स्वामित्त्व योजना का क्रियान्वयन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.4(1)स्वामित्त्व/विधि/पंश/2020/4046 दिनांक 07.09.2020 के अंतर्गत 'स्वामित्त्व योजना' के क्रियान्वयन के संबंध में विस्तृत निर्देश जारी किए गए हैं। इस पत्र के साथ भारत सरकार द्वारा जारी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) भी संलग्न किया गया है।
योजना का मुख्य उद्देश्य
- ग्रामीण भारत में आबाद क्षेत्रों (Abadi Land) की ड्रोन सर्वेक्षण तकनीक से पैमाइश कर डिजिटल मानचित्र तैयार करना।
- ग्रामीण परिवारों को 'प्रॉपर्टी कार्ड' (अधिकारों के अभिलेख) वितरित करना ताकि वे अपनी संपत्ति का उपयोग बैंक ऋण और अन्य वित्तीय लाभ प्राप्त करने के लिए कर सकें।
- ग्राम पंचायतों में संपत्ति कर और संपत्ति रजिस्टर को अद्यतन कर कर संग्रहण प्रणाली को सुदृढ़ बनाना।
- ग्रामीण संपत्ति से जुड़े आपसी विवादों और अदालतों में लम्बित मुकदमों के त्वरित निराकरण का मार्ग प्रशस्त करना।
प्रमुख प्रक्रिया एवं चरण (Standard Operating Procedure)
- CORS नेटवर्क की स्थापना: पायलट चरण के तहत राजस्थान और पंजाब राज्यों में सतत प्रचलित संदर्भ स्टेशन (CORS) नेटवर्क की स्थापना।
- तैयारी की गतिविधियां: कलेक्टर/सक्षम प्राधिकारी द्वारा सार्वजनिक नोटिस के माध्यम से सर्वेक्षण क्षेत्र की अधिसूचना, ग्राम सभा का आयोजन, और राजस्व विभाग एवं ग्राम पंचायत अधिकारियों द्वारा सीमाओं का चूना लाइनों से चिह्नीकरण।
- ड्रोन सर्वेक्षण एवं डेटा प्रोसेसिंग: भारतीय सर्वेक्षण विभाग (Survey of India) द्वारा ड्रोन के माध्यम से हवाई तस्वीरें लेना और जीआईएस (GIS) लैब में डेटा प्रोसेसिंग कर ऑर्थो-रेक्टिफाइड इमेज (ORI) तथा लैंड पार्सल मैप्स (LPM) तैयार करना।
- दावा और आपत्ति निस्तारण: ग्राम सभा, भूस्वामियों और राजस्व अधिकारियों की मदद से स्वामित्व का सत्यापन तथा प्राप्त आपत्तियों का निस्तारण।
- प्रॉपर्टी कार्ड का वितरण: राजस्व विभाग द्वारा अंतिम मानचित्रों और टेक्स्ट डेटा के आधार पर ग्रामीणों को प्रॉपर्टी कार्ड जारी करना।
संबंधित विभाग एवं अधिकारी
इस योजना के क्रियान्वयन में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राज्य राजस्व विभाग, भारतीय सर्वेक्षण विभाग (Survey of India), और पंचायती राज संस्थाएं (सरपंच, पंचायत सचिव, ग्राम सेवक) संयुक्त रूप से कार्य कर रहे हैं।
