पन्द्रहवें वित्त आयोग दिशा-निर्देश 2021-26
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा पन्द्रहवें वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत पंचायत अवधि (2021-26) के दौरान पंचायती राज संस्थाओं को देय अनुदान राशि के उपयोग एवं कार्यान्वयन हेतु संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं (क्रमांक: एफ.165(13)पंचारावि/ले.ब./15वां वि.आ./दिशा-निर्देश/2021-22/301, दिनांक 15-2-2022)।
प्रमुख बिंदु एवं अनुदान का विभाजन
- टाइड-ग्रैंड (Tied-Grant): कुल अनुदान का 60 प्रतिशत भाग राष्ट्रीय प्राथमिकताओं जैसे पेयजल आपूर्ति, वर्षा जल संचयन और स्वच्छता के लिए निर्धारित किया गया है।
- अनअटायड-ग्रैंड (Untied-Grant): कुल अनुदान का 40 प्रतिशत भाग पंचायती राज संस्थाओं द्वारा मूलभूत सेवाओं में सुधार लाने के लिए उपयोग किया जा सकेगा।
- अनुदान हस्तांतरण का आधार: पंचायती राज संस्थाओं (जिला परिषदों को 5 प्रतिशत, पंचायत समितियों को 20 प्रतिशत एवं ग्राम पंचायतों को 75 प्रतिशत) में राशि का वितरण किया गया है।
मूल (Untied) अनुदान के उपयोग के मुख्य क्षेत्र
- स्वास्थ्य, शिक्षा और पोषण से संबंधित गतिविधियां (जैसे टीकाकरण व कुपोषण की रोकथाम)।
- ग्राम पंचायत भवनों का निर्माण और मरम्मत।
- ग्राम पंचायत क्षेत्रों के अंदर और अन्तर ग्राम पंचायत सड़कों व पैदल रास्तों का निर्माण व मरम्मत।
- एलईडी स्ट्रीट लाइट्स और सोलर लाइटिंग की स्थापना व रख-रखाव।
- श्मशान और कब्रिस्तान का निर्माण, मरम्मत एवं रख-रखाव।
- सार्वजनिक पुस्तकालय, बच्चों के पार्क, खेल का मैदान और ग्रामीण हाट।
तकनीकी एवं प्रशासनिक व्यय
15वें वित्त आयोग के तहत देय मूल (अनटायड) अनुदान का अधिकतम 10 प्रतिशत तकनीकी एवं प्रशासनिक व्ययों (जैसे संविदा पर डेटा एंट्री ऑपरेटर/इंजीनियर की सेवाएं, कंप्यूटर क्रय, इंटरनेट सुविधा, सिविल कार्यों की गुणवत्ता की जांच आदि) के लिए उपयोग किया जा सकता है।
बेंध-अनुदान (Tied Grants) के अंतर्गत प्राथमिकताएं
बेंध-अनुदान (Tied-Grant) की 50% राशि का उपयोग स्वच्छता और खुले में शौच मुक्त (ODF) स्थिति तथा शेष 50% राशि का उपयोग पेयजल आपूर्ति, जल संचयन और जल पुनर्चक्रण की बुनियादी सेवाओं के लिए किया जा सकता है।
