ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार

ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 06/12/2017 को एक महत्वपूर्ण परिपत्र (क्रमांक: एफ 13(632)पविवि/विधि/एस.बी.रिट./जय.उच्च/2017/4586) जारी किया गया है। यह परिपत्र न्यायालयीन प्रकरणों, अंतरिम आदेशों की पालना और अभ्यावेदनों के निस्तारण के संबंध में है।

मुख्य बिंदु:

  • अंतरिम आदेशों की पालना: माननीय न्यायालय द्वारा पारित अंतरिम आदेशों की पालना मुख्यालय भिजवाने के बजाय शासन स्तर पर यथासमय की जाए। यदि अंतरिम आदेश विभागीय नियमों या निर्देशों के विपरीत प्रतीत होता है, तो अतिरिक्त महाधिवक्ता या राजकीय अभियोक्ता से संपर्क कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए। एकपक्षीय अंतरिम आदेश होने पर माननीय न्यायालय के समक्ष भारतीय संविधान के अनुच्छेद 226(3) के अंतर्गत प्रार्थना-पत्र प्रस्तुत करवाया जाए।
  • अभ्यावेदनों का निस्तारण: जिन प्रकरणों में न्यायालय द्वारा अभ्यावेदन निस्तारण किए जाने के आदेश दिए जाते हैं, उनका निस्तारण विभागीय अधिनियम, नियम, परिपत्र, आदेश या निर्देश के अनुसार नियत समय सीमा में किया जाए।
  • मुख्यालय मार्गदर्शन: किसी प्रकरण में मार्गदर्शन की आवश्यकता होने पर संबंधित बिंदु को स्पष्ट रूप से अंकित करते हुए सुसंगत दस्तावेजों की छायाप्रति के साथ ही मुख्यालय भिजवाया जाए, ताकि अनावश्यक देरी न हो।

जारीकर्ता: नवीन महाजन, शासन सचिव एवं आयुक्त, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।