यह अधिनियम मूल कानून 'जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969' की धारा 13 में संशोधन करता है


1. मुख्य संशोधन और नियम (Key Amendments)

यह संशोधन मुख्य रूप से विलंबित पंजीकरण (Delayed Registration) की प्रक्रिया को दो श्रेणियों में बांटता है:  

 1 वर्ष से 2 वर्ष के बीच विलंब होने पर (उप-धारा 3):

 यदि जन्म या मृत्यु की सूचना घटना के 1 वर्ष के बाद लेकिन 2 वर्ष के भीतर दी जाती है, तो पंजीकरण केवल क्षेत्र के जिला मजिस्ट्रेट (DM), उप-विभागीय मजिस्ट्रेट (SDM) या जिला मजिस्ट्रेट द्वारा अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट (Executive Magistrate) के आदेश और निर्धारित शुल्क भुगतान पर होगा।  

 नोट: यहाँ कार्यपालक मजिस्ट्रेट का अर्थ 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023' (BNSS) की धारा 14(1) के तहत नियुक्त अधिकारी से है।  

 2 वर्ष से अधिक का विलंब होने पर (उप-धारा 3A):

 यदि जन्म या मृत्यु की सूचना घटना के 2 वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद दी जाती है, तो इसका पंजीकरण केवल संबंधित क्षेत्र के प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट (Judicial Magistrate of the First Class - JMFC) के आदेश पर ही हो सकेगा।  

1. मुख्य निष्कर्ष व प्रभाव (Impact & Takeaway)

 प्रक्रिया का स्पष्ट विभाजन: पहले से चले आ रहे देरी से पंजीकरण कराने के नियमों में समयावधि (1 से 2 साल तथा 2 साल से ऊपर) के आधार पर अलग-अलग प्रशासनिक/न्यायिक प्राधिकारियों को शक्तियां सौंपी गई हैं।  

 फर्जीवाड़े पर रोक: 2 साल से अधिक पुराना मामला सीधे प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास जाने से दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया अधिक मजबूत और सख्त होगी।