जन्म, मृत्यु एवं विवाह रजिस्ट्रीकरण के परिपत्रों का संकलन - आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय, राजस्थान सरकार
जन्म, मृत्यु एवं विवाह रजिस्ट्रीकरण के परिपत्रों का संकलन
आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय, सांख्यिकी विभाग, राजस्थान सरकार, जयपुर द्वारा जन्म, मृत्यु एवं विवाह रजिस्ट्रीकरण के संबंध में समय-समय पर जारी महत्वपूर्ण परिपत्रों, आदेशों, दिशा-निर्देशों एवं स्पष्टीकरणों का यह संकलन प्रकाशित किया गया है। इस पुस्तिका का मुख्य उद्देश्य पंजीयन कार्यों में एकरूपता, पारदर्शिता और कार्यकुशलता को बढ़ाना तथा विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों को उनके दायित्वों के प्रभावी निर्वहन हेतु उपयोगी मार्गदर्शन प्रदान करना है।
मुख्य उद्देश्य एवं आवश्यकता
जन्म, मृत्यु एवं विवाह पंजीकरण प्रणाली नागरिकों की विधिक पहचान स्थापित करने तथा शासन एवं प्रशासन को विश्वसनीय जनसांख्यिकीय आँकड़े उपलब्ध कराने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। इन घटनाओं का समयबद्ध एवं त्रुटिरहित पंजीयन न केवल नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करता है, बल्कि विभिन्न शासकीय योजनाओं, नीतियों एवं विकास कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
मुख्य बिंदु एवं दिशा-निर्देश
अधिनियमों के अंतर्गत कार्य: राज्य में जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1969 (संशोधित 2023), राजस्थान जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण नियम, 2000 (संशोधित 2025) एवं राजस्थान विवाहों का अनिवार्य रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 2009 के अनुसार कार्य किया जा रहा है।
अधिकारियों के लिए उपयोगी: यह पुस्तक अतिरिक्त मुख्य रजिस्ट्रार, जिला रजिस्ट्रार, अतिरिक्त जिला रजिस्ट्रार, रजिस्ट्रार, उप-रजिस्ट्रार, ब्लॉक सांख्यिकी अधिकारियों तथा पंजीयन कार्य से जुड़े समस्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए एक उपयोगी पुस्तिका के रूप में कार्य करेगी।
विभिन्न प्रकरणों का समाधान: इसके माध्यम से नष्ट या खराब हुए रजिस्ट्रीकरण रिकॉर्ड को पुनः तैयार करने, अस्पतालों में सृजित स्थानीय जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रीकरण केंद्रों की अधिकारिता, दत्तक-ग्रहण किए गए बच्चों के जन्म रिकॉर्ड में प्रविष्टि/परिवर्तन, जन्म/मृत्यु प्रमाण पत्र में नाम-पता संशोधन, अनाथ/परित्यक्त बच्चों के पंजीकरण, ई-मित्र के माध्यम से आवेदन, विलंबित रजिस्ट्रीकरण, ई-साइन/डिजिटल हस्ताक्षर और जनआधार की अनिवार्यता आदि से संबंधित प्रकरणों का त्वरित और उचित निस्तारण संभव हो सकेगा।
ई-मित्र और पहचान पोर्टल: पहचान पोर्टल (pehchan.rajasthan.gov.in) और ई-मित्र सेवाओं के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन, डिजिटल हस्ताक्षरित प्रमाण पत्र जारी करने और बच्चों का नाम जोड़ने जैसी सुविधाएं प्रदान की गई हैं।
यह प्रकाशन विभागीय कार्यों के सुचारू संचालन में एक महत्वपूर्ण संदर्भ सामग्री के रूप में उपयोगी सिद्ध होगा।
अतिरिक्त विकास अधिकारियों की कनिष्ठ वेतन शृंखला (विकास अधिकारी) के पद पर पदोन्नति आदेश
राजस्थान पंचायती राज विभाग - पदोन्नति आदेश
राजस्थान सरकार के पंचायती राज विभाग द्वारा राजस्थान ग्रामीण विकास राज्य सेवा नियम 2007 के नियम 26 के अंतर्गत गठित विभागीय समिति की संफ़ारिश पर, राजस्थान ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज राज्य एवं अधीनस्थ सेवा नियम 1998 के अतिरिक्त विकास अधिकारियों को राजस्थान ग्रामीण विकास राज्य सेवा की कनिष्ठ वेतन शृंखला (विकास अधिकारी) (पे मैट्रिक्स लेवल-14) में वरिष्ठता सह योग्यता के आधार पर वर्षवार रिक्तियों के विरुद्ध पदोन्नत किया गया है।
मुख्य बिंदु:
विभाग: पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
पद का नाम: विकास अधिकारी (कनिष्ठ वेतन शृंखला, पे मैट्रिक्स लेवल-14)।
नियम संदर्भ: राजस्थान ग्रामीण विकास राज्य सेवा नियम 2007 के नियम 26 एवं राजस्थान ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज राज्य एवं अधीनस्थ सेवा नियम 1998।
आदेश विवरण: आदेश के तहत विभिन्न वर्षवार (जैसे 2023-24, 2024-25 और 2025-26) रिक्तियों के विरुद्ध अधिकारियों को पदोन्नत किया गया है। कुछ अधिकारियों के प्रकरण सीलबंद लिफ़ाफ़े में रखे गए हैं तथा कुछ के सेवा अभिलेख पूर्ण न होने के कारण प्रकरण सिर्फ़ डिफ़र किए गए हैं।
कार्यग्रहण निर्देश: पदोन्नत अधिकारी पदोन्नति पर कार्यग्रहण कर अपनी पालन रिपोर्ट भिजवाते हुए वर्तमान पद पर यथावत कार्य करते रहेंगे तथा इन्हें रिक्ति की दिनांक से काल्पनिक एवं पदोन्नति पर कार्यग्रहण करने की दिनांक से वास्तविक लाभ देय होगा।
यह आदेश शासन सचिव एवं आयुक्त डॉ. जोगा राम के हस्ताक्षर से राजकाज (RajKaj Ref No.: 23866584) के माध्यम से जारी किया गया है।
विकास अधिकारी के रिक्त पद पर अतिरिक्त कार्यभार सौंपे जाने के संबंध में परिपत्र
विकास अधिकारी के रिक्त पद पर अतिरिक्त कार्यभार हेतु निर्देश
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज) द्वारा विकास अधिकारी के रिक्त पद का अतिरिक्त कार्यभार प्रदान किए जाने के संबंध में नया परिपत्र जारी किया गया है। इस परिपत्र के माध्यम से पूर्व में जारी समस्त दिशा-निर्देशों को अतिक्रमित करते हुए विकास अधिकारी के रिक्त पद का अतिरिक्त कार्यभार वरियताक्रम में दिए जाने के निर्देश प्रदान किए गए हैं।
अतिरिक्त कार्यभार व्यवस्था का वरियताक्रम
पंचायत समिति कार्यालय में पदस्थापित नियमित सहायक अभियंता।
पंचायत समिति कार्यालय में पदस्थापित अतिरिक्त विकास अधिकारी।
इसके अतिरिक्त, प्रशासनिक रूप से उपखंड अधिकारी अथवा निकटतम पंचायत समिति में कार्यरत नियमित विकास अधिकारी को अतिरिक्त कार्यभार दिए जाने का निर्णय जिला कलेक्टर के स्तर से लिया जा सकता है।
पंचायत समिति की निधि से संदाय के लिए सभी आदेश एवं चैक पर हस्ताक्षर करने हेतु विभागीय परिपत्र क्रमांक एफ 2(1)पराजिव/आ.वि.अ./वि.अ./2010/993 दिनांक 03.05.2010 के अनुसार अग्रिम कार्यवाही संपादित की जाए। उक्त परिपत्र की अक्षरशः पालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
जारीकर्ता: डॉ. जोगाराम, शासन सचिव एवं आयुक्त (RajKaj Ref No.: 21456496)
ग्राम पंचायत क्षेत्र में नियमित सफाई व घर-घर कचरा संग्रहण की निविदा शर्तों की पालना नहीं करने के संबंध में फर्म को नोटिस प्रारूप
ग्राम पंचायत क्षेत्र में नियमित सफाई व घर-घर कचरा संग्रहण की निविदा शर्तों की पालना नहीं करने के संबंध में फर्म को नोटिस प्रारूप
PMAY Notice Format
प्रधानमंत्री आवास नोटिस प्रारूप
पंचायत समिति बाड़मेर ग्रामीण: ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन और पुनर्रचलन का प्रारूप 2025
ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन/पुनर्रचलन प्रारूप 2025
यह दस्तावेज़ पंचायत समिति बाड़मेर ग्रामीण के अंतर्गत ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन, पुनर्रचलन और नवसृजन से संबंधित प्रारूप 2025 को दर्शाता है। इसे ज़िला कलेक्टर, बाड़मेर (टीना डाबी) के अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत तैयार किया गया है।
मुख्य विवरण
क्षेत्र: पंचायत समिति बाड़मेर ग्रामीण
उद्देश्य: ग्राम पंचायतों और उनमें सम्मिलित गांवों की जनसंख्या और सीमाओं का पुनर्गठन व पुनर्रचलन
विविध ग्राम पंचायतें: जालीपा, लाखेताली, मूढ़ो की ढाणी, बांदरा, कपूरड़ी, रोहिली, भाड़खा, खारिया तला, आदर्श ढूंढा, आदर्श चवा, सरू पणजी, सरू चमनजी, सरली, बेरीवाला तला, गंगासरा, सांजटा, शिवकर, धने का तला, गालाबेरी, हाजाणियों की ढाणी (करली), मातासर, रावतसर, भुटिया, रामसर का कुआं, खुड़ासा, नोख और मंगने की ढाणी।
इस प्रारूप में प्रत्येक वर्तमान ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले गांवों, उनकी जनसंख्या तथा प्रस्तावित ग्राम पंचायतों में सम्मिलित गांवों के नए आँकड़ों को सारणीबद्ध किया गया है।
जिला खैरथल-तिजारा के पुनर्गठन/पुनर्सীमांकन संबंधी शुद्धि पत्र
ग्राम विकास एवं पंचायती राज विभाग शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवारा/2024/881 दिनांक 24-12-2025 के माध्यम से जिला खैरथल-तिजारा की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन से संबंधित पूर्व में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटियों के संशोधन हेतु शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
अधिसूचना संदर्भ: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवारा/2024/795 दिनांक 20.11.2025 एवं संख्या एफ.15(39)पुनर्गठन/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/835 दिनांक 21.11.2025
संशोधित क्षेत्र: जिला खैरथल-तिजारा की ग्राम पंचायतें एवं पंचायत समितियाँ (जैसे तिजारा, किशनगढ़बास, मुण्डावर, ततारपुर)
विवरण: राजपत्र में पूर्व प्रकाशित विवरण में लिपिकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने की वजह से तथा प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात कॉलम 6 के स्थान पर कॉलम 7 में अंकित विवरण को सही समझा जाए।
ब्यावर जिला ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन बाबत शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा जयपुर, दिनांक 28-12-2025 को एक शुद्धि पत्र जारी किया गया है। इसका क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/860 है।
यह शुद्धि पत्र विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पुनर्गठन/विधि/पंरा/पंचायत समिति गठन/2025/774 दिनांक 20.11.2025 एवं संख्या एफ.15(39)पुनर्गठन/विधि/पंरा/पंचायत समिति गठन/2025/815 दिनांक 21.11.2025 के संदर्भ में है, जो जिला ब्यावर की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन बाबत दिनांक 21.11.2025 एवं 24.11.2025 को राजस्थान राजपत्र विशेषनांक भाग 6(ग) में प्रकाशित हुई थीं।
मुख्य बिंदु
कारण: पूर्व में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने की वजह से व प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात यह संशोधन किया गया है।
संशोधन विवरण: ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों (जैसे रायपुर, जैतारण, जवाजा, रास) से संबंधित प्रविष्टियों, कॉलम संख्या और विवरण में सुधार किया गया है।
निर्देश: नीचे दिए गए कॉलम संख्या 6 में अंकित विवरण के स्थान पर कॉलम 7 में अंकित विवरण को सही समझ कर पढ़ा जाए।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है तथा इसकी प्रतिलिपि आवश्यक सूचनार्थ विभिन्न संबंधित अधिकारियों को प्रेषित की गई है।
ग्राम पंचायतियों की कालावधि के दौरान पट्टे जारी करने के संबंध में निर्देश
ग्राम पंचायतों की कालावधि के दौरान पट्टे जारी करने के संबंध में दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा ग्राम पंचायतों की कालावधि के दौरान पट्टे जारी करने के संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
संदर्भ: विभागीय अधिसूचना दिनांक 16.01.2025
प्रशासनिक समिति का गठन: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा-95 के तहत जिन ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त हो गया है, उनमें निवर्तमान सरपंच को प्रशासक नियुक्त किया गया है तथा संबंधित ग्राम पंचायत के उप सरपंच एवं वार्ड पंचों को प्रशासक समिति का सदस्य बनाया गया है।
शक्तियों का प्रयोग: प्रशासक द्वारा अधिनियम और राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में वर्णित समस्त शक्तियों और कर्तव्यों का प्रयोग प्रशासनिक समिति की बैठक में परामर्श उपरांत किया जाएगा।
पट्टा आवंटन प्रक्रिया: पट्टा आवंटन से संबंधित कार्यवाही में राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के प्रावधानों के तहत जहाँ वार्ड पंच की कमेटी गठित किया जाना आवश्यक है, वहाँ प्रशासक द्वारा प्रशासनिक समिति के सदस्यों की कमेटी गठित कर पट्टा आवंटन संबंधी कार्यवाही की जाए।
यह आदेश डॉ. जोगाराम, शासन सचिव एवं आयुक्त, पंचायती राज विभाग द्वारा जारी किया गया है।
स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन बाबत महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
राजस्थान सरकार पंचायती राज विभाग द्वारा निर्देश
राजस्थान सरकार के पंचायती राज विभाग द्वारा क्रमांक: एफ 4(1)स्वामित्व/विधि/पंव्रा/2020/पार्ट-3/E-File - 00439 के अंतर्गत स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन के संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए हैं। यह आदेश शासन सचिव एवं आयुक्त डॉ. जोगा राम द्वारा जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
प्रशासक की नियुक्ति: राज्य की ऐसी ग्राम पंचायतें जिनका कार्यकाल दिनांक 16.01.2025, 11.03.2025 व 23.09.2025 तक समाप्त हो गया है और जिनके चुनाव अपरिहार्य कारणों से संपन्न नहीं हो पा रहे हैं, उनमें संबंधित ग्राम पंचायत के निवर्तमान सरपंच को प्रशासक नियुक्त किया गया है।
प्रशासनिक समिति का गठन: ग्राम पंचायतों के कार्यों के सुचारू संचालन के लिए प्रशासक की सहायता हेतु प्रशासनिक समिति गठित की गई है। इसमें कार्यकाल समाप्त होने से पूर्व संबंधित ग्राम पंचायत के उप सरपंच एवं वार्ड पंचों को सदस्य बनाया गया है।
सर्वे समिति में कार्य: विभागीय पत्र क्रमांक 48 दिनांक 18.01.2021 के अनुसार स्वामित्व योजनांतर्गत गठित सर्वे समिति में 2 वार्ड पंचों کے स्थान पर प्रशासनिक समिति के 2 सदस्यों द्वारा सर्वे समिति का कार्य संपादित किया जाएगा।
समस्त जिला कलेक्टरों और मुख्य कार्यकारी अधिकारियों, जिला परिषदों को इस योजना के सफल एवं समयबद्ध क्रियान्वयन हेतु आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
स्वामित्व योजना मैप 1.0 की excel file
स्वामित्व योजना मैप 1.0 की excel file
ग्राम पंचायत में नए निर्माण कार्यों के प्रस्ताव और प्रमाण पत्र प्रारूप
ग्राम पंचायत नए निर्माण कार्यों के प्रस्ताव और प्रमाण पत्र
यह दस्तावेज़ कार्यालय ग्राम पंचायत द्वारा जारी किए जाने वाले नए निर्माण कार्यों के प्रस्ताव (परिशिष्ट-5), प्रमाण पत्र और कार्य स्थल के फोटो प्रारूप से संबंधित है। इसमें ग्राम पंचायत स्तर पर विकास कार्यों के चयन और प्रमाणीकरण के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
नए निर्माण कार्यों के प्रस्ताव (परिशिष्ट-5): कार्य का नाम, योजना का नाम, वार्षिक योजना में सम्मिलित होने की स्थिति, प्रस्तावित व्यय राशि (श्रम, सामग्री और कुल), उपलब्ध राशि, कार्य पूर्ण होने की संभावित अवधि और कार्य की आवश्यकता का विवरण।
महत्वपूर्ण शर्तें और प्रमाण पत्र:
कार्य का साइट प्लान/नक्शा या सड़क कार्य का एलाइंसमेंट संलग्न होना आवश्यक है।
निर्माण किसी व्यक्तिगत भूमि पर नहीं कराया जाएगा, बल्कि विवाद रहित पर्याप्त सार्वजनिक भूमि या आबादी भूमि पर कराया जाएगा।
प्रस्तावित कार्य सार्वजनिक लाभ हेतु उपयोगी होगा और भविष्य में भी उपयोग हो सकेगा।
संस्था/ग्राम पंचायत द्वारा स्वयं रखरखाव किया जाएगा, जिसके लिए अलग से राशि नहीं मांगी जाएगी।
यह प्रमाणित किया जाना आवश्यक है कि उक्त कार्य पूर्व में किसी अन्य योजना में स्वीकृत/निर्मित या भुगतान नहीं किया गया है।
भूमि विवरण प्रमाण पत्र: खसरा नंबर, राजस्व ग्राम, ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और राज्य सरकार के खाता संख्या का उल्लेख।
कार्य स्थल का फोटो प्रारूप: कार्य का नाम, योजना का नाम, प्रशासनिक स्वीकृत राशि और वित्तीय वर्ष के विवरण के साथ फोटो संलग्न करने का प्रावधान।
कार्यालय ग्राम पंचायत सुमेरपुर (पाली) - अतिक्रमण हटाने हेतु अंतिम नोटिस प्रारूप
कार्यालय ग्राम पंचायत - आदेश / अंतिम नोटिस
यह दस्तावेज़ कार्यालय ग्राम पंचायत, पं.स. सुमेरपुर (पाली) द्वारा जारी किया जाने वाला अतिक्रमण/अवैध निर्माण से संबंधित अंतिम नोटिस (प्रारूप-3) है। यह राजस्थान पंचायतीराज नियम 1996 के नियम 165 (3, 6) तथा The Prevention Of Damage to Public Property Act, 1984 के अंतर्गत आता है।
मुख्य बिंदु:
प्रसंग: पूर्व में जारी पत्र और सूचना के बावजूद अतिक्रमण/अवैध निर्माण हटाने के आदेश की पालना रिपोर्ट कार्यालय में प्रस्तुत न करने के संबंध में।
कार्रवाई की चेतावनी: नोटिस में दिए गए निर्देश के अनुसार आज ही अतिक्रमण/अवैध निर्माण हटाकर लिखित पालना रिपोर्ट निर्धारित तिथि को सुबह 11:00 बजे तक पंचायत कार्यालय में प्रस्तुत करनी होती है।
प्रशासनिक सहायता: समय सीमा में पालना न करने पर उपखंड प्रशासन / पुलिस इमदाद से अतिक्रमण/अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई की जाएगी और इसका समस्त हर्जा-खर्चा संबंधित व्यक्ति से वसूल किया जाएगा।
महत्वपूर्ण नियम: ग्राम पंचायत की सक्षम स्वीकृति के बिना किसी प्रकार का निर्माण कार्य करना नियम विरुद्ध है।
यह दस्तावेज़ कार्यालय ग्राम पंचायत, पं.स. सुमेरपुर (पाली) द्वारा जारी किया गया अतिक्रमण/अवैध निर्माण से संबंधित आदेश/नोटिस (प्रारूप-2) है।
मुख्य बिंदु:
नियम एवं अधिनियम: यह नोटिस राजस्थान पंचायतीराज नियम 1996 के नियम 165 (3, 6) तथा The Prevention Of Damage to Public Property Act, 1984 के अंतर्गत जारी किया जाता है।
अतिक्रमण हटाने के निर्देश: पूर्व में जारी स्थगन आदेश एवं नोटिस की पालना न करने तथा प्रस्तुत जवाब/स्पष्टीकरण असंतोषजनक होने पर अतिक्रमण/अवैध निर्माण को जनहित में हटाने के निर्देश दिए जाते हैं।
कार्रवाई की चेतावनी: निर्धारित तिथि एवं समय (सुबह 11:00 बजे) तक अतिक्रमण स्वयं न हटाने पर उपखण्ड प्रशासन/पुलिस इमदाद से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाएगी और समस्त हर्जा खर्च संबंधित व्यक्ति से वसूला जाएगा।
पुलिस कार्रवाई: आदेश/नोटिस की प्रति संबंधित पुलिस थाने में भेजकर कानूनी कार्यवाही हेतु निवेदन भी किया जाता है।
नोट: ग्राम पंचायत की सक्षम स्वीकृति के बिना किसी प्रकार का निर्माण कार्य करना नियम विरुद्ध है।
कार्यालय ग्राम पंचायत (पंस. सुमेरपुर, पाली) - स्थगन आदेश एवं नोटिस प्रारूप
कार्यालय ग्राम पंचायत - स्थगन आदेश एवं नोटिस प्रारूप
यह दस्तावेज़ कार्यालय ग्राम पंचायत, पंचायत समिति सुमेरपुर (पाली) द्वारा जारी किया गया स्थगन आदेश एवं नोटिस (प्रारूप-1) है। यह राजस्थान पंचायतीराज नियम 1996 के नियम 165(3) तथा The Prevention Of Damage to Public Property Act, 1984 के अंतर्गत आता है।
मुख्य बिंदु:
अतिक्रमण की शिकायत: ग्राम पंचायत की भूमि, आवागमन के रास्ते, जल निकासी की नाली आदि पर अतिक्रमण या अवैध निर्माण की शिकायत मिलने पर यह नोटिस जारी किया जाता है।
निषेधात्मक आज्ञा: अतिक्रमण/निर्माण को तत्काल प्रभाव से रोकने का आदेश दिया जाता है, अन्यथा नियमानुसार हटाने की कार्रवाई की जाती है।
सुनवाई की तारीख: निर्धारित तिथि एवं समय पर भूमि के स्वामित्व/निर्माण से संबंधित मूल दस्तावेज़ और जवाब के साथ पंचायत कार्यालय में उपस्थित होना अनिवार्य है, अन्यथा एक तरफा कानूनी कार्रवाई की जाती है।
महत्वपूर्ण नोट: ग्राम पंचायत की सक्षम स्वीकृति के बिना किसी प्रकार का निर्माण कार्य करना नियम विरुद्ध है।
स्वामित्व योजनान्तर्गत भारतीय सर्वेक्षण से प्राप्त मैप-2 में संशोधन किये जाने के सम्बन्ध में दिशा-निर्देश
स्वामित्व योजना: मैप-2 संशोधन सम्बन्धित दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा स्वामित्व योजनान्तर्गत भारतीय सर्वेक्षण (Survey of India) से प्राप्त मैप-2 में संशोधन किये जाने के सम्बन्ध में समस्त जिला कोर्डिनेटिंग अधिकारियों और जिला परिषदों को महत्वपूर्ण निर्देश जारी किये गये हैं।
मुख्य बिंदु:
मैप 1.0 की ग्राउंड ट्रूथिंग: मैप 1.0 पर की जाने वाली ग्राउंड ट्रूथिंग की कार्यवाही हेतु दक्ष एवं विज्ञ कार्मिकों को भारतीय सर्वेक्षण विभाग में भिजवाया जाए, ताकि होने वाले संशोधनों के सम्बन्ध में आवश्यक जानकारी दी जा सके।
नक्शों में संशोधन: भारतीय सर्वेक्षण विभाग से प्राप्त ग्राउंड ट्रूथिंग नक्शों में लाल डोरा प्रदर्शित करने, आबादी का विभाजन, नई आबादी को जोड़ने, नाम में संशोधन, नया नाम जुड़वा, और ID में संशोधन आदि को सुनिश्चित किया जाए।
मैप 2.0 की जाँच प्रक्रिया: मैप 2.0 में संशोधन करवाने के लिए अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी / मुख्य कार्यकारी अधिकारी द्वारा नक्शों की पूर्ण जाँच करायी जाए और निर्धारित प्रारूप में टिप्पणी के साथ भारतीय सर्वेक्षण विभाग को भिजवाया जाए।
प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण: आवश्यक दस्तावेजों की चेक लिस्ट और पात्रता शर्तें
प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण चेक लिस्ट
यह दस्तावेज़ कार्यालय ग्राम पंचायत द्वारा जारी प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत आवश्यक दस्तावेजों और पात्रता शर्तों की जानकारी प्रदान करता है। ग्राम पंचायत और पंचायत समिति स्तर पर आवेदन प्रक्रिया के लिए यह चेक लिस्ट अत्यंत उपयोगी है।
आवश्यक दस्तावेज
प्रार्थी की पासपोर्ट साईज़ प्रमाणित फोटो
फार्म में 14 बिन्दु की जांच रिपोर्ट
प्रार्थी का स्वयं का मोबाइल नम्बर अथवा रिश्तेदार का मोबाइल नम्बर
जॉब कार्ड के आन लाईन नम्बर / स्पष्ट छायाप्रति (स्वयं प्रमाणित)
प्रस्तावित भूखण्ड का प्रधानमंत्री आवास योजनान्तर्गत लाभार्थी का पट्टा / खातेदारी भूमि की नकल
बैंक पास बुक की स्पष्ट छाया प्रति (स्वयं प्रमाणित)
आधार कार्ड की स्पष्ट छाया प्रति (स्वयं प्रमाणित)
जन आधार / भामाशाह कार्ड की स्पष्ट छाया प्रति (स्वयं प्रमाणित)
विकलांग हो तो प्रमाण पत्र की स्पष्ट छाया प्रति (स्वयं प्रमाणित)
आवास स्वीकृति हेतु पात्रता की शर्तें (14 बिन्दु जांच रिपोर्ट मुख्य बिंदु)
मोटर साईकिल दुपहिया / तिपहिया / चौपहिया वाहन / मछली नाव नहीं है।
मेकेनाइज्ड तिपहिया / चौपहिया वाहन कृषि उपकरण नहीं है।
किसान कैडिट कार्ड, कैडिट सीमा के साथ 50 हजार या उससे अधिक का नहीं है।
परिवार का कोई सदस्य सरकारी कर्मचारी नहीं है।
परिवार के गैर कृषि उद्यमों का सरकार के साथ पंजीकृत नहीं है।
परिवार के किसी भी सदस्य की आय अधिकतम रुपये 10 हजार प्रति माह नहीं है।
इन्कमटैक्स नहीं देता हूँ।
व्यासायिक कर नहीं देता हूँ।
स्वयं का रेफ्रिजरेटर नहीं है।
स्वयं का लेण्डलाईन फोन नहीं है।
स्वयं 2.5 एकड़ या अधिक सिंचित भूमि के साथ एक सिंचित उपकरण नहीं है।
5 एकड़ या अधिक सिंचित भूमि के लिए दो या अधिक फसल मौसम नहीं है।
मालिक 7.5 एकड़ भूमि या अधिक, एक सिंचाई उपकरण के साथ नहीं है।
किसी भी सरकारी योजना में आवास निर्माण हेतु मेरे परिवार के पक्ष में आ दिनांक तक कोई स्वीकृति जारी नही हुई है अथवा कोई पक्का मकान आवंटन नहीं है।
नोट: सरकार द्वारा नवीन आवास हेतु निर्धारित अनुदान सहायता राशि से मैं न्यूनतम 25 वर्गमीटर प्लिंथ क्षेत्र का नवीन पक्का आवास निर्माण अधिकतम 12 माह की अवधि में पूर्ण कराने के लिए वचनबद्ध हूँ। आवासीय अनुदान सहायता से अधिक होने वाले व्यय की व्यवस्था मैं अपने स्तर पर स्वयं करूँगा।
ग्राम पंचायत क्षेत्र में नियमित सफाई व घर-घर कचरा संग्रहण की निविदा शर्तों की पालना के संबंध में नोटिस प्रारूप
ग्राम पंचायत सफाई एवं कचरा संग्रहण नोटिस प्रारूप
यह दस्तावेज़ ग्राम पंचायत स्तर पर वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान नियमित सफाई और घर-घर कचरा संग्रहण के लिए जारी किए जाने वाला आधिकारिक नोटिस प्रारूप है।
मुख्य बिंदु:
विषय: ग्राम पंचायत क्षेत्र में नियमित सफाई व घर-घर कचरा संग्रहण की निविदा शर्तों की पालना नहीं करने के संबंध में।
उद्देश्य: संबंधित फर्म को यह सूचित करना कि उनके द्वारा निविदा में उल्लिखित शर्तों के अनुसार सफाई कार्य और घर-घर कचरा संग्रहण नहीं किया जा रहा है।
निर्देश: स्वच्छता टेंडर के नियम व शर्तों के अनुसार कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
चेतावनी: निर्देशों की पालना न करने पर निविदा शर्तों के अनुसार विधिक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है जिसकी जिम्मेदारी स्वयं फर्म की होगी।
हस्ताक्षरकर्ता: सरपंच / प्रशासक और ग्राम विकास अधिकारी।
स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी क्रमांक एफ44(51)पंच्रावि/प्रशि./स्वामित्व/2023/पार्ट-1/E-File - 01834 (दिनांक 27.08.2024) के अंतर्गत 'स्वामित्व योजना' के क्रियान्वयन में जिलों में आ रही विभिन्न समस्याओं के निराकरण हेतु राजस्व विभाग एवं पंचायती राज विभाग के समन्वय से महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश प्रसारित किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
सीमाज्ञान एवं चूना मार्किंग: आबादी क्षेत्र की बाहरी सीमा का सीमाज्ञान संबंधित पटवारी द्वारा किए जाने के उपरांत ग्राम पंचायत के कर्मियों द्वारा चूना मार्किंग की जाएगी। चूना मार्किंग के समय पटवारी की उपस्थिति अनिवार्य है।
सड़क सीमा एवं रेलवे लाइन दूरी: राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 के नियम 161 के अनुसार, जिन व्यक्तियों के मकान आबादी भूमि में स्थित हैं किंतु सड़क सीमा या रेलवे लाइन सीमा में आ रहे हैं, उन्हें प्रॉपर्टी पार्सल का वितरण नहीं किया जाए।
एक से अधिक भूखंड: किसी व्यक्ति के स्वामित्व में एक से अधिक भूखंड होने और उनका पट्टा न होने पर सिर्फ पट्टा शुद्धा भूखंड का प्रॉपर्टी पार्सल देय है, शेष का नहीं।
महिला पट्टा धारक: राजस्थान पंचायती राज नियम 157(2) के तहत 300 वर्गगज तक के महिला पट्टा धारक की प्रॉपर्टी आईडी का क्षेत्रफल 300 वर्गगज से अधिक होने पर नियम 165(4) के अनुसार डीएलसी दर से प्रभार लेकर विक्रय विलेख दिया जा सकता है, अन्यथा प्रॉपर्टी आईडी विवादग्रस्त अंकित की जाए।
आपत्तियां एवं अपील: स्वामित्व योजना अंतर्गत आपत्तियों के आमंत्रण हेतु विज्ञापन नियमानुसार प्रकाशित किए जाएं। पट्टे या प्रॉपर्टी कार्ड वितरण में त्रुटि/विवाद होने पर राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 के नियम 166 एवं अधिनियम 1994 की धारा 97 के संबंधित अपीलीय प्रावधान ही लागू होंगे।
ग्राम पंचायतों/पंचायत समितियों द्वारा पट्टा बही का संधारण किए जाने बाबत् परिपत्र
परिचय
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों द्वारा पट्टा बही का संधारण किए जाने के संबंध में परिपत्र जारी किया गया है। विभाग के ध्यान में आया था कि कतिपय पंचायत समिति स्तर पर ग्राम पंचायतों द्वारा जारी पट्टों का रिकॉर्ड संधारित नहीं किया जा रहा है, जिससे अनियमित पट्टे जारी होने की संभावना रहती है।
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 168 के मुख्य प्रावधान
नियम 168(1): नीलामी, परक्रामण या आवंटन द्वारा किए गए समस्त विक्रय जिनके लिए पट्टे जारी किए गए, उनका अभिलेख पंचायत द्वारा प्ररूप 24 में रखी गई पट्टा बही में रखा जाएगा।
नियम 168(2): पंचायत संबंधित पंचायत समिति के विकास अधिकारी को प्रत्येक मास के प्रथम सप्ताह में पट्टा बही की एक प्रति अग्रषित करेगी। विकास अधिकारी एक नियंत्रण रजिस्टर रखेगा जिसमें पंचायतवार लेजर रखा जाएगा और सत्यापन के प्रमाणस्वरूप प्रविष्टि पर हस्ताक्षर करेगा ताकि पिछली तारीखों में पट्टे जारी करना रोका जा सके।
नियम 168(3): पंचायत समिति अपने स्तर पर पट्टा बहियां तीन परत में छपवाएगी। सभी पट्टों पर पुस्तक संख्या व क्रम संख्या होगी। पट्टे की पहली परत आवंटी को, दूसरी परत पंचायत कार्यालय में तथा तीसरी परत पंचायत समिति को रिकॉर्ड हेतु भेजी जाएगी।
अनुपालन एवं निर्देश
समस्त संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया जाता है कि राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 168 में वर्णित प्रावधानों की पालना कड़ाई से अमल में लाई जाए। उक्त परिपत्र की अवहेलना किए जाने वाले संबंधित विकास अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
राजस्थान पंचायती राज संस्थाओं में बैठक कार्यवाही विवरण संधारण बाबत परिपत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग परिपत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 23-01-2024 को क्रमांक एफ.4(3)दिशा-निर्देश/विधि/पंश/2024/27 के अंतर्गत पंचायती राज संस्थाओं की बैठकों की कार्यवाही के संधारण के संबंध में महत्वपूर्ण परिपत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
नियम-44 के प्रावधान: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम-44 के अनुसार पंचायत में सरपंच, पंचायत समिति में विकास अधिकारी तथा जिला परिषद में मुख्य कार्यकारी अधिकारी द्वारा कार्यवाही का अभिलेखन हिंदी में किया जाना अनिवार्य है।
हस्ताक्षर की प्रक्रिया: बैठक समाप्त होने के पश्चात कार्यवाही विवरण के अंत में उपस्थित सदस्यों के हस्ताक्षर करवाए जाएं। विवरण के अंत में बिना कोई रिक्त स्थान छोड़े हस्ताक्षर कराए जाएं ताकि बाद में कोई विवरण दर्ज न किया जा सके।
प्राइवेट प्रिंटेड रजिस्टरों पर रोक: बाजार से खरीदे गए प्राइवेट प्रिंटेड कार्यवाही विवरण रजिस्टरों (जिन पर प्रपत्र संख्या 24 छपा होता है) का उपयोग तुरंत प्रभाव से बंद किया जाए, क्योंकि राजस्थान पंचायत एवं न्याय पंचायत (सामान्य) नियम, 1961 का वह नियम निरस्त हो चुका है और वर्तमान में राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1953 अस्तित्व में नहीं है।
लाइनदार रजिस्टर का उपयोग: कार्यवाही विवरण दर्ज करने हेतु किसी प्रिंटेड रजिस्टर की आवश्यकता नहीं है, केवल सामान्य लाइनदार रजिस्टर का उपयोग किया जा सकता है।
स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
स्वामित्व योजना क्रियान्वयन निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन के संबंध में समस्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद, राजस्थान को महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
सम्पत्ति दस्तावेज तैयार करना: स्वामित्व योजनांतर्गत भू-खण्ड धारकों का सम्पत्ति दस्तावेज (टाईटल डॉक्यूमेंट) तैयार करते समय पंचायती राज नियम 1996 के अध्याय 9 में वर्णित स्थावर सम्पत्तियों से संबंधित प्रावधान अनुरूप पुराने गृहों का विनियमितीकरण, भूमियों का कमजोर वर्गों को आवंटन, भूमियों का रियायती कीमत पर आवंटन, सरकारी संस्थाओं को आबाद भूमि का आवंटन एवं नीलामी से संबंधित नियमों में वर्णित प्रावधान अनुरूप ही नियमानुसार कार्यवाही की जानी है।
भौतिक सर्वेक्षण एवं पट्टा निर्माण: भौतिक सर्वेक्षण उपरांत भारतीय सर्वेक्षण विभाग से मैप-2 प्राप्त होने पर राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 के प्रावधानों के तहत पट्टा निर्माण की कार्यवाही की जावे। साथ ही यह भी सुनिश्चित कर लिया जावे कि पूर्व में जारी पट्टे एवं वर्तमान कब्जे के आधार पर क्षेत्रफल कम या अधिक होने की स्थिति में, पट्टे में नियमानुसार संशोधन कर लेवें तथा यह भी सुनिश्चित किया जावे कि पंचायती राज संस्थाओं को किसी भी प्रकार की राजस्व हानि न हो।
सभी जिलों में इन निर्देशों का अध्ययन कर योजना के सफल क्रियान्वयन हेतु आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
ग्राम विकास अधिकारी (ग्राम सेवक) के रिक्त पदों पर सेवानिवृत्त ग्रामसेवकों की सेवाएं समेकित परिश्रमिक पर लिए जाने बाबत
ग्राम विकास अधिकारी के रिक्त पदों के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 02/02/2021 को जारी पत्र (क्रमांक: एफ.28(पंवारा/प्रशा-2/ग्राविअ/रिक्त पद(नि.)/2021/326) के माध्यम से ग्राम विकास अधिकारी (ग्राम सेवक) के रिक्त पदों पर सेवानिवृत्त ग्रामसेवकों की सेवाएं समेकित परिश्रमिक के आधार पर लिए जाने के संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
रिक्त पदों की स्थिति: वर्तमान में पंचायत राज संस्थाओं में ग्राम विकास अधिकारी (ग्राम सेवक) के काफी संख्या में पद रिक्त चल रहे हैं तथा नवसृजित ग्राम पंचायतों में भी पद रिक्त हैं।
विकास कार्य प्रभावित न हो: पदों के रिक्त होने से विकास कार्य प्रभावित न हों और आम जनता को असुविधा न हो, इसके लिए यह व्यवस्था की गई है।
सेवाएं लेने की प्रक्रिया: रिक्त पदों के विरुद्ध सेवानिवृत्त ग्राम विकास अधिकारियों (ग्राम सेवकों) की सेवाएं वित्त विभाग के परिपत्र दिनांक 08.02.2018 में वर्णित शर्तों के अध्याधीन समेकित परिश्रमिक के आधार पर ली जा सकती हैं।
वैकल्पिक व्यवस्था: यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी ग्राम पंचायत में ग्राम विकास अधिकारी का पद रिक्त न रहे; इसके लिए निकटतम ग्राम पंचायत के ग्राम विकास अधिकारी को अतिरिक्त चार्ज दिया जा सकता है या सेवानिवृत्त कार्मिक की सेवाएं ली जा सकती हैं।
स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन बाबत महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन बाबत निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 18.01.2021 को 'स्वामित्व योजना' के क्रियान्वयन के संबंध में महत्वपूर्ण आदेश जारी किया गया है। राष्ट्रीय पंचायत दिवस (24 अप्रैल 2020) पर केंद्र सरकार द्वारा आरंभ की गई इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पंचायती राज पर इसके दूरगामी प्रभावों को देखते हुए राजस्व विभाग एवं पंचायती राज विभाग के संयुक्त प्रयासों से क्रियान्वयन करना है।
योजना की मुख्य बातें और प्रक्रिया
ड्रोन फोटोग्राफी और मैपिंग: भारतीय सर्वेक्षण विभाग (Survey of India) द्वारा प्रत्येक राजस्व ग्राम की आबादी भूमि का मानचित्र ड्रोन के जरिए फोटोग्राफी कर तैयार किया जाएगा।
चूना मार्किंग: ड्रोन उड़ान से पहले राजस्व ग्राम की आबादी भूमि की बाहरी सीमा (outer line) पर चार इंच चौड़ाई की चूना लाइन डालकर सीमा मार्क की जाएगी। खाली पड़े भूखंडों को भी चूना लाइन डालकर चिह्नित किया जाएगा।
सर्वे समिति का गठन: प्रत्येक राजस्व ग्राम हेतु सर्वे समिति का गठन किया जाएगा जिसमें ग्राम सेवक, दो वार्ड पंच (संबंधित राजस्व ग्राम व अन्य वार्ड पंच) और पंचायत का एक कार्मिक (कनिष्ठ लिपिक अथवा ग्राम रोजगार सहायक) शामिल होंगे। यह समिति प्राप्त इमेज मैप के अनुसार प्रत्येक भूखंड और निर्मित भवन का सर्वे कर निर्धारित प्रपत्र में जानकारी संकलित करेगी।
आपत्तियां एवं निस्तारण: ग्राम पंचायत द्वारा सर्वे प्रपत्र और इमेज मैप की प्रति पंचायत भवन एवं सार्वजनिक स्थल पर चस्पा की जाएगी। राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम-148 के प्रावधानुसार 07 दिवस के भीतर आपत्तियां दर्ज कराई जा सकेंगी, जिनका निस्तारण ग्राम सभा के माध्यम से किया जाएगा।
पट्टा वितरण: आपत्तियों के निराकरण के बाद फाइनल इमेज मैप (आईडी नंबरिंग सहित) के आधार पर संबंधित लाभार्थियों को राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के प्रावधानों के तहत पट्टा, रजिस्ट्री एवं पीडीएफ कॉपी मोबाइल नंबर पर उपलब्ध कराई जाएगी।
प्रथम चरण: राज्य में इस योजना का सबसे पहले क्रियान्वयन जैसलमेर जिले में किया जाना है।
स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन हेतु प्रभारी अधिकारी की नियुक्ति का आदेश
स्वामित्व योजना आदेश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.4(5)स्वामित्व/विधि/पंव/2020/45 दिनांक 13.01.2021 के अनुसार 'स्वामित्व योजना' के क्रियान्वयन हेतु राज्य स्तर पर SVAMITVA Dashboard integration के लिए प्रभारी अधिकारी नियुक्त किया गया है।
प्रभारी अधिकारी का विवरण:
नाम: श्री पी.एन. मीणा
पदनाम: ए.सी.पी. (उप निदेशक), पंचायती राज विभाग
मोबाइल नंबर: 9784590643
यह आदेश शासन सचिव एवं आयुक्त महोदय द्वारा जारी किया गया है तथा इसकी प्रतिलिपि संबंधित विभागों एवं अधिकारियों को सूचनार्थ प्रेषित की गई है।
राजस्थान में स्वामित्त्व योजना के क्रियान्वयन बाबत दिशा-निर्देश
स्वामित्त्व योजना का क्रियान्वयन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.4(1)स्वामित्त्व/विधि/पंश/2020/4046 दिनांक 07.09.2020 के अंतर्गत 'स्वामित्त्व योजना' के क्रियान्वयन के संबंध में विस्तृत निर्देश जारी किए गए हैं। इस पत्र के साथ भारत सरकार द्वारा जारी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) भी संलग्न किया गया है।
योजना का मुख्य उद्देश्य
ग्रामीण भारत में आबाद क्षेत्रों (Abadi Land) की ड्रोन सर्वेक्षण तकनीक से पैमाइश कर डिजिटल मानचित्र तैयार करना।
ग्रामीण परिवारों को 'प्रॉपर्टी कार्ड' (अधिकारों के अभिलेख) वितरित करना ताकि वे अपनी संपत्ति का उपयोग बैंक ऋण और अन्य वित्तीय लाभ प्राप्त करने के लिए कर सकें।
ग्राम पंचायतों में संपत्ति कर और संपत्ति रजिस्टर को अद्यतन कर कर संग्रहण प्रणाली को सुदृढ़ बनाना।
ग्रामीण संपत्ति से जुड़े आपसी विवादों और अदालतों में लम्बित मुकदमों के त्वरित निराकरण का मार्ग प्रशस्त करना।
प्रमुख प्रक्रिया एवं चरण (Standard Operating Procedure)
CORS नेटवर्क की स्थापना: पायलट चरण के तहत राजस्थान और पंजाब राज्यों में सतत प्रचलित संदर्भ स्टेशन (CORS) नेटवर्क की स्थापना।
तैयारी की गतिविधियां: कलेक्टर/सक्षम प्राधिकारी द्वारा सार्वजनिक नोटिस के माध्यम से सर्वेक्षण क्षेत्र की अधिसूचना, ग्राम सभा का आयोजन, और राजस्व विभाग एवं ग्राम पंचायत अधिकारियों द्वारा सीमाओं का चूना लाइनों से चिह्नीकरण।
ड्रोन सर्वेक्षण एवं डेटा प्रोसेसिंग: भारतीय सर्वेक्षण विभाग (Survey of India) द्वारा ड्रोन के माध्यम से हवाई तस्वीरें लेना और जीआईएस (GIS) लैब में डेटा प्रोसेसिंग कर ऑर्थो-रेक्टिफाइड इमेज (ORI) तथा लैंड पार्सल मैप्स (LPM) तैयार करना।
दावा और आपत्ति निस्तारण: ग्राम सभा, भूस्वामियों और राजस्व अधिकारियों की मदद से स्वामित्व का सत्यापन तथा प्राप्त आपत्तियों का निस्तारण।
प्रॉपर्टी कार्ड का वितरण: राजस्व विभाग द्वारा अंतिम मानचित्रों और टेक्स्ट डेटा के आधार पर ग्रामीणों को प्रॉपर्टी कार्ड जारी करना।
संबंधित विभाग एवं अधिकारी
इस योजना के क्रियान्वयन में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राज्य राजस्व विभाग, भारतीय सर्वेक्षण विभाग (Survey of India), और पंचायती राज संस्थाएं (सरपंच, पंचायत सचिव, ग्राम सेवक) संयुक्त रूप से कार्य कर रहे हैं।
निर्माण कार्यों के मूल्यांकन जांच एवं उपयोगिता प्रमाण पत्र जारी करने हेतु स्थायी आदेश संख्या 36/2018 की पालना के संबंध में
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग का महत्वपूर्ण निर्देश
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रुप-5) द्वारा दिनांक 26 अप्रैल 2019 को एक आदेश जारी किया गया है। यह आदेश निर्माण कार्यों के मूल्यांकन जांच एवं उपयोगिता प्रमाण पत्र जारी करने हेतु स्थायी आदेश संख्या 36/2018 दिनांक 27.03.2018 की पालना के संबंध में है।
मुख्य बिंदु:
वित्त विभाग की आईडी संख्या 101801752 दिनांक 26.3.2018 के अनुसार "संविदा पर कार्यरत व्यक्तियों को कोई वित्तीय शक्तियां प्रदान नहीं की जावे" की पालना में निर्देश जारी किए गए हैं।
संविदा पर कार्यरत कनिष्ठ तकनीकी सहायक (JTA/STA) को मूल्यांकन जांच करना, पूर्णता प्रमाण पत्र जारी करना आदि किसी भी प्रकार की वित्तीय शक्तियां प्रदत्त नहीं होंगी।
विभागीय परिपत्र दिनांक 17.9.2014 द्वारा जारी शेड्यूल ऑफ़ पावर्स में संविदा पर कार्यरत जेटीए/एसटीए परिशिष्ट-3 में प्रदत्त सीमा राशि तक की तकनीकी स्वीकृति जारी करने के लिए यथावत अधिकृत होंगे।
महात्मा गांधी नरेगा योजना अंतर्गत संविदा पर कार्यरत (JTA/STA) विभागीय अभियंताओं (Jen/Aen/Xen) के मार्गदर्शन में यथावत कार्यों की तकनीकी पर्यवेक्षण कर सकेंगे तथा कार्यों की माप (Record Entry) संबंधित मापपुस्तिका में दर्ज कर सकेंगे, लेकिन कार्यों का मूल्यांकन जांच करना, पूर्णता प्रमाण पत्र जारी करना के लिए अधिकृत नहीं होंगे।
अतः कार्यों का मूल्यांकन, उपयोगिता प्रमाण पत्र एवं पूर्णता प्रमाण पत्र सक्षम विभागीय अभियंताओं (Jen/Aen/Xen) के द्वारा ही जारी कराया जाना सुनिश्चित किया जाए।
अतिक्रमण सम्बंधित शिकायतों को न्यायिक प्रक्रिया मानते हुए संपर्क पोर्टल 181 पर दर्ज नही करने के सम्बन्ध में
अतिक्रमण सम्बंधित शिकायतों को न्यायिक प्रक्रिया मानते हुए संपर्क पोर्टल पर दर्ज नही करने के सम्बन्ध में
ग्राम सेवक से ग्राम विकास अधिकारी नाम परिवर्तन
-:: आदेश ::-
राज्य सरकार द्वारा यह निर्णय लिया गया है कि राज्य की ग्राम पंचायतों में पदस्थापित "ग्राम सेवक" के पदनाम को "ग्राम विकास अधिकारी" के पदनाम में परिवर्तित किया जाता है। ग्राम सेवक के पदनाम को ग्राम विकास अधिकारी के पदनाम से परिवर्तित किया जाना निम्नलिखित शर्तों के अध्यधीन रहेगा -
ग्राम सेवक का पदनाम ग्राम विकास अधिकारी होने पर भी सरपंच पूर्ववत कार्यालयाध्यक्ष रहेगा तथा ग्राम पंचायत में कार्यरत कनिष्ठ लिपिक एवं ग्राम विकास अधिकारी दोनों वर्तमान व्यवस्था अनुसार सरपंच के प्रति उत्तरदायी होंगे। कनिष्ठ लिपिक एवं ग्राम विकास अधिकारी का रिपोर्टिंग चैनल समान रहेगा। उक्त स्थिति में कनिष्ठ लिपिक एवं ग्राम विकास अधिकारी में कार्य विभाजन एवं जॉब चार्ट वर्तमान व्यवस्था के अनुसार ही रहेगा।
ग्राम विकास अधिकारी का पदनाम होने पर अभी अथवा भविष्य में न तो कोई अतिरिक्त वित्तीय लाभ मांगा जायेगा तथा ना ही इस पद को राजपत्रित घोषित करने की मांग की जायेगी।
ग्राम विकास अधिकारी का पदनाम घोषित होने की स्थिति में वेतनमान में किसी परिवर्तन की मांग नहीं की जावेगी तथा ना ही इस स्थिति में किसी प्रकार की पदोन्नति से संबंद्ध मांग की जावेगी।
ग्राम सेवक के पदनाम को ग्राम विकास अधिकारी का पदनाम दिये जाने पर इस तथ्य का कोई अतिरिक्त दावा सामन्त कमेटी के समक्ष अतिरिक्त लाभ हेतु नहीं किया जावेगा।
ग्राम सेवकों का पदनाम ग्राम विकास अधिकारी होने पर भी वे राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 व राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 व अन्य अधिनियमों/नियमों/आदेशों/दिशा निर्देशों में विहित ग्राम सेवक एवं सचिव पद के कर्तव्यों व दायित्वों का निर्वहन यथावत करते रहेंगे।
ग्राम विकास अधिकारी (Village Development Officer) एवं कनिष्ठ लिपिक (LDC) ग्राम पंचायत में एक दूसरे के लिंक ऑफिसर के रूप में कार्य करेंगे, जिससे कि एक की अनुपस्थिति में दूसरा उसका भी कार्य संपादित कर सके।
यह आदेश वित्त विभाग की आई.डी. सं. 101701936 दिनांक 05.04.2018 के अनुसरण में जारी किया जा रहा है तथा सक्षम स्तर से अनुमोदित है। यह आदेश जारी करने की दिनांक से प्रभावी होंगे।
इन आदेशों की क्रियान्विति हेतु अन्य आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने/नियम परिवर्तन की कार्यवाही पृथक से की जायेगी।
अतिक्रमण हटाने के सम्बन्ध में संसाधन उपलब्ध करवाने सम्बंधित
अतिक्रमण हटाने के सम्बन्ध में संसाधन उपलब्ध करवाने सम्बंधित
राजस्थान लोक सम्पत्ति अधिनियम के अंतर्गत अतिक्रमण हटाने के संबंध में परिपत्र
राजस्थान पंचायती राज विभाग परिपत्र
यह परिपत्र राजस्थान सरकार के पंचायती राज विभाग द्वारा क्रमांक एफ 139(51)परावि/विधि/अतिक्रमण/2005/3833, दिनांक 24-12-2005 को जारी किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य राजस्थान लोक सम्पत्ति (अनाधिकृत अधिभोगियों, बेदखली अधिनियम) 1964 के अंतर्गत पंचायतों की संपत्ति से अवैध अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया और नियमों की जानकारी देना है।
मुख्य बिंदु:
सम्पदा अधिकारी की नियुक्ति: राज्य सरकार की अधिसूचना दिनांक 12.11.92 के तहत समस्त जिला परिषदों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को सम्पदा अधिकारी नियुक्त किया गया है, जो पंचायत की संपत्तियों से अवैध कब्जों को हटाने हेतु अधिकृत हैं।
नोटिस की प्रक्रिया: अतिक्रमण करने वाले व्यक्ति को कम से कम 10 दिन का समय देते हुए नोटिस दिया जाना चाहिए, जिसे लोक शपथ के ऊपर या व्यक्तिगत रूप से/डाक द्वारा तामील कराया जाएगा।
बेदखली और नीलामी के नियम: सम्पदा अधिकारी सुनवाई के पश्चात बेदखली का आदेश पारित कर सकते हैं। अतिक्रमणकर्ता द्वारा छोड़ी गई संपत्ति को 14 दिन का समय देते हुए समाचार पत्र में प्रकाशन के पश्चात नीलाम किया जा सकता है।
अपील का प्रावधान: बेदखली के आदेश के विरुद्ध जिला जज या उनके द्वारा अधिकृत न्यायिक अधिकारी के समक्ष 15 दिन के भीतर अपील की जा सकती है।
शासकीय शक्तियां और दंड: सम्पदा अधिकारी को गवाहों को बुलाने और दस्तावेज मंगवाने हेतु सिविल न्यायालय की शक्तियां प्राप्त हैं। अवैध अतिक्रमण जारी रखने पर एक वर्ष तक की सजा और 1000/- रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।
पंचायती राज नियमों के अंतर्गत अचल संपत्ति की नीलामी, पट्टा और आबाड़ी भूमि आवंटन संबंधी निर्देश
पंचायती राज अधिनियम और नियम: संपत्ति नीलामी और पट्टा दिशा-निर्देश
यह दस्तावेज़ पंचायती राज संस्थाओं के अंतर्गत अचल संपत्ति की नीलामी, बाजार कीमत निर्धारण, पुनर्विक्रय, बिक्री की पुष्टि, प्राइवेट बातचीत द्वारा आबाड़ी भूमि का अंतरण, पुराने गृहों का विनियामीकरण और कमजोर वर्गों को भूमि आबंटन से संबंधित महत्वपूर्ण नियमों की जानकारी प्रदान करता है।
मुख्य बिंदु:
नीलामी समिति (नियम 151): सरपंच, उप-सरपंच, सतर्कता समिति का अध्यक्ष, महिला/अनुसूचित जाति/जनजाति/पिछड़ा वर्ग का पंचायत द्वारा मनोनीत एक पंच, भू-राजस्व निरीक्षक या पटवारी शामिल होते हैं।
बाजार कीमत (नियम 152): विकास अधिकारी प्रत्येक वर्ष अप्रैल मास में उप-registrar कार्यालय से क्षेत्र की आबाड़ी जमीनों के सूचक दर प्राप्त करते हैं।
विक्रय की पुष्टि और अनुमोदन (नियम 154): 10,000 रुपये से अधिक की बोली के लिए पंचायत समिति (50,000 रु से अधिक), जिला परिषद (1,00,000 रु से अधिक) या राज्य सरकार (1,00,000 रु से अधिक) से पूर्व अनुमोदन प्राप्त करना आवश्यक है।
पुराने गृहों का विनियामीकरण (नियम 157): 50 वर्ष से अधिक पूर्व निर्मित मकानों हेतु 100 रुपये और 50 वर्ष के दौरान बने मकानों हेतु 200 रुपये (चयनित परिवारों के लिए राशि वसूल नहीं होगी; गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वालों के लिए भी छूट)।
कमजोर वर्गों को आबंटन (नियम 158): गांव आबादियों में 150 वर्ग गज तक की आबाड़ी भूमि अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, पिछड़े वर्गों, श्रम मजदूरों और भूमिहीन व्यक्तियों को रियायती दरों पर आबंटित की जा सकती है।
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के अंतर्गत आबाद भूमि, पट्टा और विक्रय से संबंधित प्रारूप (प्रारूप 20 से 24)
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996: आबाद भूमि और पट्टा प्रारूप विवरण
यह दस्तावेज़ राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 और राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के अंतर्गत आने वाले महत्वपूर्ण आबाद भूमि, पट्टा, और संपत्ति रजिस्टरों के प्रारूपों (प्रारूप 20 से प्रारूप 24) को स्पष्ट करता है। ग्राम पंचायतों में भूमि आवंटन, विक्रय, और संपत्ति प्रबंधन के लिए इन प्रारूपों का आधिकारिक उपयोग किया जाता है।
मुख्य बिंदु और निर्धारित प्रारूप:
प्रारूप 20 (नियम 137): भवनों और स्थावर सम्पत्तियों का रजिस्टर।
प्रारूप 21 (नियम 146): आबाद भूमि के विक्रय का रजिस्टर।
प्रारूप 22 (नियम 148): आबाद भूमि के प्रस्तावित विक्रय के सम्बन्ध में आक्षेप आमंत्रण करने का नोटिस।
प्रारूप 23 (नियम 167(1)): आबाद भूमि का विक्रय विलेख।
प्रारूप 23क (नियम 157(1)): आवासीय भूमि का पट्टा।
प्रारूप 23ख (नियम 152(2)): आबाद भूमि का आवंटन / परिवारों में के कब्जे के अस्थायी मकानों / कच्चे मकानों का नियमितीकरण (विक्रय के लिए नहीं)।
प्रारूप 23ग (नियम 158): आबाद भूमि का रियायती दर पर / निःशुल्क आवंटन।
प्रारूप 24 (नियम 168(1)): आबाद भूमि की पट्टा बही (विक्रय विलेखों का रजिस्टर)।
ग्राम पंचायत स्तर पर भूमि रिकॉर्ड, पट्टा वितरण, और नियमबद्ध आवंटन के लिए ये सभी प्रपत्र कानूनी रूप से अनिवार्य और आधिकारिक दस्तावेज हैं।
राज पंचायती राज संस्थाओं में स्थावर संपत्तियाँ, आबाद भूमि और भूखण्ड आ आवंटन नियम
अध्याय 9: स्थावर संपत्तियाँ और आबाद भूमि
यह दस्तावेज़ राज पंचायती राज संस्थाओं के अंतर्गत स्थावर संपत्तियों, आबाद भूमि, भूखंडों की नीलामी, पट्टा आवंटन, और राजस्व संवर्धन से जुड़े नियमों की विस्तृत जानकारी प्रदान करता है। इसमें ग्राम पंचायत और पंचायती राज संस्थाओं द्वारा संपत्तियों के प्रबंधन, निरीक्षण और आबाद भूमि के उपयोग से संबंधित प्रावधान शामिल हैं।
मुख्य बिंदु:
पंचायत की संपत्तियां (नियम 136): पंचायत सर्किल के आबाद क्षेत्र के भीतर आने वाली सभी सरकारी भूमियां, कॉमन भूमियां और सार्वजनिक मार्ग पंचायत में निहित होते हैं।
आबाद भूमि और भूखंडों की नीलामी (नियम 141-143): आबाद भूमि का विक्रय सामान्यतः खुली नीलामी के माध्यम से किया जाता है। आवासीय और वाणिज्यिक प्रयोजनों के लिए निर्धारित मानकों के अनुसार भूखंडों की सूची तैयार की जाती है।
कमजोर वर्गों को आबाद भूमि का आवंटन (नियम 158): अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, स्वच्छता कर्मियों, पिछड़े वर्गों, विकलांगों और बाढ़ग्रस्त परिवारों को रियायती दरों पर 150 वर्ग गज तक की आबाद भूमि का पट्टा दिया जा सकता है।
भूमि का अस्थायी उपयोग और किराए पर देना (नियम 163-164): धार्मिक उत्सवों, पशु मेलों और बाजारों के लिए आबाद भूमि के अस्थायी उपयोग हेतु पट्टा-किराया निर्धारित किया गया है। पंचायती राज भवन और दुकानें खुली नीलामी के माध्यम से पट्टे पर दी जाती हैं।
अतिक्रमण हटाना (नियम 165): सार्वजनिक भूमियों, तालाब-तलों और चरागाहों पर अतिक्रमण की जांच के लिए हर वर्ष जनवरी और जुलाई में सर्वेक्षण किया जाता है और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाती है।