राज्य निर्वाचन आयोग राजस्थान: पंचायतीराज संस्थाओं के आम चुनाव, 2026 के कार्यक्रम की घोषणा
राज्य निर्वाचन आयोग, राजस्थान द्वारा पंचायतीराज संस्थाओं के आम चुनाव 2026 की घोषणा
संविधान के अनुच्छेद 243K एवं राजस्थान पंचायतीराज अधिनियम, 1994 की धारा 17(2) में वर्णित प्रावधानों के अनुसार राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा राजस्थान में पंचायतीराज संस्थाओं के आम चुनाव 2026 के कार्यक्रम की घोषणा कर दी गई है। यह प्रेस नोट दिनांक 03/10/2026 को जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु एवं चुनाव कार्यक्रम विवरण:
परिसीमन के पश्चात स्थिति: वर्तमान में राज्य में जिलों की संख्या बढ़कर 41 हो गई है, जिसके अंतर्गत 41 जिला परिषद, 457 पंचायत समितियां, 14403 ग्राम पंचायतें और 130589 वार्ड अस्तित्व में हैं।
मतदाता सूची: अर्हता तिथि 01.01.2026 के संदर्भ में तैयार अंतिम मतदाता सूची के अनुसार कुल 4,03,07,308 पंजीकृत मतदाता हैं (पुरुष: 2,08,87,351, महिला: 1,94,19,789, थर्ड जेंडर: 168)। कुल 45384 मतदान केंद्र बनाए गए हैं।
मतदान का समय: मतदान का समय प्रातः 7:00 बजे से सायं 06:00 बजे तक नियत किया गया है।
मतदान प्रक्रिया एवं ईवीएम: चुनाव EVM (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) के माध्यम से कराए जाएंगे।
मतदाताओं की पहचान: मतदान के दौरान मतदाताओं को अपना फोटो पहचान पत्र (EPIC) प्रस्तुत करना होगा। इसके अलावा आयोग द्वारा अनुमोदित 11 वैकल्पिक फोटो दस्तावेजों (जैसे आधार कार्ड, मनरेगा जॉब कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट आदि) में से कोई एक मूल दस्तावेज मान्य होगा।
विभिन्न चरणों में चुनाव: पंचायतीराज संस्थाओं के आम चुनाव विभिन्न चरणों में संपन्न करवाए जा रहे हैं। जैसलमेर, फलोदी एवं सलूंबर के चुनाव एक चरण में, झुंझुनूं, करौली, सीकर, बांसवाड़ा, बीकानेर, जालौर एवं उदयपुर के चुनाव तीन चरण में तथा शेष जिलों के चुनाव चार चरणों में संपन्न होंगे।
आदर्श आचरण संहिता: चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों में आदर्श आचरण संहिता के प्रावधान तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं, जो चुनाव प्रक्रिया समाप्ति तक लागू रहेंगे।
उम्मीदवारों के लिए चुनाव खर्च सीमा: जिला परिषद सदस्य के लिए 3,00,000/- रुपये, पंचायत समिति सदस्य के लिए 1,50,000/- रुपये और सरपंच के लिए 1,00,000/- रुपये अधिकतम चुनाव खर्च सीमा निर्धारित की गई है।
जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण (संशोधन) अधिनियम, 2026 के प्रावधानों के संबंध में निर्देश
जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण (संशोधन) अधिनियम, 2026 की जानकारी
राजस्थान सरकार के सांख्यिकी विभाग द्वारा सभी जिला कलेक्टरों एवं अतिरिक्त मुख्य रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) को जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण (संशोधन) अधिनियम, 2026 के प्रावधानों के संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं। यह पत्र दिनांक 24/09/2026 (क्रमांक-एफ/13/1/3/आर.जी.आई./वीएस/डीएस/2017/789) को जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु एवं नए प्रावधान
विधि एवं न्याय मंत्रालय (विधाई विभाग) भारत सरकार द्वारा जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण (संशोधन) अधिनियम, 2026 (No. 12 of 2026) को दिनांक 6 अगस्त 2026 को राजपत्र में प्रकाशित किया गया था।
भारत के महारजिस्ट्रार कार्यालय की अधिसूचना के अनुसार इस अधिनियम के प्रावधान 01 अक्टूबर, 2026 से प्रभावी होंगे।
धारा 13(3): यदि किसी जन्म या मृत्यु की घटना की विलंबित इत्तिला उसके घटित होने के एक वर्ष के पश्चात किंतु दो वर्ष के भीतर दी जाती है, तो वह केवल जिला मजिस्ट्रेट, उप-खंड मजिस्ट्रेट या जिला मजिस्ट्रेट द्वारा अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 14 की उप-धारा (1) के अधीन नियुक्त) के आदेश तथा विहित फीस दिए जाने पर ही रजिस्ट्रकृत की जाएगी।
धारा 13(3A): यदि किसी जन्म या मृत्यु की घटना की विलंबित इत्तिला उसके घटित होने के दो वर्ष के पश्चात दी जाती है, तो वह केवल प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश तथा विहित फीस दिए जाने पर ही रजिस्ट्रकृत की जाएगी।
पंचायती राज एवं ग्राम पंचायत उपयोगकर्ताओं के लिए निर्देश: जिले के समस्त उपखंड अधिकारी (SDM), कार्यपालक मजिस्ट्रेट, तहसीलदार, नगर निगम/परिषद/पालिका के रजिस्ट्रार और ग्राम पंचायत के रजिस्ट्रार यह सुनिश्चित करें कि दिनांक 01.10.2026 के पश्चात उक्त संशोधित प्रावधानों की पालना अनिवार्य रूप से की जाए।
विकसित भारत-जन सेवा अभियान के अंतर्गत आयोजित गतिविधियों एवं वित्तीय स्वीकृति के संबंध में
विकसित भारत-जन सेवा अभियान के संबंध में दिशा-निर्देश एवं वित्तीय स्वीकृति
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ 165(7)ले.ब./परावि/एसएफसी-7/2025-26/ दिनांक के अंतर्गत राज्य में विकसित भारत-जन सेवा अभियान के आयोजन के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश और वित्तीय स्वीकृति जारी की गई है।
मुख्य उद्देश्य एवं गतिविधियाँ
राज्य में जनसेवा, सामाजिक सरोकार और सुशासन की भावना को सुदृढ़ करने, विभिन्न जनकल्याणकारी गतिविधियों की जानकारी को व्यापक स्तर पर पहुँचाने तथा विकसित राजस्थान के लक्ष्य को प्राप्त करने में आमजन, किसानों, महिलाओं और युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से 17 सितम्बर, 2026 से इस अभियान का आयोजन किया जा रहा है।
जिला स्तर: जनप्रतिनिधियों और आमजन के साथ संवाद।
पंचायत समिति मुख्यालय: शिविरों का आयोजन कर केंद्रीय एवं राज्य योजनाओं की जानकारी से संबंधित कार्य (दिनांक 19.09.2026 से 25.09.2026 तक)।
ग्राम पंचायत स्तर: जन-भागीदारी के माध्यम से स्वच्छता और सामुदायिक सेवा से संबंधित गतिविधियाँ।
षष्ठ राज्य वित्त आयोग के अनुदान से व्यय हेतु वित्तीय प्रावधान
षष्ठ राज्य वित्त आयोग के अंतर्गत पंचायती राज संस्थाओं को देय अनुदान राशि के उपयोग हेतु पंचायती राज विभाग के पत्रांक 347 राजकाज क्रमांक 13247621 दिनांक 28.01.2025 के बिंदु संख्या (अ)(3)(xiii) के प्रावधानों के तहत निम्नलिखित व्यय की भूतलक्षीय स्वीकृति प्रदान की गई है:
पंचायत समिति स्तर पर: शिविर के आयोजन हेतु टेंट, फर्नीचर, दरी, पेयजल व्यवस्था, बैठक व्यवस्था, इंटरनेट कनेक्टिविटी एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं से संबंधित व्यय हेतु प्रति पंचायत समिति अधिकतम राशि ₹25,000/-।
ग्राम पंचायत स्तर पर: जन-भागीदारी के माध्यम से स्वच्छता और सामुदायिक सेवा से संबंधित गतिविधियों के आयोजन हेतु प्रति ग्राम पंचायत अधिकतम राशि ₹10,000/-।
उपरोक्त व्यय षष्ठ राज्य वित्त आयोग के अंतर्गत उपलब्ध अनुदान राशि से किया जाएगा, जिसे वित्त विभाग की आई.डी. संख्या 332601518 दिनांक 18.09.2026 द्वारा अनुमोदित किया गया है।
बजट घोषणा 2026-27 के अंतर्गत अटल ज्ञान केंद्रों (फेस-2) की स्थापना एवं क्रियान्वयन के संबंध में दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा अटल ज्ञान केंद्र स्थापना के निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा बजट घोषणा 2026-27 के अंतर्गत द्वितीय चरण में 2400 से 3000 तक की आबादी वाले चयनित 1000 ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर अटल ज्ञान केंद्रों की स्थापना एवं क्रियान्वयन के संबंध में आदेश जारी किए गए हैं।
भवन निर्माण एवं लागत विवरण
प्रथम तल पर नया भवन (36'x20' हॉल): अनुमानित लागत 9.60 लाख रुपये प्रति केंद्र (श्रम मद में 2.78 लाख रुपये VBGRAMG से तथा शेष 4.95 लाख रुपये राज्य वित्त आयोग योजना अंतर्गत)।
भू-तल पर नया भवन (30'x20' हॉल): अनुमानित लागत 9.40 लाख रुपये प्रति केंद्र (श्रम मद में 2.87 लाख रुपये VBGRAMG से तथा शेष 4.64 लाख रुपये राज्य वित्त आयोग योजना अंतर्गत)।
पुराने/अनुपयोगी भवनों के लिए: अधिकतम 4.00 लाख रुपये राज्य वित्त आयोग योजना अंतर्गत वहन किए जाएंगे।
अन्य गतिविधियां एवं सुविधाएं (राज्य वित्त आयोग द्वारा वहन)
ई-कियोस्क/फर्नीचर/वर्क स्टेशन एवं वायरिंग: 4.35 लाख रुपये प्रति केंद्र।
कंप्यूटर एवं प्रिंटर: 2.25 लाख रुपये प्रति केंद्र (कंप्यूटर 2.00 लाख रुपये जिसमें अधिकतम 0.50 लाख रुपये प्रति कंप्यूटर तथा प्रिंटर 0.25 लाख रुपये)।
प्रतियोगिता परीक्षाओं की पुस्तकें एवं पत्रिकाएं: 0.30 लाख रुपये प्रति केंद्र।
महत्वपूर्ण निर्देश
सर्वप्रथम भवन निर्माण का कार्य किया जाएगा, जिसके उपरांत अन्य गतिविधियों का निष्पादन होगा।
नवीन भवनों के निर्माण पर होने वाले व्यय को सर्वप्रथम VBGRAMG मद से और तत्पश्चात राज्य वित्त आयोग मद से वहन किया जावेगा।
निर्माण कार्य आर.टी.पी.पी. (RTPP) एक्ट 2012 एवं राजस्थान सार्वजनिक खरीद पारदर्शिता नियम, 2013 के अनुसार किया जाना सुनिश्चित करें।
प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण (PMAY-G) के अंतर्गत लाभार्थियों के भौतिक सत्यापन एवं उन्हें अपात्र घोषित करने हेतु यह 'रिमांड ऑफ फॉर्म' (Remand Off Form) उपयोग
यह प्रपत्र PMAY-G की स्थाई वरीयता सूची (PWL) में शामिल लाभार्थियों के ग्राम सभा द्वारा भौतिक सत्यापन के लिए है।
ग्राम सभा की बैठक में योजनान्तर्गत निर्धारित मापदण्डों के परीक्षण उपरान्त लाभार्थियों को पात्र या अपात्र घोषित कर अनुमोदन किया जाता है।
प्रपत्र में लाभार्थी का नाम, पिता/पति का नाम, गाँव का नाम, PMAY-G ID एवं PWL में वरीयता क्रमांक दर्ज करने का स्पष्ट प्रावधान है।
अपात्रता के मुख्य कारण (मापदंड):
प्रपत्र में अपात्रता के 16 बिंदु दिए गए हैं, जिनमें से किसी एक का होना अपात्रता (Remand Off) के लिए पर्याप्त है:
पूर्व में मकान होना या किसी आवास योजना से लाभान्वित होना।
लाभार्थी की मृत्यु हो जाना (तथा परिवार में कोई न होना) या ग्राम पंचायत से पलायन कर जाना।
किसी भी प्रकार का वाहन (मोटरसाईकिल, टेम्पो, कार, जीप, नाव) या 3-व्हीलर/4-व्हीलर मशीनरी होना।
किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) की लिमिट 50,000 रुपये से अधिक होना।
परिवार के किसी सदस्य का राजकीय सेवा में होना, गैर कृषि उद्यम में पंजीकृत होना या मासिक आय 10,000 रुपये होना।
आयकर (Tax) या पेशेवर कर (Professional Tax) का भुगतान करने वाला होना।
घर में फ्रीज या बेसिक फोन होना।
स्वयं की 2.5 एकड़ जमीन के साथ कृषि यंत्र होना, 5.0 एकड़ सिंचित भूमि होना, या कम से कम 7.5 एकड़ भूमि/1 सिंचाई उपकरण होना।
माननीय प्रधानमंत्री महोदय की उपस्थिति में 28.02.2026 को आयोजित होने वाले राज्य स्तरीय समारोह के सीधे प्रसारण हेतु व्यवस्था के संबंध में
राज्य स्तरीय समारोह के सीधे प्रसारण हेतु दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी पत्र क्रमांक एफ 165(7)ले.ब./परावि/एसएफसी-7/2025-26/ के माध्यम से दिनांक 28.02.2026 को अजमेर में माननीय प्रधानमंत्री महोदय की उपस्थिति में आयोजित होने वाले राज्य स्तरीय कार्यक्रम के लाइव प्रसारण को ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर दिखाने हेतु व्यवस्था के संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु एवं वित्तीय स्वीकृति
दिनांक 28.02.2026 को अजमेर में होने वाले कार्यक्रम का लाइव प्रसारण जिला, ब्लॉक व ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर आयोजित किया जाना है।
इस कार्यक्रम के सीधे प्रसारण को ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर देखने हेतु समुचित व्यवस्था (जैसे टीवी, स्क्रीन, एलईडी व्यवस्था, फर्नीचर, टेंट, पेयजल व बैठक व्यवस्था) सुनिश्चित की जानी है।
षष्ठ राज्य वित्त आयोग के अंतर्गत पंचायती राज संस्थाओं को देय अनुदान राशि के उपयोग हेतु विभाग के पत्रांक 347 राजकाज क्रमांक 13247621 दिनांक 28.01.2025 द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के बिंदु संख्या-(अ)(3)(xiii) के प्रावधानों के अंतर्गत यह सहमति दी गई है।
प्रत्येक ग्राम पंचायत द्वारा इस प्रयोजन हेतु अधिकतम राशि 10,000/- रुपये तक का व्यय/उपयोग षष्ठ राज्य वित्त आयोग के अंतर्गत उपलब्ध अनुदान राशि से करने की सहमति प्रदान की जाती है।
यह सहमति वित्त विभाग की आई.डी. संख्या 332600355 दिनांक 26.02.2026 द्वारा अनुमोदित है।
जारीकर्ता: (डॉ. जोगा राम), शासन सचिव एवं आयुक्त, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
प्रधानमंत्री आवास योजना - ग्रामीण: ग्राम सभा सत्यापन एवं अपात्रता प्रमाण पत्र प्रारूप
प्रधानमंत्री आवास योजना - ग्रामीण (PMAY-G) सत्यापन प्रमाण पत्र
कार्यालय ग्राम पंचायत, पंचायत समिति बाड़मेर ग्रामीण, जिला - बाड़मेर के अंतर्गत प्रधानमंत्री आवास योजना - ग्रामीण के लाभार्थियों के भौतिक सत्यापन और ग्राम सभा प्रस्ताव के लिए निर्धारित प्रारूप जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
ग्राम सभा सत्यापन: प्रधानमंत्री आवास योजना - ग्रामीण की स्थायी वरीयता सूची में शामिल लाभार्थियों का ग्राम सभा द्वारा भौतिक सत्यापन एवं निर्धारित 14/16 मापदंडों के परीक्षण उपरांत पात्र या अपात्र घोषित किया जाता है।
अपात्रता के मुख्य कारण: विशेष ग्राम सभा में अपात्र पाए जाने वाले लाभार्थियों के लिए निर्धारित बिंदु (जैसे पूर्व में आवास योजना से लाभान्वित होना, सरकारी सेवा में होना, तिपहिया/चारपहिया वाहन होना, 50,000 से अधिक किसान क्रेडिट कार्ड लिमिट, 10,000 मासिक आय, आयकरदाता होना आदि) शामिल हैं।
प्रमाण पत्र विवरण: इसमें लाभार्थी का नाम, पिता का नाम, गांव का नाम, PMAY-G ID, PWL में वरीयता क्रमांक तथा सरपंच, ग्राम विकास अधिकारी (VDO) और विकास अधिकारी के हस्ताक्षर हेतु प्रावधान है।
उदयपुर जिला ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन संबंधी शुद्धि पत्र
उदयपुर जिला ग्राम पंचायत एवं पंचायत समिति पुनर्गठन शुद्धि पत्र
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा आदेश क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/894, दिनांक 28-12-2025 के माध्यम से उदयपुर जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन से संबंधित पूर्व में जारी अधिसूचना में लिपकीय त्रुटियों के सुधार हेतु शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु एवं विवरण
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
दिनांक: 28-12-2025
संबंधित जिला: उदयपुर
ग्राम पंचायतों हेतु संशोधन: सायरा पंचायत समिति के अंतर्गत पूर्व प्रकाशित विवरण 'भानपुर' के स्थान पर कॉलम 7 के अनुसार 'भानपुरा' पढ़ा जाए।
पंचायत समितियों हेतु संशोधन: कुराबड और गिरवा पंचायत समितियों के अंतर्गत पूर्व प्रकाशित विवरण (जैसे 'मामादेव' और 'साठपुर मीणा') से संबंधित प्रविष्टियों में संशोधन करते हुए कुछ प्रविष्टियों को विलोपित किया गया है तथा अन्य सुधार किए गए हैं।
यह शुद्धि पत्र प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात पूर्व में प्रकाशित अधिसूचनाओं में हुई लिपकीय त्रुटियों को सुधारने के लिए जारी किया गया है।
जिला टोंक की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन बाबत शुद्धि पत्र
जिला टोंक ग्राम पंचायत एवं पंचायत समिति पुनर्गठन शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जिला टोंक की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन से संबंधित पूर्व में जारी अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटियों के संशोधन हेतु शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य विवरण:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
क्रमांक: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव/2024/893
दिनांक: 28-12-2025
संबंधित पूर्व अधिसूचनाएं: क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव/2024/807 दिनांक 20.11.2025 एवं संख्या एफ.15(39)पंव/पंचायत समिति गठन/2025/847 दिनांक 21.11.2025
इस शुद्धि पत्र के माध्यम से टोंक, निवाई, टोडारायसिंह और उनियारा पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों तथा पंचायत समितियों के विवरण में आवश्यक संशोधन किए गए हैं। विस्तृत विवरण के लिए संबंधित आदेश का अवलोकन करें।
जिला सिरोही की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सիमांकन के संबंध में शुद्धि पत्र
अधिसूचना विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/892 दिनांक 28-12-2025 के माध्यम से जिला सिरोही की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन से संबंधित पूर्व में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने एवं प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात संशोधन कर शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
संदर्भित पत्र संख्या एवं दिनांक: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/892, दिनांक 28-12-2025
पूर्व अधिसूचनाएं: क्रमांक एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/846 दिनांक 21.11.2025 तथा राजपत्र में दिनांक 21.11.2025 एवं 24.11.2025 को प्रकाशित सूचनाएं।
विषय: जिला सिरोही के अंतर्गत ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों हेतु पूर्व प्रकाशित विवरण में संशोधन (जैसे रेवदर और सिरोही पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाले गांवों/क्षेत्रों के नाम)।
नोट: नीचे दिए गए कॉलम संख्या 6 में अंकित विवरण के स्थान पर कॉलम 7 में अंकित विवरण को सही समझा पढ़ा जाए। विस्तृत विवरण के लिए आधिकारिक अधिसूचना का अवलोकन करें।
राजस्थान सरकार: सीकर जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्संसीमाकन के संबंध में शुद्धि पत्र अधिसूचना (28-12-2025)
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा सीकर जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्संसीमाकन/नवसृजन के संबंध में एक महत्वपूर्ण शुद्धि पत्र जारी किया गया है। यह आदेश दिनांक 28-12-2025 को जारी किया गया है, जिसका पत्र क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/891 है।
अधिसूचना का मुख्य उद्देश्य
विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंव्रा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/845 दिनांक 20.11.2025 एवं संख्या एफ.15(39)पंव्रा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/846 दिनांक 21.11.2025 तथा दिनांक 21.11.2025 एवं 24.11.2025 को राजस्थान राजपत्र विशेषनांक भाग 6(ग) में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने की वजह से और प्राप्त आपत्तियों के निस्तारण पश्चात यह संशोधन/शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार।
जिला: सीकर।
जारी दिनांक: 28-12-2025।
संदर्भित आदेश क्रमांक: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/891।
विवरण: नीचे दिए गए कॉलम संख्या 6 में अंकित विवरण के स्थान पर कॉलम 7 में अंकित विवरण को सही समझ कर पढ़ा जाए, जिसके अंतर्गत ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों (जैसे नीमकाथाना, पाटन, खण्डेला, लक्ष्मणगढ़, दांताारामगढ़, फतेहपुर, नेछवा, श्रीमाधोपुर, अजीतगढ़, रामगढ़ शेखावाटी, पलसाना, खाचरियावास आदि) से संबंधित विवरणों में संशोधन किया गया है।
नोट: इस शुद्धि पत्र के माध्यम से संबंधित ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों के पूर्व प्रकाशित विवरण में आवश्यक संशोधन किए गए हैं जिन्हें राजपत्र के अनुसार पढ़ा जाना चाहिए।
श्री गंगानगर जिले के पुनर्गठन और परिसीमन से संबंधित शुद्धि पत्र - आदेश दिनांक 28-12-2025
श्री गंगानगर जिला पुनर्गठन शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा श्री गंगानगर जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन से संबंधित अधिसूचना के संबंध में एक महत्वपूर्ण शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/786 दिनांक 20.11.2025 एवं संख्या एफ.15(39)पंव्रा/समिति गठन/2025/827 दिनांक 21.11.2025 के तहत श्री गंगानगर जिले की ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्रसीमांकन के संबंध में राजपत्र में प्रकाशित विवरण में लिपिकीय त्रुटि व प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात यह शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों हेतु जारी तालिकाओं में पूर्व प्रकाशित विवरण के स्थान पर संशोधित विवरण को सही समझ कर पढ़ने के निर्देश दिए गए हैं।
सूरतगढ़, सादुलशहर, रायसिंहनगर, घड़साना, अनूपगढ़ और राजियासर आदि क्षेत्रों से संबंधित प्रविष्टियों में सुधार किया गया है।
विस्तृत विवरण और संशोधित प्रविष्टियों की जानकारी के लिए मूल पीडीएफ दस्तावेज़ का अवलोकन करें।
जिला सवाई माधोपुर की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सীमांकन बाबत शुद्धि पत्र (दिनांक 28-12-2025)
जिला सवाई माधोपुर पुनर्गठन शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार, जयपुर द्वारा दिनांक 28-12-2025 का आदेश (क्रमांक: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/890) जारी किया गया है। यह शुद्धि पत्र जिला सवाई माधोपुर की ग्राम-पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन के संबंध में पूर्व में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटि सुधार हेतु जारी किया गया है।
प्रमुख बिंदु:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
दिनांक: 28-12-2025
संबंधित जिला: सवाई माधोपुर
उद्देश्य: पूर्व में प्रकाशित अधिसूचनाओं (दिनांक 21.11.2025 एवं 24.11.2025) में लिपिकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने के कारण प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात विवरण में संशोधन।
संशोधित विवरण के अंतर्गत गंगापुरसिटी, खण्डार, बामनवास और मलारना डूंगर पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाली विभिन्न ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों के विवरण में आवश्यक सुधार किए गए हैं। संबंधित उपयोगकर्ता एवं अधिकारी अधिक जानकारी के लिए मूल आदेश का अवलोकन कर सकते हैं।
जिला सलूंबर की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन से संबंधित शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा जारी शुद्धि पत्र
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवारा/2024/889 दिनांक 28-12-2025 के तहत जिला सलूंबर की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसर्जन से संबंधित पूर्व में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटिवश हुए गलत प्रकाशन को सुधारने हेतु शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
विवरण: पूर्व प्रकाशित अधिसूचनाओं (संख्या एफ.15(39)पंवारा/पंचायत समिति गठन/2025/803 दिनांक 20.11.2025 एवं संख्या एफ.15(39)पंवारा/पंचायत समिति गठन/2025/843 दिनांक 21.11.2025) में प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात कॉलम संख्या 6 के स्थान पर कॉलम 7 में अंकित विवरण को सही पढ़ा जाए।
राजसमंद जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन संबंधी शुद्धि पत्र - 24.12.2025
राजसमंद जिले के पुनर्गठन और परिसीमन से संबंधित शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजसमंद जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन के संबंध में जारी पूर्व अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटियों के सुधार हेतु नया शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य विवरण:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
क्रमांक: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवारा/2024/889
दिनांक: 24-12-2025
संदर्भ: विभागीय अधिसूचना क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवारा/2025/842 दिनांक 20.11.2025 एवं 21.11.2025
मुख्य बिंदु:
राजपत्र प्रकाशन में हुई लिपिकीय त्रुटियों व प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण के पश्चात आमेठ, कुंभलगढ़, देवगढ़, भीम, रेलमगरा और राजसमंद पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों के विवरण में संशोधन किया गया है। कॉलम संख्या 6 के स्थान पर कॉलम संख्या 7 में दिए गए विवरण को सही पढ़ा जाए।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है।
राजस्व ग्राम और पंचायत समिति पुनर्गठन शुद्धि पत्र - सिरोही जिला
राजस्थान सरकार ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), जयपुर द्वारा दिनांक 28-12-2025 को एक शुद्धि पत्र (कमांक: एफ.15(39)पंव/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/901) जारी किया गया है। यह शुद्धि पत्र विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंव/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/846 दिनांक 21.11.2025 तथा दिनांक 24.11.2025 को राजस्थान राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटियों को दुरुस्त करने और प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण के पश्चात जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
जिला: सिरोही
अधिसूचना दिनांक: 28-12-2025
शासन सचिव: डॉ. जोगा राम (राज्यपाल की आज्ञा से)
इस शुद्धि पत्र के माध्यम से सिरोही जिले की पुनर्गठित, पुनर्जीवित और नवसृजित पंचायत समितियों तथा उनमें सम्मिलित ग्राम पंचायतों के विवरण में संशोधन किया गया है। अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात उस जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो अनुसूची के स्तंभ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी।
जिला प्रतापगढ़ की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन संबंधी शुद्धि पत्र
जिला प्रतापगढ़ पुनर्गठन शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा जिला प्रतापगढ़ की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन के संबंध में जारी अधिसूचना में लिपिकीय त्रुटियों के संशोधन हेतु शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य विवरण:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार
क्रमांक: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव/2024/887
दिनांक: 28-12-2025
विषय: जिला प्रतापगढ़ की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन के संबंध में पूर्व में प्रकाशित अधिसूचनाओं (दिनांक 21.11.2025 एवं 26.11.2025) में लिपिकीय त्रुटियों का संशोधन।
जारी किए गए विवरण के अनुसार, कॉलम संख्या 6 में अंकित पूर्व प्रकाशित विवरण के स्थान पर कॉलम संख्या 7 में दिए गए संशोधित विवरण को सही समझा जाए। इसमें दलॉट, प्रतापगढ़, पीपलखूट, सुहागपुरा और अरनोद पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाले ग्रामों एवं विवरणों में संशोधन किया गया है।
जिला फलोदी की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सーीमौन हेतु शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा आदेश क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/886, दिनांक 28-12-2025 के तहत जिला फलोदी की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्ससीमांकन/नवसृजन के संबंध में शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
यह शुद्धि पत्र पूर्व में जारी विभागीय अधिसूचनाओं (संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/800 दिनांक 20.11.2025 एवं 840 दिनांक 21.11.2025) में लिपिकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने के कारण एवं प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार।
संबंधित जिला: फलोदी।
आदेश क्रमांक व दिनांक: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/886, दिनांक 28-12-2025।
विवरण: ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों हेतु राजपत्र में प्रकाशित विवरण में कॉलम संख्या 6 के स्थान पर कॉलम संख्या 7 में अंकित विवरण को सही पढ़ा जाए।
विभिन्न पंचायत समितियों जैसे घटियाली, बाप, फलोदी, आऊ, देचू, लोहावट, बापिणी आदि के अंतर्गत आने वाले ग्रामों और क्षेत्रों के नामों में आवश्यक संशोधन किए गए हैं तथा कुछ प्रविष्टियाँ विलोपित की गई हैं।
अधिक जानकारी एवं विस्तृत विवरण के लिए आधिकारिक राजपत्र या संबंधित विभाग के आदेश का अवलोकन करें।
पाली जिले की ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन/पुनर्सिमांकन के संबंध में शुद्धि पत्र जारी
पाली जिला ग्राम पंचायत पुनर्गठन शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवारा/2024/885 दिनांक 28-12-2025 के माध्यम से पाली जिले की ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सिमांकन/नवसृजन बाबत पूर्व में जारी अधिसूचना में लिपिकीय त्रुटि के सुधार हेतु शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य विवरण एवं संशोधन
विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवारा/2024/799 दिनांक 20.11.2025 (जो दिनांक 21.11.2025 को राजस्थान राजपत्र विशेषांक भाग 6(ग) में प्रकाशित हुई थी) में प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात निम्नलिखित संशोधन किए गए हैं:
पंचायत समिति बाली: राजपत्र पृष्ठ 1184, क्रम संख्या 23, कॉलम 5 - पूर्व प्रकाशित विवरण '3. रेलिया' को विलोपन किया गया है।
पंचायत समिति बाली: राजपत्र पृष्ठ 1184, क्रम संख्या 27, कॉलम 5 - संशोधित विवरण में '3. रेलिया' जोड़ा गया है।
पंचायत समिति बाली: राजपत्र पृष्ठ 1181, क्रम संख्या 4, कॉलम 5 - पूर्व प्रकाशित विवरण '3. सादलवा' को विलोपन किया गया है।
पंचायत समिति बाली: राजपत्र पृष्ठ 1182, क्रम संख्या 6, कॉलम 5 - संशोधित विवरण में '3. सादलवा' जोड़ा गया है।
उक्त विवरण को कॉलम 6 के स्थान पर कॉलम 7 में अंकित विवरण के अनुसार सही समझ कर पढ़ा जाए। यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है।
जिला नागौर के ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन हेतु शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा संशोधन आदेश
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/884, दिनांक 28-12-2025 के तहत जिला नागौर की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन बाबत पूर्व में जारी अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने के कारण संशोधन/शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
प्रमुख विवरण:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार
दिनांक: 28-12-2025
संदर्भित पूर्व अधिसूचनाएं: संख्या एफ.15(39)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2025/798 दिनांक 20.11.2025 एवं संख्या एफ.15(39)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2025/838 दिनांक 21.11.2025
विषय: जिला नागौर की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन में लिपिकीय त्रुटियों का सुधार
इस शुद्धि पत्र के माध्यम से ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों हेतु पूर्व प्रकाशित विवरण में कॉलम संख्या 6 के स्थान पर कॉलम संख्या 7 में अंकित विवरण को सही समझा व पढ़ा जाए।
कोटपूतली-बहरोड़ जिला: ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनःसीमांठन बाबत शुद्धि पत्र अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार, जयपुर द्वारा क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवै/2024/883 दिनांक 29-12-2025 के तहत एक महत्वपूर्ण शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
अधिसूचना का मुख्य उद्देश्य एवं विवरण
विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवै/2024/797 दिनांक 20.11.2025 एवं संख्या एफ.15(39)विधि/पंचायत समिति गठन/2025/837 दिनांक 21.11.2025 तथा जिला कोटपूतली-बहरोड़ की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनःसीमांठन/नवसृजन बाबत दिनांक 21.11.2025 एवं 24.11.2025 को राजस्थान राजपत्र विशेषनांक भाग 6(ग) में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने की वजह से व प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात यह संशोधन/शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु
संबंधित जिला: कोटपूतली-बहरोड़
प्रभावित क्षेत्र: ग्राम पंचायतें एवं पंचायत समितियां
जारीकर्ता: डॉ. जोगा राम, शासन सचिव, राज्यपाल की आज्ञा से
नोट: नीचे दिए गए कॉलम संख्या 6 में अंकित विवरण के स्थान पर कॉलम 7 में अंकित विवरण को सही समझ कर पढ़ा जाए, जैसा कि मूल अधिसूचना एवं संलग्न तालिकाओं में दर्शाया गया है।
राजस्थान सरकार - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग: जिला कोटा के पुनर्गठन संबंधशुद्धि पत्र
अधिसूचना एवं संशोधन विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/882 दिनांक 28-12-2025 के माध्यम से जिला कोटा की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन के संबंध में पूर्व में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटि के सुधार हेतु शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
आदेश क्रमांक व दिनांक: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/882, दिनांक 28-12-2025।
विषय: जिला कोटा की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन बाबत पूर्व में प्रकाशित राजपत्र अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटियों का संशोधन।
प्रभावित क्षेत्र: ग्राम पंचायतें (इटावा, खैराबाद, सुल्तानपुर) एवं पंचायत समितियां (खैराबाद)।
उक्त शुद्धि पत्र के अनुसार कॉलम संख्या 6 में अंकित पूर्व प्रकाशित विवरण के स्थान पर कॉलम संख्या 7 में अंकित विवरण को सही समझा व पढ़ा जाए।
जिला खैरथल-तिजारा के पुनर्गठन/पुनर्सীमांकन संबंधी शुद्धि पत्र
ग्राम विकास एवं पंचायती राज विभाग शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवारा/2024/881 दिनांक 24-12-2025 के माध्यम से जिला खैरथल-तिजारा की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन से संबंधित पूर्व में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटियों के संशोधन हेतु शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
अधिसूचना संदर्भ: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवारा/2024/795 दिनांक 20.11.2025 एवं संख्या एफ.15(39)पुनर्गठन/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/835 दिनांक 21.11.2025
संशोधित क्षेत्र: जिला खैरथल-तिजारा की ग्राम पंचायतें एवं पंचायत समितियाँ (जैसे तिजारा, किशनगढ़बास, मुण्डावर, ततारपुर)
विवरण: राजपत्र में पूर्व प्रकाशित विवरण में लिपिकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने की वजह से तथा प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात कॉलम 6 के स्थान पर कॉलम 7 में अंकित विवरण को सही समझा जाए।
करौली जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सիमांकन संबंधी शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवै/2024/880 दिनांक 28-12-2025 के माध्यम से जिला करौली की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन के संबंध में पूर्व में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटियों के सुधार हेतु शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार।
आदेश क्रमांक व दिनांक: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवै/2024/880, दिनांक 28-12-2025।
विषय: जिला करौली की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन बाबत पूर्व में प्रकाशित राजपत्र अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने एवं प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात संशोधन।
विवरण: सपोटरा, मासलपुर, हिण्डौन, करौली, नादौती, टोडामीम, श्रीमहावीरजी, कुडगांव, शेरपुर-सुरोठ आदि पंचायत समितियों और संबंधित ग्राम पंचायतों के विवरण में संशोधन किया गया है।
अधिक जानकारी के लिए संबंधित आधिकारिक प्रपत्र एवं दस्तावेजों का अवलोकन करें।
जिला जोधपुर की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन संबंधी शुद्धि पत्र आदेश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा अधिसूचना
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा जिला जोधपुर की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्सीमांकन और नवसंयोजन के संबंध में एक महत्वपूर्ण शुद्धि पत्र जारी किया गया है। यह आदेश दिनांक 28-12-2025 को जारी किया गया है, जिसका पत्र क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव/2024/879 है।
आदेश का मुख्य उद्देश्य
विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव/पंचायत समिति गठन/2025/833 दिनांक 21.11.2025 एवं अन्य पूर्व प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटियों के कारण हुए गलत प्रकाशन और प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण के पश्चात इस शुद्धि पत्र के माध्यम से विवरणों को संशोधित किया गया है।
मुख्य विवरण एवं निर्देश
ग्राम पंचायतों हेतु संशोधन: तिंवरी, बालेसर, ओसियां, बावड़ी, लूणी, मण्डोर, शेरगढ़, सेखाला, चामू, भोपालगढ़, बिलाड़ा और पीपाड़ शहर आदि पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों के विवरण, नाम, और कॉलम की प्रविष्टियों में सुधार किया गया है।
पंचायत समितियों हेतु संशोधन: बावड़ी, हतुण्डी, लूणी, बिलाड़ा, कापरड़ा, भोपालगढ़, पीपाड़ शहर, उम्मेदनगर और झंवर मुख्यालय पाल रोड से संबंधित पंचायत समिति क्षेत्रों के विवरणों को संशोधित किया गया है।
निर्देश: संबंधित तालिकाओं में कॉलम 6 के स्थान पर कॉलम 7 में अंकित विवरण को सही समझ कर पढ़ा जाए।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है तथा इसकी प्रतियां संबंधित सभी उच्च अधिकारियों, जिला कलेक्टरों, जिला परिषदों और निर्वाचन आयोग को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रेषित की गई हैं।
जिला झुंझुनू की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन हेतु शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/874 दिनांक 28-12-2025 के माध्यम से जिला झुंझुनू की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन बाबत पूर्व में जारी अधिसूचनाओं में लिपकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने के कारण एवं प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात संशोधन एवं शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
क्रमांक एवं दिनांक: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/874, दिनांक 28-12-2025
संबंधित जिला: झुंझुनू
उद्देश्य: ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों के पुनर्गठन एवं पुनर्सीमांकन संबंधी पूर्व प्रकाशन में लिपकीय त्रुटियों का संशोधन।
विविध ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों (जैसे उदयपुरवाटी, अलसीसर, झुंझुनू, चिड़ावा, मंडावा, सिंहाना, पिलानी, बुहाना, खेतड़ी, बबाई, टोडीगुढ़ा आदि) के संबंध में कॉलम संख्या 6 के पूर्व प्रकाशित विवरण को कॉलम संख्या 7 के संशोधित विवरण के अनुसार पढ़ा जाए।
झालावाड़ जिला ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन संबंधी शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंचा/2024/877 दिनांक 28-12-2025 के माध्यम से जिला झालावाड़ की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन के संबंध में शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु
मूल अधिसूचना: विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंचा/2024/791 दिनांक 20.11.2025 एवं दिनांक 21.11.2025 को राजस्थान राजपत्र विशेषांक भाग 6(ग) में प्रकाशित हुई थी।
शुद्धि का कारण: पूर्व प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने की वजह से व प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात यह संशोधन किया गया है।
संशोधित विवरण: पिड़ावा मुख्यालय सुनेल पंचायत समिति के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों के विवरण में कॉलम संख्या 6 के स्थान पर कॉलम संख्या 7 में अंकित विवरण को सही समझा जाए।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग - जालोर जिला पुनर्गठन संशोधन शुद्धि पत्र
अधिसूचना विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा आदेश क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवारा/2024/876, दिनांक 28-12-2025 के तहत जालोर जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन के संबंध में शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु
संदर्भित विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
आदेश दिनांक: 28-12-2025।
मूल अधिसूचनाएं: विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पुनर्गठन/विधि/पंवारा/2025/790 दिनांक 20.11.2025 एवं संख्या एफ.15(39)पुनर्गठन/विधि/पंवारा/2025/831 दिनांक 21.11.2025।
कारण: राजस्थान राजपत्र विशेषांक भाग 6(ग) दिनांक 21.11.2025 एवं 24.11.2025 में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने की वजह से और प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात यह संशोधन शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
प्रभावित क्षेत्र: जालोर जिले के अंतर्गत आने वाली विभिन्न ग्राम पंचायतें और पंचायत समितियां (जैसे आहोर, भीनमाल, रानीवाड़ा, चितलवाना, सांचौर, जालोर, भाद्रजून, जसवंतपुरा, सरनाऊ, झाब)।
विस्तृत विवरण के लिए संलग्न आधिकारिक दस्तावेज देखें।
जैसलमेर जिला: ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सिमांकन के संबंध में शुद्धि पत्र
जैसलमेर जिले के पुनर्गठन और पुनर्सिमांकन से संबंधित शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवरे/2024/875 (दिनांक 28-12-2025) के माध्यम से जिला जैसलमेर की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्सिमांकन और नवसृजन के संबंध में पूर्व में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपकीय त्रुटियों को सुधारने हेतु शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
संदर्भित पूर्व अधिसूचनाएं: विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवरे/2024/789 दिनांक 20.11.2025 एवं संख्या एफ.15(39)पंरा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/830 दिनांक 21.11.2025।
कारण: 21.11.2025 एवं 24.11.2025 को राजस्थान राजपत्र विशेष अंक भाग 6(ग) में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने के कारण प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात यह संशोधन किया गया है।
विवरण: जारी किए गए शुद्धि पत्र में ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों के कॉलम में पूर्व प्रकाशित विवरण के स्थान पर संशोधित विवरण को सही समझा पढ़ने के निर्देश दिए गए हैं।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है।
जयपुर जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन संबंधी शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जयपुर जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन के संबंध में दिनांक 28-12-2025 को शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य विवरण:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
क्रमांक: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/ंपरा/2024/874
दिनांक: 28-12-2025
पार्श्वभूमि: पूर्व में जारी विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/ंपरा/2024/788 दिनांक 20.11.2025 एवं संख्या एफ.15(39)ंपरा/पेंचायत समिति गठन/2025/829 दिनांक 21.11.2025 में लिपकीय त्रुटि/गलत प्रकाशन होने की वजह से तथा प्राप्त आवेदनों के निस्तारण पश्चात् यह शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
विशेष निर्देश: नीचे दिए गए कॉलम संख्या 6 में अंकित विवरण के स्थान पर कॉलम 7 में अंकित विवरण को सही समझ कर पढ़ा जाए। इसमें फागी, चाकसू, कोटखावदा, जोबनेर, गोविन्दगढ़, शाहपुरा, माधोराजपुरा, किशनगढ़ रेनवाल, आंधी, जमवारामगढ़, दूदू, सांभरलेक, चौमूं, तूंगा, बस्सी आदि पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के विवरण में संशोधन किया गया है।
जिला हनुमानगढ़ की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन संबंधी शुद्धि पत्र अधिसूचना दिनांक 28-12-2025
अधिसूचना विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंचा/2024/873 दिनांक 28-12-2025 के माध्यम से जिला हनुमानगढ़ की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन के संबंध में पूर्व में जारी अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने के कारण संशोधन हेतु शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
दिनांक: 28-12-2025
विषय: जिला हनुमानगढ़ की ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन संबंधी पूर्व प्रकाशन में लिपिकीय त्रुटियों का संशोधन।
विवरण: पीलीबंगा, भादरा, संगरिया, हनुमानगढ़, टिब्बी, रावतसर, पल्लू और नोहर सहित विभिन्न पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायतों एवं राजस्व क्षेत्रों से संबंधित विवरण को कॉलम संख्या 6 (पूर्व प्रकाशित विवरण) के स्थान पर कॉलम संख्या 7 (संशोधित विवरण) के अनुसार पढ़ने हेतु संशोधित किया गया है।
संबंधित ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के उपयोगकर्ता और अधिकारी इस शुद्धि पत्र के अनुसार अपने अभिलेखों में सुधार कर सकते हैं।
डूंगरपुर जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन के संबंध में शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवारा/2024/87/ दिनांक 28-12-2025 के माध्यम से जिला डूंगरपुर की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्सीमांकन और नवसृजन से संबंधित पूर्व में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने के कारण यह संशोधन शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
संदर्भित पूर्व अधिसूचनाएं: क्रमांक एफ.15(39)पंवारा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/826 दिनांक 20.11.2025 एवं संख्या 827 दिनांक 21.11.2025।
संशोधन का कारण: राजस्थान राजपत्र विशेषांक भाग 6(ग) में 21.11.2025 एवं 24.11.2025 को प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटियों और प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण के पश्चात यह संशोधन किया गया है।
विवरण: ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों हेतु जारी सूचियों में कॉलम संख्या 6 में अंकित विवरण के स्थान पर कॉलम संख्या 7 में अंकित विवरण को सही पढ़ा जाए।
विस्तृत जानकारी के लिए आधिकारिक प्रपत्र और संबंधित जिले की सूचियों का अवलोकन करें।
धौलपुर जिले के ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन बाबत शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), जयपुर द्वारा जारी अधिसूचना
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा धौलपुर जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन के संबंध में दिनांक 28-12-2025 को शुद्धि पत्र जारी किया गया है। इसका आदेश क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंचा/2024/869 है।
यह शुद्धि पत्र पूर्व में राजस्थान राजपत्र विशेष अंक भाग 6(ग) में प्रकाशित अधिसूचनाओं (क्रमांक एफ.15(39)पुनर्गठन/विधि/पंचा/2024/783 दिनांक 20.11.2025 एवं संख्या एफ.15(39)पुनर्गठन/विधि/पंचा/2025/824 दिनांक 21.11.2025) में लिपिकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने की वजह से और प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण के पश्चात जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
संशोधन का उद्देश्य: राजपत्र में हुए मुद्रण या लिपिकीय त्रुटियों को सुधारना और प्राप्त अभ्यावेदनों का निस्तारण करना।
प्रभावित क्षेत्र: धौलपुर जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतें और पंचायत समितियां (जैसे राजाखेड़ा, सैपऊ, सरमथुरा, बसेड़ी, बाड़ी आदि)।
निर्देश: कॉलम 6 में अंकित विवरण के स्थान पर कॉलम 7 में अंकित विवरण को सही समझा पढ़ा जाए।
जिला डीग में ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन संबंधी शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), जयपुर द्वारा दिनांक 28-12-2025 को एक शुद्धि पत्र (क्रमांक: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/868) जारी किया गया है। यह आदेश जिला डीग की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन के संबंध में पूर्व में जारी अधिसूचनाओं में लिपकीय त्रुटिवश हुए गलत प्रकाशन को सुधारने के लिए जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
आदेश दिनांक: 28-12-2025।
विषय: जिला डीग की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन से संबंधित पूर्व अधिसूचनाओं में संशोधन।
विवरण: पूर्व प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपकीय त्रुटियों के कारण, प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात अब कॉलम संख्या 6 में अंकित विवरण के स्थान पर कॉलम संख्या 7 में अंकित विवरण को सही पढ़ा जाएगा।
यह संशोधन ग्राम पंचायतों तथा पंचायत समितियों दोनों के लिए जारी सूचियों पर लागू होता है।
संबंधित उपयोगकर्ता और अधिकारी विस्तृत जानकारी के लिए मूल अधिसूचना देख सकते हैं।
डीडवाना कुचामन ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन संबंध में शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा जारी संशोधन सूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 28-12-2025 को एक शुद्धि पत्र (क्रमांक: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवारा/2024/870) जारी किया गया है। यह आदेश डीडवाना कुचामन जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन से संबंधित पूर्व में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटियों के सुधार के संबंध में है।
मुख्य विवरण
विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवारा/2024/784 (दिनांक 20.11.2025) एवं एफ.15(39)विधि/पंचायत गठन/2025/825 (दिनांक 21.11.2025) तथा राजस्थान राजपत्र विशेष अंक भाग 6(ग) में दिनांक 21.11.2025 एवं 24.11.2025 को प्रकाशित सूचनाओं में हुई लिपिकीय त्रुटियों को आपत्तियों/आवेदन पत्रों के निस्तारण के पश्चात संशोधित किया गया है।
संशोधित विवरण के अंतर्गत विभिन्न पंचायत समितियों (जैसे नावा, परबतसर, मौलासर, डीडवाना, कुचामन सिटी और मकराना) के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों के नामों और विवरणों में सुधार किया गया है, जिसे संलग्न सूचियों के अनुसार पढ़ा जाए।
जिला दौसा की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन संबंधी शुद्धि पत्र
अति आवश्यक सूचना - जिला दौसा
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जिला दौसा की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसर्जन के संबंध में अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/867, दिनांक 28-12-2025 जारी की गई है।
यह शुद्धि पत्र विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंव्रा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/822 दिनांक 21.11.2025 एवं अन्य पूर्व प्रकाशित अधिसूचनाओं में राजपत्र विशेष अंक भाग 6(ग) में लिपिकी त्रुटि व गलत प्रकाशन होने तथा प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण के पश्चात जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
दिनांक: 28-12-2025
क्रमांक: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/867
विषय: जिला दौसा की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन से संबंधित पूर्व प्रकाशित विवरण में संशोधन/शुद्धि।
जारीकर्ता: डॉ० जोगा राम, शासन सचिव (राजपाल की आज्ञा से)।
संबंधित ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों के उपयोगकर्ता एवं अधिकारी इस अधिसूचना के अनुसार अपने रिकॉर्ड और विवरण को सही रूप में पढ़ व समझ सकते हैं।
राजस्थान सरकार: जिला चूरू की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन संबंधी शुद्धि पत्र
जिला चूरू ग्राम पंचायत एवं पंचायत समिति पुनर्गठन शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा आदेश क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/866 दिनांक 28-12-2025 के तहत चूरू जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन के संबंध में शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
यह शुद्धि पत्र विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंव्रा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/821 दिनांक 21.11.2025 एवं अन्य पूर्व प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटियों के कारण गलत प्रकाशन होने तथा प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण के पश्चात जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
संबंधित विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
आदेश दिनांक: 28-12-2025
विषय: जिला चूरू की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन से संबंधित शुद्धि पत्र
कवर किए गए क्षेत्र: चूरू, सुजानगढ़, सरदारशहर, राजगढ़, सिद्धमुख, भादरा और चांदगोठी (मुख्यालय राजगढ़) आदि पंचायत समितियां।
दस्तावेज में दी गई तालिकाओं के अनुसार ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों के विवरण में कॉलम 6 के स्थान पर कॉलम 7 में अंकित विवरण को सही समझा जाए।
राजस्थान सरकार - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा चित्तौड़गढ़ जिले के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन के संबंध में शुद्धि पत्र
ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन संबंधी शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा आदेश क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/865, दिनांक 28-12-2025 के तहत चित्तौड़गढ़ जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन के संबंध में पूर्व में जारी अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटियों एवं प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण के पश्चात संशोधन शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
पत्र क्रमांक: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/865
दिनांक: 28-12-2025
संबंधित जिला: चित्तौड़गढ़
विवरण: पूर्व प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने की वजह से और प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण के बाद ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों (जैसे गंगरार, चित्तौड़गढ़, बूँसू, भदेसर, कपासन आदि) से संबंधित विवरणों में संशोधन, नाम सुधार तथा विलोपन किया गया है।
संसोधित विवरण के अनुसार ही संबंधित प्रविष्टियों को सही समझा और पढ़ा जाए।
बूंदी जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन संबंधी संशोधन शुद्धि पत्र
अधिसूचना विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव/2024/864 दिनांक 28-12-2025 के माध्यम से जिला बूंदी की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन के संबंध में पूर्व में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटियों के सुधार हेतु शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु
यह शुद्धि पत्र निम्नलिखित विभागीय अधिसूचनाओं में संशोधन के लिए है:
अधिसूचना क्रमांक एफ.15(39)पंव/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/818 दिनांक 20.11.2025
अधिसूचना क्रमांक एफ.15(39)पंव/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/819 दिनांक 21.11.2025
राजस्थान राजपत्र विशेष अंक भाग 6(ग) दिनांक 21.11.2025 एवं 24.11.2025 में प्रकाशित विवरण
प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण और लिपिकीय त्रुटियों के कारण ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों (जैसे बूंदी, हिण्डोली, केशोरायपाटन, नैनवां, तालेड़ा, खटकड़ और लाखेरी) से संबंधित विवरणों में संशोधन किया गया है, जिसके तहत कॉलम संख्या 6 के स्थान पर कॉलम संख्या 7 के विवरण को सही पढ़ा जाए।
बीकानेर जिला की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमन संबंधी शुद्धि पत्र आदेश
अधिसूचना विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/863 दिनांक 28-12-2025 के माध्यम से जिला बीकानेर की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमन/नवसृजन के संबंध में पूर्व में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटियों के सुधार हेतु शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
आदेश क्रमांक एवं दिनांक: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/863, दिनांक 28-12-2025।
संशोधन का कारण: दिनांक 21.11.2025 एवं 24.11.2025 को राजस्थान राजपत्र विशेष अंक भाग 6(ग) में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटि व प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात।
संबंधित क्षेत्र: बीकानेर जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतें (जैसे बज्जू खालसा, हदां, खाजूवाला, कोलायत) और पंचायत समितियां।
नोट: कॉलम संख्या 6 में अंकित विवरण के स्थान पर कॉलम 7 में अंकित विवरण को सही समझ कर पढ़ा जाए।
भीलवाड़ा जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन संबंधी शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/862 दिनांक 28-12-2025 के तहत भीलवाड़ा जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन के संबंध में शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
यह शुद्धि पत्र विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/776 दिनांक 20.11.2025 एवं संख्या एफ.15(39)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2025/817 दिनांक 21.11.2025 तथा 24.11.2025 को राजस्थान राजपत्र विशेष अंक भाग 6(ग) में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने की वजह से प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना में दी गई सूचियों के अनुसार संबंधित कॉलम में पूर्व प्रकाशित विवरण के स्थान पर संशोधित विवरण को सही समझा कर पढ़ा जाए।
यह संशोधन भीलवाड़ा जिले की विभिन्न पंचायत समितियों (जैसे रायपुर, जहाजपुर, शाहपुरा, करेड़ा, आसींद, हुरड़ा, मांडलगढ़, बनेड़ा, कोटड़ी, सुवाणा, फूलिया कलां आदि) के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों और उनके विवरण से संबंधित है।
यह आदेश डॉ. जोगा राम, शासन सचिव, राजस्थान सरकार द्वारा राज्यपाल की आज्ञा से जारी किया गया है।
जिला भरतपुर की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सիमांकन संबंधी शुद्धि पत्र
राजस्थान सरकार ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा शुद्धि पत्र
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/861, दिनांक 28-12-2025 के माध्यम से जिला भरतपुर की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्सिमांंकन तथा नवसृजन के संबंध में पूर्व में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपकीय त्रुटियों के सुधार हेतु शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य विवरण
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
दिनांक: 28-12-2025
संदर्भित जिले: भरतपुर
उद्देश्य: पूर्व प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने तथा प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात विवरणों में संशोधन करना।
इस शुद्धि पत्र में भुसावर, उच्चैन, सेवर, बयाना और वैर पंचायत समितियों के अंतर्गत विभिन्न ग्राम पंचायतों के विवरणों (जैसे बाछरैन, सलेमपुर खुर्द, झारौटी, हींगोटा, ऊहलू, नंगला तुला, आदि) में आवश्यक संशोधन एवं विलोपन किए गए हैं। संबंधित उपयोगकर्ता और अधिकारी विस्तृत जानकारी के लिए आधिकारिक प्रपत्र देख सकते हैं।
ब्यावर जिला ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन बाबत शुद्धि पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा जयपुर, दिनांक 28-12-2025 को एक शुद्धि पत्र जारी किया गया है। इसका क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/860 है।
यह शुद्धि पत्र विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पुनर्गठन/विधि/पंरा/पंचायत समिति गठन/2025/774 दिनांक 20.11.2025 एवं संख्या एफ.15(39)पुनर्गठन/विधि/पंरा/पंचायत समिति गठन/2025/815 दिनांक 21.11.2025 के संदर्भ में है, जो जिला ब्यावर की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन बाबत दिनांक 21.11.2025 एवं 24.11.2025 को राजस्थान राजपत्र विशेषनांक भाग 6(ग) में प्रकाशित हुई थीं।
मुख्य बिंदु
कारण: पूर्व में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने की वजह से व प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात यह संशोधन किया गया है।
संशोधन विवरण: ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों (जैसे रायपुर, जैतारण, जवाजा, रास) से संबंधित प्रविष्टियों, कॉलम संख्या और विवरण में सुधार किया गया है।
निर्देश: नीचे दिए गए कॉलम संख्या 6 में अंकित विवरण के स्थान पर कॉलम 7 में अंकित विवरण को सही समझ कर पढ़ा जाए।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है तथा इसकी प्रतिलिपि आवश्यक सूचनार्थ विभिन्न संबंधित अधिकारियों को प्रेषित की गई है।
बाड़मेर जिले में ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन संबंधी शुद्धि पत्र
राजस्थान सरकार ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग)
यह अधिसूचना ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा जारी की गई है। इसके माध्यम से बाड़मेर जिले की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन के संबंध में दिनांक 21.11.2025 को राजस्थान राजपत्र विशेषांक भाग 6(ग) में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपकीय त्रुटियों के कारण हुए गलत प्रकाशन को सुधारने हेतु शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंचा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/814 दिनांक 20.11.2025 एवं अन्य संबंधित अधिसूचनाओं में संशोधन किया गया है।
प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण के पश्चात, राजपत्र में प्रकाशित विवरण में कॉलम 6 के स्थान पर कॉलम 7 में अंकित विवरण को सही माना जाएगा।
ग्राम पंचायतों हेतु बाड़मेर, धनाऊ, धोरीमन्ना, गडरारोड, गुड़ामालानी, सेड़वा, फागलिया, चौहटन, आड़ेल, शिव, रामसर, विशायला, डूंगरो का तला आदि पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाले गांवों और ढाणियों के नामों में संशोधन, विलोपन या शुद्धि की गई है।
पंचायत समितियों हेतु भी संबंधित विवरणों को संशोधित किया गया है।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग - Baran Gram Panchayat & Panchayat Samiti Correction Notification
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार
यह अधिसूचना ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा जिला बारां की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसर्जन के संबंध में पूर्व में जारी अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटि सुधार हेतु जारी की गई शुद्धि पत्र है।
प्रमुख बिंदु:
पूर्व में जारी विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पंव्रा/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/813 दिनांक 20.11.2025 एवं अन्य संबंधित राजपत्र प्रकाशनों में हुई लिपिकीय त्रुटियों का निस्तारण किया गया है।
अन्ता, अट्रू, छबड़ा, छीपाबड़ोद पंचायत समितियों के अंतर्गत ग्राम पंचायतों के विवरण में संशोधन किया गया है।
नाहरगढ़ पंचायत समिति के अंतर्गत भी विवरण में संशोधन किया गया है।
संशोधित विवरण के अनुसार संबंधित कॉलम में पूर्व प्रकाशित विवरण के स्थान पर अद्यतन विवरण पढ़ा जाए।
बांसवाड़ा जिला ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन संबंधी शुद्धि पत्र आदेश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग राजस्थान सरकार अधिसूचना
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंचा/2024/859, दिनांक 28-12-2025 के तहत बांसवाड़ा जिले के ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन बाबत जारी पूर्व अधिसूचनाओं में लिपकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने के कारण यह शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार।
दिनांक: 28-12-2025।
संदर्भ आदेश: विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(39)पुनर्गठन/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/812 दिनांक 21.11.2025 एवं जिला बांसवाड़ा की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन बाबत दिनांक 21.11.2025 व 24.11.2025 के राजस्थान राजपत्र विशेषांक भाग 6(ग)।
विवरण: राजपत्र में हुई लिपकीय त्रुटियों और प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों हेतु कॉलम संख्या 6 में अंकित विवरण के स्थान पर कॉलम संख्या 7 में अंकित विवरण को सही समझा कर पढ़ने हेतु निर्देशित किया गया है।
संबंधित पंचायत समितियों में बांसवाड़ा, तलवाड़ा, छोटी सरवन, गढ़ी, कुशलगढ़, घाटोल और सरेड़ी बड़ी के विभिन्न विवरणों में संशोधन किया गया है।
राजस्थान सरकार - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग: जिला बालोतरा की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन बाबत शुद्धि पत्र (अधिसूचना क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/856)
अधिसूचना एवं शुद्धि पत्र का विवरण
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), जयपुर द्वारा दिनांक 28.12.2025 को एक महत्वपूर्ण शुद्धि पत्र (अधिसूचना क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/856) जारी किया गया है। यह आदेश जिला बालोतरा की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्सीमांकन और नवसृजन से संबंधित है।
मुख्य बिंदु
संदर्भित पूर्व अधिसूचनाएं: विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/770 दिनांक 20.11.2025 एवं संख्या एफ.15(39)पुनर्गठन/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/811 दिनांक 21.11.2025 एवं 24.11.2025।
संशोधन का कारण: राजस्थान राजपत्र विशेषांक भाग 6(ग) में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपकीय त्रुटिवश गलत प्रकाशन होने के कारण एवं प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण पश्चात यह संशोधन किया गया है।
संशोधित विवरण: ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों हेतु जारी सूचियों में कॉलम 6 के स्थान पर कॉलम 7 में अंकित विवरण को सही समझा पढ़ने के निर्देश दिए गए हैं, जिसमें सिवाना, गिड़ा, कल्याणपुर, पायला कलां, बालोतरा, समदड़ी, बायतु एवं पाटोदी से संबंधित संशोधन शामिल हैं।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगाराम, शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है तथा संबंधित अधिकारियों को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित किया गया है।
राजस्थान सरकार: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग - जिला अलवर के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन हेतु शुद्धि पत्र
अधिसूचना एवं शुद्धि पत्र विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/855 दिनांक 28.12.2025 के माध्यम से जिला अलवर की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्सीमांकन और नवसृजन से संबंधित पूर्व में प्रकाशित अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटि के कारण गलत प्रकाशन को संशोधित किया गया है।
मुख्य बिंदु
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
आदेश क्रमांक: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंव्रा/2024/855
दिनांक: 28/12/2025
जिला: अलवर
उद्देश्य: पूर्व में दिनांक 21.11.2025 एवं 26.11.2025 को राजस्थान राजपत्र में प्रकाशित विवरणों में लिपिकीय त्रुटियों का सुधार।
इस शुद्धि पत्र के तहत ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों (जैसे रामगढ़, कठूमर, रैणी, भोनखर, खेड़ली-सोंखर आदि) से संबंधित कॉलम के विवरणों को संशोधित किया गया है, जिसके तहत पूर्व प्रकाशित विवरण के स्थान पर सही विवरण को पढ़ा जाए।
राजस्थान सरकार - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग: जिला अजमेर शुद्धि पत्र
ग्राम पंचायत पुनर्गठन संशोधन शुद्धि पत्र - जिला अजमेर
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/854 दिनांक 28.12.2025 के संदर्भ में जिला अजमेर की ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनर्सीमांकन/नवसृजन से संबंधित पूर्व में प्रकाशित अधिसूचना में लिपकीय त्रुटि सुधार हेतु शुद्धि पत्र जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
अधिसूचना क्रमांक एवं दिनांक: एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/854, दिनांक 28.12.2025
संबंधित जिला: अजमेर
संशोधन विवरण: पंचायत समिति सिलोरा के अंतर्गत पूर्व में प्रकाशित विवरण (कॉलम 6) में अंकित 'चुन्दड़ी' के स्थान पर संशोधित विवरण (कॉलम 7) में 'बड़गांव' पढ़ा जाए।
विकसित भारत—गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण): VB-G RAM G अधिनियम, 2025 का प्रकाशन
विस्तृत परिचय और उद्देश्य
भारत के राजपत्र (असाधारण) में प्रकाशित द विक्सित भारत—गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण): VB—G RAM G (विकसित भारत—जी राम जी) अधिनियम, 2025 (अधिनियम संख्या 36, 2025) ग्रामीण विकास के ढांचे को राष्ट्रीय विजन 'Viksit Bharat @2047' के अनुरूप स्थापित करने के लिए बनाया गया है। इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक ग्रामीण परिवार, जिसके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक श्रम करने के लिए स्वेच्छा से आगे आते हैं, को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में कम से कम एक सौ पच्चीस दिन (125 days) के मजदूरी रोजगार की कानूनी गारंटी प्रदान करना है।
प्रमुख विशेषताएं एवं बिंदु
रोजगार की गारंटी: हर ग्रामीण परिवार को वित्तीय वर्ष में कम से कम 125 दिनों का वैधानिक मजदूरी रोजगार।
कार्यान्वयन फ्रेमवर्क: इसे केंद्र प्रायोजित योजना (Centrally Sponsored Scheme) के रूप में लागू किया जाएगा।
फंड शेयरिंग पैटर्न: उत्तर पूर्वी राज्यों, हिमालयी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश (उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर) के लिए 90:10 तथा अन्य सभी राज्यों और विधायिका वाले केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 60:40 अनुपात होगा।
विकसित ग्राम पंचायत योजनाएं (VGPPs): कार्यों की शुरुआत और प्राथमिकता 'Viksit Gram Panchayat Plans' के माध्यम से होगी, जिसे पीएम गति शक्ति (PM Gati Shakti) और जीआईएस (GIS) उपकरणों के साथ एकीकृत किया जाएगा।
कार्यों के चार विषयगत डोमेन (Thematic Domains):(अ) जल सुरक्षा से जुड़े कार्य, (ब) कोर ग्रामीण बुनियादी ढांचा, (स) आजीविका से जुड़ा बुनियादी ढांचा, और (द) अत्यधिक मौसम की घटनाओं से निपटने के लिए विशेष कार्य।
ग्राम पंचायत की भूमिका: ग्राम पंचायतें परिवारों का पंजीकरण करेंगी, ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड (Gramin Rozgar Guarantee Card) जारी करेंगी और 'विकसित ग्राम पंचायत योजनाएं' तैयार करेंगी। कार्यक्रम अधिकारी (Programme Officer) यह सुनिश्चित करेंगे कि कम से कम 50 प्रतिशत लागत के कार्य ग्राम पंचायतों के माध्यम से क्रियान्वित हों।
ठेकेदारों पर रोक: अधिनियम के तहत किसी भी कार्य या घटक के निष्पादन के लिए किसी ठेकेदार को नियुक्त नहीं किया जाएगा। सभी कार्य सीधे क्रियान्वयन एजेंसियों द्वारा कराए जाएंगे।
बेरोजगारी भत्ता: आवेदन के 15 दिनों के भीतर रोजगार उपलब्ध न कराए जाने पर नियमानुसार दैनिक बेरोजगारी भत्ते का प्रावधान किया गया है।
पारदर्शिता और जवाबदेही: बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण, ई-मस्टर रोल, कार्यस्थल पर 'जनता बोर्ड' का प्रदर्शन, और ग्राम सभा द्वारा हर छह महीने में कम से कम एक बार अनिवार्य सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit)।
MGNREGA Case Record/ Work File: Indicative Framework
MGNREGA Case Record / Work File
ग्रामीण विकास मंत्रालय (Ministry of Rural Development, Government of India) द्वारा मनरेगा (MGNREGS) के अंतर्गत प्रत्येक प्रोजेक्ट या कार्य के लिए केस रिकॉर्ड / वर्क फाइल (Case Record / Work File) तैयार करने हेतु एक इंडिकेटिव फ्रेमवर्क जारी किया गया है।
यह शारीरिक फाइल (physical file) प्रत्येक कार्य के क्रियान्वयन, निगरानी और ऑडिट के लिए महत्वपूर्ण है ताकि देश भर में एकरूपता लाई जा सके।
फाइल में शामिल किए जाने वाले मुख्य दस्तावेज और अनुभाग:
कवर पेज और चेकलिस्ट: कार्य का सारांश और दस्तावेजों की अनुक्रमित सूची (Annexure I & II)।
प्रशासनिक और तकनीकी दस्तावेज: वार्षिक कार्य योजना (Annual Action Plan), तकनीकी अनुमान (Technical Estimate & Design), तकनीकी स्वीकृति (Technical Sanction) और प्रशासनिक/वित्तीय स्वीकृति।
मांग और कार्य आवंटन: व्यक्तिगत या समूह आवेदन फॉर्म (Annexure III A & B) और कार्य आवंटन पत्र (Work Allocation Form - Annexure IV)।
क्रियान्वयन से जुड़े रिकॉर्ड: ई-मस्टर रोल (e-Muster Roll), माप पुस्तिका (Measurement Book / e-MB), सामग्री खरीद दस्तावेज, मजदूरी सूची (Wage List), और भुगतान एफटीओ (FTOs)।
अन्य जरूरी दस्तावेज: रॉयल्टी रसीदें, कार्य के तीनों चरणों (शुरुआत, दौरान, पूर्णता) की तस्वीरें और जियो-टैग की गई तस्वीरें, कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र (Work Completion Certificate - Annexure V), मस्टर रोल मूवमेंट स्लिप (Annexure VI) और सोशल ऑडिट रिपोर्ट।
यह फ्रेमवर्क ग्राम पंचायत स्तर पर दस्तावेजों के बेहतर रखरखाव और पारदर्शिता के लिए उपयोगी है।
मनरेगा के अंतर्गत नागरिक सूचना बोर्ड (CIB) और वॉल राइटिंग हेतु दिशा-निर्देश
महात्मा गांधी नरेगा (MGNREGA) - नागरिक सूचना बोर्ड और वॉल राइटिंग रूपरेखा
भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (Mahatma Gandhi National Rural Employment Act, 2005) के अंतर्गत कार्यस्थलों पर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए नागरिक सूचना बोर्ड (Citizen Information Boards - CIB) और वॉल राइटिंग का सुझाव फ्रेमवर्क जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
पार्श्वभूमि और उद्देश्य: अधिनियम की अनुसूची-1 के पैरा 25(a) और मास्टर सर्कुलर के अनुसार, जनता को बुनियादी जानकारी प्रदान करने के लिए 'जनता सूचना प्रणाली' का उपयोग किया जाता है।
नागरिक सूचना बोर्ड (CIB): प्रत्येक कार्यस्थल पर CIB लगाना अनिवार्य है। व्यक्तिगत कार्यों के लिए बोर्ड का आकार कम से कम 0.6 मीटर x 0.9 मीटर और सामुदायिक कार्यों के लिए कम से कम 0.9 मीटर x 1.2 मीटर होना चाहिए।
लागत सीमा: व्यक्तिगत कार्य के लिए CIB की लागत 3,000 रुपये और सामुदायिक कार्य के लिए 5,000 रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए।
सामग्री और लेआउट: बोर्ड पर कार्य का नाम, कार्य ID, प्राक्कलन राशि, प्रारंभ और समाप्ति तिथि, मजदूरी और सामग्री घटक, और लोकपाल/ओम्बुड्समैन का संपर्क विवरण क्षेत्रीय भाषा में प्रदर्शित होना चाहिए।
वॉल राइटिंग: पंचायत भवन, आंगनवाड़ी केंद्रों, और अन्य प्रमुख सार्वजनिक स्थानों की दीवारों पर 'मेरा गांव, मेरा मनरेगा' और अन्य जागरूकता संदेश पेंट किए जाने चाहिए, जिसकी न्यूनतम चौड़ाई 2 मीटर और ऊंचाई 1.2 मीटर सुझाई गई है।
क्रियान्वयन जिम्मेदारी: ग्राम रोजगार सहायक (GRS) और तकनीकी सहायक (Technical Assistant) कार्यस्थल पर बोर्ड की स्थापना और गुणवत्ता के लिए जिम्मेदार हैं।
महात्मा गांधी नरेगा (MGNREGS) अनुमेय कार्य सूची (Schedule 1 of MGNREG Act 2005)
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम 2005 - अनुमेय कार्य सूची
यह दस्तावेज़ ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी महात्मा गांधी नरेगा (MGNREGS) के अंतर्गत अनुमेय कार्यों की सूची (Schedule 1 of MGNREG Act 2005) को दर्शाता है। इस सूची में ग्राम पंचायत और पंचायती राज स्तर पर कराए जाने वाले विभिन्न प्रकार के कार्यों का विवरण दिया गया है।
प्रमुख कार्य श्रेणियां और विवरण:
व्यक्तिगत, सामुदायिक और समूह स्तर के कार्य: इसमें पीएमएवाई-जी (PMAY-G) आवास निर्माण, आंगनवाड़ी भवन, ग्राम पंचायत/पंचायत भवन, खाद्यान्न भंडारण, किचन शेड और भारत निर्माण सेवा केंद्र का निर्माण एवं मरम्मत शामिल है।
प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन (NRM) और जल संरक्षण: जल संभरण (SWC), सिंचाई (Irrigation), भू-जल पुनर्भरण (GWR), भूमि विकास (LR), और जल निकासी से संबंधित कार्य।
कृषि एवं संबद्ध कार्य (Agri & Allied): कृषि उत्पादन भंडारण, वर्मी कम्पोस्ट, नाडेप कम्पोस्ट, पशु शेड (गाय, बकरी, सुअर, मुर्गी), और अजोला खेती के लिए बुनियादी ढांचा।
वृक्षारोपण और वानिकी (PLNT): तटबंध वृक्षारोपण, सीमा रेखा वृक्षारोपण, और उद्यानिकी (Horticulture) से जुड़े कार्य।
ग्रामीण बुनियादी ढांचा: ग्रामीण हाट, खेल का मैदान, चक्रवात आश्रय (Cyclone shelter), और सड़क व जल निकासी संरचनाएं।
यह सूची पंचायती राज संस्थाओं और ग्राम पंचायतों को महात्मा गांधी नरेगा योजना के तहत सही कार्यों के चयन और क्रियान्वयन में सहायता प्रदान करती है।
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 (मनरेगा) संक्षिप्त विवरण
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 (मनरेगा)
यह दस्तावेज़ The Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act, 2005 (No. 42 of 2005) का संशोधित संस्करण है (20 अक्टूबर, 2010 तक संशोधित)। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब परिवारों को वित्तीय वर्ष में कम से कम सौ दिनों की गारंटीकृत मजदूरी रोजगार प्रदान करके आजीविका सुरक्षा को बढ़ाना है।
मुख्य बिंदु और प्रावधान
रोजगार की गारंटी: हर ग्रामीण परिवार के वयस्क सदस्य, जो अकुशल शारीरिक कार्य करने के इच्छुक हैं, उन्हें वित्तीय वर्ष में कम से कम एक सौ दिन का रोजगार दिया जाता है।
बेरोजगारी भत्ता: यदि आवेदन प्राप्ति के पंद्रह दिनों के भीतर रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो आवेदक दैनिक बेरोजगारी भत्ते के हकदार होंगे।
कार्यान्वयन और एजेंसियां: ग्राम पंचायत, पंचायत समिति (intermediate level), जिला पंचायत और जिला कार्यक्रम समन्वयक (District Programme Coordinator) इस योजना के क्रियान्वयन और निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit): योजना के तहत कराए जाने वाले कार्यों का सामाजिक अंकेक्षण ग्राम सभा द्वारा कम से कम हर छह महीने में एक बार किया जाना अनिवार्य है।
जॉब कार्ड: पंजीकृत परिवारों के वयस्क सदस्यों के लिए जॉब कार्ड जारी किया जाता है, जिसमें कार्य मांग, कार्य आवंटन और मजदूरी भुगतान का पूरा विवरण दर्ज होता है।
मजदूरी और सामग्री का अनुपात: ग्राम पंचायत स्तर पर कार्यों के निष्पादन में श्रम और सामग्री का अनुपात 60:40 बनाए रखा जाता है।
बाड़मेर जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन - अधिसूचना 21 नवंबर 2025
बाड़मेर जिले में पंचायत समितियों का पुनर्गठन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा बाड़मेर जिले की पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्रसीमांकन और नवसृजन से संबंधित अधिसूचना जारी कर दी गई है। यह अधिसूचना दिनांक 21-11-2025 को जारी की गई है, जिसका पत्र क्रमांक एफ.15(39)पंवरे/विधि/पंचायत समिति गठन/2025/815 है।
मुख्य बिंदु:
विभागीय निर्देश: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-9, 10 एवं 101 में प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए जिला कलेक्टर द्वारा प्रस्ताव तैयार किए गए थे।
अनुमोदन पश्चात कार्रवाई: राज्य सरकार से अनुमोदन के पश्चात बाड़मेर जिले की पंचायत समितियों का पुनर्गठन और पुनर्रसीमांकन किया गया है।
चुनाव और कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में वर्णित पंचायत समितियों के चुनाव के पश्चात, उक्त जिले की विद्यमान वे पंचायत समितियां जो स्तंभ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से बंद हो जाएंगी और स्तंभ संख्या 4 में वर्णित पंचायत समितियों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
विस्तृत जानकारी और पंचायत समिति वार सम्मिलित ग्राम पंचायतों की सूची के लिए मूल अधिसूचना देखें।
डूंगरपुर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नए सृजन की अंतिम अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान राजपत्र (असाधारण) दिनांक 21 नवंबर, 2025 में डूंगरपुर जिले के संबंध में एक महत्वपूर्ण अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/785 (दिनांक 20 नवंबर, 2025) जारी की गई है।
यह अधिसूचना राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए तथा धारा-9, 10 एवं 101 के प्रावधानों के अंतर्गत जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार प्रस्तावों और आपत्तियों पर सुनवाई के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से जारी की गई है।
मुख्य बिंदु:
पुनर्गठित क्षेत्र: डूंगरपुर जिले की विभिन्न पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नए सृजन का कार्य पूरा कर लिया गया है।
अधिकारिता: अनुसूची के स्तम्भ 4 में यथानामित ग्राम पंचायतें संबंधित स्तम्भ 5 में वर्णित स्थानीय क्षेत्रों पर अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
कार्यकाल और प्रभाव: अनुसूची के स्तम्भ 4 में वर्णित नई/पुनर्गठित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, स्तम्भ 2 में दर्शित पुरानी विद्यमान ग्राम पंचायतें उस तारीख से अस्तित्व में नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
शामिल पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के तहत सागवाड़ा, गलियाकोट, पालेदवल, दोवड़ा, डूंगरपुर, झोंथरी, आसपुर, साबला, चिखली, सीमलवाड़ा, गामड़ी अहाडा और बिछीवाड़ा पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाले राजस्व ग्रामों और ग्राम पंचायतों का विवरण राजपत्र में प्रकाशित किया गया है।
विस्तृत विवरण एवं राजस्व ग्रामों की सूची के लिए कृपया संलग्न मूल राजपत्र अधिसूचना देखें।
कोटपूतली-बहरोड़ जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/797 (दिनांक 20 नवम्बर 2025) के अंतर्गत राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए कोटपूतली-बहरोड़ जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन एवं नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम व संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-9, 10, 101 एवं 98 के तहत यह कार्रवाई की गई है।
जिला कलेक्टर के प्रस्ताव: संबंधित जिला कलेक्टर द्वारा तैयार प्रस्तावों, सार्वजनिक अवलोकन, आपत्तियों के आमंत्रण तथा सुनवाई की प्रक्रिया के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से यह अधिसूचना जारी की गई है।
पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के दायरे में बानसूर, बहरोड़, कोटपूतली, नारायणपुर, नीमराना, पाटन और विराट नगर पंचायत समितियां शामिल हैं।
कार्यकाल की स्थिति: अनुसूची के स्तम्भ संख्या 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, उक्तानुसार जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो स्तम्भ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
राज्यपाल की आज्ञा से, डॉ. जोगा राम, शासन सचिव।
बारां जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन - अधिसूचना 2025
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग - अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा 98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, बारां जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन से संबंधित आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र (असाधारण) दिनांक 21 नवम्बर 2025 में प्रकाशित हुई है।
प्रमुख बिंदु
संबंधित विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
आदेश संख्या: संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/772, दिनांक 20 नवम्बर 2025।
कार्यान्वयन: जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार किए गए प्रस्तावों, आपत्तियों पर सुनवाई और राज्य सरकार के अनुमोदन के पश्चात बारां जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों और उनमें सम्मिलित राजस्व ग्रामों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, उक्त जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो स्तंभ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई वर्णित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
अधिक जानकारी के लिए कृपया मूल राजस्थान राजपत्र अधिसूचना देखें।
सवाई माधोपुर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/804 (दिनांक नवंबर 20, 2025) के माध्यम से सवाई माधोपुर जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन की आधिकारिक घोषणा की गई है।
यह कार्रवाई राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए तथा पूर्व अधिसूचना दिनांक 10.01.2025 के क्रम में जिला कलेक्टर द्वारा तैयार प्रस्तावों और आपत्तियों पर सुनवाई के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से की गई है।
मुख्य बिंदु:
सواسई माधोपुर जिला के अंतर्गत आने वाली पंचायत समितियों (जैसे बामनवास, बौंली, चौथ का बरवाड़ा, गंगापुरसिटी, खण्डार, मलारना डूंगर, सवाई माधोपुर आदि) में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन और नवसृजन किया गया है।
निसृत एवं पुनर्गठित ग्राम पंचायतें अनुसूची के स्तंभ-4 में वर्णित नामों से जानी जाएंगी तथा स्तंभ-5 में दर्शाए गए राजस्व ग्रामों पर अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
संबंधित पंचायत समितियों में नई पंचायतों के कार्यप्रारंभ के साथ ही पुरानी निर्धारित ग्राम पंचायतें अस्तित्व में नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी।
यह अधिसूचना राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी की गई है।
टोंक जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन एवं नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
टोंक जिले की ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन और पुनसीमांकन की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए टोंक जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन से संबंधित आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र (असाधारण) दिनांक 21 नवंबर, 2025 में प्रकाशित की गई है।
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
अधिकार क्षेत्र: टोंक जिले के अंतर्गत आने वाली विभिन्न पंचायत समितियां जैसे टोंक, निवाई, पीपलू, मालपुरा, टोडारायसिंह और उनियारा।
कार्यान्वयन प्रक्रिया: जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार किए गए प्रस्तावों एवं अभिशंषाओं के परीक्षण के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से टोंक जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
कार्यकाल और प्रभाव: अनुसूची के स्तम्भ संख्या 4 में वर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, उक्त जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो स्तम्भ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से ही विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
विस्तृत विवरण और ग्राम-वार सूची के लिए संलग्न आधिकारिक राजपत्र अधिसूचना देखें।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग - सलूंबर जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन एवं नवसृजन अधिसूचना
अधिसूचना विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/803 दिनांक 20 नवंबर 2025 के अंतर्गत, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए सलूंबर जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन एवं नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु
अधिनियम व निर्देश: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-9, 10 एवं 101 में वर्णित शक्तियों तथा विभागीय अधिसूचना दिनांक 10.01.2025 के तहत जिला कलेक्टर को प्रस्ताव तैयार करने, सार्वजनिक अवलोकन के लिए प्रसारित करने, आपत्तियां आमंत्रित करने और सुनवाई हेतु अधिकृत किया गया था।
राज्य सरकार का अनुमोदन: जिला कलेक्टरों द्वारा कार्यवाही किए जाने, प्रस्तावों एवं अभिशंषाओं का परीक्षण करने के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से सलूंबर जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन/पुनरसीमांकन/नवसृजन किया गया है।
शामिल पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के तहत पंचायत समिति झल्लारा, जयसमंद, लसाड़िया, सलूंबर, सराडा और सेमारी के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों एवं उनमें सम्मिलित राजस्व ग्रामों की सूची में परिवर्तन किया गया है।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, उस जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो स्तंभ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
कोटपूतली-बहरोड़ जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/797- दिनांक नवंबर 20, 2025 के माध्यम से कोटपूतली-बहरोड़ जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
प्रमुख बिंदु
अधिनियम व संदर्भ: यह कार्रवाई राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-9, 10, 98 एवं 101 के अंतर्गत जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार प्रस्तावों और आपत्तियों पर सुनवाई के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से की गई है।
अधिकारिता: अनुसूची के स्तम्भ 4 में यथानामित पुनर्गठित एवं नवसृजित ग्राम पंचायतें स्तम्भ 5 में वर्णित स्थानीय क्षेत्र एवं राजस्व ग्रामों के अनुसार अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
कार्यकाल और प्रभाव: अनुसूची के स्तम्भ 4 में वर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, स्तम्भ 2 में दर्शाई गई विद्यमान ग्राम पंचायतें उस तारीख से अस्तित्व में नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
संबंधित पंचायत समितियां
बानसूर
बहरोड़
कोटपूतली
नारायणपुर
नीमराना
पावटा
विराटनगर
विस्तृत राजस्व ग्रामों की सूची और विवरण के लिए राजस्थान राजपत्र (असाधारण) दिनांक 21 नवंबर 2025 (भाग 6-ग) का अवलोकन करें।
भरतपुर जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन अधिसूचना
भरतपुर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन एवं नवसृजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए भरतपुर जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है। यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र (अतिरिक्त) में दिनांक 21 नवंबर, 2025 को प्रकाशित की गई है।
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना संख्या: संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/775 (दिनांक नवंबर 20, 2025)।
संबद्ध जिला: भरतपुर, राजस्थान।
शामिल पंचायत समितियां: बयाना, भुसावर, नदबई, रूपबास, सेवर, उच्चैन और वैर।
कार्यकाल और प्रभाव: अनुसूची के स्तम्भ संख्या 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात उक्त जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो अनुसूची के स्तम्भ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से ही विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
प्रतापगढ़ जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुन सीमांकन और नवसृजन - राजस्थान राजपत्र अधिसूचना
प्रतापगढ़ जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन एवं पुनसीमांकन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/801 (दिनांक नवंबर 20, 2025) के अंतर्गत राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए प्रतापगढ़ जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिनीम संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-9, 10 एवं 101 के प्रावधानों के तहत यह प्रक्रिया पूर्ण की गई है।
संबंधित पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के दायरे में प्रतापगढ़ जिले की धरियावद, पीपलखूट, सुहागपुरा, धमोतर, प्रतापगढ़, अरनोद, दलोट और छोटीसादड़ी पंचायत समितियां शामिल हैं।
कार्यकाल प्रभाव: अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, विद्यमान ग्राम पंचायतें (जो स्तंभ संख्या 2 में वर्णित हैं) उस तारीख से अस्तित्व में नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
जारीकर्ता: राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
जैसलमेर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
जैसलमेर जिला ग्राम पंचायत पुनर्गठन अधिसूचना 2025
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/789 (दिनांक नवम्बर 20, 2025) के तहत जैसलमेर जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन एवं नवसृजन किया गया है। यह कार्रवाई राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा 98 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए की गई है।
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना दिनांक: नवम्बर 20, 2025
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
कार्यान्वयन: अनुसूची के स्तम्भ 4 में वर्णित नई/पुनर्गठित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, स्तम्भ 2 में उल्लेखित मौजूदा ग्राम पंचायतें उस तारीख से अस्तित्व में नहीं रहेंगी और उनका कार्य बंद हो जाएगा, जिससे नई पुनर्गठित पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
विस्तृत जानकारी और ग्रामवार राजस्व गांवों की सूची के लिए मूल राजस्थान राजपत्र (असाधारण) दिनांक 21 नवम्बर 2025 का अवलोकन करें।
करौली जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन अधिसूचना
करौली जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/794 दिनांक 20 नवम्बर, 2025 के माध्यम से करौली जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम और शक्तियाँ: यह कार्रवाई राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों और धारा-9, 10 एवं 101 के अंतर्गत राज्य सरकार द्वारा जिला कलेक्टर को प्रदत्त अधिकारों के आधार पर की गई है।
कार्यान्वयन: जिला कलेक्टर द्वारा तैयार प्रस्तावों, सार्वजनिक अवलोकन, आपत्तियों के आमंत्रण और सुनवाई के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से करौली जिले की विभिन्न पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन व नवसृजन किया गया है।
शामिल पंचायत समितियां: इस अधिसूचना में मण्डरायल, हिण्डौन, टोडाभीम, श्रीमहावीरजी, करौली, मासलपुर और नादौती पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाले राजस्व ग्रामों और ग्राम पंचायतों का विवरण अनुसूची के अनुसार निर्धारित किया गया है।
प्रभावी तिथि: अनुसूची में वर्णित नई ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, पूर्ववर्ती विद्यमान ग्राम पंचायतें उस तिथि से कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
यह अधिसूचना राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा जारी की गई है।
जालोर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन एवं नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
जालोर जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/790 (दिनांक नवंबर 20, 2025) के अंतर्गत राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए जालोर जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
संबंधित विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
अधिसूचना दिनांक: 20 नवंबर 2025 (राजस्थान राजपत्र असाधारण में 21 नवंबर 2025 को प्रकाशित)।
अधिनियम संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-9, 10, 98 एवं 101।
क्षेत्र: जालोर जिला (जिसमें जालोर, आहोर, सायला, जसवंतपुरा, भीनमाल, बागोड़ा, रानीवाड़ा, सांचौर और चितलवाना पंचायत समितियां शामिल हैं)।
कार्यकाल निर्देश: अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात उक्त जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो अनुसूची के स्तंभ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से ही विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
यह अधिसूचना राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी की गई है।
धौलपुर जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा 98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए धौलपुर जिले की ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र (असाधारण) दिनांक 21 नवंबर 2025 में प्रकाशित की गई है, जिसके अंतर्गत धौलपुर जिले के विभिन्न क्षेत्रों एवं पंचायत समितियों (जैसे बाड़ी, बसेड़ी, धौलपुर, राजाखेड़ा, सैंपऊ, सरमथुरा) में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम और संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धाराओं के तहत जिला कलेक्टर द्वारा तैयार प्रस्तावों और आपत्तियों पर सुनवाई के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से यह पुनर्गठन किया गया है।
कार्यान्वयन: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, स्तंभ 2 में उल्लेखित पूर्ववर्ती ग्राम पंचायतें उस तारीख से अस्तित्व में नहीं रहेंगी और उनका कार्यकाल समाप्त माना जाएगा।
संबंधित पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के दायरे में बाड़ी, बसेड़ी, धौलपुर, राजाखेड़ा, सैंपऊ और सरमथुरा पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाले राजस्व ग्रामों और ग्राम पंचायतों का नया सीमांकन किया गया है।
अधिक जानकारी के लिए कृपया ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार की आधिकारिक अधिसूचना देखें।
ब्यावर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन एवं निसृजन से संबंधित अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), जयपुर द्वारा जारी अधिसूचना (संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/774, दिनांक 20 नवंबर 2025) के अनुसार, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए ब्यावर जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन एवं निसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु एवं प्रक्रिया:
संबद्ध अधिनियम एवं निर्देश: यह कार्रवाई राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-9, 10, 98 एवं 101 के प्रावधानों और पूर्व विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/02 दिनांक 10.01.2025 के अंतर्गत जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार प्रस्तावों, आपत्तियों के आमंत्रण, सुनवाई तथा राज्य सरकार के अनुमोदन के पश्चात की गई है।
ग्राम पंचायतों का क्षेत्राधिकार: इस अधिसूचना के तहत पुनर्गठित, पुनसीमांकित एवं नवसृजित ग्राम पंचायतें अपने निर्धारित नामों और राजस्व ग्रामों के स्थानीय क्षेत्र के अनुसार अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
कार्यकाल: अनुसूची में वर्णित ग्राम पंचायतों के चुनावों के पश्चात उस जिले की विद्यमान ग्राम पंचायतें, जो पुनर्गठन से प्रभावित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
शामिल पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के अंतर्गत मुख्य रूप से पंचायत समिति बदनोर, जवाजा, जैतारण, रायपुर और मसूदा के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों एवं उनके राजस्व ग्रामों का पुनर्गठन किया गया है।
विस्तृत विवरण एवं सूची के लिए संलग्न राजपत्र का अवलोकन करें।
बूंदी जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
बूंदी जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन एवं पुनसीमांकन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनगर्ठन/विधि/पंरा/2024/778:- (दिनांक 20 नवम्बर 2025) के अंतर्गत राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए बूंदी जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम व संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-9, 10 एवं 101 में वर्णित शक्तियों तथा पूर्व अधिसूचना दिनांक 10.01.2025 के अनुपालन में जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार प्रस्तावों और अभिशंसाओं के परीक्षण के पश्चात यह राज्य सरकार द्वारा अनुमोदित किया गया है।
प्रभावित पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के तहत बूंदी जिले की पंचायत समिति हिंडोली, नैनवां, तालेडा और बूंदी के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन व नवसृजन किया गया है।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, उस जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो स्तंभ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
अधिक जानकारी एवं विस्तृत राजस्व ग्रामों की सूची के लिए आधिकारिक राजस्थान राजपत्र (असाधारण) दिनांक 21 नवंबर 2025 का अवलोकन करें।
खैरथल-तिजारा जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन एवं नवसृजन - अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान राजपत्र में जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/795, दिनांक 20 नवम्बर 2025 के माध्यम से खैरथल-तिजारा जिले की ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन से संबंधित विस्तृत विवरण प्रकाशित किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम एवं शक्तियां: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों और धारा-9, 10 एवं 101 में वर्णित प्रावधानों के अंतर्गत यह कार्रवाई की गई है।
जिला कलेक्टर की भूमिका: संबंधित जिले के जिला कलेक्टर द्वारा प्रस्ताव तैयार कर सार्वजनिक अवलोकन हेतु प्रसारित करने, एक माह की अवधि में आपत्तियां आमंत्रित करने तथा उन पर सुनवाई करने के पश्चात राज्य सरकार से अनुमोदन प्राप्त किया गया है।
पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के तहत मुख्य रूप से किशनगढ़बास, कोटकासिम, और तिजारा पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों और उनमें सम्मिलित राजस्व ग्रामों का पुनर्गठन व नवसृजन किया गया है।
कार्यकाल और प्रभाव: अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में यथावर्णित नई/पुनर्गठित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, उस जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो स्तंभ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
यह अधिसूचना राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी की गई है।
कोटा जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नए सृजन की अधिसूचना
राजकीय अधिसूचना और उद्देश्य
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी इस आधिकारिक अधिसूचना (संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/796, दिनांक 20 नवंबर, 2025) के माध्यम से कोटा जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नए सृजन की जानकारी दी गई है। यह कार्रवाई राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए, धारा-9, 10 एवं 101 के प्रावधानों के अंतर्गत की गई है।
मुख्य बिंदु एवं प्रक्रिया
जिला कलेक्टर द्वारा प्रस्ताव: संबंधित जिले के जिला कलेक्टर ने नियमानुसार प्रस्ताव तैयार कर सार्वजनिक अवलोकन के लिए प्रसारित किए थे और एक माह की अवधि में आपत्तियां आमंत्रित कर उनकी सुनवाई की थी।
राज्य सरकार का अनुमोदन: जिला कलेक्टरों द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों एवं अभिशंषाओं का परीक्षण करने के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से कोटा जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन/पुनरसीमांकन/निसृजन किया गया है।
नामकरण और अधिकारिता: अनुसूची के स्तम्भ 4 में वर्णित पुनर्गठित/पुनरसीमांकित/नवसृजित ग्राम पंचायतें उसी नाम से जानी जाएंगी और स्तम्भ 5 में दर्शाए गए स्थानीय क्षेत्र व राजस्व ग्रामों पर अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
कार्यकाल की शुरुआत: अनुसूची के स्तम्भ 4 में वर्णित नई ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, स्तम्भ 2 में दर्शाई गई विद्यमान ग्राम पंचायतें उस तारीख से अस्तित्व में नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी, जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
संबद्ध पंचायत समितियां
इस अधिसूचना के अंतर्गत कोटा जिले की विभिन्न पंचायत समितियों (जैसे सांगोद, खैराबाद, सुल्तानपुर, लाडपुरा आदि) के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों एवं उनके राजस्व ग्रामों में पुनर्गठन और फेरबदल किया गया है। विस्तृत विवरण के लिए राजस्थान राजपत्र, दिनांक 21 नवंबर 2025 का अवलोकन किया जा सकता है।
नोट: यह पोस्ट संलग्न राजपत्र अधिसूचना पर आधारित है।
फलौदी जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन एवं नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए तथा धारा-9, 10 एवं 101 में वर्णित शक्तियों के अंतर्गत, संबंधित जिले के जिला कलेक्टर द्वारा तैयार किए गए प्रस्तावों एवं अभिशंषाओं का परीक्षण कर राज्य सरकार से अनुमोदन प्राप्त करने के पश्चात फलौदी जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन एवं नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
प्रभावित पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के तहत फलौदी जिले की विभिन्न पंचायत समितियों (जैसे बापणी, आऊ, फलौदी, देचू, बाप, घंटियाली, लोहावट आदि) के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों और उनके राजस्व गांवों का पुनर्गठन व पुनसीमांकन किया गया है।
नया नाम एवं मुख्यालय: पुनर्गठित/नवसृजित ग्राम पंचायतें उसी नाम से जानी जाएंगी जो अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित हैं और उनकी अधिकारिता का स्थानीय क्षेत्र स्तंभ 5 के अनुसार होगा।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, संबंधित जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो अनुसूची के स्तंभ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
यह अधिसूचना राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी की गई है।
सिरोही जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन एवं नवसृजन - अधिसूचना 2025
सिरोही जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन एवं नवसृजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान राजपत्र में दिनांक 20 नवंबर 2025 की अधिसूचना (संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/806) के माध्यम से सिरोही जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
प्रमुख बिंदु
अधिनियम व संदर्भ: यह कार्रवाई राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए की गई है।
संबंधित पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के तहत पिंडवाड़ा, आबूरोड, शिवगंज, रेवदर और सिरोही पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन किया गया है।
कार्यकाल और प्रभाव: अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में वर्णित पुनर्गठित/नवसृजित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, स्तंभ संख्या 2 में उल्लिखित वर्तमान ग्राम पंचायतें उस तारीख से अस्तित्व में नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी, जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
डीग जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
डीग जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन एवं पुनरसीमांकन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/782 (दिनांक नवंबर 20, 2025) के अंतर्गत राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा 9, 10, 101 एवं धारा 98 के प्रावधानों के तहत डीग जिले की विभिन्न पंचायत समितियों के अंतर्गत ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु एवं प्रक्रिया
सक्षम प्राधिकारी की कार्रवाई: जिला कलेक्टरों द्वारा नियमानुसार प्रस्ताव तैयार कर, सार्वजनिक अवलोकन हेतु प्रसारित कर एक माह की अवधि में आपत्तियां आमंत्रित करने तथा सुनवाई करने की प्रक्रिया पूरी की गई।
राज्य सरकार का अनुमोदन: जिला कलेक्टरों द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों एवं अभिशंषाओं के परीक्षण के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से डीग जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन/पुनरसीमांकन/नवसृजन किया गया है।
अधिकारिता और कार्यक्षेत्र: अनुसूची के स्तम्भ 4 में वर्णित पुनर्गठित एवं नवसृजित ग्राम पंचायतें स्तम्भ 5 में उल्लेखित राजस्व गांवों पर अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तम्भ 4 में वर्णित नई ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, स्तम्भ 2 में उल्लेखित विद्यमान ग्राम पंचायतें उस तारीख से अस्तित्व में नहीं रहेंगी और उनका कार्य समाप्त हो जाएगा, जिसके बाद नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
शामिल पंचायत समितियां
इस अधिसूचना के अंतर्गत डीग जिले की प्रमुख पंचायत समितियों (जैसे सीकरी, पहाड़ी, कुम्हेर, कामाँ, नगर और डीग) के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों और उनसे संबंधित राजस्व गांवों का विस्तृत विवरण राजस्थान राजपत्र (अतिरिक्त) दिनांक 21 नवंबर 2025 में प्रकाशित अनुसूची के अनुसार निर्धारित किया गया है।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है।
अजमेर जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
अजमेर जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन एवं पुनरसीमांकन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान राजपत्र में जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/768 (दिनांक 20 नवंबर, 2025) के अंतर्गत अजमेर जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
यह कार्रवाई राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा 98 के तहत प्रदत्त शक्तियों और जिला कलेक्टर्स द्वारा तैयार प्रस्तावों एवं आपत्तियों की सुनवाई के उपरांत राज्य सरकार के अनुमोदन से की गई है।
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना दिनांक: 20 नवंबर, 2025
संबंधित विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार
क्षेत्र: अजमेर जिला (विभिन्न पंचायत समितियाँ जैसे सिलोरा, सावर, अजमेर ग्रामीण, श्रीनगर, केकड़ी, सरवाड़, अड़ाई, बिनाय, पीसांगन आदि)
कार्यान्वयन: अनुसूची में यथावर्णित नई पुनर्गठित/नवसृजित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, पूर्ववर्ती विद्यमान ग्राम पंचायतें उस तिथि से अस्तित्व में नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा यह अधिसूचना जारी की गई है।
बाँसवाडा जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) अधिसूचना
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/771 (दिनांक नवंबर 20, 2025) के अंतर्गत राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए बाँसवाडा जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
प्रमुख मुख्य बिंदु:
अधिनियम एवं संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-9, 10, 98 एवं 101 के अंतर्गत संबंधित जिला कलेक्टर द्वारा तैयार प्रस्तावों और अनुशंसाओं के परीक्षण के पश्चात यह अधिसूचना जारी की गई है।
शामिल पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के तहत बाँसवाडा जिले की विभिन्न पंचायत समितियों (जैसे आनन्दपुरी, अरथुना, बागीदौरा, बाँसवाडा, छोटी सरवा, छोटी सरवन, गांगडतलाई, गढ़ी, घाटोल, कुशलगढ़, सज्जनगढ़, तलवाडा आदि) के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन एवं पुनसीमांकन किया गया है।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तम्भ संख्या 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात उक्त जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो अनुसूची के स्तम्भ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
यह अधिसूचना राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी की गई है।
दौसा जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन से संबंधित अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/781/- दिनांक नवम्बर 20, 2025 के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए दौसा जिले की विभिन्न पंचायत समितियों के अंतर्गत ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु एवं विवरण
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
अधिसूचना दिनांक: नवम्बर 20, 2025 (राजस्थान राजपत्र असाधारण में प्रकाशित)
जिला: दौसा
शामिल पंचायत समितियां: बांदीकुई, दौसा, लालसोट, महवा, मंडावर, नांगल राजावतान, रामगढ़ पचवारा, सिकंदरा, सिकराय और बैजूपाड़ा, बसवा।
इस अधिसूचना के अनुसार, संबंधित जिला कलेक्टर द्वारा तैयार प्रस्तावों तथा आपत्तियों पर सुनवाई और परीक्षण के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से दौसा जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन एवं नवसृजन किया गया है। अनुसूची में यथावर्णित नई ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात पुरानी विद्यमान ग्राम पंचायतें उस तिथि से अस्तित्व में नहीं रहेंगी और उनका कार्य समाप्त हो जाएगा जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
उदयपुर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन एवं नवसृजन - राजस्थान राजपत्र अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/808, दिनांक 20 नवम्बर 2025 के अनुसार, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए उदयपुर जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बातें:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
स्थान: उदयपुर जिला
प्रभाव: इस अधिसूचना के तहत संबंधित पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन और नवसृजन किया गया है, जिसके विस्तृत विवरण और राजस्व ग्रामों की सूची राजपत्र में प्रकाशित की गई है।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तम्भ संख्या 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, उक्त जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो स्तम्भ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से ही विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
यह अधिसूचना राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी की गई है।
बीकानेर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा बीकानेर जिले में ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन के संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र (असाधारण) में दिनांक 20 नवंबर, 2025 को प्रकाशित हुई है।
अधिनियम संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98, 9, 10 एवं 101 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग।
कार्रवाई: जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार प्रस्तावों एवं अभिशषाओं का परीक्षण कर राज्य सरकार के अनुमोदन के पश्चात बीकानेर जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
शामिल पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के तहत लूनकरनसर, श्रीडूंगरगढ़, बीकानेर, नोखा, पाँचू, बज्जू खालसा, खाजूवाला, पूगल और हदां पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाले ग्राम क्षेत्रों का पुनर्गठन किया गया है।
कार्यकाल संबंधी निर्देश: अनुसूची के स्तम्भ संख्या 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात संबंधित जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो स्तम्भ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
अधिक जानकारी और विस्तृत राजस्व ग्राम सूची के लिए कृपया संलग्न मूल राजपत्र अधिसूचना देखें।
राजसमंद जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन एवं नवसृजन अधिसूचना
राजसमंद जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन और पुनसीमांकन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान राजपत्र में राजसमंद जिले की ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन, पुनसीमांकन एवं नवसृजन के संबंध में अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना दिनांक 20 नवंबर, 2025 को जारी की गई है, जिसके अंतर्गत राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का उपयोग किया गया है।
मुख्य बिंदु:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
जिला: राजसमंद
शामिल पंचायत समितियां: आमेट, भीम, रेलमगरा, राजसमंद और अन्य संबंधित क्षेत्र।
कार्यान्वयन: जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार प्रस्तावों और आपत्तियों पर सुनवाई के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से राजसमंद जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
नया कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, उस जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो अनुसूची के स्तंभ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
अधिक जानकारी के लिए कृपया राजस्थान राजपत्र (असाधारण) दिनांक 21 नवंबर, 2025 का अवलोकन करें।
हनुमानगढ़ जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनर्र्सीमांकन और नवसृजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंवारा/2024/787 (दिनांक नवंबर 20, 2025) के अंतर्गत राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए हनुमानगढ़ जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनर्र्सीमांकन और नवसृजन किया गया है।
प्रमुख बातें एवं निर्देश
सम्बन्धित विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
प्रभावित क्षेत्र: हनुमानगढ़ जिले की पंचायत समितियां (भादरा, पीलीबंगा, संगरिया, टिब्बी, हनुमानगढ़, नोहर आदि) एवं उनके अंतर्गत आने वाले राजस्व ग्राम।
नया कार्यकाल: पुनर्गठित/नवसृजित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, पुरानी विद्यमान ग्राम पंचायतें उस तारीख से कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
अधिकारिता: प्रत्येक पुनर्गठित/नवसृजित ग्राम पंचायत अनुसूची के स्तम्भ 5 में वर्णित स्थानीय क्षेत्र व राजस्व ग्रामों पर अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेगी।
जयपुर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
जयपुर जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन एवं पुनरसीमांकन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी असाधारण राजपत्र अधिसूचना (संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/788, दिनांक 20 नवंबर, 2025) के अनुसार, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए जयपुर जिले की विभिन्न पंचायत समितियों के अंतर्गत ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
संबद्ध अधिनियम: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-9, 10, 98 एवं 101।
क्रियान्वयन: संबंधित जिला कलेक्टर द्वारा तैयार प्रस्तावों एवं आपत्तियों की सुनवाई के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से जयपुर जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन और नवसृजन किया गया है।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, विद्यमान ग्राम पंचायतें उस तारीख से कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
अलवर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
अलवर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन और पुनरसीमांकन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/769, दिनांक नवम्बर 20, 2025 (राजस्थान राजपत्र असाधिकार प्रकाशित, 21 नवम्बर 2025) के अंतर्गत अलवर जिले की विभिन्न पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन एवं नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु और प्रक्रिया
यह कार्रवाई राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए, धारा-9, 10 एवं 101 में वर्णित प्रावधानों के तहत जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार प्रस्तावों और आपत्तियों पर सुनवाई के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से की गई है।
अधिसूचना के अनुसार, अनुसूची के स्तम्भ 4 में वर्णित नई पुनर्गठित/नवसृजित ग्राम पंचायतें उसी नाम से जानी जाएंगी और स्तम्भ 5 में वर्णित स्थानीय क्षेत्र व राजस्व ग्रामों पर अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
अनुसूची के स्तम्भ 4 में यथावर्नित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात्, उस जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो स्तम्भ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
संबंधित पंचायत समितियां
इस अधिसूचना के तहत अलवर जिले की कई पंचायत समितियों (जैसे भनोर और अन्य संबंधित क्षेत्र) के अंतर्गत आने वाले राजस्व ग्रामों और ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन और पुनरसीमांकन किया गया है। विस्तृत जानकारी और ग्रामवार सूची के लिए आधिकारिक राजस्थान राजपत्र (21 नवंबर 2025) देखा जा सकता है।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है।
झालावाड़ जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन - अधिसूचना 20 नवंबर 2025
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंचा/2024/791- (दिनांक नवंबर 20, 2025) के अंतर्गत, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए झालावाड़ जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम एवं प्रावधान: यह कार्रवाई राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-9, 10, 98 एवं 101 के प्रावधानों तथा पूर्व में जारी विभागीय आदेशों के तहत जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार प्रस्तावों एवं राज्य सरकार के अनुमोदन के पश्चात की गई है।
प्रभावित पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के तहत झालावाड़ जिले की कई पंचायत समितियों (जैसे अकलेरा, भवानीमंडी, डग, झालरापाटन, खानपुर, मनोहरथाना और पिड़ावा मुख्यालय सुनेल) के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों एवं उनके राजस्व ग्रामों का पुनर्गठन किया गया है।
कार्यकाल एवं अस्तित्व: अनुसूची के स्तम्भ संख्या 4 में यथावर्णित पुनर्गठित/नवसृजित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, उस जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो अनुसूची के स्तम्भ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
विस्तृत ग्राम-वार अनुसूची और राजस्व ग्रामों की जानकारी के लिए कृपया राजस्थान राजपत्र (असाधारण) दिनांक 21 नवंबर 2025 देखें।
जोधपुर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन एवं नवसृजन - राजस्थान राजपत्र अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/793 (दिनांक नवंबर 20, 2025) के तहत जोधपुर जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है। यह कार्रवाई राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा 98 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए की गई है।
मुख्य बिंदु एवं प्रक्रिया:
अधिकार एवं प्रस्ताव: जिला कलेक्टरों को संबंधित ग्राम पंचायतों व पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन हेतु प्रस्ताव तैयार करने, सार्वजनिक अवलोकन के लिए प्रसारित करने, एक माह की अवधि में आपत्तियां आमंत्रित करने और उन पर सुनवाई करने के लिए अधिकृत किया गया था।
नया नामकरण और अधिकारिता: जिला कलेक्टरों द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों और अभिशंषाओं का परीक्षण करने तथा राज्य सरकार से अनुमोदन प्राप्त करने के पश्चात, जोधपुर जिले की पुनर्गठित/पुनसीमांकित/नवसृजित ग्राम पंचायतें अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित नाम से जानी जाएंगी और स्तंभ 5 में उल्लिखित स्थानीय क्षेत्र/राजस्व गांवों पर अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
कार्यकाल और निरंतरता: अनुसूची के स्तंभ 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, संबंधित जिले की वे विद्यमान ग्राम पंचायतें जो स्तंभ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
आज्ञा से: डॉ. जोगा राम, शासन सचिव, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
चूरू जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन - अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/780 दिनांक नवंबर 20, 2025 के अंतर्गत, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए चूरू जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना क्रमांक एवं दिनांक: संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/780, दिनांक नवंबर 20, 2025।
संबंधित विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
अधिनियम संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-9, 10, 98 और 101।
क्षेत्र: चूरू जिले की विभिन्न पंचायत समितियाँ (चूरू, बीदासर, सुजानगढ़, रतनगढ़, सरदारशहर, तारानगर, राजगढ़, सिद्धमुख)।
कार्यान्वयन: जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार प्रस्तावों एवं आपत्तियों पर सुनवाई के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से चूरू जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तम्भ 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात उस जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो स्तम्भ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से ही विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा यह अधिसूचना जारी की गई है।
सीकर जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन - राजस्थान राजपत्र अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/805 (दिनांक नवंबर 20, 2025) के माध्यम से राजस्थान राजपत्र में सीकर जिले की ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन से संबंधित आधिकारिक विवरण प्रकाशित किया गया है।
मुख्य बिंदु एवं प्रक्रिया
यह अधिसूचना राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए तथा धारा-9, 10 एवं 101 के अंतर्गत जारी निर्देशों के तहत लाई गई है।
जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार किए गए प्रस्तावों, सार्वजनिक अवलोकन, आपत्तियों के आमंत्रण और सुनवाई की प्रक्रिया के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से सीकर जिले की विभिन्न पंचायत समितियों (जैसे अजीतगढ़, दांतारामगढ़, पलसाना, धोद, खंडेला, लक्ष्मणगढ़, नेछवा, नीमकाथाना, पाटन, पिपराली, श्रीमाधोपुर) के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
अनुसूची में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, उस जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो अनुसूची के स्तंभ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
विस्तृत ग्राम-वार और पंचायत समिति-वार सूची के लिए संलग्न आधिकारिक राजपत्र दस्तावेज़ का अवलोकन करें।
भीलवाड़ा जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
भीलवाड़ा जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/776 (दिनांक 20 नवम्बर 2025) के अंतर्गत राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए भीलवाड़ा जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
प्रमुख बिंदु:
अधिकार एवं प्रक्रिया: विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/02 दिनांक 10.01.2025 के द्वारा जिला कलेक्टर को ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों के पुनर्गठन/पुनसीमांकन हेतु प्रस्ताव तैयार करने, सार्वजनिक अवलोकन के लिए प्रसारित करने, एक माह की अवधि में आपत्तियां आमंत्रित करने तथा सुनवाई करने हेतु अधिकृत किया गया था।
प्रस्तावों का अनुमोदन: जिला कलेक्टरों द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों और अभिशंसाओं का परीक्षण करने के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से भीलवाड़ा जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन/पुनसीमांकन/नवसृजन किया गया है।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तम्भ संख्या 4 में यथावर्णित नई ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात उस जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो स्तम्भ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
विस्तृत विवरण और पंचायत समिति वार पुनर्गठित/नवसृजित ग्राम पंचायतों तथा उनमें सम्मिलित राजस्व ग्रामों की सूचियों के लिए संलग्न राजस्थान राजपत्र (एक्स्ट्राऑर्डिनरी) का अवलोकन करें।
पाली जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन - अधिसूचना 20 नवंबर 2025
पाली जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन एवं पुनसीमांकन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए पाली जिले के विभिन्न क्षेत्रों में ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन से संबंधित आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिसूचना दिनांक 20 नवंबर 2025 को राजस्थान राजपत्र (असाधारण) में प्रकाशित हुई है।
प्रमुख बिंदु
अधिनियम संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम सं. 13) की धारा-9, 10, 98 और 101 के प्रावधानों के अंतर्गत यह कार्रवाई की गई है।
संबंधित जिला: पाली जिला।
शामिल पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के तहत बगड़ी, देसूरी, मारवाड़ जंक्शन, रानी, रोहट, सोजत और सुमेरपुर पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन और नवसृजन किया गया है।
कार्यकाल और प्रभाव: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, संबंधित जिले की वे विद्यमान ग्राम पंचायतें जो स्तंभ 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से अस्तित्व में नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है।
झुंझुनूं जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन एवं नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
झुंझुनूं जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन एवं नवसृजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/792 (दिनांक नवंबर 20, 2025) जारी की गई है। इसके माध्यम से झुंझुनूं जिले में विभिन्न ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन एवं नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु एवं प्रक्रिया
संवैधानिक प्रावधान: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा-9, 10 एवं 101 में वर्णित शक्तियों तथा विभागीय अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/02 (दिनांक 10.01.2025) के तहत जिला कलेक्टर को प्रस्ताव तैयार करने, सार्वजनिक अवलोकन के लिए प्रसारित करने और एक माह की अवधि में आपत्तियां आमंत्रित कर सुनवाई करने हेतु अधिकृत किया गया था।
राज्य सरकार का अनुमोदन: जिला कलेक्टर्स द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों एवं अभिशंषाओं का परीक्षण करने के पश्चात राज्य सरकार के अनुमोदन से झुंझुनूं जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन/पुनसीमांकन/नवसृजन किया गया है।
अधिकारिता: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित पुनर्गठित/नवसृजित ग्राम पंचायतें स्तंभ 5 में दर्शाए गए स्थानीय क्षेत्रों एवं राजस्व ग्रामों पर अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
विद्यमान पंचायतों का कार्यकाल: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित नई ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात स्तंभ 2 में उल्लेखित वर्तमान ग्राम पंचायतें उस तारीख से अस्तित्व में नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी, जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
शामिल पंचायत समितियां
इस अधिसूचना के अंतर्गत झुंझुनूं जिले की निम्नलिखित पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों का पुनर्गठन किया गया है:
बुहाना
चिड़ावा
खेतडी
मण्डावा
नवलगढ़
पिलानी
सिंघाना
सूरजगढ़
उदयपुरवाटी
अलसीसर
झुंझुनूं
यह अधिसूचना राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी की गई है।
नागौर में नई ग्राम पंचायत गठन गजट में जारी
नागौर में नई ग्राम पंचायत गठन गजट में जारी
डीडवाना-कुचामन जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुन सीमांकन और नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
अधिसूचना विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/784 (दिनांक नवम्बर 20, 2025) के माध्यम से राजस्थान राजपत्र में डीडवाना-कुचामन जिले की ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन से संबंधित विस्तृत विवरण प्रकाशित किया गया है।
मुख्य उद्देश्य एवं प्रक्रिया
राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए, धारा-9, 10 एवं 101 में वर्णित प्रावधानों के अंतर्गत संबंधित जिला कलेक्टर को ग्राम पंचायत एवं पंचायत समिति के पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन हेतु प्रस्ताव तैयार करने, सार्वजनिक अवलोकन के लिए प्रसारित करने, एक माह की अवधि में आपत्तियां आमंत्रित करने तथा उन पर सुनवाई करने के लिए अधिकृत किया गया था। जिला कलेक्टरों द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों एवं अभिशंषाओं का परीक्षण कर तथा राज्य सरकार से अनुमोदन प्राप्त करने के पश्चात डीडवाना-कुचामन जिले की विभिन्न पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन/पुनसीमांकन/नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु
अधिनियम संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-9, 10, 98 एवं 101।
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
जारीकर्ता: डॉ. जोगा राम, शासन सचिव (राज्यपाल की आज्ञा से)।
प्रभावित क्षेत्र: डीडवाना-कुचामन जिले की विभिन्न पंचायत समितियाँ (जैसे कुचामन सिटी, लाडनूं, मौलासर, परबतसर, डीडवाना, मकराना, नावा आदि)।
अनुसूची के स्तंभ संख्या 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात उक्त जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो अनुसूची के स्तंभ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
श्रीगंगानगर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन एवं नवसृजन - राजस्थान राजपत्र अधिसूचना
श्रीगंगानगर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन और नवसृजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/786, दिनांक 20 नवंबर 2025 के अनुसार, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए श्रीगंगानगर जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनरसीमांकन एवं नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम व निर्देश: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-9, 10 एवं 101 के अंतर्गत जिला कलेक्टर द्वारा तैयार प्रस्तावों और अभिशंषाओं का परीक्षण कर राज्य सरकार के अनुमोदन के पश्चात यह अधिसूचना जारी की गई है।
कार्यान्वयन: अनुसूची के स्तम्भ संख्या 4 में यथावर्णित ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात् उस जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो स्तम्भ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी, जिससे नई पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
संबद्ध पंचायत समितियां: इस अधिसूचना में श्रीगंगानगर जिले के अंतर्गत आने वाली विभिन्न पंचायत समितियों (जैसे श्रीगंगानगर, श्रीकरणपुर, पदमपुर, घड़साना, सूरतगढ़, अनूपगढ़, सादुलशहर आदि) के अंतर्गत आने वाले राजस्व ग्रामों और उनके मुख्यालयों की विस्तृत अनुसूची जारी की गई है।
यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र (असाधारण) दिनांक 21 नवंबर 2025 में प्रकाशित की गई है, जिसके अंतर्गत राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा हस्ताक्षर किए गए हैं।
बालोतरा जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग
बालोतरा जिले की ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन की अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी असाधारण राजपत्र अधिसूचना (संख्या एफ.15(36)पुनर्गठन/विधि/पंरा/2024/770, दिनांक नवम्बर 20, 2025) के अनुसार राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए बालोतरा जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीमांकन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
अधिकार क्षेत्र और प्रभाव: इस अधिसूचना के तहत पुनर्गठित, पुनसीमांकित और नवसृजित ग्राम पंचायतें स्तम्भ 4 एवं 5 में दर्शाए गए स्थानीय क्षेत्रों और राजस्व ग्रामों के अनुसार अपनी अधिकारिता का प्रयोग करेंगी।
कार्यकाल: अनुसूची के स्तम्भ संख्या 4 में यथाور्णगत ग्राम पंचायतों के चुनाव के पश्चात, उक्त जिले की विद्यमान वे ग्राम पंचायतें जो स्तम्भ संख्या 2 में वर्णित हैं, उस तारीख से विद्यमान नहीं रहेंगी और कार्य करना बंद कर देंगी जिससे नई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल प्रारंभ होगा।
संबंधित पंचायत समितियां: इस अधिसूचना के अंतर्गत समदड़ी, कल्याणपुर, सिणधरी, पायला कलां, सिवाना, पादतू और गिडा पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में पुनर्गठन की कार्रवाई की गई है।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से डॉ. जोगा राम, शासन सचिव द्वारा जारी किया गया है।
बाड़मेर जिले में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीममार्कन और नवसृजन - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) अधिसूचना
यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र (असाधारण) में प्रकाशित की गई है। इसके अनुसार, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा-98 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्य सरकार द्वारा बाड़मेर जिले के विभिन्न पंचायत समितियों के अंतर्गत ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनसीममार्कन और नवसृजन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
संबद्ध विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार।
कार्रवाई का आधार: जिला कलेक्टरों द्वारा तैयार किए गए प्रस्तावों, आपत्तियों पर सुनवाई और राज्य सरकार के अनुमोदन के पश्चात यह अंतिम अधिसूचना जारी की गई है।
प्रभाव: अनुसूची के स्तंभ 4 में वर्णित नई एवं पुनर्गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल संबंधित पंचायतों के चुनावों के पश्चात प्रारंभ होगा, और स्तंभ 2 में उल्लेखित पुरानी पंचायतें उस तिथि से अस्तित्व में नहीं रहेंगी।
विस्तृत विवरण और पंचायत समिति वार (जैसे सेड़वा, रामसर, गडाररद, धोरीमन्ना, बायतू, शिव, गुड़ामालानी, फागलिया आदि) नवगठित ग्राम पंचायतों एवं उनमें सम्मिलित राजस्व ग्रामों की सूची आधिकारिक राजपत्र में उपलब्ध है।
पंचायती राज संस्थाओं के अधीन विद्यालय भवनों में रंग-ररोगन कार्य के संबंध में दिशा-निर्देश
पंचायती राज संस्थाओं के अधीन विद्यालय भवनों में रंग-ररोगन कार्य
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा राजकाज संदर्भ संख्या 18172438 (क्रमांक एफ 4(1111) परावि/पीसी/विविध/22-00409, दिनांक 28-01-2025) के तहत पंचायती राज संस्थाओं के अधीन आने वाले राजकीय विद्यालयों में रंग-रोगन कार्य करवाए जाने के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य निर्देश एवं बिंदु:
समयसीमा: राजकीय विद्यालय भवन में रंग-रोगन का कार्य मध्यावधि अवकाश (दीपावली अवकाश - दिनांक 13.10.2025 से दिनांक 24.10.2025) के मध्य अनिवार्य रूप से पूर्ण कराया जाना सुनिश्चित किया जाए।
विद्यालयों की सूची: इस हेतु जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक) से पंचायती राज संस्थाओं के अधीन राजकीय विद्यालयों की सूची प्राप्त की जावे।
वित्तीय प्रावधान: रंग-रोगन कार्य हेतु आवश्यकतानुसार राशि राज्य वित्त आयोग - षष्ठम योजना अंतर्गत व्यय की जा सकेगी, जिसमें अधिकतम ₹ 1.00 लाख (एक लाख रुपये तक की) सीमा तय की गई है।
गुणवत्ता एवं रंग: उच्च गुणवत्ता के पेंट/कलर का उपयोग किया जाए तथा प्राथमिकता से पर्यावरण-अनुकूल एवं दीर्घकालीन टिकाऊ पेंट का चयन हो। प्राथमिक/उच्च प्राथमिक विद्यालय भवनों पर संलग्न कलर-कोड के अनुसार ही रंग-ररोगन/पेंट किया जाना सुनिश्चित करें।
प्रगति रिपोर्ट: कार्य अधिकृत पद्धति से कराया जाए तथा प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर पूर्ण किए गए कार्य की प्रगति (पूर्व एवं पश्चात् स्थिति के फोटो सहित) जिला परिषद कार्यालय को प्रस्तुत कर विभाग को प्रेषित की जाए।
माननीय प्रधानमंत्री महोदय के दिनांक 25.09.2025 के कार्यक्रम के सीधे प्रसारण हेतु ग्राम पंचायत स्तर पर व्यवस्था के संबंध में
माननीय प्रधानमंत्री महोदय के कार्यक्रम के सीधे प्रसारण की व्यवस्था
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ 165(7)ले.ब./परावि/एसएफसी-6/2025-26 के अंतर्गत दिनांक 25.09.2025 को बांसवाड़ा में माननीय प्रधानमंत्री महोदय की उपस्थिति में होने वाले राज्य स्तरीय समारोह के लाइव प्रसारण को ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर दिखाने की समुचित व्यवस्था के संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु एवं वित्तीय स्वीकृति
कार्यक्रम: दिनांक 25.09.2025 को बांसवाड़ा में आयोजित होने वाले राज्य स्तरीय समारोह का जिला, ब्लॉक व ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर लाइव प्रसारण।
उद्देश्य: आमजन को सरकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त हो सके।
व्यवस्थाएं: टी.वी./स्क्रीन व्यवस्था, फर्नीचर, दरी, पेयजल आदि से संबंधित व्यय।
वित्तीय प्रावधान: छठे राज्य वित्त आयोग के अंतर्गत उपलब्ध अनुदान राशि से प्रति ग्राम पंचायत अधिकतम रु. 10,000/- (दस हजार रुपये) तक के व्यय/उपयोग करने की सहमति प्रदान की जाती है।
अनुमोदन: यह सहमति वित्त विभाग की आई.डी. संख्या 332501526 दिनांक 23.09.2025 द्वारा अनुमोदित है।
यह आदेश डॉ. जोंगा राम, शासन सचिव एवं आयुक्त, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा जारी किया गया है।
ग्रामीण सेवा शिविर 18 सितम्बर, 2025 से आयोजित किये जाने बाबत
ग्रामीण सेवा शिविरों का आयोजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुसार राज्य की प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर "ग्रामीण सेवा शिविर" का आयोजन 18 सितम्बर, 2025 से किया जाना है।
मुख्य निर्देश एवं व्यवस्थाएं
अभियान की अवधि तब तक होगी जब तक कि प्रत्येक पंचायत समिति की प्रत्येक ग्राम पंचायत में शिविर का आयोजन न हो जावे।
शिविर स्थल पंचायत मुख्यालय पर पंचायत भवन, स्कूल भवन या उपलब्ध अन्य सार्वजनिक स्थानों पर निर्धारित किए जाएंगे।
आगंतुकों के लिए पेयजल की समुचित व्यवस्था, मेज, कुर्सियां, दरियां और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं ग्राम पंचायत द्वारा की जाएंगी।
वित्तीय प्रावधान एवं व्यय
शिविर आयोजन एवं संचालन हेतु षष्ठ राज्य वित्त आयोग अंतर्गत पंचायती राज संस्थाओं को देय अनुदान राशि के उपयोग हेतु विभागीय पत्रांक 347 राजकाज क्रमांक 13247621 दिनांक 28.01.2025 के दिशा-निर्देशों के बिंदु सं. (अ)(3)(XIII) के अंतर्गत ग्राम पंचायत को स्वीकृत अनुदान राशि में से अधिकतम राशि रु. 25,000/- प्रति ग्राम पंचायत व्यय/उपयोग करने की सहमति प्रदान की जाती है।
यह सहमति वित्त विभाग की आई.डी. संख्या 332501444 दिनांक 16.09.2025 द्वारा अनुमोदित है। इस कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान करने के निर्देश दिए गए हैं।
पंड़ित दीनदयाल उपाध्याय अंत्योदय सम्बल पखवाड़ा (24 जून से 09 जुलाई, 2025) के आयोजन हेतु राशि व्यय करने की सहमति
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा 'पंड़ित दीनदयाल उपाध्याय अंत्योदय सम्बल पखवाड़ा' (दिनांक 24 जून, 2025 से 09 जुलाई, 2025) के आयोजन के संबंध में आदेश जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
पखवाड़े की अवधि: 24 जून, 2025 से 09 जुलाई, षष्ठ राज्य वित्त आयोग अंतर्गत पंचायती राज संस्थाओं को देय अनुदान राशि का उपयोग।
व्यय सीमा: ग्राम पंचायत को स्वीकृत अनुदान राशि में से अधिकतम राशि रु. 25,000/- प्रति ग्राम पंचायत व्यय/उपयोग करने की सहमति प्रदान की जाती है।
संदर्भित निर्देश: विभागीय पत्रांक 347 राजकाज क्रमांक 13247621 दिनांक 28.01.2025 के दिशा-निर्देशों के बिंदु सं (अ)(3)(XIII) के अंतर्गत।
वित्त विभाग की सहमति: वित्त विभाग की आई.डी. संख्या 332501054 दिनांक 03.07.2025 द्वारा अनुमोदित।
इस कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान करने के निर्देश दिए गए हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता संबंधी कार्यों के संचालन एवं मॉडल टेंडर दिशा-निर्देश
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता संबंधी कार्य और मॉडल टेंडर दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रामीण विकास, अनुभाग-5), राजस्थान सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता संबंधी कार्यों को संपादित करने हेतु स्थायी आदेश संख्या 01/2024 (दिनांक 03/09/2024) जारी किया गया है। इसके माध्यम से बी.एस.आर. (BSR) सॉफ़्ट पर प्रदर्शित स्वच्छता संबंधी आइटम्स की नई दरें निर्धारित की गई हैं तथा मॉडल टेंडर डॉक्यूमेंट (Model Tender Document) के संबंध में निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य बिंदु एवं निर्धारित दरें
घर-घर कचरा संग्रहण: वाहन उपलब्ध कराने पर अथवा संवेदक द्वारा वाहन, ड्राइवर, POL, श्रमिक व सुरक्षा उपकरणों सहित घर-घर कचरा संग्रहण व प्लास्टिक कचरे का सुरक्षित निस्तारण।
कचरे का पृथक्करण: Degradable और Non-Degradable कचरे का पृथक्करण कार्य एवं प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट नियम, 2016 के अनुसार निस्तारण।
सड़क, बाजार एवं मुख्य चौक सफाई: झाड़ू एवं सफाई कार्य, आवश्यक सुरक्षा उपकरण और मेडिकल किट के साथ कचरे को डंपिंग यार्ड पर पहुंचाना।
नाली सफाई: आवश्यक उपकरणों और सुरक्षा किट के साथ नाली सफाई कार्य।
सामुदायिक स्वच्छता परिसर (CSC) सफाई: सीट, फर्श और टाइल्स की सफाई कार्य।
निविदा प्रक्रिया एवं समय-सीमा
परिवारों एवं साफ-सफाई का आकलन (वार्ड वार): सितंबर माह का प्रथम सप्ताह
निविदा जारी करना: सितंबर माह का द्वितीय सप्ताह
निविदा प्रक्रिया पूर्ण कर कार्य आदेश जारी करना: सितंबर माह का चतुर्थ सप्ताह
कार्य प्रारम्भ करने का समय: 02 अक्टूबर
सभी ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों को आरटीपीपी (RTPP) नियमों के तहत मॉडल टेंडर के अनुसार पारदर्शी तरीके से निविदा की कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 के तहत प्ररूप 23-क एवं 23-ख में संशोधन के संबंध में
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 - पट्टा प्ररूप संशोधन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.4(1)नियम/संशो/विधि/पंवारा/2024/304 दिनांक 27-3-2025 के माध्यम से सभी मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद (समस्त राजस्थान) को राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 के तहत जारी पट्टों के प्ररूप-23क एवं 23ख में किए गए संशोधनों के अनुसार पट्टा जारी करने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना विवरण: राजस्थान राजपत्र (असाधारण) दिनांक 20 जनवरी, 2025 में प्रकाशित अधिसूचना (जी.एस.आर. 97) के तहत राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) नियम, 2025 बनाए गए हैं।
प्ररूप-23-क: नियम 157(1) के अंतर्गत आवासीय भूमि का पट्टा (पट्टा विलेख) से संबंधित है, जो पंचायत आबाबी भूमि पर पुराने संनिर्मित घरों पर कब्जे या 31 दिसंबर, 2016 से ठीक पूर्ववर्ती सत्तर वर्ष के दौरान संनिर्मित घरों के लिए है।
प्ररूप-23-ख: नियम 157(2) के अंतर्गत आबाबी भूमि का आवंटन / परिवारों के कब्जे के अस्थायी मकानों / कच्चे मकानों का नियमितीकरण (पट्टा विलेख) से संबंधित है, जो वर्ष 2003 तक के कच्चे/अस्थायी मकानों के कब्जे के लिए है (अधिकतम 300 वर्ग गज)।
आवश्यक कार्रवाई: सभी संबंधित ग्राम पंचायतों को निर्देशित किया गया है कि वे संशोधित प्ररूपों के अनुसार ही पट्टा जारी करना सुनिश्चित करें।
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 के तहत प्ररूप 23-क एवं 23-ख में संशोधन के संबंध में
राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) नियम, 2025
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.4(1)नियम/संशो/विधि/पंवारा/2024/304 दिनांक 27-3-2025 और राजस्थान राजपत्र असाधारण (दिनांक 20 जनवरी, 2025) की अधिसूचना जी.एस.आर. 97 के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 के अंतर्गत पट्टों के प्ररूप-23-क एवं 23-ख में संशोधन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
नियम 157(1) के अंतर्गत प्ररूप-23-क: आवासीय भूमि का पट्टा (पट्टा विलेख) जिसमें पुराने संनिर्मित घरों पर कब्जे या पंचायत आबाद भूमि पर कब्जे से संबंधित प्रावधान और शर्तें शामिल हैं।
नियम 157(2) के अंतर्गत प्ररूप-23-ख: आबाद भूमि का आवंटन / परिवारों के कब्जे के अस्थायी मकानों / कच्चे मकानों का नियमितीकरण (पट्टा विलेख), जिसमें अधिकतम 300 गज तक की आबाद भूमि के निःशुल्क आवंटन और उससे जुड़ी शर्तों का उल्लेख है।
निर्देश: सभी मुख्य कार्यकारी अधिकारियों, जिला परिषद (राजस्थान) को निर्देशित किया गया है कि वे संबंधित ग्राम पंचायतों को संशोधित प्ररूप-23-क और 23-ख के अनुसार पट्टा जारी करना सुनिश्चित कराएं।
स्वच्छता कार्यों के लिए रजिस्टर प्रारूप (Register Format for Sanitation Works)
ग्राम पंचायतों में स्वच्छता कार्यों के लिए निर्धारित रजिस्टर प्रारूप
यह दस्तावेज़ ग्राम पंचायतों में संचालित होने वाले विभिन्न स्वच्छता कार्यों के रिकॉर्ड और मॉनिटरिंग के लिए आधिकारिक रजिस्टर प्रारूप प्रदान करता है। इसमें मुख्य रूप से चार प्रकार के रजिस्टरों के प्रारूप शामिल हैं:
घर-घर कचरा संग्रहण एवं पृथक्करण कार्य रजिस्टर-1
सड़क सफाई कार्य रजिस्टर-2
नाली सफाई कार्य रजिस्टर-3
सामुदायिक स्वच्छता परिसर सफाई कार्य रजिस्टर-4
सामान्य विवरण और मुख्य बिंदु
प्रत्येक रजिस्टर के मुख्य पृष्ठ (सामान्य विवरण) और दैनिक कार्य इंद्राज पृष्ठ पर निम्नलिखित महत्वपूर्ण जानकारियां दर्ज करने का प्रावधान है:
ग्राम पंचायत का नाम एवं गाँव का नाम
गाँव में वार्डों की संख्या एवं परिवारों की संख्या
फर्म का नाम, मोबाइल नंबर और कार्य की अवधि
गाँव में झाड़ू लगाने का क्षेत्रफल (वर्ग मीटर), नालियों की कुल लंबाई (मीटर) और सी.एस.सी. की संख्या
कार्य आदेश के अनुसार कार्य अंतराल
कार्य करने का दिनांकवार इंद्राज एवं कुल कार्य दिवस
फर्म के प्रतिनिधि के हस्ताक्षर तथा चैक करने वाले अधिकारी (सरपंच / LDC / VDO) के हस्ताक्षर, नाम व पद
बजट घोषणा वर्ष 2025-26 के अंतर्गत अटल ज्ञान केंद्रों की स्थापना एवं क्रियान्विति के संबंध में दिशा-निर्देश
बजट घोषणा वर्ष 2025-26: अटल ज्ञान केंद्रों की स्थापना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज) राजस्थान सरकार द्वारा बजट घोषणा वर्ष 2025-26 के अंतर्गत प्रथम चरण में 3 हजार से अधिक आबादी वाले 2082 ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर अटल ज्ञान केंद्रों की स्थापना और क्रियान्विति के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
प्रमुख बिंदु एवं वित्तीय प्रावधान
केंद्र राशि: प्रत्येक अटल ज्ञान केंद्र हेतु केंद्र राशि रु. 12.50 लाख का व्यय षष्ठम राज्य वित्त आयोग के दिशा-निर्देश क्रमांक 347 दिनांक 28.01.2025 के बिंदु संख्या 3(iv) 'सामुदायिक केंद्रों का निर्माण एवं रख-रखाव कार्य' (जिसमें पुस्तकालय एवं वाचनालयों का निर्माण, फर्नीचर यथा कुर्सी, टेबल आदि) के तहत किया जा सकेगा।
इंटरनेट सुविधा: 15वें वित्त आयोग के दिशा-निर्देश क्रमांक 301 दिनांक 15.02.2022 के बिंदु संख्या 8 'सार्वजनिक पुस्तकालय' के तहत इंटरनेट सुविधा प्राप्त करने हेतु एकबारीय लागत एवं आवर्ती व्यय का उपयोग किया जा सकेगा।
कंप्यूटर क्रय: षष्ठम राज्य वित्त आयोग के दिशा-निर्देश के बिंदु संख्या (ब)(1) 'सूचना प्रौद्योगिकी/ई-गवर्नेंस/डेटा बेस का उपयोग' के तहत प्रति ग्राम पंचायत 4 कंप्यूटर क्रय किए जा सकेंगे।
अटल ज्ञान केंद्रों की स्थापना हेतु निर्धारित समय सीमा
प्रशासनिक स्वीकृति जारी करना - दिनांक 15.06.2025 तक
तकनीकी स्वीकृति जारी करना - दिनांक 30.06.2025 तक
वित्तीय स्वीकृति जारी करना - दिनांक 05.07.2025 तक
निविदा जारी संबंधित कार्यवाही - दिनांक 15.07.2025 तक
अटल प्रेरकों का चयन
प्रथम चरण में चयनित 2082 ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर अटल ज्ञान केंद्रों की स्थापना के उपरांत निर्धारित प्रक्रिया द्वारा आउटसोर्सिंग के माध्यम से अटल प्रेरकों का चयन किया जाएगा। अटल प्रेरक मानदेय का भुगतान 15वें वित्त आयोग के दिशा-निर्देश के बिंदु संख्या 13 के तहत अन्य बुनियादी सेवाओं/संवर्धित सेवाओं के आवर्ती व्यय और आवश्यक रूप से अन्य प्रशासनिक खर्च (10 प्रतिशत की सीमा भीतर) के तहत किया सकेगा। यह वित्त विभाग की आईडी संख्या 332500866 दिनांक 02.06.2025 द्वारा अनुमोदित है।
प्रधान मंत्री आवास योजना - ग्रामीण: मॉडल डिज़ाइन 2 और 3
प्रधानमंत्री आवास योजना - ग्रामीण
यह दस्तावेज़ प्रधानमंत्री आवास योजना - ग्रामीण के तहत मॉडल डिज़ाइन 2 और मॉडल डिज़ाइन 3 के संरचनात्मक प्लान और 3D मॉडल को प्रदर्शित करता है। ग्राम पंचायत और ग्रामीण उपयोगकर्ताओं के लिए यह जानकारी आवास निर्माण के लिए उपयोगी डिज़ाइन समझने में सहायक है।
मुख्य बिंदु:
मॉडल डिज़ाइन - 2: इसमें मल्टीपर्पस रूम (3.2M X 2.7M), स्टोर (2M X 2.7M), किचन (2.4M X 2.4M), बाथ, टॉयलेट और लॉबी/वरांडा शामिल हैं।
मॉडल डिज़ाइन - 3: इसमें दो मल्टीपर्पस रूम (3M X 2.7M और 3M X 2.6M), कुकिंग स्पेस, स्टोरेज, टॉयलेट, वॉशिंग एरिया और टैंक का प्रावधान दिया गया है।
नोट: यह विवरण केवल योजना के मॉडल डिज़ाइन और प्लान के दृश्यों पर आधारित है।
प्रधान मंत्री आवास योजना (ग्रामीण) शपथ-पत्र प्रारूप
प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) शपथ-पत्र प्रारूप
यह दस्तावेज़ प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत स्वयं के आवास निर्माण हेतु अनुदान या सहायता राशि प्राप्त करने के लिए आवेदक द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले शपथ-पत्र का प्रारूप है।
मुख्य बिंदु:
आवेदक का देश में अन्यत्र कोई पक्का मकान नहीं है।
आवास निर्माण हेतु उपलब्ध भूखंड आवेदक के स्वयं के स्वामित्व का है।
पूर्व में किसी आवासीय योजना की सब्सिडी या लाभ नहीं लिया गया है।
परिवार के किसी भी सदस्य की वार्षिक आय 1.20 लाख रुपए से कम है।
भूखंड रिक्त या कच्चा आवास है।
सरकार द्वारा निर्धारित अनुदान राशि से न्यूनतम 25 वर्गमीटर प्लिंथ क्षेत्र का नवीन पक्का आवास अधिकतम 12 महीने में पूर्ण करने की वचनबद्धता।
ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित स्वच्छता गतिविधियों के भुगतान के सम्बन्ध में दिशा-निर्देश
स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत स्वच्छता गतिविधियों के भुगतान संबंधी निर्देश
राजस्थान सरकार, निदेशालय, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण), पंचायती राज विभाग द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित स्वच्छता सुनिश्चित करने एवं संपादित स्वच्छता गतिविधियों के भुगतान के संबंध में आदेश क्रमांक एफ 12(परावि/एसबीएम/BSR Sanitation/2024-25/3037-44 दिनांक 05.02.2025 जारी किया गया है।
भुगतान की प्रक्रिया एवं मुख्य बिंदु:
ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित साफ-सफाई की व्यवस्था हेतु ग्रामीण विकास विभाग द्वारा स्थायी आदेश संख्या 1/2024 दिनांक 03.09.2024 के तहत 05 आइटम की दरों का निर्धारण कर संवेदक के माध्यम से निविदा आमंत्रित कर कार्य करवाए जाने के निर्देश दिए गए हैं।
मॉडल टेंडर डॉक्यूमेंट के बिंदु संख्या 27, 28, 31 के अनुसार संवेदक द्वारा किए जा रहे स्वच्छता कार्य का भुगतान मासिक आधार पर निम्नलिखित प्रक्रिया से होगा:
सफाई कार्य की ग्राम पंचायत के दैनिक रजिस्टर में प्रविष्टि / रिपोर्ट।
ग्राम पंचायत में ग्रामीण जल एवं स्वच्छता समिति की रिपोर्ट।
स्वच्छता कार्यों की ऑनलाइन पोर्टल लागू किए जाने पर ऐप की रिपोर्ट।
तकनीकी अधिकारी (कनिष्ठ तकनीकी सहायक, कनिष्ठ अभियंता, सहायक अभियंता) द्वारा सड़क एवं नाली सफाई का सत्यापन एवं समस्त 4 संधारित रजिस्टरों में इन्द्राज कर हस्ताक्षर करना।
उक्तानुसार संधारित रजिस्टर/लॉगबुक की प्रतिलिपि प्रतिमाह विकास अधिकारी को प्रस्तुत की जाएगी।
हस्ताक्षर रजिस्टर की छायाप्रतियां बिल के साथ संलग्न कर भुगतान किया सकेगा।
कार्यों के सम्पादन हेतु सामान्य वित्तीय एवं लेखा नियम, RTPP Act and Rules, ग्रामीण कार्य निर्देशिका, 15वां वित्त आयोग / राज्य वित्त आयोग के प्रावधान लागू होंगे।
SOP के अनुसार संबंधित तकनीकी अधिकारियों के निरीक्षण/सत्यापन/प्रमाणीकरण उपरांत उपयोगिता प्रमाण-पत्र जारी किए जाने के पश्चात राशि का समायोजन 15वें वित्त आयोग एवं अन्य के दिशा-निर्देशों के अनुसार किया जाएगा।
पन्द्रहवें वित्त आयोग (2021-26) की सिफारिशों के तहत पंचायती राज संस्थाओं के अनुदान उपयोग हेतु संशोधित दिशा-निर्देश
पन्द्रहवें वित्त आयोग दिशा-निर्देश 2021-26
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा पन्द्रहवें वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत पंचायत अवधि (2021-26) के दौरान पंचायती राज संस्थाओं को देय अनुदान राशि के उपयोग एवं कार्यान्वयन हेतु संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं (क्रमांक: एफ.165(13)पंचारावि/ले.ब./15वां वि.आ./दिशा-निर्देश/2021-22/301, दिनांक 15-2-2022)।
प्रमुख बिंदु एवं अनुदान का विभाजन
टाइड-ग्रैंड (Tied-Grant): कुल अनुदान का 60 प्रतिशत भाग राष्ट्रीय प्राथमिकताओं जैसे पेयजल आपूर्ति, वर्षा जल संचयन और स्वच्छता के लिए निर्धारित किया गया है।
अनअटायड-ग्रैंड (Untied-Grant): कुल अनुदान का 40 प्रतिशत भाग पंचायती राज संस्थाओं द्वारा मूलभूत सेवाओं में सुधार लाने के लिए उपयोग किया जा सकेगा।
अनुदान हस्तांतरण का आधार: पंचायती राज संस्थाओं (जिला परिषदों को 5 प्रतिशत, पंचायत समितियों को 20 प्रतिशत एवं ग्राम पंचायतों को 75 प्रतिशत) में राशि का वितरण किया गया है।
मूल (Untied) अनुदान के उपयोग के मुख्य क्षेत्र
स्वास्थ्य, शिक्षा और पोषण से संबंधित गतिविधियां (जैसे टीकाकरण व कुपोषण की रोकथाम)।
ग्राम पंचायत भवनों का निर्माण और मरम्मत।
ग्राम पंचायत क्षेत्रों के अंदर और अन्तर ग्राम पंचायत सड़कों व पैदल रास्तों का निर्माण व मरम्मत।
एलईडी स्ट्रीट लाइट्स और सोलर लाइटिंग की स्थापना व रख-रखाव।
श्मशान और कब्रिस्तान का निर्माण, मरम्मत एवं रख-रखाव।
सार्वजनिक पुस्तकालय, बच्चों के पार्क, खेल का मैदान और ग्रामीण हाट।
तकनीकी एवं प्रशासनिक व्यय
15वें वित्त आयोग के तहत देय मूल (अनटायड) अनुदान का अधिकतम 10 प्रतिशत तकनीकी एवं प्रशासनिक व्ययों (जैसे संविदा पर डेटा एंट्री ऑपरेटर/इंजीनियर की सेवाएं, कंप्यूटर क्रय, इंटरनेट सुविधा, सिविल कार्यों की गुणवत्ता की जांच आदि) के लिए उपयोग किया जा सकता है।
बेंध-अनुदान (Tied Grants) के अंतर्गत प्राथमिकताएं
बेंध-अनुदान (Tied-Grant) की 50% राशि का उपयोग स्वच्छता और खुले में शौच मुक्त (ODF) स्थिति तथा शेष 50% राशि का उपयोग पेयजल आपूर्ति, जल संचयन और जल पुनर्चक्रण की बुनियादी सेवाओं के लिए किया जा सकता है।
षष्ठ राज्य वित्त आयोग की सिफारिशों के क्रियान्वयन एवं अनुदान उपयोग हेतु दिशा-निर्देश (वित्तीय वर्ष 2024-25)
षष्ठ राज्य वित्त आयोग (2020-25) दिशा-निर्देश 2024-25
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा क्रमांक एफ 165(07)पंकावि/एसएफसी/षष्ठ/दिशा-निर्देश/2024-25/347 दिनांक 28.01.2025 के अंतर्गत षष्ठ राज्य वित्त आयोग की अंतिम रिपोर्ट (2020-25) पर राज्य सरकार द्वारा की गई कार्यवाही विवरण (ATR) के अनुसार पंचायती राज संस्थाओं को देय अनुदान के उपयोग हेतु विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
अनुदान राशि का मुख्य विभाजन
मूलभूत एवं विकास कार्य (55 प्रतिशत राशि): ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था, सड़कों एवं सार्वजनिक स्थानों की नियमित सफाई, स्वच्छता, पार्कों की चारदीवारी, सामुदायिक केंद्रों का निर्माण, आंतरिक सड़कों/सी.सी. रोड व नालियों का निर्माण (अधिकतम 40% सीमा तक), इंटरनेट सुविधा, कंप्यूटर क्रय, ऑडिट फीस का भुगतान, जनप्रतिनिधियों का प्रशिक्षण और मानदेय, तथा निजी आय बढ़ाने हेतु वाणिज्यिक परिसरों का निर्माण आदि कार्य किए जा सकेंगे।
राष्ट्रीय/राज्य प्राथमिकता की योजनाएं/गतिविधियां (40 प्रतिशत राशि): सूचना प्रौद्योगिकी/ई-गवर्नेंस/डेटाबेस (प्रियासॉफ्ट, पीएफएमएस, ई-ग्राम स्वराज पोर्टल, कंप्यूटर ऑपरेटर), पेयजल/आर.ओ. प्रणाली, मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन योजना, स्वच्छता अभियान, श्री अन्नपूर्णा रसोई योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण, सौर/एल.ई.डी. लाइटें, अग्निशमन सेवाएं, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ और युवा विकास से जुड़े क्रियाकलाप।
लिंगानुकूल स्थान बनाने के लिए (2 प्रतिशत राशि): प्रत्येक पंचायती राज संस्थान में हाथ धोने की सुविधाओं सहित पृथक शौचालय, महिलाओं के उत्पीड़न से संबंधित शिकायतों के निवारण हेतु आंतरिक समितियों का प्रदर्शन पट्ट, महिलाओं की अध्यक्षता में हेल्प डेस्क तथा महिला आगंतुकों के लिए अलग बैठने की व्यवस्था।
निष्पादन के लिए प्रोत्साहन अनुदान (3 प्रतिशत राशि): वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए यदि कोई पंचायती राज संस्था अपनी स्वयं की कर/गैर-कर राजस्व (निजी आय) पिछले तीन वर्षों की औसत आय की तुलना में बढ़ाती है, तो उसे बढ़ी हुई अतिरिक्त राशि के समान प्रोत्साहन राशि का भुगतान किया जाएगा।
वित्तीय वर्ष 2024-25 हेतु आवंटन अनुपात
राज्य के स्वयं के शुद्ध कर राजस्व के 7.00 प्रतिशत हिस्से का वितरण 2011 की जनगणना के आधार पर पंचायती राज संस्थाओं एवं नगरीय स्थानीय निकायों के मध्य 73.2 एवं 26.8 प्रतिशत के अनुपात में किया गया है। जिला परिषदों को 5 प्रतिशत, पंचायत समितियों को 20 प्रतिशत और ग्राम पंचायतों को 75 प्रतिशत हिस्सा राशि वित्तीय वर्ष 2024-25 में दिए जाने की संस्कृति की गई है।
राजस्थान संपर्क पोर्टल पर प्राप्त लाल मुंह के बंदर एवं हनुमान लंगूर से संबंधित परिवादों के निस्तारण बाबत आदेश
राजस्थान संपर्क पोर्टल परिवाद निस्तारण एवं बंदर/लंगूर पकड़ने के संबंध में निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान संपर्क पोर्टल (181 सी.एम. हेल्पलाइन) पर प्राप्त होने वाले परिवादों के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
परिवादों का अंतरण: राजस्थान संपर्क पोर्टल पर लाल मुंह के बंदर (Rhesus Macaque) एवं हनुमान लंगूर (Presbytis Entellus) से संबंधित प्राप्त परिवाद संबंधित ग्राम पंचायत को भिजवाए जाने का प्रावधान है।
ग्राम पंचायत स्तर पर कार्यवाही: जिले के अधीन ग्राम पंचायतें इन बंदरों को भगाए जाने / पकड़े जाने के संबंध में आवश्यकतानुसार, नियमानुसार अपने स्तर से व्यय कर, संबंधित पेशेवर (Professionals) की मदद लेकर उचित कार्यवाही कर सकती हैं।
वन विभाग की अधिसूचना: वन विभाग की अधिसूचना दिनांक 18.02.2000 के अनुसार वन्य जीव (सुरक्षा) अधिनियम-1972 के तहत जिला कलेक्टर्स को लाल मुंह के बंदर एवं हनुमान लंगूर के संबंध में प्राधिकृत अधिकारी नियुक्त किया गया है।
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 के अंतर्गत पुराने गृहों के वि नियमितीकरण एवं पट्टा जारी करने के संबंध में दिशा-निर्देश
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश (क्रमांक: एफ.4(1) दिशा-निर्देश/विधि/पंव/2023/04, दिनांक: 11.1.23) के अनुसार राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157-पुराने गृहों के विनिियमितीकरण के अंतर्गत 300 वर्गगज एवं उससे अधिक क्षेत्रफल के भूखंड का पट्टा जारी करने के संबंध में निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
नियम संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 का नियम 157 (पुराने गृहों का विनिियमितीकरण)।
क्षेत्रफल: 300 वर्गगज संनिर्मित क्षेत्रफल से अधिक भूमि जो आवासीय परिसर के साथ उपयोग में आ रही खाली आबादी भूमि का पट्टा नियम 157(1)(ii), उपयुक्त खण्ड (i) में विनिर्दिष्ट क्षेत्रफल से अधिक क्षेत्रफल के लिए है।
शर्ते एवं प्रक्रिया: ऐसे अधिक क्षेत्रफल पर राजस्थान स्टाम्प नियम, 2004 के नियम 58 के खण्ड (ख) के अधीन गठित जिला स्तरीय समिति द्वारा सिफारिश की गई नई बाजार दरों का 25 प्रतिशत राशि जमा करके भूखंडधारी के उपयोग में आ रही कब्जा शुदा (संपूर्ण) आबादी भूमि का पट्टा जारी किया जा सकता है।
राजस्थान लोक उपापन में पारदर्शिता नियम, 2013 के नियम 16 के अंतर्गत 6.00 लाख रुपये से अधिक लागत के कार्यों हेतु सामग्री उपापन के संबंध में मार्गदर्शन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग का महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा क्रमांक एफ 27(263)ग्रावि/ग्रुप-5/जीकेण/उपापन 2015-18, जयपुर, दिनांक 29 नवम्बर 2021 के तहत राजस्थान लोक उपापन में पारदर्शिता अधिनियम, 2012 एवं राजस्थान लोक उपापन में पारदर्शिता नियम, 2013 के नियम 16 के प्रावधानों के अंतर्गत महात्मा गांधी नरेगा योजना सहित निर्माण कार्य हेतु आनुषंगिक सामग्री के उपापन के संबंध में विस्तृत मार्गदर्शन जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु एवं निर्देश
नियम संशोधन: राजस्थान राजपत्र विशेषांक में जारी अधिसूचना दिनांक 1 अक्टूबर, 2021 (G.S.R. 349) के अनुसार राजस्थान लोक उपापन में पारदर्शिता नियम, 2013 के नियम 16 के उप-नियम (1) के परन्तुक में 'पांच लाख' के स्थान पर 'छः लाख' तथा 'पचास लाख' के स्थान पर 'साठ लाख' प्रतिस्थापित किया गया है।
6.00 लाख रुपये से अधिक के कार्य: महात्मा गांधी नरेगा को छोड़कर ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा क्रियान्वित योजनाओं के अंतर्गत स्वीकृत 6.00 लाख रुपये से अधिक लागत के समस्त कार्य राजस्थान लोक उपापन में पारदर्शिता नियम, 2013 की पालना कर संपूर्ण कार्य (श्रम एवं सामग्री सहित) संकर्म निविदा (वर्क्स टेंडर) द्वारा संपादित कराए जाएंगे।
सामग्री उपापन सीमा: पंचायती राज संस्थाएं सीमित निविदा के माध्यम से अधिकतम सीमा राशि रु. 60.00 लाख तक की सामग्री का उपापन कर सकती हैं।
कार्य समिति की जिम्मेदारी: पंचायती राज संस्था द्वारा एक वित्तीय वर्ष में रु. 60.00 लाख तक की पालना कराने का उत्तरदायित्व संबंधित पंचायत समिति का होगा।
ई-उपापन प्रक्रिया: रु. 6.00 लाख से अधिक लागत (श्रम सामग्री सहित) के कार्यों हेतु सामग्री का क्रय/उपापन ई-उपापन (E-Procurement) प्रक्रिया को अपना कर ही संपादित किया जाएगा।
अधिक जानकारी एवं विस्तृत दिशा-निर्देशों के लिए कृपया मूल विभागीय आदेश पत्र का अवलोकन करें।
स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन बाबत महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन बाबत निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 18.01.2021 को 'स्वामित्व योजना' के क्रियान्वयन के संबंध में महत्वपूर्ण आदेश जारी किया गया है। राष्ट्रीय पंचायत दिवस (24 अप्रैल 2020) पर केंद्र सरकार द्वारा आरंभ की गई इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पंचायती राज पर इसके दूरगामी प्रभावों को देखते हुए राजस्व विभाग एवं पंचायती राज विभाग के संयुक्त प्रयासों से क्रियान्वयन करना है।
योजना की मुख्य बातें और प्रक्रिया
ड्रोन फोटोग्राफी और मैपिंग: भारतीय सर्वेक्षण विभाग (Survey of India) द्वारा प्रत्येक राजस्व ग्राम की आबादी भूमि का मानचित्र ड्रोन के जरिए फोटोग्राफी कर तैयार किया जाएगा।
चूना मार्किंग: ड्रोन उड़ान से पहले राजस्व ग्राम की आबादी भूमि की बाहरी सीमा (outer line) पर चार इंच चौड़ाई की चूना लाइन डालकर सीमा मार्क की जाएगी। खाली पड़े भूखंडों को भी चूना लाइन डालकर चिह्नित किया जाएगा।
सर्वे समिति का गठन: प्रत्येक राजस्व ग्राम हेतु सर्वे समिति का गठन किया जाएगा जिसमें ग्राम सेवक, दो वार्ड पंच (संबंधित राजस्व ग्राम व अन्य वार्ड पंच) और पंचायत का एक कार्मिक (कनिष्ठ लिपिक अथवा ग्राम रोजगार सहायक) शामिल होंगे। यह समिति प्राप्त इमेज मैप के अनुसार प्रत्येक भूखंड और निर्मित भवन का सर्वे कर निर्धारित प्रपत्र में जानकारी संकलित करेगी।
आपत्तियां एवं निस्तारण: ग्राम पंचायत द्वारा सर्वे प्रपत्र और इमेज मैप की प्रति पंचायत भवन एवं सार्वजनिक स्थल पर चस्पा की जाएगी। राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम-148 के प्रावधानुसार 07 दिवस के भीतर आपत्तियां दर्ज कराई जा सकेंगी, जिनका निस्तारण ग्राम सभा के माध्यम से किया जाएगा।
पट्टा वितरण: आपत्तियों के निराकरण के बाद फाइनल इमेज मैप (आईडी नंबरिंग सहित) के आधार पर संबंधित लाभार्थियों को राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के प्रावधानों के तहत पट्टा, रजिस्ट्री एवं पीडीएफ कॉपी मोबाइल नंबर पर उपलब्ध कराई जाएगी।
प्रथम चरण: राज्य में इस योजना का सबसे पहले क्रियान्वयन जैसलमेर जिले में किया जाना है।
पुराने पट्टों के पुनर्विधमान्यकरण (Revalidation) किये जाने बाबत आदेश
पुराने पट्टों का पुनर्विधमान्यकरण (Revalidation)
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा पुराने पट्टों के पुनर्विधमान्यकरण के संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
नया नियम: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में नया नियम-167क जोड़ा गया है जिसके तहत पंचायत द्वारा जारी किये गए विक्रय विलेख, पट्टा या पट्टा विलेख का पुनर्विधमान्यकरण (Revalidation) किया जा सकता है।
शर्तें: पट्टे का पुनर्विधमान्यकरण ग्राम पंचायत में उपलब्ध रिकॉर्ड से मिलान कर पट्टा नियमानुसार जारी होने की स्थिति में तथा पट्टाधारक स्वयं या उसके वारिसान द्वारा प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करने पर ही किया जाएगा।
प्रारूप: पट्टे का पुनर्विधमान्यकरण मूल पट्टे पर ही निर्धारित प्रारूप में किया जायेगा जिसमें ग्राम पंचायत की बैठक दिनांक, प्रस्ताव संख्या और पुनर्विधमान्यकरण की दिनांक का उल्लेख किया जाएगा।
हस्ताक्षर: इस प्रक्रिया में ग्राम विकास अधिकारी और सरपंच के हस्ताक्षर होंगे।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना - भूमि रूपांतरण और प्राधिकृत अधिकारी (25 जून 2018)
अधिसूचना विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना दिनांक 25 जून 2018 (एस.ओ. 77 और एस.ओ. 78) के अंतर्गत राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम सं. 13) की धाराओं के तहत प्राधिकृत अधिकारियों और उनके क्षेत्रों का निर्धारण किया गया है।
मुख्य बिंदु
एस.ओ. 77: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 107-क की उप-धारा (3) के तहत, राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 173-क के अधीन विभिन्न प्राधिकारियों को प्रयोजन और क्षेत्रफल के अनुसार प्राधिकृत किया गया है:
संबंधित ग्राम पंचायत: 100 वर्गमीटर तक वाणिज्यिक प्रयोजन (सिनेमा, मल्टीप्लेक्स, पेट्रोल पंप को अपवर्जित करते हुए) और 300 वर्गमीटर तक लोक उपयोग प्रयोजन।
संबंधित पंचायत समिति की प्रशासनिक और स्थापन समिति: 100 वर्गमीटर से अधिक किंतु 300 वर्गमीटर तक वाणिज्यिक प्रयोजन (सिनेमा, मल्टीप्लेक्स, पेट्रोल पंप को छोड़कर), 300 वर्गमीटर से अधिक किंतु 900 वर्गमीटर तक लोक उपयोग प्रयोजन, तथा 300 वर्गमीटर तक चिकित्सा सुविधा प्रयोजन।
संबंधित जिला परिषद की प्रशासनिक और स्थापन समिति: 300 वर्गमीटर से अधिक वाणिज्यिक प्रयोजन, 900 वर्गमीटर से अधिक लोक उपयोग प्रयोजन, तथा 300 वर्गमीटर से अधिक चिकित्सा सुविधा प्रयोजन।
राज्य सरकार: किसी भी क्षेत्र के लिए सिनेमा, मल्टीप्लेक्स, पेट्रोल पंप से संबंधित वाणिज्यिक प्रयोजन, औद्योगिक क्षेत्र/औद्योगिक संपदा प्रयोजन, और सौर या वायु शक्ति संयंत्र की स्थापना।
एस.ओ. 78: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 107-ख की उप-धारा (1) के तहत, संबंधित जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (Chief Executive Officer) को राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 173-ख के अधीन प्राधिकृत अधिकारी के कृत्यों का पालन करने के लिए प्राधिकृत किया गया है।
आदेश संख्या: संख्या एफ.4(93)सीएलूंग/नोटि./लीगल/पी आर/2018/833 और संख्या एफ.4(93)सीएलूंग/नोटि./लीगल/पी आर/2018/834 जारीकर्ता: कुंजी लाल मीणा, शासन सचिव (राज्यपाल के आदेश से)
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग अधिसूचना - भूमि रूपांतरण और प्राधिकृत अधिकारी (25 जून 2018)
अधिसूचना विवरण
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना दिनांक 25 जून 2018 (एस.ओ. 77 और एस.ओ. 78) के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 107-क एवं 107-ख के अंतर्गत विभिन्न प्राधिकृत अधिकारियों को शक्तियों का प्रत्यायोजन किया गया है।
मुख्य बिंदु
संबंधित ग्राम पंचायत: 100 वर्गमीटर तक वाणिज्यिक प्रयोजन (सिनेमा, मल्टीप्लेक्स, पेट्रोल पंप को अपवर्जित करते हुए) तथा 300 वर्गमीटर तक लोक उपयोग प्रयोजन के लिए प्राधिकृत।
संबंधित पंचायत समिति की प्रशासनिक और स्थापन समिति: 100 वर्गमीटर से अधिक किंतु 300 वर्गमीटर तक वाणिज्यिक प्रयोजन (सिनेमा, मल्टीप्लेक्स, पेट्रोल पंप को छोड़कर), 300 वर्गमीटर से अधिक किंतु 900 वर्गमीटर तक लोक उपयोग प्रयोजन, और 300 वर्गमीटर तक चिकित्सा सुविधा प्रयोजन के लिए प्राधिकृत।
संबंधित जिला परिषद की प्रशासनिक और स्थापन समिति: 300 वर्गमीटर से अधिक वाणिज्यिक प्रयोजन (सिनेमा, मल्टीप्लेक्स, पेट्रोल पंप को छोड़कर), 900 वर्गमीटर से अधिक लोक उपयोग प्रयोजन, और 300 वर्गमीटर से अधिक चिकित्सा सुविधा प्रयोजन के लिए प्राधिकृत।
राज्य सरकार: किसी भी क्षेत्र के लिए सिनेमा, मल्टीप्लेक्स, पेट्रोल पंप, औद्योगिक क्षेत्र/औद्योगिक संपदा प्रयोजन, तथा सौर या वायु शक्ति संयंत्र की स्थापना के लिए प्राधिकृत।
एस.ओ. 78 के तहत: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 107-ख की उप-धारा (1) के अंतर्गत संबंधित जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) को प्राधिकृत किया गया है।
आदेश क्रमांक: संख्या एफ.4(93)सीएल यूं/नोटि./लीगल/पीआर/2018/833 और 834 हस्ताक्षरकर्ता: कुंजी लाल मीणा, शासन सचिव, राज्यपाल के आदेश से
राजस्थान पंचायती राज (दूसरा संशोधन) नियम, 2018 - आबादी भूमि उपयोग परिवर्तन और उप-विभाजन
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 27 मार्च 2018 की अधिसूचना (सं. एफ.4(7)अमे/रूल्स/लीगल/पी.आर./2014/926 दिनांक 10.7.2018) के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज (दूसरा संशोधन) नियम, 2018 जारी किए गए हैं। यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र में प्रकाशित की गई है।
मुख्य बिंदु और प्रावधान
नया अध्याय-9क का अंतःस्थापन: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में नया अध्याय-9क जोड़ा गया है जो आबादी क्षेत्र में भूमि के उपयोग के परिवर्तन (नियम 173-क) तथा भू-खंडों के उप-विभाजन व पुनर्गठन (नियम 173-ख) से संबंधित है।
संपरिवर्तन प्रभार (Conversion Charges): गैर-आवासीय प्रयोजनों के लिए आवासीय आबादी भूमि के संपरिवर्तन हेतु वाणिज्यिक, औद्योगिक, लोक उपयोग, संस्थागत, चिकित्सा सुविधा तथा सौर/पवन ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना के लिए अलग-अलग दरें निर्धारित की गई हैं।
छूट के प्रावधान: केंद्रीय या राज्य सरकार के विभागों या स्थानीय प्राधिकरणों के उपयोग, राजस्थान विनियोजन प्रोत्साहन स्कीम, 2003/2010 और तकनीकी शिक्षा संस्थान के मामलों में संपरिवर्तन प्रभारों में आंशिक या पूर्ण छूट दी गई है।
भू-खंडों का उप-विभाजन और पुनर्गठन: नियम 173-ख के तहत ग्रामीण आबादी क्षेत्र में भू-खंडों के उप-विभाजन या पुनर्गठन के लिए प्ररूप 51 में आवेदन करना होगा तथा इसके लिए निर्धारित प्रभार नियम 173-घ के अनुसार देय होंगे।
नए प्ररूप (Forms): नियमों के अंतर्गत प्ररूप 48 से लेकर प्ररूप 53 तक नए आवेदन पत्र, अनुज्ञा, पट्टा विलेख और आबादी भूमि का रजिस्टर जोड़े गए हैं।
अधिक जानकारी और विस्तृत प्रक्रियाओं के लिए संबंधित ग्राम पंचायत कार्यालय या राज ई-पंचायत पोर्टल से संपर्क करें।
वित्त विभाग, राजस्थान सरकार अधिसूचना - दिनांक 27.09.2017
वित्त विभाग अधिसूचना दिनांक 27.09.2017
यह दस्तावेज़ राजस्थान सरकार के वित्त विभाग (कर खंड), जयपुर द्वारा जारी की गई अधिसूचना है, जिसका क्रमांक [No.F.2(11)FD/Tax/2011-100] दिनांक 27.09.2017 है।
मुख्य बिंदु:
यह अधिसूचना पंजीकरण अधिनियम, 1908 (1908 का केंद्रीय अधिनियम संख्या XVI) की धारा 88 की उप-धारा (1) के खंड (d) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए जारी की गई है।
राज्य सरकार द्वारा यह निर्देश दिया गया है कि ग्राम पंचायत के सचिव के लिए, जो अपनी पदीय क्षमता में किसी लिखत (instrument) को निष्पादित करने के लिए सक्षम प्राधिकारी है, यह आवश्यक नहीं होगा कि वह किसी भी पंजीकृत अधिकारी (Registering Officer) के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हो या उससे संबंधित किसी भी कार्यवाही में उपस्थित रहे।
यह आदेश राज्यपाल की आज्ञा से हर्धेश कुमार जुनेजा, शासन उप सचिव द्वारा जारी किया गया है तथा आवश्यक कार्रवाई हेतु संबंधित विभागों को प्रेषित किया गया है।
राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2013 - आबादी क्षेत्र के पुराने मकानों के पट्टा जारी करने के संबंध में अधिसूचना
राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2013
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा अधिसूचना संख्या No.F.4(7)Ame./Rules/Legal/PR/2012/35 दिनांक 11-2-2013 जारी की गई है। यह अधिसूचना राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम संख्या 13) की धारा 102 द्वारा प्रद शक्तियों के तहत राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन करने के लिए है।
मुख्य बिंदु और नियम संशोधन:
इन नियमों को राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2013 कहा गया है।
नियम 157 की उप-नियम (1) में संशोधन किया गया है जिसके अनुसार आबादी भूमि में स्थित पुराने मकानों के लिए प्रपत्र XXIII-A में पट्टा जारी किया जा सकता है।
300 वर्ग गज तक का क्षेत्र या निर्मित क्षेत्र (25 प्रतिशत निर्मित क्षेत्र सहित):
50 वर्ष से अधिक पुराने मकानों के लिए शुल्क: रु. 100/-
नियमों के प्रारंभ होने की तिथि से ठीक पहले पचास वर्षों के दौरान निर्मित मकानों के लिए शुल्क: रु. 200/-
300 वर्ग गज से अधिक के क्षेत्र पर, ऐसे अतिरिक्त क्षेत्र के लिए राजस्थान स्टाम्प नियम, 2004 के नियम 58 के खंड (b) के तहत जिला स्तरीय समिति द्वारा अनुशंसित बाजार दरों का 25 प्रतिशत देय होगा।
बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे) सूची में शामिल परिवारों से उप-खंड (a) के तहत कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा और उप-खंड (i) के उप-खंड (b) के तहत केवल 10 प्रतिशत शुल्क लिया जाएगा।
राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 73 के अन्तर्गत पंचायतों की आमदनी में बढ़ोतरी करने की अपेक्षा बाबत
परिचय एवं उद्देश्य
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी पत्र क्रमांक एफ.1(11)(परावि)लेखा/निजी आय/2011-12/11186 दिनांक 7-11-2012 के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 73 के अंतर्गत ग्राम पंचायतों की निजी आय में बढ़ोतरी करने और वित्तीय स्वतंत्रता प्राप्त करने के संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु एवं निर्देश
वित्तीय स्वतंत्रता एवं निजी आय: राज्य वित्त आयोग की सिफारिश के अनुसार पंचायतों को अपनी निजी आय प्रति वर्ष 1.50 से 2.00 लाख रुपये बढ़ानी चाहिए ताकि वे कार्यों का प्रभावशाली तरीके से क्रियान्वयन कर सकें।
बजट घोषणा 2011-12: माननीय मुख्यमंत्री महोदय की बजट घोषणा के अनुसार, यदि कोई पंचायत पूर्व वर्ष के मुकाबले 2.00 लाख रुपये की निजी आय बढ़ाएगी, तो पंचायत समिति/जिला परिषद की सिफारिश के आधार पर राज्य सरकार द्वारा अतिरिक्त 2.00 लाख रुपये की मैंचिंग राशि (अनुदान) प्रदान की जाएगी।
राजस्व वृद्धि के स्रोत: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 33 और 34 के अनुसार पंचायतें सफाई, रोशनी, जल-निकास, सड़कों के रखरखाव के साथ-साथ कर, फीस, प्रमारों और शास्तियों में वृद्धि कर सकती हैं। हवेलियों, बड़े पक्के ग्रहों, ढाबों, होटलों, ऑटोमोबाइल सर्विस स्टेशनों, मरम्मत की दुकानों, पेट्रोल/डीजल पंपों आदि पर फीस उद्ग्रहित करके गैर राजस्व में वृद्धि की जा सकती है।
वाणिज्यिक डीएलसी दर: सड़क के किनारे स्थित दुकानों के संबंध में राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 (3) के अनुसार वाणिज्यिक डी.एल.सी. दर से कम से कम दोगुनी वसूली की जा सकती है या नियमानुसार बेदखली नोटिस/वाणिज्यिक पट्टा बनाकर पंचायत की आय बढ़ाई जा सकती है।
फीसों की दरें (नियम 68)
नियम 68 के अंतर्गत जनता को दी जाने वाली सेवाओं के लिए अधिकतम फीस दरें निर्धारित की गई हैं, जैसे:
आवेदन फीस: 10/- रुपये
निवास, जाति, आय प्रमाण पत्र: 20/- रुपये (अ.जा./अ.ज.जा. हेतु 5/- रुपये)
बिजली/पानी कनेक्शन हेतु अनापत्ति: 40/- रुपये (अ.जा./अ.ज.जा. हेतु 5/- रुपये)
भवन निर्माण स्वीकृति (पक्का निर्माण): 2/- रुपये प्रति वर्ग मीटर
पेट्रोल/डीजल पंप: 2500/- रुपये प्रति वर्ष
ढाबा/रेस्टोरेंट: 1000/- रुपये प्रति वर्ष
मोबाइल टॉवर: 10000/- रुपये प्रति वर्ष
अतिथि गृह/होटल/मोटल/विश्राम गृह: 5 कक्ष तक 1000/- रुपये प्रति वर्ष से लेकर 16 और अधिक कमरे तक 5000/- रुपये प्रति वर्ष
फीस/कर लागू करने एवं वसूली की प्रक्रिया
पंचायतों को साधारण बैठक में नियम 57 के अनुसार फीस निर्धारित दरों पर वसूल करने का प्रस्ताव पारित करना होगा।
नियम 58 के अनुसार आपत्तियों के लिए एक माह का नोटिस जारी किया जाएगा।
नियम 105 के तहत मांग पर्ची (प्रारूप 5) दी जाएगी और नियम 106 के तहत 15 दिन का नोटिस देकर चल संपत्ति की कुर्की की जा सकती है।
राजस्व विभाग के माध्यम से पटवारी द्वारा करों की वसूली (नियम 62, 63, 64) की जाएगी, जिसमें पटवारी 5 प्रतिशत काटकर 95 प्रतिशत राशि पंचायत के पी.डी. लेखे या पंचायत लेखे में जमा करेगा।
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2011 - शुल्क और नियमों से संबंधित अधिसूचना
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2011
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा अधिसूचना संख्या No. F.4 (7) Am/Rule/Legal/PR/2010/ 1348 दिनांक 12-8-2011 जारी की गई है। इसके माध्यम से राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
नियम 68 के तहत पंचायत द्वारा लिए जाने वाले शुल्क (Fees):
आवेदन शुल्क (Application fees): Rs. 10/-
निवास, जाति, आय प्रमाण पत्र आदि: Rs. 20/- (SC/ST के लिए 50% छूट)
उत्तराधिकार प्रमाण पत्र आदि: Rs. 40/- (SC/ST के लिए 50% छूट)
बिजली या पाईप द्वारा पानी के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC): Rs. 40/- (SC/ST के लिए 50% छूट)
आबादी भूमि क्रय हेतु आवेदन: Rs. 20/-
साइट प्लान तैयार करने और साइट निरीक्षण का खर्च: Rs. 50/-
राशन कार्ड (आवेदन पत्र और छपाई सहित): Rs. 10/-
30 दिन के बाद जन्म और मृत्यु का पंजीकरण: Rs. 20/-
भवन निर्माण की अनुमति: पक्का निर्माण के लिए Rs. 2/- प्रति वर्ग मीटर
पंचायत द्वारा पहले से स्वीकृत साइट प्लान में जोड़/बदलाव (Addition/Alteration): Rs. 100/-
बिना अनुमति अनाधिकृत निर्माण का नियममीकरण (Regularization): Rs. 10/- प्रति वर्ग मीटर (अधिकतम Rs. 1000/- तक)
पेट्रोल/डीजल पंप: Rs. 2500/- प्रति वर्ष
ढाबा/रेस्टोरेंट: Rs. 1000/- प्रति वर्ष
अन्य कोई व्यावसायिक इकाई: Rs. 200/- प्रति वर्ष
माइनिंग एनओसी के लिए प्रस्ताव: Rs. 5000/-
मोबाइल टॉवर: Rs. 10000/- प्रति वर्ष
गेस्ट हाउस/होटल/मोटेल/रेस्ट हाउस हेतु शुल्क: 5 कमरे तक Rs. 1000/- प्रति वर्ष, 6 से 10 कमरे Rs. 2500/- प्रति वर्ष, 11 से 15 कमरे Rs. 4000/- प्रति वर्ष, 16 या अधिक कमरे Rs. 5000/- प्रति वर्ष
इस अधिसूचना में बैठकों के आयोजन, समितियों, और विभिन्न नियमों के अंतर्गत वित्तीय सीमाओं और शक्तियों में भी संशोधन किए गए हैं।