राजस्थान विकास अधिकारी पदस्थापन आदेश 2026 | 118 नवपदोन्नत VDO/BDO Posting List Rajasthan
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज) द्वारा राजस्थान ग्रामीण विकास राज्य सेवा की कनिष्ठ वेतन श्रृंखला में नवपदोन्नत अधिकारियों के पदस्थापन के संबंध में आदेश जारी किया गया है।
आदेश के अनुसार कुल 118 नवपदोन्नत अधिकारियों का विभिन्न पंचायत समितियों, जिला परिषदों एवं अन्य संबंधित कार्यालयों में रिक्त पदों पर पदस्थापन किया गया है। अधिकारियों को वर्तमान पद से कार्यमुक्त होकर नवीन पदस्थापन स्थान पर तत्काल कार्यग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं।
इस आदेश में जयपुर, अजमेर, बाड़मेर, जैसलमेर, जोधपुर, उदयपुर, चित्तौड़गढ़, राजसमंद, जालोर, सीकर, भरतपुर, दौसा, नागौर, बीकानेर, पाली सहित राजस्थान के विभिन्न जिलों में विकास अधिकारियों के पदस्थापन का विवरण दिया गया है।
अटल ज्ञान केंद्रों में क्यूबिकल आधारित फर्नीचर और वर्क स्टेशन व्यवस्था स्थापित किए जाने के संबंध में
अटल ज्ञान केंद्रों में आधुनिक क्यूबिकल आधारित फर्नीचर और वर्क स्टेशन व्यवस्था
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज) राजस्थान सरकार द्वारा बजट घोषणा वर्ष 2025-26 के अंतर्गत निर्मित किए जा रहे अटल ज्ञान केंद्रों की कार्यप्रणाली और उपयोगिता को अधिक प्रभावी बनाने के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
माननीय मुख्यमंत्री महोदय की अध्यक्षता में दिनांक 04.04.2026 को आयोजित समीक्षा बैठक में दिए गए निर्देशों के क्रम में, पूर्व में निर्धारित सामान्य फर्नीचर व्यवस्था के स्थान पर आधुनिक क्यूबिकल आधारित फर्नीचर/वर्क स्टेशन व्यवस्था विकसित की जाएगी, जिससे अध्ययनरत विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को बेहतर और व्यवस्थित अध्ययन वातावरण मिल सके।
मुख्य बिंदु एवं वित्तीय संशोधन
उद्देश्य: प्रदेश की तीन हजार से अधिक आबादी वाली ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर आधुनिक पुस्तकालय एवं अध्ययन सुविधाओं का विकास।
संशोधित लागत: वित्त विभाग की आईडी संख्या 332601032 दिनांक 01.07.2026 के द्वारा सामान्य फर्नीचर हेतु पूर्व में स्वीकृत राशि रु. 2.35 लाख के स्थान पर क्यूबिकल आधारित फर्नीचर/वर्क स्टेशन हेतु रु. 4.10 लाख प्रति अटल ज्ञान केंद्र स्वीकृत करने की संशोधित सहमति प्रदान की गई है।
व्यय का स्रोत: उक्त स्वीकृत राशि का व्यय राज्य वित्त आयोग के अंतर्गत संबंधित पंचायतों की स्वीकृत अनुदान/उपलब्ध राशि से किया जाएगा।
फर्नीचर एवं वर्क स्टेशन का अनुमानित विवरण
वर्क स्टेशन (750mm x 600mm x 1200mm) - 20 नग (कुल लागत: रु. 3,07,000)
विज़िटर चेयर कुशन सीट और बैक के साथ - 20 नग (कुल लागत: रु. 40,000)
रिवॉल्विंग चेयर - 1 नग (कुल लागत: रु. 4,000)
टेबल (900mm x 600mm x 750mm) - 1 नग (कुल लागत: रु. 5,000)
कुल अनुमानित लागत: रु. 4,10,000 प्रति अटल ज्ञान केंद्र
सभी संबंधित जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, अति. मुख्य कार्यकारी अधिकारी, अधिशाषी/सहायक अभियंता और विकास अधिकारी, पंचायत समिति को निर्देशित किया जाता है कि समस्त कार्य विभाग द्वारा अनुमोदित ड्राइंग, गुणवत्ता मानकों एवं तकनीकी विनिर्देशों के अनुरूप ही संपन्न हों तथा कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग एवं समयबद्ध पूर्णता सुनिश्चित की जाए।
ग्रामीण विकास मंत्रालय अधिसूचना: अकुशल हस्त कार्यकर्ताओं के लिए राज्य-वार मजदूरी दरें (1 जुलाई, 2026 से प्रभावी)
ग्रामीण विकास मंत्रालय अधिसूचना
भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा 30 जून, 2026 की अधिसूचना (का.आ. 3518 (अ)) के माध्यम से 'विकसित भारत - रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण): वीबी-जी राम जी (विकसित भारत – जी राम जी) अधिनियम, 2025' के अंतर्गत अकुशल हस्त कार्यकर्ताओं के लिए राज्य-वार संशोधित मजदूरी दरें जारी कर दी गई हैं। यह अधिसूचना 1 जुलाई, 2026 से प्रवृत्त होगी।
मुख्य बिंदु:
यह अधिसूचना वर्ष 2025 के अधिनियम संख्या 36 की धारा 10 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए जारी की गई है।
इसके तहत विभिन्न राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों में अकुशल हस्त कार्य के लिए प्रतिदिन की मजदूरी दर निर्धारित की गई है।
हिमाचल प्रदेश के लिए गैर-अनुसूचित क्षेत्र में 300.00 रुपये और अनुसूचित क्षेत्र में 375.00 रुपये निर्धारित किए गए हैं।
सिक्किम के अधिकांश क्षेत्रों में 300.00 रुपये तथा इसकी 3 ग्राम पंचायतों (ज्ञानथांग, लाचुंग और लाचेन) के लिए 450.00 रुपये प्रति दिन तय किए गए हैं।
अंडमान और निकोबार के लिए, अंडमान जिला (348.00 रुपये) और निकोबार जिला (367.00 रुपये) की दरें अलग-अलग हैं।
फाइल संख्या: फा. सं. जे-11060/16/2026-आरई-III, हस्ताक्षर: रोहिणी रा भाजीभाकरे, संयुक्त सचिव।
दिनांक 29 जून 2026 को विशेष ग्राम सभा के आयोजन बाबत आदेश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग राजस्थान सरकार का महत्वपूर्ण निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा आदेश जारी कर राज्य की समस्त ग्राम पंचायतों में दिनांक 29 जून, 2026 को विशेष ग्राम सभा आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं।
विशेष ग्राम सभा के मुख्य बिंदु एवं उद्देश्य
ग्रामीण सेवा शिविर-2026: दिनांक 12 जून, 2026 से 15 जुलाई, 2026 तक आयोजित हो रहे जन कल्याण शिविरों के तहत ग्रामीण विकास विभाग की योजनाओं का प्रचार-प्रसार, कार्य प्रस्ताव प्राप्त करना, प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत किस्तें व लंबित स्वीकृतियां जारी करना तथा भूमिहीन लाभकारियों को भूमि आवंटन आदि गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।
वीबी-जी राम जी योजना: दिनांक 01 जुलाई, 2026 से वीबी-जी राम जी योजना का शुभारंभ किया जा रहा है। इस संबंध में विशेष ग्राम सभा में योजना का प्रचार-प्रसार, प्राप्त कार्यों के प्रस्ताव एवं कार्ययोजना का अनुमोदन किया जाना है।
प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (आवास प्लस सर्वे-2024): 'सभी के लिए आवास' योजना के तहत आवास प्लस सर्वे-2024 के माध्यम से किए गए सर्वेक्षण के आधार पर तैयार की गई वरीयता सूची का ग्राम सभा में अनुमोदन कराया जाना आवश्यक है।
अतः सभी जिला परिषद के मुख्य/अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारियों और पंचायत समितियों के विकास अधिकारियों से अनुरोध किया गया है कि वे अपने जिले की सभी ग्राम पंचायतों में दिनांक 29 जून, 2026 को विशेष ग्राम सभा का आयोजन सुनिश्चित कराएं।
दिनांक 29 जून, 2026 को विशेष ग्राम सभा के आयोजन बाबत
विशेष ग्राम सभा आयोजन निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा जारी पत्र (क्रमांक: एफ.15(20)पंच्रावि/विधि/वि0ग्रा0सभा/2026/ई-81146, दिनांक 22-06-2026) के माध्यम से प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों में दिनांक 29 जून, 2026 को आयोजित होने वाली विशेष ग्राम सभा के संबंध में निर्देश प्रेषित किए गए हैं।
विशेष ग्राम सभा के मुख्य एजेंडे एवं बिंदु
ग्राम पंचायत क्षेत्राधिकार से मांस की अवैध दुकानें हटाया जाना।
चरागाह एवं जलाशय क्षेत्रों में अतिक्रमणकारियों के नाम ग्राम सभा में सार्वजनिक कर अतिक्रमण हटाना।
एक गांव-एक चरागाह विकास गतिविधि- तय फॉर्मेट मय क्षेत्रफल का विवरण अंकित कराते हुए।
चरागाह विकास समिति के पुनर्गठन का अनुमोदन करना।
ग्राम पंचायत की समस्त परिसंपत्तियों (चरागाह, आबादी भूमि, पंचायत के अधीन निर्मित भवन इत्यादि) की सूची को ग्राम सभा में उपलब्ध कराकर परिसंपत्ति रजिस्टर में इंदराज के प्रमाणीकरण का अनुमोदन करना।
जलग्रहण विकास समितियों का पुनर्गठन एवं नए सचिव का चयन।
पं. दीनदयाल उपाध्याय चरागाह विकास एवं गौमाता आश्रय स्थल हेतु चयनित ग्राम पंचायतों में चरागाह भूमि (25 हेक्टेयर से अधिक) का चिन्ह्नीकरण।
घुमन्तु परिवारों को आवासीय भूखंडों के पट्टे आवंटन करना।
समस्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी (जिला परिषद) और विकास अधिकारी (पंचायत समिति) को निर्देशित किया गया है कि वे अपने क्षेत्र की सभी ग्राम पंचायतों में इन बिंदुओं को सम्मिलित करते हुए नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग: ग्राम विकास अधिकारी एवं वरिष्ठ ग्राम विकास अधिकारी के पदों का सृजन
ग्राम विकास अधिकारी एवं वरिष्ठ ग्राम विकास अधिकारी पदों का सृजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ28(40)परावि/प्रशा.2/ग्राविअ/ज्ञापन/2022-20135 के अंतर्गत वित्त (व्यय-5) विभाग की आईडी संख्या 332600780 दिनांक 23.06.2026 की सहमति के अनुसरणा में नवगठित पंचायती राज संस्थाओं के ग्राम पंचायत स्तर पर पदों का सृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
ग्राम विकास अधिकारी: पूर्व में स्वीकृत 10554 पदों के अतिरिक्त 3099 नवीन पद सृजित किए गए हैं। वर्तमान में कुल 14403 ग्राम पंचायतों हेतु 10554 ग्राम विकास अधिकारी एवं 750 वरिष्ठ ग्राम विकास अधिकारी कुल 11304 पद स्वीकृत थे, जिसके क्रम में 3099 नवीन पद स्वीकृत किए गए हैं। (ग्रेड पे-2400, एल-6)
वरिष्ठ ग्राम विकास अधिकारी: पदोन्नति के अवसर उपलब्ध कराने हेतु 1250 पदों को वरिष्ठ ग्राम विकास अधिकारी के पद में क्रमोन्नत किए जाने की सहमति प्रदान की गई है। विभाग द्वारा बड़ी ग्राम पंचायतों में वरिष्ठ ग्राम विकास अधिकारी के कुल 2000 पद (750+1250) हो जाएंगे। (ग्रेड पे-3600, एल-10)
उक्त पदों के कार्यालयवार आवंटन की कार्यवाही पृथक से की जाएगी। आदेश डॉ. जोगा राम, शासन सचिव एवं आयुक्त द्वारा जारी किया गया है।
प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण: दिनांक 29.06.2026 को विशेष ग्राम सभा के आयोजन और ड्राफ्ट वरीयता सूची (PWL) के अनुमोदन के संबंध में
प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत विशेष ग्राम सभा आयोजन निर्देश
ग्रामीण विकास विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुसार, प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत आवास+ 2024 सर्वेक्षण के क्रम में तैयार ड्राफ्ट Permanent Wait List (PWL) का विशेष ग्राम सभा द्वारा दिनांक 29.06.2026 को अनुमोदन कराया जाना है।
मुख्य बिंदु एवं दिशा-निर्देश
ग्राम सभा का आयोजन: दिनांक 29.06.2026 को सभी ग्राम पंचायतों में विशेष ग्राम सभा का आयोजन किया जाएगा।
अंतिम तिथि: अंतिम वरीयता सूची आवास सॉफ्ट पर अपलोड करने की अंतिम तिथि 10.07.2026 निर्धारित की गई है।
आवास सॉफ्ट सूची: आवास सॉफ्ट पर ग्राम पंचायतवार प्रदर्शित ड्राफ्ट वरीयता सूची को 25.06.2026 तक डाउनलोड कर संबंधित ग्राम पंचायत, सरकारी कार्यालय और सार्वजनिक स्थलों के नोटिस बोर्ड पर आमजन के अवलोकन हेतु प्रदर्शित किया जाना है।
अपील का प्रावधान: यदि किसी पात्र परिवार का नाम सूची में शामिल नहीं है या गलत तरीके से काटा गया है, तो वे निर्धारित प्रारूप में आवश्यक दस्तावेजों के साथ ग्राम सभा या जिला अपीलेट कमेटी के समक्ष अपील प्रस्तुत कर सकते हैं।
सभी संबंधित ग्राम पंचायतों और अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे निर्धारित समयावधि में इन निर्देशों की अनुपालना सुनिश्चित करें।
दिनांक 26 मई, 2026 को विशेष ग्राम सभा के आयोजन बाबत आवश्यक दिशा-निर्देश
विशेष ग्राम सभा आयोजन (26 मई, 2026)
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा जारी पत्र (क्रमांक: एफ.15(20)पंवैधि/वि0ग्रा0सभा/2026/ई-81146, दिनांक: 23.05.2026) के अनुसार दिनांक 26 मई, 2026 को राज्य की सभी ग्राम पंचायतों में विशेष ग्राम सभा का आयोजन किया जाना है।
ग्राम सभा के मुख्य एजेंडा एवं बिंदु:
ग्राम (ग्लोबल राजस्थान एग्रोटेक मीट) 2026 के बारे में जानकारी:
राज्य सरकार द्वारा 23 से 25 मई, 2026 तक प्रस्तावित 'GRAM-2026' आयोजन को वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में ईंधन संयम की अपील और मुख्यमंत्री महोदय के ईंधन बचत हेतु निर्देशों के कारण कुछ समय के लिए स्थगित किया गया है, जो शीघ्र ही आयोजित होगा।
ग्राम सभा में नागरिकों को इस आयोजन की रूपरेखा, ड्रोन तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, प्रेसिजन फार्मिंग, जैविक एवं प्राकृतिक खेती जैसी आधुनिक तकनीकों के बारे में बताया जाएगा।
किसानों, स्टार्टअप्स और कृषि वैज्ञानिकों के बीच सीधा संवाद स्थापित कर कृषि को अधिक लाभदायक बनाने पर चर्चा होगी।
ग्रामोत्थान शिविरों / ग्राम रथ यात्रा की प्रगति की जानकारी:
ग्राम उत्थान शिविर अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्र के समस्त 2770 गिरदावर सर्किल पर शिविर आयोजित किए गए, जिनमें 31.5 लाख से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया।
इन शिविरों में कृषि, उद्यान, कृषि विपणन, पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन, सहकारिता, जल संसाधन, ऊर्जा, उद्योग, ग्रामीण विकास, पंचायत राज तथा राजस्व विभाग ने भाग लिया तथा मौके पर ही ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान किया गया।
अधिकारियों की उपस्थिति एवं निर्देश:
मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद और विकास अधिकारी, पंचायत समिति यह सुनिश्चित करेंगे कि दिनांक 26 मई, 2026 को आयोजित होने वाली प्रत्येक ग्राम सभा में जिला स्तर या पंचायत समिति स्तर का कोई अधिकारी अनिवार्य रूप से उपस्थित रहे तथा ग्राम सभाओं का प्रभावी पर्यवेक्षण किया जाए।
ग्रामीण क्षेत्रों में चरणबद्ध रूप से स्ट्रीट लाइट/रोड लाइट व्यवस्था स्थापित किए जाने के संबंध में
ग्रामीण क्षेत्रों में स्ट्रीट लाइट और रोड लाइट व्यवस्था
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में चरणबद्ध रूप से स्ट्रीट लाइट और रोड लाइट व्यवस्था स्थापित करने के संबंध में दिशानिर्देश जारी किए गए हैं। यह पहल माननीय मंत्री महोदय, पंचायती राज विभाग द्वारा विधानसभा में की गई घोषणा के अनुपालन में है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रात्रिकालीन अंधकार की समस्या का समाधान करना और प्रत्येक गांव को प्रकाशमान बनाना है।
मुख्य उद्देश्य
ग्रामीण क्षेत्रों में रात्रि के समय सुरक्षित एवं सुगम आवागमन सुनिश्चित करना।
ग्रामों की मुख्य बस्तियों, बाजारों, सार्वजनिक स्थलों, विद्यालयों, पंचायत भवनों और स्वास्थ्य केंद्रों पर पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था उपलब्ध कराना।
ऊर्जा दक्ष एवं पर्यावरण अनुकूल प्रकाश व्यवस्था को बढ़ावा देना।
विद्युत आपूर्ति की कमी वाले क्षेत्रों में सौर ऊर्जा आधारित स्ट्रीट लाइट/रोड लाइट की स्थापना को प्रोत्साहित करना।
ग्रामीण क्षेत्रों में दुर्घटनाओं एवं आपराधिक गतिविधियों की संभावना को कम करना तथा ग्रामीण विकास को गति प्रदान करना।
क्रियान्वयन क्षेत्र एवं प्राथमिकता
प्रत्येक ग्राम पंचायत में सभी ग्रामीण क्षेत्रों, आबादी क्षेत्रों, बाजारों, मुख्य मार्गों, आंतरिक मार्गों और अन्य महत्वपूर्ण स्थलों पर चरणबद्ध रूप से स्ट्रीट लाइट/रोड लाइट लगाई जाएगी। कार्य प्रारंभ होने की प्राथमिकता में कच्ची बस्तियां, कमजोर वर्ग की बस्तियां, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति वर्ग की बस्तियां तथा मुख्य मार्ग, बाजार, बस स्टैंड, पंचायत भवन, विद्यालय, आंगनबाड़ी केंद्र एवं स्वास्थ्य केंद्र जैसे सार्वजनिक स्थान शामिल होंगे।
स्ट्रीट लाइट की स्थापना एवं विद्युत कनेक्शन
एल.ई.डी. स्ट्रीट लाइट: विद्युत वितरण निगम के खंभों पर नियमानुसार सड़क की चौड़ाई के अनुसार एल.ई.डी. लाइट लगाई जाएगी।
सौर ऊर्जा आधारित स्ट्रीट लाइट: जहां विद्युत पोल उपलब्ध नहीं हैं, विद्युत आपूर्ति नियमित नहीं है अथवा विद्युत वितरण का नेटवर्क उपलब्ध नहीं है, वहां सौर ऊर्जा आधारित स्ट्रीट लाइट स्थापित की जा सकती है।
विद्युत कनेक्शन: स्ट्रीट लाइट/रोड लाइट हेतु विद्युत कनेक्शन ग्राम पंचायत द्वारा लिया जाएगा, जो ग्रामवार, ग्राम पंचायतवार या क्षेत्रवार हो सकता है।
व्यय का प्रबंधन
राज्य वित्त आयोग षष्ठ/सप्तम के अंतर्गत जारी विभागीय दिशा-निर्देशों में मूलभूत एवं विकास कार्यों के लिए हस्तांतरित 55 प्रतिशत राशि से सड़कों एवं सार्वजनिक स्थानों पर उचित प्रकाश व्यवस्था और 40 प्रतिशत राशि का उपयोग रोड लाइट/स्ट्रीट लाइट के अंतर्गत किया जाना अनुमत है।
ई-पंचायत पोर्टल के माध्यम से क्रियान्वयन
योजना के पारदर्शी एवं प्रभावी क्रियान्वयन हेतु प्रशासनिक, तकनीकी एवं वित्तीय स्वीकृतियां जारी करना, राशि भुगतान, कार्य की जियो-टैगिंग एवं फोटो अपलोड करना तथा ऑनलाइन मॉनिटरिंग एवं प्रगति समीक्षा सभी कार्य ई-पंचायत पोर्टल के माध्यम से किए जाएंगे। जिला स्तर पर अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी, पंचायती राज इसके नोडल अधिकारी होंगे।
विकसित भारत—रोजगार और आजीविका के लिए गारण्टी मिशन (ग्रामीण): वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025 के प्रवर्तन की अधिसूचना
ग्रामीण विकास मंत्रालय अधिसूचना
भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय (ग्रामीण विकास विभाग) द्वारा जारी अधिसूचना संख्या का.आ. 2382 (अ.), नई दिल्ली, दिनांक 11 मई, 2026 के अनुसार केंद्रीय सरकार ने विकसित भारत—रोजगार और आजीविका के लिए गारण्टी मिशन (ग्रामीण): वीबी-जी राम जी (विकसित भारत - जी राम जी) अधिनियम, 2025 (2025 का 36) की धारा 1 की उपधारा (2) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए महत्वपूर्ण तिथि तय की है।
मुख्य बिंदु:
प्रवर्तन तिथि: 1 जुलाई, 2026 से उक्त अधिनियम के उपबंध भारत के सभी राज्यों और संघ राज्यक्षेत्रों में प्रवृत्त होंगे।
फाइल संख्या: [फा. सं. जे-11015/2/2025-यू.एस.- आर. ई. –V]
हस्ताक्षरकर्ता: रोहिणी रा भािीभाकरे, संयुक्त सचिव
ग्रामीण क्षेत्रों में निर्माण कार्यों हेतु भूमि स्वामित्व एवं मार्गदर्शन बाबत निर्देश
विभागीय ग्रामीण कार्य निर्देशिका-2025 के प्रावधानों की जानकारी
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास विभाग (अनुभाग-5) द्वारा क्रमांक एफ 27(201)ग्राविफो/अनु-5/जीकेन/सरपंच संघ/2024-25 के अंतर्गत दिनांक 14-08-2025 से लागू विभागीय ग्रामीण कार्य निर्देशिका-2025 के बिंदु संख्या 10 एवं परिशिष्ट-2 के प्रावधानों के संबंध में मार्गदर्शन जारी किया गया है। यह निर्देश ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न केंद्रीय एवं राज्य प्रवर्तित योजनाओं के अंतर्गत कराए जाने वाले निर्माण कार्यों को तकनीकी, सुगमता और गुणवत्ता की दृष्टि से क्रियान्वित करने के लिए है।
मुख्य बिंदु एवं दिशा-निर्देश
भूमि स्वामित्व और विवाद से बचाव: निर्देशिका के बिंदु संख्या 10 में 'भूमि स्वामित्व तय करने एवं कार्य को विवाद से बचाने का दायित्व' और परिशिष्ट-2 में 'सामान्य तौर पर संपादित की जाने वाली गतिविधियों के लिए आवश्यक जमीन का विवरण' से संबंधित प्रावधान दिए गए हैं।
आबादी भूमि और निर्माण कार्य: नवीन आंगनबाड़ी भवन, विद्यालय, सामुदायिक भवन, पंचायत भवन, उप स्वास्थ्य केंद्र, वाचनालय, प्याऊ और नए जल स्रोत लगाने के लिए आबादी क्षेत्र में सक्षम प्राधिकारी/संस्था से अनापत्ति प्रमाण-पत्र प्राप्त कर गतिविधि के नाम आवंटन/पट्टा जारी कराना आवश्यक है।
रास्ता/गोचर/वन भूमि संबंधी प्रावधान: नदी, नाला, तालाब के भरौव क्षेत्र में, रेलवे लाइन या सड़क की सीमा में निर्माण कार्य सामान्यतः स्वीकृत नहीं होते हैं। हालांकि, सार्वजनिक शौचालय, नालियां, बोरिंग, टंकी, हैंडपंप आदि के लिए ग्राम पंचायत स्थानीय स्तर पर आपत्तियां मांगकर और कोरम में निर्णय लेकर इसे शिथिल कर सकती है, जो पंचायत के रिकॉर्ड में होना अनिवार्य है। वन/अरण्य भूमि के मामलों में संबंधित विभाग से अनापत्ति प्रमाण-पत्र प्राप्त किया जाना चाहिए।
खातेदारी भूमि और गिफ्ट/दान: किसी भी परिसंपत्ति निर्माण हेतु खातेदारी भूमि दान/समर्पण करवाकर नामांतरण, खसरा मैप में लोकेशन दर्ज करना और सीमा ज्ञान करवाना आवश्यक है। एक से अधिक खातेदार होने पर सभी की सहमति और नोटरी पब्लिक से प्रमाणीकरण अनिवार्य है।
यह आदेश शासन सचिव, ग्रामीण विकास विभाग (कृष्ण कुणाल) द्वारा जारी किया गया है और सभी संबंधित जिला कलेक्टरों, मुख्य कार्यकारी अधिकारियों तथा जिला परिषदों को आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रेषित किया गया है।
24 अप्रैल 2026 को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस मनाने के संबंध में निर्देश
राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस 2026 का आयोजन
पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश (क्रमांक: एफ 4(0) PR / DP / राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस 2026 / 81591) के अनुसार 24 अप्रैल 2026 को जिला, ब्लॉक एवं ग्राम पंचायत स्तर पर राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस समारोहपूर्वक आयोजित किया जाएगा।
मुख्य उद्देश्य एवं महत्व
73वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम के लागू होने की याद में प्रतिवर्ष 24 अप्रैल को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर सहभागी लोकतंत्र की भावना को मजबूत करना और आत्मनिर्भर पंचायत की परिकल्पना को साकार करना है।
आयोजित की जाने वाली मुख्य गतिविधियाँ
आम नागरिकों व लाइन विभागों के अधिकारियों/कार्मिकों की सार्थक भागीदारी सुनिश्चित करते हुए ग्राम सभा का आयोजन।
आयोजित ग्राम सभा की बैठक कार्यवाही विवरण सभा सार के माध्यम से तैयार करना।
कार्यक्रम में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली पंचायतों का अभिनंदन।
सामुदायिक सहभागिता एवं जागरूकता सृजन संबंधी गतिविधियाँ।
महिला नेतृत्व वाले विकास, पंचायत उन्नति सूचकांक के अंतर्गत प्रदर्शन, सतत विकास लक्ष्यों के स्थानीयकरण (LSDGs) में प्रगति और ओएसआर (OSR) को बढ़ाने की रणनीतियों पर चर्चा।
पंचायती राज मंत्रालय के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल को फॉलो व टैग करना।
व्यय और वित्त पोषण
इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों/समारोहों में किया जाने वाला व्यय ओएसआर (OSR)/आरजीएसए (RGSA) के ई.ई.सी. (IEC) मद या अन्य केंद्रीय व राज्य ग्रामीण विकास योजनाओं से किया जा सकता है। इसे सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान करने के निर्देश दिए गए हैं।
ग्राम स्तर पर प्रत्येक माह के प्रथम मंगलवार को जनसुनवाई के संबंध में दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा जनसुनवाई व्यवस्था
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा माननीय पंचायती राज मंत्री महोदय की दिनांक 17.03.2026 को आयोजित बैठक में प्रदत्त निर्देशों की पालना के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
ग्राम स्तर पर जनसुनवाई: प्रत्येक माह के प्रथम मंगलवार को ग्राम स्तर पर नियमित रूप से जनसुनवाई का आयोजन किया जाएगा।
गायों का चयन: प्रत्येक ग्राम पंचायत में जनसुनवाई हेतु सबसे कम जनसंख्या वाले ग्राम का सर्वप्रथम चयन किया जाए।
अधिकारियों की मॉनीटरिंग: मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) द्वारा 2 माह में कम से कम एक बार तथा खण्ड विकास अधिकारी (BDO) द्वारा माह में कम से कम एक बार आवश्यक रूप से जन-समस्याओं के समाधान की मॉनीटरिंग सुनिश्चित की जाएगी।
जारीकर्ता: डॉ. जोगा राम, शासन सचिव एवं आयुक्त, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण (PMAY-G) के अंतर्गत लाभार्थियों के भौतिक सत्यापन एवं उन्हें अपात्र घोषित करने हेतु यह 'रिमांड ऑफ फॉर्म' (Remand Off Form) उपयोग
यह प्रपत्र PMAY-G की स्थाई वरीयता सूची (PWL) में शामिल लाभार्थियों के ग्राम सभा द्वारा भौतिक सत्यापन के लिए है।
ग्राम सभा की बैठक में योजनान्तर्गत निर्धारित मापदण्डों के परीक्षण उपरान्त लाभार्थियों को पात्र या अपात्र घोषित कर अनुमोदन किया जाता है।
प्रपत्र में लाभार्थी का नाम, पिता/पति का नाम, गाँव का नाम, PMAY-G ID एवं PWL में वरीयता क्रमांक दर्ज करने का स्पष्ट प्रावधान है।
अपात्रता के मुख्य कारण (मापदंड):
प्रपत्र में अपात्रता के 16 बिंदु दिए गए हैं, जिनमें से किसी एक का होना अपात्रता (Remand Off) के लिए पर्याप्त है:
पूर्व में मकान होना या किसी आवास योजना से लाभान्वित होना।
लाभार्थी की मृत्यु हो जाना (तथा परिवार में कोई न होना) या ग्राम पंचायत से पलायन कर जाना।
किसी भी प्रकार का वाहन (मोटरसाईकिल, टेम्पो, कार, जीप, नाव) या 3-व्हीलर/4-व्हीलर मशीनरी होना।
किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) की लिमिट 50,000 रुपये से अधिक होना।
परिवार के किसी सदस्य का राजकीय सेवा में होना, गैर कृषि उद्यम में पंजीकृत होना या मासिक आय 10,000 रुपये होना।
आयकर (Tax) या पेशेवर कर (Professional Tax) का भुगतान करने वाला होना।
घर में फ्रीज या बेसिक फोन होना।
स्वयं की 2.5 एकड़ जमीन के साथ कृषि यंत्र होना, 5.0 एकड़ सिंचित भूमि होना, या कम से कम 7.5 एकड़ भूमि/1 सिंचाई उपकरण होना।
राजस्थान पंचायती राज संस्थाओं के जनप्रतिनिधियों के मानदेय में वृद्धि की अधिसूचना
पंचायती राज संस्थाओं के जनप्रतिनिधियों के मानदेय में संशोधन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 के नियम 27 से 30 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित सदस्यों एवं जनप्रतिनिधियों के मानदेय की दरों में संशोधन किया गया है। यह अधिसूचना माननीय मुख्यमंत्री महोदय द्वारा दिनांक 27.02.2026 को वित्त एवं विनियोग विधेयक (बजट 2026-27) पर चर्चा की घोषणाओं के बिंदु सं.-69 के क्रम में जारी की गई है।
संशोधित मानदेय की दरें
जिला प्रमुख, जिला परिषद: वर्तमान मानदेय 16,698/- रुपये से बढ़कर 18,368/- रुपये प्रति माह
प्रधान, पंचायत समिति: वर्तमान मानदेय 11,689/- रुपये से बढ़कर 12,858/- रुपये प्रति माह
सरपंच, ग्राम पंचायत: वर्तमान मानदेय 6,679/- रुपये से बढ़कर 7,347/- रुपये प्रति माह
मुख्य बिंदु एवं निर्देश
जनप्रतिनिधियों को देय मानदेय का भुगतान राज्य वित्त आयोग के तहत मिलने वाली अनुदान राशि से किया जाएगा।
यह अधिसूचना वित्त (व्यय-5) विभाग की आईडी संख्या 332600452 दिनांक 19.03.2026 से प्राप्त सहमति के अनुसरण में जारी की गई है।
मानदेय में यह वृद्धि 01.04.2026 (April Paid in May) से प्रभावी होगी।
दिनांक 22 जनवरी, 2026 को विशेष ग्राम सभा का आयोजन एवं गिरदावर सर्किल स्तर पर विशेष शिविरों के संबंध में निर्देश
विशेष ग्राम सभा और विशेष शिविर आयोजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज) और कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के दिशा-निर्देशों के क्रम में राज्य की प्रत्येक ग्राम पंचायत में दिनांक 22 जनवरी, 2026 को विशेष ग्राम सभा का आयोजन किया जाना है। इस विशेष ग्राम सभा का मुख्य उद्देश्य आगामी GRAM-2026 (Global Rajasthan Agri-Tech Meet-2026) और विभिन्न विभागीय अभियानों के प्रति जागरूकता पैदा करना है।
मुख्य बिंदु एवं दिशा-निर्देश:
ग्राम सभा आयोजन: दिनांक 22 जनवरी, 2026 को सभी ग्राम पंचायतों में विशेष ग्राम सभा आयोजित होगी जिसमें स्वामित्व कार्ड वितरण और अनुपयोगी विद्यालय भवन में नई स्वीकृत ग्राम पंचायत का कार्यालय प्रारंभ करने जैसे विषयों पर चर्चा व कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
गिरदावर सर्किल स्तर पर विशेष शिविर: बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर दिनांक 23 जनवरी, 2026 से इन शिविरों का शुभारंभ होगा। इसके पश्चात दिनांक 24, 25 एवं 31 जनवरी, 2026 तथा 01 एवं 05 से 09 फरवरी, 2026 (कुल 10 दिवस) तक प्रत्येक गिरदावर वृत्त (ILR) पर प्रातः 10:00 बजे से सायं 05:00 बजे तक विशेष शिविर लगाए जाएंगे।
भाग लेने वाले विभाग: इन शिविरों में कृषि, उद्यानिकी, कृषि विपणन, पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन, सहकारिता, जल संसाधन, ऊर्जा, उद्योग, आपदा प्रबंधन, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के क्षेत्रीय अधिकारी एवं कर्मचारी भाग लेंगे।
विभागीय गतिविधियां: शिविरों में सॉइल हेल्थ कार्ड वितरण, पीएम किसान निधि डीबीटी, फसल बीमा, किसान क्रेडिट कार्ड आवेदन, मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना, पीएम आवास योजना (PMAY-G) के तहत गृह प्रवेश, पीएम सूर्य घर योजना पंजीकरण और विभिन्न स्वरोजगार व अनुदान योजनाओं के आवेदन तैयार किए जाएंगे।
उदयपुर जिला ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन संबंधी शुद्धि पत्र
उदयपुर जिला ग्राम पंचायत एवं पंचायत समिति पुनर्गठन शुद्धि पत्र
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा आदेश क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/894, दिनांक 28-12-2025 के माध्यम से उदयपुर जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन से संबंधित पूर्व में जारी अधिसूचना में लिपकीय त्रुटियों के सुधार हेतु शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु एवं विवरण
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
दिनांक: 28-12-2025
संबंधित जिला: उदयपुर
ग्राम पंचायतों हेतु संशोधन: सायरा पंचायत समिति के अंतर्गत पूर्व प्रकाशित विवरण 'भानपुर' के स्थान पर कॉलम 7 के अनुसार 'भानपुरा' पढ़ा जाए।
पंचायत समितियों हेतु संशोधन: कुराबड और गिरवा पंचायत समितियों के अंतर्गत पूर्व प्रकाशित विवरण (जैसे 'मामादेव' और 'साठपुर मीणा') से संबंधित प्रविष्टियों में संशोधन करते हुए कुछ प्रविष्टियों को विलोपित किया गया है तथा अन्य सुधार किए गए हैं।
यह शुद्धि पत्र प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात पूर्व में प्रकाशित अधिसूचनाओं में हुई लिपकीय त्रुटियों को सुधारने के लिए जारी किया गया है।
जिला सलूंबर की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन से संबंधित शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा जारी शुद्धि पत्र
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवारा/2024/889 दिनांक 28-12-2025 के तहत जिला सलूंबर की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसर्जन से संबंधित पूर्व में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटिवश हुए गलत प्रकाशन को सुधारने हेतु शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
विवरण: पूर्व प्रकाशित अधिसूचनाओं (संख्या एफ.15(39)पंवारा/पंचायत समिति गठन/2025/803 दिनांक 20.11.2025 एवं संख्या एफ.15(39)पंवारा/पंचायत समिति गठन/2025/843 दिनांक 21.11.2025) में प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात कॉलम संख्या 6 के स्थान पर कॉलम 7 में अंकित विवरण को सही पढ़ा जाए।
राजस्व ग्राम और पंचायत समिति पुनर्गठन शुद्धि पत्र - सिरोही जिला
राजस्थान सरकार ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), जयपुर द्वारा दिनांक 28-12-2025 को एक शुद्धि पत्र (कमांक: एफ.15(39)पंव/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/901) जारी किया गया है। यह शुद्धि पत्र विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंव/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/846 दिनांक 21.11.2025 तथा दिनांक 24.11.2025 को राजस्थान राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटियों को दुरुस्त करने और प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण के पश्चात जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
जिला: सिरोही
अधिसूचना दिनांक: 28-12-2025
शासन सचिव: डॉ. जोगा राम (राज्यपाल की आज्ञा से)
इस शुद्धि पत्र के माध्यम से सिरोही जिले की पुनर्गठित, पुनर्जीवित और नवसृजित पंचायत समितियों तथा उनमें सम्मिलित ग्राम पंचायतों के विवरण में संशोधन किया गया है। अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात उस जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो अनुसूची के स्तंभ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी।
कोटपूतली-बहरोड़ जिला: ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनःसीमांठन बाबत शुद्धि पत्र अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार, जयपुर द्वारा क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवै/2024/883 दिनांक 29-12-2025 के तहत एक महत्वपूर्ण शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
अधिसूचना का मुख्य उद्देश्य एवं विवरण
विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवै/2024/797 दिनांक 20.11.2025 एवं संख्या एफ.15(39)विधि/पंचायत समिति गठन/2025/837 दिनांक 21.11.2025 तथा जिला कोटपूतली-बहरोड़ की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनःसीमांठन/नवसृजन बाबत दिनांक 21.11.2025 एवं 24.11.2025 को राजस्थान राजपत्र विशेषनांक भाग 6(ग) में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने की वजह से व प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात यह संशोधन/शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु
संबंधित जिला: कोटपूतली-बहरोड़
प्रभावित क्षेत्र: ग्राम पंचायतें एवं पंचायत समितियां
जारीकर्ता: डॉ. जोगा राम, शासन सचिव, राज्यपाल की आज्ञा से
नोट: नीचे दिए गए कॉलम संख्या 6 में अंकित विवरण के स्थान पर कॉलम 7 में अंकित विवरण को सही समझ कर पढ़ा जाए, जैसा कि मूल अधिसूचना एवं संलग्न तालिकाओं में दर्शाया गया है।
झालावाड़ जिला ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन संबंधी शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंचा/2024/877 दिनांक 28-12-2025 के माध्यम से जिला झालावाड़ की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन के संबंध में शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु
मूल अधिसूचना: विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंचा/2024/791 दिनांक 20.11.2025 एवं दिनांक 21.11.2025 को राजस्थान राजपत्र विशेषांक भाग 6(ग) में प्रकाशित हुई थी।
शुद्धि का कारण: पूर्व प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने की वजह से व प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात यह संशोधन किया गया है।
संशोधित विवरण: पिड़ावा मुख्यालय सुनेल पंचायत समिति के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों के विवरण में कॉलम संख्या 6 के स्थान पर कॉलम संख्या 7 में अंकित विवरण को सही समझा जाए।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है।
डूंगरपुर जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन के संबंध में शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवारा/2024/87/ दिनांक 28-12-2025 के माध्यम से जिला डूंगरपुर की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्सीमांकन और नवसृजन से संबंधित पूर्व में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने के कारण यह संशोधन शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
संदर्भित पूर्व अधिसूचनाएं: क्रमांक एफ.15(39)पंवारा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/826 दिनांक 20.11.2025 एवं संख्या 827 दिनांक 21.11.2025।
संशोधन का कारण: राजस्थान राजपत्र विशेषांक भाग 6(ग) में 21.11.2025 एवं 24.11.2025 को प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटियों और प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण के पश्चात यह संशोधन किया गया है।
विवरण: ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों हेतु जारी सूचियों में कॉलम संख्या 6 में अंकित विवरण के स्थान पर कॉलम संख्या 7 में अंकित विवरण को सही पढ़ा जाए।
विस्तृत जानकारी के लिए आधिकारिक प्रपत्र और संबंधित जिले की सूचियों का अवलोकन करें।
राजस्थान सरकार: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग - जिला अलवर के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन हेतु शुद्धि पत्र
अधिसूचना एवं शुद्धि पत्र विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/855 दिनांक 28.12.2025 के माध्यम से जिला अलवर की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्सीमांकन और नवसृजन से संबंधित पूर्व में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटि के कारण गलत प्रकाशन को संशोधित किया गया है।
मुख्य बिंदु
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
आदेश क्रमांक: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/855
दिनांक: 28/12/2025
जिला: अलवर
उद्देश्य: पूर्व में दिनांक 21.11.2025 एवं 26.11.2025 को राजस्थान राजपत्र में प्रकाशित विवरणों में लिपिकीय त्रुटियों का सुधार।
इस शुद्धि पत्र के तहत ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों (जैसे रामगढ़, कठूमर, रैणी, भोनखर, खेड़ली-सोंखर आदि) से संबंधित कॉलम के विवरणों को संशोधित किया गया है, जिसके तहत पूर्व प्रकाशित विवरण के स्थान पर सही विवरण को पढ़ा जाए।
राजस्थान सरकार - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग: जिला अजमेर शुद्धि पत्र
ग्राम पंचायत पुनर्गठन संशोधन शुद्धि पत्र - जिला अजमेर
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/854 दिनांक 28.12.2025 के संदर्भ में जिला अजमेर की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन से संबंधित पूर्व में प्रकाशित अधिसूचना में लिपकीय त्रुटि सुधार हेतु शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
अधिसूचना क्रमांक एवं दिनांक: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/854, दिनांक 28.12.2025
संबंधित जिला: अजमेर
संशोधन विवरण: पंचायत समिति सिलोरा के अंतर्गत पूर्व में प्रकाशित विवरण (कॉलम 6) में अंकित 'चुन्दड़ी' के स्थान पर संशोधित विवरण (कॉलम 7) में 'बड़गांव' पढ़ा जाए।
राजसमंद जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन और संशोधन आदेश
अधिसूचना विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.15(39)पंवरे/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/900 दिनांक 28-12-2025 के माध्यम से राजसमंद जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन से संबंधित पूर्व अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंवरे/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/842 दिनांक 24.11.2025 में लिपिकीय त्रुटियों को दुरुस्त करने हेतु संशोधन शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु
राजसमंद जिला: आदेश के अनुसार राजसमंद जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन/पुनर्रसीमांकन किया गया है।
कुंभलगढ़ और चारभुजा: विवरण के अनुसार कुंभलगढ़ और चारभुजा (मुख्यालय गढ़बोर) पंचायत समितियों में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन और आवंटन किया गया है।
कार्यान्वयन: पूर्व में विद्यमान पंचायत समितियां इस तिथि से कार्य करना बंद कर देंगी और नई अनुसूची के अनुसार पंचायत समितियों का कार्यकाल एवं अधिकारिता प्रारंभ होगी।
जोधपुर जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन आदेश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/899, दिनांक 28-12-2025 के माध्यम से जोधपुर जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन की जानकारी दी गई है।
राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत शक्तियों का प्रयोग करते हुए, जोधपुर जिले की निम्नलिखित पंचायत समितियों का पुनर्गठन/पुनर्रसीमांकन/नवसृजन किया गया है:
शेरगढ़
चाबा
सेखाला
चामू
बालेसर
आगोलाई (नवसृजित/पुनर्गठित)
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना की अनुसूची के स्तम्भ 4 में वर्णित पंचायत समितियां उसी नाम से जानी जाएंगी।
उक्त पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात, जिले की विद्यमान पंचायत समितियां जो अनुसूची के स्तम्भ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे अनुसूची के स्तम्भ 4 में वर्णित पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगाराम, शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है।
राजस्थान सरकार: पंचायत समिति गठन एवं पुनर्गठन संशोधन शुद्धि पत्र (जयपुर जिला)
अधिसूचना विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 28-12-2025 को एक शुद्धि पत्र अधिसूचना (क्रमांक: एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/897) जारी की गई है।
मुख्य उद्देश्य
यह अधिसूचना दिनांक 21.11.2025 की विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/829 और दिनांक 26.11.2025 को राजस्थान राजपत्र विशेष अंक में प्रकाशित अधिसूचनाओं में रही लिपिकीय त्रुटियों को दुरुस्त करने तथा प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण के पश्चात जारी की गई है।
मुख्य बिंदु
जिला: जयपुर
संशोधित क्षेत्र/नाम: शाहपुरा, विराट नगर और अमरसर पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन से संबंधित विवरण।
सूची विवरण: अधिसूचना की अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पुनर्गठित/नवसृजित पंचायत समितियों के नाम तथा स्तंभ 5 में उनमें सम्मिलित ग्राम पंचायतों के नाम स्पष्ट किए गए हैं।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ 4 में यथावर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात, उक्त जिले की विद्यमान वे पंचायत जो स्तंभ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी, जिससे नई पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
यह आदेश डॉ. जोगा राम, शासन सचिव, राजस्थान सरकार द्वारा राज्यपाल की आज्ञा से जारी किया गया है।
विकसित भारत—गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण): VB-G RAM G अधिनियम, 2025 का प्रकाशन
विस्तृत परिचय और उद्देश्य
भारत के राजपत्र (असाधारण) में प्रकाशित द विक्सित भारत—गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण): VB—G RAM G (विकसित भारत—जी राम जी) अधिनियम, 2025 (अधिनियम संख्या 36, 2025) ग्रामीण विकास के ढांचे को राष्ट्रीय विजन 'Viksit Bharat @2047' के अनुरूप स्थापित करने के लिए बनाया गया है। इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक ग्रामीण परिवार, जिसके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक श्रम करने के लिए स्वेच्छा से आगे आते हैं, को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में कम से कम एक सौ पच्चीस दिन (125 days) के मजदूरी रोजगार की कानूनी गारंटी प्रदान करना है।
प्रमुख विशेषताएं एवं बिंदु
रोजगार की गारंटी: हर ग्रामीण परिवार को वित्तीय वर्ष में कम से कम 125 दिनों का वैधानिक मजदूरी रोजगार।
कार्यान्वयन फ्रेमवर्क: इसे केंद्र प्रायोजित योजना (Centrally Sponsored Scheme) के रूप में लागू किया जाएगा।
फंड शेयरिंग पैटर्न: उत्तर पूर्वी राज्यों, हिमालयी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश (उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर) के लिए 90:10 तथा अन्य सभी राज्यों और विधायिका वाले केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 60:40 अनुपात होगा।
विकसित ग्राम पंचायत योजनाएं (VGPPs): कार्यों की शुरुआत और प्राथमिकता 'Viksit Gram Panchayat Plans' के माध्यम से होगी, जिसे पीएम गति शक्ति (PM Gati Shakti) और जीआईएस (GIS) उपकरणों के साथ एकीकृत किया जाएगा।
कार्यों के चार विषयगत डोमेन (Thematic Domains):(अ) जल सुरक्षा से जुड़े कार्य, (ब) कोर ग्रामीण बुनियादी ढांचा, (स) आजीविका से जुड़ा बुनियादी ढांचा, और (द) अत्यधिक मौसम की घटनाओं से निपटने के लिए विशेष कार्य।
ग्राम पंचायत की भूमिका: ग्राम पंचायतें परिवारों का पंजीकरण करेंगी, ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड (Gramin Rozgar Guarantee Card) जारी करेंगी और 'विकसित ग्राम पंचायत योजनाएं' तैयार करेंगी। कार्यक्रम अधिकारी (Programme Officer) यह सुनिश्चित करेंगे कि कम से कम 50 प्रतिशत लागत के कार्य ग्राम पंचायतों के माध्यम से क्रियान्वित हों।
ठेकेदारों पर रोक: अधिनियम के तहत किसी भी कार्य या घटक के निष्पादन के लिए किसी ठेकेदार को नियुक्त नहीं किया जाएगा। सभी कार्य सीधे क्रियान्वयन एजेंसियों द्वारा कराए जाएंगे।
बेरोजगारी भत्ता: आवेदन के 15 दिनों के भीतर रोजगार उपलब्ध न कराए जाने पर नियमानुसार दैनिक बेरोजगारी भत्ते का प्रावधान किया गया है।
पारदर्शिता और जवाबदेही: बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण, ई-मस्टर रोल, कार्यस्थल पर 'जनता बोर्ड' का प्रदर्शन, और ग्राम सभा द्वारा हर छह महीने में कम से कम एक बार अनिवार्य सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit)।
ग्रामीण सेवा शिविर के फॉलोअप शिविर 17 दिसंबर 2025 से 24 दिसंबर 2025 तक आयोजित करने बाबत
ग्रामीण सेवा शिविर के फॉलोअप शिविर आयोजन के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा वर्तमान सरकार के 02 वर्ष का कार्यकाल पूर्ण होने के उपलक्ष्य में ग्रामीण सेवा शिविर के फॉलोअप शिविर आयोजित किए जाने के संबंध में आदेश जारी किया गया है।
शिविर की मुख्य तिथियां एवं अवधि
शिविर अवधि: 17 दिसंबर, 2025 से 24 दिसंबर, 2025 तक (दिनांक 21.12.2025 को छोड़कर)।
शिविर आयोजन स्थल एवं व्यवस्थाएं
शिविरों का आयोजन पंचायत भवन, स्कूल भवन या उपलब्ध अन्य सार्वजनिक स्थानों पर किया जाएगा।
भू-अभिलेख निरीक्षक वृत्त मुख्यालय पर राज्य की प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर शिविर आयोजित किए जाएंगे।
आगंतुकों के लिए पेयजल की समुचित व्यवस्था, मेज, कुर्सियां, दरियां और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं ग्राम पंचायत द्वारा की जाएंगी।
वित्तीय प्रावधान एवं व्यय की अनुमति
षष्ठ राज्य वित्त आयोग के अंतर्गत पंचायती राज संस्थाओं को देय अनुदान राशि के उपयोग के संबंध में जारी दिशा-निर्देशों के बिंदु संख्या (अ) 3 XIII के अंतर्गत संबंधित ग्राम पंचायत द्वारा शिविर आयोजन हेतु राशि रु. 25,000/- (अधिकतम) का व्यय षष्ठ राज्य वित्त आयोग अंतर्गत उपलब्ध अनुदान राशि से करने की सहमति प्रदान की जाती है। यह सहमति वित्त विभाग की आई.डी. संख्या 332501835 दिनांक 05.12.2025 द्वारा अनुमोदित है।
इस कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान करने के निर्देश दिए गए हैं।
महात्मा गांधी नरेगार्न्तगत व्यक्तिगत लाभ के कार्य “अपना खेत अपना काम” दिशा-निर्देश 2011
महात्मा गांधी नरेगार्न्तगत व्यक्तिगत लाभ के कार्य “अपना खेत अपना काम” दिशा-निर्देश 2011
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (अनुभाग-3, नरेगार्), राजस्थान सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत व्यक्तिगत लाभ के कार्य “अपना खेत अपना काम” के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। यह दस्तावेज दिनांक 27.05.2011 (क्रमांक एफ. 40 (35) ग्रावि/नरेगार्/व्यक्तिगत लाभ के काम/2011) को जारी किया गया था।
योजना का मुख्य उद्देश्य
ग्रामीण क्षेत्र में बस रहे परिवारों की आजीविका के साधनों में स्थायी सुधार किए जाने के उद्देश्य से इस योजना को प्रारंभ किया गया है ताकि किसी भी पात्र परिवार की भूमि अविकसित न रहे और सिंचाई एवं भूमि संसाधनों का समग्र विकास कर उनकी आजीविका में सुधार किया जा सके।
प्रथम चरण में प्राथमिकता एवं पात्रता
गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वाले बी.पी.एल. परिवार (जिनका नाम बीपीएल सूची 2002 में दर्ज हो)।
अनुसूचित जाति के परिवार।
अनुसूचित जनजाति के परिवार।
इन वर्गों के कार्यों के पूर्ण होने के पश्चात् सीमांत कृषक एवं तद्पश्चात् लघु कृषक।
स्वीकृत कार्य और वित्तीय सीमा
इस योजना के अंतर्गत भूमि सुधार, डिग्गी, टांका, खेत तलाई, जल भराव क्षेत्रों में पानी निकास नाली, वृक्षारोपण, बागवानी, कृषि वानिकी, जल संरक्षण कार्य एवं लघु सिंचाई जैसे कार्य करवाए जा सकते हैं।
प्रत्येक जॉब कार्ड धारी परिवार को 1.50 लाख रुपए तक की सीमा में व्यक्तिगत लाभ का अनुमत कार्य स्वीकृत किया जा सकता है।
सामग्री मद में अधिकतम व्यय सीमा 60,000/- रुपए निर्धारित है।
महात्मा गांधी नरेगा योजना - मेट निर्देशिका (दिसम्बर 2010)
महात्मा गांधी नरेगा योजना - मेट निर्देशिका
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, शासन सचिवालय, जयपुर, राजस्थान द्वारा दिसम्बर 2010 में प्रकाशित मेट निर्देशिका महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत मेटों, ग्राम पंचायत और क्षेत्र के अधिकारियों के लिए एक अत्यंत उपयोगी मार्गदर्शिका है।
दस्तावेज़ का मुख्य उद्देश्य
इस निर्देशिका का मुख्य उद्देश्य मेटों को ई-मस्टर रोल, मस्टररोल ट्रैकिंग, मेट द्वारा प्रतिदिन किए जाने वाले कार्य की माप, समूहवार मस्टररोल प्रपत्र भरने, और समयबद्ध तरीके से श्रमिकों के भुगतान की प्रक्रिया को सरल भाषा में समझाना है।
मुख्य बिंदु और विशेषताएँ
श्रमजीवियों के 10 अधिकार: राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून, 2005 के तहत श्रमिकों को 100 दिन के रोजगार की गारंटी, जॉब कार्ड, 15 दिनों के भीतर काम या बेरोजगारी भत्ता, न्यूनतम दैनिक मजदूरी, और कार्यस्थल पर सुविधाएँ पाने का अधिकार।
मेट के कर्तव्य एवं दायित्व: कार्यस्थल पर श्रमिकों को काम का आवंटन, प्रतिदिन माप करना, मस्टर रोल भरना, श्रमिकों को दैनिक मजदूरी की जानकारी देना और कार्यस्थल पर छाया, पानी, प्राथमिक उपचार जैसी सुविधाएँ सुनिश्चित करना।
ई-मस्टर रोल और ट्रैकिंग: पारदर्शी कार्यप्रणाली के लिए ई-मस्टर रोल का उपयोग, मस्टर रोल के विभिन्न भागों (क, ख, ग, घ) को भरने की विधि और समयानुसार ट्रैकिंग।
दैनिक मजदूरी गणना और श्रमिक कार्ड: श्रमिकों को उनके द्वारा प्रतिदिन अर्जित मजदूरी की जानकारी देने के लिए श्रमिक कार्ड (दैनिक मजदूरी गणना प्रपत्र) का उपयोग।
विभिन्न विभागीय आदेश: मजदूरी में अंतर, विलंब से भुगतान पर मुआवजे के प्रावधान और अधिनियम के उल्लंघन पर शास्ति से संबंधित आदेशों का संकलन।
सरपंच हेतु महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी योजना निर्देशिका वर्ष 2010
सरपंच हेतु महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी योजना निर्देशिका - वर्ष 2010
यह निर्देशिका ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, शासन सचिवालय, जयपुर द्वारा प्रकाशित की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य ग्राम पंचायतों के सरपंचों को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी अधिनियम (मनरेगा), 2005 के सफल क्रियान्वयन, प्रशासनिक पारदर्शिता, सामाजिक अंकेक्षण और वित्तीय अनुशासन के संबंध में मार्गदर्शन प्रदान करना है।
मुख्य बिंदु और प्रावधान
रोजगार का अधिकार: प्रत्येक पंजीकृत ग्रामीण परिवार को वित्तीय वर्ष में 100 दिन का अकुशल शारीरिक श्रम का गारण्टीशुदा रोजगार प्रदान किया जाता है। आवेदन के 15 दिवस के भीतर कार्य देना अनिवार्य है, अन्यथा बेरोजगारी भत्ता देय होता है।
पारदर्शिता और उत्तरदायित्व: सभी सूचनाओं को स्वैच्छिक रूप से जारी करना (Proactive Disclosure), कार्यस्थल बोर्ड लगवाना, दीवारों पर लेखन करना, और समयबद्ध मजदूरी भुगतान बैंक या पोस्ट ऑफिस के खातों के माध्यम से सुनिश्चित करना।
हरित राजस्थान योजना: राज्य में हरियाली बढ़ाने और सूखे के बचाव हेतु सघन वृक्षारोपण एवं हरित सड़क कार्यक्रम का संचालन।
भारत निर्माण राजीव गांधी सेवा केन्द्र: प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर 10 लाख रुपये की लागत से सेवा केन्द्र का निर्माण, जिसमें सूचना, शिक्षा और संचार की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।
रिकॉर्ड संधारण: रोकड़ बही, माप पुस्तिका (MB), स्टॉक रजिस्टर, और परिसंपत्ति एवं संचयी व्यय रजिस्टर का सही तरीके से संधारण।
महात्मा गांधी रोजगार गारण्टी स्थायी समिति: योजना के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु ग्राम पंचायत स्तर पर 5 सदस्यीय स्थायी समिति का गठन (अध्यक्ष: सरपंच, सदस्य: वार्ड पंच, कनिष्ठ अभियंता/तकनीकी सहायक, ग्राम सेवक एवं पदेन सचिव, ग्राम रोजगार सहायक)।
MGNREGA Case Record/ Work File: Indicative Framework
MGNREGA Case Record / Work File
ग्रामीण विकास मंत्रालय (Ministry of Rural Development, Government of India) द्वारा मनरेगा (MGNREGS) के अंतर्गत प्रत्येक प्रोजेक्ट या कार्य के लिए केस रिकॉर्ड / वर्क फाइल (Case Record / Work File) तैयार करने हेतु एक इंडिकेटिव फ्रेमवर्क जारी किया गया है।
यह शारीरिक फाइल (physical file) प्रत्येक कार्य के क्रियान्वयन, निगरानी और ऑडिट के लिए महत्वपूर्ण है ताकि देश भर में एकरूपता लाई जा सके।
फाइल में शामिल किए जाने वाले मुख्य दस्तावेज और अनुभाग:
कवर पेज और चेकलिस्ट: कार्य का सारांश और दस्तावेजों की अनुक्रमित सूची (Annexure I & II)।
प्रशासनिक और तकनीकी दस्तावेज: वार्षिक कार्य योजना (Annual Action Plan), तकनीकी अनुमान (Technical Estimate & Design), तकनीकी स्वीकृति (Technical Sanction) और प्रशासनिक/वित्तीय स्वीकृति।
मांग और कार्य आवंटन: व्यक्तिगत या समूह आवेदन फॉर्म (Annexure III A & B) और कार्य आवंटन पत्र (Work Allocation Form - Annexure IV)।
क्रियान्वयन से जुड़े रिकॉर्ड: ई-मस्टर रोल (e-Muster Roll), माप पुस्तिका (Measurement Book / e-MB), सामग्री खरीद दस्तावेज, मजदूरी सूची (Wage List), और भुगतान एफटीओ (FTOs)।
अन्य जरूरी दस्तावेज: रॉयल्टी रसीदें, कार्य के तीनों चरणों (शुरुआत, दौरान, पूर्णता) की तस्वीरें और जियो-टैग की गई तस्वीरें, कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र (Work Completion Certificate - Annexure V), मस्टर रोल मूवमेंट स्लिप (Annexure VI) और सोशल ऑडिट रिपोर्ट।
यह फ्रेमवर्क ग्राम पंचायत स्तर पर दस्तावेजों के बेहतर रखरखाव और पारदर्शिता के लिए उपयोगी है।
मनरेगा के अंतर्गत नागरिक सूचना बोर्ड (CIB) और वॉल राइटिंग हेतु दिशा-निर्देश
महात्मा गांधी नरेगा (MGNREGA) - नागरिक सूचना बोर्ड और वॉल राइटिंग रूपरेखा
भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (Mahatma Gandhi National Rural Employment Act, 2005) के अंतर्गत कार्यस्थलों पर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए नागरिक सूचना बोर्ड (Citizen Information Boards - CIB) और वॉल राइटिंग का सुझाव फ्रेमवर्क जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
पार्श्वभूमि और उद्देश्य: अधिनियम की अनुसूची-1 के पैरा 25(a) और मास्टर सर्कुलर के अनुसार, जनता को बुनियादी जानकारी प्रदान करने के लिए 'जनता सूचना प्रणाली' का उपयोग किया जाता है।
नागरिक सूचना बोर्ड (CIB): प्रत्येक कार्यस्थल पर CIB लगाना अनिवार्य है। व्यक्तिगत कार्यों के लिए बोर्ड का आकार कम से कम 0.6 मीटर x 0.9 मीटर और सामुदायिक कार्यों के लिए कम से कम 0.9 मीटर x 1.2 मीटर होना चाहिए।
लागत सीमा: व्यक्तिगत कार्य के लिए CIB की लागत 3,000 रुपये और सामुदायिक कार्य के लिए 5,000 रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए।
सामग्री और लेआउट: बोर्ड पर कार्य का नाम, कार्य ID, प्राक्कलन राशि, प्रारंभ और समाप्ति तिथि, मजदूरी और सामग्री घटक, और लोकपाल/ओम्बुड्समैन का संपर्क विवरण क्षेत्रीय भाषा में प्रदर्शित होना चाहिए।
वॉल राइटिंग: पंचायत भवन, आंगनवाड़ी केंद्रों, और अन्य प्रमुख सार्वजनिक स्थानों की दीवारों पर 'मेरा गांव, मेरा मनरेगा' और अन्य जागरूकता संदेश पेंट किए जाने चाहिए, जिसकी न्यूनतम चौड़ाई 2 मीटर और ऊंचाई 1.2 मीटर सुझाई गई है।
क्रियान्वयन जिम्मेदारी: ग्राम रोजगार सहायक (GRS) और तकनीकी सहायक (Technical Assistant) कार्यस्थल पर बोर्ड की स्थापना और गुणवत्ता के लिए जिम्मेदार हैं।
महात्मा गांधी नरेगा (MGNREGS) अनुमेय कार्य सूची (Schedule 1 of MGNREG Act 2005)
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम 2005 - अनुमेय कार्य सूची
यह दस्तावेज़ ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी महात्मा गांधी नरेगा (MGNREGS) के अंतर्गत अनुमेय कार्यों की सूची (Schedule 1 of MGNREG Act 2005) को दर्शाता है। इस सूची में ग्राम पंचायत और पंचायती राज स्तर पर कराए जाने वाले विभिन्न प्रकार के कार्यों का विवरण दिया गया है।
प्रमुख कार्य श्रेणियां और विवरण:
व्यक्तिगत, सामुदायिक और समूह स्तर के कार्य: इसमें पीएमएवाई-जी (PMAY-G) आवास निर्माण, आंगनवाड़ी भवन, ग्राम पंचायत/पंचायत भवन, खाद्यान्न भंडारण, किचन शेड और भारत निर्माण सेवा केंद्र का निर्माण एवं मरम्मत शामिल है।
प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन (NRM) और जल संरक्षण: जल संभरण (SWC), सिंचाई (Irrigation), भू-जल पुनर्भरण (GWR), भूमि विकास (LR), और जल निकासी से संबंधित कार्य।
कृषि एवं संबद्ध कार्य (Agri & Allied): कृषि उत्पादन भंडारण, वर्मी कम्पोस्ट, नाडेप कम्पोस्ट, पशु शेड (गाय, बकरी, सुअर, मुर्गी), और अजोला खेती के लिए बुनियादी ढांचा।
वृक्षारोपण और वानिकी (PLNT): तटबंध वृक्षारोपण, सीमा रेखा वृक्षारोपण, और उद्यानिकी (Horticulture) से जुड़े कार्य।
ग्रामीण बुनियादी ढांचा: ग्रामीण हाट, खेल का मैदान, चक्रवात आश्रय (Cyclone shelter), और सड़क व जल निकासी संरचनाएं।
यह सूची पंचायती राज संस्थाओं और ग्राम पंचायतों को महात्मा गांधी नरेगा योजना के तहत सही कार्यों के चयन और क्रियान्वयन में सहायता प्रदान करती है।
महात्मा गांधी नरेगा अंतर्गत ग्राम पंचायत स्तर पर संधारित किए जाने वाले 7 रजिस्टर
महात्मा गांधी नरेगा (MGNREGA) के अंतर्गत ग्राम पंचायत स्तर पर 7 अनिवार्य रजिस्टरों का संधारण
ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा सुशासन पहल के तहत महात्मा गांधी नरेगा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और रिकॉर्ड संधारण को सरल बनाने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर 7 अनिवार्य रजिस्टरों की रूपरेखा जारी की गई है। यह पुस्तिका ग्राम रोजगार सहायकों (GRS) और अन्य क्षेत्रीय पदाधिकारियों के लिए रिकॉर्ड संधारण को सुगम बनाती है।
ग्राम पंचायत स्तर पर संधारित किए जाने वाले 7 रजिस्टर:
रजिस्टर – I: जॉब कार्ड आवेदन, जॉब कार्ड पंजीकरण, जॉब कार्ड निर्गत और परिवार रोजगार संबंधी रिपोर्ट
रजिस्टर – II: ग्राम सभा की बैठक, कार्यवृत्त, संकल्प, कार्यों की प्राथमिकता प्राप्त सूची और विशेष सामाजिक लेखा-परीक्षा ग्राम सभा की बैठक एवं कार्यवृत्त की गई कार्रवाई
रजिस्टर – III: काम की मांग, कार्यों का आवंटन तथा मजदूरी का भुगतान रजिस्टर
रजिस्टर – IV: कार्य रजिस्टर (भाग क और भाग ख)
रजिस्टर – V: स्थायी परिसंपत्ति रजिस्टर (मनरेगा कार्य)
रजिस्टर – VI: शिकायत रजिस्टर
रजिस्टर – VII: सामग्री रजिस्टर
इन सभी रजिस्टरों को एनरेगासॉफ्ट (NREGASoft MIS) के माध्यम से प्राप्त करके और निर्धारित दिशा-निर्देशों व त माही/वार्षिक आधार पर भौतिक रजिस्टरों में संधारित किया जाना है।
मनरेगा योजनान्तर्गत व्यक्तिगत लाभ के कार्य निजी कृषि भूमि में टांका निर्माण मय पक्का एवं कच्चा पायथन कार्य की अनुमति के संबंध में
राजस्थान सरकार - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग
पत्रांक: एफ 55(1)ग्रावि/नरेग/भारत सरकार/एनएलएम/2023-24/05104
विषय: महात्मा गांधी नरेग योजनान्तर्गत व्यक्तिगत लाभ के कार्य निजी कृषि भूमि में टांका निर्माण मय पक्का एवं कच्चा पायथन कार्य का अनुमत करने के सम्बन्ध में।
ग्रामीण विकास विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा जारी इस पत्र के अनुसार, भारत सरकार के पत्र के क्रम में महात्मा गांधी नरेग योजनान्तर्गत टांका निर्माण कार्यों का निष्पादन "Farm Pond for Individuals" की अनुज्ञेय श्रेणी के अन्तर्गत किये जाने की अनुमति प्रदान की गई है।
मुख्य बिंदु:
महात्मा गांधी नरेगा अधिनियम के प्रावधानों, दिशा-निर्देशों एवं निर्धारित उचित प्रक्रियाओं की सख्ती से पालना की जानी है।
टांका निर्माण कार्य की योजना, कार्यान्वयन एवं निगरानी प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए।
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जिला उत्थान योजना - दिशा निर्देश 2025
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जिला उत्थान योजना: दिशा निर्देश 2025
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (गुण एवं नियंत्रण) द्वारा डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जिला उत्थान योजना - दिशा निर्देश 2025 जारी किए गए हैं। यह योजना राज्य सरकार की बजट घोषणा 2024-25 के बिन्दु संख्या 20 के अंतर्गत प्रारंभ की जा रही है जिसका मुख्य उद्देश्य जिलों के आर्थिक विकास और समावेशी सामाजिक विकास के दोहरे लक्ष्य को प्राप्त करना है।
योजना की मुख्य विशेषताएँ और प्रावधान:
नोडल विभाग: ग्रामीण विकास विभाग इस योजना का नोडल विभाग रहेगा जो अन्य विभागों से समन्वय करते हुए कार्यों की स्वीकृति प्रदान करेगा।
योजना क्षेत्र: यह योजना राज्य के सभी जिलों में ग्रामीण एवं शहरी दोनों क्षेत्रों में लागू की जाएगी।
वित्तीय प्रावधान: इस योजना का कुल बजट प्रावधान 500 करोड़ रुपये है, जो पूरी तरह राज्य वित्त पोषित योजना है।
मिशन टीम: जिलों में अति-स्थानीय नियोजन (hyper-local planning) और सेवा वितरण में सहयोग के लिए विशेष विशेषज्ञों की 'मिशन टीम' का गठन किया जाएगा।
शासन संरचना: योजना के सुचारू संचालन के लिए राज्य स्तर पर अतिरिक्त मुख्य सचिव/प्रमुख शासन सचिव (ग्रामीण विकास) की अध्यक्षता में 'राज्य स्तरीय समिति' तथा जिला स्तर पर जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में 'जिला स्तरीय समिति' का गठन किया गया है।
अनुमत कार्य और क्षेत्र:
योजना के अंतर्गत कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र, पर्यटन क्षेत्र, एमएसएमई क्षेत्र, खेल क्षेत्र और अन्य ग्रामीण व शहरी बुनियादी ढाँचे से जुड़े कार्य किए जा सकेंगे। इसमें लोक सहभागिता (जनसहयोग) को भी प्राथमिकता दी गई है।
उदयपुर जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्सีमांकन और नवसृजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/848 (दिनांक नवंबर 21, 2025) के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए उदयपुर जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्सีमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिनीम और प्रावधान: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98, धारा-9, 10 एवं 101 के अंतर्गत जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार प्रस्तावों और आपत्तियों पर सुनवाई के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से यह पुनर्गठन किया गया है।
अधिकारिता: अनुसूची के स्तंभ 4 में यथानामित पंचायत समितियां स्तंभ 5 में वर्णित स्थानीय क्षेत्र व ग्राम पंचायतों पर अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात्, उस जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो अनुसूची के स्तंभ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी, जिससे नई पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
यह अधिसूचना राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी की गई है।
झुंझुनूं जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन और पुनर्रचना - राजस्थान राजपत्र अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/832, दिनांक नवम्बर 21, 2025 के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए झुंझुनूं जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमार्कीकरण और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र असाधारण में नवम्बर 24, 2025 को प्रकाशित की गई है।
झुंझुनूं जिले के अंतर्गत आने वाली विभिन्न पंचायत समितियों और उनमें सम्मिलित ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन/पुनर्रसीमार्कीकरण किया गया है।
अधिसूचना के अनुसार, चुनी गई नई/पुनर्गठित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात, पुरानी पंचायत समितियां अस्तित्व में नहीं रहेंगी और उनका कार्य समाप्त हो जाएगा, जिसके बाद नई पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से शासन सचिव डॉ. जोगा राम द्वारा जारी किया गया है।
जालोर जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्सীमांकन और नवसृजन - अधिसूचना दिनांक 21 नवंबर 2025
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा राजस्थान राजपत्र में जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/831 दिनांक 21 नवंबर 2025 के अंतर्गत जालोर जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्सীमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम का संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 की प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए धारा-9, 10 एवं 101 में वर्णित शक्तियों के तहत यह कार्रवाई की गई है।
जिला कलेक्टर की भूमिका: जिला कलेक्टरों द्वारा प्रस्ताव तैयार करने, सार्वजनिक अवलोकन के लिए प्रसारित करने, एक माह की अवधि में आपत्तियों पर सुनवाई करने तथा राज्य सरकार से अनुमोदन प्राप्त करने के पश्चात यह पुनर्गठन लागू किया गया है।
प्रभाव: अनुसूची में वर्णित पंचायत समितियों का पुनर्गठन/पुनर्सীमांकन/नवसृजन किया गया है तथा संबंधित पंचायत समितियों का कार्यकाल अनुसूची के अनुसार निर्धारित होगा।
यह अधिसूचना राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी की गई है।
जैसलमेर जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन - अधिसूचना 2025
जैसलमेर जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन एवं नवसृजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/830 दिनांक नवंबर 21, 2025 के अनुसार, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए जैसलमेर जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-9, 10, 101 और 98 के अंतर्गत यह कार्रवाई की गई है।
जिला कलेक्टर की भूमिका: जिला कलेक्टरों द्वारा प्रस्ताव तैयार कर, आपत्तियां आमंत्रित करने तथा सुनवाई के पश्चात राज्य सरकार से अनुमोदन प्राप्त किया गया है।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पंचायत समितियों के चुनावों के पश्चात उस जिले की विद्यमान पंचायत समितियां (जो स्तंभ 2 में वर्णित हैं) उस तारीख से अस्तित्व में नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी, जिससे नई पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
जारीकर्ता: राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगाराम, शासन सचिव, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
हनुमानगढ़ जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन एवं नवसृजन अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए हनुमानगढ़ जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन एवं नवसृजन के संबंध में अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र (असाधारण) दिनांक 24 नवंबर 2025 में प्रकाशित की गई है।
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना क्रमांक एवं दिनांक: संख्या एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/828-, दिनांक 21 नवंबर 2025।
जारीकर्ता: डॉ. जोगा राम, शासन सचिव, राज्यपाल की आज्ञा से।
कार्यान्वयन: जिला कलेक्टरों द्वारा प्रस्ताव तैयार करने, आपत्तियां आमंत्रित करने और सुनवाई की प्रक्रिया पूरी करने तथा राज्य सरकार के अनुमोदन के पश्चात हनुमानगढ़ जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
प्रभाव: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पुनर्गठित/नवसृजित पंचायत समितियों का गठन किया गया है तथा संबंधित ग्राम पंचायतों का निर्धारण किया गया है।
श्रीगंगानगर जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन
श्रीगंगानगर जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए श्रीगंगानगर जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना क्रमांक: एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/827-, दिनांक: जयपुर, नवम्बर 21, 2025।
प्रभावित क्षेत्र: श्रीगंगानगर जिले के अंतर्गत आने वाली पंचायत समितियां जैसे सादुलशहर, अनूपगढ़, घड़साना, सूरतगढ़ और नई सृजित पंचायत समितियां।
कार्यकाल संबंधी निर्देश: पुनर्गठित/नवसृजित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात् उस जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो अनुसूची में निर्दिष्ट हैं, उस तारीख से ही विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
दौसा जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन और पुनर्सिमांकन - अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज (पंचायती राज विभाग) द्वारा राजस्थान राजपत्र (असाधारण) में दौसा जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्सिमांकन और नवसर्जन से संबंधित महत्वपूर्ण अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए जारी की गई है।
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना क्रमांक: संख्या एफ.15 (39) पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/822 दिनांक नवंबर 21, 2025 (राजस्थान राजपत्र दिनांक 24 नवंबर, 2025)।
अधिकार क्षेत्र: जिला कलेक्टर द्वारा तैयार किए गए प्रस्तावों, आपत्तियों पर सुनवाई और राज्य सरकार के अनुमोदन के पश्चात दौसा जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन किया गया है।
नयी व्यवस्था: अनुसूची के स्तूप 4 में वर्णित पुनर्गठित/नवसृजित पंचायत समितियां स्तूप 5 में दर्शित ग्राम पंचायतों पर अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तूप 4 में वर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात उस जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो स्तूप 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी, जिससे नई पंचायत समितियों का कार्यकाल आरंभ हो सके।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है।
बीकानेर जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन
बीकानेर जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन और नवसृजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए बीकानेर जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन के संबंध में अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना दिनांक 21 नवंबर 2025 को जारी की गई है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम व संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा-98, 9, 10 एवं 101 के अंतर्गत जिला कलेक्टर द्वारा तैयार प्रस्तावों और आपत्तियों पर सुनवाई के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से यह पुनर्गठन किया गया है।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में वर्णित पुनर्गठित/नवसृजित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात् उस जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो स्तंभ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी। इसके पश्चात नई पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
भरतपुर जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन और पुनर्रसीमांकरण अधिसूचना
अधिसूचना विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए भरतपुर जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकरण और नवसृजन से संबंधित अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र (अतिरिक्त) में 24 नवंबर 2025 को प्रकाशित हुई है, जिसके आदेश संख्या एफ.15(39)पंव/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/816 दिनांक 21 नवंबर 2025 हैं।
मुख्य बिंदु
अधिनियम का संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98, 9, 10 एवं 101 के अंतर्गत जिला कलेक्टर के माध्यम से प्रस्ताव तैयार कर आपत्तियां आमंत्रित करने के पश्चात यह कार्रवाई की गई है।
पंचायत समितियों का पुनर्गठन: भरतपुर जिले की पंचायत समितियों (जैसे रूपवास, उच्चैन और सेवर) का पुनर्गठन/पुनर्रसीमांकरण किया गया है।
कार्यकाल और अधिकारिता: अनुसूची में वर्णित नई पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात उस जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो अनुसूची में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी तथा नई पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
बालोतरा जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पांरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/811, दिनांक नवम्बर 21, 2025 के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए बालोतरा जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
संबद्ध अधिनियम: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-9, 10, 98 एवं 101।
जिला कलेक्टर की भूमिका: जिला कलेक्टरों द्वारा प्रस्ताव तैयार कर सार्वजनिक अवलोकन हेतु प्रसारित करने, एक माह की अवधि में आपत्तियां आमंत्रित करने तथा उन पर सुनवाई करने के पश्चात राज्य सरकार से अनुमोदन प्राप्त किया गया है।
कार्यकाल से संबंधित प्रावधान: अनुसूची के स्तम्भ संख्या 4 में यथावर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात, उस जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो स्तम्भ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से ही विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ हो सके।
डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा राज्यपाल की आज्ञा से यह अधिसूचना जारी की गई है।
बाड़मेर जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए बाड़मेर जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन से संबंधित अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना दिनांक 21 नवम्बर 2025 को जारी की गई है।
मुख्य बातें एवं विवरण
अधिनियम संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98, 9, 10 एवं 101 के अंतर्गत।
जिला: बाड़मेर
कार्यान्वयन प्रक्रिया: जिला कलेक्टरों द्वारा पूर्व में तैयार किए गए प्रस्तावों, आपत्तियों पर सुनवाई और आपत्तियों के आमंत्रण के उपरांत राज्य सरकार से अनुमोदन प्राप्त कर यह पुनर्गठन किया गया है।
निर्धारित व्यवस्था: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात्, स्तंभ 2 में उल्लेखित वर्तमान पंचायत समितियाँ इस तिथि से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी, जिससे नई पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित आधिकारिक राजपत्र एवं ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के निर्देशों का अवलोकन करें।
सवाई माधोपुर जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन और पुनर्सिमांकन - अधिसूचना 2025
सवाई माधोपुर जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/844 (दिनांक नवंबर 21, 2025) के तहत राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा-9, 10 एवं 101 के प्रावधानों के अंतर्गत सवाई माधोपुर जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन/पुनर्सिमांकन/नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम का संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धाराओं के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए।
संबंधित जिला: सवाई माधोपुर जिला।
अधिसूचना तिथि: नवंबर 21, 2025।
जारीकर्ता: राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव।
अधिसूचना के अनुसार, अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में वर्णित पुनर्गठित/नवसृजित पंचायत समितियों का गठन किया गया है तथा अनुसूची के स्तंभ संख्या 2 में वर्णित वर्तमान पंचायत समितियां नियमानुसार उस तिथि से विद्यमान नहीं रहेंगी जैसा कि अनुसूची और अधिनियम के प्रावधानों में निर्धारित किया गया है।
करौली जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन आदेश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/834, दिनांक 21-11-2025 के तहत, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 की शक्तियों का प्रयोग करते हुए करौली जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
संबद्ध विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
दिनांक: 21 नवम्बर 2025।
आदेश विवरण: जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार प्रस्तावों एवं आपत्तियों पर सुनवाई और राज्य सरकार के अनुमोदन के पश्चात करौली जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन किया गया है।
कार्यकाल संबंधित निर्देश: अनुसूची के स्तम्भ संख्या 4 में यथावर्णित पंचायत समितियों के चुनावों के पश्चात, उक्त जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो अनुसूची के स्तम्भ संख्या 2 में वर्णित हैं, इस तारीख से ही विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे अनुसूची के स्तम्भ 4 में वर्णित पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारम्भ होगा।
हनुमानगढ़ ज़िले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन - अधिसूचना दिनांक 21-11-2025
राजस्थान सरकार ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, राज्य सरकार द्वारा हनुमानगढ़ ज़िले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन किया गया है। यह आदेश दिनांक 21-11-2025 को जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना क्रमांक: एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/828
दिनांक: 21-11-2025
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार
विवरण: ज़िला कलेक्टर हनुमानगढ़ द्वारा तैयार किए गए प्रस्तावों एवं आपत्तियों पर विचार करने के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से हनुमानगढ़ ज़िले की विभिन्न पंचायत समितियों का पुनर्गठन/पुनर्रसीमांकन/नवसृजन किया गया है।
कार्यकाल संबंधी निर्देश: अनुसूची के स्तम्भ 4 में यथावर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात उक्त ज़िले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो अनुसूची के स्तम्भ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से ही विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे अनुसूची के स्तम्भ 4 में वर्णित पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारम्भ होगा।
जयपुर जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन अधिसूचना
अधिसूचना विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जयपुर जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन के संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना आदेश क्रमांक एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/829, दिनांक 21-11-2025 के तहत जारी की गई है।
मुख्य बिंदु
अधिनियम के प्रावधान: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-9, 10 एवं 101 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्य सरकार द्वारा यह पुनर्गठन और पुनर्रसीमांकन किया गया है।
जिला कलेक्टर की कार्रवाई: संबंधित जिला कलेक्टर द्वारा प्रस्ताव तैयार कर सार्वजनिक अवलोकनार्थ एक माह की अवधि में आपत्तियां आमंत्रित करने तथा सुनवाई करने की निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के पश्चात राज्य सरकार से अनुमोदन प्राप्त किया गया है।
नया कार्यभार और नाम: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पुनर्गठित एवं नवसृजित पंचायत समितियां उसी नाम से जानी जाएंगी और निर्धारित स्थानीय क्षेत्र पर अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
चुनाव और कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात, उक्त जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो अनुसूची के स्तंभ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और उनका कार्यभार समाप्त माना जाएगा, जिससे नई पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
डीडवाना-कुचामन जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन एवं नवसृजन अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंश/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/825 दिनांक 21-11-2025 के माध्यम से डीडवाना-कुचामन जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन एवं नवसृजन के संबंध में आधिकारिक आदेश जारी किए गए हैं।
मुख्य विवरण
राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए, राज्य सरकार द्वारा डीडवाना-कुचामन जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन एवं नवसृजन किया गया है।
महत्वपूर्ण बिंदु
अधिनियम संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98, 9, 10 एवं 101 के अंतर्गत प्राप्त शक्तियां।
संबंधित जिला: डीडवाना-कुचामन।
कार्यकाल और चुनाव: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात उक्त जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो अनुसूची के स्तंभ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
फलोदी जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन और नवसृजन - अधिसूचना दिनांक 21-11-2025
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम सं. 13) की धारा-9, 10 एवं 101 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए फलोदी जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन के संबंध में अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना दिनांक 21-11-2025 (क्रमांक: एफ.15(39)पंवरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/840) को जारी की गई है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम और प्रावधान: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-9, 10 और 101 के अंतर्गत शक्तियों का प्रयोग।
जिला कलेक्टर की कार्यवाही: जिला कलेक्टर द्वारा तैयार किए गए प्रस्तावों, सार्वजनिक अवलोकन और एक माह की अवधि में प्राप्त आपत्तियों पर सुनवाई के पश्चात राज्य सरकार से अनुमोदन प्राप्त किया गया है।
कार्यकाल प्रारंभ: अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में यथावर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात, उक्त जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो अनुसूची के स्तंभ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से ही विद्यमान नहीं रहेंगी और अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में वर्णित पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
विस्तृत जानकारी के लिए संलग्न दस्तावेज या संबंधित विभाग के आदेश का अवलोकन करें।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग - सलूंबर जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन एवं नवसृजन अधिसूचना
अधिसूचना विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/803 दिनांक 20 नवंबर 2025 के अंतर्गत, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए सलूंबर जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन एवं नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु
अधिनियम व निर्देश: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-9, 10 एवं 101 में वर्णित शक्तियों तथा विभागीय अधिसूचना दिनांक 10.01.2025 के तहत जिला कलेक्टर को प्रस्ताव तैयार करने, सार्वजनिक अवलोकन के लिए प्रसारित करने, आपत्तियां आमंत्रित करने और सुनवाई हेतु अधिकृत किया गया था।
राज्य सरकार का अनुमोदन: जिला कलेक्टरों द्वारा कार्यवाही किए जाने, प्रस्तावों एवं अभिशंषाओं का परीक्षण करने के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से सलूंबर जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन/पुनरसीमांकन/नवसृजन किया गया है।
शामिल पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के तहत पंचायत समिति झल्लारा, जयसमंद, लसाड़िया, सलूंबर, सराडा और सेमारी के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों एवं उनमें सम्मिलित राजस्व ग्रामों की सूची में परिवर्तन किया गया है।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, उस जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो स्तंभ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
भरतपुर जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन अधिसूचना
भरतपुर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन एवं नवसृजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए भरतपुर जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है। यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र (अतिरिक्त) में दिनांक 21 नवंबर, 2025 को प्रकाशित की गई है।
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना संख्या: संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/775 (दिनांक नवंबर 20, 2025)।
संबद्ध जिला: भरतपुर, राजस्थान।
शामिल पंचायत समितियां: बयाना, भुसावर, नदबई, रूपबास, सेवर, उच्चैन और वैर।
कार्यकाल और प्रभाव: अनुसूची के स्तम्भ संख्या 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात उक्त जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो अनुसूची के स्तम्भ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से ही विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
बूंदी जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
बूंदी जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन एवं पुनसीमांकन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनगर्ठन/विधि/पंरा/2024/778:- (दिनांक 20 नवम्बर 2025) के अंतर्गत राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए बूंदी जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम व संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-9, 10 एवं 101 में वर्णित शक्तियों तथा पूर्व अधिसूचना दिनांक 10.01.2025 के अनुपालन में जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार प्रस्तावों और अभिशंसाओं के परीक्षण के पश्चात यह राज्य सरकार द्वारा अनुमोदित किया गया है।
प्रभावित पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के तहत बूंदी जिले की पंचायत समिति हिंडोली, नैनवां, तालेडा और बूंदी के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन व नवसृजन किया गया है।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, उस जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो स्तंभ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
अधिक जानकारी एवं विस्तृत राजस्व ग्रामों की सूची के लिए आधिकारिक राजस्थान राजपत्र (असाधारण) दिनांक 21 नवंबर 2025 का अवलोकन करें।
भीलवाड़ा जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
भीलवाड़ा जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/776 (दिनांक 20 नवम्बर 2025) के अंतर्गत राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए भीलवाड़ा जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
प्रमुख बिंदु:
अधिकार एवं प्रक्रिया: विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/02 दिनांक 10.01.2025 के द्वारा जिला कलेक्टर को ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनसीमांकन हेतु प्रस्ताव तैयार करने, सार्वजनिक अवलोकन के लिए प्रसारित करने, एक माह की अवधि में आपत्तियां आमंत्रित करने तथा सुनवाई करने हेतु अधिकृत किया गया था।
प्रस्तावों का अनुमोदन: जिला कलेक्टरों द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों और अभिशंसाओं का परीक्षण करने के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से भीलवाड़ा जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन/पुनसीमांकन/नवसृजन किया गया है।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तम्भ संख्या 4 में यथावर्णित नई ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात उस जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो स्तम्भ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
विस्तृत विवरण और पंचायत समिति वार पुनर्गठित/नवसृजित ग्राम पंचायतों तथा उनमें सम्मिलित राजस्व ग्रामों की सूचियों के लिए संलग्न राजस्थान राजपत्र (एक्स्ट्राऑर्डिनरी) का अवलोकन करें।
झुंझुनूं जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन एवं नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
झुंझुनूं जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन एवं नवसृजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/792 (दिनांक नवंबर 20, 2025) जारी की गई है। इसके माध्यम से झुंझुनूं जिले में विभिन्न ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन एवं नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु एवं प्रक्रिया
संवैधानिक प्रावधान: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा-9, 10 एवं 101 में वर्णित शक्तियों तथा विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/02 (दिनांक 10.01.2025) के तहत जिला कलेक्टर को प्रस्ताव तैयार करने, सार्वजनिक अवलोकन के लिए प्रसारित करने और एक माह की अवधि में आपत्तियां आमंत्रित कर सुनवाई करने हेतु अधिकृत किया गया था।
राज्य सरकार का अनुमोदन: जिला कलेक्टर्स द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों एवं अभिशंषाओं का परीक्षण करने के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से झुंझुनूं जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन/पुनसीमांकन/नवसृजन किया गया है।
अधिकारिता: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पुनर्गठित/नवसृजित ग्राम पंचायतें स्तंभ 5 में दर्शाए गए स्थानीय क्षेत्रों एवं राजस्व ग्रामों पर अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
विद्यमान पंचायतों का कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित नई ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात स्तंभ 2 में उल्लेखित वर्तमान ग्राम पंचायतें उस तारीख से अस्तित्व में नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी, जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
शामिल पंचायत समितियां
इस अधिसूचना के अंतर्गत झुंझुनूं जिले की निम्नलिखित पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों का पुनर्गठन किया गया है:
बुहाना
चिड़ावा
खेतडी
मण्डावा
नवलगढ़
पिलानी
सिंघाना
सूरजगढ़
उदयपुरवाटी
अलसीसर
झुंझुनूं
यह अधिसूचना राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी की गई है।
राजस्थान पंचायती राज (अंतरित क्रियाकलाप) (संशोधन) नियम, 2025 जारी
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धाराओं के तहत राजस्थान पंचायती राज (अंतरित क्रियाकलाप) नियम, 2011 में संशोधन हेतु अधिसूचना जारी की गई है।
दिनांक: अक्टूबर 29, 2025 (राजस्थान राजपत्र असाधारण में 31 अक्टूबर 2025 को प्रकाशित)
नियम का नाम: राजस्थान पंचायती राज (अंतरित क्रियाकलाप) (संशोधन) नियम, 2025
प्रभावी तिथि: ये नियम तुरंत प्रवृत्त होंगे।
नियम 8 में संशोधन: राजस्थान पंचायती राज (अंतरित क्रियाकलाप) नियम, 2011 के नियम 8 के विद्यमान खंड (iii) के स्थान पर "एक जिले से दूसरे जिले में संबंधित विभाग" प्रतिस्थापित किया गया है।
यह आदेश राज्यपाल के आदेश से भारत भूषण गोयल, शासन उप सचिव द्वारा जारी किया गया है।
ग्राम पंचायतों में स्थित भारत निर्माण सेवा केंद्रों एवं ग्राम पंचायत भवनों की मरम्मत और रंग-रोगन के संबंध में दिशा-निर्देश
ग्राम पंचायत भवनों एवं भारत निर्माण सेवा केंद्रों की मरम्मत और एकरूप रंग-रोगन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ 4(1111) परावि/पीसी/विविध/22-00409 (दिनांक 19.09.2025) के अनुसार, माननीय मुख्यमंत्री महोदय की समीक्षा बैठक के निर्देशों के पालन में सभी ग्राम पंचायतों एवं भारत निर्माण सेवा केंद्रों में मरम्मत और एकरूप रंग-रोगन के कार्य करवाने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य निर्देश एवं समय-सीमा
मरम्मत और रंग-रोगन (वित्तीय स्वीकृति सहित): जिन भवनों में मरम्मत की आवश्यकता है, वहां राज्य वित्त आयोग एवं पंद्रहवां वित्त आयोग के अंतर्गत तुरंत स्वीकृति जारी करते हुए 15.11.2025 तक कार्य पूर्ण किया जाए।
केवल रंग-रोगन: जिन भवनों में केवल रंग-रोगन की आवश्यकता है, वहां तत्काल स्वीकृति जारी करते हुए 31.10.2025 तक कार्य पूर्ण किया जाए।
रंग एवं पेंट के मानक: भवन की बाहरी दीवारों पर अच्छी गुणवत्ता का Pink शेड का Paint (PU + Silicon Modified 100% Acrylic Exterior Emulsion), आंतरिक दीवारों पर Cream/Off White एवं छत (सीलिंग) पर White शेड का Paint (PU Reinforced Luxury Acrylic Emulsion) किया जाए।
प्रगति की मॉनिटरिंग: उक्त कार्यों की प्रगति हेतु अलग से Google Spreadsheet/Format का लिंक भेजा जा रहा है, जिस पर नियमित प्रगति दर्ज की जाए।
ग्रामीण सेवा शिविर 18 सितम्बर, 2025 से आयोजित किये जाने बाबत
ग्रामीण सेवा शिविरों का आयोजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुसार राज्य की प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर "ग्रामीण सेवा शिविर" का आयोजन 18 सितम्बर, 2025 से किया जाना है।
मुख्य निर्देश एवं व्यवस्थाएं
अभियान की अवधि तब तक होगी जब तक कि प्रत्येक पंचायत समिति की प्रत्येक ग्राम पंचायत में शिविर का आयोजन न हो जावे।
शिविर स्थल पंचायत मुख्यालय पर पंचायत भवन, स्कूल भवन या उपलब्ध अन्य सार्वजनिक स्थानों पर निर्धारित किए जाएंगे।
आगंतुकों के लिए पेयजल की समुचित व्यवस्था, मेज, कुर्सियां, दरियां और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं ग्राम पंचायत द्वारा की जाएंगी।
वित्तीय प्रावधान एवं व्यय
शिविर आयोजन एवं संचालन हेतु षष्ठ राज्य वित्त आयोग अंतर्गत पंचायती राज संस्थाओं को देय अनुदान राशि के उपयोग हेतु विभागीय पत्रांक 347 राजकाज क्रमांक 13247621 दिनांक 28.01.2025 के दिशा-निर्देशों के बिंदु सं. (अ)(3)(XIII) के अंतर्गत ग्राम पंचायत को स्वीकृत अनुदान राशि में से अधिकतम राशि रु. 25,000/- प्रति ग्राम पंचायत व्यय/उपयोग करने की सहमति प्रदान की जाती है।
यह सहमति वित्त विभाग की आई.डी. संख्या 332501444 दिनांक 16.09.2025 द्वारा अनुमोदित है। इस कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रधानमन्त्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) नयाँ आवास आवेदन फॉर्म और आवश्यक दस्तावेज चेकलिस्ट
प्रधानमन्त्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) आवेदन फॉर्म और दिशानिर्देश
यह दस्तावेज़ ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार और पंचायती राज विभाग के अंतर्गत प्रधानमन्त्री आवास योजना-ग्रामीण के नए आवास निर्माण हेतु आवेदन पत्र, स्वीकृति प्रक्रिया, शपथ-पत्र, भूमि प्रमाण-पत्र, सहमति-पत्र और चेकलिस्ट का आधिकारिक प्रारूप प्रस्तुत करता है।
मुख्य उद्देश्य एवं प्रक्रिया
प्रपत्र-24(1/1): यह नया आवास प्राप्त करने के लिए ग्रामीण विकास अधिकारी, टैग अधिकारी या ई-मित्र के माध्यम से भरा जाने वाला आवेदन पत्र है।
योग्यता और पात्रता: आवेदक का नाम PWL-2021 की वरीयता सूची में होना चाहिए। आवेदक के पास पूर्व में पक्का मकान नहीं होना चाहिए और वह निर्धारित अपवर्जन मानदंडों (जैसे वाहन, सरकारी नौकरी, आयकरदाता, भूमि सीमा आदि) के दायरे में नहीं आना चाहिए।
अनुदान और निर्माण शर्तें: आवास निर्माण हेतु मिलने वाली सहायता राशि से न्यूनतम 25 वर्गमीटर प्लिथ क्षेत्र का नया आवास अधिकतम 12 माह की अवधि में पूरा करना अनिवार्य है।
स्वीकृति प्रक्रिया: ग्राम विकास अधिकारी या टैग अधिकारी द्वारा पात्रता की जाँच, जियो टैग फोटो, Aawas Soft पर रजिस्ट्रेशन और पंचायत समिति स्तर पर प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति दी जाती है।
आवश्यक दस्तावेजों की चेकलिस्ट
वरीयता अनुसार भरा हुआ पूर्ण रजिस्ट्रेशन फॉर्म (प्रपत्र-1) और प्रमाणित फोटो
जमीन से संबंधित दस्तावेज की प्रमाणित प्रति या भूमि संबंधित प्रमाण-पत्र / सहमति-पत्र
ग्राम पंचायत की आबादी भूमि में रहवासी होने का प्रमाण-पत्र (सरपंच/ग्राम विकास अधिकारी द्वारा)
जॉब कार्ड, जन आधार कार्ड, राशन कार्ड और आधार कार्ड की प्रमाणित प्रतियाँ
आवेदक स्वयं की बैंक खाता संख्या की छाया प्रति
शपथ-पत्र, योग्यता निर्धारण शपथ-पत्र, कंसेंट फॉर्म (Consent Form) और आधार कार्ड सहमति प्रमाण-पत्र
कार्यस्थल एवं प्रस्तावित कार्य की जियो टैग फोटो
नोट: तथ्य छिपाकर या गलत जानकारी देकर लाभ प्राप्त करने पर राज्य सरकार से प्राप्त अनुदान राशि दण्डनीय ब्याज सहित वसूली योग्य होगी और प्रशासनिक स्वीकृति निरस्त कर दी जाएगी।
स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी क्रमांक एफ44(51)पंच्रावि/प्रशि./स्वामित्व/2023/पार्ट-1/E-File - 01834 (दिनांक 27.08.2024) के अंतर्गत 'स्वामित्व योजना' के क्रियान्वयन में जिलों में आ रही विभिन्न समस्याओं के निराकरण हेतु राजस्व विभाग एवं पंचायती राज विभाग के समन्वय से महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश प्रसारित किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
सीमाज्ञान एवं चूना मार्किंग: आबादी क्षेत्र की बाहरी सीमा का सीमाज्ञान संबंधित पटवारी द्वारा किए जाने के उपरांत ग्राम पंचायत के कर्मियों द्वारा चूना मार्किंग की जाएगी। चूना मार्किंग के समय पटवारी की उपस्थिति अनिवार्य है।
सड़क सीमा एवं रेलवे लाइन दूरी: राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 के नियम 161 के अनुसार, जिन व्यक्तियों के मकान आबादी भूमि में स्थित हैं किंतु सड़क सीमा या रेलवे लाइन सीमा में आ रहे हैं, उन्हें प्रॉपर्टी पार्सल का वितरण नहीं किया जाए।
एक से अधिक भूखंड: किसी व्यक्ति के स्वामित्व में एक से अधिक भूखंड होने और उनका पट्टा न होने पर सिर्फ पट्टा शुद्धा भूखंड का प्रॉपर्टी पार्सल देय है, शेष का नहीं।
महिला पट्टा धारक: राजस्थान पंचायती राज नियम 157(2) के तहत 300 वर्गगज तक के महिला पट्टा धारक की प्रॉपर्टी आईडी का क्षेत्रफल 300 वर्गगज से अधिक होने पर नियम 165(4) के अनुसार डीएलसी दर से प्रभार लेकर विक्रय विलेख दिया जा सकता है, अन्यथा प्रॉपर्टी आईडी विवादग्रस्त अंकित की जाए।
आपत्तियां एवं अपील: स्वामित्व योजना अंतर्गत आपत्तियों के आमंत्रण हेतु विज्ञापन नियमानुसार प्रकाशित किए जाएं। पट्टे या प्रॉपर्टी कार्ड वितरण में त्रुटि/विवाद होने पर राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 के नियम 166 एवं अधिनियम 1994 की धारा 97 के संबंधित अपीलीय प्रावधान ही लागू होंगे।
विभागीय ग्रामीण कार्य निर्देशिका 2025 के बिंदु संख्या 10 एवं परिशिष्ट 2 के प्रावधानों के संबंध में मार्गदर्शन
विभागीय ग्रामीण कार्य निर्देशिका 2025 - भूमि स्वामित्व एवं मार्गदर्शन
ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न निर्माण कार्यों की तकनीकी, सुगमता और गुणवत्ता के लिए विभागीय ग्रामीण कार्य निर्देशिका-2025 लागू की गई है। इस निर्देशिका के बिंदु संख्या 10 एवं परिशिष्ट 2 के प्रावधानों के संबंध में जिला कलेक्टरों को आवश्यक मार्गदर्शन जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु एवं दिशा-निर्देश
आबादी भूमि: नए आंगनबाड़ी भवन, विद्यालय, सामुदायिक भवन, पंचायत भवन, स्वास्थ्य केंद्र, शौचालय आदि के निर्माण के लिए आबादी क्षेत्र में सक्षम प्राधिकारी से अनापत्ति प्रमाण-पत्र प्राप्त करना या नाम आवंटन/पट्टा जारी कराना आवश्यक है।
रास्ता/गोचर भूमि: नदी, नाला, तालाब के भराव क्षेत्र, रेलवे लाइन और सड़क सीमा के पास निर्माण स्वीकृत नहीं है। हालांकि सार्वजनिक शौचालयी, नालियों, ट्यूवेल, टंकी आदि के निर्माण के लिए स्थानीय स्तर पर उचित निर्णय लिया जा सकता है।
खातेदारी भूमि (दान/समर्पण): परिसम्पत्तियों के निर्माण हेतु खातेदारी भूमि दान या उपहार स्वरूप ली जा सकती है, जिसके लिए नामांतरण, खसरा में लोकेशन दर्ज करना और सीमाज्ञान करवाना अनिवार्य है।
परिसम्पत्तियों का नामकरण: नवनिर्मित परिसम्पत्तियों (जैसे आंगनबाड़ी, विद्यालय, सामुदायिक भवन, पंचायत भवन आदि) की भूमि स्वामित्व शासकीय कार्यालय/ग्राम पंचायत के नाम होना अनिवार्य है।
विमुक्त, घुमन्तु एवं अर्द्धघुमन्तु आवासहीन व्यक्तियों को भूखंड/पट्टा आवंटन के संबंध में परिपत्र एवं दिशा-निर्देश
विमुक्त, घुमन्तु एवं अर्द्धघुमन्तु आवासहीन व्यक्तियों को भूखंड आवंटन
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा विमुक्त, घुमन्तु एवं अर्द्धघुमन्तु श्रेणी के आवासहीन व्यक्तियों को नियमानुसार भूखंड और पट्टा आवंटन करने के संबंध में आवश्यक परिपत्र एवं दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
प्रमुख बिंदु
नियम का संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम-158 के अंतर्गत पंचायतें 300 वर्गगज तक की आबादी भूमि रियायती दरों या पात्र श्रेणियों के लिए निःशुल्क आवंटित कर सकती हैं।
रियायती दरें (नियम 158(2)):
1000 से कम आबादी वाले गांवों में (1991 की जनगणना): 2/- रुपये प्रति वर्ग मीटर
1001 से 2000 की आबादी वाले गांवों में (1991 की जनगणना): 5/- रुपये प्रति वर्ग मीटर
2000 से अधिक आबादी वाले गांवों में (1991 की जनगणना): 10/- रुपये प्रति वर्ग मीटर
पट्टा वितरण और कार्यक्रम: राज्य सरकार के निर्देशानुसार पात्र परिवारों को भूखंड/पट्टा वितरण के संबंध में समय-समय पर अभियान चलाए गए हैं और जिला एवं स्थानीय स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाने के निर्देश हैं।
आवश्यक कार्रवाई: सभी संबंधित जिला कलेक्टरों, मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (जिला परिषद) और विकास अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे पात्र आवासहीन परिवारों का चिन्हीकरण कर पट्टे तैयार कराने और वितरण की कार्रवाई सुनिश्चित करें।
ग्राम पंचायत द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के पात्र परिवारों को पट्टा जारी करने बाबत निर्देश
ग्राम पंचायत द्वारा पट्टा जारी करने के संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत पट्टा आवंटन के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
राज्य सरकार के ध्यान में लाया गया था कि कतिपय ग्राम पंचायतों में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की पात्रता/वरीयता सूची में सम्मिलित परिवारों को आबादी भूमि का पट्टा आवंटित नहीं हो पा रहा है।
चूंकि प्रधानमंत्री आवास योजना राज्य सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं में शामिल है, इसलिए सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है।
समस्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद को निर्देशित किया जाता है कि प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की पात्रता/वरीयता सूची में शामिल समस्त परिवारों को निर्धारित प्रक्रिया अपनाते हुए नियमानुसार भूमि/पट्टे आवश्यक रूप से आवंटित किया जाना सुनिश्चित करावें।
यह आदेश शासन सचिव एवं आयुक्त, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के हस्ताक्षर से जारी किया गया है।
विकसित भारत संकल्प यात्रा के सफल क्रियान्वयन एवं वित्तीय प्रावधान के संबंध में दिशा-निर्देश
विकसित भारत संकल्प यात्रा का सफल क्रियान्वयन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा विकसित भारत संकल्प यात्रा के सफल क्रियान्वयन के संबंध में दिनांक 22-12-2023 को आदेश जारी किया गया है।
मुख्य उद्देश्य एवं विशेषताएँ
भारत सरकार द्वारा संचालित विभिन्न फ्लेगशिप योजनाओं की जानकारी आमजन तक पहुँचाने, पात्र व्यक्तियों को लाभान्वित करने और योजनाओं के निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने के उद्देश्य से यह यात्रा राजस्थान के सभी जिलों की प्रत्येक ग्राम पंचायत तथा 10 हजार से अधिक आबादी के शहरी स्थानीय निकायों में 26 जनवरी 2024 तक जारी रहेगी। यात्रा की प्रमुख विशेषताओं में:
पहुँच से छूटे लोगों तक पहुँचना
प्रसार और जागरूकता बढ़ाना
संभावित लाभार्थियों का नामाकन एवं विशेष कैंपों का आयोजन
प्रत्येक ग्राम पंचायत में मोबिलाइजेशन, सांस्कृतिक प्रदर्शन एवं सूचना तकनीक का उपयोग
वित्तीय प्रावधान एवं व्यय सीमा
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के आदेश क्रमांक एफ 165(07)पाइफो/एसएफसी/षष्टम/दिशा निर्देश/2021-22/100 दिनांक 25-01-2022 के अनुसार पंचायती राज संस्थाओं में शिविरों/अभियानों के लिए व्यय सीमा निर्धारित है। विकसित भारत संकल्प यात्रा के सफल क्रियान्वयन हेतु:
प्रति जिला परिषद: रु. 0.50 लाख तक का व्यय
प्रति ग्राम पंचायत: रु. 0.20 लाख तक का व्यय
संबंधित जिला परिषद एवं ग्राम पंचायतें यह व्यय षष्ठम राज्य वित्त आयोग की उपलब्ध अवशेष राशि से करना सुनिश्चित करें तथा इस कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान करें।
स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
स्वामित्व योजना क्रियान्वयन निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन के संबंध में समस्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद, राजस्थान को महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
सम्पत्ति दस्तावेज तैयार करना: स्वामित्व योजनांतर्गत भू-खण्ड धारकों का सम्पत्ति दस्तावेज (टाईटल डॉक्यूमेंट) तैयार करते समय पंचायती राज नियम 1996 के अध्याय 9 में वर्णित स्थावर सम्पत्तियों से संबंधित प्रावधान अनुरूप पुराने गृहों का विनियमितीकरण, भूमियों का कमजोर वर्गों को आवंटन, भूमियों का रियायती कीमत पर आवंटन, सरकारी संस्थाओं को आबाद भूमि का आवंटन एवं नीलामी से संबंधित नियमों में वर्णित प्रावधान अनुरूप ही नियमानुसार कार्यवाही की जानी है।
भौतिक सर्वेक्षण एवं पट्टा निर्माण: भौतिक सर्वेक्षण उपरांत भारतीय सर्वेक्षण विभाग से मैप-2 प्राप्त होने पर राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 के प्रावधानों के तहत पट्टा निर्माण की कार्यवाही की जावे। साथ ही यह भी सुनिश्चित कर लिया जावे कि पूर्व में जारी पट्टे एवं वर्तमान कब्जे के आधार पर क्षेत्रफल कम या अधिक होने की स्थिति में, पट्टे में नियमानुसार संशोधन कर लेवें तथा यह भी सुनिश्चित किया जावे कि पंचायती राज संस्थाओं को किसी भी प्रकार की राजस्व हानि न हो।
सभी जिलों में इन निर्देशों का अध्ययन कर योजना के सफल क्रियान्वयन हेतु आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन गांव के संग अभियान 2023 के दौरान पट्टा जारी करने के संबंध में निर्देश
राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2023 एवं प्रशासन गांव के संग अभियान
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा प्रशासनिक आदेश क्रमांक एफ 139 (45) परावि/विधि/संशो/2021/190 दिनांक 02/06/2023 जारी किया गया है। इसके माध्यम से राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन करते हुए महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना विवरण: विभागीय अधिसूचना दिनांक 23.5.2023 (जी.एस.आर. 28) के तहत राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2023 लागू किए गए हैं जो तुरंत प्रभाव से प्रवृत्त हो गए हैं।
नियम 157 में संशोधन: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 के उप-नियम (1) के परंतुक में "प्रशासन गांव के संग अभियान 2021" के स्थान पर "प्रशासन गांव के संग अभियान 2021 और प्रशासन गांव के संग अभियान 2023" प्रतिस्थापित किया गया है।
पट्टा जारी करने की दर: प्रशासन गांव के संग अभियान 2023 के दौरान ग्राम पंचायत द्वारा जारी किए जाने वाले पट्टों की दर/प्रभार में छूट के संबंध में उपर्युक्त अधिसूचना के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
जारीकर्ता:निशु कुमार अग्निहोत्री, उपुयक्त एवं उप शासन सचिव (प्रथम), ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
पंचायती राज संस्थाओं के स्वामित्व वाले सरकारी जर्जर भवनों को ध्वस्त करने के संबंध में दिशानिर्देश
पंचायती राज संस्थाओं के जर्जर भवनों को ध्वस्त करने के संबंध में दिशानिर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा क्रमांक एफ 4 (1054) परावि/पीसी/पालडी एम/जर्जर सम्पत्ति भवन/2022/294 दिनांक 14/02/2023 के तहत पंचायती राज संस्थाओं के स्वामित्व वाले जीर्णशीर्ण, अनुपयोगी एवं असुरक्षित भवनों को ध्वस्त करने के संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
पूर्व निर्देश का संदर्भ: विभागीय पत्र क्रमांक 618 दिनांक 13.04.2012 के द्वारा पूर्व में निर्देश जारी किए गए थे, जिन्हें इस आदेश द्वारा अतिक्रमित किया गया है।
निरीक्षण दल का पुनर्गठन: पंचायती राज संस्थाओं के स्वामित्व वाले जीर्णशीर्ण/अनुपयोगी एवं असुरक्षित भवनों को ध्वस्त करने के लिए गठित निरीक्षण दल का पुनर्गठन इस प्रकार किया गया है: 1. अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद 2. संबंधित अधीक्षण अभियंता / अधिशाषी अभियंता पी.डब्ल्यू.डी., जिला परिषद 3. अधिशाषी अभियंता (सिविल), जिला परिषद 4. लेखाधिकारी, जिला परिषद
अनुमति प्रक्रिया: उक्त समिति की रिपोर्ट के आधार पर जिला कलेक्टर पंचायतीराज राज संस्थाओं के स्वामित्व वाले भवन गिराने की अनुमति/आदेश प्रदान करेंगे। अनुमति/आदेश जारी होने के उपरांत ही जीर्णशीर्ण/अनुपयोगी एवं असुरक्षित भवन को ध्वस्त करने की कार्यवाही की जाएगी।
मुख्यमंत्री ग्रामीण बीपीएल आवास योजना एवं इंदिरा आवास योजना के अंतर्गत निःशुल्क पट्टा आवंटन के संबंध में निर्देश
मुख्यमंत्री ग्रामीण बीपीएल आवास योजना एवं इंदिरा आवास योजना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी पत्र क्रमांक एफ.4()विधि/पंचावि/2011/1134 दिनांक 1 जुलाई 2011 के माध्यम से बीपीएल परिवारों को निःशुल्क पट्टा आवंटन के संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
पट्टा आवंटन का अधिकार: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 153 के अंतर्गत कमजोर वर्गों को आवंटन का प्रावधान है जिसके तहत पंचायत सर्किल की आबादी भूमि में बीपीएल परिवारों को निःशुल्क पट्टे आवंटित करने का अधिकार ग्राम पंचायत में निहित है।
नियम 157 एवं 158: इन नियमों के अंतर्गत पट्टा आवंटन के लिए ग्राम पंचायत द्वारा संकल्प पारित कर बीपीएल परिवारों को पट्टे देने की कार्यवाही तत्काल सुनिश्चित करने के निर्देश हैं। इसके लिए नियम 145 से 156 द्वारा निर्धारित नीलामी प्रक्रिया की पालना करना आवश्यक नहीं है।
आबादी भूमि की उपलब्धता: जिला कलेक्टर से अपेक्षा की गई है कि जिन ग्राम पंचायतों के अधीन पंचायत सर्किल में आवंटन हेतु आबादी भूमि उपलब्ध नहीं है, वहां राज्य सरकार के स्वामित्व की अन्य उपयोग की भूमि को आबादी उपयोगार्थ परिवर्तित करते हुए ग्राम पंचायत को उपलब्ध कराई जाए।
मुख्यमंत्री ग्रामीण बीपीएल आवास योजना एवं इंदिरा आवास योजना के अंतर्गत निःशुल्क पट्टा आवंटन बाबत
मुख्यमंत्री ग्रामीण बीपीएल आवास योजना एवं इंदिरा आवास योजना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा मुख्यमंत्री ग्रामीण बीपीएल आवास योजना एवं इंदिरा आवास योजना के अंतर्गत बीपीएल परिवारों को निःशुल्क पट्टा आवंटन के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
पट्टा आवंटन का अधिकार: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 153 के अंतर्गत कमजोर वर्गों को आवंटन का प्रावधान है, जिसके तहत पंचायत सर्किल की आबादी भूमि में बीपीएल परिवारों को निःशुल्क पट्टे आवंटन करने का अधिकार ग्राम पंचायत में निहित है।
विनियमितीकरण: नियम 153 के अंतर्गत पुराने ग्रहों का विनियामितीकरण कर पट्टे जारी करने की शक्ति भी पंचायत में निहित है।
प्रक्रिया: उपरोक्त प्रावधानों के अंतर्गत आवंटन/पट्टा जारी किए जाने बाबत ग्राम पंचायत द्वारा संकल्प पारित किया जाकर आवंटन/पट्टा जारी करने की कार्यवाही की जा सकती है।
नियमों का पालन: नियम 157 एवं 158 के अंतर्गत आवंटन व पट्टा जारी करने के लिए नीलामी किए जाने संबंधी प्रक्रियात्मक प्रावधान नियम 145 से 156 द्वारा निर्धारित प्रक्रिया की पालना अपेक्षित/आवश्यक नहीं है।
भूमि की उपलब्धता: जिला कलेक्टरों से अपेक्षा की जाती है कि जिन ग्राम पंचायतों के अधीन पंचायत सर्किल में आवंटन हेतु आबादी भूमि उपलब्ध नहीं है, उन ग्राम पंचायतों के लिए ग्राम पंचायत क्षेत्र में उपलब्ध राज्य सरकार के स्वामित्व की अन्य उपयोग की भूमि को आबादी उपयोगार्थ परिवर्तित करते हुए आवंटन हेतु ग्राम पंचायत को उपलब्ध कराई जाए।
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2010 - राजस्व अभियान और प्रशासन गांवों के संग अभियान हेतु आपत्ति अवधि संशोधन
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2010
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक [No.F.4(7)Am/Rule/Legal/PR/2010/2113] दिनांक 26 नवंबर 2010 के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
नियम का नाम: राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2010।
प्रभावी तिथि: ये नियम राजपत्र में प्रकाशन की तिथि (30 नवंबर 2010) से प्रवृत्त हुए हैं।
नियम 148 में संशोधन: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 148 के उप-नियम (1) के तहत, राजस्व अभियान या प्रशासन गांवों के संग अभियान के दौरान आपत्तियां आमंत्रित करने की अवधि एक महीने के स्थान पर सात दिन होगी।
प्रारूप XXII में संशोधन: प्रारूप XXII के तहत भी राजस्व अभियान या प्रशासन गांवों के संग अभियान के दौरान आपत्तियां दर्ज कराने की अवधि एक महीने के स्थान पर सात दिन निर्धारित की गई है।
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 और 158 में संशोधन - अधिसूचना दिनांक 9-4-2007
राजस्थान पंचायती राज विभाग अधिसूचना
राजस्थान सरकार के पंचायती राज विभाग द्वारा अधिसूचना क्रमांक F.4(7)/PRD/LAW/Rule-Amnd/07/1166, दिनांक 9-4-2007 जारी की गई है जिसके तहत राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
नियम 157 में संशोधन: ऐसे परिवार जिनके पास कहीं भी कोई मकान या भूखंड नहीं है और जो वर्ष 2003 तक केhutment/kutcha house बनाकर आबादी भूमि पर काबिज हैं, उन्हें अधिकतम 300 वर्ग गज तक भूमि निःशुल्क नियमितीकरण के लिए पात्र माना जाएगा। इस प्रकार की भूमि का पट्टा परिवार की महिला मुखिया के नाम जारी किया जाएगा।
नियम 158 में संशोधन: नियम 158 के उप-नियम (2) के अंतर्गत यह प्रावधान जोड़ा गया है कि गरीबी रेखा से नीचे (BPL) जीवन बसर करने वाले परिवारों को आबादी भूमि के आवंटन के मामले में पंचायत भूमि निःशुल्क आवंटित कर सकेगी।
यह अधिसूचना राज्यपाल के आदेश से श्रीचन्द मीणा, शासन उप सचिव द्वारा जारी की गई है तथा इसकी प्रतियां संबंधित विभागों, जिला कलेक्टरों, मुख्य कार्यकारी अधिकारियों और विकास अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रेषित की गई हैं।
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 - अवलोकन एवं मुख्य प्रावधान
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996
यह दस्तावेज़ राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 का आधिकारिक संकलन है, जिसे ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 के अंतर्गत बनाया गया है। यह नियम राज्य की त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं (ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और ज़िला परिषद) के प्रशासन, कार्यप्रणाली, ग्राम सभा, कर एवं शुल्क निर्धारण, अ आबादी भूमि के प्रबंधन, और सेवा नियमों से संबंधित विस्तृत दिशा-निर्देश प्रदान करता है।
मुख्य बिंदु:
ग्राम सभा और सतर्कता समिति (विजिलेंस कमेटी): ग्राम सभा की बैठकों का आयोजन, कोरम, एजेंडा, कार्यवाही का रिकॉर्ड और 7 सदस्यीय सतर्कता समिति के गठन व उसके कार्यों का प्रावधान।
कर, शुल्क और राजस्व: पंचायतों द्वारा भवन कर, वाटर टैक्स, वाहन कर, व्यावसायिक फसलों पर कर, और विभिन्न सेवाओं पर शुल्क (फीस) लगाने और उनकी वसूली की प्रक्रिया।
आबादी भूमि और संपत्ति प्रबंधन: आबादी भूमि के पट्टे जारी करने, पुरानी बसावटों के नियमतिकरण, भूमि आवंटन, नीलामी समिति और उप-विभाजन (सब-डिवीजन) के नियम।
कार्य, अनुबंध और खरीदारी: वार्षिक कार्य योजना (एनुअल एक्शन प्लान), निर्माण कार्यों के निष्पादन, ठेकेदारों पर प्रतिबंध और सामग्री की खरीद के लिए पारदर्शी प्रक्रिया (बी.एस.आर. और निविदाएं)।
बजट, लेखा और लेखापरीक्षा (ऑडिट): बजट का निर्माण, कैलेंडर, रोकड़ बही (कैश बुक), वित्तीय औचित्य के मानक और स्थानीय निधि संपरीक्षा अधिनियम के तहत ऑडिट का प्रावधान।
स्थापना और सेवा नियम: पंचायती राज संस्थाओं में विभिन्न श्रेणियों के पदों, भर्ती, आरक्षण, वरिष्ठता, परिवीक्षा काल और अनुशासनात्मक कार्रवाई के नियम।