राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) अधिनियम, 2015
विधि (विधायी प्रारूपण) विभाग (ग्रुप-2) द्वारा जारी अधिसूचना संख्या प. 2 (40) विधि/2/2015 दिनांक 8 अक्टूबर, 2015 के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) अधिनियम, 2015 (2015 का अधिनियम संख्यांक 28) प्रकाशित किया गया है। यह अधिनियम 5 जून, 2015 से प्रवृत्त हुआ समझा जाएगा।
मुख्य बिंदु और प्रावधान
- अध्याय-4-क का अंतःस्थापन: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 में नया अध्याय 'किसी गांव के आबादी क्षेत्र का विनियमन' जोड़ा गया है।
- धारा 107-क (भूमि के उपयोग के परिवर्तन पर निर्बन्धन): आबादी क्षेत्र की भूमि के उपयोग परिवर्तन (जैसे आवासीय से वाणिज्यिक, औद्योगिक से वाणिज्यिक आदि) के लिए राज्य सरकार या प्राधिकृत अधिकारी से अनुमति और निर्धारित संपरिवर्तन प्रभार (Conversion Charges) का प्रावधान किया गया है।
- धारा 107-ख (भू-खण्डों का उप-विभाजन या पुनर्गठन): आबादी क्षेत्र में भू-खण्ड के उप-विभाजन या पुनर्गठन के लिए पूर्व अनुमति और निर्धारित शर्तों का पालन अनिवार्य किया गया है।
- धारा 107-ग (कतिपय भूमियों के पट्टे की मंजूरी): विधिपूर्ण कब्जा रखने वाले व्यक्तियों को पंचायत द्वारा विहित रीति से पट्टा प्राप्त करने का प्रावधान है, जिसके लिए आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी।
- धारा 107-घ (कतिपय भूमियों का व्ययन): नज़ूल भूमि या आबादी विकास हेतु आरक्षित भूमि का व्ययन पंचायत द्वारा नियमानुसार किया जाएगा।
- धारा 107-च (आबादी भूमि के अभिलेख): प्रत्येक पंचायत द्वारा अपने क्षेत्र के भीतर स्थित आबादी भूमि का अभिलेख तैयार और संधारित किया जाएगा।
वसूले गए समस्त संपरिवर्तन प्रभार और अन्य प्रभार पंचायत की निधि में जमा किए जाएंगे।
