राजस्थान सरकार गृह (ग्रुप-13) विभाग का पत्र
यह पत्र राजस्थान सरकार के गृह (ग्रुप-13) विभाग द्वारा क्रमांक प.6(19)गृह-13/2006, दिनांक 03.11.2011 को जारी किया गया है। यह पत्र नगर निगम, जयपुर द्वारा विवाह के अनिवार्य पंजीयन के संबंध में विभिन्न प्रकरण बिंदुओं पर चाहे गए मार्गदर्शन के संदर्भ में है।
मुख्य बिंदु एवं मार्गदर्शन
- अधिनियम का लागू होना: माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्देशानुसार 'राजस्थान विवाहों का अनिवार्य रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 2009' दिनांक 11.09.2009 को राजस्थान राजपत्र में प्रकाशित किया गया था। इस अधिनियम की धारा 3 के अंतर्गत इस अधिनियम के प्रारम्भ के पश्चात राजस्थान राज्य में ऐसे व्यक्तियों, जो भारत के नागरिक हैं, के बीच अनुष्ठापित प्रत्येक विवाह का रजिस्ट्रीकरण अनिवार्य है।
- अन्य विवाह अधिनियमों पर स्थिति: अधिनियम की धारा 20 के अंतर्गत स्पष्ट प्रावधान है कि भारतीय ईसाई विवाह अधिनियम 1872, पारसी विवाह और विवाह विच्छेद अधिनियम 1936, तथा विशेष विवाह अधिनियम 1954 के अधीन अनुष्ठापित विवाहों का अनिवार्य रजिस्ट्रीकरण अधिनियम के तहत पंजीयन नहीं होगा, बल्कि इन अधिनियमों के तहत पंजीयन स्वैच्छिक है।
- नाबालिग विवाह से संबंधित प्रावधान: यदि पक्षकार 21 वर्ष से कम उम्र के हों, तो माता-पिता या संरक्षक विवाह की तारीख से 30 दिवस के भीतर संबंधित रजिस्ट्रार को ज्ञापन प्रस्तुत करने के उत्तरदायी होंगे। यदि विवाह के समय पक्षकार नाबालिक हो, तो भी पंजीयन से रोका नहीं जा सकता है, तथा बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के प्रावधानों के तहत कार्यवाही की जाएगी।
- विभिन्न धर्मों और जातियों के विवाह: यदि किसी जाति या धर्म के पक्षकार अधिनियम की धारा 20 में वर्णित अधिनियमों को छोड़कर अन्य किसी अधिनियम के अंतर्गत विवाह अनुष्ठापित करते हैं, तो विवाह पंजीयक आवश्यक साक्ष्य, शपथ-पत्र एवं स्वयं की संतुष्टि के पश्चात विवाह प्रमाण-पत्र जारी करेगा।
