प्रशासन गांवों के संग अभियान-2021: पट्टों के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 26.11.2021 को आदेश क्रमांक एफ.4(13)मार्गदर्शन/विधि/पंव्रा/2021/957 जारी किया गया है। यह आदेश सभी मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद (राजस्थान) को 'प्रशासन गांवों के संग अभियान-2021' के दौरान जारी किए जाने वाले पट्टों के संबंध में मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए है।
मुख्य बिंदु:
- चोरी/नष्ट/गुम हुए मूल पट्टों के संबंध में: यदि 1994 से पूर्व या राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 एवं नियम, 1996 के तहत जारी मूल पट्टा चोरी, गुम या नष्ट हो गया हो:
- यदि ग्राम पंचायत के रिकॉर्ड में कार्यालय प्रति उपलब्ध है: आवेदक से FIR की प्रति, शपथ पत्र (पट्टा चोरी होने पर) या शपथ पत्र (पट्टा नष्ट/गुम होने पर) प्राप्त कर, राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के अनुसार डुप्लीकेट पट्टा जारी किया जा सकता है।
- यदि ग्राम पंचायत के रिकॉर्ड में कार्यालय प्रति उपलब्ध नहीं है: FIR की प्रति, शपथ पत्र, तथा पट्टा नष्ट/गुम होने पर आवेदक का शपथ पत्र लेकर स्थानीय समाचार पत्रों में आपत्ति आमंत्रण नोटिस प्रकाशित कराया जाएगा। आपत्तियों के निस्तारण के बाद नियमानुसार नया पट्टा जारी किया जा सकता है।
- मूल पट्टा प्रस्तुत किए जाने पर पुनर्विसमयकरण/विभाजन/नामान्तरण/भू-उपयोग परिवर्तन: यदि आवेदक मूल पट्टा प्रस्तुत करे और पंचायत रिकॉर्ड में कार्यालय प्रति संधारित न हो, तो आवेदक से शपथ पत्र लेकर, स्थानीय समाचार पत्रों में आपत्ति नोटिस प्रकाशित करवाकर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
- आवासीय भूमि का उप-विभाजन/पुनर्गठन: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के तहत प्रारूप-52 में जारी अनुज्ञा के पश्चात संबंधित ग्राम पंचायत द्वारा आवेदक का मूल पट्टा जमा कराकर अनुज्ञा के अनुसार नया पट्टा जारी किया जाएगा।
- पट्टों का पंजीयन: आवासीय पट्टों का पंजीयन प्रचलित कानूनों के तहत एक अनिवार्य विधिक प्रक्रिया है, इसमें छूट प्रदान नहीं की जा सकती।
- आबादी भूमि (राजस्व रिकॉर्ड): जिन ग्राम पंचायतों में जिला कलेक्टर/उपखण्ड अधिकारी एवं तहसीलदार द्वारा आबादी हेतु कुछ खसरे दर्ज किए जा रहे हैं और उनमें पक्के मकान हैं, तो राजस्व रिकॉर्ड में ग्राम पंचायत के नाम स्वामित्व दर्ज होने पर नियममानुसार पट्टे जारी किए जा सकते हैं।
- नियम-157 के तहत कार्रवाई: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के लागू होने के पश्चात की अवधि में निहित भूमि पर पात्रता रखने वाले व्यक्ति को नियम-157 के तहत प्रक्रिया पूर्ण कर पट्टा दिया जा सकता है।