Reform उत्सव-2026 दौरान जन योजना अभियान (PPC) वर्ष 2027-28 हेतु दिनांक 02 अक्टूबर, 2026 को विशेष ग्राम सभा आयोजन के संबंध में दिशा-निर्देश
Reform उत्सव-2026 विशेष ग्राम सभा दिशा-निर्देश
राजस्थान सरकार, पंचायती राज विभाग द्वारा Reform उत्सव-2026 के दौरान 02 अक्टूबर, 2026 को विशेष ग्राम सभा के आयोजन हेतु दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु एवं उद्देश्य
अभियान का उद्देश्य: पंचायतों में सहभागी, समावेशी, साक्ष्य-आधारित एवं अभिसरण (Convergence) पर आधारित पंचायत विकास योजनाओं (PDPs) का प्रभावी निर्माण एवं क्रियान्वयन करना।
दिनांक: 02 अक्टूबर, 2026 को विशेष ग्राम सभा का आयोजन।
सहभागिता: जनप्रतिनिधियों, पंचायत कर्मियों, संबंधित विभागों, SHGs एवं अन्य हितधारकों की भागीदारी सुनिश्चित करना।
प्रमुख गतिविधियां: केंद्र एवं राज्य योजनाओं का अभिसरण, GPDP, BPDP एवं DPDP का समयबद्ध निर्माण, नोडल अधिकारी एवं सुविधा प्रदाताओं की नियुक्ति, TMP पोर्टल पर PPC प्रशिक्षण पब्लिश करना, ग्राम सभा GPDP पोर्टल पर अपलोड करना, तथा नागरिक-केंद्रित योजनाओं एवं सुधारों का प्रचार-प्रसार।
सभी संबंधित ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों को निर्देशित किया गया है कि वे 02 अक्टूबर, 2026 की विशेष ग्राम सभा में 7 विभागों की 13 गतिविधियों के आमजन को मिलने वाले लाभ एवं लाभ प्राप्ति की प्रक्रिया की जानकारी प्रदान करें।
ग्रामीण सेवा शिविर 2026 के आयोजन एवं व्यय स्वीकृति बाबत
ग्रामीण सेवा शिविर 2026 का आयोजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ 165(7)ले.ब./परावि/एसएफसी-6/2025-26/ के अनुसार ग्रामीण सेवा शिविर-2026 का आयोजन दिनांक 12 जून, 2026 से 15 जुलाई, 2026 तक किया जाना निर्धारित किया गया है।
शिविर से संबंधित मुख्य बिंदु
अवधि: प्रत्येक ग्राम पंचायत मुख्यालय पर एक दिवसीय शिविर का आयोजन 12 जून, 2026 से 15 जुलाई, 2026 के दौरान किया जाएगा।
समय: शिविर का समय प्रातः 09:30 बजे से सायं 06:00 बजे तक अथवा कार्य समाप्ति तक रहेगा।
स्थान: शिविरों का आयोजन पंचायत भवन, स्कूल भवन या उपलब्ध अन्य सार्वजनिक स्थानों पर किया जाएगा।
व्यवस्थाएं: आगंतुकों के लिए पेयजल की समुचित व्यवस्था, मेज, कुर्सियां, दरियां और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं ग्राम पंचायत द्वारा की जाएंगी।
वित्तीय प्रावधान एवं व्यय की स्वीकृति
षष्ठ राज्य वित्त आयोग के तहत पंचायती राज संस्थाओं को देय अनुदान राशि के उपयोग के संबंध में विभागीय पत्रांक 347 राजकाज क्रमांक 13247621 दिनांक 28.01.2025 द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के बिंदु संख्या (अ) (3) (XIII) के अंतर्गत प्रति ग्राम पंचायत, अधिकतम राशि रु. 15,000/- का व्यय/उपयोग, षष्ठ राज्य वित्त आयोग के अंतर्गत उपलब्ध अनुदान राशि से व्यय करने की सहमति प्रदान की जाती है। यह सहमति वित्त विभाग की आई.डी. संख्या 332601019 दिनांक 11.06.2026 द्वारा अनुमोदित है।
ग्रामीण सेवा शिविर-2026: जन-कल्याण अभियान के आयोजन हेतु दिशा-निर्देश
ग्रामीण सेवा शिविर-2026 जन-कल्याण अभियान
राजस्थान सरकार के राजस्व विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, राज्य में जन-कल्याण योजनाओं को आमजन तक पहुँचाने के लिए 12 जून, 2026 से 15 जुलाई, 2026 तक "ग्रामीण सेवा शिविर-2026" का आयोजन किया जाएगा। इस अभियान में राजस्व विभाग के अतिरिक्त 21 विभागों की सहभागिता सुनिश्चित की गई है, और इसका नोडल विभाग राजस्व एवं सहायक नोडल विभाग पंचायती राज रहेगा।
शिविर का स्वरूप और समय
प्रत्येक ग्राम पंचायत मुख्यालय पर एक दिवसीय शिविर का आयोजन किया जाएगा।
शिविर का समय प्रातः 09:30 बजे से सांय 06:00 बजे तक (अथवा कार्यसमाप्ति तक) रहेगा।
आगामी शिकायतों का मौके पर ही निस्तारण सुनिश्चित किया जाएगा ताकि राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँच सके।
शिविर में शामिल प्रमुख विभागों के कार्य
राजस्व विभाग: राजस्व अभिलेख/खातों का शुद्धिकरण, आपसी सहमति से खातों का विभाजन, रास्ते के प्रकरणों का निस्तारण, भूमिहीन किसानों को भूमि आवंटन, जाति/मूल निवास/हैसियत प्रमाण-पत्र जारी करना आदि।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग: प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत पट्टा वितरण व किस्त जारी करना, मनरेगा, आजीविका (SHG), IHHL स्वीकृतियां, जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करना।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग: मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य जांच, टीकाकरण, टीबी मुक्त भारत अभियान, पीएमजेएवाई कार्ड बनाना।
अन्य विभाग: पशुपालन, ऊर्जा, कृषि, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता, महिला एवं बाल विकास, श्रम, आपदा प्रबंधन, जल संसाधन, परिवहन, सहकारिता, शिक्षा, आयुर्वेद, सैनिक कल्याण, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी (PHED) और सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) से जुड़े विभिन्न जन-कल्याणकारी कार्य।
अभियान की संपूर्ण तैयारी, अनुश्रवण एवं समीक्षा की जिम्मेदारी जिला कलेक्टर की होगी। प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर पूर्व तैयारी हेतु अग्रिम दल का गठन किया जाएगा।
जल जीवन मिशन (JJM) के अंतर्गत नल जल मित्र के चयन और प्रशिक्षण हेतु दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग - नल जल मित्र चयन मार्गदर्शन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा जल जीवन मिशन (JJM) के अंतर्गत नल जल मित्र के चयन और प्रशिक्षण के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इस संबंध में मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य बिंदु और दिशा-निर्देश:
चयन प्रक्रिया: प्रत्येक ग्राम पंचायत में 2 नल जल मित्र का चयन किया जाना है। इसमें से एक नल जल मित्र पेयजल योजनाओं के संचालन में पूर्व अनुभव वाला तथा दूसरा बिना अनुभव वाला होगा।
वरीयता: वर्तमान में जनता जल योजना एवं अन्य पेयजल योजनाओं में कार्य कर रहे पंप चालकों को 'Recognition of Prior Learning' (RPL) के तहत प्राथमिकता दी जाएगी।
शैक्षणिक योग्यता: नए चयन किए जाने वाले नल जल मित्र के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता (जैसे 12वीं कक्षा उत्तीर्ण, 10वीं के बाद सिविल इंजीनियरिंग में 3 वर्ष का डिप्लोमा, 10वीं पास आईटीआई के साथ 2 वर्ष का अनुभव आदि) निर्धारित की गई है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम: चयनित नल जल मित्रों का प्रशिक्षण आरएसएलडीसी (RSLDC) या कौशल विकास एवं उद्यमिता विभाग के माध्यम से कराया जाएगा, जिसमें कक्षा-कक्ष प्रशिक्षण (Classroom training), प्रायोगिक प्रशिक्षण (Practical training) और ओजेटी प्रशिक्षण (OJT Training) शामिल है।
ई-पंचायत पोर्टल पर प्रविष्टि: चयनित नल जल मित्रों के नामों का विवरण ई-पंचायत पोर्टल पर अनिवार्य रूप से दर्ज किया जाना सुनिश्चित किया जाए।
अनुमोदन: जिला कलक्टर की अध्यक्षता में गठित जिला जल एवं स्वच्छता समिति (DWSM) की बैठक में इनका अनुमोदन किया जाना आवश्यक है।
राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2026 – ग्राम विकास अधिकारी की वरिष्ठता सूची से संबंधित अधिसूचना
राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2026
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 04 जून, 2026 को अधिसूचना जारी कर राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन किया गया है। इसे राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2026 कहा गया है, जो तुरंत प्रभाव से लागू हो गए हैं।
मुख्य बिंदु एवं संशोधन
नियम 285 का संशोधन: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 285 के परंतुक में खंड (iv) और (v) जोड़े गए हैं।
8 जून, 2016 या उसके पश्चात नियुक्त ग्राम विकास अधिकारी: इनकी वरिष्ठता सूची भर्ती एजेंसी से प्राप्त योग्यता/मेरिट सूची के आधार पर तैयार की जाएगी।
अनुकंपात्मक आधार पर नियुक्ति: 8 जून, 2016 या उसके पश्चात अनुकंपा के आधार पर नियुक्त ग्राम विकास अधिकारियों के मामले में वरिष्ठता उनके पदग्रहण (joining) की तारीख के आधार पर निर्धारित होगी।
राज्य स्तर पर वरिष्ठता: ग्राम विकास अधिकारी की वरिष्ठता सूची अब राज्य स्तर पर रखी जाएगी।
आदेश क्रमांक: [सं.एफ.4(09)अमेंड/रूल्स/लीगल/पीआर/2026/37]
जारीकर्ता: भारत भूषण गोयल, उप शासन सचिव, राज्यपाल के आदेश से।
ग्रामीण क्षेत्रों में चरणबद्ध रूप से स्ट्रीट लाइट/रोड लाइट व्यवस्था स्थापित किए जाने के संबंध में
ग्रामीण क्षेत्रों में स्ट्रीट लाइट और रोड लाइट व्यवस्था
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में चरणबद्ध रूप से स्ट्रीट लाइट और रोड लाइट व्यवस्था स्थापित करने के संबंध में दिशानिर्देश जारी किए गए हैं। यह पहल माननीय मंत्री महोदय, पंचायती राज विभाग द्वारा विधानसभा में की गई घोषणा के अनुपालन में है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रात्रिकालीन अंधकार की समस्या का समाधान करना और प्रत्येक गांव को प्रकाशमान बनाना है।
मुख्य उद्देश्य
ग्रामीण क्षेत्रों में रात्रि के समय सुरक्षित एवं सुगम आवागमन सुनिश्चित करना।
ग्रामों की मुख्य बस्तियों, बाजारों, सार्वजनिक स्थलों, विद्यालयों, पंचायत भवनों और स्वास्थ्य केंद्रों पर पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था उपलब्ध कराना।
ऊर्जा दक्ष एवं पर्यावरण अनुकूल प्रकाश व्यवस्था को बढ़ावा देना।
विद्युत आपूर्ति की कमी वाले क्षेत्रों में सौर ऊर्जा आधारित स्ट्रीट लाइट/रोड लाइट की स्थापना को प्रोत्साहित करना।
ग्रामीण क्षेत्रों में दुर्घटनाओं एवं आपराधिक गतिविधियों की संभावना को कम करना तथा ग्रामीण विकास को गति प्रदान करना।
क्रियान्वयन क्षेत्र एवं प्राथमिकता
प्रत्येक ग्राम पंचायत में सभी ग्रामीण क्षेत्रों, आबादी क्षेत्रों, बाजारों, मुख्य मार्गों, आंतरिक मार्गों और अन्य महत्वपूर्ण स्थलों पर चरणबद्ध रूप से स्ट्रीट लाइट/रोड लाइट लगाई जाएगी। कार्य प्रारंभ होने की प्राथमिकता में कच्ची बस्तियां, कमजोर वर्ग की बस्तियां, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति वर्ग की बस्तियां तथा मुख्य मार्ग, बाजार, बस स्टैंड, पंचायत भवन, विद्यालय, आंगनबाड़ी केंद्र एवं स्वास्थ्य केंद्र जैसे सार्वजनिक स्थान शामिल होंगे।
स्ट्रीट लाइट की स्थापना एवं विद्युत कनेक्शन
एल.ई.डी. स्ट्रीट लाइट: विद्युत वितरण निगम के खंभों पर नियमानुसार सड़क की चौड़ाई के अनुसार एल.ई.डी. लाइट लगाई जाएगी।
सौर ऊर्जा आधारित स्ट्रीट लाइट: जहां विद्युत पोल उपलब्ध नहीं हैं, विद्युत आपूर्ति नियमित नहीं है अथवा विद्युत वितरण का नेटवर्क उपलब्ध नहीं है, वहां सौर ऊर्जा आधारित स्ट्रीट लाइट स्थापित की जा सकती है।
विद्युत कनेक्शन: स्ट्रीट लाइट/रोड लाइट हेतु विद्युत कनेक्शन ग्राम पंचायत द्वारा लिया जाएगा, जो ग्रामवार, ग्राम पंचायतवार या क्षेत्रवार हो सकता है।
व्यय का प्रबंधन
राज्य वित्त आयोग षष्ठ/सप्तम के अंतर्गत जारी विभागीय दिशा-निर्देशों में मूलभूत एवं विकास कार्यों के लिए हस्तांतरित 55 प्रतिशत राशि से सड़कों एवं सार्वजनिक स्थानों पर उचित प्रकाश व्यवस्था और 40 प्रतिशत राशि का उपयोग रोड लाइट/स्ट्रीट लाइट के अंतर्गत किया जाना अनुमत है।
ई-पंचायत पोर्टल के माध्यम से क्रियान्वयन
योजना के पारदर्शी एवं प्रभावी क्रियान्वयन हेतु प्रशासनिक, तकनीकी एवं वित्तीय स्वीकृतियां जारी करना, राशि भुगतान, कार्य की जियो-टैगिंग एवं फोटो अपलोड करना तथा ऑनलाइन मॉनिटरिंग एवं प्रगति समीक्षा सभी कार्य ई-पंचायत पोर्टल के माध्यम से किए जाएंगे। जिला स्तर पर अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी, पंचायती राज इसके नोडल अधिकारी होंगे।
ग्रामीण क्षेत्रों में निर्माण कार्यों हेतु भूमि स्वामित्व एवं मार्गदर्शन बाबत निर्देश
विभागीय ग्रामीण कार्य निर्देशिका-2025 के प्रावधानों की जानकारी
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास विभाग (अनुभाग-5) द्वारा क्रमांक एफ 27(201)ग्राविफो/अनु-5/जीकेन/सरपंच संघ/2024-25 के अंतर्गत दिनांक 14-08-2025 से लागू विभागीय ग्रामीण कार्य निर्देशिका-2025 के बिंदु संख्या 10 एवं परिशिष्ट-2 के प्रावधानों के संबंध में मार्गदर्शन जारी किया गया है। यह निर्देश ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न केंद्रीय एवं राज्य प्रवर्तित योजनाओं के अंतर्गत कराए जाने वाले निर्माण कार्यों को तकनीकी, सुगमता और गुणवत्ता की दृष्टि से क्रियान्वित करने के लिए है।
मुख्य बिंदु एवं दिशा-निर्देश
भूमि स्वामित्व और विवाद से बचाव: निर्देशिका के बिंदु संख्या 10 में 'भूमि स्वामित्व तय करने एवं कार्य को विवाद से बचाने का दायित्व' और परिशिष्ट-2 में 'सामान्य तौर पर संपादित की जाने वाली गतिविधियों के लिए आवश्यक जमीन का विवरण' से संबंधित प्रावधान दिए गए हैं।
आबादी भूमि और निर्माण कार्य: नवीन आंगनबाड़ी भवन, विद्यालय, सामुदायिक भवन, पंचायत भवन, उप स्वास्थ्य केंद्र, वाचनालय, प्याऊ और नए जल स्रोत लगाने के लिए आबादी क्षेत्र में सक्षम प्राधिकारी/संस्था से अनापत्ति प्रमाण-पत्र प्राप्त कर गतिविधि के नाम आवंटन/पट्टा जारी कराना आवश्यक है।
रास्ता/गोचर/वन भूमि संबंधी प्रावधान: नदी, नाला, तालाब के भरौव क्षेत्र में, रेलवे लाइन या सड़क की सीमा में निर्माण कार्य सामान्यतः स्वीकृत नहीं होते हैं। हालांकि, सार्वजनिक शौचालय, नालियां, बोरिंग, टंकी, हैंडपंप आदि के लिए ग्राम पंचायत स्थानीय स्तर पर आपत्तियां मांगकर और कोरम में निर्णय लेकर इसे शिथिल कर सकती है, जो पंचायत के रिकॉर्ड में होना अनिवार्य है। वन/अरण्य भूमि के मामलों में संबंधित विभाग से अनापत्ति प्रमाण-पत्र प्राप्त किया जाना चाहिए।
खातेदारी भूमि और गिफ्ट/दान: किसी भी परिसंपत्ति निर्माण हेतु खातेदारी भूमि दान/समर्पण करवाकर नामांतरण, खसरा मैप में लोकेशन दर्ज करना और सीमा ज्ञान करवाना आवश्यक है। एक से अधिक खातेदार होने पर सभी की सहमति और नोटरी पब्लिक से प्रमाणीकरण अनिवार्य है।
यह आदेश शासन सचिव, ग्रामीण विकास विभाग (कृष्ण कुणाल) द्वारा जारी किया गया है और सभी संबंधित जिला कलेक्टरों, मुख्य कार्यकारी अधिकारियों तथा जिला परिषदों को आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रेषित किया गया है।
दिनांक 20 अप्रैल, 2026 को विशेष ग्राम सभा के आयोजन के संबंध में दिशा-निर्देश
दिनांक 20 अप्रैल, 2026 को विशेष ग्राम सभा का आयोजन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश (क्रमांक: एफ.15(20)पंव्रावि/विधि/वि0ग्रा0सभा/2026/ई-81146, दिनांक: 2026.04.11) के अनुसार, राज्य की सभी ग्राम पंचायत में दिनांक 20 अप्रैल, 2026 को विशेष ग्राम सभा का आयोजन किया जाना है।
ग्राम सभा के मुख्य एजेंडा एवं चर्चा योग्य बिंदु
मुख्यमंत्री विकसित ग्राम अभियान: ग्राम पंचायत के संदर्भ में सूचकांकों पर चर्चा व अनुमोदन तथा आकांक्षाओं (Aspirations)/प्राथमिकताओं (Priorities) के संबंध में चर्चा।
वृक्षारोपण अभियान (मिशन हरियालो राजस्थान): वर्ष 2024 और 2025 में लगाए गए पौधों के जीवित रहने, उनके रख-रखाव, VBGRAMG (विकसित भारत-गारंटी फॉर रोज़गार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)) योजना के तहत श्रमिक उपलब्ध करवाने तथा वर्ष 2026 में पौधारोपण के लक्ष्यों (प्रत्येक ग्राम पंचायत में 2000 या 4000 पौधे) के संबंध में चर्चा।
'वंदे गंगा' जल संरक्षण जन अभियान (25 मई से 05 जून 2026): इस 12 दिवसीय अभियान के तहत जल संरक्षण, जन-जागरूकता, जल संग्रहण संरचनाओं का निर्माण/जीर्णोद्धार, प्रभात फेरी, श्रमदान, पौधारोपण और विभिन्न विभागों द्वारा प्रस्तावित गतिविधियों के संबंध में चर्चा।
अटल ज्ञान केंद्र: बजट घोषणा के अंतर्गत ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर स्थापित किए जा रहे अटल ज्ञान केंद्रों के उद्देश्यों, प्रस्तावित गतिविधियों, संरचनाओं और कार्य निष्पादन पर चर्चा।
समस्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी (जिला परिषद) और विकास अधिकारी (पंचायत समिति) को निर्देशित किया गया है कि वे अपने क्षेत्र की सभी ग्राम पंचायतों में उपर्युक्त एजेंडे के तहत कार्यवाही सुनिश्चित करें।
ग्राम स्तर पर प्रत्येक माह के प्रथम मंगलवार को जनसुनवाई के संबंध में दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा जनसुनवाई व्यवस्था
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा माननीय पंचायती राज मंत्री महोदय की दिनांक 17.03.2026 को आयोजित बैठक में प्रदत्त निर्देशों की पालना के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
ग्राम स्तर पर जनसुनवाई: प्रत्येक माह के प्रथम मंगलवार को ग्राम स्तर पर नियमित रूप से जनसुनवाई का आयोजन किया जाएगा।
गायों का चयन: प्रत्येक ग्राम पंचायत में जनसुनवाई हेतु सबसे कम जनसंख्या वाले ग्राम का सर्वप्रथम चयन किया जाए।
अधिकारियों की मॉनीटरिंग: मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) द्वारा 2 माह में कम से कम एक बार तथा खण्ड विकास अधिकारी (BDO) द्वारा माह में कम से कम एक बार आवश्यक रूप से जन-समस्याओं के समाधान की मॉनीटरिंग सुनिश्चित की जाएगी।
जारीकर्ता: डॉ. जोगा राम, शासन सचिव एवं आयुक्त, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण (PMAY-G) के अंतर्गत लाभार्थियों के भौतिक सत्यापन एवं उन्हें अपात्र घोषित करने हेतु यह 'रिमांड ऑफ फॉर्म' (Remand Off Form) उपयोग
यह प्रपत्र PMAY-G की स्थाई वरीयता सूची (PWL) में शामिल लाभार्थियों के ग्राम सभा द्वारा भौतिक सत्यापन के लिए है।
ग्राम सभा की बैठक में योजनान्तर्गत निर्धारित मापदण्डों के परीक्षण उपरान्त लाभार्थियों को पात्र या अपात्र घोषित कर अनुमोदन किया जाता है।
प्रपत्र में लाभार्थी का नाम, पिता/पति का नाम, गाँव का नाम, PMAY-G ID एवं PWL में वरीयता क्रमांक दर्ज करने का स्पष्ट प्रावधान है।
अपात्रता के मुख्य कारण (मापदंड):
प्रपत्र में अपात्रता के 16 बिंदु दिए गए हैं, जिनमें से किसी एक का होना अपात्रता (Remand Off) के लिए पर्याप्त है:
पूर्व में मकान होना या किसी आवास योजना से लाभान्वित होना।
लाभार्थी की मृत्यु हो जाना (तथा परिवार में कोई न होना) या ग्राम पंचायत से पलायन कर जाना।
किसी भी प्रकार का वाहन (मोटरसाईकिल, टेम्पो, कार, जीप, नाव) या 3-व्हीलर/4-व्हीलर मशीनरी होना।
किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) की लिमिट 50,000 रुपये से अधिक होना।
परिवार के किसी सदस्य का राजकीय सेवा में होना, गैर कृषि उद्यम में पंजीकृत होना या मासिक आय 10,000 रुपये होना।
आयकर (Tax) या पेशेवर कर (Professional Tax) का भुगतान करने वाला होना।
घर में फ्रीज या बेसिक फोन होना।
स्वयं की 2.5 एकड़ जमीन के साथ कृषि यंत्र होना, 5.0 एकड़ सिंचित भूमि होना, या कम से कम 7.5 एकड़ भूमि/1 सिंचाई उपकरण होना।
सोलहवाँ वित्त आयोग (2026-31): मुख्य रिपोर्ट और संस्तुतियां
सोलहवाँ वित्त आयोग (2026-31) की मुख्य रिपोर्ट
यह पोस्ट सोलहवें वित्त आयोग (2026-31) की मुख्य रिपोर्ट पर आधारित है। आयोग का गठन भारतीय संविधान के अनुच्छेद 280 के खंड (1) और वित्त आयोग अधिनियम, 1951 के प्रावधानों के तहत भारत के राष्ट्रपति द्वारा किया गया था। आयोग के अध्यक्ष डॉ. अरविंद पनगढ़िया हैं।
मुख्य बिंदु और संस्तुतियां
संस्तुति अवधि: 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक पाँच वर्ष की अवधि।
ऊर्ध्वाधर हस्तांतरण (Vertical Devolution): आयोग ने विभाज्य पूल में राज्यों की हिस्सेदारी को 41 प्रतिशत के मौजूदा स्तर पर बनाए रखने की सिफारिश की है।
क्षैतिज हस्तांतरण (Horizontal Devolution): राज्यों के बीच कर राजस्व के बंटवारे के लिए जनसंख्या (2011), जनसांख्यकीय प्रदर्शन, क्षेत्रफल, वन आवरण, प्रति व्यक्ति जीएसडीपी दूरी और जीएसडीपी में योगदान जैसे मानदंडों को शामिल किया गया है।
स्थानीय निकाय अनुदान: ग्रामीण स्थानीय निकायों (आरएलबी) और शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) के लिए अनुदानों को मूल और निष्पादन घटकों में वर्गीकृत किया गया है।
आपदा प्रबंधन वित्तपोषण: आपदा जोखिम प्रबंधन के तहत एसडीआरएफ और एसडीएमएफ के लिए 2026-31 की अवधि हेतु कुल ₹2,04,401 करोड़ के कार्पर्स की सिफारिश की गई है।
राजस्थान पंचायती राज संस्थाओं के जनप्रतिनिधियों के मानदेय में वृद्धि की अधिसूचना
पंचायती राज संस्थाओं के जनप्रतिनिधियों के मानदेय में संशोधन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 के नियम 27 से 30 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित सदस्यों एवं जनप्रतिनिधियों के मानदेय की दरों में संशोधन किया गया है। यह अधिसूचना माननीय मुख्यमंत्री महोदय द्वारा दिनांक 27.02.2026 को वित्त एवं विनियोग विधेयक (बजट 2026-27) पर चर्चा की घोषणाओं के बिंदु सं.-69 के क्रम में जारी की गई है।
संशोधित मानदेय की दरें
जिला प्रमुख, जिला परिषद: वर्तमान मानदेय 16,698/- रुपये से बढ़कर 18,368/- रुपये प्रति माह
प्रधान, पंचायत समिति: वर्तमान मानदेय 11,689/- रुपये से बढ़कर 12,858/- रुपये प्रति माह
सरपंच, ग्राम पंचायत: वर्तमान मानदेय 6,679/- रुपये से बढ़कर 7,347/- रुपये प्रति माह
मुख्य बिंदु एवं निर्देश
जनप्रतिनिधियों को देय मानदेय का भुगतान राज्य वित्त आयोग के तहत मिलने वाली अनुदान राशि से किया जाएगा।
यह अधिसूचना वित्त (व्यय-5) विभाग की आईडी संख्या 332600452 दिनांक 19.03.2026 से प्राप्त सहमति के अनुसरण में जारी की गई है।
मानदेय में यह वृद्धि 01.04.2026 (April Paid in May) से प्रभावी होगी।
परिसंपति हस्तांतरण फॉर्मेट
परिसंपति हस्तांतरण फॉर्मेट
पंचायती राज संस्थाओं की बैठकों के कार्यवाही विवरण संधारण के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
पंचायती राज संस्थाओं की बैठकों के संबंध में परिपत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा पंचायती राज संस्थाओं की बैठकों के कार्यवाही विवरण (Minutes of Meetings) के संधारण और पालना के संबंध में परिपत्र जारी किया गया है। यह दस्तावेज सभी ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों के लिए बैठकों की कार्यप्रणाली में एकरूपता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने हेतु जारी किया गया है।
मुख्य दिशा-निर्देश एवं बिंदु
हिन्दी भाषा में अभिलेखन: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम-44 के अंतर्गत ग्राम पंचायत स्तर पर सचिव, पंचायत समिति स्तर पर विकास अधिकारी और जिला परिषद स्तर पर मुख्य कार्यकारी अधिकारी द्वारा कार्यवाही विवरण अनिवार्य रूप से हिन्दी में लिखा जाना चाहिए।
हस्ताक्षर और उपस्थिति: बैठकों में उपस्थित सदस्यों की उपस्थिति, उनके हस्ताक्षर तथा लिए गए विनििश्चय स्पष्ट रूप से दर्ज किए जाने चाहिए। कार्यवाही विवरण के अंत में बिना कोई रिक्त स्थान छोड़े हस्ताक्षर कराए जाएं ताकि बाद में कोई प्रस्ताव न जोड़ा जा सके।
निजी प्रिंटेड रजिस्टरों का प्रयोग बंद करने बाबत: राजस्थान पंचायत अधिनियम, 1953 (जो कि राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 124 के तहत निरस्त हो चुका है) के प्रपत्र संख्या 24 (नियम 164) वाले निजी प्रिंटेड कार्यवाही विवरण रजिस्टरों का उपयोग विधि विरुद्ध है। अतः इनका उपयोग तुरंत प्रभाव से बंद किया जाए और केवल सामान्य लाइनदार रजिस्टर का उपयोग किया जाए।
संकल्पों की रिपोर्टिंग: अधिनियम या नियमों के विपरीत पारित किसी संकल्प के संबंध में 24 घंटे के भीतर मुख्य कार्यकारी अधिकारी को रिपोर्ट किया जाना आवश्यक है।
प्रतियों का प्रेषण: कार्यवाही विवरण की प्रतियां संबंधित पंचायत समिति, जिला परिषद तथा सभी वार्ड पंचों, पंचायत समिति सदस्यों और जिला परिषद सदस्यों को भेजी जाएं।
पंचायत निर्णय एवं सभा सार पोर्टल: ग्राम सभा बैठक का कार्यवाही विवरण फोटो आदि के साथ पंचायत निर्णय एवं सभा सार पोर्टल पर नियमित रूप से अपलोड किया जाना सुनिश्चित किया जाए।
पंचायती राज संस्थाओं की साधारण सभा की बैठकें नियमित समयावधि में करवाने बाबत
पंचायती राज संस्थाओं की साधारण सभा की बैठकें नियमित समयावधि में करवाने के संबंध में दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा पंचायती राज संस्थाओं की साधारण सभा की बैठकें नियमित समयावधि में आयोजित कराने के संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं। पत्र के माध्यम से सभी मुख्य/अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारियों, जिला परिषद (समस्त राजस्थान) को अवगत कराया गया है कि विभिन्न स्तरों पर बैठकों का आयोजन तय समय सीमा के भीतर किया जाए।
मुख्य बिंदु और प्रावधान
ग्राम पंचायत: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा-45 के तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत की साधारण सभा की बैठक प्रत्येक पन्द्रह दिवस में कम से कम एक बार (प्रत्येक माह की दिनांक 5 एवं 20 को) आयोजित की जाती है। अवकाश होने पर आगामी दिवस को बैठक आयोजित होती है।
पंचायत समिति: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा-46 के तहत पंचायत समिति की साधारण सभा की बैठक प्रत्येक माह में कम से कम एक बार आयोजित की जाती है।
जिला परिषद: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा-46 के तहत जिला परिषद की साधारण सभा की बैठक कम से कम 45 दिन के अंतराल पर आयोजित की जाए तथा इनमें जिला स्तरीय अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए।
बैठकों की अध्यक्षता संबंधी नियम
ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद की साधारण सभा की बैठकों की अध्यक्षता क्रमशः सरपंच, प्रधान और प्रमुख द्वारा की जाती है। यदि वे किन्हीं कारणों से अनुपस्थित रहते हैं, तो अध्यक्षता उप-सरपंच, उप-प्रधान या उप-प्रमुख द्वारा की जाएगी। उनके भी अनुपस्थित रहने पर बैठक में उपस्थित वार्ड पंचों, पंचायत समिति सदस्यों या जिला परिषद सदस्यों में से किसी एक को चुनकर अध्यक्षता सौंपी जाएगी।
PMAY Notice Format
प्रधानमंत्री आवास नोटिस प्रारूप
माननीय प्रधानमंत्री महोदय की उपस्थिति में 28.02.2026 को आयोजित होने वाले राज्य स्तरीय समारोह के सीधे प्रसारण हेतु व्यवस्था के संबंध में
राज्य स्तरीय समारोह के सीधे प्रसारण हेतु दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी पत्र क्रमांक एफ 165(7)ले.ब./परावि/एसएफसी-7/2025-26/ के माध्यम से दिनांक 28.02.2026 को अजमेर में माननीय प्रधानमंत्री महोदय की उपस्थिति में आयोजित होने वाले राज्य स्तरीय कार्यक्रम के लाइव प्रसारण को ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर दिखाने हेतु व्यवस्था के संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु एवं वित्तीय स्वीकृति
दिनांक 28.02.2026 को अजमेर में होने वाले कार्यक्रम का लाइव प्रसारण जिला, ब्लॉक व ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर आयोजित किया जाना है।
इस कार्यक्रम के सीधे प्रसारण को ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर देखने हेतु समुचित व्यवस्था (जैसे टीवी, स्क्रीन, एलईडी व्यवस्था, फर्नीचर, टेंट, पेयजल व बैठक व्यवस्था) सुनिश्चित की जानी है।
षष्ठ राज्य वित्त आयोग के अंतर्गत पंचायती राज संस्थाओं को देय अनुदान राशि के उपयोग हेतु विभाग के पत्रांक 347 राजकाज क्रमांक 13247621 दिनांक 28.01.2025 द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के बिंदु संख्या-(अ)(3)(xiii) के प्रावधानों के अंतर्गत यह सहमति दी गई है।
प्रत्येक ग्राम पंचायत द्वारा इस प्रयोजन हेतु अधिकतम राशि 10,000/- रुपये तक का व्यय/उपयोग षष्ठ राज्य वित्त आयोग के अंतर्गत उपलब्ध अनुदान राशि से करने की सहमति प्रदान की जाती है।
यह सहमति वित्त विभाग की आई.डी. संख्या 332600355 दिनांक 26.02.2026 द्वारा अनुमोदित है।
जारीकर्ता: (डॉ. जोगा राम), शासन सचिव एवं आयुक्त, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
जन्म के दो अनुज्ञा (Permission) प्रकरणों के संबंध में दिशा-निर्देश जारी
जन्म-मृत्यु पंजीकरण के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
राजस्थान सरकार, आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय द्वारा दिनांक 25.02.2026 को एक परिपत्र (क्रमांक-एफ13/1/3/आरजीआई/बीएस/डीईएस/2017/158) जारी किया गया है। यह परिपत्र जन्म और मृत्यु के पंजीयन के संबंध में जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1969 और राजस्थान जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण नियम 2000 के प्रावधानों के तहत जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
विलंबित पंजीयन: जन्म की 30 दिवस से एक वर्ष की अवधि की घटनाओं का पंजीयन धारा 13(2) एवं राज्य नियम 9(2) तथा एक वर्ष से अधिक की अवधि का पंजीयन धारा 13(3) एवं राज्य नियम 9(3) के तहत जारी अनुज्ञा के आधार पर किया जाता है।
दो अनुज्ञा के प्रकरण: कई प्रकरणों में माता-पिता/संरक्षक द्वारा जन्म की विलंबित घटनाओं का पंजीयन दो अलग-अलग अनुज्ञा जारी करवाकर अलग-अलग तिथियों में करवा लिया जाता है, विशेषकर शैक्षणिक लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से।
निर्णय एवं निर्देश: जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1969 की धारा 4(3) एवं 4(4) के प्रावधान के अंतर्गत यह निर्णय लिया गया है कि जिला रजिस्ट्रार/ब्लॉक सांख्यिकी अधिकारी/रजिस्ट्रार द्वारा दोनों जन्म प्रमाण पत्रों की सत्यता की जाँच, दस्तावेजों एवं साक्ष्यों की संतुष्टि के उपरांत प्रथम बार अनुज्ञा से जारी जन्म प्रमाण पत्र को यथावत रखा जावे और दूसरा अनुज्ञा से जारी जन्म प्रमाण पत्र को निरस्त किया जावे।
संस्थागत जन्म के मामले में, यदि जन्म राजकीय या निजी चिकित्सा संस्थान में हुआ है, तो ऐसी स्थिति में चिकित्सा संस्थानों में नियुक्त उप-रजिस्ट्रार द्वारा जारी जन्म प्रमाण ही मान्य होगा।
प्रधानमंत्री आवास योजना - ग्रामीण: ग्राम सभा सत्यापन एवं अपात्रता प्रमाण पत्र प्रारूप
प्रधानमंत्री आवास योजना - ग्रामीण (PMAY-G) सत्यापन प्रमाण पत्र
कार्यालय ग्राम पंचायत, पंचायत समिति बाड़मेर ग्रामीण, जिला - बाड़मेर के अंतर्गत प्रधानमंत्री आवास योजना - ग्रामीण के लाभार्थियों के भौतिक सत्यापन और ग्राम सभा प्रस्ताव के लिए निर्धारित प्रारूप जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
ग्राम सभा सत्यापन: प्रधानमंत्री आवास योजना - ग्रामीण की स्थायी वरीयता सूची में शामिल लाभार्थियों का ग्राम सभा द्वारा भौतिक सत्यापन एवं निर्धारित 14/16 मापदंडों के परीक्षण उपरांत पात्र या अपात्र घोषित किया जाता है।
अपात्रता के मुख्य कारण: विशेष ग्राम सभा में अपात्र पाए जाने वाले लाभार्थियों के लिए निर्धारित बिंदु (जैसे पूर्व में आवास योजना से लाभान्वित होना, सरकारी सेवा में होना, तिपहिया/चारपहिया वाहन होना, 50,000 से अधिक किसान क्रेडिट कार्ड लिमिट, 10,000 मासिक आय, आयकरदाता होना आदि) शामिल हैं।
प्रमाण पत्र विवरण: इसमें लाभार्थी का नाम, पिता का नाम, गांव का नाम, PMAY-G ID, PWL में वरीयता क्रमांक तथा सरपंच, ग्राम विकास अधिकारी (VDO) और विकास अधिकारी के हस्ताक्षर हेतु प्रावधान है।
दिनांक 24 दिसंबर, 2025 को विशेष ग्राम सभा का आयोजन - विकसित भारत - रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण): वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025 बाबत
विशेष ग्राम सभा आयोजन: दिनांक 24 दिसंबर, 2025
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश (क्रमांक: एफ.15(10)पंरावि/विधि/वि0ग्रा0सं0/2024/ईफाइल 22379) के अनुसार, राज्य की सभी ग्राम पंचायतों में 24 दिसंबर, 2025 को विशेष ग्राम सभा का आयोजन किया जाना है।
इस विशेष ग्राम सभा में 'विकसित भारत - रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण): वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025' (VB-G RAM G Act, 2025), विकसित भारत पर जागरूकता, रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन जैसे विषयों पर चर्चा कर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025 की मुख्य विशेषताएँ:
125 दिनों की रोजगार गारंटी: प्रत्येक ग्रामीण परिवार के वयस्क सदस्यों को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों की मजदूरी-रोजगार की वैधानिक गारंटी दी गई है।
बेरोजगारी भत्ता: मांग प्रस्तुत करने के पश्चात निर्धारित समय-सीमा के भीतर कार्य प्रदान न किए जाने पर बेरोजगारी भत्ता भुगतान का प्रावधान है।
समय पर मजदूरी भुगतान: मजदूरी में देरी होने पर प्रत्येक विलंबित दिन का मुआवजा मजदूरी के साथ दिया जाएगा।
ग्राम स्तर पर योजना निर्माण: कार्यों की योजना ग्राम सभा में ही तय की जाएगी और ग्राम पंचायत 'विकसित ग्राम पंचायत योजना' तैयार करेगी।
कार्य श्रेणियाँ: जल सुरक्षा और संरक्षण, ग्रामीण बुनियादी ढाँचा, आजीविका संवर्धन तथा जलवायु परिवर्तन से निपटने वाले कार्य शामिल किए गए हैं।
कृषि-मजदूरी समन्वय: बुवाई एवं कटाई के व्यस्ततम समय हेतु कुल मिलाकर 60 दिनों की अवधि अधिसूचित करने का प्रावधान, जिससे कृषि कार्य निर्बाध रूप से चल सकें।
प्रशासनिक मद में वृद्धि: प्रशासनिक मद की सीमा 6% से बढ़ाकर 9% कर दी गई है।
समस्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी (जिला परिषद) और विकास अधिकारी (पंचायत समिति) को निर्देशित किया गया है कि वे अपने जिले की सभी ग्राम पंचायतों में इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें।
ग्रामीण सेवा शिविर के फॉलोअप शिविर 17 दिसंबर 2025 से 24 दिसंबर 2025 तक आयोजित करने बाबत
ग्रामीण सेवा शिविर के फॉलोअप शिविर आयोजन के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा वर्तमान सरकार के 02 वर्ष का कार्यकाल पूर्ण होने के उपलक्ष्य में ग्रामीण सेवा शिविर के फॉलोअप शिविर आयोजित किए जाने के संबंध में आदेश जारी किया गया है।
शिविर की मुख्य तिथियां एवं अवधि
शिविर अवधि: 17 दिसंबर, 2025 से 24 दिसंबर, 2025 तक (दिनांक 21.12.2025 को छोड़कर)।
शिविर आयोजन स्थल एवं व्यवस्थाएं
शिविरों का आयोजन पंचायत भवन, स्कूल भवन या उपलब्ध अन्य सार्वजनिक स्थानों पर किया जाएगा।
भू-अभिलेख निरीक्षक वृत्त मुख्यालय पर राज्य की प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर शिविर आयोजित किए जाएंगे।
आगंतुकों के लिए पेयजल की समुचित व्यवस्था, मेज, कुर्सियां, दरियां और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं ग्राम पंचायत द्वारा की जाएंगी।
वित्तीय प्रावधान एवं व्यय की अनुमति
षष्ठ राज्य वित्त आयोग के अंतर्गत पंचायती राज संस्थाओं को देय अनुदान राशि के उपयोग के संबंध में जारी दिशा-निर्देशों के बिंदु संख्या (अ) 3 XIII के अंतर्गत संबंधित ग्राम पंचायत द्वारा शिविर आयोजन हेतु राशि रु. 25,000/- (अधिकतम) का व्यय षष्ठ राज्य वित्त आयोग अंतर्गत उपलब्ध अनुदान राशि से करने की सहमति प्रदान की जाती है। यह सहमति वित्त विभाग की आई.डी. संख्या 332501835 दिनांक 05.12.2025 द्वारा अनुमोदित है।
इस कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान करने के निर्देश दिए गए हैं।
महात्मा गांधी नरेगार्न्तगत व्यक्तिगत लाभ के कार्य “अपना खेत अपना काम” दिशा-निर्देश 2011
महात्मा गांधी नरेगार्न्तगत व्यक्तिगत लाभ के कार्य “अपना खेत अपना काम” दिशा-निर्देश 2011
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (अनुभाग-3, नरेगार्), राजस्थान सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत व्यक्तिगत लाभ के कार्य “अपना खेत अपना काम” के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। यह दस्तावेज दिनांक 27.05.2011 (क्रमांक एफ. 40 (35) ग्रावि/नरेगार्/व्यक्तिगत लाभ के काम/2011) को जारी किया गया था।
योजना का मुख्य उद्देश्य
ग्रामीण क्षेत्र में बस रहे परिवारों की आजीविका के साधनों में स्थायी सुधार किए जाने के उद्देश्य से इस योजना को प्रारंभ किया गया है ताकि किसी भी पात्र परिवार की भूमि अविकसित न रहे और सिंचाई एवं भूमि संसाधनों का समग्र विकास कर उनकी आजीविका में सुधार किया जा सके।
प्रथम चरण में प्राथमिकता एवं पात्रता
गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वाले बी.पी.एल. परिवार (जिनका नाम बीपीएल सूची 2002 में दर्ज हो)।
अनुसूचित जाति के परिवार।
अनुसूचित जनजाति के परिवार।
इन वर्गों के कार्यों के पूर्ण होने के पश्चात् सीमांत कृषक एवं तद्पश्चात् लघु कृषक।
स्वीकृत कार्य और वित्तीय सीमा
इस योजना के अंतर्गत भूमि सुधार, डिग्गी, टांका, खेत तलाई, जल भराव क्षेत्रों में पानी निकास नाली, वृक्षारोपण, बागवानी, कृषि वानिकी, जल संरक्षण कार्य एवं लघु सिंचाई जैसे कार्य करवाए जा सकते हैं।
प्रत्येक जॉब कार्ड धारी परिवार को 1.50 लाख रुपए तक की सीमा में व्यक्तिगत लाभ का अनुमत कार्य स्वीकृत किया जा सकता है।
सामग्री मद में अधिकतम व्यय सीमा 60,000/- रुपए निर्धारित है।
महात्मा गांधी नरेगा योजना - मेट निर्देशिका (दिसम्बर 2010)
महात्मा गांधी नरेगा योजना - मेट निर्देशिका
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, शासन सचिवालय, जयपुर, राजस्थान द्वारा दिसम्बर 2010 में प्रकाशित मेट निर्देशिका महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत मेटों, ग्राम पंचायत और क्षेत्र के अधिकारियों के लिए एक अत्यंत उपयोगी मार्गदर्शिका है।
दस्तावेज़ का मुख्य उद्देश्य
इस निर्देशिका का मुख्य उद्देश्य मेटों को ई-मस्टर रोल, मस्टररोल ट्रैकिंग, मेट द्वारा प्रतिदिन किए जाने वाले कार्य की माप, समूहवार मस्टररोल प्रपत्र भरने, और समयबद्ध तरीके से श्रमिकों के भुगतान की प्रक्रिया को सरल भाषा में समझाना है।
मुख्य बिंदु और विशेषताएँ
श्रमजीवियों के 10 अधिकार: राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून, 2005 के तहत श्रमिकों को 100 दिन के रोजगार की गारंटी, जॉब कार्ड, 15 दिनों के भीतर काम या बेरोजगारी भत्ता, न्यूनतम दैनिक मजदूरी, और कार्यस्थल पर सुविधाएँ पाने का अधिकार।
मेट के कर्तव्य एवं दायित्व: कार्यस्थल पर श्रमिकों को काम का आवंटन, प्रतिदिन माप करना, मस्टर रोल भरना, श्रमिकों को दैनिक मजदूरी की जानकारी देना और कार्यस्थल पर छाया, पानी, प्राथमिक उपचार जैसी सुविधाएँ सुनिश्चित करना।
ई-मस्टर रोल और ट्रैकिंग: पारदर्शी कार्यप्रणाली के लिए ई-मस्टर रोल का उपयोग, मस्टर रोल के विभिन्न भागों (क, ख, ग, घ) को भरने की विधि और समयानुसार ट्रैकिंग।
दैनिक मजदूरी गणना और श्रमिक कार्ड: श्रमिकों को उनके द्वारा प्रतिदिन अर्जित मजदूरी की जानकारी देने के लिए श्रमिक कार्ड (दैनिक मजदूरी गणना प्रपत्र) का उपयोग।
विभिन्न विभागीय आदेश: मजदूरी में अंतर, विलंब से भुगतान पर मुआवजे के प्रावधान और अधिनियम के उल्लंघन पर शास्ति से संबंधित आदेशों का संकलन।
सरपंच हेतु महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी योजना निर्देशिका वर्ष 2010
सरपंच हेतु महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी योजना निर्देशिका - वर्ष 2010
यह निर्देशिका ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, शासन सचिवालय, जयपुर द्वारा प्रकाशित की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य ग्राम पंचायतों के सरपंचों को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी अधिनियम (मनरेगा), 2005 के सफल क्रियान्वयन, प्रशासनिक पारदर्शिता, सामाजिक अंकेक्षण और वित्तीय अनुशासन के संबंध में मार्गदर्शन प्रदान करना है।
मुख्य बिंदु और प्रावधान
रोजगार का अधिकार: प्रत्येक पंजीकृत ग्रामीण परिवार को वित्तीय वर्ष में 100 दिन का अकुशल शारीरिक श्रम का गारण्टीशुदा रोजगार प्रदान किया जाता है। आवेदन के 15 दिवस के भीतर कार्य देना अनिवार्य है, अन्यथा बेरोजगारी भत्ता देय होता है।
पारदर्शिता और उत्तरदायित्व: सभी सूचनाओं को स्वैच्छिक रूप से जारी करना (Proactive Disclosure), कार्यस्थल बोर्ड लगवाना, दीवारों पर लेखन करना, और समयबद्ध मजदूरी भुगतान बैंक या पोस्ट ऑफिस के खातों के माध्यम से सुनिश्चित करना।
हरित राजस्थान योजना: राज्य में हरियाली बढ़ाने और सूखे के बचाव हेतु सघन वृक्षारोपण एवं हरित सड़क कार्यक्रम का संचालन।
भारत निर्माण राजीव गांधी सेवा केन्द्र: प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर 10 लाख रुपये की लागत से सेवा केन्द्र का निर्माण, जिसमें सूचना, शिक्षा और संचार की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।
रिकॉर्ड संधारण: रोकड़ बही, माप पुस्तिका (MB), स्टॉक रजिस्टर, और परिसंपत्ति एवं संचयी व्यय रजिस्टर का सही तरीके से संधारण।
महात्मा गांधी रोजगार गारण्टी स्थायी समिति: योजना के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु ग्राम पंचायत स्तर पर 5 सदस्यीय स्थायी समिति का गठन (अध्यक्ष: सरपंच, सदस्य: वार्ड पंच, कनिष्ठ अभियंता/तकनीकी सहायक, ग्राम सेवक एवं पदेन सचिव, ग्राम रोजगार सहायक)।
MGNREGA Case Record/ Work File: Indicative Framework
MGNREGA Case Record / Work File
ग्रामीण विकास मंत्रालय (Ministry of Rural Development, Government of India) द्वारा मनरेगा (MGNREGS) के अंतर्गत प्रत्येक प्रोजेक्ट या कार्य के लिए केस रिकॉर्ड / वर्क फाइल (Case Record / Work File) तैयार करने हेतु एक इंडिकेटिव फ्रेमवर्क जारी किया गया है।
यह शारीरिक फाइल (physical file) प्रत्येक कार्य के क्रियान्वयन, निगरानी और ऑडिट के लिए महत्वपूर्ण है ताकि देश भर में एकरूपता लाई जा सके।
फाइल में शामिल किए जाने वाले मुख्य दस्तावेज और अनुभाग:
कवर पेज और चेकलिस्ट: कार्य का सारांश और दस्तावेजों की अनुक्रमित सूची (Annexure I & II)।
प्रशासनिक और तकनीकी दस्तावेज: वार्षिक कार्य योजना (Annual Action Plan), तकनीकी अनुमान (Technical Estimate & Design), तकनीकी स्वीकृति (Technical Sanction) और प्रशासनिक/वित्तीय स्वीकृति।
मांग और कार्य आवंटन: व्यक्तिगत या समूह आवेदन फॉर्म (Annexure III A & B) और कार्य आवंटन पत्र (Work Allocation Form - Annexure IV)।
क्रियान्वयन से जुड़े रिकॉर्ड: ई-मस्टर रोल (e-Muster Roll), माप पुस्तिका (Measurement Book / e-MB), सामग्री खरीद दस्तावेज, मजदूरी सूची (Wage List), और भुगतान एफटीओ (FTOs)।
अन्य जरूरी दस्तावेज: रॉयल्टी रसीदें, कार्य के तीनों चरणों (शुरुआत, दौरान, पूर्णता) की तस्वीरें और जियो-टैग की गई तस्वीरें, कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र (Work Completion Certificate - Annexure V), मस्टर रोल मूवमेंट स्लिप (Annexure VI) और सोशल ऑडिट रिपोर्ट।
यह फ्रेमवर्क ग्राम पंचायत स्तर पर दस्तावेजों के बेहतर रखरखाव और पारदर्शिता के लिए उपयोगी है।
मनरेगा के अंतर्गत नागरिक सूचना बोर्ड (CIB) और वॉल राइटिंग हेतु दिशा-निर्देश
महात्मा गांधी नरेगा (MGNREGA) - नागरिक सूचना बोर्ड और वॉल राइटिंग रूपरेखा
भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (Mahatma Gandhi National Rural Employment Act, 2005) के अंतर्गत कार्यस्थलों पर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए नागरिक सूचना बोर्ड (Citizen Information Boards - CIB) और वॉल राइटिंग का सुझाव फ्रेमवर्क जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
पार्श्वभूमि और उद्देश्य: अधिनियम की अनुसूची-1 के पैरा 25(a) और मास्टर सर्कुलर के अनुसार, जनता को बुनियादी जानकारी प्रदान करने के लिए 'जनता सूचना प्रणाली' का उपयोग किया जाता है।
नागरिक सूचना बोर्ड (CIB): प्रत्येक कार्यस्थल पर CIB लगाना अनिवार्य है। व्यक्तिगत कार्यों के लिए बोर्ड का आकार कम से कम 0.6 मीटर x 0.9 मीटर और सामुदायिक कार्यों के लिए कम से कम 0.9 मीटर x 1.2 मीटर होना चाहिए।
लागत सीमा: व्यक्तिगत कार्य के लिए CIB की लागत 3,000 रुपये और सामुदायिक कार्य के लिए 5,000 रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए।
सामग्री और लेआउट: बोर्ड पर कार्य का नाम, कार्य ID, प्राक्कलन राशि, प्रारंभ और समाप्ति तिथि, मजदूरी और सामग्री घटक, और लोकपाल/ओम्बुड्समैन का संपर्क विवरण क्षेत्रीय भाषा में प्रदर्शित होना चाहिए।
वॉल राइटिंग: पंचायत भवन, आंगनवाड़ी केंद्रों, और अन्य प्रमुख सार्वजनिक स्थानों की दीवारों पर 'मेरा गांव, मेरा मनरेगा' और अन्य जागरूकता संदेश पेंट किए जाने चाहिए, जिसकी न्यूनतम चौड़ाई 2 मीटर और ऊंचाई 1.2 मीटर सुझाई गई है।
क्रियान्वयन जिम्मेदारी: ग्राम रोजगार सहायक (GRS) और तकनीकी सहायक (Technical Assistant) कार्यस्थल पर बोर्ड की स्थापना और गुणवत्ता के लिए जिम्मेदार हैं।
महात्मा गांधी नरेगा (MGNREGS) अनुमेय कार्य सूची (Schedule 1 of MGNREG Act 2005)
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम 2005 - अनुमेय कार्य सूची
यह दस्तावेज़ ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी महात्मा गांधी नरेगा (MGNREGS) के अंतर्गत अनुमेय कार्यों की सूची (Schedule 1 of MGNREG Act 2005) को दर्शाता है। इस सूची में ग्राम पंचायत और पंचायती राज स्तर पर कराए जाने वाले विभिन्न प्रकार के कार्यों का विवरण दिया गया है।
प्रमुख कार्य श्रेणियां और विवरण:
व्यक्तिगत, सामुदायिक और समूह स्तर के कार्य: इसमें पीएमएवाई-जी (PMAY-G) आवास निर्माण, आंगनवाड़ी भवन, ग्राम पंचायत/पंचायत भवन, खाद्यान्न भंडारण, किचन शेड और भारत निर्माण सेवा केंद्र का निर्माण एवं मरम्मत शामिल है।
प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन (NRM) और जल संरक्षण: जल संभरण (SWC), सिंचाई (Irrigation), भू-जल पुनर्भरण (GWR), भूमि विकास (LR), और जल निकासी से संबंधित कार्य।
कृषि एवं संबद्ध कार्य (Agri & Allied): कृषि उत्पादन भंडारण, वर्मी कम्पोस्ट, नाडेप कम्पोस्ट, पशु शेड (गाय, बकरी, सुअर, मुर्गी), और अजोला खेती के लिए बुनियादी ढांचा।
वृक्षारोपण और वानिकी (PLNT): तटबंध वृक्षारोपण, सीमा रेखा वृक्षारोपण, और उद्यानिकी (Horticulture) से जुड़े कार्य।
ग्रामीण बुनियादी ढांचा: ग्रामीण हाट, खेल का मैदान, चक्रवात आश्रय (Cyclone shelter), और सड़क व जल निकासी संरचनाएं।
यह सूची पंचायती राज संस्थाओं और ग्राम पंचायतों को महात्मा गांधी नरेगा योजना के तहत सही कार्यों के चयन और क्रियान्वयन में सहायता प्रदान करती है।
नर्सरी (पौधशाला) विकास, वृक्षारोपण एवं प्रबन्धन
नर्सरी (पौधशाला) विकास, वृक्षारोपण एवं प्रबन्धन
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 (मनरेगा) संक्षिप्त विवरण
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 (मनरेगा)
यह दस्तावेज़ The Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act, 2005 (No. 42 of 2005) का संशोधित संस्करण है (20 अक्टूबर, 2010 तक संशोधित)। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब परिवारों को वित्तीय वर्ष में कम से कम सौ दिनों की गारंटीकृत मजदूरी रोजगार प्रदान करके आजीविका सुरक्षा को बढ़ाना है।
मुख्य बिंदु और प्रावधान
रोजगार की गारंटी: हर ग्रामीण परिवार के वयस्क सदस्य, जो अकुशल शारीरिक कार्य करने के इच्छुक हैं, उन्हें वित्तीय वर्ष में कम से कम एक सौ दिन का रोजगार दिया जाता है।
बेरोजगारी भत्ता: यदि आवेदन प्राप्ति के पंद्रह दिनों के भीतर रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो आवेदक दैनिक बेरोजगारी भत्ते के हकदार होंगे।
कार्यान्वयन और एजेंसियां: ग्राम पंचायत, पंचायत समिति (intermediate level), जिला पंचायत और जिला कार्यक्रम समन्वयक (District Programme Coordinator) इस योजना के क्रियान्वयन और निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit): योजना के तहत कराए जाने वाले कार्यों का सामाजिक अंकेक्षण ग्राम सभा द्वारा कम से कम हर छह महीने में एक बार किया जाना अनिवार्य है।
जॉब कार्ड: पंजीकृत परिवारों के वयस्क सदस्यों के लिए जॉब कार्ड जारी किया जाता है, जिसमें कार्य मांग, कार्य आवंटन और मजदूरी भुगतान का पूरा विवरण दर्ज होता है।
मजदूरी और सामग्री का अनुपात: ग्राम पंचायत स्तर पर कार्यों के निष्पादन में श्रम और सामग्री का अनुपात 60:40 बनाए रखा जाता है।
महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 (मनरेगा) - अवलोकन
महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 (मनरेगा)
यह दस्तावेज़ महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 (2005 का अधिनियम संख्यांक-42) का आधिकारिक विवरण है, जिसे विभिन्न संशोधनों के साथ प्रकाशित किया गया है। यह ग्रामीण क्षेत्रों में अकुशल शारीरिक कार्य करने के इच्छुक वयस्क सदस्यों वाले परिवारों को वित्तीय वर्ष में कम से कम सौ दिनों की गारंटीकृत मजदूरी रोजगार प्रदान करने का उपबंध करता है।
मुख्य बिंदु एवं विशेषताएं:
रोजगार की गारंटी: प्रत्येक ग्रामीण गृहस्थी जिसके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक कार्य करने के लिए स्वेच्छा से आगे आते हैं, उन्हें प्रति वित्तीय वर्ष कम से कम सौ दिनों का गारंटीकृत रोजगार प्रदान किया जाएगा।
आवेदन और जॉब कार्ड: ग्राम पंचायत स्तर पर पंजीकरण और जॉब कार्ड जारी करने की प्रक्रिया का प्रावधान है, जिसमें गृहस्थी के पंजीकृत वयस्क सदस्यों का विवरण और कार्य की मांग दर्ज की जाती है।
बेकारी भत्ता: यदि आवेदन प्राप्ति के 15 दिनों के भीतर या अग्रिम आवेदन की दशा में नियत तिथि से रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो आवेदक बेरोजगारी भत्ता पाने का हकदार होगा।
मजदूरी दर: न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, 1948 के अधीन निर्धारित दरों के अनुसार मजदूरी देय होगी, जो किसी भी स्थिति में साठ रुपए प्रतिदिन से कम नहीं होगी।
सामाजिक संपरीक्षा (Social Audit): पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए ग्राम सभा द्वारा अधिनियम के अधीन सभी परियोजनाओं की नियमित सामाजिक संपरीक्षा की जाएगी।
कार्यान्वयन प्राधिकारी: केंद्रीय परिषद, राज्य रोजगार गारंटी परिषद, जिला कार्यक्रम समन्वयक, कार्यक्रम अधिकारी, और ग्राम पंचायत स्तर पर विभिन्न प्रशासनिक उत्तरदायित्व तय किए गए हैं।
महात्मा गांधी नरेगा अंतर्गत ग्राम पंचायत स्तर पर संधारित किए जाने वाले 7 रजिस्टर
महात्मा गांधी नरेगा (MGNREGA) के अंतर्गत ग्राम पंचायत स्तर पर 7 अनिवार्य रजिस्टरों का संधारण
ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा सुशासन पहल के तहत महात्मा गांधी नरेगा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और रिकॉर्ड संधारण को सरल बनाने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर 7 अनिवार्य रजिस्टरों की रूपरेखा जारी की गई है। यह पुस्तिका ग्राम रोजगार सहायकों (GRS) और अन्य क्षेत्रीय पदाधिकारियों के लिए रिकॉर्ड संधारण को सुगम बनाती है।
ग्राम पंचायत स्तर पर संधारित किए जाने वाले 7 रजिस्टर:
रजिस्टर – I: जॉब कार्ड आवेदन, जॉब कार्ड पंजीकरण, जॉब कार्ड निर्गत और परिवार रोजगार संबंधी रिपोर्ट
रजिस्टर – II: ग्राम सभा की बैठक, कार्यवृत्त, संकल्प, कार्यों की प्राथमिकता प्राप्त सूची और विशेष सामाजिक लेखा-परीक्षा ग्राम सभा की बैठक एवं कार्यवृत्त की गई कार्रवाई
रजिस्टर – III: काम की मांग, कार्यों का आवंटन तथा मजदूरी का भुगतान रजिस्टर
रजिस्टर – IV: कार्य रजिस्टर (भाग क और भाग ख)
रजिस्टर – V: स्थायी परिसंपत्ति रजिस्टर (मनरेगा कार्य)
रजिस्टर – VI: शिकायत रजिस्टर
रजिस्टर – VII: सामग्री रजिस्टर
इन सभी रजिस्टरों को एनरेगासॉफ्ट (NREGASoft MIS) के माध्यम से प्राप्त करके और निर्धारित दिशा-निर्देशों व त माही/वार्षिक आधार पर भौतिक रजिस्टरों में संधारित किया जाना है।
मनरेगा योजनान्तर्गत व्यक्तिगत लाभ के कार्य निजी कृषि भूमि में टांका निर्माण मय पक्का एवं कच्चा पायथन कार्य की अनुमति के संबंध में
राजस्थान सरकार - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग
पत्रांक: एफ 55(1)ग्रावि/नरेग/भारत सरकार/एनएलएम/2023-24/05104
विषय: महात्मा गांधी नरेग योजनान्तर्गत व्यक्तिगत लाभ के कार्य निजी कृषि भूमि में टांका निर्माण मय पक्का एवं कच्चा पायथन कार्य का अनुमत करने के सम्बन्ध में।
ग्रामीण विकास विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा जारी इस पत्र के अनुसार, भारत सरकार के पत्र के क्रम में महात्मा गांधी नरेग योजनान्तर्गत टांका निर्माण कार्यों का निष्पादन "Farm Pond for Individuals" की अनुज्ञेय श्रेणी के अन्तर्गत किये जाने की अनुमति प्रदान की गई है।
मुख्य बिंदु:
महात्मा गांधी नरेगा अधिनियम के प्रावधानों, दिशा-निर्देशों एवं निर्धारित उचित प्रक्रियाओं की सख्ती से पालना की जानी है।
टांका निर्माण कार्य की योजना, कार्यान्वयन एवं निगरानी प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए।
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जिला उत्थान योजना - दिशा निर्देश 2025
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जिला उत्थान योजना: दिशा निर्देश 2025
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (गुण एवं नियंत्रण) द्वारा डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जिला उत्थान योजना - दिशा निर्देश 2025 जारी किए गए हैं। यह योजना राज्य सरकार की बजट घोषणा 2024-25 के बिन्दु संख्या 20 के अंतर्गत प्रारंभ की जा रही है जिसका मुख्य उद्देश्य जिलों के आर्थिक विकास और समावेशी सामाजिक विकास के दोहरे लक्ष्य को प्राप्त करना है।
योजना की मुख्य विशेषताएँ और प्रावधान:
नोडल विभाग: ग्रामीण विकास विभाग इस योजना का नोडल विभाग रहेगा जो अन्य विभागों से समन्वय करते हुए कार्यों की स्वीकृति प्रदान करेगा।
योजना क्षेत्र: यह योजना राज्य के सभी जिलों में ग्रामीण एवं शहरी दोनों क्षेत्रों में लागू की जाएगी।
वित्तीय प्रावधान: इस योजना का कुल बजट प्रावधान 500 करोड़ रुपये है, जो पूरी तरह राज्य वित्त पोषित योजना है।
मिशन टीम: जिलों में अति-स्थानीय नियोजन (hyper-local planning) और सेवा वितरण में सहयोग के लिए विशेष विशेषज्ञों की 'मिशन टीम' का गठन किया जाएगा।
शासन संरचना: योजना के सुचारू संचालन के लिए राज्य स्तर पर अतिरिक्त मुख्य सचिव/प्रमुख शासन सचिव (ग्रामीण विकास) की अध्यक्षता में 'राज्य स्तरीय समिति' तथा जिला स्तर पर जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में 'जिला स्तरीय समिति' का गठन किया गया है।
अनुमत कार्य और क्षेत्र:
योजना के अंतर्गत कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र, पर्यटन क्षेत्र, एमएसएमई क्षेत्र, खेल क्षेत्र और अन्य ग्रामीण व शहरी बुनियादी ढाँचे से जुड़े कार्य किए जा सकेंगे। इसमें लोक सहभागिता (जनसहयोग) को भी प्राथमिकता दी गई है।
राजस्थान राज्य सूचना आयोग का सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 के तहत महत्वपूर्ण निर्णय
राजस्थान राज्य सूचना आयोग निर्णय - दिनांक 16.10.2025
राजस्थान राज्य सूचना आयोग (जयपुर) द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 के अंतर्गत द्वितीय अपील एवं परिवार मामलों पर एक महत्वपूर्ण निर्णय पारित किया गया है। यह निर्णय मुख्य सूचना आयुक्त श्री मोहन लाल लाठर द्वारा दिनांक 16-10-2025 को जारी किया गया।
मुख्य बिंदु एवं विवरण
अपीलार्थी/परिवादी: श्री सज्जन सिंह (निवासी - जोधपुर, राजस्थान) द्वारा वर्ष 2018 से 2025 के बीच आयोग में कुल 1127 द्वितीय अपीलें एवं परिवार दायर किए जा चुके हैं।
लक्ष्यित विभाग: अधिकांश अपीलें/शिकायतें पंचायती राज विभाग के ग्राम पंचायत एवं पंचायत समिति स्तर के लोक सूचना अधिकारियों (ग्राम विकास अधिकारी, विकास अधिकारी आदि) के विरुद्ध संस्थित की गई हैं। बाड़मेर, बालोतरा, जैसलमेर और फलोदी जिलों से संबंधित प्रकरण इसमें शामिल हैं।
शीर्ष न्यायालयों के निर्णय का हवाला: आदेश में माननीय उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों के विभिन्न महत्वपूर्ण निर्णयों (जैसे सीबीआई बनाम आदित्य बंधोपाध्याय) का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया गया है कि आरटीआई अधिनियम का दुरुपयोग, अत्यधिक या पुनरावृत्ति (Repetitive/Excessive) वाले आवेदन, और लोक प्राधिकारियों के सीमित मानव संसाधनों पर अत्यधिक भार डालना कानून की भावना के अनुकूल नहीं है।
कैशबुक व अन्य दस्तावेजों की मांग: आयोग ने अपने निर्णय में यह भी रेखांकित किया है कि एक ही अवधि के कैशबुक की बार-बार प्रतियां मांगना लोक प्राधिकारी के सीमित संसाधनों का अनावश्यक विचलन है।
आयोग का निष्कर्ष: परिशिष्ट-01 में वर्णित मामलों की विशिष्ट परिस्थितियों को देखते हुए, चूंकि प्रार्थी को पूर्व में समुचित सूचना/विनिश्चय प्रेषित किया जा चुका है, अतः शेष प्रकरणों में अतिरिक्त सूचना उपलब्ध कराने के कोई निर्देश नहीं दिए गए हैं और प्रकरणों को निस्तारित किया गया है।
नरेगा में व्यक्तिगत कार्यों पर रोक संबंधित आदेश
नरेगा में व्यक्तिगत कार्यों पर रोक संबंधित आदेश
ग्राम पंचायतों में नियुक्त प्रशासकों के मानदेय भुगतान के संबंध में मार्गदर्शन
ग्राम पंचायतों में प्रशासकों के मानदेय भुगतान के संबंध में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद, श्रीगंगानगर को ग्राम पंचायतों में नियुक्त प्रशासकों के मानदेय भुगतान के संबंध में मार्गदर्शन जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
पत्राचार संदर्भ: आपका राजकाज क्रमांक 17879858 दिनांक 19.09.2025 के संदर्भ में।
विभाग का मार्गदर्शन: वर्तमान में ग्राम पंचायतों में नियुक्त प्रशासकों को मानदेय के संबंध में राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 एवं राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 में कोई प्रावधान नहीं है।
यह पत्र वित्तीय सलाहकार, कृष्ण कन्हैया मीणा द्वारा जारी किया गया है और इसकी प्रतिलिपि निजी सचिव, शासन सचिव एवं आयुक्त, पंचायती राज विभाग, जयपुर को सूचनार्थ प्रेषित की गई है।
ग्राम पंचायतियों की कालावधि के दौरान पट्टे जारी करने के संबंध में निर्देश
ग्राम पंचायतों की कालावधि के दौरान पट्टे जारी करने के संबंध में दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा ग्राम पंचायतों की कालावधि के दौरान पट्टे जारी करने के संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
संदर्भ: विभागीय अधिसूचना दिनांक 16.01.2025
प्रशासनिक समिति का गठन: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा-95 के तहत जिन ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त हो गया है, उनमें निवर्तमान सरपंच को प्रशासक नियुक्त किया गया है तथा संबंधित ग्राम पंचायत के उप सरपंच एवं वार्ड पंचों को प्रशासक समिति का सदस्य बनाया गया है।
शक्तियों का प्रयोग: प्रशासक द्वारा अधिनियम और राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में वर्णित समस्त शक्तियों और कर्तव्यों का प्रयोग प्रशासनिक समिति की बैठक में परामर्श उपरांत किया जाएगा।
पट्टा आवंटन प्रक्रिया: पट्टा आवंटन से संबंधित कार्यवाही में राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के प्रावधानों के तहत जहाँ वार्ड पंच की कमेटी गठित किया जाना आवश्यक है, वहाँ प्रशासक द्वारा प्रशासनिक समिति के सदस्यों की कमेटी गठित कर पट्टा आवंटन संबंधी कार्यवाही की जाए।
यह आदेश डॉ. जोगाराम, शासन सचिव एवं आयुक्त, पंचायती राज विभाग द्वारा जारी किया गया है।
ग्राम पंचायतों में स्थित भारत निर्माण सेवा केंद्रों एवं ग्राम पंचायत भवनों की मरम्मत और रंग-रोगन के संबंध में दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग का महत्वपूर्ण निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा ग्राम पंचायतों में स्थित भारत निर्माण सेवा केंद्रों एवं ग्राम पंचायत भवनों की मरम्मत और एकरूप रंग-रोगन के संबंध में आदेश जारी किया गया है। यह आदेश क्रमांक एफ 4(1111) परावि/पीसी/विविध/22-00409, दिनांक 19.09.2025 के अंतर्गत जारी किया गया है, जिसके हस्ताक्षर डॉ. जोगा राम, शासन सचिव एवं आयुक्त द्वारा किए गए हैं।
प्रमुख निर्देश एवं समय-सीमा
जिन भवनों में मरम्मत की आवश्यकता है: ऐसे भवनों के लिए राज्य वित्त आयोग एवं पंद्रहवां वित्त आयोग के अंतर्गत मरम्मत और रंग-रोगन की स्वीकृति तत्काल जारी करते हुए दिनांक 15.11.2025 तक कार्य पूर्ण किया जाए।
जिन भवनों में केवल रंग-रोगन की आवश्यकता है: ऐसे भवनों के लिए तत्काल स्वीकृति जारी करते हुए दिनांक 31.10.2025 तक कार्य पूर्ण किया जाए।
रंग-रोगन के लिए निर्धारित मानक
बाहरी दीवारें: अच्छी गुणवत्ता का Pink शेड का Paint (PU + Silicon Modified 100% Acrylic Exterior Emulsion) किया जाए।
आंतरिक दीवारें: Cream / Off White शेड का Paint किया जाए।
सीलिंग (छत): White शेड का Paint (PU Reinforced Luxury Acrylic Emulsion) किया जाए।
प्रगति निगरानी
उक्त कार्यों की प्रगति दर्ज करने के लिए पृथक से गूगल स्प्रेडशीट/फॉर्मेट का लिंक भेजा जा रहा है, जिस पर नियमित रूप से प्रगति दर्ज कराई जानी है। संबंधित सभी मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (जिला परिषद) को इन निर्देशों की समयबद्ध क्रियान्विति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
ग्राम पंचायतों में स्थित भारत निर्माण सेवा केंद्रों एवं ग्राम पंचायत भवनों की मरम्मत और रंग-रोगन के संबंध में दिशा-निर्देश
ग्राम पंचायत भवनों एवं भारत निर्माण सेवा केंद्रों की मरम्मत और एकरूप रंग-रोगन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ 4(1111) परावि/पीसी/विविध/22-00409 (दिनांक 19.09.2025) के अनुसार, माननीय मुख्यमंत्री महोदय की समीक्षा बैठक के निर्देशों के पालन में सभी ग्राम पंचायतों एवं भारत निर्माण सेवा केंद्रों में मरम्मत और एकरूप रंग-रोगन के कार्य करवाने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य निर्देश एवं समय-सीमा
मरम्मत और रंग-रोगन (वित्तीय स्वीकृति सहित): जिन भवनों में मरम्मत की आवश्यकता है, वहां राज्य वित्त आयोग एवं पंद्रहवां वित्त आयोग के अंतर्गत तुरंत स्वीकृति जारी करते हुए 15.11.2025 तक कार्य पूर्ण किया जाए।
केवल रंग-रोगन: जिन भवनों में केवल रंग-रोगन की आवश्यकता है, वहां तत्काल स्वीकृति जारी करते हुए 31.10.2025 तक कार्य पूर्ण किया जाए।
रंग एवं पेंट के मानक: भवन की बाहरी दीवारों पर अच्छी गुणवत्ता का Pink शेड का Paint (PU + Silicon Modified 100% Acrylic Exterior Emulsion), आंतरिक दीवारों पर Cream/Off White एवं छत (सीलिंग) पर White शेड का Paint (PU Reinforced Luxury Acrylic Emulsion) किया जाए।
प्रगति की मॉनिटरिंग: उक्त कार्यों की प्रगति हेतु अलग से Google Spreadsheet/Format का लिंक भेजा जा रहा है, जिस पर नियमित प्रगति दर्ज की जाए।
RTPPR Rule 2013
RTPPR Rule 2013 Both in English and Hindi
ग्रामीण कार्य निर्देशिका 2025
ग्रामीण कार्य निर्देशिका 2025
जन्म, मृत्यु एवं विवाह रजिस्ट्रीकरण की मार्गदर्शिका (पहचान पोर्टल)
जन्म-मृत्यु एवं विवाह रजिस्ट्रीकरण की मार्गदर्शिका
यह मार्गदर्शिका आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय, योजना विभाग, राजस्थान, जयपुर द्वारा जारी की गई है। इस पुस्तिका का मुख्य उद्देश्य जन्म, मृत्यु और विवाह रजिस्ट्रीकरण अधिनियमों तथा नियमों के तहत जिला रजिस्ट्रार, रजिस्ट्रार और पंचायत स्तर के अधिकारियों को सुगम दिशा-निर्देश प्रदान करना है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियमों का पालन: जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1969 एवं राजस्थान विवाहों का अनिवार्य रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 2009 के प्रावधानों के तहत कार्य किया जाना सुनिश्चित करना।
पहचान पोर्टल: राजस्थान के विवाह एवं जन्म-मृत्यु पंजीकरण कार्यों को ऑनलाइन वेबपोर्टल 'पहचान' के माध्यम से सुगम और पारदर्शी बनाया गया है।
पंचायत स्तर पर अधिकार: ग्राम पंचायत स्तर पर कार्यरत ग्राम सेवक (पदेन सचिव) को रजिस्ट्रार की शक्तियां प्रदान की गई हैं, जो जन्म और मृत्यु की घटनाओं का पंजीकरण करते हैं।
डिजिटल हस्ताक्षर: ई-मित्र केंद्रों और पोर्टल के माध्यम से डिजिटली हस्ताक्षरित जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने की सुविधा दी गई है।
यह मार्गदर्शिका ग्राम पंचायतों और स्थानीय निकायों के उपयोगकर्ताओं के लिए पंजीकरण प्रक्रिया को सरल और मानकीकृत करने में अत्यंत उपयोगी है।
PM AAWAS नाम MISMATCH
PM AAWAS नाम MISMATCH Format
PM AAWAS Remand form
PM AAWAS Remand form
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता संबंधी कार्यों के संचालन एवं मॉडल टेंडर दिशा-निर्देश
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता संबंधी कार्य और मॉडल टेंडर दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रामीण विकास, अनुभाग-5), राजस्थान सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता संबंधी कार्यों को संपादित करने हेतु स्थायी आदेश संख्या 01/2024 (दिनांक 03/09/2024) जारी किया गया है। इसके माध्यम से बी.एस.आर. (BSR) सॉफ़्ट पर प्रदर्शित स्वच्छता संबंधी आइटम्स की नई दरें निर्धारित की गई हैं तथा मॉडल टेंडर डॉक्यूमेंट (Model Tender Document) के संबंध में निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य बिंदु एवं निर्धारित दरें
घर-घर कचरा संग्रहण: वाहन उपलब्ध कराने पर अथवा संवेदक द्वारा वाहन, ड्राइवर, POL, श्रमिक व सुरक्षा उपकरणों सहित घर-घर कचरा संग्रहण व प्लास्टिक कचरे का सुरक्षित निस्तारण।
कचरे का पृथक्करण: Degradable और Non-Degradable कचरे का पृथक्करण कार्य एवं प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट नियम, 2016 के अनुसार निस्तारण।
सड़क, बाजार एवं मुख्य चौक सफाई: झाड़ू एवं सफाई कार्य, आवश्यक सुरक्षा उपकरण और मेडिकल किट के साथ कचरे को डंपिंग यार्ड पर पहुंचाना।
नाली सफाई: आवश्यक उपकरणों और सुरक्षा किट के साथ नाली सफाई कार्य।
सामुदायिक स्वच्छता परिसर (CSC) सफाई: सीट, फर्श और टाइल्स की सफाई कार्य।
निविदा प्रक्रिया एवं समय-सीमा
परिवारों एवं साफ-सफाई का आकलन (वार्ड वार): सितंबर माह का प्रथम सप्ताह
निविदा जारी करना: सितंबर माह का द्वितीय सप्ताह
निविदा प्रक्रिया पूर्ण कर कार्य आदेश जारी करना: सितंबर माह का चतुर्थ सप्ताह
कार्य प्रारम्भ करने का समय: 02 अक्टूबर
सभी ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों को आरटीपीपी (RTPP) नियमों के तहत मॉडल टेंडर के अनुसार पारदर्शी तरीके से निविदा की कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
ग्राम पंचायत स्तर पर निविदा आमंत्रित करने के निर्देशों के संबंध में आदेश
ग्राम पंचायत स्तर पर निविदा प्रक्रिया के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
राजगंगार सरकार (ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग) द्वारा ग्राम पंचायत स्तर पर निविदा/उपज्ञापन की कार्यवाही के संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं। यह दस्तावेज राजस्थान राज्य में पारदर्शिता अधिनियम 2012 व नियम 2013, सामान्य वित्त एवं लेखा नियम तथा पंचायती राज नियम 1996 के तहत जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
उपज्ञापन समिति का गठन: ग्राम पंचायत स्तर पर उपज्ञापन हेतु एक समिति होगी जिसमें सरपंच (अध्यक्ष), सचिव (सदस्य-सचिव), संबंधित पंचायत समिति के सहायक अभियंता, और पंचायत समिति में पदस्थापित लेखाधिकारी/सहायक लेखाधिकारी (सदस्य) शामिल होंगे। इसके अलावा अन्य वांछित तकनीकी अधिकारी को भी शामिल किया जा सकेगा।
निविदा दरों का अंतर: निविदा में सम्मिलित निविदादाताओं से प्राप्त दरों का अंतर जी-शेड्यूल (G-Schedule) से 10 प्रतिशत अधिक होने पर निविदाओं की स्वीकृति पंचायत समिति स्तर से की जाएगी।
तुलना और निर्धारण: प्राप्त निविदाओं की तुलना करते समय मनरेगा योजना, अन्य विभागीय योजनाओं में प्राप्त समकालीन दरों तथा बाजार में प्रचलित दरों का ध्यान रखा जाएगा और सर्वाधिक उपयुक्त कीमतों का निर्धारण होगा।
अनुबंध निष्पादन: जब भी कोई निविदा स्वीकृत की जाए, तो उस व्यक्ति से नियमानुसार करार/इकरार निष्पादित किया जाएगा, जिसकी निविदा स्वीकृत की गई है।
जारीकर्ता: रोहित कुमार सिंह, अतिरिक्त मुख्य सचिव, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (दिनांक: 27/08/2020)
जन आधार शिथिलता प्रारूप
जन आधार शिथिलता प्रारूप मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने हेतु
बाल सरंक्षण समिति का गठन प्रारूप
बाल सरंक्षण समिति का गठन प्रारूप
बैंक मे साइन भिजवाने हेतु प्रपत्र
ग्राम पंचायत के खाते बैंक मे साइन भिजवाने हेतु प्रपत्र
SBM CC format
SBM CC format
कार्यालय ग्राम पंचायत सुमेरपुर (पाली) - अतिक्रमण हटाने हेतु अंतिम नोटिस प्रारूप
कार्यालय ग्राम पंचायत - आदेश / अंतिम नोटिस
यह दस्तावेज़ कार्यालय ग्राम पंचायत, पं.स. सुमेरपुर (पाली) द्वारा जारी किया जाने वाला अतिक्रमण/अवैध निर्माण से संबंधित अंतिम नोटिस (प्रारूप-3) है। यह राजस्थान पंचायतीराज नियम 1996 के नियम 165 (3, 6) तथा The Prevention Of Damage to Public Property Act, 1984 के अंतर्गत आता है।
मुख्य बिंदु:
प्रसंग: पूर्व में जारी पत्र और सूचना के बावजूद अतिक्रमण/अवैध निर्माण हटाने के आदेश की पालना रिपोर्ट कार्यालय में प्रस्तुत न करने के संबंध में।
कार्रवाई की चेतावनी: नोटिस में दिए गए निर्देश के अनुसार आज ही अतिक्रमण/अवैध निर्माण हटाकर लिखित पालना रिपोर्ट निर्धारित तिथि को सुबह 11:00 बजे तक पंचायत कार्यालय में प्रस्तुत करनी होती है।
प्रशासनिक सहायता: समय सीमा में पालना न करने पर उपखंड प्रशासन / पुलिस इमदाद से अतिक्रमण/अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई की जाएगी और इसका समस्त हर्जा-खर्चा संबंधित व्यक्ति से वसूल किया जाएगा।
महत्वपूर्ण नियम: ग्राम पंचायत की सक्षम स्वीकृति के बिना किसी प्रकार का निर्माण कार्य करना नियम विरुद्ध है।
यह दस्तावेज़ कार्यालय ग्राम पंचायत, पं.स. सुमेरपुर (पाली) द्वारा जारी किया गया अतिक्रमण/अवैध निर्माण से संबंधित आदेश/नोटिस (प्रारूप-2) है।
मुख्य बिंदु:
नियम एवं अधिनियम: यह नोटिस राजस्थान पंचायतीराज नियम 1996 के नियम 165 (3, 6) तथा The Prevention Of Damage to Public Property Act, 1984 के अंतर्गत जारी किया जाता है।
अतिक्रमण हटाने के निर्देश: पूर्व में जारी स्थगन आदेश एवं नोटिस की पालना न करने तथा प्रस्तुत जवाब/स्पष्टीकरण असंतोषजनक होने पर अतिक्रमण/अवैध निर्माण को जनहित में हटाने के निर्देश दिए जाते हैं।
कार्रवाई की चेतावनी: निर्धारित तिथि एवं समय (सुबह 11:00 बजे) तक अतिक्रमण स्वयं न हटाने पर उपखण्ड प्रशासन/पुलिस इमदाद से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाएगी और समस्त हर्जा खर्च संबंधित व्यक्ति से वसूला जाएगा।
पुलिस कार्रवाई: आदेश/नोटिस की प्रति संबंधित पुलिस थाने में भेजकर कानूनी कार्यवाही हेतु निवेदन भी किया जाता है।
नोट: ग्राम पंचायत की सक्षम स्वीकृति के बिना किसी प्रकार का निर्माण कार्य करना नियम विरुद्ध है।
कार्यालय ग्राम पंचायत (पंस. सुमेरपुर, पाली) - स्थगन आदेश एवं नोटिस प्रारूप
कार्यालय ग्राम पंचायत - स्थगन आदेश एवं नोटिस प्रारूप
यह दस्तावेज़ कार्यालय ग्राम पंचायत, पंचायत समिति सुमेरपुर (पाली) द्वारा जारी किया गया स्थगन आदेश एवं नोटिस (प्रारूप-1) है। यह राजस्थान पंचायतीराज नियम 1996 के नियम 165(3) तथा The Prevention Of Damage to Public Property Act, 1984 के अंतर्गत आता है।
मुख्य बिंदु:
अतिक्रमण की शिकायत: ग्राम पंचायत की भूमि, आवागमन के रास्ते, जल निकासी की नाली आदि पर अतिक्रमण या अवैध निर्माण की शिकायत मिलने पर यह नोटिस जारी किया जाता है।
निषेधात्मक आज्ञा: अतिक्रमण/निर्माण को तत्काल प्रभाव से रोकने का आदेश दिया जाता है, अन्यथा नियमानुसार हटाने की कार्रवाई की जाती है।
सुनवाई की तारीख: निर्धारित तिथि एवं समय पर भूमि के स्वामित्व/निर्माण से संबंधित मूल दस्तावेज़ और जवाब के साथ पंचायत कार्यालय में उपस्थित होना अनिवार्य है, अन्यथा एक तरफा कानूनी कार्रवाई की जाती है।
महत्वपूर्ण नोट: ग्राम पंचायत की सक्षम स्वीकृति के बिना किसी प्रकार का निर्माण कार्य करना नियम विरुद्ध है।
सामान्य बिल / वाउचर प्रपत्र फॉर्मेट
सामान्य वाउचर प्रपत्र फॉर्मेट
कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र (CC) का सामग्री प्रपत्र
सामग्री प्रपत्र
कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र (CC) का मस्टर रोल प्रपत्र
कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र (CC) का मस्टर रोल प्रपत्र
कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र (CC) एवं फोटो सहित
कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र (CC) एवं फोटो सहित
ग्राम पंचायत में नए निर्माण कार्यों के प्रस्ताव और प्रमाण पत्र प्रारूप
ग्राम पंचायत नए निर्माण कार्यों के प्रस्ताव प्रपत्र
यह दस्तावेज़ कार्यालय ग्राम पंचायत द्वारा जारी किया गया है जिसमें नए निर्माण कार्यों के प्रस्ताव (परिशिष्ट-5) और उससे संबंधित प्रमाण पत्रों का प्रारूप दिया गया है। इसके माध्यम से ग्राम पंचायत स्तर पर विकास कार्यों की प्रशासनिक प्रक्रिया को पूरा किया जाता है।
मुख्य बिंदु:
नए निर्माण कार्यों के प्रस्ताव: कार्य का नाम, योजना का नाम, वार्षिक योजना में सम्मिलित होने की स्थिति, और अनुमानित लागत (श्रम, सामग्री और कुल) का विवरण।
आवश्यक शर्तें व प्रमाण पत्र: कार्य का साइट प्लान/नक्शा या सड़क का एलाइनमेंट संलग्न होना अनिवार्य है।
सार्वजनिक भूमि: निर्माण किसी भी व्यक्तिगत भूमि पर नहीं कराया जाएगा तथा यह विवाद रहित पर्याप्त सार्वजनिक भूमि या आबादी भूमि पर होगा जिससे सार्वजनिक लाभ सुनिश्चित हो सके।
रखरखाव और उपयोग: कार्य के रखरखाव एवं समुचित उपयोग की व्यवस्था संस्था या ग्राम पंचायत द्वारा स्वयं की जाएगी, जिसके लिए अलग से राशि नहीं मांगी जाएगी।
दोहरी प्रविष्टि की रोकथाम: यह प्रमाणित किया जाता है कि प्रस्तावित कार्य पूर्व में किसी अन्य योजना के अंतर्गत स्वीकृत या निर्मित नहीं है और न ही इसका भुगतान अन्य योजनाओं से किया गया है।
खसरा एवं भूमि विवरण: प्रमाण पत्र में खसरा नंबर, राजस्व ग्राम, और राज्य सरकार के खाता संख्या का उल्लेख किया जाता है।
स्थल फोटो: प्रस्तावित कार्य स्थल का फोटो, प्रशासनिक स्वीकृत राशि और वित्तीय वर्ष का विवरण दर्ज करने का प्रावधान है।
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 के तहत प्ररूप 23-क एवं 23-ख में संशोधन के संबंध में
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 - पट्टा प्ररूप संशोधन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.4(1)नियम/संशो/विधि/पंवारा/2024/304 दिनांक 27-3-2025 के माध्यम से सभी मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद (समस्त राजस्थान) को राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 के तहत जारी पट्टों के प्ररूप-23क एवं 23ख में किए गए संशोधनों के अनुसार पट्टा जारी करने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
अधिसूचना विवरण: राजस्थान राजपत्र (असाधारण) दिनांक 20 जनवरी, 2025 में प्रकाशित अधिसूचना (जी.एस.आर. 97) के तहत राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) नियम, 2025 बनाए गए हैं।
प्ररूप-23-क: नियम 157(1) के अंतर्गत आवासीय भूमि का पट्टा (पट्टा विलेख) से संबंधित है, जो पंचायत आबाबी भूमि पर पुराने संनिर्मित घरों पर कब्जे या 31 दिसंबर, 2016 से ठीक पूर्ववर्ती सत्तर वर्ष के दौरान संनिर्मित घरों के लिए है।
प्ररूप-23-ख: नियम 157(2) के अंतर्गत आबाबी भूमि का आवंटन / परिवारों के कब्जे के अस्थायी मकानों / कच्चे मकानों का नियमितीकरण (पट्टा विलेख) से संबंधित है, जो वर्ष 2003 तक के कच्चे/अस्थायी मकानों के कब्जे के लिए है (अधिकतम 300 वर्ग गज)।
आवश्यक कार्रवाई: सभी संबंधित ग्राम पंचायतों को निर्देशित किया गया है कि वे संशोधित प्ररूपों के अनुसार ही पट्टा जारी करना सुनिश्चित करें।
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 के तहत प्ररूप 23-क एवं 23-ख में संशोधन के संबंध में
राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) नियम, 2025
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.4(1)नियम/संशो/विधि/पंवारा/2024/304 दिनांक 27-3-2025 और राजस्थान राजपत्र असाधारण (दिनांक 20 जनवरी, 2025) की अधिसूचना जी.एस.आर. 97 के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 के अंतर्गत पट्टों के प्ररूप-23-क एवं 23-ख में संशोधन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
नियम 157(1) के अंतर्गत प्ररूप-23-क: आवासीय भूमि का पट्टा (पट्टा विलेख) जिसमें पुराने संनिर्मित घरों पर कब्जे या पंचायत आबाद भूमि पर कब्जे से संबंधित प्रावधान और शर्तें शामिल हैं।
नियम 157(2) के अंतर्गत प्ररूप-23-ख: आबाद भूमि का आवंटन / परिवारों के कब्जे के अस्थायी मकानों / कच्चे मकानों का नियमितीकरण (पट्टा विलेख), जिसमें अधिकतम 300 गज तक की आबाद भूमि के निःशुल्क आवंटन और उससे जुड़ी शर्तों का उल्लेख है।
निर्देश: सभी मुख्य कार्यकारी अधिकारियों, जिला परिषद (राजस्थान) को निर्देशित किया गया है कि वे संबंधित ग्राम पंचायतों को संशोधित प्ररूप-23-क और 23-ख के अनुसार पट्टा जारी करना सुनिश्चित कराएं।
स्वच्छता कार्यों के लिए रजिस्टर प्रारूप (Register Format for Sanitation Works)
ग्राम पंचायतों में स्वच्छता कार्यों के लिए निर्धारित रजिस्टर प्रारूप
यह दस्तावेज़ ग्राम पंचायतों में संचालित होने वाले विभिन्न स्वच्छता कार्यों के रिकॉर्ड और मॉनिटरिंग के लिए आधिकारिक रजिस्टर प्रारूप प्रदान करता है। इसमें मुख्य रूप से चार प्रकार के रजिस्टरों के प्रारूप शामिल हैं:
घर-घर कचरा संग्रहण एवं पृथक्करण कार्य रजिस्टर-1
सड़क सफाई कार्य रजिस्टर-2
नाली सफाई कार्य रजिस्टर-3
सामुदायिक स्वच्छता परिसर सफाई कार्य रजिस्टर-4
सामान्य विवरण और मुख्य बिंदु
प्रत्येक रजिस्टर के मुख्य पृष्ठ (सामान्य विवरण) और दैनिक कार्य इंद्राज पृष्ठ पर निम्नलिखित महत्वपूर्ण जानकारियां दर्ज करने का प्रावधान है:
ग्राम पंचायत का नाम एवं गाँव का नाम
गाँव में वार्डों की संख्या एवं परिवारों की संख्या
फर्म का नाम, मोबाइल नंबर और कार्य की अवधि
गाँव में झाड़ू लगाने का क्षेत्रफल (वर्ग मीटर), नालियों की कुल लंबाई (मीटर) और सी.एस.सी. की संख्या
कार्य आदेश के अनुसार कार्य अंतराल
कार्य करने का दिनांकवार इंद्राज एवं कुल कार्य दिवस
फर्म के प्रतिनिधि के हस्ताक्षर तथा चैक करने वाले अधिकारी (सरपंच / LDC / VDO) के हस्ताक्षर, नाम व पद
बजट घोषणा वर्ष 2025-26 के अंतर्गत अटल ज्ञान केंद्रों की स्थापना एवं क्रियान्विति के संबंध में दिशा-निर्देश
बजट घोषणा वर्ष 2025-26: अटल ज्ञान केंद्रों की स्थापना
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज) राजस्थान सरकार द्वारा बजट घोषणा वर्ष 2025-26 के अंतर्गत प्रथम चरण में 3 हजार से अधिक आबादी वाले 2082 ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर अटल ज्ञान केंद्रों की स्थापना और क्रियान्विति के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
प्रमुख बिंदु एवं वित्तीय प्रावधान
केंद्र राशि: प्रत्येक अटल ज्ञान केंद्र हेतु केंद्र राशि रु. 12.50 लाख का व्यय षष्ठम राज्य वित्त आयोग के दिशा-निर्देश क्रमांक 347 दिनांक 28.01.2025 के बिंदु संख्या 3(iv) 'सामुदायिक केंद्रों का निर्माण एवं रख-रखाव कार्य' (जिसमें पुस्तकालय एवं वाचनालयों का निर्माण, फर्नीचर यथा कुर्सी, टेबल आदि) के तहत किया जा सकेगा।
इंटरनेट सुविधा: 15वें वित्त आयोग के दिशा-निर्देश क्रमांक 301 दिनांक 15.02.2022 के बिंदु संख्या 8 'सार्वजनिक पुस्तकालय' के तहत इंटरनेट सुविधा प्राप्त करने हेतु एकबारीय लागत एवं आवर्ती व्यय का उपयोग किया जा सकेगा।
कंप्यूटर क्रय: षष्ठम राज्य वित्त आयोग के दिशा-निर्देश के बिंदु संख्या (ब)(1) 'सूचना प्रौद्योगिकी/ई-गवर्नेंस/डेटा बेस का उपयोग' के तहत प्रति ग्राम पंचायत 4 कंप्यूटर क्रय किए जा सकेंगे।
अटल ज्ञान केंद्रों की स्थापना हेतु निर्धारित समय सीमा
प्रशासनिक स्वीकृति जारी करना - दिनांक 15.06.2025 तक
तकनीकी स्वीकृति जारी करना - दिनांक 30.06.2025 तक
वित्तीय स्वीकृति जारी करना - दिनांक 05.07.2025 तक
निविदा जारी संबंधित कार्यवाही - दिनांक 15.07.2025 तक
अटल प्रेरकों का चयन
प्रथम चरण में चयनित 2082 ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर अटल ज्ञान केंद्रों की स्थापना के उपरांत निर्धारित प्रक्रिया द्वारा आउटसोर्सिंग के माध्यम से अटल प्रेरकों का चयन किया जाएगा। अटल प्रेरक मानदेय का भुगतान 15वें वित्त आयोग के दिशा-निर्देश के बिंदु संख्या 13 के तहत अन्य बुनियादी सेवाओं/संवर्धित सेवाओं के आवर्ती व्यय और आवश्यक रूप से अन्य प्रशासनिक खर्च (10 प्रतिशत की सीमा भीतर) के तहत किया सकेगा। यह वित्त विभाग की आईडी संख्या 332500866 दिनांक 02.06.2025 द्वारा अनुमोदित है।
राजस्थान में अटल ज्ञान केंद्र की स्थापना एवं संशोधित दिशा-निर्देश
अटल ज्ञान केंद्र योजना - संशोधित दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा राज्य की प्रत्येक ग्राम पंचायत में चरणबद्ध रूप से अटल ज्ञान केंद्र स्थापित किए जाने के संबंध में आदेश एवं संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता, युवाओं के लिए करियर मार्गदर्शन, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और लोक कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी सुलभ कराने के उद्देश्य से शुरू की गई है।
योजना के मुख्य बिंदु एवं गतिविधियां:
अटल पुस्तकालय एवं वाचनालय: महापुरुषों के विचार, प्रतियोगिता परीक्षा पुस्तकें, ई-लब्रेरी और कार्यशाला सेंटर की सुविधा।
संविधान केंद्र: भारत के संविधान की प्रस्तावना, मूल अधिकार, कर्तव्य और लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रदर्शन।
सूचना सुविधा केंद्र: सरकारी योजनाओं की जानकारी, साहित्य वितरण और कानूनी प्रावधानों की जागरूकता।
डिजिटल ई-लर्निंग केंद्र: ई-कॉर्नर, ई-मित्र प्लस मशीन और पोर्टल के माध्यम से योजनाओं के ऑनलाइन आवेदन की सुविधा।
युवा मार्गदर्शन केंद्र: करियर काउंसलिंग, उच्च शिक्षा ऋण संस्थानों की जानकारी और विषय विशेषज्ञों के व्याख्यान।
भवन निर्माण एवं लागत विवरण:
प्रथम चरण में राज्य की 3 हजार से अधिक आबादी वाले 2082 ग्राम पंचायत मुख्यालयों का चयन किया गया है। भारत निर्माण सेवा केंद्र के भवनों में आवश्यकतानुसार हॉल का निर्माण किया जाएगा। प्रत्येक अटल ज्ञान केंद्र के निर्माण की कुल अनुमानित लागत 12.50 लाख रुपये होगी, जिसमें हॉल निर्माण, फर्नीचर, वायरिंग और कंप्यूटर शामिल हैं।
अटल प्रेरकों का चयन एवं मानदेय:
स्थानीय युवाओं को आउटसोर्सिंग के माध्यम से अटल प्रेरक के रूप में नियुक्त किया जाएगा। इनकी न्यूनतम योग्यता 12वीं + RS-CIT प्रमाण-पत्र और न्यूनतम आयु 18 वर्ष (दिनांक 01.04.2025 तक) निर्धारित की गई है। श्रम विभाग की अधिसूचना दिनांक 13.12.2024 के अनुसार इन्हें 9334/- रुपये मासिक मानदेय (359/- प्रतिदिन) देय होगा।
प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) क्रियान्वयन फ्रेमवर्क: महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश और मुख्य बिंदु
यह दस्तावेज ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) के क्रियान्वयन का फ्रेमवर्क है। इसका मुख्य उद्देश्य वर्ष 2022 तक देश के सभी बेघर परिवारों तथा कच्चे व जीर्ण-शीर्ण मकानों में रहने वाले परिवारों को बुनियादी सुविधाओं से युक्त पक्का मकान उपलब्ध कराना है।
मुख्य विशेषताएं एवं वित्तीय प्रावधान:
लक्ष्य: 2016-17 से 2018-19 तक तीन वर्षों में एक करोड़ ग्रामीण आवास निर्माण का लक्ष्य।
आवास का आकार: मकान का न्यूनतम आकार बढ़ाकर 25 वर्ग मीटर (साफ-सुथरे रसोई घर सहित) कर दिया गया है।
इकाई सहायता: मैदानी क्षेत्रों में 70,000 रुपये से बढ़ाकर 1.20 लाख रुपये तथा पर्वतीय राज्यों, दुर्गम क्षेत्रों एवं आईएपी जिलों में 75,000 रुपये से बढ़ाकर 1.30 लाख रुपये की गई है।
शौचालय निर्माण: स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण (एसबीएम-जी), मनरेगा या अन्य स्रोतों से शौचालय निर्माण के लिए 12,000 रुपये की अतिरिक्त सहायता।
मनरेगा मजदूरी: आवास निर्माण के लिए मनरेगा के अंतर्गत 90 / 95 दिनों की अकुशल मजदूरी का प्रावधान।
ऋण सुविधा: इच्छुक लाभार्थियों को वित्तीय संस्थाओं से 70,000 रुपये तक की ऋण सुविधा उपलब्ध कराने में मदद।
लाभार्थियों का चयन और सत्यापन:
लाभार्थियों का चयन सामाजिक आर्थिक जाति आधारित जनगणना (एसईसीसी) 2011 के आंकड़ों और मापदंडों के आधार पर ग्राम सभा द्वारा किया जाता है। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आवाससॉफ्ट (AwaasSoft) पोर्टल और आवास ऐप के माध्यम से ई-शासन, जिओ-टैगिंग और निगरानी की व्यवस्था की गई है।
प्रधान मंत्री आवास योजना (ग्रामीण) शपथ-पत्र प्रारूप
प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) शपथ-पत्र प्रारूप
यह दस्तावेज़ प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत स्वयं के आवास निर्माण हेतु अनुदान या सहायता राशि प्राप्त करने के लिए आवेदक द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले शपथ-पत्र का प्रारूप है।
मुख्य बिंदु:
आवेदक का देश में अन्यत्र कोई पक्का मकान नहीं है।
आवास निर्माण हेतु उपलब्ध भूखंड आवेदक के स्वयं के स्वामित्व का है।
पूर्व में किसी आवासीय योजना की सब्सिडी या लाभ नहीं लिया गया है।
परिवार के किसी भी सदस्य की वार्षिक आय 1.20 लाख रुपए से कम है।
भूखंड रिक्त या कच्चा आवास है।
सरकार द्वारा निर्धारित अनुदान राशि से न्यूनतम 25 वर्गमीटर प्लिंथ क्षेत्र का नवीन पक्का आवास अधिकतम 12 महीने में पूर्ण करने की वचनबद्धता।
ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित स्वच्छता गतिविधियों के भुगतान के सम्बन्ध में दिशा-निर्देश
स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत स्वच्छता गतिविधियों के भुगतान संबंधी निर्देश
राजस्थान सरकार, निदेशालय, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण), पंचायती राज विभाग द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित स्वच्छता सुनिश्चित करने एवं संपादित स्वच्छता गतिविधियों के भुगतान के संबंध में आदेश क्रमांक एफ 12(परावि/एसबीएम/BSR Sanitation/2024-25/3037-44 दिनांक 05.02.2025 जारी किया गया है।
भुगतान की प्रक्रिया एवं मुख्य बिंदु:
ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित साफ-सफाई की व्यवस्था हेतु ग्रामीण विकास विभाग द्वारा स्थायी आदेश संख्या 1/2024 दिनांक 03.09.2024 के तहत 05 आइटम की दरों का निर्धारण कर संवेदक के माध्यम से निविदा आमंत्रित कर कार्य करवाए जाने के निर्देश दिए गए हैं।
मॉडल टेंडर डॉक्यूमेंट के बिंदु संख्या 27, 28, 31 के अनुसार संवेदक द्वारा किए जा रहे स्वच्छता कार्य का भुगतान मासिक आधार पर निम्नलिखित प्रक्रिया से होगा:
सफाई कार्य की ग्राम पंचायत के दैनिक रजिस्टर में प्रविष्टि / रिपोर्ट।
ग्राम पंचायत में ग्रामीण जल एवं स्वच्छता समिति की रिपोर्ट।
स्वच्छता कार्यों की ऑनलाइन पोर्टल लागू किए जाने पर ऐप की रिपोर्ट।
तकनीकी अधिकारी (कनिष्ठ तकनीकी सहायक, कनिष्ठ अभियंता, सहायक अभियंता) द्वारा सड़क एवं नाली सफाई का सत्यापन एवं समस्त 4 संधारित रजिस्टरों में इन्द्राज कर हस्ताक्षर करना।
उक्तानुसार संधारित रजिस्टर/लॉगबुक की प्रतिलिपि प्रतिमाह विकास अधिकारी को प्रस्तुत की जाएगी।
हस्ताक्षर रजिस्टर की छायाप्रतियां बिल के साथ संलग्न कर भुगतान किया सकेगा।
कार्यों के सम्पादन हेतु सामान्य वित्तीय एवं लेखा नियम, RTPP Act and Rules, ग्रामीण कार्य निर्देशिका, 15वां वित्त आयोग / राज्य वित्त आयोग के प्रावधान लागू होंगे।
SOP के अनुसार संबंधित तकनीकी अधिकारियों के निरीक्षण/सत्यापन/प्रमाणीकरण उपरांत उपयोगिता प्रमाण-पत्र जारी किए जाने के पश्चात राशि का समायोजन 15वें वित्त आयोग एवं अन्य के दिशा-निर्देशों के अनुसार किया जाएगा।
पन्द्रहवें वित्त आयोग (2021-26) की सिफारिशों के तहत पंचायती राज संस्थाओं के अनुदान उपयोग हेतु संशोधित दिशा-निर्देश
पन्द्रहवें वित्त आयोग दिशा-निर्देश 2021-26
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा पन्द्रहवें वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत पंचायत अवधि (2021-26) के दौरान पंचायती राज संस्थाओं को देय अनुदान राशि के उपयोग एवं कार्यान्वयन हेतु संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं (क्रमांक: एफ.165(13)पंचारावि/ले.ब./15वां वि.आ./दिशा-निर्देश/2021-22/301, दिनांक 15-2-2022)।
प्रमुख बिंदु एवं अनुदान का विभाजन
टाइड-ग्रैंड (Tied-Grant): कुल अनुदान का 60 प्रतिशत भाग राष्ट्रीय प्राथमिकताओं जैसे पेयजल आपूर्ति, वर्षा जल संचयन और स्वच्छता के लिए निर्धारित किया गया है।
अनअटायड-ग्रैंड (Untied-Grant): कुल अनुदान का 40 प्रतिशत भाग पंचायती राज संस्थाओं द्वारा मूलभूत सेवाओं में सुधार लाने के लिए उपयोग किया जा सकेगा।
अनुदान हस्तांतरण का आधार: पंचायती राज संस्थाओं (जिला परिषदों को 5 प्रतिशत, पंचायत समितियों को 20 प्रतिशत एवं ग्राम पंचायतों को 75 प्रतिशत) में राशि का वितरण किया गया है।
मूल (Untied) अनुदान के उपयोग के मुख्य क्षेत्र
स्वास्थ्य, शिक्षा और पोषण से संबंधित गतिविधियां (जैसे टीकाकरण व कुपोषण की रोकथाम)।
ग्राम पंचायत भवनों का निर्माण और मरम्मत।
ग्राम पंचायत क्षेत्रों के अंदर और अन्तर ग्राम पंचायत सड़कों व पैदल रास्तों का निर्माण व मरम्मत।
एलईडी स्ट्रीट लाइट्स और सोलर लाइटिंग की स्थापना व रख-रखाव।
श्मशान और कब्रिस्तान का निर्माण, मरम्मत एवं रख-रखाव।
सार्वजनिक पुस्तकालय, बच्चों के पार्क, खेल का मैदान और ग्रामीण हाट।
तकनीकी एवं प्रशासनिक व्यय
15वें वित्त आयोग के तहत देय मूल (अनटायड) अनुदान का अधिकतम 10 प्रतिशत तकनीकी एवं प्रशासनिक व्ययों (जैसे संविदा पर डेटा एंट्री ऑपरेटर/इंजीनियर की सेवाएं, कंप्यूटर क्रय, इंटरनेट सुविधा, सिविल कार्यों की गुणवत्ता की जांच आदि) के लिए उपयोग किया जा सकता है।
बेंध-अनुदान (Tied Grants) के अंतर्गत प्राथमिकताएं
बेंध-अनुदान (Tied-Grant) की 50% राशि का उपयोग स्वच्छता और खुले में शौच मुक्त (ODF) स्थिति तथा शेष 50% राशि का उपयोग पेयजल आपूर्ति, जल संचयन और जल पुनर्चक्रण की बुनियादी सेवाओं के लिए किया जा सकता है।
GKN 2010
ग्रामीण कार्य निर्देशिका GKN 2010
फार्मर रजिस्ट्री शिविरों के आयोजन हेतु षष्ठ राज्य वित्त आयोग की अनुदान राशि के उपयोग की स्वीकृति
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग राजस्थान सरकार आदेश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), जयपुर द्वारा दिनांक 05 फरवरी, 2025 से 31 मार्च, 2025 तक प्रदेश की समस्त ग्राम पंचायतों में "फार्मर रजिस्ट्री" शिविरों के आयोजन के संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
शिविर की अवधि: दिनांक 05 फरवरी, 2025 से 31 मार्च, 2025 तक प्रदेश की समस्त ग्राम पंचायतों में फार्मर रजिस्ट्री शिविर आयोजित किए जा रहे हैं।
वित्तीय स्वीकृति: षष्ठ राज्य वित्त आयोग के अंतर्गत पंचायती राज संस्थाओं को देय अनुदान राशि के उपयोग हेतु, ग्राम पंचायत स्तर पर तीन दिवसीय शिविर आयोजित करने पर प्रति ग्राम पंचायत अधिकतम रु. 15,000/- प्रति शिविर के व्यय/उपयोग करने की सहमति प्रदान की जाती है।
संदर्भित पत्र एवं आदेश: यह सहमति वित्त (व्यय-5) विभाग की आई.डी. संख्या 332500159 दिनांक 21.02.2025, राजस्व एवं उपवेशन विभाग के पत्र संख्या 349 दिनांक 21.01.2025 तथा विभागीय राजकाज पत्रक संख्या 13145977 दिनांक 22.01.2025 के क्रम में दी गई है।
यह आदेश शासन सचिव एवं आयुक्त डॉ. जोगाराम द्वारा जारी किया गया है।
षष्ठ राज्य वित्त आयोग की सिफारिशों के क्रियान्वयन एवं अनुदान उपयोग हेतु दिशा-निर्देश (वित्तीय वर्ष 2024-25)
षष्ठ राज्य वित्त आयोग (2020-25) दिशा-निर्देश 2024-25
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), राजस्थान सरकार द्वारा क्रमांक एफ 165(07)पंकावि/एसएफसी/षष्ठ/दिशा-निर्देश/2024-25/347 दिनांक 28.01.2025 के अंतर्गत षष्ठ राज्य वित्त आयोग की अंतिम रिपोर्ट (2020-25) पर राज्य सरकार द्वारा की गई कार्यवाही विवरण (ATR) के अनुसार पंचायती राज संस्थाओं को देय अनुदान के उपयोग हेतु विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
अनुदान राशि का मुख्य विभाजन
मूलभूत एवं विकास कार्य (55 प्रतिशत राशि): ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था, सड़कों एवं सार्वजनिक स्थानों की नियमित सफाई, स्वच्छता, पार्कों की चारदीवारी, सामुदायिक केंद्रों का निर्माण, आंतरिक सड़कों/सी.सी. रोड व नालियों का निर्माण (अधिकतम 40% सीमा तक), इंटरनेट सुविधा, कंप्यूटर क्रय, ऑडिट फीस का भुगतान, जनप्रतिनिधियों का प्रशिक्षण और मानदेय, तथा निजी आय बढ़ाने हेतु वाणिज्यिक परिसरों का निर्माण आदि कार्य किए जा सकेंगे।
राष्ट्रीय/राज्य प्राथमिकता की योजनाएं/गतिविधियां (40 प्रतिशत राशि): सूचना प्रौद्योगिकी/ई-गवर्नेंस/डेटाबेस (प्रियासॉफ्ट, पीएफएमएस, ई-ग्राम स्वराज पोर्टल, कंप्यूटर ऑपरेटर), पेयजल/आर.ओ. प्रणाली, मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन योजना, स्वच्छता अभियान, श्री अन्नपूर्णा रसोई योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण, सौर/एल.ई.डी. लाइटें, अग्निशमन सेवाएं, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ और युवा विकास से जुड़े क्रियाकलाप।
लिंगानुकूल स्थान बनाने के लिए (2 प्रतिशत राशि): प्रत्येक पंचायती राज संस्थान में हाथ धोने की सुविधाओं सहित पृथक शौचालय, महिलाओं के उत्पीड़न से संबंधित शिकायतों के निवारण हेतु आंतरिक समितियों का प्रदर्शन पट्ट, महिलाओं की अध्यक्षता में हेल्प डेस्क तथा महिला आगंतुकों के लिए अलग बैठने की व्यवस्था।
निष्पादन के लिए प्रोत्साहन अनुदान (3 प्रतिशत राशि): वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए यदि कोई पंचायती राज संस्था अपनी स्वयं की कर/गैर-कर राजस्व (निजी आय) पिछले तीन वर्षों की औसत आय की तुलना में बढ़ाती है, तो उसे बढ़ी हुई अतिरिक्त राशि के समान प्रोत्साहन राशि का भुगतान किया जाएगा।
वित्तीय वर्ष 2024-25 हेतु आवंटन अनुपात
राज्य के स्वयं के शुद्ध कर राजस्व के 7.00 प्रतिशत हिस्से का वितरण 2011 की जनगणना के आधार पर पंचायती राज संस्थाओं एवं नगरीय स्थानीय निकायों के मध्य 73.2 एवं 26.8 प्रतिशत के अनुपात में किया गया है। जिला परिषदों को 5 प्रतिशत, पंचायत समितियों को 20 प्रतिशत और ग्राम पंचायतों को 75 प्रतिशत हिस्सा राशि वित्तीय वर्ष 2024-25 में दिए जाने की संस्कृति की गई है।
प्रधानमन्त्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) नयाँ आवास आवेदन फॉर्म और आवश्यक दस्तावेज चेकलिस्ट
प्रधानमन्त्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) आवेदन फॉर्म और दिशानिर्देश
यह दस्तावेज़ ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार और पंचायती राज विभाग के अंतर्गत प्रधानमन्त्री आवास योजना-ग्रामीण के नए आवास निर्माण हेतु आवेदन पत्र, स्वीकृति प्रक्रिया, शपथ-पत्र, भूमि प्रमाण-पत्र, सहमति-पत्र और चेकलिस्ट का आधिकारिक प्रारूप प्रस्तुत करता है।
मुख्य उद्देश्य एवं प्रक्रिया
प्रपत्र-24(1/1): यह नया आवास प्राप्त करने के लिए ग्रामीण विकास अधिकारी, टैग अधिकारी या ई-मित्र के माध्यम से भरा जाने वाला आवेदन पत्र है।
योग्यता और पात्रता: आवेदक का नाम PWL-2021 की वरीयता सूची में होना चाहिए। आवेदक के पास पूर्व में पक्का मकान नहीं होना चाहिए और वह निर्धारित अपवर्जन मानदंडों (जैसे वाहन, सरकारी नौकरी, आयकरदाता, भूमि सीमा आदि) के दायरे में नहीं आना चाहिए।
अनुदान और निर्माण शर्तें: आवास निर्माण हेतु मिलने वाली सहायता राशि से न्यूनतम 25 वर्गमीटर प्लिथ क्षेत्र का नया आवास अधिकतम 12 माह की अवधि में पूरा करना अनिवार्य है।
स्वीकृति प्रक्रिया: ग्राम विकास अधिकारी या टैग अधिकारी द्वारा पात्रता की जाँच, जियो टैग फोटो, Aawas Soft पर रजिस्ट्रेशन और पंचायत समिति स्तर पर प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति दी जाती है।
आवश्यक दस्तावेजों की चेकलिस्ट
वरीयता अनुसार भरा हुआ पूर्ण रजिस्ट्रेशन फॉर्म (प्रपत्र-1) और प्रमाणित फोटो
जमीन से संबंधित दस्तावेज की प्रमाणित प्रति या भूमि संबंधित प्रमाण-पत्र / सहमति-पत्र
ग्राम पंचायत की आबादी भूमि में रहवासी होने का प्रमाण-पत्र (सरपंच/ग्राम विकास अधिकारी द्वारा)
जॉब कार्ड, जन आधार कार्ड, राशन कार्ड और आधार कार्ड की प्रमाणित प्रतियाँ
आवेदक स्वयं की बैंक खाता संख्या की छाया प्रति
शपथ-पत्र, योग्यता निर्धारण शपथ-पत्र, कंसेंट फॉर्म (Consent Form) और आधार कार्ड सहमति प्रमाण-पत्र
कार्यस्थल एवं प्रस्तावित कार्य की जियो टैग फोटो
नोट: तथ्य छिपाकर या गलत जानकारी देकर लाभ प्राप्त करने पर राज्य सरकार से प्राप्त अनुदान राशि दण्डनीय ब्याज सहित वसूली योग्य होगी और प्रशासनिक स्वीकृति निरस्त कर दी जाएगी।
कार्यालय पटवार मण्डल - मकान व आबादी भूमि संबंधी रिपोर्ट प्रारूप
कार्यालय पटवार मण्डल रिपोर्ट प्रारूप
यह दस्तावेज कार्यालय पटवार मण्डल, तहसील और जिला स्तर पर उपयोग होने वाला एक आधिकारिक रिपोर्ट प्रारूप है। इस प्रारूप का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में आवेदक के मकान और आबादी भूमि से संबंधित विवरण को पटवार मण्डल के रिकॉर्ड के आधार पर सत्यापित करना है।
मुख्य बिंदु और विवरण:
कार्यालय विवरण: पटवार मण्डल, तहसील और जिला का उल्लेख करने के लिए निर्धारित स्थान।
आवेदक की जानकारी: आवेदक का नाम, पिता का नाम, जाति और निवास स्थान की प्रविष्टि।
भूमि और मकान का विवरण: ग्राम की आबादी भूमि में बने मकान, आराजी नंबर और मकान का कुल क्षेत्रफल (वर्ग फीट में) दर्ज करने का प्रावधान।
सत्यापन: पटवारी हल्के के हस्ताक्षर के साथ रिपोर्ट जारी करने का स्थान।
यह प्रपत्र पंचायती राज और ग्रामीण प्रशासनिक कार्यों के अंतर्गत आबादी भूमि व मकान से जुड़े सत्यापन कार्यों में उपयोगी है।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता संबंधी कार्य और मॉडल टेंडर डॉक्यूमेंट के संबंध में दिशा-निर्देश
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता संबंधी कार्यों के लिए मॉडल टेंडर और दरें
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रामीण विकास, अनुभाग-5), जयपुर द्वारा दिनांक 03/09/2024 को जारी स्थायी आदेश संख्या 01/2024 के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता संबंधी कार्यों के संपादन के संबंध में निर्देश और मॉडल टेंडर डॉक्यूमेंट जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
स्वच्छता गतिविधियां: घर-घर कचरा संग्रहण एवं पृथक्करण, सड़क/बाजार/मुख्य चौक की सफाई, नाली सफाई और सामुदायिक स्वच्छता परिसर (CSC) की सफाई शामिल है।
निर्धारित दरें: घर-घर कचरा संग्रहण (वाहन पंचायत द्वारा उपलब्ध कराने पर रु. 0.88 प्रति घर प्रतिदिन और संवेदक द्वारा वाहन उपलब्ध कराने पर रु. 2.63 प्रति घर प्रतिदिन), कचरा पृथक्करण (रु. 0.45 प्रति घर प्रतिदिन), सड़क सफाई (रु. 0.10 प्रति वर्गमीटर), नाली सफाई (रु. 57.69 प्रति घनमीटर) और सामुदायिक स्वच्छता परिसर सफाई (रु. 49.08 प्रति एस.सी.एस. एक बारिज) निर्धारित की गई हैं।
समय सीमा: परिवारों की संख्या एवं स्वच्छता आकलन सितंबर माह का प्रथम सप्ताह, निविदा जारी करना सितंबर माह का द्वितीय सप्ताह, कार्य आदेश जारी करना सितंबर माह का चतुर्थ सप्ताह और कार्य प्रारंभ 02 अक्टूबर को निर्धारित है।
नियम एवं शर्तें: सभी कार्य RTPP Act 2012 और RTPP Rules 2013 के प्रावधानों के तहत ई-निविदा प्रक्रिया द्वारा संपादित किए जाएंगे।
विमुक्त, घुमन्तु एवं अर्द्धघुमन्तु आवासहीन व्यक्तियों को भूखंड/पट्टा आवंटन के संबंध में परिपत्र एवं दिशा-निर्देश
विमुक्त, घुमन्तु एवं अर्द्धघुमन्तु आवासहीन व्यक्तियों को भूखंड आवंटन
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा विमुक्त, घुमन्तु एवं अर्द्धघुमन्तु श्रेणी के आवासहीन व्यक्तियों को नियमानुसार भूखंड और पट्टा आवंटन करने के संबंध में आवश्यक परिपत्र एवं दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
प्रमुख बिंदु
नियम का संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम-158 के अंतर्गत पंचायतें 300 वर्गगज तक की आबादी भूमि रियायती दरों या पात्र श्रेणियों के लिए निःशुल्क आवंटित कर सकती हैं।
रियायती दरें (नियम 158(2)):
1000 से कम आबादी वाले गांवों में (1991 की जनगणना): 2/- रुपये प्रति वर्ग मीटर
1001 से 2000 की आबादी वाले गांवों में (1991 की जनगणना): 5/- रुपये प्रति वर्ग मीटर
2000 से अधिक आबादी वाले गांवों में (1991 की जनगणना): 10/- रुपये प्रति वर्ग मीटर
पट्टा वितरण और कार्यक्रम: राज्य सरकार के निर्देशानुसार पात्र परिवारों को भूखंड/पट्टा वितरण के संबंध में समय-समय पर अभियान चलाए गए हैं और जिला एवं स्थानीय स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाने के निर्देश हैं।
आवश्यक कार्रवाई: सभी संबंधित जिला कलेक्टरों, मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (जिला परिषद) और विकास अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे पात्र आवासहीन परिवारों का चिन्हीकरण कर पट्टे तैयार कराने और वितरण की कार्रवाई सुनिश्चित करें।
विकसित भारत संकल्प यात्रा के सफल क्रियान्वयन एवं वित्तीय प्रावधान के संबंध में दिशा-निर्देश
विकसित भारत संकल्प यात्रा का सफल क्रियान्वयन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा विकसित भारत संकल्प यात्रा के सफल क्रियान्वयन के संबंध में दिनांक 22-12-2023 को आदेश जारी किया गया है।
मुख्य उद्देश्य एवं विशेषताएँ
भारत सरकार द्वारा संचालित विभिन्न फ्लेगशिप योजनाओं की जानकारी आमजन तक पहुँचाने, पात्र व्यक्तियों को लाभान्वित करने और योजनाओं के निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने के उद्देश्य से यह यात्रा राजस्थान के सभी जिलों की प्रत्येक ग्राम पंचायत तथा 10 हजार से अधिक आबादी के शहरी स्थानीय निकायों में 26 जनवरी 2024 तक जारी रहेगी। यात्रा की प्रमुख विशेषताओं में:
पहुँच से छूटे लोगों तक पहुँचना
प्रसार और जागरूकता बढ़ाना
संभावित लाभार्थियों का नामाकन एवं विशेष कैंपों का आयोजन
प्रत्येक ग्राम पंचायत में मोबिलाइजेशन, सांस्कृतिक प्रदर्शन एवं सूचना तकनीक का उपयोग
वित्तीय प्रावधान एवं व्यय सीमा
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के आदेश क्रमांक एफ 165(07)पाइफो/एसएफसी/षष्टम/दिशा निर्देश/2021-22/100 दिनांक 25-01-2022 के अनुसार पंचायती राज संस्थाओं में शिविरों/अभियानों के लिए व्यय सीमा निर्धारित है। विकसित भारत संकल्प यात्रा के सफल क्रियान्वयन हेतु:
प्रति जिला परिषद: रु. 0.50 लाख तक का व्यय
प्रति ग्राम पंचायत: रु. 0.20 लाख तक का व्यय
संबंधित जिला परिषद एवं ग्राम पंचायतें यह व्यय षष्ठम राज्य वित्त आयोग की उपलब्ध अवशेष राशि से करना सुनिश्चित करें तथा इस कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान करें।
अकुशल व अर्द्धकुशल (मेट) श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी दर पुनरीक्षण के संबंध में आदेश
कार्यालय जिला परिषद (ग्रा.वि.प्र.), बाड़मेर - न्यूनतम मजदूरी दर पुनरीक्षण आदेश
कार्यालय जिला परिषद (ग्राम विकास एवं पंचायती राज), बाड़मेर द्वारा दिनांक 18.09.2023 को अकुशल व अर्द्धकुशल (मेट) श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी दर पुनरीक्षित करने के संबंध में आदेश जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
संदर्भित पत्र: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग का पत्रांक एफ 27(74) ग्राविवि/अनु-5/जीकेन/न्यूनतम मजदूरी दर/2014-15 दिनांक 13.09.2023 एवं श्रम विभाग की अधिसूचना दिनांक 31.08.2023।
लागू योजनाएं: महात्मा गांधी मनरेगा योजना को छोड़कर, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा संचालित विभिन्न केंद्र व राज्य प्रवर्तित योजनाओं में नियोजित श्रमिक।
पुनरीज्क्षित न्यूनतम मजदूरी दर: अकुशल श्रमिकों हेतु रुपये 285/- प्रति दिवस तथा अर्द्धकुशल (मेट) श्रमिकों हेतु रुपये 297/- प्रति दिवस।
प्रभावी तिथि: यह आदेश जारी होने की तिथि से प्रभावी है।
बीसआर सॉफ्टवेयर संबंधी निर्देश: श्रम विभाग द्वारा पुनरीक्षित न्यूनतम मजदूरी दरों का विभागीय निर्माण/विकास कार्यों के लिए उपयोग हेतु आदेश जारी होने की तिथि से लागू करने के साथ-साथ इन पुनरीक्षित न्यूनतम मजदूरी दरों का इन्द्राज / अपडेशन वर्ष 2023-24 की वर्तमान बीएसआर सॉफ्टवेयर में नहीं किया जावेगा। उक्त पुनरीक्षित दरों का इन्द्राज माह अप्रैल में वर्ष 2024-25 की बीएसआर में अपलोड किया जावेगा।
तकमीनों में भुगतान: पुनरीक्षित न्यूनतम मजदूरी दर एवं वर्ष 2023-24 बीएसआर सॉफ्टवेयर में दर्ज / इन्द्राज न्यूनतम मजदूरी दर के अंतर राशि का भुगतान कार्य के तकमीने में पृथक से सम्मिलित करते हुए संबंधित कार्यकारी संस्था द्वारा उक्तनुसार अकुशल व अर्द्धकुशल (मेट) श्रमिक को किया जावे। पत्र जारी करने के दिनांक के बाद जारी समस्त तकमीनों में श्रम दर की अंतर राशि का प्रावधान कर ही तकमीनों में प्रस्तुत किए जावें।
ग्राम विकास अधिकारी (ग्राम सेवक) के रिक्त पदों का कार्यभार सौंपे जाने बाबत निर्देश
ग्राम विकास अधिकारी के रिक्त पदों के कार्यभार के संबंध में निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी पत्र क्रमांक एफ.37()पंवारा/प्रशा.2/मंत्रा/ग्रासेचार्ज/2018/1024 दिनांक 06/05/2022 के माध्यम से ग्राम विकास अधिकारी (ग्राम सेवक) के रिक्त पदों का कार्यभार दिए जाने के संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
कार्यभार की सीमा: किसी भी ग्राम पंचायत में ग्राम विकास अधिकारी का पद रिक्त होने पर उसकी समीपस्थ ग्राम पंचायत में नियुक्त ग्राम विकास अधिकारी को चार्ज दिलाया जाए, किंतु किसी भी अवस्था में ग्राम विकास अधिकारी के पास दो से अधिक ग्राम पंचायतों का कार्यभार नहीं दिया जाए।
कनिष्ठ लिपक (LDC) को कार्यभार: जिले में रिक्त पदों का कार्यभार दिए जाने के पश्चात जिन ग्राम पंचायतों में पद रिक्त रहें, वहां ग्राम विकास अधिकारी का कार्यभार उसी पंचायत के कार्यरत कनिष्ठ लिपिक को दिया जाए। यह ध्यान रखा जाए कि किसी भी कनिष्ठ लिपिक के पास एक से अधिक ग्राम पंचायत का कार्यभार न हो।
अन्य व्यवस्था: यदि किसी ग्राम पंचायत में ग्राम विकास अधिकारी का पद रिक्त रहे अथवा ग्राम विकास अधिकारी और कनिष्ठ लिपिक दोनों ही पद रिक्त हों, तो राज्य हित को ध्यान में रखते हुए कार्यभार अन्य ग्राम विकास अधिकारी/कनिष्ठ लिपिक को दिए जाने हेतु संबंधित जिले के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद को अधिकृत किया गया है।
राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 के नियम 157(1) के संबंध में मार्गदर्शन बाबत
राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 के नियम 157(1) पर मार्गदर्शन
कार्यालय जिला परिषद जोधपुर (ग्रामीण विकास प्रकोष्ठ) द्वारा जारी पत्र क्रमांक जिपजो/पंचायत/2022-23/1134 दिनांक 21/4/2022 के माध्यम से विकास अधिकारी, पंचायत समिति लूणी, जिला जोधपुर को राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 के संशोधित नियम 157(1) के संबंध में मार्गदर्शन प्रेषित किया गया है।
मुख्य बिंदु एवं मार्गदर्शन
विषय: राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 के संशोधित नियम 157(1) के सम्बन्ध में मार्गदर्शन बाबत।
संदर्भ: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), जयपुर का पत्र क्रमांक एफ.139(3) मार्गदर्शन/विधि/धरा/2022/291 दिनांक 23/3/2022 (तथा संयुक्त शासन सचिव (प्रथम) जयपुर के पत्रांक 291 दिनांक 23.03.2022)।
नियम 157(1) के अंतर्गत उठाए गए मुख्य प्रश्न:
नियम 157 पुराने गृहों का विनियामितीकरण (1) जहां व्यक्ति आबादी भूमि में पुराने गृह का कब्जा रखते हैं, और पट्टा जारी किये जाने के इच्छुक हैं, में 'व्यक्ति' शब्द को इस नियम के सन्दर्भ में परिभाषित/विवेचित करने के संबंध में।
किसी 'व्यक्ति' के आबादी भूमि में पुश्तैनी कब्जाशुदा मकान एक से अधिक होने पर उस व्यक्ति/उस परिवार के अन्य सदस्यों के नाम एक से अधिक पट्टे/विक्रय विलेख जारी किये जा सकते हैं अथवा नहीं।
विभाग द्वारा प्रेषित मार्गदर्शन:
'व्यक्ति' शब्द पंचायती राज अधिनियम, 1994 में नहीं है। उक्त शब्द की परिभाषा Gen. Clause Act के अनुसार व्यक्ति शब्द की परिभाषा Section 42 के अनुसार:- "Person shall include any company or association or body of individuals, whether incorporated or not;" है।
संबंधित प्रावधानों में ऐसे पट्टे/विक्रय विलेख जारी किए जाने के संबंध में स्पष्ट प्रावधान नहीं है।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग राजस्थान सरकार - शासकीय भवन परिसरों में विकास कार्यों के संबंध में आदेश
राजकीय भवन परिसरों में निर्माण कार्यों के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा क्रमांक एफ 27(252)/ग्राविवि/ग्रुप-5/SOP/पार्ट-3/2021-22 दिनांक 22 मार्च, 2022 के माध्यम से एक कार्यालय आदेश जारी किया गया है।
इस आदेश का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण विकास विभाग एवं पंचायती राज विभाग की योजनाओं के अंतर्गत शासकीय भवन परिसरों (जैसे- विद्यालय, चिकित्सालय, आंगनबाड़ी केन्द्र, किसान सेवा केन्द्र, पशु चिकित्सालय आदि) में किए जाने वाले कार्यों में आने वाली बाधाओं का समाधान करना है।
मुख्य बिंदु:
समस्या: शासकीय भवन परिसरों के नाम भूमि का पट्टा जारी न होने के कारण प्रशासनिक, तकनीकी या वित्तीय स्वीकृतियां लंबे समय तक लंबित रहती हैं, जिससे निर्माण कार्य विलंबित और प्रभावित होते हैं।
समाधान: जहाँ कार्यस्थल में राजकीय भवन परिसर होना सुनिश्चित हो, वहाँ यदि राजकीय भवन परिसर के नाम भूमि का पट्टा न हो, तो उस संस्था के प्रधान या कार्यालयाध्यक्ष की सहमति/अनापत्ति के अनुरूप निर्माण कार्य कराया जा सकता है।
ग्राम पंचायतों की भूमिका: इस संबंध में ग्राम पंचायतें भी संबंधित संस्था प्रधान की सहमति से विकास कार्य की स्वीकृति जारी कर सकेंगी।
यह आदेश प्रमुख शासन सचिव अपर्णा अरोरा द्वारा जारी किया गया है तथा इसकी प्रतिलिपि सूचनाथ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु विभिन्न संबंधित अधिकारियों को प्रेषित की गई है।
शिकायत या परिवाद के साथ 50 रुपये के नॉन ज्यूडिशियल स्टाम्प पर शपथ पत्र प्रस्तुत करने बाबत आदेश
परिवाद एवं शिकायतों के संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज) द्वारा आदेश क्रमांक एफ 17(ई)पसवि/प्र.2/संस्था/परिपत्र/2014/461, दिनांक 02/03/2022 जारी किया गया है।
इस आदेश के अनुसार, किसी भी परिवाद अथवा शिकायत की जांच करने से पूर्व यह अनिवार्य किया गया है कि परिवाद के साथ परिवाद के सत्य होने व आवेदक के परिचय बाबत 50 रुपये के नॉन ज्यूडिशियल स्टाम्प पर शपथग्रहिता से सत्यापित शपथ पत्र संलग्न किया जाए।
मुख्य बिंदु:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
दिनांक: 02/03/2022
आदेश क्रमांक: एफ 17(ई)पसवि/प्र.2/संस्था/परिपत्र/2014/461
नियम: परिवाद या शिकायत की जांच से पहले 50 रुपये के नॉन ज्यूडिशियल स्टाम्प पर शपथ पत्र संलग्न करना अनिवार्य है।
उद्देश्य: कार्यालयों में अनावश्यक शिकायतों को प्राप्त होने से रोकना और निर्धारित प्रक्रिया का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करना।
अतिरिक्त / सहायक विकास अधिकारी के जॉब चार्ट के संबंध में परिपत्र
परिचय एवं मुख्य उद्देश्य
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा क्रमांक एफ.28(2)परावि/प्रशा.2/पंचा.प.अ./जॉब चार्ट/2017/550, दिनांक 23-02-2022 के तहत अतिरिक्त विकास अधिकारी और सहायक विकास अधिकारी के जॉब चार्ट के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
अतिरिक्त विकास अधिकारी के कार्य एवं उत्तरदायित्व
समन्वयक के रूप में: अतिरिक्त विकास अधिकारी, सहायक विकास अधिकारी तथा विकास अधिकारी के मध्य एक समन्वयक के रूप में विकास अधिकारी के सीधे नियंत्रण में कार्य करेंगे।
शाखाओं के प्रभारी: पंचायत समिति की समस्त शाखाओं के प्रभारी के रूप में विकास अधिकारी के निर्देशन में कार्य करेंगे।
पर्यवेक्षण: पंचायत समिति के सहायक विकास अधिकारी अतिरिक्त विकास अधिकारी के पर्यवेक्षण में अपनी आवंटित शाखाओं का कार्य संपादित करेंगे।
नोडल अधिकारी: प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), राजीविका, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं के नोडल अधिकारी भी आवश्यकतानुसार नियुक्त किए जा सकेंगे।
सहायक विकास अधिकारी (SEO) का जॉब चार्ट एवं सर्कल पुनर्गठन
पदों का विवरण: जिला परिषद में कुल 165 सृजित पद (प्रति कार्यालय 5-5 पद) तथा पंचायत समिति में 2264 सृजित पद (औसततन 5 ग्राम पंचायतों पर 1 पद) हैं।
सर्कल/क्लस्टर पुनर्गठन: पंचायत समिति के परिदृश्य में आने वाली समस्त ग्राम पंचायतों को स्वीकृत सहायक विकास अधिकारियों के पदों के अनुरूप समान रूप से भौगोलिक संबद्धता और निकटता को ध्यान में रखते हुए सर्कल/क्लस्टर में पुनर्वितजित किया जाएगा।
निरीक्षण एवं भ्रमण: सहायक विकास अधिकारी अपने कलस्टर की प्रत्येक ग्राम पंचायत का माह में कम से कम एक बार विस्तृत निरीक्षण करेंगे तथा निरीक्षण प्रतिवेदन विकास अधिकारी के माध्यम से मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद तथा विभाग को प्रेषित करेंगे।
ग्राम पंचायत रिकॉर्ड: सहायक विकास अधिकारी ग्राम पंचायत अभिलेखों, लेजर, रोकड़ बही, स्टॉक रजिस्टर, जन्म-मृत्यु पंजीका, और विभिन्न अधिनियमों (सूचना का अधिकार अधिनियम 2005, सुनवाई का अधिकार अधिनियम 2012, लोक सेवा गारंटी अधिनियम 2011) के अंतर्गत प्राप्त आवेदन रजिस्टरों का नियमित संधारण सुनिश्चित कराएंगे।
अतिरिक्त / सहायक विकास अधिकारी के जॉब चार्ट के संबंध में परिपत्र
अतिरिक्त एवं सहायक विकास अधिकारी जॉब चार्ट परिपत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा क्रमांक एफ.28(2)परावि/प्रशा.2/पंचा.प.अ./जॉब चार्ट/2017/550 दिनांक 23-2-2022 के तहत अतिरिक्त विकास अधिकारी और सहायक विकास अधिकारी के जॉब चार्ट के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
अतिरिक्त विकास अधिकारी के कार्य एवं दायित्व
अतिरिक्त विकास अधिकारी, सहायक विकास अधिकारी तथा विकास अधिकारी के मध्य एक समन्वयक के रूप में विकास अधिकारी के सीधे नियंत्रण में कार्य करेंगे।
पंचायत समिति की समस्त शाखाओं के प्रभारी के रूप में विकास अधिकारी के निर्देशन में कार्य करेंगे।
पंचायत समिति के सहायक विकास अधिकारी अतिरिक्त विकास अधिकारी के पर्यवेक्षण में अपनी आवंटित शाखाओं का कार्य संपादित करेंगे।
अतिरिक्त विकास अधिकारी अपने अधीन पदस्थापित अतिरिक्त विकास अधिकारियों को प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), राजिविका, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं का नोडल अधिकारी भी आवश्यकतानुसार नियुक्त कर सकेंगे।
सहायक विकास अधिकारी (SEO) का जॉब चार्ट एवं कलस्टर पुनर्गठन
विभागीय परिपत्र क्रमांक 4313 दिनांक 16.11.17 की निरंतरता में सहायक विकास अधिकारी के ग्राम पंचायत कलस्टर पुनर्गठन करने एवं उसके अनुरूप निरीक्षण व्यवस्था स्थापित करने के संबंध में निर्देश दिए गए हैं।
जिला परिषद: कुल सृजित पद 165 (प्रति कार्यालय में 5-5 पद)।
पंचायत समिति: कुल सृजित पद 2264 (औसततन 5 ग्राम पंचायतों पर 1 पद)।
सहायक विकास अधिकारी के प्रमुख निरीक्षण एवं कार्य
सहायक विकास अधिकारी अपने कलस्टर की प्रत्येक ग्राम पंचायत का माह में कम से कम एक बार विस्तृत निरीक्षण करेंगे।
ग्राम पंचायतों के कलस्टर के मध्य वाली ग्राम पंचायत को कलस्टर मुख्यालय बनाया जाकर कलस्टर की ग्राम पंचायतों के ग्राम विकास अधिकारियों की माह में कम से कम एक बैठक का आयोजन किया जाएगा।
मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण, सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास कार्यक्रम, विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास कार्यक्रम, राज्य वित्त आयोग अनुदान, केन्द्र वित्त आयोग अनुदान, स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन जैसी योजनाओं के कार्यों का प्रतिमाह निरीक्षण करेंगे।
ग्राम पंचायत में संधारित किए जाने वाले रिकॉर्ड/पंजिकाओं का संधारण और अद्यतन सुनिश्चित कराना।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग - कार्य सम्पादन हेतु स्थायी आदेश
कार्य सम्पादन हेतु स्थायी आदेश
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज) द्वारा क्रमांक एफ.17(ई)ग्राविप/प्र.2/संस्था/2009/04, दिनांक 03.01.2022 के तहत नया स्थायी आदेश जारी किया गया है। यह आदेश राजस्थान कार्यपद्धति नियमों के नियम 21 के अंतर्गत पूर्व में जारी स्थायी आदेश (दिनांक 04.01.2017) को अतिक्रमित करते हुए जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
कार्यों का निष्पादन: इस आदेश की अनुसूची में पंचायती राज विभाग से संबंधित कार्यों का विवरण दिया गया है और यह निर्धारित किया गया है कि कौन सा कार्य किस अधिकारी, निदेशक/आयुक्त, शासन सचिव (पं.राज), प्रमुख शासन सचिव (ग्रा.वि. एवं पं.राज), राज्यमंत्री या मंत्री के स्तर पर निपटाया जाएगा।
अनुसूची के कार्य: इसमें नीति निर्धारण, नीतिगत परिवर्तन, वार्षिक व पंचवर्षीय योजना, मंत्रीमंडल ज्ञापन, नियम एवं अधिनियमों का संशोधन, ग्राम सभा एवं मीटिंग, पंचायत संस्थाओं की स्थापना, आरक्षण, कार्यकाल, निलंबन, वित्तीय बजट, लेखा और संपरीक्षा, कर्मचारियों के स्थानांतरण, विधानसभा प्रश्न, पंचायती राज संस्थाओं का विघटन और अन्य कई प्रशासनिक एवं विधिक कार्य शामिल हैं।
विशेष निर्देश:
मंत्री की अनुपस्थिति में मामलों को मुख्यालय पर निपटाने और बाद में मंत्री के ध्यान में लाने के संबंध में निर्देश दिए गए हैं।
शासन सचिव / प्रमुख शासन सचिव (ग्रा.वि. एवं पं.राज) की अनुपस्थिति में निदेशक/आयुक्त मामलों को निपटा सकते हैं।
वित्तीय निहितार्थ (Financial Implications) वाले प्रकरणों तथा 50 लाख रुपये या उससे अधिक की निविदा से संबंधित पत्रावलियां वित्तीय सलाहकार के माध्यम से प्रस्तुत की जाएंगी।
स्थायी आदेश संख्या 38/2021 - कनिष्ठ तकनीकी सहायक / कनिष्ठ अभियंता की तकनीकी स्वीकृति जारी करने हेतु प्रदत्त शक्तियों में संशोधन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग - स्थायी आदेश संख्या 38/2021
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रामीण विकास, अनुभाग-5) द्वारा क्रमांक एफ 27(252)ग्राविव/ग्रुप-5/SOP/पार्ट-3/2021-22, दिनांक 02 नवम्बर, 2021 के तहत महत्वपूर्ण स्थायी आदेश जारी किया गया है। यह आदेश कनिष्ठ तकनीकी सहायक / कनिष्ठ अभियंता के लिए तकनीकी स्वीकृति जारी करने हेतु प्रदत्त शक्तियों में संशोधन से संबंधित है।
मुख्य बिंदु:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
आदेश संख्या: स्थायी आदेश संख्या 38/2021 (क्रमांक: एफ 27(252)ग्राविव/ग्रुप-5/SOP/पार्ट-3/2021-22, दिनांक 02 नवम्बर, 2021)
संशोधित प्रावधान: निर्माण कार्य की तकनीकी स्वीकृति (मूल कार्य / नवीन कार्य / मरम्मत/रखरखाव हेतु) कनिष्ठ तकनीकी सहायक / कनिष्ठ अभियंता के लिए संशोधित वित्तीय सीमाएं निम्नलिखित हैं:
नवीन कार्य हेतु संशोधित सीमा: 10.00 लाख रुपये
मरम्मत/रखरखाव हेतु संशोधित सीमा: 1.00 लाख रुपये
प्रभावी तिथि: यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होंगे।
जारीकर्ता: कृष्णा कान्त पाठक, शासन सचिव, ग्रामीण विकास विभाग।
ग्राम विकास अधिकारियों (VDO) के बहुआयामी भत्ते और अतिरिक्त प्रभार भत्ते के संबंध में मार्गदर्शन
ग्राम विकास अधिकारियों के भत्ते के संबंध में निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा ग्राम विकास अधिकारियों (ग्राम सेवक) को अतिरिक्त ग्राम पंचायत पर देय बहुआयामी भत्ता (विशेष भत्ता) और अतिरिक्त कार्य भत्ते के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार।
आदेश दिनांक: 22/09/2021 (क्रमांक: एफ.28(13)पंचावि/प्रशा-2/ग्राविस(ग्रासे)/अति.भत्तो/2021/2181)
भत्ते में वृद्धि: बहुआयामी कार्य की प्रकृति को देखते हुए बहुआयामी भत्ता (विशेष भत्ता) 1500/- रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 2250/- रुपये प्रतिमाह तथा अतिरिक्त कार्यभत्ता 2500/- रुपये से बढ़ाकर 3750/- रुपये प्रतिमाह दिनांक 01.10.2021 से स्वीकृत किया गया है।
अन्य निर्देश: मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद- अजमेर के पत्र दिनांक 18/10/2021 (क्रमांक एफ.28(25)पंचावि/प्रशा-2/ग्राविस संघ/मार्ग(अजमेर)/2021/2396) के अनुसार ग्राम विकास अधिकारी को अन्य ग्राम पंचायत का अतिरिक्त कार्यभार दिए जाने पर उस ग्राम पंचायत के अतिरिक्त कार्य के लिए अतिरिक्त प्रभार भत्ता एवं विशेष भत्ता देय होगा, जो बिना अधिकतम समभावधि के लिए देय होगा।
स्थायी आदेश संख्या 37/2021: ग्राम पंचायतों के निर्माण कार्यों की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति के संबंध में
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग - स्थायी आदेश संख्या 37/2021
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रामीण विकास, अनुभाग-5) द्वारा दिनांक 01 अक्टूबर 2021 को स्थायी आदेश संख्या 37/2021 जारी किया गया है। यह आदेश ग्राम पंचायतों को निर्माण कार्यों की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति जारी करने हेतु प्रदत्त शक्तियों में संशोधन से संबंधित है।
मुख्य बिंदु एवं वित्तीय सीमाएं
परिशिष्ट - 1 (प्रशासनिक स्वीकृति): निर्माण कार्य की प्रशासनिक स्वीकृति (मूल) (विधायक, सांसद कोष व महात्मा गांधी नरेगा के अतिरिक्त) के अंतर्गत नवीन स्वीकृति हेतु वित्तीय सीमा 10.00 लाख रुपये तक तथा रखरखाव एवं मरम्मत हेतु 0.50 लाख रुपये तक निर्धारित की गई है। इसमें शर्तें/टिप्पणियां क्र.सं. 1 से 13 यथावत लागू होंगी।
परिशिष्ट - 2 (वित्तीय स्वीकृति): निर्माण कार्य की वित्तीय स्वीकृति (मूल) (विधायक, सांसद कोष व महात्मा गांधी नरेगा के अतिरिक्त) के अंतर्गत नवीन स्वीकृति हेतु वित्तीय सीमा 10.00 लाख रुपये तक तथा रखरखाव एवं मरम्मत हेतु 0.50 लाख रुपये तक निर्धारित की गई है। इसमें शर्तें/टिप्पणियां क्र.सं. 1 से 10 यथावत लागू होंगी।
यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं।
अकुशल व अर्द्धकुशल (मेट) श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी दर पुनरीक्षित करने के संबंध में आदेश
अकुशल व अर्द्धकुशल (मेट) श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी दर पुनरीक्षित
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रामीण विकास, अनुभाग-5) द्वारा अकुशल एवं अर्द्धकुशल (मेट) श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी दर पुनरीक्षित करने के संबंध में आदेश जारी किया गया है।
प्रमुख बिंदु एवं निर्देश
पत्रांक एवं दिनांक: क्रमांक एफ 27(74) प्राविवि/अनु-5/जीकेएम/न्यूनतम मजदूरी दर/ईओ 65508/2014-16, दिनांक 10 अगस्त, 2021।
संदर्भ: श्रम विभाग की अधिसूचना क्रमांक एफ 8(5)(6) न्यूअभि/आई आर/श्रम/2000/पार्ट/15340 दिनांक 30.07.2021।
पुनरीत मजदूरी दरें: श्रम विभाग की अधिसूचना दिनांक 30.07.2021 के आधार पर, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा संपादित की जा रही विभिन्न केंद्र व राज्य प्रवर्तित योजनाओं (महात्मा गांधी नरेगा योजना को छोड़कर) में नियोजित अकुशल श्रमिक की न्यूनतम मजदूरी दर रूपए 252/- प्रति दिवस तथा अर्द्धकुशल श्रमिक (मेट) की न्यूनतम मजदूरी दर रूपए 264/- प्रति दिवस पुनरीक्षित की गई है।
प्रभावी तिथि: यह आदेश जारी होने की तिथि से प्रभावी किया गया है।
बीएसआर सॉफ्टवेयर (BSR Software) संबंधी निर्देश: वर्ष 2021-22 के वर्तमान बीएसआर सॉफ्टवेयर में इन पुनरीक्षित दरों का इन्द्राज/अपडेशन नहीं किया जाएगा।
तकमीने में अंतर राशि का प्रावधान: पुनरीक्षित न्यूनतम मजदूरी दर एवं वर्ष 2021-22 बीएसआर सॉफ्टवेयर में दर्ज न्यूनतम मजदूरी दर के अंतर राशि का भुगतान कार्य के तकमीने में पृथक से सम्मिलित करते हुए संबंधित कार्यकारी संस्था द्वारा नियमानुसार किया जावे।
अकुशल व अर्द्धकुशल (मेट) श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी दरें पुनरीक्षित करने के संबंध में
राजस्थान सरकार ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग आदेश
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रामीण विकास, अनुभाग-5) द्वारा अकुशल व अर्द्धकुशल (मेट) श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी दरें पुनरीक्षित करने के संबंध में आदेश जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
क्रमांक व दिनांक: क्रमांक एफ 27 (74) प्राविवि/अनु-5/जीकेण/न्यूनतम मजदूरी दर/ई ओ. 85598/2014-15, जयपुर दिनांक 8 फरवरी 2021।
संदर्भ: श्रम विभाग द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक एफ 8(5)(6) न्यू.म.अभि./श्रम/आई.आर./2000/पार्ट/15744 दिनांक 19.08.2020।
पुनरीक्षित मजदूरी दरें: श्रम विभाग की अधिसूचना दिनांक 19.08.2020 के आधार पर ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की विभिन्न केंद्र व राज्य प्रवर्तित योजनाओं (महात्मा गांधी नरेगा योजना को छोड़कर) में नियोजित अकुशल श्रमिक एवं अर्द्धकुशल श्रमिक (मेट) की न्यूनतम मजदूरी दरें क्रमशः रुपये 225/- व रुपये 237/- प्रति दिवस पुनरीक्षित की गई हैं। यह आदेश जारी होने की तिथि से प्रभावी है।
सॉफ्टवेयर से संबंधित निर्देश: इन दरों का इन्ड्राज/अपडेशन वर्ष 2020-21 की वर्तमान बीएसआर सॉफ्टवेयर में नहीं किया जावेगा। पुनरीक्षित न्यूनतम मजदूरी दर एवं वर्ष 2020-21 की बीएसआर सॉफ्टवेयर में दर्ज/इन्ड्राज न्यूनतम मजदूरी दर के अंतर राशि का भुगतान कार्य के तकमीने में पृथक से सम्मिलित करते हुए संबंधित कार्यकारी द्वारा अकुशल व अर्द्धकुशल (मेट) श्रमिक को कर दिया जावे।
स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन हेतु प्रभारी अधिकारी की नियुक्ति का आदेश
स्वामित्व योजना आदेश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.4(5)स्वामित्व/विधि/पंव/2020/45 दिनांक 13.01.2021 के अनुसार 'स्वामित्व योजना' के क्रियान्वयन हेतु राज्य स्तर पर SVAMITVA Dashboard integration के लिए प्रभारी अधिकारी नियुक्त किया गया है।
प्रभारी अधिकारी का विवरण:
नाम: श्री पी.एन. मीणा
पदनाम: ए.सी.पी. (उप निदेशक), पंचायती राज विभाग
मोबाइल नंबर: 9784590643
यह आदेश शासन सचिव एवं आयुक्त महोदय द्वारा जारी किया गया है तथा इसकी प्रतिलिपि संबंधित विभागों एवं अधिकारियों को सूचनार्थ प्रेषित की गई है।
आबादी भूमि पर से अतिक्रमण हटाने बाबत महत्वपूर्ण निर्देश
आबादी भूमि पर से अतिक्रमण हटाने बाबत निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा आबाती भूमि पर से अतिक्रमण हटाने के संबंध में आदेश जारी किया गया है।
निर्देश: मुख्यमंत्री सूचना तंत्र पर पंचायती राज विभाग के जन घोषणा पत्र में बिंदु संख्या 27.8.04 के अनुसार अतिक्रमणियों पर शिकंजा कसा जाएगा एवं जमीनों के मामलों में धोखाधड़ी रोकने के लिए संबंधित अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी एवं हाउसिंग सोसाइटियों की जिम्मेदारी सुनिश्चित की जाएगी की पालना सुनिश्चित की जानी है।
नियम संदर्भ: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम-165 के अन्तर्गत उपरोक्तानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
यह पत्र मगनलाल योगी, आयुक्त एवं संयुक्त शासन सचिव (प्रथम) द्वारा जारी किया गया है तथा समस्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद को प्रेषित किया गया है।
पुराने पट्टों के पुनर्विधमान्यकरण (Revalidation) किये जाने बाबत आदेश
पुराने पट्टों का पुनर्विधमान्यकरण (Revalidation)
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा पुराने पट्टों के पुनर्विधमान्यकरण के संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
नया नियम: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में नया नियम-167क जोड़ा गया है जिसके तहत पंचायत द्वारा जारी किये गए विक्रय विलेख, पट्टा या पट्टा विलेख का पुनर्विधमान्यकरण (Revalidation) किया जा सकता है।
शर्तें: पट्टे का पुनर्विधमान्यकरण ग्राम पंचायत में उपलब्ध रिकॉर्ड से मिलान कर पट्टा नियमानुसार जारी होने की स्थिति में तथा पट्टाधारक स्वयं या उसके वारिसान द्वारा प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करने पर ही किया जाएगा।
प्रारूप: पट्टे का पुनर्विधमान्यकरण मूल पट्टे पर ही निर्धारित प्रारूप में किया जायेगा जिसमें ग्राम पंचायत की बैठक दिनांक, प्रस्ताव संख्या और पुनर्विधमान्यकरण की दिनांक का उल्लेख किया जाएगा।
हस्ताक्षर: इस प्रक्रिया में ग्राम विकास अधिकारी और सरपंच के हस्ताक्षर होंगे।
राजस्थान राज्य सूचना आयोग का निर्णय: तृतीय पक्षकार से संबंधित सूचना नहीं दी जा सकती
राजस्थान राज्य सूचना आयोग निर्णय
यह पोस्ट राजस्थान राज्य सूचना आयोग, जयपुर द्वारा जारी द्वितीय अपील संख्या 105739/2018 (निर्णय दिनांक: 24/05/2019) के आदेश पर आधारित है।
मुख्य बिंदु एवं विवरण
अपीलार्थी: श्री मुकेश गैना, तेजाजी मन्दिर के पास, तबीजी, जिला अजमेर (राज.)।
प्रत्यर्थी: राज्य लोक सूचना अधिकारी एवं सचिव, ग्राम पंचायत तबीजी, पंचायत समिति पीसांगन, जिला अजमेर (राज.)।
मामला: अपीलार्थी द्वारा दिनांक 20-04-2018 को आवेदन कर अन्य व्यक्तियों (श्री शिवशंकर सोनी व कालूराम सोनी) को पंचायत द्वारा जारी पट्टों की प्रति उपलब्ध कराने की मांग की गई थी।
आयोग का निर्णय: सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 8(1)(ज) के तहत चाही गई सूचना तृतीय पक्षकार की व्यक्तिगत सूचना होने के कारण प्रदाय नहीं की जा सकती। अपीलार्थी द्वारा किया गया आक्षेप बलहीन पाया गया और आयोग द्वारा अपील खारिज कर दी गई।
यह सारांश राजस्थान राज्य सूचना आयोग के आधिकारिक निर्णय दस्तावेज पर आधारित है।
निर्माण कार्यों के मूल्यांकन जांच एवं उपयोगिता प्रमाण पत्र जारी करने हेतु स्थायी आदेश संख्या 36/2018 की पालना के संबंध में
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग का महत्वपूर्ण निर्देश
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रुप-5) द्वारा दिनांक 26 अप्रैल 2019 को एक आदेश जारी किया गया है। यह आदेश निर्माण कार्यों के मूल्यांकन जांच एवं उपयोगिता प्रमाण पत्र जारी करने हेतु स्थायी आदेश संख्या 36/2018 दिनांक 27.03.2018 की पालना के संबंध में है।
मुख्य बिंदु:
वित्त विभाग की आईडी संख्या 101801752 दिनांक 26.3.2018 के अनुसार "संविदा पर कार्यरत व्यक्तियों को कोई वित्तीय शक्तियां प्रदान नहीं की जावे" की पालना में निर्देश जारी किए गए हैं।
संविदा पर कार्यरत कनिष्ठ तकनीकी सहायक (JTA/STA) को मूल्यांकन जांच करना, पूर्णता प्रमाण पत्र जारी करना आदि किसी भी प्रकार की वित्तीय शक्तियां प्रदत्त नहीं होंगी।
विभागीय परिपत्र दिनांक 17.9.2014 द्वारा जारी शेड्यूल ऑफ़ पावर्स में संविदा पर कार्यरत जेटीए/एसटीए परिशिष्ट-3 में प्रदत्त सीमा राशि तक की तकनीकी स्वीकृति जारी करने के लिए यथावत अधिकृत होंगे।
महात्मा गांधी नरेगा योजना अंतर्गत संविदा पर कार्यरत (JTA/STA) विभागीय अभियंताओं (Jen/Aen/Xen) के मार्गदर्शन में यथावत कार्यों की तकनीकी पर्यवेक्षण कर सकेंगे तथा कार्यों की माप (Record Entry) संबंधित मापपुस्तिका में दर्ज कर सकेंगे, लेकिन कार्यों का मूल्यांकन जांच करना, पूर्णता प्रमाण पत्र जारी करना के लिए अधिकृत नहीं होंगे।
अतः कार्यों का मूल्यांकन, उपयोगिता प्रमाण पत्र एवं पूर्णता प्रमाण पत्र सक्षम विभागीय अभियंताओं (Jen/Aen/Xen) के द्वारा ही जारी कराया जाना सुनिश्चित किया जाए।
निजी भूमि में कार्य करवाने के सम्बन्ध में समझौता प्रारूप
निजी भूमि में कार्य करवाने के सम्बन्ध में समझौता प्रारूप
बेरों (खेतों में कुओं) पर सड़क, सीसी सड़क एवं अन्य विकास कार्यों के संबंध में दिशा-निर्देश
राजस्थान सरकार ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग का महत्वपूर्ण पत्र
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रामीण विकास, अनुभाग-5), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश (क्रमांक एफ 27(212)ग्रावि/ग्रुप-5/पीएमजीवाई/अभि./बेरों पर निर्माण/2018-19 जयपुर, दिनांक जुलाई 2018) के माध्यम से बेरों (खेतों में कुओं) पर सड़क, सीसी सड़क एवं अन्य विकास/निर्माण कार्यों के संबंध में स्थिति स्पष्ट की गई है।
मुख्य बिंदु एवं दिशा-निर्देश
अपना खेत अपना काम: व्यक्तिगत लाभ के कार्य महात्मा गांधी नरेगा योजनान्तर्गत अनुमत किए गए हैं। विस्तृत दिशा-निर्देश विभागीय पत्र क्रमांक एफ 40(35)ग्रावि/नरेगा/व्यक्तिगत लाभ के कार्य/2011 दिनांक 04.05.11 व 27.05.2011 के द्वारा जारी किए गए हैं।
भूमि सुधार एवं अन्य कार्य: भूमि सुधार, कृषि वानिकी, उद्यानिकी, जल संरक्षण, लघु सिंचाई (कच्चे धोरों बनाने का कार्य, कच्चे धोरों को पक्का करने का कार्य, फार्मपॉण्ड, डिग्गी टांके, जल हॉज निर्माण, नवीन कूप निर्माण, कूप गहरा करना आदि) तथा जल भराव क्षेत्रों से पानी निकास हेतु नाली निर्माण, चेकडेम आदि कार्य महात्मा गांधी नरेगा योजनान्तर्गत अनुमत हैं।
गाँवों और ढाणियों के रास्ते: गाँवों और ढाणियों में कदमी रास्ते जो राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हैं, किन्तु लगातार उपयोग में आ रहे हैं, उन पर खंरजा, सड़क निर्माण कार्य संबंधित काश्तकारों से सहमति एवं नियमानुसार शपथ लेने के उपरान्त विभिन्न योजनान्तर्गत अनुमत हैं।
पेयजल कार्य: राजकीय भूमि के अभाव में, भूमिधारक द्वारा राज्य सरकार के पक्ष में 100/- रुपये के स्टाम्प पेपर पर सहमति पत्र जारी करने पर निजी भूमि पर पेयजल हेतु ट्यूूबवेल, हैंडपंप, पानी की टंकी तथा टांका निर्माण कार्य कराया जाना अनुमत है।
अकुशल एवं अर्द्धकुशल श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी दरों में पुनरीक्षण के संबंध में आदेश
अकुशल एवं अर्द्धकुशल (मेट) श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी दर पुनरीक्षित
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा अकुशल एवं अर्द्धकुशल (मेट) श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी दरों में पुनरीक्षण के संबंध में आदेश जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
न्यूनतम मजदूरी दर: श्रम विभाग की अधिसूचना दिनांक 07.06.2018 के आधार पर, महात्मा गांधी नरेगा योजना को छोड़कर अन्य ग्रामीण विकास एवं राज्य प्रवर्तित योजनाओं में नियोजित अकुशल श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी रुपये 213/- प्रति दिवस तथा अर्द्धकुशल (मेट) श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी रुपये 223/- प्रति दिवस पुनरीक्षित की गई है।
प्रभावी तिथि: यह आदेश जारी होने की तिथि से प्रभावी है।
बीएसआर सॉफ्टवेयर (BSR Software) संबंधी निर्देश: वर्ष 2018-19 के बीएसआर (BSR) ऑनलाइन सॉफ्टवेयर में इन पुनरीक्षित दरों का इंदराज/अपडेशन नहीं किया गया है। अतः पुनरीक्षित न्यूनतम मजदूरी दर एवं वर्ष 2018-19 की बीएसआर सॉफ्टवेयर में दर्ज न्यूनतम मजदूरी दर के अंतर की राशि का भुगतान कार्य के तकमीने में पृथक से सम्मिलित करते हुए संबंधित कार्यकारी संस्था द्वारा किया जाएगा।
तकनीकी अधिकारियों की शक्तियों एवं कार्यों के संबंध में स्थायी आदेश संख्या 36/2018
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग का महत्वपूर्ण आदेश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रामीण विकास, अनुभाग-5), राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 12 जून 2018 को स्थायी आदेश संख्या 36/2018 के संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं। यह आदेश निर्माण कार्यों के मूल्यांकन जांच एवं उपयोगिता प्रमाण पत्र जारी करने हेतु तकनीकी अधिकारियों को संशोधित एवं नवीनतम प्रदत्त शक्तियों से संबंधित है।
मुख्य बिंदु:
संविदा पर कार्यरत (JTA/STA): विभागीय परिपत्र दिनांक 17.09.2014 द्वारा जारी शेड्यूल ऑफ पावर्स के अनुसार संविदा पर कार्यरत (JTA/STA) को मूल्यांकन जांच करना, पूर्णता प्रमाण पत्र जारी करना आदि किसी भी प्रकार की वित्तीय शक्तियां प्रदत्त नहीं होंगी।
JTA/STA तकनीकी स्वीकृति: विभागीय परिपत्र दिनांक 17.09.2014 द्वारा जारी शेड्यूल ऑफ पावर्स में जेटीए/एस्टीए परिशिष्ट-3 में प्रदत्त सीमा राशि तक की तकनीकी स्वीकृति जारी करने के लिए यथावत अधिकृत होंगे।
महात्मा गांधी नरेगा योजना: महात्मा गांधी नरेगा योजना अंतर्गत संविदा पर कार्यरत (JTA/STA) विभागीय अभियंताओं (JEn/AEn/XEn/SE) के मार्गदर्शन में यथावत कार्यों का तकनीकी पर्यवेक्षण कर सकेंगे।
माप दर्ज करने की सीमा: उक्त संविदा पर कार्यरत (JTA/STA) विभागीय अभियंताओं के मार्गदर्शन में कार्य की माप (Record Entry) संबंधित मापपुस्तिका में दर्ज कर सकेंगे, लेकिन कार्यों का मूल्यांकन जांच करना, पूर्णता प्रमाण पत्र जारी करने के लिए अधिकृत नहीं होंगे।
प्रमाण पत्रों का जारी किया जाना: कार्यों का मूल्यांकन, उपयोगिता प्रमाण पत्र एवं पूर्णता प्रमाण पत्र सक्षम विभागीय अभियंताओं (JEn/AEn/XEn/SE) द्वारा ही जारी किए जाएंगे।
ग्राम पंचायत द्वारा जारी पट्टों के हस्तांतरण / नामांतरण (Mutation) हेतु निर्देश, आवश्यक दस्तावेज एवं शुल्क दर
ग्राम पंचायत पट्टा हस्तांतरण एवं नामांतरण दिशानिर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.4(86) नामांतरण/विधि/पंश/2018/603 दिनांक 9.5.2018 के अंतर्गत ग्राम पंचायतों द्वारा जारी पट्टों के हस्तांतरण या नामांतरण (Mutation) के संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु एवं निर्देश
पट्टों का रिकॉर्ड: समस्त पंचायतों को राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 173.जी में वर्णित Form LIII (Form 53) प्रारूप में अब तक जारी किए गए समस्त पट्टों का पूर्ण रिकॉर्ड संधारित करना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
हस्तांतरण हेतु आवश्यक दस्तावेज: पट्टों के प्रकार और हस्तांतरण के आधार (उत्तराधिकार, वसीयतनामा, पंजीकृत हक त्याग, पंजीकृत विक्रय पत्र, पंजीकृत गिफ्ट डीड) के अनुसार आवश्यक दस्तावेज जैसे उत्तराधिकार प्रमाण पत्र, शपथ-पत्र, हक त्यागपत्र, आपत्तियों हेतु समाचार पत्रों में प्रकाशन आदि निर्धारित किए गए हैं।
शुल्क एवं दरें: मूल आवंटन के प्रकार (पुराने ग्रहों का विनियमितीकरण, निःशुल्क आवंटित भूखंड, रियायती दर पर आवंटन, नीलामी द्वारा आवंटन, पूर्ण शुल्क के साथ आवंटन) के आधार पर परिवार के सदस्यों या अन्य व्यक्तियों को नामांतरण करने हेतु प्रक्रिया शुल्क (रु. 100 से रु. 200) एवं नामांतरण शुल्क (डीएलसी दर का 2% से 5%) निर्धारित किया गया है।
नामांतरण की प्रक्रिया निर्धारित दस्तावेजों की जांच के उपरांत ग्राम पंचायत की बैठक में प्रस्ताव पारित करके की जाएगी।
स्थायी आदेश संख्या 36/2018: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा तकनीकी अधिकारियों को वित्तीय शक्तियां प्रत्याहारित
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग - स्थायी आदेश संख्या 36/2018
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रामीण विकास, अनुभाग-5) द्वारा दिनांक 27 मार्च, 2018 को स्थायी आदेश संख्या 36/2018 जारी किया गया है। यह आदेश विभिन्न योजनाओं में सम्पादित निर्माण कार्यों के मूल्यांकन जांच एवं पूर्णता प्रमाण पत्र के संबंध में तकनीकी अधिकारियों को वित्तीय शक्तियां प्रदान करने हेतु है।
मुख्य बिंदु एवं वित्तीय शक्तियां
मूल्यांकन जांच करना:
कनिष्ठ अभियंता (JEN): 5 लाख तक
सहायक अभियंता (AEN): 15.00 लाख तक
अधिशाषी अभियंता (EE): 50.00 लाख तक
अधीक्षक अभियंता (SE): 100.00 लाख तक
अतिरिक्त मुख्य अभियंता (ACE): पूर्ण शक्तियां
पूर्णता प्रमाण पत्र:
कनिष्ठ अभियंता (JEN): मनरेगा योजना में व्यक्तिगत लाभ श्रेणी (कैटेगरी 4) के राशि रुपये 3 लाख तक की लागत के कार्य एवं अन्य विभागीय योजनाओं में (हैंडपम्प, ट्यूबवेल के कार्यों को छोड़ कर) 1 लाख तक स्वीकृत राशि के निर्माण कार्यों के पूर्णता प्रमाण-पत्र कनिष्ठ अभियंता द्वारा जारी किए जा सकेंगे।
सहायक अभियंता (AEN): 15.00 लाख तक
अधिशाषी अभियंता (EE): 50.00 लाख तक
वित्त विभाग की आईडी संख्या 101801752 दिनांक 26.03.2018 के अनुशरण में जारी यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं।
राजस्थान पंचायती राज (दूसरा संशोधन) नियम, 2018 - आबादी भूमि उपयोग परिवर्तन और उप-विभाजन
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 27 मार्च 2018 की अधिसूचना (सं. एफ.4(7)अमे/रूल्स/लीगल/पी.आर./2014/926 दिनांक 10.7.2018) के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज (दूसरा संशोधन) नियम, 2018 जारी किए गए हैं। यह अधिसूचना राजस्थान राजपत्र में प्रकाशित की गई है।
मुख्य बिंदु और प्रावधान
नया अध्याय-9क का अंतःस्थापन: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में नया अध्याय-9क जोड़ा गया है जो आबादी क्षेत्र में भूमि के उपयोग के परिवर्तन (नियम 173-क) तथा भू-खंडों के उप-विभाजन व पुनर्गठन (नियम 173-ख) से संबंधित है।
संपरिवर्तन प्रभार (Conversion Charges): गैर-आवासीय प्रयोजनों के लिए आवासीय आबादी भूमि के संपरिवर्तन हेतु वाणिज्यिक, औद्योगिक, लोक उपयोग, संस्थागत, चिकित्सा सुविधा तथा सौर/पवन ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना के लिए अलग-अलग दरें निर्धारित की गई हैं।
छूट के प्रावधान: केंद्रीय या राज्य सरकार के विभागों या स्थानीय प्राधिकरणों के उपयोग, राजस्थान विनियोजन प्रोत्साहन स्कीम, 2003/2010 और तकनीकी शिक्षा संस्थान के मामलों में संपरिवर्तन प्रभारों में आंशिक या पूर्ण छूट दी गई है।
भू-खंडों का उप-विभाजन और पुनर्गठन: नियम 173-ख के तहत ग्रामीण आबादी क्षेत्र में भू-खंडों के उप-विभाजन या पुनर्गठन के लिए प्ररूप 51 में आवेदन करना होगा तथा इसके लिए निर्धारित प्रभार नियम 173-घ के अनुसार देय होंगे।
नए प्ररूप (Forms): नियमों के अंतर्गत प्ररूप 48 से लेकर प्ररूप 53 तक नए आवेदन पत्र, अनुज्ञा, पट्टा विलेख और आबादी भूमि का रजिस्टर जोड़े गए हैं।
अधिक जानकारी और विस्तृत प्रक्रियाओं के लिए संबंधित ग्राम पंचायत कार्यालय या राज ई-पंचायत पोर्टल से संपर्क करें।
ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी भूमि पर बने आवास गृहों के पट्टे जारी करने के संबंध में निर्देश
ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी और सिवायचक भूमि पर बने आवासों के पट्टे जारी करने के दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी पत्रांक क्र.0एफ.4(78)सिवायचक/नियमन/विधि/पंव्रा/2017/659 दिनांक 25.05.2018 के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी भूमि पर बने आवास गृहों के नियमन और पट्टे जारी करने के संबंध में आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य निर्देश एवं प्रक्रिया:
संयुक्त सर्वे: राजस्व लोक अदालत अभियान: न्याय आपके द्वार-2018 (दिनांक 01.05.2018 से 30.06.2018) के तहत ग्राम सेवक एवं पटवारी द्वारा संयुक्त सर्वे कराया जाना सुनिश्चित किया जाए।
ई-पचायत पोर्टल पर प्रगति दर्ज करना: अभियान के दौरान दिए गए पट्टों की प्रगति ई-पंचायत पोर्टल पर प्रतिदिन ऑनलाइन भेजी जानी चाहिए।
समयबद्ध कार्यवाही: जिन ग्राम पंचायतों में सर्वे एवं पट्टे जारी करने का कार्य नहीं हुआ है, वहां नियमानुसार प्रक्रिया अपनाकर अभियान द्वारा पट्टे जारी किए जाएं।
समन्वय बैठक: उपखंड अधिकारी, विकास अधिकारी एवं तहसीलदार की संयुक्त बैठक आयोजित कर अधिक से अधिक पात्र रहवासियों को पट्टे जारी किए जाएं।
अकुशल व अर्द्धकुशल (मेट) श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी दर पुनरीक्षित करने के संबंध में आदेश
अकुशल व अर्द्धकुशल श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी दर पुनरीक्षण
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रामीण विकास, अनुभाग-5) द्वारा दिनांक 13 अक्टूबर 2017 का आदेश जारी किया गया है, जिसका क्रमांक एफ 27 (74) ग्राविवि/अनु-5/जीकेएन/न्यूनतम मजदूरी दर/ई.ओ. 65598/2014-15 है।
मुख्य बिंदु:
संदर्भ: श्रम विभाग द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक एफ 5(6) न्यू.म./श्रम/2000/पार्ट/11232 एवं 11276 दिनांक 03.07.2017।
पुनरीक्षित दरें: महात्मा नरेगा योजना को छोड़कर, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा संपादित की जा रही विभिन्न केन्द्र व राज्य प्रवर्तित योजनाओं में नियोजित अकुशल श्रमिक की न्यूनतम मजदूरी दर रुपये 207/- प्रति दिवस तथा अर्द्धकुशल श्रमिक (मेट) की न्यूनतम मजदूरी दर रुपये 217/- प्रति दिवस पुनरीक्षित की गई है।
प्रभावी तिथि: यह आदेश जारी होने की तिथि से प्रभावी है।
बीसआर सॉफ्टवेयर संबंधी निर्देश: पुनरीक्षित न्यूनतम मजदूरी दरों का इन्ड्राज/अपडेशन वर्ष 2017-18 की बीएसआर सॉफ़्टवेयर में नहीं किया जावेगा। कार्य के तकमीने में पृथक से सम्मिलित करते हुए भुगतान किया जाएगा।
स्थायी आदेश संख्या 34/2017: प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृतियों की वित्तीय सीमा के संबंध में संशोधन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग का स्थायी आदेश संख्या 34/2017
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रामीण विकास, अनुभाग-5) द्वारा क्रमांक एफ 27(263) ग्रावि/ग्रुप-5/जीकेन/उपापन/2015-16/ई.ओ.नं. दिनांक 22.8.2017 के तहत स्थायी आदेश संख्या 34/2017 जारी किया गया है।
यह आदेश विभागीय परिपत्र क्रमांक एफ-27(79) ग्रावि/अनु.5/जीकेन/प्रशा.अनु.स./2014 दिनांक 17.9.2014 के परिशिष्ट 1 के बिन्दु संख्या 1 (ब) में वर्णित प्रशासनिक स्वीकृति जारी करने की सीमा एवं परिशिष्ट 2 के बिन्दु संख्या 1 (ब) में वर्णित वित्तीय स्वीकृति जारी करने के संबंध में संशोधित निर्देश जारी करता है।
मुख्य बिंदु:
परिशिष्ट 1 (प्रशासनिक स्वीकृति): निर्माण कार्य की प्रशासनिक स्वीकृति (मूल) (विधायक, सांसद कोष व महात्मा गांधी नरेगा के लिए) हेतु जिला कलक्टर/जिला कार्यक्रम समन्वयक, ईजीएस को संपूर्ण शक्तियां प्रदान की गई हैं।
परिशिष्ट 2 (वित्तीय स्वीकृति): निर्माण कार्य की प्रशासनिक स्वीकृति (मूल) (विधायक, सांसद कोष व महात्मा गांधी नरेगा के लिए) की वित्तीय स्वीकृति हेतु जिला कलक्टर/जिला कार्यक्रम समन्वयक, ईजीएस को संपूर्ण शक्तियां दी गई हैं।
यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू रहेगा।
इस आदेश की प्रति सभी संबंधित जिला कलेक्टरों, मुख्य कार्यकारी अधिकारियों, विकास अधिकारियों और ग्राम पंचायतों को आवश्यक कार्रवाई एवं अनुपालन हेतु प्रेषित की गई है।
राजस्थान सरकार - स्थायी आदेश संख्या 32/2017: तकनीकी स्वीकृति एवं उपयोगिता प्रमाण पत्र जारी करने के संबंध में संशोधित निर्देश
स्थायी आदेश संख्या 32/2017
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रामीण विकास, अनुभाग-5), राजस्थान सरकार द्वारा क्रमांक एफ 27(263) ग्रावि/ग्रुप-5/जीकेएन/उपापन/2015-16/92279, दिनांक 13-04-2017 के तहत एक अति-आवश्यक स्थायी आदेश जारी किया गया है। यह आदेश विभागीय परिपत्र क्रमांक एफ-27(79) ग्रावि/अनु.5/जीकेएन/प्रशा.अनु.स./2014 दिनांक 17.9.2014 के परिशिष्ट 3 में वर्णित तकनीकी स्वीकृति जारी करने की सीमा एवं परिशिष्ट 5 के बिन्दु संख्या 3 में वर्णित उपयोगिता प्रमाण पत्र जारी करने के संबंध में संशोधित निर्देश जारी करने के लिए है।
मुख्य बिंदु:
परिशिष्ट 3 (वित्तीय सीमा एवं मरम्मत/रखरखाव):
कनिष्ठ तकनीकी सहायक / कनिष्ठ अभियन्ता: मरम्मत/रखरखाव हेतु अब 1 लाख रुपये तक की सीमा।
सहायक अभियन्ता पं.स./जि.प.: 15.00 लाख तक (नवीन कार्य), मरम्मत/रखरखाव हेतु 2 लाख तक।
अधिसाषी अभियन्ता पं.स./जि.प.: 50.00 लाख तक (नवीन कार्य), मरम्मत/रखरखाव हेतु 5 लाख तक।
जिला दर निर्धारण समिति के अनुमोदन उपरान्त अधिसाषी अभियन्ता (अभि.) एवं सदस्य सचिव, जि.द.नि.स. जिला परिषद: 5 लाख से अधिक परन्तु 50 लाख से कम लागत के कार्य।
परिशिष्ट 5 (उपयोगिता एवं पूर्णता प्रमाण पत्र): महात्मा गांधी नरेगा योजना में व्यक्तिगत लाभ श्रेणी के सभी कार्यों एवं अन्य विभागीय योजनाओं में (हैण्डपम्प, ट्यूबवेल के कार्यों को छोड़कर) 1 लाख तक स्वीकृत राशि के निर्माण कार्यों के पूर्णता प्रमाण-पत्र कनिष्ठ तकनीकी सहायक / कनिष्ठ अभियन्ता द्वारा जारी किये जा सकेंगे। हैण्डपम्प, ट्यूबवेल के कार्य एवं 1 लाख से अधिक लागत के निर्माण कार्यों के पूर्णता प्रमाण-पत्र शेड्यूल ऑफ पावर्स के प्रावधानों के अनुसार ही यथावत जारी किये जायेंगे। शेष प्रावधान शेड्यूल ऑफ पावर्स के अनुसार यथावत रहेंगे।
जारीकर्ता: (सुदर्शन सेठी), अतिरिक्त मुख्य सचिव, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार।
स्थायी आदेश संख्या 31/2017: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के अंतर्गत विकास कार्यों के संबंध में दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग - स्थायी आदेश संख्या 31/2017
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रामीण विकास, अनुभाग-5), राजस्थान सरकार द्वारा क्रमांक एफ 27(263) ग्रावि/ग्रुप-5/जीकेन/उपापन/2015-16/92279, दिनांक 13-04-2017 को स्थायी आदेश संख्या 31/2017 जारी किया गया है। यह आदेश ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा क्रियान्वित योजनाओं (विशेषकर महात्मा गांधी मनरेगा योजना) के अंतर्गत कराए जा रहे विकास कार्यों की संपादन व्यवस्था के संबंध में है।
मुख्य बिंदु एवं निर्देश:
ग्रेवल सड़कों की नियमित मरम्मत और अधिकतम आयु: विभिन्न विकास योजनाओं में निर्मित ग्रेवल सड़कों के वार्षिक क्षरण की रोकथाम हेतु नियत कालीन मरम्मत (Periodical Maintenance) के निर्देश दिए गए हैं। ग्रेवल सड़कों की पुनरावृत्ति (repetitive) मरम्मत कार्य सामान्यतः कार्य पूर्णता प्रमाण-पत्र जारी होने की दिनांक से न्यूनतम 5 वर्ष से पहले नहीं कराया जा सकेगा।
गांवों के अंदर नालियों के साथ आंतरिक सड़क निर्माण एवं तकनीकी मापदंड: गांवों की आंतरिक सड़कों की चौड़ाई स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। मुख्य आवागमन मार्ग की चौड़ाई भारत सरकार के निर्देश दिनांक 24.04.2012 के अनुसार 3 मीटर निर्धारित की गई है। आंतरिक सीमेंट सड़क की अधिकतम चौड़ाई 5.5 मीटर तक ही अनुमत होगी।
सार्वजनिक निर्माण विभाग की सड़कों के बर्म की मरम्मत: पीडब्ल्यूडी या अन्य विभागों द्वारा निर्मित सड़कों और उनके बर्म (पटरी) की मरम्मत एवं झाड़ियां काटने का कार्य मनरेगा योजनान्तर्गत दिशा-निर्देशानुसार स्वीकृति उपरांत पंचायती राज संस्थाओं द्वारा कराया जा सकता है।
गाँवों में श्रमिकों का नियोजन और साफ-सफाई की गतिविधियाँ: श्रमिकों के नियोजन हेतु बीएसआर (BSR) / दर विश्लेषण का निर्धारण स्थानीय निकाय (नगर निगम/परिषद/पालिका) की प्रचलित दरों से 10 प्रतिशत कम दर की सीमा में जिला दर निर्धारण समिति द्वारा पंचायत समितिवार किया जाएगा।
कदीमी रास्ते और निजी भूमि पर सड़क निर्माण: राजस्व रिकार्ड में दर्ज न होने वाले कदीमी रास्तों पर सड़क निर्माण हेतु विभागीय आदेश संख्या 26/2016 दिनांक 06.04.2016 की शर्त संख्या 13 के अनुसार संबंधित काश्तकारों की सहमति और नियमानुसार शपथ-पत्र के उपरांत कार्य संपादित किया जा सकेगा।
राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2017 से संबंधित अधिसूचना
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग अधिसूचना
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग (पंचायती राज), जयपुर द्वारा दिनांक 12 अप्रैल, 2017 को राजस्थान पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) नियम, 2017 जारी किए गए हैं। यह अधिसूचना राजस्थान राज-पत्र में प्रकाशित की गई है।
मुख्य बिंदु:
अधिनियम व नियम: यह संशोधन राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम सं. 13) की धारा 102 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में किया गया है।
नियम 148 का संशोधन: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 148 के उप-नियम (1) के अंतिम परन्तुक में आवश्यक संशोधन किया गया है।
शब्दावली में बदलाव: "राजस्व अभियान या प्रशासन गांव के संग अभियान" के स्थान पर "राजस्व अभियान या प्रशासन गांव के संग अभियान या भूमि के विक्रय और पट्टा वितरण के लिए राज्य सरकार के आदेश द्वारा आयोजित किसी अन्य अभियान के समय" शब्दावली प्रतिस्थापित की गई है।
प्रारूप 22 का संशोधन: संलग्न प्रारूप 22 की टिप्पणी में भी उपर्युक्त शब्दावली को प्रतिस्थापित किया गया है।
लागू होना: ये नियम राजपत्र में इनके प्रकाशन की तारीख (12 अप्रैल, 2017) से प्रवृत्त होंगे।
आदेश संख्या: [सं. एफ.4(7) अमे/रूल्स/लीगल/पी.आर./2017/289]
द्वितीय अपील संख्या 220/2016 - राज्य सूचना आयोग, जयपुर आदेश
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत द्वितीय अपील का निर्णय
राज्य सूचना आयोग, जयपुर द्वारा अपील संख्या 220/2016 (दिनांक 13-10-2016) के संबंध में आदेश जारी किया गया है। यह मामला श्री किशोरी लाल बनाम राज्य सूचना अधिकारी / सचिव, ग्राम पंचायत गणेश्वर, पंचायत समिति नीम का थाना, जिला सीकर से संबंधित है।
मुख्य बिंदु और निर्देश:
अपीलार्थी का आवेदन: अपीलार्थी ने दिनांक 02-05-2015 को विकास अधिकारी, पंचायत समिति नीम का थाना को प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर पंचायत समिति के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों में जनवरी 2009 से मार्च 2015 तक विभिन्न योजनाओं के तहत हुए विकास कार्यों की जानकारी मांगी थी।
सूचना का अंतरण: विकास अधिकारी द्वारा पत्र क्रमांक 2316 दिनांक 11-05-2015 को 41 पंचायतों के ग्राम सचिवों को प्रार्थना पत्र का अंतरण किया गया था।
प्रत्यार्थी का पक्ष: आयोग के नोटिस के संदर्भ में प्रत्यार्थी ने दिनांक 21-03-2016 को अपीलोत्तर प्रस्तुत कर बताया कि चाही गई सूचना पत्र दिनांक 20-10-2015 द्वारा पंजीकृत डाक से उपलब्ध करा दी गई है तथा उसकी प्रति आयोग को प्रेषित की गई है।
आयोग की टिप्पणी एवं निर्देश: सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 6 (1) के तहत आवेदक का यह दायित्व है कि वह वांछित सूचना से संबंधित लोक प्राधिकरण के लोक सूचना अधिकारी के समक्ष ही प्रार्थना प्रस्तुत करें। विकास अधिकारी द्वारा एक साथ 41 ग्राम पंचायतों के लोक सूचना अधिकारियों को धारा 6 (3) के तहत प्रार्थना पत्र का अंतरण करना अधिनियम के प्रावधानों के प्रतिकूल माना गया है।
अपील का निस्तारण: चूंकि वांछित सूचना प्रदान की जा चुकी है और अपीलार्थी सुनवाई के समय उपस्थित नहीं हुआ, अतः वर्तमान अपील को खारिज किया जाता है।
अतिक्रमण सम्बंधित शिकायतों को न्यायिक प्रक्रिया मानते हुए संपर्क पोर्टल 181 पर दर्ज नही करने के सम्बन्ध में
अतिक्रमण सम्बंधित शिकायतों को न्यायिक प्रक्रिया मानते हुए संपर्क पोर्टल पर दर्ज नही करने के सम्बन्ध में
विमुक्त, घुमन्तु एवं अर्द्धघुमन्तु के आवासहीन व्यक्तियों को भूखण्ड आवंटन बाबत परिपत्र
विमुक्त, घुमन्तु एवं अर्द्धघुमन्तु के आवासहीन व्यक्तियों को भूखण्ड आवंटन
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग) द्वारा परिपत्र क्रमांक एफ.4()दिशा निर्देश/विधि/पंरा/2016/494 दिनांक 27-6-16 जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु:
राज्य सरकार के ध्यान में लाया गया है कि अधिकांश ग्राम पंचायतों द्वारा विमुक्त, घुमन्तु एवं अर्द्धघुमन्तु के आवासहीन व्यक्तियों को नियमानुसार भूखण्ड आवंटन करने में शिथिलता बरती जा रही है।
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 का नियम 158 कमजोर वर्गों को आबंटन के तहत ग्राम पंचायत को 300 वर्गगज तक की आबादी भूमि रियायती दर पर आवंटित करने की अनुमति देता है।
समाज कल्याण विभाग द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक F.1(F)(2)SW/63 दिनांक 24.2.1964 के तहत अधिसूचित जातियों के आवासहीन व्यक्तियों को नियमानुसार भूखण्ड आवंटन किया जाना सुनिश्चित किया जाए।
स्थायी आदेश संख्या 27/2016: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा कार्यकारी संस्था के संबंध में आदेश
स्थायी आदेश संख्या 27/2016
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रामीण विकास, अनुभाग-5) राजस्थान सरकार द्वारा जारी स्थायी आदेश संख्या 27/2016 (क्रमांक: एफ 4(10) पंरावि/पीपी/जीकेन/2014-15, दिनांक 11 अप्रैल 2016) के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी।
मुख्य बिंदु:
विभागीय स्थायी आदेश संख्या 24/2015 दिनांक 15 दिसंबर 2015 के द्वारा ग्रामीण कार्य निर्देशिका-2015 के बिन्दु संख्या 24.8 के अंतर्गत जलग्रहण विकास एवं भू-संरक्षण विभाग के कार्य कराने के लिए अधिकृत जलग्रहण समिति को जोड़ा गया था।
विभागीय परिपत्र संख्या 17/2015 द्वारा जारी ग्रामीण कार्य निर्देशिका-2015 भाग-1 को विभागीय आदेश दिनांक 22.12.2015 द्वारा स्थगित कर ग्रामीण कार्य निर्देशिका-2010 प्रभावी की गई है।
ग्रामीण कार्य निर्देशिका-2010 के बिंदु संख्या 2.3 में वर्णित कार्यकारी संस्था संबंधित योजना की मार्गदर्शिका के प्रावधान अनुसार होने का उल्लेख है।
भारत सरकार / जलग्रहण विकास एवं भू-संरक्षण विभाग द्वारा जारी मार्गदर्शिका के अनुसार कार्य कराने के लिए अधिकृत जलग्रहण समिति को भी कार्यकारी संस्था की श्रेणी में जोड़ा जाता है।
उपरोक्त आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होंगे।
स्थायी आदेश संख्या 26/2016 - ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग
स्थायी आदेश संख्या 26/2016
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रामीण विकास, अनुभाग-5), राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 06 अप्रैल, 2016 का स्थायी आदेश जारी किया गया है। यह आदेश एफ- 27(252)ग्राविवि/ग्रुप-5/जीकेएन/एसओपी/2015-16 के अंतर्गत है।
इस आदेश के माध्यम से ग्राम पंचायतों और विकास अधिकारियों (पंचायत समिति) को प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति के लिए प्रदत्त शक्तियों में संशोधन किया गया है:
परिशिष्ट - 1 प्रशासनिक स्वीकृति: निर्माण कार्य की प्रशासनिक स्वीकृति (मूल) (विधायक कोष व महात्मा गांधी नरेगा के अतिरिक्त) के संबंध में ग्राम पंचायत एवं विकास अधिकारी की वित्तीय सीमाएं निर्धारित की गई हैं। नवीन स्वीकृति के लिए ग्राम पंचायत हेतु 5.00 लाख रुपये तक तथा विकास अधिकारी हेतु 5.00 लाख रुपये तक की सीमा है। रखरखाव/मरम्मत हेतु ग्राम पंचायत हेतु 0.50 लाख रुपये तथा विकास अधिकारी हेतु 2.00 लाख रुपये तक की सीमा तय की गई है।
परिशिष्ट - 2 वित्तीय स्वीकृति (संशोधित सहित): निर्माण कार्य की वित्तीय स्वीकृति (मूल) हेतु ग्राम पंचायत एवं विकास अधिकारी की वित्तीय सीमाएं दी गई हैं। नवीन स्वीकृति के लिए ग्राम पंचायत (ग्राम पंचायत के पास उपलब्ध राशि) तथा विकास अधिकारी (पंचायत समिति के पास उपलब्ध राशि) हेतु 5.00 लाख रुपये तक की सीमा है। रखरखाव/मरम्मत हेतु ग्राम पंचायत हेतु 0.50 लाख रुपये तथा विकास अधिकारी हेतु 2.00 लाख रुपये तक की सीमा है।
यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा। अधिक जानकारी के लिए प्रमुख शासन सचिव श्रीमंत पाण्डेय के हस्ताक्षर से जारी मूल आदेश का अवलोकन करें।
श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी दर पुनरीक्षित करने के संबंध में (दिनांक 05.04.2016)
श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी दर पुनरीक्षित करने के संबंध में
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रामीण विकास, अनुभाग-5), राजस्थान सरकार द्वारा जारी पत्र क्रमांक एफ 27 (74) ग्राविवि/अनु-5/जीकेन/न्यूनतम मजदूर दर/2014-15 दिनांक 05.04.2016 के अनुसार, श्रम विभाग द्वारा जारी अधिसूचना दिनांक 17.12.2015 के आधार पर ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा सम्पादित की जा रही विभिन्न केन्द्र व राज्य प्रवर्तित योजनाओं (मनरेगा योजना को छोड़कर) में नियोजित श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी पुनरीक्षित की गई है।
मुख्य बिंदु:
अकुशल श्रमिक: न्यूनतम मजदूरी दर रुपये 197/- प्रति दिन पुनरीक्षित की गई है।
अर्द्धकुशल श्रमिक (मेट): न्यूनतम मजदूरी दर रुपये 207/- प्रति दिन पुनरीक्षित की गई है।
यह आदेश मनरेगा योजना को छोड़कर अन्य विभिन्न केंद्र व राज्य प्रवर्तित योजनाओं में कार्यरत श्रमिकों पर लागू होता है।
पत्र के अनुसार, इसे संबंधित जिला कलेक्टर एवं अध्यक्ष, जिलादर निर्णयक समिति, जिला समस्त राजस्थान को सूचनाथ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित किया गया है।
राजस्थान सरकार - स्थायी आदेश संख्या 25/2015: शेड्यूल्ड ऑफ़ पॉवर में संशोधन
राजस्थान सरकार ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग - स्थायी आदेश
ग्रामीण विकास (विकास, अनुभाग-5) द्वारा जारी स्थायी आदेश संख्या- 25/2015 (क्रमांक एफ-27(252)ग्राविव/ग्रुप-5/जीकेन/एसओपी/2015-16 जयपुर, दिनांक 10 मार्च, 2016) के माध्यम से ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों को प्रदत्त प्रशासनिक एवं वित्तीय शक्तियों के शेड्यूल्ड ऑफ़ पॉवर में संशोधन किया गया है।
प्रमुख बिंदु
प्रशासनिक स्वीकृति (परिशिष्ट-1): ग्राम पंचायत के पास उपलब्ध राशि के अनुसार निर्माण कार्य की प्रशासनिक स्वीकृति (मूल) नवीन स्वीकृति 10.00 लाख रुपये तक तथा रखरखाव/मरम्मत 0.50 लाख रुपये तक निर्धारित की गई है। विकास अधिकारी (पंचायत समिति के पास उपलब्ध राशि) हेतु नवीन स्वीकृति 5.00 लाख रुपये तक तथा रखरखाव/मरम्मत 2.00 लाख रुपये तक है।
वित्तीय स्वीकृति (परिशिष्ट-2): ग्राम पंचायत हेतु नवीन वित्तीय स्वीकृति 10.00 लाख रुपये तक तथा रखरखाव/मरम्मत 0.50 लाख रुपये तक है। विकास अधिकारी हेतु नवीन वित्तीय स्वीकृति 5.00 लाख रुपये तक तथा रखरखाव/मरम्मत 2.00 लाख रुपये तक है।
शर्तें एवं निर्देश: यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होंगे। सड़क निर्माण कार्य हेतु निजी भूमि पर प्रचलित आम रास्तों के संबंध में भूमि से संबंधित काश्तकारों से सहमति एवं नियमानुसार शपथ पत्र लेने के उपरांत कार्य सम्पादन किया जा सकेगा।
स्थायी आदेश संख्या 23/2015: ग्रामीण कार्य निर्देशिका-2015 में संशोधन संबधी आदेश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रामीण विकास, अनुभाग-5) द्वारा जारी स्थायी आदेश संख्या - 23/2015 (क्रमांक: एफ-27(71)ग्रावि/अनु-5/सरपंच ज्ञापन/2015-16, दिनांक 27 नवम्बर, 2015) के संबंध में मुख्य जानकारी निम्नलिखित है:
मुख्य बिंदु एवं उद्देश्य:
विभागीय परिपत्र संख्या 17/2015 के द्वारा जारी ग्रामीण कार्य निर्देशिका-2015 भाग-1 में संशोधन किया गया है।
निर्देशिका के निर्देश संख्या 9.6.1 - जिला स्तरीय दर निर्णायक समिति अथवा जिला स्तरीय समिति में जिले के दो सरपंच एवं दो ग्राम सेवक पदेन सचिव (कुल 4 सदस्य) शामिल किए जाते हैं।
इन सदस्यों का चयन अलग-अलग पंचायत समितियों से प्रतिवर्ष रोटेशन के आधार पर जिला कलक्टर द्वारा मनोनीत किया जाएगा।
शेष प्रावधान यथावत रहेंगे और यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होंगे।
स्थायी आदेश संख्या 22/2015: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा प्रशासनिक स्वीकृतियों के संबंध में संशोधन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार - स्थायी आदेश संख्या 22/2015
राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रामीण विकास, अनुभाग-5) द्वारा दिनांक 17 नवंबर, 2015 को स्थायी आदेश संख्या 22/2015 जारी किया गया है। यह आदेश विभागीय परिपत्र संख्या- 17/2015 द्वारा जारी ग्रामीण कार्य निर्देशिका-2015, भाग-1 में संशोधन से संबंधित है।
मुख्य बिंदु एवं संशोधन
निर्देश संख्या 11.1 में संशोधन: स्वामित्व आवश्यकता एवं प्रक्रिया में परिसम्पत्तियों की श्रेणियों में से सड़क निर्माण कार्यों हेतु निजी भूमि पर प्रचलित आम रास्ते के लिए भूमि पर सम्बन्धित काश्तकारों से सहमति, शपथ-पत्र पर लेने के उपरान्त कार्य सम्पादन किया जा सकेगा।
तालिका-1 शिड्यूल ऑफ़ पावर (प्रशासनिक स्वीकृति):
कार्य/आइटम का विवरण: निर्माण कार्य की प्रशासनिक स्वीकृति (मूल) (विधायक व सांसद कोष के अतिरिक्त)।
स्वीकृतकर्ता अधिकारी/समिति: ग्राम पंचायत (ग्राम पंचायत के पास उपलब्ध राशि)।
शक्तियों की वित्तीय सीमा: नवीन स्वीकृति के लिए 5.00 लाख रुपये तक तथा रख-रखाव/मरम्मत के लिए 0.50 लाख रुपये।
शर्ते/टिप्पणियां: शर्तें/टिप्पणियां क्र.सं. 1 से 16 से यथावत लागू होंगी।
यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा।
स्थायी आदेश संख्या 24/2015: ग्रामीण कार्य निर्देशिका-2015 में संशोधन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग का स्थायी आदेश
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रामीण विकास, अनुभाग-5), राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 15 दिसम्बर 2015 का स्थायी आदेश संख्या 24/2015 जारी किया गया है। यह आदेश ग्रामीण कार्य निर्देशिका-2015, भाग-1 में संशोधन के संबंध में है।
मुख्य बिंदु
परिपत्र संदर्भ: विभागीय परिपत्र संख्या 17/2015 द्वारा ग्रामीण कार्य निर्देशिका-2015, भाग-1 जारी की गई थी।
बिंदु संख्या 24 में संशोधन: निर्देशिका के बिंदु संख्या 24 (कार्यकारी संस्था / कार्य निष्पादन संख्या) में संशोधन करते हुए, अनुच्छेद 24.8 में अन्य संस्थाओं की श्रेणी में 'जलग्रहण विकास एवं भू-संरक्षण विभाग के कार्य कराने के लिए अधिकृत जलग्रहण समिति' को जोड़ा गया है।
प्रभावी तिथि: यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।
यह आदेश संबंधित अधिकारियों, जिला कलेक्टरों, मुख्य कार्यकारी अधिकारियों और विकास अधिकारियों को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित किया गया है।
स्थायी आदेश संख्या 20/2015 - ग्रामीण कार्य निर्देशिका-2015 भाग-1 में संशोधन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग - स्थायी आदेश संख्या 20/2015
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (ग्रामीण विकास, अनुभाग-5) द्वारा दिनांक 17 सितम्बर, 2015 को स्थायी आदेश संख्या- 20/2015 जारी किया गया है। यह आदेश विभागीय परिपत्र संख्या- 17/2015 द्वारा जारी ग्रामीण कार्य निर्देशिका-2015 भाग-1 के निर्देशों में संशोधन के संबंध में है।
प्रमुख संशोधन एवं बिंदु:
निर्देश संख्या- 7.1: शिड्यूूल ऑफ पॉवर्स हेतु परिशिष्ट-2 (ग्रामीण कार्य निर्देशिका-2015 भाग-1) की तालिका संख्या- 3 शिड्यूूल ऑफ पॉवर्स के तकनीकी स्वीकृति कॉलम संख्या- 6 में शर्त/टिप्पणी जोड़ी गई है कि प्राकृतिक आपदा की स्थिति में क्षतिग्रस्त कार्यों के तत्काल सम्पादन हेतु ग्राम पंचायत द्वारा एक लाख तक की तकनीकी स्वीकृति ग्रामीण कार्य निर्देशिका- 2015 के भाग-1 के निर्देश संख्या- 4.3 व 4.4 के अनुसार जारी की जा सकेगी।
निर्देश संख्या- 9.5.1: पंचायत समिति स्तरीय बाजार दर सर्वेक्षण एवं प्रस्तावक समिति में उप-निर्देश संख्या- 1 के अनुसार एक सरपंच एवं एक ग्राम सेवक (कुल 2 सदस्य) शामिल किये जाते हैं। प्रतिवर्ष रोटेशन के आधार पर इन सदस्यों का चयन विकास अधिकारी द्वारा पंचायत समिति की प्रशासन व स्थापना समिति की बैठक में लॉटरी के आधार पर किया जाएगा।
ग्रामीण कार्य निर्देशिका- 15 भाग-1 के निर्देश संख्या- 18.1: "राज्य स्तरीय तकनीकी अनुमोदन समिति में क्रम संख्या- 5 पर अंकित जिलों के आमंत्रित अधिशाषी अभियंता 3 के स्थान पर प्रत्येक संभाग से एक अधिशाषी अभियंता को प्रतिवर्ष रोटेशन के आधार पर सदस्य नियुक्त किया जाता है।"
प्रभावी तिथि: उपर्युक्त आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होंगे। आदेश पर श्रीमत पाण्डेय, प्रमुख शासन सचिव, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज के हस्ताक्षर हैं।
राजस्थान पंचायती राज (पर्यटन इकाईयों के लिए पंचायत क्षेत्र में आबादी भूमि का आवंटन, भूमि के उपयोग का परिवर्तन और नियमितीकरण) नियम, 2015
राजस्थान पंचायती राज नियम, 2015 - पर्यटन इकाइयों हेतु दिशा-निर्देश
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एफ.4( )पर्यटन नियम/विधि/पैरा/2015/486 दिनांक जुलाई 10, 2015 के अंतर्गत राजस्थान पंचायती राज (पर्यटन इकाईयों के लिए पंचायत क्षेत्र में आबादी भूमि का आवंटन, भूमि के उपयोग का परिवर्तन और नियमितीकरण) नियम, 2015 बनाए गए हैं।
मुख्य बिंदु एवं नियम:
लागू क्षेत्र: यह नियम पंचायत क्षेत्र में आबादी भूमि के आवंटन, भूमि उपयोग परिवर्तन और नियमितीकरण पर लागू होते हैं।
आबादी भूमि का आवंटन: जिला कलेक्टर, संबंधित पंचायती राज संस्था से परामर्श कर पर्यटन इकाइयों की स्थापना के लिए ग्राम की आबादी क्षेत्र में उपयुक्त भूमि की पहचान करेंगे।
न्यूनतम एवं अधिकतम भूमि क्षेत्र:
बजट होटल और 1 से 3 सितारा होटल: न्यूनतम 1,200 वर्ग मीटर, अधिकतम 4,000 वर्ग मीटर तक।
4 सितारा होटल: न्यूनतम 6,000 वर्ग मीटर, अधिकतम 12,000 वर्ग मीटर तक।
5 सितारा और उससे ऊपर के होटल: न्यूनतम 18,000 वर्ग मीटर, अधिकतम 40,000 वर्ग मीटर तक।
अन्य पर्यटन इकाई: आवश्यकता/उपलब्धता के अनुसार।
आरक्षित मूल्य: पर्यटन इकाइयों के लिए आरक्षित भूमि के आवंटन का आरक्षित मूल्य जिला स्तरीय समिति द्वारा आबादी भूमि के बाजार मूल्य के निर्धारण के लिए सिफारिश की गई दरों के समतुल्य होगा।
विरासत संपत्तियों (हेरिटेज होटल्स) का परिवर्तन: हेरिटेज संपत्तियों को हेरिटेज होटल में बदलने के लिए सादे कागज पर आवेदन किया जा सकता है। इसके लिए भूमि उपयोग परिवर्तन का कोई प्रभार देय नहीं होगा।
दत्तक-ग्रहण किए गए बच्चों के जन्म रिकार्ड में प्रविष्टि/परिवर्तन विषयक स्पष्टीकरण
दत्तक-ग्रहण किए गए बच्चों के जन्म रिकार्ड में प्रविष्टि/परिवर्तन
भारत सरकार, गृह मंत्रालय, भारत के महारजिस्ट्रार का कार्यालय द्वारा दिनांक 15.05.2015 का पत्र संख्या सं.1/7/2011 - वीएस - (सीआरएस)/619 जारी किया गया है। यह पत्र सभी मुख्य रजिस्ट्रार, जन्म एवं मृत्यु को संबोधित है।
मुख्य बिंदु एवं निर्देश
दत्तक-ग्रहण विलेख की अनिवार्यता: गैर-संस्थागत दत्तक-ग्रहण के संबंध में “हिन्दू दत्तक-ग्रहण और भरण-पोषण (एचएएमए) अधिनियम, 1956” की धारा 16 के अंतर्गत पंजीकृत और दोनों पक्षों द्वारा हस्ताक्षरित दत्तक-ग्रहण विलेख प्रस्तुत करना पर्याप्त है। इसकी प्रामाणिकता की जांच केवल एचएएमए अधिनियम के मानदंडों के आधार पर की जाएगी।
सम्बन्धियों/परिचितों में दत्तक लेना: देश के अन्दर सम्बन्धियों अथवा परिचितों में गैर-संस्थागत दत्तक-ग्रहण के लिए पंजीकृत दत्तक-ग्रहण (Adoption deed) विलेख पर्याप्त होगा और इसके लिए किसी न्यायालय के दत्तक ग्रहण आदेश प्रस्तुत करने की आवश्यकता नहीं होगी।
जन्म रिकार्ड में संशोधन और प्रमाण पत्र जारी करना: जन्म रिकार्ड में प्रविष्टि या परिवर्तन करने से पहले, दत्तक-ग्रहण विलेख की सत्यता जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रार द्वारा सत्यापित की जानी चाहिए। यदि विलेख वैध पाया जाता है, तो दत्तक माता-पिता और बच्चे का नाम दर्ज करके जन्म प्रमाण पत्र जारी किया जाना चाहिए।
विलंबित पंजीकरण: यदि दत्तक बच्चे की आयु एक वर्ष से अधिक है और उसका जन्म पहले से पंजीकृत नहीं है, तो जन्म और मृत्यु पंजीकरण (आरबीडी) अधिनियम, 1969 की धारा 13(3) के अनुसार स्थानीय मजिस्ट्रेट का आदेश पंजीकरण से पहले प्राप्त किया जाना चाहिए।
समय-सीमा: संबंधित माता-पिता द्वारा दस्तावेज प्रस्तुत करने की तारीख से 7 से 10 दिनों के अंदर वांछित जन्म प्रमाण पत्र जारी किया जाना चाहिए।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग - शिड्यूूल ऑफ़ पावर्स (Schedule of Powers) 2014
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग का शिड्यूूल ऑफ़ पावर्स (Schedule of Powers) 2014 परिपत्र
यह परिपत्र ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 17 सितम्बर, 2014 को जारी किया गया है (क्रमांक: एफ 27(79)ग्रावि/अनु-5/जीकेन/प्रशा. अनुस./2014)। इस दस्तावेज का मुख्य उद्देश्य पंचायती राज संस्थाओं और कार्यकारी विभागों द्वारा किए जाने वाले निर्माण कार्यों के लिए प्रशासनिक, वित्तीय एवं तकनीकी स्वीकृतियों, संशोधित स्वीकृतियों, अतिरिक्त मात्रा और एक्स्ट्रा आइटम्स की स्वीकृति हेतु शिड्यूूल ऑफ़ पावर्स निर्धारित करना है।
मुख्य बिंदु एवं दिशा-निर्देश:
कार्यों की स्वीकृति: मुख्यालय, ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद के स्तर पर उपलब्ध राशि तथा महात्मा गांधी नरेगा के अंतर्गत प्रशासनिक, वित्तीय एवं तकनीकी स्वीकृतियों के लिए प्राधिकृत अधिकारियों की वित्तीय सीमाएं निर्धारित की गई हैं।
शर्तें और प्रक्रिया: न्यूनतम मजदूरी में वृद्धि, बीसार (BSR) में संशोधन या अन्य कारणों से लागत बढ़ने पर ग्रामीण कार्य निर्देशिका के अनुसार सक्षम प्राधिकारी द्वारा वित्तीय सीमा एवं शर्तों के अधीन स्वीकृति दी जाएगी।
तकनीकी स्वीकृति पूर्व प्रमाण: तकनीकी स्वीकृति जारी करने से पूर्व यह प्रमाणित किया जाना आवश्यक है कि संबंधित कार्य की भूमि पंचायत या राज्य सरकार के नाम है और उस पर कोई विवाद नहीं है।
रेंडम चैक और माप पुस्तिका: कनिष्ठ तकनीकी सहायक/कनिष्ठ अभियंता, सहायक अभियंता तथा अधिशाषी अभियंता द्वारा किए जाने वाले कार्यों के रेंडम चैक और चेक मेजरमेंट के लिए स्पष्ट प्रोफार्मा और न्यूनतम प्रतिशत निर्धारित किए गए हैं।
परिशिष्ट: परिपत्र के साथ प्रशासनिक स्वीकृति, वित्तीय स्वीकृति, तकनीकी स्वीकृति, अतिरिक्त मात्रा एवं एक्स्ट्रा आइटम्स, तथा उपयोगिता प्रमाण पत्र, मूल्यांकन जांच एवं पूर्णता प्रमाण पत्र से संबंधित परिशिष्ट (1 से 5) संलग्न हैं।
ग्राम सेवक पदेन सचिव एवं कनिष्ठ लिपिक (प्रथम व द्वितीय) का जॉब-चार्ट और संशोधन आदेश
राजस्व एवं पंचायती राज विभाग जॉब-चार्ट
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा जारी पत्र क्रमांक एफ.28(145)पंवारा/प्रशा-2/ग्रासे/परिपत्र/म.पत्र/10/3497 दिनांक 23/12/2013 के अंतर्गत पंचायती राज संस्थाओं में कार्यरत ग्राम सेवक पदेन सचिव एवं कनिष्ठ लिपिक प्रथम व द्वितीय के लिए जॉब-चार्ट जारी किया गया है। इसके साथ ही विभाग के पत्र क्रमांक एफ37(1)पंवारा/प्रशा-2/समितिमाग/2016/3419 दिनांक 7-9-17 द्वारा जॉब-चार्ट में संशोधन भी किया गया है।
मुख्य बिंदु एवं कार्य और कर्तव्य
ग्राम सेवक एवं सचिव के कर्तव्य (धारा 78(2) एवं नियम 331): पंचायत के अभिलेख और रजिस्टर सुरक्षित रखना, प्राप्त धनराशियों के लिए रसीद जारी करना, पंचायत निधि के लेखे रखना व सुरक्षा करना, अधिनियम व नियमों के अनुसार विवरण और रिपोर्ट तैयार करना।
कार्यालयीन उपस्थिति एवं बैठकें: सचिव पंचायत में नियमित रूप से कार्यालय समय में उपस्थित रहेगा और सरपंच के निर्देशानुसार कार्य करेगा। नियम 5, 7, 8, 9, 39 के तहत बैठकों के नोटिस, एजेंडा व अनुपालना सुनिश्चित करना।
राजस्व, कर एवं अचल संपत्तियां: कर व फीस की वसूली हेतु मांग तैयार करवाना, पटवारी द्वारा करों की वसूली में मदद करना, और नियम 137, 138, 142 आदि के तहत अचल संपत्तियों से संबंधित कार्य व पट्टे जारी करना।
निर्माण कार्य: नियम 175, 176, 177, 179, 180, 184 और 191 के अनुसार निर्माण कार्यों के अनुमान तैयार करना, तकनीकी अनुमोदन प्राप्त करना, मस्टररोल संधारित करना और प्रगति रिपोर्ट भेजना।
कनिष्ठ लिपिक प्रथम का जॉब-चार्ट: योजनाओं से संबंधित पत्रावलियों का संधारण, एमवी मूवमेंट रजिस्टर रखना, हिंदी व अंग्रेजी में टंकण कार्य, विभिन्न सॉफ्टवेयर्स (प्रिया सॉफ्ट, नरेरेगा सॉफ्ट आदि) पर ऑनलाइन/ऑफलाइन फीडिंग करना और ग्राम सेवक के समक्ष सूचना प्रस्तुत करना।
कनिष्ठ लिपिक द्वितीय का जॉब-चार्ट: योजनावार स्वीकृत राशि, प्राप्त राशि और व्यय राशि के लेखों का संधारण, मासिक वेतन बिल तैयार करना, राजीव गांधी सेवा केंद्र पर सेवाएं देना, ई-मेल का दैनिक संचालन करना और मनरेगा से संबंधित कार्य।
जॉब-चार्ट में संशोधन (दिनांक 7-9-2017): राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 के नियम 2(viii) के अनुसार पंचायत का कार्यालय-प्रधान सरपंच है तथा कनिष्ठ लिपिक दोनों की ग्रेड-पे 2400 होने के कारण इन्हें एक दूसरे के नियंत्रण में रखना उचित नहीं है। अतः जॉब-चार्ट में जहाँ-जहाँ "कनिष्ठ लिपिक ग्राम सेवक के नियंत्रण में एवं सहायक के रूप में कार्य करेगा" अंकित है, उसके स्थान पर "कनिष्ठ लिपिक एवं ग्राम सेवक सरपंच के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करेंगे" प्रतिस्थापित किया गया है।
राजस्थान पंचायती राज संस्थाओं में कार्यरत ग्राम सेवक, कनिष्ठ लिपिक प्रथम व द्वितीय का जॉब-चार्ट एवं संशोधन निर्देश
ग्राम सेवक एवं पंचायत सचिव का जॉब-चार्ट
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के पत्र क्रमांक एफ.28(145)पंवारा/प्रशा-2/ग्रासे/परिपत्र/म.पत्र/10/3497 दिनांक 23/12/2013 के द्वारा पंचायती राज संस्थाओं में कार्यरत ग्राम सेवक पदेन सचिव एवं कनिष्ठ लिपिक प्रथम व द्वितीय का जॉब-चार्ट जारी किया गया है। इसके बाद पत्र क्रमांक एफ37(1)पंवारा/प्रशा-2/समितिमाग/2016/3419 दिनांक 7-9-? द्वारा जॉब-चार्ट में संशोधन भी जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु एवं कर्तव्य
ग्राम सेवक एवं सचिव के कर्तव्य: धारा 78(2) एवं नियम 331 के तहत पंचायत के अभिलेखों की सुरक्षा, रसीदें जारी करना, पंचायत निधि का संधारण, बैठकें आयोजित करना, और बजट एवं लेखा संबंधी कार्य।
कनिष्ठ लिपिक प्रथम का जॉब-चार्ट: योजनाओं से संबंधित पत्रावलियों का संधारण, एम.बी. मूवमेंट रजिस्टर, कम्प्यूटर पर ऑनलाइन/ऑफलाइन फीडिंग (प्रिया सॉफ्ट, नरेगा सॉफ्ट, आवास सॉफ्ट, आईडब्ल्यूएमएस आदि) और योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट तैयार करना।
कनिष्ठ लिपिक द्वितीय का जॉब-चार्ट: योजनावार स्वीकृत राशि, व्यय राशि के लेखों का संधारण, मासिक वेतन बिल, राजीव गांधी सेवा केंद्र पर सेवाएं, और मनरेगा कार्यों से संबंधित प्रविष्टियां।
जॉब-चार्ट में संशोधन (दिनांक 7-9-?): राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 के नियम 2(viii) के अनुसार पंचायत का कार्यालय-प्रधान सरपंच होता है। ग्रेड-पे समान होने के कारण संशोधन किया गया कि कनिष्ठ लिपिक एवं ग्राम सेवक सरपंच के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करेंगे।
प्रशासन गाँवों के संग अभियान में भूमि विक्रय व पट्टा जारी करने के संबंध में विभागीय मार्गदर्शन
प्रशासन गाँवों के संग अभियान - भूमि विक्रय और पट्टा जारी करने के संबंध में मार्गदर्शन
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज) द्वारा जिला कलेक्टर, पाली को प्रशासन गाँवों के संग अभियान के अंतर्गत भूमि विक्रय (पट्टे जारी करने) के संबंध में मार्गदर्शन प्रदान किया गया है।
मुख्य बिंदु एवं विभागीय टिप्पणी
पुश्तैनी कब्जा सुधा प्लॉटों पर पट्टा: ग्राम पंचायतों की आबादी भूमि में सरपंच द्वारा जारी स्वामित्व प्रमाण पत्र या अनापत्ति प्रमाण पत्र के आधार पर पुश्तैनी कब्जा सुधा प्लॉटों की रजिस्ट्री करवाने और पट्टा बनवाने की मांग के संबंध में, राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के प्रावधानों के अनुसार नियमानुसार राशि वसूल कर पट्टा जारी किया जा सकता है।
व्यावसायिक उपयोग हेतु भूमि के पट्टे: आबादी भूमि क्षेत्र में स्थित पुश्तैनी भूमि में दुकानें या छोटे-छोटे कुटीर उद्योग संचालित होने और उनके पट्टे भूमि स्वामियों के पास न होने की स्थिति में, पंचायती राज नियमों में वर्तमान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। अतः व्यावसायिक प्रयोजनार्थ उपयोग में लाई जा रही भूमि के पट्टे दिया जाना संभव नहीं है।
यह आदेश उप शासन सचिव (विधि) द्वारा जारी किया गया है।
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 के अंतर्गत पट्टा जारी करने संबंधी दिशा-निर्देश
प्रस्तावना
राजस्थान सरकार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज) द्वारा दिनांक 10.01.2013 को क्रमांक एफ.139( )परावि/विधि/नियम/मार्गदर्शन/2012/23 के तहत एक महत्वपूर्ण आज्ञा जारी की गई है। यह दस्तावेज ग्रामीण क्षेत्रों में पुराने गृहों के वि니मितीकरण और पट्टा वितरण से संबंधित है।
मुख्य बिंदु एवं निर्देश
नियम 157(1) के तहत प्रावधान: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157 के उप-नियम (1) के अनुसार, आबादी भूमि में स्थित पुराने गृहों के लिए पट्टा जारी किया जाता है, जिसमें पुराने गृह की परिधि में परिसर में स्थित उपयोग में आने वाली भूमि भी सम्मिलित होती है।
प्रशासन-गाँवों के संग अभियान 2013: अभियान की अवधि के दौरान ऐसे सभी मामलों में पट्टा जारी करने के लिए पंचायत द्वारा संबंधित व्यक्ति को उसके कब्जे वाली आबादी भूमि (अधिकतम 300 वर्गगज तक निर्मित भवन/मकान का क्षेत्रफल) तथा इस निर्मित एरिया के 25 प्रतिशत तक की उसकी उपयोग में आने वाली कब्जाशुदा भूमि को सम्मिलित किया जाएगा।
पट्टा जारी करने की प्रक्रिया: निर्मित भवन और 25 प्रतिशत अतिरिक्त भूमि (इनमें से जो भी कम हो) का पट्टा, नियम 146 के प्रावधानुसार स्थल निरीक्षण करवाने के पश्चात तथा नियम 148 व 149 के अनुसार नोटिस जारी कर प्राप्त आपक्षपों का निपटारा करने के पश्चात जारी किया जाएगा।
अतिक्रमण हटाने के सम्बन्ध में संसाधन उपलब्ध करवाने सम्बंधित
अतिक्रमण हटाने के सम्बन्ध में संसाधन उपलब्ध करवाने सम्बंधित
राजस्थान विवाहों का अनिवार्य रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 2009 के संबंध में मार्गदर्शन
राजस्थान सरकार गृह (ग्रुप-13) विभाग का पत्र
यह पत्र राजस्थान सरकार के गृह (ग्रुप-13) विभाग द्वारा क्रमांक प.6(19)गृह-13/2006, दिनांक 03.11.2011 को जारी किया गया है। यह पत्र नगर निगम, जयपुर द्वारा विवाह के अनिवार्य पंजीयन के संबंध में विभिन्न प्रकरण बिंदुओं पर चाहे गए मार्गदर्शन के संदर्भ में है।
मुख्य बिंदु एवं मार्गदर्शन
अधिनियम का लागू होना: माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्देशानुसार 'राजस्थान विवाहों का अनिवार्य रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 2009' दिनांक 11.09.2009 को राजस्थान राजपत्र में प्रकाशित किया गया था। इस अधिनियम की धारा 3 के अंतर्गत इस अधिनियम के प्रारम्भ के पश्चात राजस्थान राज्य में ऐसे व्यक्तियों, जो भारत के नागरिक हैं, के बीच अनुष्ठापित प्रत्येक विवाह का रजिस्ट्रीकरण अनिवार्य है।
अन्य विवाह अधिनियमों पर स्थिति: अधिनियम की धारा 20 के अंतर्गत स्पष्ट प्रावधान है कि भारतीय ईसाई विवाह अधिनियम 1872, पारसी विवाह और विवाह विच्छेद अधिनियम 1936, तथा विशेष विवाह अधिनियम 1954 के अधीन अनुष्ठापित विवाहों का अनिवार्य रजिस्ट्रीकरण अधिनियम के तहत पंजीयन नहीं होगा, बल्कि इन अधिनियमों के तहत पंजीयन स्वैच्छिक है।
नाबालिग विवाह से संबंधित प्रावधान: यदि पक्षकार 21 वर्ष से कम उम्र के हों, तो माता-पिता या संरक्षक विवाह की तारीख से 30 दिवस के भीतर संबंधित रजिस्ट्रार को ज्ञापन प्रस्तुत करने के उत्तरदायी होंगे। यदि विवाह के समय पक्षकार नाबालिक हो, तो भी पंजीयन से रोका नहीं जा सकता है, तथा बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के प्रावधानों के तहत कार्यवाही की जाएगी।
विभिन्न धर्मों और जातियों के विवाह: यदि किसी जाति या धर्म के पक्षकार अधिनियम की धारा 20 में वर्णित अधिनियमों को छोड़कर अन्य किसी अधिनियम के अंतर्गत विवाह अनुष्ठापित करते हैं, तो विवाह पंजीयक आवश्यक साक्ष्य, शपथ-पत्र एवं स्वयं की संतुष्टि के पश्चात विवाह प्रमाण-पत्र जारी करेगा।
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (RTI Act 2005) - मुख्य बिंदु और विवरण
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005
यह दस्तावेज भारत सरकार के विधि और न्याय मंत्रालय द्वारा प्रकाशित सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (2005 का अधिनियम संख्यांक 22) का आधिकारिक विवरण है, जो 1 फरवरी, 2011 तक यथाविद्यमान है। इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को लोक प्राधिकरणों के नियंत्रण अधीन सूचना तक पहुँच सुनिश्चित करना, शासन में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व बढ़ाना तथा भ्रष्टाचार को रोकना है।
मुख्य उपयोगी बिंदु
संक्षिप्त नाम व विस्तार: यह अधिनियम जम्मू-कश्मीर राज्य के सिवाय संपूर्ण भारत पर लागू होता है (तत्कालीन स्थिति के अनुसार)।
लोक प्राधिकारियों की बाध्यता: प्रत्येक लोक प्राधिकरण का यह कर्तव्य है कि वह अपने सभी अभिलेखों को सूचीबद्ध और अनुक्रमित करे तथा अधिनियम के प्रारंभ होने से एक सौ दिन के भीतर अपने संगठन, अधिकारियों की शक्तियों, कृत्यों और अन्य आवश्यक विवरणों को स्वतः प्रकाशित करे।
सूचना प्राप्त करने के लिए अनुरोध: कोई भी नागरिक संबंधित लोक प्राधिकारी या केंद्रीय/राज्य लोक सूचना अधिकारी को अंग्रेजी, हिंदी या आवेदन किए गए क्षेत्र की राजभाषा में लिखित या इलेक्ट्रॉनिक रूप में अनुरोध प्रस्तुत कर सकता है।
अनुरोध का निपटारा: सामान्य मामलों में अनुरोध प्राप्ति के 30 दिन के भीतर और व्यक्ति के जीवन या स्वतंत्रता से संबंधित मामलों में 48 घंटे के भीतर सूचना उपलब्ध कराई जानी अनिवार्य है।
सूचना के प्रकट किए जाने से छूट: अधिनियम की धारा 8 के तहत देश की संप्रभुता, सुरक्षा, वैज्ञानिक हित, न्यायालय की अवमानना या मंत्रिमंडल के कागजातों आदि से संबंधित कुछ विशेष मामलों में सूचना देने से छूट प्रदान की गई है।
केंद्रीय एवं राज्य सूचना आयोग: अधिनियम के तहत केंद्रीय स्तर पर केंद्रीय सूचना आयोग और राज्य स्तर पर राज्य सूचना आयोग के गठन, पदावधि, शक्तियों, अपीलों और शास्तियों का विस्तृत प्रावधान किया गया है।
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2010 - राजस्व अभियान और प्रशासन गांवों के संग अभियान हेतु आपत्ति अवधि संशोधन
राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2010
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग (पंचायती राज विभाग), राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक [No.F.4(7)Am/Rule/Legal/PR/2010/2113] दिनांक 26 नवंबर 2010 के माध्यम से राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 में संशोधन किया गया है।
मुख्य बिंदु:
नियम का नाम: राजस्थान पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2010।
प्रभावी तिथि: ये नियम राजपत्र में प्रकाशन की तिथि (30 नवंबर 2010) से प्रवृत्त हुए हैं।
नियम 148 में संशोधन: राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 148 के उप-नियम (1) के तहत, राजस्व अभियान या प्रशासन गांवों के संग अभियान के दौरान आपत्तियां आमंत्रित करने की अवधि एक महीने के स्थान पर सात दिन होगी।
प्रारूप XXII में संशोधन: प्रारूप XXII के तहत भी राजस्व अभियान या प्रशासन गांवों के संग अभियान के दौरान आपत्तियां दर्ज कराने की अवधि एक महीने के स्थान पर सात दिन निर्धारित की गई है।
राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994: मुख्य प्रावधान और संरचना
राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (Rajasthan Panchayati Raj Act, 1994)
यह दस्तावेज़ राजस्थान राज्य में पंचायती राज संस्थाओं के गठन, शक्तियों, कार्यों और प्रशासन से संबंधित मुख्य कानूनी प्रावधानों की जानकारी प्रदान करता है। इसमें प्रारंभिक परिभाषाओं से लेकर वार्ड सभा, ग्राम सभा, पंचायत, पंचायत समिति और ज़िला परिषद की संरचना तक के नियम शामिल हैं।
मुख्य बिंदु और विशेषताएँ:
वार्ड सभा और ग्राम सभा: प्रत्येक पंचायत वृत्त में वार्ड सभा और ग्राम सभा के गठन, बैठकों के आयोजन, कोरम तथा कार्यों का विवरण दिया गया है।
पंचायती राज संस्थाओं का गठन: अधिनियम के तहत पंचायत, पंचायत समिति और ज़िला परिषद की स्थापना, सीटों के आरक्षण (अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग और महिलाओं के लिए), तथा निर्वाचन प्रक्रिया को समझाया गया है।
अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रावधान: विकास अधिकारी (Vikas Adhikari), मुख्य कार्यकारी अधिकारी (Chief Executive Officer) तथा राजस्थान पंचायत समिति और ज़िला परिषद सेवा के गठन संबंधी नियम दिए गए हैं।
वित्त और कराधान: पंचायती राज संस्थाओं के फंड, कर लगाने की शक्तियाँ, बजट और लेखा-परीक्षण (Audit) से जुड़े प्रावधान उल्लेखित हैं।
राज्य सरकार की शक्तियाँ: प्रस्तावों को रद्द या निलंबित करने, संस्थाओं के विघटन और नियमों तथा उप-नियमों (Bye-laws) के निर्माण की शक्ति का उल्लेख है।