टैगिंग एवं फोटो अपलोड करना तथा ऑनलाइन मॉनिटरिंग एवं प्रगति समीक्षा सभी कार्य ई-पंचायत पोर्टल के माध्यम से किए जाएंगे। जिला स्तर पर अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी, पंचायती राज इसके नोडल अधिकारी होंगे।
विकसित भारत—रोजगार और आजीविका के लिए गारण्टी मिशन (ग्रामीण): वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025 के प्रवर्तन की अधिसूचना
ग्रामीण विकास मंत्रालय अधिसूचना
भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय (ग्रामीण विकास विभाग) द्वारा जारी अधिसूचना संख्या का.आ. 2382 (अ.), नई दिल्ली, दिनांक 11 मई, 2026 के अनुसार केंद्रीय सरकार ने विकसित भारत—रोजगार और आजीविका के लिए गारण्टी मिशन (ग्रामीण): वीबी-जी राम जी (विकसित भारत - जी राम जी) अधिनियम, 2025 (2025 का 36) की धारा 1 की उपधारा (2) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए महत्वपूर्ण तिथि तय की है।
मुख्य बिंदु:
प्रवर्तन तिथि: 1 जुलाई, 2026 से उक्त अधिनियम के उपबंध भारत के सभी राज्यों और संघ राज्यक्षेत्रों में प्रवृत्त होंगे।
फाइल संख्या: [फा. सं. जे-11015/2/2025-यू.एस.- आर. ई. –V]
हस्ताक्षरकर्ता: रोहिणी रा भािीभाकरे, संयुक्त सचिव
ग्रामीण क्षेत्रों में निर्माण कार्यों हेतु भूमि स्वामित्व एवं मार्गदर्शन बाबत निर्देश
विभागीय ग्रामीण कार्य निर्देशिका-2025 के प्रावधानों की जानकारी
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास विभाग (अनुभाग-5) द्वारा क्रमांक एफ 27(201)ग्राविफो/अनु-5/जीकेन/सरपंच संघ/2024-25 के अंतर्गत दिनांक 14-08-2025 से लागू विभागीय ग्रामीण कार्य निर्देशिका-2025 के बिंदु संख्या 10 एवं परिशिष्ट-2 के प्रावधानों के संबंध में मार्गदर्शन जारी किया गया है। यह निर्देश ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न केंद्रीय एवं राज्य प्रवर्तित योजनाओं के अंतर्गत कराए जाने वाले निर्माण कार्यों को तकनीकी, सुगमता और गुणवत्ता की दृष्टि से क्रियान्वित करने के लिए है।
मुख्य बिंदु एवं दिशा-निर्देश
भूमि स्वामित्व और विवाद से बचाव: निर्देशिका के बिंदु संख्या 10 में 'भूमि स्वामित्व तय करने एवं कार्य को विवाद से बचाने का दायित्व' और परिशिष्ट-2 में 'सामान्य तौर पर संपादित की जाने वाली गतिविधियों के लिए आवश्यक जमीन का विवरण' से संबंधित प्रावधान दिए गए हैं।
आबादी भूमि और निर्माण कार्य: नवीन आंगनबाड़ी भवन, विद्यालय, सामुदायिक भवन, पंचायत भवन, उप स्वास्थ्य केंद्र, वाचनालय, प्याऊ और नए जल स्रोत लगाने के लिए आबादी क्षेत्र में सक्षम प्राधिकारी/संस्था से अनापत्ति प्रमाण-पत्र प्राप्त कर गतिविधि के नाम आवंटन/पट्टा जारी कराना आवश्यक है।
रास्ता/गोचर/वन भूमि संबंधी प्रावधान: नदी, नाला, तालाब के भरौव क्षेत्र में, रेलवे लाइन या सड़क की सीमा में निर्माण कार्य सामान्यतः स्वीकृत नहीं होते हैं। हालांकि, सार्वजनिक शौचालय, नालियां, बोरिंग, टंकी, हैंडपंप आदि के लिए ग्राम पंचायत स्थानीय स्तर पर आपत्तियां मांगकर और कोरम में निर्णय लेकर इसे शिथिल कर सकती है, जो पंचायत के रिकॉर्ड में होना अनिवार्य है। वन/अरण्य भूमि के मामलों में संबंधित विभाग से अनापत्ति प्रमाण-पत्र प्राप्त किया जाना चाहिए।
खातेदारी भूमि और गिफ्ट/दान: किसी भी परिसंपत्ति निर्माण हेतु खातेदारी भूमि दान/समर्पण करवाकर नामांतरण, खसरा मैप में लोकेशन दर्ज करना और सीमा ज्ञान करवाना आवश्यक है। एक से अधिक खातेदार होने पर सभी की सहमति और नोटरी पब्लिक से प्रमाणीकरण अनिवार्य है।
यह आदेश शासन सचिव, ग्रामीण विकास विभाग (कृष्ण कुणाल) द्वारा जारी किया गया है और सभी संबंधित जिला कलेक्टरों, मुख्य कार्यकारी अधिकारियों तथा जिला परिषदों को आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रेषित किया गया है।
24 अप्रैल 2026 को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस मनाने के संबंध में निर्देश
राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस 2026 का आयोजन
पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश (क्रमांक: एफ 4(0) PR / DP / राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस 2026 / 81591) के अनुसार 24 अप्रैल 2026 को जिला, ब्लॉक एवं ग्राम पंचायत स्तर पर राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस समारोहपूर्वक आयोजित किया जाएगा।
मुख्य उद्देश्य एवं महत्व
73वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम के लागू होने की याद में प्रतिवर्ष 24 अप्रैल को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर सहभागी लोकतंत्र की भावना को मजबूत करना और आत्मनिर्भर पंचायत की परिकल्पना को साकार करना है।
आयोजित की जाने वाली मुख्य गतिविधियाँ
आम नागरिकों व लाइन विभागों के अधिकारियों/कार्मिकों की सार्थक भागीदारी सुनिश्चित करते हुए ग्राम सभा का आयोजन।
आयोजित ग्राम सभा की बैठक कार्यवाही विवरण सभा सार के माध्यम से तैयार करना।
कार्यक्रम में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली पंचायतों का अभिनंदन।
सामुदायिक सहभागिता एवं जागरूकता सृजन संबंधी गतिविधियाँ।
महिला नेतृत्व वाले विकास, पंचायत उन्नति सूचकांक के अंतर्गत प्रदर्शन, सतत विकास लक्ष्यों के स्थानीयकरण (LSDGs) में प्रगति और ओएसआर (OSR) को बढ़ाने की रणनीतियों पर चर्चा।
पंचायती राज मंत्रालय के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल को फॉलो व टैग करना।
व्यय और वित्त पोषण
इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों/समारोहों में किया जाने वाला व्यय ओएसआर (OSR)/आरजीएसए (RGSA) के ई.ई.सी. (IEC) मद या अन्य केंद्रीय व राज्य ग्रामीण विकास योजनाओं से किया जा सकता है। इसे सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान करने के निर्देश दिए गए हैं।
ग्राम स्तर पर प्रत्येक माह के प्रथम मंगलवार को जनसुनवाई के संबंध में दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा जनसुनवाई व्यवस्था
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा माननीय पंचायती राज मंत्री महोदय की दिनांक 17.03.2026 को आयोजित बैठक में प्रदत्त निर्देशों की पालना के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
ग्राम स्तर पर जनसुनवाई: प्रत्येक माह के प्रथम मंगलवार को ग्राम स्तर पर नियमित रूप से जनसुनवाई का आयोजन किया जाएगा।
गायों का चयन: प्रत्येक ग्राम पंचायत में जनसुनवाई हेतु सबसे कम जनसंख्या वाले ग्राम का सर्वप्रथम चयन किया जाए।
अधिकारियों की मॉनीटरिंग: मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) द्वारा 2 माह में कम से कम एक बार तथा खण्ड विकास अधिकारी (BDO) द्वारा माह में कम से कम एक बार आवश्यक रूप से जन-समस्याओं के समाधान की मॉनीटरिंग सुनिश्चित की जाएगी।
जारीकर्ता: डॉ. जोगा राम, शासन सचिव एवं आयुक्त, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण (PMAY-G) के अंतर्गत लाभार्थियों के भौतिक सत्यापन एवं उन्हें अपात्र घोषित करने हेतु यह 'रिमांड ऑफ फॉर्म' (Remand Off Form) उपयोग
यह प्रपत्र PMAY-G की स्थाई वरीयता सूची (PWL) में शामिल लाभार्थियों के ग्राम सभा द्वारा भौतिक सत्यापन के लिए है।
ग्राम सभा की बैठक में योजनान्तर्गत निर्धारित मापदण्डों के परीक्षण उपरान्त लाभार्थियों को पात्र या अपात्र घोषित कर अनुमोदन किया जाता है।
प्रपत्र में लाभार्थी का नाम, पिता/पति का नाम, गाँव का नाम, PMAY-G ID एवं PWL में वरीयता क्रमांक दर्ज करने का स्पष्ट प्रावधान है।
अपात्रता के मुख्य कारण (मापदंड):
प्रपत्र में अपात्रता के 16 बिंदु दिए गए हैं, जिनमें से किसी एक का होना अपात्रता (Remand Off) के लिए पर्याप्त है:
पूर्व में मकान होना या किसी आवास योजना से लाभान्वित होना।
लाभार्थी की मृत्यु हो जाना (तथा परिवार में कोई न होना) या ग्राम पंचायत से पलायन कर जाना।
किसी भी प्रकार का वाहन (मोटरसाईकिल, टेम्पो, कार, जीप, नाव) या 3-व्हीलर/4-व्हीलर मशीनरी होना।
किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) की लिमिट 50,000 रुपये से अधिक होना।
परिवार के किसी सदस्य का राजकीय सेवा में होना, गैर कृषि उद्यम में पंजीकृत होना या मासिक आय 10,000 रुपये होना।
आयकर (Tax) या पेशेवर कर (Professional Tax) का भुगतान करने वाला होना।
घर में फ्रीज या बेसिक फोन होना।
स्वयं की 2.5 एकड़ जमीन के साथ कृषि यंत्र होना, 5.0 एकड़ सिंचित भूमि होना, या कम से कम 7.5 एकड़ भूमि/1 सिंचाई उपकरण होना।
राजस्थान पंचायती राज संस्थाओं के जनप्रतिनिधियों के मानदेय में वृद्धि की अधिसूचना
पंचायती राज संस्थाओं के जनप्रतिनिधियों के मानदेय में संशोधन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 के नियम 27 से 30 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित सदस्यों एवं जनप्रतिनिधियों के मानदेय की दरों में संशोधन किया गया है। यह अधिसूचना माननीय मुख्यमंत्री महोदय द्वारा दिनांक 27.02.2026 को वित्त एवं विनियोग विधेयक (बजट 2026-27) पर चर्चा की घोषणाओं के बिंदु सं.-69 के क्रम में जारी की गई है।
संशोधित मानदेय की दरें
जिला प्रमुख, जिला परिषद: वर्तमान मानदेय 16,698/- रुपये से बढ़कर 18,368/- रुपये प्रति माह
प्रधान, पंचायत समिति: वर्तमान मानदेय 11,689/- रुपये से बढ़कर 12,858/- रुपये प्रति माह
सरपंच, ग्राम पंचायत: वर्तमान मानदेय 6,679/- रुपये से बढ़कर 7,347/- रुपये प्रति माह
मुख्य बिंदु एवं निर्देश
जनप्रतिनिधियों को देय मानदेय का भुगतान राज्य वित्त आयोग के तहत मिलने वाली अनुदान राशि से किया जाएगा।
यह अधिसूचना वित्त (व्यय-5) विभाग की आईडी संख्या 332600452 दिनांक 19.03.2026 से प्राप्त सहमति के अनुसरण में जारी की गई है।
मानदेय में यह वृद्धि 01.04.2026 (April Paid in May) से प्रभावी होगी।
दिनांक 22 जनवरी, 2026 को विशेष ग्राम सभा का आयोजन एवं गिरदावर सर्किल स्तर पर विशेष शिविरों के संबंध में निर्देश
विशेष ग्राम सभा और विशेष शिविर आयोजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज) और कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के दिशा-निर्देशों के क्रम में राज्य की प्रत्येक ग्राम पंचायत में दिनांक 22 जनवरी, 2026 को विशेष ग्राम सभा का आयोजन किया जाना है। इस विशेष ग्राम सभा का मुख्य उद्देश्य आगामी GRAM-2026 (Global Rajasthan Agri-Tech Meet-2026) और विभिन्न विभागीय अभियानों के प्रति जागरूकता पैदा करना है।
मुख्य बिंदु एवं दिशा-निर्देश:
ग्राम सभा आयोजन: दिनांक 22 जनवरी, 2026 को सभी ग्राम पंचायतों में विशेष ग्राम सभा आयोजित होगी जिसमें स्वामित्व कार्ड वितरण और अनुपयोगी विद्यालय भवन में नई स्वीकृत ग्राम पंचायत का कार्यालय प्रारंभ करने जैसे विषयों पर चर्चा व कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
गिरदावर सर्किल स्तर पर विशेष शिविर: बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर दिनांक 23 जनवरी, 2026 से इन शिविरों का शुभारंभ होगा। इसके पश्चात दिनांक 24, 25 एवं 31 जनवरी, 2026 तथा 01 एवं 05 से 09 फरवरी, 2026 (कुल 10 दिवस) तक प्रत्येक गिरदावर वृत्त (ILR) पर प्रातः 10:00 बजे से सायं 05:00 बजे तक विशेष शिविर लगाए जाएंगे।
भाग लेने वाले विभाग: इन शिविरों में कृषि, उद्यानिकी, कृषि विपणन, पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन, सहकारिता, जल संसाधन, ऊर्जा, उद्योग, आपदा प्रबंधन, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के क्षेत्रीय अधिकारी एवं कर्मचारी भाग लेंगे।
विभागीय गतिविधियां: शिविरों में सॉइल हेल्थ कार्ड वितरण, पीएम किसान निधि डीबीटी, फसल बीमा, किसान क्रेडिट कार्ड आवेदन, मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना, पीएम आवास योजना (PMAY-G) के तहत गृह प्रवेश, पीएम सूर्य घर योजना पंजीकरण और विभिन्न स्वरोजगार व अनुदान योजनाओं के आवेदन तैयार किए जाएंगे।
उदयपुर जिला ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन संबंधी शुद्धि पत्र
उदयपुर जिला ग्राम पंचायत एवं पंचायत समिति पुनर्गठन शुद्धि पत्र
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा आदेश क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/894, दिनांक 28-12-2025 के माध्यम से उदयपुर जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन से संबंधित पूर्व में जारी अधिसूचना में लिपकीय त्रुटियों के सुधार हेतु शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु एवं विवरण
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
दिनांक: 28-12-2025
संबंधित जिला: उदयपुर
ग्राम पंचायतों हेतु संशोधन: सायरा पंचायत समिति के अंतर्गत पूर्व प्रकाशित विवरण 'भानपुर' के स्थान पर कॉलम 7 के अनुसार 'भानपुरा' पढ़ा जाए।
पंचायत समितियों हेतु संशोधन: कुराबड और गिरवा पंचायत समितियों के अंतर्गत पूर्व प्रकाशित विवरण (जैसे 'मामादेव' और 'साठपुर मीणा') से संबंधित प्रविष्टियों में संशोधन करते हुए कुछ प्रविष्टियों को विलोपित किया गया है तथा अन्य सुधार किए गए हैं।
यह शुद्धि पत्र प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात पूर्व में प्रकाशित अधिसूचनाओं में हुई लिपकीय त्रुटियों को सुधारने के लिए जारी किया गया है।
जिला सलूंबर की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन से संबंधित शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा जारी शुद्धि पत्र
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवारा/2024/889 दिनांक 28-12-2025 के तहत जिला सलूंबर की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसर्जन से संबंधित पूर्व में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटिवश हुए गलत प्रकाशन को सुधारने हेतु शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
विवरण: पूर्व प्रकाशित अधिसूचनाओं (संख्या एफ.15(39)पंवारा/पंचायत समिति गठन/2025/803 दिनांक 20.11.2025 एवं संख्या एफ.15(39)पंवारा/पंचायत समिति गठन/2025/843 दिनांक 21.11.2025) में प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात कॉलम संख्या 6 के स्थान पर कॉलम 7 में अंकित विवरण को सही पढ़ा जाए।
राजस्व ग्राम और पंचायत समिति पुनर्गठन शुद्धि पत्र - सिरोही जिला
राजस्थान सरकार ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), जयपुर द्वारा दिनांक 28-12-2025 को एक शुद्धि पत्र (कमांक: एफ.15(39)पंव/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/901) जारी किया गया है। यह शुद्धि पत्र विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंव/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/846 दिनांक 21.11.2025 तथा दिनांक 24.11.2025 को राजस्थान राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटियों को दुरुस्त करने और प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण के पश्चात जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
जिला: सिरोही
अधिसूचना दिनांक: 28-12-2025
शासन सचिव: डॉ. जोगा राम (राज्यपाल की आज्ञा से)
इस शुद्धि पत्र के माध्यम से सिरोही जिले की पुनर्गठित, पुनर्जीवित और नवसृजित पंचायत समितियों तथा उनमें सम्मिलित ग्राम पंचायतों के विवरण में संशोधन किया गया है। अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात उस जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो अनुसूची के स्तंभ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी।
कोटपूतली-बहरोड़ जिला: ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनःसीमांठन बाबत शुद्धि पत्र अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार, जयपुर द्वारा क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवै/2024/883 दिनांक 29-12-2025 के तहत एक महत्वपूर्ण शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
अधिसूचना का मुख्य उद्देश्य एवं विवरण
विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवै/2024/797 दिनांक 20.11.2025 एवं संख्या एफ.15(39)विधि/पंचायत समिति गठन/2025/837 दिनांक 21.11.2025 तथा जिला कोटपूतली-बहरोड़ की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनःसीमांठन/नवसृजन बाबत दिनांक 21.11.2025 एवं 24.11.2025 को राजस्थान राजपत्र विशेषनांक भाग 6(ग) में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने की वजह से व प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात यह संशोधन/शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु
संबंधित जिला: कोटपूतली-बहरोड़
प्रभावित क्षेत्र: ग्राम पंचायतें एवं पंचायत समितियां
जारीकर्ता: डॉ. जोगा राम, शासन सचिव, राज्यपाल की आज्ञा से
नोट: नीचे दिए गए कॉलम संख्या 6 में अंकित विवरण के स्थान पर कॉलम 7 में अंकित विवरण को सही समझ कर पढ़ा जाए, जैसा कि मूल अधिसूचना एवं संलग्न तालिकाओं में दर्शाया गया है।
झालावाड़ जिला ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन संबंधी शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंचा/2024/877 दिनांक 28-12-2025 के माध्यम से जिला झालावाड़ की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन के संबंध में शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु
मूल अधिसूचना: विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंचा/2024/791 दिनांक 20.11.2025 एवं दिनांक 21.11.2025 को राजस्थान राजपत्र विशेषांक भाग 6(ग) में प्रकाशित हुई थी।
शुद्धि का कारण: पूर्व प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने की वजह से व प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात यह संशोधन किया गया है।
संशोधित विवरण: पिड़ावा मुख्यालय सुनेल पंचायत समिति के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों के विवरण में कॉलम संख्या 6 के स्थान पर कॉलम संख्या 7 में अंकित विवरण को सही समझा जाए।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है।
डूंगरपुर जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन के संबंध में शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवारा/2024/87/ दिनांक 28-12-2025 के माध्यम से जिला डूंगरपुर की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्सीमांकन और नवसृजन से संबंधित पूर्व में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने के कारण यह संशोधन शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
संदर्भित पूर्व अधिसूचनाएं: क्रमांक एफ.15(39)पंवारा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/826 दिनांक 20.11.2025 एवं संख्या 827 दिनांक 21.11.2025।
संशोधन का कारण: राजस्थान राजपत्र विशेषांक भाग 6(ग) में 21.11.2025 एवं 24.11.2025 को प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटियों और प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण के पश्चात यह संशोधन किया गया है।
विवरण: ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों हेतु जारी सूचियों में कॉलम संख्या 6 में अंकित विवरण के स्थान पर कॉलम संख्या 7 में अंकित विवरण को सही पढ़ा जाए।
विस्तृत जानकारी के लिए आधिकारिक प्रपत्र और संबंधित जिले की सूचियों का अवलोकन करें।
राजस्थान सरकार: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग - जिला अलवर के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन हेतु शुद्धि पत्र
अधिसूचना एवं शुद्धि पत्र विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/855 दिनांक 28.12.2025 के माध्यम से जिला अलवर की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्सीमांकन और नवसृजन से संबंधित पूर्व में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटि के कारण गलत प्रकाशन को संशोधित किया गया है।
मुख्य बिंदु
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
आदेश क्रमांक: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/855
दिनांक: 28/12/2025
जिला: अलवर
उद्देश्य: पूर्व में दिनांक 21.11.2025 एवं 26.11.2025 को राजस्थान राजपत्र में प्रकाशित विवरणों में लिपिकीय त्रुटियों का सुधार।
इस शुद्धि पत्र के तहत ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों (जैसे रामगढ़, कठूमर, रैणी, भोनखर, खेड़ली-सोंखर आदि) से संबंधित कॉलम के विवरणों को संशोधित किया गया है, जिसके तहत पूर्व प्रकाशित विवरण के स्थान पर सही विवरण को पढ़ा जाए।
राजस्थान सरकार - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग: जिला अजमेर शुद्धि पत्र
ग्राम पंचायत पुनर्गठन संशोधन शुद्धि पत्र - जिला अजमेर
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/854 दिनांक 28.12.2025 के संदर्भ में जिला अजमेर की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन से संबंधित पूर्व में प्रकाशित अधिसूचना में लिपकीय त्रुटि सुधार हेतु शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
अधिसूचना क्रमांक एवं दिनांक: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/854, दिनांक 28.12.2025
संबंधित जिला: अजमेर
संशोधन विवरण: पंचायत समिति सिलोरा के अंतर्गत पूर्व में प्रकाशित विवरण (कॉलम 6) में अंकित 'चुन्दड़ी' के स्थान पर संशोधित विवरण (कॉलम 7) में 'बड़गांव' पढ़ा जाए।
राजसमंद जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन और संशोधन आदेश
अधिसूचना विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.15(39)पंवरे/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/900 दिनांक 28-12-2025 के माध्यम से राजसमंद जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन से संबंधित पूर्व अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंवरे/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/842 दिनांक 24.11.2025 में लिपिकीय त्रुटियों को दुरुस्त करने हेतु संशोधन शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु
राजसमंद जिला: आदेश के अनुसार राजसमंद जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन/पुनर्रसीमांकन किया गया है।
कुंभलगढ़ और चारभुजा: विवरण के अनुसार कुंभलगढ़ और चारभुजा (मुख्यालय गढ़बोर) पंचायत समितियों में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन और आवंटन किया गया है।
कार्यान्वयन: पूर्व में विद्यमान पंचायत समितियां इस तिथि से कार्य करना बंद कर देंगी और नई अनुसूची के अनुसार पंचायत समितियों का कार्यकाल एवं अधिकारिता प्रारंभ होगी।
जोधपुर जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन आदेश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/899, दिनांक 28-12-2025 के माध्यम से जोधपुर जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन की जानकारी दी गई है।
राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत शक्तियों का प्रयोग करते हुए, जोधपुर जिले की निम्नलिखित पंचायत समितियों का पुनर्गठन/पुनर्रसीमांकन/नवसृजन किया गया है:
शेरगढ़
चाबा
सेखाला
चामू
बालेसर
आगोलाई (नवसृजित/पुनर्गठित)
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना की अनुसूची के स्तम्भ 4 में वर्णित पंचायत समितियां उसी नाम से जानी जाएंगी।
उक्त पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात, जिले की विद्यमान पंचायत समितियां जो अनुसूची के स्तम्भ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे अनुसूची के स्तम्भ 4 में वर्णित पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगाराम, शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है।
राजस्थान सरकार: पंचायत समिति गठन एवं पुनर्गठन संशोधन शुद्धि पत्र (जयपुर जिला)
अधिसूचना विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 28-12-2025 को एक शुद्धि पत्र अधिसूचना (क्रमांक: एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/897) जारी की गई है।
मुख्य उद्देश्य
यह अधिसूचना दिनांक 21.11.2025 की विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/829 और दिनांक 26.11.2025 को राजस्थान राजपत्र विशेष अंक में प्रकाशित अधिसूचनाओं में रही लिपिकीय त्रुटियों को दुरुस्त करने तथा प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण के पश्चात जारी की गई है।
मुख्य बिंदु
जिला: जयपुर
संशोधित क्षेत्र/नाम: शाहपुरा, विराट नगर और अमरसर पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन से संबंधित विवरण।
सूची विवरण: अधिसूचना की अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पुनर्गठित/नवसृजित पंचायत समितियों के नाम तथा स्तंभ 5 में उनमें सम्मिलित ग्राम पंचायतों के नाम स्पष्ट किए गए हैं।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ 4 में यथावर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात, उक्त जिले की विद्यमान वे पंचायत जो स्तंभ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी, जिससे नई पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
यह आदेश डॉ. जोगा राम, शासन सचिव, राजस्थान सरकार द्वारा राज्यपाल की आज्ञा से जारी किया गया है।
विकसित भारत—गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण): VB-G RAM G अधिनियम, 2025 का प्रकाशन
विस्तृत परिचय और उद्देश्य
भारत के राजपत्र (असाधारण) में प्रकाशित द विक्सित भारत—गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण): VB—G RAM G (विकसित भारत—जी राम जी) अधिनियम, 2025 (अधिनियम संख्या 36, 2025) ग्रामीण विकास के ढांचे को राष्ट्रीय विजन 'Viksit Bharat @2047' के अनुरूप स्थापित करने के लिए बनाया गया है। इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक ग्रामीण परिवार, जिसके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक श्रम करने के लिए स्वेच्छा से आगे आते हैं, को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में कम से कम एक सौ पच्चीस दिन (125 days) के मजदूरी रोजगार की कानूनी गारंटी प्रदान करना है।
प्रमुख विशेषताएं एवं बिंदु
रोजगार की गारंटी: हर ग्रामीण परिवार को वित्तीय वर्ष में कम से कम 125 दिनों का वैधानिक मजदूरी रोजगार।
कार्यान्वयन फ्रेमवर्क: इसे केंद्र प्रायोजित योजना (Centrally Sponsored Scheme) के रूप में लागू किया जाएगा।
फंड शेयरिंग पैटर्न: उत्तर पूर्वी राज्यों, हिमालयी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश (उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर) के लिए 90:10 तथा अन्य सभी राज्यों और विधायिका वाले केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 60:40 अनुपात होगा।
विकसित ग्राम पंचायत योजनाएं (VGPPs): कार्यों की शुरुआत और प्राथमिकता 'Viksit Gram Panchayat Plans' के माध्यम से होगी, जिसे पीएम गति शक्ति (PM Gati Shakti) और जीआईएस (GIS) उपकरणों के साथ एकीकृत किया जाएगा।
कार्यों के चार विषयगत डोमेन (Thematic Domains):(अ) जल सुरक्षा से जुड़े कार्य, (ब) कोर ग्रामीण बुनियादी ढांचा, (स) आजीविका से जुड़ा बुनियादी ढांचा, और (द) अत्यधिक मौसम की घटनाओं से निपटने के लिए विशेष कार्य।
ग्राम पंचायत की भूमिका: ग्राम पंचायतें परिवारों का पंजीकरण करेंगी, ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड (Gramin Rozgar Guarantee Card) जारी करेंगी और 'विकसित ग्राम पंचायत योजनाएं' तैयार करेंगी। कार्यक्रम अधिकारी (Programme Officer) यह सुनिश्चित करेंगे कि कम से कम 50 प्रतिशत लागत के कार्य ग्राम पंचायतों के माध्यम से क्रियान्वित हों।
ठेकेदारों पर रोक: अधिनियम के तहत किसी भी कार्य या घटक के निष्पादन के लिए किसी ठेकेदार को नियुक्त नहीं किया जाएगा। सभी कार्य सीधे क्रियान्वयन एजेंसियों द्वारा कराए जाएंगे।
बेरोजगारी भत्ता: आवेदन के 15 दिनों के भीतर रोजगार उपलब्ध न कराए जाने पर नियमानुसार दैनिक बेरोजगारी भत्ते का प्रावधान किया गया है।
पारदर्शिता और जवाबदेही: बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण, ई-मस्टर रोल, कार्यस्थल पर 'जनता बोर्ड' का प्रदर्शन, और ग्राम सभा द्वारा हर छह महीने में कम से कम एक बार अनिवार्य सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit)।
ग्रामीण सेवा शिविर के फॉलोअप शिविर 17 दिसंबर 2025 से 24 दिसंबर 2025 तक आयोजित करने बाबत
ग्रामीण सेवा शिविर के फॉलोअप शिविर आयोजन के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा वर्तमान सरकार के 02 वर्ष का कार्यकाल पूर्ण होने के उपलक्ष्य में ग्रामीण सेवा शिविर के फॉलोअप शिविर आयोजित किए जाने के संबंध में आदेश जारी किया गया है।
शिविर की मुख्य तिथियां एवं अवधि
शिविर अवधि: 17 दिसंबर, 2025 से 24 दिसंबर, 2025 तक (दिनांक 21.12.2025 को छोड़कर)।
शिविर आयोजन स्थल एवं व्यवस्थाएं
शिविरों का आयोजन पंचायत भवन, स्कूल भवन या उपलब्ध अन्य सार्वजनिक स्थानों पर किया जाएगा।
भू-अभिलेख निरीक्षक वृत्त मुख्यालय पर राज्य की प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर शिविर आयोजित किए जाएंगे।
आगंतुकों के लिए पेयजल की समुचित व्यवस्था, मेज, कुर्सियां, दरियां और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं ग्राम पंचायत द्वारा की जाएंगी।
वित्तीय प्रावधान एवं व्यय की अनुमति
षष्ठ राज्य वित्त आयोग के अंतर्गत पंचायती राज संस्थाओं को देय अनुदान राशि के उपयोग के संबंध में जारी दिशा-निर्देशों के बिंदु संख्या (अ) 3 XIII के अंतर्गत संबंधित ग्राम पंचायत द्वारा शिविर आयोजन हेतु राशि रु. 25,000/- (अधिकतम) का व्यय षष्ठ राज्य वित्त आयोग अंतर्गत उपलब्ध अनुदान राशि से करने की सहमति प्रदान की जाती है। यह सहमति वित्त विभाग की आई.डी. संख्या 332501835 दिनांक 05.12.2025 द्वारा अनुमोदित है।
इस कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान करने के निर्देश दिए गए हैं।
महात्मा गांधी नरेगार्न्तगत व्यक्तिगत लाभ के कार्य “अपना खेत अपना काम” दिशा-निर्देश 2011
महात्मा गांधी नरेगार्न्तगत व्यक्तिगत लाभ के कार्य “अपना खेत अपना काम” दिशा-निर्देश 2011
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (अनुभाग-3, नरेगार्), राजस्थान सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत व्यक्तिगत लाभ के कार्य “अपना खेत अपना काम” के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। यह दस्तावेज दिनांक 27.05.2011 (क्रमांक एफ. 40 (35) ग्रावि/नरेगार्/व्यक्तिगत लाभ के काम/2011) को जारी किया गया था।
योजना का मुख्य उद्देश्य
ग्रामीण क्षेत्र में बस रहे परिवारों की आजीविका के साधनों में स्थायी सुधार किए जाने के उद्देश्य से इस योजना को प्रारंभ किया गया है ताकि किसी भी पात्र परिवार की भूमि अविकसित न रहे और सिंचाई एवं भूमि संसाधनों का समग्र विकास कर उनकी आजीविका में सुधार किया जा सके।
प्रथम चरण में प्राथमिकता एवं पात्रता
गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वाले बी.पी.एल. परिवार (जिनका नाम बीपीएल सूची 2002 में दर्ज हो)।
अनुसूचित जाति के परिवार।
अनुसूचित जनजाति के परिवार।
इन वर्गों के कार्यों के पूर्ण होने के पश्चात् सीमांत कृषक एवं तद्पश्चात् लघु कृषक।
स्वीकृत कार्य और वित्तीय सीमा
इस योजना के अंतर्गत भूमि सुधार, डिग्गी, टांका, खेत तलाई, जल भराव क्षेत्रों में पानी निकास नाली, वृक्षारोपण, बागवानी, कृषि वानिकी, जल संरक्षण कार्य एवं लघु सिंचाई जैसे कार्य करवाए जा सकते हैं।
प्रत्येक जॉब कार्ड धारी परिवार को 1.50 लाख रुपए तक की सीमा में व्यक्तिगत लाभ का अनुमत कार्य स्वीकृत किया जा सकता है।
सामग्री मद में अधिकतम व्यय सीमा 60,000/- रुपए निर्धारित है।
महात्मा गांधी नरेगा योजना - मेट निर्देशिका (दिसम्बर 2010)
महात्मा गांधी नरेगा योजना - मेट निर्देशिका
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, शासन सचिवालय, जयपुर, राजस्थान द्वारा दिसम्बर 2010 में प्रकाशित मेट निर्देशिका महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत मेटों, ग्राम पंचायत और क्षेत्र के अधिकारियों के लिए एक अत्यंत उपयोगी मार्गदर्शिका है।
दस्तावेज़ का मुख्य उद्देश्य
इस निर्देशिका का मुख्य उद्देश्य मेटों को ई-मस्टर रोल, मस्टररोल ट्रैकिंग, मेट द्वारा प्रतिदिन किए जाने वाले कार्य की माप, समूहवार मस्टररोल प्रपत्र भरने, और समयबद्ध तरीके से श्रमिकों के भुगतान की प्रक्रिया को सरल भाषा में समझाना है।
मुख्य बिंदु और विशेषताएँ
श्रमजीवियों के 10 अधिकार: राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून, 2005 के तहत श्रमिकों को 100 दिन के रोजगार की गारंटी, जॉब कार्ड, 15 दिनों के भीतर काम या बेरोजगारी भत्ता, न्यूनतम दैनिक मजदूरी, और कार्यस्थल पर सुविधाएँ पाने का अधिकार।
मेट के कर्तव्य एवं दायित्व: कार्यस्थल पर श्रमिकों को काम का आवंटन, प्रतिदिन माप करना, मस्टर रोल भरना, श्रमिकों को दैनिक मजदूरी की जानकारी देना और कार्यस्थल पर छाया, पानी, प्राथमिक उपचार जैसी सुविधाएँ सुनिश्चित करना।
ई-मस्टर रोल और ट्रैकिंग: पारदर्शी कार्यप्रणाली के लिए ई-मस्टर रोल का उपयोग, मस्टर रोल के विभिन्न भागों (क, ख, ग, घ) को भरने की विधि और समयानुसार ट्रैकिंग।
दैनिक मजदूरी गणना और श्रमिक कार्ड: श्रमिकों को उनके द्वारा प्रतिदिन अर्जित मजदूरी की जानकारी देने के लिए श्रमिक कार्ड (दैनिक मजदूरी गणना प्रपत्र) का उपयोग।
विभिन्न विभागीय आदेश: मजदूरी में अंतर, विलंब से भुगतान पर मुआवजे के प्रावधान और अधिनियम के उल्लंघन पर शास्ति से संबंधित आदेशों का संकलन।
सरपंच हेतु महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी योजना निर्देशिका वर्ष 2010
सरपंच हेतु महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी योजना निर्देशिका - वर्ष 2010
यह निर्देशिका ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, शासन सचिवालय, जयपुर द्वारा प्रकाशित की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य ग्राम पंचायतों के सरपंचों को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी अधिनियम (मनरेगा), 2005 के सफल क्रियान्वयन, प्रशासनिक पारदर्शिता, सामाजिक अंकेक्षण और वित्तीय अनुशासन के संबंध में मार्गदर्शन प्रदान करना है।
मुख्य बिंदु और प्रावधान
रोजगार का अधिकार: प्रत्येक पंजीकृत ग्रामीण परिवार को वित्तीय वर्ष में 100 दिन का अकुशल शारीरिक श्रम का गारण्टीशुदा रोजगार प्रदान किया जाता है। आवेदन के 15 दिवस के भीतर कार्य देना अनिवार्य है, अन्यथा बेरोजगारी भत्ता देय होता है।
पारदर्शिता और उत्तरदायित्व: सभी सूचनाओं को स्वैच्छिक रूप से जारी करना (Proactive Disclosure), कार्यस्थल बोर्ड लगवाना, दीवारों पर लेखन करना, और समयबद्ध मजदूरी भुगतान बैंक या पोस्ट ऑफिस के खातों के माध्यम से सुनिश्चित करना।
हरित राजस्थान योजना: राज्य में हरियाली बढ़ाने और सूखे के बचाव हेतु सघन वृक्षारोपण एवं हरित सड़क कार्यक्रम का संचालन।
भारत निर्माण राजीव गांधी सेवा केन्द्र: प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर 10 लाख रुपये की लागत से सेवा केन्द्र का निर्माण, जिसमें सूचना, शिक्षा और संचार की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।
रिकॉर्ड संधारण: रोकड़ बही, माप पुस्तिका (MB), स्टॉक रजिस्टर, और परिसंपत्ति एवं संचयी व्यय रजिस्टर का सही तरीके से संधारण।
महात्मा गांधी रोजगार गारण्टी स्थायी समिति: योजना के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु ग्राम पंचायत स्तर पर 5 सदस्यीय स्थायी समिति का गठन (अध्यक्ष: सरपंच, सदस्य: वार्ड पंच, कनिष्ठ अभियंता/तकनीकी सहायक, ग्राम सेवक एवं पदेन सचिव, ग्राम रोजगार सहायक)।
MGNREGA Case Record/ Work File: Indicative Framework
MGNREGA Case Record / Work File
ग्रामीण विकास मंत्रालय (Ministry of Rural Development, Government of India) द्वारा मनरेगा (MGNREGS) के अंतर्गत प्रत्येक प्रोजेक्ट या कार्य के लिए केस रिकॉर्ड / वर्क फाइल (Case Record / Work File) तैयार करने हेतु एक इंडिकेटिव फ्रेमवर्क जारी किया गया है।
यह शारीरिक फाइल (physical file) प्रत्येक कार्य के क्रियान्वयन, निगरानी और ऑडिट के लिए महत्वपूर्ण है ताकि देश भर में एकरूपता लाई जा सके।
फाइल में शामिल किए जाने वाले मुख्य दस्तावेज और अनुभाग:
कवर पेज और चेकलिस्ट: कार्य का सारांश और दस्तावेजों की अनुक्रमित सूची (Annexure I & II)।
प्रशासनिक और तकनीकी दस्तावेज: वार्षिक कार्य योजना (Annual Action Plan), तकनीकी अनुमान (Technical Estimate & Design), तकनीकी स्वीकृति (Technical Sanction) और प्रशासनिक/वित्तीय स्वीकृति।
मांग और कार्य आवंटन: व्यक्तिगत या समूह आवेदन फॉर्म (Annexure III A & B) और कार्य आवंटन पत्र (Work Allocation Form - Annexure IV)।
क्रियान्वयन से जुड़े रिकॉर्ड: ई-मस्टर रोल (e-Muster Roll), माप पुस्तिका (Measurement Book / e-MB), सामग्री खरीद दस्तावेज, मजदूरी सूची (Wage List), और भुगतान एफटीओ (FTOs)।
अन्य जरूरी दस्तावेज: रॉयल्टी रसीदें, कार्य के तीनों चरणों (शुरुआत, दौरान, पूर्णता) की तस्वीरें और जियो-टैग की गई तस्वीरें, कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र (Work Completion Certificate - Annexure V), मस्टर रोल मूवमेंट स्लिप (Annexure VI) और सोशल ऑडिट रिपोर्ट।
यह फ्रेमवर्क ग्राम पंचायत स्तर पर दस्तावेजों के बेहतर रखरखाव और पारदर्शिता के लिए उपयोगी है।
मनरेगा के अंतर्गत नागरिक सूचना बोर्ड (CIB) और वॉल राइटिंग हेतु दिशा-निर्देश
महात्मा गांधी नरेगा (MGNREGA) - नागरिक सूचना बोर्ड और वॉल राइटिंग रूपरेखा
भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (Mahatma Gandhi National Rural Employment Act, 2005) के अंतर्गत कार्यस्थलों पर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए नागरिक सूचना बोर्ड (Citizen Information Boards - CIB) और वॉल राइटिंग का सुझाव फ्रेमवर्क जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
पार्श्वभूमि और उद्देश्य: अधिनियम की अनुसूची-1 के पैरा 25(a) और मास्टर सर्कुलर के अनुसार, जनता को बुनियादी जानकारी प्रदान करने के लिए 'जनता सूचना प्रणाली' का उपयोग किया जाता है।
नागरिक सूचना बोर्ड (CIB): प्रत्येक कार्यस्थल पर CIB लगाना अनिवार्य है। व्यक्तिगत कार्यों के लिए बोर्ड का आकार कम से कम 0.6 मीटर x 0.9 मीटर और सामुदायिक कार्यों के लिए कम से कम 0.9 मीटर x 1.2 मीटर होना चाहिए।
लागत सीमा: व्यक्तिगत कार्य के लिए CIB की लागत 3,000 रुपये और सामुदायिक कार्य के लिए 5,000 रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए।
सामग्री और लेआउट: बोर्ड पर कार्य का नाम, कार्य ID, प्राक्कलन राशि, प्रारंभ और समाप्ति तिथि, मजदूरी और सामग्री घटक, और लोकपाल/ओम्बुड्समैन का संपर्क विवरण क्षेत्रीय भाषा में प्रदर्शित होना चाहिए।
वॉल राइटिंग: पंचायत भवन, आंगनवाड़ी केंद्रों, और अन्य प्रमुख सार्वजनिक स्थानों की दीवारों पर 'मेरा गांव, मेरा मनरेगा' और अन्य जागरूकता संदेश पेंट किए जाने चाहिए, जिसकी न्यूनतम चौड़ाई 2 मीटर और ऊंचाई 1.2 मीटर सुझाई गई है।
क्रियान्वयन जिम्मेदारी: ग्राम रोजगार सहायक (GRS) और तकनीकी सहायक (Technical Assistant) कार्यस्थल पर बोर्ड की स्थापना और गुणवत्ता के लिए जिम्मेदार हैं।
महात्मा गांधी नरेगा (MGNREGS) अनुमेय कार्य सूची (Schedule 1 of MGNREG Act 2005)
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम 2005 - अनुमेय कार्य सूची
यह दस्तावेज़ ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी महात्मा गांधी नरेगा (MGNREGS) के अंतर्गत अनुमेय कार्यों की सूची (Schedule 1 of MGNREG Act 2005) को दर्शाता है। इस सूची में ग्राम पंचायत और पंचायती राज स्तर पर कराए जाने वाले विभिन्न प्रकार के कार्यों का विवरण दिया गया है।
प्रमुख कार्य श्रेणियां और विवरण:
व्यक्तिगत, सामुदायिक और समूह स्तर के कार्य: इसमें पीएमएवाई-जी (PMAY-G) आवास निर्माण, आंगनवाड़ी भवन, ग्राम पंचायत/पंचायत भवन, खाद्यान्न भंडारण, किचन शेड और भारत निर्माण सेवा केंद्र का निर्माण एवं मरम्मत शामिल है।
प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन (NRM) और जल संरक्षण: जल संभरण (SWC), सिंचाई (Irrigation), भू-जल पुनर्भरण (GWR), भूमि विकास (LR), और जल निकासी से संबंधित कार्य।
कृषि एवं संबद्ध कार्य (Agri & Allied): कृषि उत्पादन भंडारण, वर्मी कम्पोस्ट, नाडेप कम्पोस्ट, पशु शेड (गाय, बकरी, सुअर, मुर्गी), और अजोला खेती के लिए बुनियादी ढांचा।
वृक्षारोपण और वानिकी (PLNT): तटबंध वृक्षारोपण, सीमा रेखा वृक्षारोपण, और उद्यानिकी (Horticulture) से जुड़े कार्य।
ग्रामीण बुनियादी ढांचा: ग्रामीण हाट, खेल का मैदान, चक्रवात आश्रय (Cyclone shelter), और सड़क व जल निकासी संरचनाएं।
यह सूची पंचायती राज संस्थाओं और ग्राम पंचायतों को महात्मा गांधी नरेगा योजना के तहत सही कार्यों के चयन और क्रियान्वयन में सहायता प्रदान करती है।
महात्मा गांधी नरेगा अंतर्गत ग्राम पंचायत स्तर पर संधारित किए जाने वाले 7 रजिस्टर
महात्मा गांधी नरेगा (MGNREGA) के अंतर्गत ग्राम पंचायत स्तर पर 7 अनिवार्य रजिस्टरों का संधारण
ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा सुशासन पहल के तहत महात्मा गांधी नरेगा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और रिकॉर्ड संधारण को सरल बनाने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर 7 अनिवार्य रजिस्टरों की रूपरेखा जारी की गई है। यह पुस्तिका ग्राम रोजगार सहायकों (GRS) और अन्य क्षेत्रीय पदाधिकारियों के लिए रिकॉर्ड संधारण को सुगम बनाती है।
ग्राम पंचायत स्तर पर संधारित किए जाने वाले 7 रजिस्टर:
रजिस्टर – I: जॉब कार्ड आवेदन, जॉब कार्ड पंजीकरण, जॉब कार्ड निर्गत और परिवार रोजगार संबंधी रिपोर्ट
रजिस्टर – II: ग्राम सभा की बैठक, कार्यवृत्त, संकल्प, कार्यों की प्राथमिकता प्राप्त सूची और विशेष सामाजिक लेखा-परीक्षा ग्राम सभा की बैठक एवं कार्यवृत्त की गई कार्रवाई
रजिस्टर – III: काम की मांग, कार्यों का आवंटन तथा मजदूरी का भुगतान रजिस्टर
रजिस्टर – IV: कार्य रजिस्टर (भाग क और भाग ख)
रजिस्टर – V: स्थायी परिसंपत्ति रजिस्टर (मनरेगा कार्य)
रजिस्टर – VI: शिकायत रजिस्टर
रजिस्टर – VII: सामग्री रजिस्टर
इन सभी रजिस्टरों को एनरेगासॉफ्ट (NREGASoft MIS) के माध्यम से प्राप्त करके और निर्धारित दिशा-निर्देशों व त माही/वार्षिक आधार पर भौतिक रजिस्टरों में संधारित किया जाना है।
मनरेगा योजनान्तर्गत व्यक्तिगत लाभ के कार्य निजी कृषि भूमि में टांका निर्माण मय पक्का एवं कच्चा पायथन कार्य की अनुमति के संबंध में
राजस्थान सरकार - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग
पत्रांक: एफ 55(1)ग्रावि/नरेग/भारत सरकार/एनएलएम/2023-24/05104
विषय: महात्मा गांधी नरेग योजनान्तर्गत व्यक्तिगत लाभ के कार्य निजी कृषि भूमि में टांका निर्माण मय पक्का एवं कच्चा पायथन कार्य का अनुमत करने के सम्बन्ध में।
ग्रामीण विकास विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा जारी इस पत्र के अनुसार, भारत सरकार के पत्र के क्रम में महात्मा गांधी नरेग योजनान्तर्गत टांका निर्माण कार्यों का निष्पादन "Farm Pond for Individuals" की अनुज्ञेय श्रेणी के अन्तर्गत किये जाने की अनुमति प्रदान की गई है।
मुख्य बिंदु:
महात्मा गांधी नरेगा अधिनियम के प्रावधानों, दिशा-निर्देशों एवं निर्धारित उचित प्रक्रियाओं की सख्ती से पालना की जानी है।
टांका निर्माण कार्य की योजना, कार्यान्वयन एवं निगरानी प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए।
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जिला उत्थान योजना - दिशा निर्देश 2025
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जिला उत्थान योजना: दिशा निर्देश 2025
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (गुण एवं नियंत्रण) द्वारा डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जिला उत्थान योजना - दिशा निर्देश 2025 जारी किए गए हैं। यह योजना राज्य सरकार की बजट घोषणा 2024-25 के बिन्दु संख्या 20 के अंतर्गत प्रारंभ की जा रही है जिसका मुख्य उद्देश्य जिलों के आर्थिक विकास और समावेशी सामाजिक विकास के दोहरे लक्ष्य को प्राप्त करना है।
योजना की मुख्य विशेषताएँ और प्रावधान:
नोडल विभाग: ग्रामीण विकास विभाग इस योजना का नोडल विभाग रहेगा जो अन्य विभागों से समन्वय करते हुए कार्यों की स्वीकृति प्रदान करेगा।
योजना क्षेत्र: यह योजना राज्य के सभी जिलों में ग्रामीण एवं शहरी दोनों क्षेत्रों में लागू की जाएगी।
वित्तीय प्रावधान: इस योजना का कुल बजट प्रावधान 500 करोड़ रुपये है, जो पूरी तरह राज्य वित्त पोषित योजना है।
मिशन टीम: जिलों में अति-स्थानीय नियोजन (hyper-local planning) और सेवा वितरण में सहयोग के लिए विशेष विशेषज्ञों की 'मिशन टीम' का गठन किया जाएगा।
शासन संरचना: योजना के सुचारू संचालन के लिए राज्य स्तर पर अतिरिक्त मुख्य सचिव/प्रमुख शासन सचिव (ग्रामीण विकास) की अध्यक्षता में 'राज्य स्तरीय समिति' तथा जिला स्तर पर जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में 'जिला स्तरीय समिति' का गठन किया गया है।
अनुमत कार्य और क्षेत्र:
योजना के अंतर्गत कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र, पर्यटन क्षेत्र, एमएसएमई क्षेत्र, खेल क्षेत्र और अन्य ग्रामीण व शहरी बुनियादी ढाँचे से जुड़े कार्य किए जा सकेंगे। इसमें लोक सहभागिता (जनसहयोग) को भी प्राथमिकता दी गई है।
उदयपुर जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्सีमांकन और नवसृजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/848 (दिनांक नवंबर 21, 2025) के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए उदयपुर जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्सีमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिनीम और प्रावधान: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98, धारा-9, 10 एवं 101 के अंतर्गत जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार प्रस्तावों और आपत्तियों पर सुनवाई के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से यह पुनर्गठन किया गया है।
अधिकारिता: अनुसूची के स्तंभ 4 में यथानामित पंचायत समितियां स्तंभ 5 में वर्णित स्थानीय क्षेत्र व ग्राम पंचायतों पर अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात्, उस जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो अनुसूची के स्तंभ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी, जिससे नई पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
यह अधिसूचना राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी की गई है।
झुंझुनूं जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन और पुनर्रचना - राजस्थान राजपत्र अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/832, दिनांक नवम्बर 21, 2025 के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए झुंझुनूं जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमार्कीकरण और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र असाधारण में नवम्बर 24, 2025 को प्रकाशित की गई है।
झुंझुनूं जिले के अंतर्गत आने वाली विभिन्न पंचायत समितियों और उनमें सम्मिलित ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन/पुनर्रसीमार्कीकरण किया गया है।
अधिसूचना के अनुसार, चुनी गई नई/पुनर्गठित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात, पुरानी पंचायत समितियां अस्तित्व में नहीं रहेंगी और उनका कार्य समाप्त हो जाएगा, जिसके बाद नई पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से शासन सचिव डॉ. जोगा राम द्वारा जारी किया गया है।
जालोर जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्सীमांकन और नवसृजन - अधिसूचना दिनांक 21 नवंबर 2025
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा राजस्थान राजपत्र में जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/831 दिनांक 21 नवंबर 2025 के अंतर्गत जालोर जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्सীमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम का संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 की प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए धारा-9, 10 एवं 101 में वर्णित शक्तियों के तहत यह कार्रवाई की गई है।
जिला कलेक्टर की भूमिका: जिला कलेक्टरों द्वारा प्रस्ताव तैयार करने, सार्वजनिक अवलोकन के लिए प्रसारित करने, एक माह की अवधि में आपत्तियों पर सुनवाई करने तथा राज्य सरकार से अनुमोदन प्राप्त करने के पश्चात यह पुनर्गठन लागू किया गया है।
प्रभाव: अनुसूची में वर्णित पंचायत समितियों का पुनर्गठन/पुनर्सীमांकन/नवसृजन किया गया है तथा संबंधित पंचायत समितियों का कार्यकाल अनुसूची के अनुसार निर्धारित होगा।
यह अधिसूचना राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी की गई है।
जैसलमेर जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन - अधिसूचना 2025
जैसलमेर जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन एवं नवसृजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/830 दिनांक नवंबर 21, 2025 के अनुसार, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए जैसलमेर जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-9, 10, 101 और 98 के अंतर्गत यह कार्रवाई की गई है।
जिला कलेक्टर की भूमिका: जिला कलेक्टरों द्वारा प्रस्ताव तैयार कर, आपत्तियां आमंत्रित करने तथा सुनवाई के पश्चात राज्य सरकार से अनुमोदन प्राप्त किया गया है।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पंचायत समितियों के चुनावों के पश्चात उस जिले की विद्यमान पंचायत समितियां (जो स्तंभ 2 में वर्णित हैं) उस तारीख से अस्तित्व में नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी, जिससे नई पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
जारीकर्ता: राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगाराम, शासन सचिव, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
हनुमानगढ़ जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन एवं नवसृजन अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए हनुमानगढ़ जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन एवं नवसृजन के संबंध में अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र (असाधारण) दिनांक 24 नवंबर 2025 में प्रकाशित की गई है।
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना क्रमांक एवं दिनांक: संख्या एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/828-, दिनांक 21 नवंबर 2025।
जारीकर्ता: डॉ. जोगा राम, शासन सचिव, राज्यपाल की आज्ञा से।
कार्यान्वयन: जिला कलेक्टरों द्वारा प्रस्ताव तैयार करने, आपत्तियां आमंत्रित करने और सुनवाई की प्रक्रिया पूरी करने तथा राज्य सरकार के अनुमोदन के पश्चात हनुमानगढ़ जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
प्रभाव: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पुनर्गठित/नवसृजित पंचायत समितियों का गठन किया गया है तथा संबंधित ग्राम पंचायतों का निर्धारण किया गया है।
श्रीगंगानगर जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन
श्रीगंगानगर जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए श्रीगंगानगर जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना क्रमांक: एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/827-, दिनांक: जयपुर, नवम्बर 21, 2025।
प्रभावित क्षेत्र: श्रीगंगानगर जिले के अंतर्गत आने वाली पंचायत समितियां जैसे सादुलशहर, अनूपगढ़, घड़साना, सूरतगढ़ और नई सृजित पंचायत समितियां।
कार्यकाल संबंधी निर्देश: पुनर्गठित/नवसृजित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात् उस जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो अनुसूची में निर्दिष्ट हैं, उस तारीख से ही विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
दौसा जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन और पुनर्सिमांकन - अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज (पंचायती राज विभाग) द्वारा राजस्थान राजपत्र (असाधारण) में दौसा जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्सिमांकन और नवसर्जन से संबंधित महत्वपूर्ण अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए जारी की गई है।
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना क्रमांक: संख्या एफ.15 (39) पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/822 दिनांक नवंबर 21, 2025 (राजस्थान राजपत्र दिनांक 24 नवंबर, 2025)।
अधिकार क्षेत्र: जिला कलेक्टर द्वारा तैयार किए गए प्रस्तावों, आपत्तियों पर सुनवाई और राज्य सरकार के अनुमोदन के पश्चात दौसा जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन किया गया है।
नयी व्यवस्था: अनुसूची के स्तूप 4 में वर्णित पुनर्गठित/नवसृजित पंचायत समितियां स्तूप 5 में दर्शित ग्राम पंचायतों पर अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तूप 4 में वर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात उस जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो स्तूप 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी, जिससे नई पंचायत समितियों का कार्यकाल आरंभ हो सके।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है।
बीकानेर जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन
बीकानेर जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन और नवसृजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए बीकानेर जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन के संबंध में अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना दिनांक 21 नवंबर 2025 को जारी की गई है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम व संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा-98, 9, 10 एवं 101 के अंतर्गत जिला कलेक्टर द्वारा तैयार प्रस्तावों और आपत्तियों पर सुनवाई के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से यह पुनर्गठन किया गया है।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में वर्णित पुनर्गठित/नवसृजित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात् उस जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो स्तंभ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी। इसके पश्चात नई पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
भरतपुर जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन और पुनर्रसीमांकरण अधिसूचना
अधिसूचना विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए भरतपुर जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकरण और नवसृजन से संबंधित अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र (अतिरिक्त) में 24 नवंबर 2025 को प्रकाशित हुई है, जिसके आदेश संख्या एफ.15(39)पंव/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/816 दिनांक 21 नवंबर 2025 हैं।
मुख्य बिंदु
अधिनियम का संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98, 9, 10 एवं 101 के अंतर्गत जिला कलेक्टर के माध्यम से प्रस्ताव तैयार कर आपत्तियां आमंत्रित करने के पश्चात यह कार्रवाई की गई है।
पंचायत समितियों का पुनर्गठन: भरतपुर जिले की पंचायत समितियों (जैसे रूपवास, उच्चैन और सेवर) का पुनर्गठन/पुनर्रसीमांकरण किया गया है।
कार्यकाल और अधिकारिता: अनुसूची में वर्णित नई पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात उस जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो अनुसूची में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी तथा नई पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
बालोतरा जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पांरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/811, दिनांक नवम्बर 21, 2025 के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए बालोतरा जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
संबद्ध अधिनियम: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-9, 10, 98 एवं 101।
जिला कलेक्टर की भूमिका: जिला कलेक्टरों द्वारा प्रस्ताव तैयार कर सार्वजनिक अवलोकन हेतु प्रसारित करने, एक माह की अवधि में आपत्तियां आमंत्रित करने तथा उन पर सुनवाई करने के पश्चात राज्य सरकार से अनुमोदन प्राप्त किया गया है।
कार्यकाल से संबंधित प्रावधान: अनुसूची के स्तम्भ संख्या 4 में यथावर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात, उस जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो स्तम्भ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से ही विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ हो सके।
डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा राज्यपाल की आज्ञा से यह अधिसूचना जारी की गई है।
बाड़मेर जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए बाड़मेर जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन से संबंधित अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना दिनांक 21 नवम्बर 2025 को जारी की गई है।
मुख्य बातें एवं विवरण
अधिनियम संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98, 9, 10 एवं 101 के अंतर्गत।
जिला: बाड़मेर
कार्यान्वयन प्रक्रिया: जिला कलेक्टरों द्वारा पूर्व में तैयार किए गए प्रस्तावों, आपत्तियों पर सुनवाई और आपत्तियों के आमंत्रण के उपरांत राज्य सरकार से अनुमोदन प्राप्त कर यह पुनर्गठन किया गया है।
निर्धारित व्यवस्था: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात्, स्तंभ 2 में उल्लेखित वर्तमान पंचायत समितियाँ इस तिथि से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी, जिससे नई पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित आधिकारिक राजपत्र एवं ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के निर्देशों का अवलोकन करें।
सवाई माधोपुर जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन और पुनर्सिमांकन - अधिसूचना 2025
सवाई माधोपुर जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/844 (दिनांक नवंबर 21, 2025) के तहत राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा-9, 10 एवं 101 के प्रावधानों के अंतर्गत सवाई माधोपुर जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन/पुनर्सिमांकन/नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम का संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धाराओं के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए।
संबंधित जिला: सवाई माधोपुर जिला।
अधिसूचना तिथि: नवंबर 21, 2025।
जारीकर्ता: राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव।
अधिसूचना के अनुसार, अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में वर्णित पुनर्गठित/नवसृजित पंचायत समितियों का गठन किया गया है तथा अनुसूची के स्तंभ संख्या 2 में वर्णित वर्तमान पंचायत समितियां नियमानुसार उस तिथि से विद्यमान नहीं रहेंगी जैसा कि अनुसूची और अधिनियम के प्रावधानों में निर्धारित किया गया है।
करौली जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन आदेश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/834, दिनांक 21-11-2025 के तहत, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 की शक्तियों का प्रयोग करते हुए करौली जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
संबद्ध विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
दिनांक: 21 नवम्बर 2025।
आदेश विवरण: जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार प्रस्तावों एवं आपत्तियों पर सुनवाई और राज्य सरकार के अनुमोदन के पश्चात करौली जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन किया गया है।
कार्यकाल संबंधित निर्देश: अनुसूची के स्तम्भ संख्या 4 में यथावर्णित पंचायत समितियों के चुनावों के पश्चात, उक्त जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो अनुसूची के स्तम्भ संख्या 2 में वर्णित हैं, इस तारीख से ही विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे अनुसूची के स्तम्भ 4 में वर्णित पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारम्भ होगा।
हनुमानगढ़ ज़िले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन - अधिसूचना दिनांक 21-11-2025
राजस्थान सरकार ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, राज्य सरकार द्वारा हनुमानगढ़ ज़िले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन किया गया है। यह आदेश दिनांक 21-11-2025 को जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना क्रमांक: एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/828
दिनांक: 21-11-2025
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार
विवरण: ज़िला कलेक्टर हनुमानगढ़ द्वारा तैयार किए गए प्रस्तावों एवं आपत्तियों पर विचार करने के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से हनुमानगढ़ ज़िले की विभिन्न पंचायत समितियों का पुनर्गठन/पुनर्रसीमांकन/नवसृजन किया गया है।
कार्यकाल संबंधी निर्देश: अनुसूची के स्तम्भ 4 में यथावर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात उक्त ज़िले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो अनुसूची के स्तम्भ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से ही विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे अनुसूची के स्तम्भ 4 में वर्णित पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारम्भ होगा।
जयपुर जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन अधिसूचना
अधिसूचना विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जयपुर जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन के संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना आदेश क्रमांक एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/829, दिनांक 21-11-2025 के तहत जारी की गई है।
मुख्य बिंदु
अधिनियम के प्रावधान: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-9, 10 एवं 101 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्य सरकार द्वारा यह पुनर्गठन और पुनर्रसीमांकन किया गया है।
जिला कलेक्टर की कार्रवाई: संबंधित जिला कलेक्टर द्वारा प्रस्ताव तैयार कर सार्वजनिक अवलोकनार्थ एक माह की अवधि में आपत्तियां आमंत्रित करने तथा सुनवाई करने की निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के पश्चात राज्य सरकार से अनुमोदन प्राप्त किया गया है।
नया कार्यभार और नाम: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पुनर्गठित एवं नवसृजित पंचायत समितियां उसी नाम से जानी जाएंगी और निर्धारित स्थानीय क्षेत्र पर अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
चुनाव और कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात, उक्त जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो अनुसूची के स्तंभ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और उनका कार्यभार समाप्त माना जाएगा, जिससे नई पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
डीडवाना-कुचामन जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन एवं नवसृजन अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंश/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/825 दिनांक 21-11-2025 के माध्यम से डीडवाना-कुचामन जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन एवं नवसृजन के संबंध में आधिकारिक आदेश जारी किए गए हैं।
मुख्य विवरण
राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए, राज्य सरकार द्वारा डीडवाना-कुचामन जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन एवं नवसृजन किया गया है।
महत्वपूर्ण बिंदु
अधिनियम संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98, 9, 10 एवं 101 के अंतर्गत प्राप्त शक्तियां।
संबंधित जिला: डीडवाना-कुचामन।
कार्यकाल और चुनाव: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात उक्त जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो अनुसूची के स्तंभ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
फलोदी जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन और नवसृजन - अधिसूचना दिनांक 21-11-2025
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम सं. 13) की धारा-9, 10 एवं 101 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए फलोदी जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन के संबंध में अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना दिनांक 21-11-2025 (क्रमांक: एफ.15(39)पंवरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/840) को जारी की गई है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम और प्रावधान: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-9, 10 और 101 के अंतर्गत शक्तियों का प्रयोग।
जिला कलेक्टर की कार्यवाही: जिला कलेक्टर द्वारा तैयार किए गए प्रस्तावों, सार्वजनिक अवलोकन और एक माह की अवधि में प्राप्त आपत्तियों पर सुनवाई के पश्चात राज्य सरकार से अनुमोदन प्राप्त किया गया है।
कार्यकाल प्रारंभ: अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में यथावर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात, उक्त जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो अनुसूची के स्तंभ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से ही विद्यमान नहीं रहेंगी और अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में वर्णित पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
विस्तृत जानकारी के लिए संलग्न दस्तावेज या संबंधित विभाग के आदेश का अवलोकन करें।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग - सलूंबर जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन एवं नवसृजन अधिसूचना
अधिसूचना विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/803 दिनांक 20 नवंबर 2025 के अंतर्गत, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए सलूंबर जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन एवं नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु
अधिनियम व निर्देश: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-9, 10 एवं 101 में वर्णित शक्तियों तथा विभागीय अधिसूचना दिनांक 10.01.2025 के तहत जिला कलेक्टर को प्रस्ताव तैयार करने, सार्वजनिक अवलोकन के लिए प्रसारित करने, आपत्तियां आमंत्रित करने और सुनवाई हेतु अधिकृत किया गया था।
राज्य सरकार का अनुमोदन: जिला कलेक्टरों द्वारा कार्यवाही किए जाने, प्रस्तावों एवं अभिशंषाओं का परीक्षण करने के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से सलूंबर जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन/पुनरसीमांकन/नवसृजन किया गया है।
शामिल पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के तहत पंचायत समिति झल्लारा, जयसमंद, लसाड़िया, सलूंबर, सराडा और सेमारी के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों एवं उनमें सम्मिलित राजस्व ग्रामों की सूची में परिवर्तन किया गया है।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, उस जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो स्तंभ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
भरतपुर जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन अधिसूचना
भरतपुर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन एवं नवसृजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए भरतपुर जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है। यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र (अतिरिक्त) में दिनांक 21 नवंबर, 2025 को प्रकाशित की गई है।
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना संख्या: संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/775 (दिनांक नवंबर 20, 2025)।
संबद्ध जिला: भरतपुर, राजस्थान।
शामिल पंचायत समितियां: बयाना, भुसावर, नदबई, रूपबास, सेवर, उच्चैन और वैर।
कार्यकाल और प्रभाव: अनुसूची के स्तम्भ संख्या 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात उक्त जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो अनुसूची के स्तम्भ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से ही विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
बूंदी जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
बूंदी जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन एवं पुनसीमांकन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनगर्ठन/विधि/पंरा/2024/778:- (दिनांक 20 नवम्बर 2025) के अंतर्गत राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए बूंदी जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम व संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-9, 10 एवं 101 में वर्णित शक्तियों तथा पूर्व अधिसूचना दिनांक 10.01.2025 के अनुपालन में जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार प्रस्तावों और अभिशंसाओं के परीक्षण के पश्चात यह राज्य सरकार द्वारा अनुमोदित किया गया है।
प्रभावित पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के तहत बूंदी जिले की पंचायत समिति हिंडोली, नैनवां, तालेडा और बूंदी के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन व नवसृजन किया गया है।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, उस जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो स्तंभ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
अधिक जानकारी एवं विस्तृत राजस्व ग्रामों की सूची के लिए आधिकारिक राजस्थान राजपत्र (असाधारण) दिनांक 21 नवंबर 2025 का अवलोकन करें।
भीलवाड़ा जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
भीलवाड़ा जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/776 (दिनांक 20 नवम्बर 2025) के अंतर्गत राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए भीलवाड़ा जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
प्रमुख बिंदु:
अधिकार एवं प्रक्रिया: विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/02 दिनांक 10.01.2025 के द्वारा जिला कलेक्टर को ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनसीमांकन हेतु प्रस्ताव तैयार करने, सार्वजनिक अवलोकन के लिए प्रसारित करने, एक माह की अवधि में आपत्तियां आमंत्रित करने तथा सुनवाई करने हेतु अधिकृत किया गया था।
प्रस्तावों का अनुमोदन: जिला कलेक्टरों द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों और अभिशंसाओं का परीक्षण करने के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से भीलवाड़ा जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन/पुनसीमांकन/नवसृजन किया गया है।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तम्भ संख्या 4 में यथावर्णित नई ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात उस जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो स्तम्भ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
विस्तृत विवरण और पंचायत समिति वार पुनर्गठित/नवसृजित ग्राम पंचायतों तथा उनमें सम्मिलित राजस्व ग्रामों की सूचियों के लिए संलग्न राजस्थान राजपत्र (एक्स्ट्राऑर्डिनरी) का अवलोकन करें।
झुंझुनूं जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन एवं नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
झुंझुनूं जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन एवं नवसृजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/792 (दिनांक नवंबर 20, 2025) जारी की गई है। इसके माध्यम से झुंझुनूं जिले में विभिन्न ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन एवं नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु एवं प्रक्रिया
संवैधानिक प्रावधान: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा-9, 10 एवं 101 में वर्णित शक्तियों तथा विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/02 (दिनांक 10.01.2025) के तहत जिला कलेक्टर को प्रस्ताव तैयार करने, सार्वजनिक अवलोकन के लिए प्रसारित करने और एक माह की अवधि में आपत्तियां आमंत्रित कर सुनवाई करने हेतु अधिकृत किया गया था।
राज्य सरकार का अनुमोदन: जिला कलेक्टर्स द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों एवं अभिशंषाओं का परीक्षण करने के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से झुंझुनूं जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन/पुनसीमांकन/नवसृजन किया गया है।
अधिकारिता: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पुनर्गठित/नवसृजित ग्राम पंचायतें स्तंभ 5 में दर्शाए गए स्थानीय क्षेत्रों एवं राजस्व ग्रामों पर अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
विद्यमान पंचायतों का कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित नई ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात स्तंभ 2 में उल्लेखित वर्तमान ग्राम पंचायतें उस तारीख से अस्तित्व में नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी, जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
शामिल पंचायत समितियां
इस अधिसूचना के अंतर्गत झुंझुनूं जिले की निम्नलिखित पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों का पुनर्गठन किया गया है:
बुहाना
चिड़ावा
खेतडी
मण्डावा
नवलगढ़
पिलानी
सिंघाना
सूरजगढ़
उदयपुरवाटी
अलसीसर
झुंझुनूं
यह अधिसूचना राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी की गई है।
राजस्थान पंचायती राज (अंतरित क्रियाकलाप) (संशोधन) नियम, 2025 जारी
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धाराओं के तहत राजस्थान पंचायती राज (अंतरित क्रियाकलाप) नियम, 2011 में संशोधन हेतु अधिसूचना जारी की गई है।
दिनांक: अक्टूबर 29, 2025 (राजस्थान राजपत्र असाधारण में 31 अक्टूबर 2025 को प्रकाशित)
नियम का नाम: राजस्थान पंचायती राज (अंतरित क्रियाकलाप) (संशोधन) नियम, 2025
प्रभावी तिथि: ये नियम तुरंत प्रवृत्त होंगे।
नियम 8 में संशोधन: राजस्थान पंचायती राज (अंतरित क्रियाकलाप) नियम, 2011 के नियम 8 के विद्यमान खंड (iii) के स्थान पर "एक जिले से दूसरे जिले में संबंधित विभाग" प्रतिस्थापित किया गया है।
यह आदेश राज्यपाल के आदेश से भारत भूषण गोयल, शासन उप सचिव द्वारा जारी किया गया है।
ग्राम पंचायतों में स्थित भारत निर्माण सेवा केंद्रों एवं ग्राम पंचायत भवनों की मरम्मत और रंग-रोगन के संबंध में दिशा-निर्देश
ग्राम पंचायत भवनों एवं भारत निर्माण सेवा केंद्रों की मरम्मत और एकरूप रंग-रोगन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ 4(1111) परावि/पीसी/विविध/22-00409 (दिनांक 19.09.2025) के अनुसार, माननीय मुख्यमंत्री महोदय की समीक्षा बैठक के निर्देशों के पालन में सभी ग्राम पंचायतों एवं भारत निर्माण सेवा केंद्रों में मरम्मत और एकरूप रंग-रोगन के कार्य करवाने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य निर्देश एवं समय-सीमा
मरम्मत और रंग-रोगन (वित्तीय स्वीकृति सहित): जिन भवनों में मरम्मत की आवश्यकता है, वहां राज्य वित्त आयोग एवं पंद्रहवां वित्त आयोग के अंतर्गत तुरंत स्वीकृति जारी करते हुए 15.11.2025 तक कार्य पूर्ण किया जाए।
केवल रंग-रोगन: जिन भवनों में केवल रंग-रोगन की आवश्यकता है, वहां तत्काल स्वीकृति जारी करते हुए 31.10.2025 तक कार्य पूर्ण किया जाए।
रंग एवं पेंट के मानक: भवन की बाहरी दीवारों पर अच्छी गुणवत्ता का Pink शेड का Paint (PU + Silicon Modified 100% Acrylic Exterior Emulsion), आंतरिक दीवारों पर Cream/Off White एवं छत (सीलिंग) पर White शेड का Paint (PU Reinforced Luxury Acrylic Emulsion) किया जाए।
प्रगति की मॉनिटरिंग: उक्त कार्यों की प्रगति हेतु अलग से Google Spreadsheet/Format का लिंक भेजा जा रहा है, जिस पर नियमित प्रगति दर्ज की जाए।
ग्रामीण सेवा शिविर 18 सितम्बर, 2025 से आयोजित किये जाने बाबत
ग्रामीण सेवा शिविरों का आयोजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुसार राज्य की प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर "ग्रामीण सेवा शिविर" का आयोजन 18 सितम्बर, 2025 से किया जाना है।
मुख्य निर्देश एवं व्यवस्थाएं
अभियान की अवधि तब तक होगी जब तक कि प्रत्येक पंचायत समिति की प्रत्येक ग्राम पंचायत में शिविर का आयोजन न हो जावे।
शिविर स्थल पंचायत मुख्यालय पर पंचायत भवन, स्कूल भवन या उपलब्ध अन्य सार्वजनिक स्थानों पर निर्धारित किए जाएंगे।
आगंतुकों के लिए पेयजल की समुचित व्यवस्था, मेज, कुर्सियां, दरियां और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं ग्राम पंचायत द्वारा की जाएंगी।
वित्तीय प्रावधान एवं व्यय
शिविर आयोजन एवं संचालन हेतु षष्ठ राज्य वित्त आयोग अंतर्गत पंचायती राज संस्थाओं को देय अनुदान राशि के उपयोग हेतु विभागीय पत्रांक 347 राजकाज क्रमांक 13247621 दिनांक 28.01.2025 के दिशा-निर्देशों के बिंदु सं. (अ)(3)(XIII) के अंतर्गत ग्राम पंचायत को स्वीकृत अनुदान राशि में से अधिकतम राशि रु. 25,000/- प्रति ग्राम पंचायत व्यय/उपयोग करने की सहमति प्रदान की जाती है।
यह सहमति वित्त विभाग की आई.डी. संख्या 332501444 दिनांक 16.09.2025 द्वारा अनुमोदित है। इस कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान करने के निर्देश दिए गए हैं।
PMAY-G के अंतर्गत 25 मीटर से अधिक दूरी वाले आवासों का भौतिक सत्यापन
PMAY-G भौतिक सत्यापन प्रारूप
यह दस्तावेज़ प्रधानमंत्री आवास योजना - ग्रामीण (PMAY-G) के तहत 25 मीटर से अधिक दूरी पर आवास निर्माण करने वाले मामलों के भौतिक सत्यापन के लिए निर्धारित प्रपत्र है।
मुख्य विवरण
निरीक्षणकर्ता का विवरण: नाम, पद, मोबाइल नंबर और निरीक्षण दिनांक दर्ज करने का प्रावधान।
विवरण तालिका: क्र.सं., ग्राम पंचायत, PMAY-G ID, लाभार्थी का नाम और 25 मीटर से अधिक दूरी पर आवास निर्माण करने का कारण।
हस्ताक्षर: निरीक्षणकर्ता के हस्ताक्षर का स्थान।
आबादी भूमि में भूमिहीन परिवार को भूखंड आ आवंटन एवं पट्टा जारी करने की प्रक्रिया (रांपारा नियम 1996 के नियम 158-1)
आबादी भूमि में भूमिहीन परिवारों को भूखंड आवंटन की प्रक्रिया
राज ई पंचायत पोर्टल के इस पोस्ट में राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 के नियम 158(1) के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में भूमिहीन परिवारों को आबादी भूमि में भूखंड (पट्टा) आवंटन करने की पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया और प्रपत्रों की जानकारी दी गई है।
मुख्य बिंदु एवं प्रक्रिया:
आवेदन: ग्राम पंचायत के वार्ड में निवास करने वाले भूमिहीन परिवार, जिनका भारत में कहीं भी आवासीय या कृषि भूमि का पट्टा नहीं है, वे सरपंच महोदय को निर्धारित दस्तावेजों (मतदाता पहचान पत्र/आधार कार्ड, राशन कार्ड, शपथ पत्र, बीपीएल कार्ड यदि हो) के साथ आवेदन प्रस्तुत करते हैं।
पटवारी का भूमिहीन प्रमाण पत्र: पटवार मंडल एवं तहसील स्तर पर यह प्रमाणित किया जाता है कि आवेदक का परिवार राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार भूमिहीन श्रेणी में आता है।
शपथ-पत्र: आवेदक द्वारा 50/- रुपये के स्टाम्प पेपर पर भूमिहीन होने और अन्य स्थान पर पट्टा न होने संबंधी शपथ-पत्र प्रस्तुत किया जाता है।
मौका निरीक्षण कमेटी: राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 के नियम 146 के तहत ग्राम पंचायत द्वारा वार्ड पंचों की एक कमेटी का गठन किया जाता है जो स्थल निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करती है।
आपत्ति नोटिस: नियम 148 (प्रारूप 22) के तहत आबादी भूमि के आवंटन पर आपत्तियां आमंत्रित करने के लिए नोटिस जारी किया जाता है।
रियायती दरें: नियम 158(1) के तहत अनुसूचित जाति, स्वच्छता कर्मियों, अनुसूचित जनजाति, श्रम मजदूरी पर आधारित भूमिहीन व्यक्तियों और गाड़िया लुहारों को रियायती दरों पर भूखंड आवंटित किए जाते हैं:
1000 से कम आबादी वाले गांवों में: 2 रुपये प्रति वर्ग गज
1001 से 2000 की आबादी वाले गांवों में: 5 रुपये प्रति वर्ग गज
2000 से अधिक आबादी वाले गांवों में: 10 रुपये प्रति वर्ग मीटर
पट्टा जारी करना: निर्धारित राशि ग्राम पंचायत कोष में जमा होने के पश्चात प्रपत्र-23 (ग) में विक्रय विलेख (पट्टा) जारी किया जाता है, जो कि अहस्तांतरणीय होता है।
बजट घोषणा वर्ष 2025-26 के अंतर्गत अटल ज्ञान केंद्रों की स्थापना एवं क्रियान्विति के संबंध में दिशा-निर्देश
बजट घोषणा वर्ष 2025-26: अटल ज्ञान केंद्रों की स्थापना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज) राजस्थान सरकार द्वारा बजट घोषणा वर्ष 2025-26 के अंतर्गत प्रथम चरण में 3 हजार से अधिक आबादी वाले 2082 ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर अटल ज्ञान केंद्रों की स्थापना और क्रियान्विति के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
प्रमुख बिंदु एवं वित्तीय प्रावधान
केंद्र राशि: प्रत्येक अटल ज्ञान केंद्र हेतु केंद्र राशि रु. 12.50 लाख का व्यय षष्ठम राज्य वित्त आयोग के दिशा-निर्देश क्रमांक 347 दिनांक 28.01.2025 के बिंदु संख्या 3(iv) 'सामुदायिक केंद्रों का निर्माण एवं रख-रखाव कार्य' (जिसमें पुस्तकालय एवं वाचनालयों का निर्माण, फर्नीचर यथा कुर्सी, टेबल आदि) के तहत किया जा सकेगा।
इंटरनेट सुविधा: 15वें वित्त आयोग के दिशा-निर्देश क्रमांक 301 दिनांक 15.02.2022 के बिंदु संख्या 8 'सार्वजनिक पुस्तकालय' के तहत इंटरनेट सुविधा प्राप्त करने हेतु एकबारीय लागत एवं आवर्ती व्यय का उपयोग किया जा सकेगा।
कंप्यूटर क्रय: षष्ठम राज्य वित्त आयोग के दिशा-निर्देश के बिंदु संख्या (ब)(1) 'सूचना प्रौद्योगिकी/ई-गवर्नेंस/डेटा बेस का उपयोग' के तहत प्रति ग्राम पंचायत 4 कंप्यूटर क्रय किए जा सकेंगे।
अटल ज्ञान केंद्रों की स्थापना हेतु निर्धारित समय सीमा
प्रशासनिक स्वीकृति जारी करना - दिनांक 15.06.2025 तक
तकनीकी स्वीकृति जारी करना - दिनांक 30.06.2025 तक
वित्तीय स्वीकृति जारी करना - दिनांक 05.07.2025 तक
निविदा जारी संबंधित कार्यवाही - दिनांक 15.07.2025 तक
अटल प्रेरकों का चयन
प्रथम चरण में चयनित 2082 ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर अटल ज्ञान केंद्रों की स्थापना के उपरांत निर्धारित प्रक्रिया द्वारा आउटसोर्सिंग के माध्यम से अटल प्रेरकों का चयन किया जाएगा। अटल प्रेरक मानदेय का भुगतान 15वें वित्त आयोग के दिशा-निर्देश के बिंदु संख्या 13 के तहत अन्य बुनियादी सेवाओं/संवर्धित सेवाओं के आवर्ती व्यय और आवश्यक रूप से अन्य प्रशासनिक खर्च (10 प्रतिशत की सीमा भीतर) के तहत किया सकेगा। यह वित्त विभाग की आईडी संख्या 332500866 दिनांक 02.06.2025 द्वारा अनुमोदित है।
राजस्थान में अटल ज्ञान केंद्र की स्थापना एवं संशोधित दिशा-निर्देश
अटल ज्ञान केंद्र योजना - संशोधित दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा राज्य की प्रत्येक ग्राम पंचायत में चरणबद्ध रूप से अटल ज्ञान केंद्र स्थापित किए जाने के संबंध में आदेश एवं संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता, युवाओं के लिए करियर मार्गदर्शन, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और लोक कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी सुलभ कराने के उद्देश्य से शुरू की गई है।
योजना के मुख्य बिंदु एवं गतिविधियां:
अटल पुस्तकालय एवं वाचनालय: महापुरुषों के विचार, प्रतियोगिता परीक्षा पुस्तकें, ई-लब्रेरी और कार्यशाला सेंटर की सुविधा।
संविधान केंद्र: भारत के संविधान की प्रस्तावना, मूल अधिकार, कर्तव्य और लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रदर्शन।
सूचना सुविधा केंद्र: सरकारी योजनाओं की जानकारी, साहित्य वितरण और कानूनी प्रावधानों की जागरूकता।
डिजिटल ई-लर्निंग केंद्र: ई-कॉर्नर, ई-मित्र प्लस मशीन और पोर्टल के माध्यम से योजनाओं के ऑनलाइन आवेदन की सुविधा।
युवा मार्गदर्शन केंद्र: करियर काउंसलिंग, उच्च शिक्षा ऋण संस्थानों की जानकारी और विषय विशेषज्ञों के व्याख्यान।
भवन निर्माण एवं लागत विवरण:
प्रथम चरण में राज्य की 3 हजार से अधिक आबादी वाले 2082 ग्राम पंचायत मुख्यालयों का चयन किया गया है। भारत निर्माण सेवा केंद्र के भवनों में आवश्यकतानुसार हॉल का निर्माण किया जाएगा। प्रत्येक अटल ज्ञान केंद्र के निर्माण की कुल अनुमानित लागत 12.50 लाख रुपये होगी, जिसमें हॉल निर्माण, फर्नीचर, वायरिंग और कंप्यूटर शामिल हैं।
अटल प्रेरकों का चयन एवं मानदेय:
स्थानीय युवाओं को आउटसोर्सिंग के माध्यम से अटल प्रेरक के रूप में नियुक्त किया जाएगा। इनकी न्यूनतम योग्यता 12वीं + RS-CIT प्रमाण-पत्र और न्यूनतम आयु 18 वर्ष (दिनांक 01.04.2025 तक) निर्धारित की गई है। श्रम विभाग की अधिसूचना दिनांक 13.12.2024 के अनुसार इन्हें 9334/- रुपये मासिक मानदेय (359/- प्रतिदिन) देय होगा।
प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) क्रियान्वयन फ्रेमवर्क: महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश और मुख्य बिंदु
यह दस्तावेज ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) के क्रियान्वयन का फ्रेमवर्क है। इसका मुख्य उद्देश्य वर्ष 2022 तक देश के सभी बेघर परिवारों तथा कच्चे व जीर्ण-शीर्ण मकानों में रहने वाले परिवारों को बुनियादी सुविधाओं से युक्त पक्का मकान उपलब्ध कराना है।
मुख्य विशेषताएं एवं वित्तीय प्रावधान:
लक्ष्य: 2016-17 से 2018-19 तक तीन वर्षों में एक करोड़ ग्रामीण आवास निर्माण का लक्ष्य।
आवास का आकार: मकान का न्यूनतम आकार बढ़ाकर 25 वर्ग मीटर (साफ-सुथरे रसोई घर सहित) कर दिया गया है।
इकाई सहायता: मैदानी क्षेत्रों में 70,000 रुपये से बढ़ाकर 1.20 लाख रुपये तथा पर्वतीय राज्यों, दुर्गम क्षेत्रों एवं आईएपी जिलों में 75,000 रुपये से बढ़ाकर 1.30 लाख रुपये की गई है।
शौचालय निर्माण: स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण (एसबीएम-जी), मनरेगा या अन्य स्रोतों से शौचालय निर्माण के लिए 12,000 रुपये की अतिरिक्त सहायता।
मनरेगा मजदूरी: आवास निर्माण के लिए मनरेगा के अंतर्गत 90 / 95 दिनों की अकुशल मजदूरी का प्रावधान।
ऋण सुविधा: इच्छुक लाभार्थियों को वित्तीय संस्थाओं से 70,000 रुपये तक की ऋण सुविधा उपलब्ध कराने में मदद।
लाभार्थियों का चयन और सत्यापन:
लाभार्थियों का चयन सामाजिक आर्थिक जाति आधारित जनगणना (एसईसीसी) 2011 के आंकड़ों और मापदंडों के आधार पर ग्राम सभा द्वारा किया जाता है। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आवाससॉफ्ट (AwaasSoft) पोर्टल और आवास ऐप के माध्यम से ई-शासन, जिओ-टैगिंग और निगरानी की व्यवस्था की गई है।
मुख्यमंत्री थार सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम - दिशा निर्देश 2025
मुख्यमंत्री थार सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम - दिशा निर्देश 2025
ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग (ग्रामीण विकास अनुभाग-6), राजस्थान सरकार द्वारा जारी क्रमांक एफ.55(01)ग्रावि/SAP/CM-Thar-BADP/मार्गदर्शिका/2025-12932 दिनांक 26.03.2025 के अंतर्गत 'मुख्यमंत्री थार सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम' की मार्गदर्शिका जारी की गई है।
कार्यक्रम का उद्देश्य एवं क्षेत्र
यह कार्यक्रम राजस्थान प्रदेश की अंतर्राष्ट्रीय सीमा के निकट निवास करने वाले परिवारों की सुविधाओं के उन्नयन, क्षेत्रीय विकास में असंतुलन को दूर करने तथा समग्र विकास पर बल देने के लिए शुरू किया गया है। यह शत-प्रतिशत राज्य वित्त पोषित कार्यक्रम है। यह कार्यक्रम बाड़मेर, बीकानेर, जैसलमेर और श्री गंगानगर जिलों के चयनित आबाद गांवों, कस्बों, अर्द्धशहरी/शहरी क्षेत्रों में संचालित होगा।
कार्यक्रम के अंतर्गत कराए जाने वाले कार्य
शिक्षा एवं स्वास्थ्य: शाला भवनों एवं कमरों का निर्माण, आंगनबाड़ी भवन, स्मार्ट डिजिटल क्लासरूम, छात्रावासों का निर्माण एवं जीर्णोद्धार, खेल मैदान व पुस्तकालय भवनों का निर्माण।
पेयजल: स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता, फ्लोराइड युक्त पानी या खारे पानी वाले क्षेत्रों में वाटर ट्रीटमेंट/आर.ओ. प्लांट।
सम्पर्क सड़क: आन्तरिक सड़कें एवं नाली, सरकारी कार्यालयों, शिक्षा एवं चिकित्सा केन्द्रों हेतु सुगम पहुँच मार्ग और पुल/पुलिया निर्माण।
ऊर्जा: सरकारी भवनों, शिक्षा एवं चिकित्सा केन्द्रों में सोलर प्लांट (आवर्ती व्यय अनुमत नहीं)।
कृषि एवं पशुपालन अवसंरचना: लघु सिंचाई परियोजनाओं का निर्माण, जल संरक्षण कार्य, पशु चारा संग्रहण केन्द्रों का निर्माण।
खेल अवसंरचना: खेल मैदानों का निर्माण/विकास, खेल स्टेडियम, ओपन जिम/शारीरिक फिटनेस उपकरणों की स्थापना।
पर्यटन एवं संस्कृति: पुरातत्व एवं सांस्कृतिक महत्व के स्थलों का विकास, शौचालय, पेयजल, रोशनी, सामुदायिक भवन, संपर्क सड़क व पार्किंग।
महिला सशक्तीकरण: स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के उत्पादों की बिक्री में सहयोग, हाट निर्माण, संकुल स्तरीय संगठन के लिए कार्यशाला भवन का निर्माण।
कौशल विकास: ब्लॉक स्तर पर कौशल विकास केन्द्रों की स्थापना।
वित्तीय प्रावधान एवं क्रियान्वयन
कार्यक्रम के अंतर्गत कुल राशि का 80 प्रतिशत जिलों को वार्षिक कार्योजना हेतु, 19 प्रतिशत राज्य स्तर पर संरक्षित, और 01 प्रतिशत राशि प्रशासनिक मद हेतु उपलब्ध होगी। वार्षिक कार्योजना में किसी भी कार्य की न्यूनतम धनराशि सामान्य रूप से 5 लाख रुपये से कम नहीं होगी। कार्यक्रम के क्रियान्वयन हेतु जिला स्तर पर जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में 'जिला स्तरीय समिति' तथा राज्य स्तर पर ग्रामीण विकास विभाग के मंत्री की अध्यक्षता में 'राज्य स्तरीय समिति' का गठन किया गया है।
मुख्यमंत्री थार सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम - दिशा निर्देश 2025
मुख्यमंत्री थार सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम - दिशा निर्देश 2025
ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग (ग्रामीण विकास अनुभाग-6), राजस्थान सरकार द्वारा जारी क्रमांक एफ.55(01)ग्रावि/SAP/CM-Thar-BADP/मार्गदर्शिका/2025-12932 दिनांक 26.03.2025 के अंतर्गत 'मुख्यमंत्री थार सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम' की मार्गदर्शिका जारी की गई है।
कार्यक्रम का उद्देश्य एवं क्षेत्र
यह कार्यक्रम राजस्थान प्रदेश की अंतर्राष्ट्रीय सीमा के निकट निवास करने वाले परिवारों की सुविधाओं के उन्नयन, क्षेत्रीय विकास में असंतुलन को दूर करने तथा समग्र विकास पर बल देने के लिए शुरू किया गया है। यह शत-प्रतिशत राज्य वित्त पोषित कार्यक्रम है। यह कार्यक्रम बाड़मेर, बीकानेर, जैसलमेर और श्री गंगानगर जिलों के चयनित आबाद गांवों, कस्बों, अर्द्धशहरी/शहरी क्षेत्रों में संचालित होगा।
कार्यक्रम के अंतर्गत कराए जाने वाले कार्य
शिक्षा एवं स्वास्थ्य: शाला भवनों एवं कमरों का निर्माण, आंगनबाड़ी भवन, स्मार्ट डिजिटल क्लासरूम, छात्रावासों का निर्माण एवं जीर्णोद्धार, खेल मैदान व पुस्तकालय भवनों का निर्माण।
पेयजल: स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता, फ्लोराइड युक्त पानी या खारे पानी वाले क्षेत्रों में वाटर ट्रीटमेंट/आर.ओ. प्लांट।
सम्पर्क सड़क: आन्तरिक सड़कें एवं नाली, सरकारी कार्यालयों, शिक्षा एवं चिकित्सा केन्द्रों हेतु सुगम पहुँच मार्ग और पुल/पुलिया निर्माण।
ऊर्जा: सरकारी भवनों, शिक्षा एवं चिकित्सा केन्द्रों में सोलर प्लांट (आवर्ती व्यय अनुमत नहीं)।
कृषि एवं पशुपालन अवसंरचना: लघु सिंचाई परियोजनाओं का निर्माण, जल संरक्षण कार्य, पशु चारा संग्रहण केन्द्रों का निर्माण।
खेल अवसंरचना: खेल मैदानों का निर्माण/विकास, खेल स्टेडियम, ओपन जिम/शारीरिक फिटनेस उपकरणों की स्थापना।
पर्यटन एवं संस्कृति: पुरातत्व एवं सांस्कृतिक महत्व के स्थलों का विकास, शौचालय, पेयजल, रोशनी, सामुदायिक भवन, संपर्क सड़क व पार्किंग।
महिला सशक्तीकरण: स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के उत्पादों की बिक्री में सहयोग, हाट निर्माण, संकुल स्तरीय संगठन के लिए कार्यशाला भवन का निर्माण।
कौशल विकास: ब्लॉक स्तर पर कौशल विकास केन्द्रों की स्थापना।
वित्तीय प्रावधान एवं क्रियान्वयन
कार्यक्रम के अंतर्गत कुल राशि का 80 प्रतिशत जिलों को वार्षिक कार्योजना हेतु, 19 प्रतिशत राज्य स्तर पर संरक्षित, और 01 प्रतिशत राशि प्रशासनिक मद हेतु उपलब्ध होगी। वार्षिक कार्योजना में किसी भी कार्य की न्यूनतम धनराशि सामान्य रूप से 5 लाख रुपये से कम नहीं होगी। कार्यक्रम के क्रियान्वयन हेतु जिला स्तर पर जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में 'जिला स्तरीय समिति' तथा राज्य स्तर पर ग्रामीण विकास विभाग के मंत्री की अध्यक्षता में 'राज्य स्तरीय समिति' का गठन किया गया है।
मुख्यमंत्री थार सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम - दिशा निर्देश 2025
मुख्यमंत्री थार सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम - दिशा निर्देश 2025
ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग (ग्रामीण विकास अनुभाग-6), राजस्थान सरकार द्वारा जारी क्रमांक एफ.55(01)ग्रावि/SAP/CM-Thar-BADP/मार्गदर्शिका/2025-12932 दिनांक 26.03.2025 के अंतर्गत 'मुख्यमंत्री थार सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम' की मार्गदर्शिका जारी की गई है।
कार्यक्रम का उद्देश्य एवं क्षेत्र
यह कार्यक्रम राजस्थान प्रदेश की अंतर्राष्ट्रीय सीमा के निकट निवास करने वाले परिवारों की सुविधाओं के उन्नयन, क्षेत्रीय विकास में असंतुलन को दूर करने तथा समग्र विकास पर बल देने के लिए शुरू किया गया है। यह शत-प्रतिशत राज्य वित्त पोषित कार्यक्रम है। यह कार्यक्रम बाड़मेर, बीकानेर, जैसलमेर और श्री गंगानगर जिलों के चयनित आबाद गांवों, कस्बों, अर्द्धशहरी/शहरी क्षेत्रों में संचालित होगा।
कार्यक्रम के अंतर्गत कराए जाने वाले कार्य
शिक्षा एवं स्वास्थ्य: शाला भवनों एवं कमरों का निर्माण, आंगनबाड़ी भवन, स्मार्ट डिजिटल क्लासरूम, छात्रावासों का निर्माण एवं जीर्णोद्धार, खेल मैदान व पुस्तकालय भवनों का निर्माण।
पेयजल: स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता, फ्लोराइड युक्त पानी या खारे पानी वाले क्षेत्रों में वाटर ट्रीटमेंट/आर.ओ. प्लांट।
सम्पर्क सड़क: आन्तरिक सड़कें एवं नाली, सरकारी कार्यालयों, शिक्षा एवं चिकित्सा केन्द्रों हेतु सुगम पहुँच मार्ग और पुल/पुलिया निर्माण।
ऊर्जा: सरकारी भवनों, शिक्षा एवं चिकित्सा केन्द्रों में सोलर प्लांट (आवर्ती व्यय अनुमत नहीं)।
कृषि एवं पशुपालन अवसंरचना: लघु सिंचाई परियोजनाओं का निर्माण, जल संरक्षण कार्य, पशु चारा संग्रहण केन्द्रों का निर्माण।
खेल अवसंरचना: खेल मैदानों का निर्माण/विकास, खेल स्टेडियम, ओपन जिम/शारीरिक फिटनेस उपकरणों की स्थापना।
पर्यटन एवं संस्कृति: पुरातत्व एवं सांस्कृतिक महत्व के स्थलों का विकास, शौचालय, पेयजल, रोशनी, सामुदायिक भवन, संपर्क सड़क व पार्किंग।
महिला सशक्तीकरण: स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के उत्पादों की बिक्री में सहयोग, हाट निर्माण, संकुल स्तरीय संगठन के लिए कार्यशाला भवन का निर्माण।
कौशल विकास: ब्लॉक स्तर पर कौशल विकास केन्द्रों की स्थापना।
वित्तीय प्रावधान एवं क्रियान्वयन
कार्यक्रम के अंतर्गत कुल राशि का 80 प्रतिशत जिलों को वार्षिक कार्योजना हेतु, 19 प्रतिशत राज्य स्तर पर संरक्षित, और 01 प्रतिशत राशि प्रशासनिक मद हेतु उपलब्ध होगी। वार्षिक कार्योजना में किसी भी कार्य की न्यूनतम धनराशि सामान्य रूप से 5 लाख रुपये से कम नहीं होगी। कार्यक्रम के क्रियान्वयन हेतु जिला स्तर पर जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में 'जिला स्तरीय समिति' तथा राज्य स्तर पर ग्रामीण विकास विभाग के मंत्री की अध्यक्षता में 'राज्य स्तरीय समिति' का गठन किया गया है।
षष्ठ राज्य वित्त आयोग की सिफारिशों के क्रियान्वयन एवं अनुदान उपयोग हेतु दिशा-निर्देश (वित्तीय वर्ष 2024-25)
षष्ठ राज्य वित्त आयोग (2020-25) दिशा-निर्देश 2024-25
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा क्रमांक एफ 165(07)पंकावि/एसएफसी/षष्ठ/दिशा-निर्देश/2024-25/347 दिनांक 28.01.2025 के अंतर्गत षष्ठ राज्य वित्त आयोग की अंतिम रिपोर्ट (2020-25) पर राज्य सरकार द्वारा की गई कार्यवाही विवरण (ATR) के अनुसार पंचायती राज संस्थाओं को देय अनुदान के उपयोग हेतु विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
अनुदान राशि का मुख्य विभाजन
मूलभूत एवं विकास कार्य (55 प्रतिशत राशि): ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था, सड़कों एवं सार्वजनिक स्थानों की नियमित सफाई, स्वच्छता, पार्कों की चारदीवारी, सामुदायिक केंद्रों का निर्माण, आंतरिक सड़कों/सी.सी. रोड व नालियों का निर्माण (अधिकतम 40% सीमा तक), इंटरनेट सुविधा, कंप्यूटर क्रय, ऑडिट फीस का भुगतान, जनप्रतिनिधियों का प्रशिक्षण और मानदेय, तथा निजी आय बढ़ाने हेतु वाणिज्यिक परिसरों का निर्माण आदि कार्य किए जा सकेंगे।
राष्ट्रीय/राज्य प्राथमिकता की योजनाएं/गतिविधियां (40 प्रतिशत राशि): सूचना प्रौद्योगिकी/ई-गवर्नेंस/डेटाबेस (प्रियासॉफ्ट, पीएफएमएस, ई-ग्राम स्वराज पोर्टल, कंप्यूटर ऑपरेटर), पेयजल/आर.ओ. प्रणाली, मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन योजना, स्वच्छता अभियान, श्री अन्नपूर्णा रसोई योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण, सौर/एल.ई.डी. लाइटें, अग्निशमन सेवाएं, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ और युवा विकास से जुड़े क्रियाकलाप।
लिंगानुकूल स्थान बनाने के लिए (2 प्रतिशत राशि): प्रत्येक पंचायती राज संस्थान में हाथ धोने की सुविधाओं सहित पृथक शौचालय, महिलाओं के उत्पीड़न से संबंधित शिकायतों के निवारण हेतु आंतरिक समितियों का प्रदर्शन पट्ट, महिलाओं की अध्यक्षता में हेल्प डेस्क तथा महिला आगंतुकों के लिए अलग बैठने की व्यवस्था।
निष्पादन के लिए प्रोत्साहन अनुदान (3 प्रतिशत राशि): वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए यदि कोई पंचायती राज संस्था अपनी स्वयं की कर/गैर-कर राजस्व (निजी आय) पिछले तीन वर्षों की औसत आय की तुलना में बढ़ाती है, तो उसे बढ़ी हुई अतिरिक्त राशि के समान प्रोत्साहन राशि का भुगतान किया जाएगा।
वित्तीय वर्ष 2024-25 हेतु आवंटन अनुपात
राज्य के स्वयं के शुद्ध कर राजस्व के 7.00 प्रतिशत हिस्से का वितरण 2011 की जनगणना के आधार पर पंचायती राज संस्थाओं एवं नगरीय स्थानीय निकायों के मध्य 73.2 एवं 26.8 प्रतिशत के अनुपात में किया गया है। जिला परिषदों को 5 प्रतिशत, पंचायत समितियों को 20 प्रतिशत और ग्राम पंचायतों को 75 प्रतिशत हिस्सा राशि वित्तीय वर्ष 2024-25 में दिए जाने की संस्कृति की गई है।
प्रधानमन्त्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) नयाँ आवास आवेदन फॉर्म और आवश्यक दस्तावेज चेकलिस्ट
प्रधानमन्त्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) आवेदन फॉर्म और दिशानिर्देश
यह दस्तावेज़ ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार और पंचायती राज विभाग के अंतर्गत प्रधानमन्त्री आवास योजना-ग्रामीण के नए आवास निर्माण हेतु आवेदन पत्र, स्वीकृति प्रक्रिया, शपथ-पत्र, भूमि प्रमाण-पत्र, सहमति-पत्र और चेकलिस्ट का आधिकारिक प्रारूप प्रस्तुत करता है।
मुख्य उद्देश्य एवं प्रक्रिया
प्रपत्र-24(1/1): यह नया आवास प्राप्त करने के लिए ग्रामीण विकास अधिकारी, टैग अधिकारी या ई-मित्र के माध्यम से भरा जाने वाला आवेदन पत्र है।
योग्यता और पात्रता: आवेदक का नाम PWL-2021 की वरीयता सूची में होना चाहिए। आवेदक के पास पूर्व में पक्का मकान नहीं होना चाहिए और वह निर्धारित अपवर्जन मानदंडों (जैसे वाहन, सरकारी नौकरी, आयकरदाता, भूमि सीमा आदि) के दायरे में नहीं आना चाहिए।
अनुदान और निर्माण शर्तें: आवास निर्माण हेतु मिलने वाली सहायता राशि से न्यूनतम 25 वर्गमीटर प्लिथ क्षेत्र का नया आवास अधिकतम 12 माह की अवधि में पूरा करना अनिवार्य है।
स्वीकृति प्रक्रिया: ग्राम विकास अधिकारी या टैग अधिकारी द्वारा पात्रता की जाँच, जियो टैग फोटो, Aawas Soft पर रजिस्ट्रेशन और पंचायत समिति स्तर पर प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति दी जाती है।
आवश्यक दस्तावेजों की चेकलिस्ट
वरीयता अनुसार भरा हुआ पूर्ण रजिस्ट्रेशन फॉर्म (प्रपत्र-1) और प्रमाणित फोटो
जमीन से संबंधित दस्तावेज की प्रमाणित प्रति या भूमि संबंधित प्रमाण-पत्र / सहमति-पत्र
ग्राम पंचायत की आबादी भूमि में रहवासी होने का प्रमाण-पत्र (सरपंच/ग्राम विकास अधिकारी द्वारा)
जॉब कार्ड, जन आधार कार्ड, राशन कार्ड और आधार कार्ड की प्रमाणित प्रतियाँ
आवेदक स्वयं की बैंक खाता संख्या की छाया प्रति
शपथ-पत्र, योग्यता निर्धारण शपथ-पत्र, कंसेंट फॉर्म (Consent Form) और आधार कार्ड सहमति प्रमाण-पत्र
कार्यस्थल एवं प्रस्तावित कार्य की जियो टैग फोटो
नोट: तथ्य छिपाकर या गलत जानकारी देकर लाभ प्राप्त करने पर राज्य सरकार से प्राप्त अनुदान राशि दण्डनीय ब्याज सहित वसूली योग्य होगी और प्रशासनिक स्वीकृति निरस्त कर दी जाएगी।
स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी क्रमांक एफ44(51)पंच्रावि/प्रशि./स्वामित्व/2023/पार्ट-1/E-File - 01834 (दिनांक 27.08.2024) के अंतर्गत 'स्वामित्व योजना' के क्रियान्वयन में जिलों में आ रही विभिन्न समस्याओं के निराकरण हेतु राजस्व विभाग एवं पंचायती राज विभाग के समन्वय से महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश प्रसारित किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
सीमाज्ञान एवं चूना मार्किंग: आबादी क्षेत्र की बाहरी सीमा का सीमाज्ञान संबंधित पटवारी द्वारा किए जाने के उपरांत ग्राम पंचायत के कर्मियों द्वारा चूना मार्किंग की जाएगी। चूना मार्किंग के समय पटवारी की उपस्थिति अनिवार्य है।
सड़क सीमा एवं रेलवे लाइन दूरी: राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 के नियम 161 के अनुसार, जिन व्यक्तियों के मकान आबादी भूमि में स्थित हैं किंतु सड़क सीमा या रेलवे लाइन सीमा में आ रहे हैं, उन्हें प्रॉपर्टी पार्सल का वितरण नहीं किया जाए।
एक से अधिक भूखंड: किसी व्यक्ति के स्वामित्व में एक से अधिक भूखंड होने और उनका पट्टा न होने पर सिर्फ पट्टा शुद्धा भूखंड का प्रॉपर्टी पार्सल देय है, शेष का नहीं।
महिला पट्टा धारक: राजस्थान पंचायती राज नियम 157(2) के तहत 300 वर्गगज तक के महिला पट्टा धारक की प्रॉपर्टी आईडी का क्षेत्रफल 300 वर्गगज से अधिक होने पर नियम 165(4) के अनुसार डीएलसी दर से प्रभार लेकर विक्रय विलेख दिया जा सकता है, अन्यथा प्रॉपर्टी आईडी विवादग्रस्त अंकित की जाए।
आपत्तियां एवं अपील: स्वामित्व योजना अंतर्गत आपत्तियों के आमंत्रण हेतु विज्ञापन नियमानुसार प्रकाशित किए जाएं। पट्टे या प्रॉपर्टी कार्ड वितरण में त्रुटि/विवाद होने पर राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 के नियम 166 एवं अधिनियम 1994 की धारा 97 के संबंधित अपीलीय प्रावधान ही लागू होंगे।
विभागीय ग्रामीण कार्य निर्देशिका 2025 के बिंदु संख्या 10 एवं परिशिष्ट 2 के प्रावधानों के संबंध में मार्गदर्शन
विभागीय ग्रामीण कार्य निर्देशिका 2025 - भूमि स्वामित्व एवं मार्गदर्शन
ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न निर्माण कार्यों की तकनीकी, सुगमता और गुणवत्ता के लिए विभागीय ग्रामीण कार्य निर्देशिका-2025 लागू की गई है। इस निर्देशिका के बिंदु संख्या 10 एवं परिशिष्ट 2 के प्रावधानों के संबंध में जिला कलेक्टरों को आवश्यक मार्गदर्शन जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु एवं दिशा-निर्देश
आबादी भूमि: नए आंगनबाड़ी भवन, विद्यालय, सामुदायिक भवन, पंचायत भवन, स्वास्थ्य केंद्र, शौचालय आदि के निर्माण के लिए आबादी क्षेत्र में सक्षम प्राधिकारी से अनापत्ति प्रमाण-पत्र प्राप्त करना या नाम आवंटन/पट्टा जारी कराना आवश्यक है।
रास्ता/गोचर भूमि: नदी, नाला, तालाब के भराव क्षेत्र, रेलवे लाइन और सड़क सीमा के पास निर्माण स्वीकृत नहीं है। हालांकि सार्वजनिक शौचालयी, नालियों, ट्यूवेल, टंकी आदि के निर्माण के लिए स्थानीय स्तर पर उचित निर्णय लिया जा सकता है।
खातेदारी भूमि (दान/समर्पण): परिसम्पत्तियों के निर्माण हेतु खातेदारी भूमि दान या उपहार स्वरूप ली जा सकती है, जिसके लिए नामांतरण, खसरा में लोकेशन दर्ज करना और सीमाज्ञान करवाना अनिवार्य है।
परिसम्पत्तियों का नामकरण: नवनिर्मित परिसम्पत्तियों (जैसे आंगनबाड़ी, विद्यालय, सामुदायिक भवन, पंचायत भवन आदि) की भूमि स्वामित्व शासकीय कार्यालय/ग्राम पंचायत के नाम होना अनिवार्य है।
विमुक्त, घुमन्तु एवं अर्द्धघुमन्तु आवासहीन व्यक्तियों को भूखंड/पट्टा आवंटन के संबंध में परिपत्र एवं दिशा-निर्देश
विमुक्त, घुमन्तु एवं अर्द्धघुमन्तु आवासहीन व्यक्तियों को भूखंड आवंटन
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा विमुक्त, घुमन्तु एवं अर्द्धघुमन्तु श्रेणी के आवासहीन व्यक्तियों को नियमानुसार भूखंड और पट्टा आवंटन करने के संबंध में आवश्यक परिपत्र एवं दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
प्रमुख बिंदु
नियम का संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम-158 के अंतर्गत पंचायतें 300 वर्गगज तक की आबादी भूमि रियायती दरों या पात्र श्रेणियों के लिए निःशुल्क आवंटित कर सकती हैं।
रियायती दरें (नियम 158(2)):
1000 से कम आबादी वाले गांवों में (1991 की जनगणना): 2/- रुपये प्रति वर्ग मीटर
1001 से 2000 की आबादी वाले गांवों में (1991 की जनगणना): 5/- रुपये प्रति वर्ग मीटर
2000 से अधिक आबादी वाले गांवों में (1991 की जनगणना): 10/- रुपये प्रति वर्ग मीटर
पट्टा वितरण और कार्यक्रम: राज्य सरकार के निर्देशानुसार पात्र परिवारों को भूखंड/पट्टा वितरण के संबंध में समय-समय पर अभियान चलाए गए हैं और जिला एवं स्थानीय स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाने के निर्देश हैं।
आवश्यक कार्रवाई: सभी संबंधित जिला कलेक्टरों, मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (जिला परिषद) और विकास अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे पात्र आवासहीन परिवारों का चिन्हीकरण कर पट्टे तैयार कराने और वितरण की कार्रवाई सुनिश्चित करें।
ग्राम पंचायत द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के पात्र परिवारों को पट्टा जारी करने बाबत निर्देश
ग्राम पंचायत द्वारा पट्टा जारी करने के संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत पट्टा आवंटन के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
राज्य सरकार के ध्यान में लाया गया था कि कतिपय ग्राम पंचायतों में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की पात्रता/वरीयता सूची में सम्मिलित परिवारों को आबादी भूमि का पट्टा आवंटित नहीं हो पा रहा है।
चूंकि प्रधानमंत्री आवास योजना राज्य सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं में शामिल है, इसलिए सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है।
समस्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद को निर्देशित किया जाता है कि प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की पात्रता/वरीयता सूची में शामिल समस्त परिवारों को निर्धारित प्रक्रिया अपनाते हुए नियमानुसार भूमि/पट्टे आवश्यक रूप से आवंटित किया जाना सुनिश्चित करावें।
यह आदेश शासन सचिव एवं आयुक्त, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के हस्ताक्षर से जारी किया गया है।
विकसित भारत संकल्प यात्रा के सफल क्रियान्वयन एवं वित्तीय प्रावधान के संबंध में दिशा-निर्देश
विकसित भारत संकल्प यात्रा का सफल क्रियान्वयन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा विकसित भारत संकल्प यात्रा के सफल क्रियान्वयन के संबंध में दिनांक 22-12-2023 को आदेश जारी किया गया है।
मुख्य उद्देश्य एवं विशेषताएँ
भारत सरकार द्वारा संचालित विभिन्न फ्लेगशिप योजनाओं की जानकारी आमजन तक पहुँचाने, पात्र व्यक्तियों को लाभान्वित करने और योजनाओं के निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने के उद्देश्य से यह यात्रा राजस्थान के सभी जिलों की प्रत्येक ग्राम पंचायत तथा 10 हजार से अधिक आबादी के शहरी स्थानीय निकायों में 26 जनवरी 2024 तक जारी रहेगी। यात्रा की प्रमुख विशेषताओं में:
पहुँच से छूटे लोगों तक पहुँचना
प्रसार और जागरूकता बढ़ाना
संभावित लाभार्थियों का नामाकन एवं विशेष कैंपों का आयोजन
प्रत्येक ग्राम पंचायत में मोबिलाइजेशन, सांस्कृतिक प्रदर्शन एवं सूचना तकनीक का उपयोग
वित्तीय प्रावधान एवं व्यय सीमा
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के आदेश क्रमांक एफ 165(07)पाइफो/एसएफसी/षष्टम/दिशा निर्देश/2021-22/100 दिनांक 25-01-2022 के अनुसार पंचायती राज संस्थाओं में शिविरों/अभियानों के लिए व्यय सीमा निर्धारित है। विकसित भारत संकल्प यात्रा के सफल क्रियान्वयन हेतु:
प्रति जिला परिषद: रु. 0.50 लाख तक का व्यय
प्रति ग्राम पंचायत: रु. 0.20 लाख तक का व्यय
संबंधित जिला परिषद एवं ग्राम पंचायतें यह व्यय षष्ठम राज्य वित्त आयोग की उपलब्ध अवशेष राशि से करना सुनिश्चित करें तथा इस कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान करें।
स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
स्वामित्व योजना क्रियान्वयन निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन के संबंध में समस्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद, राजस्थान को महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
सम्पत्ति दस्तावेज तैयार करना: स्वामित्व योजनांतर्गत भू-खण्ड धारकों का सम्पत्ति दस्तावेज (टाईटल डॉक्यूमेंट) तैयार करते समय पंचायती राज नियम 1996 के अध्याय 9 में वर्णित स्थावर सम्पत्तियों से संबंधित प्रावधान अनुरूप पुराने गृहों का विनियमितीकरण, भूमियों का कमजोर वर्गों को आवंटन, भूमियों का रियायती कीमत पर आवंटन, सरकारी संस्थाओं को आबाद भूमि का आवंटन एवं नीलामी से संबंधित नियमों में वर्णित प्रावधान अनुरूप ही नियमानुसार कार्यवाही की जानी है।
भौतिक सर्वेक्षण एवं पट्टा निर्माण: भौतिक सर्वेक्षण उपरांत भारतीय सर्वेक्षण विभाग से मैप-2 प्राप्त होने पर राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 के प्रावधानों के तहत पट्टा निर्माण की कार्यवाही की जावे। साथ ही यह भी सुनिश्चित कर लिया जावे कि पूर्व में जारी पट्टे एवं वर्तमान कब्जे के आधार पर क्षेत्रफल कम या अधिक होने की स्थिति में, पट्टे में नियमानुसार संशोधन कर लेवें तथा यह भी सुनिश्चित किया जावे कि पंचायती राज संस्थाओं को किसी भी प्रकार की राजस्व हानि न हो।
सभी जिलों में इन निर्देशों का अध्ययन कर योजना के सफल क्रियान्वयन हेतु आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन गांव के संग अभियान 2023 के दौरान पट्टा जारी करने के संबंध में निर्देश
राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2023 एवं प्रशासन गांव के संग अभियान
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा प्रशासनिक आदेश क्रमांक एफ 139 (45) परावि/विधि/संशो/2021/190 दिनांक 02/06/2023 जारी किया गया है। इसके माध्यम से राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन करते हुए महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना विवरण: विभागीय अधिसूचना दिनांक 23.5.2023 (जी.एस.आर. 28) के तहत राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2023 लागू किए गए हैं जो तुरंत प्रभाव से प्रवृत्त हो गए हैं।
नियम 157 में संशोधन: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 के उप-नियम (1) के परंतुक में "प्रशासन गांव के संग अभियान 2021" के स्थान पर "प्रशासन गांव के संग अभियान 2021 और प्रशासन गांव के संग अभियान 2023" प्रतिस्थापित किया गया है।
पट्टा जारी करने की दर: प्रशासन गांव के संग अभियान 2023 के दौरान ग्राम पंचायत द्वारा जारी किए जाने वाले पट्टों की दर/प्रभार में छूट के संबंध में उपर्युक्त अधिसूचना के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
जारीकर्ता:निशु कुमार अग्निहोत्री, उपुयक्त एवं उप शासन सचिव (प्रथम), ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
पंचायती राज संस्थाओं के स्वामित्व वाले सरकारी जर्जर भवनों को ध्वस्त करने के संबंध में दिशानिर्देश
पंचायती राज संस्थाओं के जर्जर भवनों को ध्वस्त करने के संबंध में दिशानिर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा क्रमांक एफ 4 (1054) परावि/पीसी/पालडी एम/जर्जर सम्पत्ति भवन/2022/294 दिनांक 14/02/2023 के तहत पंचायती राज संस्थाओं के स्वामित्व वाले जीर्णशीर्ण, अनुपयोगी एवं असुरक्षित भवनों को ध्वस्त करने के संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
पूर्व निर्देश का संदर्भ: विभागीय पत्र क्रमांक 618 दिनांक 13.04.2012 के द्वारा पूर्व में निर्देश जारी किए गए थे, जिन्हें इस आदेश द्वारा अतिक्रमित किया गया है।
निरीक्षण दल का पुनर्गठन: पंचायती राज संस्थाओं के स्वामित्व वाले जीर्णशीर्ण/अनुपयोगी एवं असुरक्षित भवनों को ध्वस्त करने के लिए गठित निरीक्षण दल का पुनर्गठन इस प्रकार किया गया है: 1. अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद 2. संबंधित अधीक्षण अभियंता / अधिशाषी अभियंता पी.डब्ल्यू.डी., जिला परिषद 3. अधिशाषी अभियंता (सिविल), जिला परिषद 4. लेखाधिकारी, जिला परिषद
अनुमति प्रक्रिया: उक्त समिति की रिपोर्ट के आधार पर जिला कलेक्टर पंचायतीराज राज संस्थाओं के स्वामित्व वाले भवन गिराने की अनुमति/आदेश प्रदान करेंगे। अनुमति/आदेश जारी होने के उपरांत ही जीर्णशीर्ण/अनुपयोगी एवं असुरक्षित भवन को ध्वस्त करने की कार्यवाही की जाएगी।
मरम्मत हेतु 1.00 लाख रुपये तक की सीमा ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग - स्थायी आदेश संख्या 39/2022
राजकीय आदेश विवरण
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रामीण विकास, अनुभाग-5) द्वारा जारी स्थायी आदेश संख्या 39/2022 (दिनांक 19 अक्टूबर 2022) के माध्यम से निर्माण कार्यों की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृतियों के संबंध में संशोधन किया गया है।
मुख्य बिंदु
पत्रांक संख्या: एफ 27(252) ग्राविव/ग्रुप-5/SOP/पार्ट-3/2021-22
जारी दिनांक: 19 अक्टूबर 2022
जारीकर्ता: अपर्णा अरोरा, प्रमुख शासन सचिव
संशोधन विवरण: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के पूर्व जारी आदेशों के क्रम में ग्राम पंचायतों को प्रदत्त शक्तियों के तहत प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति (विशेषकर रखरखाव मरम्मत हेतु 1.00 लाख रुपये तक की सीमा) से संबंधित प्रावधानों को संशोधित किया गया है।
यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है और इसकी प्रतियां संबंधित विभागों, जिला कलेक्टरों, मुख्य कार्यकारी अधिकारियों और विकास अधिकारियों को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रेषित की गई हैं।
पंचायत समिति एवं ग्राम पंचायत के स्वामित्व वाली भूमियों की सूचना भेजने बाबत निर्देश
पंचायत समिति एवं ग्राम पंचायत के स्वामित्व वाली भूमियों की सूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी पत्र क्रमांक एफ.4(14)लैण्ड बैंक/विधि/पंव्रा/2022/720 दिनांक 09/06/2022 के माध्यम से सभी मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद (राजस्थान) को पंचायत समिति एवं ग्राम पंचायत के स्वामित्व वाली भूमियों की सूचना भेजने के संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य उद्देश्य एवं पृष्ठभूमि
माननीय मंत्री महोदय, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज द्वारा दिनांक 15.3.2022 को राज्य विधानसभा में चर्चा के दौरान यह घोषणा की गई थी कि ग्राम पंचायतों की भूमि का रिकॉर्ड संधारित कर लैण्ड बैंक बनाया जाएगा, जिससे पंचायतों की निजी आय में वृद्धि हो सके।
समयबद्ध कार्यवाही हेतु निर्देश
15 दिवस की अवधि: समस्त विकास अधिकारीगण अपने कार्यालय के जिम्मेदार अधिकारी/कार्मिक को पाबंद करें तथा स्वयं क्षेत्र के राजस्व अधिकारियों (तहसीलदार, पटवारी आदि) के कार्यालय से संपर्क कर पंचायत समिति/ग्राम पंचायत के स्वामित्व की भूमि (चाहे वह आ आबादी किस्म की हो अथवा कृषि या अन्य किस्म की) का संपूर्ण विवरण प्राप्त कर जमाबंदी की प्रति प्राप्त करें। यह कार्य अधिकतम 15 दिवस में पूर्ण कराया जाए।
7 दिवस की अवधि: राजस्व रिकॉर्ड से सूचना प्राप्त होने के पश्चात संलग्न प्रपत्र में पंचायतवार/पंचायत समितिवार सूचना अधिकतम 07 दिवस में आवश्यक रूप से भरवाई जाए।
कुल समयसीमा: इस प्रकार वांछित प्रपत्र हर हाल में अधिकतम 21 दिवस की अवधि में पंचायती राज विभाग को भिजवाया जाना सुनिश्चित किया जाए।
विभागीय निर्माण कार्यों के अंतर्गत निजी भूमि पर सड़क निर्माण कार्य की स्वीकृति के संबंध में आदेश
विभागीय निर्माण कार्यों के अंतर्गत सड़क निर्माण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 22 मार्च, 2022 को निजी भूमि खातेदारी पर सड़क निर्माण कार्य की स्वीकृति के संबंध में महत्वपूर्ण आदेश जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
आदेश क्रमांक: एफ 27(252) ग्राविव/ग्रुप-5/SOP/पार्ट-3/2021-22, दिनांक 22 मार्च, 2022।
जारीकर्ता: अपर्णा अरोरा, प्रमुख शासन सचिव, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग।
शर्त/टिप्पणी संख्या 13 का जोड़ा जाना: सड़क निर्माण कार्य हेतु निजी भूमि पर प्रचलित आम रास्तों के लिए भूमि से संबंधित काश्तकारों से सहमति एवं नियमानुसार शपथ पत्र लेने के उपरान्त कार्य संपादन किया जा सकेगा।
प्रभावी क्षेत्र: उक्त शर्त विभाग की समस्त विभागीय योजनांतर्गत प्रशासनिक स्वीकृति जारी करने पर प्रभावी होगी।
सहूलियत: इसमें काश्तकारों से सहमति में सरलता हेतु विभाग द्वारा पृथक् से प्रपत्र भी जारी किया जा सकेगा।
यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है और इसकी प्रतियां समस्त जिला कलेक्टर, मुख्य कार्यकारी अधिकारी और विकास अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रेषित की गई हैं।
निजी भूमि खातेदारी पर सड़क निर्माण कार्य की स्वीकृति जारी करने के संबंध में आदेश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग का महत्वपूर्ण आदेश
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रामीण विकास, अनुभाग-5) द्वारा दिनांक 22 मार्च, 2022 को निजी भूमि खातेदारी पर सड़क निर्माण कार्य की स्वीकृति जारी करने के संबंध में आदेश जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
पत्र क्रमांक: एफ 27(252) ग्राविव/ग्रुप-5/SOP/पार्ट-3/2021-22, दिनांक 22 मार्च, 2022।
जारीकर्ता: अपर्णा अरोड़ा, प्रमुख शासन सचिव।
शर्त/टिप्पणी संख्या 13: सड़क निर्माण कार्य हेतु निजी भूमि पर प्रचलित आम रास्तों के लिए भूमि से संबंधित काश्तकारों से सहमति एवं नियमानुसार शपथ पत्र लेने के उपरान्त कार्य सम्पादन किया जा सकेगा।
यह शर्त विभाग की समस्त विभागीय योजनान्तर्गत प्रशासनिक स्वीकृति जारी करने पर भी प्रभावी होगी।
काश्तकारों से सहमति में सरलता हेतु विभाग द्वारा पृथक् से प्रपत्र भी जारी किया जा सकता है।
यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग राजस्थान सरकार - शासकीय भवन परिसरों में विकास कार्यों के संबंध में आदेश
राजकीय भवन परिसरों में निर्माण कार्यों के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा क्रमांक एफ 27(252)/ग्राविवि/ग्रुप-5/SOP/पार्ट-3/2021-22 दिनांक 22 मार्च, 2022 के माध्यम से एक कार्यालय आदेश जारी किया गया है।
इस आदेश का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण विकास विभाग एवं पंचायती राज विभाग की योजनाओं के अंतर्गत शासकीय भवन परिसरों (जैसे- विद्यालय, चिकित्सालय, आंगनबाड़ी केन्द्र, किसान सेवा केन्द्र, पशु चिकित्सालय आदि) में किए जाने वाले कार्यों में आने वाली बाधाओं का समाधान करना है।
मुख्य बिंदु:
समस्या: शासकीय भवन परिसरों के नाम भूमि का पट्टा जारी न होने के कारण प्रशासनिक, तकनीकी या वित्तीय स्वीकृतियां लंबे समय तक लंबित रहती हैं, जिससे निर्माण कार्य विलंबित और प्रभावित होते हैं।
समाधान: जहाँ कार्यस्थल में राजकीय भवन परिसर होना सुनिश्चित हो, वहाँ यदि राजकीय भवन परिसर के नाम भूमि का पट्टा न हो, तो उस संस्था के प्रधान या कार्यालयाध्यक्ष की सहमति/अनापत्ति के अनुरूप निर्माण कार्य कराया जा सकता है।
ग्राम पंचायतों की भूमिका: इस संबंध में ग्राम पंचायतें भी संबंधित संस्था प्रधान की सहमति से विकास कार्य की स्वीकृति जारी कर सकेंगी।
यह आदेश प्रमुख शासन सचिव अपर्णा अरोरा द्वारा जारी किया गया है तथा इसकी प्रतिलिपि सूचनाथ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु विभिन्न संबंधित अधिकारियों को प्रेषित की गई है।
परिवाद या शिकायत की जांच के संबंध में शपथ पत्र के संशोधन से जुड़ा संशोधित आदेश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग का संशोधित आदेश
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज) द्वारा परिवाद या शिकायतों की जांच के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
विभाग के आदेश क्रमांक 24 दिनांक 03.01.2018 के तहत परिवाद या शिकायत की जांच से पूर्व शपथ पत्र प्रस्तुत करने का प्रावधान किया गया था।
संशोधित आदेश क्रमांक एफ.17(ई)परावि/प्र.2/संस्था/परिपत्र/2014/1012 दिनांक 22.02.2018 के अनुसार शपथ पत्र 10 रुपये के स्थान पर 50 रुपये के नॉन ज्यूडिशियल स्टाम्प पर, शपथग्रहिता से सत्यापित संलग्न करना अनिवार्य किया गया था।
आदेश क्रमांक एफ.17(ई)परावि/प्र.2/संस्था/परिपत्र/2014/461 दिनांक 02.03.2022 के तहत यह पुन: निर्देशित किया गया है कि परिवाद के साथ सत्य होने व आवेदक के परिचय बाबत शपथ पत्र 50 रुपये के नॉन ज्यूडिशियल स्टाम्प पर शपथग्रहिता से सत्यापित होना अनिवार्य है, क्योंकि 50 रुपये के स्टाम्प संलग्न न होने से अनावश्यक शिकायतें प्राप्त हो रही थीं।
अतिरिक्त / सहायक विकास अधिकारी के जॉब चार्ट के संबंध में परिपत्र
परिचय एवं मुख्य उद्देश्य
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा क्रमांक एफ.28(2)परावि/प्रशा.2/पंचा.प.अ./जॉब चार्ट/2017/550, दिनांक 23-02-2022 के तहत अतिरिक्त विकास अधिकारी और सहायक विकास अधिकारी के जॉब चार्ट के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
अतिरिक्त विकास अधिकारी के कार्य एवं उत्तरदायित्व
समन्वयक के रूप में: अतिरिक्त विकास अधिकारी, सहायक विकास अधिकारी तथा विकास अधिकारी के मध्य एक समन्वयक के रूप में विकास अधिकारी के सीधे नियंत्रण में कार्य करेंगे।
शाखाओं के प्रभारी: पंचायत समिति की समस्त शाखाओं के प्रभारी के रूप में विकास अधिकारी के निर्देशन में कार्य करेंगे।
पर्यवेक्षण: पंचायत समिति के सहायक विकास अधिकारी अतिरिक्त विकास अधिकारी के पर्यवेक्षण में अपनी आवंटित शाखाओं का कार्य संपादित करेंगे।
नोडल अधिकारी: प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), राजीविका, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं के नोडल अधिकारी भी आवश्यकतानुसार नियुक्त किए जा सकेंगे।
सहायक विकास अधिकारी (SEO) का जॉब चार्ट एवं सर्कल पुनर्गठन
पदों का विवरण: जिला परिषद में कुल 165 सृजित पद (प्रति कार्यालय 5-5 पद) तथा पंचायत समिति में 2264 सृजित पद (औसततन 5 ग्राम पंचायतों पर 1 पद) हैं।
सर्कल/क्लस्टर पुनर्गठन: पंचायत समिति के परिदृश्य में आने वाली समस्त ग्राम पंचायतों को स्वीकृत सहायक विकास अधिकारियों के पदों के अनुरूप समान रूप से भौगोलिक संबद्धता और निकटता को ध्यान में रखते हुए सर्कल/क्लस्टर में पुनर्वितजित किया जाएगा।
निरीक्षण एवं भ्रमण: सहायक विकास अधिकारी अपने कलस्टर की प्रत्येक ग्राम पंचायत का माह में कम से कम एक बार विस्तृत निरीक्षण करेंगे तथा निरीक्षण प्रतिवेदन विकास अधिकारी के माध्यम से मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद तथा विभाग को प्रेषित करेंगे।
ग्राम पंचायत रिकॉर्ड: सहायक विकास अधिकारी ग्राम पंचायत अभिलेखों, लेजर, रोकड़ बही, स्टॉक रजिस्टर, जन्म-मृत्यु पंजीका, और विभिन्न अधिनियमों (सूचना का अधिकार अधिनियम 2005, सुनवाई का अधिकार अधिनियम 2012, लोक सेवा गारंटी अधिनियम 2011) के अंतर्गत प्राप्त आवेदन रजिस्टरों का नियमित संधारण सुनिश्चित कराएंगे।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग - कार्य सम्पादन हेतु स्थायी आदेश
कार्य सम्पादन हेतु स्थायी आदेश
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज) द्वारा क्रमांक एफ.17(ई)ग्राविप/प्र.2/संस्था/2009/04, दिनांक 03.01.2022 के तहत नया स्थायी आदेश जारी किया गया है। यह आदेश राजस्थान कार्यपद्धति नियमों के नियम 21 के अंतर्गत पूर्व में जारी स्थायी आदेश (दिनांक 04.01.2017) को अतिक्रमित करते हुए जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
कार्यों का निष्पादन: इस आदेश की अनुसूची में पंचायती राज विभाग से संबंधित कार्यों का विवरण दिया गया है और यह निर्धारित किया गया है कि कौन सा कार्य किस अधिकारी, निदेशक/आयुक्त, शासन सचिव (पं.राज), प्रमुख शासन सचिव (ग्रा.वि. एवं पं.राज), राज्यमंत्री या मंत्री के स्तर पर निपटाया जाएगा।
अनुसूची के कार्य: इसमें नीति निर्धारण, नीतिगत परिवर्तन, वार्षिक व पंचवर्षीय योजना, मंत्रीमंडल ज्ञापन, नियम एवं अधिनियमों का संशोधन, ग्राम सभा एवं मीटिंग, पंचायत संस्थाओं की स्थापना, आरक्षण, कार्यकाल, निलंबन, वित्तीय बजट, लेखा और संपरीक्षा, कर्मचारियों के स्थानांतरण, विधानसभा प्रश्न, पंचायती राज संस्थाओं का विघटन और अन्य कई प्रशासनिक एवं विधिक कार्य शामिल हैं।
विशेष निर्देश:
मंत्री की अनुपस्थिति में मामलों को मुख्यालय पर निपटाने और बाद में मंत्री के ध्यान में लाने के संबंध में निर्देश दिए गए हैं।
शासन सचिव / प्रमुख शासन सचिव (ग्रा.वि. एवं पं.राज) की अनुपस्थिति में निदेशक/आयुक्त मामलों को निपटा सकते हैं।
वित्तीय निहितार्थ (Financial Implications) वाले प्रकरणों तथा 50 लाख रुपये या उससे अधिक की निविदा से संबंधित पत्रावलियां वित्तीय सलाहकार के माध्यम से प्रस्तुत की जाएंगी।
प्रशासन गांवों के संग अभियान-2021 के दौरान जारी पट्टों के संबंध में मार्गदर्शन
प्रशासन गांवों के संग अभियान-2021 दिशा-निर्देश
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा पट्टों के संबंध में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन जारी किया गया है। यह पत्र क्रमांक एफ.4(13)मार्गदर्शन/विधि/पंवरा/2021/960 दिनांक 30.11.2021 को जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
विषय: प्रशासन गांवों के संग अभियान-2021 के दौरान जारी किये जाने वाले पट्टों के संबंध में मार्गदर्शन।
निर्देश: पट्टों के हस्तांतरण एवं नामांतरण के संबंध में स्पष्ट किया गया है कि हस्तांतरण एवं नामांतरण के प्रकरणों में नया पट्टा जारी नहीं किया जाकर, अन्तरण की प्रविष्टि मूल पट्टे पर अंकित कर कार्यवाही की जा सकती है।
अधिकारी: यह आदेश (पी.सी. किशन) शासन सचिव, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा जारी किया गया है।
प्रशासन गांवों के संग अभियान-2021 के दौरान जारी किये जाने वाले पट्टों के संबंध में मार्गदर्शन
प्रशासन गांवों के संग अभियान-2021: पट्टों के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 26.11.2021 को आदेश क्रमांक एफ.4(13)मार्गदर्शन/विधि/पंव्रा/2021/957 जारी किया गया है। यह आदेश सभी मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद (राजस्थान) को 'प्रशासन गांवों के संग अभियान-2021' के दौरान जारी किए जाने वाले पट्टों के संबंध में मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए है।
मुख्य बिंदु:
चोरी/नष्ट/गुम हुए मूल पट्टों के संबंध में: यदि 1994 से पूर्व या राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 एवं नियम, 1996 के तहत जारी मूल पट्टा चोरी, गुम या नष्ट हो गया हो:
यदि ग्राम पंचायत के रिकॉर्ड में कार्यालय प्रति उपलब्ध है: आवेदक से FIR की प्रति, शपथ पत्र (पट्टा चोरी होने पर) या शपथ पत्र (पट्टा नष्ट/गुम होने पर) प्राप्त कर, राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के अनुसार डुप्लीकेट पट्टा जारी किया जा सकता है।
यदि ग्राम पंचायत के रिकॉर्ड में कार्यालय प्रति उपलब्ध नहीं है: FIR की प्रति, शपथ पत्र, तथा पट्टा नष्ट/गुम होने पर आवेदक का शपथ पत्र लेकर स्थानीय समाचार पत्रों में आपत्ति आमंत्रण नोटिस प्रकाशित कराया जाएगा। आपत्तियों के निस्तारण के बाद नियमानुसार नया पट्टा जारी किया जा सकता है।
मूल पट्टा प्रस्तुत किए जाने पर पुनर्विसमयकरण/विभाजन/नामान्तरण/भू-उपयोग परिवर्तन: यदि आवेदक मूल पट्टा प्रस्तुत करे और पंचायत रिकॉर्ड में कार्यालय प्रति संधारित न हो, तो आवेदक से शपथ पत्र लेकर, स्थानीय समाचार पत्रों में आपत्ति नोटिस प्रकाशित करवाकर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
आवासीय भूमि का उप-विभाजन/पुनर्गठन: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के तहत प्रारूप-52 में जारी अनुज्ञा के पश्चात संबंधित ग्राम पंचायत द्वारा आवेदक का मूल पट्टा जमा कराकर अनुज्ञा के अनुसार नया पट्टा जारी किया जाएगा।
पट्टों का पंजीयन: आवासीय पट्टों का पंजीयन प्रचलित कानूनों के तहत एक अनिवार्य विधिक प्रक्रिया है, इसमें छूट प्रदान नहीं की जा सकती।
आबादी भूमि (राजस्व रिकॉर्ड): जिन ग्राम पंचायतों में जिला कलेक्टर/उपखण्ड अधिकारी एवं तहसीलदार द्वारा आबादी हेतु कुछ खसरे दर्ज किए जा रहे हैं और उनमें पक्के मकान हैं, तो राजस्व रिकॉर्ड में ग्राम पंचायत के नाम स्वामित्व दर्ज होने पर नियममानुसार पट्टे जारी किए जा सकते हैं।
नियम-157 के तहत कार्रवाई: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के लागू होने के पश्चात की अवधि में निहित भूमि पर पात्रता रखने वाले व्यक्ति को नियम-157 के तहत प्रक्रिया पूर्ण कर पट्टा दिया जा सकता है।
स्थायी आदेश संख्या 38/2021 - कनिष्ठ तकनीकी सहायक / कनिष्ठ अभियंता की तकनीकी स्वीकृति जारी करने हेतु प्रदत्त शक्तियों में संशोधन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग - स्थायी आदेश संख्या 38/2021
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रामीण विकास, अनुभाग-5) द्वारा क्रमांक एफ 27(252)ग्राविव/ग्रुप-5/SOP/पार्ट-3/2021-22, दिनांक 02 नवम्बर, 2021 के तहत महत्वपूर्ण स्थायी आदेश जारी किया गया है। यह आदेश कनिष्ठ तकनीकी सहायक / कनिष्ठ अभियंता के लिए तकनीकी स्वीकृति जारी करने हेतु प्रदत्त शक्तियों में संशोधन से संबंधित है।
मुख्य बिंदु:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
आदेश संख्या: स्थायी आदेश संख्या 38/2021 (क्रमांक: एफ 27(252)ग्राविव/ग्रुप-5/SOP/पार्ट-3/2021-22, दिनांक 02 नवम्बर, 2021)
संशोधित प्रावधान: निर्माण कार्य की तकनीकी स्वीकृति (मूल कार्य / नवीन कार्य / मरम्मत/रखरखाव हेतु) कनिष्ठ तकनीकी सहायक / कनिष्ठ अभियंता के लिए संशोधित वित्तीय सीमाएं निम्नलिखित हैं:
नवीन कार्य हेतु संशोधित सीमा: 10.00 लाख रुपये
मरम्मत/रखरखाव हेतु संशोधित सीमा: 1.00 लाख रुपये
प्रभावी तिथि: यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होंगे।
जारीकर्ता: कृष्णा कान्त पाठक, शासन सचिव, ग्रामीण विकास विभाग।
स्थायी आदेश संख्या 37/2021: ग्राम पंचायतों के निर्माण कार्यों की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति के संबंध में
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग - स्थायी आदेश संख्या 37/2021
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रामीण विकास, अनुभाग-5) द्वारा दिनांक 01 अक्टूबर 2021 को स्थायी आदेश संख्या 37/2021 जारी किया गया है। यह आदेश ग्राम पंचायतों को निर्माण कार्यों की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति जारी करने हेतु प्रदत्त शक्तियों में संशोधन से संबंधित है।
मुख्य बिंदु एवं वित्तीय सीमाएं
परिशिष्ट - 1 (प्रशासनिक स्वीकृति): निर्माण कार्य की प्रशासनिक स्वीकृति (मूल) (विधायक, सांसद कोष व महात्मा गांधी नरेगा के अतिरिक्त) के अंतर्गत नवीन स्वीकृति हेतु वित्तीय सीमा 10.00 लाख रुपये तक तथा रखरखाव एवं मरम्मत हेतु 0.50 लाख रुपये तक निर्धारित की गई है। इसमें शर्तें/टिप्पणियां क्र.सं. 1 से 13 यथावत लागू होंगी।
परिशिष्ट - 2 (वित्तीय स्वीकृति): निर्माण कार्य की वित्तीय स्वीकृति (मूल) (विधायक, सांसद कोष व महात्मा गांधी नरेगा के अतिरिक्त) के अंतर्गत नवीन स्वीकृति हेतु वित्तीय सीमा 10.00 लाख रुपये तक तथा रखरखाव एवं मरम्मत हेतु 0.50 लाख रुपये तक निर्धारित की गई है। इसमें शर्तें/टिप्पणियां क्र.सं. 1 से 10 यथावत लागू होंगी।
यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं।
अकुशल व अर्द्धकुशल (मेट) श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी दरें पुनरीक्षित करने के संबंध में
राजस्थान सरकार ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग आदेश
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रामीण विकास, अनुभाग-5) द्वारा अकुशल व अर्द्धकुशल (मेट) श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी दरें पुनरीक्षित करने के संबंध में आदेश जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
क्रमांक व दिनांक: क्रमांक एफ 27 (74) प्राविवि/अनु-5/जीकेण/न्यूनतम मजदूरी दर/ई ओ. 85598/2014-15, जयपुर दिनांक 8 फरवरी 2021।
संदर्भ: श्रम विभाग द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक एफ 8(5)(6) न्यू.म.अभि./श्रम/आई.आर./2000/पार्ट/15744 दिनांक 19.08.2020।
पुनरीक्षित मजदूरी दरें: श्रम विभाग की अधिसूचना दिनांक 19.08.2020 के आधार पर ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की विभिन्न केंद्र व राज्य प्रवर्तित योजनाओं (महात्मा गांधी नरेगा योजना को छोड़कर) में नियोजित अकुशल श्रमिक एवं अर्द्धकुशल श्रमिक (मेट) की न्यूनतम मजदूरी दरें क्रमशः रुपये 225/- व रुपये 237/- प्रति दिवस पुनरीक्षित की गई हैं। यह आदेश जारी होने की तिथि से प्रभावी है।
सॉफ्टवेयर से संबंधित निर्देश: इन दरों का इन्ड्राज/अपडेशन वर्ष 2020-21 की वर्तमान बीएसआर सॉफ्टवेयर में नहीं किया जावेगा। पुनरीक्षित न्यूनतम मजदूरी दर एवं वर्ष 2020-21 की बीएसआर सॉफ्टवेयर में दर्ज/इन्ड्राज न्यूनतम मजदूरी दर के अंतर राशि का भुगतान कार्य के तकमीने में पृथक से सम्मिलित करते हुए संबंधित कार्यकारी द्वारा अकुशल व अर्द्धकुशल (मेट) श्रमिक को कर दिया जावे।
स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन बाबत महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन बाबत निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 18.01.2021 को 'स्वामित्व योजना' के क्रियान्वयन के संबंध में महत्वपूर्ण आदेश जारी किया गया है। राष्ट्रीय पंचायत दिवस (24 अप्रैल 2020) पर केंद्र सरकार द्वारा आरंभ की गई इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पंचायती राज पर इसके दूरगामी प्रभावों को देखते हुए राजस्व विभाग एवं पंचायती राज विभाग के संयुक्त प्रयासों से क्रियान्वयन करना है।
योजना की मुख्य बातें और प्रक्रिया
ड्रोन फोटोग्राफी और मैपिंग: भारतीय सर्वेक्षण विभाग (Survey of India) द्वारा प्रत्येक राजस्व ग्राम की आबादी भूमि का मानचित्र ड्रोन के जरिए फोटोग्राफी कर तैयार किया जाएगा।
चूना मार्किंग: ड्रोन उड़ान से पहले राजस्व ग्राम की आबादी भूमि की बाहरी सीमा (outer line) पर चार इंच चौड़ाई की चूना लाइन डालकर सीमा मार्क की जाएगी। खाली पड़े भूखंडों को भी चूना लाइन डालकर चिह्नित किया जाएगा।
सर्वे समिति का गठन: प्रत्येक राजस्व ग्राम हेतु सर्वे समिति का गठन किया जाएगा जिसमें ग्राम सेवक, दो वार्ड पंच (संबंधित राजस्व ग्राम व अन्य वार्ड पंच) और पंचायत का एक कार्मिक (कनिष्ठ लिपिक अथवा ग्राम रोजगार सहायक) शामिल होंगे। यह समिति प्राप्त इमेज मैप के अनुसार प्रत्येक भूखंड और निर्मित भवन का सर्वे कर निर्धारित प्रपत्र में जानकारी संकलित करेगी।
आपत्तियां एवं निस्तारण: ग्राम पंचायत द्वारा सर्वे प्रपत्र और इमेज मैप की प्रति पंचायत भवन एवं सार्वजनिक स्थल पर चस्पा की जाएगी। राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम-148 के प्रावधानुसार 07 दिवस के भीतर आपत्तियां दर्ज कराई जा सकेंगी, जिनका निस्तारण ग्राम सभा के माध्यम से किया जाएगा।
पट्टा वितरण: आपत्तियों के निराकरण के बाद फाइनल इमेज मैप (आईडी नंबरिंग सहित) के आधार पर संबंधित लाभार्थियों को राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के प्रावधानों के तहत पट्टा, रजिस्ट्री एवं पीडीएफ कॉपी मोबाइल नंबर पर उपलब्ध कराई जाएगी।
प्रथम चरण: राज्य में इस योजना का सबसे पहले क्रियान्वयन जैसलमेर जिले में किया जाना है।
राजस्थान में स्वामित्त्व योजना के क्रियान्वयन बाबत दिशा-निर्देश
स्वामित्त्व योजना का क्रियान्वयन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.4(1)स्वामित्त्व/विधि/पंश/2020/4046 दिनांक 07.09.2020 के अंतर्गत 'स्वामित्त्व योजना' के क्रियान्वयन के संबंध में विस्तृत निर्देश जारी किए गए हैं। इस पत्र के साथ भारत सरकार द्वारा जारी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) भी संलग्न किया गया है।
योजना का मुख्य उद्देश्य
ग्रामीण भारत में आबाद क्षेत्रों (Abadi Land) की ड्रोन सर्वेक्षण तकनीक से पैमाइश कर डिजिटल मानचित्र तैयार करना।
ग्रामीण परिवारों को 'प्रॉपर्टी कार्ड' (अधिकारों के अभिलेख) वितरित करना ताकि वे अपनी संपत्ति का उपयोग बैंक ऋण और अन्य वित्तीय लाभ प्राप्त करने के लिए कर सकें।
ग्राम पंचायतों में संपत्ति कर और संपत्ति रजिस्टर को अद्यतन कर कर संग्रहण प्रणाली को सुदृढ़ बनाना।
ग्रामीण संपत्ति से जुड़े आपसी विवादों और अदालतों में लम्बित मुकदमों के त्वरित निराकरण का मार्ग प्रशस्त करना।
प्रमुख प्रक्रिया एवं चरण (Standard Operating Procedure)
CORS नेटवर्क की स्थापना: पायलट चरण के तहत राजस्थान और पंजाब राज्यों में सतत प्रचलित संदर्भ स्टेशन (CORS) नेटवर्क की स्थापना।
तैयारी की गतिविधियां: कलेक्टर/सक्षम प्राधिकारी द्वारा सार्वजनिक नोटिस के माध्यम से सर्वेक्षण क्षेत्र की अधिसूचना, ग्राम सभा का आयोजन, और राजस्व विभाग एवं ग्राम पंचायत अधिकारियों द्वारा सीमाओं का चूना लाइनों से चिह्नीकरण।
ड्रोन सर्वेक्षण एवं डेटा प्रोसेसिंग: भारतीय सर्वेक्षण विभाग (Survey of India) द्वारा ड्रोन के माध्यम से हवाई तस्वीरें लेना और जीआईएस (GIS) लैब में डेटा प्रोसेसिंग कर ऑर्थो-रेक्टिफाइड इमेज (ORI) तथा लैंड पार्सल मैप्स (LPM) तैयार करना।
दावा और आपत्ति निस्तारण: ग्राम सभा, भूस्वामियों और राजस्व अधिकारियों की मदद से स्वामित्व का सत्यापन तथा प्राप्त आपत्तियों का निस्तारण।
प्रॉपर्टी कार्ड का वितरण: राजस्व विभाग द्वारा अंतिम मानचित्रों और टेक्स्ट डेटा के आधार पर ग्रामीणों को प्रॉपर्टी कार्ड जारी करना।
संबंधित विभाग एवं अधिकारी
इस योजना के क्रियान्वयन में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राज्य राजस्व विभाग, भारतीय सर्वेक्षण विभाग (Survey of India), और पंचायती राज संस्थाएं (सरपंच, पंचायत सचिव, ग्राम सेवक) संयुक्त रूप से कार्य कर रहे हैं।
आबादी भूमि विक्रय और आवंटन के संबंध में राज्य सरकार के अनुमोदन बाबत निर्देश
आबादी भूमि विक्रय एवं आवंटन के संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 13/08/2020 को आदेश क्रमांक एफ.4(3)निर्देश/विधि/पंश/2020/3955 जारी किया गया है। यह आदेश समस्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद को संबोधित है।
दस्तावेज का मुख्य उद्देश्य
इस पत्र का मुख्य उद्देश्य ग्राम पंचायत की आबादी भूमि के विक्रय एवं आवंटन के लिए राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के अध्याय 9 में नियम 140-166 के तहत राज्य सरकार का अनुमोदन प्राप्त करने की प्रक्रिया को स्पष्ट करना और जिला परिषद स्तर पर नियमों की पालना सुनिश्चित करना है।
मुख्य बिंदु और निर्देश
प्रक्रिया का पालन: आबादी भूमि के विक्रय एवं आवंटन से संबंधित समस्त प्रकरण ग्राम पंचायत/पंचायत समितियों द्वारा संबंधित मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद के माध्यम से ही राज्य सरकार के अनुमोदनार्थ प्रेषित किए जाएं। सीधे भेजे जाने पर विभाग द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।
जिला परिषद स्तर पर परीक्षण: मुख्य कार्यकारी अधिकारी द्वारा प्रकरणों का अपने स्तर पर परीक्षण किया जाए। नियमों के विपरीत प्रकरणों को जिला परिषद स्तर पर ही खारिज कर संबंधित ग्राम पंचायत को लौटाया जाए। विभाग को भेजने से पूर्व उचित औचित्यपूर्ण अभिषांशा दी जाए।
अनावश्यक प्रकरणों को न भेजना: जिन प्रकरणों में राज्य सरकार के अनुमोदन या अनुमति की आवश्यकता प्रतीत नहीं होती, ऐसे प्रकरण विभाग को प्रेषित न किए जाएं।
निशुल्क आवंटन संबंधी छूट: विभागीय अधिसूचना दिनांक 06.04.2017 के तहत नियम-162(2) के अंतर्गत सरकारी कार्यालय के भवन हेतु आबादी भूमि निःशुल्क आवंटित किए जाने की निर्धारित सीमा के अनुसार ग्राम पंचायत, पंचायत समिति एवं जिला परिषद को अधिकृत किया जा चुका है, अतः ऐसे प्रकरण विभाग को प्रेषित न किए जाएं।
आबादी भूमि पर से अतिक्रमण हटाने बाबत महत्वपूर्ण निर्देश
आबादी भूमि पर से अतिक्रमण हटाने बाबत निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा आबाती भूमि पर से अतिक्रमण हटाने के संबंध में आदेश जारी किया गया है।
निर्देश: मुख्यमंत्री सूचना तंत्र पर पंचायती राज विभाग के जन घोषणा पत्र में बिंदु संख्या 27.8.04 के अनुसार अतिक्रमणियों पर शिकंजा कसा जाएगा एवं जमीनों के मामलों में धोखाधड़ी रोकने के लिए संबंधित अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी एवं हाउसिंग सोसाइटियों की जिम्मेदारी सुनिश्चित की जाएगी की पालना सुनिश्चित की जानी है।
नियम संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम-165 के अन्तर्गत उपरोक्तानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
यह पत्र मगनलाल योगी, आयुक्त एवं संयुक्त शासन सचिव (प्रथम) द्वारा जारी किया गया है तथा समस्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद को प्रेषित किया गया है।
निर्माण कार्यों के मूल्यांकन जांच एवं उपयोगिता प्रमाण पत्र जारी करने हेतु स्थायी आदेश संख्या 36/2018 की पालना के संबंध में
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग का महत्वपूर्ण निर्देश
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रुप-5) द्वारा दिनांक 26 अप्रैल 2019 को एक आदेश जारी किया गया है। यह आदेश निर्माण कार्यों के मूल्यांकन जांच एवं उपयोगिता प्रमाण पत्र जारी करने हेतु स्थायी आदेश संख्या 36/2018 दिनांक 27.03.2018 की पालना के संबंध में है।
मुख्य बिंदु:
वित्त विभाग की आईडी संख्या 101801752 दिनांक 26.3.2018 के अनुसार "संविदा पर कार्यरत व्यक्तियों को कोई वित्तीय शक्तियां प्रदान नहीं की जावे" की पालना में निर्देश जारी किए गए हैं।
संविदा पर कार्यरत कनिष्ठ तकनीकी सहायक (JTA/STA) को मूल्यांकन जांच करना, पूर्णता प्रमाण पत्र जारी करना आदि किसी भी प्रकार की वित्तीय शक्तियां प्रदत्त नहीं होंगी।
विभागीय परिपत्र दिनांक 17.9.2014 द्वारा जारी शेड्यूल ऑफ़ पावर्स में संविदा पर कार्यरत जेटीए/एसटीए परिशिष्ट-3 में प्रदत्त सीमा राशि तक की तकनीकी स्वीकृति जारी करने के लिए यथावत अधिकृत होंगे।
महात्मा गांधी नरेगा योजना अंतर्गत संविदा पर कार्यरत (JTA/STA) विभागीय अभियंताओं (Jen/Aen/Xen) के मार्गदर्शन में यथावत कार्यों की तकनीकी पर्यवेक्षण कर सकेंगे तथा कार्यों की माप (Record Entry) संबंधित मापपुस्तिका में दर्ज कर सकेंगे, लेकिन कार्यों का मूल्यांकन जांच करना, पूर्णता प्रमाण पत्र जारी करना के लिए अधिकृत नहीं होंगे।
अतः कार्यों का मूल्यांकन, उपयोगिता प्रमाण पत्र एवं पूर्णता प्रमाण पत्र सक्षम विभागीय अभियंताओं (Jen/Aen/Xen) के द्वारा ही जारी कराया जाना सुनिश्चित किया जाए।
विशेष आवासीय पट्टा एवं भू-खण्ड आवंटन अभियान बाबत निर्देश
विशेष आवासीय पट्टा / भू-खण्ड आवंटन अभियान
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा क्रमांक एफ.4(4)पट्टा अभि/विधि/पंव्रा/2019/200 दिनांक 19.02.2019 (22.2.19) के तहत विशेष आवासीय पट्टा/भू-खण्ड आवंटन अभियान के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
अभियान के मुख्य बिंदु:
राज्य में विशेष अभियान चलाकर पंचायतों के पट्टाहीन पात्र व्यक्तियों को आबादी भूमि के पट्टे एवं भू-खण्डहीन पात्र व्यक्तियों को भू-खण्ड आवंटित किए जाएंगे।
अभियान के लिए जिला स्तर पर संबंधित जिला कलेक्टर प्रभारी होंगे।
ग्राम पंचायतों को उनकी आबादी भूमि का सीमाज्ञान करवाना सुनिश्चित किया जाए ताकि पट्टे आवंटन में समस्या न आए।
जहाँ ग्राम पंचायतों के पास आबादी भूमि उपलब्ध नहीं है, वहाँ सिवायचक भूमि या राज्य सरकार के स्वामित्व की अन्य उपयोग की भूमि का उपयोग परिवर्तन कर आवंटन हेतु उपलब्ध कराई जाए, किंतु चारागाह भूमि को आवश्यकतानुसार नियमानुसार रूपांतरित किया जाए।
पट्टा/भू-खण्ड आवंटन से संबंधित लंबित प्रकरणों की सूची कारणों सहित तीन दिवस की अवधि में जिला परिषद को प्राप्त कर मुख्य कार्यकारी अधिकारी स्तर से मार्गदर्शन दिया जाए।
प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के पात्र परिवारों को प्राथमिकता प्रदान करते हुए आवासीय पट्टा उपलब्ध कराया जाना सुनिश्चित करें।
बेरों (खेतों में कुओं) पर सड़क, सीसी सड़क एवं अन्य विकास कार्यों के संबंध में दिशा-निर्देश
राजस्थान सरकार ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग का महत्वपूर्ण पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रामीण विकास, अनुभाग-5), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश (क्रमांक एफ 27(212)ग्रावि/ग्रुप-5/पीएमजीवाई/अभि./बेरों पर निर्माण/2018-19 जयपुर, दिनांक जुलाई 2018) के माध्यम से बेरों (खेतों में कुओं) पर सड़क, सीसी सड़क एवं अन्य विकास/निर्माण कार्यों के संबंध में स्थिति स्पष्ट की गई है।
मुख्य बिंदु एवं दिशा-निर्देश
अपना खेत अपना काम: व्यक्तिगत लाभ के कार्य महात्मा गांधी नरेगा योजनान्तर्गत अनुमत किए गए हैं। विस्तृत दिशा-निर्देश विभागीय पत्र क्रमांक एफ 40(35)ग्रावि/नरेगा/व्यक्तिगत लाभ के कार्य/2011 दिनांक 04.05.11 व 27.05.2011 के द्वारा जारी किए गए हैं।
भूमि सुधार एवं अन्य कार्य: भूमि सुधार, कृषि वानिकी, उद्यानिकी, जल संरक्षण, लघु सिंचाई (कच्चे धोरों बनाने का कार्य, कच्चे धोरों को पक्का करने का कार्य, फार्मपॉण्ड, डिग्गी टांके, जल हॉज निर्माण, नवीन कूप निर्माण, कूप गहरा करना आदि) तथा जल भराव क्षेत्रों से पानी निकास हेतु नाली निर्माण, चेकडेम आदि कार्य महात्मा गांधी नरेगा योजनान्तर्गत अनुमत हैं।
गाँवों और ढाणियों के रास्ते: गाँवों और ढाणियों में कदमी रास्ते जो राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हैं, किन्तु लगातार उपयोग में आ रहे हैं, उन पर खंरजा, सड़क निर्माण कार्य संबंधित काश्तकारों से सहमति एवं नियमानुसार शपथ लेने के उपरान्त विभिन्न योजनान्तर्गत अनुमत हैं।
पेयजल कार्य: राजकीय भूमि के अभाव में, भूमिधारक द्वारा राज्य सरकार के पक्ष में 100/- रुपये के स्टाम्प पेपर पर सहमति पत्र जारी करने पर निजी भूमि पर पेयजल हेतु ट्यूूबवेल, हैंडपंप, पानी की टंकी तथा टांका निर्माण कार्य कराया जाना अनुमत है।
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2018 - अधिसूचना
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2018
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 10.7.2018 की अधिसूचना संख्या एफ 4(7)अमे/रूल्स/लोगल/पी.आर./2014/927 के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
नियम का नाम: इन नियमों का नाम राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2018 है।
प्रवृत्ति: ये नियम तुरंत प्रवृत्त होंगे।
नियम 173-ङ का संशोधन:
उप-नियम (1) में, विद्यमान अभिव्यक्ति "द्वारा इस रूप में नियुक्त और अधिसूचित अपील प्राधिकारी" हटाई जाएगी।
उप-नियम (3) में, विद्यमान अभिव्यक्ति "अपील प्राधिकारी" के स्थान पर "राज्य सरकार" प्रतिस्थापित की जाएगी।
राजस्थान पंचायती राज (दूसरा संशोधन) नियम, 2018 - आबादी क्षेत्र में भूमि उपयोग परिवर्तन और भू-खण्डों के उप-विभाजन संबंधी दिशा-निर्देश
राजस्थान पंचायती राज (दूसरा संशोधन) नियम, 2018
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 10 जुलाई 2018 की अधिसूचना (जी.एस.आर. 61) के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन करते हुए नया 'अध्याय-9क' अंतःस्थापित किया गया है। यह संशोधन ग्राम पंचायतों के आबादी क्षेत्र में भूमि उपयोग परिवर्तन और भू-खण्डों के उप-विभाजन व पुनर्गठन से संबंधित है।
मुख्य बिंदु और प्रावधान
आबादी क्षेत्र में भूमि उपयोग का परिवर्तन (नियम 173-क): ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग के अंतर्गत कोई भी व्यक्ति अपने द्वारा धारित आबादी क्षेत्र की भूमि के उपयोग परिवर्तन के लिए प्रारूप 48 में आवेदन कर सकेगा। इसके लिए आपत्तियां आमंत्रित की जाती हैं और निर्धारित प्रक्रिया के बाद संपरिवर्तन प्रभार जमा कराके नया पट्टा विलेख (प्रारूप 50) जारी किया जाता है।
संपरिर्वतन प्रभार की दरें:
वाणिज्यिक प्रयोजन: 10 रुपये प्रति वर्ग मीटर या आवासीय आबादी भूमि की जिला स्तरीय समिति (जि.स्त.स.) दर की रकम का दस प्रतिशत, जो भी उच्चतर हो।
औद्योगिक क्षेत्र/संपदा-प्रयोजन: 5 रुपये प्रति वर्ग मीटर या जि.स्त.स. दर की 5 प्रतिशत, जो भी उच्चतर हो।
लोक उपयोग प्रयोजन: 1000 वर्ग मीटर तक निःशुल्क और 1000 वर्ग मीटर से अधिक के लिए 5 रुपये प्रति वर्ग मीटर या जि.स्त.स. दर का 5 प्रतिशत।
संस्थागत प्रयोजन: 5 रुपये प्रति वर्ग मीटर या जि.स्त.स. दर का 5 प्रतिशत।
चिकित्सा सुविधा-प्रयोजन: 10 रुपये प्रति वर्ग मीटर या जि.स्त.स. दर का 10 प्रतिशत।
सौर या पवन ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना: औद्योगिक प्रयोजन के लिए विहित दरों का 10 प्रतिशत।
भू-खण्डों का उप-विभाजन और पुनर्गठन (नियम 173-ख): ग्राम पंचायत क्षेत्र में स्थित भू-खण्डों के उप-विभाजन या पुनर्गठन के लिए प्रारूप 51 में आवेदन करना होगा। इसके लिए स्थल योजना, मूल नक्शा और अन्य विवरण संलग्न करना अनिवार्य है।
आबादी भूमि के अभिलेख का रखरखाव (नियम 173-छ): प्रत्येक पंचायत प्रारूप 53 में गांव के पंचायत क्षेत्र के भीतर स्थित आबादी भूमि का अभिलेख रखेगी।
नए प्रारूप (प्रारूप 48 से 53): नियमों के अंतर्गत भूमि उपयोग परिवर्तन, अनुज्ञा, भू-खंड उप-विभाजन आवेदन और आबादी भूमि रजिस्टर के लिए नए प्रारूप जोड़े गए हैं।
राजस्थान पंचायती राज (दूसरा संशोधन) नियम, 2018 - आ आबादी क्षेत्र में भूमि उपयोग परिवर्तन एवं भू-खंडों के उप-विभाजन संबंधित अधिसूचना
राजस्थान पंचायती राज (दूसरा संशोधन) नियम, 2018
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 10 जुलाई, 2018 की अधिसूचना (जी.एस.आर.61) के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन करते हुए नया 'अध्याय-9क' अंतःस्थापित किया गया है। यह दस्तावेज मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी भूमि के उपयोग परिवर्तन और भू-खंडों के उप-विभाजन या पुनर्गठन से संबंधित है।
मुख्य बिंदु और विशेषताएँ:
नया अध्याय-9क: आबादी क्षेत्र में भूमि के उपयोग का परिवर्तन और भू-खंडों के उप-विभाजन/पुनर्गठन की प्रक्रिया का विस्तृत प्रावधान।
प्रारूप 48: किसी व्यक्ति द्वारा आबादी क्षेत्र में भूमि उपयोग परिवर्तन के लिए प्राधिकृत अधिकारी को आवेदन करने हेतु निर्धारित प्रारूप।
संपरिवर्तन प्रभार (Conversion Charges): गैर-आवासीय प्रयोजनों (जैसे वाणिज्यिक, औद्योगिक, संस्थागत, चिकित्सा सुविधा आदि) के लिए संपरिवर्तन प्रभार की दरें निर्धारित की गई हैं।
प्रारूप 51: गाँव के आबादी क्षेत्र में स्थित भूमि के भू-खंडों के उप-विभाजन या पुनर्गठन की अनुज्ञा प्राप्त करने के लिए आवेदन।
अभिलेख संधारण: प्रत्येक पंचायत द्वारा 'प्रारूप 53' में गाँव के पंचायत क्षेत्र के भीतर स्थित आबादी भूमि का अभिलेख (आबादी भूमि का रजिस्टर) रखा जाएगा।
यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र में दिनांक 10 जुलाई, 2018 को प्रकाशित की गई थी और इसके तहत नए प्रारूप (प्रारूप 48 से प्रारूप 53) जोड़े गए हैं ताकि ग्राम पंचायतों में भूमि उपयोग परिवर्तन और उप-विभाजन से जुड़े कार्यों का सुचारू संचालन किया जा सके।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना - भूमि रूपांतरण और प्राधिकृत अधिकारी (25 जून 2018)
अधिसूचना विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना दिनांक 25 जून 2018 (एस.ओ. 77 और एस.ओ. 78) के अंतर्गत राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम सं. 13) की धाराओं के तहत प्राधिकृत अधिकारियों और उनके क्षेत्रों का निर्धारण किया गया है।
मुख्य बिंदु
एस.ओ. 77: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 107-क की उप-धारा (3) के तहत, राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 173-क के अधीन विभिन्न प्राधिकारियों को प्रयोजन और क्षेत्रफल के अनुसार प्राधिकृत किया गया है:
संबंधित ग्राम पंचायत: 100 वर्गमीटर तक वाणिज्यिक प्रयोजन (सिनेमा, मल्टीप्लेक्स, पेट्रोल पंप को अपवर्जित करते हुए) और 300 वर्गमीटर तक लोक उपयोग प्रयोजन।
संबंधित पंचायत समिति की प्रशासनिक और स्थापन समिति: 100 वर्गमीटर से अधिक किंतु 300 वर्गमीटर तक वाणिज्यिक प्रयोजन (सिनेमा, मल्टीप्लेक्स, पेट्रोल पंप को छोड़कर), 300 वर्गमीटर से अधिक किंतु 900 वर्गमीटर तक लोक उपयोग प्रयोजन, तथा 300 वर्गमीटर तक चिकित्सा सुविधा प्रयोजन।
संबंधित जिला परिषद की प्रशासनिक और स्थापन समिति: 300 वर्गमीटर से अधिक वाणिज्यिक प्रयोजन, 900 वर्गमीटर से अधिक लोक उपयोग प्रयोजन, तथा 300 वर्गमीटर से अधिक चिकित्सा सुविधा प्रयोजन।
राज्य सरकार: किसी भी क्षेत्र के लिए सिनेमा, मल्टीप्लेक्स, पेट्रोल पंप से संबंधित वाणिज्यिक प्रयोजन, औद्योगिक क्षेत्र/औद्योगिक संपदा प्रयोजन, और सौर या वायु शक्ति संयंत्र की स्थापना।
एस.ओ. 78: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 107-ख की उप-धारा (1) के तहत, संबंधित जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (Chief Executive Officer) को राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 173-ख के अधीन प्राधिकृत अधिकारी के कृत्यों का पालन करने के लिए प्राधिकृत किया गया है।
आदेश संख्या: संख्या एफ.4(93)सीएलूंग/नोटि./लीगल/पी आर/2018/833 और संख्या एफ.4(93)सीएलूंग/नोटि./लीगल/पी आर/2018/834 जारीकर्ता: कुंजी लाल मीणा, शासन सचिव (राज्यपाल के आदेश से)
स्थायी आदेश संख्या 36/2018: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा तकनीकी अधिकारियों को वित्तीय शक्तियां प्रत्याहारित
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग - स्थायी आदेश संख्या 36/2018
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रामीण विकास, अनुभाग-5) द्वारा दिनांक 27 मार्च, 2018 को स्थायी आदेश संख्या 36/2018 जारी किया गया है। यह आदेश विभिन्न योजनाओं में सम्पादित निर्माण कार्यों के मूल्यांकन जांच एवं पूर्णता प्रमाण पत्र के संबंध में तकनीकी अधिकारियों को वित्तीय शक्तियां प्रदान करने हेतु है।
मुख्य बिंदु एवं वित्तीय शक्तियां
मूल्यांकन जांच करना:
कनिष्ठ अभियंता (JEN): 5 लाख तक
सहायक अभियंता (AEN): 15.00 लाख तक
अधिशाषी अभियंता (EE): 50.00 लाख तक
अधीक्षक अभियंता (SE): 100.00 लाख तक
अतिरिक्त मुख्य अभियंता (ACE): पूर्ण शक्तियां
पूर्णता प्रमाण पत्र:
कनिष्ठ अभियंता (JEN): मनरेगा योजना में व्यक्तिगत लाभ श्रेणी (कैटेगरी 4) के राशि रुपये 3 लाख तक की लागत के कार्य एवं अन्य विभागीय योजनाओं में (हैंडपम्प, ट्यूबवेल के कार्यों को छोड़ कर) 1 लाख तक स्वीकृत राशि के निर्माण कार्यों के पूर्णता प्रमाण-पत्र कनिष्ठ अभियंता द्वारा जारी किए जा सकेंगे।
सहायक अभियंता (AEN): 15.00 लाख तक
अधिशाषी अभियंता (EE): 50.00 लाख तक
वित्त विभाग की आईडी संख्या 101801752 दिनांक 26.03.2018 के अनुशरण में जारी यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं।
राजस्थान पंचायती राज (दूसरा संशोधन) नियम, 2018 - आबादी भूमि उपयोग परिवर्तन और उप-विभाजन
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 27 मार्च 2018 की अधिसूचना (सं. एफ.4(7)अमे/रूल्स/लीगल/पी.आर./2014/926 दिनांक 10.7.2018) के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज (दूसरा संशोधन) नियम, 2018 जारी किए गए हैं। यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र में प्रकाशित की गई है।
मुख्य बिंदु और प्रावधान
नया अध्याय-9क का अंतःस्थापन: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में नया अध्याय-9क जोड़ा गया है जो आबादी क्षेत्र में भूमि के उपयोग के परिवर्तन (नियम 173-क) तथा भू-खंडों के उप-विभाजन व पुनर्गठन (नियम 173-ख) से संबंधित है।
संपरिवर्तन प्रभार (Conversion Charges): गैर-आवासीय प्रयोजनों के लिए आवासीय आबादी भूमि के संपरिवर्तन हेतु वाणिज्यिक, औद्योगिक, लोक उपयोग, संस्थागत, चिकित्सा सुविधा तथा सौर/पवन ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना के लिए अलग-अलग दरें निर्धारित की गई हैं।
छूट के प्रावधान: केंद्रीय या राज्य सरकार के विभागों या स्थानीय प्राधिकरणों के उपयोग, राजस्थान विनियोजन प्रोत्साहन स्कीम, 2003/2010 और तकनीकी शिक्षा संस्थान के मामलों में संपरिवर्तन प्रभारों में आंशिक या पूर्ण छूट दी गई है।
भू-खंडों का उप-विभाजन और पुनर्गठन: नियम 173-ख के तहत ग्रामीण आबादी क्षेत्र में भू-खंडों के उप-विभाजन या पुनर्गठन के लिए प्ररूप 51 में आवेदन करना होगा तथा इसके लिए निर्धारित प्रभार नियम 173-घ के अनुसार देय होंगे।
नए प्ररूप (Forms): नियमों के अंतर्गत प्ररूप 48 से लेकर प्ररूप 53 तक नए आवेदन पत्र, अनुज्ञा, पट्टा विलेख और आबादी भूमि का रजिस्टर जोड़े गए हैं।
अधिक जानकारी और विस्तृत प्रक्रियाओं के लिए संबंधित ग्राम पंचायत कार्यालय या राज ई-पंचायत पोर्टल से संपर्क करें।
ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी भूमि पर बने आवास गृहों के पट्टे जारी किए जाने के संबंध में निर्देश
ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी भूमि पर बने आवास गृहों के पट्टे जारी करने की प्रक्रिया
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी भूमि पर बने आवास गृहों के पट्टे दिए जाने के संबंध में आदेश जारी किया गया है। यह पत्र क्रमांक फ.4(78)सिवायचक/नियमन/विधि/पंचरा/2017/1104, दिनांक 03-10-2017 को जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु एवं निर्देश:
सर्वेक्षण कार्य: ग्राम पंचायत स्तर पर ग्राम सेवक एवं पटवारी द्वारा राजस्व विभाग के परिपत्र दिनांक 07.09.2017 में वर्णित प्रावधानों के तहत दिनांक 01.01.2017 से पूर्व बने आवास गृहों का संयुक्त सर्वे किया जाएगा।
प्रमाणन दस्तावेज: 01.01.2017 से पूर्व रहने के प्रमाण हेतु राशन कार्ड, वोटर आईडी, भामाशाह कार्ड, आधार कार्ड, बिजली, पानी या टेलीफोन बिल में से किसी एक दस्तावेज का उपयोग किया जाएगा।
पात्रता शर्तें: पट्टा जारी करते समय यह ध्यान रखा जाएगा कि एक परिवार को अधिकतम 300 वर्गगज या वास्तविक क्षेत्रफल (इसमें से जो भी कम हो) का ही पट्टा दिया जाएगा। यदि उस ग्राम पंचायत में उस परिवार के पास पूर्व में ही आवासीय मकान या भूखंड है, तो पट्टा नहीं दिया जाएगा।
प्रतिबंधित श्रेणियां: राजस्थान काश्तकारी अधिनियम, 1955 की धारा 16 के अंतर्गत प्रतिबंधित भूमि, नाला, नाड़ी, जोहड़, जलप्रवाह क्षेत्र, ओरण, चारागाह भूमि, वन विभाग के अधीन भूमि तथा अन्य प्रतिबंधित क्षेत्रों को छोड़कर ही भूमि सेटअपार्ट की जाएगी।
स्थायी आदेश संख्या 34/2017: प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृतियों की वित्तीय सीमा के संबंध में संशोधन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग का स्थायी आदेश संख्या 34/2017
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रामीण विकास, अनुभाग-5) द्वारा क्रमांक एफ 27(263) ग्रावि/ग्रुप-5/जीकेन/उपापन/2015-16/ई.ओ.नं. दिनांक 22.8.2017 के तहत स्थायी आदेश संख्या 34/2017 जारी किया गया है।
यह आदेश विभागीय परिपत्र क्रमांक एफ-27(79) ग्रावि/अनु.5/जीकेन/प्रशा.अनु.स./2014 दिनांक 17.9.2014 के परिशिष्ट 1 के बिन्दु संख्या 1 (ब) में वर्णित प्रशासनिक स्वीकृति जारी करने की सीमा एवं परिशिष्ट 2 के बिन्दु संख्या 1 (ब) में वर्णित वित्तीय स्वीकृति जारी करने के संबंध में संशोधित निर्देश जारी करता है।
मुख्य बिंदु:
परिशिष्ट 1 (प्रशासनिक स्वीकृति): निर्माण कार्य की प्रशासनिक स्वीकृति (मूल) (विधायक, सांसद कोष व महात्मा गांधी नरेगा के लिए) हेतु जिला कलक्टर/जिला कार्यक्रम समन्वयक, ईजीएस को संपूर्ण शक्तियां प्रदान की गई हैं।
परिशिष्ट 2 (वित्तीय स्वीकृति): निर्माण कार्य की प्रशासनिक स्वीकृति (मूल) (विधायक, सांसद कोष व महात्मा गांधी नरेगा के लिए) की वित्तीय स्वीकृति हेतु जिला कलक्टर/जिला कार्यक्रम समन्वयक, ईजीएस को संपूर्ण शक्तियां दी गई हैं।
यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू रहेगा।
इस आदेश की प्रति सभी संबंधित जिला कलेक्टरों, मुख्य कार्यकारी अधिकारियों, विकास अधिकारियों और ग्राम पंचायतों को आवश्यक कार्रवाई एवं अनुपालन हेतु प्रेषित की गई है।
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2017 से संबंधित अधिसूचना
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2017
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना जी.एस.आर. 20 (दिनांक 17 मई, 2017) के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
नियम का नाम: इन नियमों का नाम राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2017 है।
प्रवृत्ती: ये राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से प्रवृत्त होंगे।
नियम 157 का संशोधन: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 के उप-नियम (1) के खण्ड (i) के उप-खण्ड (ब) में विद्यमान अभिव्यक्ति "इन नियमों के प्रारम्भ की तारीख से ठीक पूर्ववर्ती पचास वर्षों के दौरान" के स्थान पर "31 दिसम्बर, 2016 के ठीक पूर्ववर्ती सत्तर वर्षों के दौरान" प्रतिस्थापित की गई है।
आदेश संख्या: [संख्या एफ.4(7) अमे/रूल्स/लीगल/पी.आर./2017/447]
हस्ताक्षरकर्ता: राज्यपाल के आदेश से, विष्णु कुमार गोयल, उप शासन सचिव।
पट्टा आवंटन अभियान (14 अप्रैल, 2017 से 12 जुलाई, 2017) के संबंध में निर्देश
पट्टा आवंटन अभियान निर्देश
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा पट्टा आवंटन अभियान के संबंध में पत्र जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
अभियान की अवधि: 14 अप्रैल, 2017 से 12 जुलाई, 2017 तक (90 दिवस)।
ग्राम पंचायतों द्वारा शिविर के दिन के अलावा भी इस पूरी अवधि में पट्टा/भू-खण्ड आवंटन से संबंधित आवेदन प्रार्थना-पत्र प्राप्त कर उनका निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।
प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की पात्रता/वरीयता सूची में शामिल समस्त परिवारों को निर्धारित प्रक्रिया अपनाकर भूमि/पट्टे आवश्यक रूप से आवंटित किए जाएं।
शिविरों में पटवारी, तहसीलदार एवं नायब तहसीलदार आदि की उपस्थिति सुनिश्चित कर पंचायती राज अधिकारियों को वांछित सहयोग प्रदान करने के निर्देश दिए गए हैं।
राजस्थान सरकार - स्थायी आदेश संख्या 32/2017: तकनीकी स्वीकृति एवं उपयोगिता प्रमाण पत्र जारी करने के संबंध में संशोधित निर्देश
स्थायी आदेश संख्या 32/2017
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रामीण विकास, अनुभाग-5), राजस्थान सरकार द्वारा क्रमांक एफ 27(263) ग्रावि/ग्रुप-5/जीकेएन/उपापन/2015-16/92279, दिनांक 13-04-2017 के तहत एक अति-आवश्यक स्थायी आदेश जारी किया गया है। यह आदेश विभागीय परिपत्र क्रमांक एफ-27(79) ग्रावि/अनु.5/जीकेएन/प्रशा.अनु.स./2014 दिनांक 17.9.2014 के परिशिष्ट 3 में वर्णित तकनीकी स्वीकृति जारी करने की सीमा एवं परिशिष्ट 5 के बिन्दु संख्या 3 में वर्णित उपयोगिता प्रमाण पत्र जारी करने के संबंध में संशोधित निर्देश जारी करने के लिए है।
मुख्य बिंदु:
परिशिष्ट 3 (वित्तीय सीमा एवं मरम्मत/रखरखाव):
कनिष्ठ तकनीकी सहायक / कनिष्ठ अभियन्ता: मरम्मत/रखरखाव हेतु अब 1 लाख रुपये तक की सीमा।
सहायक अभियन्ता पं.स./जि.प.: 15.00 लाख तक (नवीन कार्य), मरम्मत/रखरखाव हेतु 2 लाख तक।
अधिसाषी अभियन्ता पं.स./जि.प.: 50.00 लाख तक (नवीन कार्य), मरम्मत/रखरखाव हेतु 5 लाख तक।
जिला दर निर्धारण समिति के अनुमोदन उपरान्त अधिसाषी अभियन्ता (अभि.) एवं सदस्य सचिव, जि.द.नि.स. जिला परिषद: 5 लाख से अधिक परन्तु 50 लाख से कम लागत के कार्य।
परिशिष्ट 5 (उपयोगिता एवं पूर्णता प्रमाण पत्र): महात्मा गांधी नरेगा योजना में व्यक्तिगत लाभ श्रेणी के सभी कार्यों एवं अन्य विभागीय योजनाओं में (हैण्डपम्प, ट्यूबवेल के कार्यों को छोड़कर) 1 लाख तक स्वीकृत राशि के निर्माण कार्यों के पूर्णता प्रमाण-पत्र कनिष्ठ तकनीकी सहायक / कनिष्ठ अभियन्ता द्वारा जारी किये जा सकेंगे। हैण्डपम्प, ट्यूबवेल के कार्य एवं 1 लाख से अधिक लागत के निर्माण कार्यों के पूर्णता प्रमाण-पत्र शेड्यूल ऑफ पावर्स के प्रावधानों के अनुसार ही यथावत जारी किये जायेंगे। शेष प्रावधान शेड्यूल ऑफ पावर्स के अनुसार यथावत रहेंगे।
जारीकर्ता: (सुदर्शन सेठी), अतिरिक्त मुख्य सचिव, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
स्थायी आदेश संख्या 31/2017: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के अंतर्गत विकास कार्यों के संबंध में दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग - स्थायी आदेश संख्या 31/2017
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रामीण विकास, अनुभाग-5), राजस्थान सरकार द्वारा क्रमांक एफ 27(263) ग्रावि/ग्रुप-5/जीकेन/उपापन/2015-16/92279, दिनांक 13-04-2017 को स्थायी आदेश संख्या 31/2017 जारी किया गया है। यह आदेश ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा क्रियान्वित योजनाओं (विशेषकर महात्मा गांधी मनरेगा योजना) के अंतर्गत कराए जा रहे विकास कार्यों की संपादन व्यवस्था के संबंध में है।
मुख्य बिंदु एवं निर्देश:
ग्रेवल सड़कों की नियमित मरम्मत और अधिकतम आयु: विभिन्न विकास योजनाओं में निर्मित ग्रेवल सड़कों के वार्षिक क्षरण की रोकथाम हेतु नियत कालीन मरम्मत (Periodical Maintenance) के निर्देश दिए गए हैं। ग्रेवल सड़कों की पुनरावृत्ति (repetitive) मरम्मत कार्य सामान्यतः कार्य पूर्णता प्रमाण-पत्र जारी होने की दिनांक से न्यूनतम 5 वर्ष से पहले नहीं कराया जा सकेगा।
गांवों के अंदर नालियों के साथ आंतरिक सड़क निर्माण एवं तकनीकी मापदंड: गांवों की आंतरिक सड़कों की चौड़ाई स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। मुख्य आवागमन मार्ग की चौड़ाई भारत सरकार के निर्देश दिनांक 24.04.2012 के अनुसार 3 मीटर निर्धारित की गई है। आंतरिक सीमेंट सड़क की अधिकतम चौड़ाई 5.5 मीटर तक ही अनुमत होगी।
सार्वजनिक निर्माण विभाग की सड़कों के बर्म की मरम्मत: पीडब्ल्यूडी या अन्य विभागों द्वारा निर्मित सड़कों और उनके बर्म (पटरी) की मरम्मत एवं झाड़ियां काटने का कार्य मनरेगा योजनान्तर्गत दिशा-निर्देशानुसार स्वीकृति उपरांत पंचायती राज संस्थाओं द्वारा कराया जा सकता है।
गाँवों में श्रमिकों का नियोजन और साफ-सफाई की गतिविधियाँ: श्रमिकों के नियोजन हेतु बीएसआर (BSR) / दर विश्लेषण का निर्धारण स्थानीय निकाय (नगर निगम/परिषद/पालिका) की प्रचलित दरों से 10 प्रतिशत कम दर की सीमा में जिला दर निर्धारण समिति द्वारा पंचायत समितिवार किया जाएगा।
कदीमी रास्ते और निजी भूमि पर सड़क निर्माण: राजस्व रिकार्ड में दर्ज न होने वाले कदीमी रास्तों पर सड़क निर्माण हेतु विभागीय आदेश संख्या 26/2016 दिनांक 06.04.2016 की शर्त संख्या 13 के अनुसार संबंधित काश्तकारों की सहमति और नियमानुसार शपथ-पत्र के उपरांत कार्य संपादित किया जा सकेगा।
स्थायी आदेश संख्या 27/2016: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा कार्यकारी संस्था के संबंध में आदेश
स्थायी आदेश संख्या 27/2016
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रामीण विकास, अनुभाग-5) राजस्थान सरकार द्वारा जारी स्थायी आदेश संख्या 27/2016 (क्रमांक: एफ 4(10) पंरावि/पीपी/जीकेन/2014-15, दिनांक 11 अप्रैल 2016) के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी।
मुख्य बिंदु:
विभागीय स्थायी आदेश संख्या 24/2015 दिनांक 15 दिसंबर 2015 के द्वारा ग्रामीण कार्य निर्देशिका-2015 के बिन्दु संख्या 24.8 के अंतर्गत जलग्रहण विकास एवं भू-संरक्षण विभाग के कार्य कराने के लिए अधिकृत जलग्रहण समिति को जोड़ा गया था।
विभागीय परिपत्र संख्या 17/2015 द्वारा जारी ग्रामीण कार्य निर्देशिका-2015 भाग-1 को विभागीय आदेश दिनांक 22.12.2015 द्वारा स्थगित कर ग्रामीण कार्य निर्देशिका-2010 प्रभावी की गई है।
ग्रामीण कार्य निर्देशिका-2010 के बिंदु संख्या 2.3 में वर्णित कार्यकारी संस्था संबंधित योजना की मार्गदर्शिका के प्रावधान अनुसार होने का उल्लेख है।
भारत सरकार / जलग्रहण विकास एवं भू-संरक्षण विभाग द्वारा जारी मार्गदर्शिका के अनुसार कार्य कराने के लिए अधिकृत जलग्रहण समिति को भी कार्यकारी संस्था की श्रेणी में जोड़ा जाता है।
उपरोक्त आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होंगे।
स्थायी आदेश संख्या 26/2016 - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग
स्थायी आदेश संख्या 26/2016
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रामीण विकास, अनुभाग-5), राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 06 अप्रैल, 2016 का स्थायी आदेश जारी किया गया है। यह आदेश एफ- 27(252)ग्राविवि/ग्रुप-5/जीकेएन/एसओपी/2015-16 के अंतर्गत है।
इस आदेश के माध्यम से ग्राम पंचायतों और विकास अधिकारियों (पंचायत समिति) को प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति के लिए प्रदत्त शक्तियों में संशोधन किया गया है:
परिशिष्ट - 1 प्रशासनिक स्वीकृति: निर्माण कार्य की प्रशासनिक स्वीकृति (मूल) (विधायक कोष व महात्मा गांधी नरेगा के अतिरिक्त) के संबंध में ग्राम पंचायत एवं विकास अधिकारी की वित्तीय सीमाएं निर्धारित की गई हैं। नवीन स्वीकृति के लिए ग्राम पंचायत हेतु 5.00 लाख रुपये तक तथा विकास अधिकारी हेतु 5.00 लाख रुपये तक की सीमा है। रखरखाव/मरम्मत हेतु ग्राम पंचायत हेतु 0.50 लाख रुपये तथा विकास अधिकारी हेतु 2.00 लाख रुपये तक की सीमा तय की गई है।
परिशिष्ट - 2 वित्तीय स्वीकृति (संशोधित सहित): निर्माण कार्य की वित्तीय स्वीकृति (मूल) हेतु ग्राम पंचायत एवं विकास अधिकारी की वित्तीय सीमाएं दी गई हैं। नवीन स्वीकृति के लिए ग्राम पंचायत (ग्राम पंचायत के पास उपलब्ध राशि) तथा विकास अधिकारी (पंचायत समिति के पास उपलब्ध राशि) हेतु 5.00 लाख रुपये तक की सीमा है। रखरखाव/मरम्मत हेतु ग्राम पंचायत हेतु 0.50 लाख रुपये तथा विकास अधिकारी हेतु 2.00 लाख रुपये तक की सीमा है।
यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा। अधिक जानकारी के लिए प्रमुख शासन सचिव श्रीमंत पाण्डेय के हस्ताक्षर से जारी मूल आदेश का अवलोकन करें।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग - संशोधित अधिसूचना (राजपत्र दिनांक 6 अप्रैल 2016)
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
यह दस्तावेज ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा जारी संशोधित अधिसूचना से संबंधित है, जो राजस्थान राज-पत्र (असाधारण) दिनांक 6 अप्रैल 2016 में प्रकाशित हुई है।
संदर्भ: विभागीय समसंख्यक अधिसूचना क्रमांक 1302 दिनांक 02-08-2011 द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (अधिनियम संख्या 13) की धारा 98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 154(4)(ग) के अन्तर्गत 5.00 लाख से 10.00 लाख तक की आबादी भूमि के विक्रय/नीलामी की पुष्टि किए जाने हेतु संभागीय आयुक्त को अधिकृत किया गया था।
संशोधन विवरण: सहवं से नियम 154(3)(ग) के स्थान पर "नियम 154(4)(ग)" अंकित हो गया था। अत: उक्त अधिसूचना में आंशिक संशोधन कर प्रयुक्त अभिव्यक्ति राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के "नियम 154(3)(ग)" के स्थान पर "नियम 154(4)(ग)" पढ़ा जावे।
यह आदेश संयुक्त शासन सचिव (विधि) द्वारा जारी किया गया है।
राजस्थान सरकार - स्थायी आदेश संख्या 25/2015: शेड्यूल्ड ऑफ़ पॉवर में संशोधन
राजस्थान सरकार ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग - स्थायी आदेश
ग्रामीण विकास (विकास, अनुभाग-5) द्वारा जारी स्थायी आदेश संख्या- 25/2015 (क्रमांक एफ-27(252)ग्राविव/ग्रुप-5/जीकेन/एसओपी/2015-16 जयपुर, दिनांक 10 मार्च, 2016) के माध्यम से ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों को प्रदत्त प्रशासनिक एवं वित्तीय शक्तियों के शेड्यूल्ड ऑफ़ पॉवर में संशोधन किया गया है।
प्रमुख बिंदु
प्रशासनिक स्वीकृति (परिशिष्ट-1): ग्राम पंचायत के पास उपलब्ध राशि के अनुसार निर्माण कार्य की प्रशासनिक स्वीकृति (मूल) नवीन स्वीकृति 10.00 लाख रुपये तक तथा रखरखाव/मरम्मत 0.50 लाख रुपये तक निर्धारित की गई है। विकास अधिकारी (पंचायत समिति के पास उपलब्ध राशि) हेतु नवीन स्वीकृति 5.00 लाख रुपये तक तथा रखरखाव/मरम्मत 2.00 लाख रुपये तक है।
वित्तीय स्वीकृति (परिशिष्ट-2): ग्राम पंचायत हेतु नवीन वित्तीय स्वीकृति 10.00 लाख रुपये तक तथा रखरखाव/मरम्मत 0.50 लाख रुपये तक है। विकास अधिकारी हेतु नवीन वित्तीय स्वीकृति 5.00 लाख रुपये तक तथा रखरखाव/मरम्मत 2.00 लाख रुपये तक है।
शर्तें एवं निर्देश: यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होंगे। सड़क निर्माण कार्य हेतु निजी भूमि पर प्रचलित आम रास्तों के संबंध में भूमि से संबंधित काश्तकारों से सहमति एवं नियमानुसार शपथ पत्र लेने के उपरांत कार्य सम्पादन किया जा सकेगा।
प्रधानमंत्री आवास योजना - ग्रामीण की पात्रता/वरीयता सूची में शामिल परिवारों को पट्टा आवंटन बाबत निर्देश
प्रधानमंत्री आवास योजना - ग्रामीण पट्टा आवंटन निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना - ग्रामीण के संबंध में आदेश जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
विषय: "प्रधानमंत्री आवास योजना - ग्रामीण" की पात्रता/वरीयता सूची में शामिल परिवारों को पट्टा आवंटन करने बाबत।
आदेश संख्या एवं दिनांक: क्र.एफ.4( )पट्टा निर्देश/विधि/पंशावि/2016/692, दिनांक 01.09.2016।
जारीकर्ता: आनन्द कुमार, शासन सचिव एवं आयुक्त, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
मुख्य निर्देश: इस योजना की पात्रता/वरीयता सूची में शामिल परिवारों को राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के प्रावधानों के अन्तर्गत निर्धारित प्रक्रिया अपनाई जाकर संबंधित को भूमि/पट्टे आवंटन की कार्यवाही तत्काल सुनिश्चित करावे, ताकि योजना सुचारू रूप से क्रियान्वित की जा सके।
ग्रामीण कार्य निर्देशिका - 2015 (भाग-1) के क्रियान्वयन को स्थगित करने बाबत आदेश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग का आदेश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रामीण विकास, अनुभाग-5), राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 22 दिसंबर 2015 को एक आदेश जारी किया गया है, जिसका क्रमांक एफ 4(10)पंरावि/पीपी/जीकेन/2014-15 है।
मुख्य बिंदु:
आदेश का उद्देश्य: विभागीय परिपत्र दिनांक 18.08.2015 के द्वारा राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 के नियम 182 (क) के क्रम में ग्रामीण कार्य निर्देशिका -2015 (भाग-1) लागू की गई थी।
क्रियान्वयन स्थगन: उक्त ग्रामीण कार्य निर्देशिका -2015 (भाग-1) के संबंध में प्राप्त सुझावों के निस्तारण कर संशोधित निर्देशिका तैयार होने तक इसके क्रियान्वयन को स्थगित किया गया है।
वैकल्पिक व्यवस्था: इस दौरान विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन हेतु पूर्व की भांति ग्रामीण कार्य निर्देशिका -2010 लागू रहेगी।
स्थायी आदेश संख्या 22/2015: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा प्रशासनिक स्वीकृतियों के संबंध में संशोधन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार - स्थायी आदेश संख्या 22/2015
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रामीण विकास, अनुभाग-5) द्वारा दिनांक 17 नवंबर, 2015 को स्थायी आदेश संख्या 22/2015 जारी किया गया है। यह आदेश विभागीय परिपत्र संख्या- 17/2015 द्वारा जारी ग्रामीण कार्य निर्देशिका-2015, भाग-1 में संशोधन से संबंधित है।
मुख्य बिंदु एवं संशोधन
निर्देश संख्या 11.1 में संशोधन: स्वामित्व आवश्यकता एवं प्रक्रिया में परिसम्पत्तियों की श्रेणियों में से सड़क निर्माण कार्यों हेतु निजी भूमि पर प्रचलित आम रास्ते के लिए भूमि पर सम्बन्धित काश्तकारों से सहमति, शपथ-पत्र पर लेने के उपरान्त कार्य सम्पादन किया जा सकेगा।
तालिका-1 शिड्यूल ऑफ़ पावर (प्रशासनिक स्वीकृति):
कार्य/आइटम का विवरण: निर्माण कार्य की प्रशासनिक स्वीकृति (मूल) (विधायक व सांसद कोष के अतिरिक्त)।
स्वीकृतकर्ता अधिकारी/समिति: ग्राम पंचायत (ग्राम पंचायत के पास उपलब्ध राशि)।
शक्तियों की वित्तीय सीमा: नवीन स्वीकृति के लिए 5.00 लाख रुपये तक तथा रख-रखाव/मरम्मत के लिए 0.50 लाख रुपये।
शर्ते/टिप्पणियां: शर्तें/टिप्पणियां क्र.सं. 1 से 16 से यथावत लागू होंगी।
यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा।
स्थायी आदेश संख्या 24/2015: ग्रामीण कार्य निर्देशिका-2015 में संशोधन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग का स्थायी आदेश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रामीण विकास, अनुभाग-5), राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 15 दिसम्बर 2015 का स्थायी आदेश संख्या 24/2015 जारी किया गया है। यह आदेश ग्रामीण कार्य निर्देशिका-2015, भाग-1 में संशोधन के संबंध में है।
मुख्य बिंदु
परिपत्र संदर्भ: विभागीय परिपत्र संख्या 17/2015 द्वारा ग्रामीण कार्य निर्देशिका-2015, भाग-1 जारी की गई थी।
बिंदु संख्या 24 में संशोधन: निर्देशिका के बिंदु संख्या 24 (कार्यकारी संस्था / कार्य निष्पादन संख्या) में संशोधन करते हुए, अनुच्छेद 24.8 में अन्य संस्थाओं की श्रेणी में 'जलग्रहण विकास एवं भू-संरक्षण विभाग के कार्य कराने के लिए अधिकृत जलग्रहण समिति' को जोड़ा गया है।
प्रभावी तिथि: यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।
यह आदेश संबंधित अधिकारियों, जिला कलेक्टरों, मुख्य कार्यकारी अधिकारियों और विकास अधिकारियों को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित किया गया है।
स्थायी आदेश संख्या 20/2015 - ग्रामीण कार्य निर्देशिका-2015 भाग-1 में संशोधन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग - स्थायी आदेश संख्या 20/2015
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रामीण विकास, अनुभाग-5) द्वारा दिनांक 17 सितम्बर, 2015 को स्थायी आदेश संख्या- 20/2015 जारी किया गया है। यह आदेश विभागीय परिपत्र संख्या- 17/2015 द्वारा जारी ग्रामीण कार्य निर्देशिका-2015 भाग-1 के निर्देशों में संशोधन के संबंध में है।
प्रमुख संशोधन एवं बिंदु:
निर्देश संख्या- 7.1: शिड्यूूल ऑफ पॉवर्स हेतु परिशिष्ट-2 (ग्रामीण कार्य निर्देशिका-2015 भाग-1) की तालिका संख्या- 3 शिड्यूूल ऑफ पॉवर्स के तकनीकी स्वीकृति कॉलम संख्या- 6 में शर्त/टिप्पणी जोड़ी गई है कि प्राकृतिक आपदा की स्थिति में क्षतिग्रस्त कार्यों के तत्काल सम्पादन हेतु ग्राम पंचायत द्वारा एक लाख तक की तकनीकी स्वीकृति ग्रामीण कार्य निर्देशिका- 2015 के भाग-1 के निर्देश संख्या- 4.3 व 4.4 के अनुसार जारी की जा सकेगी।
निर्देश संख्या- 9.5.1: पंचायत समिति स्तरीय बाजार दर सर्वेक्षण एवं प्रस्तावक समिति में उप-निर्देश संख्या- 1 के अनुसार एक सरपंच एवं एक ग्राम सेवक (कुल 2 सदस्य) शामिल किये जाते हैं। प्रतिवर्ष रोटेशन के आधार पर इन सदस्यों का चयन विकास अधिकारी द्वारा पंचायत समिति की प्रशासन व स्थापना समिति की बैठक में लॉटरी के आधार पर किया जाएगा।
ग्रामीण कार्य निर्देशिका- 15 भाग-1 के निर्देश संख्या- 18.1: "राज्य स्तरीय तकनीकी अनुमोदन समिति में क्रम संख्या- 5 पर अंकित जिलों के आमंत्रित अधिशाषी अभियंता 3 के स्थान पर प्रत्येक संभाग से एक अधिशाषी अभियंता को प्रतिवर्ष रोटेशन के आधार पर सदस्य नियुक्त किया जाता है।"
प्रभावी तिथि: उपर्युक्त आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होंगे। आदेश पर श्रीमत पाण्डेय, प्रमुख शासन सचिव, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज के हस्ताक्षर हैं।
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2015 - सिंचाई परियोजना के विस्थापितों को भूमि आवंटन
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2015
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना दिनांक 5 अगस्त 2015 के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
नियम का नाम: राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2015।
प्रवर्तन: ये नियम राजपत्र में प्रकाशन की तारीख (05.08.2015) से प्रवृत्त होंगे।
नियम 158 का संशोधन: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 158 में उप-नियम (2क) के पश्चात् और उप-नियम (3) के पूर्व नया उप-नियम (2ख) अंतःस्थापित किया गया है।
विस्थापितों के लिए प्रावधान: राज्य सरकार, सिंचाई परियोजना के विस्थापितों को, निःशुल्क अधिकतम 300 वर्ग गज के अध्यधीन रहते हुए उनके स्वामित्व वाले गृह स्थलों या गृह के समतुल्य आबादी भूमि आवंटित कर सकेगी।
आदेश क्रमांक: [संख्या एफ.4 (7) अमें/रूल/लीगल/पी.आर./2014/537]
यह आदेश राज्यपाल के आदेश से एस.के. सोलंकी, संयुक्त शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग - शिड्यूूल ऑफ़ पावर्स (Schedule of Powers) 2014
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग का शिड्यूूल ऑफ़ पावर्स (Schedule of Powers) 2014 परिपत्र
यह परिपत्र ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 17 सितम्बर, 2014 को जारी किया गया है (क्रमांक: एफ 27(79)ग्रावि/अनु-5/जीकेन/प्रशा. अनुस./2014)। इस दस्तावेज का मुख्य उद्देश्य पंचायती राज संस्थाओं और कार्यकारी विभागों द्वारा किए जाने वाले निर्माण कार्यों के लिए प्रशासनिक, वित्तीय एवं तकनीकी स्वीकृतियों, संशोधित स्वीकृतियों, अतिरिक्त मात्रा और एक्स्ट्रा आइटम्स की स्वीकृति हेतु शिड्यूूल ऑफ़ पावर्स निर्धारित करना है।
मुख्य बिंदु एवं दिशा-निर्देश:
कार्यों की स्वीकृति: मुख्यालय, ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद के स्तर पर उपलब्ध राशि तथा महात्मा गांधी नरेगा के अंतर्गत प्रशासनिक, वित्तीय एवं तकनीकी स्वीकृतियों के लिए प्राधिकृत अधिकारियों की वित्तीय सीमाएं निर्धारित की गई हैं।
शर्तें और प्रक्रिया: न्यूनतम मजदूरी में वृद्धि, बीसार (BSR) में संशोधन या अन्य कारणों से लागत बढ़ने पर ग्रामीण कार्य निर्देशिका के अनुसार सक्षम प्राधिकारी द्वारा वित्तीय सीमा एवं शर्तों के अधीन स्वीकृति दी जाएगी।
तकनीकी स्वीकृति पूर्व प्रमाण: तकनीकी स्वीकृति जारी करने से पूर्व यह प्रमाणित किया जाना आवश्यक है कि संबंधित कार्य की भूमि पंचायत या राज्य सरकार के नाम है और उस पर कोई विवाद नहीं है।
रेंडम चैक और माप पुस्तिका: कनिष्ठ तकनीकी सहायक/कनिष्ठ अभियंता, सहायक अभियंता तथा अधिशाषी अभियंता द्वारा किए जाने वाले कार्यों के रेंडम चैक और चेक मेजरमेंट के लिए स्पष्ट प्रोफार्मा और न्यूनतम प्रतिशत निर्धारित किए गए हैं।
परिशिष्ट: परिपत्र के साथ प्रशासनिक स्वीकृति, वित्तीय स्वीकृति, तकनीकी स्वीकृति, अतिरिक्त मात्रा एवं एक्स्ट्रा आइटम्स, तथा उपयोगिता प्रमाण पत्र, मूल्यांकन जांच एवं पूर्णता प्रमाण पत्र से संबंधित परिशिष्ट (1 से 5) संलग्न हैं।
राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2013 से संबंधित अधिसूचना
राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2013
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक एफ.4(7)अमे/रूल्स/लीगल/पीआर/2012/135 दिनांक 11-2-2013 के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
नियम का नाम: राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2013।
प्रवर्तन: यह राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से प्रवृत्त होंगे।
नियम 157 का संशोधन: इसके तहत व्यैक्तिक आबादी भूमि में पुराने गृह का कब्ज़ा रखने वाले और पट्टा प्राप्त करने के इच्छुक व्यक्तियों के लिए प्ररूप 23-क में पंचायत द्वारा पट्टा जारी करने का प्रावधान किया गया है।
प्रभार एवं शुल्क विवरण: 300 वर्गगज तक या 300 वर्गगज अधिकतम क्षेत्रफल (25 प्रतिशत संनिर्मित क्षेत्रफल को सम्मिलित करते हुए) के लिए संनिर्मित पुराने ग्रहों पर नियम के प्रारंभ की तारीख से पूर्व, पचास वर्षों से अधिक पूर्व के लिए 100/- रु. तथा ठीक पूर्ववर्ती पचास वर्षों के दौरान के लिए 200/- रु. प्रभार निर्धारित किया गया है।
विशेष छूट: गरीबी रेखा से नीचे की सूची में सम्मिलित परिवारों से उप-खण्ड (क) के अधीन कोई फीस प्रभारित नहीं की जाएगी तथा उप-खण्ड (ख) के अधीन केवल 10 प्रतिशत फीस प्रभारित की जाएगी।
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2013 - नियम 159 में संशोधन
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2013
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा अधिसूचना संख्या F.4 (7)Ame./Rules/Legal/PR/2012/136 दिनांक 11-2-2013 जारी की गई है। इसके तहत राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 159 की उप-नियम (2) में संशोधन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
पंचायत आबादी क्षेत्र में गोदामों या कार्यालयों के निर्माण के लिए प्राथमिकता के आधार पर 1500 वर्ग गज तक के प्लॉट आवंटित कर सकती है।
प्राथमिक कृषि सहकारी समिति / बड़ी आकार की बहुउद्देशीय विपणन समिति (Primary Agricultural Cooperative Society/ Large Sized Multipurpose Marketing Society): उप-नियम (5) के नियम 152 के तहत बाजार मूल्य के 50% मूल्य पर।
ग्राम सेवा सहकारी समिति या क्रय विक्रय सहकारी समिति (Gram Sewa Sahakari Samiti or Kray Vikray Sahakari Samiti): राज्य सरकार के अनुमोदन के अधीन निःशुल्क (free of charge)।
राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2013 - आबादी क्षेत्र के पुराने मकानों के पट्टा जारी करने के संबंध में अधिसूचना
राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2013
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा अधिसूचना संख्या No.F.4(7)Ame./Rules/Legal/PR/2012/35 दिनांक 11-2-2013 जारी की गई है। यह अधिसूचना राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा 102 द्वारा प्रद शक्तियों के तहत राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन करने के लिए है।
मुख्य बिंदु और नियम संशोधन:
इन नियमों को राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2013 कहा गया है।
नियम 157 की उप-नियम (1) में संशोधन किया गया है जिसके अनुसार आबादी भूमि में स्थित पुराने मकानों के लिए प्रपत्र XXIII-A में पट्टा जारी किया जा सकता है।
300 वर्ग गज तक का क्षेत्र या निर्मित क्षेत्र (25 प्रतिशत निर्मित क्षेत्र सहित):
50 वर्ष से अधिक पुराने मकानों के लिए शुल्क: रु. 100/-
नियमों के प्रारंभ होने की तिथि से ठीक पहले पचास वर्षों के दौरान निर्मित मकानों के लिए शुल्क: रु. 200/-
300 वर्ग गज से अधिक के क्षेत्र पर, ऐसे अतिरिक्त क्षेत्र के लिए राजस्थान स्टाम्प नियम, 2004 के नियम 58 के खंड (b) के तहत जिला स्तरीय समिति द्वारा अनुशंसित बाजार दरों का 25 प्रतिशत देय होगा।
बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे) सूची में शामिल परिवारों से उप-खंड (a) के तहत कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा और उप-खंड (i) के उप-खंड (b) के तहत केवल 10 प्रतिशत शुल्क लिया जाएगा।
आबादी भूमि पट्टा प्रक्रिया हेतु राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के अंतर्गत तीन बैठकों की प्रक्रिया संबंधी परिपत्र
परिचय
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 08/01/2013 को जारी परिपत्र (क्रमांक: एफ.15(79)पंवारा/विधि/प्रशा.गाヴォं के संग अभि.2013/12/12) के माध्यम से आबादी भूमि के पट्टा वितरण की प्रक्रिया को सरल बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य उद्देश्य एवं विवरण
विभाग के ध्यान में लाया गया था कि पंचायतों द्वारा आबादी भूमि का पट्टा देने के लिए कम से कम छह बैठकें करनी पड़ती हैं, जिससे प्रक्रिया में काफी विलम्ब होता है। इस संबंध में नियमों के प्रावधानों एवं मूल भावना को ध्यान में रखते हुए स्पष्ट किया जाता है कि राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 145 से 147 में पट्टा दिए जाने की प्रक्रिया निर्धारित है। इसके तहत आवेदन पत्र प्रस्तुत करने के पश्चात् ग्राम पंचायत द्वारा पट्टा दिए जाने की कार्यवाही अब केवल 3 बैठकों में पूर्ण की जा सकती है:
प्रथम बैठक: तीन पंचों की समिति की प्रतिनियुक्ति।
द्वितीय बैठक: रिपोर्ट का समिश्रण व आपत्ति आमंत्रण।
तृतीय बैठक: यदि आपत्ति प्राप्त नहीं होती है तो पट्टा जारी करने की कार्यवाही की जा सकती है।
मुख्यमंत्री ग्रामीण बीपीएल आवास योजना एवं इंदिरा आवास योजना के अंतर्गत निःशुल्क पट्टा आवंटन के संबंध में निर्देश
मुख्यमंत्री ग्रामीण बीपीएल आवास योजना एवं इंदिरा आवास योजना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी पत्र क्रमांक एफ.4()विधि/पंचावि/2011/1134 दिनांक 1 जुलाई 2011 के माध्यम से बीपीएल परिवारों को निःशुल्क पट्टा आवंटन के संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
पट्टा आवंटन का अधिकार: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 153 के अंतर्गत कमजोर वर्गों को आवंटन का प्रावधान है जिसके तहत पंचायत सर्किल की आबादी भूमि में बीपीएल परिवारों को निःशुल्क पट्टे आवंटित करने का अधिकार ग्राम पंचायत में निहित है।
नियम 157 एवं 158: इन नियमों के अंतर्गत पट्टा आवंटन के लिए ग्राम पंचायत द्वारा संकल्प पारित कर बीपीएल परिवारों को पट्टे देने की कार्यवाही तत्काल सुनिश्चित करने के निर्देश हैं। इसके लिए नियम 145 से 156 द्वारा निर्धारित नीलामी प्रक्रिया की पालना करना आवश्यक नहीं है।
आबादी भूमि की उपलब्धता: जिला कलेक्टर से अपेक्षा की गई है कि जिन ग्राम पंचायतों के अधीन पंचायत सर्किल में आवंटन हेतु आबादी भूमि उपलब्ध नहीं है, वहां राज्य सरकार के स्वामित्व की अन्य उपयोग की भूमि को आबादी उपयोगार्थ परिवर्तित करते हुए ग्राम पंचायत को उपलब्ध कराई जाए।
मुख्यमंत्री ग्रामीण बीपीएल आवास योजना एवं इंदिरा आवास योजना के अंतर्गत निःशुल्क पट्टा आवंटन बाबत
मुख्यमंत्री ग्रामीण बीपीएल आवास योजना एवं इंदिरा आवास योजना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा मुख्यमंत्री ग्रामीण बीपीएल आवास योजना एवं इंदिरा आवास योजना के अंतर्गत बीपीएल परिवारों को निःशुल्क पट्टा आवंटन के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
पट्टा आवंटन का अधिकार: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 153 के अंतर्गत कमजोर वर्गों को आवंटन का प्रावधान है, जिसके तहत पंचायत सर्किल की आबादी भूमि में बीपीएल परिवारों को निःशुल्क पट्टे आवंटन करने का अधिकार ग्राम पंचायत में निहित है।
विनियमितीकरण: नियम 153 के अंतर्गत पुराने ग्रहों का विनियामितीकरण कर पट्टे जारी करने की शक्ति भी पंचायत में निहित है।
प्रक्रिया: उपरोक्त प्रावधानों के अंतर्गत आवंटन/पट्टा जारी किए जाने बाबत ग्राम पंचायत द्वारा संकल्प पारित किया जाकर आवंटन/पट्टा जारी करने की कार्यवाही की जा सकती है।
नियमों का पालन: नियम 157 एवं 158 के अंतर्गत आवंटन व पट्टा जारी करने के लिए नीलामी किए जाने संबंधी प्रक्रियात्मक प्रावधान नियम 145 से 156 द्वारा निर्धारित प्रक्रिया की पालना अपेक्षित/आवश्यक नहीं है।
भूमि की उपलब्धता: जिला कलेक्टरों से अपेक्षा की जाती है कि जिन ग्राम पंचायतों के अधीन पंचायत सर्किल में आवंटन हेतु आबादी भूमि उपलब्ध नहीं है, उन ग्राम पंचायतों के लिए ग्राम पंचायत क्षेत्र में उपलब्ध राज्य सरकार के स्वामित्व की अन्य उपयोग की भूमि को आबादी उपयोगार्थ परिवर्तित करते हुए आवंटन हेतु ग्राम पंचायत को उपलब्ध कराई जाए।
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2010 - राजस्व अभियान और प्रशासन गांवों के संग अभियान हेतु आपत्ति अवधि संशोधन
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2010
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक [No.F.4(7)Am/Rule/Legal/PR/2010/2113] दिनांक 26 नवंबर 2010 के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
नियम का नाम: राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2010।
प्रभावी तिथि: ये नियम राजपत्र में प्रकाशन की तिथि (30 नवंबर 2010) से प्रवृत्त हुए हैं।
नियम 148 में संशोधन: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 148 के उप-नियम (1) के तहत, राजस्व अभियान या प्रशासन गांवों के संग अभियान के दौरान आपत्तियां आमंत्रित करने की अवधि एक महीने के स्थान पर सात दिन होगी।
प्रारूप XXII में संशोधन: प्रारूप XXII के तहत भी राजस्व अभियान या प्रशासन गांवों के संग अभियान के दौरान आपत्तियां दर्ज कराने की अवधि एक महीने के स्थान पर सात दिन निर्धारित की गई है।
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 - अवलोकन एवं मुख्य प्रावधान
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996
यह दस्तावेज़ राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 का आधिकारिक संकलन है, जिसे ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 के अंतर्गत बनाया गया है। यह नियम राज्य की त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं (ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और ज़िला परिषद) के प्रशासन, कार्यप्रणाली, ग्राम सभा, कर एवं शुल्क निर्धारण, अ आबादी भूमि के प्रबंधन, और सेवा नियमों से संबंधित विस्तृत दिशा-निर्देश प्रदान करता है।
मुख्य बिंदु:
ग्राम सभा और सतर्कता समिति (विजिलेंस कमेटी): ग्राम सभा की बैठकों का आयोजन, कोरम, एजेंडा, कार्यवाही का रिकॉर्ड और 7 सदस्यीय सतर्कता समिति के गठन व उसके कार्यों का प्रावधान।
कर, शुल्क और राजस्व: पंचायतों द्वारा भवन कर, वाटर टैक्स, वाहन कर, व्यावसायिक फसलों पर कर, और विभिन्न सेवाओं पर शुल्क (फीस) लगाने और उनकी वसूली की प्रक्रिया।
आबादी भूमि और संपत्ति प्रबंधन: आबादी भूमि के पट्टे जारी करने, पुरानी बसावटों के नियमतिकरण, भूमि आवंटन, नीलामी समिति और उप-विभाजन (सब-डिवीजन) के नियम।
कार्य, अनुबंध और खरीदारी: वार्षिक कार्य योजना (एनुअल एक्शन प्लान), निर्माण कार्यों के निष्पादन, ठेकेदारों पर प्रतिबंध और सामग्री की खरीद के लिए पारदर्शी प्रक्रिया (बी.एस.आर. और निविदाएं)।
बजट, लेखा और लेखापरीक्षा (ऑडिट): बजट का निर्माण, कैलेंडर, रोकड़ बही (कैश बुक), वित्तीय औचित्य के मानक और स्थानीय निधि संपरीक्षा अधिनियम के तहत ऑडिट का प्रावधान।
स्थापना और सेवा नियम: पंचायती राज संस्थाओं में विभिन्न श्रेणियों के पदों, भर्ती, आरक्षण, वरिष्ठता, परिवीक्षा काल और अनुशासनात्मक कार्रवाई के नियम।