महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 (मनरेगा)

यह दस्तावेज़ महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 (2005 का अधिनियम संख्यांक-42) का आधिकारिक विवरण है, जिसे विभिन्न संशोधनों के साथ प्रकाशित किया गया है। यह ग्रामीण क्षेत्रों में अकुशल शारीरिक कार्य करने के इच्छुक वयस्क सदस्यों वाले परिवारों को वित्तीय वर्ष में कम से कम सौ दिनों की गारंटीकृत मजदूरी रोजगार प्रदान करने का उपबंध करता है।

मुख्य बिंदु एवं विशेषताएं:

  • रोजगार की गारंटी: प्रत्येक ग्रामीण गृहस्थी जिसके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक कार्य करने के लिए स्वेच्छा से आगे आते हैं, उन्हें प्रति वित्तीय वर्ष कम से कम सौ दिनों का गारंटीकृत रोजगार प्रदान किया जाएगा।
  • आवेदन और जॉब कार्ड: ग्राम पंचायत स्तर पर पंजीकरण और जॉब कार्ड जारी करने की प्रक्रिया का प्रावधान है, जिसमें गृहस्थी के पंजीकृत वयस्क सदस्यों का विवरण और कार्य की मांग दर्ज की जाती है।
  • बेकारी भत्ता: यदि आवेदन प्राप्ति के 15 दिनों के भीतर या अग्रिम आवेदन की दशा में नियत तिथि से रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो आवेदक बेरोजगारी भत्ता पाने का हकदार होगा।
  • मजदूरी दर: न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, 1948 के अधीन निर्धारित दरों के अनुसार मजदूरी देय होगी, जो किसी भी स्थिति में साठ रुपए प्रतिदिन से कम नहीं होगी।
  • सामाजिक संपरीक्षा (Social Audit): पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए ग्राम सभा द्वारा अधिनियम के अधीन सभी परियोजनाओं की नियमित सामाजिक संपरीक्षा की जाएगी।
  • कार्यान्वयन प्राधिकारी: केंद्रीय परिषद, राज्य रोजगार गारंटी परिषद, जिला कार्यक्रम समन्वयक, कार्यक्रम अधिकारी, और ग्राम पंचायत स्तर पर विभिन्न प्रशासनिक उत्तरदायित्व तय किए गए हैं।