राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2026 जारी
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2026
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम सं. 13) की धारा 102 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2026 की अधिसूचना जारी कर दी गई है। यह अधिसूचना दिनांक 04 अगस्त, 2026 को जारी की गई है और यह तुरंत प्रभाव से प्रवृत्त हो गई है।
मुख्य संशोधन बिंदु:
नियम 154 का संशोधन: इसके तहत यदि सबसे ऊंची बोली की रकम दो लाख रुपये से अधिक हो, तो पंचायत को पूर्व अनुमोदन प्राप्त करना होगा:
(क) यदि रकम 5 लाख रुपये से अनधिक हो, तो पंचायत समिति का।
(ख) यदि रकम 5 लाख रुपये से अधिक किंतु 10 लाख रुपये से अनधिक हो, तो जिला परिषद का।
(ग) यदि रकम 10 लाख रुपये से अधिक हो, तो राज्य सरकार का पूर्व अनुमोदन आवश्यक होगा।
साथ ही, नियम 154 और नियम 160 के अंत में दी गई टिप्पणियों में मौजूदा अभिव्यक्ति "10,000/-" के स्थान पर "2,00,000/-" प्रतिस्थापित कर दिया गया है।
नियम 157 का संशोधन: नियम 157 के उप-नियम (1) के द्वितीय परंतुक में "प्रशासन गांव के संग अभियान 2021 और प्रशासन गांव के संग अभियान 2023" के स्थान पर "ग्रामीण सेवा शिविर 2026 या पंचायती राज विभाग या राजस्व विभाग द्वारा किसी भी नाम से आयोजित कोई भी शिविर या अभियान" प्रतिस्थापित किया गया है।
आदेश क्रमांक: [NO.F.4(05)Rule/Amend/Legal/PR/2026/45] हस्ताक्षर: भारत भूषण गोयल, शासन उप सचिव, राज्यपाल के आदेश से।
पट्टा नवीनीकरण प्रक्रिया
मुख्य नियम एवं शुल्क
इस प्रक्रिया को पंचायती राज विभाग के विशिष्ट नियमों और आदेशों द्वारा निर्देशित किया जाता है:
सरपंच को दिए जाने वाले आवेदन पत्र के साथ निम्नलिखित पांच दस्तावेज संलग्न करना अनिवार्य है:
मूल विक्रय विलेख (पट्टा)।
मूल विक्रय विलेख (पट्टा) की फोटो प्रति।
पट्टा जारी करने की रसीद।
आधार कार्ड।
मतदाता पहचान पत्र।
प्रक्रिया का चरणबद्ध सारांश
आवेदन प्रस्तुति: प्रार्थी सरपंच/ग्राम पंचायत को आवेदन प्रस्तुत करता है ताकि वह अपने विक्रय विलेख का पंजीयन करवा सके।
रिकॉर्ड मिलान: ग्राम विकास अधिकारी (VDO) पंचायत में उपलब्ध रिकॉर्ड से पट्टा संख्या, दिनांक और पुस्तक संख्या का मिलान करते हैं।
पंचायत बैठक में प्रस्ताव: पत्रावली को पंचायत की आगामी बैठक में रखा जाता है, जहाँ उपस्थित सदस्य सर्वसम्मति से 100 रुपये के शुल्क के साथ पुनर्विधिमान्यकरण का प्रस्ताव पारित करते हैं।
आदेश जारी करना: प्रस्ताव के अनुमोदन के पश्चात्, ग्राम विकास अधिकारी और सरपंच के हस्ताक्षर व कार्यालय की मोहर के साथ अंतिम आदेश जारी किया जाता है।
ग्राम पंचायतियों की कालावधि के दौरान पट्टे जारी करने के संबंध में निर्देश
ग्राम पंचायतों की कालावधि के दौरान पट्टे जारी करने के संबंध में दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा ग्राम पंचायतों की कालावधि के दौरान पट्टे जारी करने के संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
संदर्भ: विभागीय अधिसूचना दिनांक 16.01.2025
प्रशासनिक समिति का गठन: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा-95 के तहत जिन ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त हो गया है, उनमें निवर्तमान सरपंच को प्रशासक नियुक्त किया गया है तथा संबंधित ग्राम पंचायत के उप सरपंच एवं वार्ड पंचों को प्रशासक समिति का सदस्य बनाया गया है।
शक्तियों का प्रयोग: प्रशासक द्वारा अधिनियम और राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में वर्णित समस्त शक्तियों और कर्तव्यों का प्रयोग प्रशासनिक समिति की बैठक में परामर्श उपरांत किया जाएगा।
पट्टा आवंटन प्रक्रिया: पट्टा आवंटन से संबंधित कार्यवाही में राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के प्रावधानों के तहत जहाँ वार्ड पंच की कमेटी गठित किया जाना आवश्यक है, वहाँ प्रशासक द्वारा प्रशासनिक समिति के सदस्यों की कमेटी गठित कर पट्टा आवंटन संबंधी कार्यवाही की जाए।
यह आदेश डॉ. जोगाराम, शासन सचिव एवं आयुक्त, पंचायती राज विभाग द्वारा जारी किया गया है।
स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन बाबत महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
राजस्थान सरकार पंचायती राज विभाग द्वारा निर्देश
राजस्थान सरकार के पंचायती राज विभाग द्वारा क्रमांक: एफ 4(1)स्वामित्व/विधि/पंव्रा/2020/पार्ट-3/E-File - 00439 के अंतर्गत स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन के संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए हैं। यह आदेश शासन सचिव एवं आयुक्त डॉ. जोगा राम द्वारा जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
प्रशासक की नियुक्ति: राज्य की ऐसी ग्राम पंचायतें जिनका कार्यकाल दिनांक 16.01.2025, 11.03.2025 व 23.09.2025 तक समाप्त हो गया है और जिनके चुनाव अपरिहार्य कारणों से संपन्न नहीं हो पा रहे हैं, उनमें संबंधित ग्राम पंचायत के निवर्तमान सरपंच को प्रशासक नियुक्त किया गया है।
प्रशासनिक समिति का गठन: ग्राम पंचायतों के कार्यों के सुचारू संचालन के लिए प्रशासक की सहायता हेतु प्रशासनिक समिति गठित की गई है। इसमें कार्यकाल समाप्त होने से पूर्व संबंधित ग्राम पंचायत के उप सरपंच एवं वार्ड पंचों को सदस्य बनाया गया है।
सर्वे समिति में कार्य: विभागीय पत्र क्रमांक 48 दिनांक 18.01.2021 के अनुसार स्वामित्व योजनांतर्गत गठित सर्वे समिति में 2 वार्ड पंचों کے स्थान पर प्रशासनिक समिति के 2 सदस्यों द्वारा सर्वे समिति का कार्य संपादित किया जाएगा।
समस्त जिला कलेक्टरों और मुख्य कार्यकारी अधिकारियों, जिला परिषदों को इस योजना के सफल एवं समयबद्ध क्रियान्वयन हेतु आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
पट्टा मिसल 158 आबादी भूमि Word file
पट्टा मिसल 158 आबादी भूमि Word file
आबादी भूमि में भूमिहीन परिवार को भूखंड आ आवंटन एवं पट्टा जारी करने की प्रक्रिया (रांपारा नियम 1996 के नियम 158-1)
आबादी भूमि में भूमिहीन परिवारों को भूखंड आवंटन की प्रक्रिया
राज ई पंचायत पोर्टल के इस पोस्ट में राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 के नियम 158(1) के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में भूमिहीन परिवारों को आबादी भूमि में भूखंड (पट्टा) आवंटन करने की पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया और प्रपत्रों की जानकारी दी गई है।
मुख्य बिंदु एवं प्रक्रिया:
आवेदन: ग्राम पंचायत के वार्ड में निवास करने वाले भूमिहीन परिवार, जिनका भारत में कहीं भी आवासीय या कृषि भूमि का पट्टा नहीं है, वे सरपंच महोदय को निर्धारित दस्तावेजों (मतदाता पहचान पत्र/आधार कार्ड, राशन कार्ड, शपथ पत्र, बीपीएल कार्ड यदि हो) के साथ आवेदन प्रस्तुत करते हैं।
पटवारी का भूमिहीन प्रमाण पत्र: पटवार मंडल एवं तहसील स्तर पर यह प्रमाणित किया जाता है कि आवेदक का परिवार राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार भूमिहीन श्रेणी में आता है।
शपथ-पत्र: आवेदक द्वारा 50/- रुपये के स्टाम्प पेपर पर भूमिहीन होने और अन्य स्थान पर पट्टा न होने संबंधी शपथ-पत्र प्रस्तुत किया जाता है।
मौका निरीक्षण कमेटी: राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 के नियम 146 के तहत ग्राम पंचायत द्वारा वार्ड पंचों की एक कमेटी का गठन किया जाता है जो स्थल निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करती है।
आपत्ति नोटिस: नियम 148 (प्रारूप 22) के तहत आबादी भूमि के आवंटन पर आपत्तियां आमंत्रित करने के लिए नोटिस जारी किया जाता है।
रियायती दरें: नियम 158(1) के तहत अनुसूचित जाति, स्वच्छता कर्मियों, अनुसूचित जनजाति, श्रम मजदूरी पर आधारित भूमिहीन व्यक्तियों और गाड़िया लुहारों को रियायती दरों पर भूखंड आवंटित किए जाते हैं:
1000 से कम आबादी वाले गांवों में: 2 रुपये प्रति वर्ग गज
1001 से 2000 की आबादी वाले गांवों में: 5 रुपये प्रति वर्ग गज
2000 से अधिक आबादी वाले गांवों में: 10 रुपये प्रति वर्ग मीटर
पट्टा जारी करना: निर्धारित राशि ग्राम पंचायत कोष में जमा होने के पश्चात प्रपत्र-23 (ग) में विक्रय विलेख (पट्टा) जारी किया जाता है, जो कि अहस्तांतरणीय होता है।
स्वामित्व योजना मैप 1.0 की excel file
स्वामित्व योजना मैप 1.0 की excel file
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 के तहत प्ररूप 23-क एवं 23-ख में संशोधन के संबंध में
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 - पट्टा प्ररूप संशोधन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.4(1)नियम/संशो/विधि/पंवारा/2024/304 दिनांक 27-3-2025 के माध्यम से सभी मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद (समस्त राजस्थान) को राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 के तहत जारी पट्टों के प्ररूप-23क एवं 23ख में किए गए संशोधनों के अनुसार पट्टा जारी करने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना विवरण: राजस्थान राजपत्र (असाधारण) दिनांक 20 जनवरी, 2025 में प्रकाशित अधिसूचना (जी.एस.आर. 97) के तहत राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) नियम, 2025 बनाए गए हैं।
प्ररूप-23-क: नियम 157(1) के अंतर्गत आवासीय भूमि का पट्टा (पट्टा विलेख) से संबंधित है, जो पंचायत आबाबी भूमि पर पुराने संनिर्मित घरों पर कब्जे या 31 दिसंबर, 2016 से ठीक पूर्ववर्ती सत्तर वर्ष के दौरान संनिर्मित घरों के लिए है।
प्ररूप-23-ख: नियम 157(2) के अंतर्गत आबाबी भूमि का आवंटन / परिवारों के कब्जे के अस्थायी मकानों / कच्चे मकानों का नियमितीकरण (पट्टा विलेख) से संबंधित है, जो वर्ष 2003 तक के कच्चे/अस्थायी मकानों के कब्जे के लिए है (अधिकतम 300 वर्ग गज)।
आवश्यक कार्रवाई: सभी संबंधित ग्राम पंचायतों को निर्देशित किया गया है कि वे संशोधित प्ररूपों के अनुसार ही पट्टा जारी करना सुनिश्चित करें।
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 के तहत प्ररूप 23-क एवं 23-ख में संशोधन के संबंध में
राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) नियम, 2025
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.4(1)नियम/संशो/विधि/पंवारा/2024/304 दिनांक 27-3-2025 और राजस्थान राजपत्र असाधारण (दिनांक 20 जनवरी, 2025) की अधिसूचना जी.एस.आर. 97 के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 के अंतर्गत पट्टों के प्ररूप-23-क एवं 23-ख में संशोधन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
नियम 157(1) के अंतर्गत प्ररूप-23-क: आवासीय भूमि का पट्टा (पट्टा विलेख) जिसमें पुराने संनिर्मित घरों पर कब्जे या पंचायत आबाद भूमि पर कब्जे से संबंधित प्रावधान और शर्तें शामिल हैं।
नियम 157(2) के अंतर्गत प्ररूप-23-ख: आबाद भूमि का आवंटन / परिवारों के कब्जे के अस्थायी मकानों / कच्चे मकानों का नियमितीकरण (पट्टा विलेख), जिसमें अधिकतम 300 गज तक की आबाद भूमि के निःशुल्क आवंटन और उससे जुड़ी शर्तों का उल्लेख है।
निर्देश: सभी मुख्य कार्यकारी अधिकारियों, जिला परिषद (राजस्थान) को निर्देशित किया गया है कि वे संबंधित ग्राम पंचायतों को संशोधित प्ररूप-23-क और 23-ख के अनुसार पट्टा जारी करना सुनिश्चित कराएं।
स्वामित्व योजनान्तर्गत भारतीय सर्वेक्षण से प्राप्त मैप-2 में संशोधन किये जाने के सम्बन्ध में दिशा-निर्देश
स्वामित्व योजना: मैप-2 संशोधन सम्बन्धित दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा स्वामित्व योजनान्तर्गत भारतीय सर्वेक्षण (Survey of India) से प्राप्त मैप-2 में संशोधन किये जाने के सम्बन्ध में समस्त जिला कोर्डिनेटिंग अधिकारियों और जिला परिषदों को महत्वपूर्ण निर्देश जारी किये गये हैं।
मुख्य बिंदु:
मैप 1.0 की ग्राउंड ट्रूथिंग: मैप 1.0 पर की जाने वाली ग्राउंड ट्रूथिंग की कार्यवाही हेतु दक्ष एवं विज्ञ कार्मिकों को भारतीय सर्वेक्षण विभाग में भिजवाया जाए, ताकि होने वाले संशोधनों के सम्बन्ध में आवश्यक जानकारी दी जा सके।
नक्शों में संशोधन: भारतीय सर्वेक्षण विभाग से प्राप्त ग्राउंड ट्रूथिंग नक्शों में लाल डोरा प्रदर्शित करने, आबादी का विभाजन, नई आबादी को जोड़ने, नाम में संशोधन, नया नाम जुड़वा, और ID में संशोधन आदि को सुनिश्चित किया जाए।
मैप 2.0 की जाँच प्रक्रिया: मैप 2.0 में संशोधन करवाने के लिए अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी / मुख्य कार्यकारी अधिकारी द्वारा नक्शों की पूर्ण जाँच करायी जाए और निर्धारित प्रारूप में टिप्पणी के साथ भारतीय सर्वेक्षण विभाग को भिजवाया जाए।
कार्यालय पटवार मण्डल - मकान व आबादी भूमि संबंधी रिपोर्ट प्रारूप
कार्यालय पटवार मण्डल रिपोर्ट प्रारूप
यह दस्तावेज कार्यालय पटवार मण्डल, तहसील और जिला स्तर पर उपयोग होने वाला एक आधिकारिक रिपोर्ट प्रारूप है। इस प्रारूप का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में आवेदक के मकान और आबादी भूमि से संबंधित विवरण को पटवार मण्डल के रिकॉर्ड के आधार पर सत्यापित करना है।
मुख्य बिंदु और विवरण:
कार्यालय विवरण: पटवार मण्डल, तहसील और जिला का उल्लेख करने के लिए निर्धारित स्थान।
आवेदक की जानकारी: आवेदक का नाम, पिता का नाम, जाति और निवास स्थान की प्रविष्टि।
भूमि और मकान का विवरण: ग्राम की आबादी भूमि में बने मकान, आराजी नंबर और मकान का कुल क्षेत्रफल (वर्ग फीट में) दर्ज करने का प्रावधान।
सत्यापन: पटवारी हल्के के हस्ताक्षर के साथ रिपोर्ट जारी करने का स्थान।
यह प्रपत्र पंचायती राज और ग्रामीण प्रशासनिक कार्यों के अंतर्गत आबादी भूमि व मकान से जुड़े सत्यापन कार्यों में उपयोगी है।
स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी क्रमांक एफ44(51)पंच्रावि/प्रशि./स्वामित्व/2023/पार्ट-1/E-File - 01834 (दिनांक 27.08.2024) के अंतर्गत 'स्वामित्व योजना' के क्रियान्वयन में जिलों में आ रही विभिन्न समस्याओं के निराकरण हेतु राजस्व विभाग एवं पंचायती राज विभाग के समन्वय से महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश प्रसारित किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
सीमाज्ञान एवं चूना मार्किंग: आबादी क्षेत्र की बाहरी सीमा का सीमाज्ञान संबंधित पटवारी द्वारा किए जाने के उपरांत ग्राम पंचायत के कर्मियों द्वारा चूना मार्किंग की जाएगी। चूना मार्किंग के समय पटवारी की उपस्थिति अनिवार्य है।
सड़क सीमा एवं रेलवे लाइन दूरी: राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 के नियम 161 के अनुसार, जिन व्यक्तियों के मकान आबादी भूमि में स्थित हैं किंतु सड़क सीमा या रेलवे लाइन सीमा में आ रहे हैं, उन्हें प्रॉपर्टी पार्सल का वितरण नहीं किया जाए।
एक से अधिक भूखंड: किसी व्यक्ति के स्वामित्व में एक से अधिक भूखंड होने और उनका पट्टा न होने पर सिर्फ पट्टा शुद्धा भूखंड का प्रॉपर्टी पार्सल देय है, शेष का नहीं।
महिला पट्टा धारक: राजस्थान पंचायती राज नियम 157(2) के तहत 300 वर्गगज तक के महिला पट्टा धारक की प्रॉपर्टी आईडी का क्षेत्रफल 300 वर्गगज से अधिक होने पर नियम 165(4) के अनुसार डीएलसी दर से प्रभार लेकर विक्रय विलेख दिया जा सकता है, अन्यथा प्रॉपर्टी आईडी विवादग्रस्त अंकित की जाए।
आपत्तियां एवं अपील: स्वामित्व योजना अंतर्गत आपत्तियों के आमंत्रण हेतु विज्ञापन नियमानुसार प्रकाशित किए जाएं। पट्टे या प्रॉपर्टी कार्ड वितरण में त्रुटि/विवाद होने पर राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 के नियम 166 एवं अधिनियम 1994 की धारा 97 के संबंधित अपीलीय प्रावधान ही लागू होंगे।
विमुक्त, घुमन्तु एवं अर्द्धघुमन्तु आवासहीन व्यक्तियों को भूखंड/पट्टा आवंटन के संबंध में परिपत्र एवं दिशा-निर्देश
विमुक्त, घुमन्तु एवं अर्द्धघुमन्तु आवासहीन व्यक्तियों को भूखंड आवंटन
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा विमुक्त, घुमन्तु एवं अर्द्धघुमन्तु श्रेणी के आवासहीन व्यक्तियों को नियमानुसार भूखंड और पट्टा आवंटन करने के संबंध में आवश्यक परिपत्र एवं दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
प्रमुख बिंदु
नियम का संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम-158 के अंतर्गत पंचायतें 300 वर्गगज तक की आबादी भूमि रियायती दरों या पात्र श्रेणियों के लिए निःशुल्क आवंटित कर सकती हैं।
रियायती दरें (नियम 158(2)):
1000 से कम आबादी वाले गांवों में (1991 की जनगणना): 2/- रुपये प्रति वर्ग मीटर
1001 से 2000 की आबादी वाले गांवों में (1991 की जनगणना): 5/- रुपये प्रति वर्ग मीटर
2000 से अधिक आबादी वाले गांवों में (1991 की जनगणना): 10/- रुपये प्रति वर्ग मीटर
पट्टा वितरण और कार्यक्रम: राज्य सरकार के निर्देशानुसार पात्र परिवारों को भूखंड/पट्टा वितरण के संबंध में समय-समय पर अभियान चलाए गए हैं और जिला एवं स्थानीय स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाने के निर्देश हैं।
आवश्यक कार्रवाई: सभी संबंधित जिला कलेक्टरों, मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (जिला परिषद) और विकास अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे पात्र आवासहीन परिवारों का चिन्हीकरण कर पट्टे तैयार कराने और वितरण की कार्रवाई सुनिश्चित करें।
ग्राम पंचायत द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के पात्र परिवारों को पट्टा जारी करने के संबंध में निर्देश
प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत पट्टा आवंटन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा ग्राम पंचायतों द्वारा पट्टा जारी करने के संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
विषय: ग्राम पंचायत द्वारा पट्टा जारी करने बाबत।
कारण: राज्य सरकार के ध्यान में लाया गया था कि कतिपय ग्राम पंचायतों में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की पात्रता/वरीयता सूची में सम्मिलित परिवारों को आबादी भूमि का पट्टा आवंटित नहीं हो पा रहा है।
योजना का महत्व: प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण राज्य सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं में शामिल है।
निर्देश: सभी मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद को निर्देशित किया गया है कि वे प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की पात्रता/वरीयता सूची में शामिल समस्त परिवारों को निर्धारित प्रक्रिया अपनाते हुए नियमनुसार भूमि/पट्टे आवश्यक रूप से आवंटित किया जाना सुनिश्चित करावें।
यह आदेश शासन सचिव एवं आयुक्त, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा जारी किया गया है।
ग्राम पंचायत द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के पात्र परिवारों को पट्टा जारी करने बाबत निर्देश
ग्राम पंचायत द्वारा पट्टा जारी करने के संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत पट्टा आवंटन के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
राज्य सरकार के ध्यान में लाया गया था कि कतिपय ग्राम पंचायतों में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की पात्रता/वरीयता सूची में सम्मिलित परिवारों को आबादी भूमि का पट्टा आवंटित नहीं हो पा रहा है।
चूंकि प्रधानमंत्री आवास योजना राज्य सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं में शामिल है, इसलिए सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है।
समस्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद को निर्देशित किया जाता है कि प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की पात्रता/वरीयता सूची में शामिल समस्त परिवारों को निर्धारित प्रक्रिया अपनाते हुए नियमानुसार भूमि/पट्टे आवश्यक रूप से आवंटित किया जाना सुनिश्चित करावें।
यह आदेश शासन सचिव एवं आयुक्त, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के हस्ताक्षर से जारी किया गया है।
ग्राम पंचायतों/पंचायत समितियों द्वारा पट्टा बही का संधारण किए जाने बाबत् परिपत्र
परिचय
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों द्वारा पट्टा बही का संधारण किए जाने के संबंध में परिपत्र जारी किया गया है। विभाग के ध्यान में आया था कि कतिपय पंचायत समिति स्तर पर ग्राम पंचायतों द्वारा जारी पट्टों का रिकॉर्ड संधारित नहीं किया जा रहा है, जिससे अनियमित पट्टे जारी होने की संभावना रहती है।
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 168 के मुख्य प्रावधान
नियम 168(1): नीलामी, परक्रामण या आवंटन द्वारा किए गए समस्त विक्रय जिनके लिए पट्टे जारी किए गए, उनका अभिलेख पंचायत द्वारा प्ररूप 24 में रखी गई पट्टा बही में रखा जाएगा।
नियम 168(2): पंचायत संबंधित पंचायत समिति के विकास अधिकारी को प्रत्येक मास के प्रथम सप्ताह में पट्टा बही की एक प्रति अग्रषित करेगी। विकास अधिकारी एक नियंत्रण रजिस्टर रखेगा जिसमें पंचायतवार लेजर रखा जाएगा और सत्यापन के प्रमाणस्वरूप प्रविष्टि पर हस्ताक्षर करेगा ताकि पिछली तारीखों में पट्टे जारी करना रोका जा सके।
नियम 168(3): पंचायत समिति अपने स्तर पर पट्टा बहियां तीन परत में छपवाएगी। सभी पट्टों पर पुस्तक संख्या व क्रम संख्या होगी। पट्टे की पहली परत आवंटी को, दूसरी परत पंचायत कार्यालय में तथा तीसरी परत पंचायत समिति को रिकॉर्ड हेतु भेजी जाएगी।
अनुपालन एवं निर्देश
समस्त संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया जाता है कि राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 168 में वर्णित प्रावधानों की पालना कड़ाई से अमल में लाई जाए। उक्त परिपत्र की अवहेलना किए जाने वाले संबंधित विकास अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
मदरसा व मस्जिद के पट्टे चाहने के संबंध में मार्गदर्शन बाबत आदेश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग का मार्गदर्शन
यह दस्तावेज़ ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा जारी किया गया पत्र है, जिसका क्रमांक एफ.139(78)विविध/पार्ट-1/विधि/पंज/23 है। यह पत्र अति० मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद, सीकर को संबोधित है।
मुख्य बिंदु:
विषय: मदरसा व मस्जिद के पट्टे चाहने के संबंध में मार्गदर्शन बाबत।
संदर्भ: जिला परिषद सीकर का पत्र क्रमांक 733 दिनांक 26.06.2023।
विभाग का स्पष्टीकरण: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में किसी धार्मिक संस्था को निःशुल्क पट्टा आवंटन का कोई प्रावधान नहीं है।
स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
स्वामित्व योजना क्रियान्वयन निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन के संबंध में समस्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद, राजस्थान को महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
सम्पत्ति दस्तावेज तैयार करना: स्वामित्व योजनांतर्गत भू-खण्ड धारकों का सम्पत्ति दस्तावेज (टाईटल डॉक्यूमेंट) तैयार करते समय पंचायती राज नियम 1996 के अध्याय 9 में वर्णित स्थावर सम्पत्तियों से संबंधित प्रावधान अनुरूप पुराने गृहों का विनियमितीकरण, भूमियों का कमजोर वर्गों को आवंटन, भूमियों का रियायती कीमत पर आवंटन, सरकारी संस्थाओं को आबाद भूमि का आवंटन एवं नीलामी से संबंधित नियमों में वर्णित प्रावधान अनुरूप ही नियमानुसार कार्यवाही की जानी है।
भौतिक सर्वेक्षण एवं पट्टा निर्माण: भौतिक सर्वेक्षण उपरांत भारतीय सर्वेक्षण विभाग से मैप-2 प्राप्त होने पर राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 के प्रावधानों के तहत पट्टा निर्माण की कार्यवाही की जावे। साथ ही यह भी सुनिश्चित कर लिया जावे कि पूर्व में जारी पट्टे एवं वर्तमान कब्जे के आधार पर क्षेत्रफल कम या अधिक होने की स्थिति में, पट्टे में नियमानुसार संशोधन कर लेवें तथा यह भी सुनिश्चित किया जावे कि पंचायती राज संस्थाओं को किसी भी प्रकार की राजस्व हानि न हो।
सभी जिलों में इन निर्देशों का अध्ययन कर योजना के सफल क्रियान्वयन हेतु आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन गांव के संग अभियान 2023 के दौरान पट्टा जारी करने के संबंध में निर्देश
राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2023 एवं प्रशासन गांव के संग अभियान
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा प्रशासनिक आदेश क्रमांक एफ 139 (45) परावि/विधि/संशो/2021/190 दिनांक 02/06/2023 जारी किया गया है। इसके माध्यम से राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन करते हुए महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना विवरण: विभागीय अधिसूचना दिनांक 23.5.2023 (जी.एस.आर. 28) के तहत राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2023 लागू किए गए हैं जो तुरंत प्रभाव से प्रवृत्त हो गए हैं।
नियम 157 में संशोधन: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 के उप-नियम (1) के परंतुक में "प्रशासन गांव के संग अभियान 2021" के स्थान पर "प्रशासन गांव के संग अभियान 2021 और प्रशासन गांव के संग अभियान 2023" प्रतिस्थापित किया गया है।
पट्टा जारी करने की दर: प्रशासन गांव के संग अभियान 2023 के दौरान ग्राम पंचायत द्वारा जारी किए जाने वाले पट्टों की दर/प्रभार में छूट के संबंध में उपर्युक्त अधिसूचना के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
जारीकर्ता:निशु कुमार अग्निहोत्री, उपुयक्त एवं उप शासन सचिव (प्रथम), ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 के अंतर्गत पुराने गृहों के वि नियमितीकरण एवं पट्टा जारी करने के संबंध में दिशा-निर्देश
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश (क्रमांक: एफ.4(1) दिशा-निर्देश/विधि/पंव/2023/04, दिनांक: 11.1.23) के अनुसार राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157-पुराने गृहों के विनिियमितीकरण के अंतर्गत 300 वर्गगज एवं उससे अधिक क्षेत्रफल के भूखंड का पट्टा जारी करने के संबंध में निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
नियम संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 का नियम 157 (पुराने गृहों का विनिियमितीकरण)।
क्षेत्रफल: 300 वर्गगज संनिर्मित क्षेत्रफल से अधिक भूमि जो आवासीय परिसर के साथ उपयोग में आ रही खाली आबादी भूमि का पट्टा नियम 157(1)(ii), उपयुक्त खण्ड (i) में विनिर्दिष्ट क्षेत्रफल से अधिक क्षेत्रफल के लिए है।
शर्ते एवं प्रक्रिया: ऐसे अधिक क्षेत्रफल पर राजस्थान स्टाम्प नियम, 2004 के नियम 58 के खण्ड (ख) के अधीन गठित जिला स्तरीय समिति द्वारा सिफारिश की गई नई बाजार दरों का 25 प्रतिशत राशि जमा करके भूखंडधारी के उपयोग में आ रही कब्जा शुदा (संपूर्ण) आबादी भूमि का पट्टा जारी किया जा सकता है।
नियम 157 के तहत 300 वर्ग गज से अधिक भूमि की बाजार दर की 25 प्रतिशत राशी लेने के सम्बन्ध में
नियम 157 के तहत 300 वर्ग गज से अधिक भूमि की बाजार दर की 25 प्रतिशत राशी लेने के सम्बन्ध में
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 के अंतर्गत पुराने गृहों के वि नियमितीकरण और पट्टा जारी करने बाबत
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 के संबंध में निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी पत्र क्रमांक एफ.4(1)दिशा-निर्देश/विधि/पंव/2023/04 दिनांक 11.1.2023 के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 (पुराने गृहों के विियमितीकरण) के अंतर्गत 300 वर्गगज एवं उससे अधिक क्षेत्रफल के भूखंड का पट्टा जारी करने के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
विषय: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157-पुराने गृहों के विियमितीकरण के संबंध में।
क्षेत्रफल: 300 वर्गगज संनिर्मित क्षेत्रफल से अधिक भूमि जो आवासीय परिसर के साथ उपयोग में आ रही खाली आबादी भूमि का पट्टा नियम 157(1)(ii), उपयुक्त खण्ड (i) में विनिर्दिष्ट क्षेत्र से अधिक क्षेत्रफल के लिए है।
शर्तें एवं प्रक्रिया: ऐसे अधिक क्षेत्रफल पर राजस्थान स्टाम्प नियम, 2004 के नियम 58 के खण्ड (ख) के अधीन गठित जिला स्तरीय समिति द्वारा सिफारिश की गई नई बाजार दरों का 25 प्रतिशत राशि जमा करके भूखंडधारी के उपयोग में आ रही कब्जा शुदा (संपूर्ण) आबादी भूमि का पट्टा जारी किया जा सकता है।
यह आदेश समस्त जिलों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद को आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रेषित किया गया है।
पंचायत समिति एवं ग्राम पंचायत के स्वामित्व वाली भूमियों की सूचना भेजने बाबत निर्देश
पंचायत समिति एवं ग्राम पंचायत के स्वामित्व वाली भूमियों की सूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी पत्र क्रमांक एफ.4(14)लैण्ड बैंक/विधि/पंव्रा/2022/720 दिनांक 09/06/2022 के माध्यम से सभी मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद (राजस्थान) को पंचायत समिति एवं ग्राम पंचायत के स्वामित्व वाली भूमियों की सूचना भेजने के संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य उद्देश्य एवं पृष्ठभूमि
माननीय मंत्री महोदय, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज द्वारा दिनांक 15.3.2022 को राज्य विधानसभा में चर्चा के दौरान यह घोषणा की गई थी कि ग्राम पंचायतों की भूमि का रिकॉर्ड संधारित कर लैण्ड बैंक बनाया जाएगा, जिससे पंचायतों की निजी आय में वृद्धि हो सके।
समयबद्ध कार्यवाही हेतु निर्देश
15 दिवस की अवधि: समस्त विकास अधिकारीगण अपने कार्यालय के जिम्मेदार अधिकारी/कार्मिक को पाबंद करें तथा स्वयं क्षेत्र के राजस्व अधिकारियों (तहसीलदार, पटवारी आदि) के कार्यालय से संपर्क कर पंचायत समिति/ग्राम पंचायत के स्वामित्व की भूमि (चाहे वह आ आबादी किस्म की हो अथवा कृषि या अन्य किस्म की) का संपूर्ण विवरण प्राप्त कर जमाबंदी की प्रति प्राप्त करें। यह कार्य अधिकतम 15 दिवस में पूर्ण कराया जाए।
7 दिवस की अवधि: राजस्व रिकॉर्ड से सूचना प्राप्त होने के पश्चात संलग्न प्रपत्र में पंचायतवार/पंचायत समितिवार सूचना अधिकतम 07 दिवस में आवश्यक रूप से भरवाई जाए।
कुल समयसीमा: इस प्रकार वांछित प्रपत्र हर हाल में अधिकतम 21 दिवस की अवधि में पंचायती राज विभाग को भिजवाया जाना सुनिश्चित किया जाए।
राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 के नियम 157(1) के संबंध में मार्गदर्शन बाबत
राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 के नियम 157(1) पर मार्गदर्शन
कार्यालय जिला परिषद जोधपुर (ग्रामीण विकास प्रकोष्ठ) द्वारा जारी पत्र क्रमांक जिपजो/पंचायत/2022-23/1134 दिनांक 21/4/2022 के माध्यम से विकास अधिकारी, पंचायत समिति लूणी, जिला जोधपुर को राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 के संशोधित नियम 157(1) के संबंध में मार्गदर्शन प्रेषित किया गया है।
मुख्य बिंदु एवं मार्गदर्शन
विषय: राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 के संशोधित नियम 157(1) के सम्बन्ध में मार्गदर्शन बाबत।
संदर्भ: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), जयपुर का पत्र क्रमांक एफ.139(3) मार्गदर्शन/विधि/धरा/2022/291 दिनांक 23/3/2022 (तथा संयुक्त शासन सचिव (प्रथम) जयपुर के पत्रांक 291 दिनांक 23.03.2022)।
नियम 157(1) के अंतर्गत उठाए गए मुख्य प्रश्न:
नियम 157 पुराने गृहों का विनियामितीकरण (1) जहां व्यक्ति आबादी भूमि में पुराने गृह का कब्जा रखते हैं, और पट्टा जारी किये जाने के इच्छुक हैं, में 'व्यक्ति' शब्द को इस नियम के सन्दर्भ में परिभाषित/विवेचित करने के संबंध में।
किसी 'व्यक्ति' के आबादी भूमि में पुश्तैनी कब्जाशुदा मकान एक से अधिक होने पर उस व्यक्ति/उस परिवार के अन्य सदस्यों के नाम एक से अधिक पट्टे/विक्रय विलेख जारी किये जा सकते हैं अथवा नहीं।
विभाग द्वारा प्रेषित मार्गदर्शन:
'व्यक्ति' शब्द पंचायती राज अधिनियम, 1994 में नहीं है। उक्त शब्द की परिभाषा Gen. Clause Act के अनुसार व्यक्ति शब्द की परिभाषा Section 42 के अनुसार:- "Person shall include any company or association or body of individuals, whether incorporated or not;" है।
संबंधित प्रावधानों में ऐसे पट्टे/विक्रय विलेख जारी किए जाने के संबंध में स्पष्ट प्रावधान नहीं है।
कृषि भूमि के आवासीय संपरिवर्तन और पट्टा जारी करने के संबंध में मार्गदर्शन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग का महत्वपूर्ण मार्गदर्शन
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज) द्वारा कृषि भूमि के आवासीय संपरिवर्तन और पट्टा जारी करने के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
क्रमांक एवं दिनांक: क्रमांक एफ.139 (22) मार्गदर्शन/पाली/विधि/परां/2022/4-13, दिनांक 13/4/2022 (जिला कलेक्टर, पाली को संबोधित)।
विषय: ग्राम पंचायत रायपुर, पं.स. रायपुर जिला पाली में तहसीलदार द्वारा खातेदारी भूमि का आवासीय संपरिवर्तन (कृषि भूमि से अकृषि) के पश्चात उस भूमि के पंचायत क्षेत्र के क्षेत्राधिकार में आने या नहीं आने के संबंध में मार्गदर्शन।
प्रमुख स्पष्टीकरण: कृषि भूमि का आवासीय संपरिवर्तन करने के पश्चात वह भूमि संबंधित खातेदार / अन्तरिती के नाम पर ही दर्ज रहती है, इसलिए यह ग्राम पंचायत की आबादी में नहीं मानी जा सकती है।
ग्राम पंचायत का क्षेत्राधिकार: ग्राम पंचायत को ऐसी भूमि के संबंध में पट्टा जारी करने या अन्य कोई कार्यवाही करने की अधिकारिता नहीं है। ऐसी भूमि पर विकास कार्य संपरिवर्तन आदेश के अनुसार ही करवाए जा सकते हैं।
अन्य संबंधित आदेश: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के क्रमांक एफ.139 ()पराविवि/कृषि भू.पट्टा/अलवर/2016/368 दिनांक 02-06-2016 के अनुसार राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में ग्राम पंचायतों को पंचायत क्षेत्र में स्थित आबादी भूमि का ही पट्टा दिये जाने के प्रावधान हैं। निजी खातेदारों में परिवर्तित आबादी भूमि का पट्टा दिये जाने के प्रावधान नहीं हैं। ऐसे प्रकरणों में राजस्व विभाग द्वारा ही कार्यवाही की जाती है।
ग्राम पंचायतों/पंचायत समितियों द्वारा पट्टा बही का संधारण किए जाने बाबत् परिपत्र
पट्टा बही के संधारण के संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा दिनांक 30/03/2022 को एक परिपत्र जारी किया गया है जिसका क्रमांक क्र.एफ.139(06)निर्देश/विधि/पंवरे/2022/327 है।
इस परिपत्र का मुख्य उद्देश्य ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों द्वारा पट्टा बही का उचित संधारण सुनिश्चित करना है।
मुख्य बिंदु:
विभाग के ध्यान में लाया गया था कि कतिपय पंचायत समिति स्तर पर ग्राम पंचायतों द्वारा जारी पट्टों का रिकॉर्ड संधारित नहीं किया जा रहा है, जिससे भ्रष्टाचार संबंधी प्रकरण प्राप्त हो रहे हैं।
राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1996 के नियम 168 के तहत नीलामी, परक्रामण या आवंटन द्वारा किए गए समस्त विक्रयों, जिनके लिए पट्टे जारी किए जाएं, अभिलेख पंचायत द्वारा प्ररूप 24 में पट्टा बही में रखे जाने का प्रावधान है।
समस्त विकास अधिकारियों, पंचायत समिति (राजस्थान) को निर्देशित किया गया है कि राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1996 के नियम 168 में वर्णित प्रावधानों की पालना कढ़ाई से अमल में लाई जाए।
उक्त परिपत्र की अवहेलना किए जाने वाले संबंधित विकास अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
राजमार्ग एवं अन्य सड़कों के मध्य बिंदु से छोड़ी जाने वाली भूमि के संबंध में।
विषयः- राजस्थान भू-राजस्व (ग्रामीण क्षेत्र में कृषि भूमि का अकृषि प्रयोजन हेतु संपरिवर्तन) नियम, 2007 के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अन्य सड़कों के मध्य बिंदु से छोड़ी जाने वाली भूमि के संबंध में।
राजस्थान भू-राजस्व (ग्रामीण क्षेत्र में कृषि भूमि का अकृषि प्रयोजन हेतु संपरिवर्तन) नियम, 2007 के नियम 4 उन श्रेणियों की भूमियों का अंकन है, जिसका संपरिवर्तन अनुज्ञात नहीं किया जा सकता है। उक्त नियमों के नियम (ख) में यह प्रावधान है किः-
"किसी भी रेल लाईन, राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य मार्ग या केन्द्रीय या राज्य सरकार द्वारा इस निमित्त बनाये गये किसी भी अधिनियम या नियमों में विनिर्दिष्ट हो, की सीमाओं के भीतर या उद्योग स्थापित करने के लिए, भारतीय सड़क कांग्रेस के मार्गदर्शनों में राष्ट्रीय राज मार्ग / राज्य राज मार्ग / मुख्य जिला सड़क / अन्य जिला सड़क / ग्रामीण सड़को के मध्य बिन्दु से, विनिर्दिष्ट सीमा, जो दीर्घती हो, के भीतर आने वाली भूमि"
उक्त प्रावधानानुसार इण्डियन रोड़ कांग्रेस के नोर्म्स अनुसार सड़क के मध्य बिंदु से भूमि छोड़कर संपरिवर्तन किये जाने के प्रावधान है। इस संबंध में इण्डियन रोड़ कांग्रेस के प्रावधानानुसार किस श्रेणी की सड़क के मध्य से कितनी भूमि छोड़कर संपरिवर्तन किया जा सकता है, के संबंध में समय-समय पर विभाग से मार्गदर्शन अपेक्षित किया जाता है। इस संबंध में यह स्पष्ट किया जाता है कि राजस्थान भू-राजस्व (ग्रामीण क्षेत्र में कृषि भूमि का अकृषि प्रयोजन हेतु संपरिवर्तन) नियम, 2007 के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग / राज्य राजमार्ग / मेजर डिस्ट्रिक्ट रोड़ / अन्य डिस्ट्रिक्ट रोड़ / ग्रामीण सड़को पर स्थित कृषि भूमियों का संपरिवर्तन केन्द्र बिन्दु से निम्नानुसार दूरी छोड़कर किया जावेंः-
क्र.स.
सड़क श्रेणी
केन्द्र बिन्दु से बिल्डिंग लाईन की दूरी जिसके भीतर आने वाली भूमि संपरिवर्तन योग्य नही है।
केन्द्र बिंदु से कन्ट्रोल लाईन की दूरी जहां तक भवन निर्माण संक्रियाओं को नियंत्रित किया जाता है।
1
राष्ट्रीय / राज्य राजमार्ग
40 मीटर
75 मीटर
2
एम.डी.आर.
25 मीटर
50 मीटर
3
ओ.डी.आर.
15 मीटर
17.5 मीटर
4
ग्रामीण सड़क
12.5 मीटर
15 मीटर
राष्ट्रीय राजमार्ग / राज्य राजमार्ग / मेजर डिस्ट्रिक्ट रोड़ / अन्य डिस्ट्रिक्ट रोड़ / ग्रामीण सड़कों पर कन्ट्रोल लाईन (ऊपर वर्णित अनुसार) तक भवन निर्माण संक्रियाओं को नियंत्रित किया जाना आवश्यक है।
अतः केन्द्र बिन्दु से बिल्डिंग लाईन एवं कन्ट्रोल लाईन के भीतर निर्माण संक्रियाए उक्त सड़कों के लिये सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति के बिना नहीं करने हेतु संपरिवर्तन आदेश में शर्त अंकित की जावें।
उक्त परिपत्र, समय-समय पर इण्डियन रोड़ कांग्रेस द्वारा जारी नोर्म्स के अध्यधीन रहेगा।
प्रशासन गांवों के संग अभियान-2021 की अवधि बढ़ाने बाबत अधिसूचना
प्रशासन गांवों के संग अभियान-2021 की अवधि विस्तार
राजस्थान सरकार राजस्व (ग्रुप-6) विभाग द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक प.3(17)राज-6/2021/143, दिनांक 15/12/2021 के अनुसार 'प्रशासन गांवों के संग अभियान-2021' की अवधि में संशोधन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
संशोधित अवधि: उक्त अभियान अब दिनांक 02.10.2021 से 28.02.2022 तक के लिये प्रभावशाली रहेगा।
पूर्व अवधि: अधिसूचना में उल्लेखित पहले की अवधि (दिनांक 02.10.2021 से 17.12.2021) के स्थान पर अब इसे आगे बढ़ाया गया है।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से महावीर प्रसाद मीना, संयुक्त शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है तथा इसकी प्रतिलिपि विभिन्न संबंधित विभागों एवं अधिकारियों को सूचनाथ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित की गई है।
33 केवी जी.एस.एस. बागावास अहिरान हेतु भूमि आवंटन के संबंध में परिपत्र
भूमि आवंटन के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज) द्वारा 33 केवी जी.एस.एस. बागावास अहिरान हेतु भूमि आवंटन के संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं।
राजस्थान पंचायती राज विभाग 1996 के नियम 162(2) के प्रावधानों के अनुसार सरकारी संस्थाओं को ही निःशुल्क भूमि आवंटन किये जाने का प्रावधान है।
विद्युत वितरण निगम लिमिटेड इस श्रेणी में नहीं आता है।
यदि इस निगम को जी.एस.एस. हेतु पंचायत की उक्त आबादी भूमि की आवश्यकता है, तो वांछित भूमि संबंधित ग्राम पंचायत से नियमानुसार क्रय कर सकता है।
यह सक्षम स्तर से अनुमोदित है।
प्रशासन गांवों के संग अभियान-2021 के दौरान जारी पट्टों के संबंध में मार्गदर्शन
प्रशासन गांवों के संग अभियान-2021 दिशा-निर्देश
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा पट्टों के संबंध में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन जारी किया गया है। यह पत्र क्रमांक एफ.4(13)मार्गदर्शन/विधि/पंवरा/2021/960 दिनांक 30.11.2021 को जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
विषय: प्रशासन गांवों के संग अभियान-2021 के दौरान जारी किये जाने वाले पट्टों के संबंध में मार्गदर्शन।
निर्देश: पट्टों के हस्तांतरण एवं नामांतरण के संबंध में स्पष्ट किया गया है कि हस्तांतरण एवं नामांतरण के प्रकरणों में नया पट्टा जारी नहीं किया जाकर, अन्तरण की प्रविष्टि मूल पट्टे पर अंकित कर कार्यवाही की जा सकती है।
अधिकारी: यह आदेश (पी.सी. किशन) शासन सचिव, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा जारी किया गया है।
प्रशासन गांवों के संग अभियान-2021 के दौरान जारी किये जाने वाले पट्टों के संबंध में मार्गदर्शन
प्रशासन गांवों के संग अभियान-2021: पट्टों के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 26.11.2021 को आदेश क्रमांक एफ.4(13)मार्गदर्शन/विधि/पंव्रा/2021/957 जारी किया गया है। यह आदेश सभी मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद (राजस्थान) को 'प्रशासन गांवों के संग अभियान-2021' के दौरान जारी किए जाने वाले पट्टों के संबंध में मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए है।
मुख्य बिंदु:
चोरी/नष्ट/गुम हुए मूल पट्टों के संबंध में: यदि 1994 से पूर्व या राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 एवं नियम, 1996 के तहत जारी मूल पट्टा चोरी, गुम या नष्ट हो गया हो:
यदि ग्राम पंचायत के रिकॉर्ड में कार्यालय प्रति उपलब्ध है: आवेदक से FIR की प्रति, शपथ पत्र (पट्टा चोरी होने पर) या शपथ पत्र (पट्टा नष्ट/गुम होने पर) प्राप्त कर, राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के अनुसार डुप्लीकेट पट्टा जारी किया जा सकता है।
यदि ग्राम पंचायत के रिकॉर्ड में कार्यालय प्रति उपलब्ध नहीं है: FIR की प्रति, शपथ पत्र, तथा पट्टा नष्ट/गुम होने पर आवेदक का शपथ पत्र लेकर स्थानीय समाचार पत्रों में आपत्ति आमंत्रण नोटिस प्रकाशित कराया जाएगा। आपत्तियों के निस्तारण के बाद नियमानुसार नया पट्टा जारी किया जा सकता है।
मूल पट्टा प्रस्तुत किए जाने पर पुनर्विसमयकरण/विभाजन/नामान्तरण/भू-उपयोग परिवर्तन: यदि आवेदक मूल पट्टा प्रस्तुत करे और पंचायत रिकॉर्ड में कार्यालय प्रति संधारित न हो, तो आवेदक से शपथ पत्र लेकर, स्थानीय समाचार पत्रों में आपत्ति नोटिस प्रकाशित करवाकर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
आवासीय भूमि का उप-विभाजन/पुनर्गठन: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के तहत प्रारूप-52 में जारी अनुज्ञा के पश्चात संबंधित ग्राम पंचायत द्वारा आवेदक का मूल पट्टा जमा कराकर अनुज्ञा के अनुसार नया पट्टा जारी किया जाएगा।
पट्टों का पंजीयन: आवासीय पट्टों का पंजीयन प्रचलित कानूनों के तहत एक अनिवार्य विधिक प्रक्रिया है, इसमें छूट प्रदान नहीं की जा सकती।
आबादी भूमि (राजस्व रिकॉर्ड): जिन ग्राम पंचायतों में जिला कलेक्टर/उपखण्ड अधिकारी एवं तहसीलदार द्वारा आबादी हेतु कुछ खसरे दर्ज किए जा रहे हैं और उनमें पक्के मकान हैं, तो राजस्व रिकॉर्ड में ग्राम पंचायत के नाम स्वामित्व दर्ज होने पर नियममानुसार पट्टे जारी किए जा सकते हैं।
नियम-157 के तहत कार्रवाई: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के लागू होने के पश्चात की अवधि में निहित भूमि पर पात्रता रखने वाले व्यक्ति को नियम-157 के तहत प्रक्रिया पूर्ण कर पट्टा दिया जा सकता है।
राजस्थान पंचायती राज (चतुर्थ संशोधन) नियम, 2021 - प्रशासन गांवों के संग अभियान के दौरान शुल्क में छूट
राजस्थान पंचायती राज (चतुर्थ संशोधन) नियम, 2021
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा अधिसूचना दिनांक 06 अक्टूबर, 2021 जारी कर राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन किया गया है। इसके तहत 'राजस्थान पंचायती राज (चतुर्थ संशोधन) नियम, 2021' बनाए गए हैं जो तुरंत प्रभाव से लागू हो गए हैं।
प्रमुख बिंदु:
नियम 157 का संशोधन: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 के उप-नियम (1) के अंतर्गत एक नया परंतुक जोड़ा गया है।
प्रशासन गांवों के संग अभियान 2021: इस अभियान की समयावधि के दौरान खंड (i) और (ii) के अधीन विनिर्दिष्ट दरों के पचास प्रतिशत (50%) के समतुल्य दर से ही शुल्क प्रभारित किया जाएगा।
यह आदेश राज्यपाल के आदेश से डॉ. प्रेम सिंह चारण, संयुक्त शासन सचिव द्वारा [सं. एफ.139(45)पंरावि/विधि/संशो/2021/860] के अंतर्गत जारी किया गया है।
आबादी भूमि के भू-परिवर्तन, उप-विभाजन, पुनर्गठन, पुनर्रधिमान्यकरण एवं हस्तांतरण संबंधी दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की आज्ञा दिनांक 30.09.2021
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा क्रमांक एफ.4(3)निर्देश/पट्टा/विधि/पंवै/2020/849 दिनांक 30.9.2021 के माध्यम से ग्राम पंचायतों की आबादी भूमि के आवासीय से अन्य उपयोग में भू-परिवर्तन, भू-खंडों के उप-विभाजन, पुनर्गठन, पट्टों के पुनर्रधिमान्यकरण (Revalidation) तथा हस्तांतरण/नामांतरण (Mutation) के संबंध में विस्तृत प्रक्रिया और दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
आवासीय भूमि का वाणिज्यिक एवं अन्य प्रयोजनार्थ भू-उपयोग संपरिवर्तन: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 173-क से 173-ज के अंतर्गत विभिन्न प्रयोजनों (वाणिज्यिक, औद्योगिक, लोक उपयोग, संस्थागत, चिकित्सा सुविधा, सौर या पवन ऊर्जा संयंत्र) के लिए संपरिवर्तन शुल्क और प्रक्रिया निर्धारित की गई है।
आपत्तियां आमंत्रित करना व नोटिस: भूमि उपयोग परिवर्तन के आवेदन पर आसपास के क्षेत्र में नोटिस चस्पा करके, डुगडुगी बजवाकर या समाचार पत्र में प्रकाशित कर 30 दिवस के भीतर आपत्तियां आमंत्रित की जाती हैं।
भू-खंडों का उप-विभाजन एवं पुनर्गठन: नियम 173-ख के अंतर्गत भू-खंडों के उप-विभाजन या पुनर्गठन के लिए प्रारूप 51 में आवेदन करना होता है, जिसे मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद द्वारा 45 दिनों में निपटाया जाता है।
पट्टों का पुनर्रधिमान्यकरण (Revalidation): निर्धारित समय सीमा समाप्त हो चुके पट्टों के पुनर्रधिमान्यकरण हेतु नियम 157, 158, 159 एवं 162 के अधीन फीस निर्धारित की गई है।
हस्तांतरण/नामांतरण (Mutation): आबादी भूमि के पट्टों के हस्तांतरण हेतु उत्तराधिकार, वसीयतनामा, गिफ्ट डीड आदि मामलों के लिए आवश्यक दस्तावेज और शुल्क/दरें (प्रारूप 48 से 52) तय की गई हैं।
स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन बाबत महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन बाबत निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 18.01.2021 को 'स्वामित्व योजना' के क्रियान्वयन के संबंध में महत्वपूर्ण आदेश जारी किया गया है। राष्ट्रीय पंचायत दिवस (24 अप्रैल 2020) पर केंद्र सरकार द्वारा आरंभ की गई इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पंचायती राज पर इसके दूरगामी प्रभावों को देखते हुए राजस्व विभाग एवं पंचायती राज विभाग के संयुक्त प्रयासों से क्रियान्वयन करना है।
योजना की मुख्य बातें और प्रक्रिया
ड्रोन फोटोग्राफी और मैपिंग: भारतीय सर्वेक्षण विभाग (Survey of India) द्वारा प्रत्येक राजस्व ग्राम की आबादी भूमि का मानचित्र ड्रोन के जरिए फोटोग्राफी कर तैयार किया जाएगा।
चूना मार्किंग: ड्रोन उड़ान से पहले राजस्व ग्राम की आबादी भूमि की बाहरी सीमा (outer line) पर चार इंच चौड़ाई की चूना लाइन डालकर सीमा मार्क की जाएगी। खाली पड़े भूखंडों को भी चूना लाइन डालकर चिह्नित किया जाएगा।
सर्वे समिति का गठन: प्रत्येक राजस्व ग्राम हेतु सर्वे समिति का गठन किया जाएगा जिसमें ग्राम सेवक, दो वार्ड पंच (संबंधित राजस्व ग्राम व अन्य वार्ड पंच) और पंचायत का एक कार्मिक (कनिष्ठ लिपिक अथवा ग्राम रोजगार सहायक) शामिल होंगे। यह समिति प्राप्त इमेज मैप के अनुसार प्रत्येक भूखंड और निर्मित भवन का सर्वे कर निर्धारित प्रपत्र में जानकारी संकलित करेगी।
आपत्तियां एवं निस्तारण: ग्राम पंचायत द्वारा सर्वे प्रपत्र और इमेज मैप की प्रति पंचायत भवन एवं सार्वजनिक स्थल पर चस्पा की जाएगी। राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम-148 के प्रावधानुसार 07 दिवस के भीतर आपत्तियां दर्ज कराई जा सकेंगी, जिनका निस्तारण ग्राम सभा के माध्यम से किया जाएगा।
पट्टा वितरण: आपत्तियों के निराकरण के बाद फाइनल इमेज मैप (आईडी नंबरिंग सहित) के आधार पर संबंधित लाभार्थियों को राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के प्रावधानों के तहत पट्टा, रजिस्ट्री एवं पीडीएफ कॉपी मोबाइल नंबर पर उपलब्ध कराई जाएगी।
प्रथम चरण: राज्य में इस योजना का सबसे पहले क्रियान्वयन जैसलमेर जिले में किया जाना है।
स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन हेतु प्रभारी अधिकारी की नियुक्ति का आदेश
स्वामित्व योजना आदेश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.4(5)स्वामित्व/विधि/पंव/2020/45 दिनांक 13.01.2021 के अनुसार 'स्वामित्व योजना' के क्रियान्वयन हेतु राज्य स्तर पर SVAMITVA Dashboard integration के लिए प्रभारी अधिकारी नियुक्त किया गया है।
प्रभारी अधिकारी का विवरण:
नाम: श्री पी.एन. मीणा
पदनाम: ए.सी.पी. (उप निदेशक), पंचायती राज विभाग
मोबाइल नंबर: 9784590643
यह आदेश शासन सचिव एवं आयुक्त महोदय द्वारा जारी किया गया है तथा इसकी प्रतिलिपि संबंधित विभागों एवं अधिकारियों को सूचनार्थ प्रेषित की गई है।
राजस्थान में स्वामित्त्व योजना के क्रियान्वयन बाबत दिशा-निर्देश
स्वामित्त्व योजना का क्रियान्वयन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.4(1)स्वामित्त्व/विधि/पंश/2020/4046 दिनांक 07.09.2020 के अंतर्गत 'स्वामित्त्व योजना' के क्रियान्वयन के संबंध में विस्तृत निर्देश जारी किए गए हैं। इस पत्र के साथ भारत सरकार द्वारा जारी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) भी संलग्न किया गया है।
योजना का मुख्य उद्देश्य
ग्रामीण भारत में आबाद क्षेत्रों (Abadi Land) की ड्रोन सर्वेक्षण तकनीक से पैमाइश कर डिजिटल मानचित्र तैयार करना।
ग्रामीण परिवारों को 'प्रॉपर्टी कार्ड' (अधिकारों के अभिलेख) वितरित करना ताकि वे अपनी संपत्ति का उपयोग बैंक ऋण और अन्य वित्तीय लाभ प्राप्त करने के लिए कर सकें।
ग्राम पंचायतों में संपत्ति कर और संपत्ति रजिस्टर को अद्यतन कर कर संग्रहण प्रणाली को सुदृढ़ बनाना।
ग्रामीण संपत्ति से जुड़े आपसी विवादों और अदालतों में लम्बित मुकदमों के त्वरित निराकरण का मार्ग प्रशस्त करना।
प्रमुख प्रक्रिया एवं चरण (Standard Operating Procedure)
CORS नेटवर्क की स्थापना: पायलट चरण के तहत राजस्थान और पंजाब राज्यों में सतत प्रचलित संदर्भ स्टेशन (CORS) नेटवर्क की स्थापना।
तैयारी की गतिविधियां: कलेक्टर/सक्षम प्राधिकारी द्वारा सार्वजनिक नोटिस के माध्यम से सर्वेक्षण क्षेत्र की अधिसूचना, ग्राम सभा का आयोजन, और राजस्व विभाग एवं ग्राम पंचायत अधिकारियों द्वारा सीमाओं का चूना लाइनों से चिह्नीकरण।
ड्रोन सर्वेक्षण एवं डेटा प्रोसेसिंग: भारतीय सर्वेक्षण विभाग (Survey of India) द्वारा ड्रोन के माध्यम से हवाई तस्वीरें लेना और जीआईएस (GIS) लैब में डेटा प्रोसेसिंग कर ऑर्थो-रेक्टिफाइड इमेज (ORI) तथा लैंड पार्सल मैप्स (LPM) तैयार करना।
दावा और आपत्ति निस्तारण: ग्राम सभा, भूस्वामियों और राजस्व अधिकारियों की मदद से स्वामित्व का सत्यापन तथा प्राप्त आपत्तियों का निस्तारण।
प्रॉपर्टी कार्ड का वितरण: राजस्व विभाग द्वारा अंतिम मानचित्रों और टेक्स्ट डेटा के आधार पर ग्रामीणों को प्रॉपर्टी कार्ड जारी करना।
संबंधित विभाग एवं अधिकारी
इस योजना के क्रियान्वयन में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राज्य राजस्व विभाग, भारतीय सर्वेक्षण विभाग (Survey of India), और पंचायती राज संस्थाएं (सरपंच, पंचायत सचिव, ग्राम सेवक) संयुक्त रूप से कार्य कर रहे हैं।
आबादी भूमि विक्रय और आवंटन के संबंध में राज्य सरकार के अनुमोदन बाबत निर्देश
आबादी भूमि विक्रय एवं आवंटन के संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 13/08/2020 को आदेश क्रमांक एफ.4(3)निर्देश/विधि/पंश/2020/3955 जारी किया गया है। यह आदेश समस्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद को संबोधित है।
दस्तावेज का मुख्य उद्देश्य
इस पत्र का मुख्य उद्देश्य ग्राम पंचायत की आबादी भूमि के विक्रय एवं आवंटन के लिए राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के अध्याय 9 में नियम 140-166 के तहत राज्य सरकार का अनुमोदन प्राप्त करने की प्रक्रिया को स्पष्ट करना और जिला परिषद स्तर पर नियमों की पालना सुनिश्चित करना है।
मुख्य बिंदु और निर्देश
प्रक्रिया का पालन: आबादी भूमि के विक्रय एवं आवंटन से संबंधित समस्त प्रकरण ग्राम पंचायत/पंचायत समितियों द्वारा संबंधित मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद के माध्यम से ही राज्य सरकार के अनुमोदनार्थ प्रेषित किए जाएं। सीधे भेजे जाने पर विभाग द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।
जिला परिषद स्तर पर परीक्षण: मुख्य कार्यकारी अधिकारी द्वारा प्रकरणों का अपने स्तर पर परीक्षण किया जाए। नियमों के विपरीत प्रकरणों को जिला परिषद स्तर पर ही खारिज कर संबंधित ग्राम पंचायत को लौटाया जाए। विभाग को भेजने से पूर्व उचित औचित्यपूर्ण अभिषांशा दी जाए।
अनावश्यक प्रकरणों को न भेजना: जिन प्रकरणों में राज्य सरकार के अनुमोदन या अनुमति की आवश्यकता प्रतीत नहीं होती, ऐसे प्रकरण विभाग को प्रेषित न किए जाएं।
निशुल्क आवंटन संबंधी छूट: विभागीय अधिसूचना दिनांक 06.04.2017 के तहत नियम-162(2) के अंतर्गत सरकारी कार्यालय के भवन हेतु आबादी भूमि निःशुल्क आवंटित किए जाने की निर्धारित सीमा के अनुसार ग्राम पंचायत, पंचायत समिति एवं जिला परिषद को अधिकृत किया जा चुका है, अतः ऐसे प्रकरण विभाग को प्रेषित न किए जाएं।
आबादी भूमि पर से अतिक्रमण हटाने बाबत महत्वपूर्ण निर्देश
आबादी भूमि पर से अतिक्रमण हटाने बाबत निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा आबाती भूमि पर से अतिक्रमण हटाने के संबंध में आदेश जारी किया गया है।
निर्देश: मुख्यमंत्री सूचना तंत्र पर पंचायती राज विभाग के जन घोषणा पत्र में बिंदु संख्या 27.8.04 के अनुसार अतिक्रमणियों पर शिकंजा कसा जाएगा एवं जमीनों के मामलों में धोखाधड़ी रोकने के लिए संबंधित अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी एवं हाउसिंग सोसाइटियों की जिम्मेदारी सुनिश्चित की जाएगी की पालना सुनिश्चित की जानी है।
नियम संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम-165 के अन्तर्गत उपरोक्तानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
यह पत्र मगनलाल योगी, आयुक्त एवं संयुक्त शासन सचिव (प्रथम) द्वारा जारी किया गया है तथा समस्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद को प्रेषित किया गया है।
नियम 167.क - पट्टा पुन्र्विधिमान्य करण हेतु मूल पट्टे पर लिखा जाने वाला आदेश
नियम 167.क - पट्टा पुन्र्विधिमान्य करण हेतु मूल पट्टे पर लिखा जाने वाला आदेश
पुराने पट्टों के पुनर्विधमान्यकरण (Revalidation) किये जाने बाबत आदेश
पुराने पट्टों का पुनर्विधमान्यकरण (Revalidation)
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा पुराने पट्टों के पुनर्विधमान्यकरण के संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
नया नियम: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में नया नियम-167क जोड़ा गया है जिसके तहत पंचायत द्वारा जारी किये गए विक्रय विलेख, पट्टा या पट्टा विलेख का पुनर्विधमान्यकरण (Revalidation) किया जा सकता है।
शर्तें: पट्टे का पुनर्विधमान्यकरण ग्राम पंचायत में उपलब्ध रिकॉर्ड से मिलान कर पट्टा नियमानुसार जारी होने की स्थिति में तथा पट्टाधारक स्वयं या उसके वारिसान द्वारा प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करने पर ही किया जाएगा।
प्रारूप: पट्टे का पुनर्विधमान्यकरण मूल पट्टे पर ही निर्धारित प्रारूप में किया जायेगा जिसमें ग्राम पंचायत की बैठक दिनांक, प्रस्ताव संख्या और पुनर्विधमान्यकरण की दिनांक का उल्लेख किया जाएगा।
हस्ताक्षर: इस प्रक्रिया में ग्राम विकास अधिकारी और सरपंच के हस्ताक्षर होंगे।
विशेष आवासीय पट्टा एवं भू-खण्ड आवंटन अभियान बाबत निर्देश
विशेष आवासीय पट्टा / भू-खण्ड आवंटन अभियान
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा क्रमांक एफ.4(4)पट्टा अभि/विधि/पंव्रा/2019/200 दिनांक 19.02.2019 (22.2.19) के तहत विशेष आवासीय पट्टा/भू-खण्ड आवंटन अभियान के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
अभियान के मुख्य बिंदु:
राज्य में विशेष अभियान चलाकर पंचायतों के पट्टाहीन पात्र व्यक्तियों को आबादी भूमि के पट्टे एवं भू-खण्डहीन पात्र व्यक्तियों को भू-खण्ड आवंटित किए जाएंगे।
अभियान के लिए जिला स्तर पर संबंधित जिला कलेक्टर प्रभारी होंगे।
ग्राम पंचायतों को उनकी आबादी भूमि का सीमाज्ञान करवाना सुनिश्चित किया जाए ताकि पट्टे आवंटन में समस्या न आए।
जहाँ ग्राम पंचायतों के पास आबादी भूमि उपलब्ध नहीं है, वहाँ सिवायचक भूमि या राज्य सरकार के स्वामित्व की अन्य उपयोग की भूमि का उपयोग परिवर्तन कर आवंटन हेतु उपलब्ध कराई जाए, किंतु चारागाह भूमि को आवश्यकतानुसार नियमानुसार रूपांतरित किया जाए।
पट्टा/भू-खण्ड आवंटन से संबंधित लंबित प्रकरणों की सूची कारणों सहित तीन दिवस की अवधि में जिला परिषद को प्राप्त कर मुख्य कार्यकारी अधिकारी स्तर से मार्गदर्शन दिया जाए।
प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के पात्र परिवारों को प्राथमिकता प्रदान करते हुए आवासीय पट्टा उपलब्ध कराया जाना सुनिश्चित करें।
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2018 - अधिसूचना
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2018
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 10.7.2018 की अधिसूचना संख्या एफ 4(7)अमे/रूल्स/लोगल/पी.आर./2014/927 के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
नियम का नाम: इन नियमों का नाम राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2018 है।
प्रवृत्ति: ये नियम तुरंत प्रवृत्त होंगे।
नियम 173-ङ का संशोधन:
उप-नियम (1) में, विद्यमान अभिव्यक्ति "द्वारा इस रूप में नियुक्त और अधिसूचित अपील प्राधिकारी" हटाई जाएगी।
उप-नियम (3) में, विद्यमान अभिव्यक्ति "अपील प्राधिकारी" के स्थान पर "राज्य सरकार" प्रतिस्थापित की जाएगी।
राजस्थान पंचायती राज (दूसरा संशोधन) नियम, 2018 - आबादी क्षेत्र में भूमि उपयोग परिवर्तन और भू-खण्डों के उप-विभाजन संबंधी दिशा-निर्देश
राजस्थान पंचायती राज (दूसरा संशोधन) नियम, 2018
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 10 जुलाई 2018 की अधिसूचना (जी.एस.आर. 61) के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन करते हुए नया 'अध्याय-9क' अंतःस्थापित किया गया है। यह संशोधन ग्राम पंचायतों के आबादी क्षेत्र में भूमि उपयोग परिवर्तन और भू-खण्डों के उप-विभाजन व पुनर्गठन से संबंधित है।
मुख्य बिंदु और प्रावधान
आबादी क्षेत्र में भूमि उपयोग का परिवर्तन (नियम 173-क): ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग के अंतर्गत कोई भी व्यक्ति अपने द्वारा धारित आबादी क्षेत्र की भूमि के उपयोग परिवर्तन के लिए प्रारूप 48 में आवेदन कर सकेगा। इसके लिए आपत्तियां आमंत्रित की जाती हैं और निर्धारित प्रक्रिया के बाद संपरिवर्तन प्रभार जमा कराके नया पट्टा विलेख (प्रारूप 50) जारी किया जाता है।
संपरिर्वतन प्रभार की दरें:
वाणिज्यिक प्रयोजन: 10 रुपये प्रति वर्ग मीटर या आवासीय आबादी भूमि की जिला स्तरीय समिति (जि.स्त.स.) दर की रकम का दस प्रतिशत, जो भी उच्चतर हो।
औद्योगिक क्षेत्र/संपदा-प्रयोजन: 5 रुपये प्रति वर्ग मीटर या जि.स्त.स. दर की 5 प्रतिशत, जो भी उच्चतर हो।
लोक उपयोग प्रयोजन: 1000 वर्ग मीटर तक निःशुल्क और 1000 वर्ग मीटर से अधिक के लिए 5 रुपये प्रति वर्ग मीटर या जि.स्त.स. दर का 5 प्रतिशत।
संस्थागत प्रयोजन: 5 रुपये प्रति वर्ग मीटर या जि.स्त.स. दर का 5 प्रतिशत।
चिकित्सा सुविधा-प्रयोजन: 10 रुपये प्रति वर्ग मीटर या जि.स्त.स. दर का 10 प्रतिशत।
सौर या पवन ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना: औद्योगिक प्रयोजन के लिए विहित दरों का 10 प्रतिशत।
भू-खण्डों का उप-विभाजन और पुनर्गठन (नियम 173-ख): ग्राम पंचायत क्षेत्र में स्थित भू-खण्डों के उप-विभाजन या पुनर्गठन के लिए प्रारूप 51 में आवेदन करना होगा। इसके लिए स्थल योजना, मूल नक्शा और अन्य विवरण संलग्न करना अनिवार्य है।
आबादी भूमि के अभिलेख का रखरखाव (नियम 173-छ): प्रत्येक पंचायत प्रारूप 53 में गांव के पंचायत क्षेत्र के भीतर स्थित आबादी भूमि का अभिलेख रखेगी।
नए प्रारूप (प्रारूप 48 से 53): नियमों के अंतर्गत भूमि उपयोग परिवर्तन, अनुज्ञा, भू-खंड उप-विभाजन आवेदन और आबादी भूमि रजिस्टर के लिए नए प्रारूप जोड़े गए हैं।
राजस्थान पंचायती राज (दूसरा संशोधन) नियम, 2018 - आ आबादी क्षेत्र में भूमि उपयोग परिवर्तन एवं भू-खंडों के उप-विभाजन संबंधित अधिसूचना
राजस्थान पंचायती राज (दूसरा संशोधन) नियम, 2018
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 10 जुलाई, 2018 की अधिसूचना (जी.एस.आर.61) के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन करते हुए नया 'अध्याय-9क' अंतःस्थापित किया गया है। यह दस्तावेज मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी भूमि के उपयोग परिवर्तन और भू-खंडों के उप-विभाजन या पुनर्गठन से संबंधित है।
मुख्य बिंदु और विशेषताएँ:
नया अध्याय-9क: आबादी क्षेत्र में भूमि के उपयोग का परिवर्तन और भू-खंडों के उप-विभाजन/पुनर्गठन की प्रक्रिया का विस्तृत प्रावधान।
प्रारूप 48: किसी व्यक्ति द्वारा आबादी क्षेत्र में भूमि उपयोग परिवर्तन के लिए प्राधिकृत अधिकारी को आवेदन करने हेतु निर्धारित प्रारूप।
संपरिवर्तन प्रभार (Conversion Charges): गैर-आवासीय प्रयोजनों (जैसे वाणिज्यिक, औद्योगिक, संस्थागत, चिकित्सा सुविधा आदि) के लिए संपरिवर्तन प्रभार की दरें निर्धारित की गई हैं।
प्रारूप 51: गाँव के आबादी क्षेत्र में स्थित भूमि के भू-खंडों के उप-विभाजन या पुनर्गठन की अनुज्ञा प्राप्त करने के लिए आवेदन।
अभिलेख संधारण: प्रत्येक पंचायत द्वारा 'प्रारूप 53' में गाँव के पंचायत क्षेत्र के भीतर स्थित आबादी भूमि का अभिलेख (आबादी भूमि का रजिस्टर) रखा जाएगा।
यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र में दिनांक 10 जुलाई, 2018 को प्रकाशित की गई थी और इसके तहत नए प्रारूप (प्रारूप 48 से प्रारूप 53) जोड़े गए हैं ताकि ग्राम पंचायतों में भूमि उपयोग परिवर्तन और उप-विभाजन से जुड़े कार्यों का सुचारू संचालन किया जा सके।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना - भूमि रूपांतरण और प्राधिकृत अधिकारी (25 जून 2018)
अधिसूचना विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना दिनांक 25 जून 2018 (एस.ओ. 77 और एस.ओ. 78) के अंतर्गत राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम सं. 13) की धाराओं के तहत प्राधिकृत अधिकारियों और उनके क्षेत्रों का निर्धारण किया गया है।
मुख्य बिंदु
एस.ओ. 77: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 107-क की उप-धारा (3) के तहत, राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 173-क के अधीन विभिन्न प्राधिकारियों को प्रयोजन और क्षेत्रफल के अनुसार प्राधिकृत किया गया है:
संबंधित ग्राम पंचायत: 100 वर्गमीटर तक वाणिज्यिक प्रयोजन (सिनेमा, मल्टीप्लेक्स, पेट्रोल पंप को अपवर्जित करते हुए) और 300 वर्गमीटर तक लोक उपयोग प्रयोजन।
संबंधित पंचायत समिति की प्रशासनिक और स्थापन समिति: 100 वर्गमीटर से अधिक किंतु 300 वर्गमीटर तक वाणिज्यिक प्रयोजन (सिनेमा, मल्टीप्लेक्स, पेट्रोल पंप को छोड़कर), 300 वर्गमीटर से अधिक किंतु 900 वर्गमीटर तक लोक उपयोग प्रयोजन, तथा 300 वर्गमीटर तक चिकित्सा सुविधा प्रयोजन।
संबंधित जिला परिषद की प्रशासनिक और स्थापन समिति: 300 वर्गमीटर से अधिक वाणिज्यिक प्रयोजन, 900 वर्गमीटर से अधिक लोक उपयोग प्रयोजन, तथा 300 वर्गमीटर से अधिक चिकित्सा सुविधा प्रयोजन।
राज्य सरकार: किसी भी क्षेत्र के लिए सिनेमा, मल्टीप्लेक्स, पेट्रोल पंप से संबंधित वाणिज्यिक प्रयोजन, औद्योगिक क्षेत्र/औद्योगिक संपदा प्रयोजन, और सौर या वायु शक्ति संयंत्र की स्थापना।
एस.ओ. 78: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 107-ख की उप-धारा (1) के तहत, संबंधित जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (Chief Executive Officer) को राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 173-ख के अधीन प्राधिकृत अधिकारी के कृत्यों का पालन करने के लिए प्राधिकृत किया गया है।
आदेश संख्या: संख्या एफ.4(93)सीएलूंग/नोटि./लीगल/पी आर/2018/833 और संख्या एफ.4(93)सीएलूंग/नोटि./लीगल/पी आर/2018/834 जारीकर्ता: कुंजी लाल मीणा, शासन सचिव (राज्यपाल के आदेश से)
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना - भूमि रूपांतरण और प्राधिकृत अधिकारी (25 जून 2018)
अधिसूचना विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना दिनांक 25 जून 2018 (एस.ओ. 77 और एस.ओ. 78) के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 107-क एवं 107-ख के अंतर्गत विभिन्न प्राधिकृत अधिकारियों को शक्तियों का प्रत्यायोजन किया गया है।
मुख्य बिंदु
संबंधित ग्राम पंचायत: 100 वर्गमीटर तक वाणिज्यिक प्रयोजन (सिनेमा, मल्टीप्लेक्स, पेट्रोल पंप को अपवर्जित करते हुए) तथा 300 वर्गमीटर तक लोक उपयोग प्रयोजन के लिए प्राधिकृत।
संबंधित पंचायत समिति की प्रशासनिक और स्थापन समिति: 100 वर्गमीटर से अधिक किंतु 300 वर्गमीटर तक वाणिज्यिक प्रयोजन (सिनेमा, मल्टीप्लेक्स, पेट्रोल पंप को छोड़कर), 300 वर्गमीटर से अधिक किंतु 900 वर्गमीटर तक लोक उपयोग प्रयोजन, और 300 वर्गमीटर तक चिकित्सा सुविधा प्रयोजन के लिए प्राधिकृत।
संबंधित जिला परिषद की प्रशासनिक और स्थापन समिति: 300 वर्गमीटर से अधिक वाणिज्यिक प्रयोजन (सिनेमा, मल्टीप्लेक्स, पेट्रोल पंप को छोड़कर), 900 वर्गमीटर से अधिक लोक उपयोग प्रयोजन, और 300 वर्गमीटर से अधिक चिकित्सा सुविधा प्रयोजन के लिए प्राधिकृत।
राज्य सरकार: किसी भी क्षेत्र के लिए सिनेमा, मल्टीप्लेक्स, पेट्रोल पंप, औद्योगिक क्षेत्र/औद्योगिक संपदा प्रयोजन, तथा सौर या वायु शक्ति संयंत्र की स्थापना के लिए प्राधिकृत।
एस.ओ. 78 के तहत: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 107-ख की उप-धारा (1) के अंतर्गत संबंधित जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) को प्राधिकृत किया गया है।
आदेश क्रमांक: संख्या एफ.4(93)सीएल यूं/नोटि./लीगल/पीआर/2018/833 और 834 हस्ताक्षरकर्ता: कुंजी लाल मीणा, शासन सचिव, राज्यपाल के आदेश से
ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी भूमि पर बने आवास गृहों के पट्टे जारी करने के संबंध में निर्देश
ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी भूमि पर पट्टे जारी करने के संबंध में
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 25.05.2018 को क्र0एफ.(78)सिवायचक/नियमिन/विधि/परा/2017/659 के अंतर्गत सभी संभागीय आयुक्तों एवं जिला कलेक्टर्स को ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी भूमि पर बने आवास गृहों के पट्टे दिए जाने के संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
सर्वे एवं पट्टे जारी करना: ग्राम पंचायत स्तर पर ग्राम सेवक एवं पटवारी द्वारा संयुक्त सर्वे कराया जाएगा। तहसीलदार द्वारा सेटअपार्ट का प्रस्ताव तैयार कर उपखण्ड अधिकारी द्वारा सेटअपार्ट की कार्यवाही के उपरांत संबंधित ग्राम पंचायतों द्वारा पट्टे जारी किए जाएंगे।
पात्रता: वे मकान जहां रहवासी दिनांक 01.01.2017 को कम से कम 3 वर्ष अथवा इससे अधिक की अवधि से पूर्व मकान बनाकर रह रहे हैं (विधि द्वारा वर्जित/प्रतिबंधित श्रेणी, सार्वजनिक प्रयोजनार्थ भूमि एवं मास्टर प्लान में प्रभावित भूमि को छोड़कर)।
न्याय आपके द्वार अभियान 2018: राजस्व लोक अदालत अभियान (01.05.2018 से 30.06.2018) के दौरान अभियान से पूर्व एवं अभियान के दौरान दिए गए पट्टों की प्रगति ई-पंचायत पोर्टल पर ऑनलाइन भिजवाना सुनिश्चित किया जाए।
ग्राम पंचायत द्वारा जारी पट्टों के हस्तांतरण / नामांतरण (Mutation) हेतु निर्देश, आवश्यक दस्तावेज एवं शुल्क दर
ग्राम पंचायत पट्टा हस्तांतरण एवं नामांतरण दिशानिर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.4(86) नामांतरण/विधि/पंश/2018/603 दिनांक 9.5.2018 के अंतर्गत ग्राम पंचायतों द्वारा जारी पट्टों के हस्तांतरण या नामांतरण (Mutation) के संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु एवं निर्देश
पट्टों का रिकॉर्ड: समस्त पंचायतों को राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 173.जी में वर्णित Form LIII (Form 53) प्रारूप में अब तक जारी किए गए समस्त पट्टों का पूर्ण रिकॉर्ड संधारित करना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
हस्तांतरण हेतु आवश्यक दस्तावेज: पट्टों के प्रकार और हस्तांतरण के आधार (उत्तराधिकार, वसीयतनामा, पंजीकृत हक त्याग, पंजीकृत विक्रय पत्र, पंजीकृत गिफ्ट डीड) के अनुसार आवश्यक दस्तावेज जैसे उत्तराधिकार प्रमाण पत्र, शपथ-पत्र, हक त्यागपत्र, आपत्तियों हेतु समाचार पत्रों में प्रकाशन आदि निर्धारित किए गए हैं।
शुल्क एवं दरें: मूल आवंटन के प्रकार (पुराने ग्रहों का विनियमितीकरण, निःशुल्क आवंटित भूखंड, रियायती दर पर आवंटन, नीलामी द्वारा आवंटन, पूर्ण शुल्क के साथ आवंटन) के आधार पर परिवार के सदस्यों या अन्य व्यक्तियों को नामांतरण करने हेतु प्रक्रिया शुल्क (रु. 100 से रु. 200) एवं नामांतरण शुल्क (डीएलसी दर का 2% से 5%) निर्धारित किया गया है।
नामांतरण की प्रक्रिया निर्धारित दस्तावेजों की जांच के उपरांत ग्राम पंचायत की बैठक में प्रस्ताव पारित करके की जाएगी।
राजस्थान पंचायती राज (दूसरा संशोधन) नियम, 2018 - आबादी भूमि उपयोग परिवर्तन और उप-विभाजन
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 27 मार्च 2018 की अधिसूचना (सं. एफ.4(7)अमे/रूल्स/लीगल/पी.आर./2014/926 दिनांक 10.7.2018) के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज (दूसरा संशोधन) नियम, 2018 जारी किए गए हैं। यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र में प्रकाशित की गई है।
मुख्य बिंदु और प्रावधान
नया अध्याय-9क का अंतःस्थापन: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में नया अध्याय-9क जोड़ा गया है जो आबादी क्षेत्र में भूमि के उपयोग के परिवर्तन (नियम 173-क) तथा भू-खंडों के उप-विभाजन व पुनर्गठन (नियम 173-ख) से संबंधित है।
संपरिवर्तन प्रभार (Conversion Charges): गैर-आवासीय प्रयोजनों के लिए आवासीय आबादी भूमि के संपरिवर्तन हेतु वाणिज्यिक, औद्योगिक, लोक उपयोग, संस्थागत, चिकित्सा सुविधा तथा सौर/पवन ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना के लिए अलग-अलग दरें निर्धारित की गई हैं।
छूट के प्रावधान: केंद्रीय या राज्य सरकार के विभागों या स्थानीय प्राधिकरणों के उपयोग, राजस्थान विनियोजन प्रोत्साहन स्कीम, 2003/2010 और तकनीकी शिक्षा संस्थान के मामलों में संपरिवर्तन प्रभारों में आंशिक या पूर्ण छूट दी गई है।
भू-खंडों का उप-विभाजन और पुनर्गठन: नियम 173-ख के तहत ग्रामीण आबादी क्षेत्र में भू-खंडों के उप-विभाजन या पुनर्गठन के लिए प्ररूप 51 में आवेदन करना होगा तथा इसके लिए निर्धारित प्रभार नियम 173-घ के अनुसार देय होंगे।
नए प्ररूप (Forms): नियमों के अंतर्गत प्ररूप 48 से लेकर प्ररूप 53 तक नए आवेदन पत्र, अनुज्ञा, पट्टा विलेख और आबादी भूमि का रजिस्टर जोड़े गए हैं।
अधिक जानकारी और विस्तृत प्रक्रियाओं के लिए संबंधित ग्राम पंचायत कार्यालय या राज ई-पंचायत पोर्टल से संपर्क करें।
अवधिपार पट्टा विलेखों के पुनर्विधिमान्यकरण के संबंध में दिशा-निर्देश
अवधिपार पट्टा विलेखों का पुनर्विधिमान्यकरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा अवधिपार पट्टा विलेखों के पुनर्विधिमान्यकरण के संबंध में आदेश जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
नया नियम: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 167 में उप-नियम 167(क) जोड़कर ग्राम पंचायतों द्वारा जारी विक्रय विलेख, पट्टा या पट्टा विलेख के पुनर्विधिमान्यकरण का प्रावधान किया गया है।
शुल्क निर्धारण: विभागीय अधिसूचना दिनांक 02.01.2018 के अनुसार शुल्क का निर्धारण किया गया है। नियम 157, 158, 159 एवं 162 के अधीन जारी पट्टों के पुनर्विधिमान्यकरण हेतु 100/- रुपये तथा अन्य नियमों के अधीन जारी विक्रय विलेख या पट्टा विलेख हेतु मूल विक्रय विलेख या पट्टा विलेख द्वारा दी गई भूमि की वर्तमान डीएलसी (DLC) दर की राशि का एक प्रतिशत देय होगा।
आवेदन प्रक्रिया: कोई भी व्यक्ति जो अपने पट्टा विलेख का पुनर्विधिमान्यकरण कराना चाहता है, वह मूल विक्रय विलेख/पट्टा और निर्धारित फीस के साथ पंचायत में आवेदन कर सकेगा।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना - पट्टा विलेख का पुनर्वितिमान्यकरण
राजस्थान राज-पत्र अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), जयपुर द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.4(7)संशो/नियम/विधि/पंरा/2017/02 (दिनांक 02 जनवरी, 2018) के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी।
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 167-क द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, राज्य सरकार द्वारा ग्राम पंचायत द्वारा जारी किये गये विक्रय विलेख, पट्टा या पट्टा विलेख का पुनर्वितिमान्यकरण किये जाने के आवेदन के साथ देय फीस निम्नानुसार निर्धारित की गई है:
पanchayat नियम 157, 158, 159 एवं 162 के अधीन जारी किये गये पट्टों का पुनर्वितिमान्यकरण हेतु: 100/- रुपये
पanchayat नियम 157, 158, 159 एवं 162 के अतिरिक्त अन्य नियमों के अधीन जारी किये गये विक्रय विलेख, पट्टा या पट्टा विलेख का पुनर्वितिमान्यकरण हेतु: मूल विक्रय विलेख, पट्टा या पट्टा विलेख द्वारा दी गई भूमि की वर्तमान डी०एल०सी० दर की राशि का एक प्रतिशत
यह अधिसूचना विष्णु कुमार गोयल, उप शासन सचिव द्वारा जारी की गई है।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना - पट्टा पुनर्वितिप्रमाणिकरण फीस
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 167-क के अंतर्गत अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना राजस्थान राज-पत्र (असाधारण) दिनांक 02 जनवरी, 2018 को प्रकाशित की गई है।
मुख्य बिंदु
संख्या: एफ.4(7)संशो/नियम/विधि/पंरा/2017/02 (जयपुर, जनवरी 02, 2018)
नियम संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 167-क द्वारा प्रदत्त शक्तियां।
नियम 157, 158, 159 एवं 162 के अधीन पट्टे: पंचायत द्वारा नियम 157, 158, 159 एवं 162 के अधीन जारी किये गये पट्टों के पुनर्वितिप्रमाणिकरण (re-verification/re-authentication) किये जाने के आवेदन के साथ देय फीस 100/- रुपये निर्धारित की गई है।
अन्य नियमों के अधीन जारी पट्टे: पंचायत द्वारा नियम 157, 158, 159 एवं 162 के अतिरिक्त अन्य नियमों के अधीन जारी किये गये विक्रय विलेख, पट्टा या पट्टा विलेख के पुनर्वितिप्रमाणिकरण हेतु मूल विक्रय विलेख, पट्टा या पट्टा विलेख द्वारा दी गई भूमि की वर्तमान डी०एल०सी० (DLC) दर की राशि का एक प्रतिशत फीस होगी।
यह आदेश विष्णु कुमार गोयल, उप शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है।
राजस्थान पंचायती राज (पंचम संशोधन) नियम, 2017 - अधिसूचना
राजस्थान पंचायती राज (पंचम संशोधन) नियम, 2017
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना (क्रमांक: जी.एस.आर.98, संख्या एफ.4(7)अमे/रूल्स/लीगल/पी.आर./2017/1457, दिनांक 22 नवम्बर 2017) के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
नियम का नाम: ये नियम राजस्थान पंचायती राज (पंचम संशोधन) नियम, 2017 कहलाएंगे और राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से प्रवृत्त होंगे।
नियम 21 का संशोधन: नियम 21 के उप-नियम (1) और उप-नियम (2) में अधिकारियों जैसे मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद, विकास आयुक्त के स्थान पर 'सक्षम प्राधिकारी' अभिव्यक्ति प्रतिस्थापित की गई है।
नया नियम 167-क का अंतःस्थापन: नियम 167 के पश्चात नया नियम '167-क. विक्रय विलेख, पट्टा या पट्टा विलेख का पुनर्विधिमान्यकरण' जोड़ा गया है।
पुनर्विधिमान्यकरण की प्रक्रिया: पंचायत द्वारा जारी किए गए विक्रय विलेख, पट्टा या पट्टा विलेख के पुनर्विधिमान्यकरण के लिए कोई भी व्यक्ति मूल दस्तावेजों और राज्य सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट फीस के साथ आवेदन कर सकेगा। पंचायत अपने अभिलेखों से समाधान करने के पश्चात इसे पुन: विधिमान्य कर सकेगी और इस प्रभाव का पृष्ठांकन करेगी।
राजस्थान पंचायती राज (पंचम संशोधन) नियम, 2017 - अधिसूचना
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या जी.एस.आर.98 (क्रमांक एफ.4(7) अमे/रूल्स/लीगल/पी.आर./2017/1457, दिनांक 22 नवम्बर 2017) के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन किए गए हैं। इन्हें राजस्थान पंचायती राज (पंचम संशोधन) नियम, 2017 कहा गया है। यह राजपत्र में प्रकाशन की तिथि (23 नवम्बर 2017) से प्रवृत्त हो गए हैं।
मुख्य बिंदु एवं संशोधन
नियम 21 का संशोधन: नियम 21 के उप-नियम (1) और उप-नियम (2) में अधिकारियों के पदों के स्थान पर अब "सक्षम प्राधिकारी" अभिव्यक्ति को प्रतिस्थापित किया गया है।
नया नियम 167-क अंतःस्थापित: नियमों में नया नियम 167-क जोड़ा गया है जो विक्रय विलेख, पट्टा या पट्टा विलेख का पुनर्वितिमान्यकरण से संबंधित है।
पुनर्वितिमान्यकरण की प्रक्रिया: पंचायत द्वारा जारी किए गए विक्रय विलेख, पट्टा या पट्टा विलेख का पुनर्वितिमान्यकरण कराने के इच्छुक व्यक्ति को मूल दस्तावेज और राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर विनिर्दिष्ट फीस के साथ पंचायत में आवेदन करना होगा।
पंचायत अपने अभिलेख से समाधान करने के पश्चात विक्रय विलेख, पट्टा या पट्टा विलेख को पुन: विधिमान्य कर सकेगी और इस प्रभाव का पृष्ठांकन करेगी।
यह आदेश राज्यपाल के आदेश से राजेन्द्र शेखर मक्कड़, शासन उप सचिव द्वारा जारी किया गया है।
ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी भूमि पर बने आवास गृहों के पट्टे जारी करने के संबंध में निर्देश
ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी और सिवायचक भूमि पर बने आवासों के पट्टे जारी करने के दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी पत्रांक क्र.0एफ.4(78)सिवायचक/नियमन/विधि/पंव्रा/2017/659 दिनांक 25.05.2018 के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी भूमि पर बने आवास गृहों के नियमन और पट्टे जारी करने के संबंध में आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य निर्देश एवं प्रक्रिया:
संयुक्त सर्वे: राजस्व लोक अदालत अभियान: न्याय आपके द्वार-2018 (दिनांक 01.05.2018 से 30.06.2018) के तहत ग्राम सेवक एवं पटवारी द्वारा संयुक्त सर्वे कराया जाना सुनिश्चित किया जाए।
ई-पचायत पोर्टल पर प्रगति दर्ज करना: अभियान के दौरान दिए गए पट्टों की प्रगति ई-पंचायत पोर्टल पर प्रतिदिन ऑनलाइन भेजी जानी चाहिए।
समयबद्ध कार्यवाही: जिन ग्राम पंचायतों में सर्वे एवं पट्टे जारी करने का कार्य नहीं हुआ है, वहां नियमानुसार प्रक्रिया अपनाकर अभियान द्वारा पट्टे जारी किए जाएं।
समन्वय बैठक: उपखंड अधिकारी, विकास अधिकारी एवं तहसीलदार की संयुक्त बैठक आयोजित कर अधिक से अधिक पात्र रहवासियों को पट्टे जारी किए जाएं।
ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी भूमि पर बने आवास गृहों के पट्टे जारी किए जाने के संबंध में निर्देश
ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी भूमि पर बने आवास गृहों के पट्टे जारी करने की प्रक्रिया
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी भूमि पर बने आवास गृहों के पट्टे दिए जाने के संबंध में आदेश जारी किया गया है। यह पत्र क्रमांक फ.4(78)सिवायचक/नियमन/विधि/पंचरा/2017/1104, दिनांक 03-10-2017 को जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु एवं निर्देश:
सर्वेक्षण कार्य: ग्राम पंचायत स्तर पर ग्राम सेवक एवं पटवारी द्वारा राजस्व विभाग के परिपत्र दिनांक 07.09.2017 में वर्णित प्रावधानों के तहत दिनांक 01.01.2017 से पूर्व बने आवास गृहों का संयुक्त सर्वे किया जाएगा।
प्रमाणन दस्तावेज: 01.01.2017 से पूर्व रहने के प्रमाण हेतु राशन कार्ड, वोटर आईडी, भामाशाह कार्ड, आधार कार्ड, बिजली, पानी या टेलीफोन बिल में से किसी एक दस्तावेज का उपयोग किया जाएगा।
पात्रता शर्तें: पट्टा जारी करते समय यह ध्यान रखा जाएगा कि एक परिवार को अधिकतम 300 वर्गगज या वास्तविक क्षेत्रफल (इसमें से जो भी कम हो) का ही पट्टा दिया जाएगा। यदि उस ग्राम पंचायत में उस परिवार के पास पूर्व में ही आवासीय मकान या भूखंड है, तो पट्टा नहीं दिया जाएगा।
प्रतिबंधित श्रेणियां: राजस्थान काश्तकारी अधिनियम, 1955 की धारा 16 के अंतर्गत प्रतिबंधित भूमि, नाला, नाड़ी, जोहड़, जलप्रवाह क्षेत्र, ओरण, चारागाह भूमि, वन विभाग के अधीन भूमि तथा अन्य प्रतिबंधित क्षेत्रों को छोड़कर ही भूमि सेटअपार्ट की जाएगी।
वित्त विभाग, राजस्थान सरकार अधिसूचना - दिनांक 27.09.2017
वित्त विभाग अधिसूचना दिनांक 27.09.2017
यह दस्तावेज़ राजस्थान सरकार के वित्त विभाग (कर खंड), जयपुर द्वारा जारी की गई अधिसूचना है, जिसका क्रमांक [No.F.2(11)FD/Tax/2011-100] दिनांक 27.09.2017 है।
मुख्य बिंदु:
यह अधिसूचना पंजीकरण अधिनियम, 1908 (1908 का केंद्रीय अधिनियम संख्या XVI) की धारा 88 की उप-धारा (1) के खंड (d) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए जारी की गई है।
राज्य सरकार द्वारा यह निर्देश दिया गया है कि ग्राम पंचायत के सचिव के लिए, जो अपनी पदीय क्षमता में किसी लिखत (instrument) को निष्पादित करने के लिए सक्षम प्राधिकारी है, यह आवश्यक नहीं होगा कि वह किसी भी पंजीकृत अधिकारी (Registering Officer) के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हो या उससे संबंधित किसी भी कार्यवाही में उपस्थित रहे।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से हर्धेश कुमार जुनेजा, शासन उप सचिव द्वारा जारी किया गया है तथा आवश्यक कार्रवाई हेतु संबंधित विभागों को प्रेषित किया गया है।
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2017 - नियम 157 में संशोधन
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग अधिसूचना
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम सं. 13) की धारा 102 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन हेतु अधिसूचना जारी की गई है।
मुख्य बिंदु:
नियम का नाम: राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2017।
प्रवर्तन: यह राजपत्र में इसके प्रकाशन की तारीख (17 मई 2017) से प्रवृत्त होंगे।
नियम 157 का संशोधन: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 के उप-नियम (1) के खण्ड (i) के उप-खण्ड (ब) में विद्यमान अभिव्यक्ति “इन नियमों के प्रारम्भ की तारीख से ठीक पूर्ववर्ती पचास वर्षों के दौरान” के स्थान पर “31 दिसम्बर, 2016 के ठीक पूर्ववर्ती सत्तर वर्षों के दौरान” प्रतिस्थापित की गई है।
राज्यपाल के आदेश से, विष्णु कुमार गोयल, उप शासन सचिव।
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2017 से संबंधित अधिसूचना
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2017
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना जी.एस.आर. 20 (दिनांक 17 मई, 2017) के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
नियम का नाम: इन नियमों का नाम राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2017 है।
प्रवृत्ती: ये राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से प्रवृत्त होंगे।
नियम 157 का संशोधन: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 के उप-नियम (1) के खण्ड (i) के उप-खण्ड (ब) में विद्यमान अभिव्यक्ति "इन नियमों के प्रारम्भ की तारीख से ठीक पूर्ववर्ती पचास वर्षों के दौरान" के स्थान पर "31 दिसम्बर, 2016 के ठीक पूर्ववर्ती सत्तर वर्षों के दौरान" प्रतिस्थापित की गई है।
आदेश संख्या: [संख्या एफ.4(7) अमे/रूल्स/लीगल/पी.आर./2017/447]
हस्ताक्षरकर्ता: राज्यपाल के आदेश से, विष्णु कुमार गोयल, उप शासन सचिव।
पट्टा आवंटन अभियान (14 अप्रैल, 2017 से 12 जुलाई, 2017) के संबंध में निर्देश
पट्टा आवंटन अभियान निर्देश
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा पट्टा आवंटन अभियान के संबंध में पत्र जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
अभियान की अवधि: 14 अप्रैल, 2017 से 12 जुलाई, 2017 तक (90 दिवस)।
ग्राम पंचायतों द्वारा शिविर के दिन के अलावा भी इस पूरी अवधि में पट्टा/भू-खण्ड आवंटन से संबंधित आवेदन प्रार्थना-पत्र प्राप्त कर उनका निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।
प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की पात्रता/वरीयता सूची में शामिल समस्त परिवारों को निर्धारित प्रक्रिया अपनाकर भूमि/पट्टे आवश्यक रूप से आवंटित किए जाएं।
शिविरों में पटवारी, तहसीलदार एवं नायब तहसीलदार आदि की उपस्थिति सुनिश्चित कर पंचायती राज अधिकारियों को वांछित सहयोग प्रदान करने के निर्देश दिए गए हैं।
राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2017 से संबंधित अधिसूचना
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग अधिसूचना
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), जयपुर द्वारा दिनांक 12 अप्रैल, 2017 को राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2017 जारी किए गए हैं। यह अधिसूचना राजस्थान राज-पत्र में प्रकाशित की गई है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम व नियम: यह संशोधन राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम सं. 13) की धारा 102 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में किया गया है।
नियम 148 का संशोधन: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 148 के उप-नियम (1) के अंतिम परन्तुक में आवश्यक संशोधन किया गया है।
शब्दावली में बदलाव: "राजस्व अभियान या प्रशासन गांव के संग अभियान" के स्थान पर "राजस्व अभियान या प्रशासन गांव के संग अभियान या भूमि के विक्रय और पट्टा वितरण के लिए राज्य सरकार के आदेश द्वारा आयोजित किसी अन्य अभियान के समय" शब्दावली प्रतिस्थापित की गई है।
प्रारूप 22 का संशोधन: संलग्न प्रारूप 22 की टिप्पणी में भी उपर्युक्त शब्दावली को प्रतिस्थापित किया गया है।
लागू होना: ये नियम राजपत्र में इनके प्रकाशन की तारीख (12 अप्रैल, 2017) से प्रवृत्त होंगे।
आदेश संख्या: [सं. एफ.4(7) अमे/रूल्स/लीगल/पी.आर./2017/289]
राजकीय कार्यालय भवन हेतु निःशुल्क भूमि आवंटन संबंधी अधिसूचना
अधिसूचना विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना (क्रमांक: संख्या एफ.4(54)पट्टा अभि/विधि/पंव्रा/2017/271, दिनांक अप्रैल 06, 2017) के अंतर्गत किसी भी सरकारी कार्यालय के भवन हेतु निःशुल्क भूमि आवंटन के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु एवं सीमाएं
राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा 98 और राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 162(2) के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग किया गया है।
500 वर्ग गज तक: संबंधित ग्राम पंचायत द्वारा भूमि का निःशुल्क आवंटन किया जा सकता है।
500 से अधिक एवं 1000 वर्ग गज तक: संबंधित पंचायत समिति की पूर्वानुमति से भूमि का निःशुल्क आवंटन किया जा सकता है।
1000 वर्ग गज से अधिक: संबंधित जिला परिषद की पूर्वानुमति से भूमि का निःशुल्क आवंटन किया जा सकता है।
यह आदेश आनंद कुमार, शासन सचिव एवं आयुक्त द्वारा जारी किया गया है।
राजस्व ग्राम विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना - सरकारी कार्यालय भवनों हेतु निःशुल्क भूमि आवंटन नियम
अधिसूचना विवरण एवं मुख्य बिंदु
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.4(54)पट्टा अभि/विधि/पंश/2017/271 दिनांक अप्रैल 06, 2017 के माध्यम से सरकारी कार्यालयों के भवन हेतु भूमि के निःशुल्क आवंटन के संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं।
यह अधिसूचना राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा 98 तथा राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 162(2) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए जारी की गई है।
निःशुल्क भूमि आवंटन की सीमाएं एवं प्राधिकार:
500 वर्ग गज तक: संबंधित ग्राम पंचायत द्वारा निःशुल्क भूमि का आवंटन किया जा सकता है।
500 से अधिक एवं 1000 वर्ग गज तक: संबंधित पंचायत समिति की पूर्वानुमति से ग्राम पंचायत/पंचायत समिति द्वारा आवंटन।
1000 वर्ग गज से अधिक: संबंधित जिला परिषद की पूर्वानुमति से संबंधित ग्राम पंचायत, पंचायत समिति एवं जिला परिषद को अधिकृत किया गया है।
यह आदेश शासन सचिव एवं आयुक्त आनन्द कुमार के आदेशानुसार जारी किया गया है।
अतिक्रमण सम्बंधित शिकायतों को न्यायिक प्रक्रिया मानते हुए संपर्क पोर्टल 181 पर दर्ज नही करने के सम्बन्ध में
अतिक्रमण सम्बंधित शिकायतों को न्यायिक प्रक्रिया मानते हुए संपर्क पोर्टल पर दर्ज नही करने के सम्बन्ध में
विमुक्त, घुमन्तु एवं अर्द्धघुमन्तु के आवासहीन व्यक्तियों को भूखण्ड आवंटन बाबत परिपत्र
विमुक्त, घुमन्तु एवं अर्द्धघुमन्तु के आवासहीन व्यक्तियों को भूखण्ड आवंटन
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा परिपत्र क्रमांक एफ.4()दिशा निर्देश/विधि/पंरा/2016/494 दिनांक 27-6-16 जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
राज्य सरकार के ध्यान में लाया गया है कि अधिकांश ग्राम पंचायतों द्वारा विमुक्त, घुमन्तु एवं अर्द्धघुमन्तु के आवासहीन व्यक्तियों को नियमानुसार भूखण्ड आवंटन करने में शिथिलता बरती जा रही है।
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 का नियम 158 कमजोर वर्गों को आबंटन के तहत ग्राम पंचायत को 300 वर्गगज तक की आबादी भूमि रियायती दर पर आवंटित करने की अनुमति देता है।
समाज कल्याण विभाग द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक F.1(F)(2)SW/63 दिनांक 24.2.1964 के तहत अधिसूचित जातियों के आवासहीन व्यक्तियों को नियमानुसार भूखण्ड आवंटन किया जाना सुनिश्चित किया जाए।
निजी आबादी भूमि पर ग्राम पंचायत पट्टे जारी नहीं कर सकती
निजी आबादी भूमि पर ग्राम पंचायत पट्टे जारी नहीं कर सकती
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग - संशोधित अधिसूचना (राजपत्र दिनांक 6 अप्रैल 2016)
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
यह दस्तावेज ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा जारी संशोधित अधिसूचना से संबंधित है, जो राजस्थान राज-पत्र (असाधारण) दिनांक 6 अप्रैल 2016 में प्रकाशित हुई है।
संदर्भ: विभागीय समसंख्यक अधिसूचना क्रमांक 1302 दिनांक 02-08-2011 द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (अधिनियम संख्या 13) की धारा 98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 154(4)(ग) के अन्तर्गत 5.00 लाख से 10.00 लाख तक की आबादी भूमि के विक्रय/नीलामी की पुष्टि किए जाने हेतु संभागीय आयुक्त को अधिकृत किया गया था।
संशोधन विवरण: सहवं से नियम 154(3)(ग) के स्थान पर "नियम 154(4)(ग)" अंकित हो गया था। अत: उक्त अधिसूचना में आंशिक संशोधन कर प्रयुक्त अभिव्यक्ति राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के "नियम 154(3)(ग)" के स्थान पर "नियम 154(4)(ग)" पढ़ा जावे।
यह आदेश संयुक्त शासन सचिव (विधि) द्वारा जारी किया गया है।
राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 107-क के अंतर्गत पर्यटन इकाइयों के लिए अधिकृत अधिकारी की नियुक्ति संबंधी अधिसूचना
अधिसूचना विवरण
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), जयपुर द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक एफ.4 () टूरिज्म रूल/लीगल/पीआर/2015/13 (दिनांक जनवरी 11, 2016) के अनुसार, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम सं. 13) की धारा 107-क की उप-धारा (3) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राजस्थान सरकार ने राजस्थान पंचायती राज (भूमि उपयोग का आवंटन, परिवर्तन और आबादी भूमि का नियमितीकरण) पर्यटन इकाइयों के क्षेत्र में नियम, 2015 के तहत अधिकृत अधिकारी के कृत्यों का निर्वहन करने के लिए अधिकारियों को अधिकृत किया है।
अधिकृत अधिकारी, पर्यटन इकाई की श्रेणी एवं भूमि क्षेत्र का विवरण
संबंधित पंचायत समिति के विकास अधिकारी (Block Development Officer): क्रम संख्या 2 और 3 में उल्लिखित के अलावा अन्य पर्यटन इकाइयां - 300 वर्ग मीटर से अधिक नहीं।
संबंधित जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (Chief Executive Officer): (अ) बजट होटल्स और 1,2,3 स्टार होटल्स (1,200 वर्ग मीटर से 4,000 वर्ग मीटर तक); (ब) अन्य पर्यटन इकाइयां (301 वर्ग मीटर से 4,000 वर्ग मीटर तक)।
कलेक्टर (Collector): (अ) 4 स्टार होटल्स (6,000 वर्ग मीटर से 12,000 वर्ग मीटर तक); (ब) 5 और इससे ऊपर के स्टार होटल्स (18,000 वर्ग मीटर से 40,000 वर्ग मीटर तक); (स) अन्य पर्यटन इकाइयां (4,001 वर्ग मीटर से 40,000 वर्ग मीटर तक)।
नोट: 40,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाली अन्य पर्यटन इकाइयों के लिए राज्य सरकार भूमि उपयोग परिवर्तन की अनुमति देने और भूमि उपयोग को नियमित करने के लिए प्राधिकारी होगी।
यह आदेश राज्यपाल के आदेशानुसार एस.के. सोलंकी, शासन उप सचिव द्वारा जारी किया गया है।
प्रधानमंत्री आवास योजना - ग्रामीण की पात्रता/वरीयता सूची में शामिल परिवारों को पट्टा आवंटन बाबत निर्देश
प्रधानमंत्री आवास योजना - ग्रामीण पट्टा आवंटन निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना - ग्रामीण के संबंध में आदेश जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
विषय: "प्रधानमंत्री आवास योजना - ग्रामीण" की पात्रता/वरीयता सूची में शामिल परिवारों को पट्टा आवंटन करने बाबत।
आदेश संख्या एवं दिनांक: क्र.एफ.4( )पट्टा निर्देश/विधि/पंशावि/2016/692, दिनांक 01.09.2016।
जारीकर्ता: आनन्द कुमार, शासन सचिव एवं आयुक्त, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
मुख्य निर्देश: इस योजना की पात्रता/वरीयता सूची में शामिल परिवारों को राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के प्रावधानों के अन्तर्गत निर्धारित प्रक्रिया अपनाई जाकर संबंधित को भूमि/पट्टे आवंटन की कार्यवाही तत्काल सुनिश्चित करावे, ताकि योजना सुचारू रूप से क्रियान्वित की जा सके।
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) अधिनियम, 2015 - आबादी क्षेत्र भूमि विनियमन और पट्टा प्रावधान
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) अधिनियम, 2015
विधि (विधायी प्रारूपण) विभाग (ग्रुप-2) द्वारा जारी अधिसूचना संख्या प. 2 (40) विधि/2/2015 दिनांक 8 अक्टूबर, 2015 के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) अधिनियम, 2015 (2015 का अधिनियम संख्यांक 28) प्रकाशित किया गया है। यह अधिनियम 5 जून, 2015 से प्रवृत्त हुआ समझा जाएगा।
मुख्य बिंदु और प्रावधान
अध्याय-4-क का अंतःस्थापन: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 में नया अध्याय 'किसी गांव के आबादी क्षेत्र का विनियमन' जोड़ा गया है।
धारा 107-क (भूमि के उपयोग के परिवर्तन पर निर्बन्धन): आबादी क्षेत्र की भूमि के उपयोग परिवर्तन (जैसे आवासीय से वाणिज्यिक, औद्योगिक से वाणिज्यिक आदि) के लिए राज्य सरकार या प्राधिकृत अधिकारी से अनुमति और निर्धारित संपरिवर्तन प्रभार (Conversion Charges) का प्रावधान किया गया है।
धारा 107-ख (भू-खण्डों का उप-विभाजन या पुनर्गठन): आबादी क्षेत्र में भू-खण्ड के उप-विभाजन या पुनर्गठन के लिए पूर्व अनुमति और निर्धारित शर्तों का पालन अनिवार्य किया गया है।
धारा 107-ग (कतिपय भूमियों के पट्टे की मंजूरी): विधिपूर्ण कब्जा रखने वाले व्यक्तियों को पंचायत द्वारा विहित रीति से पट्टा प्राप्त करने का प्रावधान है, जिसके लिए आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी।
धारा 107-घ (कतिपय भूमियों का व्ययन): नज़ूल भूमि या आबादी विकास हेतु आरक्षित भूमि का व्ययन पंचायत द्वारा नियमानुसार किया जाएगा।
धारा 107-च (आबादी भूमि के अभिलेख): प्रत्येक पंचायत द्वारा अपने क्षेत्र के भीतर स्थित आबादी भूमि का अभिलेख तैयार और संधारित किया जाएगा।
वसूले गए समस्त संपरिवर्तन प्रभार और अन्य प्रभार पंचायत की निधि में जमा किए जाएंगे।
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2015 - सिंचाई परियोजना के विस्थापितों को भूमि आवंटन
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2015
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना दिनांक 5 अगस्त 2015 के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
नियम का नाम: राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2015।
प्रवर्तन: ये नियम राजपत्र में प्रकाशन की तारीख (05.08.2015) से प्रवृत्त होंगे।
नियम 158 का संशोधन: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 158 में उप-नियम (2क) के पश्चात् और उप-नियम (3) के पूर्व नया उप-नियम (2ख) अंतःस्थापित किया गया है।
विस्थापितों के लिए प्रावधान: राज्य सरकार, सिंचाई परियोजना के विस्थापितों को, निःशुल्क अधिकतम 300 वर्ग गज के अध्यधीन रहते हुए उनके स्वामित्व वाले गृह स्थलों या गृह के समतुल्य आबादी भूमि आवंटित कर सकेगी।
आदेश क्रमांक: [संख्या एफ.4 (7) अमें/रूल/लीगल/पी.आर./2014/537]
यह आदेश राज्यपाल के आदेश से एस.के. सोलंकी, संयुक्त शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है।
राजस्थान पंचायती राज (पर्यटन इकाईयों के लिए पंचायत क्षेत्र में आबादी भूमि का आवंटन, भूमि के उपयोग का परिवर्तन और नियमितीकरण) नियम, 2015
राजस्थान पंचायती राज नियम, 2015 - पर्यटन इकाइयों हेतु दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.4( )पर्यटन नियम/विधि/पैरा/2015/486 दिनांक जुलाई 10, 2015 के अंतर्गत राजस्थान पंचायती राज (पर्यटन इकाईयों के लिए पंचायत क्षेत्र में आबादी भूमि का आवंटन, भूमि के उपयोग का परिवर्तन और नियमितीकरण) नियम, 2015 बनाए गए हैं।
मुख्य बिंदु एवं नियम:
लागू क्षेत्र: यह नियम पंचायत क्षेत्र में आबादी भूमि के आवंटन, भूमि उपयोग परिवर्तन और नियमितीकरण पर लागू होते हैं।
आबादी भूमि का आवंटन: जिला कलेक्टर, संबंधित पंचायती राज संस्था से परामर्श कर पर्यटन इकाइयों की स्थापना के लिए ग्राम की आबादी क्षेत्र में उपयुक्त भूमि की पहचान करेंगे।
न्यूनतम एवं अधिकतम भूमि क्षेत्र:
बजट होटल और 1 से 3 सितारा होटल: न्यूनतम 1,200 वर्ग मीटर, अधिकतम 4,000 वर्ग मीटर तक।
4 सितारा होटल: न्यूनतम 6,000 वर्ग मीटर, अधिकतम 12,000 वर्ग मीटर तक।
5 सितारा और उससे ऊपर के होटल: न्यूनतम 18,000 वर्ग मीटर, अधिकतम 40,000 वर्ग मीटर तक।
अन्य पर्यटन इकाई: आवश्यकता/उपलब्धता के अनुसार।
आरक्षित मूल्य: पर्यटन इकाइयों के लिए आरक्षित भूमि के आवंटन का आरक्षित मूल्य जिला स्तरीय समिति द्वारा आबादी भूमि के बाजार मूल्य के निर्धारण के लिए सिफारिश की गई दरों के समतुल्य होगा।
विरासत संपत्तियों (हेरिटेज होटल्स) का परिवर्तन: हेरिटेज संपत्तियों को हेरिटेज होटल में बदलने के लिए सादे कागज पर आवेदन किया जा सकता है। इसके लिए भूमि उपयोग परिवर्तन का कोई प्रभार देय नहीं होगा।
डिजिटली हस्ताक्षरित आवासीय भूमि का पट्टा जारी करने बाबत अधिसूचना
राजकीय अधिसूचना: डिजिटली हस्ताक्षरित आवासीय भूमि का पट्टा
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 27 नवंबर 2014 की अधिसूचना संख्या एफ.4( )डिजी.पट्टा/विधि/पंस/2014/1569 के अंतर्गत डिजिटली हस्ताक्षरित 'आवासीय भूमि का पट्टा' जारी करने के संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
पूर्वापेक्षित स्टेशनरी: आवासीय भूमि का पट्टा जारी करने के लिए पूर्व मुद्रित (Pre-Printed) स्टेशनरी का उपयोग किया जाएगा जिसमें सुरक्षा मानकों जैसे होलोग्राम (Hologram), वॉटरमार्क (Water Mark) और बारकोड (Bar Code) का समावेश होगा।
डिजिटल हस्ताक्षर: इन पट्टों पर डिजिटल हस्ताक्षर (Digital Signature) किए जाएंगे जिसे इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट 2000 और संशोधित आईटी एक्ट 2009 के प्रावधानों के तहत मान्यता प्रदान की गई है।
वितरण व्यवस्था: इस सेवा को पूरे राज्य में कार्यरत ई-मित्र केन्द्रों (एकीकृत नागरिक सेवा केंद्र) और जिले में प्रस्तावित नेशनल ई-गवर्नेंस प्लान के तहत स्थापित किए जाने वाले सीएससी केन्द्रों (नागरिक सेवा केंद्र) के माध्यम से उपलब्ध कराने के लिए अधिकृत किया गया है।
मूल आवेदन व दस्तावेज: इस सेवा को प्राप्त करने के लिए प्रार्थी द्वारा प्रस्तुत किए गए मूल आवेदन पत्र एवं संबंधित दस्तावेज जिले से संबंधित अधिकारी, जिनके हस्ताक्षर से यह जारी किया जाएगा, के कार्यालय में निरीक्षण/परीक्षण के लिए उपलब्ध होंगे।
यह आदेश राजेश यादव, शासन सचिव एवं आयुक्त की आज्ञा से जारी किया गया है।
डिजिटल हस्ताक्षर और प्री-प्रिंटेड स्टेशनरी के माध्यम से 'आवासीय भूमि का पट्टा' जारी करने बाबत अधिसूचना
राजस्थान राज-पत्र अधिसूचना दिनांक 27 नवम्बर 2014
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज) द्वारा जारी इस अधिसूचना के माध्यम से महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए हैं:
ग्राम पंचायत रूपवास का नगर पालिका में क्षेत्र परिवर्तन: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा-101 के अंतर्गत ग्राम पंचायत रूपवास की वर्तमान सीमाओं (उत्तर में ग्राम बरबार, दक्षिण में ग्राम समाहड, पूर्व में भिड़यानी व रूढ़ रूपवास तथा पश्चिम में दौरदा) को पंचायती राज संस्थाओं के क्षेत्राधिकार से पृथक किया गया है।
आवासीय भूमि का पट्टा: राज्य सरकार द्वारा डिजिटल हस्ताक्षरित (Digital Signature) और पूर्व-मुद्रित (Pre-Printed) स्टेशनरी का उपयोग करते हुए 'आवासीय भूमि का पट्टा' अनुमन्य किए जाने का निर्णय लिया गया है।
सुरक्षा मानक: पट्टे के लिए उपयोग की जाने वाली स्टेशनरी में सुरक्षा की दृष्टि से मानक तरीकों (Hologram, Water Mark, Bar Code, आदि) का उपयोग किया जाएगा।
वितरण और उपलब्धता: यह सेवा संपूर्ण राज्य में ई-मित्र केन्द्रों (एकीकृत नागरिक सेवा केन्द्र) एवं नेशनल ई-गवर्नेंस प्लान के तहत स्थापित सी.एस.सी. केन्द्रों (नागरिक सेवा केन्द्र) के माध्यम से चरणबद्ध रूप से उपलब्ध कराई जाएगी।
राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2013 से संबंधित अधिसूचना
राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2013
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक एफ.4(7)अमे/रूल्स/लीगल/पीआर/2012/135 दिनांक 11-2-2013 के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
नियम का नाम: राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2013।
प्रवर्तन: यह राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से प्रवृत्त होंगे।
नियम 157 का संशोधन: इसके तहत व्यैक्तिक आबादी भूमि में पुराने गृह का कब्ज़ा रखने वाले और पट्टा प्राप्त करने के इच्छुक व्यक्तियों के लिए प्ररूप 23-क में पंचायत द्वारा पट्टा जारी करने का प्रावधान किया गया है।
प्रभार एवं शुल्क विवरण: 300 वर्गगज तक या 300 वर्गगज अधिकतम क्षेत्रफल (25 प्रतिशत संनिर्मित क्षेत्रफल को सम्मिलित करते हुए) के लिए संनिर्मित पुराने ग्रहों पर नियम के प्रारंभ की तारीख से पूर्व, पचास वर्षों से अधिक पूर्व के लिए 100/- रु. तथा ठीक पूर्ववर्ती पचास वर्षों के दौरान के लिए 200/- रु. प्रभार निर्धारित किया गया है।
विशेष छूट: गरीबी रेखा से नीचे की सूची में सम्मिलित परिवारों से उप-खण्ड (क) के अधीन कोई फीस प्रभारित नहीं की जाएगी तथा उप-खण्ड (ख) के अधीन केवल 10 प्रतिशत फीस प्रभारित की जाएगी।
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2013 - नियम 159 में संशोधन
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2013
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा अधिसूचना संख्या F.4 (7)Ame./Rules/Legal/PR/2012/136 दिनांक 11-2-2013 जारी की गई है। इसके तहत राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 159 की उप-नियम (2) में संशोधन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
पंचायत आबादी क्षेत्र में गोदामों या कार्यालयों के निर्माण के लिए प्राथमिकता के आधार पर 1500 वर्ग गज तक के प्लॉट आवंटित कर सकती है।
प्राथमिक कृषि सहकारी समिति / बड़ी आकार की बहुउद्देशीय विपणन समिति (Primary Agricultural Cooperative Society/ Large Sized Multipurpose Marketing Society): उप-नियम (5) के नियम 152 के तहत बाजार मूल्य के 50% मूल्य पर।
ग्राम सेवा सहकारी समिति या क्रय विक्रय सहकारी समिति (Gram Sewa Sahakari Samiti or Kray Vikray Sahakari Samiti): राज्य सरकार के अनुमोदन के अधीन निःशुल्क (free of charge)।
राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2013 - आबादी क्षेत्र के पुराने मकानों के पट्टा जारी करने के संबंध में अधिसूचना
राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2013
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा अधिसूचना संख्या No.F.4(7)Ame./Rules/Legal/PR/2012/35 दिनांक 11-2-2013 जारी की गई है। यह अधिसूचना राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा 102 द्वारा प्रद शक्तियों के तहत राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन करने के लिए है।
मुख्य बिंदु और नियम संशोधन:
इन नियमों को राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2013 कहा गया है।
नियम 157 की उप-नियम (1) में संशोधन किया गया है जिसके अनुसार आबादी भूमि में स्थित पुराने मकानों के लिए प्रपत्र XXIII-A में पट्टा जारी किया जा सकता है।
300 वर्ग गज तक का क्षेत्र या निर्मित क्षेत्र (25 प्रतिशत निर्मित क्षेत्र सहित):
50 वर्ष से अधिक पुराने मकानों के लिए शुल्क: रु. 100/-
नियमों के प्रारंभ होने की तिथि से ठीक पहले पचास वर्षों के दौरान निर्मित मकानों के लिए शुल्क: रु. 200/-
300 वर्ग गज से अधिक के क्षेत्र पर, ऐसे अतिरिक्त क्षेत्र के लिए राजस्थान स्टाम्प नियम, 2004 के नियम 58 के खंड (b) के तहत जिला स्तरीय समिति द्वारा अनुशंसित बाजार दरों का 25 प्रतिशत देय होगा।
बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे) सूची में शामिल परिवारों से उप-खंड (a) के तहत कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा और उप-खंड (i) के उप-खंड (b) के तहत केवल 10 प्रतिशत शुल्क लिया जाएगा।
प्रशासन गाँवों के संग अभियान में भूमि विक्रय व पट्टा जारी करने के संबंध में विभागीय मार्गदर्शन
प्रशासन गाँवों के संग अभियान - भूमि विक्रय और पट्टा जारी करने के संबंध में मार्गदर्शन
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज) द्वारा जिला कलेक्टर, पाली को प्रशासन गाँवों के संग अभियान के अंतर्गत भूमि विक्रय (पट्टे जारी करने) के संबंध में मार्गदर्शन प्रदान किया गया है।
मुख्य बिंदु एवं विभागीय टिप्पणी
पुश्तैनी कब्जा सुधा प्लॉटों पर पट्टा: ग्राम पंचायतों की आबादी भूमि में सरपंच द्वारा जारी स्वामित्व प्रमाण पत्र या अनापत्ति प्रमाण पत्र के आधार पर पुश्तैनी कब्जा सुधा प्लॉटों की रजिस्ट्री करवाने और पट्टा बनवाने की मांग के संबंध में, राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के प्रावधानों के अनुसार नियमानुसार राशि वसूल कर पट्टा जारी किया जा सकता है।
व्यावसायिक उपयोग हेतु भूमि के पट्टे: आबादी भूमि क्षेत्र में स्थित पुश्तैनी भूमि में दुकानें या छोटे-छोटे कुटीर उद्योग संचालित होने और उनके पट्टे भूमि स्वामियों के पास न होने की स्थिति में, पंचायती राज नियमों में वर्तमान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। अतः व्यावसायिक प्रयोजनार्थ उपयोग में लाई जा रही भूमि के पट्टे दिया जाना संभव नहीं है।
यह आदेश उप शासन सचिव (विधि) द्वारा जारी किया गया है।
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 के अंतर्गत पट्टा जारी करने संबंधी दिशा-निर्देश
प्रस्तावना
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज) द्वारा दिनांक 10.01.2013 को क्रमांक एफ.139( )परावि/विधि/नियम/मार्गदर्शन/2012/23 के तहत एक महत्वपूर्ण आज्ञा जारी की गई है। यह दस्तावेज ग्रामीण क्षेत्रों में पुराने गृहों के वि니मितीकरण और पट्टा वितरण से संबंधित है।
मुख्य बिंदु एवं निर्देश
नियम 157(1) के तहत प्रावधान: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 के उप-नियम (1) के अनुसार, आबादी भूमि में स्थित पुराने गृहों के लिए पट्टा जारी किया जाता है, जिसमें पुराने गृह की परिधि में परिसर में स्थित उपयोग में आने वाली भूमि भी सम्मिलित होती है।
प्रशासन-गाँवों के संग अभियान 2013: अभियान की अवधि के दौरान ऐसे सभी मामलों में पट्टा जारी करने के लिए पंचायत द्वारा संबंधित व्यक्ति को उसके कब्जे वाली आबादी भूमि (अधिकतम 300 वर्गगज तक निर्मित भवन/मकान का क्षेत्रफल) तथा इस निर्मित एरिया के 25 प्रतिशत तक की उसकी उपयोग में आने वाली कब्जाशुदा भूमि को सम्मिलित किया जाएगा।
पट्टा जारी करने की प्रक्रिया: निर्मित भवन और 25 प्रतिशत अतिरिक्त भूमि (इनमें से जो भी कम हो) का पट्टा, नियम 146 के प्रावधानुसार स्थल निरीक्षण करवाने के पश्चात तथा नियम 148 व 149 के अनुसार नोटिस जारी कर प्राप्त आपक्षपों का निपटारा करने के पश्चात जारी किया जाएगा।
राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 के अंतर्गत नियम 162 की शक्तियों का प्रत्यायोजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज) द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक एफ.4( )पंसंवि/पीसी/प्र.गा.के संग अभि./आ.भू./2012-13/16 दिनांक 09-01-2013 के संबंध में आवश्यक जानकारी:
मुख्य बिंदु:
अधिनियम और नियम: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 तथा राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 162 के उप-नियम (2) के अंतर्गत शक्तियां।
प्रत्यायोजन अवधि: 'प्रशासन गांवों के संग अभियान-2013' की अवधि दिनांक 10.01.2013 से 28.02.2013 तक।
शक्तियों का उपयोग: यह शक्तियां संबंधित जिला कलेक्टर को प्रत्यायोजित की गई हैं, जिनका प्रयोग केवल राजकीय विभागों एवं राजकीय संस्थाओं को आवंटन किए जाने के संबंध में किया जाएगा।
यह आदेश किशनलाल बांडेलिया, उप शासन सचिव (विधि) द्वारा जारी किया गया है।
आबादी भूमि पट्टा प्रक्रिया हेतु राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के अंतर्गत तीन बैठकों की प्रक्रिया संबंधी परिपत्र
परिचय
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 08/01/2013 को जारी परिपत्र (क्रमांक: एफ.15(79)पंवारा/विधि/प्रशा.गाヴォं के संग अभि.2013/12/12) के माध्यम से आबादी भूमि के पट्टा वितरण की प्रक्रिया को सरल बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य उद्देश्य एवं विवरण
विभाग के ध्यान में लाया गया था कि पंचायतों द्वारा आबादी भूमि का पट्टा देने के लिए कम से कम छह बैठकें करनी पड़ती हैं, जिससे प्रक्रिया में काफी विलम्ब होता है। इस संबंध में नियमों के प्रावधानों एवं मूल भावना को ध्यान में रखते हुए स्पष्ट किया जाता है कि राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 145 से 147 में पट्टा दिए जाने की प्रक्रिया निर्धारित है। इसके तहत आवेदन पत्र प्रस्तुत करने के पश्चात् ग्राम पंचायत द्वारा पट्टा दिए जाने की कार्यवाही अब केवल 3 बैठकों में पूर्ण की जा सकती है:
प्रथम बैठक: तीन पंचों की समिति की प्रतिनियुक्ति।
द्वितीय बैठक: रिपोर्ट का समिश्रण व आपत्ति आमंत्रण।
तृतीय बैठक: यदि आपत्ति प्राप्त नहीं होती है तो पट्टा जारी करने की कार्यवाही की जा सकती है।
प्रशासन गांवों के संग अभियान-2013: नगरीय सीमाओं में सम्मिलित ग्राम पंचायतों में भूमि आवंटन और पट्टा वितरण के निर्देश
नगरीय विकास आवासन एवं स्वायत्त शासन विभाग आदेश
राजस्थान सरकार के नगरीय विकास आवासन एवं स्वायत्त शासन विभाग द्वारा क्रमांक प.3 (1192)/नविचि/3/2010, दिनांक 4 जनवरी 2013 को आदेश जारी किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य 'प्रशासन गांवों के संग अभियान-2013' के शिविरों में नगरीय सीमाओं (Urbanisable limits) में सम्मिलित ग्राम पंचायतों के गांवों में सार्वजनिक उपयोग, सरकारी विभागों एवं आबादी विस्तार हेतु ग्राम पंचायतों को भूमि आवंटन करना है।
मुख्य बिंदु:
अभियान अवधि: राज्य सरकार द्वारा 10 जनवरी, 2013 से 28 फरवरी, 2013 तक 'प्रशासन गांवों के संग अभियान-2013' चलाया जा रहा है।
पट्टा देने की अधिकारिता: मास्टर प्लान में दर्शाये गए परिधीय क्षेत्र में स्थित ग्राम पंचायतों को ग्राम पंचायत मुख्यालय वाले ग्राम में 500 मीटर तक और पंचायत के अन्य गांवों में 200 मीटर तक की सीमा में आबादी विस्तार एवं अन्य सार्वजनिक सुविधाओं (विद्यालय, चिकित्सालय आदि) के लिए राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 के अंतर्गत पट्टे दिए जाने की अधिकारिता दी गई है।
भूमि की उपलब्धता: जयपुर रीजन में जयपुर विकास प्राधिकरण द्वारा, जोधपुर रीजन में जोधपुर विकास प्राधिकरण तथा अन्य क्षेत्रों में जिला कलेक्टर द्वारा ग्राम पंचायतों को भूमि उपलब्ध कराई जाएगी।
समस्या निवारण एवं कमेटी गठन: प्राधिकरण/न्यास/स्थानीय निकाय के नाम दर्ज एवं सिवायचक भूमि को ग्राम पंचायतों को आवंटित करने के लिए कमेटी का गठन किया गया है, जिसमें प्राधिकरण का उपायुक्त/सचिव/मुख्य नगर पालिका अधिकारी (अध्यक्ष), संबंधित उपखण्ड अधिकारी (सदस्य), और संबंधित उप नगर नियोजक या सहायक/कनिष्ठ अभियंता (सदस्य) शामिल हैं।
राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 73 के अन्तर्गत पंचायतों की आमदनी में बढ़ोतरी करने की अपेक्षा बाबत
परिचय एवं उद्देश्य
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी पत्र क्रमांक एफ.1(11)(परावि)लेखा/निजी आय/2011-12/11186 दिनांक 7-11-2012 के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 73 के अंतर्गत ग्राम पंचायतों की निजी आय में बढ़ोतरी करने और वित्तीय स्वतंत्रता प्राप्त करने के संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु एवं निर्देश
वित्तीय स्वतंत्रता एवं निजी आय: राज्य वित्त आयोग की सिफारिश के अनुसार पंचायतों को अपनी निजी आय प्रति वर्ष 1.50 से 2.00 लाख रुपये बढ़ानी चाहिए ताकि वे कार्यों का प्रभावशाली तरीके से क्रियान्वयन कर सकें।
बजट घोषणा 2011-12: माननीय मुख्यमंत्री महोदय की बजट घोषणा के अनुसार, यदि कोई पंचायत पूर्व वर्ष के मुकाबले 2.00 लाख रुपये की निजी आय बढ़ाएगी, तो पंचायत समिति/जिला परिषद की सिफारिश के आधार पर राज्य सरकार द्वारा अतिरिक्त 2.00 लाख रुपये की मैंचिंग राशि (अनुदान) प्रदान की जाएगी।
राजस्व वृद्धि के स्रोत: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 33 और 34 के अनुसार पंचायतें सफाई, रोशनी, जल-निकास, सड़कों के रखरखाव के साथ-साथ कर, फीस, प्रमारों और शास्तियों में वृद्धि कर सकती हैं। हवेलियों, बड़े पक्के ग्रहों, ढाबों, होटलों, ऑटोमोबाइल सर्विस स्टेशनों, मरम्मत की दुकानों, पेट्रोल/डीजल पंपों आदि पर फीस उद्ग्रहित करके गैर राजस्व में वृद्धि की जा सकती है।
वाणिज्यिक डीएलसी दर: सड़क के किनारे स्थित दुकानों के संबंध में राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 (3) के अनुसार वाणिज्यिक डी.एल.सी. दर से कम से कम दोगुनी वसूली की जा सकती है या नियमानुसार बेदखली नोटिस/वाणिज्यिक पट्टा बनाकर पंचायत की आय बढ़ाई जा सकती है।
फीसों की दरें (नियम 68)
नियम 68 के अंतर्गत जनता को दी जाने वाली सेवाओं के लिए अधिकतम फीस दरें निर्धारित की गई हैं, जैसे:
आवेदन फीस: 10/- रुपये
निवास, जाति, आय प्रमाण पत्र: 20/- रुपये (अ.जा./अ.ज.जा. हेतु 5/- रुपये)
बिजली/पानी कनेक्शन हेतु अनापत्ति: 40/- रुपये (अ.जा./अ.ज.जा. हेतु 5/- रुपये)
भवन निर्माण स्वीकृति (पक्का निर्माण): 2/- रुपये प्रति वर्ग मीटर
पेट्रोल/डीजल पंप: 2500/- रुपये प्रति वर्ष
ढाबा/रेस्टोरेंट: 1000/- रुपये प्रति वर्ष
मोबाइल टॉवर: 10000/- रुपये प्रति वर्ष
अतिथि गृह/होटल/मोटल/विश्राम गृह: 5 कक्ष तक 1000/- रुपये प्रति वर्ष से लेकर 16 और अधिक कमरे तक 5000/- रुपये प्रति वर्ष
फीस/कर लागू करने एवं वसूली की प्रक्रिया
पंचायतों को साधारण बैठक में नियम 57 के अनुसार फीस निर्धारित दरों पर वसूल करने का प्रस्ताव पारित करना होगा।
नियम 58 के अनुसार आपत्तियों के लिए एक माह का नोटिस जारी किया जाएगा।
नियम 105 के तहत मांग पर्ची (प्रारूप 5) दी जाएगी और नियम 106 के तहत 15 दिन का नोटिस देकर चल संपत्ति की कुर्की की जा सकती है।
राजस्व विभाग के माध्यम से पटवारी द्वारा करों की वसूली (नियम 62, 63, 64) की जाएगी, जिसमें पटवारी 5 प्रतिशत काटकर 95 प्रतिशत राशि पंचायत के पी.डी. लेखे या पंचायत लेखे में जमा करेगा।
अतिक्रमण हटाने के सम्बन्ध में संसाधन उपलब्ध करवाने सम्बंधित
अतिक्रमण हटाने के सम्बन्ध में संसाधन उपलब्ध करवाने सम्बंधित
राजकीय भूमि पर अतिक्रमण हटवाने हेतु संसाधन / राशी का प्रावधान
राजकीय भूमि पर अतिक्रमण हटवाने हेतु संसाधन / राशी का प्रावधान
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2011 - शुल्क और नियमों से संबंधित अधिसूचना
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2011
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा अधिसूचना संख्या No. F.4 (7) Am/Rule/Legal/PR/2010/ 1348 दिनांक 12-8-2011 जारी की गई है। इसके माध्यम से राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
नियम 68 के तहत पंचायत द्वारा लिए जाने वाले शुल्क (Fees):
आवेदन शुल्क (Application fees): Rs. 10/-
निवास, जाति, आय प्रमाण पत्र आदि: Rs. 20/- (SC/ST के लिए 50% छूट)
उत्तराधिकार प्रमाण पत्र आदि: Rs. 40/- (SC/ST के लिए 50% छूट)
बिजली या पाईप द्वारा पानी के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC): Rs. 40/- (SC/ST के लिए 50% छूट)
आबादी भूमि क्रय हेतु आवेदन: Rs. 20/-
साइट प्लान तैयार करने और साइट निरीक्षण का खर्च: Rs. 50/-
राशन कार्ड (आवेदन पत्र और छपाई सहित): Rs. 10/-
30 दिन के बाद जन्म और मृत्यु का पंजीकरण: Rs. 20/-
भवन निर्माण की अनुमति: पक्का निर्माण के लिए Rs. 2/- प्रति वर्ग मीटर
पंचायत द्वारा पहले से स्वीकृत साइट प्लान में जोड़/बदलाव (Addition/Alteration): Rs. 100/-
बिना अनुमति अनाधिकृत निर्माण का नियममीकरण (Regularization): Rs. 10/- प्रति वर्ग मीटर (अधिकतम Rs. 1000/- तक)
पेट्रोल/डीजल पंप: Rs. 2500/- प्रति वर्ष
ढाबा/रेस्टोरेंट: Rs. 1000/- प्रति वर्ष
अन्य कोई व्यावसायिक इकाई: Rs. 200/- प्रति वर्ष
माइनिंग एनओसी के लिए प्रस्ताव: Rs. 5000/-
मोबाइल टॉवर: Rs. 10000/- प्रति वर्ष
गेस्ट हाउस/होटल/मोटेल/रेस्ट हाउस हेतु शुल्क: 5 कमरे तक Rs. 1000/- प्रति वर्ष, 6 से 10 कमरे Rs. 2500/- प्रति वर्ष, 11 से 15 कमरे Rs. 4000/- प्रति वर्ष, 16 या अधिक कमरे Rs. 5000/- प्रति वर्ष
इस अधिसूचना में बैठकों के आयोजन, समितियों, और विभिन्न नियमों के अंतर्गत वित्तीय सीमाओं और शक्तियों में भी संशोधन किए गए हैं।
राजस्थान पंचायती राज विभाग अधिसूचना: आ आबादी भूमि के विक्रय/नीलामी की पुष्टि संबंधी अधिकार
अधिसूचना विवरण
राजस्थान सरकार, पंचायती राज विभाग द्वारा जारी क्रमांक एफ.5(31)पंसंवि/विधि/संशोधितकरण/सं.आयुक्त/2011/1302, दिनांक 2-8-2011 के अंतर्गत आबादी भूमि के विक्रय और नीलामी की पुष्टि के संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु
नियम संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा 98 तथा राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 154(4)(ग) के अंतर्गत यह प्रावधान किया गया है।
संभागीय आयुक्त के अधिकार: 5.00 लाख रुपये से 10.00 लाख रुपये तक की आबादी भूमि के विक्रय/नीलामी की पुष्टि करने हेतु संभागीय आयुक्त को अधिकृत किया गया है।
राज्य सरकार स्तर पर पुष्टि: जिन भूखंडों की राशि 10.00 लाख से अधिक होगी, उनके विक्रय/नीलामी की पुष्टि हेतु प्रकरण पूर्ववत् राज्य सरकार को प्रेषित किए जाएंगे तथा पुष्टि राज्य सरकार द्वारा की जाएगी।
मुख्यमंत्री ग्रामीण बीपीएल आवास योजना एवं इंदिरा आवास योजना के अंतर्गत निःशुल्क पट्टा आवंटन के संबंध में निर्देश
मुख्यमंत्री ग्रामीण बीपीएल आवास योजना एवं इंदिरा आवास योजना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी पत्र क्रमांक एफ.4()विधि/पंचावि/2011/1134 दिनांक 1 जुलाई 2011 के माध्यम से बीपीएल परिवारों को निःशुल्क पट्टा आवंटन के संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
पट्टा आवंटन का अधिकार: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 153 के अंतर्गत कमजोर वर्गों को आवंटन का प्रावधान है जिसके तहत पंचायत सर्किल की आबादी भूमि में बीपीएल परिवारों को निःशुल्क पट्टे आवंटित करने का अधिकार ग्राम पंचायत में निहित है।
नियम 157 एवं 158: इन नियमों के अंतर्गत पट्टा आवंटन के लिए ग्राम पंचायत द्वारा संकल्प पारित कर बीपीएल परिवारों को पट्टे देने की कार्यवाही तत्काल सुनिश्चित करने के निर्देश हैं। इसके लिए नियम 145 से 156 द्वारा निर्धारित नीलामी प्रक्रिया की पालना करना आवश्यक नहीं है।
आबादी भूमि की उपलब्धता: जिला कलेक्टर से अपेक्षा की गई है कि जिन ग्राम पंचायतों के अधीन पंचायत सर्किल में आवंटन हेतु आबादी भूमि उपलब्ध नहीं है, वहां राज्य सरकार के स्वामित्व की अन्य उपयोग की भूमि को आबादी उपयोगार्थ परिवर्तित करते हुए ग्राम पंचायत को उपलब्ध कराई जाए।
मुख्यमंत्री ग्रामीण बीपीएल आवास योजना एवं इंदिरा आवास योजना के अंतर्गत निःशुल्क पट्टा आवंटन बाबत
मुख्यमंत्री ग्रामीण बीपीएल आवास योजना एवं इंदिरा आवास योजना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा मुख्यमंत्री ग्रामीण बीपीएल आवास योजना एवं इंदिरा आवास योजना के अंतर्गत बीपीएल परिवारों को निःशुल्क पट्टा आवंटन के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
पट्टा आवंटन का अधिकार: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 153 के अंतर्गत कमजोर वर्गों को आवंटन का प्रावधान है, जिसके तहत पंचायत सर्किल की आबादी भूमि में बीपीएल परिवारों को निःशुल्क पट्टे आवंटन करने का अधिकार ग्राम पंचायत में निहित है।
विनियमितीकरण: नियम 153 के अंतर्गत पुराने ग्रहों का विनियामितीकरण कर पट्टे जारी करने की शक्ति भी पंचायत में निहित है।
प्रक्रिया: उपरोक्त प्रावधानों के अंतर्गत आवंटन/पट्टा जारी किए जाने बाबत ग्राम पंचायत द्वारा संकल्प पारित किया जाकर आवंटन/पट्टा जारी करने की कार्यवाही की जा सकती है।
नियमों का पालन: नियम 157 एवं 158 के अंतर्गत आवंटन व पट्टा जारी करने के लिए नीलामी किए जाने संबंधी प्रक्रियात्मक प्रावधान नियम 145 से 156 द्वारा निर्धारित प्रक्रिया की पालना अपेक्षित/आवश्यक नहीं है।
भूमि की उपलब्धता: जिला कलेक्टरों से अपेक्षा की जाती है कि जिन ग्राम पंचायतों के अधीन पंचायत सर्किल में आवंटन हेतु आबादी भूमि उपलब्ध नहीं है, उन ग्राम पंचायतों के लिए ग्राम पंचायत क्षेत्र में उपलब्ध राज्य सरकार के स्वामित्व की अन्य उपयोग की भूमि को आबादी उपयोगार्थ परिवर्तित करते हुए आवंटन हेतु ग्राम पंचायत को उपलब्ध कराई जाए।
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2010 - राजस्व अभियान और प्रशासन गांवों के संग अभियान हेतु आपत्ति अवधि संशोधन
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2010
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक [No.F.4(7)Am/Rule/Legal/PR/2010/2113] दिनांक 26 नवंबर 2010 के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
नियम का नाम: राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2010।
प्रभावी तिथि: ये नियम राजपत्र में प्रकाशन की तिथि (30 नवंबर 2010) से प्रवृत्त हुए हैं।
नियम 148 में संशोधन: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 148 के उप-नियम (1) के तहत, राजस्व अभियान या प्रशासन गांवों के संग अभियान के दौरान आपत्तियां आमंत्रित करने की अवधि एक महीने के स्थान पर सात दिन होगी।
प्रारूप XXII में संशोधन: प्रारूप XXII के तहत भी राजस्व अभियान या प्रशासन गांवों के संग अभियान के दौरान आपत्तियां दर्ज कराने की अवधि एक महीने के स्थान पर सात दिन निर्धारित की गई है।
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2010 - आ आबादी एवं आपत्ति अवधि संबंधित अधिसूचना
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2010
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक [No.F.4(7)Am/Rule/Legal/PR/2010/2113] दिनांक 26 नवम्बर, 2010 के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी।
मुख्य बिंदु:
नियम संशोधन: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 148 के उप-नियम (1) के परन्तुक में संशोधन किया गया है।
आपत्ति अवधि में छूट: राजस्व अभियान या प्रशासन गांवों के संघ अभियान के दौरान आपत्तियां आमंत्रित करने की अवधि एक महीने के स्थान पर सात (7) दिन होगी।
प्रारूप संशोधन: फॉर्म XXII के अंतर्गत भी नोट जोड़ा गया है कि राजस्व अभियान या प्रशासन गांवों के संघ अभियान के दौरान फाइलिंग आपत्तियां दर्ज करने की अवधि एक महीने के स्थान पर सात दिन होगी।
लागू होना: यह नियम आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशन की तिथि (30 नवम्बर, 2010) से प्रभावी हो गए हैं।
राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) नियम, 2008 - नए पट्टा प्ररूप (प्ररूप 23-क, 23-ख और 23-ग)
राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) नियम, 2008
राजस्थान सरकार, पंचायती राज विभाग द्वारा दिनांक 1.2.2008 को अधिसूचना सं. एफ.4(11)पी.आर.डी./लॉ/रूल/एमेण्ड/07/445 जारी की गई है। इस अधिसूचना के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन किया गया है और नए पट्टा प्ररूप जोड़े गए हैं।
मुख्य बिंदु:
नियम 157 का संशोधन: नियम 157 के उप-नियम (1) में 'प्ररूप 23-क' और उप-नियम (2) में 'प्ररूप 23-ख' जोड़ा गया है।
नियम 158 का संशोधन: नियम 158 के उप-नियम (1) में 'प्ररूप 23-ग' जोड़ा गया है।
प्ररूप 23-क: आवासीय भूमि का पट्टा (नियम 157 (1) के अंतर्गत)।
प्ररूप 23-ख: आबादी भूमि का आवंटन / परिवारों के कब्जे के अस्थायी मकानों/कच्चे मकानों की नियमितीकरण (नियम 157 (2) के अंतर्गत)।
प्ररूप 23-ग: आबादी भूमि का रियायती दर पर / निःशुल्क आवंटन (नियम 158 के अंतर्गत)।
यह संशोधन ग्राम पंचायतों में आवासीय भूमि के आवंटन, पट्टा जारी करने और कच्चे मकानों के नियमितीकरण प्रक्रिया से संबंधित प्ररूपों को स्पष्ट करता है।
राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2007 - पट्टा नियम 158 संशोधन
राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2007
पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 18.06.2007 की अधिसूचना (क्रमांक: एफ.4(11)पीआरओडी/लॉ/रूल-एमेंड/07/2078) के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 158 में संशोधन किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
भूतपूर्व सैनिकों के लिए: पंचायत, सरहदी पंचायत समिति क्षेत्रों में भूतपूर्व सैनिकों को ग्रामीण आबादी में 150 वर्गगज तक आबादी भूमि रियायती दर पर आवंटित कर सकेगी।
घुमक्कड़ भेड़ पालकों के लिए: पंचायत, घुमक्कड़ भेड़ पालकों को 300 वर्गगज तक आबादी भूमि निःशुल्क आवंटित कर सकेगी।
विधवाओं और तलाकशुदा महिलाओं के लिए प्रावधान: इस नियम के अधीन आबंटित तीस प्रतिशत भूमि विधवाओं और तलाकशुदा महिलाओं को आबंटित की जायेगी।
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 और 158 में संशोधन - अधिसूचना दिनांक 9-4-2007
राजस्थान पंचायती राज विभाग अधिसूचना
राजस्थान सरकार के पंचायती राज विभाग द्वारा अधिसूचना क्रमांक F.4(7)/PRD/LAW/Rule-Amnd/07/1166 दिनांक 9-4-2007 जारी की गई है। इसके माध्यम से राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन किए गए हैं जिन्हें राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) नियम, 2007 कहा गया है।
मुख्य बिंदु:
नियम 157 में संशोधन: ऐसे परिवार जिनके पास कहीं भी कोई मकान या घर का प्लॉट नहीं है और जो वर्ष 2003 तक की अवधि के आवास/झोपड़ी/कच्चे घर के रूप में आबादी भूमि पर काबिज हैं, वे अधिकतम 300 वर्ग गज तक भूमि के निःशुल्क नियमन के हकदार होंगे। इस प्रकार की भूमि का पट्टा परिवार की महिला मुखिया के नाम जारी किया जाएगा।
नियम 158 में संशोधन: नियम 158 के उप-नियम (2) के अंतर्गत यह प्रावधान जोड़ा गया है कि बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे) परिवारों को आबादी भूमि के आवंटन के मामले में पंचायत भूमि निःशुल्क आवंटित कर सकेगी।
ग्राम पंचायतों द्वारा किसी भी समुदाय, धार्मिक संस्थाओं और गैर सरकारी संस्था को पट्टा जारी नहीं करने के संबंध में आदेश
राजस्व एवं पंचायती राज विभाग निर्देश
राजस्थान सरकार, पंचायती राज विभाग द्वारा ग्राम पंचायतों द्वारा जारी पट्टों के संबंध में आदेश जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
नियम संदर्भ: ग्राम पंचायत द्वारा आबादी क्षेत्रों की भूमि के पट्टे राजस्थान पंचायत राज (सामान्य) नियम 1996 के नियम 162 एवं 167 के प्रावधानों के तहत ही दिए जा सकते हैं।
निःशुल्क भूमि आवंटन: नियम 162 के तहत केवल राजकीय संस्थाओं को ही 500 वर्ग गज तक भूमि निःशुल्क दी जा सकती है। किसी भी समाज या गैर सरकारी संस्थाओं को निःशुल्क भूमि दिए जाने का नियमों में कोई प्रावधान नहीं है।
निरस्तीकरण कार्रवाई: यदि किसी गैर सरकारी संस्था या समुदाय को नियम विरुद्ध आबादी भूमि आवंटित की गई है, तो उसे तुरंत प्रभाव से निरस्त करने हेतु राज्य सरकार को मामला प्रेषित किया जाए।
शासकीय आदेश संख्या: क्रमांक:- एफ-139(26)परावरि/विधि/पट्टा/सामान्य/02/3297, दिनांक 19-7-06।
राजस्थान लोक सम्पत्ति अधिनियम के अंतर्गत अतिक्रमण हटाने के संबंध में परिपत्र
राजस्थान पंचायती राज विभाग परिपत्र
यह परिपत्र राजस्थान सरकार के पंचायती राज विभाग द्वारा क्रमांक एफ 139(51)परावि/विधि/अतिक्रमण/2005/3833, दिनांक 24-12-2005 को जारी किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य राजस्थान लोक सम्पत्ति (अनाधिकृत अधिभोगियों, बेदखली अधिनियम) 1964 के अंतर्गत पंचायतों की संपत्ति से अवैध अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया और नियमों की जानकारी देना है।
मुख्य बिंदु:
सम्पदा अधिकारी की नियुक्ति: राज्य सरकार की अधिसूचना दिनांक 12.11.92 के तहत समस्त जिला परिषदों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को सम्पदा अधिकारी नियुक्त किया गया है, जो पंचायत की संपत्तियों से अवैध कब्जों को हटाने हेतु अधिकृत हैं।
नोटिस की प्रक्रिया: अतिक्रमण करने वाले व्यक्ति को कम से कम 10 दिन का समय देते हुए नोटिस दिया जाना चाहिए, जिसे लोक शपथ के ऊपर या व्यक्तिगत रूप से/डाक द्वारा तामील कराया जाएगा।
बेदखली और नीलामी के नियम: सम्पदा अधिकारी सुनवाई के पश्चात बेदखली का आदेश पारित कर सकते हैं। अतिक्रमणकर्ता द्वारा छोड़ी गई संपत्ति को 14 दिन का समय देते हुए समाचार पत्र में प्रकाशन के पश्चात नीलाम किया जा सकता है।
अपील का प्रावधान: बेदखली के आदेश के विरुद्ध जिला जज या उनके द्वारा अधिकृत न्यायिक अधिकारी के समक्ष 15 दिन के भीतर अपील की जा सकती है।
शासकीय शक्तियां और दंड: सम्पदा अधिकारी को गवाहों को बुलाने और दस्तावेज मंगवाने हेतु सिविल न्यायालय की शक्तियां प्राप्त हैं। अवैध अतिक्रमण जारी रखने पर एक वर्ष तक की सजा और 1000/- रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।
पंचायती राज नियमों के अंतर्गत अचल संपत्ति की नीलामी, पट्टा और आबाड़ी भूमि आवंटन संबंधी निर्देश
पंचायती राज अधिनियम और नियम: संपत्ति नीलामी और पट्टा दिशा-निर्देश
यह दस्तावेज़ पंचायती राज संस्थाओं के अंतर्गत अचल संपत्ति की नीलामी, बाजार कीमत निर्धारण, पुनर्विक्रय, बिक्री की पुष्टि, प्राइवेट बातचीत द्वारा आबाड़ी भूमि का अंतरण, पुराने गृहों का विनियामीकरण और कमजोर वर्गों को भूमि आबंटन से संबंधित महत्वपूर्ण नियमों की जानकारी प्रदान करता है।
मुख्य बिंदु:
नीलामी समिति (नियम 151): सरपंच, उप-सरपंच, सतर्कता समिति का अध्यक्ष, महिला/अनुसूचित जाति/जनजाति/पिछड़ा वर्ग का पंचायत द्वारा मनोनीत एक पंच, भू-राजस्व निरीक्षक या पटवारी शामिल होते हैं।
बाजार कीमत (नियम 152): विकास अधिकारी प्रत्येक वर्ष अप्रैल मास में उप-registrar कार्यालय से क्षेत्र की आबाड़ी जमीनों के सूचक दर प्राप्त करते हैं।
विक्रय की पुष्टि और अनुमोदन (नियम 154): 10,000 रुपये से अधिक की बोली के लिए पंचायत समिति (50,000 रु से अधिक), जिला परिषद (1,00,000 रु से अधिक) या राज्य सरकार (1,00,000 रु से अधिक) से पूर्व अनुमोदन प्राप्त करना आवश्यक है।
पुराने गृहों का विनियामीकरण (नियम 157): 50 वर्ष से अधिक पूर्व निर्मित मकानों हेतु 100 रुपये और 50 वर्ष के दौरान बने मकानों हेतु 200 रुपये (चयनित परिवारों के लिए राशि वसूल नहीं होगी; गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वालों के लिए भी छूट)।
कमजोर वर्गों को आबंटन (नियम 158): गांव आबादियों में 150 वर्ग गज तक की आबाड़ी भूमि अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, पिछड़े वर्गों, श्रम मजदूरों और भूमिहीन व्यक्तियों को रियायती दरों पर आबंटित की जा सकती है।
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के अंतर्गत आबाद भूमि, पट्टा और विक्रय से संबंधित प्रारूप (प्रारूप 20 से 24)
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996: आबाद भूमि और पट्टा प्रारूप विवरण
यह दस्तावेज़ राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 और राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के अंतर्गत आने वाले महत्वपूर्ण आबाद भूमि, पट्टा, और संपत्ति रजिस्टरों के प्रारूपों (प्रारूप 20 से प्रारूप 24) को स्पष्ट करता है। ग्राम पंचायतों में भूमि आवंटन, विक्रय, और संपत्ति प्रबंधन के लिए इन प्रारूपों का आधिकारिक उपयोग किया जाता है।
मुख्य बिंदु और निर्धारित प्रारूप:
प्रारूप 20 (नियम 137): भवनों और स्थावर सम्पत्तियों का रजिस्टर।
प्रारूप 21 (नियम 146): आबाद भूमि के विक्रय का रजिस्टर।
प्रारूप 22 (नियम 148): आबाद भूमि के प्रस्तावित विक्रय के सम्बन्ध में आक्षेप आमंत्रण करने का नोटिस।
प्रारूप 23 (नियम 167(1)): आबाद भूमि का विक्रय विलेख।
प्रारूप 23क (नियम 157(1)): आवासीय भूमि का पट्टा।
प्रारूप 23ख (नियम 152(2)): आबाद भूमि का आवंटन / परिवारों में के कब्जे के अस्थायी मकानों / कच्चे मकानों का नियमितीकरण (विक्रय के लिए नहीं)।
प्रारूप 23ग (नियम 158): आबाद भूमि का रियायती दर पर / निःशुल्क आवंटन।
प्रारूप 24 (नियम 168(1)): आबाद भूमि की पट्टा बही (विक्रय विलेखों का रजिस्टर)।
ग्राम पंचायत स्तर पर भूमि रिकॉर्ड, पट्टा वितरण, और नियमबद्ध आवंटन के लिए ये सभी प्रपत्र कानूनी रूप से अनिवार्य और आधिकारिक दस्तावेज हैं।
राज पंचायती राज संस्थाओं में स्थावर संपत्तियाँ, आबाद भूमि और भूखण्ड आ आवंटन नियम
अध्याय 9: स्थावर संपत्तियाँ और आबाद भूमि
यह दस्तावेज़ राज पंचायती राज संस्थाओं के अंतर्गत स्थावर संपत्तियों, आबाद भूमि, भूखंडों की नीलामी, पट्टा आवंटन, और राजस्व संवर्धन से जुड़े नियमों की विस्तृत जानकारी प्रदान करता है। इसमें ग्राम पंचायत और पंचायती राज संस्थाओं द्वारा संपत्तियों के प्रबंधन, निरीक्षण और आबाद भूमि के उपयोग से संबंधित प्रावधान शामिल हैं।
मुख्य बिंदु:
पंचायत की संपत्तियां (नियम 136): पंचायत सर्किल के आबाद क्षेत्र के भीतर आने वाली सभी सरकारी भूमियां, कॉमन भूमियां और सार्वजनिक मार्ग पंचायत में निहित होते हैं।
आबाद भूमि और भूखंडों की नीलामी (नियम 141-143): आबाद भूमि का विक्रय सामान्यतः खुली नीलामी के माध्यम से किया जाता है। आवासीय और वाणिज्यिक प्रयोजनों के लिए निर्धारित मानकों के अनुसार भूखंडों की सूची तैयार की जाती है।
कमजोर वर्गों को आबाद भूमि का आवंटन (नियम 158): अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, स्वच्छता कर्मियों, पिछड़े वर्गों, विकलांगों और बाढ़ग्रस्त परिवारों को रियायती दरों पर 150 वर्ग गज तक की आबाद भूमि का पट्टा दिया जा सकता है।
भूमि का अस्थायी उपयोग और किराए पर देना (नियम 163-164): धार्मिक उत्सवों, पशु मेलों और बाजारों के लिए आबाद भूमि के अस्थायी उपयोग हेतु पट्टा-किराया निर्धारित किया गया है। पंचायती राज भवन और दुकानें खुली नीलामी के माध्यम से पट्टे पर दी जाती हैं।
अतिक्रमण हटाना (नियम 165): सार्वजनिक भूमियों, तालाब-तलों और चरागाहों पर अतिक्रमण की जांच के लिए हर वर्ष जनवरी और जुलाई में सर्वेक्षण किया जाता है और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाती है।