सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005

यह दस्तावेज भारत सरकार के विधि और न्याय मंत्रालय द्वारा प्रकाशित सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (2005 का अधिनियम संख्यांक 22) का आधिकारिक विवरण है, जो 1 फरवरी, 2011 तक यथाविद्यमान है। इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को लोक प्राधिकरणों के नियंत्रण अधीन सूचना तक पहुँच सुनिश्चित करना, शासन में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व बढ़ाना तथा भ्रष्टाचार को रोकना है।

मुख्य उपयोगी बिंदु

  • संक्षिप्त नाम व विस्तार: यह अधिनियम जम्मू-कश्मीर राज्य के सिवाय संपूर्ण भारत पर लागू होता है (तत्कालीन स्थिति के अनुसार)।
  • लोक प्राधिकारियों की बाध्यता: प्रत्येक लोक प्राधिकरण का यह कर्तव्य है कि वह अपने सभी अभिलेखों को सूचीबद्ध और अनुक्रमित करे तथा अधिनियम के प्रारंभ होने से एक सौ दिन के भीतर अपने संगठन, अधिकारियों की शक्तियों, कृत्यों और अन्य आवश्यक विवरणों को स्वतः प्रकाशित करे।
  • सूचना प्राप्त करने के लिए अनुरोध: कोई भी नागरिक संबंधित लोक प्राधिकारी या केंद्रीय/राज्य लोक सूचना अधिकारी को अंग्रेजी, हिंदी या आवेदन किए गए क्षेत्र की राजभाषा में लिखित या इलेक्ट्रॉनिक रूप में अनुरोध प्रस्तुत कर सकता है।
  • अनुरोध का निपटारा: सामान्य मामलों में अनुरोध प्राप्ति के 30 दिन के भीतर और व्यक्ति के जीवन या स्वतंत्रता से संबंधित मामलों में 48 घंटे के भीतर सूचना उपलब्ध कराई जानी अनिवार्य है।
  • सूचना के प्रकट किए जाने से छूट: अधिनियम की धारा 8 के तहत देश की संप्रभुता, सुरक्षा, वैज्ञानिक हित, न्यायालय की अवमानना या मंत्रिमंडल के कागजातों आदि से संबंधित कुछ विशेष मामलों में सूचना देने से छूट प्रदान की गई है।
  • केंद्रीय एवं राज्य सूचना आयोग: अधिनियम के तहत केंद्रीय स्तर पर केंद्रीय सूचना आयोग और राज्य स्तर पर राज्य सूचना आयोग के गठन, पदावधि, शक्तियों, अपीलों और शास्तियों का विस्तृत प्रावधान किया गया है।