राज्य निर्वाचन आयोग राजस्थान: पंचायतीराज संस्थाओं के आम चुनाव, 2026 के कार्यक्रम की घोषणा
राज्य निर्वाचन आयोग, राजस्थान द्वारा पंचायतीराज संस्थाओं के आम चुनाव 2026 की घोषणा
संविधान के अनुच्छेद 243K एवं राजस्थान पंचायतीराज अधिनियम, 1994 की धारा 17(2) में वर्णित प्रावधानों के अनुसार राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा राजस्थान में पंचायतीराज संस्थाओं के आम चुनाव 2026 के कार्यक्रम की घोषणा कर दी गई है। यह प्रेस नोट दिनांक 03/10/2026 को जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु एवं चुनाव कार्यक्रम विवरण:
परिसीमन के पश्चात स्थिति: वर्तमान में राज्य में जिलों की संख्या बढ़कर 41 हो गई है, जिसके अंतर्गत 41 जिला परिषद, 457 पंचायत समितियां, 14403 ग्राम पंचायतें और 130589 वार्ड अस्तित्व में हैं।
मतदाता सूची: अर्हता तिथि 01.01.2026 के संदर्भ में तैयार अंतिम मतदाता सूची के अनुसार कुल 4,03,07,308 पंजीकृत मतदाता हैं (पुरुष: 2,08,87,351, महिला: 1,94,19,789, थर्ड जेंडर: 168)। कुल 45384 मतदान केंद्र बनाए गए हैं।
मतदान का समय: मतदान का समय प्रातः 7:00 बजे से सायं 06:00 बजे तक नियत किया गया है।
मतदान प्रक्रिया एवं ईवीएम: चुनाव EVM (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) के माध्यम से कराए जाएंगे।
मतदाताओं की पहचान: मतदान के दौरान मतदाताओं को अपना फोटो पहचान पत्र (EPIC) प्रस्तुत करना होगा। इसके अलावा आयोग द्वारा अनुमोदित 11 वैकल्पिक फोटो दस्तावेजों (जैसे आधार कार्ड, मनरेगा जॉब कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट आदि) में से कोई एक मूल दस्तावेज मान्य होगा।
विभिन्न चरणों में चुनाव: पंचायतीराज संस्थाओं के आम चुनाव विभिन्न चरणों में संपन्न करवाए जा रहे हैं। जैसलमेर, फलोदी एवं सलूंबर के चुनाव एक चरण में, झुंझुनूं, करौली, सीकर, बांसवाड़ा, बीकानेर, जालौर एवं उदयपुर के चुनाव तीन चरण में तथा शेष जिलों के चुनाव चार चरणों में संपन्न होंगे।
आदर्श आचरण संहिता: चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों में आदर्श आचरण संहिता के प्रावधान तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं, जो चुनाव प्रक्रिया समाप्ति तक लागू रहेंगे।
उम्मीदवारों के लिए चुनाव खर्च सीमा: जिला परिषद सदस्य के लिए 3,00,000/- रुपये, पंचायत समिति सदस्य के लिए 1,50,000/- रुपये और सरपंच के लिए 1,00,000/- रुपये अधिकतम चुनाव खर्च सीमा निर्धारित की गई है।
विकसित भारत-जन सेवा अभियान के अंतर्गत आयोजित गतिविधियों एवं वित्तीय स्वीकृति के संबंध में
विकसित भारत-जन सेवा अभियान के संबंध में दिशा-निर्देश एवं वित्तीय स्वीकृति
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ 165(7)ले.ब./परावि/एसएफसी-7/2025-26/ दिनांक के अंतर्गत राज्य में विकसित भारत-जन सेवा अभियान के आयोजन के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश और वित्तीय स्वीकृति जारी की गई है।
मुख्य उद्देश्य एवं गतिविधियाँ
राज्य में जनसेवा, सामाजिक सरोकार और सुशासन की भावना को सुदृढ़ करने, विभिन्न जनकल्याणकारी गतिविधियों की जानकारी को व्यापक स्तर पर पहुँचाने तथा विकसित राजस्थान के लक्ष्य को प्राप्त करने में आमजन, किसानों, महिलाओं और युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से 17 सितम्बर, 2026 से इस अभियान का आयोजन किया जा रहा है।
जिला स्तर: जनप्रतिनिधियों और आमजन के साथ संवाद।
पंचायत समिति मुख्यालय: शिविरों का आयोजन कर केंद्रीय एवं राज्य योजनाओं की जानकारी से संबंधित कार्य (दिनांक 19.09.2026 से 25.09.2026 तक)।
ग्राम पंचायत स्तर: जन-भागीदारी के माध्यम से स्वच्छता और सामुदायिक सेवा से संबंधित गतिविधियाँ।
षष्ठ राज्य वित्त आयोग के अनुदान से व्यय हेतु वित्तीय प्रावधान
षष्ठ राज्य वित्त आयोग के अंतर्गत पंचायती राज संस्थाओं को देय अनुदान राशि के उपयोग हेतु पंचायती राज विभाग के पत्रांक 347 राजकाज क्रमांक 13247621 दिनांक 28.01.2025 के बिंदु संख्या (अ)(3)(xiii) के प्रावधानों के तहत निम्नलिखित व्यय की भूतलक्षीय स्वीकृति प्रदान की गई है:
पंचायत समिति स्तर पर: शिविर के आयोजन हेतु टेंट, फर्नीचर, दरी, पेयजल व्यवस्था, बैठक व्यवस्था, इंटरनेट कनेक्टिविटी एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं से संबंधित व्यय हेतु प्रति पंचायत समिति अधिकतम राशि ₹25,000/-।
ग्राम पंचायत स्तर पर: जन-भागीदारी के माध्यम से स्वच्छता और सामुदायिक सेवा से संबंधित गतिविधियों के आयोजन हेतु प्रति ग्राम पंचायत अधिकतम राशि ₹10,000/-।
उपरोक्त व्यय षष्ठ राज्य वित्त आयोग के अंतर्गत उपलब्ध अनुदान राशि से किया जाएगा, जिसे वित्त विभाग की आई.डी. संख्या 332601518 दिनांक 18.09.2026 द्वारा अनुमोदित किया गया है।
बजट घोषणा 2026-27 के अंतर्गत अटल ज्ञान केंद्रों (फेस-2) की स्थापना एवं क्रियान्वयन के संबंध में दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा अटल ज्ञान केंद्र स्थापना के निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा बजट घोषणा 2026-27 के अंतर्गत द्वितीय चरण में 2400 से 3000 तक की आबादी वाले चयनित 1000 ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर अटल ज्ञान केंद्रों की स्थापना एवं क्रियान्वयन के संबंध में आदेश जारी किए गए हैं।
भवन निर्माण एवं लागत विवरण
प्रथम तल पर नया भवन (36'x20' हॉल): अनुमानित लागत 9.60 लाख रुपये प्रति केंद्र (श्रम मद में 2.78 लाख रुपये VBGRAMG से तथा शेष 4.95 लाख रुपये राज्य वित्त आयोग योजना अंतर्गत)।
भू-तल पर नया भवन (30'x20' हॉल): अनुमानित लागत 9.40 लाख रुपये प्रति केंद्र (श्रम मद में 2.87 लाख रुपये VBGRAMG से तथा शेष 4.64 लाख रुपये राज्य वित्त आयोग योजना अंतर्गत)।
पुराने/अनुपयोगी भवनों के लिए: अधिकतम 4.00 लाख रुपये राज्य वित्त आयोग योजना अंतर्गत वहन किए जाएंगे।
अन्य गतिविधियां एवं सुविधाएं (राज्य वित्त आयोग द्वारा वहन)
ई-कियोस्क/फर्नीचर/वर्क स्टेशन एवं वायरिंग: 4.35 लाख रुपये प्रति केंद्र।
कंप्यूटर एवं प्रिंटर: 2.25 लाख रुपये प्रति केंद्र (कंप्यूटर 2.00 लाख रुपये जिसमें अधिकतम 0.50 लाख रुपये प्रति कंप्यूटर तथा प्रिंटर 0.25 लाख रुपये)।
प्रतियोगिता परीक्षाओं की पुस्तकें एवं पत्रिकाएं: 0.30 लाख रुपये प्रति केंद्र।
महत्वपूर्ण निर्देश
सर्वप्रथम भवन निर्माण का कार्य किया जाएगा, जिसके उपरांत अन्य गतिविधियों का निष्पादन होगा।
नवीन भवनों के निर्माण पर होने वाले व्यय को सर्वप्रथम VBGRAMG मद से और तत्पश्चात राज्य वित्त आयोग मद से वहन किया जावेगा।
निर्माण कार्य आर.टी.पी.पी. (RTPP) एक्ट 2012 एवं राजस्थान सार्वजनिक खरीद पारदर्शिता नियम, 2013 के अनुसार किया जाना सुनिश्चित करें।
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2026 जारी
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2026
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम सं. 13) की धारा 102 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2026 की अधिसूचना जारी कर दी गई है। यह अधिसूचना दिनांक 04 अगस्त, 2026 को जारी की गई है और यह तुरंत प्रभाव से प्रवृत्त हो गई है।
मुख्य संशोधन बिंदु:
नियम 154 का संशोधन: इसके तहत यदि सबसे ऊंची बोली की रकम दो लाख रुपये से अधिक हो, तो पंचायत को पूर्व अनुमोदन प्राप्त करना होगा:
(क) यदि रकम 5 लाख रुपये से अनधिक हो, तो पंचायत समिति का।
(ख) यदि रकम 5 लाख रुपये से अधिक किंतु 10 लाख रुपये से अनधिक हो, तो जिला परिषद का।
(ग) यदि रकम 10 लाख रुपये से अधिक हो, तो राज्य सरकार का पूर्व अनुमोदन आवश्यक होगा।
साथ ही, नियम 154 और नियम 160 के अंत में दी गई टिप्पणियों में मौजूदा अभिव्यक्ति "10,000/-" के स्थान पर "2,00,000/-" प्रतिस्थापित कर दिया गया है।
नियम 157 का संशोधन: नियम 157 के उप-नियम (1) के द्वितीय परंतुक में "प्रशासन गांव के संग अभियान 2021 और प्रशासन गांव के संग अभियान 2023" के स्थान पर "ग्रामीण सेवा शिविर 2026 या पंचायती राज विभाग या राजस्व विभाग द्वारा किसी भी नाम से आयोजित कोई भी शिविर या अभियान" प्रतिस्थापित किया गया है।
आदेश क्रमांक: [NO.F.4(05)Rule/Amend/Legal/PR/2026/45] हस्ताक्षर: भारत भूषण गोयल, शासन उप सचिव, राज्यपाल के आदेश से।
अटल ज्ञान केंद्रों में क्यूबिकल आधारित फर्नीचर और वर्क स्टेशन व्यवस्था स्थापित किए जाने के संबंध में
अटल ज्ञान केंद्रों में आधुनिक क्यूबिकल आधारित फर्नीचर और वर्क स्टेशन व्यवस्था
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज) राजस्थान सरकार द्वारा बजट घोषणा वर्ष 2025-26 के अंतर्गत निर्मित किए जा रहे अटल ज्ञान केंद्रों की कार्यप्रणाली और उपयोगिता को अधिक प्रभावी बनाने के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
माननीय मुख्यमंत्री महोदय की अध्यक्षता में दिनांक 04.04.2026 को आयोजित समीक्षा बैठक में दिए गए निर्देशों के क्रम में, पूर्व में निर्धारित सामान्य फर्नीचर व्यवस्था के स्थान पर आधुनिक क्यूबिकल आधारित फर्नीचर/वर्क स्टेशन व्यवस्था विकसित की जाएगी, जिससे अध्ययनरत विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को बेहतर और व्यवस्थित अध्ययन वातावरण मिल सके।
मुख्य बिंदु एवं वित्तीय संशोधन
उद्देश्य: प्रदेश की तीन हजार से अधिक आबादी वाली ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर आधुनिक पुस्तकालय एवं अध्ययन सुविधाओं का विकास।
संशोधित लागत: वित्त विभाग की आईडी संख्या 332601032 दिनांक 01.07.2026 के द्वारा सामान्य फर्नीचर हेतु पूर्व में स्वीकृत राशि रु. 2.35 लाख के स्थान पर क्यूबिकल आधारित फर्नीचर/वर्क स्टेशन हेतु रु. 4.10 लाख प्रति अटल ज्ञान केंद्र स्वीकृत करने की संशोधित सहमति प्रदान की गई है।
व्यय का स्रोत: उक्त स्वीकृत राशि का व्यय राज्य वित्त आयोग के अंतर्गत संबंधित पंचायतों की स्वीकृत अनुदान/उपलब्ध राशि से किया जाएगा।
फर्नीचर एवं वर्क स्टेशन का अनुमानित विवरण
वर्क स्टेशन (750mm x 600mm x 1200mm) - 20 नग (कुल लागत: रु. 3,07,000)
विज़िटर चेयर कुशन सीट और बैक के साथ - 20 नग (कुल लागत: रु. 40,000)
रिवॉल्विंग चेयर - 1 नग (कुल लागत: रु. 4,000)
टेबल (900mm x 600mm x 750mm) - 1 नग (कुल लागत: रु. 5,000)
कुल अनुमानित लागत: रु. 4,10,000 प्रति अटल ज्ञान केंद्र
सभी संबंधित जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, अति. मुख्य कार्यकारी अधिकारी, अधिशाषी/सहायक अभियंता और विकास अधिकारी, पंचायत समिति को निर्देशित किया जाता है कि समस्त कार्य विभाग द्वारा अनुमोदित ड्राइंग, गुणवत्ता मानकों एवं तकनीकी विनिर्देशों के अनुरूप ही संपन्न हों तथा कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग एवं समयबद्ध पूर्णता सुनिश्चित की जाए।
राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2026 – ग्राम विकास अधिकारी की वरिष्ठता सूची से संबंधित अधिसूचना
राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2026
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 04 जून, 2026 को अधिसूचना जारी कर राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन किया गया है। इसे राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2026 कहा गया है, जो तुरंत प्रभाव से लागू हो गए हैं।
मुख्य बिंदु एवं संशोधन
नियम 285 का संशोधन: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 285 के परंतुक में खंड (iv) और (v) जोड़े गए हैं।
8 जून, 2016 या उसके पश्चात नियुक्त ग्राम विकास अधिकारी: इनकी वरिष्ठता सूची भर्ती एजेंसी से प्राप्त योग्यता/मेरिट सूची के आधार पर तैयार की जाएगी।
अनुकंपात्मक आधार पर नियुक्ति: 8 जून, 2016 या उसके पश्चात अनुकंपा के आधार पर नियुक्त ग्राम विकास अधिकारियों के मामले में वरिष्ठता उनके पदग्रहण (joining) की तारीख के आधार पर निर्धारित होगी।
राज्य स्तर पर वरिष्ठता: ग्राम विकास अधिकारी की वरिष्ठता सूची अब राज्य स्तर पर रखी जाएगी।
आदेश क्रमांक: [सं.एफ.4(09)अमेंड/रूल्स/लीगल/पीआर/2026/37]
जारीकर्ता: भारत भूषण गोयल, उप शासन सचिव, राज्यपाल के आदेश से।
अतिरिक्त विकास अधिकारियों (Addl. Development Officers) की वर्ष 2022-2023 से 2025-2026 की स्थायी वरिष्ठता सूचियां प्रकाशित
अतिरिक्त विकास अधिकारियों की स्थायी वरिष्ठता सूचियां जारी
पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा अतिरिक्त विकास अधिकारियों (Addl. Development Officers) की 01 अप्रैल की स्थिति के अनुसार वर्ष 2022-2023, 2023-2024, 2024-2025 एवं 2025-2026 की स्थायी वरिष्ठता सूचियां विधिवत प्रकाशित कर दी गई हैं।
यह आदेश शासन सचिव एवं आयुक्त डॉ. जोगाराम के हस्ताक्षर से जारी किया गया है।
महत्वपूर्ण बिंदु:
संबंधित पद: अतिरिक्त विकास अधिकारी (Addl. Development Officers)
प्रकाशन वर्ष: 2022-23, 2023-24, 2024-25, 2025-26 (01 अप्रैल की स्थिति के अनुसार)
संबद्ध कार्मिक एवं अधिकारी विभाग की वेबसाइट पर जाकर अपनी वरिष्ठता सूची देख सकते हैं।
माननीय प्रधानमंत्री महोदय की उपस्थिति में 28.02.2026 को आयोजित होने वाले राज्य स्तरीय समारोह के सीधे प्रसारण हेतु व्यवस्था के संबंध में
राज्य स्तरीय समारोह के सीधे प्रसारण हेतु दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी पत्र क्रमांक एफ 165(7)ले.ब./परावि/एसएफसी-7/2025-26/ के माध्यम से दिनांक 28.02.2026 को अजमेर में माननीय प्रधानमंत्री महोदय की उपस्थिति में आयोजित होने वाले राज्य स्तरीय कार्यक्रम के लाइव प्रसारण को ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर दिखाने हेतु व्यवस्था के संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु एवं वित्तीय स्वीकृति
दिनांक 28.02.2026 को अजमेर में होने वाले कार्यक्रम का लाइव प्रसारण जिला, ब्लॉक व ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर आयोजित किया जाना है।
इस कार्यक्रम के सीधे प्रसारण को ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर देखने हेतु समुचित व्यवस्था (जैसे टीवी, स्क्रीन, एलईडी व्यवस्था, फर्नीचर, टेंट, पेयजल व बैठक व्यवस्था) सुनिश्चित की जानी है।
षष्ठ राज्य वित्त आयोग के अंतर्गत पंचायती राज संस्थाओं को देय अनुदान राशि के उपयोग हेतु विभाग के पत्रांक 347 राजकाज क्रमांक 13247621 दिनांक 28.01.2025 द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के बिंदु संख्या-(अ)(3)(xiii) के प्रावधानों के अंतर्गत यह सहमति दी गई है।
प्रत्येक ग्राम पंचायत द्वारा इस प्रयोजन हेतु अधिकतम राशि 10,000/- रुपये तक का व्यय/उपयोग षष्ठ राज्य वित्त आयोग के अंतर्गत उपलब्ध अनुदान राशि से करने की सहमति प्रदान की जाती है।
यह सहमति वित्त विभाग की आई.डी. संख्या 332600355 दिनांक 26.02.2026 द्वारा अनुमोदित है।
जारीकर्ता: (डॉ. जोगा राम), शासन सचिव एवं आयुक्त, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
जिला सलूंबर की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन से संबंधित शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा जारी शुद्धि पत्र
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवारा/2024/889 दिनांक 28-12-2025 के तहत जिला सलूंबर की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसर्जन से संबंधित पूर्व में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटिवश हुए गलत प्रकाशन को सुधारने हेतु शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
विवरण: पूर्व प्रकाशित अधिसूचनाओं (संख्या एफ.15(39)पंवारा/पंचायत समिति गठन/2025/803 दिनांक 20.11.2025 एवं संख्या एफ.15(39)पंवारा/पंचायत समिति गठन/2025/843 दिनांक 21.11.2025) में प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात कॉलम संख्या 6 के स्थान पर कॉलम 7 में अंकित विवरण को सही पढ़ा जाए।
जयपुर जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन संबंधी शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जयपुर जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन के संबंध में दिनांक 28-12-2025 को शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य विवरण:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
क्रमांक: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/ंपरा/2024/874
दिनांक: 28-12-2025
पार्श्वभूमि: पूर्व में जारी विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/ंपरा/2024/788 दिनांक 20.11.2025 एवं संख्या एफ.15(39)ंपरा/पेंचायत समिति गठन/2025/829 दिनांक 21.11.2025 में लिपकीय त्रुटि/गलत प्रकाशन होने की वजह से तथा प्राप्त आवेदनों के निस्तारण पश्चात् यह शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
विशेष निर्देश: नीचे दिए गए कॉलम संख्या 6 में अंकित विवरण के स्थान पर कॉलम 7 में अंकित विवरण को सही समझ कर पढ़ा जाए। इसमें फागी, चाकसू, कोटखावदा, जोबनेर, गोविन्दगढ़, शाहपुरा, माधोराजपुरा, किशनगढ़ रेनवाल, आंधी, जमवारामगढ़, दूदू, सांभरलेक, चौमूं, तूंगा, बस्सी आदि पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के विवरण में संशोधन किया गया है।
जिला डीग में ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन संबंधी शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), जयपुर द्वारा दिनांक 28-12-2025 को एक शुद्धि पत्र (क्रमांक: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/868) जारी किया गया है। यह आदेश जिला डीग की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन के संबंध में पूर्व में जारी अधिसूचनाओं में लिपकीय त्रुटिवश हुए गलत प्रकाशन को सुधारने के लिए जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
आदेश दिनांक: 28-12-2025।
विषय: जिला डीग की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन से संबंधित पूर्व अधिसूचनाओं में संशोधन।
विवरण: पूर्व प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपकीय त्रुटियों के कारण, प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात अब कॉलम संख्या 6 में अंकित विवरण के स्थान पर कॉलम संख्या 7 में अंकित विवरण को सही पढ़ा जाएगा।
यह संशोधन ग्राम पंचायतों तथा पंचायत समितियों दोनों के लिए जारी सूचियों पर लागू होता है।
संबंधित उपयोगकर्ता और अधिकारी विस्तृत जानकारी के लिए मूल अधिसूचना देख सकते हैं।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग - Baran Gram Panchayat & Panchayat Samiti Correction Notification
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार
यह अधिसूचना ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा जिला बारां की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसर्जन के संबंध में पूर्व में जारी अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटि सुधार हेतु जारी की गई शुद्धि पत्र है।
प्रमुख बिंदु:
पूर्व में जारी विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंव्रा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/813 दिनांक 20.11.2025 एवं अन्य संबंधित राजपत्र प्रकाशनों में हुई लिपिकीय त्रुटियों का निस्तारण किया गया है।
अन्ता, अट्रू, छबड़ा, छीपाबड़ोद पंचायत समितियों के अंतर्गत ग्राम पंचायतों के विवरण में संशोधन किया गया है।
नाहरगढ़ पंचायत समिति के अंतर्गत भी विवरण में संशोधन किया गया है।
संशोधित विवरण के अनुसार संबंधित कॉलम में पूर्व प्रकाशित विवरण के स्थान पर अद्यतन विवरण पढ़ा जाए।
करौली जिले में पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन की अधिसूचना
करौली जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए करौली जिले में पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन के संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र में 24 नवंबर 2025 को प्रकाशित हुई है।
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना क्रमांक: एफ.15(39)पंव/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/834 (दिनांक 21 नवंबर 2025)।
अधिकार क्षेत्र: जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार प्रस्तावों एवं आपत्तियों पर सुनवाई के उपरांत राज्य सरकार के अनुमोदन से करौली जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन किया गया है।
नया कार्यकाल: पुनर्गठित/पुनर्रसीमांकित/नवसृजित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात, पुरानी पंचायत समितियां कार्य करना बंद कर देंगी और नई समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है।
जालोर जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्सীमांकन और नवसृजन - अधिसूचना दिनांक 21 नवंबर 2025
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा राजस्थान राजपत्र में जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/831 दिनांक 21 नवंबर 2025 के अंतर्गत जालोर जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्सীमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम का संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 की प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए धारा-9, 10 एवं 101 में वर्णित शक्तियों के तहत यह कार्रवाई की गई है।
जिला कलेक्टर की भूमिका: जिला कलेक्टरों द्वारा प्रस्ताव तैयार करने, सार्वजनिक अवलोकन के लिए प्रसारित करने, एक माह की अवधि में आपत्तियों पर सुनवाई करने तथा राज्य सरकार से अनुमोदन प्राप्त करने के पश्चात यह पुनर्गठन लागू किया गया है।
प्रभाव: अनुसूची में वर्णित पंचायत समितियों का पुनर्गठन/पुनर्सীमांकन/नवसृजन किया गया है तथा संबंधित पंचायत समितियों का कार्यकाल अनुसूची के अनुसार निर्धारित होगा।
यह अधिसूचना राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी की गई है।
दौसा जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन और नवसर्जन - अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा दौसा जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रोमन और नवसर्जन के संबंध में महत्वपूर्ण अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना आदेश क्रमांक एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/822 दिनांक 21-11-2025 के तहत जारी की गई है।
मुख्य बिंदु:
राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए, राज्य सरकार द्वारा दौसा जिले की विभिन्न पंचायत समितियों का पुनर्गठन/पुनर्रोन/नवसर्जन किया गया है।
जिला कलेक्टर द्वारा तैयार किए गए प्रस्तावों एवं आपत्तियों पर विचार करने तथा राज्य सरकार से अनुमोदन प्राप्त करने के पश्चात यह अंतिम आदेश लागू किया गया है।
अनुसूची में वर्णित पंचायत समितियां उस नाम से जानी जाएंगी और निर्धारित स्थानीय क्षेत्र व अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में वर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात, उक्त जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो अनुसूची के स्तंभ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में वर्णित पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
राजस्थान पंचायती राज (अंतरित क्रियाकलाप) (संशोधन) नियम, 2025 जारी
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धाराओं के तहत राजस्थान पंचायती राज (अंतरित क्रियाकलाप) नियम, 2011 में संशोधन हेतु अधिसूचना जारी की गई है।
दिनांक: अक्टूबर 29, 2025 (राजस्थान राजपत्र असाधारण में 31 अक्टूबर 2025 को प्रकाशित)
नियम का नाम: राजस्थान पंचायती राज (अंतरित क्रियाकलाप) (संशोधन) नियम, 2025
प्रभावी तिथि: ये नियम तुरंत प्रवृत्त होंगे।
नियम 8 में संशोधन: राजस्थान पंचायती राज (अंतरित क्रियाकलाप) नियम, 2011 के नियम 8 के विद्यमान खंड (iii) के स्थान पर "एक जिले से दूसरे जिले में संबंधित विभाग" प्रतिस्थापित किया गया है।
यह आदेश राज्यपाल के आदेश से भारत भूषण गोयल, शासन उप सचिव द्वारा जारी किया गया है।
पंचायती राज संस्थाओं के अधीन विद्यालय भवनों में रंग-ररोगन कार्य के संबंध में दिशा-निर्देश
पंचायती राज संस्थाओं के अधीन विद्यालय भवनों में रंग-ररोगन कार्य
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा राजकाज संदर्भ संख्या 18172438 (क्रमांक एफ 4(1111) परावि/पीसी/विविध/22-00409, दिनांक 28-01-2025) के तहत पंचायती राज संस्थाओं के अधीन आने वाले राजकीय विद्यालयों में रंग-रोगन कार्य करवाए जाने के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य निर्देश एवं बिंदु:
समयसीमा: राजकीय विद्यालय भवन में रंग-रोगन का कार्य मध्यावधि अवकाश (दीपावली अवकाश - दिनांक 13.10.2025 से दिनांक 24.10.2025) के मध्य अनिवार्य रूप से पूर्ण कराया जाना सुनिश्चित किया जाए।
विद्यालयों की सूची: इस हेतु जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक) से पंचायती राज संस्थाओं के अधीन राजकीय विद्यालयों की सूची प्राप्त की जावे।
वित्तीय प्रावधान: रंग-रोगन कार्य हेतु आवश्यकतानुसार राशि राज्य वित्त आयोग - षष्ठम योजना अंतर्गत व्यय की जा सकेगी, जिसमें अधिकतम ₹ 1.00 लाख (एक लाख रुपये तक की) सीमा तय की गई है।
गुणवत्ता एवं रंग: उच्च गुणवत्ता के पेंट/कलर का उपयोग किया जाए तथा प्राथमिकता से पर्यावरण-अनुकूल एवं दीर्घकालीन टिकाऊ पेंट का चयन हो। प्राथमिक/उच्च प्राथमिक विद्यालय भवनों पर संलग्न कलर-कोड के अनुसार ही रंग-ररोगन/पेंट किया जाना सुनिश्चित करें।
प्रगति रिपोर्ट: कार्य अधिकृत पद्धति से कराया जाए तथा प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर पूर्ण किए गए कार्य की प्रगति (पूर्व एवं पश्चात् स्थिति के फोटो सहित) जिला परिषद कार्यालय को प्रस्तुत कर विभाग को प्रेषित की जाए।
दिनांक 02 अक्टूबर, 2025 को आयोजित होने वाली ग्राम सभा के संबंध में दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के निर्देश
राजकीय दिशा-निर्देशों के अनुसार राज्य की सभी ग्राम पंचायतों में दिनांक 02 अक्टूबर, 2025 को ग्राम सभा का आयोजन किया जाना सुनिश्चित किया गया है। इस ग्राम सभा में प्रमुख रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर कार्रवाई संपादित की जानी है:
1. सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना से संबंधित बिंदु
वर्ष 2025 के लिए सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के सभी लाभार्थियों के वार्षिक भौतिक सत्यापन का कार्य सुनिश्चित किया जाए।
असतत्यापित पेंशनर्स के रुके हुए पेंशन भुगतान और विभिन्न कारणों से अपात्र हुए पेंशनर्स के मामलों के निस्तारण हेतु ग्राम सभा में व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए।
शत-प्रतिशत पेंशनर्स का वार्षिक सत्यापन कराया जाए तथा अपात्र पाए गए पेंशनर्स की सूची व गलत सूचना के आधार पर निरस्त प्रकरणों की जांच उपरांत पुनः प्रारंभ (री-ओपन) करने की कार्रवाई रिपोर्ट सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग को भेजी जाए।
2. किसान गिरदावरी से संबंधित बिंदु
ग्राम सभाओं में आने वाले किसानों को 'किसान गिरदावरी' मोबाइल ऐप डाउनलोड करने तथा लॉगिन प्रक्रिया की जानकारी दी जाए।
DOIT&C द्वारा तैयार स्क्रीन रिकॉर्डेड वीडियो एवं व्हाट्सएप टेम्पलेट्स का प्रचार-प्रसार किया जाए और व्हाट्सएप चैनल को फॉलो कराया जाए।
3. चारागाह विकास से संबंधित बिंदु
ग्राम पंचायतों में चारागाह और संपत्ति विवरण रजिस्टर का संधारण सुनिश्चित किया जाए।
ग्राम सभा में "एक पंचायत-एक चारागाह" एवं "एक गांव-एक चारागाह" गतिविधि के संबंध में प्रस्ताव लेकर चारागाह विकास हेतु आवश्यक कार्रवाई की जाए।
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 170 के अंतर्गत चारागाह विकास समिति का गठन/नवीनीकरण किया जाए और अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया पूरी की जाए।
4. जन योजना अभियान (पीपीसी) - सबकी योजना सबका विकास
पंचायती राज मंत्रालय, भारत सरकार के पत्र दिनांक 17.09.2025 एवं विभागीय पत्र दिनांक 25.09.2025 के अनुसार ग्राम पंचायत विकास योजनाएँ (GPDP) तैयार करने के लिए ग्राम सभा की बैठक में आवश्यक कार्रवाई की जाए।
माननीय प्रधानमंत्री महोदय के दिनांक 25.09.2025 के कार्यक्रम के सीधे प्रसारण हेतु ग्राम पंचायत स्तर पर व्यवस्था के संबंध में
माननीय प्रधानमंत्री महोदय के कार्यक्रम के सीधे प्रसारण की व्यवस्था
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ 165(7)ले.ब./परावि/एसएफसी-6/2025-26 के अंतर्गत दिनांक 25.09.2025 को बांसवाड़ा में माननीय प्रधानमंत्री महोदय की उपस्थिति में होने वाले राज्य स्तरीय समारोह के लाइव प्रसारण को ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर दिखाने की समुचित व्यवस्था के संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु एवं वित्तीय स्वीकृति
कार्यक्रम: दिनांक 25.09.2025 को बांसवाड़ा में आयोजित होने वाले राज्य स्तरीय समारोह का जिला, ब्लॉक व ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर लाइव प्रसारण।
उद्देश्य: आमजन को सरकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त हो सके।
व्यवस्थाएं: टी.वी./स्क्रीन व्यवस्था, फर्नीचर, दरी, पेयजल आदि से संबंधित व्यय।
वित्तीय प्रावधान: छठे राज्य वित्त आयोग के अंतर्गत उपलब्ध अनुदान राशि से प्रति ग्राम पंचायत अधिकतम रु. 10,000/- (दस हजार रुपये) तक के व्यय/उपयोग करने की सहमति प्रदान की जाती है।
अनुमोदन: यह सहमति वित्त विभाग की आई.डी. संख्या 332501526 दिनांक 23.09.2025 द्वारा अनुमोदित है।
यह आदेश डॉ. जोंगा राम, शासन सचिव एवं आयुक्त, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा जारी किया गया है।
पंड़ित दीनदयाल उपाध्याय अंत्योदय सम्बल पखवाड़ा (24 जून से 09 जुलाई, 2025) के आयोजन हेतु राशि व्यय करने की सहमति
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा 'पंड़ित दीनदयाल उपाध्याय अंत्योदय सम्बल पखवाड़ा' (दिनांक 24 जून, 2025 से 09 जुलाई, 2025) के आयोजन के संबंध में आदेश जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
पखवाड़े की अवधि: 24 जून, 2025 से 09 जुलाई, षष्ठ राज्य वित्त आयोग अंतर्गत पंचायती राज संस्थाओं को देय अनुदान राशि का उपयोग।
व्यय सीमा: ग्राम पंचायत को स्वीकृत अनुदान राशि में से अधिकतम राशि रु. 25,000/- प्रति ग्राम पंचायत व्यय/उपयोग करने की सहमति प्रदान की जाती है।
संदर्भित निर्देश: विभागीय पत्रांक 347 राजकाज क्रमांक 13247621 दिनांक 28.01.2025 के दिशा-निर्देशों के बिंदु सं (अ)(3)(XIII) के अंतर्गत।
वित्त विभाग की सहमति: वित्त विभाग की आई.डी. संख्या 332501054 दिनांक 03.07.2025 द्वारा अनुमोदित।
इस कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान करने के निर्देश दिए गए हैं।
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 के तहत प्ररूप 23-क एवं 23-ख में संशोधन के संबंध में
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 - पट्टा प्ररूप संशोधन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.4(1)नियम/संशो/विधि/पंवारा/2024/304 दिनांक 27-3-2025 के माध्यम से सभी मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद (समस्त राजस्थान) को राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 के तहत जारी पट्टों के प्ररूप-23क एवं 23ख में किए गए संशोधनों के अनुसार पट्टा जारी करने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना विवरण: राजस्थान राजपत्र (असाधारण) दिनांक 20 जनवरी, 2025 में प्रकाशित अधिसूचना (जी.एस.आर. 97) के तहत राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) नियम, 2025 बनाए गए हैं।
प्ररूप-23-क: नियम 157(1) के अंतर्गत आवासीय भूमि का पट्टा (पट्टा विलेख) से संबंधित है, जो पंचायत आबाबी भूमि पर पुराने संनिर्मित घरों पर कब्जे या 31 दिसंबर, 2016 से ठीक पूर्ववर्ती सत्तर वर्ष के दौरान संनिर्मित घरों के लिए है।
प्ररूप-23-ख: नियम 157(2) के अंतर्गत आबाबी भूमि का आवंटन / परिवारों के कब्जे के अस्थायी मकानों / कच्चे मकानों का नियमितीकरण (पट्टा विलेख) से संबंधित है, जो वर्ष 2003 तक के कच्चे/अस्थायी मकानों के कब्जे के लिए है (अधिकतम 300 वर्ग गज)।
आवश्यक कार्रवाई: सभी संबंधित ग्राम पंचायतों को निर्देशित किया गया है कि वे संशोधित प्ररूपों के अनुसार ही पट्टा जारी करना सुनिश्चित करें।
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 के तहत प्ररूप 23-क एवं 23-ख में संशोधन के संबंध में
राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) नियम, 2025
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.4(1)नियम/संशो/विधि/पंवारा/2024/304 दिनांक 27-3-2025 और राजस्थान राजपत्र असाधारण (दिनांक 20 जनवरी, 2025) की अधिसूचना जी.एस.आर. 97 के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 के अंतर्गत पट्टों के प्ररूप-23-क एवं 23-ख में संशोधन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
नियम 157(1) के अंतर्गत प्ररूप-23-क: आवासीय भूमि का पट्टा (पट्टा विलेख) जिसमें पुराने संनिर्मित घरों पर कब्जे या पंचायत आबाद भूमि पर कब्जे से संबंधित प्रावधान और शर्तें शामिल हैं।
नियम 157(2) के अंतर्गत प्ररूप-23-ख: आबाद भूमि का आवंटन / परिवारों के कब्जे के अस्थायी मकानों / कच्चे मकानों का नियमितीकरण (पट्टा विलेख), जिसमें अधिकतम 300 गज तक की आबाद भूमि के निःशुल्क आवंटन और उससे जुड़ी शर्तों का उल्लेख है।
निर्देश: सभी मुख्य कार्यकारी अधिकारियों, जिला परिषद (राजस्थान) को निर्देशित किया गया है कि वे संबंधित ग्राम पंचायतों को संशोधित प्ररूप-23-क और 23-ख के अनुसार पट्टा जारी करना सुनिश्चित कराएं।
बजट घोषणा वर्ष 2025-26 के अंतर्गत अटल ज्ञान केंद्रों की स्थापना एवं क्रियान्विति के संबंध में दिशा-निर्देश
बजट घोषणा वर्ष 2025-26: अटल ज्ञान केंद्रों की स्थापना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज) राजस्थान सरकार द्वारा बजट घोषणा वर्ष 2025-26 के अंतर्गत प्रथम चरण में 3 हजार से अधिक आबादी वाले 2082 ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर अटल ज्ञान केंद्रों की स्थापना और क्रियान्विति के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
प्रमुख बिंदु एवं वित्तीय प्रावधान
केंद्र राशि: प्रत्येक अटल ज्ञान केंद्र हेतु केंद्र राशि रु. 12.50 लाख का व्यय षष्ठम राज्य वित्त आयोग के दिशा-निर्देश क्रमांक 347 दिनांक 28.01.2025 के बिंदु संख्या 3(iv) 'सामुदायिक केंद्रों का निर्माण एवं रख-रखाव कार्य' (जिसमें पुस्तकालय एवं वाचनालयों का निर्माण, फर्नीचर यथा कुर्सी, टेबल आदि) के तहत किया जा सकेगा।
इंटरनेट सुविधा: 15वें वित्त आयोग के दिशा-निर्देश क्रमांक 301 दिनांक 15.02.2022 के बिंदु संख्या 8 'सार्वजनिक पुस्तकालय' के तहत इंटरनेट सुविधा प्राप्त करने हेतु एकबारीय लागत एवं आवर्ती व्यय का उपयोग किया जा सकेगा।
कंप्यूटर क्रय: षष्ठम राज्य वित्त आयोग के दिशा-निर्देश के बिंदु संख्या (ब)(1) 'सूचना प्रौद्योगिकी/ई-गवर्नेंस/डेटा बेस का उपयोग' के तहत प्रति ग्राम पंचायत 4 कंप्यूटर क्रय किए जा सकेंगे।
अटल ज्ञान केंद्रों की स्थापना हेतु निर्धारित समय सीमा
प्रशासनिक स्वीकृति जारी करना - दिनांक 15.06.2025 तक
तकनीकी स्वीकृति जारी करना - दिनांक 30.06.2025 तक
वित्तीय स्वीकृति जारी करना - दिनांक 05.07.2025 तक
निविदा जारी संबंधित कार्यवाही - दिनांक 15.07.2025 तक
अटल प्रेरकों का चयन
प्रथम चरण में चयनित 2082 ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर अटल ज्ञान केंद्रों की स्थापना के उपरांत निर्धारित प्रक्रिया द्वारा आउटसोर्सिंग के माध्यम से अटल प्रेरकों का चयन किया जाएगा। अटल प्रेरक मानदेय का भुगतान 15वें वित्त आयोग के दिशा-निर्देश के बिंदु संख्या 13 के तहत अन्य बुनियादी सेवाओं/संवर्धित सेवाओं के आवर्ती व्यय और आवश्यक रूप से अन्य प्रशासनिक खर्च (10 प्रतिशत की सीमा भीतर) के तहत किया सकेगा। यह वित्त विभाग की आईडी संख्या 332500866 दिनांक 02.06.2025 द्वारा अनुमोदित है।
ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित स्वच्छता गतिविधियों के भुगतान के सम्बन्ध में दिशा-निर्देश
स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत स्वच्छता गतिविधियों के भुगतान संबंधी निर्देश
राजस्थान सरकार, निदेशालय, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण), पंचायती राज विभाग द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित स्वच्छता सुनिश्चित करने एवं संपादित स्वच्छता गतिविधियों के भुगतान के संबंध में आदेश क्रमांक एफ 12(परावि/एसबीएम/BSR Sanitation/2024-25/3037-44 दिनांक 05.02.2025 जारी किया गया है।
भुगतान की प्रक्रिया एवं मुख्य बिंदु:
ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित साफ-सफाई की व्यवस्था हेतु ग्रामीण विकास विभाग द्वारा स्थायी आदेश संख्या 1/2024 दिनांक 03.09.2024 के तहत 05 आइटम की दरों का निर्धारण कर संवेदक के माध्यम से निविदा आमंत्रित कर कार्य करवाए जाने के निर्देश दिए गए हैं।
मॉडल टेंडर डॉक्यूमेंट के बिंदु संख्या 27, 28, 31 के अनुसार संवेदक द्वारा किए जा रहे स्वच्छता कार्य का भुगतान मासिक आधार पर निम्नलिखित प्रक्रिया से होगा:
सफाई कार्य की ग्राम पंचायत के दैनिक रजिस्टर में प्रविष्टि / रिपोर्ट।
ग्राम पंचायत में ग्रामीण जल एवं स्वच्छता समिति की रिपोर्ट।
स्वच्छता कार्यों की ऑनलाइन पोर्टल लागू किए जाने पर ऐप की रिपोर्ट।
तकनीकी अधिकारी (कनिष्ठ तकनीकी सहायक, कनिष्ठ अभियंता, सहायक अभियंता) द्वारा सड़क एवं नाली सफाई का सत्यापन एवं समस्त 4 संधारित रजिस्टरों में इन्द्राज कर हस्ताक्षर करना।
उक्तानुसार संधारित रजिस्टर/लॉगबुक की प्रतिलिपि प्रतिमाह विकास अधिकारी को प्रस्तुत की जाएगी।
हस्ताक्षर रजिस्टर की छायाप्रतियां बिल के साथ संलग्न कर भुगतान किया सकेगा।
कार्यों के सम्पादन हेतु सामान्य वित्तीय एवं लेखा नियम, RTPP Act and Rules, ग्रामीण कार्य निर्देशिका, 15वां वित्त आयोग / राज्य वित्त आयोग के प्रावधान लागू होंगे।
SOP के अनुसार संबंधित तकनीकी अधिकारियों के निरीक्षण/सत्यापन/प्रमाणीकरण उपरांत उपयोगिता प्रमाण-पत्र जारी किए जाने के पश्चात राशि का समायोजन 15वें वित्त आयोग एवं अन्य के दिशा-निर्देशों के अनुसार किया जाएगा।
15वें वित्त आयोग वित्तीय वर्ष 2023-24 (टייד अनुदान द्वितीय किस्त) की राशि ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर मैनुअल रिसिप्ट वाउचर की प्रविष्टि के संबंध में
15वें वित्त आयोग के अंतर्गत टाइड अनुदान की प्रविष्टि के संबंध में निर्देश
कार्यालय जिला परिषद, बाड़मेर एवं ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा जारी पत्र के अनुसार 15वें वित्त आयोग के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए देय टाइड अनुदान की द्वितीय किस्त की राशि रुपये 872.86 करोड़ (वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए) के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
विषय: 15वें वित्त आयोग अन्तर्गत वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए देय टाइड अनुदान की द्वितीय किस्त की राशि रुपये 872.86 करोड़ राशि के ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर मैनुअल रिसिप्ट वाउचर की एंट्री खुलवाने के संबंध में।
तकनीकी कारणों से छूट: 15वें वित्त आयोग के वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए देय टाइड अनुदान की प्रथम किस्त की राशि रुपये 791.34 करोड़ पंचायती राज संस्थाओं (जिला परिषदों, पंचायत समितियों एवं ग्राम पंचायतों) को हस्तांतरित की जा चुकी है, किंतु तकनीकी कारणों से संपूर्ण राशि ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर प्रदर्शित नहीं हो रही थी।
अनुमति: पंचायती राज मंत्रालय भारत सरकार द्वारा उक्त राशि के मैनुअल रिसिप्ट दिनांक 20.02.2025 तक खोले जाने की अनुमति प्रदान की गई है।
निर्देश: 15वें वित्त आयोग अन्तर्गत वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए देय टाइड अनुदान की द्वितीय किस्त की राशि रुपये 872.86 करोड़ (वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए देय टाइड अनुदान की प्रथम किस्त की राशि रुपये 791.34 करोड़) पंचायती राज संस्थाओं यथा जिला परिषदों, पंचायत समितियों एवं ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित की गई राशि की सीमा में ही मैनुअल रिसिप्ट वाउचर की एन्ट्री किया जाना सुनिश्चित करें।
व्यक्तिगत जिम्मेदारी: उक्त राशि की सीमा से अधिक राशि का इन्ड्राज किये जाने पर संबंधित व्यक्ति व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे।
दिनांक 26 जनवरी 2025 को आयोजित होने वाली ग्राम सभा के संबंध में दिशा-निर्देश
26 जनवरी 2025 को ग्राम सभा का आयोजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा जारी पत्र क्रमांक एफ.15(10)पंरावि/विधि/वि0ग्रा0सभा/24/ईफाईल 22379 (दिनांक 23.01.2025) के अनुसार राज्य की सभी ग्राम पंचायत में दिनांक 26 जनवरी 2025 को ग्राम सभा का आयोजन किया जाना है। इस संबंध में सभी मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद और विकास अधिकारी, पंचायत समिति को आवश्यक कार्रवाई हेतु निर्देश दिए गए हैं।
ग्राम सभा के मुख्य एजेंडा बिंदु
सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना से संबंधित बिंदु: सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के पत्रांक 12901185 दिनांक 09.01.2025 के अनुसरण में, दिनांक 26 जनवरी 2025 की ग्राम सभा में पेंशनर्स के वार्षिक भौतिक सत्यापन, विभिन्न कारणों से निरस्त की गई पेंशन स्वीकृतियों की सूची का पठन, अपात्र पेंशनर्स के पी.पी.ओ. निरस्त करने तथा पात्र पेंशनर की गलत सूचनाओं के आधार पर निरست की गई पेंशन को पुनः प्रारंभ किए जाने हेतु अनुमोदन की कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं से संबंधित रिपोर्ट निर्धारित प्रपत्र में भेजी जाएगी।
राज-किसान गिरदावरी मोबाइल ऐप: बजट घोषणा 2024-25 के अनुसार एग्रीस्टेक के माध्यम से किसान स्तर से स्वयं के खसरे पर जाकर फसल की फोटो लेकर (geo-location with photo based) ऑनलाइन गिरदावरी किए जाने का प्रावधान है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय भारत सरकार के एग्रीस्टेक प्रोजेक्ट के अंतर्गत रबी संवत 2081 से राज्य की ऑनलाइन तहसीलों में डिजिटल क्रॉप सर्वे (ई-गिरदावरी) दिनांक 01.01.2025 सेारंभ किया गया है।
पर्यावरण संरक्षण कार्य योजना एवं उपभोक्ता सशक्तिकरण शपथ: गांव में प्लास्टिक मुक्त वातावरण बनाना, जैविक खेती को प्रोत्साहित करना, वृक्षारोपण, जल संरक्षण और पर्यावरणीय जागरूकता पर चर्चा की जाएगी। इसके अलावा, गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में उपभोक्ता सशक्तिकरण के लिए गुणवत्ता शपथ ग्रहण कराई जाएगी।
विशेष निर्देश: ग्राम सभा के दौरान भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के सहयोग से उपभोक्ता सशक्तिकरण के लिए गुणवत्ता शपथ ग्रहण करवाने तथा संबंधित फोटो व वीडियो श्री राजेन्द्र कुमार मीणा (मोबाइल नंबर - 9636845891) को व्हाट्सएप पर भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
पंचायती राज संस्थाओं के जनप्रतिनिधियों के मानदेय में संशोधन की अधिसूचना
पंचायती राज जनप्रतिनिधियों के मानदेय में संशोधन
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज) द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक एफ.951(19)(41)परावि/लेखा/नि.आ./बजट घोषणा/2022-23 के अनुसार, माननीय उप मुख्यमंत्री (वित्त) महोदया की दिनांक 08.02.2024 की बजट घोषणा के बिंदु सं.-48 के क्रम में पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के मानदेय की दरों में संशोधन किया गया है।
मानदेय की संशोधित दरें
जिला प्रमुख, जिला परिषद: वर्तमान दर 13800/- रुपये प्रति माह से बढ़ाकर संशोधित दर 15180/- रुपये प्रति माह की गई है।
प्रधान, पंचायत समिति: वर्तमान दर 9660/- रुपये प्रति माह से बढ़ाकर संशोधित दर 10626/- रुपये प्रति माह की गई है।
सरपंच, ग्राम पंचायत: वर्तमान दर 5520/- रुपये प्रति माह से बढ़ाकर संशोधित दर 6072/- रुपये प्रति माह की गई है।
जनप्रतिनिधियों को देय मानदेय का भुगतान राज्य वित्त आयोग के तहत मिलने वाली अनुदान राशि से किया जाएगा। यह आदेश दिनांक 01.04.2024 से लागू होगा। यह अधिसूचना वित्त (व्यय-5) विभाग की आईडी संख्या 332400440 दिनांक 14.03.2024 से प्राप्त सहमति के अनुसरण में जारी की गई है।
ग्राम विकास अधिकारियों की राज्यस्तरीय अंतिम वरिष्ठता सूची (01 अप्रैल, 2020 की स्थिति)
ग्राम विकास अधिकारियों की राज्यस्तरीय अंतिम वरिष्ठता सूची जारी
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 23/01/2023 को आदेश क्रमांक एफ.28(67)पंरावि/प्रशा.2/ग्राविवो/वरि० सूची/2022/313 जारी किया गया है। यह आदेश विभागीय आदेश क्रमांक 4573 दिनांक 16.12.2022 के क्रम में ग्राम विकास अधिकारियों की 01 अप्रैल, 2020 की स्थिति के अनुसार राज्यस्तरीय अस्थायी वरिष्ठता सूची पर जिला परिषदों से प्राप्त आपत्तियों के निस्तारण के पश्चात प्रकाशित की गई है।
मुख्य बिंदु:
पद का नाम: ग्राम विकास अधिकारी
स्थिति की तिथि: 01 अप्रैल, 2020
क्षेत्र: टीएसपी (TSP) एवं नॉन टीएसपी (Non-TSP) क्षेत्र
संबंधित ग्राम विकास अधिकारी एवं पंचायत समितियां इस सूची को आधिकारिक पोर्टल से देख सकते हैं।
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 के अंतर्गत पुराने गृहों के वि नियमितीकरण एवं पट्टा जारी करने के संबंध में दिशा-निर्देश
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश (क्रमांक: एफ.4(1) दिशा-निर्देश/विधि/पंव/2023/04, दिनांक: 11.1.23) के अनुसार राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157-पुराने गृहों के विनिियमितीकरण के अंतर्गत 300 वर्गगज एवं उससे अधिक क्षेत्रफल के भूखंड का पट्टा जारी करने के संबंध में निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
नियम संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 का नियम 157 (पुराने गृहों का विनिियमितीकरण)।
क्षेत्रफल: 300 वर्गगज संनिर्मित क्षेत्रफल से अधिक भूमि जो आवासीय परिसर के साथ उपयोग में आ रही खाली आबादी भूमि का पट्टा नियम 157(1)(ii), उपयुक्त खण्ड (i) में विनिर्दिष्ट क्षेत्रफल से अधिक क्षेत्रफल के लिए है।
शर्ते एवं प्रक्रिया: ऐसे अधिक क्षेत्रफल पर राजस्थान स्टाम्प नियम, 2004 के नियम 58 के खण्ड (ख) के अधीन गठित जिला स्तरीय समिति द्वारा सिफारिश की गई नई बाजार दरों का 25 प्रतिशत राशि जमा करके भूखंडधारी के उपयोग में आ रही कब्जा शुदा (संपूर्ण) आबादी भूमि का पट्टा जारी किया जा सकता है।
पंचायत समिति एवं ग्राम पंचायत के स्वामित्व वाली भूमियों की सूचना भेजने बाबत निर्देश
पंचायत समिति एवं ग्राम पंचायत के स्वामित्व वाली भूमियों की सूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी पत्र क्रमांक एफ.4(14)लैण्ड बैंक/विधि/पंव्रा/2022/720 दिनांक 09/06/2022 के माध्यम से सभी मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद (राजस्थान) को पंचायत समिति एवं ग्राम पंचायत के स्वामित्व वाली भूमियों की सूचना भेजने के संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य उद्देश्य एवं पृष्ठभूमि
माननीय मंत्री महोदय, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज द्वारा दिनांक 15.3.2022 को राज्य विधानसभा में चर्चा के दौरान यह घोषणा की गई थी कि ग्राम पंचायतों की भूमि का रिकॉर्ड संधारित कर लैण्ड बैंक बनाया जाएगा, जिससे पंचायतों की निजी आय में वृद्धि हो सके।
समयबद्ध कार्यवाही हेतु निर्देश
15 दिवस की अवधि: समस्त विकास अधिकारीगण अपने कार्यालय के जिम्मेदार अधिकारी/कार्मिक को पाबंद करें तथा स्वयं क्षेत्र के राजस्व अधिकारियों (तहसीलदार, पटवारी आदि) के कार्यालय से संपर्क कर पंचायत समिति/ग्राम पंचायत के स्वामित्व की भूमि (चाहे वह आ आबादी किस्म की हो अथवा कृषि या अन्य किस्म की) का संपूर्ण विवरण प्राप्त कर जमाबंदी की प्रति प्राप्त करें। यह कार्य अधिकतम 15 दिवस में पूर्ण कराया जाए।
7 दिवस की अवधि: राजस्व रिकॉर्ड से सूचना प्राप्त होने के पश्चात संलग्न प्रपत्र में पंचायतवार/पंचायत समितिवार सूचना अधिकतम 07 दिवस में आवश्यक रूप से भरवाई जाए।
कुल समयसीमा: इस प्रकार वांछित प्रपत्र हर हाल में अधिकतम 21 दिवस की अवधि में पंचायती राज विभाग को भिजवाया जाना सुनिश्चित किया जाए।
ग्राम विकास अधिकारी (ग्राम सेवक) के रिक्त पदों का कार्यभार सौंपे जाने बाबत निर्देश
ग्राम विकास अधिकारी के रिक्त पदों के कार्यभार के संबंध में निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी पत्र क्रमांक एफ.37()पंवारा/प्रशा.2/मंत्रा/ग्रासेचार्ज/2018/1024 दिनांक 06/05/2022 के माध्यम से ग्राम विकास अधिकारी (ग्राम सेवक) के रिक्त पदों का कार्यभार दिए जाने के संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
कार्यभार की सीमा: किसी भी ग्राम पंचायत में ग्राम विकास अधिकारी का पद रिक्त होने पर उसकी समीपस्थ ग्राम पंचायत में नियुक्त ग्राम विकास अधिकारी को चार्ज दिलाया जाए, किंतु किसी भी अवस्था में ग्राम विकास अधिकारी के पास दो से अधिक ग्राम पंचायतों का कार्यभार नहीं दिया जाए।
कनिष्ठ लिपक (LDC) को कार्यभार: जिले में रिक्त पदों का कार्यभार दिए जाने के पश्चात जिन ग्राम पंचायतों में पद रिक्त रहें, वहां ग्राम विकास अधिकारी का कार्यभार उसी पंचायत के कार्यरत कनिष्ठ लिपिक को दिया जाए। यह ध्यान रखा जाए कि किसी भी कनिष्ठ लिपिक के पास एक से अधिक ग्राम पंचायत का कार्यभार न हो।
अन्य व्यवस्था: यदि किसी ग्राम पंचायत में ग्राम विकास अधिकारी का पद रिक्त रहे अथवा ग्राम विकास अधिकारी और कनिष्ठ लिपिक दोनों ही पद रिक्त हों, तो राज्य हित को ध्यान में रखते हुए कार्यभार अन्य ग्राम विकास अधिकारी/कनिष्ठ लिपिक को दिए जाने हेतु संबंधित जिले के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद को अधिकृत किया गया है।
राजस्थान लोक उपापन में पारदर्शिता नियम, 2013 के नियम 16 के अंतर्गत 6.00 लाख रुपये से अधिक लागत के कार्यों हेतु सामग्री उपापन के संबंध में मार्गदर्शन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग का महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा क्रमांक एफ 27(263)ग्रावि/ग्रुप-5/जीकेण/उपापन 2015-18, जयपुर, दिनांक 29 नवम्बर 2021 के तहत राजस्थान लोक उपापन में पारदर्शिता अधिनियम, 2012 एवं राजस्थान लोक उपापन में पारदर्शिता नियम, 2013 के नियम 16 के प्रावधानों के अंतर्गत महात्मा गांधी नरेगा योजना सहित निर्माण कार्य हेतु आनुषंगिक सामग्री के उपापन के संबंध में विस्तृत मार्गदर्शन जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु एवं निर्देश
नियम संशोधन: राजस्थान राजपत्र विशेषांक में जारी अधिसूचना दिनांक 1 अक्टूबर, 2021 (G.S.R. 349) के अनुसार राजस्थान लोक उपापन में पारदर्शिता नियम, 2013 के नियम 16 के उप-नियम (1) के परन्तुक में 'पांच लाख' के स्थान पर 'छः लाख' तथा 'पचास लाख' के स्थान पर 'साठ लाख' प्रतिस्थापित किया गया है।
6.00 लाख रुपये से अधिक के कार्य: महात्मा गांधी नरेगा को छोड़कर ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा क्रियान्वित योजनाओं के अंतर्गत स्वीकृत 6.00 लाख रुपये से अधिक लागत के समस्त कार्य राजस्थान लोक उपापन में पारदर्शिता नियम, 2013 की पालना कर संपूर्ण कार्य (श्रम एवं सामग्री सहित) संकर्म निविदा (वर्क्स टेंडर) द्वारा संपादित कराए जाएंगे।
सामग्री उपापन सीमा: पंचायती राज संस्थाएं सीमित निविदा के माध्यम से अधिकतम सीमा राशि रु. 60.00 लाख तक की सामग्री का उपापन कर सकती हैं।
कार्य समिति की जिम्मेदारी: पंचायती राज संस्था द्वारा एक वित्तीय वर्ष में रु. 60.00 लाख तक की पालना कराने का उत्तरदायित्व संबंधित पंचायत समिति का होगा।
ई-उपापन प्रक्रिया: रु. 6.00 लाख से अधिक लागत (श्रम सामग्री सहित) के कार्यों हेतु सामग्री का क्रय/उपापन ई-उपापन (E-Procurement) प्रक्रिया को अपना कर ही संपादित किया जाएगा।
अधिक जानकारी एवं विस्तृत दिशा-निर्देशों के लिए कृपया मूल विभागीय आदेश पत्र का अवलोकन करें।
राजस्थान लोक उपापन में पारदर्शिता (RTTP) नियम 2013 के नियम 16 के अंतर्गत महात्मा नरेगा योजनांतर्गत निर्माण कार्यों हेतु आनुषंगिक सामग्री उपापन बाबत दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग का महत्वपूर्ण आदेश
यह आदेश ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रामीण विकास, अनुभाग-5), राजस्थान सरकार द्वारा क्रमांक एफ 27(263)प्रावि/युप-5/जीकेएन/उपापन 2015-18, दिनांक 29 नवम्बर 2021 को जारी किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य राजस्थान लोक उपापन में पारदर्शिता अधिनियम, 2012 एवं राजस्थान लोक उपापन में पारदर्शिता नियम, 2013 के नियम 16 के तहत महात्मा नरेगा योजनांतर्गत स्वीकृत निर्माण कार्यों हेतु आनुषंगिक सामग्री के उपापन के संबंध में मार्गदर्शन प्रदान करना है।
मुख्य दिशा-बिंदु एवं नियम:
सीमा में संशोधन: राजस्थान लोक उपापन में पारदर्शिता नियम, 2013 के नियम 16 के प्रावधानों के तहत 'सीमित बोली' प्रक्रिया के अंतर्गत वित्तीय वर्ष में सामग्री उपापन की अधिकतम सीमा को 'पाँच लाख रुपये' से बढ़ाकर 'छः लाख रुपये' (6.00 लाख रुपये) कर दिया गया है।
6.00 लाख रुपये तक के कार्य: महात्मा नरेगा योजना सहित अन्य योजनाओं के अंतर्गत रुपये 6.00 लाख तक (श्रम सामग्री सहित) की लागत के कार्यों हेतु सामग्री उपापन 'सीमित निविदा' के माध्यम से किया जा सकेगा।
6.00 लाख रुपये से अधिक के कार्य: रुपये 6.00 लाख से अधिक लागत के समस्त कार्य राजस्थान लोक उपापन में पारदर्शिता अधिनियम, 2012 एवं नियम, 2013 की पालना में अनिवार्य रूप से पूर्ण कार्य (श्रम एवं सामग्री सहित) संकर्म निविदा (वर्क्स एंड मटेरियल सप्लाई टेंडर) के माध्यम से कराए जाएंगे।
वित्तीय सीमा: पंचायती राज संस्थाओं द्वारा एक वित्तीय वर्ष में सामग्री उपापन की निर्धारित अधिकतम सीमा रु. 60.00 लाख तक की पालना करने का उत्तरदायित्व संबंधित पंचायत समिति का होगा।
ई-प्रोक्योरमेंट (E-Procurement): रुपये 6.00 लाख से अधिक लागत के कार्यों हेतु सामग्री का क्रय/उपापन 'राजस्थान लोक उपापन में पारदर्शिता अधिनियम, 2012' एवं नियमों के तहत ई-उपापन प्रक्रिया को अपनाकर ही संपादित किया जाएगा।
अधिक जानकारी के लिए कृपया विभागीय आदेश पत्र संख्या एफ 27(263)प्रावि/युप-5/जीकेएन/उपापन 2015-18 दिनांक 29 नवंबर 2021 का अवलोकन करें।
राजस्थान पंचायती राज (चतुर्थ संशोधन) नियम, 2021 - प्रशासन गांवों के संग अभियान के दौरान शुल्क में छूट
राजस्थान पंचायती राज (चतुर्थ संशोधन) नियम, 2021
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा अधिसूचना दिनांक 06 अक्टूबर, 2021 जारी कर राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन किया गया है। इसके तहत 'राजस्थान पंचायती राज (चतुर्थ संशोधन) नियम, 2021' बनाए गए हैं जो तुरंत प्रभाव से लागू हो गए हैं।
प्रमुख बिंदु:
नियम 157 का संशोधन: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 के उप-नियम (1) के अंतर्गत एक नया परंतुक जोड़ा गया है।
प्रशासन गांवों के संग अभियान 2021: इस अभियान की समयावधि के दौरान खंड (i) और (ii) के अधीन विनिर्दिष्ट दरों के पचास प्रतिशत (50%) के समतुल्य दर से ही शुल्क प्रभारित किया जाएगा।
यह आदेश राज्यपाल के आदेश से डॉ. प्रेम सिंह चारण, संयुक्त शासन सचिव द्वारा [सं. एफ.139(45)पंरावि/विधि/संशो/2021/860] के अंतर्गत जारी किया गया है।
स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन बाबत महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन बाबत निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 18.01.2021 को 'स्वामित्व योजना' के क्रियान्वयन के संबंध में महत्वपूर्ण आदेश जारी किया गया है। राष्ट्रीय पंचायत दिवस (24 अप्रैल 2020) पर केंद्र सरकार द्वारा आरंभ की गई इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पंचायती राज पर इसके दूरगामी प्रभावों को देखते हुए राजस्व विभाग एवं पंचायती राज विभाग के संयुक्त प्रयासों से क्रियान्वयन करना है।
योजना की मुख्य बातें और प्रक्रिया
ड्रोन फोटोग्राफी और मैपिंग: भारतीय सर्वेक्षण विभाग (Survey of India) द्वारा प्रत्येक राजस्व ग्राम की आबादी भूमि का मानचित्र ड्रोन के जरिए फोटोग्राफी कर तैयार किया जाएगा।
चूना मार्किंग: ड्रोन उड़ान से पहले राजस्व ग्राम की आबादी भूमि की बाहरी सीमा (outer line) पर चार इंच चौड़ाई की चूना लाइन डालकर सीमा मार्क की जाएगी। खाली पड़े भूखंडों को भी चूना लाइन डालकर चिह्नित किया जाएगा।
सर्वे समिति का गठन: प्रत्येक राजस्व ग्राम हेतु सर्वे समिति का गठन किया जाएगा जिसमें ग्राम सेवक, दो वार्ड पंच (संबंधित राजस्व ग्राम व अन्य वार्ड पंच) और पंचायत का एक कार्मिक (कनिष्ठ लिपिक अथवा ग्राम रोजगार सहायक) शामिल होंगे। यह समिति प्राप्त इमेज मैप के अनुसार प्रत्येक भूखंड और निर्मित भवन का सर्वे कर निर्धारित प्रपत्र में जानकारी संकलित करेगी।
आपत्तियां एवं निस्तारण: ग्राम पंचायत द्वारा सर्वे प्रपत्र और इमेज मैप की प्रति पंचायत भवन एवं सार्वजनिक स्थल पर चस्पा की जाएगी। राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम-148 के प्रावधानुसार 07 दिवस के भीतर आपत्तियां दर्ज कराई जा सकेंगी, जिनका निस्तारण ग्राम सभा के माध्यम से किया जाएगा।
पट्टा वितरण: आपत्तियों के निराकरण के बाद फाइनल इमेज मैप (आईडी नंबरिंग सहित) के आधार पर संबंधित लाभार्थियों को राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के प्रावधानों के तहत पट्टा, रजिस्ट्री एवं पीडीएफ कॉपी मोबाइल नंबर पर उपलब्ध कराई जाएगी।
प्रथम चरण: राज्य में इस योजना का सबसे पहले क्रियान्वयन जैसलमेर जिले में किया जाना है।
राजस्थान में स्वामित्त्व योजना के क्रियान्वयन बाबत दिशा-निर्देश
स्वामित्त्व योजना का क्रियान्वयन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.4(1)स्वामित्त्व/विधि/पंश/2020/4046 दिनांक 07.09.2020 के अंतर्गत 'स्वामित्त्व योजना' के क्रियान्वयन के संबंध में विस्तृत निर्देश जारी किए गए हैं। इस पत्र के साथ भारत सरकार द्वारा जारी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) भी संलग्न किया गया है।
योजना का मुख्य उद्देश्य
ग्रामीण भारत में आबाद क्षेत्रों (Abadi Land) की ड्रोन सर्वेक्षण तकनीक से पैमाइश कर डिजिटल मानचित्र तैयार करना।
ग्रामीण परिवारों को 'प्रॉपर्टी कार्ड' (अधिकारों के अभिलेख) वितरित करना ताकि वे अपनी संपत्ति का उपयोग बैंक ऋण और अन्य वित्तीय लाभ प्राप्त करने के लिए कर सकें।
ग्राम पंचायतों में संपत्ति कर और संपत्ति रजिस्टर को अद्यतन कर कर संग्रहण प्रणाली को सुदृढ़ बनाना।
ग्रामीण संपत्ति से जुड़े आपसी विवादों और अदालतों में लम्बित मुकदमों के त्वरित निराकरण का मार्ग प्रशस्त करना।
प्रमुख प्रक्रिया एवं चरण (Standard Operating Procedure)
CORS नेटवर्क की स्थापना: पायलट चरण के तहत राजस्थान और पंजाब राज्यों में सतत प्रचलित संदर्भ स्टेशन (CORS) नेटवर्क की स्थापना।
तैयारी की गतिविधियां: कलेक्टर/सक्षम प्राधिकारी द्वारा सार्वजनिक नोटिस के माध्यम से सर्वेक्षण क्षेत्र की अधिसूचना, ग्राम सभा का आयोजन, और राजस्व विभाग एवं ग्राम पंचायत अधिकारियों द्वारा सीमाओं का चूना लाइनों से चिह्नीकरण।
ड्रोन सर्वेक्षण एवं डेटा प्रोसेसिंग: भारतीय सर्वेक्षण विभाग (Survey of India) द्वारा ड्रोन के माध्यम से हवाई तस्वीरें लेना और जीआईएस (GIS) लैब में डेटा प्रोसेसिंग कर ऑर्थो-रेक्टिफाइड इमेज (ORI) तथा लैंड पार्सल मैप्स (LPM) तैयार करना।
दावा और आपत्ति निस्तारण: ग्राम सभा, भूस्वामियों और राजस्व अधिकारियों की मदद से स्वामित्व का सत्यापन तथा प्राप्त आपत्तियों का निस्तारण।
प्रॉपर्टी कार्ड का वितरण: राजस्व विभाग द्वारा अंतिम मानचित्रों और टेक्स्ट डेटा के आधार पर ग्रामीणों को प्रॉपर्टी कार्ड जारी करना।
संबंधित विभाग एवं अधिकारी
इस योजना के क्रियान्वयन में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राज्य राजस्व विभाग, भारतीय सर्वेक्षण विभाग (Survey of India), और पंचायती राज संस्थाएं (सरपंच, पंचायत सचिव, ग्राम सेवक) संयुक्त रूप से कार्य कर रहे हैं।
पुराने पट्टों के पुनर्विधमान्यकरण (Revalidation) किये जाने बाबत आदेश
पुराने पट्टों का पुनर्विधमान्यकरण (Revalidation)
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा पुराने पट्टों के पुनर्विधमान्यकरण के संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
नया नियम: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में नया नियम-167क जोड़ा गया है जिसके तहत पंचायत द्वारा जारी किये गए विक्रय विलेख, पट्टा या पट्टा विलेख का पुनर्विधमान्यकरण (Revalidation) किया जा सकता है।
शर्तें: पट्टे का पुनर्विधमान्यकरण ग्राम पंचायत में उपलब्ध रिकॉर्ड से मिलान कर पट्टा नियमानुसार जारी होने की स्थिति में तथा पट्टाधारक स्वयं या उसके वारिसान द्वारा प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करने पर ही किया जाएगा।
प्रारूप: पट्टे का पुनर्विधमान्यकरण मूल पट्टे पर ही निर्धारित प्रारूप में किया जायेगा जिसमें ग्राम पंचायत की बैठक दिनांक, प्रस्ताव संख्या और पुनर्विधमान्यकरण की दिनांक का उल्लेख किया जाएगा।
हस्ताक्षर: इस प्रक्रिया में ग्राम विकास अधिकारी और सरपंच के हस्ताक्षर होंगे।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना - भूमि रूपांतरण और प्राधिकृत अधिकारी (25 जून 2018)
अधिसूचना विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना दिनांक 25 जून 2018 (एस.ओ. 77 और एस.ओ. 78) के अंतर्गत राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम सं. 13) की धाराओं के तहत प्राधिकृत अधिकारियों और उनके क्षेत्रों का निर्धारण किया गया है।
मुख्य बिंदु
एस.ओ. 77: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 107-क की उप-धारा (3) के तहत, राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 173-क के अधीन विभिन्न प्राधिकारियों को प्रयोजन और क्षेत्रफल के अनुसार प्राधिकृत किया गया है:
संबंधित ग्राम पंचायत: 100 वर्गमीटर तक वाणिज्यिक प्रयोजन (सिनेमा, मल्टीप्लेक्स, पेट्रोल पंप को अपवर्जित करते हुए) और 300 वर्गमीटर तक लोक उपयोग प्रयोजन।
संबंधित पंचायत समिति की प्रशासनिक और स्थापन समिति: 100 वर्गमीटर से अधिक किंतु 300 वर्गमीटर तक वाणिज्यिक प्रयोजन (सिनेमा, मल्टीप्लेक्स, पेट्रोल पंप को छोड़कर), 300 वर्गमीटर से अधिक किंतु 900 वर्गमीटर तक लोक उपयोग प्रयोजन, तथा 300 वर्गमीटर तक चिकित्सा सुविधा प्रयोजन।
संबंधित जिला परिषद की प्रशासनिक और स्थापन समिति: 300 वर्गमीटर से अधिक वाणिज्यिक प्रयोजन, 900 वर्गमीटर से अधिक लोक उपयोग प्रयोजन, तथा 300 वर्गमीटर से अधिक चिकित्सा सुविधा प्रयोजन।
राज्य सरकार: किसी भी क्षेत्र के लिए सिनेमा, मल्टीप्लेक्स, पेट्रोल पंप से संबंधित वाणिज्यिक प्रयोजन, औद्योगिक क्षेत्र/औद्योगिक संपदा प्रयोजन, और सौर या वायु शक्ति संयंत्र की स्थापना।
एस.ओ. 78: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 107-ख की उप-धारा (1) के तहत, संबंधित जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (Chief Executive Officer) को राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 173-ख के अधीन प्राधिकृत अधिकारी के कृत्यों का पालन करने के लिए प्राधिकृत किया गया है।
आदेश संख्या: संख्या एफ.4(93)सीएलूंग/नोटि./लीगल/पी आर/2018/833 और संख्या एफ.4(93)सीएलूंग/नोटि./लीगल/पी आर/2018/834 जारीकर्ता: कुंजी लाल मीणा, शासन सचिव (राज्यपाल के आदेश से)
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना - भूमि रूपांतरण और प्राधिकृत अधिकारी (25 जून 2018)
अधिसूचना विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना दिनांक 25 जून 2018 (एस.ओ. 77 और एस.ओ. 78) के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 107-क एवं 107-ख के अंतर्गत विभिन्न प्राधिकृत अधिकारियों को शक्तियों का प्रत्यायोजन किया गया है।
मुख्य बिंदु
संबंधित ग्राम पंचायत: 100 वर्गमीटर तक वाणिज्यिक प्रयोजन (सिनेमा, मल्टीप्लेक्स, पेट्रोल पंप को अपवर्जित करते हुए) तथा 300 वर्गमीटर तक लोक उपयोग प्रयोजन के लिए प्राधिकृत।
संबंधित पंचायत समिति की प्रशासनिक और स्थापन समिति: 100 वर्गमीटर से अधिक किंतु 300 वर्गमीटर तक वाणिज्यिक प्रयोजन (सिनेमा, मल्टीप्लेक्स, पेट्रोल पंप को छोड़कर), 300 वर्गमीटर से अधिक किंतु 900 वर्गमीटर तक लोक उपयोग प्रयोजन, और 300 वर्गमीटर तक चिकित्सा सुविधा प्रयोजन के लिए प्राधिकृत।
संबंधित जिला परिषद की प्रशासनिक और स्थापन समिति: 300 वर्गमीटर से अधिक वाणिज्यिक प्रयोजन (सिनेमा, मल्टीप्लेक्स, पेट्रोल पंप को छोड़कर), 900 वर्गमीटर से अधिक लोक उपयोग प्रयोजन, और 300 वर्गमीटर से अधिक चिकित्सा सुविधा प्रयोजन के लिए प्राधिकृत।
राज्य सरकार: किसी भी क्षेत्र के लिए सिनेमा, मल्टीप्लेक्स, पेट्रोल पंप, औद्योगिक क्षेत्र/औद्योगिक संपदा प्रयोजन, तथा सौर या वायु शक्ति संयंत्र की स्थापना के लिए प्राधिकृत।
एस.ओ. 78 के तहत: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 107-ख की उप-धारा (1) के अंतर्गत संबंधित जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) को प्राधिकृत किया गया है।
आदेश क्रमांक: संख्या एफ.4(93)सीएल यूं/नोटि./लीगल/पीआर/2018/833 और 834 हस्ताक्षरकर्ता: कुंजी लाल मीणा, शासन सचिव, राज्यपाल के आदेश से
राजस्थान पंचायती राज (दूसरा संशोधन) नियम, 2018 - आबादी भूमि उपयोग परिवर्तन और उप-विभाजन
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 27 मार्च 2018 की अधिसूचना (सं. एफ.4(7)अमे/रूल्स/लीगल/पी.आर./2014/926 दिनांक 10.7.2018) के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज (दूसरा संशोधन) नियम, 2018 जारी किए गए हैं। यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र में प्रकाशित की गई है।
मुख्य बिंदु और प्रावधान
नया अध्याय-9क का अंतःस्थापन: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में नया अध्याय-9क जोड़ा गया है जो आबादी क्षेत्र में भूमि के उपयोग के परिवर्तन (नियम 173-क) तथा भू-खंडों के उप-विभाजन व पुनर्गठन (नियम 173-ख) से संबंधित है।
संपरिवर्तन प्रभार (Conversion Charges): गैर-आवासीय प्रयोजनों के लिए आवासीय आबादी भूमि के संपरिवर्तन हेतु वाणिज्यिक, औद्योगिक, लोक उपयोग, संस्थागत, चिकित्सा सुविधा तथा सौर/पवन ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना के लिए अलग-अलग दरें निर्धारित की गई हैं।
छूट के प्रावधान: केंद्रीय या राज्य सरकार के विभागों या स्थानीय प्राधिकरणों के उपयोग, राजस्थान विनियोजन प्रोत्साहन स्कीम, 2003/2010 और तकनीकी शिक्षा संस्थान के मामलों में संपरिवर्तन प्रभारों में आंशिक या पूर्ण छूट दी गई है।
भू-खंडों का उप-विभाजन और पुनर्गठन: नियम 173-ख के तहत ग्रामीण आबादी क्षेत्र में भू-खंडों के उप-विभाजन या पुनर्गठन के लिए प्ररूप 51 में आवेदन करना होगा तथा इसके लिए निर्धारित प्रभार नियम 173-घ के अनुसार देय होंगे।
नए प्ररूप (Forms): नियमों के अंतर्गत प्ररूप 48 से लेकर प्ररूप 53 तक नए आवेदन पत्र, अनुज्ञा, पट्टा विलेख और आबादी भूमि का रजिस्टर जोड़े गए हैं।
अधिक जानकारी और विस्तृत प्रक्रियाओं के लिए संबंधित ग्राम पंचायत कार्यालय या राज ई-पंचायत पोर्टल से संपर्क करें।
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2017 से संबंधित अधिसूचना
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2017
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना जी.एस.आर. 20 (दिनांक 17 मई, 2017) के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
नियम का नाम: इन नियमों का नाम राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2017 है।
प्रवृत्ती: ये राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से प्रवृत्त होंगे।
नियम 157 का संशोधन: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 के उप-नियम (1) के खण्ड (i) के उप-खण्ड (ब) में विद्यमान अभिव्यक्ति "इन नियमों के प्रारम्भ की तारीख से ठीक पूर्ववर्ती पचास वर्षों के दौरान" के स्थान पर "31 दिसम्बर, 2016 के ठीक पूर्ववर्ती सत्तर वर्षों के दौरान" प्रतिस्थापित की गई है।
आदेश संख्या: [संख्या एफ.4(7) अमे/रूल्स/लीगल/पी.आर./2017/447]
हस्ताक्षरकर्ता: राज्यपाल के आदेश से, विष्णु कुमार गोयल, उप शासन सचिव।
राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2017 से संबंधित अधिसूचना
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग अधिसूचना
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), जयपुर द्वारा दिनांक 12 अप्रैल, 2017 को राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2017 जारी किए गए हैं। यह अधिसूचना राजस्थान राज-पत्र में प्रकाशित की गई है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम व नियम: यह संशोधन राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम सं. 13) की धारा 102 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में किया गया है।
नियम 148 का संशोधन: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 148 के उप-नियम (1) के अंतिम परन्तुक में आवश्यक संशोधन किया गया है।
शब्दावली में बदलाव: "राजस्व अभियान या प्रशासन गांव के संग अभियान" के स्थान पर "राजस्व अभियान या प्रशासन गांव के संग अभियान या भूमि के विक्रय और पट्टा वितरण के लिए राज्य सरकार के आदेश द्वारा आयोजित किसी अन्य अभियान के समय" शब्दावली प्रतिस्थापित की गई है।
प्रारूप 22 का संशोधन: संलग्न प्रारूप 22 की टिप्पणी में भी उपर्युक्त शब्दावली को प्रतिस्थापित किया गया है।
लागू होना: ये नियम राजपत्र में इनके प्रकाशन की तारीख (12 अप्रैल, 2017) से प्रवृत्त होंगे।
आदेश संख्या: [सं. एफ.4(7) अमे/रूल्स/लीगल/पी.आर./2017/289]
राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 107-क के अंतर्गत पर्यटन इकाइयों के लिए अधिकृत अधिकारी की नियुक्ति संबंधी अधिसूचना
अधिसूचना विवरण
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), जयपुर द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक एफ.4 () टूरिज्म रूल/लीगल/पीआर/2015/13 (दिनांक जनवरी 11, 2016) के अनुसार, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम सं. 13) की धारा 107-क की उप-धारा (3) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राजस्थान सरकार ने राजस्थान पंचायती राज (भूमि उपयोग का आवंटन, परिवर्तन और आबादी भूमि का नियमितीकरण) पर्यटन इकाइयों के क्षेत्र में नियम, 2015 के तहत अधिकृत अधिकारी के कृत्यों का निर्वहन करने के लिए अधिकारियों को अधिकृत किया है।
अधिकृत अधिकारी, पर्यटन इकाई की श्रेणी एवं भूमि क्षेत्र का विवरण
संबंधित पंचायत समिति के विकास अधिकारी (Block Development Officer): क्रम संख्या 2 और 3 में उल्लिखित के अलावा अन्य पर्यटन इकाइयां - 300 वर्ग मीटर से अधिक नहीं।
संबंधित जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (Chief Executive Officer): (अ) बजट होटल्स और 1,2,3 स्टार होटल्स (1,200 वर्ग मीटर से 4,000 वर्ग मीटर तक); (ब) अन्य पर्यटन इकाइयां (301 वर्ग मीटर से 4,000 वर्ग मीटर तक)।
कलेक्टर (Collector): (अ) 4 स्टार होटल्स (6,000 वर्ग मीटर से 12,000 वर्ग मीटर तक); (ब) 5 और इससे ऊपर के स्टार होटल्स (18,000 वर्ग मीटर से 40,000 वर्ग मीटर तक); (स) अन्य पर्यटन इकाइयां (4,001 वर्ग मीटर से 40,000 वर्ग मीटर तक)।
नोट: 40,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाली अन्य पर्यटन इकाइयों के लिए राज्य सरकार भूमि उपयोग परिवर्तन की अनुमति देने और भूमि उपयोग को नियमित करने के लिए प्राधिकारी होगी।
यह आदेश राज्यपाल के आदेशानुसार एस.के. सोलंकी, शासन उप सचिव द्वारा जारी किया गया है।
राजस्थान पंचायती राज (पर्यटन इकाईयों के लिए पंचायत क्षेत्र में आबादी भूमि का आवंटन, भूमि के उपयोग का परिवर्तन और नियमितीकरण) नियम, 2015
राजस्थान पंचायती राज नियम, 2015 - पर्यटन इकाइयों हेतु दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.4( )पर्यटन नियम/विधि/पैरा/2015/486 दिनांक जुलाई 10, 2015 के अंतर्गत राजस्थान पंचायती राज (पर्यटन इकाईयों के लिए पंचायत क्षेत्र में आबादी भूमि का आवंटन, भूमि के उपयोग का परिवर्तन और नियमितीकरण) नियम, 2015 बनाए गए हैं।
मुख्य बिंदु एवं नियम:
लागू क्षेत्र: यह नियम पंचायत क्षेत्र में आबादी भूमि के आवंटन, भूमि उपयोग परिवर्तन और नियमितीकरण पर लागू होते हैं।
आबादी भूमि का आवंटन: जिला कलेक्टर, संबंधित पंचायती राज संस्था से परामर्श कर पर्यटन इकाइयों की स्थापना के लिए ग्राम की आबादी क्षेत्र में उपयुक्त भूमि की पहचान करेंगे।
न्यूनतम एवं अधिकतम भूमि क्षेत्र:
बजट होटल और 1 से 3 सितारा होटल: न्यूनतम 1,200 वर्ग मीटर, अधिकतम 4,000 वर्ग मीटर तक।
4 सितारा होटल: न्यूनतम 6,000 वर्ग मीटर, अधिकतम 12,000 वर्ग मीटर तक।
5 सितारा और उससे ऊपर के होटल: न्यूनतम 18,000 वर्ग मीटर, अधिकतम 40,000 वर्ग मीटर तक।
अन्य पर्यटन इकाई: आवश्यकता/उपलब्धता के अनुसार।
आरक्षित मूल्य: पर्यटन इकाइयों के लिए आरक्षित भूमि के आवंटन का आरक्षित मूल्य जिला स्तरीय समिति द्वारा आबादी भूमि के बाजार मूल्य के निर्धारण के लिए सिफारिश की गई दरों के समतुल्य होगा।
विरासत संपत्तियों (हेरिटेज होटल्स) का परिवर्तन: हेरिटेज संपत्तियों को हेरिटेज होटल में बदलने के लिए सादे कागज पर आवेदन किया जा सकता है। इसके लिए भूमि उपयोग परिवर्तन का कोई प्रभार देय नहीं होगा।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग - शिड्यूूल ऑफ़ पावर्स (Schedule of Powers) 2014
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग का शिड्यूूल ऑफ़ पावर्स (Schedule of Powers) 2014 परिपत्र
यह परिपत्र ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 17 सितम्बर, 2014 को जारी किया गया है (क्रमांक: एफ 27(79)ग्रावि/अनु-5/जीकेन/प्रशा. अनुस./2014)। इस दस्तावेज का मुख्य उद्देश्य पंचायती राज संस्थाओं और कार्यकारी विभागों द्वारा किए जाने वाले निर्माण कार्यों के लिए प्रशासनिक, वित्तीय एवं तकनीकी स्वीकृतियों, संशोधित स्वीकृतियों, अतिरिक्त मात्रा और एक्स्ट्रा आइटम्स की स्वीकृति हेतु शिड्यूूल ऑफ़ पावर्स निर्धारित करना है।
मुख्य बिंदु एवं दिशा-निर्देश:
कार्यों की स्वीकृति: मुख्यालय, ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद के स्तर पर उपलब्ध राशि तथा महात्मा गांधी नरेगा के अंतर्गत प्रशासनिक, वित्तीय एवं तकनीकी स्वीकृतियों के लिए प्राधिकृत अधिकारियों की वित्तीय सीमाएं निर्धारित की गई हैं।
शर्तें और प्रक्रिया: न्यूनतम मजदूरी में वृद्धि, बीसार (BSR) में संशोधन या अन्य कारणों से लागत बढ़ने पर ग्रामीण कार्य निर्देशिका के अनुसार सक्षम प्राधिकारी द्वारा वित्तीय सीमा एवं शर्तों के अधीन स्वीकृति दी जाएगी।
तकनीकी स्वीकृति पूर्व प्रमाण: तकनीकी स्वीकृति जारी करने से पूर्व यह प्रमाणित किया जाना आवश्यक है कि संबंधित कार्य की भूमि पंचायत या राज्य सरकार के नाम है और उस पर कोई विवाद नहीं है।
रेंडम चैक और माप पुस्तिका: कनिष्ठ तकनीकी सहायक/कनिष्ठ अभियंता, सहायक अभियंता तथा अधिशाषी अभियंता द्वारा किए जाने वाले कार्यों के रेंडम चैक और चेक मेजरमेंट के लिए स्पष्ट प्रोफार्मा और न्यूनतम प्रतिशत निर्धारित किए गए हैं।
परिशिष्ट: परिपत्र के साथ प्रशासनिक स्वीकृति, वित्तीय स्वीकृति, तकनीकी स्वीकृति, अतिरिक्त मात्रा एवं एक्स्ट्रा आइटम्स, तथा उपयोगिता प्रमाण पत्र, मूल्यांकन जांच एवं पूर्णता प्रमाण पत्र से संबंधित परिशिष्ट (1 से 5) संलग्न हैं।
राजस्थान पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों के मानदेय एवं बैठक भत्तों में संशोधन - अधिसूचना 2013
राजस्थान पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों के मानदेय एवं बैठक भत्तों में संशोधन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक एफ.951(19).(41)प्ररावि/लेखा/निओअउ/बजट घोषणा/2012-13/2494 दिनांक 01-04-2013 के अनुसार राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 के नियम 27 से 30 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए मानदेय एवं बैठक भत्तों की दरों में आंशिक संशोधन किया गया है।
मानदेय की संशोधित दरें (प्रति माह):
जिला प्रमुख, जिला परिषद: वर्तमान 7,500/- रुपये से बढ़ाकर 9,000/- रुपये
प्रधान, पंचायत समिति: वर्तमान 5,000/- रुपये से बढ़ाकर 6,000/- रुपये
सरपंच, ग्राम पंचायत: वर्तमान 3,000/- रुपये से बढ़ाकर 3,500/- रुपये
बैठक भत्ता की संशोधित दरें:
सदस्य, जिला परिषद: वर्तमान 125/- रुपये से बदलकर 500/- रुपये
सदस्य, पंचायत समिति: वर्तमान 100/- रुपये से बदलकर 350/- रुपये
सदस्य, ग्राम पंचायत: वर्तमान 75/- रुपये से बदलकर 200/- रुपये
यह भत्ता संबंधित प्रतिनिधि द्वारा माह में बैठक आयोजित होने पर ही तथा माह हेतु निर्धारित बैठकों में उपस्थित होने पर ही देय होगा। यह अधिसूचना वित्त (व्यय-5) विभाग की आईडी संख्या 331300289 दि. 25.03.2013 से प्राप्त सहमति के अनुसरण में जारी की गई है।
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2013 - नियम 159 में संशोधन
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2013
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा अधिसूचना संख्या F.4 (7)Ame./Rules/Legal/PR/2012/136 दिनांक 11-2-2013 जारी की गई है। इसके तहत राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 159 की उप-नियम (2) में संशोधन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
पंचायत आबादी क्षेत्र में गोदामों या कार्यालयों के निर्माण के लिए प्राथमिकता के आधार पर 1500 वर्ग गज तक के प्लॉट आवंटित कर सकती है।
प्राथमिक कृषि सहकारी समिति / बड़ी आकार की बहुउद्देशीय विपणन समिति (Primary Agricultural Cooperative Society/ Large Sized Multipurpose Marketing Society): उप-नियम (5) के नियम 152 के तहत बाजार मूल्य के 50% मूल्य पर।
ग्राम सेवा सहकारी समिति या क्रय विक्रय सहकारी समिति (Gram Sewa Sahakari Samiti or Kray Vikray Sahakari Samiti): राज्य सरकार के अनुमोदन के अधीन निःशुल्क (free of charge)।
राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2013 - आबादी क्षेत्र के पुराने मकानों के पट्टा जारी करने के संबंध में अधिसूचना
राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2013
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा अधिसूचना संख्या No.F.4(7)Ame./Rules/Legal/PR/2012/35 दिनांक 11-2-2013 जारी की गई है। यह अधिसूचना राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा 102 द्वारा प्रद शक्तियों के तहत राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन करने के लिए है।
मुख्य बिंदु और नियम संशोधन:
इन नियमों को राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2013 कहा गया है।
नियम 157 की उप-नियम (1) में संशोधन किया गया है जिसके अनुसार आबादी भूमि में स्थित पुराने मकानों के लिए प्रपत्र XXIII-A में पट्टा जारी किया जा सकता है।
300 वर्ग गज तक का क्षेत्र या निर्मित क्षेत्र (25 प्रतिशत निर्मित क्षेत्र सहित):
50 वर्ष से अधिक पुराने मकानों के लिए शुल्क: रु. 100/-
नियमों के प्रारंभ होने की तिथि से ठीक पहले पचास वर्षों के दौरान निर्मित मकानों के लिए शुल्क: रु. 200/-
300 वर्ग गज से अधिक के क्षेत्र पर, ऐसे अतिरिक्त क्षेत्र के लिए राजस्थान स्टाम्प नियम, 2004 के नियम 58 के खंड (b) के तहत जिला स्तरीय समिति द्वारा अनुशंसित बाजार दरों का 25 प्रतिशत देय होगा।
बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे) सूची में शामिल परिवारों से उप-खंड (a) के तहत कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा और उप-खंड (i) के उप-खंड (b) के तहत केवल 10 प्रतिशत शुल्क लिया जाएगा।
राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 73 के अन्तर्गत पंचायतों की आमदनी में बढ़ोतरी करने की अपेक्षा बाबत
परिचय एवं उद्देश्य
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी पत्र क्रमांक एफ.1(11)(परावि)लेखा/निजी आय/2011-12/11186 दिनांक 7-11-2012 के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 73 के अंतर्गत ग्राम पंचायतों की निजी आय में बढ़ोतरी करने और वित्तीय स्वतंत्रता प्राप्त करने के संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु एवं निर्देश
वित्तीय स्वतंत्रता एवं निजी आय: राज्य वित्त आयोग की सिफारिश के अनुसार पंचायतों को अपनी निजी आय प्रति वर्ष 1.50 से 2.00 लाख रुपये बढ़ानी चाहिए ताकि वे कार्यों का प्रभावशाली तरीके से क्रियान्वयन कर सकें।
बजट घोषणा 2011-12: माननीय मुख्यमंत्री महोदय की बजट घोषणा के अनुसार, यदि कोई पंचायत पूर्व वर्ष के मुकाबले 2.00 लाख रुपये की निजी आय बढ़ाएगी, तो पंचायत समिति/जिला परिषद की सिफारिश के आधार पर राज्य सरकार द्वारा अतिरिक्त 2.00 लाख रुपये की मैंचिंग राशि (अनुदान) प्रदान की जाएगी।
राजस्व वृद्धि के स्रोत: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 33 और 34 के अनुसार पंचायतें सफाई, रोशनी, जल-निकास, सड़कों के रखरखाव के साथ-साथ कर, फीस, प्रमारों और शास्तियों में वृद्धि कर सकती हैं। हवेलियों, बड़े पक्के ग्रहों, ढाबों, होटलों, ऑटोमोबाइल सर्विस स्टेशनों, मरम्मत की दुकानों, पेट्रोल/डीजल पंपों आदि पर फीस उद्ग्रहित करके गैर राजस्व में वृद्धि की जा सकती है।
वाणिज्यिक डीएलसी दर: सड़क के किनारे स्थित दुकानों के संबंध में राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 (3) के अनुसार वाणिज्यिक डी.एल.सी. दर से कम से कम दोगुनी वसूली की जा सकती है या नियमानुसार बेदखली नोटिस/वाणिज्यिक पट्टा बनाकर पंचायत की आय बढ़ाई जा सकती है।
फीसों की दरें (नियम 68)
नियम 68 के अंतर्गत जनता को दी जाने वाली सेवाओं के लिए अधिकतम फीस दरें निर्धारित की गई हैं, जैसे:
आवेदन फीस: 10/- रुपये
निवास, जाति, आय प्रमाण पत्र: 20/- रुपये (अ.जा./अ.ज.जा. हेतु 5/- रुपये)
बिजली/पानी कनेक्शन हेतु अनापत्ति: 40/- रुपये (अ.जा./अ.ज.जा. हेतु 5/- रुपये)
भवन निर्माण स्वीकृति (पक्का निर्माण): 2/- रुपये प्रति वर्ग मीटर
पेट्रोल/डीजल पंप: 2500/- रुपये प्रति वर्ष
ढाबा/रेस्टोरेंट: 1000/- रुपये प्रति वर्ष
मोबाइल टॉवर: 10000/- रुपये प्रति वर्ष
अतिथि गृह/होटल/मोटल/विश्राम गृह: 5 कक्ष तक 1000/- रुपये प्रति वर्ष से लेकर 16 और अधिक कमरे तक 5000/- रुपये प्रति वर्ष
फीस/कर लागू करने एवं वसूली की प्रक्रिया
पंचायतों को साधारण बैठक में नियम 57 के अनुसार फीस निर्धारित दरों पर वसूल करने का प्रस्ताव पारित करना होगा।
नियम 58 के अनुसार आपत्तियों के लिए एक माह का नोटिस जारी किया जाएगा।
नियम 105 के तहत मांग पर्ची (प्रारूप 5) दी जाएगी और नियम 106 के तहत 15 दिन का नोटिस देकर चल संपत्ति की कुर्की की जा सकती है।
राजस्व विभाग के माध्यम से पटवारी द्वारा करों की वसूली (नियम 62, 63, 64) की जाएगी, जिसमें पटवारी 5 प्रतिशत काटकर 95 प्रतिशत राशि पंचायत के पी.डी. लेखे या पंचायत लेखे में जमा करेगा।
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2011 - शुल्क और नियमों से संबंधित अधिसूचना
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2011
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा अधिसूचना संख्या No. F.4 (7) Am/Rule/Legal/PR/2010/ 1348 दिनांक 12-8-2011 जारी की गई है। इसके माध्यम से राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
नियम 68 के तहत पंचायत द्वारा लिए जाने वाले शुल्क (Fees):
आवेदन शुल्क (Application fees): Rs. 10/-
निवास, जाति, आय प्रमाण पत्र आदि: Rs. 20/- (SC/ST के लिए 50% छूट)
उत्तराधिकार प्रमाण पत्र आदि: Rs. 40/- (SC/ST के लिए 50% छूट)
बिजली या पाईप द्वारा पानी के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC): Rs. 40/- (SC/ST के लिए 50% छूट)
आबादी भूमि क्रय हेतु आवेदन: Rs. 20/-
साइट प्लान तैयार करने और साइट निरीक्षण का खर्च: Rs. 50/-
राशन कार्ड (आवेदन पत्र और छपाई सहित): Rs. 10/-
30 दिन के बाद जन्म और मृत्यु का पंजीकरण: Rs. 20/-
भवन निर्माण की अनुमति: पक्का निर्माण के लिए Rs. 2/- प्रति वर्ग मीटर
पंचायत द्वारा पहले से स्वीकृत साइट प्लान में जोड़/बदलाव (Addition/Alteration): Rs. 100/-
बिना अनुमति अनाधिकृत निर्माण का नियममीकरण (Regularization): Rs. 10/- प्रति वर्ग मीटर (अधिकतम Rs. 1000/- तक)
पेट्रोल/डीजल पंप: Rs. 2500/- प्रति वर्ष
ढाबा/रेस्टोरेंट: Rs. 1000/- प्रति वर्ष
अन्य कोई व्यावसायिक इकाई: Rs. 200/- प्रति वर्ष
माइनिंग एनओसी के लिए प्रस्ताव: Rs. 5000/-
मोबाइल टॉवर: Rs. 10000/- प्रति वर्ष
गेस्ट हाउस/होटल/मोटेल/रेस्ट हाउस हेतु शुल्क: 5 कमरे तक Rs. 1000/- प्रति वर्ष, 6 से 10 कमरे Rs. 2500/- प्रति वर्ष, 11 से 15 कमरे Rs. 4000/- प्रति वर्ष, 16 या अधिक कमरे Rs. 5000/- प्रति वर्ष
इस अधिसूचना में बैठकों के आयोजन, समितियों, और विभिन्न नियमों के अंतर्गत वित्तीय सीमाओं और शक्तियों में भी संशोधन किए गए हैं।
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2010 - राजस्व अभियान और प्रशासन गांवों के संग अभियान हेतु आपत्ति अवधि संशोधन
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2010
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक [No.F.4(7)Am/Rule/Legal/PR/2010/2113] दिनांक 26 नवंबर 2010 के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
नियम का नाम: राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2010।
प्रभावी तिथि: ये नियम राजपत्र में प्रकाशन की तिथि (30 नवंबर 2010) से प्रवृत्त हुए हैं।
नियम 148 में संशोधन: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 148 के उप-नियम (1) के तहत, राजस्व अभियान या प्रशासन गांवों के संग अभियान के दौरान आपत्तियां आमंत्रित करने की अवधि एक महीने के स्थान पर सात दिन होगी।
प्रारूप XXII में संशोधन: प्रारूप XXII के तहत भी राजस्व अभियान या प्रशासन गांवों के संग अभियान के दौरान आपत्तियां दर्ज कराने की अवधि एक महीने के स्थान पर सात दिन निर्धारित की गई है।
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2010 - आ आबादी एवं आपत्ति अवधि संबंधित अधिसूचना
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2010
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक [No.F.4(7)Am/Rule/Legal/PR/2010/2113] दिनांक 26 नवम्बर, 2010 के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी।
मुख्य बिंदु:
नियम संशोधन: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 148 के उप-नियम (1) के परन्तुक में संशोधन किया गया है।
आपत्ति अवधि में छूट: राजस्व अभियान या प्रशासन गांवों के संघ अभियान के दौरान आपत्तियां आमंत्रित करने की अवधि एक महीने के स्थान पर सात (7) दिन होगी।
प्रारूप संशोधन: फॉर्म XXII के अंतर्गत भी नोट जोड़ा गया है कि राजस्व अभियान या प्रशासन गांवों के संघ अभियान के दौरान फाइलिंग आपत्तियां दर्ज करने की अवधि एक महीने के स्थान पर सात दिन होगी।
लागू होना: यह नियम आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशन की तिथि (30 नवम्बर, 2010) से प्रभावी हो गए हैं।
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 - अवलोकन एवं मुख्य प्रावधान
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996
यह दस्तावेज़ राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 का आधिकारिक संकलन है, जिसे ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 के अंतर्गत बनाया गया है। यह नियम राज्य की त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं (ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और ज़िला परिषद) के प्रशासन, कार्यप्रणाली, ग्राम सभा, कर एवं शुल्क निर्धारण, अ आबादी भूमि के प्रबंधन, और सेवा नियमों से संबंधित विस्तृत दिशा-निर्देश प्रदान करता है।
मुख्य बिंदु:
ग्राम सभा और सतर्कता समिति (विजिलेंस कमेटी): ग्राम सभा की बैठकों का आयोजन, कोरम, एजेंडा, कार्यवाही का रिकॉर्ड और 7 सदस्यीय सतर्कता समिति के गठन व उसके कार्यों का प्रावधान।
कर, शुल्क और राजस्व: पंचायतों द्वारा भवन कर, वाटर टैक्स, वाहन कर, व्यावसायिक फसलों पर कर, और विभिन्न सेवाओं पर शुल्क (फीस) लगाने और उनकी वसूली की प्रक्रिया।
आबादी भूमि और संपत्ति प्रबंधन: आबादी भूमि के पट्टे जारी करने, पुरानी बसावटों के नियमतिकरण, भूमि आवंटन, नीलामी समिति और उप-विभाजन (सब-डिवीजन) के नियम।
कार्य, अनुबंध और खरीदारी: वार्षिक कार्य योजना (एनुअल एक्शन प्लान), निर्माण कार्यों के निष्पादन, ठेकेदारों पर प्रतिबंध और सामग्री की खरीद के लिए पारदर्शी प्रक्रिया (बी.एस.आर. और निविदाएं)।
बजट, लेखा और लेखापरीक्षा (ऑडिट): बजट का निर्माण, कैलेंडर, रोकड़ बही (कैश बुक), वित्तीय औचित्य के मानक और स्थानीय निधि संपरीक्षा अधिनियम के तहत ऑडिट का प्रावधान।
स्थापना और सेवा नियम: पंचायती राज संस्थाओं में विभिन्न श्रेणियों के पदों, भर्ती, आरक्षण, वरिष्ठता, परिवीक्षा काल और अनुशासनात्मक कार्रवाई के नियम।
राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994: मुख्य प्रावधान और संरचना
राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (Rajasthan Panchayati Raj Act, 1994)
यह दस्तावेज़ राजस्थान राज्य में पंचायती राज संस्थाओं के गठन, शक्तियों, कार्यों और प्रशासन से संबंधित मुख्य कानूनी प्रावधानों की जानकारी प्रदान करता है। इसमें प्रारंभिक परिभाषाओं से लेकर वार्ड सभा, ग्राम सभा, पंचायत, पंचायत समिति और ज़िला परिषद की संरचना तक के नियम शामिल हैं।
मुख्य बिंदु और विशेषताएँ:
वार्ड सभा और ग्राम सभा: प्रत्येक पंचायत वृत्त में वार्ड सभा और ग्राम सभा के गठन, बैठकों के आयोजन, कोरम तथा कार्यों का विवरण दिया गया है।
पंचायती राज संस्थाओं का गठन: अधिनियम के तहत पंचायत, पंचायत समिति और ज़िला परिषद की स्थापना, सीटों के आरक्षण (अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग और महिलाओं के लिए), तथा निर्वाचन प्रक्रिया को समझाया गया है।
अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रावधान: विकास अधिकारी (Vikas Adhikari), मुख्य कार्यकारी अधिकारी (Chief Executive Officer) तथा राजस्थान पंचायत समिति और ज़िला परिषद सेवा के गठन संबंधी नियम दिए गए हैं।
वित्त और कराधान: पंचायती राज संस्थाओं के फंड, कर लगाने की शक्तियाँ, बजट और लेखा-परीक्षण (Audit) से जुड़े प्रावधान उल्लेखित हैं।
राज्य सरकार की शक्तियाँ: प्रस्तावों को रद्द या निलंबित करने, संस्थाओं के विघटन और नियमों तथा उप-नियमों (Bye-laws) के निर्माण की शक्ति का उल्लेख है।