वरिष्ठ ग्राम विकास अधिकारी के 2000 पदों के पंचायत समितिवार आवंटन का आदेश
मुख्य दिशा-निर्देश
वरिष्ठ ग्राम विकास अधिकारी के 2000 पदों के पंचायत समितिवार आवंटन का आदेश
ये 2,000 पद संबंधित पंचायत समिति की बड़ी ग्राम पंचायतों में (जनसंख्या के आधार पर) सृजित किए जाएंगे।
कार्मिक विभाग की 30 मार्च 2026 की अधिसूचना के अनुसार, ये पद राजस्थान ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज राज्य एवं अधीनस्थ सेवा नियम, 1998 के अधीन रहेंगे।
राजस्थान विकास अधिकारी पदस्थापन आदेश 2026 | 118 नवपदोन्नत VDO/BDO Posting List Rajasthan
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज) द्वारा राजस्थान ग्रामीण विकास राज्य सेवा की कनिष्ठ वेतन श्रृंखला में नवपदोन्नत अधिकारियों के पदस्थापन के संबंध में आदेश जारी किया गया है।
आदेश के अनुसार कुल 118 नवपदोन्नत अधिकारियों का विभिन्न पंचायत समितियों, जिला परिषदों एवं अन्य संबंधित कार्यालयों में रिक्त पदों पर पदस्थापन किया गया है। अधिकारियों को वर्तमान पद से कार्यमुक्त होकर नवीन पदस्थापन स्थान पर तत्काल कार्यग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं।
इस आदेश में जयपुर, अजमेर, बाड़मेर, जैसलमेर, जोधपुर, उदयपुर, चित्तौड़गढ़, राजसमंद, जालोर, सीकर, भरतपुर, दौसा, नागौर, बीकानेर, पाली सहित राजस्थान के विभिन्न जिलों में विकास अधिकारियों के पदस्थापन का विवरण दिया गया है।
अटल ज्ञान केंद्रों में क्यूबिकल आधारित फर्नीचर और वर्क स्टेशन व्यवस्था स्थापित किए जाने के संबंध में
अटल ज्ञान केंद्रों में आधुनिक क्यूबिकल आधारित फर्नीचर और वर्क स्टेशन व्यवस्था
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज) राजस्थान सरकार द्वारा बजट घोषणा वर्ष 2025-26 के अंतर्गत निर्मित किए जा रहे अटल ज्ञान केंद्रों की कार्यप्रणाली और उपयोगिता को अधिक प्रभावी बनाने के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
माननीय मुख्यमंत्री महोदय की अध्यक्षता में दिनांक 04.04.2026 को आयोजित समीक्षा बैठक में दिए गए निर्देशों के क्रम में, पूर्व में निर्धारित सामान्य फर्नीचर व्यवस्था के स्थान पर आधुनिक क्यूबिकल आधारित फर्नीचर/वर्क स्टेशन व्यवस्था विकसित की जाएगी, जिससे अध्ययनरत विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को बेहतर और व्यवस्थित अध्ययन वातावरण मिल सके।
मुख्य बिंदु एवं वित्तीय संशोधन
उद्देश्य: प्रदेश की तीन हजार से अधिक आबादी वाली ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर आधुनिक पुस्तकालय एवं अध्ययन सुविधाओं का विकास।
संशोधित लागत: वित्त विभाग की आईडी संख्या 332601032 दिनांक 01.07.2026 के द्वारा सामान्य फर्नीचर हेतु पूर्व में स्वीकृत राशि रु. 2.35 लाख के स्थान पर क्यूबिकल आधारित फर्नीचर/वर्क स्टेशन हेतु रु. 4.10 लाख प्रति अटल ज्ञान केंद्र स्वीकृत करने की संशोधित सहमति प्रदान की गई है।
व्यय का स्रोत: उक्त स्वीकृत राशि का व्यय राज्य वित्त आयोग के अंतर्गत संबंधित पंचायतों की स्वीकृत अनुदान/उपलब्ध राशि से किया जाएगा।
फर्नीचर एवं वर्क स्टेशन का अनुमानित विवरण
वर्क स्टेशन (750mm x 600mm x 1200mm) - 20 नग (कुल लागत: रु. 3,07,000)
विज़िटर चेयर कुशन सीट और बैक के साथ - 20 नग (कुल लागत: रु. 40,000)
रिवॉल्विंग चेयर - 1 नग (कुल लागत: रु. 4,000)
टेबल (900mm x 600mm x 750mm) - 1 नग (कुल लागत: रु. 5,000)
कुल अनुमानित लागत: रु. 4,10,000 प्रति अटल ज्ञान केंद्र
सभी संबंधित जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, अति. मुख्य कार्यकारी अधिकारी, अधिशाषी/सहायक अभियंता और विकास अधिकारी, पंचायत समिति को निर्देशित किया जाता है कि समस्त कार्य विभाग द्वारा अनुमोदित ड्राइंग, गुणवत्ता मानकों एवं तकनीकी विनिर्देशों के अनुरूप ही संपन्न हों तथा कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग एवं समयबद्ध पूर्णता सुनिश्चित की जाए।
दिनांक 29 जून 2026 को विशेष ग्राम सभा के आयोजन बाबत आदेश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग राजस्थान सरकार का महत्वपूर्ण निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा आदेश जारी कर राज्य की समस्त ग्राम पंचायतों में दिनांक 29 जून, 2026 को विशेष ग्राम सभा आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं।
विशेष ग्राम सभा के मुख्य बिंदु एवं उद्देश्य
ग्रामीण सेवा शिविर-2026: दिनांक 12 जून, 2026 से 15 जुलाई, 2026 तक आयोजित हो रहे जन कल्याण शिविरों के तहत ग्रामीण विकास विभाग की योजनाओं का प्रचार-प्रसार, कार्य प्रस्ताव प्राप्त करना, प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत किस्तें व लंबित स्वीकृतियां जारी करना तथा भूमिहीन लाभकारियों को भूमि आवंटन आदि गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।
वीबी-जी राम जी योजना: दिनांक 01 जुलाई, 2026 से वीबी-जी राम जी योजना का शुभारंभ किया जा रहा है। इस संबंध में विशेष ग्राम सभा में योजना का प्रचार-प्रसार, प्राप्त कार्यों के प्रस्ताव एवं कार्ययोजना का अनुमोदन किया जाना है।
प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (आवास प्लस सर्वे-2024): 'सभी के लिए आवास' योजना के तहत आवास प्लस सर्वे-2024 के माध्यम से किए गए सर्वेक्षण के आधार पर तैयार की गई वरीयता सूची का ग्राम सभा में अनुमोदन कराया जाना आवश्यक है।
अतः सभी जिला परिषद के मुख्य/अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारियों और पंचायत समितियों के विकास अधिकारियों से अनुरोध किया गया है कि वे अपने जिले की सभी ग्राम पंचायतों में दिनांक 29 जून, 2026 को विशेष ग्राम सभा का आयोजन सुनिश्चित कराएं।
दिनांक 29 जून, 2026 को विशेष ग्राम सभा के आयोजन बाबत
विशेष ग्राम सभा आयोजन निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा जारी पत्र (क्रमांक: एफ.15(20)पंच्रावि/विधि/वि0ग्रा0सभा/2026/ई-81146, दिनांक 22-06-2026) के माध्यम से प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों में दिनांक 29 जून, 2026 को आयोजित होने वाली विशेष ग्राम सभा के संबंध में निर्देश प्रेषित किए गए हैं।
विशेष ग्राम सभा के मुख्य एजेंडे एवं बिंदु
ग्राम पंचायत क्षेत्राधिकार से मांस की अवैध दुकानें हटाया जाना।
चरागाह एवं जलाशय क्षेत्रों में अतिक्रमणकारियों के नाम ग्राम सभा में सार्वजनिक कर अतिक्रमण हटाना।
एक गांव-एक चरागाह विकास गतिविधि- तय फॉर्मेट मय क्षेत्रफल का विवरण अंकित कराते हुए।
चरागाह विकास समिति के पुनर्गठन का अनुमोदन करना।
ग्राम पंचायत की समस्त परिसंपत्तियों (चरागाह, आबादी भूमि, पंचायत के अधीन निर्मित भवन इत्यादि) की सूची को ग्राम सभा में उपलब्ध कराकर परिसंपत्ति रजिस्टर में इंदराज के प्रमाणीकरण का अनुमोदन करना।
जलग्रहण विकास समितियों का पुनर्गठन एवं नए सचिव का चयन।
पं. दीनदयाल उपाध्याय चरागाह विकास एवं गौमाता आश्रय स्थल हेतु चयनित ग्राम पंचायतों में चरागाह भूमि (25 हेक्टेयर से अधिक) का चिन्ह्नीकरण।
घुमन्तु परिवारों को आवासीय भूखंडों के पट्टे आवंटन करना।
समस्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी (जिला परिषद) और विकास अधिकारी (पंचायत समिति) को निर्देशित किया गया है कि वे अपने क्षेत्र की सभी ग्राम पंचायतों में इन बिंदुओं को सम्मिलित करते हुए नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग: ग्राम विकास अधिकारी एवं वरिष्ठ ग्राम विकास अधिकारी के पदों का सृजन
ग्राम विकास अधिकारी एवं वरिष्ठ ग्राम विकास अधिकारी पदों का सृजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ28(40)परावि/प्रशा.2/ग्राविअ/ज्ञापन/2022-20135 के अंतर्गत वित्त (व्यय-5) विभाग की आईडी संख्या 332600780 दिनांक 23.06.2026 की सहमति के अनुसरणा में नवगठित पंचायती राज संस्थाओं के ग्राम पंचायत स्तर पर पदों का सृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
ग्राम विकास अधिकारी: पूर्व में स्वीकृत 10554 पदों के अतिरिक्त 3099 नवीन पद सृजित किए गए हैं। वर्तमान में कुल 14403 ग्राम पंचायतों हेतु 10554 ग्राम विकास अधिकारी एवं 750 वरिष्ठ ग्राम विकास अधिकारी कुल 11304 पद स्वीकृत थे, जिसके क्रम में 3099 नवीन पद स्वीकृत किए गए हैं। (ग्रेड पे-2400, एल-6)
वरिष्ठ ग्राम विकास अधिकारी: पदोन्नति के अवसर उपलब्ध कराने हेतु 1250 पदों को वरिष्ठ ग्राम विकास अधिकारी के पद में क्रमोन्नत किए जाने की सहमति प्रदान की गई है। विभाग द्वारा बड़ी ग्राम पंचायतों में वरिष्ठ ग्राम विकास अधिकारी के कुल 2000 पद (750+1250) हो जाएंगे। (ग्रेड पे-3600, एल-10)
उक्त पदों के कार्यालयवार आवंटन की कार्यवाही पृथक से की जाएगी। आदेश डॉ. जोगा राम, शासन सचिव एवं आयुक्त द्वारा जारी किया गया है।
प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण: दिनांक 29.06.2026 को विशेष ग्राम सभा के आयोजन और ड्राफ्ट वरीयता सूची (PWL) के अनुमोदन के संबंध में
प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत विशेष ग्राम सभा आयोजन निर्देश
ग्रामीण विकास विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुसार, प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत आवास+ 2024 सर्वेक्षण के क्रम में तैयार ड्राफ्ट Permanent Wait List (PWL) का विशेष ग्राम सभा द्वारा दिनांक 29.06.2026 को अनुमोदन कराया जाना है।
मुख्य बिंदु एवं दिशा-निर्देश
ग्राम सभा का आयोजन: दिनांक 29.06.2026 को सभी ग्राम पंचायतों में विशेष ग्राम सभा का आयोजन किया जाएगा।
अंतिम तिथि: अंतिम वरीयता सूची आवास सॉफ्ट पर अपलोड करने की अंतिम तिथि 10.07.2026 निर्धारित की गई है।
आवास सॉफ्ट सूची: आवास सॉफ्ट पर ग्राम पंचायतवार प्रदर्शित ड्राफ्ट वरीयता सूची को 25.06.2026 तक डाउनलोड कर संबंधित ग्राम पंचायत, सरकारी कार्यालय और सार्वजनिक स्थलों के नोटिस बोर्ड पर आमजन के अवलोकन हेतु प्रदर्शित किया जाना है।
अपील का प्रावधान: यदि किसी पात्र परिवार का नाम सूची में शामिल नहीं है या गलत तरीके से काटा गया है, तो वे निर्धारित प्रारूप में आवश्यक दस्तावेजों के साथ ग्राम सभा या जिला अपीलेट कमेटी के समक्ष अपील प्रस्तुत कर सकते हैं।
सभी संबंधित ग्राम पंचायतों और अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे निर्धारित समयावधि में इन निर्देशों की अनुपालना सुनिश्चित करें।
ग्रामीण सेवा शिविर 2026 के आयोजन एवं व्यय स्वीकृति बाबत
ग्रामीण सेवा शिविर 2026 का आयोजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ 165(7)ले.ब./परावि/एसएफसी-6/2025-26/ के अनुसार ग्रामीण सेवा शिविर-2026 का आयोजन दिनांक 12 जून, 2026 से 15 जुलाई, 2026 तक किया जाना निर्धारित किया गया है।
शिविर से संबंधित मुख्य बिंदु
अवधि: प्रत्येक ग्राम पंचायत मुख्यालय पर एक दिवसीय शिविर का आयोजन 12 जून, 2026 से 15 जुलाई, 2026 के दौरान किया जाएगा।
समय: शिविर का समय प्रातः 09:30 बजे से सायं 06:00 बजे तक अथवा कार्य समाप्ति तक रहेगा।
स्थान: शिविरों का आयोजन पंचायत भवन, स्कूल भवन या उपलब्ध अन्य सार्वजनिक स्थानों पर किया जाएगा।
व्यवस्थाएं: आगंतुकों के लिए पेयजल की समुचित व्यवस्था, मेज, कुर्सियां, दरियां और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं ग्राम पंचायत द्वारा की जाएंगी।
वित्तीय प्रावधान एवं व्यय की स्वीकृति
षष्ठ राज्य वित्त आयोग के तहत पंचायती राज संस्थाओं को देय अनुदान राशि के उपयोग के संबंध में विभागीय पत्रांक 347 राजकाज क्रमांक 13247621 दिनांक 28.01.2025 द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के बिंदु संख्या (अ) (3) (XIII) के अंतर्गत प्रति ग्राम पंचायत, अधिकतम राशि रु. 15,000/- का व्यय/उपयोग, षष्ठ राज्य वित्त आयोग के अंतर्गत उपलब्ध अनुदान राशि से व्यय करने की सहमति प्रदान की जाती है। यह सहमति वित्त विभाग की आई.डी. संख्या 332601019 दिनांक 11.06.2026 द्वारा अनुमोदित है।
ग्रामीण सेवा शिविर-2026: जन-कल्याण अभियान के आयोजन हेतु दिशा-निर्देश
ग्रामीण सेवा शिविर-2026 जन-कल्याण अभियान
राजस्थान सरकार के राजस्व विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, राज्य में जन-कल्याण योजनाओं को आमजन तक पहुँचाने के लिए 12 जून, 2026 से 15 जुलाई, 2026 तक "ग्रामीण सेवा शिविर-2026" का आयोजन किया जाएगा। इस अभियान में राजस्व विभाग के अतिरिक्त 21 विभागों की सहभागिता सुनिश्चित की गई है, और इसका नोडल विभाग राजस्व एवं सहायक नोडल विभाग पंचायती राज रहेगा।
शिविर का स्वरूप और समय
प्रत्येक ग्राम पंचायत मुख्यालय पर एक दिवसीय शिविर का आयोजन किया जाएगा।
शिविर का समय प्रातः 09:30 बजे से सांय 06:00 बजे तक (अथवा कार्यसमाप्ति तक) रहेगा।
आगामी शिकायतों का मौके पर ही निस्तारण सुनिश्चित किया जाएगा ताकि राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँच सके।
शिविर में शामिल प्रमुख विभागों के कार्य
राजस्व विभाग: राजस्व अभिलेख/खातों का शुद्धिकरण, आपसी सहमति से खातों का विभाजन, रास्ते के प्रकरणों का निस्तारण, भूमिहीन किसानों को भूमि आवंटन, जाति/मूल निवास/हैसियत प्रमाण-पत्र जारी करना आदि।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग: प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत पट्टा वितरण व किस्त जारी करना, मनरेगा, आजीविका (SHG), IHHL स्वीकृतियां, जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करना।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग: मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य जांच, टीकाकरण, टीबी मुक्त भारत अभियान, पीएमजेएवाई कार्ड बनाना।
अन्य विभाग: पशुपालन, ऊर्जा, कृषि, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता, महिला एवं बाल विकास, श्रम, आपदा प्रबंधन, जल संसाधन, परिवहन, सहकारिता, शिक्षा, आयुर्वेद, सैनिक कल्याण, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी (PHED) और सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) से जुड़े विभिन्न जन-कल्याणकारी कार्य।
अभियान की संपूर्ण तैयारी, अनुश्रवण एवं समीक्षा की जिम्मेदारी जिला कलेक्टर की होगी। प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर पूर्व तैयारी हेतु अग्रिम दल का गठन किया जाएगा।
जल जीवन मिशन (JJM) के अंतर्गत नल जल मित्र के चयन और प्रशिक्षण हेतु दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग - नल जल मित्र चयन मार्गदर्शन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा जल जीवन मिशन (JJM) के अंतर्गत नल जल मित्र के चयन और प्रशिक्षण के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इस संबंध में मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य बिंदु और दिशा-निर्देश:
चयन प्रक्रिया: प्रत्येक ग्राम पंचायत में 2 नल जल मित्र का चयन किया जाना है। इसमें से एक नल जल मित्र पेयजल योजनाओं के संचालन में पूर्व अनुभव वाला तथा दूसरा बिना अनुभव वाला होगा।
वरीयता: वर्तमान में जनता जल योजना एवं अन्य पेयजल योजनाओं में कार्य कर रहे पंप चालकों को 'Recognition of Prior Learning' (RPL) के तहत प्राथमिकता दी जाएगी।
शैक्षणिक योग्यता: नए चयन किए जाने वाले नल जल मित्र के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता (जैसे 12वीं कक्षा उत्तीर्ण, 10वीं के बाद सिविल इंजीनियरिंग में 3 वर्ष का डिप्लोमा, 10वीं पास आईटीआई के साथ 2 वर्ष का अनुभव आदि) निर्धारित की गई है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम: चयनित नल जल मित्रों का प्रशिक्षण आरएसएलडीसी (RSLDC) या कौशल विकास एवं उद्यमिता विभाग के माध्यम से कराया जाएगा, जिसमें कक्षा-कक्ष प्रशिक्षण (Classroom training), प्रायोगिक प्रशिक्षण (Practical training) और ओजेटी प्रशिक्षण (OJT Training) शामिल है।
ई-पंचायत पोर्टल पर प्रविष्टि: चयनित नल जल मित्रों के नामों का विवरण ई-पंचायत पोर्टल पर अनिवार्य रूप से दर्ज किया जाना सुनिश्चित किया जाए।
अनुमोदन: जिला कलक्टर की अध्यक्षता में गठित जिला जल एवं स्वच्छता समिति (DWSM) की बैठक में इनका अनुमोदन किया जाना आवश्यक है।
दिनांक 26 मई, 2026 को विशेष ग्राम सभा के आयोजन बाबत आवश्यक दिशा-निर्देश
विशेष ग्राम सभा आयोजन (26 मई, 2026)
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा जारी पत्र (क्रमांक: एफ.15(20)पंवैधि/वि0ग्रा0सभा/2026/ई-81146, दिनांक: 23.05.2026) के अनुसार दिनांक 26 मई, 2026 को राज्य की सभी ग्राम पंचायतों में विशेष ग्राम सभा का आयोजन किया जाना है।
ग्राम सभा के मुख्य एजेंडा एवं बिंदु:
ग्राम (ग्लोबल राजस्थान एग्रोटेक मीट) 2026 के बारे में जानकारी:
राज्य सरकार द्वारा 23 से 25 मई, 2026 तक प्रस्तावित 'GRAM-2026' आयोजन को वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में ईंधन संयम की अपील और मुख्यमंत्री महोदय के ईंधन बचत हेतु निर्देशों के कारण कुछ समय के लिए स्थगित किया गया है, जो शीघ्र ही आयोजित होगा।
ग्राम सभा में नागरिकों को इस आयोजन की रूपरेखा, ड्रोन तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, प्रेसिजन फार्मिंग, जैविक एवं प्राकृतिक खेती जैसी आधुनिक तकनीकों के बारे में बताया जाएगा।
किसानों, स्टार्टअप्स और कृषि वैज्ञानिकों के बीच सीधा संवाद स्थापित कर कृषि को अधिक लाभदायक बनाने पर चर्चा होगी।
ग्रामोत्थान शिविरों / ग्राम रथ यात्रा की प्रगति की जानकारी:
ग्राम उत्थान शिविर अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्र के समस्त 2770 गिरदावर सर्किल पर शिविर आयोजित किए गए, जिनमें 31.5 लाख से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया।
इन शिविरों में कृषि, उद्यान, कृषि विपणन, पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन, सहकारिता, जल संसाधन, ऊर्जा, उद्योग, ग्रामीण विकास, पंचायत राज तथा राजस्व विभाग ने भाग लिया तथा मौके पर ही ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान किया गया।
अधिकारियों की उपस्थिति एवं निर्देश:
मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद और विकास अधिकारी, पंचायत समिति यह सुनिश्चित करेंगे कि दिनांक 26 मई, 2026 को आयोजित होने वाली प्रत्येक ग्राम सभा में जिला स्तर या पंचायत समिति स्तर का कोई अधिकारी अनिवार्य रूप से उपस्थित रहे तथा ग्राम सभाओं का प्रभावी पर्यवेक्षण किया जाए।
राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2026 – ग्राम विकास अधिकारी की वरिष्ठता सूची से संबंधित अधिसूचना
राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2026
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 04 जून, 2026 को अधिसूचना जारी कर राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन किया गया है। इसे राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2026 कहा गया है, जो तुरंत प्रभाव से लागू हो गए हैं।
मुख्य बिंदु एवं संशोधन
नियम 285 का संशोधन: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 285 के परंतुक में खंड (iv) और (v) जोड़े गए हैं।
8 जून, 2016 या उसके पश्चात नियुक्त ग्राम विकास अधिकारी: इनकी वरिष्ठता सूची भर्ती एजेंसी से प्राप्त योग्यता/मेरिट सूची के आधार पर तैयार की जाएगी।
अनुकंपात्मक आधार पर नियुक्ति: 8 जून, 2016 या उसके पश्चात अनुकंपा के आधार पर नियुक्त ग्राम विकास अधिकारियों के मामले में वरिष्ठता उनके पदग्रहण (joining) की तारीख के आधार पर निर्धारित होगी।
राज्य स्तर पर वरिष्ठता: ग्राम विकास अधिकारी की वरिष्ठता सूची अब राज्य स्तर पर रखी जाएगी।
आदेश क्रमांक: [सं.एफ.4(09)अमेंड/रूल्स/लीगल/पीआर/2026/37]
जारीकर्ता: भारत भूषण गोयल, उप शासन सचिव, राज्यपाल के आदेश से।
राजस्थान जन आधार प्राधिकरण - परिपत्र-11: नवजात शिशु का स्वतः जन आधार नामांकन एवं मृतक सदस्य को स्वतः हटाने की प्रक्रिया
राजस्थान जन आधार प्राधिकरण परिपत्र-11
राजस्थान सरकार के आयोजना विभाग (राजस्थान जन आधार प्राधिकरण) द्वारा परिपत्र-11 (क्रमांक: एफ17(8)4/डीईएस/रा.ज.आ.यो./परिपत्र/2019/1043, दिनांक: 04.06.2026) जारी किया गया है। यह परिपत्र नवजात शिशु के जन्म उपरांत स्वतः (Auto) जन आधार नामांकन और परिवार में मृतक सदस्य का नाम स्वतः हटाने की प्रक्रिया से संबंधित है।
1. नवजात शिशु के जन्म उपरांत स्वतः (Auto) जन आधार नामांकन
राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ आमजन तक त्वरित गति से पहुँचाने के उद्देश्य से, पहचान पोर्टल द्वारा जन्म प्रमाण पत्र जारी होने और डेटा प्राप्त होने के बाद शिशु का माता के जन आधार कार्ड में स्वतः जुड़ने का प्रावधान किया गया है। इसके लिए निम्नलिखित शर्तें पूरी होनी आवश्यक हैं:
पहचान पोर्टल से शिशु का जन्म प्रमाण पत्र बनाते समय आवेदन फॉर्म में शिशु की माता की आधार संख्या, जन आधार परिवार पहचान संख्या एवं जन आधार सदस्य पहचान संख्या (Member ID) दर्ज करना आवश्यक है।
जन आधार में माता की आधार ई-केवाईसी आवश्यक रूप से होनी चाहिए।
ऐसे शिशु, जिनका नाम जन्म प्रमाण पत्र में दर्ज नहीं होता, उनका जन आधार नामांकन उनकी माता के जन आधार परिवार में वास्तविक नाम उपलब्ध होने तक बेबी ऑफ़ माता (Baby of Mother Name) के नाम से स्वतः ही जोड़ा जायेगा।
शिशु का फोटो जन आधार में एडिटिंग प्रोफाइल (Profile Editing) मॉड्यूल द्वारा अपडेट किया जा सकता है। शिशु का नाम जन्म प्रमाण पत्र में अद्यतन कराने पर पहचान पोर्टल से डेटा प्राप्त होने के उपरांत जन आधार में नाम स्वतः ही अद्यतन हो जायेगा।
2. मृतक सदस्य को जन आधार से स्वतः हटाना
किसी जन आधार परिवार में किसी सदस्य की मृत्यु उपरांत पहचान पोर्टल द्वारा मृत्यु प्रमाण पत्र जारी होने एवं पहचान पोर्टल से डेटा प्राप्त होने के उपरांत मृतक सदस्य का नाम उनके जन आधार परिवार से स्वतः हटाने के प्रावधान किए गए हैं। इस हेतु मृतक सदस्य का पहचान पोर्टल से मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाते समय आवेदन फॉर्म में मृतक की आधार संख्या, जन आधार परिवार पहचान संख्या एवं जन आधार सदस्य पहचान संख्या (Member ID) दर्ज करना आवश्यक है।
नोट: उक्त प्रक्रियाओं के अतिरिक्त जन आधार नामांकन एवं इसमें किसी नए सदस्य को जोड़ने एवं हटाने की प्रक्रिया पूर्ववत रहेंगी।
ग्रामीण क्षेत्रों में चरणबद्ध रूप से स्ट्रीट लाइट/रोड लाइट व्यवस्था स्थापित किए जाने के संबंध में
ग्रामीण क्षेत्रों में स्ट्रीट लाइट और रोड लाइट व्यवस्था
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में चरणबद्ध रूप से स्ट्रीट लाइट और रोड लाइट व्यवस्था स्थापित करने के संबंध में दिशानिर्देश जारी किए गए हैं। यह पहल माननीय मंत्री महोदय, पंचायती राज विभाग द्वारा विधानसभा में की गई घोषणा के अनुपालन में है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रात्रिकालीन अंधकार की समस्या का समाधान करना और प्रत्येक गांव को प्रकाशमान बनाना है।
मुख्य उद्देश्य
ग्रामीण क्षेत्रों में रात्रि के समय सुरक्षित एवं सुगम आवागमन सुनिश्चित करना।
ग्रामों की मुख्य बस्तियों, बाजारों, सार्वजनिक स्थलों, विद्यालयों, पंचायत भवनों और स्वास्थ्य केंद्रों पर पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था उपलब्ध कराना।
ऊर्जा दक्ष एवं पर्यावरण अनुकूल प्रकाश व्यवस्था को बढ़ावा देना।
विद्युत आपूर्ति की कमी वाले क्षेत्रों में सौर ऊर्जा आधारित स्ट्रीट लाइट/रोड लाइट की स्थापना को प्रोत्साहित करना।
ग्रामीण क्षेत्रों में दुर्घटनाओं एवं आपराधिक गतिविधियों की संभावना को कम करना तथा ग्रामीण विकास को गति प्रदान करना।
क्रियान्वयन क्षेत्र एवं प्राथमिकता
प्रत्येक ग्राम पंचायत में सभी ग्रामीण क्षेत्रों, आबादी क्षेत्रों, बाजारों, मुख्य मार्गों, आंतरिक मार्गों और अन्य महत्वपूर्ण स्थलों पर चरणबद्ध रूप से स्ट्रीट लाइट/रोड लाइट लगाई जाएगी। कार्य प्रारंभ होने की प्राथमिकता में कच्ची बस्तियां, कमजोर वर्ग की बस्तियां, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति वर्ग की बस्तियां तथा मुख्य मार्ग, बाजार, बस स्टैंड, पंचायत भवन, विद्यालय, आंगनबाड़ी केंद्र एवं स्वास्थ्य केंद्र जैसे सार्वजनिक स्थान शामिल होंगे।
स्ट्रीट लाइट की स्थापना एवं विद्युत कनेक्शन
एल.ई.डी. स्ट्रीट लाइट: विद्युत वितरण निगम के खंभों पर नियमानुसार सड़क की चौड़ाई के अनुसार एल.ई.डी. लाइट लगाई जाएगी।
सौर ऊर्जा आधारित स्ट्रीट लाइट: जहां विद्युत पोल उपलब्ध नहीं हैं, विद्युत आपूर्ति नियमित नहीं है अथवा विद्युत वितरण का नेटवर्क उपलब्ध नहीं है, वहां सौर ऊर्जा आधारित स्ट्रीट लाइट स्थापित की जा सकती है।
विद्युत कनेक्शन: स्ट्रीट लाइट/रोड लाइट हेतु विद्युत कनेक्शन ग्राम पंचायत द्वारा लिया जाएगा, जो ग्रामवार, ग्राम पंचायतवार या क्षेत्रवार हो सकता है।
व्यय का प्रबंधन
राज्य वित्त आयोग षष्ठ/सप्तम के अंतर्गत जारी विभागीय दिशा-निर्देशों में मूलभूत एवं विकास कार्यों के लिए हस्तांतरित 55 प्रतिशत राशि से सड़कों एवं सार्वजनिक स्थानों पर उचित प्रकाश व्यवस्था और 40 प्रतिशत राशि का उपयोग रोड लाइट/स्ट्रीट लाइट के अंतर्गत किया जाना अनुमत है।
ई-पंचायत पोर्टल के माध्यम से क्रियान्वयन
योजना के पारदर्शी एवं प्रभावी क्रियान्वयन हेतु प्रशासनिक, तकनीकी एवं वित्तीय स्वीकृतियां जारी करना, राशि भुगतान, कार्य की जियो-टैगिंग एवं फोटो अपलोड करना तथा ऑनलाइन मॉनिटरिंग एवं प्रगति समीक्षा सभी कार्य ई-पंचायत पोर्टल के माध्यम से किए जाएंगे। जिला स्तर पर अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी, पंचायती राज इसके नोडल अधिकारी होंगे।
दिनांक 05 जून 2026 को विशेष ग्राम सभा का आयोजन बाबत
विशेष ग्राम सभा के आयोजन के संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 05 जून, 2026 को विशेष ग्राम सभा के आयोजन के संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
विषय: दिनांक 05 जून 2026 को विशेष ग्राम सभा का आयोजन।
संदर्भ: पंचायतीराज मंत्रालय, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार से प्राप्त संयुक्त अ.शा. पत्र क्रमांक M-11015/169/2026-CB दिनांक 21.05.2026।
अभियान: भारत सरकार द्वारा "स्वच्छ गाँव, सुरक्षित जलवायु" अभियान के अंतर्गत विश्व पर्यावरण दिवस 05 जून के अवसर पर विशेष ग्राम सभा का आयोजन किए जाने के निर्देश प्राप्त हुए हैं।
निर्देश: सभी जिलों की सभी ग्राम पंचायतों में विश्व पर्यावरण दिवस (05 जून) के अवसर पर विशेष ग्राम सभा का आयोजन किया जाना सुनिश्चित करें तथा संदर्भित पत्र में वर्णित निर्देशों की पालना की जाए।
यह आदेश भरत भूषण गोयल, उपायुक्त एवं उप शासन सचिव (प्रथम) द्वारा जारी किया गया है।
ग्रामीण क्षेत्रों में निर्माण कार्यों हेतु भूमि स्वामित्व एवं मार्गदर्शन बाबत निर्देश
विभागीय ग्रामीण कार्य निर्देशिका-2025 के प्रावधानों की जानकारी
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास विभाग (अनुभाग-5) द्वारा क्रमांक एफ 27(201)ग्राविफो/अनु-5/जीकेन/सरपंच संघ/2024-25 के अंतर्गत दिनांक 14-08-2025 से लागू विभागीय ग्रामीण कार्य निर्देशिका-2025 के बिंदु संख्या 10 एवं परिशिष्ट-2 के प्रावधानों के संबंध में मार्गदर्शन जारी किया गया है। यह निर्देश ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न केंद्रीय एवं राज्य प्रवर्तित योजनाओं के अंतर्गत कराए जाने वाले निर्माण कार्यों को तकनीकी, सुगमता और गुणवत्ता की दृष्टि से क्रियान्वित करने के लिए है।
मुख्य बिंदु एवं दिशा-निर्देश
भूमि स्वामित्व और विवाद से बचाव: निर्देशिका के बिंदु संख्या 10 में 'भूमि स्वामित्व तय करने एवं कार्य को विवाद से बचाने का दायित्व' और परिशिष्ट-2 में 'सामान्य तौर पर संपादित की जाने वाली गतिविधियों के लिए आवश्यक जमीन का विवरण' से संबंधित प्रावधान दिए गए हैं।
आबादी भूमि और निर्माण कार्य: नवीन आंगनबाड़ी भवन, विद्यालय, सामुदायिक भवन, पंचायत भवन, उप स्वास्थ्य केंद्र, वाचनालय, प्याऊ और नए जल स्रोत लगाने के लिए आबादी क्षेत्र में सक्षम प्राधिकारी/संस्था से अनापत्ति प्रमाण-पत्र प्राप्त कर गतिविधि के नाम आवंटन/पट्टा जारी कराना आवश्यक है।
रास्ता/गोचर/वन भूमि संबंधी प्रावधान: नदी, नाला, तालाब के भरौव क्षेत्र में, रेलवे लाइन या सड़क की सीमा में निर्माण कार्य सामान्यतः स्वीकृत नहीं होते हैं। हालांकि, सार्वजनिक शौचालय, नालियां, बोरिंग, टंकी, हैंडपंप आदि के लिए ग्राम पंचायत स्थानीय स्तर पर आपत्तियां मांगकर और कोरम में निर्णय लेकर इसे शिथिल कर सकती है, जो पंचायत के रिकॉर्ड में होना अनिवार्य है। वन/अरण्य भूमि के मामलों में संबंधित विभाग से अनापत्ति प्रमाण-पत्र प्राप्त किया जाना चाहिए।
खातेदारी भूमि और गिफ्ट/दान: किसी भी परिसंपत्ति निर्माण हेतु खातेदारी भूमि दान/समर्पण करवाकर नामांतरण, खसरा मैप में लोकेशन दर्ज करना और सीमा ज्ञान करवाना आवश्यक है। एक से अधिक खातेदार होने पर सभी की सहमति और नोटरी पब्लिक से प्रमाणीकरण अनिवार्य है।
यह आदेश शासन सचिव, ग्रामीण विकास विभाग (कृष्ण कुणाल) द्वारा जारी किया गया है और सभी संबंधित जिला कलेक्टरों, मुख्य कार्यकारी अधिकारियों तथा जिला परिषदों को आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रेषित किया गया है।
24 अप्रैल 2026 को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस मनाने के संबंध में निर्देश
राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस 2026 का आयोजन
पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश (क्रमांक: एफ 4(0) PR / DP / राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस 2026 / 81591) के अनुसार 24 अप्रैल 2026 को जिला, ब्लॉक एवं ग्राम पंचायत स्तर पर राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस समारोहपूर्वक आयोजित किया जाएगा।
मुख्य उद्देश्य एवं महत्व
73वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम के लागू होने की याद में प्रतिवर्ष 24 अप्रैल को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर सहभागी लोकतंत्र की भावना को मजबूत करना और आत्मनिर्भर पंचायत की परिकल्पना को साकार करना है।
आयोजित की जाने वाली मुख्य गतिविधियाँ
आम नागरिकों व लाइन विभागों के अधिकारियों/कार्मिकों की सार्थक भागीदारी सुनिश्चित करते हुए ग्राम सभा का आयोजन।
आयोजित ग्राम सभा की बैठक कार्यवाही विवरण सभा सार के माध्यम से तैयार करना।
कार्यक्रम में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली पंचायतों का अभिनंदन।
सामुदायिक सहभागिता एवं जागरूकता सृजन संबंधी गतिविधियाँ।
महिला नेतृत्व वाले विकास, पंचायत उन्नति सूचकांक के अंतर्गत प्रदर्शन, सतत विकास लक्ष्यों के स्थानीयकरण (LSDGs) में प्रगति और ओएसआर (OSR) को बढ़ाने की रणनीतियों पर चर्चा।
पंचायती राज मंत्रालय के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल को फॉलो व टैग करना।
व्यय और वित्त पोषण
इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों/समारोहों में किया जाने वाला व्यय ओएसआर (OSR)/आरजीएसए (RGSA) के ई.ई.सी. (IEC) मद या अन्य केंद्रीय व राज्य ग्रामीण विकास योजनाओं से किया जा सकता है। इसे सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान करने के निर्देश दिए गए हैं।
पचपदरा, बालोतरा में एचआरआरएल रिफाइनरी के उद्घाटन कार्यक्रम के लाइव प्रसारण हेतु व्यवस्था
एचआरआरएल रिफाइनरी उद्घाटन कार्यक्रम का लाइव प्रसारण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा पचपदरा, बालोतरा में माननीय प्रधानमंत्री महोदय की उपस्थिति में दिनांक 21.04.2026 को होने वाले HRRL रिफाइनरी के उद्घाटन कार्यक्रम का लाइव प्रसारण ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर दिखाने के संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं।
प्रसारण व्यवस्था: सभी ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर लाइव प्रसारण की समुचित व्यवस्था (टीवी/स्क्रीन/एलईडी व्यवस्था, फर्नीचर, टेंट, पेयजल, व्यवस्थित बैठक व्यवस्था, इंटरनेट कनेक्टिविटी तथा ग्राम पंचायत भवन पर स्थापित ई-मित्र प्लस मशीन के माध्यम से प्रसारण)।
वित्तीय प्रावधान: छठे राज्य वित्त आयोग के अंतर्गत उपलब्ध अनुदान राशि से प्रति ग्राम पंचायत अधिकतम राशि 5,000/- रुपये तक के व्यय/उपयोग की सहमति प्रदान की गई है।
अनुमोदन: यह सहमति वित्त विभाग की आई.डी. संख्या 332600669 दिनांक 19.04.2026 द्वारा अनुमोदित है।
अतिरिक्त विकास अधिकारियों (Addl. Development Officers) की वर्ष 2022-2023 से 2025-2026 की स्थायी वरिष्ठता सूचियां प्रकाशित
अतिरिक्त विकास अधिकारियों की स्थायी वरिष्ठता सूचियां जारी
पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा अतिरिक्त विकास अधिकारियों (Addl. Development Officers) की 01 अप्रैल की स्थिति के अनुसार वर्ष 2022-2023, 2023-2024, 2024-2025 एवं 2025-2026 की स्थायी वरिष्ठता सूचियां विधिवत प्रकाशित कर दी गई हैं।
यह आदेश शासन सचिव एवं आयुक्त डॉ. जोगाराम के हस्ताक्षर से जारी किया गया है।
महत्वपूर्ण बिंदु:
संबंधित पद: अतिरिक्त विकास अधिकारी (Addl. Development Officers)
प्रकाशन वर्ष: 2022-23, 2023-24, 2024-25, 2025-26 (01 अप्रैल की स्थिति के अनुसार)
संबद्ध कार्मिक एवं अधिकारी विभाग की वेबसाइट पर जाकर अपनी वरिष्ठता सूची देख सकते हैं।
दिनांक 20 अप्रैल, 2026 को विशेष ग्राम सभा के आयोजन के संबंध में दिशा-निर्देश
दिनांक 20 अप्रैल, 2026 को विशेष ग्राम सभा का आयोजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश (क्रमांक: एफ.15(20)पंव्रावि/विधि/वि0ग्रा0सभा/2026/ई-81146, दिनांक: 2026.04.11) के अनुसार, राज्य की सभी ग्राम पंचायत में दिनांक 20 अप्रैल, 2026 को विशेष ग्राम सभा का आयोजन किया जाना है।
ग्राम सभा के मुख्य एजेंडा एवं चर्चा योग्य बिंदु
मुख्यमंत्री विकसित ग्राम अभियान: ग्राम पंचायत के संदर्भ में सूचकांकों पर चर्चा व अनुमोदन तथा आकांक्षाओं (Aspirations)/प्राथमिकताओं (Priorities) के संबंध में चर्चा।
वृक्षारोपण अभियान (मिशन हरियालो राजस्थान): वर्ष 2024 और 2025 में लगाए गए पौधों के जीवित रहने, उनके रख-रखाव, VBGRAMG (विकसित भारत-गारंटी फॉर रोज़गार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)) योजना के तहत श्रमिक उपलब्ध करवाने तथा वर्ष 2026 में पौधारोपण के लक्ष्यों (प्रत्येक ग्राम पंचायत में 2000 या 4000 पौधे) के संबंध में चर्चा।
'वंदे गंगा' जल संरक्षण जन अभियान (25 मई से 05 जून 2026): इस 12 दिवसीय अभियान के तहत जल संरक्षण, जन-जागरूकता, जल संग्रहण संरचनाओं का निर्माण/जीर्णोद्धार, प्रभात फेरी, श्रमदान, पौधारोपण और विभिन्न विभागों द्वारा प्रस्तावित गतिविधियों के संबंध में चर्चा।
अटल ज्ञान केंद्र: बजट घोषणा के अंतर्गत ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर स्थापित किए जा रहे अटल ज्ञान केंद्रों के उद्देश्यों, प्रस्तावित गतिविधियों, संरचनाओं और कार्य निष्पादन पर चर्चा।
समस्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी (जिला परिषद) और विकास अधिकारी (पंचायत समिति) को निर्देशित किया गया है कि वे अपने क्षेत्र की सभी ग्राम पंचायतों में उपर्युक्त एजेंडे के तहत कार्यवाही सुनिश्चित करें।
विकास अधिकारी के रिक्त पद पर अतिरिक्त कार्यभार सौंपे जाने के संबंध में परिपत्र
विकास अधिकारी के रिक्त पद पर अतिरिक्त कार्यभार हेतु निर्देश
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज) द्वारा विकास अधिकारी के रिक्त पद का अतिरिक्त कार्यभार प्रदान किए जाने के संबंध में नया परिपत्र जारी किया गया है। इस परिपत्र के माध्यम से पूर्व में जारी समस्त दिशा-निर्देशों को अतिक्रमित करते हुए विकास अधिकारी के रिक्त पद का अतिरिक्त कार्यभार वरियताक्रम में दिए जाने के निर्देश प्रदान किए गए हैं।
अतिरिक्त कार्यभार व्यवस्था का वरियताक्रम
पंचायत समिति कार्यालय में पदस्थापित नियमित सहायक अभियंता।
पंचायत समिति कार्यालय में पदस्थापित अतिरिक्त विकास अधिकारी।
इसके अतिरिक्त, प्रशासनिक रूप से उपखंड अधिकारी अथवा निकटतम पंचायत समिति में कार्यरत नियमित विकास अधिकारी को अतिरिक्त कार्यभार दिए जाने का निर्णय जिला कलेक्टर के स्तर से लिया जा सकता है।
पंचायत समिति की निधि से संदाय के लिए सभी आदेश एवं चैक पर हस्ताक्षर करने हेतु विभागीय परिपत्र क्रमांक एफ 2(1)पराजिव/आ.वि.अ./वि.अ./2010/993 दिनांक 03.05.2010 के अनुसार अग्रिम कार्यवाही संपादित की जाए। उक्त परिपत्र की अक्षरशः पालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
जारीकर्ता: डॉ. जोगाराम, शासन सचिव एवं आयुक्त (RajKaj Ref No.: 21456496)
ग्राम स्तर पर प्रत्येक माह के प्रथम मंगलवार को जनसुनवाई के संबंध में दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा जनसुनवाई व्यवस्था
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा माननीय पंचायती राज मंत्री महोदय की दिनांक 17.03.2026 को आयोजित बैठक में प्रदत्त निर्देशों की पालना के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
ग्राम स्तर पर जनसुनवाई: प्रत्येक माह के प्रथम मंगलवार को ग्राम स्तर पर नियमित रूप से जनसुनवाई का आयोजन किया जाएगा।
गायों का चयन: प्रत्येक ग्राम पंचायत में जनसुनवाई हेतु सबसे कम जनसंख्या वाले ग्राम का सर्वप्रथम चयन किया जाए।
अधिकारियों की मॉनीटरिंग: मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) द्वारा 2 माह में कम से कम एक बार तथा खण्ड विकास अधिकारी (BDO) द्वारा माह में कम से कम एक बार आवश्यक रूप से जन-समस्याओं के समाधान की मॉनीटरिंग सुनिश्चित की जाएगी।
जारीकर्ता: डॉ. जोगा राम, शासन सचिव एवं आयुक्त, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण (PMAY-G) के अंतर्गत लाभार्थियों के भौतिक सत्यापन एवं उन्हें अपात्र घोषित करने हेतु यह 'रिमांड ऑफ फॉर्म' (Remand Off Form) उपयोग
यह प्रपत्र PMAY-G की स्थाई वरीयता सूची (PWL) में शामिल लाभार्थियों के ग्राम सभा द्वारा भौतिक सत्यापन के लिए है।
ग्राम सभा की बैठक में योजनान्तर्गत निर्धारित मापदण्डों के परीक्षण उपरान्त लाभार्थियों को पात्र या अपात्र घोषित कर अनुमोदन किया जाता है।
प्रपत्र में लाभार्थी का नाम, पिता/पति का नाम, गाँव का नाम, PMAY-G ID एवं PWL में वरीयता क्रमांक दर्ज करने का स्पष्ट प्रावधान है।
अपात्रता के मुख्य कारण (मापदंड):
प्रपत्र में अपात्रता के 16 बिंदु दिए गए हैं, जिनमें से किसी एक का होना अपात्रता (Remand Off) के लिए पर्याप्त है:
पूर्व में मकान होना या किसी आवास योजना से लाभान्वित होना।
लाभार्थी की मृत्यु हो जाना (तथा परिवार में कोई न होना) या ग्राम पंचायत से पलायन कर जाना।
किसी भी प्रकार का वाहन (मोटरसाईकिल, टेम्पो, कार, जीप, नाव) या 3-व्हीलर/4-व्हीलर मशीनरी होना।
किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) की लिमिट 50,000 रुपये से अधिक होना।
परिवार के किसी सदस्य का राजकीय सेवा में होना, गैर कृषि उद्यम में पंजीकृत होना या मासिक आय 10,000 रुपये होना।
आयकर (Tax) या पेशेवर कर (Professional Tax) का भुगतान करने वाला होना।
घर में फ्रीज या बेसिक फोन होना।
स्वयं की 2.5 एकड़ जमीन के साथ कृषि यंत्र होना, 5.0 एकड़ सिंचित भूमि होना, या कम से कम 7.5 एकड़ भूमि/1 सिंचाई उपकरण होना।
राजस्थान पंचायती राज संस्थाओं के जनप्रतिनिधियों के मानदेय में वृद्धि की अधिसूचना
पंचायती राज संस्थाओं के जनप्रतिनिधियों के मानदेय में संशोधन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 के नियम 27 से 30 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित सदस्यों एवं जनप्रतिनिधियों के मानदेय की दरों में संशोधन किया गया है। यह अधिसूचना माननीय मुख्यमंत्री महोदय द्वारा दिनांक 27.02.2026 को वित्त एवं विनियोग विधेयक (बजट 2026-27) पर चर्चा की घोषणाओं के बिंदु सं.-69 के क्रम में जारी की गई है।
संशोधित मानदेय की दरें
जिला प्रमुख, जिला परिषद: वर्तमान मानदेय 16,698/- रुपये से बढ़कर 18,368/- रुपये प्रति माह
प्रधान, पंचायत समिति: वर्तमान मानदेय 11,689/- रुपये से बढ़कर 12,858/- रुपये प्रति माह
सरपंच, ग्राम पंचायत: वर्तमान मानदेय 6,679/- रुपये से बढ़कर 7,347/- रुपये प्रति माह
मुख्य बिंदु एवं निर्देश
जनप्रतिनिधियों को देय मानदेय का भुगतान राज्य वित्त आयोग के तहत मिलने वाली अनुदान राशि से किया जाएगा।
यह अधिसूचना वित्त (व्यय-5) विभाग की आईडी संख्या 332600452 दिनांक 19.03.2026 से प्राप्त सहमति के अनुसरण में जारी की गई है।
मानदेय में यह वृद्धि 01.04.2026 (April Paid in May) से प्रभावी होगी।
पंचायती राज संस्थाओं की बैठकों के कार्यवाही विवरण संधारण के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
पंचायती राज संस्थाओं की बैठकों के संबंध में परिपत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा पंचायती राज संस्थाओं की बैठकों के कार्यवाही विवरण (Minutes of Meetings) के संधारण और पालना के संबंध में परिपत्र जारी किया गया है। यह दस्तावेज सभी ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों के लिए बैठकों की कार्यप्रणाली में एकरूपता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने हेतु जारी किया गया है।
मुख्य दिशा-निर्देश एवं बिंदु
हिन्दी भाषा में अभिलेखन: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम-44 के अंतर्गत ग्राम पंचायत स्तर पर सचिव, पंचायत समिति स्तर पर विकास अधिकारी और जिला परिषद स्तर पर मुख्य कार्यकारी अधिकारी द्वारा कार्यवाही विवरण अनिवार्य रूप से हिन्दी में लिखा जाना चाहिए।
हस्ताक्षर और उपस्थिति: बैठकों में उपस्थित सदस्यों की उपस्थिति, उनके हस्ताक्षर तथा लिए गए विनििश्चय स्पष्ट रूप से दर्ज किए जाने चाहिए। कार्यवाही विवरण के अंत में बिना कोई रिक्त स्थान छोड़े हस्ताक्षर कराए जाएं ताकि बाद में कोई प्रस्ताव न जोड़ा जा सके।
निजी प्रिंटेड रजिस्टरों का प्रयोग बंद करने बाबत: राजस्थान पंचायत अधिनियम, 1953 (जो कि राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 124 के तहत निरस्त हो चुका है) के प्रपत्र संख्या 24 (नियम 164) वाले निजी प्रिंटेड कार्यवाही विवरण रजिस्टरों का उपयोग विधि विरुद्ध है। अतः इनका उपयोग तुरंत प्रभाव से बंद किया जाए और केवल सामान्य लाइनदार रजिस्टर का उपयोग किया जाए।
संकल्पों की रिपोर्टिंग: अधिनियम या नियमों के विपरीत पारित किसी संकल्प के संबंध में 24 घंटे के भीतर मुख्य कार्यकारी अधिकारी को रिपोर्ट किया जाना आवश्यक है।
प्रतियों का प्रेषण: कार्यवाही विवरण की प्रतियां संबंधित पंचायत समिति, जिला परिषद तथा सभी वार्ड पंचों, पंचायत समिति सदस्यों और जिला परिषद सदस्यों को भेजी जाएं।
पंचायत निर्णय एवं सभा सार पोर्टल: ग्राम सभा बैठक का कार्यवाही विवरण फोटो आदि के साथ पंचायत निर्णय एवं सभा सार पोर्टल पर नियमित रूप से अपलोड किया जाना सुनिश्चित किया जाए।
पंचायती राज संस्थाओं की साधारण सभा की बैठकें नियमित समयावधि में करवाने बाबत
पंचायती राज संस्थाओं की साधारण सभा की बैठकें नियमित समयावधि में करवाने के संबंध में दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा पंचायती राज संस्थाओं की साधारण सभा की बैठकें नियमित समयावधि में आयोजित कराने के संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं। पत्र के माध्यम से सभी मुख्य/अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारियों, जिला परिषद (समस्त राजस्थान) को अवगत कराया गया है कि विभिन्न स्तरों पर बैठकों का आयोजन तय समय सीमा के भीतर किया जाए।
मुख्य बिंदु और प्रावधान
ग्राम पंचायत: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा-45 के तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत की साधारण सभा की बैठक प्रत्येक पन्द्रह दिवस में कम से कम एक बार (प्रत्येक माह की दिनांक 5 एवं 20 को) आयोजित की जाती है। अवकाश होने पर आगामी दिवस को बैठक आयोजित होती है।
पंचायत समिति: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा-46 के तहत पंचायत समिति की साधारण सभा की बैठक प्रत्येक माह में कम से कम एक बार आयोजित की जाती है।
जिला परिषद: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा-46 के तहत जिला परिषद की साधारण सभा की बैठक कम से कम 45 दिन के अंतराल पर आयोजित की जाए तथा इनमें जिला स्तरीय अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए।
बैठकों की अध्यक्षता संबंधी नियम
ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद की साधारण सभा की बैठकों की अध्यक्षता क्रमशः सरपंच, प्रधान और प्रमुख द्वारा की जाती है। यदि वे किन्हीं कारणों से अनुपस्थित रहते हैं, तो अध्यक्षता उप-सरपंच, उप-प्रधान या उप-प्रमुख द्वारा की जाएगी। उनके भी अनुपस्थित रहने पर बैठक में उपस्थित वार्ड पंचों, पंचायत समिति सदस्यों या जिला परिषद सदस्यों में से किसी एक को चुनकर अध्यक्षता सौंपी जाएगी।
माननीय प्रधानमंत्री महोदय की उपस्थिति में 28.02.2026 को आयोजित होने वाले राज्य स्तरीय समारोह के सीधे प्रसारण हेतु व्यवस्था के संबंध में
राज्य स्तरीय समारोह के सीधे प्रसारण हेतु दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी पत्र क्रमांक एफ 165(7)ले.ब./परावि/एसएफसी-7/2025-26/ के माध्यम से दिनांक 28.02.2026 को अजमेर में माननीय प्रधानमंत्री महोदय की उपस्थिति में आयोजित होने वाले राज्य स्तरीय कार्यक्रम के लाइव प्रसारण को ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर दिखाने हेतु व्यवस्था के संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु एवं वित्तीय स्वीकृति
दिनांक 28.02.2026 को अजमेर में होने वाले कार्यक्रम का लाइव प्रसारण जिला, ब्लॉक व ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर आयोजित किया जाना है।
इस कार्यक्रम के सीधे प्रसारण को ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर देखने हेतु समुचित व्यवस्था (जैसे टीवी, स्क्रीन, एलईडी व्यवस्था, फर्नीचर, टेंट, पेयजल व बैठक व्यवस्था) सुनिश्चित की जानी है।
षष्ठ राज्य वित्त आयोग के अंतर्गत पंचायती राज संस्थाओं को देय अनुदान राशि के उपयोग हेतु विभाग के पत्रांक 347 राजकाज क्रमांक 13247621 दिनांक 28.01.2025 द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के बिंदु संख्या-(अ)(3)(xiii) के प्रावधानों के अंतर्गत यह सहमति दी गई है।
प्रत्येक ग्राम पंचायत द्वारा इस प्रयोजन हेतु अधिकतम राशि 10,000/- रुपये तक का व्यय/उपयोग षष्ठ राज्य वित्त आयोग के अंतर्गत उपलब्ध अनुदान राशि से करने की सहमति प्रदान की जाती है।
यह सहमति वित्त विभाग की आई.डी. संख्या 332600355 दिनांक 26.02.2026 द्वारा अनुमोदित है।
जारीकर्ता: (डॉ. जोगा राम), शासन सचिव एवं आयुक्त, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
जन्म के दो अनुज्ञा (Permission) प्रकरणों के संबंध में दिशा-निर्देश जारी
जन्म-मृत्यु पंजीकरण के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
राजस्थान सरकार, आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय द्वारा दिनांक 25.02.2026 को एक परिपत्र (क्रमांक-एफ13/1/3/आरजीआई/बीएस/डीईएस/2017/158) जारी किया गया है। यह परिपत्र जन्म और मृत्यु के पंजीयन के संबंध में जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1969 और राजस्थान जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण नियम 2000 के प्रावधानों के तहत जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
विलंबित पंजीयन: जन्म की 30 दिवस से एक वर्ष की अवधि की घटनाओं का पंजीयन धारा 13(2) एवं राज्य नियम 9(2) तथा एक वर्ष से अधिक की अवधि का पंजीयन धारा 13(3) एवं राज्य नियम 9(3) के तहत जारी अनुज्ञा के आधार पर किया जाता है।
दो अनुज्ञा के प्रकरण: कई प्रकरणों में माता-पिता/संरक्षक द्वारा जन्म की विलंबित घटनाओं का पंजीयन दो अलग-अलग अनुज्ञा जारी करवाकर अलग-अलग तिथियों में करवा लिया जाता है, विशेषकर शैक्षणिक लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से।
निर्णय एवं निर्देश: जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1969 की धारा 4(3) एवं 4(4) के प्रावधान के अंतर्गत यह निर्णय लिया गया है कि जिला रजिस्ट्रार/ब्लॉक सांख्यिकी अधिकारी/रजिस्ट्रार द्वारा दोनों जन्म प्रमाण पत्रों की सत्यता की जाँच, दस्तावेजों एवं साक्ष्यों की संतुष्टि के उपरांत प्रथम बार अनुज्ञा से जारी जन्म प्रमाण पत्र को यथावत रखा जावे और दूसरा अनुज्ञा से जारी जन्म प्रमाण पत्र को निरस्त किया जावे।
संस्थागत जन्म के मामले में, यदि जन्म राजकीय या निजी चिकित्सा संस्थान में हुआ है, तो ऐसी स्थिति में चिकित्सा संस्थानों में नियुक्त उप-रजिस्ट्रार द्वारा जारी जन्म प्रमाण ही मान्य होगा।
जन्म, मृत्यु एवं विवाह रजिस्ट्रीकरण के परिपत्रों का संकलन - आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय, राजस्थान
जन्म, मृत्यु एवं विवाह रजिस्ट्रीकरण परिपत्र संकलन
यह दस्तावेज आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय, सांख्यिकी विभाग, राजस्थान, जयपुर द्वारा जारी किया गया जन्म, मृत्यु एवं विवाह रजिस्ट्रीकरण के महत्वपूर्ण परिपत्रों का एक विस्तृत संकलन है। इस संकलन में ग्राम पंचायतों, स्थानीय निकायों और संबंधित अधिकारियों के मार्गदर्शन के लिए कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य बिंदु एवं विषय
नष्ट या खराब हुए रिकॉर्ड: नष्ट अथवा खराब हुए रजिस्ट्रीकरण रिकॉर्ड को पुनः तैयार करने के लिए दिशा-निर्देश।
दत्तक-ग्रहण (Adoption): दत्तक-ग्रहण किए गए बच्चों के जन्म रिकॉर्ड में प्रविष्टि और परिवर्तन तथा संबंधित स्पष्टीकरण।
ई-मित्र सेवाएं: ई-मित्र केंद्र के माध्यम से जन्म और मृत्यु पंजीकरण हेतु आवेदन प्रक्रिया।
आधार प्रमाणीकरण: जन्म, मृत्यु एवं विवाह पंजीयन तथा राजकीय योजनाओं की सेवाओं के लिए आधार प्रमाणीकरण की अनिवार्यता।
ई-साइन और डिजिटल हस्ताक्षर: जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र में ई-साइन/डिजिटल हस्ताक्षर के प्रयोग संबंधी निर्देश।
विवाह पंजीयन: राजस्थान विवाहों का अनिवार्य रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 2009 के अंतर्गत आने वाले विभिन्न प्रावधान, मार्गदर्शन और प्रक्रियाएं।
जनआधार अनिवार्यता: जन्म-मृत्यु एवं विवाह पंजीयन में जनआधार की अनिवार्यता और उससे उत्पन्न समस्याओं के समाधान।
यह संकलन ग्राम पंचायत स्तर पर जन्म, मृत्यु और विवाह पंजीकरण के कार्यों को सुचारू रूप से संचालित करने और आमजन को बेहतर सेवाएं प्रदान करने में अत्यंत उपयोगी है।
दिनांक 22 जनवरी, 2026 को विशेष ग्राम सभा का आयोजन एवं गिरदावर सर्किल स्तर पर विशेष शिविरों के संबंध में निर्देश
विशेष ग्राम सभा और विशेष शिविर आयोजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज) और कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के दिशा-निर्देशों के क्रम में राज्य की प्रत्येक ग्राम पंचायत में दिनांक 22 जनवरी, 2026 को विशेष ग्राम सभा का आयोजन किया जाना है। इस विशेष ग्राम सभा का मुख्य उद्देश्य आगामी GRAM-2026 (Global Rajasthan Agri-Tech Meet-2026) और विभिन्न विभागीय अभियानों के प्रति जागरूकता पैदा करना है।
मुख्य बिंदु एवं दिशा-निर्देश:
ग्राम सभा आयोजन: दिनांक 22 जनवरी, 2026 को सभी ग्राम पंचायतों में विशेष ग्राम सभा आयोजित होगी जिसमें स्वामित्व कार्ड वितरण और अनुपयोगी विद्यालय भवन में नई स्वीकृत ग्राम पंचायत का कार्यालय प्रारंभ करने जैसे विषयों पर चर्चा व कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
गिरदावर सर्किल स्तर पर विशेष शिविर: बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर दिनांक 23 जनवरी, 2026 से इन शिविरों का शुभारंभ होगा। इसके पश्चात दिनांक 24, 25 एवं 31 जनवरी, 2026 तथा 01 एवं 05 से 09 फरवरी, 2026 (कुल 10 दिवस) तक प्रत्येक गिरदावर वृत्त (ILR) पर प्रातः 10:00 बजे से सायं 05:00 बजे तक विशेष शिविर लगाए जाएंगे।
भाग लेने वाले विभाग: इन शिविरों में कृषि, उद्यानिकी, कृषि विपणन, पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन, सहकारिता, जल संसाधन, ऊर्जा, उद्योग, आपदा प्रबंधन, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के क्षेत्रीय अधिकारी एवं कर्मचारी भाग लेंगे।
विभागीय गतिविधियां: शिविरों में सॉइल हेल्थ कार्ड वितरण, पीएम किसान निधि डीबीटी, फसल बीमा, किसान क्रेडिट कार्ड आवेदन, मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना, पीएम आवास योजना (PMAY-G) के तहत गृह प्रवेश, पीएम सूर्य घर योजना पंजीकरण और विभिन्न स्वरोजगार व अनुदान योजनाओं के आवेदन तैयार किए जाएंगे।
पंचायत समिति बाड़मेर, बाड़मेर ग्रामीण के पुनर्गठन/पुनर्शीलन/नवसृजन प्रारूप 2025
पंचायत समिति पुनर्गठन और नवसृजन 2025
यह दस्तावेज़ बाड़मेर जिले की पंचायत समिति बाड़मेर एवं बाड़मेर ग्रामीण के पुनर्गठन, पुनर्शीलन और नवसृजन से संबंधित प्रारूप 2025 (परिशिष्ट - ख) को प्रस्तुत करता है। इस दस्तावेज़ में ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन, उनकी वर्तमान स्थिति, प्रस्तावित ग्राम पंचायतों के नाम तथा वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार उनकी जनसंख्या का विवरण दिया गया है।
विवरण: विभिन्न ग्राम पंचायतों और उनके अंतर्गत आने वाले गांवों, ढाणियों की जनसंख्या (वर्ष 2011) एवं प्रस्तावित पुनर्गठन सूची का विस्तृत विवरण।
पंचायती राज संस्थाओं से जुड़े उपयोगकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों के लिए यह प्रारूप बाड़मेर क्षेत्र में प्रशासनिक सीमाओं और ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन की जानकारी हेतु महत्वपूर्ण है।
पंचायत समिति बाड़मेर ग्रामीण: ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन और पुनर्रचलन का प्रारूप 2025
ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन/पुनर्रचलन प्रारूप 2025
यह दस्तावेज़ पंचायत समिति बाड़मेर ग्रामीण के अंतर्गत ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन, पुनर्रचलन और नवसृजन से संबंधित प्रारूप 2025 को दर्शाता है। इसे ज़िला कलेक्टर, बाड़मेर (टीना डाबी) के अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत तैयार किया गया है।
मुख्य विवरण
क्षेत्र: पंचायत समिति बाड़मेर ग्रामीण
उद्देश्य: ग्राम पंचायतों और उनमें सम्मिलित गांवों की जनसंख्या और सीमाओं का पुनर्गठन व पुनर्रचलन
विविध ग्राम पंचायतें: जालीपा, लाखेताली, मूढ़ो की ढाणी, बांदरा, कपूरड़ी, रोहिली, भाड़खा, खारिया तला, आदर्श ढूंढा, आदर्श चवा, सरू पणजी, सरू चमनजी, सरली, बेरीवाला तला, गंगासरा, सांजटा, शिवकर, धने का तला, गालाबेरी, हाजाणियों की ढाणी (करली), मातासर, रावतसर, भुटिया, रामसर का कुआं, खुड़ासा, नोख और मंगने की ढाणी।
इस प्रारूप में प्रत्येक वर्तमान ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले गांवों, उनकी जनसंख्या तथा प्रस्तावित ग्राम पंचायतों में सम्मिलित गांवों के नए आँकड़ों को सारणीबद्ध किया गया है।
उदयपुर जिला ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन संबंधी शुद्धि पत्र
उदयपुर जिला ग्राम पंचायत एवं पंचायत समिति पुनर्गठन शुद्धि पत्र
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा आदेश क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/894, दिनांक 28-12-2025 के माध्यम से उदयपुर जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन से संबंधित पूर्व में जारी अधिसूचना में लिपकीय त्रुटियों के सुधार हेतु शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु एवं विवरण
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
दिनांक: 28-12-2025
संबंधित जिला: उदयपुर
ग्राम पंचायतों हेतु संशोधन: सायरा पंचायत समिति के अंतर्गत पूर्व प्रकाशित विवरण 'भानपुर' के स्थान पर कॉलम 7 के अनुसार 'भानपुरा' पढ़ा जाए।
पंचायत समितियों हेतु संशोधन: कुराबड और गिरवा पंचायत समितियों के अंतर्गत पूर्व प्रकाशित विवरण (जैसे 'मामादेव' और 'साठपुर मीणा') से संबंधित प्रविष्टियों में संशोधन करते हुए कुछ प्रविष्टियों को विलोपित किया गया है तथा अन्य सुधार किए गए हैं।
यह शुद्धि पत्र प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात पूर्व में प्रकाशित अधिसूचनाओं में हुई लिपकीय त्रुटियों को सुधारने के लिए जारी किया गया है।
जिला टोंक की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन बाबत शुद्धि पत्र
जिला टोंक ग्राम पंचायत एवं पंचायत समिति पुनर्गठन शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जिला टोंक की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन से संबंधित पूर्व में जारी अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटियों के संशोधन हेतु शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य विवरण:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
क्रमांक: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव/2024/893
दिनांक: 28-12-2025
संबंधित पूर्व अधिसूचनाएं: क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव/2024/807 दिनांक 20.11.2025 एवं संख्या एफ.15(39)पंव/पंचायत समिति गठन/2025/847 दिनांक 21.11.2025
इस शुद्धि पत्र के माध्यम से टोंक, निवाई, टोडारायसिंह और उनियारा पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों तथा पंचायत समितियों के विवरण में आवश्यक संशोधन किए गए हैं। विस्तृत विवरण के लिए संबंधित आदेश का अवलोकन करें।
जिला सिरोही की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सիमांकन के संबंध में शुद्धि पत्र
अधिसूचना विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/892 दिनांक 28-12-2025 के माध्यम से जिला सिरोही की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन से संबंधित पूर्व में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने एवं प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात संशोधन कर शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
संदर्भित पत्र संख्या एवं दिनांक: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/892, दिनांक 28-12-2025
पूर्व अधिसूचनाएं: क्रमांक एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/846 दिनांक 21.11.2025 तथा राजपत्र में दिनांक 21.11.2025 एवं 24.11.2025 को प्रकाशित सूचनाएं।
विषय: जिला सिरोही के अंतर्गत ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों हेतु पूर्व प्रकाशित विवरण में संशोधन (जैसे रेवदर और सिरोही पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाले गांवों/क्षेत्रों के नाम)।
नोट: नीचे दिए गए कॉलम संख्या 6 में अंकित विवरण के स्थान पर कॉलम 7 में अंकित विवरण को सही समझा पढ़ा जाए। विस्तृत विवरण के लिए आधिकारिक अधिसूचना का अवलोकन करें।
राजस्थान सरकार: सीकर जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्संसीमाकन के संबंध में शुद्धि पत्र अधिसूचना (28-12-2025)
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा सीकर जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्संसीमाकन/नवसृजन के संबंध में एक महत्वपूर्ण शुद्धि पत्र जारी किया गया है। यह आदेश दिनांक 28-12-2025 को जारी किया गया है, जिसका पत्र क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/891 है।
अधिसूचना का मुख्य उद्देश्य
विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंव्रा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/845 दिनांक 20.11.2025 एवं संख्या एफ.15(39)पंव्रा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/846 दिनांक 21.11.2025 तथा दिनांक 21.11.2025 एवं 24.11.2025 को राजस्थान राजपत्र विशेषनांक भाग 6(ग) में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने की वजह से और प्राप्त आपत्तियों के निस्तारण पश्चात यह संशोधन/शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार।
जिला: सीकर।
जारी दिनांक: 28-12-2025।
संदर्भित आदेश क्रमांक: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/891।
विवरण: नीचे दिए गए कॉलम संख्या 6 में अंकित विवरण के स्थान पर कॉलम 7 में अंकित विवरण को सही समझ कर पढ़ा जाए, जिसके अंतर्गत ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों (जैसे नीमकाथाना, पाटन, खण्डेला, लक्ष्मणगढ़, दांताारामगढ़, फतेहपुर, नेछवा, श्रीमाधोपुर, अजीतगढ़, रामगढ़ शेखावाटी, पलसाना, खाचरियावास आदि) से संबंधित विवरणों में संशोधन किया गया है।
नोट: इस शुद्धि पत्र के माध्यम से संबंधित ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों के पूर्व प्रकाशित विवरण में आवश्यक संशोधन किए गए हैं जिन्हें राजपत्र के अनुसार पढ़ा जाना चाहिए।
श्री गंगानगर जिले के पुनर्गठन और परिसीमन से संबंधित शुद्धि पत्र - आदेश दिनांक 28-12-2025
श्री गंगानगर जिला पुनर्गठन शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा श्री गंगानगर जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन से संबंधित अधिसूचना के संबंध में एक महत्वपूर्ण शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/786 दिनांक 20.11.2025 एवं संख्या एफ.15(39)पंव्रा/समिति गठन/2025/827 दिनांक 21.11.2025 के तहत श्री गंगानगर जिले की ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्रसीमांकन के संबंध में राजपत्र में प्रकाशित विवरण में लिपिकीय त्रुटि व प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात यह शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों हेतु जारी तालिकाओं में पूर्व प्रकाशित विवरण के स्थान पर संशोधित विवरण को सही समझ कर पढ़ने के निर्देश दिए गए हैं।
सूरतगढ़, सादुलशहर, रायसिंहनगर, घड़साना, अनूपगढ़ और राजियासर आदि क्षेत्रों से संबंधित प्रविष्टियों में सुधार किया गया है।
विस्तृत विवरण और संशोधित प्रविष्टियों की जानकारी के लिए मूल पीडीएफ दस्तावेज़ का अवलोकन करें।
जिला सवाई माधोपुर की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सীमांकन बाबत शुद्धि पत्र (दिनांक 28-12-2025)
जिला सवाई माधोपुर पुनर्गठन शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार, जयपुर द्वारा दिनांक 28-12-2025 का आदेश (क्रमांक: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/890) जारी किया गया है। यह शुद्धि पत्र जिला सवाई माधोपुर की ग्राम-पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन के संबंध में पूर्व में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटि सुधार हेतु जारी किया गया है।
प्रमुख बिंदु:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
दिनांक: 28-12-2025
संबंधित जिला: सवाई माधोपुर
उद्देश्य: पूर्व में प्रकाशित अधिसूचनाओं (दिनांक 21.11.2025 एवं 24.11.2025) में लिपिकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने के कारण प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात विवरण में संशोधन।
संशोधित विवरण के अंतर्गत गंगापुरसिटी, खण्डार, बामनवास और मलारना डूंगर पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाली विभिन्न ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों के विवरण में आवश्यक सुधार किए गए हैं। संबंधित उपयोगकर्ता एवं अधिकारी अधिक जानकारी के लिए मूल आदेश का अवलोकन कर सकते हैं।
जिला सलूंबर की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन से संबंधित शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा जारी शुद्धि पत्र
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवारा/2024/889 दिनांक 28-12-2025 के तहत जिला सलूंबर की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसर्जन से संबंधित पूर्व में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटिवश हुए गलत प्रकाशन को सुधारने हेतु शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
विवरण: पूर्व प्रकाशित अधिसूचनाओं (संख्या एफ.15(39)पंवारा/पंचायत समिति गठन/2025/803 दिनांक 20.11.2025 एवं संख्या एफ.15(39)पंवारा/पंचायत समिति गठन/2025/843 दिनांक 21.11.2025) में प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात कॉलम संख्या 6 के स्थान पर कॉलम 7 में अंकित विवरण को सही पढ़ा जाए।
राजसमंद जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन संबंधी शुद्धि पत्र - 24.12.2025
राजसमंद जिले के पुनर्गठन और परिसीमन से संबंधित शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजसमंद जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन के संबंध में जारी पूर्व अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटियों के सुधार हेतु नया शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य विवरण:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
क्रमांक: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवारा/2024/889
दिनांक: 24-12-2025
संदर्भ: विभागीय अधिसूचना क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवारा/2025/842 दिनांक 20.11.2025 एवं 21.11.2025
मुख्य बिंदु:
राजपत्र प्रकाशन में हुई लिपिकीय त्रुटियों व प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण के पश्चात आमेठ, कुंभलगढ़, देवगढ़, भीम, रेलमगरा और राजसमंद पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों के विवरण में संशोधन किया गया है। कॉलम संख्या 6 के स्थान पर कॉलम संख्या 7 में दिए गए विवरण को सही पढ़ा जाए।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है।
राजस्व ग्राम और पंचायत समिति पुनर्गठन शुद्धि पत्र - सिरोही जिला
राजस्थान सरकार ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), जयपुर द्वारा दिनांक 28-12-2025 को एक शुद्धि पत्र (कमांक: एफ.15(39)पंव/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/901) जारी किया गया है। यह शुद्धि पत्र विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंव/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/846 दिनांक 21.11.2025 तथा दिनांक 24.11.2025 को राजस्थान राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटियों को दुरुस्त करने और प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण के पश्चात जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
जिला: सिरोही
अधिसूचना दिनांक: 28-12-2025
शासन सचिव: डॉ. जोगा राम (राज्यपाल की आज्ञा से)
इस शुद्धि पत्र के माध्यम से सिरोही जिले की पुनर्गठित, पुनर्जीवित और नवसृजित पंचायत समितियों तथा उनमें सम्मिलित ग्राम पंचायतों के विवरण में संशोधन किया गया है। अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात उस जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो अनुसूची के स्तंभ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी।
जिला प्रतापगढ़ की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन संबंधी शुद्धि पत्र
जिला प्रतापगढ़ पुनर्गठन शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा जिला प्रतापगढ़ की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन के संबंध में जारी अधिसूचना में लिपिकीय त्रुटियों के संशोधन हेतु शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य विवरण:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार
क्रमांक: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव/2024/887
दिनांक: 28-12-2025
विषय: जिला प्रतापगढ़ की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन के संबंध में पूर्व में प्रकाशित अधिसूचनाओं (दिनांक 21.11.2025 एवं 26.11.2025) में लिपिकीय त्रुटियों का संशोधन।
जारी किए गए विवरण के अनुसार, कॉलम संख्या 6 में अंकित पूर्व प्रकाशित विवरण के स्थान पर कॉलम संख्या 7 में दिए गए संशोधित विवरण को सही समझा जाए। इसमें दलॉट, प्रतापगढ़, पीपलखूट, सुहागपुरा और अरनोद पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाले ग्रामों एवं विवरणों में संशोधन किया गया है।
जिला फलोदी की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सーीमौन हेतु शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा आदेश क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/886, दिनांक 28-12-2025 के तहत जिला फलोदी की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्ससीमांकन/नवसृजन के संबंध में शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
यह शुद्धि पत्र पूर्व में जारी विभागीय अधिसूचनाओं (संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/800 दिनांक 20.11.2025 एवं 840 दिनांक 21.11.2025) में लिपिकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने के कारण एवं प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार।
संबंधित जिला: फलोदी।
आदेश क्रमांक व दिनांक: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/886, दिनांक 28-12-2025।
विवरण: ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों हेतु राजपत्र में प्रकाशित विवरण में कॉलम संख्या 6 के स्थान पर कॉलम संख्या 7 में अंकित विवरण को सही पढ़ा जाए।
विभिन्न पंचायत समितियों जैसे घटियाली, बाप, फलोदी, आऊ, देचू, लोहावट, बापिणी आदि के अंतर्गत आने वाले ग्रामों और क्षेत्रों के नामों में आवश्यक संशोधन किए गए हैं तथा कुछ प्रविष्टियाँ विलोपित की गई हैं।
अधिक जानकारी एवं विस्तृत विवरण के लिए आधिकारिक राजपत्र या संबंधित विभाग के आदेश का अवलोकन करें।
पाली जिले की ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन/पुनर्सिमांकन के संबंध में शुद्धि पत्र जारी
पाली जिला ग्राम पंचायत पुनर्गठन शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवारा/2024/885 दिनांक 28-12-2025 के माध्यम से पाली जिले की ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सिमांकन/नवसृजन बाबत पूर्व में जारी अधिसूचना में लिपिकीय त्रुटि के सुधार हेतु शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य विवरण एवं संशोधन
विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवारा/2024/799 दिनांक 20.11.2025 (जो दिनांक 21.11.2025 को राजस्थान राजपत्र विशेषांक भाग 6(ग) में प्रकाशित हुई थी) में प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात निम्नलिखित संशोधन किए गए हैं:
पंचायत समिति बाली: राजपत्र पृष्ठ 1184, क्रम संख्या 23, कॉलम 5 - पूर्व प्रकाशित विवरण '3. रेलिया' को विलोपन किया गया है।
पंचायत समिति बाली: राजपत्र पृष्ठ 1184, क्रम संख्या 27, कॉलम 5 - संशोधित विवरण में '3. रेलिया' जोड़ा गया है।
पंचायत समिति बाली: राजपत्र पृष्ठ 1181, क्रम संख्या 4, कॉलम 5 - पूर्व प्रकाशित विवरण '3. सादलवा' को विलोपन किया गया है।
पंचायत समिति बाली: राजपत्र पृष्ठ 1182, क्रम संख्या 6, कॉलम 5 - संशोधित विवरण में '3. सादलवा' जोड़ा गया है।
उक्त विवरण को कॉलम 6 के स्थान पर कॉलम 7 में अंकित विवरण के अनुसार सही समझ कर पढ़ा जाए। यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है।
जिला नागौर के ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन हेतु शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा संशोधन आदेश
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/884, दिनांक 28-12-2025 के तहत जिला नागौर की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन बाबत पूर्व में जारी अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने के कारण संशोधन/शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
प्रमुख विवरण:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार
दिनांक: 28-12-2025
संदर्भित पूर्व अधिसूचनाएं: संख्या एफ.15(39)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2025/798 दिनांक 20.11.2025 एवं संख्या एफ.15(39)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2025/838 दिनांक 21.11.2025
विषय: जिला नागौर की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन में लिपिकीय त्रुटियों का सुधार
इस शुद्धि पत्र के माध्यम से ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों हेतु पूर्व प्रकाशित विवरण में कॉलम संख्या 6 के स्थान पर कॉलम संख्या 7 में अंकित विवरण को सही समझा व पढ़ा जाए।
कोटपूतली-बहरोड़ जिला: ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनःसीमांठन बाबत शुद्धि पत्र अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार, जयपुर द्वारा क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवै/2024/883 दिनांक 29-12-2025 के तहत एक महत्वपूर्ण शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
अधिसूचना का मुख्य उद्देश्य एवं विवरण
विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवै/2024/797 दिनांक 20.11.2025 एवं संख्या एफ.15(39)विधि/पंचायत समिति गठन/2025/837 दिनांक 21.11.2025 तथा जिला कोटपूतली-बहरोड़ की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनःसीमांठन/नवसृजन बाबत दिनांक 21.11.2025 एवं 24.11.2025 को राजस्थान राजपत्र विशेषनांक भाग 6(ग) में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने की वजह से व प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात यह संशोधन/शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु
संबंधित जिला: कोटपूतली-बहरोड़
प्रभावित क्षेत्र: ग्राम पंचायतें एवं पंचायत समितियां
जारीकर्ता: डॉ. जोगा राम, शासन सचिव, राज्यपाल की आज्ञा से
नोट: नीचे दिए गए कॉलम संख्या 6 में अंकित विवरण के स्थान पर कॉलम 7 में अंकित विवरण को सही समझ कर पढ़ा जाए, जैसा कि मूल अधिसूचना एवं संलग्न तालिकाओं में दर्शाया गया है।
राजस्थान सरकार - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग: जिला कोटा के पुनर्गठन संबंधशुद्धि पत्र
अधिसूचना एवं संशोधन विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/882 दिनांक 28-12-2025 के माध्यम से जिला कोटा की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन के संबंध में पूर्व में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटि के सुधार हेतु शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
आदेश क्रमांक व दिनांक: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/882, दिनांक 28-12-2025।
विषय: जिला कोटा की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन बाबत पूर्व में प्रकाशित राजपत्र अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटियों का संशोधन।
प्रभावित क्षेत्र: ग्राम पंचायतें (इटावा, खैराबाद, सुल्तानपुर) एवं पंचायत समितियां (खैराबाद)।
उक्त शुद्धि पत्र के अनुसार कॉलम संख्या 6 में अंकित पूर्व प्रकाशित विवरण के स्थान पर कॉलम संख्या 7 में अंकित विवरण को सही समझा व पढ़ा जाए।
जिला खैरथल-तिजारा के पुनर्गठन/पुनर्सীमांकन संबंधी शुद्धि पत्र
ग्राम विकास एवं पंचायती राज विभाग शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवारा/2024/881 दिनांक 24-12-2025 के माध्यम से जिला खैरथल-तिजारा की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन से संबंधित पूर्व में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटियों के संशोधन हेतु शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
अधिसूचना संदर्भ: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवारा/2024/795 दिनांक 20.11.2025 एवं संख्या एफ.15(39)पुनर्गठन/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/835 दिनांक 21.11.2025
संशोधित क्षेत्र: जिला खैरथल-तिजारा की ग्राम पंचायतें एवं पंचायत समितियाँ (जैसे तिजारा, किशनगढ़बास, मुण्डावर, ततारपुर)
विवरण: राजपत्र में पूर्व प्रकाशित विवरण में लिपिकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने की वजह से तथा प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात कॉलम 6 के स्थान पर कॉलम 7 में अंकित विवरण को सही समझा जाए।
करौली जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सիमांकन संबंधी शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवै/2024/880 दिनांक 28-12-2025 के माध्यम से जिला करौली की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन के संबंध में पूर्व में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटियों के सुधार हेतु शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार।
आदेश क्रमांक व दिनांक: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवै/2024/880, दिनांक 28-12-2025।
विषय: जिला करौली की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन बाबत पूर्व में प्रकाशित राजपत्र अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने एवं प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात संशोधन।
विवरण: सपोटरा, मासलपुर, हिण्डौन, करौली, नादौती, टोडामीम, श्रीमहावीरजी, कुडगांव, शेरपुर-सुरोठ आदि पंचायत समितियों और संबंधित ग्राम पंचायतों के विवरण में संशोधन किया गया है।
अधिक जानकारी के लिए संबंधित आधिकारिक प्रपत्र एवं दस्तावेजों का अवलोकन करें।
जिला जोधपुर की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन संबंधी शुद्धि पत्र आदेश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा अधिसूचना
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा जिला जोधपुर की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्सीमांकन और नवसंयोजन के संबंध में एक महत्वपूर्ण शुद्धि पत्र जारी किया गया है। यह आदेश दिनांक 28-12-2025 को जारी किया गया है, जिसका पत्र क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव/2024/879 है।
आदेश का मुख्य उद्देश्य
विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव/पंचायत समिति गठन/2025/833 दिनांक 21.11.2025 एवं अन्य पूर्व प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटियों के कारण हुए गलत प्रकाशन और प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण के पश्चात इस शुद्धि पत्र के माध्यम से विवरणों को संशोधित किया गया है।
मुख्य विवरण एवं निर्देश
ग्राम पंचायतों हेतु संशोधन: तिंवरी, बालेसर, ओसियां, बावड़ी, लूणी, मण्डोर, शेरगढ़, सेखाला, चामू, भोपालगढ़, बिलाड़ा और पीपाड़ शहर आदि पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों के विवरण, नाम, और कॉलम की प्रविष्टियों में सुधार किया गया है।
पंचायत समितियों हेतु संशोधन: बावड़ी, हतुण्डी, लूणी, बिलाड़ा, कापरड़ा, भोपालगढ़, पीपाड़ शहर, उम्मेदनगर और झंवर मुख्यालय पाल रोड से संबंधित पंचायत समिति क्षेत्रों के विवरणों को संशोधित किया गया है।
निर्देश: संबंधित तालिकाओं में कॉलम 6 के स्थान पर कॉलम 7 में अंकित विवरण को सही समझ कर पढ़ा जाए।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है तथा इसकी प्रतियां संबंधित सभी उच्च अधिकारियों, जिला कलेक्टरों, जिला परिषदों और निर्वाचन आयोग को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रेषित की गई हैं।
जिला झुंझुनू की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन हेतु शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/874 दिनांक 28-12-2025 के माध्यम से जिला झुंझुनू की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन बाबत पूर्व में जारी अधिसूचनाओं में लिपकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने के कारण एवं प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात संशोधन एवं शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
क्रमांक एवं दिनांक: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/874, दिनांक 28-12-2025
संबंधित जिला: झुंझुनू
उद्देश्य: ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों के पुनर्गठन एवं पुनर्सीमांकन संबंधी पूर्व प्रकाशन में लिपकीय त्रुटियों का संशोधन।
विविध ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों (जैसे उदयपुरवाटी, अलसीसर, झुंझुनू, चिड़ावा, मंडावा, सिंहाना, पिलानी, बुहाना, खेतड़ी, बबाई, टोडीगुढ़ा आदि) के संबंध में कॉलम संख्या 6 के पूर्व प्रकाशित विवरण को कॉलम संख्या 7 के संशोधित विवरण के अनुसार पढ़ा जाए।
झालावाड़ जिला ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन संबंधी शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंचा/2024/877 दिनांक 28-12-2025 के माध्यम से जिला झालावाड़ की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन के संबंध में शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु
मूल अधिसूचना: विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंचा/2024/791 दिनांक 20.11.2025 एवं दिनांक 21.11.2025 को राजस्थान राजपत्र विशेषांक भाग 6(ग) में प्रकाशित हुई थी।
शुद्धि का कारण: पूर्व प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने की वजह से व प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात यह संशोधन किया गया है।
संशोधित विवरण: पिड़ावा मुख्यालय सुनेल पंचायत समिति के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों के विवरण में कॉलम संख्या 6 के स्थान पर कॉलम संख्या 7 में अंकित विवरण को सही समझा जाए।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग - जालोर जिला पुनर्गठन संशोधन शुद्धि पत्र
अधिसूचना विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा आदेश क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवारा/2024/876, दिनांक 28-12-2025 के तहत जालोर जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन के संबंध में शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु
संदर्भित विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
आदेश दिनांक: 28-12-2025।
मूल अधिसूचनाएं: विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पुनर्गठन/विधि/पंवारा/2025/790 दिनांक 20.11.2025 एवं संख्या एफ.15(39)पुनर्गठन/विधि/पंवारा/2025/831 दिनांक 21.11.2025।
कारण: राजस्थान राजपत्र विशेषांक भाग 6(ग) दिनांक 21.11.2025 एवं 24.11.2025 में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने की वजह से और प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात यह संशोधन शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
प्रभावित क्षेत्र: जालोर जिले के अंतर्गत आने वाली विभिन्न ग्राम पंचायतें और पंचायत समितियां (जैसे आहोर, भीनमाल, रानीवाड़ा, चितलवाना, सांचौर, जालोर, भाद्रजून, जसवंतपुरा, सरनाऊ, झाब)।
विस्तृत विवरण के लिए संलग्न आधिकारिक दस्तावेज देखें।
जैसलमेर जिला: ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सिमांकन के संबंध में शुद्धि पत्र
जैसलमेर जिले के पुनर्गठन और पुनर्सिमांकन से संबंधित शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवरे/2024/875 (दिनांक 28-12-2025) के माध्यम से जिला जैसलमेर की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्सिमांकन और नवसृजन के संबंध में पूर्व में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपकीय त्रुटियों को सुधारने हेतु शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
संदर्भित पूर्व अधिसूचनाएं: विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवरे/2024/789 दिनांक 20.11.2025 एवं संख्या एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/830 दिनांक 21.11.2025।
कारण: 21.11.2025 एवं 24.11.2025 को राजस्थान राजपत्र विशेष अंक भाग 6(ग) में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने के कारण प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात यह संशोधन किया गया है।
विवरण: जारी किए गए शुद्धि पत्र में ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों के कॉलम में पूर्व प्रकाशित विवरण के स्थान पर संशोधित विवरण को सही समझा पढ़ने के निर्देश दिए गए हैं।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है।
जयपुर जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन संबंधी शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जयपुर जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन के संबंध में दिनांक 28-12-2025 को शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य विवरण:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
क्रमांक: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/ंपरा/2024/874
दिनांक: 28-12-2025
पार्श्वभूमि: पूर्व में जारी विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/ंपरा/2024/788 दिनांक 20.11.2025 एवं संख्या एफ.15(39)ंपरा/पेंचायत समिति गठन/2025/829 दिनांक 21.11.2025 में लिपकीय त्रुटि/गलत प्रकाशन होने की वजह से तथा प्राप्त आवेदनों के निस्तारण पश्चात् यह शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
विशेष निर्देश: नीचे दिए गए कॉलम संख्या 6 में अंकित विवरण के स्थान पर कॉलम 7 में अंकित विवरण को सही समझ कर पढ़ा जाए। इसमें फागी, चाकसू, कोटखावदा, जोबनेर, गोविन्दगढ़, शाहपुरा, माधोराजपुरा, किशनगढ़ रेनवाल, आंधी, जमवारामगढ़, दूदू, सांभरलेक, चौमूं, तूंगा, बस्सी आदि पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के विवरण में संशोधन किया गया है।
जिला हनुमानगढ़ की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन संबंधी शुद्धि पत्र अधिसूचना दिनांक 28-12-2025
अधिसूचना विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंचा/2024/873 दिनांक 28-12-2025 के माध्यम से जिला हनुमानगढ़ की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन के संबंध में पूर्व में जारी अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने के कारण संशोधन हेतु शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
दिनांक: 28-12-2025
विषय: जिला हनुमानगढ़ की ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन संबंधी पूर्व प्रकाशन में लिपिकीय त्रुटियों का संशोधन।
विवरण: पीलीबंगा, भादरा, संगरिया, हनुमानगढ़, टिब्बी, रावतसर, पल्लू और नोहर सहित विभिन्न पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायतों एवं राजस्व क्षेत्रों से संबंधित विवरण को कॉलम संख्या 6 (पूर्व प्रकाशित विवरण) के स्थान पर कॉलम संख्या 7 (संशोधित विवरण) के अनुसार पढ़ने हेतु संशोधित किया गया है।
संबंधित ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के उपयोगकर्ता और अधिकारी इस शुद्धि पत्र के अनुसार अपने अभिलेखों में सुधार कर सकते हैं।
डूंगरपुर जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन के संबंध में शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवारा/2024/87/ दिनांक 28-12-2025 के माध्यम से जिला डूंगरपुर की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्सीमांकन और नवसृजन से संबंधित पूर्व में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने के कारण यह संशोधन शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
संदर्भित पूर्व अधिसूचनाएं: क्रमांक एफ.15(39)पंवारा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/826 दिनांक 20.11.2025 एवं संख्या 827 दिनांक 21.11.2025।
संशोधन का कारण: राजस्थान राजपत्र विशेषांक भाग 6(ग) में 21.11.2025 एवं 24.11.2025 को प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटियों और प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण के पश्चात यह संशोधन किया गया है।
विवरण: ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों हेतु जारी सूचियों में कॉलम संख्या 6 में अंकित विवरण के स्थान पर कॉलम संख्या 7 में अंकित विवरण को सही पढ़ा जाए।
विस्तृत जानकारी के लिए आधिकारिक प्रपत्र और संबंधित जिले की सूचियों का अवलोकन करें।
धौलपुर जिले के ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन बाबत शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), जयपुर द्वारा जारी अधिसूचना
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा धौलपुर जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन के संबंध में दिनांक 28-12-2025 को शुद्धि पत्र जारी किया गया है। इसका आदेश क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंचा/2024/869 है।
यह शुद्धि पत्र पूर्व में राजस्थान राजपत्र विशेष अंक भाग 6(ग) में प्रकाशित अधिसूचनाओं (क्रमांक एफ.15(39)पुनर्गठन/विधि/पंचा/2024/783 दिनांक 20.11.2025 एवं संख्या एफ.15(39)पुनर्गठन/विधि/पंचा/2025/824 दिनांक 21.11.2025) में लिपिकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने की वजह से और प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण के पश्चात जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
संशोधन का उद्देश्य: राजपत्र में हुए मुद्रण या लिपिकीय त्रुटियों को सुधारना और प्राप्त अभ्यावेदनों का निस्तारण करना।
प्रभावित क्षेत्र: धौलपुर जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतें और पंचायत समितियां (जैसे राजाखेड़ा, सैपऊ, सरमथुरा, बसेड़ी, बाड़ी आदि)।
निर्देश: कॉलम 6 में अंकित विवरण के स्थान पर कॉलम 7 में अंकित विवरण को सही समझा पढ़ा जाए।
जिला डीग में ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन संबंधी शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), जयपुर द्वारा दिनांक 28-12-2025 को एक शुद्धि पत्र (क्रमांक: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/868) जारी किया गया है। यह आदेश जिला डीग की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन के संबंध में पूर्व में जारी अधिसूचनाओं में लिपकीय त्रुटिवश हुए गलत प्रकाशन को सुधारने के लिए जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
आदेश दिनांक: 28-12-2025।
विषय: जिला डीग की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन से संबंधित पूर्व अधिसूचनाओं में संशोधन।
विवरण: पूर्व प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपकीय त्रुटियों के कारण, प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात अब कॉलम संख्या 6 में अंकित विवरण के स्थान पर कॉलम संख्या 7 में अंकित विवरण को सही पढ़ा जाएगा।
यह संशोधन ग्राम पंचायतों तथा पंचायत समितियों दोनों के लिए जारी सूचियों पर लागू होता है।
संबंधित उपयोगकर्ता और अधिकारी विस्तृत जानकारी के लिए मूल अधिसूचना देख सकते हैं।
डीडवाना कुचामन ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन संबंध में शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा जारी संशोधन सूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 28-12-2025 को एक शुद्धि पत्र (क्रमांक: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवारा/2024/870) जारी किया गया है। यह आदेश डीडवाना कुचामन जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन से संबंधित पूर्व में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटियों के सुधार के संबंध में है।
मुख्य विवरण
विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवारा/2024/784 (दिनांक 20.11.2025) एवं एफ.15(39)विधि/पंचायत गठन/2025/825 (दिनांक 21.11.2025) तथा राजस्थान राजपत्र विशेष अंक भाग 6(ग) में दिनांक 21.11.2025 एवं 24.11.2025 को प्रकाशित सूचनाओं में हुई लिपिकीय त्रुटियों को आपत्तियों/आवेदन पत्रों के निस्तारण के पश्चात संशोधित किया गया है।
संशोधित विवरण के अंतर्गत विभिन्न पंचायत समितियों (जैसे नावा, परबतसर, मौलासर, डीडवाना, कुचामन सिटी और मकराना) के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों के नामों और विवरणों में सुधार किया गया है, जिसे संलग्न सूचियों के अनुसार पढ़ा जाए।
जिला दौसा की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन संबंधी शुद्धि पत्र
अति आवश्यक सूचना - जिला दौसा
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जिला दौसा की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसर्जन के संबंध में अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/867, दिनांक 28-12-2025 जारी की गई है।
यह शुद्धि पत्र विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंव्रा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/822 दिनांक 21.11.2025 एवं अन्य पूर्व प्रकाशित अधिसूचनाओं में राजपत्र विशेष अंक भाग 6(ग) में लिपिकी त्रुटि व गलत प्रकाशन होने तथा प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण के पश्चात जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
दिनांक: 28-12-2025
क्रमांक: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/867
विषय: जिला दौसा की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन से संबंधित पूर्व प्रकाशित विवरण में संशोधन/शुद्धि।
जारीकर्ता: डॉ० जोगा राम, शासन सचिव (राजपाल की आज्ञा से)।
संबंधित ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों के उपयोगकर्ता एवं अधिकारी इस अधिसूचना के अनुसार अपने रिकॉर्ड और विवरण को सही रूप में पढ़ व समझ सकते हैं।
राजस्थान सरकार: जिला चूरू की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन संबंधी शुद्धि पत्र
जिला चूरू ग्राम पंचायत एवं पंचायत समिति पुनर्गठन शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा आदेश क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/866 दिनांक 28-12-2025 के तहत चूरू जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन के संबंध में शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
यह शुद्धि पत्र विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंव्रा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/821 दिनांक 21.11.2025 एवं अन्य पूर्व प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटियों के कारण गलत प्रकाशन होने तथा प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण के पश्चात जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
संबंधित विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
आदेश दिनांक: 28-12-2025
विषय: जिला चूरू की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन से संबंधित शुद्धि पत्र
कवर किए गए क्षेत्र: चूरू, सुजानगढ़, सरदारशहर, राजगढ़, सिद्धमुख, भादरा और चांदगोठी (मुख्यालय राजगढ़) आदि पंचायत समितियां।
दस्तावेज में दी गई तालिकाओं के अनुसार ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों के विवरण में कॉलम 6 के स्थान पर कॉलम 7 में अंकित विवरण को सही समझा जाए।
राजस्थान सरकार - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा चित्तौड़गढ़ जिले के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन के संबंध में शुद्धि पत्र
ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन संबंधी शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा आदेश क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/865, दिनांक 28-12-2025 के तहत चित्तौड़गढ़ जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन के संबंध में पूर्व में जारी अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटियों एवं प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण के पश्चात संशोधन शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
पत्र क्रमांक: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/865
दिनांक: 28-12-2025
संबंधित जिला: चित्तौड़गढ़
विवरण: पूर्व प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने की वजह से और प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण के बाद ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों (जैसे गंगरार, चित्तौड़गढ़, बूँसू, भदेसर, कपासन आदि) से संबंधित विवरणों में संशोधन, नाम सुधार तथा विलोपन किया गया है।
संसोधित विवरण के अनुसार ही संबंधित प्रविष्टियों को सही समझा और पढ़ा जाए।
बूंदी जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन संबंधी संशोधन शुद्धि पत्र
अधिसूचना विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव/2024/864 दिनांक 28-12-2025 के माध्यम से जिला बूंदी की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन के संबंध में पूर्व में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटियों के सुधार हेतु शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु
यह शुद्धि पत्र निम्नलिखित विभागीय अधिसूचनाओं में संशोधन के लिए है:
अधिसूचना क्रमांक एफ.15(39)पंव/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/818 दिनांक 20.11.2025
अधिसूचना क्रमांक एफ.15(39)पंव/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/819 दिनांक 21.11.2025
राजस्थान राजपत्र विशेष अंक भाग 6(ग) दिनांक 21.11.2025 एवं 24.11.2025 में प्रकाशित विवरण
प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण और लिपिकीय त्रुटियों के कारण ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों (जैसे बूंदी, हिण्डोली, केशोरायपाटन, नैनवां, तालेड़ा, खटकड़ और लाखेरी) से संबंधित विवरणों में संशोधन किया गया है, जिसके तहत कॉलम संख्या 6 के स्थान पर कॉलम संख्या 7 के विवरण को सही पढ़ा जाए।
बीकानेर जिला की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमन संबंधी शुद्धि पत्र आदेश
अधिसूचना विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/863 दिनांक 28-12-2025 के माध्यम से जिला बीकानेर की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमन/नवसृजन के संबंध में पूर्व में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटियों के सुधार हेतु शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
आदेश क्रमांक एवं दिनांक: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/863, दिनांक 28-12-2025।
संशोधन का कारण: दिनांक 21.11.2025 एवं 24.11.2025 को राजस्थान राजपत्र विशेष अंक भाग 6(ग) में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटि व प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात।
संबंधित क्षेत्र: बीकानेर जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतें (जैसे बज्जू खालसा, हदां, खाजूवाला, कोलायत) और पंचायत समितियां।
नोट: कॉलम संख्या 6 में अंकित विवरण के स्थान पर कॉलम 7 में अंकित विवरण को सही समझ कर पढ़ा जाए।
भीलवाड़ा जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन संबंधी शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/862 दिनांक 28-12-2025 के तहत भीलवाड़ा जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन के संबंध में शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
यह शुद्धि पत्र विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/776 दिनांक 20.11.2025 एवं संख्या एफ.15(39)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2025/817 दिनांक 21.11.2025 तथा 24.11.2025 को राजस्थान राजपत्र विशेष अंक भाग 6(ग) में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने की वजह से प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना में दी गई सूचियों के अनुसार संबंधित कॉलम में पूर्व प्रकाशित विवरण के स्थान पर संशोधित विवरण को सही समझा कर पढ़ा जाए।
यह संशोधन भीलवाड़ा जिले की विभिन्न पंचायत समितियों (जैसे रायपुर, जहाजपुर, शाहपुरा, करेड़ा, आसींद, हुरड़ा, मांडलगढ़, बनेड़ा, कोटड़ी, सुवाणा, फूलिया कलां आदि) के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों और उनके विवरण से संबंधित है।
यह आदेश डॉ. जोगा राम, शासन सचिव, राजस्थान सरकार द्वारा राज्यपाल की आज्ञा से जारी किया गया है।
जिला भरतपुर की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सիमांकन संबंधी शुद्धि पत्र
राजस्थान सरकार ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा शुद्धि पत्र
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/861, दिनांक 28-12-2025 के माध्यम से जिला भरतपुर की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्सिमांंकन तथा नवसृजन के संबंध में पूर्व में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपकीय त्रुटियों के सुधार हेतु शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य विवरण
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
दिनांक: 28-12-2025
संदर्भित जिले: भरतपुर
उद्देश्य: पूर्व प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने तथा प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात विवरणों में संशोधन करना।
इस शुद्धि पत्र में भुसावर, उच्चैन, सेवर, बयाना और वैर पंचायत समितियों के अंतर्गत विभिन्न ग्राम पंचायतों के विवरणों (जैसे बाछरैन, सलेमपुर खुर्द, झारौटी, हींगोटा, ऊहलू, नंगला तुला, आदि) में आवश्यक संशोधन एवं विलोपन किए गए हैं। संबंधित उपयोगकर्ता और अधिकारी विस्तृत जानकारी के लिए आधिकारिक प्रपत्र देख सकते हैं।
ब्यावर जिला ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन बाबत शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा जयपुर, दिनांक 28-12-2025 को एक शुद्धि पत्र जारी किया गया है। इसका क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/860 है।
यह शुद्धि पत्र विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पुनर्गठन/विधि/पंरा/पंचायत समिति गठन/2025/774 दिनांक 20.11.2025 एवं संख्या एफ.15(39)पुनर्गठन/विधि/पंरा/पंचायत समिति गठन/2025/815 दिनांक 21.11.2025 के संदर्भ में है, जो जिला ब्यावर की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन बाबत दिनांक 21.11.2025 एवं 24.11.2025 को राजस्थान राजपत्र विशेषनांक भाग 6(ग) में प्रकाशित हुई थीं।
मुख्य बिंदु
कारण: पूर्व में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने की वजह से व प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात यह संशोधन किया गया है।
संशोधन विवरण: ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों (जैसे रायपुर, जैतारण, जवाजा, रास) से संबंधित प्रविष्टियों, कॉलम संख्या और विवरण में सुधार किया गया है।
निर्देश: नीचे दिए गए कॉलम संख्या 6 में अंकित विवरण के स्थान पर कॉलम 7 में अंकित विवरण को सही समझ कर पढ़ा जाए।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है तथा इसकी प्रतिलिपि आवश्यक सूचनार्थ विभिन्न संबंधित अधिकारियों को प्रेषित की गई है।
बाड़मेर जिले में ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन संबंधी शुद्धि पत्र
राजस्थान सरकार ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग)
यह अधिसूचना ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा जारी की गई है। इसके माध्यम से बाड़मेर जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन के संबंध में दिनांक 21.11.2025 को राजस्थान राजपत्र विशेषांक भाग 6(ग) में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपकीय त्रुटियों के कारण हुए गलत प्रकाशन को सुधारने हेतु शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंचा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/814 दिनांक 20.11.2025 एवं अन्य संबंधित अधिसूचनाओं में संशोधन किया गया है।
प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण के पश्चात, राजपत्र में प्रकाशित विवरण में कॉलम 6 के स्थान पर कॉलम 7 में अंकित विवरण को सही माना जाएगा।
ग्राम पंचायतों हेतु बाड़मेर, धनाऊ, धोरीमन्ना, गडरारोड, गुड़ामालानी, सेड़वा, फागलिया, चौहटन, आड़ेल, शिव, रामसर, विशायला, डूंगरो का तला आदि पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाले गांवों और ढाणियों के नामों में संशोधन, विलोपन या शुद्धि की गई है।
पंचायत समितियों हेतु भी संबंधित विवरणों को संशोधित किया गया है।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग - Baran Gram Panchayat & Panchayat Samiti Correction Notification
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार
यह अधिसूचना ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा जिला बारां की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसर्जन के संबंध में पूर्व में जारी अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटि सुधार हेतु जारी की गई शुद्धि पत्र है।
प्रमुख बिंदु:
पूर्व में जारी विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंव्रा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/813 दिनांक 20.11.2025 एवं अन्य संबंधित राजपत्र प्रकाशनों में हुई लिपिकीय त्रुटियों का निस्तारण किया गया है।
अन्ता, अट्रू, छबड़ा, छीपाबड़ोद पंचायत समितियों के अंतर्गत ग्राम पंचायतों के विवरण में संशोधन किया गया है।
नाहरगढ़ पंचायत समिति के अंतर्गत भी विवरण में संशोधन किया गया है।
संशोधित विवरण के अनुसार संबंधित कॉलम में पूर्व प्रकाशित विवरण के स्थान पर अद्यतन विवरण पढ़ा जाए।
बांसवाड़ा जिला ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन संबंधी शुद्धि पत्र आदेश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग राजस्थान सरकार अधिसूचना
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंचा/2024/859, दिनांक 28-12-2025 के तहत बांसवाड़ा जिले के ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन बाबत जारी पूर्व अधिसूचनाओं में लिपकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने के कारण यह शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार।
दिनांक: 28-12-2025।
संदर्भ आदेश: विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पुनर्गठन/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/812 दिनांक 21.11.2025 एवं जिला बांसवाड़ा की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन बाबत दिनांक 21.11.2025 व 24.11.2025 के राजस्थान राजपत्र विशेषांक भाग 6(ग)।
विवरण: राजपत्र में हुई लिपकीय त्रुटियों और प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों हेतु कॉलम संख्या 6 में अंकित विवरण के स्थान पर कॉलम संख्या 7 में अंकित विवरण को सही समझा कर पढ़ने हेतु निर्देशित किया गया है।
संबंधित पंचायत समितियों में बांसवाड़ा, तलवाड़ा, छोटी सरवन, गढ़ी, कुशलगढ़, घाटोल और सरेड़ी बड़ी के विभिन्न विवरणों में संशोधन किया गया है।
राजस्थान सरकार - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग: जिला बालोतरा की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन बाबत शुद्धि पत्र (अधिसूचना क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/856)
अधिसूचना एवं शुद्धि पत्र का विवरण
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), जयपुर द्वारा दिनांक 28.12.2025 को एक महत्वपूर्ण शुद्धि पत्र (अधिसूचना क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/856) जारी किया गया है। यह आदेश जिला बालोतरा की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्सीमांकन और नवसृजन से संबंधित है।
मुख्य बिंदु
संदर्भित पूर्व अधिसूचनाएं: विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/770 दिनांक 20.11.2025 एवं संख्या एफ.15(39)पुनर्गठन/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/811 दिनांक 21.11.2025 एवं 24.11.2025।
संशोधन का कारण: राजस्थान राजपत्र विशेषांक भाग 6(ग) में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने के कारण एवं प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात यह संशोधन किया गया है।
संशोधित विवरण: ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों हेतु जारी सूचियों में कॉलम 6 के स्थान पर कॉलम 7 में अंकित विवरण को सही समझा पढ़ने के निर्देश दिए गए हैं, जिसमें सिवाना, गिड़ा, कल्याणपुर, पायला कलां, बालोतरा, समदड़ी, बायतु एवं पाटोदी से संबंधित संशोधन शामिल हैं।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगाराम, शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है तथा संबंधित अधिकारियों को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित किया गया है।
राजस्थान सरकार: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग - जिला अलवर के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन हेतु शुद्धि पत्र
अधिसूचना एवं शुद्धि पत्र विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/855 दिनांक 28.12.2025 के माध्यम से जिला अलवर की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्सीमांकन और नवसृजन से संबंधित पूर्व में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटि के कारण गलत प्रकाशन को संशोधित किया गया है।
मुख्य बिंदु
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
आदेश क्रमांक: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/855
दिनांक: 28/12/2025
जिला: अलवर
उद्देश्य: पूर्व में दिनांक 21.11.2025 एवं 26.11.2025 को राजस्थान राजपत्र में प्रकाशित विवरणों में लिपिकीय त्रुटियों का सुधार।
इस शुद्धि पत्र के तहत ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों (जैसे रामगढ़, कठूमर, रैणी, भोनखर, खेड़ली-सोंखर आदि) से संबंधित कॉलम के विवरणों को संशोधित किया गया है, जिसके तहत पूर्व प्रकाशित विवरण के स्थान पर सही विवरण को पढ़ा जाए।
राजस्थान सरकार - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग: जिला अजमेर शुद्धि पत्र
ग्राम पंचायत पुनर्गठन संशोधन शुद्धि पत्र - जिला अजमेर
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/854 दिनांक 28.12.2025 के संदर्भ में जिला अजमेर की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन से संबंधित पूर्व में प्रकाशित अधिसूचना में लिपकीय त्रुटि सुधार हेतु शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
अधिसूचना क्रमांक एवं दिनांक: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/854, दिनांक 28.12.2025
संबंधित जिला: अजमेर
संशोधन विवरण: पंचायत समिति सिलोरा के अंतर्गत पूर्व में प्रकाशित विवरण (कॉलम 6) में अंकित 'चुन्दड़ी' के स्थान पर संशोधित विवरण (कॉलम 7) में 'बड़गांव' पढ़ा जाए।
राजस्व ग्राम और पंचायत समिति पुनर्गठन शुद्धि पत्र - सिरोही जिला
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 28-12-2025 को एक शुद्धि पत्र जारी किया गया है। इसका पत्र क्रमांक एफ.15(39)पंव/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/901 है।
मुख्य विवरण
यह शुद्धि पत्र विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंव/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/846 दिनांक 21.11.2025 और दिनांक 24.11.2025 को राजस्थान राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटियों को दुरुस्त करने तथा प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण के पश्चात जारी किया गया है।
प्रमुख बातें
जिला: सिरोही
पुनर्गठित पंचायत समितियां: सिरोही और कालन्द्री
विद्यमान पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात, पुरानी पंचायत समितियां अस्तित्व में नहीं रहेंगी और नई पुनर्गठित पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
राजसमंद जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन और संशोधन आदेश
अधिसूचना विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.15(39)पंवरे/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/900 दिनांक 28-12-2025 के माध्यम से राजसमंद जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन से संबंधित पूर्व अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंवरे/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/842 दिनांक 24.11.2025 में लिपिकीय त्रुटियों को दुरुस्त करने हेतु संशोधन शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु
राजसमंद जिला: आदेश के अनुसार राजसमंद जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन/पुनर्रसीमांकन किया गया है।
कुंभलगढ़ और चारभुजा: विवरण के अनुसार कुंभलगढ़ और चारभुजा (मुख्यालय गढ़बोर) पंचायत समितियों में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन और आवंटन किया गया है।
कार्यान्वयन: पूर्व में विद्यमान पंचायत समितियां इस तिथि से कार्य करना बंद कर देंगी और नई अनुसूची के अनुसार पंचायत समितियों का कार्यकाल एवं अधिकारिता प्रारंभ होगी।
जोधपुर जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन आदेश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/899, दिनांक 28-12-2025 के माध्यम से जोधपुर जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन की जानकारी दी गई है।
राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत शक्तियों का प्रयोग करते हुए, जोधपुर जिले की निम्नलिखित पंचायत समितियों का पुनर्गठन/पुनर्रसीमांकन/नवसृजन किया गया है:
शेरगढ़
चाबा
सेखाला
चामू
बालेसर
आगोलाई (नवसृजित/पुनर्गठित)
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना की अनुसूची के स्तम्भ 4 में वर्णित पंचायत समितियां उसी नाम से जानी जाएंगी।
उक्त पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात, जिले की विद्यमान पंचायत समितियां जो अनुसूची के स्तम्भ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे अनुसूची के स्तम्भ 4 में वर्णित पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगाराम, शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है।
जैसलमेर जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन और संशोधन बाबत अधिसूचना
जैसलमेर जिला पंचायत समिति पुनर्गठन संशोधन आदेश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 28-12-2025 को एक अधिसूचना (क्रमांक: एफ.15(39)पंव/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/898) जारी की गई है। यह अधिसूचना विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंस/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/830 दिनांक 21.11.2025 और राजस्थान राजपत्र में 24.11.2025 को प्रकाशित सूचनाओं में लिपिकीय त्रुटियों को दुरुस्त करने तथा प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण के पश्चात संशोधन हेतु जारी की गई है।
मुख्य बिंदु:
प्रभावित जिला: जैसलमेर
संशोधन का उद्देश्य: पूर्व में जारी अधिसूचनाओं की लिपिकीय त्रुटियों का सुधार और प्राप्त अभ्यावेदनों का निस्तारण।
कार्यकाल: सूची के स्तम्भ 4 में वर्णित पंचायत समितियों के चुनावों के पश्चात, उस जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो स्तम्भ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी, जिससे नई पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
राजस्थान सरकार: पंचायत समिति गठन एवं पुनर्गठन संशोधन शुद्धि पत्र (जयपुर जिला)
अधिसूचना विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 28-12-2025 को एक शुद्धि पत्र अधिसूचना (क्रमांक: एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/897) जारी की गई है।
मुख्य उद्देश्य
यह अधिसूचना दिनांक 21.11.2025 की विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/829 और दिनांक 26.11.2025 को राजस्थान राजपत्र विशेष अंक में प्रकाशित अधिसूचनाओं में रही लिपिकीय त्रुटियों को दुरुस्त करने तथा प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण के पश्चात जारी की गई है।
मुख्य बिंदु
जिला: जयपुर
संशोधित क्षेत्र/नाम: शाहपुरा, विराट नगर और अमरसर पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन से संबंधित विवरण।
सूची विवरण: अधिसूचना की अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पुनर्गठित/नवसृजित पंचायत समितियों के नाम तथा स्तंभ 5 में उनमें सम्मिलित ग्राम पंचायतों के नाम स्पष्ट किए गए हैं।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ 4 में यथावर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात, उक्त जिले की विद्यमान वे पंचायत जो स्तंभ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी, जिससे नई पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
यह आदेश डॉ. जोगा राम, शासन सचिव, राजस्थान सरकार द्वारा राज्यपाल की आज्ञा से जारी किया गया है।
बीकानेर जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन बाबत शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार
आदेश क्रमांक: एफ.15(39)पंवरे/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/896 दिनांक: 24-12-2025
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा जारी इस शुद्धि पत्र के माध्यम से जिला बीकानेर की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्सीमांकन और नवसृजन से संबंधित पूर्व में जारी विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंवरे/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/818 दिनांक 21.11.2025 (जो राजस्थान राजपत्र विशेषांक भाग 6(ग) में 24.11.2025 को प्रकाशित हुई थी) की लिपिकीय त्रुटियों को दुरुस्त किया गया है।
मुख्य बिंदु:
प्रभावित क्षेत्र: बीकानेर जिले की पुनर्गठित, पुनर्सीमांकित और नवसृजित पंचायत समितियां जैसे कोलायत, बज्जू खालसा, हदां, और बीछनोक तथा उनमें सम्मिलित ग्राम पंचायतों का विवरण संशोधित किया गया है।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पंचायत समितियों के चुनावों के पश्चात् उस जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो अनुसूची के स्तंभ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से ही विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
भीलवाड़ा जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन के संबंध में शुद्धि पत्र अधिसूचना
अधिसूचना विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार, जयपुर द्वारा भीलवाड़ा जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन के संबंध में दिनांक 28-12-2025 को शुद्धि पत्र अधिसूचना (क्रमांक: एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/895) जारी की गई है।
मुख्य बिंदु
संदर्भित अधिसूचना: यह अधिसूचना विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/817 दिनांक 21.11.2025 तथा राजस्थान राजपत्र दिनांक 24.11.2025 में प्रकाशित त्रुटियों को दुरुस्त करने के लिए जारी की गई है।
आसींद पंचायत समिति: आसींद पंचायत समिति के अंतर्गत पुनर्गठित/नवसृजित पंचायत समिति का मुख्यालय आसींद रहेगा और इसमें बराणा, चोरेला, ब्राह्मणों की सेरी, दांतड़ा, डड़ावत, दौलतगढ़, जालरिया, जिन्द्रास, कांवलास, करजालिया, कटार, लाछुड़ा, मोड़ का निम्बाहेड़ा, नेगड़िया, पालड़ी, रघुनाथपुरा, रतनपुरा (ला), तिलोली, सुलवाड़ा, बामणी, पाण्डरू, जीवलिया, झालरा, राजपुरा, मालासेरी, रूपपुरा (ब) और बागमाली ग्राम पंचायतें सम्मिलित हैं।
बदनौर पंचायत समिति: बदनौर पंचायत समिति में मोटरास, आकड़सादा, जगपुरा, संग्रामगढ़ और जयनगर ग्राम पंचायतें सम्मिलित हैं।
हुरडा पंचायत समिति: हुरडा पंचायत समिति का मुख्यालय हुरडा रहेगा और इसमें हुरडा, कोटड़ी, आगूचा, बराठिया, भोजरास, रूपारेली, बड़ला, लाम्बा, कानिया, गागेड़ा, खेजड़ी, अंतली, जालमपुरा, तस्वारिया, सरेरी, गढवालों का खेड़ा, कंवलियास, जालखेड़ा, टोंकरवाड, भगवानपुरा, आपलियास, बागा का खेड़ा, परडोदास और सनोदिया ग्राम पंचायतें सम्मिलित हैं।
शम्भूगढ़ पंचायत समिति: शम्भूगढ़ पंचायत समिति का मुख्यालय शम्भूगढ़ रहेगा और इसके अंतर्गत शम्भूगढ़, आमेसर, बरसणी, गांगलास, ईरास, कालियास, रूपपुरा, मोतीलपुर, परासोली, जोधडास, दूलहेपुरा, रामुपरिया, धौली जेतुपुरा, मोटरास, आकड़सादा, जगपुरा, संग्रामगढ़, रायरा, जयनगर, बारणी, दांतड़ा, फलामादा, सोडार और उंखलिया ग्राम पंचायतें शामिल हैं।
राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. ओ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा यह अधिसूचना जारी की गई है।
दिनांक 24 दिसंबर, 2025 को विशेष ग्राम सभा का आयोजन - विकसित भारत - रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण): वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025 बाबत
विशेष ग्राम सभा आयोजन: दिनांक 24 दिसंबर, 2025
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश (क्रमांक: एफ.15(10)पंरावि/विधि/वि0ग्रा0सं0/2024/ईफाइल 22379) के अनुसार, राज्य की सभी ग्राम पंचायतों में 24 दिसंबर, 2025 को विशेष ग्राम सभा का आयोजन किया जाना है।
इस विशेष ग्राम सभा में 'विकसित भारत - रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण): वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025' (VB-G RAM G Act, 2025), विकसित भारत पर जागरूकता, रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन जैसे विषयों पर चर्चा कर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025 की मुख्य विशेषताएँ:
125 दिनों की रोजगार गारंटी: प्रत्येक ग्रामीण परिवार के वयस्क सदस्यों को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों की मजदूरी-रोजगार की वैधानिक गारंटी दी गई है।
बेरोजगारी भत्ता: मांग प्रस्तुत करने के पश्चात निर्धारित समय-सीमा के भीतर कार्य प्रदान न किए जाने पर बेरोजगारी भत्ता भुगतान का प्रावधान है।
समय पर मजदूरी भुगतान: मजदूरी में देरी होने पर प्रत्येक विलंबित दिन का मुआवजा मजदूरी के साथ दिया जाएगा।
ग्राम स्तर पर योजना निर्माण: कार्यों की योजना ग्राम सभा में ही तय की जाएगी और ग्राम पंचायत 'विकसित ग्राम पंचायत योजना' तैयार करेगी।
कार्य श्रेणियाँ: जल सुरक्षा और संरक्षण, ग्रामीण बुनियादी ढाँचा, आजीविका संवर्धन तथा जलवायु परिवर्तन से निपटने वाले कार्य शामिल किए गए हैं।
कृषि-मजदूरी समन्वय: बुवाई एवं कटाई के व्यस्ततम समय हेतु कुल मिलाकर 60 दिनों की अवधि अधिसूचित करने का प्रावधान, जिससे कृषि कार्य निर्बाध रूप से चल सकें।
प्रशासनिक मद में वृद्धि: प्रशासनिक मद की सीमा 6% से बढ़ाकर 9% कर दी गई है।
समस्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी (जिला परिषद) और विकास अधिकारी (पंचायत समिति) को निर्देशित किया गया है कि वे अपने जिले की सभी ग्राम पंचायतों में इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें।
ग्रामीण सेवा शिविर के फॉलोअप शिविर 17 दिसंबर 2025 से 24 दिसंबर 2025 तक आयोजित करने बाबत
ग्रामीण सेवा शिविर के फॉलोअप शिविर आयोजन के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा वर्तमान सरकार के 02 वर्ष का कार्यकाल पूर्ण होने के उपलक्ष्य में ग्रामीण सेवा शिविर के फॉलोअप शिविर आयोजित किए जाने के संबंध में आदेश जारी किया गया है।
शिविर की मुख्य तिथियां एवं अवधि
शिविर अवधि: 17 दिसंबर, 2025 से 24 दिसंबर, 2025 तक (दिनांक 21.12.2025 को छोड़कर)।
शिविर आयोजन स्थल एवं व्यवस्थाएं
शिविरों का आयोजन पंचायत भवन, स्कूल भवन या उपलब्ध अन्य सार्वजनिक स्थानों पर किया जाएगा।
भू-अभिलेख निरीक्षक वृत्त मुख्यालय पर राज्य की प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर शिविर आयोजित किए जाएंगे।
आगंतुकों के लिए पेयजल की समुचित व्यवस्था, मेज, कुर्सियां, दरियां और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं ग्राम पंचायत द्वारा की जाएंगी।
वित्तीय प्रावधान एवं व्यय की अनुमति
षष्ठ राज्य वित्त आयोग के अंतर्गत पंचायती राज संस्थाओं को देय अनुदान राशि के उपयोग के संबंध में जारी दिशा-निर्देशों के बिंदु संख्या (अ) 3 XIII के अंतर्गत संबंधित ग्राम पंचायत द्वारा शिविर आयोजन हेतु राशि रु. 25,000/- (अधिकतम) का व्यय षष्ठ राज्य वित्त आयोग अंतर्गत उपलब्ध अनुदान राशि से करने की सहमति प्रदान की जाती है। यह सहमति वित्त विभाग की आई.डी. संख्या 332501835 दिनांक 05.12.2025 द्वारा अनुमोदित है।
इस कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान करने के निर्देश दिए गए हैं।
महात्मा गांधी नरेगार्न्तगत व्यक्तिगत लाभ के कार्य “अपना खेत अपना काम” दिशा-निर्देश 2011
महात्मा गांधी नरेगार्न्तगत व्यक्तिगत लाभ के कार्य “अपना खेत अपना काम” दिशा-निर्देश 2011
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (अनुभाग-3, नरेगार्), राजस्थान सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत व्यक्तिगत लाभ के कार्य “अपना खेत अपना काम” के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। यह दस्तावेज दिनांक 27.05.2011 (क्रमांक एफ. 40 (35) ग्रावि/नरेगार्/व्यक्तिगत लाभ के काम/2011) को जारी किया गया था।
योजना का मुख्य उद्देश्य
ग्रामीण क्षेत्र में बस रहे परिवारों की आजीविका के साधनों में स्थायी सुधार किए जाने के उद्देश्य से इस योजना को प्रारंभ किया गया है ताकि किसी भी पात्र परिवार की भूमि अविकसित न रहे और सिंचाई एवं भूमि संसाधनों का समग्र विकास कर उनकी आजीविका में सुधार किया जा सके।
प्रथम चरण में प्राथमिकता एवं पात्रता
गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वाले बी.पी.एल. परिवार (जिनका नाम बीपीएल सूची 2002 में दर्ज हो)।
अनुसूचित जाति के परिवार।
अनुसूचित जनजाति के परिवार।
इन वर्गों के कार्यों के पूर्ण होने के पश्चात् सीमांत कृषक एवं तद्पश्चात् लघु कृषक।
स्वीकृत कार्य और वित्तीय सीमा
इस योजना के अंतर्गत भूमि सुधार, डिग्गी, टांका, खेत तलाई, जल भराव क्षेत्रों में पानी निकास नाली, वृक्षारोपण, बागवानी, कृषि वानिकी, जल संरक्षण कार्य एवं लघु सिंचाई जैसे कार्य करवाए जा सकते हैं।
प्रत्येक जॉब कार्ड धारी परिवार को 1.50 लाख रुपए तक की सीमा में व्यक्तिगत लाभ का अनुमत कार्य स्वीकृत किया जा सकता है।
सामग्री मद में अधिकतम व्यय सीमा 60,000/- रुपए निर्धारित है।
महात्मा गांधी नरेगा योजना - मेट निर्देशिका (दिसम्बर 2010)
महात्मा गांधी नरेगा योजना - मेट निर्देशिका
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, शासन सचिवालय, जयपुर, राजस्थान द्वारा दिसम्बर 2010 में प्रकाशित मेट निर्देशिका महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत मेटों, ग्राम पंचायत और क्षेत्र के अधिकारियों के लिए एक अत्यंत उपयोगी मार्गदर्शिका है।
दस्तावेज़ का मुख्य उद्देश्य
इस निर्देशिका का मुख्य उद्देश्य मेटों को ई-मस्टर रोल, मस्टररोल ट्रैकिंग, मेट द्वारा प्रतिदिन किए जाने वाले कार्य की माप, समूहवार मस्टररोल प्रपत्र भरने, और समयबद्ध तरीके से श्रमिकों के भुगतान की प्रक्रिया को सरल भाषा में समझाना है।
मुख्य बिंदु और विशेषताएँ
श्रमजीवियों के 10 अधिकार: राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून, 2005 के तहत श्रमिकों को 100 दिन के रोजगार की गारंटी, जॉब कार्ड, 15 दिनों के भीतर काम या बेरोजगारी भत्ता, न्यूनतम दैनिक मजदूरी, और कार्यस्थल पर सुविधाएँ पाने का अधिकार।
मेट के कर्तव्य एवं दायित्व: कार्यस्थल पर श्रमिकों को काम का आवंटन, प्रतिदिन माप करना, मस्टर रोल भरना, श्रमिकों को दैनिक मजदूरी की जानकारी देना और कार्यस्थल पर छाया, पानी, प्राथमिक उपचार जैसी सुविधाएँ सुनिश्चित करना।
ई-मस्टर रोल और ट्रैकिंग: पारदर्शी कार्यप्रणाली के लिए ई-मस्टर रोल का उपयोग, मस्टर रोल के विभिन्न भागों (क, ख, ग, घ) को भरने की विधि और समयानुसार ट्रैकिंग।
दैनिक मजदूरी गणना और श्रमिक कार्ड: श्रमिकों को उनके द्वारा प्रतिदिन अर्जित मजदूरी की जानकारी देने के लिए श्रमिक कार्ड (दैनिक मजदूरी गणना प्रपत्र) का उपयोग।
विभिन्न विभागीय आदेश: मजदूरी में अंतर, विलंब से भुगतान पर मुआवजे के प्रावधान और अधिनियम के उल्लंघन पर शास्ति से संबंधित आदेशों का संकलन।
सरपंच हेतु महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी योजना निर्देशिका वर्ष 2010
सरपंच हेतु महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी योजना निर्देशिका - वर्ष 2010
यह निर्देशिका ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, शासन सचिवालय, जयपुर द्वारा प्रकाशित की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य ग्राम पंचायतों के सरपंचों को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी अधिनियम (मनरेगा), 2005 के सफल क्रियान्वयन, प्रशासनिक पारदर्शिता, सामाजिक अंकेक्षण और वित्तीय अनुशासन के संबंध में मार्गदर्शन प्रदान करना है।
मुख्य बिंदु और प्रावधान
रोजगार का अधिकार: प्रत्येक पंजीकृत ग्रामीण परिवार को वित्तीय वर्ष में 100 दिन का अकुशल शारीरिक श्रम का गारण्टीशुदा रोजगार प्रदान किया जाता है। आवेदन के 15 दिवस के भीतर कार्य देना अनिवार्य है, अन्यथा बेरोजगारी भत्ता देय होता है।
पारदर्शिता और उत्तरदायित्व: सभी सूचनाओं को स्वैच्छिक रूप से जारी करना (Proactive Disclosure), कार्यस्थल बोर्ड लगवाना, दीवारों पर लेखन करना, और समयबद्ध मजदूरी भुगतान बैंक या पोस्ट ऑफिस के खातों के माध्यम से सुनिश्चित करना।
हरित राजस्थान योजना: राज्य में हरियाली बढ़ाने और सूखे के बचाव हेतु सघन वृक्षारोपण एवं हरित सड़क कार्यक्रम का संचालन।
भारत निर्माण राजीव गांधी सेवा केन्द्र: प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर 10 लाख रुपये की लागत से सेवा केन्द्र का निर्माण, जिसमें सूचना, शिक्षा और संचार की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।
रिकॉर्ड संधारण: रोकड़ बही, माप पुस्तिका (MB), स्टॉक रजिस्टर, और परिसंपत्ति एवं संचयी व्यय रजिस्टर का सही तरीके से संधारण।
महात्मा गांधी रोजगार गारण्टी स्थायी समिति: योजना के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु ग्राम पंचायत स्तर पर 5 सदस्यीय स्थायी समिति का गठन (अध्यक्ष: सरपंच, सदस्य: वार्ड पंच, कनिष्ठ अभियंता/तकनीकी सहायक, ग्राम सेवक एवं पदेन सचिव, ग्राम रोजगार सहायक)।
महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 (मनरेगा) - अवलोकन
महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 (मनरेगा)
यह दस्तावेज़ महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 (2005 का अधिनियम संख्यांक-42) का आधिकारिक विवरण है, जिसे विभिन्न संशोधनों के साथ प्रकाशित किया गया है। यह ग्रामीण क्षेत्रों में अकुशल शारीरिक कार्य करने के इच्छुक वयस्क सदस्यों वाले परिवारों को वित्तीय वर्ष में कम से कम सौ दिनों की गारंटीकृत मजदूरी रोजगार प्रदान करने का उपबंध करता है।
मुख्य बिंदु एवं विशेषताएं:
रोजगार की गारंटी: प्रत्येक ग्रामीण गृहस्थी जिसके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक कार्य करने के लिए स्वेच्छा से आगे आते हैं, उन्हें प्रति वित्तीय वर्ष कम से कम सौ दिनों का गारंटीकृत रोजगार प्रदान किया जाएगा।
आवेदन और जॉब कार्ड: ग्राम पंचायत स्तर पर पंजीकरण और जॉब कार्ड जारी करने की प्रक्रिया का प्रावधान है, जिसमें गृहस्थी के पंजीकृत वयस्क सदस्यों का विवरण और कार्य की मांग दर्ज की जाती है।
बेकारी भत्ता: यदि आवेदन प्राप्ति के 15 दिनों के भीतर या अग्रिम आवेदन की दशा में नियत तिथि से रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो आवेदक बेरोजगारी भत्ता पाने का हकदार होगा।
मजदूरी दर: न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, 1948 के अधीन निर्धारित दरों के अनुसार मजदूरी देय होगी, जो किसी भी स्थिति में साठ रुपए प्रतिदिन से कम नहीं होगी।
सामाजिक संपरीक्षा (Social Audit): पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए ग्राम सभा द्वारा अधिनियम के अधीन सभी परियोजनाओं की नियमित सामाजिक संपरीक्षा की जाएगी।
कार्यान्वयन प्राधिकारी: केंद्रीय परिषद, राज्य रोजगार गारंटी परिषद, जिला कार्यक्रम समन्वयक, कार्यक्रम अधिकारी, और ग्राम पंचायत स्तर पर विभिन्न प्रशासनिक उत्तरदायित्व तय किए गए हैं।
मनरेगा योजनान्तर्गत व्यक्तिगत लाभ के कार्य निजी कृषि भूमि में टांका निर्माण मय पक्का एवं कच्चा पायथन कार्य की अनुमति के संबंध में
राजस्थान सरकार - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग
पत्रांक: एफ 55(1)ग्रावि/नरेग/भारत सरकार/एनएलएम/2023-24/05104
विषय: महात्मा गांधी नरेग योजनान्तर्गत व्यक्तिगत लाभ के कार्य निजी कृषि भूमि में टांका निर्माण मय पक्का एवं कच्चा पायथन कार्य का अनुमत करने के सम्बन्ध में।
ग्रामीण विकास विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा जारी इस पत्र के अनुसार, भारत सरकार के पत्र के क्रम में महात्मा गांधी नरेग योजनान्तर्गत टांका निर्माण कार्यों का निष्पादन "Farm Pond for Individuals" की अनुज्ञेय श्रेणी के अन्तर्गत किये जाने की अनुमति प्रदान की गई है।
मुख्य बिंदु:
महात्मा गांधी नरेगा अधिनियम के प्रावधानों, दिशा-निर्देशों एवं निर्धारित उचित प्रक्रियाओं की सख्ती से पालना की जानी है।
टांका निर्माण कार्य की योजना, कार्यान्वयन एवं निगरानी प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए।
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जिला उत्थान योजना - दिशा निर्देश 2025
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जिला उत्थान योजना: दिशा निर्देश 2025
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (गुण एवं नियंत्रण) द्वारा डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जिला उत्थान योजना - दिशा निर्देश 2025 जारी किए गए हैं। यह योजना राज्य सरकार की बजट घोषणा 2024-25 के बिन्दु संख्या 20 के अंतर्गत प्रारंभ की जा रही है जिसका मुख्य उद्देश्य जिलों के आर्थिक विकास और समावेशी सामाजिक विकास के दोहरे लक्ष्य को प्राप्त करना है।
योजना की मुख्य विशेषताएँ और प्रावधान:
नोडल विभाग: ग्रामीण विकास विभाग इस योजना का नोडल विभाग रहेगा जो अन्य विभागों से समन्वय करते हुए कार्यों की स्वीकृति प्रदान करेगा।
योजना क्षेत्र: यह योजना राज्य के सभी जिलों में ग्रामीण एवं शहरी दोनों क्षेत्रों में लागू की जाएगी।
वित्तीय प्रावधान: इस योजना का कुल बजट प्रावधान 500 करोड़ रुपये है, जो पूरी तरह राज्य वित्त पोषित योजना है।
मिशन टीम: जिलों में अति-स्थानीय नियोजन (hyper-local planning) और सेवा वितरण में सहयोग के लिए विशेष विशेषज्ञों की 'मिशन टीम' का गठन किया जाएगा।
शासन संरचना: योजना के सुचारू संचालन के लिए राज्य स्तर पर अतिरिक्त मुख्य सचिव/प्रमुख शासन सचिव (ग्रामीण विकास) की अध्यक्षता में 'राज्य स्तरीय समिति' तथा जिला स्तर पर जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में 'जिला स्तरीय समिति' का गठन किया गया है।
अनुमत कार्य और क्षेत्र:
योजना के अंतर्गत कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र, पर्यटन क्षेत्र, एमएसएमई क्षेत्र, खेल क्षेत्र और अन्य ग्रामीण व शहरी बुनियादी ढाँचे से जुड़े कार्य किए जा सकेंगे। इसमें लोक सहभागिता (जनसहयोग) को भी प्राथमिकता दी गई है।
उदयपुर जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्सีमांकन और नवसृजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/848 (दिनांक नवंबर 21, 2025) के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए उदयपुर जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्सีमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिनीम और प्रावधान: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98, धारा-9, 10 एवं 101 के अंतर्गत जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार प्रस्तावों और आपत्तियों पर सुनवाई के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से यह पुनर्गठन किया गया है।
अधिकारिता: अनुसूची के स्तंभ 4 में यथानामित पंचायत समितियां स्तंभ 5 में वर्णित स्थानीय क्षेत्र व ग्राम पंचायतों पर अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात्, उस जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो अनुसूची के स्तंभ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी, जिससे नई पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
यह अधिसूचना राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी की गई है।
सिरोही जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन और पुनर्सिमांकन - अधिसूचना
सिरोही जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए सिरोही जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्सिमांकन और नवसर्जन किया गया है। यह अधिसूचना 21 नवंबर 2025 को जारी की गई है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम का संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98, धारा-9, 10 एवं 101 के अंतर्गत।
कार्यान्वयन: जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार प्रस्तावों एवं आपत्तियों पर सुनवाई के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से सिरोही जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन किया गया है।
प्रभाव: अनुसूची में वर्णित नई पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात् पुरानी पंचायत समितियां कार्य करना बंद कर देंगी और नई पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
विस्तृत जानकारी के लिए राजस्थान राजपत्र, दिनांक 24 नवंबर 2025 का अवलोकन करें।
सीकर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनर्सिमांकन एवं नवसृजन - राजस्थान राजपत्र अधिसूचना
सीकर जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन और पुनर्सिमांकन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना (संख्या एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/845-, दिनांक 21 नवम्बर 2025) के अनुसार सीकर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनर्सिमांकन एवं नवसृजन किया गया है।
मुख्य विवरण
जारीकर्ता विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
अधिसूचना दिनांक: 21 नवम्बर 2025 (राजस्थान राजपत्र असाधारण में प्रकाशित - 24 नवम्बर 2025)
कानूनी संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा-98 की शक्तियों का प्रयोग करते हुए तथा धारा-9, 10 एवं 101 के अंतर्गत
जिला कलेक्टरों द्वारा निर्धारित प्रक्रिया, आपत्तियों के आमंत्रण एवं सुनवाई के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से सीकर जिले की विभिन्न पंचायत समितियों और उनमें सम्मिलित ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन व नवसृजन किया गया है।
महत्वपूर्ण बिंदु
शेड्यूल के अनुसार पुनर्भाषित पंचायत समितियां संबंधित क्षेत्र में अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
चुनावी प्रक्रिया और निर्धारित प्रावधानों के तहत पुरानी पंचायतों का कार्यकाल और नई पंचायतों का कार्यकाल तय किया जाएगा।
संबधित पंचायत समितियों और ग्राम पंचायतों की पूरी सूची राजपत्र अधिसूचना में संलग्न है।
राजसमंद जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन और नवसृजन - अधिसूचना 2025
राजसमंद जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजसमंद जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन के संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र (असाधारण) दिनांक 24 नवंबर 2025 को प्रकाशित की गई है।
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना क्रमांक: एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/842 (दिनांक 21 नवंबर 2025)
अधिनियम संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए, तथा धारा-9, 10 एवं 101 के अंतर्गत प्राप्त शक्तियों के तहत यह पुनर्गठन किया गया है।
प्रभावित क्षेत्र: राजसमंद जिले की पंचायत समितियां (जैसे आमेट, भीम, कुंभलगढ़, रेलमगरा और राजसमंद) और उनमें सम्मिलित ग्राम पंचायतें।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में वर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात, उक्त जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो अनुसूची के स्तंभ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
अधिक जानकारी के लिए कृपया ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की आधिकारिक अधिसूचना देखें।
पाली जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन से संबंधित अधिसूचना
पाली जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए पाली जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन किया गया है। यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र (असाधारण) दिनांक 24 नवंबर 2025 में प्रकाशित की गई है।
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना संख्या एवं दिनांक: संख्या एफ.15(39)पंव/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/839, दिनांक नवंबर 21, 2025।
संबंधित अधिनियम: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-9, 10 एवं 101 तथा धारा-98।
प्रभावित क्षेत्र: पाली जिले की पंचायत समितियां (जैसे बगड़ी और मारवाड़ जंक्शन)।
कार्यान्वयन: जिला कलेक्टरों द्वारा प्रस्ताव तैयार करने, आपत्तियां आमंत्रित करने तथा राज्य सरकार के अनुमोदन के पश्चात यह पुनर्गठन किया गया है।
अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में यथावर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात उस जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो अनुसूची के स्तंभ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में वर्णित पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
कोटा जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन एवं नवसर्जन - राजस्थान राजपत्र अधिसूचना
कोटा जिले में पंचायत समिति पुनर्गठन और नवसर्जन की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए कोटा जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसर्जन के संबंध में अधिसूचना जारी की गई है।
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना संख्या एवं दिनांक: संख्या एफ.15(39)पंश/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/836, दिनांक नवम्बर 21, 2025 (राजस्थान राजपत्र असाधारण, 24 नवम्बर 2025)।
कार्रवाई का विवरण: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-9, 10 एवं 101 में वर्णित शक्तियों के तहत जिला कलेक्टर द्वारा प्रस्ताव तैयार कर, सार्वजनिक अवलोकन एवं आपत्तियां आमंत्रित करने के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से कोटा जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन किया गया है।
शामिल पंचायत समितियां: सूची के अनुसार खैराबाद एवं चेचट पंचायत समितियों और उनसे संबंधित ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन और पुनर्सीमांकन किया गया है।
कार्यकाल की स्थिति: सूची के स्तंभ संख्या 4 में वर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात उस जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो स्तंभ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से ही विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पंचायत समितियों का कार्यकाल आरंभ हो सके।
यह अधिसूचना राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी की गई है।
करौली जिले में पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन की अधिसूचना
करौली जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए करौली जिले में पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन के संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र में 24 नवंबर 2025 को प्रकाशित हुई है।
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना क्रमांक: एफ.15(39)पंव/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/834 (दिनांक 21 नवंबर 2025)।
अधिकार क्षेत्र: जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार प्रस्तावों एवं आपत्तियों पर सुनवाई के उपरांत राज्य सरकार के अनुमोदन से करौली जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन किया गया है।
नया कार्यकाल: पुनर्गठित/पुनर्रसीमांकित/नवसृजित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात, पुरानी पंचायत समितियां कार्य करना बंद कर देंगी और नई समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है।
झुंझुनूं जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन और पुनर्रचना - राजस्थान राजपत्र अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/832, दिनांक नवम्बर 21, 2025 के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए झुंझुनूं जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमार्कीकरण और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र असाधारण में नवम्बर 24, 2025 को प्रकाशित की गई है।
झुंझुनूं जिले के अंतर्गत आने वाली विभिन्न पंचायत समितियों और उनमें सम्मिलित ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन/पुनर्रसीमार्कीकरण किया गया है।
अधिसूचना के अनुसार, चुनी गई नई/पुनर्गठित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात, पुरानी पंचायत समितियां अस्तित्व में नहीं रहेंगी और उनका कार्य समाप्त हो जाएगा, जिसके बाद नई पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से शासन सचिव डॉ. जोगा राम द्वारा जारी किया गया है।
जालोर जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्सীमांकन और नवसृजन - अधिसूचना दिनांक 21 नवंबर 2025
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा राजस्थान राजपत्र में जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/831 दिनांक 21 नवंबर 2025 के अंतर्गत जालोर जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्सীमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम का संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 की प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए धारा-9, 10 एवं 101 में वर्णित शक्तियों के तहत यह कार्रवाई की गई है।
जिला कलेक्टर की भूमिका: जिला कलेक्टरों द्वारा प्रस्ताव तैयार करने, सार्वजनिक अवलोकन के लिए प्रसारित करने, एक माह की अवधि में आपत्तियों पर सुनवाई करने तथा राज्य सरकार से अनुमोदन प्राप्त करने के पश्चात यह पुनर्गठन लागू किया गया है।
प्रभाव: अनुसूची में वर्णित पंचायत समितियों का पुनर्गठन/पुनर्सীमांकन/नवसृजन किया गया है तथा संबंधित पंचायत समितियों का कार्यकाल अनुसूची के अनुसार निर्धारित होगा।
यह अधिसूचना राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी की गई है।
जैसलमेर जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन - अधिसूचना 2025
जैसलमेर जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन एवं नवसृजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/830 दिनांक नवंबर 21, 2025 के अनुसार, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए जैसलमेर जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-9, 10, 101 और 98 के अंतर्गत यह कार्रवाई की गई है।
जिला कलेक्टर की भूमिका: जिला कलेक्टरों द्वारा प्रस्ताव तैयार कर, आपत्तियां आमंत्रित करने तथा सुनवाई के पश्चात राज्य सरकार से अनुमोदन प्राप्त किया गया है।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पंचायत समितियों के चुनावों के पश्चात उस जिले की विद्यमान पंचायत समितियां (जो स्तंभ 2 में वर्णित हैं) उस तारीख से अस्तित्व में नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी, जिससे नई पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
जारीकर्ता: राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगाराम, शासन सचिव, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
हनुमानगढ़ जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन एवं नवसृजन अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए हनुमानगढ़ जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन एवं नवसृजन के संबंध में अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र (असाधारण) दिनांक 24 नवंबर 2025 में प्रकाशित की गई है।
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना क्रमांक एवं दिनांक: संख्या एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/828-, दिनांक 21 नवंबर 2025।
जारीकर्ता: डॉ. जोगा राम, शासन सचिव, राज्यपाल की आज्ञा से।
कार्यान्वयन: जिला कलेक्टरों द्वारा प्रस्ताव तैयार करने, आपत्तियां आमंत्रित करने और सुनवाई की प्रक्रिया पूरी करने तथा राज्य सरकार के अनुमोदन के पश्चात हनुमानगढ़ जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
प्रभाव: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पुनर्गठित/नवसृजित पंचायत समितियों का गठन किया गया है तथा संबंधित ग्राम पंचायतों का निर्धारण किया गया है।
श्रीगंगानगर जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन
श्रीगंगानगर जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए श्रीगंगानगर जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना क्रमांक: एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/827-, दिनांक: जयपुर, नवम्बर 21, 2025।
प्रभावित क्षेत्र: श्रीगंगानगर जिले के अंतर्गत आने वाली पंचायत समितियां जैसे सादुलशहर, अनूपगढ़, घड़साना, सूरतगढ़ और नई सृजित पंचायत समितियां।
कार्यकाल संबंधी निर्देश: पुनर्गठित/नवसृजित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात् उस जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो अनुसूची में निर्दिष्ट हैं, उस तारीख से ही विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
फलोदी जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन एवं नवसृजन - अधिसूचना 2025
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज (पंचायती राज विभाग) द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए फलोदी जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन एवं नवसृजन किया गया है। यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र में दिनांक 24 नवंबर 2025 को प्रकाशित की गई है (अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंव/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/840, दिनांक 21 नवंबर 2025)।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम का संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा 9, 10, 101 एवं 98 के प्रावधानों के अंतर्गत यह कार्रवाई की गई है।
पंचायत समितियों का पुनर्गठन: फलोदी जिले की विभिन्न पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन एवं नवसृजन किया गया है, जिसके तहत उनकी अनुसूचियों और शामिल ग्राम पंचायतों का विवरण निर्धारित किया गया है।
कार्यकाल और प्रभाव: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात, जिले की विद्यमान वे पंचायत जो स्तंभ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और उनका कार्य करना बंद हो जाएगा, जिससे नई पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
अधिक जानकारी और विस्तृत अनुसूची के लिए कृपया आधिकारिक राजस्थान राजपत्र, दिनांक 24 नवंबर 2025 का अवलोकन करें।
डूंगरपुर जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन एवं नवसृजन - राजस्थान राजपत्र अधिसूचना
डूंगरपुर जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान राजपत्र (असाधारण) में दिनांक 24 नवम्बर, 2025 को एक महत्वपूर्ण अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंव/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/826 जारी की गई है।
यह अधिसूचना राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए, राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी की गई है। इसके तहत डूंगरपुर जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुर्नसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना क्रमांक: एफ.15(39)पंव/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/826 (दिनांक: नवम्बर 21, 2025)
संबंधित जिला: डूंगरपुर
प्रमुख प्रावधान: जिला कलेक्टर द्वारा तैयार प्रस्तावों एवं आपत्तियों पर विचार करने के पश्चात् राज्य सरकार के अनुमोदन से डूंगरपुर जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन किया गया है।
चुनाव पश्चात प्रभाव: अनुसूची के स्तम्भ संख्या 4 में वर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात्, उक्त जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो स्तम्भ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से ही विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बन्द कर देंगी, जिससे नई पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारम्भ हो सके।
विस्तृत जानकारी के लिए राजस्थान राजपत्र के भाग 6 (ग) का अवलोकन करें।
धौलपुर जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन और नवसृजन अधिसूचना
धौलपुर जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा धौलपुर जिले में पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रमांकित और नवसृजन के संबंध में अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र (असाधारण) दिनांक 24 नवम्बर 2025 में प्रकाशित की गई है।
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना संख्या: एफ.15(39)पंवरे/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/824 (दिनांक 21 नवम्बर 2025)
राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-9, 10 एवं 101 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग किया गया है।
धौलपुर जिले की पंचायत समितियों (जैसे बाड़ी, बसेड़ी, सरमथुरा) का पुनर्गठन/नवसृजन किया गया है तथा इसमें शामिल ग्राम पंचायतों की सूची निर्धारित की गई है।
अधिसूचना के अनुसार, संबंधित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात जिले की विद्यमान पंचायत समितियां कार्य करना बंद कर देंगी और नई पंचायत समितियों का कार्यकाल आरंभ होगा।
डीग जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन और नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
डीग जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा डीग जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन से संबंधित महत्वपूर्ण अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र (असाधारण) दिनांक 24 नवंबर, 2025 में प्रकाशित हुई है।
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना संख्या एवं दिनांक: संख्या एफ.15(39)पंव/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/823, दिनांक 21 नवंबर, 2025।
विधिक प्रावधान: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए डीग जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन किया गया है।
पुनर्गठित पंचायत समितियां: डीग जिले के अंतर्गत डीग, कुम्हेर, ब्रज नगर और सीकरि (सीकरी) पंचायत समितियों का पुनर्गठन एवं नवसृजन किया गया है।
कार्यकाल: अनुसूची में वर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात, उस जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो नई अनुसूची में शामिल नहीं हैं, वे कार्य करना बंद कर देंगी और नई पंचायत समितियों का कार्यकाल आरंभ होगा।
अधिक जानकारी के लिए कृपया मूल राजस्थान राजपत्र अधिसूचना देखें।
दौसा जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन और पुनर्सिमांकन - अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज (पंचायती राज विभाग) द्वारा राजस्थान राजपत्र (असाधारण) में दौसा जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्सिमांकन और नवसर्जन से संबंधित महत्वपूर्ण अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए जारी की गई है।
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना क्रमांक: संख्या एफ.15 (39) पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/822 दिनांक नवंबर 21, 2025 (राजस्थान राजपत्र दिनांक 24 नवंबर, 2025)।
अधिकार क्षेत्र: जिला कलेक्टर द्वारा तैयार किए गए प्रस्तावों, आपत्तियों पर सुनवाई और राज्य सरकार के अनुमोदन के पश्चात दौसा जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन किया गया है।
नयी व्यवस्था: अनुसूची के स्तूप 4 में वर्णित पुनर्गठित/नवसृजित पंचायत समितियां स्तूप 5 में दर्शित ग्राम पंचायतों पर अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तूप 4 में वर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात उस जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो स्तूप 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी, जिससे नई पंचायत समितियों का कार्यकाल आरंभ हो सके।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है।
चूरू जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन - अधिसूचना
चूरू जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन और पुनर्रसीमांकन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान राजपत्र (असाधारण) में दिनांक नवंबर 24, 2025 को अधिसूचना संख्या एफ.15 (39)पंश/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/821:- जारी की गई है।
यह अधिसूचना राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए जारी की गई है, जिसके अंतर्गत चूरू जिले की विभिन्न पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना क्रमांक: एफ.15 (39)पंश/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/821:-
दिनांक: नवंबर 21, 2025
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
शामिल क्षेत्र: चूरू जिले के अंतर्गत आने वाली विभिन्न पंचायत समितियां और उनके क्षेत्राधिकार में आने वाले ग्राम पंचायत क्षेत्र।
अनुसार, अनुसूची मेंवर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात उक्त जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो अनुसूची के स्तम्भ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से ही विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे अनुसूची के स्तम्भ 4 में वर्णित पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
राज्यपाल की आज्ञा से, डॉ. जोगा राम, शासन सचिव।
चित्तौड़गढ़ जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन - अधिसूचना
चित्तौड़गढ़ जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा 98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए, चित्तौड़गढ़ जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन से संबंधित अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंचा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/820 दिनांक नवंबर 21, 2025 जारी की गई है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम व प्रावधान: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा 98 के अंतर्गत शक्तियों का प्रयोग करते हुए तथा जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार प्रस्तावों एवं आपत्तियों पर विचार करने के पश्चात यह पुनर्गठन किया गया है।
प्रभावित पंचायत समितियाँ: इस अधिसूचना के तहत चित्तौड़गढ़ जिले की प्रमुख पंचायत समितियों (जैसे बेगूूँ, गंगरार, चित्तौड़गढ़, कपासन, और भदेसर आदि) के अंतर्गत शामिल ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन और पुनर्रसीमांकन की सूची जारी की गई है।
कार्यकाल और चुनाव: अनुसूची में वर्णित नई पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात उस जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो अनुसूची में पूर्व में थीं, वे उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
विस्तृत विवरण और ग्राम पंचायतों की सूची के लिए मूल राजपत्र अधिसूचना देखें।
ब्यावर जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन और पुनर्रचना की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए ब्यावर जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रचना और नवसर्जन से संबंधित अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना दिनांक 21 नवंबर, 2025 (संख्या एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/815-) के तहत राजस्थान राजपत्र में प्रकाशित हुई है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम और संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-9 और 10 के प्रावधानों तथा विभागीय अधिसूचनाओं के अंतर्गत यह कार्रवाई की गई है।
पुनर्गठन का क्षेत्र: ब्यावर जिले की निम्नलिखित पंचायत समितियों (जैतारण, रायपुर, रास, जवाजा और नरबदखेड़ा) का पुनर्गठन/पुनर्रचना/नवसर्जन किया गया है।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात्, उस जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो स्तंभ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी, जिससे स्तंभ 4 में वर्णित पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
बीकानेर जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन
बीकानेर जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन और नवसृजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए बीकानेर जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन के संबंध में अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना दिनांक 21 नवंबर 2025 को जारी की गई है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम व संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा-98, 9, 10 एवं 101 के अंतर्गत जिला कलेक्टर द्वारा तैयार प्रस्तावों और आपत्तियों पर सुनवाई के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से यह पुनर्गठन किया गया है।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में वर्णित पुनर्गठित/नवसृजित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात् उस जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो स्तंभ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी। इसके पश्चात नई पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
भरतपुर जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन और पुनर्रसीमांकरण अधिसूचना
अधिसूचना विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए भरतपुर जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकरण और नवसृजन से संबंधित अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र (अतिरिक्त) में 24 नवंबर 2025 को प्रकाशित हुई है, जिसके आदेश संख्या एफ.15(39)पंव/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/816 दिनांक 21 नवंबर 2025 हैं।
मुख्य बिंदु
अधिनियम का संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98, 9, 10 एवं 101 के अंतर्गत जिला कलेक्टर के माध्यम से प्रस्ताव तैयार कर आपत्तियां आमंत्रित करने के पश्चात यह कार्रवाई की गई है।
पंचायत समितियों का पुनर्गठन: भरतपुर जिले की पंचायत समितियों (जैसे रूपवास, उच्चैन और सेवर) का पुनर्गठन/पुनर्रसीमांकरण किया गया है।
कार्यकाल और अधिकारिता: अनुसूची में वर्णित नई पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात उस जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो अनुसूची में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी तथा नई पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
बालोतरा जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पांरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/811, दिनांक नवम्बर 21, 2025 के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए बालोतरा जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
संबद्ध अधिनियम: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-9, 10, 98 एवं 101।
जिला कलेक्टर की भूमिका: जिला कलेक्टरों द्वारा प्रस्ताव तैयार कर सार्वजनिक अवलोकन हेतु प्रसारित करने, एक माह की अवधि में आपत्तियां आमंत्रित करने तथा उन पर सुनवाई करने के पश्चात राज्य सरकार से अनुमोदन प्राप्त किया गया है।
कार्यकाल से संबंधित प्रावधान: अनुसूची के स्तम्भ संख्या 4 में यथावर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात, उस जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो स्तम्भ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से ही विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ हो सके।
डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा राज्यपाल की आज्ञा से यह अधिसूचना जारी की गई है।
बांसवाड़ा जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन और पुनसीमांकन
बांसवाड़ा जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन एवं नवसृजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पांरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/812 (दिनांक नवंबर 21, 2025) के अंतर्गत बांसवाड़ा जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है। यह कार्रवाई राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 द्वारा प्रदत्त शक्तियों तथा धारा-9, 10 एवं 101 के प्रावधानों के तहत जिला कलेक्टर द्वारा तैयार प्रस्तावों और राज्य सरकार के अनुमोदन के पश्चात की गई है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम के तहत कार्रवाई: संबंधित जिला कलेक्टर को ग्राम पंचायत एवं पंचायत समिति के पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन हेतु प्रस्ताव तैयार करने, सार्वजनिक अवलोकन के लिए प्रसारित करने, आपत्तियां आमंत्रित करने तथा सुनवाई करने हेतु अधिकृत किया गया था।
अधिकारिता: अनुसूची के स्तम्भ 4 में वर्णित पुनर्गठित/नवसृजित पंचायत समितियां स्तम्भ 5 में वर्णित स्थानीय क्षेत्रों और ग्राम पंचायतों पर अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
विद्यमान समितियों की समाप्ति: अनुसूची के स्तम्भ 4 में वर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात, उस जिले की विद्यमान पंचायत समितियां (जो स्तम्भ 2 में वर्णित हैं) उस तारीख से अस्तित्व में नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी, जिससे नई पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
बूंदी जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन और नवसृजन - राजस्थान राजपत्र अधिसूचना
बूंदी जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्सीमांकन और नवसृजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/819-, दिनांक नवंबर 21, 2025 के अनुसार, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए बूंदी जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्सीमांकन और नवসृजन किया गया है।
प्रमुख बिंदु
अधिनियम का संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98, 9, 10 एवं 101 के अंतर्गत।
कार्यान्वयन: जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार प्रस्तावों एवं आपत्तियों पर विचार करने और राज्य सरकार के अनुमोदन के पश्चात यह अधिसूचना जारी की गई है।
नया कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पुनर्गठित/नवसृजित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात्, स्तंभ 2 में वर्णित वर्तमान पंचायत समितियां उस तारीख से कार्य करना बंद कर देंगी और नई पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
पुनर्गठित पंचायत समितियां
हिंडोली
दबलान
नैनवा
केशोरायपाटन
लाखेरी
तालेड़ा
बूंदी
खटकड़
विस्तृत विवरण और ग्राम पंचायतों की सूची के लिए मूल राजपत्र अधिसूचना देखें।
बाड़मेर जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए बाड़मेर जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन से संबंधित अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना दिनांक 21 नवम्बर 2025 को जारी की गई है।
मुख्य बातें एवं विवरण
अधिनियम संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98, 9, 10 एवं 101 के अंतर्गत।
जिला: बाड़मेर
कार्यान्वयन प्रक्रिया: जिला कलेक्टरों द्वारा पूर्व में तैयार किए गए प्रस्तावों, आपत्तियों पर सुनवाई और आपत्तियों के आमंत्रण के उपरांत राज्य सरकार से अनुमोदन प्राप्त कर यह पुनर्गठन किया गया है।
निर्धारित व्यवस्था: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात्, स्तंभ 2 में उल्लेखित वर्तमान पंचायत समितियाँ इस तिथि से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी, जिससे नई पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित आधिकारिक राजपत्र एवं ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के निर्देशों का अवलोकन करें।
कोटपूतली-बहरोड़ जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन और नवसृजन - अधिसूचना 2025
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा राजस्थान राजपत्र में जारी अधिसूचना (संख्या एफ.15(39)पंश/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/837-, दिनांक नवंबर 21, 2025) के माध्यम से कोटपूतली-बहरोड़ जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्र्रीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम और अधिकार: यह कार्रवाई राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए तथा धारा-9, 10 एवं 101 के अंतर्गत राज्य सरकार द्वारा जिला कलेक्टर को प्रदत्त शक्तियों के तहत की गई है।
पुनर्गठित पंचायत समितियां: कोटपूतली-बहरोड़ जिले के अंतर्गत बहरोड़, नीमराना, विराटनगर और मैैध कुण्डला (नवसृजित) पंचायत समितियों का पुनर्गठन/नवसृजन किया गया है।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात्, उस जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो स्तंभ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी, जिससे नई पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित आधिकारिक राजपत्र अधिसूचना देखें।
सवाई माधोपुर जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन और पुनर्सिमांकन - अधिसूचना 2025
सवाई माधोपुर जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/844 (दिनांक नवंबर 21, 2025) के तहत राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा-9, 10 एवं 101 के प्रावधानों के अंतर्गत सवाई माधोपुर जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन/पुनर्सिमांकन/नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम का संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धाराओं के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए।
संबंधित जिला: सवाई माधोपुर जिला।
अधिसूचना तिथि: नवंबर 21, 2025।
जारीकर्ता: राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव।
अधिसूचना के अनुसार, अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में वर्णित पुनर्गठित/नवसृजित पंचायत समितियों का गठन किया गया है तथा अनुसूची के स्तंभ संख्या 2 में वर्णित वर्तमान पंचायत समितियां नियमानुसार उस तिथि से विद्यमान नहीं रहेंगी जैसा कि अनुसूची और अधिनियम के प्रावधानों में निर्धारित किया गया है।
डीडवाना-कुचामन जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन और नवसृजन - राजस्थान राजपत्र अधिसूचना
डीडवाना-कुचामन जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/825, दिनांक नवम्बर 21, 2025 के अंतर्गत डीडवाना-कुचामन जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्सिर्माकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह आदेश जारी किया गया है।
क्षेत्र और समितियाँ: डीडवाना-कुचामन जिले के अंतर्गत आने वाली पंचायत समितियों और उनमें सम्मिलित ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन किया गया है जैसा कि राजपत्र की अनुसूची में वर्णित है।
प्रभावी तिथि: अनुसूची में वर्णित पंचायत समितियों के चुनावों के पश्चात उस जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो अनुसूची के स्तंभ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगे तथा नई पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
खैरथल-तिजारा जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्सिर्मांकन एवं नवसृजन से संबंधित अधिसूचना
खैरथल-तिजारा जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन और नवसृजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए खैरथल-तिजारा जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्सिर्मांकन एवं नवसृजन से संबंधित अधिसूचना संख्या एफ.15 (36) पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/835 दिनांक नवंबर 21, 2025 जारी की गई है। यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र (असाधारण) में नवंबर 24, 2025 को प्रकाशित हुई है।
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना क्रमांक और दिनांक: संख्या एफ.15 (36) पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/835, दिनांक नवंबर 21, 2025।
संबंधित जिला: खैरथल-तिजारा जिला।
कानूनी प्रावधान: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 द्वारा प्रदत्त शक्तियां तथा धारा-9, 10 एवं 101 के अंतर्गत जिला कलेक्टर द्वारा तैयार प्रस्तावों और आपत्तियों पर विचार करने के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से यह पुनर्गठन किया गया है।
कार्यान्वयन: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात, उक्त जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो अनुसूची के स्तंभ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी। इसी के साथ स्तंभ 4 में वर्णित पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है।
भीलवाड़ा जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन - राजस्थान राजपत्र अधिसूचना
भीलवाड़ा जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन एवं पुनर्रसीमांकन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/817, दिनांक नवंबर 21, 2025 के अनुसार, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए भीलवाड़ा जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा 98, 9, 10 एवं 101।
संबंधित विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
जारीकर्ता: राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव।
प्रक्रिया: जिला कलेक्टरों द्वारा प्रस्ताव तैयार कर, आपत्तियां आमंत्रित करने तथा राज्य सरकार से अनुमोदन प्राप्त करने के पश्चात यह पुनर्गठन किया गया है।
प्रभाव: अनुसूची में वर्णित नई पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात उस जिले की विद्यमान पंचायत समितियां कार्य करना बंद कर देंगी और नई पंचायत समितियों का कार्यकाल आरंभ होगा।
बारां जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंव/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/813- (दिनांक नवम्बर 21, 2025) के अंतर्गत, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए और धारा-9, 10 एवं 101 के अंतर्गत राज्य सरकार द्वारा बारां जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु एवं विवरण
संबंधित जिला: बारां
अधिसूचना दिनांक: नवम्बर 21, 2025
शासन सचिव: डॉ. जोगा राम (राज्यपाल की आज्ञा से)
जिला कलेक्टर्स द्वारा पूर्व में निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्रस्ताव तैयार किए गए, आपत्तियां आमंत्रित की गईं और उन पर सुनवाई के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से यह अंतिम अधिसूचना जारी की गई है।
पुनर्गठन से संबंधित मुख्य निर्देश
बारां जिले की पुनर्गठित, पुनर्रसीमांकित और नवसृजित पंचायत समितियां अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित नाम से जानी जाएंगी।
स्थानीय क्षेत्र जो इस प्रकार पुनर्गठित किए गए हैं, वे अनुसूची के स्तंभ 5 में वर्णित ग्राम पंचायतों को समाहित करेंगे।
इन पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात, पूर्ववर्ती पंचायत समितियां इस तिथि से कार्य करना बंद कर देंगी और नई पंचायत समितियों का कार्यकाल आरंभ होगा।
टोंक जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन - अधिसूचना दिनांक 21-11-2025
राजस्थान सरकार ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा टोंक जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन के संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना दिनांक 21-11-2025 (क्रमांक: एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/847) को जारी की गई है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-9, 10 एवं 101 की प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्य सरकार द्वारा यह पुनर्गठन किया गया है।
टोंक जिला पंचायत समितियां: जिला कलेक्टर द्वारा तैयार किए गए प्रस्तावों एवं आपत्तियों पर विचार करने के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से टोंक जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन/पुनर्रसीमांकन/नवसृजन किया गया है।
कार्यकाल और प्रभाव: संबंधित पंचायत समितियों के चुनावों के पश्चात उस जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो सूची में वर्णित हैं, इस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और अनुसूची में वर्णित नई पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
दौसा जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन और नवसर्जन - अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा दौसा जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रोमन और नवसर्जन के संबंध में महत्वपूर्ण अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना आदेश क्रमांक एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/822 दिनांक 21-11-2025 के तहत जारी की गई है।
मुख्य बिंदु:
राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए, राज्य सरकार द्वारा दौसा जिले की विभिन्न पंचायत समितियों का पुनर्गठन/पुनर्रोन/नवसर्जन किया गया है।
जिला कलेक्टर द्वारा तैयार किए गए प्रस्तावों एवं आपत्तियों पर विचार करने तथा राज्य सरकार से अनुमोदन प्राप्त करने के पश्चात यह अंतिम आदेश लागू किया गया है।
अनुसूची में वर्णित पंचायत समितियां उस नाम से जानी जाएंगी और निर्धारित स्थानीय क्षेत्र व अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में वर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात, उक्त जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो अनुसूची के स्तंभ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में वर्णित पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
अलवर जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन/पुनर्सिमांकन/नवसृजन - अधिसूचना दिनांक 21-11-2025
अलवर जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन और नवसृजन अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक एफ.15(39)पंविलि/पंचायत समिति गठन/2025/810 दिनांक 21-11-2025 के अनुसार, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए अलवर जिले के अंतर्गत पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्सिमांकन एवं नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम व संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 के साथ धारा-9, 10 एवं 101 के प्रावधानों के अंतर्गत यह प्रशासनिक कार्रवाई की गई है।
जिला कलेक्टर के प्रस्ताव: जिला कलेक्टर्स द्वारा तैयार किए गए प्रस्तावों, सार्वजनिक अवलोकन और आपत्तियों पर सुनवाई के उपरांत प्राप्त संचिकाओं के परीक्षण के बाद राज्य सरकार द्वारा यह अनुमोदन प्रदान किया गया है।
नयी व्यवस्था: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पुनर्गठित/नवसृजित पंचायत समितियां उस नाम से जानी जाएंगी तथा स्तंभ 5 में उल्लेखित ग्राम पंचायतें उनके अधिकार क्षेत्र में आएंगी।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात, उक्त जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो अनुसूची के स्तंभ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
करौली जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन आदेश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/834, दिनांक 21-11-2025 के तहत, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 की शक्तियों का प्रयोग करते हुए करौली जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
संबद्ध विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
दिनांक: 21 नवम्बर 2025।
आदेश विवरण: जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार प्रस्तावों एवं आपत्तियों पर सुनवाई और राज्य सरकार के अनुमोदन के पश्चात करौली जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन किया गया है।
कार्यकाल संबंधित निर्देश: अनुसूची के स्तम्भ संख्या 4 में यथावर्णित पंचायत समितियों के चुनावों के पश्चात, उक्त जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो अनुसूची के स्तम्भ संख्या 2 में वर्णित हैं, इस तारीख से ही विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे अनुसूची के स्तम्भ 4 में वर्णित पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारम्भ होगा।
हनुमानगढ़ ज़िले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन - अधिसूचना दिनांक 21-11-2025
राजस्थान सरकार ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, राज्य सरकार द्वारा हनुमानगढ़ ज़िले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन किया गया है। यह आदेश दिनांक 21-11-2025 को जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना क्रमांक: एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/828
दिनांक: 21-11-2025
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार
विवरण: ज़िला कलेक्टर हनुमानगढ़ द्वारा तैयार किए गए प्रस्तावों एवं आपत्तियों पर विचार करने के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से हनुमानगढ़ ज़िले की विभिन्न पंचायत समितियों का पुनर्गठन/पुनर्रसीमांकन/नवसृजन किया गया है।
कार्यकाल संबंधी निर्देश: अनुसूची के स्तम्भ 4 में यथावर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात उक्त ज़िले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो अनुसूची के स्तम्भ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से ही विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे अनुसूची के स्तम्भ 4 में वर्णित पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारम्भ होगा।
राजस्थान सरकार: सीकर जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन एवं नवसृजन की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा सीकर जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन एवं नवसृजन से संबंधित आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई है।
अधिसूचना विवरण
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
क्रमांक: एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/845
दिनांक: 21-11-2025
जारीकर्ता: डॉ. जोगा राम, शासन सचिव (राज्यपल की आज्ञा से)
मुख्य बिंदु एवं प्रक्रिया
राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 की प्रदत्त शक्तियों तथा विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/02 दिनांक 10.01.2025 के अंतर्गत जिला कलेक्टर सीकर द्वारा प्रस्ताव तैयार कर सार्वजनिक अवलोकनार्थ एक माह की अवधि में आपत्तियां आमंत्रित की गईं और सुनवाई की गई।
राज्य सरकार के अनुमोदन के पश्चात सीकर जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन/पुनर्रसीमांकन/नवसृजन किया गया है।
अधिसूचना के अनुसार, सीकर जिले की पुनर्गठित/पुनर्रसीमांकित/नवसृजित पंचायत समितियां अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित नाम से जानी जाएंगी और संबंधित स्थानीय क्षेत्र में अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
अनुसूची के स्तंभ 4 में यथावर्णित पंचायत समितियों के चुनावों के पश्चात उक्त जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो अनुसूची के स्तंभ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारम्भ होगा।
ब्यावर जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन और नवसृजन - अधिसूचना दिनांक 21-11-2025
ब्यावर जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा ब्यावर जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्सीमांकन और नवसृजन से संबंधित अधिसूचना जारी कर दी गई है। यह अधिसूचना क्रमांक एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/ 815 दिनांक 21-11-2025 को जारी की गई है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम के प्रावधान: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह कार्रवाई की गई है।
जिला कलेक्टर की भूमिका: जिला कलेक्टरों द्वारा प्रस्ताव तैयार करने, सार्वजनिक अवलोकन के लिए प्रसारित करने, एक माह की अवधि में आपत्तियां आमंत्रित करने और उन पर सुनवाई करने की प्रक्रिया के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से यह पुनर्गठन किया गया है।
पंचायत समितियों का कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में यथावर्णित पंचायत समितियों के चुनावों के पश्चात उस जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो अनुसूची के स्तंभ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से ही विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी।
विस्तृत विवरण और ग्राम पंचायतों की सूची के लिए मूल अधिसूचना देखें।
जयपुर जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन अधिसूचना
अधिसूचना विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जयपुर जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन के संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना आदेश क्रमांक एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/829, दिनांक 21-11-2025 के तहत जारी की गई है।
मुख्य बिंदु
अधिनियम के प्रावधान: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-9, 10 एवं 101 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्य सरकार द्वारा यह पुनर्गठन और पुनर्रसीमांकन किया गया है।
जिला कलेक्टर की कार्रवाई: संबंधित जिला कलेक्टर द्वारा प्रस्ताव तैयार कर सार्वजनिक अवलोकनार्थ एक माह की अवधि में आपत्तियां आमंत्रित करने तथा सुनवाई करने की निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के पश्चात राज्य सरकार से अनुमोदन प्राप्त किया गया है।
नया कार्यभार और नाम: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पुनर्गठित एवं नवसृजित पंचायत समितियां उसी नाम से जानी जाएंगी और निर्धारित स्थानीय क्षेत्र पर अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
चुनाव और कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात, उक्त जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो अनुसूची के स्तंभ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और उनका कार्यभार समाप्त माना जाएगा, जिससे नई पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
डीडवाना-कुचामन जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन एवं नवसृजन अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंश/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/825 दिनांक 21-11-2025 के माध्यम से डीडवाना-कुचामन जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन एवं नवसृजन के संबंध में आधिकारिक आदेश जारी किए गए हैं।
मुख्य विवरण
राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए, राज्य सरकार द्वारा डीडवाना-कुचामन जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन एवं नवसृजन किया गया है।
महत्वपूर्ण बिंदु
अधिनियम संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98, 9, 10 एवं 101 के अंतर्गत प्राप्त शक्तियां।
संबंधित जिला: डीडवाना-कुचामन।
कार्यकाल और चुनाव: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात उक्त जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो अनुसूची के स्तंभ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
चूरू जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन और नवसृजन - अधिसूचना 21-11-2025
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), जयपुर द्वारा दिनांक 21-11-2025 को चूरू जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रोमांकित और नवसृजन के संबंध में एक महत्वपूर्ण अधिसूचना जारी की गई है (क्रमांक: एफ.15(39)पंव्रा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/ 821)।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम का संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए तथा धारा-9, 10 एवं 101 में वर्णित शक्तियों के अंतर्गत यह पुनर्गठन किया गया है।
कार्यान्वयन: जिला कलेक्टर द्वारा तैयार किए गए प्रस्तावों और आपत्तियों पर सुनवाई के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से चूरू जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन/पुनर्रोमांकित/नवसृजन किया गया है।
नया कार्यकाल: संबंधित अनुसूचियों में वर्णित नई पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात, उस जिले की विद्यमान पंचायत समितियां इस तारीख से कार्य करना बंद कर देंगी और नई पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
जैसलमेर जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन और नवसृजन अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा जैसलमेर जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन के संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना दिनांक 21-11-2025 को जारी की गई है, जिसका क्रमांक एफ.15(39)पंवरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/830 है।
प्रमुख बिंदु
कानूनी प्रावधान: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-9, 10 एवं 101 में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह पुनर्गठन किया गया है।
कार्रवाई प्रक्रिया: जिला कलेक्टर द्वारा प्रस्ताव तैयार कर सार्वजनिक अवलोकन के लिए प्रसारित किए गए थे, एक माह की अवधि में आपत्तियां आमंत्रित की गईं और सुनवाई के पश्चात प्राप्त प्रस्तावों एवं अभिशंसाओं का परीक्षण कर राज्य सरकार से अनुमोदन कराया गया।
पंचायत समितियों का विवरण: अधिसूचना के तहत जैसलमेर जिले की विभिन्न पंचायत समितियों (जैसे जैसलमेर, सम, फतेहगढ़, मोहनगढ़, नाचना, सांकड़ा, रामदेवरा, भणियाना) का पुनर्गठन और नवसृजन किया गया है।
कार्यकाल और प्रभाव: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात उस जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो अनुसूची के स्तंभ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा यह आदेश जारी किया गया है।
राजसमंद जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन एवं नवसृजन आदेश
राजसमंद जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन और नवसृजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजसमंद जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन एवं नवसृजन के संबंध में अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना दिनांक 21-11-2025 को जारी की गई है, जिसका क्रमांक एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/842 है।
प्रमुख बिंदु
अधिनियम के तहत कार्रवाई: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए तथा धारा-9, 10 एवं 101 के प्रावधानों के अंतर्गत यह पुनर्गठन किया गया है।
जिला कलेक्टर की भूमिका: संबंधित जिले के जिला कलेक्टर द्वारा प्रस्ताव तैयार कर सार्वजनिक अवलोकन के लिए प्रसारित किए गए थे और एक माह की अवधि में आपत्तियां आमंत्रित कर सुनवाई की गई थी।
राज्य सरकार का अनुमोदन: जिला कलेक्टरों द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों एवं आपत्तियों की परीक्षण के पश्चात राज्य सरकार से अनुमोदन प्राप्त कर राजसमंद जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन/पुनर्रसीमांकन किया गया है।
प्रभावित पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के तहत राजसमंद जिले की प्रमुख पंचायत समितियों (जैसे आमेट, भीम, कुंभलगढ़, रेलमगरा, राजसमंद) के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों का पुनर्रसीमांकन और नई सूची तैयार की गई है।
कार्यकाल और प्रभाव: सूची के स्तंभ संख्या 4 में वर्णित पंचायत समितियों के चुनावों के पश्चात, उस जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो सूची के स्तंभ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
नागौर जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन एवं नवसृजन - अधिसूचना दिनांक 21.11.2025
राजस्थान सरकार ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा नागौर जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन एवं नवसृजन के संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना दिनांक 21-11-2025 (क्रमांक: एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/838) को जारी की गई है।
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना का आधार: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 की धारा-9, 10 एवं 101 में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए तथा जिला कलेक्टर नागौर द्वारा तैयार प्रस्तावों एवं आपत्तियों पर विचार के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से यह पुनर्गठन किया गया है।
पंचायत समितियों का पुनर्गठन: नागौर जिले की वर्तमान पंचायत समितियों और उनमें सम्मिलित ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन एवं नवसृजन किया गया है, जिसके तहत नागौर, श्रीबालाजी, रियांवड़ी, मेड़ता सिटी, मेड़ता रोड, भैरूंदा, जायल, डेह, मूंडवा, डेगाना, खींवसर और पांचौड़ी जैसी पंचायत समितियां शामिल हैं।
अधिकारिता: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पुनर्गठित/नवसृजित पंचायत समितियां स्तंभ 5 में वर्णित ग्राम पंचायतों के क्षेत्र पर अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात, उक्त जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो अनुसूची के स्तंभ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है।
फलोदी जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन और नवसृजन - अधिसूचना दिनांक 21-11-2025
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम सं. 13) की धारा-9, 10 एवं 101 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए फलोदी जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन के संबंध में अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना दिनांक 21-11-2025 (क्रमांक: एफ.15(39)पंवरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/840) को जारी की गई है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम और प्रावधान: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-9, 10 और 101 के अंतर्गत शक्तियों का प्रयोग।
जिला कलेक्टर की कार्यवाही: जिला कलेक्टर द्वारा तैयार किए गए प्रस्तावों, सार्वजनिक अवलोकन और एक माह की अवधि में प्राप्त आपत्तियों पर सुनवाई के पश्चात राज्य सरकार से अनुमोदन प्राप्त किया गया है।
कार्यकाल प्रारंभ: अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में यथावर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात, उक्त जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो अनुसूची के स्तंभ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से ही विद्यमान नहीं रहेंगी और अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में वर्णित पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
विस्तृत जानकारी के लिए संलग्न दस्तावेज या संबंधित विभाग के आदेश का अवलोकन करें।
बाड़मेर जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन - अधिसूचना 21 नवंबर 2025
बाड़मेर जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा बाड़मेर जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन से संबंधित अधिसूचना जारी कर दी गई है। यह अधिसूचना दिनांक 21-11-2025 को जारी की गई है, जिसका पत्र क्रमांक एफ.15(39)पंवरे/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/815 है।
मुख्य बिंदु:
विभागीय निर्देश: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-9, 10 एवं 101 में प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए जिला कलेक्टर द्वारा प्रस्ताव तैयार किए गए थे।
अनुमोदन पश्चात कार्रवाई: राज्य सरकार से अनुमोदन के पश्चात बाड़मेर जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन और पुनर्रसीमांकन किया गया है।
चुनाव और कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में वर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात, उक्त जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो स्तंभ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से बंद हो जाएंगी और स्तंभ संख्या 4 में वर्णित पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
विस्तृत जानकारी और पंचायत समिति वार सम्मिलित ग्राम पंचायतों की सूची के लिए मूल अधिसूचना देखें।
जोधपुर जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन आदेश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/833 दिनांक 21-11-2025 के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 की शक्तियों का उपयोग करते हुए जोधपुर जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-9, 10 एवं 101 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग।
कार्यान्वयन प्रक्रिया: जिला कलेक्टर द्वारा तैयार प्रस्तावों, सार्वजनिक अवलोकन और आपत्तियों के आमंत्रण के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से यह अधिसूचना जारी की गई है।
अधिकारिता: जोधपुर जिले की पुनर्गठित/पुनर्रसीमांकित एवं नवसृजित पंचायत समितियां अनुसूची के अनुसार संबंधित क्षेत्राधिकार का प्रयोग करेंगी।
कार्यकाल और चुनाव: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात, उक्त जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो अनुसूची के स्तंभ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारम्भ होगा।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से शासन सचिव (डॉ. जोगा राम) द्वारा दिनांक 21.11.2025 को जारी किया गया है।
बाड़मेर जिला परिषद की वर्तमान पंचायत समितियों व ग्राम पंचायतों की स्थिति
बाड़मेर जिला परिषद की पंचायत समितियां एवं ग्राम पंचायतें
यह दस्तावेज बाड़मेर जिला परिषद के अंतर्गत वर्तमान पंचायत समितियों और ग्राम पंचायतों की स्थिति की जानकारी प्रदान करता है। इसमें विभिन्न पंचायत समितियों के अंतर्गत पुनर्गठन सहित ग्राम पंचायतों की कुल संख्या और वर्तमान ग्राम पंचायतों की संख्या दर्शायी गई है।
मुख्य बिंदु:
डूगेरों का तला, विशाला, बाटाडू, लीलसर, मांगता और भियाड़ पंचायत समितियां नवसृजित हैं।
फागलिया, गडरारोड, रामसर और सेड़वा पंचायत समितियों की सीमा में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है।
बाड़मेर जिला परिषद के अंतर्गत कुल ग्राम पंचायतों का विवरण दिया गया है।
बालोतरा जिले की पंचायत समिति पायला कला से 2 ग्राम पंचायत खुडाला व नई उन्दरी पुनर्गठन के बाद गुड़ामालानी पंचायत समिति में हैं।
बालोतरा जिले की पंचायत समिति बायतु से 25 ग्राम पंचायतें (पुनर्गठन सहित) बाटाडू पंचायत समिति में हैं।
डूंगरपुर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नए सृजन की अंतिम अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान राजपत्र (असाधारण) दिनांक 21 नवंबर, 2025 में डूंगरपुर जिले के संबंध में एक महत्वपूर्ण अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/785 (दिनांक 20 नवंबर, 2025) जारी की गई है।
यह अधिसूचना राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए तथा धारा-9, 10 एवं 101 के प्रावधानों के अंतर्गत जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार प्रस्तावों और आपत्तियों पर सुनवाई के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से जारी की गई है।
मुख्य बिंदु:
पुनर्गठित क्षेत्र: डूंगरपुर जिले की विभिन्न पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नए सृजन का कार्य पूरा कर लिया गया है।
अधिकारिता: अनुसूची के स्तम्भ 4 में यथानामित ग्राम पंचायतें संबंधित स्तम्भ 5 में वर्णित स्थानीय क्षेत्रों पर अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
कार्यकाल और प्रभाव: अनुसूची के स्तम्भ 4 में वर्णित नई/पुनर्गठित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, स्तम्भ 2 में दर्शित पुरानी विद्यमान ग्राम पंचायतें उस तारीख से अस्तित्व में नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
शामिल पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के तहत सागवाड़ा, गलियाकोट, पालेदवल, दोवड़ा, डूंगरपुर, झोंथरी, आसपुर, साबला, चिखली, सीमलवाड़ा, गामड़ी अहाडा और बिछीवाड़ा पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाले राजस्व ग्रामों और ग्राम पंचायतों का विवरण राजपत्र में प्रकाशित किया गया है।
विस्तृत विवरण एवं राजस्व ग्रामों की सूची के लिए कृपया संलग्न मूल राजपत्र अधिसूचना देखें।
कोटपूतली-बहरोड़ जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/797 (दिनांक 20 नवम्बर 2025) के अंतर्गत राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए कोटपूतली-बहरोड़ जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन एवं नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम व संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-9, 10, 101 एवं 98 के तहत यह कार्रवाई की गई है।
जिला कलेक्टर के प्रस्ताव: संबंधित जिला कलेक्टर द्वारा तैयार प्रस्तावों, सार्वजनिक अवलोकन, आपत्तियों के आमंत्रण तथा सुनवाई की प्रक्रिया के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से यह अधिसूचना जारी की गई है।
पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के दायरे में बानसूर, बहरोड़, कोटपूतली, नारायणपुर, नीमराना, पाटन और विराट नगर पंचायत समितियां शामिल हैं।
कार्यकाल की स्थिति: अनुसूची के स्तम्भ संख्या 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, उक्तानुसार जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो स्तम्भ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
राज्यपाल की आज्ञा से, डॉ. जोगा राम, शासन सचिव।
बारां जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन - अधिसूचना 2025
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग - अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा 98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, बारां जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन से संबंधित आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र (असाधारण) दिनांक 21 नवम्बर 2025 में प्रकाशित हुई है।
प्रमुख बिंदु
संबंधित विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
आदेश संख्या: संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/772, दिनांक 20 नवम्बर 2025।
कार्यान्वयन: जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार किए गए प्रस्तावों, आपत्तियों पर सुनवाई और राज्य सरकार के अनुमोदन के पश्चात बारां जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों और उनमें सम्मिलित राजस्व ग्रामों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, उक्त जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो स्तंभ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई वर्णित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
अधिक जानकारी के लिए कृपया मूल राजस्थान राजपत्र अधिसूचना देखें।
सवाई माधोपुर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/804 (दिनांक नवंबर 20, 2025) के माध्यम से सवाई माधोपुर जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन की आधिकारिक घोषणा की गई है।
यह कार्रवाई राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए तथा पूर्व अधिसूचना दिनांक 10.01.2025 के क्रम में जिला कलेक्टर द्वारा तैयार प्रस्तावों और आपत्तियों पर सुनवाई के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से की गई है।
मुख्य बिंदु:
सواسई माधोपुर जिला के अंतर्गत आने वाली पंचायत समितियों (जैसे बामनवास, बौंली, चौथ का बरवाड़ा, गंगापुरसिटी, खण्डार, मलारना डूंगर, सवाई माधोपुर आदि) में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन और नवसृजन किया गया है।
निसृत एवं पुनर्गठित ग्राम पंचायतें अनुसूची के स्तंभ-4 में वर्णित नामों से जानी जाएंगी तथा स्तंभ-5 में दर्शाए गए राजस्व ग्रामों पर अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
संबंधित पंचायत समितियों में नई पंचायतों के कार्यप्रारंभ के साथ ही पुरानी निर्धारित ग्राम पंचायतें अस्तित्व में नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी।
यह अधिसूचना राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी की गई है।
टोंक जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन एवं नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
टोंक जिले की ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन और पुनसीमांकन की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए टोंक जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन से संबंधित आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र (असाधारण) दिनांक 21 नवंबर, 2025 में प्रकाशित की गई है।
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
अधिकार क्षेत्र: टोंक जिले के अंतर्गत आने वाली विभिन्न पंचायत समितियां जैसे टोंक, निवाई, पीपलू, मालपुरा, टोडारायसिंह और उनियारा।
कार्यान्वयन प्रक्रिया: जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार किए गए प्रस्तावों एवं अभिशंषाओं के परीक्षण के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से टोंक जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
कार्यकाल और प्रभाव: अनुसूची के स्तम्भ संख्या 4 में वर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, उक्त जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो स्तम्भ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से ही विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
विस्तृत विवरण और ग्राम-वार सूची के लिए संलग्न आधिकारिक राजपत्र अधिसूचना देखें।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग - सलूंबर जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन एवं नवसृजन अधिसूचना
अधिसूचना विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/803 दिनांक 20 नवंबर 2025 के अंतर्गत, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए सलूंबर जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन एवं नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु
अधिनियम व निर्देश: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-9, 10 एवं 101 में वर्णित शक्तियों तथा विभागीय अधिसूचना दिनांक 10.01.2025 के तहत जिला कलेक्टर को प्रस्ताव तैयार करने, सार्वजनिक अवलोकन के लिए प्रसारित करने, आपत्तियां आमंत्रित करने और सुनवाई हेतु अधिकृत किया गया था।
राज्य सरकार का अनुमोदन: जिला कलेक्टरों द्वारा कार्यवाही किए जाने, प्रस्तावों एवं अभिशंषाओं का परीक्षण करने के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से सलूंबर जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन/पुनरसीमांकन/नवसृजन किया गया है।
शामिल पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के तहत पंचायत समिति झल्लारा, जयसमंद, लसाड़िया, सलूंबर, सराडा और सेमारी के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों एवं उनमें सम्मिलित राजस्व ग्रामों की सूची में परिवर्तन किया गया है।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, उस जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो स्तंभ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
कोटपूतली-बहरोड़ जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/797- दिनांक नवंबर 20, 2025 के माध्यम से कोटपूतली-बहरोड़ जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
प्रमुख बिंदु
अधिनियम व संदर्भ: यह कार्रवाई राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-9, 10, 98 एवं 101 के अंतर्गत जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार प्रस्तावों और आपत्तियों पर सुनवाई के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से की गई है।
अधिकारिता: अनुसूची के स्तम्भ 4 में यथानामित पुनर्गठित एवं नवसृजित ग्राम पंचायतें स्तम्भ 5 में वर्णित स्थानीय क्षेत्र एवं राजस्व ग्रामों के अनुसार अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
कार्यकाल और प्रभाव: अनुसूची के स्तम्भ 4 में वर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, स्तम्भ 2 में दर्शाई गई विद्यमान ग्राम पंचायतें उस तारीख से अस्तित्व में नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
संबंधित पंचायत समितियां
बानसूर
बहरोड़
कोटपूतली
नारायणपुर
नीमराना
पावटा
विराटनगर
विस्तृत राजस्व ग्रामों की सूची और विवरण के लिए राजस्थान राजपत्र (असाधारण) दिनांक 21 नवंबर 2025 (भाग 6-ग) का अवलोकन करें।
भरतपुर जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन अधिसूचना
भरतपुर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन एवं नवसृजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए भरतपुर जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है। यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र (अतिरिक्त) में दिनांक 21 नवंबर, 2025 को प्रकाशित की गई है।
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना संख्या: संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/775 (दिनांक नवंबर 20, 2025)।
संबद्ध जिला: भरतपुर, राजस्थान।
शामिल पंचायत समितियां: बयाना, भुसावर, नदबई, रूपबास, सेवर, उच्चैन और वैर।
कार्यकाल और प्रभाव: अनुसूची के स्तम्भ संख्या 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात उक्त जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो अनुसूची के स्तम्भ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से ही विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
प्रतापगढ़ जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुन सीमांकन और नवसृजन - राजस्थान राजपत्र अधिसूचना
प्रतापगढ़ जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन एवं पुनसीमांकन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/801 (दिनांक नवंबर 20, 2025) के अंतर्गत राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए प्रतापगढ़ जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिनीम संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-9, 10 एवं 101 के प्रावधानों के तहत यह प्रक्रिया पूर्ण की गई है।
संबंधित पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के दायरे में प्रतापगढ़ जिले की धरियावद, पीपलखूट, सुहागपुरा, धमोतर, प्रतापगढ़, अरनोद, दलोट और छोटीसादड़ी पंचायत समितियां शामिल हैं।
कार्यकाल प्रभाव: अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, विद्यमान ग्राम पंचायतें (जो स्तंभ संख्या 2 में वर्णित हैं) उस तारीख से अस्तित्व में नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
जारीकर्ता: राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
जैसलमेर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
जैसलमेर जिला ग्राम पंचायत पुनर्गठन अधिसूचना 2025
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/789 (दिनांक नवम्बर 20, 2025) के तहत जैसलमेर जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन एवं नवसृजन किया गया है। यह कार्रवाई राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा 98 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए की गई है।
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना दिनांक: नवम्बर 20, 2025
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
कार्यान्वयन: अनुसूची के स्तम्भ 4 में वर्णित नई/पुनर्गठित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, स्तम्भ 2 में उल्लेखित मौजूदा ग्राम पंचायतें उस तारीख से अस्तित्व में नहीं रहेंगी और उनका कार्य बंद हो जाएगा, जिससे नई पुनर्गठित पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
विस्तृत जानकारी और ग्रामवार राजस्व गांवों की सूची के लिए मूल राजस्थान राजपत्र (असाधारण) दिनांक 21 नवम्बर 2025 का अवलोकन करें।
करौली जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन अधिसूचना
करौली जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/794 दिनांक 20 नवम्बर, 2025 के माध्यम से करौली जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम और शक्तियाँ: यह कार्रवाई राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों और धारा-9, 10 एवं 101 के अंतर्गत राज्य सरकार द्वारा जिला कलेक्टर को प्रदत्त अधिकारों के आधार पर की गई है।
कार्यान्वयन: जिला कलेक्टर द्वारा तैयार प्रस्तावों, सार्वजनिक अवलोकन, आपत्तियों के आमंत्रण और सुनवाई के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से करौली जिले की विभिन्न पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन व नवसृजन किया गया है।
शामिल पंचायत समितियां: इस अधिसूचना में मण्डरायल, हिण्डौन, टोडाभीम, श्रीमहावीरजी, करौली, मासलपुर और नादौती पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाले राजस्व ग्रामों और ग्राम पंचायतों का विवरण अनुसूची के अनुसार निर्धारित किया गया है।
प्रभावी तिथि: अनुसूची में वर्णित नई ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, पूर्ववर्ती विद्यमान ग्राम पंचायतें उस तिथि से कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
यह अधिसूचना राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा जारी की गई है।
जालोर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन एवं नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
जालोर जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/790 (दिनांक नवंबर 20, 2025) के अंतर्गत राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए जालोर जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
संबंधित विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
अधिसूचना दिनांक: 20 नवंबर 2025 (राजस्थान राजपत्र असाधारण में 21 नवंबर 2025 को प्रकाशित)।
अधिनियम संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-9, 10, 98 एवं 101।
क्षेत्र: जालोर जिला (जिसमें जालोर, आहोर, सायला, जसवंतपुरा, भीनमाल, बागोड़ा, रानीवाड़ा, सांचौर और चितलवाना पंचायत समितियां शामिल हैं)।
कार्यकाल निर्देश: अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात उक्त जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो अनुसूची के स्तंभ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से ही विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
यह अधिसूचना राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी की गई है।
धौलपुर जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा 98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए धौलपुर जिले की ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र (असाधारण) दिनांक 21 नवंबर 2025 में प्रकाशित की गई है, जिसके अंतर्गत धौलपुर जिले के विभिन्न क्षेत्रों एवं पंचायत समितियों (जैसे बाड़ी, बसेड़ी, धौलपुर, राजाखेड़ा, सैंपऊ, सरमथुरा) में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम और संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धाराओं के तहत जिला कलेक्टर द्वारा तैयार प्रस्तावों और आपत्तियों पर सुनवाई के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से यह पुनर्गठन किया गया है।
कार्यान्वयन: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, स्तंभ 2 में उल्लेखित पूर्ववर्ती ग्राम पंचायतें उस तारीख से अस्तित्व में नहीं रहेंगी और उनका कार्यकाल समाप्त माना जाएगा।
संबंधित पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के दायरे में बाड़ी, बसेड़ी, धौलपुर, राजाखेड़ा, सैंपऊ और सरमथुरा पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाले राजस्व ग्रामों और ग्राम पंचायतों का नया सीमांकन किया गया है।
अधिक जानकारी के लिए कृपया ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार की आधिकारिक अधिसूचना देखें।
ब्यावर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन एवं निसृजन से संबंधित अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), जयपुर द्वारा जारी अधिसूचना (संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/774, दिनांक 20 नवंबर 2025) के अनुसार, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए ब्यावर जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन एवं निसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु एवं प्रक्रिया:
संबद्ध अधिनियम एवं निर्देश: यह कार्रवाई राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-9, 10, 98 एवं 101 के प्रावधानों और पूर्व विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/02 दिनांक 10.01.2025 के अंतर्गत जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार प्रस्तावों, आपत्तियों के आमंत्रण, सुनवाई तथा राज्य सरकार के अनुमोदन के पश्चात की गई है।
ग्राम पंचायतों का क्षेत्राधिकार: इस अधिसूचना के तहत पुनर्गठित, पुनसीमांकित एवं नवसृजित ग्राम पंचायतें अपने निर्धारित नामों और राजस्व ग्रामों के स्थानीय क्षेत्र के अनुसार अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
कार्यकाल: अनुसूची में वर्णित ग्राम पंचायतों के चुनावों के पश्चात उस जिले की विद्यमान ग्राम पंचायतें, जो पुनर्गठन से प्रभावित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
शामिल पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के अंतर्गत मुख्य रूप से पंचायत समिति बदनोर, जवाजा, जैतारण, रायपुर और मसूदा के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों एवं उनके राजस्व ग्रामों का पुनर्गठन किया गया है।
विस्तृत विवरण एवं सूची के लिए संलग्न राजपत्र का अवलोकन करें।
बूंदी जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
बूंदी जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन एवं पुनसीमांकन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनगर्ठन/विधि/पंरा/2024/778:- (दिनांक 20 नवम्बर 2025) के अंतर्गत राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए बूंदी जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम व संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-9, 10 एवं 101 में वर्णित शक्तियों तथा पूर्व अधिसूचना दिनांक 10.01.2025 के अनुपालन में जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार प्रस्तावों और अभिशंसाओं के परीक्षण के पश्चात यह राज्य सरकार द्वारा अनुमोदित किया गया है।
प्रभावित पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के तहत बूंदी जिले की पंचायत समिति हिंडोली, नैनवां, तालेडा और बूंदी के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन व नवसृजन किया गया है।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, उस जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो स्तंभ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
अधिक जानकारी एवं विस्तृत राजस्व ग्रामों की सूची के लिए आधिकारिक राजस्थान राजपत्र (असाधारण) दिनांक 21 नवंबर 2025 का अवलोकन करें।
खैरथल-तिजारा जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन एवं नवसृजन - अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान राजपत्र में जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/795, दिनांक 20 नवम्बर 2025 के माध्यम से खैरथल-तिजारा जिले की ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन से संबंधित विस्तृत विवरण प्रकाशित किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम एवं शक्तियां: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों और धारा-9, 10 एवं 101 में वर्णित प्रावधानों के अंतर्गत यह कार्रवाई की गई है।
जिला कलेक्टर की भूमिका: संबंधित जिले के जिला कलेक्टर द्वारा प्रस्ताव तैयार कर सार्वजनिक अवलोकन हेतु प्रसारित करने, एक माह की अवधि में आपत्तियां आमंत्रित करने तथा उन पर सुनवाई करने के पश्चात राज्य सरकार से अनुमोदन प्राप्त किया गया है।
पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के तहत मुख्य रूप से किशनगढ़बास, कोटकासिम, और तिजारा पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों और उनमें सम्मिलित राजस्व ग्रामों का पुनर्गठन व नवसृजन किया गया है।
कार्यकाल और प्रभाव: अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में यथावर्णित नई/पुनर्गठित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, उस जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो स्तंभ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
यह अधिसूचना राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी की गई है।
कोटा जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नए सृजन की अधिसूचना
राजकीय अधिसूचना और उद्देश्य
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी इस आधिकारिक अधिसूचना (संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/796, दिनांक 20 नवंबर, 2025) के माध्यम से कोटा जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नए सृजन की जानकारी दी गई है। यह कार्रवाई राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए, धारा-9, 10 एवं 101 के प्रावधानों के अंतर्गत की गई है।
मुख्य बिंदु एवं प्रक्रिया
जिला कलेक्टर द्वारा प्रस्ताव: संबंधित जिले के जिला कलेक्टर ने नियमानुसार प्रस्ताव तैयार कर सार्वजनिक अवलोकन के लिए प्रसारित किए थे और एक माह की अवधि में आपत्तियां आमंत्रित कर उनकी सुनवाई की थी।
राज्य सरकार का अनुमोदन: जिला कलेक्टरों द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों एवं अभिशंषाओं का परीक्षण करने के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से कोटा जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन/पुनरसीमांकन/निसृजन किया गया है।
नामकरण और अधिकारिता: अनुसूची के स्तम्भ 4 में वर्णित पुनर्गठित/पुनरसीमांकित/नवसृजित ग्राम पंचायतें उसी नाम से जानी जाएंगी और स्तम्भ 5 में दर्शाए गए स्थानीय क्षेत्र व राजस्व ग्रामों पर अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
कार्यकाल की शुरुआत: अनुसूची के स्तम्भ 4 में वर्णित नई ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, स्तम्भ 2 में दर्शाई गई विद्यमान ग्राम पंचायतें उस तारीख से अस्तित्व में नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी, जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
संबद्ध पंचायत समितियां
इस अधिसूचना के अंतर्गत कोटा जिले की विभिन्न पंचायत समितियों (जैसे सांगोद, खैराबाद, सुल्तानपुर, लाडपुरा आदि) के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों एवं उनके राजस्व ग्रामों में पुनर्गठन और फेरबदल किया गया है। विस्तृत विवरण के लिए राजस्थान राजपत्र, दिनांक 21 नवंबर 2025 का अवलोकन किया जा सकता है।
नोट: यह पोस्ट संलग्न राजपत्र अधिसूचना पर आधारित है।
फलौदी जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन एवं नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए तथा धारा-9, 10 एवं 101 में वर्णित शक्तियों के अंतर्गत, संबंधित जिले के जिला कलेक्टर द्वारा तैयार किए गए प्रस्तावों एवं अभिशंषाओं का परीक्षण कर राज्य सरकार से अनुमोदन प्राप्त करने के पश्चात फलौदी जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन एवं नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
प्रभावित पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के तहत फलौदी जिले की विभिन्न पंचायत समितियों (जैसे बापणी, आऊ, फलौदी, देचू, बाप, घंटियाली, लोहावट आदि) के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों और उनके राजस्व गांवों का पुनर्गठन व पुनसीमांकन किया गया है।
नया नाम एवं मुख्यालय: पुनर्गठित/नवसृजित ग्राम पंचायतें उसी नाम से जानी जाएंगी जो अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित हैं और उनकी अधिकारिता का स्थानीय क्षेत्र स्तंभ 5 के अनुसार होगा।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, संबंधित जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो अनुसूची के स्तंभ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
यह अधिसूचना राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी की गई है।
सिरोही जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन एवं नवसृजन - अधिसूचना 2025
सिरोही जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन एवं नवसृजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान राजपत्र में दिनांक 20 नवंबर 2025 की अधिसूचना (संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/806) के माध्यम से सिरोही जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
प्रमुख बिंदु
अधिनियम व संदर्भ: यह कार्रवाई राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए की गई है।
संबंधित पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के तहत पिंडवाड़ा, आबूरोड, शिवगंज, रेवदर और सिरोही पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन किया गया है।
कार्यकाल और प्रभाव: अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में वर्णित पुनर्गठित/नवसृजित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, स्तंभ संख्या 2 में उल्लिखित वर्तमान ग्राम पंचायतें उस तारीख से अस्तित्व में नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी, जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
डीग जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
डीग जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन एवं पुनरसीमांकन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/782 (दिनांक नवंबर 20, 2025) के अंतर्गत राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा 9, 10, 101 एवं धारा 98 के प्रावधानों के तहत डीग जिले की विभिन्न पंचायत समितियों के अंतर्गत ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु एवं प्रक्रिया
सक्षम प्राधिकारी की कार्रवाई: जिला कलेक्टरों द्वारा नियमानुसार प्रस्ताव तैयार कर, सार्वजनिक अवलोकन हेतु प्रसारित कर एक माह की अवधि में आपत्तियां आमंत्रित करने तथा सुनवाई करने की प्रक्रिया पूरी की गई।
राज्य सरकार का अनुमोदन: जिला कलेक्टरों द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों एवं अभिशंषाओं के परीक्षण के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से डीग जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन/पुनरसीमांकन/नवसृजन किया गया है।
अधिकारिता और कार्यक्षेत्र: अनुसूची के स्तम्भ 4 में वर्णित पुनर्गठित एवं नवसृजित ग्राम पंचायतें स्तम्भ 5 में उल्लेखित राजस्व गांवों पर अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तम्भ 4 में वर्णित नई ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, स्तम्भ 2 में उल्लेखित विद्यमान ग्राम पंचायतें उस तारीख से अस्तित्व में नहीं रहेंगी और उनका कार्य समाप्त हो जाएगा, जिसके बाद नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
शामिल पंचायत समितियां
इस अधिसूचना के अंतर्गत डीग जिले की प्रमुख पंचायत समितियों (जैसे सीकरी, पहाड़ी, कुम्हेर, कामाँ, नगर और डीग) के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों और उनसे संबंधित राजस्व गांवों का विस्तृत विवरण राजस्थान राजपत्र (अतिरिक्त) दिनांक 21 नवंबर 2025 में प्रकाशित अनुसूची के अनुसार निर्धारित किया गया है।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है।
अजमेर जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
अजमेर जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन एवं पुनरसीमांकन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान राजपत्र में जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/768 (दिनांक 20 नवंबर, 2025) के अंतर्गत अजमेर जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
यह कार्रवाई राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा 98 के तहत प्रदत्त शक्तियों और जिला कलेक्टर्स द्वारा तैयार प्रस्तावों एवं आपत्तियों की सुनवाई के उपरांत राज्य सरकार के अनुमोदन से की गई है।
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना दिनांक: 20 नवंबर, 2025
संबंधित विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार
क्षेत्र: अजमेर जिला (विभिन्न पंचायत समितियाँ जैसे सिलोरा, सावर, अजमेर ग्रामीण, श्रीनगर, केकड़ी, सरवाड़, अड़ाई, बिनाय, पीसांगन आदि)
कार्यान्वयन: अनुसूची में यथावर्णित नई पुनर्गठित/नवसृजित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, पूर्ववर्ती विद्यमान ग्राम पंचायतें उस तिथि से अस्तित्व में नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा यह अधिसूचना जारी की गई है।
बाँसवाडा जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) अधिसूचना
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/771 (दिनांक नवंबर 20, 2025) के अंतर्गत राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए बाँसवाडा जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
प्रमुख मुख्य बिंदु:
अधिनियम एवं संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-9, 10, 98 एवं 101 के अंतर्गत संबंधित जिला कलेक्टर द्वारा तैयार प्रस्तावों और अनुशंसाओं के परीक्षण के पश्चात यह अधिसूचना जारी की गई है।
शामिल पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के तहत बाँसवाडा जिले की विभिन्न पंचायत समितियों (जैसे आनन्दपुरी, अरथुना, बागीदौरा, बाँसवाडा, छोटी सरवा, छोटी सरवन, गांगडतलाई, गढ़ी, घाटोल, कुशलगढ़, सज्जनगढ़, तलवाडा आदि) के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन एवं पुनसीमांकन किया गया है।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तम्भ संख्या 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात उक्त जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो अनुसूची के स्तम्भ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
यह अधिसूचना राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी की गई है।
दौसा जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन से संबंधित अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/781/- दिनांक नवम्बर 20, 2025 के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए दौसा जिले की विभिन्न पंचायत समितियों के अंतर्गत ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु एवं विवरण
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
अधिसूचना दिनांक: नवम्बर 20, 2025 (राजस्थान राजपत्र असाधारण में प्रकाशित)
जिला: दौसा
शामिल पंचायत समितियां: बांदीकुई, दौसा, लालसोट, महवा, मंडावर, नांगल राजावतान, रामगढ़ पचवारा, सिकंदरा, सिकराय और बैजूपाड़ा, बसवा।
इस अधिसूचना के अनुसार, संबंधित जिला कलेक्टर द्वारा तैयार प्रस्तावों तथा आपत्तियों पर सुनवाई और परीक्षण के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से दौसा जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन एवं नवसृजन किया गया है। अनुसूची में यथावर्णित नई ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात पुरानी विद्यमान ग्राम पंचायतें उस तिथि से अस्तित्व में नहीं रहेंगी और उनका कार्य समाप्त हो जाएगा जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
उदयपुर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन एवं नवसृजन - राजस्थान राजपत्र अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/808, दिनांक 20 नवम्बर 2025 के अनुसार, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए उदयपुर जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बातें:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
स्थान: उदयपुर जिला
प्रभाव: इस अधिसूचना के तहत संबंधित पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन और नवसृजन किया गया है, जिसके विस्तृत विवरण और राजस्व ग्रामों की सूची राजपत्र में प्रकाशित की गई है।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तम्भ संख्या 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, उक्त जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो स्तम्भ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से ही विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
यह अधिसूचना राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी की गई है।
बीकानेर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा बीकानेर जिले में ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन के संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र (असाधारण) में दिनांक 20 नवंबर, 2025 को प्रकाशित हुई है।
अधिनियम संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98, 9, 10 एवं 101 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग।
कार्रवाई: जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार प्रस्तावों एवं अभिशषाओं का परीक्षण कर राज्य सरकार के अनुमोदन के पश्चात बीकानेर जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
शामिल पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के तहत लूनकरनसर, श्रीडूंगरगढ़, बीकानेर, नोखा, पाँचू, बज्जू खालसा, खाजूवाला, पूगल और हदां पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाले ग्राम क्षेत्रों का पुनर्गठन किया गया है।
कार्यकाल संबंधी निर्देश: अनुसूची के स्तम्भ संख्या 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात संबंधित जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो स्तम्भ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
अधिक जानकारी और विस्तृत राजस्व ग्राम सूची के लिए कृपया संलग्न मूल राजपत्र अधिसूचना देखें।
राजसमंद जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन एवं नवसृजन अधिसूचना
राजसमंद जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन और पुनसीमांकन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान राजपत्र में राजसमंद जिले की ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन, पुनसीमांकन एवं नवसृजन के संबंध में अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना दिनांक 20 नवंबर, 2025 को जारी की गई है, जिसके अंतर्गत राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का उपयोग किया गया है।
मुख्य बिंदु:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
जिला: राजसमंद
शामिल पंचायत समितियां: आमेट, भीम, रेलमगरा, राजसमंद और अन्य संबंधित क्षेत्र।
कार्यान्वयन: जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार प्रस्तावों और आपत्तियों पर सुनवाई के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से राजसमंद जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
नया कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, उस जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो अनुसूची के स्तंभ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
अधिक जानकारी के लिए कृपया राजस्थान राजपत्र (असाधारण) दिनांक 21 नवंबर, 2025 का अवलोकन करें।
हनुमानगढ़ जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनर्र्सीमांकन और नवसृजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवारा/2024/787 (दिनांक नवंबर 20, 2025) के अंतर्गत राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए हनुमानगढ़ जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनर्र्सीमांकन और नवसृजन किया गया है।
प्रमुख बातें एवं निर्देश
सम्बन्धित विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
प्रभावित क्षेत्र: हनुमानगढ़ जिले की पंचायत समितियां (भादरा, पीलीबंगा, संगरिया, टिब्बी, हनुमानगढ़, नोहर आदि) एवं उनके अंतर्गत आने वाले राजस्व ग्राम।
नया कार्यकाल: पुनर्गठित/नवसृजित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, पुरानी विद्यमान ग्राम पंचायतें उस तारीख से कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
अधिकारिता: प्रत्येक पुनर्गठित/नवसृजित ग्राम पंचायत अनुसूची के स्तम्भ 5 में वर्णित स्थानीय क्षेत्र व राजस्व ग्रामों पर अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेगी।
जयपुर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
जयपुर जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन एवं पुनरसीमांकन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी असाधारण राजपत्र अधिसूचना (संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/788, दिनांक 20 नवंबर, 2025) के अनुसार, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए जयपुर जिले की विभिन्न पंचायत समितियों के अंतर्गत ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
संबद्ध अधिनियम: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-9, 10, 98 एवं 101।
क्रियान्वयन: संबंधित जिला कलेक्टर द्वारा तैयार प्रस्तावों एवं आपत्तियों की सुनवाई के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से जयपुर जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन और नवसृजन किया गया है।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, विद्यमान ग्राम पंचायतें उस तारीख से कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
अलवर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
अलवर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन और पुनरसीमांकन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/769, दिनांक नवम्बर 20, 2025 (राजस्थान राजपत्र असाधिकार प्रकाशित, 21 नवम्बर 2025) के अंतर्गत अलवर जिले की विभिन्न पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन एवं नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु और प्रक्रिया
यह कार्रवाई राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए, धारा-9, 10 एवं 101 में वर्णित प्रावधानों के तहत जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार प्रस्तावों और आपत्तियों पर सुनवाई के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से की गई है।
अधिसूचना के अनुसार, अनुसूची के स्तम्भ 4 में वर्णित नई पुनर्गठित/नवसृजित ग्राम पंचायतें उसी नाम से जानी जाएंगी और स्तम्भ 5 में वर्णित स्थानीय क्षेत्र व राजस्व ग्रामों पर अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
अनुसूची के स्तम्भ 4 में यथावर्नित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात्, उस जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो स्तम्भ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
संबंधित पंचायत समितियां
इस अधिसूचना के तहत अलवर जिले की कई पंचायत समितियों (जैसे भनोर और अन्य संबंधित क्षेत्र) के अंतर्गत आने वाले राजस्व ग्रामों और ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन और पुनरसीमांकन किया गया है। विस्तृत जानकारी और ग्रामवार सूची के लिए आधिकारिक राजस्थान राजपत्र (21 नवंबर 2025) देखा जा सकता है।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है।
झालावाड़ जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन - अधिसूचना 20 नवंबर 2025
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंचा/2024/791- (दिनांक नवंबर 20, 2025) के अंतर्गत, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए झालावाड़ जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम एवं प्रावधान: यह कार्रवाई राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-9, 10, 98 एवं 101 के प्रावधानों तथा पूर्व में जारी विभागीय आदेशों के तहत जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार प्रस्तावों एवं राज्य सरकार के अनुमोदन के पश्चात की गई है।
प्रभावित पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के तहत झालावाड़ जिले की कई पंचायत समितियों (जैसे अकलेरा, भवानीमंडी, डग, झालरापाटन, खानपुर, मनोहरथाना और पिड़ावा मुख्यालय सुनेल) के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों एवं उनके राजस्व ग्रामों का पुनर्गठन किया गया है।
कार्यकाल एवं अस्तित्व: अनुसूची के स्तम्भ संख्या 4 में यथावर्णित पुनर्गठित/नवसृजित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, उस जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो अनुसूची के स्तम्भ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
विस्तृत ग्राम-वार अनुसूची और राजस्व ग्रामों की जानकारी के लिए कृपया राजस्थान राजपत्र (असाधारण) दिनांक 21 नवंबर 2025 देखें।
जोधपुर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन एवं नवसृजन - राजस्थान राजपत्र अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/793 (दिनांक नवंबर 20, 2025) के तहत जोधपुर जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है। यह कार्रवाई राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा 98 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए की गई है।
मुख्य बिंदु एवं प्रक्रिया:
अधिकार एवं प्रस्ताव: जिला कलेक्टरों को संबंधित ग्राम पंचायतों व पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन हेतु प्रस्ताव तैयार करने, सार्वजनिक अवलोकन के लिए प्रसारित करने, एक माह की अवधि में आपत्तियां आमंत्रित करने और उन पर सुनवाई करने के लिए अधिकृत किया गया था।
नया नामकरण और अधिकारिता: जिला कलेक्टरों द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों और अभिशंषाओं का परीक्षण करने तथा राज्य सरकार से अनुमोदन प्राप्त करने के पश्चात, जोधपुर जिले की पुनर्गठित/पुनसीमांकित/नवसृजित ग्राम पंचायतें अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित नाम से जानी जाएंगी और स्तंभ 5 में उल्लिखित स्थानीय क्षेत्र/राजस्व गांवों पर अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
कार्यकाल और निरंतरता: अनुसूची के स्तंभ 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, संबंधित जिले की वे विद्यमान ग्राम पंचायतें जो स्तंभ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
आज्ञा से: डॉ. जोगा राम, शासन सचिव, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
चूरू जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन - अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/780 दिनांक नवंबर 20, 2025 के अंतर्गत, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए चूरू जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना क्रमांक एवं दिनांक: संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/780, दिनांक नवंबर 20, 2025।
संबंधित विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
अधिनियम संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-9, 10, 98 और 101।
क्षेत्र: चूरू जिले की विभिन्न पंचायत समितियाँ (चूरू, बीदासर, सुजानगढ़, रतनगढ़, सरदारशहर, तारानगर, राजगढ़, सिद्धमुख)।
कार्यान्वयन: जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार प्रस्तावों एवं आपत्तियों पर सुनवाई के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से चूरू जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तम्भ 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात उस जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो स्तम्भ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से ही विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा यह अधिसूचना जारी की गई है।
सीकर जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन - राजस्थान राजपत्र अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/805 (दिनांक नवंबर 20, 2025) के माध्यम से राजस्थान राजपत्र में सीकर जिले की ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन से संबंधित आधिकारिक विवरण प्रकाशित किया गया है।
मुख्य बिंदु एवं प्रक्रिया
यह अधिसूचना राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए तथा धारा-9, 10 एवं 101 के अंतर्गत जारी निर्देशों के तहत लाई गई है।
जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार किए गए प्रस्तावों, सार्वजनिक अवलोकन, आपत्तियों के आमंत्रण और सुनवाई की प्रक्रिया के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से सीकर जिले की विभिन्न पंचायत समितियों (जैसे अजीतगढ़, दांतारामगढ़, पलसाना, धोद, खंडेला, लक्ष्मणगढ़, नेछवा, नीमकाथाना, पाटन, पिपराली, श्रीमाधोपुर) के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
अनुसूची में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, उस जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो अनुसूची के स्तंभ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
विस्तृत ग्राम-वार और पंचायत समिति-वार सूची के लिए संलग्न आधिकारिक राजपत्र दस्तावेज़ का अवलोकन करें।
भीलवाड़ा जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
भीलवाड़ा जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/776 (दिनांक 20 नवम्बर 2025) के अंतर्गत राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए भीलवाड़ा जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
प्रमुख बिंदु:
अधिकार एवं प्रक्रिया: विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/02 दिनांक 10.01.2025 के द्वारा जिला कलेक्टर को ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनसीमांकन हेतु प्रस्ताव तैयार करने, सार्वजनिक अवलोकन के लिए प्रसारित करने, एक माह की अवधि में आपत्तियां आमंत्रित करने तथा सुनवाई करने हेतु अधिकृत किया गया था।
प्रस्तावों का अनुमोदन: जिला कलेक्टरों द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों और अभिशंसाओं का परीक्षण करने के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से भीलवाड़ा जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन/पुनसीमांकन/नवसृजन किया गया है।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तम्भ संख्या 4 में यथावर्णित नई ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात उस जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो स्तम्भ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
विस्तृत विवरण और पंचायत समिति वार पुनर्गठित/नवसृजित ग्राम पंचायतों तथा उनमें सम्मिलित राजस्व ग्रामों की सूचियों के लिए संलग्न राजस्थान राजपत्र (एक्स्ट्राऑर्डिनरी) का अवलोकन करें।
पाली जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन - अधिसूचना 20 नवंबर 2025
पाली जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन एवं पुनसीमांकन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए पाली जिले के विभिन्न क्षेत्रों में ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन से संबंधित आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना दिनांक 20 नवंबर 2025 को राजस्थान राजपत्र (असाधारण) में प्रकाशित हुई है।
प्रमुख बिंदु
अधिनियम संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम सं. 13) की धारा-9, 10, 98 और 101 के प्रावधानों के अंतर्गत यह कार्रवाई की गई है।
संबंधित जिला: पाली जिला।
शामिल पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के तहत बगड़ी, देसूरी, मारवाड़ जंक्शन, रानी, रोहट, सोजत और सुमेरपुर पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन और नवसृजन किया गया है।
कार्यकाल और प्रभाव: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, संबंधित जिले की वे विद्यमान ग्राम पंचायतें जो स्तंभ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से अस्तित्व में नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है।
झुंझुनूं जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन एवं नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
झुंझुनूं जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन एवं नवसृजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/792 (दिनांक नवंबर 20, 2025) जारी की गई है। इसके माध्यम से झुंझुनूं जिले में विभिन्न ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन एवं नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु एवं प्रक्रिया
संवैधानिक प्रावधान: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा-9, 10 एवं 101 में वर्णित शक्तियों तथा विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/02 (दिनांक 10.01.2025) के तहत जिला कलेक्टर को प्रस्ताव तैयार करने, सार्वजनिक अवलोकन के लिए प्रसारित करने और एक माह की अवधि में आपत्तियां आमंत्रित कर सुनवाई करने हेतु अधिकृत किया गया था।
राज्य सरकार का अनुमोदन: जिला कलेक्टर्स द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों एवं अभिशंषाओं का परीक्षण करने के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से झुंझुनूं जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन/पुनसीमांकन/नवसृजन किया गया है।
अधिकारिता: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पुनर्गठित/नवसृजित ग्राम पंचायतें स्तंभ 5 में दर्शाए गए स्थानीय क्षेत्रों एवं राजस्व ग्रामों पर अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
विद्यमान पंचायतों का कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित नई ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात स्तंभ 2 में उल्लेखित वर्तमान ग्राम पंचायतें उस तारीख से अस्तित्व में नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी, जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
शामिल पंचायत समितियां
इस अधिसूचना के अंतर्गत झुंझुनूं जिले की निम्नलिखित पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों का पुनर्गठन किया गया है:
बुहाना
चिड़ावा
खेतडी
मण्डावा
नवलगढ़
पिलानी
सिंघाना
सूरजगढ़
उदयपुरवाटी
अलसीसर
झुंझुनूं
यह अधिसूचना राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी की गई है।
डीडवाना-कुचामन जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुन सीमांकन और नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
अधिसूचना विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/784 (दिनांक नवम्बर 20, 2025) के माध्यम से राजस्थान राजपत्र में डीडवाना-कुचामन जिले की ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन से संबंधित विस्तृत विवरण प्रकाशित किया गया है।
मुख्य उद्देश्य एवं प्रक्रिया
राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए, धारा-9, 10 एवं 101 में वर्णित प्रावधानों के अंतर्गत संबंधित जिला कलेक्टर को ग्राम पंचायत एवं पंचायत समिति के पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन हेतु प्रस्ताव तैयार करने, सार्वजनिक अवलोकन के लिए प्रसारित करने, एक माह की अवधि में आपत्तियां आमंत्रित करने तथा उन पर सुनवाई करने के लिए अधिकृत किया गया था। जिला कलेक्टरों द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों एवं अभिशंषाओं का परीक्षण कर तथा राज्य सरकार से अनुमोदन प्राप्त करने के पश्चात डीडवाना-कुचामन जिले की विभिन्न पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन/पुनसीमांकन/नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु
अधिनियम संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-9, 10, 98 एवं 101।
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
जारीकर्ता: डॉ. जोगा राम, शासन सचिव (राज्यपाल की आज्ञा से)।
प्रभावित क्षेत्र: डीडवाना-कुचामन जिले की विभिन्न पंचायत समितियाँ (जैसे कुचामन सिटी, लाडनूं, मौलासर, परबतसर, डीडवाना, मकराना, नावा आदि)।
अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात उक्त जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो अनुसूची के स्तंभ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
श्रीगंगानगर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन एवं नवसृजन - राजस्थान राजपत्र अधिसूचना
श्रीगंगानगर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन और नवसृजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/786, दिनांक 20 नवंबर 2025 के अनुसार, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए श्रीगंगानगर जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन एवं नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम व निर्देश: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-9, 10 एवं 101 के अंतर्गत जिला कलेक्टर द्वारा तैयार प्रस्तावों और अभिशंषाओं का परीक्षण कर राज्य सरकार के अनुमोदन के पश्चात यह अधिसूचना जारी की गई है।
कार्यान्वयन: अनुसूची के स्तम्भ संख्या 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात् उस जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो स्तम्भ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी, जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
संबद्ध पंचायत समितियां: इस अधिसूचना में श्रीगंगानगर जिले के अंतर्गत आने वाली विभिन्न पंचायत समितियों (जैसे श्रीगंगानगर, श्रीकरणपुर, पदमपुर, घड़साना, सूरतगढ़, अनूपगढ़, सादुलशहर आदि) के अंतर्गत आने वाले राजस्व ग्रामों और उनके मुख्यालयों की विस्तृत अनुसूची जारी की गई है।
यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र (असाधारण) दिनांक 21 नवंबर 2025 में प्रकाशित की गई है, जिसके अंतर्गत राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा हस्ताक्षर किए गए हैं।
बालोतरा जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग
बालोतरा जिले की ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी असाधारण राजपत्र अधिसूचना (संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/770, दिनांक नवम्बर 20, 2025) के अनुसार राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए बालोतरा जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिकार क्षेत्र और प्रभाव: इस अधिसूचना के तहत पुनर्गठित, पुनसीमांकित और नवसृजित ग्राम पंचायतें स्तम्भ 4 एवं 5 में दर्शाए गए स्थानीय क्षेत्रों और राजस्व ग्रामों के अनुसार अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तम्भ संख्या 4 में यथाور्णगत ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, उक्त जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो स्तम्भ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
संबंधित पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के अंतर्गत समदड़ी, कल्याणपुर, सिणधरी, पायला कलां, सिवाना, पादतू और गिडा पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में पुनर्गठन की कार्रवाई की गई है।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है।
बाड़मेर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीममार्कन और नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) अधिसूचना
यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र (असाधारण) में प्रकाशित की गई है। इसके अनुसार, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्य सरकार द्वारा बाड़मेर जिले के विभिन्न पंचायत समितियों के अंतर्गत ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीममार्कन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
संबद्ध विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार।
कार्रवाई का आधार: जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार किए गए प्रस्तावों, आपत्तियों पर सुनवाई और राज्य सरकार के अनुमोदन के पश्चात यह अंतिम अधिसूचना जारी की गई है।
प्रभाव: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित नई एवं पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल संबंधित पंचायतों के चुनावों के पश्चात प्रारंभ होगा, और स्तंभ 2 में उल्लेखित पुरानी पंचायतें उस तिथि से अस्तित्व में नहीं रहेंगी।
विस्तृत विवरण और पंचायत समिति वार (जैसे सेड़वा, रामसर, गडाररद, धोरीमन्ना, बायतू, शिव, गुड़ामालानी, फागलिया आदि) नवगठित ग्राम पंचायतों एवं उनमें सम्मिलित राजस्व ग्रामों की सूची आधिकारिक राजपत्र में उपलब्ध है।
राजस्थान पंचायती राज (अंतरित क्रियाकलाप) (संशोधन) नियम, 2025 जारी
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धाराओं के तहत राजस्थान पंचायती राज (अंतरित क्रियाकलाप) नियम, 2011 में संशोधन हेतु अधिसूचना जारी की गई है।
दिनांक: अक्टूबर 29, 2025 (राजस्थान राजपत्र असाधारण में 31 अक्टूबर 2025 को प्रकाशित)
नियम का नाम: राजस्थान पंचायती राज (अंतरित क्रियाकलाप) (संशोधन) नियम, 2025
प्रभावी तिथि: ये नियम तुरंत प्रवृत्त होंगे।
नियम 8 में संशोधन: राजस्थान पंचायती राज (अंतरित क्रियाकलाप) नियम, 2011 के नियम 8 के विद्यमान खंड (iii) के स्थान पर "एक जिले से दूसरे जिले में संबंधित विभाग" प्रतिस्थापित किया गया है।
यह आदेश राज्यपाल के आदेश से भारत भूषण गोयल, शासन उप सचिव द्वारा जारी किया गया है।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग - जिला परिषद डीडवाना-कुचामन का गठन
जिला परिषद डीडवाना-कुचामन का गठन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा अधिसूचना संख्या एफ15(1)परा/विधि/जिपगठन/2025/763 दिनांक नवम्बर 19, 2025 के तहत राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-11 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए नवीन जिला परिषद, डीडवाना-कुचामन का गठन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
मुख्यालय: नवीन जिला परिषद डीडवाना-कुचामन का मुख्यालय डीडवाना-कुचामन रखा गया है।
क्षेत्राधिकार: नवगठित जिला परिषद का क्षेत्राधिकार राजस्व विभाग की अधिसूचना दिनांक 05.08.2023 में वर्णित क्षेत्र में से नगर निगम/नगर परिषद/नगर पालिका (नगरीय क्षेत्र) को छोड़कर, समस्त क्षेत्र रहेगा।
जिला परिषद नागौर: जिला परिषद नागौर वर्तमान स्वरूप में उस तारीख से ही विद्यमान नहीं रहेगी और कार्य करना बन्द कर देगी जब नवीन जिला परिषद डीडवाना-कुचामन एवं पुनर्गठित जिला परिषद नागौर का कार्यकाल प्रारम्भ होगा।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग - नया जिला परिषद ब्यावरा गठन अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-11 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए जिला परिषद, ब्यावर के गठन की अधिसूचना जारी की गई है।
क्षेत्राधिकार: राजस्व विभाग की पूर्ववर्ती अधिसूचनाओं के अंतर्गत अजमेर, पाली, भीलवाड़ा और राजसमंद जिलों के पुनर्गठन के फलस्वरूप नवगठित जिला ब्यावर के क्षेत्र को इसमें शामिल किया गया है (नगरीय क्षेत्रों को छोड़कर)।
कार्यान्वयन: जिला परिषद अजमेर, भीलवाड़ा, पाली और राजसमंद अपने वर्तमान स्वरूप में निर्धारित तिथि से कार्य करना बंद कर देंगी, जब तक कि नवीन जिला परिषद ब्यावर और पुनर्गठित जिला परिषदों का कार्यकाल प्रारंभ नहीं होता।
जिला परिषद कोटपूतली-बहरोड का गठन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
जिला परिषद कोटपूतली-बहरोड का गठन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ15(1)परा/विधि/जिपगठन/2025/765 (दिनांक 19 नवम्बर 2025) के अनुसार नवीन जिला परिषद कोटपूतली-बहरोड का गठन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना क्रमांक एवं दिनांक: एफ15(1)परा/विधि/जिपगठन/2025/765, दिनांक 19 नवम्बर 2025।
नया जिला मुख्यालय: कोटपूतली-बहरोड।
अधिकारक्षेत्र: राजस्व विभाग की अधिसूचनाओं (दिनांक 05.08.2023) के तहत जयपुर और अलवर जिलों के पुनर्गठन से बने नवीन जिले कोटपूतली-बहरोड के अंतर्गत आने वाला समस्त ग्रामीण क्षेत्र (नगर निगम/नगर परिषद/नगर पालिका क्षेत्रों को छोड़कर)।
अधिनियम संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-11 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग - जिला परिषद फलोदी का गठन
जिला परिषद फलोदी का गठन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-11 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए जिला परिषद, फलोदी का गठन किया गया है। यह अधिसूचना जयपुर, नवम्बर 19, 2025 (संख्या एफ15(1)परा/विधि/जिपगठन/2025/760) के अंतर्गत जारी की गई है।
मुख्य बिंदु:
नया जिला परिषद: राजस्व विभाग की अधिसूचनाओं के क्रम में नवनिर्वाचित जिला परिषद फलोदी का गठन किया गया है जिसका मुख्यालय फलोदी रखा गया है।
क्षेत्राधिकार: नवनिर्वाचित जिला परिषद, फलोदी का क्षेत्राधिकार, राजस्व विभाग की उक्त अधिसूचनाओं में वर्णित क्षेत्र में से नगर निगम/नगर परिषद/नगर पालिका (नगरीय क्षेत्र) को छोड़कर, समस्त क्षेत्र रहेगा।
कार्यकाल: जिला परिषद जैसलमेर, जोधपुर वर्तमान स्वरूप में उस तारीख से ही विद्यमान नहीं रहेगी और कार्य करना बंद कर देगी जब नवीन जिला परिषद फलोदी एवं पुनर्गठित जिला परिषद जैसलमेर, जोधपुर का कार्यकाल प्रारम्भ होगा।
जिला परिषद, सलुंबर के गठन के संबंध में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
जिला परिषद, सलुंबर का गठन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ15(1)परा/विधि/जिपुगठन/2025/766 दिनांक नवंबर 19, 2025 के अनुसार, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-11 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए जिला परिषद, सलुंबर का गठन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
मुख्यालय: नवगठित जिला परिषद सलुंबर का मुख्यालय सलुंबर रखा गया है।
क्षेत्राधिकार: राजस्व विभाग की अधिसूचना क्रमांक प-9(18)राज-1/2022-(12) दिनांक 05.08.2023 द्वारा पुनर्गठित उदयपुर जिले के क्षेत्र में से नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिका (नगरीय क्षेत्र) को छोड़कर समस्त क्षेत्र इस क्षेत्राधिकार में शामिल होगा।
जिला परिषद उदयपुर की स्थिति: जिला परिषद उदयपुर अपने वर्तमान स्वरूप में उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेगी और कार्य करना बंद कर देगी जब नवीन जिला परिषद सलुंबर एवं पुनर्गठित जिला परिषद उदयपुर का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
जिला परिषद बालोतरा का गठन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
जिला परिषद बालोतरा का गठन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-11 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए जिला परिषद, बालोतरा का गठन किया गया है।
आधार: राजस्व विभाग की अधिसूचना क्रमांक प-9(18)रास-1/2022-(2) दिनांक 05.08.2023 द्वारा बाड़मेर जिले के पुनर्गठन के फलस्वरूप नवीन जिला बालोतरा का गठन, जिसका मुख्यालय बालोतरा है।
क्षेत्राधिकार: नवगठित जिला परिषद, बालोतरा का क्षेत्राधिकार राजस्व विभाग की अधिसूचना में वर्णित क्षेत्र में से नगर निगम/नगर परिषद/नगर पालिका (नगरीय क्षेत्र) को छोड़कर समस्त क्षेत्र रहेगा। यह क्षेत्र जिला परिषद बाड़मेर के वर्तमान क्षेत्राधिकार से पृथक होगा।
कार्यकाल: जिला परिषद बाड़मेर अपने वर्तमान स्वरूप में उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेगी और कार्य करना बंद कर देगी जब नवीन जिला परिषद बालोतरा एवं पुनर्गठित जिला परिषद बाड़मेर का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग - जिला परिषद खैरथल-तिजारा का गठन
नया जिला परिषद खैरथल-तिजारा का गठन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ15(1)परा/विधि/जिपगठन/2025/764 दिनांक 19 नवंबर, 2025 के अनुसार, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-11 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए नवीन जिला परिषद, खैरथल-तिजारा का गठन किया गया है।
प्रमुख बिंदु
मुख्यालय: नवीन जिला परिषद खैरथल-तिजारा का मुख्यालय खैरथल-तिजारा रखा गया है।
क्षेत्राधिकार: राजस्व विभाग की अधिसूचना दिनांक 05.08.2023 में वर्णित क्षेत्र में से नगर निगम/नगर परिषद/नगर पालिका (नगरीय क्षेत्र) को छोड़कर समस्त क्षेत्र तथा जिला परिषद अलवर के वर्तमान क्षेत्राधिकार से वह क्षेत्र पृथक रहेगा जो क्षेत्र नवगठित जिला परिषद खैरथल-तिजारा के क्षेत्राधिकार में सम्मिलित है।
अलवर जिला परिषद का कार्यभार: जिला परिषद अलवर वर्तमान स्वरूप में उस तारीख से ही विद्यमान नहीं रहेगी और कार्य करना बंद कर देगी जब नवीन जिला परिषद खैरथल-तिजारा एवं पुनर्गठित जिला परिषद अलवर का कार्यकाल प्रारम्भ होगा।
नवीन जिला परिषद डीग का गठन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
नवीन जिला परिषद डीग का गठन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा अधिसूचना संख्या एफ15(1)परा/विधि/जिपगठन/2025/762 दिनांक 19 नवम्बर 2025 के माध्यम से नवीन जिला परिषद डीग के गठन की सूचना जारी की गई है।
मुख्य बिंदु:
नवीन जिला गठन: राजस्व विभाग की अधिसूचना क्रमांक प-9(18)राज-1/2022-(4) दिनांक 05.08.2023 के द्वारा भरतपुर जिले का पुनर्गठन कर नवीन जिला डीग का गठन किया गया है, जिसका मुख्यालय डीग रखा गया है।
जिला परिषद का गठन: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-11 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए जिला परिषद, डीग का गठन किया गया है।
क्षेत्राधिकार: नवगठित जिला परिषद, डीग का क्षेत्राधिकार राजस्व विभाग की उक्त अधिसूचना में वर्णित क्षेत्र में से नगर निगम/नगर परिषद/नगर पालिका (नगरीय क्षेत्र) को छोड़कर समस्त क्षेत्र रहेगा। यह क्षेत्र जिला परिषद भरतपुर के वर्तमान क्षेत्राधिकार से पृथक रहेगा।
भरतपुर जिला परिषद का कार्य: जिला परिषद भरतपुर वर्तमान स्वरूप में उस तारीख से ही विद्यमान नहीं रहेगी और कार्य करना बंद कर देगी जब नवीन जिला परिषद डीग एवं पुनर्गठित जिला परिषद भरतपुर का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयन्ती पर 15 नवम्बर 2025 को विशेष ग्राम सभा का आयोजन
विशेष ग्राम सभा आयोजन एवं निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा जारी पत्र (एफ.15(10)पंरावि/विधि/वि0ग्रा0सं0/2024/ईफाइल 22379, दिनांक: 14-11-2025) के अनुसार जनजाति गौरव वर्ष भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयन्ती के अवसर पर दिनांक 15 नवम्बर, 2025 को राज्य की सभी ग्राम पंचायतों में विशेष ग्राम सभा का आयोजन किया जाना है।
मुख्य बिंदु एवं निर्देश:
चारागाह विकास: ग्राम पंचायतों में चारागाह विकास हेतु ग्राम सभा में 'एक पंचायत-एक चारागाह' एवं 'एक गांव-एक चारागाह' गतिविधि के संबंध में प्रस्ताव लेकर संलग्न मॉडल प्रारूप के अनुसार चारागाह विकास को ग्राम सभा के स्थायी एजेंडे में जोड़कर प्रस्ताव पारित किए जाने हैं।
चारागाह समिति और अतिक्रमण: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 170 के अंतर्गत चारागाह विकास समिति को क्रियाशील बनाने, चारागाह भूमि का संरक्षण करने तथा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना: वर्ष 2025 के लिए सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के सभी लाभार्थियों के वार्षिक भौतिक सत्यापन तथा अपात्र पेंशनर्स के प्रकरणों को निस्तारित करने हेतु ग्राम सभाओं में व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए।
किसान गिरदावरी: पंचायत स्तर पर आयोजित ग्राम सभाओं में आने वाले किसानों को 'किसान गिरदावरी' मोबाइल ऐप डाउनलोड करने तथा लॉगिन प्रक्रिया की जानकारी देने के निर्देश दिए गए हैं।
जन योजना अभियान (पीपीसी): 'सबकी योजना सबका विकास' के तहत ग्राम पंचायत विकास योजनाएँ (GPDP) तैयार करने के लिए ग्राम सभा की बैठकों में आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
अतः सभी मुख्य/अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद और विकास अधिकारी, पंचायत समिति को उक्त निर्देशों की अक्षरशः पालना करने के निर्देश दिए गए हैं।
राजस्थान राज्य सूचना आयोग का सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 के तहत महत्वपूर्ण निर्णय
राजस्थान राज्य सूचना आयोग निर्णय - दिनांक 16.10.2025
राजस्थान राज्य सूचना आयोग (जयपुर) द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 के अंतर्गत द्वितीय अपील एवं परिवार मामलों पर एक महत्वपूर्ण निर्णय पारित किया गया है। यह निर्णय मुख्य सूचना आयुक्त श्री मोहन लाल लाठर द्वारा दिनांक 16-10-2025 को जारी किया गया।
मुख्य बिंदु एवं विवरण
अपीलार्थी/परिवादी: श्री सज्जन सिंह (निवासी - जोधपुर, राजस्थान) द्वारा वर्ष 2018 से 2025 के बीच आयोग में कुल 1127 द्वितीय अपीलें एवं परिवार दायर किए जा चुके हैं।
लक्ष्यित विभाग: अधिकांश अपीलें/शिकायतें पंचायती राज विभाग के ग्राम पंचायत एवं पंचायत समिति स्तर के लोक सूचना अधिकारियों (ग्राम विकास अधिकारी, विकास अधिकारी आदि) के विरुद्ध संस्थित की गई हैं। बाड़मेर, बालोतरा, जैसलमेर और फलोदी जिलों से संबंधित प्रकरण इसमें शामिल हैं।
शीर्ष न्यायालयों के निर्णय का हवाला: आदेश में माननीय उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों के विभिन्न महत्वपूर्ण निर्णयों (जैसे सीबीआई बनाम आदित्य बंधोपाध्याय) का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया गया है कि आरटीआई अधिनियम का दुरुपयोग, अत्यधिक या पुनरावृत्ति (Repetitive/Excessive) वाले आवेदन, और लोक प्राधिकारियों के सीमित मानव संसाधनों पर अत्यधिक भार डालना कानून की भावना के अनुकूल नहीं है।
कैशबुक व अन्य दस्तावेजों की मांग: आयोग ने अपने निर्णय में यह भी रेखांकित किया है कि एक ही अवधि के कैशबुक की बार-बार प्रतियां मांगना लोक प्राधिकारी के सीमित संसाधनों का अनावश्यक विचलन है।
आयोग का निष्कर्ष: परिशिष्ट-01 में वर्णित मामलों की विशिष्ट परिस्थितियों को देखते हुए, चूंकि प्रार्थी को पूर्व में समुचित सूचना/विनिश्चय प्रेषित किया जा चुका है, अतः शेष प्रकरणों में अतिरिक्त सूचना उपलब्ध कराने के कोई निर्देश नहीं दिए गए हैं और प्रकरणों को निस्तारित किया गया है।
ग्राम पंचायतों में नियुक्त प्रशासकों के मानदेय भुगतान के संबंध में मार्गदर्शन
ग्राम पंचायतों में प्रशासकों के मानदेय भुगतान के संबंध में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद, श्रीगंगानगर को ग्राम पंचायतों में नियुक्त प्रशासकों के मानदेय भुगतान के संबंध में मार्गदर्शन जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
पत्राचार संदर्भ: आपका राजकाज क्रमांक 17879858 दिनांक 19.09.2025 के संदर्भ में।
विभाग का मार्गदर्शन: वर्तमान में ग्राम पंचायतों में नियुक्त प्रशासकों को मानदेय के संबंध में राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 एवं राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 में कोई प्रावधान नहीं है।
यह पत्र वित्तीय सलाहकार, कृष्ण कन्हैया मीणा द्वारा जारी किया गया है और इसकी प्रतिलिपि निजी सचिव, शासन सचिव एवं आयुक्त, पंचायती राज विभाग, जयपुर को सूचनार्थ प्रेषित की गई है।
पंचायती राज संस्थाओं के अधीन विद्यालय भवनों में रंग-ररोगन कार्य के संबंध में दिशा-निर्देश
पंचायती राज संस्थाओं के अधीन विद्यालय भवनों में रंग-ररोगन कार्य
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा राजकाज संदर्भ संख्या 18172438 (क्रमांक एफ 4(1111) परावि/पीसी/विविध/22-00409, दिनांक 28-01-2025) के तहत पंचायती राज संस्थाओं के अधीन आने वाले राजकीय विद्यालयों में रंग-रोगन कार्य करवाए जाने के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य निर्देश एवं बिंदु:
समयसीमा: राजकीय विद्यालय भवन में रंग-रोगन का कार्य मध्यावधि अवकाश (दीपावली अवकाश - दिनांक 13.10.2025 से दिनांक 24.10.2025) के मध्य अनिवार्य रूप से पूर्ण कराया जाना सुनिश्चित किया जाए।
विद्यालयों की सूची: इस हेतु जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक) से पंचायती राज संस्थाओं के अधीन राजकीय विद्यालयों की सूची प्राप्त की जावे।
वित्तीय प्रावधान: रंग-रोगन कार्य हेतु आवश्यकतानुसार राशि राज्य वित्त आयोग - षष्ठम योजना अंतर्गत व्यय की जा सकेगी, जिसमें अधिकतम ₹ 1.00 लाख (एक लाख रुपये तक की) सीमा तय की गई है।
गुणवत्ता एवं रंग: उच्च गुणवत्ता के पेंट/कलर का उपयोग किया जाए तथा प्राथमिकता से पर्यावरण-अनुकूल एवं दीर्घकालीन टिकाऊ पेंट का चयन हो। प्राथमिक/उच्च प्राथमिक विद्यालय भवनों पर संलग्न कलर-कोड के अनुसार ही रंग-ररोगन/पेंट किया जाना सुनिश्चित करें।
प्रगति रिपोर्ट: कार्य अधिकृत पद्धति से कराया जाए तथा प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर पूर्ण किए गए कार्य की प्रगति (पूर्व एवं पश्चात् स्थिति के फोटो सहित) जिला परिषद कार्यालय को प्रस्तुत कर विभाग को प्रेषित की जाए।
ग्राम पंचायतों में नियुक्त प्रशासकों के मानदेय भुगतान के संबंध में मार्गदर्शन
ग्राम पंचायतों में प्रशासकों के मानदेय भुगतान पर मार्गदर्शन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा ग्राम पंचायतों में नियुक्त प्रशासकों के मानदेय भुगतान के संबंध में मार्गदर्शन जारी किया गया है। यह पत्र मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद श्रीगंगानगर को संबोधित है।
मुख्य बिंदु:
विषय: ग्राम पंचायतों में नियुक्त प्रशासकों के मानदेय भुगतान के सम्बन्ध में मार्गदर्शन बाबत।
संदर्भ: आपका राजकाज क्रमांक 17879858 दिनांक 19.09.2025।
विभाग का स्पष्टीकरण: वर्तमान में ग्राम पंचायतों में नियुक्त प्रशासकों को मानदेय के सम्बन्ध में राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 एवं राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 में कोई प्रावधान नहीं है।
यह पत्र वित्तीय सलाहकार कृष्ण कन्हैया मीणा द्वारा जारी किया गया है तथा इसकी प्रतिलिपि निजी सचिव, शासन सचिव एवं आयुक्त, पंचायती राज विभाग, जयपुर को सूचनार्थ प्रेषित की गई है।
ग्राम पंचायतियों की कालावधि के दौरान पट्टे जारी करने के संबंध में निर्देश
ग्राम पंचायतों की कालावधि के दौरान पट्टे जारी करने के संबंध में दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा ग्राम पंचायतों की कालावधि के दौरान पट्टे जारी करने के संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
संदर्भ: विभागीय अधिसूचना दिनांक 16.01.2025
प्रशासनिक समिति का गठन: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा-95 के तहत जिन ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त हो गया है, उनमें निवर्तमान सरपंच को प्रशासक नियुक्त किया गया है तथा संबंधित ग्राम पंचायत के उप सरपंच एवं वार्ड पंचों को प्रशासक समिति का सदस्य बनाया गया है।
शक्तियों का प्रयोग: प्रशासक द्वारा अधिनियम और राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में वर्णित समस्त शक्तियों और कर्तव्यों का प्रयोग प्रशासनिक समिति की बैठक में परामर्श उपरांत किया जाएगा।
पट्टा आवंटन प्रक्रिया: पट्टा आवंटन से संबंधित कार्यवाही में राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के प्रावधानों के तहत जहाँ वार्ड पंच की कमेटी गठित किया जाना आवश्यक है, वहाँ प्रशासक द्वारा प्रशासनिक समिति के सदस्यों की कमेटी गठित कर पट्टा आवंटन संबंधी कार्यवाही की जाए।
यह आदेश डॉ. जोगाराम, शासन सचिव एवं आयुक्त, पंचायती राज विभाग द्वारा जारी किया गया है।
दिनांक 02 अक्टूबर, 2025 को आयोजित होने वाली ग्राम सभा के संबंध में दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के निर्देश
राजकीय दिशा-निर्देशों के अनुसार राज्य की सभी ग्राम पंचायतों में दिनांक 02 अक्टूबर, 2025 को ग्राम सभा का आयोजन किया जाना सुनिश्चित किया गया है। इस ग्राम सभा में प्रमुख रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर कार्रवाई संपादित की जानी है:
1. सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना से संबंधित बिंदु
वर्ष 2025 के लिए सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के सभी लाभार्थियों के वार्षिक भौतिक सत्यापन का कार्य सुनिश्चित किया जाए।
असतत्यापित पेंशनर्स के रुके हुए पेंशन भुगतान और विभिन्न कारणों से अपात्र हुए पेंशनर्स के मामलों के निस्तारण हेतु ग्राम सभा में व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए।
शत-प्रतिशत पेंशनर्स का वार्षिक सत्यापन कराया जाए तथा अपात्र पाए गए पेंशनर्स की सूची व गलत सूचना के आधार पर निरस्त प्रकरणों की जांच उपरांत पुनः प्रारंभ (री-ओपन) करने की कार्रवाई रिपोर्ट सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग को भेजी जाए।
2. किसान गिरदावरी से संबंधित बिंदु
ग्राम सभाओं में आने वाले किसानों को 'किसान गिरदावरी' मोबाइल ऐप डाउनलोड करने तथा लॉगिन प्रक्रिया की जानकारी दी जाए।
DOIT&C द्वारा तैयार स्क्रीन रिकॉर्डेड वीडियो एवं व्हाट्सएप टेम्पलेट्स का प्रचार-प्रसार किया जाए और व्हाट्सएप चैनल को फॉलो कराया जाए।
3. चारागाह विकास से संबंधित बिंदु
ग्राम पंचायतों में चारागाह और संपत्ति विवरण रजिस्टर का संधारण सुनिश्चित किया जाए।
ग्राम सभा में "एक पंचायत-एक चारागाह" एवं "एक गांव-एक चारागाह" गतिविधि के संबंध में प्रस्ताव लेकर चारागाह विकास हेतु आवश्यक कार्रवाई की जाए।
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 170 के अंतर्गत चारागाह विकास समिति का गठन/नवीनीकरण किया जाए और अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया पूरी की जाए।
4. जन योजना अभियान (पीपीसी) - सबकी योजना सबका विकास
पंचायती राज मंत्रालय, भारत सरकार के पत्र दिनांक 17.09.2025 एवं विभागीय पत्र दिनांक 25.09.2025 के अनुसार ग्राम पंचायत विकास योजनाएँ (GPDP) तैयार करने के लिए ग्राम सभा की बैठक में आवश्यक कार्रवाई की जाए।
स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन बाबत महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
राजस्थान सरकार पंचायती राज विभाग द्वारा निर्देश
राजस्थान सरकार के पंचायती राज विभाग द्वारा क्रमांक: एफ 4(1)स्वामित्व/विधि/पंव्रा/2020/पार्ट-3/E-File - 00439 के अंतर्गत स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन के संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए हैं। यह आदेश शासन सचिव एवं आयुक्त डॉ. जोगा राम द्वारा जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
प्रशासक की नियुक्ति: राज्य की ऐसी ग्राम पंचायतें जिनका कार्यकाल दिनांक 16.01.2025, 11.03.2025 व 23.09.2025 तक समाप्त हो गया है और जिनके चुनाव अपरिहार्य कारणों से संपन्न नहीं हो पा रहे हैं, उनमें संबंधित ग्राम पंचायत के निवर्तमान सरपंच को प्रशासक नियुक्त किया गया है।
प्रशासनिक समिति का गठन: ग्राम पंचायतों के कार्यों के सुचारू संचालन के लिए प्रशासक की सहायता हेतु प्रशासनिक समिति गठित की गई है। इसमें कार्यकाल समाप्त होने से पूर्व संबंधित ग्राम पंचायत के उप सरपंच एवं वार्ड पंचों को सदस्य बनाया गया है।
सर्वे समिति में कार्य: विभागीय पत्र क्रमांक 48 दिनांक 18.01.2021 के अनुसार स्वामित्व योजनांतर्गत गठित सर्वे समिति में 2 वार्ड पंचों کے स्थान पर प्रशासनिक समिति के 2 सदस्यों द्वारा सर्वे समिति का कार्य संपादित किया जाएगा।
समस्त जिला कलेक्टरों और मुख्य कार्यकारी अधिकारियों, जिला परिषदों को इस योजना के सफल एवं समयबद्ध क्रियान्वयन हेतु आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
माननीय प्रधानमंत्री महोदय के दिनांक 25.09.2025 के कार्यक्रम के सीधे प्रसारण हेतु ग्राम पंचायत स्तर पर व्यवस्था के संबंध में
माननीय प्रधानमंत्री महोदय के कार्यक्रम के सीधे प्रसारण की व्यवस्था
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ 165(7)ले.ब./परावि/एसएफसी-6/2025-26 के अंतर्गत दिनांक 25.09.2025 को बांसवाड़ा में माननीय प्रधानमंत्री महोदय की उपस्थिति में होने वाले राज्य स्तरीय समारोह के लाइव प्रसारण को ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर दिखाने की समुचित व्यवस्था के संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु एवं वित्तीय स्वीकृति
कार्यक्रम: दिनांक 25.09.2025 को बांसवाड़ा में आयोजित होने वाले राज्य स्तरीय समारोह का जिला, ब्लॉक व ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर लाइव प्रसारण।
उद्देश्य: आमजन को सरकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त हो सके।
व्यवस्थाएं: टी.वी./स्क्रीन व्यवस्था, फर्नीचर, दरी, पेयजल आदि से संबंधित व्यय।
वित्तीय प्रावधान: छठे राज्य वित्त आयोग के अंतर्गत उपलब्ध अनुदान राशि से प्रति ग्राम पंचायत अधिकतम रु. 10,000/- (दस हजार रुपये) तक के व्यय/उपयोग करने की सहमति प्रदान की जाती है।
अनुमोदन: यह सहमति वित्त विभाग की आई.डी. संख्या 332501526 दिनांक 23.09.2025 द्वारा अनुमोदित है।
यह आदेश डॉ. जोंगा राम, शासन सचिव एवं आयुक्त, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा जारी किया गया है।
ग्राम पंचायतों में स्थित भारत निर्माण सेवा केंद्रों एवं ग्राम पंचायत भवनों की मरम्मत और रंग-रोगन के संबंध में दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग का महत्वपूर्ण निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा ग्राम पंचायतों में स्थित भारत निर्माण सेवा केंद्रों एवं ग्राम पंचायत भवनों की मरम्मत और एकरूप रंग-रोगन के संबंध में आदेश जारी किया गया है। यह आदेश क्रमांक एफ 4(1111) परावि/पीसी/विविध/22-00409, दिनांक 19.09.2025 के अंतर्गत जारी किया गया है, जिसके हस्ताक्षर डॉ. जोगा राम, शासन सचिव एवं आयुक्त द्वारा किए गए हैं।
प्रमुख निर्देश एवं समय-सीमा
जिन भवनों में मरम्मत की आवश्यकता है: ऐसे भवनों के लिए राज्य वित्त आयोग एवं पंद्रहवां वित्त आयोग के अंतर्गत मरम्मत और रंग-रोगन की स्वीकृति तत्काल जारी करते हुए दिनांक 15.11.2025 तक कार्य पूर्ण किया जाए।
जिन भवनों में केवल रंग-रोगन की आवश्यकता है: ऐसे भवनों के लिए तत्काल स्वीकृति जारी करते हुए दिनांक 31.10.2025 तक कार्य पूर्ण किया जाए।
रंग-रोगन के लिए निर्धारित मानक
बाहरी दीवारें: अच्छी गुणवत्ता का Pink शेड का Paint (PU + Silicon Modified 100% Acrylic Exterior Emulsion) किया जाए।
आंतरिक दीवारें: Cream / Off White शेड का Paint किया जाए।
सीलिंग (छत): White शेड का Paint (PU Reinforced Luxury Acrylic Emulsion) किया जाए।
प्रगति निगरानी
उक्त कार्यों की प्रगति दर्ज करने के लिए पृथक से गूगल स्प्रेडशीट/फॉर्मेट का लिंक भेजा जा रहा है, जिस पर नियमित रूप से प्रगति दर्ज कराई जानी है। संबंधित सभी मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (जिला परिषद) को इन निर्देशों की समयबद्ध क्रियान्विति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
ग्राम पंचायतों में स्थित भारत निर्माण सेवा केंद्रों एवं ग्राम पंचायत भवनों की मरम्मत और रंग-रोगन के संबंध में दिशा-निर्देश
ग्राम पंचायत भवनों एवं भारत निर्माण सेवा केंद्रों की मरम्मत और एकरूप रंग-रोगन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ 4(1111) परावि/पीसी/विविध/22-00409 (दिनांक 19.09.2025) के अनुसार, माननीय मुख्यमंत्री महोदय की समीक्षा बैठक के निर्देशों के पालन में सभी ग्राम पंचायतों एवं भारत निर्माण सेवा केंद्रों में मरम्मत और एकरूप रंग-रोगन के कार्य करवाने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य निर्देश एवं समय-सीमा
मरम्मत और रंग-रोगन (वित्तीय स्वीकृति सहित): जिन भवनों में मरम्मत की आवश्यकता है, वहां राज्य वित्त आयोग एवं पंद्रहवां वित्त आयोग के अंतर्गत तुरंत स्वीकृति जारी करते हुए 15.11.2025 तक कार्य पूर्ण किया जाए।
केवल रंग-रोगन: जिन भवनों में केवल रंग-रोगन की आवश्यकता है, वहां तत्काल स्वीकृति जारी करते हुए 31.10.2025 तक कार्य पूर्ण किया जाए।
रंग एवं पेंट के मानक: भवन की बाहरी दीवारों पर अच्छी गुणवत्ता का Pink शेड का Paint (PU + Silicon Modified 100% Acrylic Exterior Emulsion), आंतरिक दीवारों पर Cream/Off White एवं छत (सीलिंग) पर White शेड का Paint (PU Reinforced Luxury Acrylic Emulsion) किया जाए।
प्रगति की मॉनिटरिंग: उक्त कार्यों की प्रगति हेतु अलग से Google Spreadsheet/Format का लिंक भेजा जा रहा है, जिस पर नियमित प्रगति दर्ज की जाए।
राजस्थान विवाहों का अनिवार्य रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 2009 के अंतर्गत विधवा/विधुर के विवाह पंजीयन के संबंध में दिशानिर्देश
विधवा/विधुर के विवाह पंजीयन के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय, राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान विवाहों का अनिवार्य रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 2009 के अंतर्गत विधवा/विधुर के विवाह पंजीयन के संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं। इस संबंध में जिला नोडल विवाह पंजीयन अधिकारी एवं उप/सहायक निदेशकों को पत्र प्रेषित किए गए हैं।
मुख्य बिंदु एवं प्रक्रिया
शपथ पत्रों का सत्यापन: विवाह पंजीयन हेतु प्रस्तुत किए जाने वाले शपथ पत्रों को पब्लिक नोटरी से प्रमाणित कराना एवं नियमानुसार नोटरी टिकट लगाना अनिवार्य है।
आवश्यक शपथ पत्र:
विवाह के मृत पक्ष (वर/वधु) की ओर से माता/पिता अथवा संरक्षक की ओर से दिया जाने वाला शपथ पत्र।
विधवा/विधुर द्वारा पाई पेपर पर नोटरी द्वारा सत्यापित शपथ पत्र।
विवाह की पुष्टि हेतु दो स्वतंत्र गवाहों के शपथ पत्र अलग-अलग पाई पेपर पर नोटरी द्वारा सत्यापित।
मृत्यु प्रमाण पत्र: विवाह पंजीयन हेतु प्रस्तुत किए जाने वाले आवेदन पत्र के साथ विवाह के मृत पक्ष का मृत्यु प्रमाण पत्र आवश्यक रूप से लिया जाए।
माता-पिता/संरक्षक द्वारा शपथ पत्र न देने पर प्रक्रिया: यदि मृत पक्ष के माता-पिता या संरक्षक द्वारा 15 दिवस में शपथ पत्र नहीं दिए जाते हैं या उपस्थित नहीं होते हैं, तो रजिस्ट्रार विवाह में उपस्थित अन्य चार प्रतिष्ठित गवाहों के शपथ पत्र एवं बयान पश्चात संपूर्ण तथ्यों की जांच करेगा और स्वयं की संतुष्टि उपरांत विवाह का पंजीयन करेगा तथा पंजीयन रजिस्टर में संबंधित गवाहों के हस्ताक्षर भी लेगा।
ग्रामीण सेवा शिविर 18 सितम्बर, 2025 से आयोजित किये जाने बाबत
ग्रामीण सेवा शिविरों का आयोजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुसार राज्य की प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर "ग्रामीण सेवा शिविर" का आयोजन 18 सितम्बर, 2025 से किया जाना है।
मुख्य निर्देश एवं व्यवस्थाएं
अभियान की अवधि तब तक होगी जब तक कि प्रत्येक पंचायत समिति की प्रत्येक ग्राम पंचायत में शिविर का आयोजन न हो जावे।
शिविर स्थल पंचायत मुख्यालय पर पंचायत भवन, स्कूल भवन या उपलब्ध अन्य सार्वजनिक स्थानों पर निर्धारित किए जाएंगे।
आगंतुकों के लिए पेयजल की समुचित व्यवस्था, मेज, कुर्सियां, दरियां और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं ग्राम पंचायत द्वारा की जाएंगी।
वित्तीय प्रावधान एवं व्यय
शिविर आयोजन एवं संचालन हेतु षष्ठ राज्य वित्त आयोग अंतर्गत पंचायती राज संस्थाओं को देय अनुदान राशि के उपयोग हेतु विभागीय पत्रांक 347 राजकाज क्रमांक 13247621 दिनांक 28.01.2025 के दिशा-निर्देशों के बिंदु सं. (अ)(3)(XIII) के अंतर्गत ग्राम पंचायत को स्वीकृत अनुदान राशि में से अधिकतम राशि रु. 25,000/- प्रति ग्राम पंचायत व्यय/उपयोग करने की सहमति प्रदान की जाती है।
यह सहमति वित्त विभाग की आई.डी. संख्या 332501444 दिनांक 16.09.2025 द्वारा अनुमोदित है। इस कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान करने के निर्देश दिए गए हैं।
ग्राम पंचायत द्वारा जारी पट्टे का नामांतरण एवं हस्तांतरण आवेदन प्रारूप व आदेश प्रक्रिया
ग्राम पंचायत पट्टा नामांतरण एवं हस्तांतरण प्रक्रिया
यह दस्तावेज़ राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 के नियम 157(1) के अंतर्गत ग्राम पंचायत द्वारा जारी पट्टों के नामांतरण (Mutation) और हस्तांतरण से संबंधित आवेदन प्रारूप, आदेश और कार्यवाही विवरण प्रदान करता है।
मुख्य बिंदु:
नियम एवं निर्देश: यह प्रक्रिया राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 के नियम 157(1) तथा ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के पत्र क्रमांक एफ 4 (86) नामांतरण / विधि / परा / 2018 / 603 जयपुर दिनांक 09.05.2018 की अनुपालना में है।
आवेदन का उद्देश्य: मूल पट्टाधारी की मृत्यु होने के पश्चात, उनके उत्तराधिकारियों द्वारा आबादी भूमि के पट्टे को अपने नाम नामांतरण या हस्तांतरित कराने हेतु सरपंच एवं ग्राम विकास अधिकारी महोदय को आवेदन प्रस्तुत किया जाता है।
संलग्नक: आवेदन के साथ मूल विक्रय विलेख (पट्टा), मूल विक्रय विलेख की फोटो प्रति, पट्टा जारी की रसीद, आधार कार्ड और मतदाता पहचान पत्र संलग्न किए जाते हैं।
कार्यालयीन प्रक्रिया: पंचायत रिकॉर्ड से मिलान करने के बाद, ग्राम विकास अधिकारी और सरपंच द्वारा पत्रावली तैयार की जाती है और पंचायत बैठक में अनुमोदन हेतु प्रस्तुत की जाती है। 100 रुपये का निर्धारित शुल्क प्राप्त कर नामांतरण/हस्तांतरण आदेश जारी किया जाता है।
कार्यालय पटवार मण्डल - मकान व आबादी भूमि संबंधी रिपोर्ट प्रारूप
कार्यालय पटवार मण्डल रिपोर्ट प्रारूप
यह दस्तावेज कार्यालय पटवार मण्डल, तहसील और जिला स्तर पर उपयोग होने वाला एक आधिकारिक रिपोर्ट प्रारूप है। इस प्रारूप का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में आवेदक के मकान और आबादी भूमि से संबंधित विवरण को पटवार मण्डल के रिकॉर्ड के आधार पर सत्यापित करना है।
मुख्य बिंदु और विवरण:
कार्यालय विवरण: पटवार मण्डल, तहसील और जिला का उल्लेख करने के लिए निर्धारित स्थान।
आवेदक की जानकारी: आवेदक का नाम, पिता का नाम, जाति और निवास स्थान की प्रविष्टि।
भूमि और मकान का विवरण: ग्राम की आबादी भूमि में बने मकान, आराजी नंबर और मकान का कुल क्षेत्रफल (वर्ग फीट में) दर्ज करने का प्रावधान।
सत्यापन: पटवारी हल्के के हस्ताक्षर के साथ रिपोर्ट जारी करने का स्थान।
यह प्रपत्र पंचायती राज और ग्रामीण प्रशासनिक कार्यों के अंतर्गत आबादी भूमि व मकान से जुड़े सत्यापन कार्यों में उपयोगी है।
दिनांक 26 नवम्बर 2024 को विशेष ग्राम सभा के आयोजन बाबत
संविधान दिवस (Constitution Day) के अवसर पर विशेष ग्राम सभा का आयोजन
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज) के पत्र क्रमांक एफ.15(10)पंरावि/विधि/विग्र0सभा/24/ईफाइल 22379 जयपुर, दिनांक 21.11.2024 के माध्यम से सभी मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद और विकास अधिकारी, पंचायत समिति को निर्देश दिए गए हैं कि दिनांक 26 नवम्बर 2024 को संविधान लागू होने के 75वें वर्ष के उत्सव के रूप में सभी ग्राम पंचायतों में विशेष ग्राम सभा का आयोजन किया जाए।
विशेष ग्राम सभा में आयोजित की जाने वाली मुख्य गतिविधियाँ:
संविधानिक मूल्य पर प्रश्नोत्तरी: युवा पीढ़ी को शिक्षित करने और नागरिक जिम्मेदारी की भावना को बढ़ावा देने के लिए।
स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के साथ जुड़ाव: महिलाओं को सशक्त बनाने और राष्ट्र निर्माण में उनके आवश्यक योगदान पर चर्चा।
आदिवासी समुदायों में क्षमता निर्माण (पेसा गांव): संवैधानिक अधिकारों और कानूनी हकदारी के बारे में जागरूकता बढ़ाना।
अधिकारों और कर्तव्यों पर बहस: स्थानीय निकायों में नागरिकों के अधिकारों और कर्तव्यों पर चर्चा।
इसके अतिरिक्त, क्षेत्रीय भाषा में संविधान के अमृत महोत्सव के बारे में बताना तथा संविधान की प्रस्तावना पढ़ना भी सुनिश्चित किया जाए।
दिनांक 15 नवम्बर 2024 को आयोजित होने वाली विशेष ग्राम सभा के संबंध में दिशा-निर्देश
विशेष ग्राम सभा और जनजातीय गौरव दिवस आयोजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा जारी पत्र क्र. एफ.15(10)पंरावि/विधि/विग्रामसभा/24/ईफाइल 22379 दिनांक 14.11.2024 के माध्यम से दिनांक 15 नवम्बर 2024 को आयोजित होने वाली विशेष ग्राम सभा के संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश प्रदान किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
विशेष ग्राम सभा का आयोजन: आदिवासी नेता और महान व्यक्तित्व भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में पेसा और वन अधिकार अधिनियम (FRA) गांवों में 15 नवम्बर 2024 को विशेष ग्राम सभा सह-अभिविन्यास/प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाना है।
आदर्श आचार संहिता: जिन विधानसभा क्षेत्रों में राजस्थान विधानसभा उप चुनाव, 2024 की आदर्श आचार संहिता प्रभावी है, उन जिलों में विशेष ग्राम सभा सह-अभिविन्यास/प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जाने हैं।
माननीय प्रधानमंत्री महोदय का संबोधन: पंचायती राज मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देशानुसार 15 नवम्बर 2024 को जमुई, बिहार में जनजातीय गौरव दिवस कार्यक्रम का संबोधन माननीय प्रधानमंत्री महोदय द्वारा किया जा रहा है। इसका सीधा प्रसारण 15 नवम्बर 2024 को आयोजित विशेष ग्राम सभा में किया जाना है।
रिकॉर्डेड संस्करण: 15 नवम्बर 2024 के बाद आयोजित होने वाली ग्राम सभाओं में माननीय प्रधानमंत्री महोदय के संबोधन का रिकॉर्डेड संस्करण प्रसारित किया जाएगा।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता संबंधी कार्य और मॉडल टेंडर डॉक्यूमेंट के संबंध में दिशा-निर्देश
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता संबंधी कार्यों के लिए मॉडल टेंडर और दरें
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रामीण विकास, अनुभाग-5), जयपुर द्वारा दिनांक 03/09/2024 को जारी स्थायी आदेश संख्या 01/2024 के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता संबंधी कार्यों के संपादन के संबंध में निर्देश और मॉडल टेंडर डॉक्यूमेंट जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
स्वच्छता गतिविधियां: घर-घर कचरा संग्रहण एवं पृथक्करण, सड़क/बाजार/मुख्य चौक की सफाई, नाली सफाई और सामुदायिक स्वच्छता परिसर (CSC) की सफाई शामिल है।
निर्धारित दरें: घर-घर कचरा संग्रहण (वाहन पंचायत द्वारा उपलब्ध कराने पर रु. 0.88 प्रति घर प्रतिदिन और संवेदक द्वारा वाहन उपलब्ध कराने पर रु. 2.63 प्रति घर प्रतिदिन), कचरा पृथक्करण (रु. 0.45 प्रति घर प्रतिदिन), सड़क सफाई (रु. 0.10 प्रति वर्गमीटर), नाली सफाई (रु. 57.69 प्रति घनमीटर) और सामुदायिक स्वच्छता परिसर सफाई (रु. 49.08 प्रति एस.सी.एस. एक बारिज) निर्धारित की गई हैं।
समय सीमा: परिवारों की संख्या एवं स्वच्छता आकलन सितंबर माह का प्रथम सप्ताह, निविदा जारी करना सितंबर माह का द्वितीय सप्ताह, कार्य आदेश जारी करना सितंबर माह का चतुर्थ सप्ताह और कार्य प्रारंभ 02 अक्टूबर को निर्धारित है।
नियम एवं शर्तें: सभी कार्य RTPP Act 2012 और RTPP Rules 2013 के प्रावधानों के तहत ई-निविदा प्रक्रिया द्वारा संपादित किए जाएंगे।
स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी क्रमांक एफ44(51)पंच्रावि/प्रशि./स्वामित्व/2023/पार्ट-1/E-File - 01834 (दिनांक 27.08.2024) के अंतर्गत 'स्वामित्व योजना' के क्रियान्वयन में जिलों में आ रही विभिन्न समस्याओं के निराकरण हेतु राजस्व विभाग एवं पंचायती राज विभाग के समन्वय से महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश प्रसारित किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
सीमाज्ञान एवं चूना मार्किंग: आबादी क्षेत्र की बाहरी सीमा का सीमाज्ञान संबंधित पटवारी द्वारा किए जाने के उपरांत ग्राम पंचायत के कर्मियों द्वारा चूना मार्किंग की जाएगी। चूना मार्किंग के समय पटवारी की उपस्थिति अनिवार्य है।
सड़क सीमा एवं रेलवे लाइन दूरी: राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 के नियम 161 के अनुसार, जिन व्यक्तियों के मकान आबादी भूमि में स्थित हैं किंतु सड़क सीमा या रेलवे लाइन सीमा में आ रहे हैं, उन्हें प्रॉपर्टी पार्सल का वितरण नहीं किया जाए।
एक से अधिक भूखंड: किसी व्यक्ति के स्वामित्व में एक से अधिक भूखंड होने और उनका पट्टा न होने पर सिर्फ पट्टा शुद्धा भूखंड का प्रॉपर्टी पार्सल देय है, शेष का नहीं।
महिला पट्टा धारक: राजस्थान पंचायती राज नियम 157(2) के तहत 300 वर्गगज तक के महिला पट्टा धारक की प्रॉपर्टी आईडी का क्षेत्रफल 300 वर्गगज से अधिक होने पर नियम 165(4) के अनुसार डीएलसी दर से प्रभार लेकर विक्रय विलेख दिया जा सकता है, अन्यथा प्रॉपर्टी आईडी विवादग्रस्त अंकित की जाए।
आपत्तियां एवं अपील: स्वामित्व योजना अंतर्गत आपत्तियों के आमंत्रण हेतु विज्ञापन नियमानुसार प्रकाशित किए जाएं। पट्टे या प्रॉपर्टी कार्ड वितरण में त्रुटि/विवाद होने पर राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 के नियम 166 एवं अधिनियम 1994 की धारा 97 के संबंधित अपीलीय प्रावधान ही लागू होंगे।
राजस्थान संपर्क पोर्टल पर प्राप्त लाल मुंह के बंदर एवं हनुमान लंगूर से संबंधित परिवादों के निस्तारण बाबत आदेश
राजस्थान संपर्क पोर्टल परिवाद निस्तारण एवं बंदर/लंगूर पकड़ने के संबंध में निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान संपर्क पोर्टल (181 सी.एम. हेल्पलाइन) पर प्राप्त होने वाले परिवादों के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
परिवादों का अंतरण: राजस्थान संपर्क पोर्टल पर लाल मुंह के बंदर (Rhesus Macaque) एवं हनुमान लंगूर (Presbytis Entellus) से संबंधित प्राप्त परिवाद संबंधित ग्राम पंचायत को भिजवाए जाने का प्रावधान है।
ग्राम पंचायत स्तर पर कार्यवाही: जिले के अधीन ग्राम पंचायतें इन बंदरों को भगाए जाने / पकड़े जाने के संबंध में आवश्यकतानुसार, नियमानुसार अपने स्तर से व्यय कर, संबंधित पेशेवर (Professionals) की मदद लेकर उचित कार्यवाही कर सकती हैं।
वन विभाग की अधिसूचना: वन विभाग की अधिसूचना दिनांक 18.02.2000 के अनुसार वन्य जीव (सुरक्षा) अधिनियम-1972 के तहत जिला कलेक्टर्स को लाल मुंह के बंदर एवं हनुमान लंगूर के संबंध में प्राधिकृत अधिकारी नियुक्त किया गया है।
विभागीय ग्रामीण कार्य निर्देशिका 2025 के बिंदु संख्या 10 एवं परिशिष्ट 2 के प्रावधानों के संबंध में मार्गदर्शन
विभागीय ग्रामीण कार्य निर्देशिका 2025 - भूमि स्वामित्व एवं मार्गदर्शन
ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न निर्माण कार्यों की तकनीकी, सुगमता और गुणवत्ता के लिए विभागीय ग्रामीण कार्य निर्देशिका-2025 लागू की गई है। इस निर्देशिका के बिंदु संख्या 10 एवं परिशिष्ट 2 के प्रावधानों के संबंध में जिला कलेक्टरों को आवश्यक मार्गदर्शन जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु एवं दिशा-निर्देश
आबादी भूमि: नए आंगनबाड़ी भवन, विद्यालय, सामुदायिक भवन, पंचायत भवन, स्वास्थ्य केंद्र, शौचालय आदि के निर्माण के लिए आबादी क्षेत्र में सक्षम प्राधिकारी से अनापत्ति प्रमाण-पत्र प्राप्त करना या नाम आवंटन/पट्टा जारी कराना आवश्यक है।
रास्ता/गोचर भूमि: नदी, नाला, तालाब के भराव क्षेत्र, रेलवे लाइन और सड़क सीमा के पास निर्माण स्वीकृत नहीं है। हालांकि सार्वजनिक शौचालयी, नालियों, ट्यूवेल, टंकी आदि के निर्माण के लिए स्थानीय स्तर पर उचित निर्णय लिया जा सकता है।
खातेदारी भूमि (दान/समर्पण): परिसम्पत्तियों के निर्माण हेतु खातेदारी भूमि दान या उपहार स्वरूप ली जा सकती है, जिसके लिए नामांतरण, खसरा में लोकेशन दर्ज करना और सीमाज्ञान करवाना अनिवार्य है।
परिसम्पत्तियों का नामकरण: नवनिर्मित परिसम्पत्तियों (जैसे आंगनबाड़ी, विद्यालय, सामुदायिक भवन, पंचायत भवन आदि) की भूमि स्वामित्व शासकीय कार्यालय/ग्राम पंचायत के नाम होना अनिवार्य है।
पंचायती राज संस्थाओं के जनप्रतिनिधियों के मानदेय में संशोधन की अधिसूचना
पंचायती राज जनप्रतिनिधियों के मानदेय में संशोधन
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज) द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक एफ.951(19)(41)परावि/लेखा/नि.आ./बजट घोषणा/2022-23 के अनुसार, माननीय उप मुख्यमंत्री (वित्त) महोदया की दिनांक 08.02.2024 की बजट घोषणा के बिंदु सं.-48 के क्रम में पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के मानदेय की दरों में संशोधन किया गया है।
मानदेय की संशोधित दरें
जिला प्रमुख, जिला परिषद: वर्तमान दर 13800/- रुपये प्रति माह से बढ़ाकर संशोधित दर 15180/- रुपये प्रति माह की गई है।
प्रधान, पंचायत समिति: वर्तमान दर 9660/- रुपये प्रति माह से बढ़ाकर संशोधित दर 10626/- रुपये प्रति माह की गई है।
सरपंच, ग्राम पंचायत: वर्तमान दर 5520/- रुपये प्रति माह से बढ़ाकर संशोधित दर 6072/- रुपये प्रति माह की गई है।
जनप्रतिनिधियों को देय मानदेय का भुगतान राज्य वित्त आयोग के तहत मिलने वाली अनुदान राशि से किया जाएगा। यह आदेश दिनांक 01.04.2024 से लागू होगा। यह अधिसूचना वित्त (व्यय-5) विभाग की आईडी संख्या 332400440 दिनांक 14.03.2024 से प्राप्त सहमति के अनुसरण में जारी की गई है।
विमुक्त, घुमन्तु एवं अर्द्धघुमन्तु आवासहीन व्यक्तियों को भूखंड/पट्टा आवंटन के संबंध में परिपत्र एवं दिशा-निर्देश
विमुक्त, घुमन्तु एवं अर्द्धघुमन्तु आवासहीन व्यक्तियों को भूखंड आवंटन
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा विमुक्त, घुमन्तु एवं अर्द्धघुमन्तु श्रेणी के आवासहीन व्यक्तियों को नियमानुसार भूखंड और पट्टा आवंटन करने के संबंध में आवश्यक परिपत्र एवं दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
प्रमुख बिंदु
नियम का संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम-158 के अंतर्गत पंचायतें 300 वर्गगज तक की आबादी भूमि रियायती दरों या पात्र श्रेणियों के लिए निःशुल्क आवंटित कर सकती हैं।
रियायती दरें (नियम 158(2)):
1000 से कम आबादी वाले गांवों में (1991 की जनगणना): 2/- रुपये प्रति वर्ग मीटर
1001 से 2000 की आबादी वाले गांवों में (1991 की जनगणना): 5/- रुपये प्रति वर्ग मीटर
2000 से अधिक आबादी वाले गांवों में (1991 की जनगणना): 10/- रुपये प्रति वर्ग मीटर
पट्टा वितरण और कार्यक्रम: राज्य सरकार के निर्देशानुसार पात्र परिवारों को भूखंड/पट्टा वितरण के संबंध में समय-समय पर अभियान चलाए गए हैं और जिला एवं स्थानीय स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाने के निर्देश हैं।
आवश्यक कार्रवाई: सभी संबंधित जिला कलेक्टरों, मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (जिला परिषद) और विकास अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे पात्र आवासहीन परिवारों का चिन्हीकरण कर पट्टे तैयार कराने और वितरण की कार्रवाई सुनिश्चित करें।
ग्राम पंचायत द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के पात्र परिवारों को पट्टा जारी करने के संबंध में निर्देश
प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत पट्टा आवंटन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा ग्राम पंचायतों द्वारा पट्टा जारी करने के संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
विषय: ग्राम पंचायत द्वारा पट्टा जारी करने बाबत।
कारण: राज्य सरकार के ध्यान में लाया गया था कि कतिपय ग्राम पंचायतों में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की पात्रता/वरीयता सूची में सम्मिलित परिवारों को आबादी भूमि का पट्टा आवंटित नहीं हो पा रहा है।
योजना का महत्व: प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण राज्य सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं में शामिल है।
निर्देश: सभी मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद को निर्देशित किया गया है कि वे प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की पात्रता/वरीयता सूची में शामिल समस्त परिवारों को निर्धारित प्रक्रिया अपनाते हुए नियमनुसार भूमि/पट्टे आवश्यक रूप से आवंटित किया जाना सुनिश्चित करावें।
यह आदेश शासन सचिव एवं आयुक्त, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा जारी किया गया है।
ग्राम पंचायत द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के पात्र परिवारों को पट्टा जारी करने बाबत निर्देश
ग्राम पंचायत द्वारा पट्टा जारी करने के संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत पट्टा आवंटन के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
राज्य सरकार के ध्यान में लाया गया था कि कतिपय ग्राम पंचायतों में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की पात्रता/वरीयता सूची में सम्मिलित परिवारों को आबादी भूमि का पट्टा आवंटित नहीं हो पा रहा है।
चूंकि प्रधानमंत्री आवास योजना राज्य सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं में शामिल है, इसलिए सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है।
समस्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद को निर्देशित किया जाता है कि प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की पात्रता/वरीयता सूची में शामिल समस्त परिवारों को निर्धारित प्रक्रिया अपनाते हुए नियमानुसार भूमि/पट्टे आवश्यक रूप से आवंटित किया जाना सुनिश्चित करावें।
यह आदेश शासन सचिव एवं आयुक्त, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के हस्ताक्षर से जारी किया गया है।
ग्राम पंचायतों/पंचायत समितियों द्वारा पट्टा बही का संधारण किए जाने बाबत् परिपत्र
परिचय
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों द्वारा पट्टा बही का संधारण किए जाने के संबंध में परिपत्र जारी किया गया है। विभाग के ध्यान में आया था कि कतिपय पंचायत समिति स्तर पर ग्राम पंचायतों द्वारा जारी पट्टों का रिकॉर्ड संधारित नहीं किया जा रहा है, जिससे अनियमित पट्टे जारी होने की संभावना रहती है।
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 168 के मुख्य प्रावधान
नियम 168(1): नीलामी, परक्रामण या आवंटन द्वारा किए गए समस्त विक्रय जिनके लिए पट्टे जारी किए गए, उनका अभिलेख पंचायत द्वारा प्ररूप 24 में रखी गई पट्टा बही में रखा जाएगा।
नियम 168(2): पंचायत संबंधित पंचायत समिति के विकास अधिकारी को प्रत्येक मास के प्रथम सप्ताह में पट्टा बही की एक प्रति अग्रषित करेगी। विकास अधिकारी एक नियंत्रण रजिस्टर रखेगा जिसमें पंचायतवार लेजर रखा जाएगा और सत्यापन के प्रमाणस्वरूप प्रविष्टि पर हस्ताक्षर करेगा ताकि पिछली तारीखों में पट्टे जारी करना रोका जा सके।
नियम 168(3): पंचायत समिति अपने स्तर पर पट्टा बहियां तीन परत में छपवाएगी। सभी पट्टों पर पुस्तक संख्या व क्रम संख्या होगी। पट्टे की पहली परत आवंटी को, दूसरी परत पंचायत कार्यालय में तथा तीसरी परत पंचायत समिति को रिकॉर्ड हेतु भेजी जाएगी।
अनुपालन एवं निर्देश
समस्त संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया जाता है कि राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 168 में वर्णित प्रावधानों की पालना कड़ाई से अमल में लाई जाए। उक्त परिपत्र की अवहेलना किए जाने वाले संबंधित विकास अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
राजस्थान पंचायती राज संस्थाओं में बैठक कार्यवाही विवरण संधारण बाबत परिपत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग परिपत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 23-01-2024 को क्रमांक एफ.4(3)दिशा-निर्देश/विधि/पंश/2024/27 के अंतर्गत पंचायती राज संस्थाओं की बैठकों की कार्यवाही के संधारण के संबंध में महत्वपूर्ण परिपत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
नियम-44 के प्रावधान: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम-44 के अनुसार पंचायत में सरपंच, पंचायत समिति में विकास अधिकारी तथा जिला परिषद में मुख्य कार्यकारी अधिकारी द्वारा कार्यवाही का अभिलेखन हिंदी में किया जाना अनिवार्य है।
हस्ताक्षर की प्रक्रिया: बैठक समाप्त होने के पश्चात कार्यवाही विवरण के अंत में उपस्थित सदस्यों के हस्ताक्षर करवाए जाएं। विवरण के अंत में बिना कोई रिक्त स्थान छोड़े हस्ताक्षर कराए जाएं ताकि बाद में कोई विवरण दर्ज न किया जा सके।
प्राइवेट प्रिंटेड रजिस्टरों पर रोक: बाजार से खरीदे गए प्राइवेट प्रिंटेड कार्यवाही विवरण रजिस्टरों (जिन पर प्रपत्र संख्या 24 छपा होता है) का उपयोग तुरंत प्रभाव से बंद किया जाए, क्योंकि राजस्थान पंचायत एवं न्याय पंचायत (सामान्य) नियम, 1961 का वह नियम निरस्त हो चुका है और वर्तमान में राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1953 अस्तित्व में नहीं है।
लाइनदार रजिस्टर का उपयोग: कार्यवाही विवरण दर्ज करने हेतु किसी प्रिंटेड रजिस्टर की आवश्यकता नहीं है, केवल सामान्य लाइनदार रजिस्टर का उपयोग किया जा सकता है।
विकसित भारत संकल्प यात्रा के सफल क्रियान्वयन एवं वित्तीय प्रावधान के संबंध में दिशा-निर्देश
विकसित भारत संकल्प यात्रा का सफल क्रियान्वयन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा विकसित भारत संकल्प यात्रा के सफल क्रियान्वयन के संबंध में दिनांक 22-12-2023 को आदेश जारी किया गया है।
मुख्य उद्देश्य एवं विशेषताएँ
भारत सरकार द्वारा संचालित विभिन्न फ्लेगशिप योजनाओं की जानकारी आमजन तक पहुँचाने, पात्र व्यक्तियों को लाभान्वित करने और योजनाओं के निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने के उद्देश्य से यह यात्रा राजस्थान के सभी जिलों की प्रत्येक ग्राम पंचायत तथा 10 हजार से अधिक आबादी के शहरी स्थानीय निकायों में 26 जनवरी 2024 तक जारी रहेगी। यात्रा की प्रमुख विशेषताओं में:
पहुँच से छूटे लोगों तक पहुँचना
प्रसार और जागरूकता बढ़ाना
संभावित लाभार्थियों का नामाकन एवं विशेष कैंपों का आयोजन
प्रत्येक ग्राम पंचायत में मोबिलाइजेशन, सांस्कृतिक प्रदर्शन एवं सूचना तकनीक का उपयोग
वित्तीय प्रावधान एवं व्यय सीमा
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के आदेश क्रमांक एफ 165(07)पाइफो/एसएफसी/षष्टम/दिशा निर्देश/2021-22/100 दिनांक 25-01-2022 के अनुसार पंचायती राज संस्थाओं में शिविरों/अभियानों के लिए व्यय सीमा निर्धारित है। विकसित भारत संकल्प यात्रा के सफल क्रियान्वयन हेतु:
प्रति जिला परिषद: रु. 0.50 लाख तक का व्यय
प्रति ग्राम पंचायत: रु. 0.20 लाख तक का व्यय
संबंधित जिला परिषद एवं ग्राम पंचायतें यह व्यय षष्ठम राज्य वित्त आयोग की उपलब्ध अवशेष राशि से करना सुनिश्चित करें तथा इस कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान करें।
मदरसा व मस्जिद के पट्टे चाहने के संबंध में मार्गदर्शन बाबत आदेश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग का मार्गदर्शन
यह दस्तावेज़ ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा जारी किया गया पत्र है, जिसका क्रमांक एफ.139(78)विविध/पार्ट-1/विधि/पंज/23 है। यह पत्र अति० मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद, सीकर को संबोधित है।
मुख्य बिंदु:
विषय: मदरसा व मस्जिद के पट्टे चाहने के संबंध में मार्गदर्शन बाबत।
संदर्भ: जिला परिषद सीकर का पत्र क्रमांक 733 दिनांक 26.06.2023।
विभाग का स्पष्टीकरण: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में किसी धार्मिक संस्था को निःशुल्क पट्टा आवंटन का कोई प्रावधान नहीं है।
स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
स्वामित्व योजना क्रियान्वयन निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन के संबंध में समस्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद, राजस्थान को महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
सम्पत्ति दस्तावेज तैयार करना: स्वामित्व योजनांतर्गत भू-खण्ड धारकों का सम्पत्ति दस्तावेज (टाईटल डॉक्यूमेंट) तैयार करते समय पंचायती राज नियम 1996 के अध्याय 9 में वर्णित स्थावर सम्पत्तियों से संबंधित प्रावधान अनुरूप पुराने गृहों का विनियमितीकरण, भूमियों का कमजोर वर्गों को आवंटन, भूमियों का रियायती कीमत पर आवंटन, सरकारी संस्थाओं को आबाद भूमि का आवंटन एवं नीलामी से संबंधित नियमों में वर्णित प्रावधान अनुरूप ही नियमानुसार कार्यवाही की जानी है।
भौतिक सर्वेक्षण एवं पट्टा निर्माण: भौतिक सर्वेक्षण उपरांत भारतीय सर्वेक्षण विभाग से मैप-2 प्राप्त होने पर राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 के प्रावधानों के तहत पट्टा निर्माण की कार्यवाही की जावे। साथ ही यह भी सुनिश्चित कर लिया जावे कि पूर्व में जारी पट्टे एवं वर्तमान कब्जे के आधार पर क्षेत्रफल कम या अधिक होने की स्थिति में, पट्टे में नियमानुसार संशोधन कर लेवें तथा यह भी सुनिश्चित किया जावे कि पंचायती राज संस्थाओं को किसी भी प्रकार की राजस्व हानि न हो।
सभी जिलों में इन निर्देशों का अध्ययन कर योजना के सफल क्रियान्वयन हेतु आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन गांव के संग अभियान 2023 के दौरान पट्टा जारी करने के संबंध में निर्देश
राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2023 एवं प्रशासन गांव के संग अभियान
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा प्रशासनिक आदेश क्रमांक एफ 139 (45) परावि/विधि/संशो/2021/190 दिनांक 02/06/2023 जारी किया गया है। इसके माध्यम से राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन करते हुए महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना विवरण: विभागीय अधिसूचना दिनांक 23.5.2023 (जी.एस.आर. 28) के तहत राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2023 लागू किए गए हैं जो तुरंत प्रभाव से प्रवृत्त हो गए हैं।
नियम 157 में संशोधन: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 के उप-नियम (1) के परंतुक में "प्रशासन गांव के संग अभियान 2021" के स्थान पर "प्रशासन गांव के संग अभियान 2021 और प्रशासन गांव के संग अभियान 2023" प्रतिस्थापित किया गया है।
पट्टा जारी करने की दर: प्रशासन गांव के संग अभियान 2023 के दौरान ग्राम पंचायत द्वारा जारी किए जाने वाले पट्टों की दर/प्रभार में छूट के संबंध में उपर्युक्त अधिसूचना के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
जारीकर्ता:निशु कुमार अग्निहोत्री, उपुयक्त एवं उप शासन सचिव (प्रथम), ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
राजस्थान पंचायती राज संस्थाओं के जनप्रतिनिधियों के मानदेय और बैठक भत्तों में संशोधन (अधिसूचना 21-02-2023)
पंचायती राज जनप्रतिनिधियों के मानदेय और बैठक भत्तों में वृद्धि
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 21-02-2023 की अधिसूचना (क्रमांक: एफ.951(19)(41)प्राविवि/लेखा/नि.आ./बजट घोषणा/2022-23/210) के माध्यम से पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित सदस्यों व जनप्रतिनिधियों के मानदेय एवं बैठक भत्तों की दरों में संशोधन किया गया है। यह आदेश माननीय मुख्यमंत्री महोदय द्वारा 10.02.2023 को की गई बजट घोषणा के बिंदु संख्या 162 के क्रम में जारी किया गया है।
मानदेय की संशोधित दरें (प्रति माह):
जिला प्रमुख, जिला परिषद: वर्तमान 12,000/- रुपये से बढ़कर 13,800/- रुपये प्रति माह।
प्रधान, पंचायत समिति: वर्तमान 8,400/- रुपये से बढ़कर 9,660/- रुपये प्रति माह।
सरपंच, ग्राम पंचायत: वर्तमान 4,800/- रुपये से बढ़कर 5,520/- रुपये प्रति माह।
बैठक भत्तों की संशोधित दरें (प्रति बैठक):
सदस्य, जिला परिषद: वर्तमान 600/- रुपये से बढ़कर 690/- रुपये प्रति बैठक।
सदस्य, पंचायत समिति: वर्तमान 420/- रुपये से बढ़कर 483/- रुपये प्रति बैठक।
सदस्य, ग्राम पंचायत: वर्तमान 240/- रुपये से बढ़कर 276/- रुपये प्रति बैठक।
मुख्य बिंदु:
जनप्रतिनिधियों को देय मानदेय एवं बैठक भत्तों का भुगतान राज्य वित्त आयोग के तहत मिलने वाली अनुदान राशि से किया जाएगा। यह आदेश दिनांक 01.04.2023 से लागू होगा। यह अधिसूचना वित्त (व्यय-5) विभाग की आईडी संख्या 332300155 दिनांक 17.02.2023 से प्राप्त सहमति के अनुसरण में जारी की गई है।
पंचायती राज संस्थाओं के स्वामित्व वाले सरकारी जर्जर भवनों को ध्वस्त करने के संबंध में दिशानिर्देश
पंचायती राज संस्थाओं के जर्जर भवनों को ध्वस्त करने के संबंध में दिशानिर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा क्रमांक एफ 4 (1054) परावि/पीसी/पालडी एम/जर्जर सम्पत्ति भवन/2022/294 दिनांक 14/02/2023 के तहत पंचायती राज संस्थाओं के स्वामित्व वाले जीर्णशीर्ण, अनुपयोगी एवं असुरक्षित भवनों को ध्वस्त करने के संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
पूर्व निर्देश का संदर्भ: विभागीय पत्र क्रमांक 618 दिनांक 13.04.2012 के द्वारा पूर्व में निर्देश जारी किए गए थे, जिन्हें इस आदेश द्वारा अतिक्रमित किया गया है।
निरीक्षण दल का पुनर्गठन: पंचायती राज संस्थाओं के स्वामित्व वाले जीर्णशीर्ण/अनुपयोगी एवं असुरक्षित भवनों को ध्वस्त करने के लिए गठित निरीक्षण दल का पुनर्गठन इस प्रकार किया गया है: 1. अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद 2. संबंधित अधीक्षण अभियंता / अधिशाषी अभियंता पी.डब्ल्यू.डी., जिला परिषद 3. अधिशाषी अभियंता (सिविल), जिला परिषद 4. लेखाधिकारी, जिला परिषद
अनुमति प्रक्रिया: उक्त समिति की रिपोर्ट के आधार पर जिला कलेक्टर पंचायतीराज राज संस्थाओं के स्वामित्व वाले भवन गिराने की अनुमति/आदेश प्रदान करेंगे। अनुमति/आदेश जारी होने के उपरांत ही जीर्णशीर्ण/अनुपयोगी एवं असुरक्षित भवन को ध्वस्त करने की कार्यवाही की जाएगी।
ग्राम विकास अधिकारियों की राज्यस्तरीय अंतिम वरिष्ठता सूची (01 अप्रैल, 2020 की स्थिति)
ग्राम विकास अधिकारियों की राज्यस्तरीय अंतिम वरिष्ठता सूची जारी
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 23/01/2023 को आदेश क्रमांक एफ.28(67)पंरावि/प्रशा.2/ग्राविवो/वरि० सूची/2022/313 जारी किया गया है। यह आदेश विभागीय आदेश क्रमांक 4573 दिनांक 16.12.2022 के क्रम में ग्राम विकास अधिकारियों की 01 अप्रैल, 2020 की स्थिति के अनुसार राज्यस्तरीय अस्थायी वरिष्ठता सूची पर जिला परिषदों से प्राप्त आपत्तियों के निस्तारण के पश्चात प्रकाशित की गई है।
मुख्य बिंदु:
पद का नाम: ग्राम विकास अधिकारी
स्थिति की तिथि: 01 अप्रैल, 2020
क्षेत्र: टीएसपी (TSP) एवं नॉन टीएसपी (Non-TSP) क्षेत्र
संबंधित ग्राम विकास अधिकारी एवं पंचायत समितियां इस सूची को आधिकारिक पोर्टल से देख सकते हैं।
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 के अंतर्गत पुराने गृहों के वि नियमितीकरण एवं पट्टा जारी करने के संबंध में दिशा-निर्देश
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश (क्रमांक: एफ.4(1) दिशा-निर्देश/विधि/पंव/2023/04, दिनांक: 11.1.23) के अनुसार राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157-पुराने गृहों के विनिियमितीकरण के अंतर्गत 300 वर्गगज एवं उससे अधिक क्षेत्रफल के भूखंड का पट्टा जारी करने के संबंध में निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
नियम संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 का नियम 157 (पुराने गृहों का विनिियमितीकरण)।
क्षेत्रफल: 300 वर्गगज संनिर्मित क्षेत्रफल से अधिक भूमि जो आवासीय परिसर के साथ उपयोग में आ रही खाली आबादी भूमि का पट्टा नियम 157(1)(ii), उपयुक्त खण्ड (i) में विनिर्दिष्ट क्षेत्रफल से अधिक क्षेत्रफल के लिए है।
शर्ते एवं प्रक्रिया: ऐसे अधिक क्षेत्रफल पर राजस्थान स्टाम्प नियम, 2004 के नियम 58 के खण्ड (ख) के अधीन गठित जिला स्तरीय समिति द्वारा सिफारिश की गई नई बाजार दरों का 25 प्रतिशत राशि जमा करके भूखंडधारी के उपयोग में आ रही कब्जा शुदा (संपूर्ण) आबादी भूमि का पट्टा जारी किया जा सकता है।
ग्राम विकास अधिकारी (VDO) के रिक्त पदों पर सेवानिवृत्त ग्रामसेवकों की सेवाएँ लेने बाबत आदेश 2021
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा ग्राम विकास अधिकारी (VDO / ग्राम सेवक) के रिक्त पदों के संबंध में यह महत्वपूर्ण आदेश जारी किया गया है। इसका पत्रांक एफ.28( )पंरावि/प्रशा-2/ग्राविअ/रिक्त पद(नि.)/2021/326 है।
यह पत्र प्रदेश के समस्त जिला परिषदों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (CEO) को संबोधित है।
आदेश के मुख्य बिंदु और निर्देश:
पंचायत राज संस्थाओं में वर्तमान में ग्राम विकास अधिकारी के काफी पद रिक्त चल रहे हैं। साथ ही, ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन से नवसृजित ग्राम पंचायतों में कुल 1426 पद भी रिक्त हैं, जिन पर भर्ती की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है।
ग्राम विकास अधिकारी का पद रिक्त होने से विकास कार्य प्रभावित न हों और आम जनता के कार्यों में बाधा न आए, इस दृष्टि से यह आदेश जारी किया गया है।
निर्देशित किया गया है कि किसी भी ग्राम पंचायत में ग्राम विकास अधिकारी का पद रिक्त नहीं रहना चाहिए।
रिक्त पदों की व्यवस्था हेतु दो विकल्प दिए गए हैं:
रिक्त पद का चार्ज निकटतम ग्राम पंचायत में पदस्थापित ग्राम विकास अधिकारी को अतिरिक्त प्रभार (Additional Charge) के रूप में दिया जाए।
अथवा, रिक्त पद के विरुद्ध सेवानिवृत्त ग्राम विकास अधिकारियों (ग्राम सेवकों) की सेवाएँ वित्त विभाग के परिपत्र (दिनांक 08.02.2018) में वर्णित शर्तों के अधीन समेकित पारिश्रमिक (Consolidated Remuneration) के आधार पर ली जाएं।
राजस्थान पहचान पोर्टल पर ई-मित्र के माध्यम से विवाह पंजीयन प्रक्रिया परिपत्र 2016
आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा 'पहचान' वेबपोर्टल पर ऑनलाईन विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया के सम्बन्ध में यह परिपत्र जारी किया गया है। राजस्थान विवाहों का अनिवार्य रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 2009 के अन्तर्गत आमजन की सुविधा के लिए दिनांक 21.03.2016 से ई-मित्र केन्द्रों के माध्यम से विवाह पंजीयन हेतु आवेदन की प्रक्रिया प्रारम्भ की गई है। इस परिपत्र का क्रमांक एफ 13/1/3/वीएस/डीईएस/वि.पं./2013/1/47779/2016 है।
ई-मित्र केन्द्र द्वारा अपनाई जाने वाली प्रक्रिया:
आवेदक द्वारा निर्धारित प्रपत्र में सभी सूचनाएँ अनिवार्य रूप से भरी जानी चाहिए।
आवेदन के साथ पहचान एवं पते के दस्तावेज (जैसे मतदाता पहचान पत्र, ड्राइविंग लाईसेन्स, पासपोर्ट, पेन कार्ड, भामाशाह कार्ड आदि) की स्वहस्ताक्षरित प्रति और वर-वधू की 5x3 साईज की संयुक्त फोटो संलग्न करना आवश्यक है।
ई-मित्र संचालक 'पहचान' वेबपोर्टल पर 'ई-मित्र कियोस्क आवेदन प्रपत्र भरें' विकल्प के माध्यम से सभी सूचनाओं की सही-सही प्रविष्टि करेगा।
ई-मित्र संचालक द्वारा पहचान दस्तावेज एवं वर-वधू की संयुक्त फोटो को पृथक-पृथक स्केन कर 50 केबी से 100 केबी तक की जेपीईजी (JPEG) फाईल में अपलोड किया जाएगा।
निर्धारित सेवा एवं पंजीयन शुल्क:
ऑनलाईन आवेदन भरने एवं राजकीय डाटाबेस से सत्यापन पर सेवा शुल्क 15/- रूपये देय है।
दस्तावेजों को स्केन कर अपलोड करने की स्थिति में 20/- रूपये सेवा शुल्क लिया जाएगा।
विवाह सम्पन्न होने की तिथि से 30 दिन के भीतर पंजीयन शुल्क 10/- रूपये तथा 30 दिन के पश्चात् 100/- रूपये निर्धारित है।
रजिस्ट्रार (विवाह पंजीयन) द्वारा अपनाई जाने वाली प्रक्रिया:
ई-मित्र से प्राप्त आवेदन की जांच के उपरान्त, रजिस्ट्रार द्वारा एक तिथि निर्धारित कर वर-वधू को SMS के माध्यम से आवश्यक दस्तावेजों के साथ कार्यालय में उपस्थित होने की सूचना दी जाएगी (यह तिथि आवेदन प्राप्त होने के सात दिवस से अधिक नहीं होगी)।
निर्धारित तिथि पर वर-वधू को ई-मित्र पावती, पासपोर्ट साईज फोटो, संयुक्त फोटो, जन्म प्रमाण पत्र, शपथ पत्र, और दो गवाहों के शपथ पत्र व पहचान दस्तावेजों सहित उपस्थित होना होगा।
मूल दस्तावेजों की जांच एवं सन्तुष्टि के पश्चात् रजिस्ट्रार द्वारा विवाह पंजीयन कर प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा।
यदि आवेदन में कोई कमी पाई जाती है, तो उचित कारण सहित आपत्ति दर्ज कर आवेदक को SMS द्वारा सूचित किया जाएगा, जिसकी पूर्ति सम्बन्धित ई-मित्र पर की जा सकेगी।
राजस्थान विवाहों का अनिवार्य रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 2009 के संबंध में मार्गदर्शन
राजस्थान सरकार गृह (ग्रुप-13) विभाग का पत्र
यह पत्र राजस्थान सरकार के गृह (ग्रुप-13) विभाग द्वारा क्रमांक प.6(19)गृह-13/2006, दिनांक 03.11.2011 को जारी किया गया है। यह पत्र नगर निगम, जयपुर द्वारा विवाह के अनिवार्य पंजीयन के संबंध में विभिन्न प्रकरण बिंदुओं पर चाहे गए मार्गदर्शन के संदर्भ में है।
मुख्य बिंदु एवं मार्गदर्शन
अधिनियम का लागू होना: माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्देशानुसार 'राजस्थान विवाहों का अनिवार्य रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 2009' दिनांक 11.09.2009 को राजस्थान राजपत्र में प्रकाशित किया गया था। इस अधिनियम की धारा 3 के अंतर्गत इस अधिनियम के प्रारम्भ के पश्चात राजस्थान राज्य में ऐसे व्यक्तियों, जो भारत के नागरिक हैं, के बीच अनुष्ठापित प्रत्येक विवाह का रजिस्ट्रीकरण अनिवार्य है।
अन्य विवाह अधिनियमों पर स्थिति: अधिनियम की धारा 20 के अंतर्गत स्पष्ट प्रावधान है कि भारतीय ईसाई विवाह अधिनियम 1872, पारसी विवाह और विवाह विच्छेद अधिनियम 1936, तथा विशेष विवाह अधिनियम 1954 के अधीन अनुष्ठापित विवाहों का अनिवार्य रजिस्ट्रीकरण अधिनियम के तहत पंजीयन नहीं होगा, बल्कि इन अधिनियमों के तहत पंजीयन स्वैच्छिक है।
नाबालिग विवाह से संबंधित प्रावधान: यदि पक्षकार 21 वर्ष से कम उम्र के हों, तो माता-पिता या संरक्षक विवाह की तारीख से 30 दिवस के भीतर संबंधित रजिस्ट्रार को ज्ञापन प्रस्तुत करने के उत्तरदायी होंगे। यदि विवाह के समय पक्षकार नाबालिक हो, तो भी पंजीयन से रोका नहीं जा सकता है, तथा बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के प्रावधानों के तहत कार्यवाही की जाएगी।
विभिन्न धर्मों और जातियों के विवाह: यदि किसी जाति या धर्म के पक्षकार अधिनियम की धारा 20 में वर्णित अधिनियमों को छोड़कर अन्य किसी अधिनियम के अंतर्गत विवाह अनुष्ठापित करते हैं, तो विवाह पंजीयक आवश्यक साक्ष्य, शपथ-पत्र एवं स्वयं की संतुष्टि के पश्चात विवाह प्रमाण-पत्र जारी करेगा।
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2011 - शुल्क और नियमों से संबंधित अधिसूचना
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2011
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा अधिसूचना संख्या No. F.4 (7) Am/Rule/Legal/PR/2010/ 1348 दिनांक 12-8-2011 जारी की गई है। इसके माध्यम से राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
नियम 68 के तहत पंचायत द्वारा लिए जाने वाले शुल्क (Fees):
आवेदन शुल्क (Application fees): Rs. 10/-
निवास, जाति, आय प्रमाण पत्र आदि: Rs. 20/- (SC/ST के लिए 50% छूट)
उत्तराधिकार प्रमाण पत्र आदि: Rs. 40/- (SC/ST के लिए 50% छूट)
बिजली या पाईप द्वारा पानी के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC): Rs. 40/- (SC/ST के लिए 50% छूट)
आबादी भूमि क्रय हेतु आवेदन: Rs. 20/-
साइट प्लान तैयार करने और साइट निरीक्षण का खर्च: Rs. 50/-
राशन कार्ड (आवेदन पत्र और छपाई सहित): Rs. 10/-
30 दिन के बाद जन्म और मृत्यु का पंजीकरण: Rs. 20/-
भवन निर्माण की अनुमति: पक्का निर्माण के लिए Rs. 2/- प्रति वर्ग मीटर
पंचायत द्वारा पहले से स्वीकृत साइट प्लान में जोड़/बदलाव (Addition/Alteration): Rs. 100/-
बिना अनुमति अनाधिकृत निर्माण का नियममीकरण (Regularization): Rs. 10/- प्रति वर्ग मीटर (अधिकतम Rs. 1000/- तक)
पेट्रोल/डीजल पंप: Rs. 2500/- प्रति वर्ष
ढाबा/रेस्टोरेंट: Rs. 1000/- प्रति वर्ष
अन्य कोई व्यावसायिक इकाई: Rs. 200/- प्रति वर्ष
माइनिंग एनओसी के लिए प्रस्ताव: Rs. 5000/-
मोबाइल टॉवर: Rs. 10000/- प्रति वर्ष
गेस्ट हाउस/होटल/मोटेल/रेस्ट हाउस हेतु शुल्क: 5 कमरे तक Rs. 1000/- प्रति वर्ष, 6 से 10 कमरे Rs. 2500/- प्रति वर्ष, 11 से 15 कमरे Rs. 4000/- प्रति वर्ष, 16 या अधिक कमरे Rs. 5000/- प्रति वर्ष
इस अधिसूचना में बैठकों के आयोजन, समितियों, और विभिन्न नियमों के अंतर्गत वित्तीय सीमाओं और शक्तियों में भी संशोधन किए गए हैं।
राजस्थान पंचायती राज विभाग अधिसूचना: आ आबादी भूमि के विक्रय/नीलामी की पुष्टि संबंधी अधिकार
अधिसूचना विवरण
राजस्थान सरकार, पंचायती राज विभाग द्वारा जारी क्रमांक एफ.5(31)पंसंवि/विधि/संशोधितकरण/सं.आयुक्त/2011/1302, दिनांक 2-8-2011 के अंतर्गत आबादी भूमि के विक्रय और नीलामी की पुष्टि के संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु
नियम संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा 98 तथा राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 154(4)(ग) के अंतर्गत यह प्रावधान किया गया है।
संभागीय आयुक्त के अधिकार: 5.00 लाख रुपये से 10.00 लाख रुपये तक की आबादी भूमि के विक्रय/नीलामी की पुष्टि करने हेतु संभागीय आयुक्त को अधिकृत किया गया है।
राज्य सरकार स्तर पर पुष्टि: जिन भूखंडों की राशि 10.00 लाख से अधिक होगी, उनके विक्रय/नीलामी की पुष्टि हेतु प्रकरण पूर्ववत् राज्य सरकार को प्रेषित किए जाएंगे तथा पुष्टि राज्य सरकार द्वारा की जाएगी।
मुख्यमंत्री ग्रामीण बीपीएल आवास योजना एवं इंदिरा आवास योजना के अंतर्गत निःशुल्क पट्टा आवंटन के संबंध में निर्देश
मुख्यमंत्री ग्रामीण बीपीएल आवास योजना एवं इंदिरा आवास योजना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी पत्र क्रमांक एफ.4()विधि/पंचावि/2011/1134 दिनांक 1 जुलाई 2011 के माध्यम से बीपीएल परिवारों को निःशुल्क पट्टा आवंटन के संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
पट्टा आवंटन का अधिकार: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 153 के अंतर्गत कमजोर वर्गों को आवंटन का प्रावधान है जिसके तहत पंचायत सर्किल की आबादी भूमि में बीपीएल परिवारों को निःशुल्क पट्टे आवंटित करने का अधिकार ग्राम पंचायत में निहित है।
नियम 157 एवं 158: इन नियमों के अंतर्गत पट्टा आवंटन के लिए ग्राम पंचायत द्वारा संकल्प पारित कर बीपीएल परिवारों को पट्टे देने की कार्यवाही तत्काल सुनिश्चित करने के निर्देश हैं। इसके लिए नियम 145 से 156 द्वारा निर्धारित नीलामी प्रक्रिया की पालना करना आवश्यक नहीं है।
आबादी भूमि की उपलब्धता: जिला कलेक्टर से अपेक्षा की गई है कि जिन ग्राम पंचायतों के अधीन पंचायत सर्किल में आवंटन हेतु आबादी भूमि उपलब्ध नहीं है, वहां राज्य सरकार के स्वामित्व की अन्य उपयोग की भूमि को आबादी उपयोगार्थ परिवर्तित करते हुए ग्राम पंचायत को उपलब्ध कराई जाए।
मुख्यमंत्री ग्रामीण बीपीएल आवास योजना एवं इंदिरा आवास योजना के अंतर्गत निःशुल्क पट्टा आवंटन बाबत
मुख्यमंत्री ग्रामीण बीपीएल आवास योजना एवं इंदिरा आवास योजना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा मुख्यमंत्री ग्रामीण बीपीएल आवास योजना एवं इंदिरा आवास योजना के अंतर्गत बीपीएल परिवारों को निःशुल्क पट्टा आवंटन के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
पट्टा आवंटन का अधिकार: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 153 के अंतर्गत कमजोर वर्गों को आवंटन का प्रावधान है, जिसके तहत पंचायत सर्किल की आबादी भूमि में बीपीएल परिवारों को निःशुल्क पट्टे आवंटन करने का अधिकार ग्राम पंचायत में निहित है।
विनियमितीकरण: नियम 153 के अंतर्गत पुराने ग्रहों का विनियामितीकरण कर पट्टे जारी करने की शक्ति भी पंचायत में निहित है।
प्रक्रिया: उपरोक्त प्रावधानों के अंतर्गत आवंटन/पट्टा जारी किए जाने बाबत ग्राम पंचायत द्वारा संकल्प पारित किया जाकर आवंटन/पट्टा जारी करने की कार्यवाही की जा सकती है।
नियमों का पालन: नियम 157 एवं 158 के अंतर्गत आवंटन व पट्टा जारी करने के लिए नीलामी किए जाने संबंधी प्रक्रियात्मक प्रावधान नियम 145 से 156 द्वारा निर्धारित प्रक्रिया की पालना अपेक्षित/आवश्यक नहीं है।
भूमि की उपलब्धता: जिला कलेक्टरों से अपेक्षा की जाती है कि जिन ग्राम पंचायतों के अधीन पंचायत सर्किल में आवंटन हेतु आबादी भूमि उपलब्ध नहीं है, उन ग्राम पंचायतों के लिए ग्राम पंचायत क्षेत्र में उपलब्ध राज्य सरकार के स्वामित्व की अन्य उपयोग की भूमि को आबादी उपयोगार्थ परिवर्तित करते हुए आवंटन हेतु ग्राम पंचायत को उपलब्ध कराई जाए।
वित्तीय वर्ष 2011-12 की सामग्री क्रय की निविदा को अंतिम रूप देने के संबंध में आदेश
वित्तीय वर्ष 2011-12 की सामग्री क्रय निविदा के संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (अनुभाग-3), राजस्थान सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2011-12 के लिए सामग्री क्रय की निविदा को अंतिम रूप देने के संबंध में पत्र क्रमांक 20(31) प्रावि/नरेगा/क्रय पालिसी/2011, दिनांक 26 APR 2011 जारी किया गया है। यह पत्र समस्त जिला कलक्टर एवं जिला कार्यक्रम समन्वयक, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना, राजस्थान को संबोधित है।
मुख्य बिंदु:
निर्णय की स्थिति: अधिकांश जिलों में केवल 20-25 प्रतिशत ग्राम पंचायतों में ही निर्माण सामग्री की निविदाएं अंतिम रूप से निर्णीत हो पाई हैं, जिससे भारत निर्माण राजीव गांधी सेवा केन्द्रों का निर्माण प्रभावित हो रहा है।
जिन ग्राम पंचायतों में निविदा प्राप्त नहीं हुई: उन मामलों में संबंधित ग्राम पंचायत अपनी समिति की संस्तुति से समीप की ग्राम पंचायत/समिति की पंचायत समिति की दरों पर सामग्री क्रय करने की अनुमति पंचायत समिति के विकास अधिकारी के स्तर पर प्रदान करने का निर्णय लिया गया है।
पुरानी दरों पर क्रय की अनुमति: जिन ग्राम पंचायतों में पिछले कुछ महीनों पूर्व ही निविदा निर्णीत की गई है और सप्लायर वित्तीय वर्ष 2011-12 में भी पुरानी दरों पर आपूर्ति करने को सहमत हो, वहां आगामी निविदा कार्यवाही होने तक पुरानी दरों पर क्रय की अनुमति दी जाती है।
निर्देश: जिला कार्यक्रम समन्वयकों से अपेक्षा की जाती है कि वे भारत निर्माण राजीव गांधी सेवा केन्द्रों के निर्माण कार्य को निर्धारित समयावधि में पूरा कराना सुनिश्चित करें।
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2010 - राजस्व अभियान और प्रशासन गांवों के संग अभियान हेतु आपत्ति अवधि संशोधन
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2010
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक [No.F.4(7)Am/Rule/Legal/PR/2010/2113] दिनांक 26 नवंबर 2010 के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
नियम का नाम: राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2010।
प्रभावी तिथि: ये नियम राजपत्र में प्रकाशन की तिथि (30 नवंबर 2010) से प्रवृत्त हुए हैं।
नियम 148 में संशोधन: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 148 के उप-नियम (1) के तहत, राजस्व अभियान या प्रशासन गांवों के संग अभियान के दौरान आपत्तियां आमंत्रित करने की अवधि एक महीने के स्थान पर सात दिन होगी।
प्रारूप XXII में संशोधन: प्रारूप XXII के तहत भी राजस्व अभियान या प्रशासन गांवों के संग अभियान के दौरान आपत्तियां दर्ज कराने की अवधि एक महीने के स्थान पर सात दिन निर्धारित की गई है।
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2010 - आ आबादी एवं आपत्ति अवधि संबंधित अधिसूचना
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2010
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक [No.F.4(7)Am/Rule/Legal/PR/2010/2113] दिनांक 26 नवम्बर, 2010 के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी।
मुख्य बिंदु:
नियम संशोधन: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 148 के उप-नियम (1) के परन्तुक में संशोधन किया गया है।
आपत्ति अवधि में छूट: राजस्व अभियान या प्रशासन गांवों के संघ अभियान के दौरान आपत्तियां आमंत्रित करने की अवधि एक महीने के स्थान पर सात (7) दिन होगी।
प्रारूप संशोधन: फॉर्म XXII के अंतर्गत भी नोट जोड़ा गया है कि राजस्व अभियान या प्रशासन गांवों के संघ अभियान के दौरान फाइलिंग आपत्तियां दर्ज करने की अवधि एक महीने के स्थान पर सात दिन होगी।
लागू होना: यह नियम आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशन की तिथि (30 नवम्बर, 2010) से प्रभावी हो गए हैं।
राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) नियम, 2008 - नए पट्टा प्ररूप (प्ररूप 23-क, 23-ख और 23-ग)
राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) नियम, 2008
राजस्थान सरकार, पंचायती राज विभाग द्वारा दिनांक 1.2.2008 को अधिसूचना सं. एफ.4(11)पी.आर.डी./लॉ/रूल/एमेण्ड/07/445 जारी की गई है। इस अधिसूचना के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन किया गया है और नए पट्टा प्ररूप जोड़े गए हैं।
मुख्य बिंदु:
नियम 157 का संशोधन: नियम 157 के उप-नियम (1) में 'प्ररूप 23-क' और उप-नियम (2) में 'प्ररूप 23-ख' जोड़ा गया है।
नियम 158 का संशोधन: नियम 158 के उप-नियम (1) में 'प्ररूप 23-ग' जोड़ा गया है।
प्ररूप 23-क: आवासीय भूमि का पट्टा (नियम 157 (1) के अंतर्गत)।
प्ररूप 23-ख: आबादी भूमि का आवंटन / परिवारों के कब्जे के अस्थायी मकानों/कच्चे मकानों की नियमितीकरण (नियम 157 (2) के अंतर्गत)।
प्ररूप 23-ग: आबादी भूमि का रियायती दर पर / निःशुल्क आवंटन (नियम 158 के अंतर्गत)।
यह संशोधन ग्राम पंचायतों में आवासीय भूमि के आवंटन, पट्टा जारी करने और कच्चे मकानों के नियमितीकरण प्रक्रिया से संबंधित प्ररूपों को स्पष्ट करता है।
राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2007 - पट्टा नियम 158 संशोधन
राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2007
पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 18.06.2007 की अधिसूचना (क्रमांक: एफ.4(11)पीआरओडी/लॉ/रूल-एमेंड/07/2078) के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 158 में संशोधन किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
भूतपूर्व सैनिकों के लिए: पंचायत, सरहदी पंचायत समिति क्षेत्रों में भूतपूर्व सैनिकों को ग्रामीण आबादी में 150 वर्गगज तक आबादी भूमि रियायती दर पर आवंटित कर सकेगी।
घुमक्कड़ भेड़ पालकों के लिए: पंचायत, घुमक्कड़ भेड़ पालकों को 300 वर्गगज तक आबादी भूमि निःशुल्क आवंटित कर सकेगी।
विधवाओं और तलाकशुदा महिलाओं के लिए प्रावधान: इस नियम के अधीन आबंटित तीस प्रतिशत भूमि विधवाओं और तलाकशुदा महिलाओं को आबंटित की जायेगी।
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 और 158 में संशोधन - अधिसूचना दिनांक 9-4-2007
राजस्थान पंचायती राज विभाग अधिसूचना
राजस्थान सरकार के पंचायती राज विभाग द्वारा अधिसूचना क्रमांक F.4(7)/PRD/LAW/Rule-Amnd/07/1166, दिनांक 9-4-2007 जारी की गई है जिसके तहत राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
नियम 157 में संशोधन: ऐसे परिवार जिनके पास कहीं भी कोई मकान या भूखंड नहीं है और जो वर्ष 2003 तक केhutment/kutcha house बनाकर आबादी भूमि पर काबिज हैं, उन्हें अधिकतम 300 वर्ग गज तक भूमि निःशुल्क नियमितीकरण के लिए पात्र माना जाएगा। इस प्रकार की भूमि का पट्टा परिवार की महिला मुखिया के नाम जारी किया जाएगा।
नियम 158 में संशोधन: नियम 158 के उप-नियम (2) के अंतर्गत यह प्रावधान जोड़ा गया है कि गरीबी रेखा से नीचे (BPL) जीवन बसर करने वाले परिवारों को आबादी भूमि के आवंटन के मामले में पंचायत भूमि निःशुल्क आवंटित कर सकेगी।
यह अधिसूचना राज्यपाल के आदेश से श्रीचन्द मीणा, शासन उप सचिव द्वारा जारी की गई है तथा इसकी प्रतियां संबंधित विभागों, जिला कलेक्टरों, मुख्य कार्यकारी अधिकारियों और विकास अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रेषित की गई हैं।
ग्राम पंचायतों द्वारा किसी भी समुदाय, धार्मिक संस्थाओं और गैर सरकारी संस्था को पट्टा जारी नहीं करने का आदेश
राजकीय आदेश: ग्राम पंचायतों द्वारा पट्टे जारी करने के संबंध में
राजस्थान सरकार, पंचायती राज विभाग द्वारा ग्राम पंचायतों द्वारा जारी पट्टों के संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए हैं। इस आदेश के अनुसार, किसी भी समुदाय, धार्मिक संस्थाओं या गैर सरकारी संस्थाओं को नियमविरुद्ध पट्टे जारी नहीं किए जा सकते हैं।
मुख्य बिंदु:
नियमों का संदर्भ: राजस्थान पंचायत राज (सामान्य) नियम 1996 के नियम 162 एवं 167 के प्रावधानों के विपरीत सरंचनाओं और समुदायों को नि:शुल्क आबंटित कर दिए जाने पर शांति व्यवस्था भंग होने की आशंका रहती है।
नियम 162 और 167: नियम 162 के तहत केवल राजकीय संस्थाओं को ही 500 वर्ग गज तक भूमि नि:शुल्क दी जा सकती है। नियम 167 के तहत आवादी भूमि के विक्रय की प्रक्रिया का उल्लेख है। किसी भी समाज एवं गैर सरकारी संस्थाओं को नि:शुल्क भूमि दिए जाने का नियमों में कोई प्रावधान नहीं है।
निरस्तीकरण की कार्रवाई: यदि इस प्रकार किसी गैर सरकारी संस्था या समुदाय को पंचायत की आवादी भूमि आबंटित की जाती है, तो वह प्रारम्भतः शून्य मानी जाएगी। ऐसे पट्टों को मान्यता नहीं दी जानी चाहिए।
जुर्माना और विभागीय कार्रवाई: यदि नियमों के विरुद्ध पट्टे जारी किए जाते हैं, तो प्रचलित बाजार दर से दुगुनी कीमत मय ब्याज के वसूल करने के साथ विभागीय कार्रवाई भी अमल में लाई जाएगी।
राजस्थान लोक सम्पत्ति (अनाधिकृत अधिभोगियों, बेदखली अधिनियम) 1964 के अंतर्गत अतिक्रमण हटाने बाबत परिपत्र
परिपत्र विवरण एवं मुख्य बिंदु
राजस्थान सरकार, पंचायती राज विभाग द्वारा जारी परिपत्र क्रमांक: एफ 139(51)परावि/विधि/अतिक्रमण/2005/3833 दिनांक 24-12-2005 के माध्यम से राजस्थान लोक सम्पत्ति (अनाधिकृत अधिभोगियों, बेदखली अधिनियम) 1964 के प्रावधानों के अंतर्गत पंचायतों की संपत्ति से अवैध अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया और नियमों की जानकारी दी गई है।
मुख्य उपयोगी बिंदु:
सम्पदा अधिकारी: राज्य सरकार की अधिसूचना दिनांक 12.11.92 के अनुसार समस्त जिला परिषदों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को सम्पदा अधिकारी नियुक्त किया गया है, जो पंचायत की संपत्तियों से अवैध कब्जों को हटाने हेतु अधिकृत हैं।
बेदखली की प्रक्रिया: अनाधिकृत अधिभोगी को कम से कम 10 दिन का नोटिस दिया जाना चाहिए, जिसमें बेदखली के कारणों का उल्लेख हो। नोटिस तामील करने के पश्चात सुनवाई कर सम्पदा अधिकारी बेदखल का आदेश पारित कर सकते हैं।
अपील का प्रावधान: बेदखली के आदेश के विरुद्ध जिला जज अथवा उसके द्वारा अधिकृत न्यायिक अधिकारी के समक्ष 15 दिन के भीतर अपील की जा सकती है।
दंड का प्रावधान: एक बार बेदखल किए जाने के बाद पुनः अतिक्रमण करने पर एक वर्ष की सजा तथा 1000/- रुपये तक के जुर्माने अथवा दोनों से दण्डित किया जा सकता है।
पंचायती राज नियमों के अंतर्गत अचल संपत्ति की नीलामी, पट्टा एवं आवादी भूमि के आवंटन से संबंधित दिशा-निर्देश
पंचायती राज अधिनियम के अंतर्गत नियम और प्रक्रियाएं
यह दस्तावेज़ पंचायती राज संस्थाओं के अंतर्गत अचल संपत्ति की नीलामी, बाजार कीमत, पट्टा, और आवादी भूमि के आवंटन से संबंधित नियमों की जानकारी प्रदान करता है।
मुख्य बिंदु:
नीलामी समिति (नियम 151): स्थावर संपत्ति की सभी नीलामी एक नीलामी समिति द्वारा की जाएगी जिसमें सरपंच, उप-सरपंच, सतर्कता समिति का अध्यक्ष, महिला/आरक्षित वर्ग का एक पंच, और भू-राजस्व निरीक्षक या पटवारी शामिल होंगे।
बाजार कीमत और बोलियां (नियम 152): नीलामी समिति यह सुनिश्चित करेगी कि बोली स्वतंत्र और उचित हो। विकास अधिकारी प्रत्येक वर्ष अप्रैल मास में उप-registrar कार्यालय से सूचक दरें प्राप्त करेंगे।
विफल होने पर संदाय और पुनर्बिक्री (नियम 153): उच्चतम बोली लगाने वाले व्यक्ति को स्थल पर 10 प्रतिशत और चौबीस घंटों के भीतर 15 प्रतिशत तथा शेष राशि 60 दिवस के भीतर जमा करानी होगी।
विक्री की पुष्टि (नियम 154): उच्चतम बोली की स्वीकृति और पट्टा जारी करने से पहले निर्धारित प्राधिकारियों (जैसे पंचायत समिति, जिला परिषद या राज्य सरकार) से अनुमोदन प्राप्त करना आवश्यक है।
प्राइवेट बातचीत द्वारा आवादी भूमि का अंतरण (नियम 156): कुछ विशेष परिस्थितियों में पंचायत प्राइवेट बातचीत द्वारा विक्रय कर सकेगी, बशर्ते बाजार कीमत से कम कीमत पर अंतरण न हो।
पुराने गृहों को विियमितीकरण (नियम 157): 50 वर्ष से अधिक पूर्व निर्मित मकानों हेतु 100 रुपये (चयनित परिवार से राशि वसूल नहीं होगी) और 50 वर्ष के दौरान बने पुराने मकानों हेतु 200 रुपये की राशि जमा कराने के पश्चात पट्टा जारी किया जा सकेगा।
कमजोर वर्गों को आबंटन (नियम 158): पंचायत कमजोर वर्गों (अनुसूचित जातियों, जनजातियों, भूमिहीन व्यक्तियों आदि) को 150 वर्ग गज तक की आवादी भूमि रियायती दरों पर आबंटित कर सकेगी।
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के अंतर्गत आबाद भूमि, पट्टा वितरण और पंजीयन प्रारूप
राज ई-पंचायत पोर्टल: आबाती भूमि और पट्टा संबंधी प्रारूप
यह दस्तावेज़ राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 और राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के तहत ग्राम पंचायतों में आबाती भूमि, भवनों, और पट्टा वितरण से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण प्रारूपों (प्रपत्र) की जानकारी प्रदान करता है।
मुख्य प्रारूप और उनके उपयोग
प्ररूप 20: भवनों और स्थावर सम्पत्तियों का रजिस्टर (नियम 137 के अंतर्गत)।
प्ररूप 21: आबाती भूमि के विक्रय का रजिस्टर (नियम 146 के अंतर्गत)।
प्ररूप 22: आबाती भूमि के प्रस्तावित विक्रय के सम्बन्ध में आक्षेप आमंत्रण करने का नोटिस (नियम 148 के अंतर्गत)।
प्ररूप 23: आबाती भूमि का विक्रय विलेख (नियम 167(1) के अंतर्गत)।
प्ररूप 23क: आवासीय भूमि का पट्टा (नियम 157(1) के अंतर्गत)।
प्ररूप 23ख: आबाती भूमि का आबंटन / परिवारों के कब्जे के अस्थायी मकानों/कच्चे मकानों का नियमितीकरण (नियम 152(2) के अंतर्गत)।
प्ररूप 23ग: आबाती भूमि का रियायती दर पर / नि:शुल्क आबंटन (नियम 158 के अंतर्गत)।
प्ररूप 24: आबाती भूमि की पट्टा बही (विक्रय विलेखों का रजिस्टर / नियम 168(1) के अंतर्गत)।
ध्यान दें: ग्राम पंचायतों द्वारा आबाती भूमि के क्रय-विक्रय, पट्टा वितरण, और नियमीकरण की प्रक्रिया निर्धारित नियमों और प्रावधानों के अनुसार ही की जानी चाहिए।
राज पंचायती राज संस्थाओं में स्थावर संपत्तियाँ, आबाद भूमि और भूखंड आ आवंटन से संबंधित नियम
स्थावर संपत्तियाँ और आबाद भूमि प्रबंधन
यह दस्तावेज़ राजस्थान पंचायती राज संस्थाओं के अंतर्गत आने वाली स्थावर संपत्तियों, आबाद भूमि, भूखंडों के आवंटन, नीलामी, पट्टे जारी करने और पंचायत की आय के विभिन्न स्रोतों से संबंधित नियमों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करता है। इसमें ग्राम पंचायत स्तर पर संपत्तियों के रख-रखाव, निरीक्षण, और अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया को समझाया गया है।
मुख्य बिंदु:
ग्राम पंचायत की संपत्ति: पंचायत सर्किल के आबाद क्षेत्र के भीतर आने वाली सभी सरकारी भूमियाँ, कॉमन भूमियाँ और सार्वजनिक मार्ग पंचायत में निहित होते हैं।
आबाद भूमि और भूखंडों की नीलामी: भूमि का विक्रय सामान्यतः खुली नीलामी के माध्यम से किया जाता है। इसके लिए नियम 141 से 154 तक की प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है।
कमजोर वर्गों और संस्थाओं को आवंटन: अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, स्वच्छता कर्मियों, और अन्य पात्र परिवारों को रियायती दरों पर 150 वर्ग गज तक की आबाद भूमि का आवंटन किया जा सकता है।
पट्टा जारी करने के नियम: पट्टे पर देने या पुराने मकानों के नियमितीकरण (नियम 157) के लिए निर्धारित शुल्क और प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक है।
निषिद्ध क्षेत्र: रेलवे लाइन, राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग और अन्य जिला सड़कों के निर्धारित निश्चित दायरे के भीतर किसी भी आबाद भूमि का विक्रय या पक्का निर्माण अनुमत नहीं है।
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 - अवलोकन एवं मुख्य प्रावधान
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996
यह दस्तावेज़ राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 का आधिकारिक संकलन है, जिसे ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 के अंतर्गत बनाया गया है। यह नियम राज्य की त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं (ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और ज़िला परिषद) के प्रशासन, कार्यप्रणाली, ग्राम सभा, कर एवं शुल्क निर्धारण, अ आबादी भूमि के प्रबंधन, और सेवा नियमों से संबंधित विस्तृत दिशा-निर्देश प्रदान करता है।
मुख्य बिंदु:
ग्राम सभा और सतर्कता समिति (विजिलेंस कमेटी): ग्राम सभा की बैठकों का आयोजन, कोरम, एजेंडा, कार्यवाही का रिकॉर्ड और 7 सदस्यीय सतर्कता समिति के गठन व उसके कार्यों का प्रावधान।
कर, शुल्क और राजस्व: पंचायतों द्वारा भवन कर, वाटर टैक्स, वाहन कर, व्यावसायिक फसलों पर कर, और विभिन्न सेवाओं पर शुल्क (फीस) लगाने और उनकी वसूली की प्रक्रिया।
आबादी भूमि और संपत्ति प्रबंधन: आबादी भूमि के पट्टे जारी करने, पुरानी बसावटों के नियमतिकरण, भूमि आवंटन, नीलामी समिति और उप-विभाजन (सब-डिवीजन) के नियम।
कार्य, अनुबंध और खरीदारी: वार्षिक कार्य योजना (एनुअल एक्शन प्लान), निर्माण कार्यों के निष्पादन, ठेकेदारों पर प्रतिबंध और सामग्री की खरीद के लिए पारदर्शी प्रक्रिया (बी.एस.आर. और निविदाएं)।
बजट, लेखा और लेखापरीक्षा (ऑडिट): बजट का निर्माण, कैलेंडर, रोकड़ बही (कैश बुक), वित्तीय औचित्य के मानक और स्थानीय निधि संपरीक्षा अधिनियम के तहत ऑडिट का प्रावधान।
स्थापना और सेवा नियम: पंचायती राज संस्थाओं में विभिन्न श्रेणियों के पदों, भर्ती, आरक्षण, वरिष्ठता, परिवीक्षा काल और अनुशासनात्मक कार्रवाई के नियम।
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 - महत्वपूर्ण नियम और दिशा-निर्देश
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 का सारांश
राज्य सरकार ने राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धाराओं और शक्तियों के तहत राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 बनाए हैं। यह दस्तावेज पंचायती राज संस्थाओं, ग्राम सभा, सतर्कता समितियों, कर निर्धारण, कार्यभार हस्तांतरण, बजट, लेखा और लेखापरीक्षा से संबंधित नियमों का विस्तृत विवरण प्रदान करता है।
मुख्य बिंदु:
ग्राम सभा और बैठकें: प्रत्येक वर्ष कम से कम दो ग्राम सभाओं का आयोजन किया जाना अनिवार्य है। बैठक का स्थान पंचायत कार्यालय या सुविधाजनक सार्वजनिक स्थल होगा। बैठक के नोटिस का प्रकाशन कम से कम 15 दिन पूर्व किया जाना आवश्यक है।
सतर्कता समितियाँ: वित्तीय वर्ष के प्रथम त्रimas में आयोजित होने वाली ग्राम सभा में सतर्कता समिति के गठन का प्रावधान है। इसका उद्देश्य विकास क्रिया-कलापों का त्वरित कार्यान्वयन और निधियों के दुरुपयोग को रोकना है।
कर और फीस का अधिरोपण: पंचायतें अधिनियम के तहत विभिन्न कर, फीस और उपकर (जैसे भवन कर, यात्री कर, वाहन कर, जल कर आदि) अधिरोपित और संग्रहित कर सकती हैं।
स्थावर संपत्तियाँ और आबाद भूमि: पंचायत क्षेत्र की सभी सार्वजनिक भूमि, मार्ग और आबाद भूमि पंचायत में निहित होती हैं। आबाद भूमि का आवंटन और विक्रय निर्धारित नियमों के अनुसार किया जाता है।
बजट, लेखा और संपरीक्षा: पंचायती राज संस्थाओं द्वारा प्रतिवर्ष 15 फरवरी तक आगामी वर्ष का बजट तैयार कर संबंधित प्राधिकारी को प्रस्तुत किया जाता है। लेखाओं की संपरीक्षा राजस्थान स्थानीय निधि संपरीक्षा अधिनियम, 1954 के तहत की जाती है।
राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994: मुख्य प्रावधान और संरचना
राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 - एक अवलोकन
यह दस्तावेज़ 'राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994' का आधिकारिक विवरण प्रस्तुत करता है, जो पूरे राजस्थान राज्य में लागू है। यह अधिनियम ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय स्वशासन की संस्थाओं—जैसे ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और ज़िला परिषद—की स्थापना, गठन, शक्तियों और कार्यों का मार्गदर्शन करता है।
मुख्य बिंदु और संरचना
त्रिस्तरीय ढांचा: अधिनियम के तहत ग्राम स्तर पर पंचायत, ब्लॉक स्तर पर पंचायत समिति और ज़िला स्तर पर ज़िला परिषद के गठन का प्रावधान किया गया है।
वार्ड सभा और ग्राम सभा: अधिनियम की धारा 3 और 8ए के अंतर्गत वार्ड सभा और ग्राम सभा की बैठकों, कोरम, पीठासीन अधिकारियों और कार्यों का विस्तृत विवरण दिया गया है।
आरक्षण नीति: अधिनियम की धारा 15 और 16 के तहत अनुसूचित जातियों (SCs), अनुसूचित जनजातियों (STs), पिछड़ा वर्ग (Backward Classes) और महिलाओं के लिए सीटों तथा अध्यक्ष पदों पर आरक्षण का प्रावधान है।
कार्यकाल और चुनाव: पंचायती राज संस्थाओं का सामान्य कार्यकाल उनकी पहली बैठक की तारीख से 5 वर्ष निर्धारित किया गया है, और चुनावों का अधीक्षण राज्य निर्वाचन आयोग के पास निहित है।
वित्त और बजट: प्रत्येक संस्था के लिए अपने फंड, कर लगाने की शक्तियाँ, और वार्षिक बजट प्रस्तुत करने के नियम निर्धारित किए गए हैं।