राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2026 जारी
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2026
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम सं. 13) की धारा 102 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2026 की अधिसूचना जारी कर दी गई है। यह अधिसूचना दिनांक 04 अगस्त, 2026 को जारी की गई है और यह तुरंत प्रभाव से प्रवृत्त हो गई है।
मुख्य संशोधन बिंदु:
नियम 154 का संशोधन: इसके तहत यदि सबसे ऊंची बोली की रकम दो लाख रुपये से अधिक हो, तो पंचायत को पूर्व अनुमोदन प्राप्त करना होगा:
(क) यदि रकम 5 लाख रुपये से अनधिक हो, तो पंचायत समिति का।
(ख) यदि रकम 5 लाख रुपये से अधिक किंतु 10 लाख रुपये से अनधिक हो, तो जिला परिषद का।
(ग) यदि रकम 10 लाख रुपये से अधिक हो, तो राज्य सरकार का पूर्व अनुमोदन आवश्यक होगा।
साथ ही, नियम 154 और नियम 160 के अंत में दी गई टिप्पणियों में मौजूदा अभिव्यक्ति "10,000/-" के स्थान पर "2,00,000/-" प्रतिस्थापित कर दिया गया है।
नियम 157 का संशोधन: नियम 157 के उप-नियम (1) के द्वितीय परंतुक में "प्रशासन गांव के संग अभियान 2021 और प्रशासन गांव के संग अभियान 2023" के स्थान पर "ग्रामीण सेवा शिविर 2026 या पंचायती राज विभाग या राजस्व विभाग द्वारा किसी भी नाम से आयोजित कोई भी शिविर या अभियान" प्रतिस्थापित किया गया है।
आदेश क्रमांक: [NO.F.4(05)Rule/Amend/Legal/PR/2026/45] हस्ताक्षर: भारत भूषण गोयल, शासन उप सचिव, राज्यपाल के आदेश से।
राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2026 – ग्राम विकास अधिकारी की वरिष्ठता सूची से संबंधित अधिसूचना
राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2026
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 04 जून, 2026 को अधिसूचना जारी कर राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन किया गया है। इसे राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2026 कहा गया है, जो तुरंत प्रभाव से लागू हो गए हैं।
मुख्य बिंदु एवं संशोधन
नियम 285 का संशोधन: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 285 के परंतुक में खंड (iv) और (v) जोड़े गए हैं।
8 जून, 2016 या उसके पश्चात नियुक्त ग्राम विकास अधिकारी: इनकी वरिष्ठता सूची भर्ती एजेंसी से प्राप्त योग्यता/मेरिट सूची के आधार पर तैयार की जाएगी।
अनुकंपात्मक आधार पर नियुक्ति: 8 जून, 2016 या उसके पश्चात अनुकंपा के आधार पर नियुक्त ग्राम विकास अधिकारियों के मामले में वरिष्ठता उनके पदग्रहण (joining) की तारीख के आधार पर निर्धारित होगी।
राज्य स्तर पर वरिष्ठता: ग्राम विकास अधिकारी की वरिष्ठता सूची अब राज्य स्तर पर रखी जाएगी।
आदेश क्रमांक: [सं.एफ.4(09)अमेंड/रूल्स/लीगल/पीआर/2026/37]
जारीकर्ता: भारत भूषण गोयल, उप शासन सचिव, राज्यपाल के आदेश से।
जिला सलूंबर की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन से संबंधित शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा जारी शुद्धि पत्र
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवारा/2024/889 दिनांक 28-12-2025 के तहत जिला सलूंबर की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसर्जन से संबंधित पूर्व में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटिवश हुए गलत प्रकाशन को सुधारने हेतु शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
विवरण: पूर्व प्रकाशित अधिसूचनाओं (संख्या एफ.15(39)पंवारा/पंचायत समिति गठन/2025/803 दिनांक 20.11.2025 एवं संख्या एफ.15(39)पंवारा/पंचायत समिति गठन/2025/843 दिनांक 21.11.2025) में प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात कॉलम संख्या 6 के स्थान पर कॉलम 7 में अंकित विवरण को सही पढ़ा जाए।
जिला डीग में ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन संबंधी शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), जयपुर द्वारा दिनांक 28-12-2025 को एक शुद्धि पत्र (क्रमांक: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/868) जारी किया गया है। यह आदेश जिला डीग की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन के संबंध में पूर्व में जारी अधिसूचनाओं में लिपकीय त्रुटिवश हुए गलत प्रकाशन को सुधारने के लिए जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
आदेश दिनांक: 28-12-2025।
विषय: जिला डीग की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन से संबंधित पूर्व अधिसूचनाओं में संशोधन।
विवरण: पूर्व प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपकीय त्रुटियों के कारण, प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात अब कॉलम संख्या 6 में अंकित विवरण के स्थान पर कॉलम संख्या 7 में अंकित विवरण को सही पढ़ा जाएगा।
यह संशोधन ग्राम पंचायतों तथा पंचायत समितियों दोनों के लिए जारी सूचियों पर लागू होता है।
संबंधित उपयोगकर्ता और अधिकारी विस्तृत जानकारी के लिए मूल अधिसूचना देख सकते हैं।
करौली जिले में पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन की अधिसूचना
करौली जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए करौली जिले में पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन के संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र में 24 नवंबर 2025 को प्रकाशित हुई है।
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना क्रमांक: एफ.15(39)पंव/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/834 (दिनांक 21 नवंबर 2025)।
अधिकार क्षेत्र: जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार प्रस्तावों एवं आपत्तियों पर सुनवाई के उपरांत राज्य सरकार के अनुमोदन से करौली जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन किया गया है।
नया कार्यकाल: पुनर्गठित/पुनर्रसीमांकित/नवसृजित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात, पुरानी पंचायत समितियां कार्य करना बंद कर देंगी और नई समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है।
राजस्थान पंचायती राज (अंतरित क्रियाकलाप) (संशोधन) नियम, 2025 जारी
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धाराओं के तहत राजस्थान पंचायती राज (अंतरित क्रियाकलाप) नियम, 2011 में संशोधन हेतु अधिसूचना जारी की गई है।
दिनांक: अक्टूबर 29, 2025 (राजस्थान राजपत्र असाधारण में 31 अक्टूबर 2025 को प्रकाशित)
नियम का नाम: राजस्थान पंचायती राज (अंतरित क्रियाकलाप) (संशोधन) नियम, 2025
प्रभावी तिथि: ये नियम तुरंत प्रवृत्त होंगे।
नियम 8 में संशोधन: राजस्थान पंचायती राज (अंतरित क्रियाकलाप) नियम, 2011 के नियम 8 के विद्यमान खंड (iii) के स्थान पर "एक जिले से दूसरे जिले में संबंधित विभाग" प्रतिस्थापित किया गया है।
यह आदेश राज्यपाल के आदेश से भारत भूषण गोयल, शासन उप सचिव द्वारा जारी किया गया है।
दिनांक 02 अक्टूबर, 2025 को आयोजित होने वाली ग्राम सभा के संबंध में दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के निर्देश
राजकीय दिशा-निर्देशों के अनुसार राज्य की सभी ग्राम पंचायतों में दिनांक 02 अक्टूबर, 2025 को ग्राम सभा का आयोजन किया जाना सुनिश्चित किया गया है। इस ग्राम सभा में प्रमुख रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर कार्रवाई संपादित की जानी है:
1. सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना से संबंधित बिंदु
वर्ष 2025 के लिए सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के सभी लाभार्थियों के वार्षिक भौतिक सत्यापन का कार्य सुनिश्चित किया जाए।
असतत्यापित पेंशनर्स के रुके हुए पेंशन भुगतान और विभिन्न कारणों से अपात्र हुए पेंशनर्स के मामलों के निस्तारण हेतु ग्राम सभा में व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए।
शत-प्रतिशत पेंशनर्स का वार्षिक सत्यापन कराया जाए तथा अपात्र पाए गए पेंशनर्स की सूची व गलत सूचना के आधार पर निरस्त प्रकरणों की जांच उपरांत पुनः प्रारंभ (री-ओपन) करने की कार्रवाई रिपोर्ट सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग को भेजी जाए।
2. किसान गिरदावरी से संबंधित बिंदु
ग्राम सभाओं में आने वाले किसानों को 'किसान गिरदावरी' मोबाइल ऐप डाउनलोड करने तथा लॉगिन प्रक्रिया की जानकारी दी जाए।
DOIT&C द्वारा तैयार स्क्रीन रिकॉर्डेड वीडियो एवं व्हाट्सएप टेम्पलेट्स का प्रचार-प्रसार किया जाए और व्हाट्सएप चैनल को फॉलो कराया जाए।
3. चारागाह विकास से संबंधित बिंदु
ग्राम पंचायतों में चारागाह और संपत्ति विवरण रजिस्टर का संधारण सुनिश्चित किया जाए।
ग्राम सभा में "एक पंचायत-एक चारागाह" एवं "एक गांव-एक चारागाह" गतिविधि के संबंध में प्रस्ताव लेकर चारागाह विकास हेतु आवश्यक कार्रवाई की जाए।
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 170 के अंतर्गत चारागाह विकास समिति का गठन/नवीनीकरण किया जाए और अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया पूरी की जाए।
4. जन योजना अभियान (पीपीसी) - सबकी योजना सबका विकास
पंचायती राज मंत्रालय, भारत सरकार के पत्र दिनांक 17.09.2025 एवं विभागीय पत्र दिनांक 25.09.2025 के अनुसार ग्राम पंचायत विकास योजनाएँ (GPDP) तैयार करने के लिए ग्राम सभा की बैठक में आवश्यक कार्रवाई की जाए।
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 के तहत प्ररूप 23-क एवं 23-ख में संशोधन के संबंध में
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 - पट्टा प्ररूप संशोधन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.4(1)नियम/संशो/विधि/पंवारा/2024/304 दिनांक 27-3-2025 के माध्यम से सभी मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद (समस्त राजस्थान) को राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 के तहत जारी पट्टों के प्ररूप-23क एवं 23ख में किए गए संशोधनों के अनुसार पट्टा जारी करने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना विवरण: राजस्थान राजपत्र (असाधारण) दिनांक 20 जनवरी, 2025 में प्रकाशित अधिसूचना (जी.एस.आर. 97) के तहत राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) नियम, 2025 बनाए गए हैं।
प्ररूप-23-क: नियम 157(1) के अंतर्गत आवासीय भूमि का पट्टा (पट्टा विलेख) से संबंधित है, जो पंचायत आबाबी भूमि पर पुराने संनिर्मित घरों पर कब्जे या 31 दिसंबर, 2016 से ठीक पूर्ववर्ती सत्तर वर्ष के दौरान संनिर्मित घरों के लिए है।
प्ररूप-23-ख: नियम 157(2) के अंतर्गत आबाबी भूमि का आवंटन / परिवारों के कब्जे के अस्थायी मकानों / कच्चे मकानों का नियमितीकरण (पट्टा विलेख) से संबंधित है, जो वर्ष 2003 तक के कच्चे/अस्थायी मकानों के कब्जे के लिए है (अधिकतम 300 वर्ग गज)।
आवश्यक कार्रवाई: सभी संबंधित ग्राम पंचायतों को निर्देशित किया गया है कि वे संशोधित प्ररूपों के अनुसार ही पट्टा जारी करना सुनिश्चित करें।
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 के तहत प्ररूप 23-क एवं 23-ख में संशोधन के संबंध में
राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) नियम, 2025
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.4(1)नियम/संशो/विधि/पंवारा/2024/304 दिनांक 27-3-2025 और राजस्थान राजपत्र असाधारण (दिनांक 20 जनवरी, 2025) की अधिसूचना जी.एस.आर. 97 के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 के अंतर्गत पट्टों के प्ररूप-23-क एवं 23-ख में संशोधन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
नियम 157(1) के अंतर्गत प्ररूप-23-क: आवासीय भूमि का पट्टा (पट्टा विलेख) जिसमें पुराने संनिर्मित घरों पर कब्जे या पंचायत आबाद भूमि पर कब्जे से संबंधित प्रावधान और शर्तें शामिल हैं।
नियम 157(2) के अंतर्गत प्ररूप-23-ख: आबाद भूमि का आवंटन / परिवारों के कब्जे के अस्थायी मकानों / कच्चे मकानों का नियमितीकरण (पट्टा विलेख), जिसमें अधिकतम 300 गज तक की आबाद भूमि के निःशुल्क आवंटन और उससे जुड़ी शर्तों का उल्लेख है।
निर्देश: सभी मुख्य कार्यकारी अधिकारियों, जिला परिषद (राजस्थान) को निर्देशित किया गया है कि वे संबंधित ग्राम पंचायतों को संशोधित प्ररूप-23-क और 23-ख के अनुसार पट्टा जारी करना सुनिश्चित कराएं।
पंचायत समिति एवं ग्राम पंचायत के स्वामित्व वाली भूमियों की सूचना भेजने बाबत निर्देश
पंचायत समिति एवं ग्राम पंचायत के स्वामित्व वाली भूमियों की सूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी पत्र क्रमांक एफ.4(14)लैण्ड बैंक/विधि/पंव्रा/2022/720 दिनांक 09/06/2022 के माध्यम से सभी मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद (राजस्थान) को पंचायत समिति एवं ग्राम पंचायत के स्वामित्व वाली भूमियों की सूचना भेजने के संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य उद्देश्य एवं पृष्ठभूमि
माननीय मंत्री महोदय, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज द्वारा दिनांक 15.3.2022 को राज्य विधानसभा में चर्चा के दौरान यह घोषणा की गई थी कि ग्राम पंचायतों की भूमि का रिकॉर्ड संधारित कर लैण्ड बैंक बनाया जाएगा, जिससे पंचायतों की निजी आय में वृद्धि हो सके।
समयबद्ध कार्यवाही हेतु निर्देश
15 दिवस की अवधि: समस्त विकास अधिकारीगण अपने कार्यालय के जिम्मेदार अधिकारी/कार्मिक को पाबंद करें तथा स्वयं क्षेत्र के राजस्व अधिकारियों (तहसीलदार, पटवारी आदि) के कार्यालय से संपर्क कर पंचायत समिति/ग्राम पंचायत के स्वामित्व की भूमि (चाहे वह आ आबादी किस्म की हो अथवा कृषि या अन्य किस्म की) का संपूर्ण विवरण प्राप्त कर जमाबंदी की प्रति प्राप्त करें। यह कार्य अधिकतम 15 दिवस में पूर्ण कराया जाए।
7 दिवस की अवधि: राजस्व रिकॉर्ड से सूचना प्राप्त होने के पश्चात संलग्न प्रपत्र में पंचायतवार/पंचायत समितिवार सूचना अधिकतम 07 दिवस में आवश्यक रूप से भरवाई जाए।
कुल समयसीमा: इस प्रकार वांछित प्रपत्र हर हाल में अधिकतम 21 दिवस की अवधि में पंचायती राज विभाग को भिजवाया जाना सुनिश्चित किया जाए।
राजस्थान लोक उपापन में पारदर्शिता (RTTP) नियम 2013 के नियम 16 के अंतर्गत महात्मा नरेगा योजनांतर्गत निर्माण कार्यों हेतु आनुषंगिक सामग्री उपापन बाबत दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग का महत्वपूर्ण आदेश
यह आदेश ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रामीण विकास, अनुभाग-5), राजस्थान सरकार द्वारा क्रमांक एफ 27(263)प्रावि/युप-5/जीकेएन/उपापन 2015-18, दिनांक 29 नवम्बर 2021 को जारी किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य राजस्थान लोक उपापन में पारदर्शिता अधिनियम, 2012 एवं राजस्थान लोक उपापन में पारदर्शिता नियम, 2013 के नियम 16 के तहत महात्मा नरेगा योजनांतर्गत स्वीकृत निर्माण कार्यों हेतु आनुषंगिक सामग्री के उपापन के संबंध में मार्गदर्शन प्रदान करना है।
मुख्य दिशा-बिंदु एवं नियम:
सीमा में संशोधन: राजस्थान लोक उपापन में पारदर्शिता नियम, 2013 के नियम 16 के प्रावधानों के तहत 'सीमित बोली' प्रक्रिया के अंतर्गत वित्तीय वर्ष में सामग्री उपापन की अधिकतम सीमा को 'पाँच लाख रुपये' से बढ़ाकर 'छः लाख रुपये' (6.00 लाख रुपये) कर दिया गया है।
6.00 लाख रुपये तक के कार्य: महात्मा नरेगा योजना सहित अन्य योजनाओं के अंतर्गत रुपये 6.00 लाख तक (श्रम सामग्री सहित) की लागत के कार्यों हेतु सामग्री उपापन 'सीमित निविदा' के माध्यम से किया जा सकेगा।
6.00 लाख रुपये से अधिक के कार्य: रुपये 6.00 लाख से अधिक लागत के समस्त कार्य राजस्थान लोक उपापन में पारदर्शिता अधिनियम, 2012 एवं नियम, 2013 की पालना में अनिवार्य रूप से पूर्ण कार्य (श्रम एवं सामग्री सहित) संकर्म निविदा (वर्क्स एंड मटेरियल सप्लाई टेंडर) के माध्यम से कराए जाएंगे।
वित्तीय सीमा: पंचायती राज संस्थाओं द्वारा एक वित्तीय वर्ष में सामग्री उपापन की निर्धारित अधिकतम सीमा रु. 60.00 लाख तक की पालना करने का उत्तरदायित्व संबंधित पंचायत समिति का होगा।
ई-प्रोक्योरमेंट (E-Procurement): रुपये 6.00 लाख से अधिक लागत के कार्यों हेतु सामग्री का क्रय/उपापन 'राजस्थान लोक उपापन में पारदर्शिता अधिनियम, 2012' एवं नियमों के तहत ई-उपापन प्रक्रिया को अपनाकर ही संपादित किया जाएगा।
अधिक जानकारी के लिए कृपया विभागीय आदेश पत्र संख्या एफ 27(263)प्रावि/युप-5/जीकेएन/उपापन 2015-18 दिनांक 29 नवंबर 2021 का अवलोकन करें।
राजस्थान पंचायती राज (चतुर्थ संशोधन) नियम, 2021 - प्रशासन गांवों के संग अभियान के दौरान शुल्क में छूट
राजस्थान पंचायती राज (चतुर्थ संशोधन) नियम, 2021
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा अधिसूचना दिनांक 06 अक्टूबर, 2021 जारी कर राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन किया गया है। इसके तहत 'राजस्थान पंचायती राज (चतुर्थ संशोधन) नियम, 2021' बनाए गए हैं जो तुरंत प्रभाव से लागू हो गए हैं।
प्रमुख बिंदु:
नियम 157 का संशोधन: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 के उप-नियम (1) के अंतर्गत एक नया परंतुक जोड़ा गया है।
प्रशासन गांवों के संग अभियान 2021: इस अभियान की समयावधि के दौरान खंड (i) और (ii) के अधीन विनिर्दिष्ट दरों के पचास प्रतिशत (50%) के समतुल्य दर से ही शुल्क प्रभारित किया जाएगा।
यह आदेश राज्यपाल के आदेश से डॉ. प्रेम सिंह चारण, संयुक्त शासन सचिव द्वारा [सं. एफ.139(45)पंरावि/विधि/संशो/2021/860] के अंतर्गत जारी किया गया है।
स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन बाबत महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन बाबत निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 18.01.2021 को 'स्वामित्व योजना' के क्रियान्वयन के संबंध में महत्वपूर्ण आदेश जारी किया गया है। राष्ट्रीय पंचायत दिवस (24 अप्रैल 2020) पर केंद्र सरकार द्वारा आरंभ की गई इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पंचायती राज पर इसके दूरगामी प्रभावों को देखते हुए राजस्व विभाग एवं पंचायती राज विभाग के संयुक्त प्रयासों से क्रियान्वयन करना है।
योजना की मुख्य बातें और प्रक्रिया
ड्रोन फोटोग्राफी और मैपिंग: भारतीय सर्वेक्षण विभाग (Survey of India) द्वारा प्रत्येक राजस्व ग्राम की आबादी भूमि का मानचित्र ड्रोन के जरिए फोटोग्राफी कर तैयार किया जाएगा।
चूना मार्किंग: ड्रोन उड़ान से पहले राजस्व ग्राम की आबादी भूमि की बाहरी सीमा (outer line) पर चार इंच चौड़ाई की चूना लाइन डालकर सीमा मार्क की जाएगी। खाली पड़े भूखंडों को भी चूना लाइन डालकर चिह्नित किया जाएगा।
सर्वे समिति का गठन: प्रत्येक राजस्व ग्राम हेतु सर्वे समिति का गठन किया जाएगा जिसमें ग्राम सेवक, दो वार्ड पंच (संबंधित राजस्व ग्राम व अन्य वार्ड पंच) और पंचायत का एक कार्मिक (कनिष्ठ लिपिक अथवा ग्राम रोजगार सहायक) शामिल होंगे। यह समिति प्राप्त इमेज मैप के अनुसार प्रत्येक भूखंड और निर्मित भवन का सर्वे कर निर्धारित प्रपत्र में जानकारी संकलित करेगी।
आपत्तियां एवं निस्तारण: ग्राम पंचायत द्वारा सर्वे प्रपत्र और इमेज मैप की प्रति पंचायत भवन एवं सार्वजनिक स्थल पर चस्पा की जाएगी। राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम-148 के प्रावधानुसार 07 दिवस के भीतर आपत्तियां दर्ज कराई जा सकेंगी, जिनका निस्तारण ग्राम सभा के माध्यम से किया जाएगा।
पट्टा वितरण: आपत्तियों के निराकरण के बाद फाइनल इमेज मैप (आईडी नंबरिंग सहित) के आधार पर संबंधित लाभार्थियों को राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के प्रावधानों के तहत पट्टा, रजिस्ट्री एवं पीडीएफ कॉपी मोबाइल नंबर पर उपलब्ध कराई जाएगी।
प्रथम चरण: राज्य में इस योजना का सबसे पहले क्रियान्वयन जैसलमेर जिले में किया जाना है।
पुराने पट्टों के पुनर्विधमान्यकरण (Revalidation) किये जाने बाबत आदेश
पुराने पट्टों का पुनर्विधमान्यकरण (Revalidation)
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा पुराने पट्टों के पुनर्विधमान्यकरण के संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
नया नियम: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में नया नियम-167क जोड़ा गया है जिसके तहत पंचायत द्वारा जारी किये गए विक्रय विलेख, पट्टा या पट्टा विलेख का पुनर्विधमान्यकरण (Revalidation) किया जा सकता है।
शर्तें: पट्टे का पुनर्विधमान्यकरण ग्राम पंचायत में उपलब्ध रिकॉर्ड से मिलान कर पट्टा नियमानुसार जारी होने की स्थिति में तथा पट्टाधारक स्वयं या उसके वारिसान द्वारा प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करने पर ही किया जाएगा।
प्रारूप: पट्टे का पुनर्विधमान्यकरण मूल पट्टे पर ही निर्धारित प्रारूप में किया जायेगा जिसमें ग्राम पंचायत की बैठक दिनांक, प्रस्ताव संख्या और पुनर्विधमान्यकरण की दिनांक का उल्लेख किया जाएगा।
हस्ताक्षर: इस प्रक्रिया में ग्राम विकास अधिकारी और सरपंच के हस्ताक्षर होंगे।
राजस्थान पंचायती राज (दूसरा संशोधन) नियम, 2018 - आबादी भूमि उपयोग परिवर्तन और उप-विभाजन
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 27 मार्च 2018 की अधिसूचना (सं. एफ.4(7)अमे/रूल्स/लीगल/पी.आर./2014/926 दिनांक 10.7.2018) के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज (दूसरा संशोधन) नियम, 2018 जारी किए गए हैं। यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र में प्रकाशित की गई है।
मुख्य बिंदु और प्रावधान
नया अध्याय-9क का अंतःस्थापन: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में नया अध्याय-9क जोड़ा गया है जो आबादी क्षेत्र में भूमि के उपयोग के परिवर्तन (नियम 173-क) तथा भू-खंडों के उप-विभाजन व पुनर्गठन (नियम 173-ख) से संबंधित है।
संपरिवर्तन प्रभार (Conversion Charges): गैर-आवासीय प्रयोजनों के लिए आवासीय आबादी भूमि के संपरिवर्तन हेतु वाणिज्यिक, औद्योगिक, लोक उपयोग, संस्थागत, चिकित्सा सुविधा तथा सौर/पवन ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना के लिए अलग-अलग दरें निर्धारित की गई हैं।
छूट के प्रावधान: केंद्रीय या राज्य सरकार के विभागों या स्थानीय प्राधिकरणों के उपयोग, राजस्थान विनियोजन प्रोत्साहन स्कीम, 2003/2010 और तकनीकी शिक्षा संस्थान के मामलों में संपरिवर्तन प्रभारों में आंशिक या पूर्ण छूट दी गई है।
भू-खंडों का उप-विभाजन और पुनर्गठन: नियम 173-ख के तहत ग्रामीण आबादी क्षेत्र में भू-खंडों के उप-विभाजन या पुनर्गठन के लिए प्ररूप 51 में आवेदन करना होगा तथा इसके लिए निर्धारित प्रभार नियम 173-घ के अनुसार देय होंगे।
नए प्ररूप (Forms): नियमों के अंतर्गत प्ररूप 48 से लेकर प्ररूप 53 तक नए आवेदन पत्र, अनुज्ञा, पट्टा विलेख और आबादी भूमि का रजिस्टर जोड़े गए हैं।
अधिक जानकारी और विस्तृत प्रक्रियाओं के लिए संबंधित ग्राम पंचायत कार्यालय या राज ई-पंचायत पोर्टल से संपर्क करें।
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2017 से संबंधित अधिसूचना
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2017
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना जी.एस.आर. 20 (दिनांक 17 मई, 2017) के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
नियम का नाम: इन नियमों का नाम राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2017 है।
प्रवृत्ती: ये राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से प्रवृत्त होंगे।
नियम 157 का संशोधन: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 के उप-नियम (1) के खण्ड (i) के उप-खण्ड (ब) में विद्यमान अभिव्यक्ति "इन नियमों के प्रारम्भ की तारीख से ठीक पूर्ववर्ती पचास वर्षों के दौरान" के स्थान पर "31 दिसम्बर, 2016 के ठीक पूर्ववर्ती सत्तर वर्षों के दौरान" प्रतिस्थापित की गई है।
आदेश संख्या: [संख्या एफ.4(7) अमे/रूल्स/लीगल/पी.आर./2017/447]
हस्ताक्षरकर्ता: राज्यपाल के आदेश से, विष्णु कुमार गोयल, उप शासन सचिव।
राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2017 से संबंधित अधिसूचना
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग अधिसूचना
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), जयपुर द्वारा दिनांक 12 अप्रैल, 2017 को राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2017 जारी किए गए हैं। यह अधिसूचना राजस्थान राज-पत्र में प्रकाशित की गई है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम व नियम: यह संशोधन राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम सं. 13) की धारा 102 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में किया गया है।
नियम 148 का संशोधन: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 148 के उप-नियम (1) के अंतिम परन्तुक में आवश्यक संशोधन किया गया है।
शब्दावली में बदलाव: "राजस्व अभियान या प्रशासन गांव के संग अभियान" के स्थान पर "राजस्व अभियान या प्रशासन गांव के संग अभियान या भूमि के विक्रय और पट्टा वितरण के लिए राज्य सरकार के आदेश द्वारा आयोजित किसी अन्य अभियान के समय" शब्दावली प्रतिस्थापित की गई है।
प्रारूप 22 का संशोधन: संलग्न प्रारूप 22 की टिप्पणी में भी उपर्युक्त शब्दावली को प्रतिस्थापित किया गया है।
लागू होना: ये नियम राजपत्र में इनके प्रकाशन की तारीख (12 अप्रैल, 2017) से प्रवृत्त होंगे।
आदेश संख्या: [सं. एफ.4(7) अमे/रूल्स/लीगल/पी.आर./2017/289]
राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 107-क के अंतर्गत पर्यटन इकाइयों के लिए अधिकृत अधिकारी की नियुक्ति संबंधी अधिसूचना
अधिसूचना विवरण
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), जयपुर द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक एफ.4 () टूरिज्म रूल/लीगल/पीआर/2015/13 (दिनांक जनवरी 11, 2016) के अनुसार, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम सं. 13) की धारा 107-क की उप-धारा (3) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राजस्थान सरकार ने राजस्थान पंचायती राज (भूमि उपयोग का आवंटन, परिवर्तन और आबादी भूमि का नियमितीकरण) पर्यटन इकाइयों के क्षेत्र में नियम, 2015 के तहत अधिकृत अधिकारी के कृत्यों का निर्वहन करने के लिए अधिकारियों को अधिकृत किया है।
अधिकृत अधिकारी, पर्यटन इकाई की श्रेणी एवं भूमि क्षेत्र का विवरण
संबंधित पंचायत समिति के विकास अधिकारी (Block Development Officer): क्रम संख्या 2 और 3 में उल्लिखित के अलावा अन्य पर्यटन इकाइयां - 300 वर्ग मीटर से अधिक नहीं।
संबंधित जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (Chief Executive Officer): (अ) बजट होटल्स और 1,2,3 स्टार होटल्स (1,200 वर्ग मीटर से 4,000 वर्ग मीटर तक); (ब) अन्य पर्यटन इकाइयां (301 वर्ग मीटर से 4,000 वर्ग मीटर तक)।
कलेक्टर (Collector): (अ) 4 स्टार होटल्स (6,000 वर्ग मीटर से 12,000 वर्ग मीटर तक); (ब) 5 और इससे ऊपर के स्टार होटल्स (18,000 वर्ग मीटर से 40,000 वर्ग मीटर तक); (स) अन्य पर्यटन इकाइयां (4,001 वर्ग मीटर से 40,000 वर्ग मीटर तक)।
नोट: 40,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाली अन्य पर्यटन इकाइयों के लिए राज्य सरकार भूमि उपयोग परिवर्तन की अनुमति देने और भूमि उपयोग को नियमित करने के लिए प्राधिकारी होगी।
यह आदेश राज्यपाल के आदेशानुसार एस.के. सोलंकी, शासन उप सचिव द्वारा जारी किया गया है।
राजस्थान पंचायती राज (पर्यटन इकाईयों के लिए पंचायत क्षेत्र में आबादी भूमि का आवंटन, भूमि के उपयोग का परिवर्तन और नियमितीकरण) नियम, 2015
राजस्थान पंचायती राज नियम, 2015 - पर्यटन इकाइयों हेतु दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.4( )पर्यटन नियम/विधि/पैरा/2015/486 दिनांक जुलाई 10, 2015 के अंतर्गत राजस्थान पंचायती राज (पर्यटन इकाईयों के लिए पंचायत क्षेत्र में आबादी भूमि का आवंटन, भूमि के उपयोग का परिवर्तन और नियमितीकरण) नियम, 2015 बनाए गए हैं।
मुख्य बिंदु एवं नियम:
लागू क्षेत्र: यह नियम पंचायत क्षेत्र में आबादी भूमि के आवंटन, भूमि उपयोग परिवर्तन और नियमितीकरण पर लागू होते हैं।
आबादी भूमि का आवंटन: जिला कलेक्टर, संबंधित पंचायती राज संस्था से परामर्श कर पर्यटन इकाइयों की स्थापना के लिए ग्राम की आबादी क्षेत्र में उपयुक्त भूमि की पहचान करेंगे।
न्यूनतम एवं अधिकतम भूमि क्षेत्र:
बजट होटल और 1 से 3 सितारा होटल: न्यूनतम 1,200 वर्ग मीटर, अधिकतम 4,000 वर्ग मीटर तक।
4 सितारा होटल: न्यूनतम 6,000 वर्ग मीटर, अधिकतम 12,000 वर्ग मीटर तक।
5 सितारा और उससे ऊपर के होटल: न्यूनतम 18,000 वर्ग मीटर, अधिकतम 40,000 वर्ग मीटर तक।
अन्य पर्यटन इकाई: आवश्यकता/उपलब्धता के अनुसार।
आरक्षित मूल्य: पर्यटन इकाइयों के लिए आरक्षित भूमि के आवंटन का आरक्षित मूल्य जिला स्तरीय समिति द्वारा आबादी भूमि के बाजार मूल्य के निर्धारण के लिए सिफारिश की गई दरों के समतुल्य होगा।
विरासत संपत्तियों (हेरिटेज होटल्स) का परिवर्तन: हेरिटेज संपत्तियों को हेरिटेज होटल में बदलने के लिए सादे कागज पर आवेदन किया जा सकता है। इसके लिए भूमि उपयोग परिवर्तन का कोई प्रभार देय नहीं होगा।
राजस्थान पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों के मानदेय एवं बैठक भत्तों में संशोधन - अधिसूचना 2013
राजस्थान पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों के मानदेय एवं बैठक भत्तों में संशोधन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक एफ.951(19).(41)प्ररावि/लेखा/निओअउ/बजट घोषणा/2012-13/2494 दिनांक 01-04-2013 के अनुसार राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 के नियम 27 से 30 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए मानदेय एवं बैठक भत्तों की दरों में आंशिक संशोधन किया गया है।
मानदेय की संशोधित दरें (प्रति माह):
जिला प्रमुख, जिला परिषद: वर्तमान 7,500/- रुपये से बढ़ाकर 9,000/- रुपये
प्रधान, पंचायत समिति: वर्तमान 5,000/- रुपये से बढ़ाकर 6,000/- रुपये
सरपंच, ग्राम पंचायत: वर्तमान 3,000/- रुपये से बढ़ाकर 3,500/- रुपये
बैठक भत्ता की संशोधित दरें:
सदस्य, जिला परिषद: वर्तमान 125/- रुपये से बदलकर 500/- रुपये
सदस्य, पंचायत समिति: वर्तमान 100/- रुपये से बदलकर 350/- रुपये
सदस्य, ग्राम पंचायत: वर्तमान 75/- रुपये से बदलकर 200/- रुपये
यह भत्ता संबंधित प्रतिनिधि द्वारा माह में बैठक आयोजित होने पर ही तथा माह हेतु निर्धारित बैठकों में उपस्थित होने पर ही देय होगा। यह अधिसूचना वित्त (व्यय-5) विभाग की आईडी संख्या 331300289 दि. 25.03.2013 से प्राप्त सहमति के अनुसरण में जारी की गई है।
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2013 - नियम 159 में संशोधन
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2013
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा अधिसूचना संख्या F.4 (7)Ame./Rules/Legal/PR/2012/136 दिनांक 11-2-2013 जारी की गई है। इसके तहत राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 159 की उप-नियम (2) में संशोधन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
पंचायत आबादी क्षेत्र में गोदामों या कार्यालयों के निर्माण के लिए प्राथमिकता के आधार पर 1500 वर्ग गज तक के प्लॉट आवंटित कर सकती है।
प्राथमिक कृषि सहकारी समिति / बड़ी आकार की बहुउद्देशीय विपणन समिति (Primary Agricultural Cooperative Society/ Large Sized Multipurpose Marketing Society): उप-नियम (5) के नियम 152 के तहत बाजार मूल्य के 50% मूल्य पर।
ग्राम सेवा सहकारी समिति या क्रय विक्रय सहकारी समिति (Gram Sewa Sahakari Samiti or Kray Vikray Sahakari Samiti): राज्य सरकार के अनुमोदन के अधीन निःशुल्क (free of charge)।
राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2013 - आबादी क्षेत्र के पुराने मकानों के पट्टा जारी करने के संबंध में अधिसूचना
राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2013
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा अधिसूचना संख्या No.F.4(7)Ame./Rules/Legal/PR/2012/35 दिनांक 11-2-2013 जारी की गई है। यह अधिसूचना राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा 102 द्वारा प्रद शक्तियों के तहत राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन करने के लिए है।
मुख्य बिंदु और नियम संशोधन:
इन नियमों को राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2013 कहा गया है।
नियम 157 की उप-नियम (1) में संशोधन किया गया है जिसके अनुसार आबादी भूमि में स्थित पुराने मकानों के लिए प्रपत्र XXIII-A में पट्टा जारी किया जा सकता है।
300 वर्ग गज तक का क्षेत्र या निर्मित क्षेत्र (25 प्रतिशत निर्मित क्षेत्र सहित):
50 वर्ष से अधिक पुराने मकानों के लिए शुल्क: रु. 100/-
नियमों के प्रारंभ होने की तिथि से ठीक पहले पचास वर्षों के दौरान निर्मित मकानों के लिए शुल्क: रु. 200/-
300 वर्ग गज से अधिक के क्षेत्र पर, ऐसे अतिरिक्त क्षेत्र के लिए राजस्थान स्टाम्प नियम, 2004 के नियम 58 के खंड (b) के तहत जिला स्तरीय समिति द्वारा अनुशंसित बाजार दरों का 25 प्रतिशत देय होगा।
बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे) सूची में शामिल परिवारों से उप-खंड (a) के तहत कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा और उप-खंड (i) के उप-खंड (b) के तहत केवल 10 प्रतिशत शुल्क लिया जाएगा।
राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 73 के अन्तर्गत पंचायतों की आमदनी में बढ़ोतरी करने की अपेक्षा बाबत
परिचय एवं उद्देश्य
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी पत्र क्रमांक एफ.1(11)(परावि)लेखा/निजी आय/2011-12/11186 दिनांक 7-11-2012 के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 73 के अंतर्गत ग्राम पंचायतों की निजी आय में बढ़ोतरी करने और वित्तीय स्वतंत्रता प्राप्त करने के संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु एवं निर्देश
वित्तीय स्वतंत्रता एवं निजी आय: राज्य वित्त आयोग की सिफारिश के अनुसार पंचायतों को अपनी निजी आय प्रति वर्ष 1.50 से 2.00 लाख रुपये बढ़ानी चाहिए ताकि वे कार्यों का प्रभावशाली तरीके से क्रियान्वयन कर सकें।
बजट घोषणा 2011-12: माननीय मुख्यमंत्री महोदय की बजट घोषणा के अनुसार, यदि कोई पंचायत पूर्व वर्ष के मुकाबले 2.00 लाख रुपये की निजी आय बढ़ाएगी, तो पंचायत समिति/जिला परिषद की सिफारिश के आधार पर राज्य सरकार द्वारा अतिरिक्त 2.00 लाख रुपये की मैंचिंग राशि (अनुदान) प्रदान की जाएगी।
राजस्व वृद्धि के स्रोत: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 33 और 34 के अनुसार पंचायतें सफाई, रोशनी, जल-निकास, सड़कों के रखरखाव के साथ-साथ कर, फीस, प्रमारों और शास्तियों में वृद्धि कर सकती हैं। हवेलियों, बड़े पक्के ग्रहों, ढाबों, होटलों, ऑटोमोबाइल सर्विस स्टेशनों, मरम्मत की दुकानों, पेट्रोल/डीजल पंपों आदि पर फीस उद्ग्रहित करके गैर राजस्व में वृद्धि की जा सकती है।
वाणिज्यिक डीएलसी दर: सड़क के किनारे स्थित दुकानों के संबंध में राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 (3) के अनुसार वाणिज्यिक डी.एल.सी. दर से कम से कम दोगुनी वसूली की जा सकती है या नियमानुसार बेदखली नोटिस/वाणिज्यिक पट्टा बनाकर पंचायत की आय बढ़ाई जा सकती है।
फीसों की दरें (नियम 68)
नियम 68 के अंतर्गत जनता को दी जाने वाली सेवाओं के लिए अधिकतम फीस दरें निर्धारित की गई हैं, जैसे:
आवेदन फीस: 10/- रुपये
निवास, जाति, आय प्रमाण पत्र: 20/- रुपये (अ.जा./अ.ज.जा. हेतु 5/- रुपये)
बिजली/पानी कनेक्शन हेतु अनापत्ति: 40/- रुपये (अ.जा./अ.ज.जा. हेतु 5/- रुपये)
भवन निर्माण स्वीकृति (पक्का निर्माण): 2/- रुपये प्रति वर्ग मीटर
पेट्रोल/डीजल पंप: 2500/- रुपये प्रति वर्ष
ढाबा/रेस्टोरेंट: 1000/- रुपये प्रति वर्ष
मोबाइल टॉवर: 10000/- रुपये प्रति वर्ष
अतिथि गृह/होटल/मोटल/विश्राम गृह: 5 कक्ष तक 1000/- रुपये प्रति वर्ष से लेकर 16 और अधिक कमरे तक 5000/- रुपये प्रति वर्ष
फीस/कर लागू करने एवं वसूली की प्रक्रिया
पंचायतों को साधारण बैठक में नियम 57 के अनुसार फीस निर्धारित दरों पर वसूल करने का प्रस्ताव पारित करना होगा।
नियम 58 के अनुसार आपत्तियों के लिए एक माह का नोटिस जारी किया जाएगा।
नियम 105 के तहत मांग पर्ची (प्रारूप 5) दी जाएगी और नियम 106 के तहत 15 दिन का नोटिस देकर चल संपत्ति की कुर्की की जा सकती है।
राजस्व विभाग के माध्यम से पटवारी द्वारा करों की वसूली (नियम 62, 63, 64) की जाएगी, जिसमें पटवारी 5 प्रतिशत काटकर 95 प्रतिशत राशि पंचायत के पी.डी. लेखे या पंचायत लेखे में जमा करेगा।
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2011 - शुल्क और नियमों से संबंधित अधिसूचना
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2011
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा अधिसूचना संख्या No. F.4 (7) Am/Rule/Legal/PR/2010/ 1348 दिनांक 12-8-2011 जारी की गई है। इसके माध्यम से राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
नियम 68 के तहत पंचायत द्वारा लिए जाने वाले शुल्क (Fees):
आवेदन शुल्क (Application fees): Rs. 10/-
निवास, जाति, आय प्रमाण पत्र आदि: Rs. 20/- (SC/ST के लिए 50% छूट)
उत्तराधिकार प्रमाण पत्र आदि: Rs. 40/- (SC/ST के लिए 50% छूट)
बिजली या पाईप द्वारा पानी के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC): Rs. 40/- (SC/ST के लिए 50% छूट)
आबादी भूमि क्रय हेतु आवेदन: Rs. 20/-
साइट प्लान तैयार करने और साइट निरीक्षण का खर्च: Rs. 50/-
राशन कार्ड (आवेदन पत्र और छपाई सहित): Rs. 10/-
30 दिन के बाद जन्म और मृत्यु का पंजीकरण: Rs. 20/-
भवन निर्माण की अनुमति: पक्का निर्माण के लिए Rs. 2/- प्रति वर्ग मीटर
पंचायत द्वारा पहले से स्वीकृत साइट प्लान में जोड़/बदलाव (Addition/Alteration): Rs. 100/-
बिना अनुमति अनाधिकृत निर्माण का नियममीकरण (Regularization): Rs. 10/- प्रति वर्ग मीटर (अधिकतम Rs. 1000/- तक)
पेट्रोल/डीजल पंप: Rs. 2500/- प्रति वर्ष
ढाबा/रेस्टोरेंट: Rs. 1000/- प्रति वर्ष
अन्य कोई व्यावसायिक इकाई: Rs. 200/- प्रति वर्ष
माइनिंग एनओसी के लिए प्रस्ताव: Rs. 5000/-
मोबाइल टॉवर: Rs. 10000/- प्रति वर्ष
गेस्ट हाउस/होटल/मोटेल/रेस्ट हाउस हेतु शुल्क: 5 कमरे तक Rs. 1000/- प्रति वर्ष, 6 से 10 कमरे Rs. 2500/- प्रति वर्ष, 11 से 15 कमरे Rs. 4000/- प्रति वर्ष, 16 या अधिक कमरे Rs. 5000/- प्रति वर्ष
इस अधिसूचना में बैठकों के आयोजन, समितियों, और विभिन्न नियमों के अंतर्गत वित्तीय सीमाओं और शक्तियों में भी संशोधन किए गए हैं।
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2010 - राजस्व अभियान और प्रशासन गांवों के संग अभियान हेतु आपत्ति अवधि संशोधन
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2010
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक [No.F.4(7)Am/Rule/Legal/PR/2010/2113] दिनांक 26 नवंबर 2010 के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
नियम का नाम: राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2010।
प्रभावी तिथि: ये नियम राजपत्र में प्रकाशन की तिथि (30 नवंबर 2010) से प्रवृत्त हुए हैं।
नियम 148 में संशोधन: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 148 के उप-नियम (1) के तहत, राजस्व अभियान या प्रशासन गांवों के संग अभियान के दौरान आपत्तियां आमंत्रित करने की अवधि एक महीने के स्थान पर सात दिन होगी।
प्रारूप XXII में संशोधन: प्रारूप XXII के तहत भी राजस्व अभियान या प्रशासन गांवों के संग अभियान के दौरान आपत्तियां दर्ज कराने की अवधि एक महीने के स्थान पर सात दिन निर्धारित की गई है।
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2010 - आ आबादी एवं आपत्ति अवधि संबंधित अधिसूचना
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2010
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक [No.F.4(7)Am/Rule/Legal/PR/2010/2113] दिनांक 26 नवम्बर, 2010 के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी।
मुख्य बिंदु:
नियम संशोधन: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 148 के उप-नियम (1) के परन्तुक में संशोधन किया गया है।
आपत्ति अवधि में छूट: राजस्व अभियान या प्रशासन गांवों के संघ अभियान के दौरान आपत्तियां आमंत्रित करने की अवधि एक महीने के स्थान पर सात (7) दिन होगी।
प्रारूप संशोधन: फॉर्म XXII के अंतर्गत भी नोट जोड़ा गया है कि राजस्व अभियान या प्रशासन गांवों के संघ अभियान के दौरान फाइलिंग आपत्तियां दर्ज करने की अवधि एक महीने के स्थान पर सात दिन होगी।
लागू होना: यह नियम आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशन की तिथि (30 नवम्बर, 2010) से प्रभावी हो गए हैं।
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 - अवलोकन एवं मुख्य प्रावधान
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996
यह दस्तावेज़ राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 का आधिकारिक संकलन है, जिसे ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 के अंतर्गत बनाया गया है। यह नियम राज्य की त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं (ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और ज़िला परिषद) के प्रशासन, कार्यप्रणाली, ग्राम सभा, कर एवं शुल्क निर्धारण, अ आबादी भूमि के प्रबंधन, और सेवा नियमों से संबंधित विस्तृत दिशा-निर्देश प्रदान करता है।
मुख्य बिंदु:
ग्राम सभा और सतर्कता समिति (विजिलेंस कमेटी): ग्राम सभा की बैठकों का आयोजन, कोरम, एजेंडा, कार्यवाही का रिकॉर्ड और 7 सदस्यीय सतर्कता समिति के गठन व उसके कार्यों का प्रावधान।
कर, शुल्क और राजस्व: पंचायतों द्वारा भवन कर, वाटर टैक्स, वाहन कर, व्यावसायिक फसलों पर कर, और विभिन्न सेवाओं पर शुल्क (फीस) लगाने और उनकी वसूली की प्रक्रिया।
आबादी भूमि और संपत्ति प्रबंधन: आबादी भूमि के पट्टे जारी करने, पुरानी बसावटों के नियमतिकरण, भूमि आवंटन, नीलामी समिति और उप-विभाजन (सब-डिवीजन) के नियम।
कार्य, अनुबंध और खरीदारी: वार्षिक कार्य योजना (एनुअल एक्शन प्लान), निर्माण कार्यों के निष्पादन, ठेकेदारों पर प्रतिबंध और सामग्री की खरीद के लिए पारदर्शी प्रक्रिया (बी.एस.आर. और निविदाएं)।
बजट, लेखा और लेखापरीक्षा (ऑडिट): बजट का निर्माण, कैलेंडर, रोकड़ बही (कैश बुक), वित्तीय औचित्य के मानक और स्थानीय निधि संपरीक्षा अधिनियम के तहत ऑडिट का प्रावधान।
स्थापना और सेवा नियम: पंचायती राज संस्थाओं में विभिन्न श्रेणियों के पदों, भर्ती, आरक्षण, वरिष्ठता, परिवीक्षा काल और अनुशासनात्मक कार्रवाई के नियम।
राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994: मुख्य प्रावधान और संरचना
राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (Rajasthan Panchayati Raj Act, 1994)
यह दस्तावेज़ राजस्थान राज्य में पंचायती राज संस्थाओं के गठन, शक्तियों, कार्यों और प्रशासन से संबंधित मुख्य कानूनी प्रावधानों की जानकारी प्रदान करता है। इसमें प्रारंभिक परिभाषाओं से लेकर वार्ड सभा, ग्राम सभा, पंचायत, पंचायत समिति और ज़िला परिषद की संरचना तक के नियम शामिल हैं।
मुख्य बिंदु और विशेषताएँ:
वार्ड सभा और ग्राम सभा: प्रत्येक पंचायत वृत्त में वार्ड सभा और ग्राम सभा के गठन, बैठकों के आयोजन, कोरम तथा कार्यों का विवरण दिया गया है।
पंचायती राज संस्थाओं का गठन: अधिनियम के तहत पंचायत, पंचायत समिति और ज़िला परिषद की स्थापना, सीटों के आरक्षण (अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग और महिलाओं के लिए), तथा निर्वाचन प्रक्रिया को समझाया गया है।
अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रावधान: विकास अधिकारी (Vikas Adhikari), मुख्य कार्यकारी अधिकारी (Chief Executive Officer) तथा राजस्थान पंचायत समिति और ज़िला परिषद सेवा के गठन संबंधी नियम दिए गए हैं।
वित्त और कराधान: पंचायती राज संस्थाओं के फंड, कर लगाने की शक्तियाँ, बजट और लेखा-परीक्षण (Audit) से जुड़े प्रावधान उल्लेखित हैं।
राज्य सरकार की शक्तियाँ: प्रस्तावों को रद्द या निलंबित करने, संस्थाओं के विघटन और नियमों तथा उप-नियमों (Bye-laws) के निर्माण की शक्ति का उल्लेख है।